मुस्लिमों की मजहबी भावनाएँ आहत करने के नाम पर गिरफ्तार इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को जेल के भीतर धमकियाँ मिल रही हैं। जेल के भीतर ही लोग उसकी जान के लिए खतरा बने हुए हैं। यह बातें शर्मिष्ठा ने एक याचिका में कहीं हैं। इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को जमानत देने से इनकार कर दिया है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, शर्मिष्ठा की तरफ से अलीपुर (कोलकाता) की जिला अदालत में दायर एक याचिका में समस्याएँ बताई गईं थी। शर्मिष्ठा ने इस याचिका में कहा था कि उन्हें जेल के अंदर अन्य कैदियों से कई तरह की धमकियाँ मिल रही हैं। शर्मिष्ठा ने कहा था कि उन्हें अपनी सुरक्षा का डर सता रहा है।
शर्मिष्ठा को अलीपुर के महिला सुधार गृह में रखा गया है। उन्होंने याचिका में कहा कि इस महिला सुधार गृह में ना सही से साफ़-सफाई होती है ना ही यहाँ पीने का साफ़ पानी है। शर्मिष्ठा ने यह भी बताया कि उन्हें बीमारियाँ भी हैं और इस महिला सुधार गृह में उन्हें कोई भी सुविधा नहीं मिल रही है।
शर्मिष्ठा ने अलीपुर कोर्ट में याचिका दायर खुद को सुरक्षा दिए जाने की माँग की है। अलीपुर कोर्ट में इस पर अभी सुनवाई नहीं हुई है। इस बीच शर्मिष्ठा की जमानत याचिका को सोमवार (3 जून, 2025) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने सुना। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को अंतरिम तौर पर जमानत देने से इनकार कर दिया।
हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा के वीडियो ने लोगों की भावनाएँ आहत की हैं। हाई कोर्ट ने राहत माँगने पर यह भी कहा कि अगर शर्मिष्ठा को जेल में दो दिन रहना पड़ेगा तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। कोर्ट ने इस दौरान बोलने की आजादी को लेकर टिप्पणियाँ की।
वहीं इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने शर्मिष्ठा को राहत देने का पुरजोर विरोध किया और कहा कि उन्हें यह वीडियो बनाने से पहले सोचना चाहिए था। पश्चिम बंगाल सरकार ने यह भी प्रयास किया कि यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में अब छुट्टियों के बाद सुना जाए। इस मामले की सुनवाई अब गुरुवार (5 जून, 2025) को है।
शर्मिष्ठा को शुक्रवार (30 मई, 2025) को गिरफ्तार किया था। उसे पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों ने इससे पहले अभियान चलाया था।
फिल्म टॉप गन में मेवरिक में एड हैरिस का किरदार टॉम क्रूज से कहता है, “ये विमान जिनका आप परीक्षण कर रहे हैं, कैप्टन एक दिन इन्हें पायलटों की बिल्कुल भी जरूरत नहीं होगी। पायलट को सोने, खाने, टॉयलेट करने की जरूरत होती है। पायलट तो कभी-कभी आदेश की अवहेलना करेंगे। आपने बस उन लोगों के लिए कुछ समय खरीदा है।” यह सिर्फ जिम कैश और जैक एप्स जूनियर द्वारा लिखी गई पंक्ति ही नहीं थी, बल्कि यह एक भविष्यवाणी थी।
बॉर्डर फिल्म में जैकी श्रॉफ द्वारा अभिनीत विंग कमांडर एंडी बाजवा, सनी देओल द्वारा अभिनीत मेजर कुलदीप सिंह चाँदपुरी से कहते हैं कि यह वायुसेना ही है जो दुश्मन को उसके इलाके में मार गिराती है। एक समय था जब यह हकीकत थी। कारगिल युद्ध में वायुसेना ने पाकिस्तानी चौकियों और बंकरों को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई थी।
युद्ध की कहानियाँ और फिल्मों की पटकथाएँ वास्तविक जीवन के अनुभवों के आधार पर बनती हैं, लेकिन तकनीक में तेजी से बदलाव हुआ है। अब किफायती ड्रोन युद्ध के मैदान में बेहद कारगर हथियार बन गए हैं।
दुनियाभर में युद्ध का तरीका बदल रहा है। कॉकपिट डॉगफाइट्स में नहीं, बल्कि कंटेनर, ट्रकों, गुफाओं और बंकरों से किए जाने वाले हमलों में है। ड्रोन, घूमते हुए हथियार, एफपीवी, मशीनें जो न सोती हैं, न खाती हैं, न सवाल करती हैं। ये बस आज्ञा मानती हैं और अब युद्ध की कहानियाँ लिख रही हैं।
ड्रोन युद्ध का युग आ गया है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या लड़ाकू विमान अब संग्रहालय की शोभा बढ़ाएँगी? यूक्रेन-रूस युद्ध में नई तस्वीर सामने आई है। यूक्रेन के ड्रोन ने रूस में तबाही मचा दी। हाई-टेक राफेल, एफ-35, मिग इंजन या सुखोई की गड़गड़ाहट को अब भूल जाइए। रूस-यूक्रेन युद्ध ने इतिहास में जंग की नई दास्तान लिखी है। इसमें सस्ते ड्रोन, और सस्ते एफपीवी क्वाडकॉप्टर ने न केवल ऑपरेशन को अंजाम दिया, बल्कि उन्हें परिभाषित भी किया।
अचानक दुनिया भर के देशों ने ऐसे ड्रोन खरीदना शुरू कर दिया है, जो लड़ाकू जेट और महंगी मिसाइलों के काम को सस्ते, सटीक और जोखिम-मुक्त तरीके से कर सकते हैं।
ऐसा नहीं है कि ड्रोन कभी युद्ध का हिस्सा नहीं रहे हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य पश्चिमी देश सीरिया सहित मध्य पूर्व देशों पर हमला करने के लिए उनका उपयोग करते रहे हैं। हालाँकि वे जिन ड्रोन का उपयोग करते हैं, वे महंगे हैं और उन्हें हासिल करना मुश्किल है। अब जिन ड्रोनों का उपयोग किया जा रहा है वे लड़ाकू जेट की तुलना में बहुत सस्ते हैं।
ड्रोन अब सहायक हथियार नहीं, युद्ध विजेता हैं
युद्ध के शुरुआती दिनों से ही, तुर्की के बायरकटर टीबी2 ने यूक्रेन को रूसी बख्तरबंद गाड़ियों को नष्ट करने में मदद की। जवाबी कार्रवाई में रूस की ओर से ईरानी शाहद-136 ड्रोन यूक्रेनी शहरों को निशाना बनाया। फिर ग्रेनेड के साथ रेट्रोफिट किए गए व्यावसायिक रेसिंग ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। ये केवल तभी विस्फोट करते थे जब टारगेट सुनिश्चित होती थी। युद्ध शुरू होने के बाद से रूस और यूक्रेन दोनों ने सैकड़ों वीडियो साझा किए गए, जिसमें दिखाया गया था कि कैसे सस्ते ड्रोन सफलतापूर्वक दुश्मन को मार गिराते हैं।
हाल ही में यूक्रेन ने ‘ऑपरेशन स्पाइडरवेब’ में दिखाया कि ड्रोन युद्ध कुछ ही दिनों में कितना विकसित हो गया है। यूक्रेन ने करीब डेढ़ साल पहले कथित तौर पर रूस के अंदर स्थित एयरबेस पर हमला करने की तैयारी शुरू कर दी थी। ड्रोन्स को लकड़ी के कंटेनरों और मोबाइल केबिनों में छिपाकर रूस में तस्करी की गई। हमले के समय इन कंटेनरों की छतें रिमोट से खोली गईं। ड्रोन्स ने रूसी विमानों पर सटीक हमला किया। अब सीमा पार कर हमले के लिए किसी जेट की जरूरत नहीं थी। बस योजना, धैर्य और एक लैपटॉप की जरूरत थी। यह कोई साइंस फिक्शन नहीं है। यह ड्रोन युद्ध का नया तरीका है।
This will be in textbooks. Ukraine secretly delivered FPV drones and wooden mobile cabins into Russia. The drones were hidden under the roofs of the cabins, which were later mounted on trucks.
At the signal, the roofs opened remotely. Dozens of drones launched directly from the… pic.twitter.com/sJyG3WyYYI
हाल ही में, भारत ने पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। पहलगाम में 26 निर्दोष हिंदुओं की जान चली गई थी। भारत ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी शिविरों पर हमला किया। इसके बाद पाकिस्तान ने अपने सहयोगी देशों से प्राप्त ड्रोन का इस्तेमाल किया। भारतीय नागरिकों और सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की गई। लेकिन, भारतीय वायु रक्षा प्रणाली ने इसे रोक दिया।
A 100% Indian-designed suicide drone called the JM-1 made its combat debut in Operation Sindoor becoming the first ‘Atmanirbhar’ loitering munition to strike Pakistani targets. The Indian drone warfare story is probably this conflict’s biggest takeaway: pic.twitter.com/u6SUDjHqOD
फिर भारत के लिए जवाबी कार्रवाई करने का समय आ गया। भारतीय सशस्त्र बलों ने भारत में बने एफपीवी ड्रोन, हेरॉन यूएवी और सामरिक लोइटरिंग मुनिशन पर बहुत अधिक भरोसा किया। भारत द्वारा निर्मित लोइटरिंग मुनिशन जेएम-1 ने भी ऑपरेशन में अपनी क्षमता साबित की। हाई रिज़ॉल्यूशन वाले ड्रोन निगरानी प्रणाली का उपयोग करके लक्ष्यों की मैपिंग की गई। खुफिया इनपुट के साथ क्रॉस वेरिफाई किया गया और फिर सटीक हमले किए गए।
साथ ही भारतीय मिसाइलों ने पाकिस्तानी हवाई ठिकानों को तबाह कर दिया। इस दौरान भारतीय नकली ड्रोन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, खासकर भारतीय लड़ाकू विमानों से मेल खाने वाले ड्रोन्स ने पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणाली को भ्रमित कर दिया।
अजरबैजान आर्मेनिया युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल
यूक्रेन-रूस जंग से पहले 2020 के नागोर्नो-करबाख युद्ध में पहली बार मानव रहित ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। तुर्की के बायरकटर टीबी2 ड्रोन से लैस अजरबैजान ने अर्मेनियाई सेना को अपने अधीन कर लिया। अजरबैजान ने कथित तौर पर वायु रक्षा प्रणाली की जानकारी प्राप्त करने के लिए ‘चारा ड्रोन’ का इस्तेमाल किया और फिर उन्हें नष्ट करने के लिए आधुनिक ड्रोन का इस्तेमाल किया।
सिर्फ 44 दिनों में आर्मेनिया ने सैकड़ों टैंक, तोपें और मोबाइल एयर डिफेंस यूनिट खो दिए। उनमें से कई ड्रोन द्वारा रिकॉर्ड किए गए फुल एचडी फुटेज में नष्ट हो गए।
Azerbaijan’s use of Turkish drones gave it a decisive edge and victory over Armenia in the Nagorno-Karabakh conflict in 2020.
Here’s a look at why the world is now taking notice of Turkish drone and defence technology pic.twitter.com/7P5EXhVoDm
MQ 9 रीपर जैसे ड्रोन लक्ष्य पर हमला करने के बाद घर लौट आते हैं। हालाँकि, घूमते-फिरते हथियार या LM, प्रतीक्षा करने के लिए बनाए गए हैं। ये एक भिक्षु के धैर्य और एक फिदायीन के स्वभाव जैसे उड़ने वाले स्नाइपर की तरह हैं। एक बार लॉन्च होने के बाद, वे कभी-कभी घंटों तक युद्ध के मैदान के ऊपर चक्कर लगाते हैं, हरकतों को स्कैन करते हैं। जिस समय सैनिकों का ग्रुप, टैंक या रडार सिग्नल पर लॉक होते हैं और बगैर चेतावनी के टारगेट को ध्वस्त कर देते हैं। इससे बचना काफी मुश्किल होता है।
Russia turned Oekainian armoured vehicles into scrap metal. The footage shows several armoured vehicles destroyed by Russian UAVs and Lancet loitering munitions of the Sever Group of Forces in the border area of Kursk region. pic.twitter.com/u1Mob5T3zG
भारत के नागस्त्र-1 की कीमत मात्र 5,500 डॉलर या लगभग 4.69 लाख रुपये है। जबकि एक राफेल की कीमत लगभग 242 मिलियन डॉलर है। यानी एक राफेल की तुलना में भारत उसी कीमत पर 44,000 नागस्त्र-1 ड्रोन अपने शस्त्रागार में जोड़ सकता है।
इजरायल जैसे देशों ने हारोप जैसी प्रणालियों के साथ प्रौद्योगिकी का बीड़ा उठाया, लेकिन अब ईरान के शाहेद 131 और 136 भी प्रतिस्पर्धा दे रहे हैं। युद्ध अब हवाई युद्ध में लगे लड़ाकू विमानों से नहीं लड़े जाते। वे ऊपर से निगरानी करने वाले ड्रोनों से लड़े जा रहे हैं और लड़े जाते रहेंगे।
DPR quadcopter drone grenade strikes against Ukrainian soldiers near Pervomaisk pic.twitter.com/pWhXsxiFfQ
भविष्य में नई वायु सेना को अरबों डॉलर के जेट, विशाल हवाई पट्टी और पायलटों की ज़रूरत नहीं होगी, जिन्हें युद्ध में प्रशिक्षित होने में सालों लग जाते हैं। यह शिपिंग कंटेनरों में फिट हो जाता है और मांग पर लॉन्च होता है।
बायरकटर टीबी2 तुर्की निर्मित ड्रोन है जो सस्ता, कैमरा युक्त और घातक है। इसका इस्तेमाल सीरिया, लीबिया, यूक्रेन और अजरबैजान में किया जा चुका है।
बायरकटर टीबी2 स्रोत: Wiki
शाहेद 136 और 131 ईरान निर्मित कामिकेज़ ड्रोन हैं जिन्हें यमन से लेकर रूस तक को बेचा जाता है। वे अविश्वसनीय हैं लेकिन ग्रुप में इस्तेमाल किए जाने पर ख़तरनाक है।
शाहेद 136 स्रोत-wiki
एमक्यू 9 रीपर संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा निर्मित ड्रोन है। ये लंबे समय तक चलने वाला और सैटेलाइट से जुड़ा हंटर किलर ड्रोन है। ये महंगे हैं लेकिन रेंज और सटीकता में बेजोड़ हैं।
एमक्यू 9 रीपर स्रोत- GAAS
विंग लूंग II और CH सीरीज चीन निर्मित ड्रोन हैं, जिन्हें रीपर्स को बीजिंग का जवाब माना जाता है। इन्हें अफ्रीका और मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर बेचा गया है।
विंग लूंग II स्रोत- Wiki
इजरायल निर्मित आईएआई हारोप और हेरोन ड्रोन भी बेजोड़ हैं। फिलिस्तीन- इजरायल युद्ध में इसका इस्तेमाल किया गया है। इनकी उड़ान क्षमता उल्लेखनीय है।
आईएआई हारोप स्रोत- wiki
भारत घातक और CATS वारियर जैसे विश्व स्तरीय ड्रोन भी विकसित कर रहा है। भारत के नागस्त्र-1 का हाल ही में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान इस्तेमाल किया गया।
घातक ड्रोन स्रोत- wiki
सबसे अच्छी बात यह है कि इनमें से ज़्यादातर ड्रोन किफ़ायती हैं। इनमें से कुछ की कीमत मिसाइल से भी कम है। युद्ध का मैदान अब सबसे बड़े लोगों और देशों का नहीं, बल्कि सबसे होशियार लोगों और देशों का है।
क्या लड़ाकू विमान खत्म हो गए हैं?
यह घोषणा करना जल्दीबाजी है कि लड़ाकू विमानों का समय खत्म हो गया है। आखिरकार अगर कुछ हज़ार डॉलर का ड्रोन एक छिपे हुए ट्रक से सैकड़ों मिलियन डॉलर के विमान को नष्ट कर सकता है, तो हवाई पट्टी बनाने की क्या ज़रूरत है? हालाँकि, अभी लड़ाकू विमानों को छोड़ने का समय नहीं आया है।
जब बात गहरी पैठ वाले हमलों, हवाई श्रेष्ठता और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध की आती है, तो लड़ाकू विमान अभी भी हावी हैं। ये दुश्मन का मनोबल तोड़ते हैं, तेज गति से बचाव करने वाले मिशन चलाते हैं और ऐसे पेलोड ले जाते हैं जिन्हें ड्रोन अभी भी संभाल नहीं सकते। सुखोई 30, राफेल या यहां तक कि भारत का आगामी एएमसीए की जरूरत और विश्वसनीयता बनी रहेगी।
भविष्य लड़ाकू विमान के साथ-साथ ड्रोन युग का होगा यानी लड़ाकू विमानों के ऊपर से बोझ कम हो जाएगा।
ड्रोन सिद्धांत या डायनासोर सिद्धांत
दुनिया भर की सेनाओं के लिए असली सवाल यह नहीं है कि ड्रोन काम करते हैं या नहीं। सवाल यह है कि क्या उन्होंने ड्रोन के साथ नेतृत्व करने के लिए खुद में तेजी से बदलाव किया है?
अब सवाल यह उठता है कि क्या भारत को डेढ़ लाख करोड़ रुपये अधिक राफेल में निवेश करना चाहिए या आधी राशि स्वदेशी ड्रोन और एआई – आधारित युद्ध प्रणाली बनाने में खर्च करनी चाहिए। क्या भारत पर्याप्त ड्रोन ऑपरेटरों, कोडर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध रणनीतिकारों को ट्रेनिंग दे रहा है, या सिर्फ अधिक लड़ाकू पायलटों को? बीसवीं सदी में जिसने भी आसमान को नियंत्रित किया, उसने युद्ध को नियंत्रित किया।
इक्कीसवीं सदी में डेटा भी काफी अहम है। साइबर सुरक्षा, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता, ड्रोन रक्षा ग्रिड और स्वायत्त हत्या प्राधिकरण अब सैन्य आवश्यकताएँ हैं, लग्जरी नहीं।
अब दहाड़ने का नहीं, मौन आक्रमण का है जमाना
एक समय था जब युद्ध की जीत गरजते जेट इंजनों के रूप में आकाश में गूँजती थी। दुश्मन के दिलों में ये दहशत पैदा करता था । युद्ध का मैदान अब दहाड़ता नहीं है। यह गुनगुनाता है। युद्ध के मैदान में सैनिकों द्वारा सुनी जाने वाली प्रोपेलर की मच्छर जैसी भनभनाहट, उन्हें बैठ कर अपने भाग्य का इंतजार करने पर मजबूर कर देती है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा रूस यूक्रेन युद्ध में देखा गया है।
लड़ाकू विमान खत्म नहीं हुए हैं और वे लंबे समय तक यहाँ रहने वाले हैं। हालाँकि उनकी सर्वश्रेष्ठता को ड्रोन ने चुनौती दी है। वे अब उन मशीनों के साथ हवा साझा करते हैं जो साँस नहीं लेती हैं, पलक नहीं झपकाती हैं और संकोच नहीं करती हैं। ड्रोन ध्वनि अवरोध को नहीं तोड़ते हैं। वे पारंपरिक युद्ध के नियमों को तोड़ते हैं।
ड्रोन युद्ध का युग आ गया है। जो देश इसके मुताबिक अपनी कार्यशैली बदलेंगे, वे नेतृत्व करेंगे। जो नहीं करेंगे, वे अपने विनाश को आमंत्रित करेंगे। इतना ही नहीं पूरी हाई डेफिनिशन में रीप्ले देखेंगे, जिसे उसी ड्रोन द्वारा फिल्माया गया है, जिसने युद्ध के मैदान में उनके साथियों को मार डाला था।
इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली पर FIR करवाने वाला वजाहत खान गायब हो गया है। इस्लामी कट्टरपंथी वजाहत खान ने इस्लाम के कथित अपमान पर शर्मिष्ठा पर FIR करवाई थी। इसके बाद सामने आया था वजाहत खुद ही माँ कामाख्या, भगवान कृष्ण समेत तमाम हिन्दू देवी-देवताओं पर अपमानजक टिप्पणियाँ करता था। इसके बाद उसके खिलाफ असम समेत कई जगह मामले में दर्ज हुए थे। इसके बाद वह कोलकाता से गायब हो गया है।
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, वजाहत खान के घरवालों ने बताया है कि वह गायब है। वजाहत खान तब से ही गायब है जबसे उसके खिलाफ शिकायतें होना चालू हुई है। वजाहत खान के खिलाफ कोलकाता में भी एक शिकायत 2 जून, 2025 को दर्ज करवाई गई है। यह शिकायत एक हिन्दू संगठन ने दर्ज करवाई है।
इस शिकायत में बताया गया है कि वजाहत खान ने हिन्दुओं को लेकर ‘रेप कल्चर’ और गौमूत्र से जुड़ा मजाक उड़ाया। रिपोर्ट में उसके खिलाफ और भी कई आरोप लगाए गए हैं। कोलकाता में यह FIR गार्डन रीच थाने में हुई है। पुलिस ने अभी इस पर क्या एक्शन लिया है, यह स्पष्ट नहीं है।
वहीं वजाहत खान के खिलाफ असम में भी एक FIR करवाई गई है। यह FIR उसके माँ कामाख्या पर की गई टिप्पणियों को लेकर करवाई गई है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस मामले में गिरफ्तारी की बात कही है।
उन्होंने मीडिया को बताया, “वजाहत खान के खिलाफ माँ कामाख्या पर अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के मामले में एक केस दर्ज किया गया है। अब असम पुलिस पश्चिम बंगाल जाएगी और आगे की कार्रवाई करेगी। हम पश्चिम बंगाल पुलिस से इस मामले में सहयोग माँगेगे ताकि आरोपित को असम में कार्रवाई के लिए लाया जा सके।”
Reference to unacceptable comments made by an individual against Devi Maa Kamakhya, a case has been registered by @assampolice and we will seek West Bengal Govt's cooperation in bringing the individual to Assam to face the law. pic.twitter.com/0jpyhLHmCL
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) June 2, 2025
वजाहत खान पर कार्रवाई होने को देखते हुए उसके घरवाले बता रहे हैं कि उनका बेटा एकदम ‘सेक्युलर’ है। उन्होंने दावा किया है कि वजाहत खान के अकाउंट से हिन्दू देवी-देवताओं के विरुद्ध जो टिप्पणियाँ की गईं थी, वह अकाउंट हैक होने चलते हुईं।
वजाहत खान सने अपनी पोस्ट में हिंदू देवी-देवताओं और सनातन धर्म के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। उसके कुछ पोस्ट इस प्रकार हैं-
“एक हिंदू अपनी साली को अंग अंग पर रंग लगाते हुए और अपने दोस्तों को भी उसके साथ ऐसा करने का निमंत्रण देते हुए… सी हिंदुओं… यहीं है इनकी असलियत… बलात्कारी संस्कृति”
“नहीं वो उसकी बात कर रहा है जिसकी 16108 रखेलो के साथ रंग रसिया मनाता था…या चुपके-चुपके लड़कियों को नहाते हुए देखता था…”
“मेरे पास आपके लिए कुछ है… पहले अपने धर्म के बारे में पढ़ो। मूत्र पीने वाले मैल हैं।”
“तुझ जैसी &^$^&* पेट की औलाद रसूल के बारे में बारे में बात करे ये जेब नहीं देता…तू इसकी बात कर, तेरा कृष्णा कैसा रंगीला था देख…सच्चाई देख, वहम में मत जी… $%टू साले, तूने जो भी कहा वो सब तो झूठ और बहुत है लेकिन ये तेरे ही किताब का है सच पढ़, सुवर के पिल्ले”
गौरतलब है कि वजाहत खान की शिकायत के आधार पर ही शर्मिष्ठा पनोली को गिरफ्तार किया गया था। वह रशीदी फाउंडेशन नाम के एक संगठन से जुड़ा हुआ है। लेकिन कार्रवाई की बात सामने आते ही वह गायब हो गया है। वहीं शर्मिष्ठा अभी पुलिस की हिरासत में है।
पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार की गई यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) पूछताछ के लिए सीधे भगवान शिव की नगरी वाराणसी (काशी) लेकर जा रही है। NIA का कहना है कि ज्योति मल्होत्रा जब भी पाकिस्तान का दौरा करती थी, तो उसके ठीक पहले या बाद में वह काशी ज़रूर जाती थी। यह अजीबोगरीब दोहराव अब जाँच एजेंसियों के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है, जिसके तार सुलझाने के लिए NIA वाराणसी पहुँचेगी।
एक ट्रैवल व्लॉगर होने के नाते वह देश के किसी भी हिस्से में जा सकती थी, लेकिन काशी पर उसका लगातार ध्यान संदेह पैदा करता है। क्या उसने किसी के निर्देश पर वाराणसी के कुछ खास, चुनिंदा स्थानों के वीडियो बनाए और अपने यूट्यूब चैनल ‘ट्रेवल विद जो’ पर पोस्ट किए? इन वीडियो में क्या कोई गुप्त संदेश या संवेदनशील जानकारी छिपी हो सकती है जिसे कोड वर्ड में भेजा गया हो? ऐसे कई सवालों के जवाब NIA अब काशी से खोजेगी।
ज्योति का ‘ट्रेवल विद जो’ और संदिग्ध काशी यात्राएँ
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ज्योति मल्होत्रा ने 2022 के बाद से 4 बार पाकिस्तान की यात्रा की, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि हर बार पाकिस्तान जाने से पहले या बाद में वह काशी जरूर गई। इन यात्राओं के वीडियो उसने अपने यूट्यूब चैनल ‘ट्रेवल विद जो’ पर पोस्ट भी किए हैं।
ज्योति पहली बार पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर सितंबर 2022 में गई थी। लौटते ही ज्योति ने अक्टूबर 2022 में वाराणसी आकर उसने शहर के अलग-अलग जगहों के वीडियो अपने चैनल पर बनाकर डाले।
इसके बाद ज्योति अप्रैल 2023 में फिर पाकिस्तान गई और वापस आकर जुलाई 2023 में काशी पहुँची। 9 दिसंबर 2023 को ज्योति मल्होत्रा ने बस से एक बार फिर काशी का दौरा किया था। दिलचस्प बात यह है कि 19 दिसंबर 2023 को जब प्रधानमंत्री मोदी वाराणसी में थे और उन्होंने वंदे भारत ट्रेन को हरी झंडी दिखाई, तो ज्योति भी उसी ट्रेन में वाराणसी से दिल्ली तक बैठी थी और ज्योति ने ट्रेन के पायलट केबिन का वीडियो भी बनाया और क्लोज-अप शॉट लिए।
फिर ज्योति जनवरी-फरवरी 2025 को काशी में रहकर अलग-अलग जगहों पर घूमती रही। मार्च 2025 में ज्योति कश्मीर और फिर वहाँ से पाकिस्तान गई। इसका वीडियो भी उसने अपने यूट्यूब चैनल पर पोस्ट किया था।
कौन है ज्योति मल्होत्रा?
ज्योति मल्होत्रा हरियाणा के हिसार की रहने वाली एक यूट्यूबर और ट्रैवल व्लॉगर है। उसका यूट्यूब चैनल ‘ट्रेवल विद जो’ और इंस्टाग्राम अकाउंट ‘@travelwithjoone’ काफी लोकप्रिय हैं। उसके यूट्यूब पर 3.77 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर और इंस्टाग्राम पर 1.31 लाख फॉलोअर्स हैं।
ज्योति मल्होत्रा को भारतीय खुफिया जानकारी पाकिस्तान को देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। उस पर आरोप है कि उसने भारत के सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और सेना से जुड़ी कई गुप्त सूचनाएँ पाकिस्तान भेजी हैं।
जाँच में पता चला है कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के संपर्क में थी और पाकिस्तान हाई कमीशन, दिल्ली में उसकी मुलाकात एहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश से हुई थी। दानिश को बाद में भारत से निष्कासित कर दिया गया था।
ज्योति ने कई बार पाकिस्तान की यात्रा की है और अपनी यात्राओं के वीडियो भी बनाए हैं। उसके वीडियो और रील्स में भारत और पाकिस्तान की तुलना करते हुए संवेदनशील सूचनाएँ साझा करने का भी आरोप है। पुलिस ने उसके डिजिटल डिवाइस और खातों से 12 टेराबाइट्स से अधिक डिजिटल फॉरेंसिक डेटा बरामद किया है, जिसमें पाकिस्तानी कनेक्शन के सबूत शामिल हैं। उस पर सरकारी गोपनीयता अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
केरल में एक ट्रेन में आग लगाने वाला आतंकी शाहरुख सैफी काफिरों को मारने के मिशन पर था। वह मानता था कि काफिरों को मारने से उसके गुनाह खत्म हो जाएँगे। यह जानकारी राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने कोर्ट को दी है।
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, NIA ने सैफी के विषय में यह बातें चार्जशीट में कोर्ट को बताई हैं। NIA ने यह सारी जानकारियाँ कोर्ट को तब दीं, जब उसने अपनी जमानत के लिए याचिका डाली। हालाँकि, कोर्ट ने सैफी की याचिका को तुरंत खारिज कर दिया।
सैफी ने अपनी ज़मानत याचिका में तर्क दिया था कि उसके मामले की सुनवाई में देर हो रही है, इसलिए उसे ज़मानत मिलनी चाहिए। कोर्ट ने उसकी इस दलील को मानने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने सैफी की ज़मानत याचिका को खारिज करते हुए पाया कि सैफी ने मुकदमे में देरी के लिए बार-बार मानसिक बीमारी का झूठा दावा किया था।
कोर्ट ने कहा कि अगर मुकदमे में कोई देरी हुई है, तो इसका दोष सैफी को जाता है, किसी और को नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सैफी सहयोग करता है तो मुकदमे को तेज़ी से चलाया जा सकता है।
‘सच्चा मुसलमान’ बनना चाहता था सैफी
NIA ने कोर्ट में बताया कि दिल्ली का रहने वाला सैफी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी से परेशान था और ‘एक सच्चा मुसलमान’ बनना चाहता था। NIA ने बताया था कि इसी चाहत में उसने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कट्टरपंथी इस्लामी मौलानाओं द्वारा फैलाए गए जिहाद के बारे में जानना शुरू किया।
NIA ने कहा, “उसने यह मान लिया था कि अपने गुनाहों से मुक्ति पाने का सबसे आसान तरीका ‘काफिरों’ को मारना है, और इसी सोच के साथ उसने आतंकवाद का रास्ता चुनने का फैसला किया।”
एजेंसी ने आगे बताया कि सैफी ने ऐसे जगह पर हमला करने की सोची जहाँ उसकी पहचान आसानी से न हो। इसलिए, वह 31 मार्च 2023 को दिल्ली से केरल के लिए ट्रेन में सवार हुआ। 2 अप्रैल 2023 को सैफी शोरानूर रेलवे स्टेशन पहुँचा, जहाँ से उसने एक पेट्रोल पंप से बोतल में पेट्रोल और स्टेशन के सामने एक दुकान से लाइटर खरीदा।
NIA ने बताया कि पेट्रोल और लाइटर को अपने काले बैग में छिपाकर, सैफी बिना टिकट के ट्रेन में चढ़ा और बाद में आग लगाई। इस आतंकी हमले में 9 यात्री बुरी तरह झुलस गए थे। 3 लोगों की जान चली गई थी।
यह भी सामने आया था कि सैफी कट्टरपंथी मौलाना जाकिर नाइक और पाकिस्तान के मौलवियों जैसे डॉ. इसरार अहमद, तारिक जमील, मुफ्ती तारिक मसूद और तैमूर अहमद की रीरें देखता था। शाहरुख सैफी पर UAPA समेत कई धाराएँ लगाई गई हैं।
दक्षिण भारत के राज्य आंध्र प्रदेश का तिरुपति बालाजी मंदिर रहस्यमयी माना जाता है। यहाँ भगवान विष्णु की मंदिर प्रकट हुई थी। इसी कारण मंदिर को श्री वेंक्टेश्वर मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर तिरुमला की सप्तगिरी (सात पहाड़ियों) में एक वेंकटाद्रि पर स्थित है। मंदिर विष्णु के कलयुग अवतार को समर्पित है, जिन्हें गोविंदा या बालाजी के नाम से भी जाना जाता है। इसे संसार के सबसे अधिक दान प्राप्त करने वाले मंदिरों में से एक है और हर दिन लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
तिरुपति बालाजी मंदिर में स्थापित मूर्ति (साभार : TOI)
मंदिर का इतिहास
तिरुपति मंदिर का इतिहास हज़ारों वर्षों पुराना माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस स्थान का उल्लेख वराह पुराण, भागवत पुराण और पद्म पुराण जैसे कई हिंदू ग्रंथों में मिलता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब ऋषि भृगु ने विष्णु जी के छाती पर लात रखी थी तब माता लक्ष्मी चाहती थीं कि प्रभु उन्हें सजा दें, मगर भगवान ने ऐसा नहीं किया। इसी बात से नाराज होकर माता वैकुंठ छो़ड़कर धरती पर आ गईं और उनके जाने के बाद उन्हें ढूँढते हुए धरती पर आ गए। इस दौरान उन्होंने तिरुमला पर्वत का वेंकटेश्वर के नाम से निवास किया। बाद में वही स्थान तिरुपति मंदिर रूप में प्रसिद्ध हुआ।
ptमंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति (बाएँ), मंदिर की कलाकृति (दाएँ) ( साभार : The United Indian)
ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो इस मंदिर का निर्माण 300 ईसवी में शुरू हुआ। तमिल शिलालेखों और ताम्रपत्रों में इस मंदिर का वर्णन है। दक्षिण भारत के चोल, पल्लव, पांड्य और विजयनगर साम्राज्य के शासकों ने इस मंदिर के विकास और संरक्षण में बड़ी भूमिका निभाई थी।
विशेष रूप से 1517 में विजयनगर सम्राट कृष्णदेव राय ने जब इस मंदिर का दौरा किया तो इसकी भीतरी छत पर सोने का पानी चढ़ाने का आदेश दिया। उनके संरक्षण में मंदिर का बड़े पैमाने में विस्तार हुआ। इसके अलावा मरठा, मैसूर और ब्रिटिश काल में भी मंदिर में खूब चढ़ावा चढ़ा।
मंदिर की संरचना
तिरुपति मंदिर द्रविड़ शैली का एक अनोखा उदाहरण है। मंदिर का मुख्य हिस्सा ‘गर्भगृह’ है जहाँ भगवान वेंकटेश्वर की आठ फीट ऊँची मूर्ति है। यह मूर्ति काले पत्थर की है। माना जाता है कि मूर्ति बनाई नहीं गई बल्कि प्रकट हुई है। भगवान की मूर्ति की खास बात यह है कि उनकी आँखों में चमक है इसलिए उन्हें हमेशा आधा ढका जाता है ताकि भक्तों पर उनका सीधा प्रभाव न पड़े।
मुख्य मंदिर परिसर में एक भव्य गोपुरम (मुख्य द्वार) है जिसपर सोने की परत है। इस गोपुरम की ऊँचाई लगभग 50 फीट है और इसकी कलाकृतियाँ ही मंदिर की प्राचीनता का प्रतीक हैं।
तिरुपति मंदिर में पूजा-अर्चना करते पुजारी (साभार : Jansatta)
इसके साथ ही मंदिर परिसर में कई महत्वपूर्ण स्थल और भवन हैं, जिनमें रणग मंडपम जो कि उत्सव और धार्मिक आयोजनो के लिए प्रयोग किया जाता है, स्वर्ण द्वार – जिसे केवल विशेष अवसरों पर ही खोला जाता है और ध्वजस्तंभ – यह मंदिर की धार्मिक प्रतिष्ठा का प्रतीक है।
इसके अलावा मंदिर में एक बड़ा रसोईघर भी है जहाँ विश्वप्रसिद्ध ‘तिरुपति लड्डू’ प्रसाद तैयार किया जाता है। इस लड्डू को GI टैग प्राप्त है और इसे प्रसाद के रूप में भक्तों को वितरित किया जाता है।
कैसे पहुँचें ?
तिरुपति मंदिर तक पहुँचने के लिए करीबी हवाई अड्डा तिरुपति इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Renigunta Airport) है। जो तिरुमला से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। यहाँ से चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली जैसे शहरों के लिए सीधी उड़ानें उपलब्ध हैं।
तिरुपति बालजी मेंदिर में भक्तों का जनसैलाब (साभार : Pilgrimage)
तिरुपति रेलवे स्टेशन दक्षिण भारत का एक प्रमुख रेलवे जंक्शन है जो चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, विजयवाड़ा और अन्य बड़े शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। स्टेशन से मंदिर तक की दूरी लगभग 20 किलोमीटर है।
सिंधु जल समझौता स्थगित होने के बाद पाकिस्तान भारत के खिलाफ अलग-अलग पैंतरे चल रहा है। उसने हाल ही में ब्रह्मपुत्र नदी पर प्रलाप चालू किया है। इस बार उसने यह डर फैलाने की कोशिश की है कि अगर चीन ब्रह्मपुत्र का पानी रोक दे तो क्या होगा? उसके इस प्रोपेगेंडा का जवाब असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने दिया है।
‘ब्रह्मपुत्र’ भारत की अपनी नदी, किसी पर निर्भर नहीं
मुख्यमंत्री हिमंता ने साफ किया कि ब्रह्मपुत्र नदी चीन से भले ही आती हो, लेकिन इसमें ज्यादातर पानी भारत कि सहायक नदियाँ ही लाती हैं। चीन ब्रह्मपुत्र के कुल पानी में सिर्फ 30-35% का योगदान देता है, और वह भी ज़्यादातर पिघलते ग्लेशियरों से आता है। बाकी 65-70% पानी तो भारत के भीतर नदियाँ ही लाती हैं।
उन्होंने बताया कि बाकी 65-70% पानी तो भारत के भीतर ही बनता है, खासकर अरुणाचल प्रदेश, असम, नागालैंड और मेघालय में होने वाली भारी मानसूनी बारिश से। इसके अलावा, सुबनसिरी, लोहित, कामेंग, मानस, धनसिरी, जिया-भरली, कोपिली जैसी कई बड़ी सहायक नदियाँ भी हैं जो ब्रह्मपुत्र में पानी डालती हैं।
अगर चीन ब्रह्मपुत्र का पानी रोक दे तो क्या होगा? पाकिस्तान की नई डराने वाली कहानी का करारा जवाब
भारत द्वारा जब से पुरानी और एकतरफा सिंधु जल संधि को दरकिनार किया गया है, पाकिस्तान एक नई घबराहट फैलाने की कोशिश कर रहा है: “अगर चीन ब्रह्मपुत्र का पानी रोक दे तो?”
— Himanta Biswa Sarma (@himantabiswa) June 2, 2025
CM हिमंता बिस्वा ने कहा कि मेघालय की खासी, गारो और जयंतिया पहाड़ियों से भी कृष्णाई, दिगारू, कुलसी जैसी नदियों के ज़रिए ब्रह्मपुत्र में खूब पानी आता है और भारत-चीन सीमा पर (तूतिंग में) ब्रह्मपुत्र का प्रवाह लगभग 2,000-3,000 घन मीटर/सेकंड होता है।
उन्होने कहा कि असम के मैदानी इलाकों में (जैसे गुवाहाटी में), मानसून के दौरान यह प्रवाह बढ़कर 15,000-20,000 घन मीटर/सेकंड हो जाता है। इसका मतलब है कि ब्रह्मपुत्र भारत में आने के बाद और भी बड़ी और शक्तिशाली हो जाती है। यह एक भारतीय, बारिश से पोषित नदी प्रणाली है, जो किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं है।
पाकिस्तान को जाननी चाहिए यह सच्चाई
मुख्यमंत्री बिस्वा ने एक और अहम बात बताई। उन्होंने कहा कि अगर चीन कभी ब्रह्मपुत्र के पानी को कम भी कर दे (जो अभी तक किसी आधिकारिक मंच पर न तो कहा गया है और न ही इसका कोई कोई संकेत दिया गया है), तो यह भारत के लिए फायदेमंद ही होगा।
उन्होंने कहा कि हर साल असम में आने वाली भीषण बाढ़ लाखों लोगों को विस्थापित करती है और भारी तबाही मचाती है। पाकिस्तान, जिसने 74 सालों तक सिंधु जल संधि से बहुत फ़ायदा उठाया है, वह अब घबरा रहा है क्योंकि भारत अपने जल अधिकारों पर अपने हिसाब से फ़ैसले ले रहा है। मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि ब्रह्मपुत्र किसी एक देश पर आधारित नहीं है। यह भारत के भूगोल, मानसून और हमारी सभ्यता की ताकत से पोषित है।
पाकिस्तान की नई कहानी का करारा जवाब
भारतीय मीडिया के मुताबिक, भारत द्वारा सिंधु जल संधि को लेकर दिए गए स्पष्टीकरण के बाद से पाकिस्तान एक नई घबराहट फैलाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान के एक पत्रकार ने अमेरिकी पत्रिका ‘द डिप्लोमैट‘ में एक लेख प्रकाशित किया, जिसमें दावा किया गया कि अगर भारत सिंधु नदी का पानी रोकेगा, तो चीन ब्रह्मपुत्र का पानी रोक देगा। इस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
भारत ने इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान ने पुलवामा आतंकी हमले का कोई जिक्र नहीं किया, जिसमें 26 निर्दोष हिंदुओं की जान चली गई थी। यह हमला ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने किया था, जिसे पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का सहयोगी माना जाता है।
भारत ने साफ कर दिया कि चीन कोई ऐसा दोस्त नहीं है जो पाकिस्तान के कहने पर भारत से झगड़ा करेगा। चीन अपने आर्थिक हितों को पहले रखता है और पाकिस्तान को केवल कर्ज और परियोजनाओं के लिए देखता है। भारत पहले ही ब्रह्मपुत्र पर चीन की गतिविधियों पर नज़र रख रहा है और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने में सक्षम है।
भारतीय मीडिया ने पाकिस्तान की खराब आर्थिक स्थिति का भी जिक्र किया है, जो IMF के कर्ज पर निर्भर है। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा भारत को युद्ध की धमकी देना बेकार लगता है। भारत ने यह भी बताया कि सिंधु जल संधि कोई बंधन नहीं था, बल्कि भारत की एक अच्छी पहल थी। यदि पाकिस्तान की ओर से आतंकवादी हमले जारी रहते हैं, तो भारत अपने जल अधिकारों का प्रयोग कर सकता है और ज़रूरत पड़ने पर पानी पूरी तरह से रोक सकता है। यह भारत का अपना अधिकार है।
कुल मिलाकर, भारत ने पाकिस्तान के इन झूठे प्रचारों का तथ्यों और मजबूती से जवाब दिया है, यह साफ करते हुए कि ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के कार्यों का भारत पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा और भारत अपने देश के हितों की रक्षा के लिए हमेशा तैयार है।
अमेरिकी अरबपति कारोबारी और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के पिता एरोल मस्क भारत दौरे पर आए हैं। एरोल मस्क अयोध्या स्थित राम मंदिर में दर्शन करने भी जाएँगे। उससे पहल उन्होंने पूरे विश्व से शिव की आराधना करने को कहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी प्रशंसा की है।
एरोल मस्क ने IANS से कहा, “मुझे लगता है कि अगर पूरी दुनिया शिव की राह पर चले तो सब ठीक होगा। मैं कोई एक्सपर्ट नहीं हूँ लेकिन यह धर्म (हिन्दू) इतना पुराना है कि मैं चकित हो जाता हूँ। इससे बस यही पता चलता है कि हम कितना कम जानते हैं।”
Delhi: Tesla CEO Elon Musk's father, Errol Musk, says, "I think if the whole world followed Shiva, it would be all right. I'm not an expert, but I'm fascinated by it. It's so old, the religion is so ancient that it boggles my mind. It simply tells us how little we actually know" pic.twitter.com/HBU5pDWZKp
उन्होंने इस दौरान अपने बेटे की कंपनी टेस्ला और भारत के विषय में भी बात की। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी को भारत के हितों का ध्यान रखना है और एलन को टेस्ला के हितों का ध्यान रखना है। इसलिए, वे दोनों मिलकर कुछ ऐसा करेंगे जो टेस्ला और भारत दोनों के भले के लिए हो। मैं ये सारी बातें अपने स्तर पर बोल रहा हूँ।”
Delhi: When asked about the chemistry between PM Modi and Elon Musk, Tesla CEO Elon Musk’s father, Errol Musk, says, "Very good. Prime Minister Modi has to look after the interests of India when it comes to Tesla, and Elon has to look after the interests of Tesla. So, between… pic.twitter.com/PwEr322OJB
एरोल मस्क ने इस दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रशंसा भी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी वर्तमान में विश्व में सबसे अच्छे नेताओं में से एक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी को देखना काफी सुखद है।
एरोल मस्क ने इस दौरान ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भी बात की। मस्क ने भारत का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “मैं हमेशा से इस मामले में भारत के पक्ष में रहा हूँ… आप यहाँ के लोगों का जीवन कठिन नहीं बना सकते।” उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी परेशानियाँ पैदा कर रहा है, तो इस पर एक्शन लिया जाना चाहिए।
Delhi: On Operation Sindoor, Tesla CEO Elon Musk’s father, Errol Musk, says, "I’ve always been inclined to be on India’s side in this matter… You can’t make ordinary people’s lives so miserable in this area. And if it’s Pakistan that’s causing the trouble, something has to be… pic.twitter.com/sbRjgNbN9e
एरोल मस्क ने भारत को वैश्विक नेता बताया और कहा कि यह चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इसके बावजूद विनम्र है। एरोल मस्क वर्तमान में भारत की यात्रा पर है। एरोल मस्क राम मंदिर भी दर्शन के लिए जाएँगे। उन्होंने अपन बेटे एलन मस्क को भी भारत आने की सलाह दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के बटला हाउस में अवैध निर्माण की कार्रवाई में दखल देने से इंकार कर दिया है। याचिकाकर्ताओं को सक्षम अधिकारियों से संपर्क करने के लिए कहा है। उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में अवैध निर्माणों को तोड़ने के लिए नोटिस जारी कर रखा है।
इसके खिलाफ सुल्ताना शाहीन ने स्टे के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उसने बटला हाउस के 40 लोगों के निर्माण पर कार्रवाई रोकने की अपील की थी। लेकिन 2 जून 2025 को जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने इस पर सुनवाई करते हुए फौरी रहात से इंकार कर दिया। अब मामले की सुनवाई की जुलाई में होगी।
The Supreme Court refuses to interfere with the demolition notices issued to the property owners at Batla House in Jamia Nagar and asks petitioners to approach the appropriate authorities.
40 residents who own properties in Batla House sought a stay on the demolition order.… pic.twitter.com/ouP2QK1te4
गौरतलब है कि दिल्ली के जिस इलाके में बटला हाउस आता है वहाँ उसी इलाके के जामिया नगर, ओखला स्थित मुरादी रोड और खिजर बाबा कॉलोनी में 115 अवैध निर्माण पर कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने स्टे लगा दिया।
शाहीन का कहना है कि यहाँ पर रहने वाले लोग अपनी संपत्ति के कई वर्षों से मालिक हैं। अब इस संपत्ति को पीएम-उदय योजना के दायरे से बाहर करार देकर ध्वस्त करने का नोटिस दिया जा रहा है।
बता दें कि पीएम-उदय एक ऐसी योजना है जिसका उद्देश्य दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों की सूची के निवासियों को संपत्ति के अधिकार प्रदान करना या मान्यता देना है।
7 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को बटला हाउस क्षेत्र में अवैध संपत्तियों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद 27 मई को शाहीन की संपत्ति पर 15 दिन में ध्वस्तीकरण का नोटिस चिपकाया गया था।
सिंचाई विभाग का दावा है कि बटला हाउसक की ये संपत्तियाँ सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण हैं। इस दावे को चुनौती देते हुए शाहीन ने कहा है कि संपत्ति के मालिकों को उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। ऐसे में यह कार्रवाई मनमानी और गलत है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) ने भाजपा से जुड़ी एक झूठी खबर प्रकाशित करने के मामले में माफी माँग ली है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने एक खबर में दावा किया था कि भाजपा कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को अपने चुनावी अभियान का चेहरा बनाने वाली है।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने यह माफी सोमवार (2 जून, 2025) को प्रकाशित की। TOI ने स्पष्ट किया कि उसकी रिपोर्ट तथ्यात्मक रूप से गलत थी। TOI की तरफ से इस खबर पर खेद व्यक्त किया गया। अखबार ने भाजपा से जुड़ी झूठी खबर छापने के लिए माफ़ी भी माँगी है।
TOI ने लिखा, “TOI के लखनऊ और चेन्नई के 1 जून के संस्करणों में एक रिपोर्ट छपी थी, जिसका शीर्षक था ‘कर्नल कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका भाजपा के प्रचार अभियान का चेहरा बनने वाले हैं’ , फिर हमें पता चला कि भाजपा की ऐसी कोई योजना नहीं है।”
आगे TOI ने बताया, “हाँलाकि यह रिपोर्ट भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के साथ बातचीत पर आधारित थी, लेकिन हमें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से इसकी जाँच करनी चाहिए थी। हम इस गलती के लिए माफी माँगते हैं।”
गौरतलब है कि TOI ने अपनी रिपोर्ट में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया था। इससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई थी। दरअसल सिद्दीकी ने कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह को महिलाओं, विशेषकर मुस्लिम महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया था।
वहीं TOI रिपोर्ट में इसे इस तरह दिखाया गया कि जैसे भाजपा ऑपरेशन सिंदूर के विषय में दुनिया को बताने वाली इन दोनों महिला अधिकारियों को चुनाव अभियान का चेहरा बनाने जा रही हो। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि 9 जून 2025 को मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने के मौके पर भाजपा यह अभियान चालू करेगी।
खबर में बताया गया था कि भाजपा यह अभियान महिला सशक्तिकरण को लेकर चलाएगी। खबर प्रकाशित होने के बाद भाजपा ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया था। भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पर इसे फेक न्यूज बताया था। उन्होंने कहा था कि भाजपा की ऐसी कोई योजना नहीं है।
This is #FakeNews. The BJP has no plans to use either Col Sofia Qureshi or Wing Commander Vyomika Singh as campaign faces. The comments made by BJP Minority Morcha President Jamal Siddiqui have been misconstrued. He simply made a limited point about highlighting Col Qureshi as an… pic.twitter.com/nPttvpTWMs
इससे पहले भाजपा को दैनिक भास्कर की भी ऐसी ही एक झूठी खबर के लिए सफाई देनी पड़ी थी। इस खबर में दावा किया गया था कि पार्टी घर-घर सिंदूर भेजने का अभियान चलाने वाली है। भाजपा ने इस खबर को पूरी तरह बेबुनियाद बताया था और स्पष्ट किया था कि ऐसी कोई योजना नहीं है।
ध्यान देने वाली बात है कि जब इन अखबारों ने भाजपा से जुड़ी यह खबरें बिना कोई तथ्य जाँचे छापीं, तो उन्होंने इसे मुख पन्नों पर जगह दी। उसे एकदम डिटेल में छापा। इसके चलते भाजपा के खिलाफ खूब दुष्प्रचार भी हुआ। भाजपा को इसके चलते सामने आकर खंडन करना पड़ा।
जब भाजपा ने इन अखबारों की इन खबरों को स्पष्ट तौर पर झूठा बता दिया तो इन्होने माफ़ी के तौर पर एक छोटे से कोने में इसके लिए माफी छाप दी, जिस पर शायद ही किसी की नजर पड़े। ऐसे में यह सन्देश जाता है कि अखबार फर्जी खबर को तो खूब प्रचारित करना चाहते हैं लेकिन अपनी गलती स्वीकार करने में वह बचते हैं।
किसी पार्टी के एजेंडे या अभियान को लेकर ऐसी अफवाह या भ्रामकता फैलाना उस पार्टी की छवि पर भी प्रभाव डालता है। ऐसे में इस इस छवि बिगाड़ने के जिम्मेदार अखबारों को छोटा माफीनामा नहीं बल्कि वापस पूरी खबर सही तथ्यों के साथ छापनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं हो रहा, तो इसे बेईमानी ही कहा जाएगा।