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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने ‘तेजी से न्याय’ वाली बनाई व्यवस्था, 2 जजों के बेंच ने उठा दिए उसी पर सवाल

नई लिस्टिंग प्रणाली में 30 जजों के लिए 2 अलग-अलग शिफ्ट लगा दी गई। इन शिफ्टों में सोमवार और शुक्रवार को उन्हें नए दायर केसों के लिए 15 अलग-अलग पीठों में सुनवाई करनी होती है। इसी पर 2 जजों की बेंच ने कहा कि फैसला लेने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा।

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित द्वारा लागू की गई नई लिस्टिंग प्रणाली पर सुप्रीम कोर्ट की ही बेंच ने सवाल उठा दिए हैं। उच्चतम न्यायालय के जस्टिस संजय किशन कॉल की अध्यक्षता वाली बेंच ने CJI जस्टिस यूयू ललित द्वारा लागू किए नए सिस्टम की निंदा की है।

उच्चतम न्यायालय के जस्टिस संजय किशन कॉल वाली बेंच का मानना है कि नए लिस्टिंग सिस्टम से जजों को किसी मामले में फैसला लेने का पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है। यह टिप्पणी मंगलवार (13 सितम्बर 2022) को एक सुनवाई के दौरान की गई।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक यह टिप्पणी करने वाली बेंच में जस्टिस संजय किशन कॉल (Justice Sanjay Kishan Kaul) के साथ जस्टिस अभय एस ओका (Justices Abhay S Oka) भी शामिल थे। उन्होंने यह टिप्पणी नागेश चौधरी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के केस में की। अदालत ने इस केस की सुनवाई फिलहाल 15 नवम्बर तक के लिए स्थगित कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कॉल और जस्टिस अभय एस ओका की बेंच का मानना है कि नए सिस्टम से दोपहर सत्र की अवधि में कई केसों का ढेर लग जाता है। इनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट में लागू की गई नई लिस्टिंग प्रणाली से जजों को फैसला लेने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा।

गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित द्वारा लागू की गई लिस्टिंग प्रणाली में 30 जजों के लिए 2 अलग-अलग शिफ्ट लगा दी गई है। इन शिफ्टों में सोमवार और शुक्रवार को उन्हें नए दायर केसों के लिए 15 अलग-अलग पीठों में सुनवाई करनी होती है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट में नए दायर इन केसों की संख्या रोजाना 60 से ज्यादा होती है। इसी नए लिस्टिंग सिस्टम के अनुसार मंगलववार, बुधवार और गुरुवार को यही जज सुबह 10:30 से दोपहर 1 बजे तक 3 जजों की पीठ के रूप में कानून के बेहद जरूरी पुराने मामलों को देखते हैं।

एक अन्य मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन जजों की पीठ को दोपहर में 2 घंटे में 30 केसों की सुनवाई करनी होती है। इस प्रकार 1 मामले को निबटाने के लिए जजों को लगभग 4 मिनट का समय मिल रहा। यद्दपि बाद में मंगलवार (13 सितम्बर) को मुख्य न्यायाधीश ने इन केसों की संख्या 30 से कम कर के 20 कर दिया। इस प्रकार अब 2 घंटे में जजों को 20 केसों की सुनवाई करनी पड़ती है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इसी को लेकर आपत्ति जताई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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