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जाधवपुर के वामपंथी लम्पट: किस ऑफ लव चाहिए, देश विरोधी नारे लगाएँगे और विरोध के नाम पर हिंसा करेंगे

एबीवीपी के सेमिनार को संबोधित करने पहुॅंचे केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ AISA और SFI के छात्रों ने की धक्का-मुक्की। बाल खींचे, चश्मा तोड़ दिया। बचाने के लिए राज्यपाल को आना पड़ा।

पश्चिम बंगाल का जाधवपुर विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक गतिविधियों से कम, परिसर में पल रहे वामपंथी छात्र संगठन की करतूतों से ज्यादा सुर्खियों में रहता है। शुक्रवार को एक बार फिर इसकी झलक ​तब दिखाई पड़ी जब केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के छात्रों ने धक्का-मुक्की की।

केंद्रीय मंत्री को बचाने के लिए राज्यपाल जगदीप धनखड़ को खुद विश्वविद्यालय पहुॅंचना पड़ा। बताया जाता है कि राज्यपाल, जो विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं, वे भी विरोध के कारण काफी देर तक परिसर में नहीं प्रवेश कर सके। राज्यपाल ने जब परिसर से बाबुल सुप्रियो के साथ निकलने की कोशिश की तो भी उन्हें छात्रों के विरोध का सामना करना पड़ा।

जाधवपुर वही विश्वविद्यालय है जहॉं के छात्रों ने फरवरी 2016 में राष्ट्रविरोधी नारे लगे थे। जेएनयू में उससे कुछ दिन पहले ही इस तरह की घटना हुई थी। जाधवपुर के वामपंथी छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने रैली निकाल कर ‘कश्मीर मॉंगे आजादी, अफजल बोले आजादी’ जैसे नारे लगाए गए थे। ऐसा आरएसएस और भाजपा के विरोध तथा अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर किया गया था।

उससे पहले 2014 में 5 नवंबर को यहॉं के छात्रों ने ‘किस ऑफ लव’ रैली निकाली थी। परिसर से करीब 500 मीटर दूर जाधवपुर थाने के सामने एक-दूसरे का सरेआम चुंबन लेकर उन्होंने अपना विरोध जताया था। इस दौरान ‘संघी गुंडे होशियार, तेरे सामने करेंगे प्यार’ जैसे नारे लगाए गए थे।

शुक्रवार को जब बाबुल सुप्रियो के साथ धक्का-मुक्की की गई तब वे एबीवीपी की ओर से आयोजित एक सेमिनार को संबोधित करने के लिए विश्वविद्यालय पहुॅंचे थे। बकौल सुप्रियो, “विश्वविद्यालय के कुछ छात्रों ने मेरे बाल खींचे और मुझे धक्का दिया।” बताया जाता है कि विरोध के दौरान केंद्रीय मंत्री पर बोतल फेंकी गई और उनके चश्मे को भी तोड़ दिया गया। बाबुल सुप्रियो ने वाइस चांसलर से पुलिस को बुलाने को भी कहा, लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।

बाबुल सुप्रियो ने ट्वीट कर कहा है, “ये कुछ भी कर लें मुझे उकसा नहीं पाएँगे। लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने में विपक्ष की भूमिका सत्ताधारी दल की तरह ही काफी अहम है, तथा मतभेदों को धैर्यपूर्वक सुनना भी आवश्यक है। इस तरह का व्यवहार अनुचित और निन्दनीय है।”

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, राज्यपाल ने इस घटना को गंभीरता से लिया है और पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से इस बारे में बात की है। उन्होंने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से बात कर इस मामले में तुरंत कोई कदम नहीं उठाए जाने को लेकर भी नाराजगी जताई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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