Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयचीन और अमेरिका ने ठुकराई इमरान खान की 'मैंगो डिप्लोमेसी', वापस लौटाए तोहफे में...

चीन और अमेरिका ने ठुकराई इमरान खान की ‘मैंगो डिप्लोमेसी’, वापस लौटाए तोहफे में मिले पाकिस्तानी आम

पाकिस्तान के एफओ ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भी चौंसा आम की पेटियाँ भेजी थी लेकिन अभी तक पाकिस्तान की इस मैंगो डिप्लोमेसी पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

क्या आपको पता है कि हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान की हालत कुछ हद तक सुधर रही है। कभी गधे बेचने वाला हमारा पड़ोसी मुल्क आज ‘आम’ तोहफे में दे रहा है, हालाँकि ये अलग बात है कि अमेरिका और चीन समेत कई देशों ने पाकिस्तान के इन तोहफों को ठुकरा दिया। पाकिस्तान ने इसे ‘मैंगो डिप्लोमेसी’ नाम दिया है।  

बीते बुधवार (09 जून) को पाकिस्तान के फॉरेन ऑफिस (एफओ) 32 देशों की सरकारों और राष्ट्राध्यक्षों को ‘चौंसा’ आम की पेटियाँ भेजी गईं। आम की इन पेटियों को अमेरिका, चीन, रूस, कनाडा, फ्रांस जैसे विकसित देशों के अलावा नेपाल, तुर्की, श्रीलंका, ईरान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे कुल 32 देशों को भेजा गया।

हालाँकि, अमेरिका और चीन ने कोरोना वायरस क्वारंटीन नियमों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के द्वारा भेजी गईं आम की इन पेटियों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अमेरिका और चीन के अलावा कनाडा, नेपाल, मिस्र और श्रीलंका ने भी पाकिस्तान के द्वारा मैंगो डिप्लोमेसी के तहत भेजे गए आम के तोहफे को स्वीकार करने में असमर्थता जताई है।

न्यूज एजेंसी एएनआई के द्वारा सूत्रों के हवाले से यह खबर भी दी गई कि पाकिस्तान के एफओ ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भी चौंसा आम की पेटियाँ भेजी थी लेकिन अभी तक पाकिस्तान की इस मैंगो डिप्लोमेसी पर उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। न्यूज इंटरनेशनल की खबर में बताया गया है कि विभिन्न देशों को यह आम पाकिस्तान के राष्ट्रपति डॉ. आरिफ अल्वी की ओर से भेजे गए हैं। बाकी देशों का तो ठीक है लेकिन पाकिस्तान के परम मित्र चीन ने उसके तोहफे को नकार दिया, यह पाकिस्तान के लिए ठीक खबर नहीं है।

इस्लामिक कट्टरपंथियों और भारत के खिलाफ अपने पैंतरों से चर्चा में रहने वाला पाकिस्तान कभी-कभार ऐसी ही कुछ वजहों से भी चर्चा में बना रहता है। 2019 में यह खबर आई थी कि देश की आर्थिक किल्लतों के चलते पाकिस्तान के सियासतदानों ने चीन को गधे बेचने के फैसला किया था। पाकिस्तान में गधों की तीसरी सबसे बड़ी आबादी है और पाकिस्तान इन गधों को बेचकर करोड़ों रुपए कमाना चाहता था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मेलोनी समझकर तो नहीं पकड़ा था?’: राहुल गाँधी-संदीप दीक्षित की PM मोदी और इटली की प्रधानमंत्री को लेकर घटिया टिप्पणी, कॉन्ग्रेस का महिला-विरोधी चेहरा...

राहुल गाँधी ने PM मोदी की विदेश नीति का मजाक उड़ाते हुए संदीप दीक्षित को गले लगाया। इसके बाद दीक्षित ने मेलोनी को लेकर भद्दी टिप्पणी की।

नदी जोड़ो मेगा प्रोजेक्ट Part II: बुंदेलखंड को केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना की सबसे ज्यादा जरूरत क्यों?

भारत सरकार ने राज्यसभा में कहा कि भारत के अतिमहत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना में शीर्ष पर केन-बेतवा नदी लिंक प्रोजेक्ट है।
- विज्ञापन -