Home Blog Page 343

‘कम से कम सेना की बात तो मानो’: शहजाद पूनावाला बोले- LoP का मतलब लीडर ऑफ पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा, पीएम मोदी पर राहुल गाँधी के बिगड़े बोल पर BJP ने लताड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपमानजनक टिप्पणी पर लोकसभा में विपक्ष नेता राहुल गाँधी की आलोचना की जा रही है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस टिप्पणी को असभ्य और पाकिस्तान खुफिया एजेंसी (ISI) का समर्थन बताया। उन्होंने भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर दावा किया था कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आते ही ‘नरेंद्र’ ने सरेंडर कर दिया।

मंगलवार (03 जून 2025) को भोपाल में आयोजित कॉन्ग्रेस के संगठन अभियान के प्रमोचन के दौरान कही। राहुल गाँधी ने कहा, “इन पर (BJP-RSS) थोड़ा सा दबाव डालो ये लोग डर जाते हैं। जैसे डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया…कहा मोदी जी क्या कर रहे हो? ‘नरेंद्र सरेंडर’ और नरेंद्र मोदी जी ने ट्रंप के इशारे का पालन किया। ये BJP-RSS का चरित्र है।”

इसके बाद राहुल गाँधी ने 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का जिक्र किया, जिसके अंत में बांग्लादेशी को आजादी मिली। यह युद्ध उस समय लड़ा गया था जब कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। उन्होंने कहा, “आपको एक समय याद होगा जब फोन कॉल नहीं आया था। 1971 की लड़ाई में एयरक्राफ्ट कैरियर आया था। इंदिरा गाँधी ने कहा था जो मुझे करना है मैं करूँगी। अमेरिका की धमकी के बावजूद पाकिस्तान को तोड़ दिया था। कॉन्ग्रेस के शेर और शेरनियाँ महाशक्तियों के खिलाफ लड़ते हैं और कभी झुकते नहीं हैं।”

राहलु गाँधी चीन-पाकिस्तान के ‘पेड एजेंट’

  • उधर, राहुल गाँधी के पीएम मोदी के लिए सरेंडर शब्द का प्रयोग करने पर भारी आलोचना की जा रही है। BJP ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष की ऐसी भाषा देश और सेना का अपमान है। कहा कि राहुल गाँधी चीन और पाकिस्तान के पेड एजेंट तो नहीं हैं।

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने राहुल गाँधी के बयान को ऑपरेशन सिंदूर और भारतीय सेना का अपमान करार दिया है। उन्होंने कहा, “जिस लहजे से ऑपरेशन सिंदूर पर राहुल गाँधी ने बात कही। कोई भी सभ्य राजनेता या विपक्ष का नेता अपने देश के बारे में बात करते समय सरेंडर जैसे शब्द का इस्तेमाल कभी नहीं करेगा। अगर कोई नेता इस तरह के शब्द का प्रयोग कर रहा है तो वह राजनीति लायक नहीं है।”

प्रवक्ता ने आगे कहा कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला ऑपरेशन सिंदूर के तहत लिया गया था, जिसमें पाकिस्तान के भीतर घुसकर 9 आतंकी लॉन्चपैड और 11 एयरबेस तबाह किए गए थे। संबित पात्रा ने कहा, “ये सब ऑन रिकॉर्ड है। इसके बावजूद राहुल गाँधी ने भारत की मातृभूमि के लिए सरेंडर शब्द का प्रयोग किया और ऑपरेशन सिंदूर का मजाक उड़ाया। हमारा देश कभी आतंक के सामने सरेंडर नहीं करता।”

वहीं, बीजेपी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, “राहुल गाँधी ने LoP का मतलब, लीडर ऑफ ऑपोजिशन की जगह लीडर ऑफ पाकिस्तानी प्रोपागेंडा समझ लिया है। पाकिस्तान ने भी मान लिया है कि भारत की उनकी कितनी कुटाई की और वह भारत से गिड़गिड़ा रहा था। लेकिन राहुल गाँधी कहते हैं कि ट्रंप का फोन आते ही पीएम ने सरेंडर कर दिया।”

पूनावाला ने आगे कहा, “राहुल जी, DGMO की बात मान लीजिए। उनकी नहीं तो विदेश मंत्रालय की मान लीजिए। कम से कम खुद की पार्टी के सांसद, शशि थरूर, मनीष तिवारी और सलमान खुर्शीद की ही बात मान लीजिए।”

‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने तोड़ी पाकिस्तानी फौज की कमर, करोड़ों के नुकसान में आतंकी मुल्क: IAF ने तबाह किए 6 लड़ाकू जेट, 2 निगरानी विमान, 1 C-130, 30+ मिसाइलें और कई ड्रोन

मंगलवार (6 मई 2025) की रात को शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारतीय वायुसेना की अब तक की सबसे सटीक और प्रभावशाली सैन्य कार्रवाई बनकर उभरा है। इस चार दिवसीय संघर्ष में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान की हवाई ताकत को जबरदस्त झटका दिया।

जानकारी के अनुसार, इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 6 लड़ाकू विमान, 2 महत्वपूर्ण निगरानी एयरक्राफ्ट, एक C-130 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, 30 से अधिक मिसाइलें और कई मानवरहित हवाई वाहन (ड्रोन) नष्ट कर दिए। यह कार्रवाई मुख्य रूप से हवा से दागी जाने वाली क्रूज मिसाइलों के जरिए की गई, जो भारत की सटीक मारक क्षमता को दर्शाती है।

ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब भारतीय वायुसेना ने अपनी अत्याधुनिक सुदर्शन मिसाइल प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से एक पाकिस्तानी निगरानी एयरक्राफ्ट को सटीक निशाना बनाया और उसे मार गिराया।

इसके अलावा, भोलारी एयरबेस पर हुए हमले के दौरान स्वीडिश मूल का एक और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम भी नष्ट हो गया।

जानकारी के मुताबिक, भारतीय वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों, जैसे राफेल और सुखोई-30, ने मिलकर पाकिस्तान के एक हैंगर को निशाना बनाया, जिसमें कई चीनी मूल के विंग लूंग ड्रोन ढेर हो गए। इंडियन एयर डिफेंस सिस्टम ने भी इस संघर्ष के दौरान 10 से अधिक पाकिस्तानी ड्रोन मार गिराए। साथ ही, पाकिस्तान द्वारा भारतीय एयरबेसों पर दागी गई कई क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों को भी हवा में ही नष्ट कर दिया गया, जिससे भारत की रक्षात्मक क्षमता साबित हुई।

भारतीय ड्रोन हमलों के दौरान पंजाब क्षेत्र में पाकिस्तान का एक C-130 सैन्य परिवहन विमान भी तबाह हो गया। पाकिस्तान ने शुरुआत में जवाबी कार्रवाई की कोशिश की, लेकिन जब उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा तो उसने 10 मई, 2025 को युद्धविराम का अनुरोध किया, जिसके बाद चार दिनों का यह संघर्ष समाप्त हो गया।

खास बात यह है कि इस पूरे अभियान के दौरान ब्रह्मोस मिसाइलों का प्रयोग नहीं किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि भारत ने लक्षित और नियंत्रित शक्ति का उपयोग किया। भारतीय वायुसेना इस पूरे ऑपरेशन के दौरान जुटाए गए डेटा का गहन तकनीकी विश्लेषण कर रही है।

यह ऑपरेशन भारत की रणनीतिक क्षमता और सटीक सैन्य कार्रवाई का एक सशक्त उदाहरण बन गया है, जो भविष्य के किसी भी खतरे से निपटने की भारत की तैयारी को दर्शाता है।

कहलाए नर्मदांचल के ‘शिवाजी’, मधुमक्खियों के छत्ते बने ‘हथियार’… कौन थे स्वतंत्रता की अलख जगाने वाले राजा भभूत सिंह: अब इनके ही नाम से जाना जाएगा पंचमढ़ी अभ्यारण्य

एमपी की बीजेपी सरकार ने पंचमढ़ी में कैबिनेट की बैठक की। पंचमढ़ी में बैठक करने का मकसद नर्मदांचल के शिवाजी कहलाने वाले राजा भभूत सिंह को सम्मानित करना था। बैठक के दौरान उनके प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका को याद किया गया।

गुरिल्ला युद्धों और मधुमक्खियों के सहारे अंग्रेजों को भगाने वाले राजा भभूत सिंह की वीरता हर घर में कहानियों की तरह आज भी गूँजती है। उनकी स्मृति में पंचमढ़ी वन्य जीव अभ्यारण्य का नाम राजा भभूत सिंह पर रखने का फैसला भी मोहन कैबिनेट ने किया है।

सतपुड़ा में 1857 की क्रांति की जगाई अलख

राजा भभूत सिंह एक ऐसा गौड़ शासक थे जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 1857 की क्रांति की चिंगारी सतपुड़ा में जलाई। 1858 में जब महान क्रांतिकारी तात्या टोपे अंग्रेजी शासन को चकमा देते हुए साँडिया पहुँचे। इस दौरान उनके स्वागत के लिए राजा भभूत सिंह पहुँचे थे। सतपुड़ा की गोद में दो महान क्रांतिकारियों ने 8 दिनों तक डेरा डाला। जनजातीय समाज पर राजा भभूत सिंह का काफी प्रभाव था। इसलिए उन्होने जनजातीय समाज को एकजुट किया और गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग दी।

राजा भभूत सिंह को सतपुड़ा की घाटियों की पूरी जानकारी थी। जबकि अंग्रेज इससे अनजान थे। राजा भभूत सिंह के गोरिल्ला सिपाही जाते और अंग्रेजों की फौज पर हमला कर गायब हो जाते थे। उनका युद्ध कौशल छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह था। इसलिए उन्हें नर्मदांचल का शिवाजी भी कहा जाता है। मान्यता ये भी है कि राजा भभूत सिंह ने युद्ध के दौरान मधुमक्खियों के छत्तों का भी इस्तेमाल किया था।

राजा भभूत सिंह के अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूँकने की तात्कालिक वजह काफी दिलचस्प है। सोहागपुर से आए एक थानेदार ने हर्राकोट आकर जागीरदार से मुर्गियाँ माँगी। राजा ने इसे अपमानजनक माना और अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह कर दिया।

देनवा घाटी में अंग्रेजों को खानी पड़ी मुँह की

देनवा घाटी का युद्ध राजा भभूत सिंह के लिए काफी निर्णायक माना जाता है। यहाँ अंग्रेजी फौज और मद्रास इन्फेंट्री के साथ उनका मुकाबला हुआ और इसमें अंग्रेजी फौज बुरी तरह हार गई। एक अंग्रेज अफसर एलियट ने 1865 की सेटलमेंट रिपोर्ट में कहा था कि राजा भभूत सिंह को पकड़ने के लिए ही मद्रास इन्फेंट्री को बुलाया गया था। 1860 तक उन्होंने अंग्रजों को धूल चटाई। दो साल बाद उन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया और जबलपुर में मौत की सजा दी। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि उन्हें फाँसी की सजा दी गई जबकि कुछ इतिहासकार मानते हैं कि उन्हें गोलियों से भून डाला गया। जनजातीय समुदाय को एकजुट कर अंग्रेजों से लोहा लेने वाले वीर योद्धाओं में राजा भभूत सिंह का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित है।

राजा भभूत सिंह की कहानी सिर्फ एक क्रांतिकारी की गाथा ही नहीं है बल्कि जल जंगल और जमीन के लिए लड़ने वाले वीर योद्धा की भी है। उनके राज्य की थूपगढ़ चोटी समुद्र तल से करीब 1350 मीटर ऊँची है, वहाँ की प्राकृतिक छटा आज भी लोगों को अपनी ओर खींचती है। यह गौड़ साम्राज्य की राजधानी हुआ करती थी।

अंग्रेजों से लड़ने का इतिहास था

राजा भभूत सिंह पंचमढ़ी जागीर के स्वामी ठाकुर अजीत सिंह के वंशज थे। उनके दादा ठाकुर मोहन सिंह ने 1819-20 में सीताबर्डी युद्ध में अंग्रेजों के खिलाफ नागपुर के पराक्रमी पेशवा अप्पा साहेब भोंसले का साथ दिया था। जब अंग्रेजों ने अप्पा साहेब का अपमान किया और संधि करने के लिए विवश किया तो भेस बदलकर उन्होने जनजातीय समुदाय को एकजुट किया और अंग्रेजों से लोहा लिया था।

जिस 1000 साल पुराने किले से छत्रपति शिवाजी ने बढ़ाया ‘हिन्दवी साम्राज्य’, वहाँ होगी जानवरों की कुर्बानी: बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी अनुमति, अंदर हैं मुस्लिमों के 100+ अतिक्रमण

बॉम्बे हाई कोर्ट ने कोल्हापुर जिले के विशालगढ़ किले में कुर्बानी देने की अनुमति दे दी है। यह कुर्बानी विवादित दरगाह पर दी जाएगी। यह फैसला बकरीद और इस दरगाह पर होने वालेउर्स के मद्देनजर दिया गया है। इस किले के अंदर हिन्दू लगातार मुस्लिम अतिक्रमण की बात दोहराते रहे हैं।

मंगलवार (03 जून, 2025) को कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस डॉ नीला गोखले और फिरदोस पूनीवाला की बेंच ने यह आदेश दिया। बेंच ने कहा, “ध्यान दिया जाए कि 14 जून 2024 को जारी एक आदेश में दरगाह के पास ‘एक बंद और निजी क्षेत्र’ में पशुओं और पक्षियों की कुर्बानी देने की अनुमति दी गई थी। न कि किसी ‘खुले या सार्वजनिक स्थान’ पर।”

कोर्ट ने कहा कि पिछले साल की तरह का आदेश इस साल भी लागू होगा। इस साल भी 07 जून को बकरीद के त्योहार और 08 जून से 12 जून तक उर्स पर किले के भीतर पशुओं की कुर्बानी दी जा सकेगी। कोर्ट ने कहा कि किले के बाहर सार्वजनिक स्थान पर कुर्बानी नहीं होनी चाहिए।

दरगाह ने सरकार के आदेश को दी थी चुनौती

बता दें कि साल 2023 में विशालगढ़ के हजरत पीर मलिक रेहान मीरा साहेब दरगाह ट्रस्ट ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। ट्रस्ट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों पुरातत्व निदेशालय, कोल्हापुर पुलिस अधीक्षक और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा दरगाह परिसर में पशुओं की कुर्बानी पर लगाए गए प्रतिबंध को चुनौती दी थी।

प्रशासन ने कहा था कि विशालगढ़ किला एक संरक्षित स्मारक है और महाराष्ट्र प्राचीन स्मारक और पुरातत्व अधिनियम 1962 के मुताबिक ऐसे स्थलों पर खाना पकाना और खाना परोसना भी प्रतिबंधित है। प्रशासन ने जानवरों की कुर्बानी को इस नियम का उल्लंघन बताया था।

वहीं मुस्लिम इसका विरोध कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि कुर्बानी का स्थान दरगाह परिसर के अंदर नहीं, बल्कि उससे लगभग 1.4 किलोमीटर दूर एक निजी भूमि पर है।

छत्रपति शिवाजी महाराज का है किला, बनाई अवैध दरगाह

विशालगढ़ किला लगभग 1000 साल पुराना है। यह किला छत्रपति शिवाजी महाराज के वीरतापूर्ण जीवन का एक अभिन्न हिस्सा है। किले में मुस्लिम समुदाय ने अवैध अतिक्रमण कर लिए हैं। वहीं किले के भीतर मंदिर जीर्ण शीर्ण अवस्था में छोड़ दिया गया है। वर्तमान में यहाँ 20 से 24 हिन्दू मंदिर है, लेकिन यह काफी खराब हालत में हैं।

आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, विशालगढ़ किले के भीतर 156 ऐसे ढाँचे हैं, जिनको अवैध रूप से बनाया गया है। इनमें से 100 से अधिक मुस्लिम समुदाय के हैं। यहाँ लोहे की शीट लगाकर अतिक्रमण किया गया है। 

जिस गाँव में हुई कॉन्स्टेबल सौरभ देशवाल की हत्या, वहाँ की 90% आबादी मुस्लिम: अब घरों पर Opindia को लटके मिले ताले, कादिर गैंग को बचाने के लिए कह रहे- पुलिस ने ही मारी सिर में गोली

“यहाँ किसी ने गोली नहीं चलाई। वह (सिपाही सौरभ देशवाल) पुलिस की गोली से मरा है और पुलिस अब हमें परेशान कर रही है। हम क्या तुम्हें बदमाश लगते हैं?” ये शब्द हैं उस गाँव के मुस्लिमों के, जहाँ हिस्ट्रीशीटर कादिर को पकड़ने गई SOG के सिपाही सौरभ देशवाल की गुंडों ने घेरकर हत्या की थी।

यह घटना 25 मई, 2025 को गाजियाबाद के नाहल गाँव में हुई थी। ऑपइंडिया इस घटना के बाद 28 मई, 2025 को इस नाहल गाँव पहुँची। यहाँ हमें कादिर के कुछ पड़ोसी मिले, जिनसे बातचीत हुई। कादिर की चार मंजिला कोठी से करीब 300 मीटर की दूरी में सभी मकानों पर ताले लगे हुए हैं।

यहाँ रहने वाले लोग अपने-अपने रिश्तेदारों या फिर जान पहचान वालों के यहाँ जा चुके हैं। भले ही कादिर के कुछ पड़ोसी हमसे पुलिस प्रशासन की कार्रवाई में मदद करने की बात कैमरे पर कर रहे थे। लेकिन हकीकत यह है कि पूरे बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ है।

कादिर की कोठी से करीब 200 मीटर पहले हमारी मुलाकात यहाँ मौजूद मस्जिद के इमाम से हुई। घटना से खुद को अनजान बताते हुए इमाम मोहम्मद फकरूद्दीन ने बताया, “मैं बाहर का रहने वाला हूँ और यहाँ करीब डेढ़ वर्ष से मस्जिद में रहकर नमाज पढ़ाता हूँ लेकिन घटना के बाद से लोग मस्जिद नहीं आ रहे हैं।” इमाम ने कहा कि जो हुआ है गलत हुआ है।

नाहल गाँव की 90% आबादी मुस्लिम

ऑपइंडिया इसके बाद हिस्ट्रीशीटर कादिर के चार मंजिला कोठी के बाहर पहुँचा। हमें दिखा कि यहाँ भारी पुलिसबल तैनात है। कुछ पुलिसवाले आराम कर रहे थे तो कुछ पुलिस वाले गश्त कर रहे थे। कुछ कोठी के सामने कुर्सियों पर बैठे हुए थे।

इस बीच कोठी के सामने मिले एक बुजुर्ग फतेह मोहम्मद ने बताया कि वह बाजार में छोले भटूरे की दुकान लगाते हैं, लेकिन जब से यह घटना हुई है तब से यह दुकान बंद है। कादिर के बारे में पूछने पर बोले कि हम कादिर को नहीं जानते लेकिन इस घटना में हम किसी को दोषी नहीं मानते।

फ़तेह मोहम्मद ने कहा कि अब पुलिस परेशान कर रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस बेगुनाहों को घरों से उठा रही है। फ़तेह मोहम्मद ने बताया कि गाँव में 90% मुस्लिम एवं 10% गैर मुस्लिम आबादी हैं। यहीं हमारी टीम को टोपी लगाए एक मुस्लिम युवा मिला। वह बाइक पर बैठा हुआ था।

उसने भी फ़तेह मोहम्मद का दावा ही दोहराया। उसने कादिर को पहचानने से इनकार किया। ऑपइंडिया को यहीं पर इरफान नाम के बुजुर्ग मिले। उन्होंने बताया कि कादिर उनका भतीजा है और उसने सात दिन पहले ही जान से मारने की धमकी दी थी।

रिपोर्टर के सवाल से भड़का कादिर का पड़ोसी दुकानदार

ऑपइंडिया को कादिर का पड़ोसी दुकानदार भी मिला। उसने घटना के बारे में जानने से इनकार किया लेकिन पुलिस पर आरोप जड़ दिए। उसने दावा किया कि सौरभ देशवाल पुलिसकी गोली से मरा है। उसने कहा, “सौरभ पुलिस की गोली से मरा है हम क्या रात को गोली लेकर बैठे थे?”

उसने हमारी टीम से बदतमीजी भी की। दुकानदार ने सवालों से भड़कते हुए हमें धक्का दिया और हिंसक होने का प्रयास किया। वहीं इसके बाद हमने 15-20 लोगों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन अधिकांश लोग खुद को घटना से अंजान बताते हुए आरोपित कादिर के खिलाफ कुछ भी बोलने से बचते रहे।

सौरभ देशवाल के गाँव में पसरा सन्नाटा

नाहल, गाजियाबाद से निकलने के बाद ऑपइंडिया की टीम शामली के बधेव गाँव में पहुँची। यह सौरभ देशवाल का गाँव है। गाँव में चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है दोपहर के समय सुनसान पड़ी गाँव की गलियाँ सौरभ के बलिदान का शोक मनाते दिखीं।

गाँव का हर व्यक्ति इस हत्या से स्तब्ध था। यहाँ हम गाँव के बीचों बीच बने बने सौरभ देशवाल के घर पहुँचे। 3 मंजिला अधूरे से मकान के बरामदे में 10-15 लोग गमगीन बैठे हुए थे। उनके बीच एक पुराना सा कुर्ता पहने(जिस पर दाग लगे है) पिता उत्तम कुमार बैठे हुए थे।

उत्तम कुमार की आँखों में आँसू सूख चुके हैं। गहरे गम में डूबे पिता को देख लगता है कि उन्हें यकीन ही नहीं कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। पूछने पर कहते हैं वह बहुत बहादुर था। उन्हें योगी सरकार से न्याय उम्मीद है।

बगल में चारपाई पर बैठे सौरभ की बुआ के लड़के की आँखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा था। वह कहते हैं कि सौरभ बेहद मिलनसार और बहादुर था। सौरभ देशवाल के परिजनों ने बताया कि वह अपना समय गायों की सेवा में लगाते थे। यहीं बैठे एक और रिश्तेदार कादिर का हश्र विकास दुबे और अतीक अहमद जैसा चाहते हैं।

घर के अंदर बैठी सौरभ की माँ और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल था। सौरभ का खुद का परिवार बसने से पहले उजड़ गया। उनकी पत्नी बदहवास थीं। सौरभ का विवाह 2020 में ही हुआ था। उनकी पत्नी और माँ के गले में बात करने के लिए जान नहीं थी। ऑपइंडिया ने उनसे बात नहीं की।

सौरभ के घर से वापस आते हुए एक महिला ने कहा कि सभी आरोपितों का एनकाउंटर होना चाहिए और कादिर के घर पर बुलडोजर भी चलना चाहिए। आप ऑपइंडिया की यह ग्राउंड रिपोर्ट नीचे लगे लिंक पर देख सकते हैं।

गौरतलब है कि इस मामले में पुलिस कादिर, उसके भाई आदिल समेत कई अपराधियों को पकड़ चुकी है। सौरभ देशवाल के परिवार को ₹50 लाख दिए जाने की घोषणा की जा चुकी है। हालाँकि, उनका परिवार कहता है कि उन्हें उनका बेटा वापस चाहिए।

साथ में अनुराग मिश्रा

CNG-BS4-EV गाड़ियों को ही एंट्री, कृत्रिम बारिश, 70 लाख पौधे… ताकि दम न घोटे दिल्ली की हवा: BJP सरकार का ‘मास्टरप्लान’, CM रेखा गुप्ता बोलीं- 5 जून से चलेगा ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान

विश्व पर्यावरण दिवस से दो दिन पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार (3 जून 2025) को दिल्ली के प्रदूषण को खत्म करने के लिहाज से एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान-2025 जारी किया है। इसके तहत दिल्ली में 5 जून 2025 से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ से अभियान चलाया जाएगा। इसमें साल भर में पूरी दिल्ली में 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।

मीडिया ब्रीफिंग में CM रेखा ने कहा, “पर्यावरण दिवस नजदीक है। दिल्ली में वायु प्रदूषण हम सबसे जुड़ा हुए विषय है। एयर पॉल्यूशन का दंश वर्षों से हम सबको डस रहा है। दिल्ली वासियों को अनेक प्रकार की तकलीफें कई वर्षों से झेलनी पड़ रही हैं। हम सबका एक ही सपना है- क्लीन दिल्ली, ग्रीन दिल्ली, हेल्दी दिल्ली।”

सीएम ने आगे कहा, ” हमारे पर्यावरण विभाग और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अन्य विभागों के साथ मिलकर एयर पॉल्यूशन मिटिगेशन प्लान-2025 तैयार किया है।”

गौरतलब है कि 31 मई 2025 को सीएम रेखा गुप्ता ने अपनी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर वर्क बुक जारी की थी। इसमें अब तक स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़कें, रोशनी और गरीबों की भलाई से जुड़ी योजनाओं पर जो काम किया है उसकी जानकारी दी गई है।

यातायात पर विशेष ध्यान

मिटिगेशन प्लान के तहत दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए अलग-अलग पहलुओं पर काम किया जाएगा। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में ट्रैफिक जाम की समस्या सबसे प्रमुख है। इसके लिए 250 प्रमुख सड़कों को चिन्हित किया गया है।

इन सड़कों पर यातायात पुलिस और अन्य विभागों के साथ जाम की समस्या को हल करने के लिए योजना बन रही है। कुछ मुख्य चौराहों और जंक्शन्स पर ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम सुधारा जाएगा ताकि वाहनों की आवाजाही निर्बाधित रहे और प्रदूषण कम हो।

इसके अलावा मेट्रो स्टेशनों पर 2300 इलेक्ट्रिक ऑटो तैनात किए जाएँगे। ट्रांसपोर्ट सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए 200 नई इलेक्ट्रॉनिक बसें शुरू की जाएँगी। इसके साथ ही 1 नवंबर से BS-4 वाहनों, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही दिल्ली में प्रवेश मिलेगा। इसके अलावा प्रदूषण बढ़ाने वाले 16 हॉटस्पॉट को चिह्नित किया जाएगा।

इस योजना के तहत जिन जगहों पर 500 वर्ग मीटर से अधिक हो, उन्हें DPCC (दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति) के पोर्टल पर रेजिस्ट्रेशन भी करवाना पड़ेगा।

हरियाली बढ़ाने का लक्ष्य

सीएम रेखा का कहना है कि हरियाली को बढ़ाने से ही प्रदूषण की समस्या का हल निकल सकता है। इसके लिए ही 5 जून से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को शुरू किया जाएगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभियान है, जिसके जरिए माँओं के सम्मान को पर्यावरण जिम्मेदारियों के सात जोड़ना ही मुख्य ध्येय है। इसके तहत पूरी दिल्ली में साल भर में 70 लाख पेड़ लगाए जाएँगे।

वायु की गुणवत्ता को परखने के लिए 6 नए एयर मॉनिटरिंग स्टेशन बनाए जाएँगे। साथ ही 4 वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट्स का निर्माण किया जाएगा। ग्रीन एनर्जी के बुनियादी ढाँचें को मजबूत करने के लिए 18,000 पब्लिक और सेमी-पब्लिक EV चार्जिंग स्टेशन तैयार होंगे।

इन सबके साथ-साथ दिल्ली को नवाचार में आगे बढ़ाने के लिए भी मिटिगेशन प्लान में बिंदु शामिल किए गए हैं। इसके तहत दिल्ली सरकार IIT कानपुर का साथ कृत्रिम बारिश करवाने के लिए क्लाउड सीडिंग का MOU करेगी। प्रदूषण की समस्या खत्म करने के लिए स्टार्टअप के जरिए युवा विचारों को आमंत्रित किया जाएगा। साथ ही प्रदूषण के अलग-अलग पहलुओं पर वैज्ञानिक संस्थानों के साथ मिलकर शोध किया जाएगा।

वायु प्रदूषण कम करने के लिहाज से मिटिगेशन प्लान में नई मशीनों को लगाने का भी प्रावधान शामिल किया गया है। इसके तहत 140 एंटी-स्मॉग गन, 1000 वाटर स्प्रिंकलर और सड़कों की सफाई के लिए 70 नई क्लीनिंग मशीनें आएँगी। 3000 वर्ग मीटर से बड़ी वाणिज्यिक इमारतों के लिए एंटी स्मॉग-गन को अनिवार्य किया जाएगा।

BSF ने बॉर्डर पर 3 साल में पकड़े 5000 घुसपैठिए, वापस भी भेजा: रिपोर्ट में बताया- पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा गिरफ्तारी

भारत में लगातार बांग्लादेशी घुसपैठियों को पहचान कर वापस भेजने की प्रक्रिया जारी है। देश के अलग-अलग हिस्सों से घुसपैठिए पकड़ कर ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ में वापस भेजे जा रहे हैं। इसी बीच सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने बताया है कि उन्होंने पिछले तीन सालों से लगातार 5,000 घुसपैठिए सीमा पर पकड़े हैं। यह चोरी-छिपे भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे।

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, BSF के अधिकारियों ने बताया कि 2023 में 2406 लोगों को पकड़ा गया और वापस भेजा गया। अगले साल 2024 में यह संख्या थोड़ी बढ़ी और 2425 लोगों को वापस भेजा गया। वहीं मई 2025 तक 557 ऐसे लोगों को पकड़ कर वापस भेजा जा चुका है।

रिपोर्ट बताती है कि BSF ने अधिकांश घुसपैठिए पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों में पकड़े हैं। इसमें भी सबसे अधिक घुसपैठ पश्चिम बंगाल में दर्ज की गई है। यहाँ पिछले 3 सालों में 2688 लोगों को पकड़ा गया। इनमें से 90% पश्चिम बंगाल के सीमाई इलाकों में पकड़े गए थे।

पश्चिम बंगाल के अलावा मिजोरम जैसे राज्यों में भी काफी घुसपैठ देखी गई। वहीं असम और त्रिपुरा में ऐसे मामले कम मिले। हालाँकि, बीते दिनों में घुसपैठिए त्रिपुरा से भी अंदर आने का प्रयास कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, त्रिपुरा में पिछले तीन सालों में घुसपैठ की कोशिशों की संख्या 771 रही।

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों के बड़ी संख्या में आने का मुद्दा गृह मंत्री अमित शाह भी हाल ही में उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी घुसपैठियों को TMC सरकार का आशीर्वाद मिला हुआ है। उन्होंने कहा था कि CM ममता बनर्जी ने घुसपैठियों के लिए सीमाएँ खोल हैं।

ऑपरेशन पुश-बैक भी जारी

जहाँ BSF ने बताया है कि वह सीमा पर पकड़ घुसपैठियों को वापस भेज रही है, वहीं इसी दौरान ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ भी चल रहा है। इसके तहत अब तक 2000 अवैध घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश भेजा जा चुका है। इसके अलावा देश के अलग-अलग जगहों पर छुपकर रह रहे लगभग 2000 घुसपैठिए अब सामने से वतन वापसी के लिए तैयार हो गए हैं।

सुरक्षा एजेंसियाँ अब घुसपैठियों की जानकारी बॉयोमेट्रिक के जरिए भी सहेज रही है। इसे राष्ट्रीय डेटाबेस से भी जोड़ा जाएगा। इससे दोबारा देश में घुसपैठियों के घुसने पर जानकारी निकालना और कार्रवाई करना आसान हो जाएगा।

ऑपरेशन पुश-बैक क्या है?

‘ऑपरेशन पुश-बैक’ अप्रैल 2025 से चल रहा है। ये भारत सरकार की एक नई रणनीति है, जिसका उद्देश्य अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं से त्वरित रूप से निपटना है। ये वे लोग हैं जो कई वर्षों से अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं। 

इस ऑपरेशन के तहत अब पुलिस को सौंपना, FIR दर्ज करना, अदालत में पेश करना, मुकदमा चलाना और फिर निर्वासन प्रोटोकॉल की लंबी प्रक्रिया से भारत सरकार ने किनारा कर लिया है।

भारत के गृह मंत्रालय (MHA) ने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं की पहचान और राष्ट्रीयता की पुष्टि के लिए 30 दिन की समय सीमा तय की है। इसके बाद भारतीय सुरक्षाबल घुसपैठियों को तुरंत सीमा पार बांग्लादेश की ओर धकेल रहे हैं।

‘उसे बाहर निकाला, बांग्लादेश भेज दिया’: अब ‘ऑपरेशन पुश-बैक’ पर छलका कपिल सिब्बल का दर्द, सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बोले- हम उसे वापस नहीं बुला सकते; जानिए क्या है मामला

उसे (बांग्लादेशी महिला को) बाहर निकाल दिया। उसे बांग्लादेश भेज दिया गया।

यह दलील कपिल सिब्बल ने 2 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा, नाम की एक बांग्लादेशी महिला के पक्ष में दिया। इस महिला को असम पुलिस ने उसके मुल्क वापस भेज दिया है। उसके बेटे अनच अली (Iunuch Ali) ने इसे चुनौती दी है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल की इस दलील के जवाब में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा, “यदि वह (मोनोवरा बेवा) पहले से ही देश में नहीं है तो हम उसे वापस नहीं बुला सकते।” इस महिला की पैरवी करते हुए सिब्बल ने ‘ऑपरेशन पुशबैक’ की वैधता पर भी सवाल उठाए।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब देश विरोधी या हिंदू-विरोधी मामले पर कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े दिखे हों। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में मस्जिद की पैरवी हो, वक्फ का मामला हो या आरजी कर अस्पताल में ट्रेनी डॉक्टर के रेप केस और हत्या के मामले में आरोपित को बचाने का, हिंदू- विरोधी एजेंडे को भुनाने में कोर्ट के सामने काला कोट पहने कपिल सिब्बल का चेहरा रेडिमेड तरीके से उठकर सामने आ जाता है।

इसी तरह सोमवार (2 जून 2025) को भी सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा के बेटे अनच अली की याचिका के लिए कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े दिखे। अनच ने याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी माँ को जबरन बांग्लादेश भेज दिया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया है।

कोर्ट से सिब्बल ने कहा कि महिला मोनोवरा बेवा को धुबरी पुलिस ने उठाया और जबरन बांग्लादेश भेज दिया। याचिका पर जस्टिस संजय करोल और सतीश चंद्र शर्मा सुनवाई कर रहे थे।

सिब्बल ने कोर्ट से सवाल किया कि धुबरी एसपी किस आधार पर किसी व्यक्ति को बांग्लादेशी नागरिक घोषित कर सकते हैं? क्या महिला को हिरासत में लेने के बाद किसी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया? क्या कोर्ट इस पर भरोसा कर सकती है?

सिब्बल यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनच को ये तक नहीं पता है कि उसकी माँ भारत में है भी या बांग्लादेश भेज दी गई। सरकार को अनच की माँ की मौजूदा स्थिति के बारे में बताना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका के तहत केंद्र सरकार को नोटिस जारी की।

अनच अली का ये भी कहना है कि ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ उसकी माँ की याचिका 2017 से अब तक सुप्रीम कोर्ट में अब तक लंबित है।

क्या था लंबित मामला

26 साल के अनच अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसका दावा है कि उसकी माँ मोनोवरा बेवा को असम पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही देश से रातों रात लोगों को बांग्लादेश भेज दिया जा रहा है।

बता दें कि मोनोवरा बेवा को 17 मार्च 2016 को धुबरी फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2017 के आदेश में भी ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद बेवा ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी। तब से अब तक ये मामला लंबित है।

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में ये आदेश दिया था कि विदेशी नागरिकों को हमेशा के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता। या तो उन्हें डिपोर्ट किया जाए या जमानत पर रिहा कर दिया जाए।

हालाँकि निर्वासन तभी संभव है जब वह देश अपने नागरिक को स्वीकार करे। इस फैसले के आधार पर मोनोवरा को दिसंबर 2019 में हिरासत से रिहा कर दिया गया।

फिर सामने आए कपिल सिब्बल

पहलगाम हमलों के बाद अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को वापस खदेड़ने के लिए अनौपचारिक रूप से शुरू किए गए ऑपरेशन पुश-बैक की प्रक्रिया तेज कर दी गई। इसके तहत 24 मई को मोनोवरा को फिर से हिरासत में लिया गया।

इसके बाद बेवा के बेटे अनच अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की कि मोनेवरा की हिरासत गैर कानूनी है।

सिब्बल ने ऑपरेशन पुशबैक पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी घुसपैठियों के वापस भेजे जाने की ये प्रक्रिया कानूनी रूप से मान्य नहीं है। कानूनी तौर पर सिर्फ डिपोर्टेशन यानी निर्वासन ही सही मानी जा सकती है।

अनच का कहना है कि विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार करके उन्हें बिना किसी सत्यापन और दूसरे देश की मंजूरी के प्रशासन द्वारा वहाँ छोड़ देना गैर कानूनी है। किसी भी तरह से मान्य नहीं है।

कपिल सिब्बल यूँ ही काला कोट नहीं पहनते बल्कि जहाँ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को हवा मिल रही हो, वहाँ पहुँचते हैं। उनका नाम नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हुए 2020 दिल्ली दंगों के मामले में आरोपी उमर खालिद की पैरवी में भी खूब उछला।

इसके अलावा गैंगस्टर से राजनेता बने अतीक अहमद के बेटे असद अहमद की पुलिस मुठभेड़ में मौत पर कपिल सिब्बल ने असद के पक्ष में सहानुभूति जताई। इसके कारण विवाद को भी हवा मिली।

कपिल सिब्बल, जो खुद को ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों का पैरोकार बताते आए हैं लेकिन अलग-अलग मसलों पर दिए गए उनके बयान शांति व्यवस्था को चरमराने के लिए काफी होते हैं।

‘मारेंगे 100 जूता, गिनेंगे 1’ पर अमल कर रहा भारत, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में 20 एयरबेस टारगेट करने की दी जानकारी: पाकिस्तान ने डोजियर में 28 फौजी अड्डे की तबाही कबूली

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के 20 नहीं बल्कि 28 ठिकानों को ध्वस्त किया था। ये खुलासा खुद पाकिस्तान ने अपने डोजियर में किया है।


पाकिस्तान ने अपने आधिकारिक डोजियर में माना है कि ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को जितना नुकसान हुआ है वो भारत द्वारा बताए गए नुकसान से कहीं अधिक था। पाकिस्तान ने भारतीय वायु सेना द्वारा मारे गए 8 अतिरिक्त लक्ष्यों की सूची भी दी है।

पाकिस्तान के ‘ऑपरेशन बनियान उन मार्सोस’ पर तैयार किए गए डोजियर के मानचित्रों में पेशावर, झंग, हैदराबाद (सिंध), गुजरात, पंजाब, गुजरांवाला, भवालनगर, अटक और छोर पर हुए हमलों को दर्शाया गया है। भारतीय वायु सेना और सैन्य संचालन महानिदेशक ने पिछले महीने के हमलों के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन जगहों पर हुए हमलों का खुलासा नहीं किया था।

पाकिस्तान के ये ठिकाने भी भारत ने किए थे ध्वस्त।
(भारत ने इन ठिकानों को किया ध्वस्त फोटो साभार- टीवी9)

हाल ही में हुए इस खुलासे से नई दिल्ली से सीजफायर के लिए इस्लामाबाद की अपील को समझा जा सकता है। इसके अलावा डोजियर से पाकिस्तान की कलई भी खुल रही है। पाकिस्तान ने भारतीय पक्ष को काफी नुकसान पहुँचाने का दावा किया था और भारतीय हमलों में उसे कोई नुकसान नहीं हुआ है, ये भी कहा था।

भारतीय सेना की प्रेस ब्रीफिंग में भारतीय जवाबी हमले के दायरे और उसकी व्यापकता को अच्छी तरह से समझाया जा सकता है। इस स्थिति को देखते हुए पाकिस्तान ने 8 अतिरिक्त लक्ष्यों की जानकारी दी है।

मैक्सार टेक्नोलॉजीज द्वारा उपलब्ध कराई गई सैटेलाइट तस्वीरों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढाँचे के खिलाफ भारत द्वारा किए गए सटीक हमलों से होने वाले विनाश को दिखाया था। इसमें मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा का प्रशिक्षण केंद्र और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय सहित नौ लक्ष्यों को निशाना बनाया गया था। मुजफ्फराबाद, कोटली, रावलकोट, चकस्वारी, भिंबर, नीलम घाटी, झेलम और चकवाल उन जगहों में शामिल थे, जिन पर ऑपरेशन के दौरान हमला किया गया था।

Pakistan (32)
(भारत ने इन ठिकानों को किया ध्वस्त फोटो साभार- टीवी9)

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, पाकिस्तान ने भारत के पश्चिमी हिस्से में रिहायशी इलाकों और सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। जबकि नई दिल्ली ने साफ कहा था कि उसने सिर्फ आतंकी ठिकानों पर हमला किया है।

पाकिस्तान पर जवाबी हमले में भारत ने 11 सैन्य ठिकानों पर हमला किया। नूर खान, रफीकी, मुरीद, सुक्कुर, सियालकोट, पसरूर, चुनियन, सरगोधा, स्कारू, भोलारी और जैकबाबाद उन ग्यारह हवाई ठिकानों में शामिल थे जिन्हें निशाना बनाया गया। तीन दिनों तक चली यह तनातनी तब खत्म हुई जब पाकिस्तान ने भारत से सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाया।

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ एक रेडलाइन खींच दी है। भारत में अब कोई भी आतंकवादी हमला युद्ध अपराध माना जाएगा, जिसके लिए कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।

हाल में हुए संघर्ष के दौरान भारतीय सैन्य क्षमताओं का स्पष्ट रूप से प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा, जैसा कि पाकिस्तान के डोजियर से पता चलता है, भारत ने जितना स्वीकार किया है, उससे कहीं ज़्यादा जोरदार और दूर तक हमला किया।

भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर बदले की कार्रवाई की थी। पहलगाम में 26 मासूम लोगों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। इसका जवाब देते हुए भारत ने पाकिस्तान और पीओके में मौजूद 9 आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया।

जेल में मिल रही जान से मारने की धमकी, पीने को साफ़ पानी तक नहीं: बंगाल पुलिस की कैद में बंद शर्मिष्ठा ने माँगी सुरक्षा, कलकत्ता हाई कोर्ट ने जमानत देने से किया है इनकार

मुस्लिमों की मजहबी भावनाएँ आहत करने के नाम पर गिरफ्तार इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर शर्मिष्ठा पनोली को जेल के भीतर धमकियाँ मिल रही हैं। जेल के भीतर ही लोग उसकी जान के लिए खतरा बने हुए हैं। यह बातें शर्मिष्ठा ने एक याचिका में कहीं हैं। इस बीच कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, शर्मिष्ठा की तरफ से अलीपुर (कोलकाता) की जिला अदालत में दायर एक याचिका में समस्याएँ बताई गईं थी। शर्मिष्ठा ने इस याचिका में कहा था कि उन्हें जेल के अंदर अन्य कैदियों से कई तरह की धमकियाँ मिल रही हैं। शर्मिष्ठा ने कहा था कि उन्हें अपनी सुरक्षा का डर सता रहा है।

शर्मिष्ठा को अलीपुर के महिला सुधार गृह में रखा गया है। उन्होंने याचिका में कहा कि इस महिला सुधार गृह में ना सही से साफ़-सफाई होती है ना ही यहाँ पीने का साफ़ पानी है। शर्मिष्ठा ने यह भी बताया कि उन्हें बीमारियाँ भी हैं और इस महिला सुधार गृह में उन्हें कोई भी सुविधा नहीं मिल रही है।

शर्मिष्ठा ने अलीपुर कोर्ट में याचिका दायर खुद को सुरक्षा दिए जाने की माँग की है। अलीपुर कोर्ट में इस पर अभी सुनवाई नहीं हुई है। इस बीच शर्मिष्ठा की जमानत याचिका को सोमवार (3 जून, 2025) को कलकत्ता हाई कोर्ट ने सुना। कलकत्ता हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा को अंतरिम तौर पर जमानत देने से इनकार कर दिया।

हाई कोर्ट ने शर्मिष्ठा के वीडियो ने लोगों की भावनाएँ आहत की हैं। हाई कोर्ट ने राहत माँगने पर यह भी कहा कि अगर शर्मिष्ठा को जेल में दो दिन रहना पड़ेगा तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा। कोर्ट ने इस दौरान बोलने की आजादी को लेकर टिप्पणियाँ की।

वहीं इस दौरान पश्चिम बंगाल सरकार ने शर्मिष्ठा को राहत देने का पुरजोर विरोध किया और कहा कि उन्हें यह वीडियो बनाने से पहले सोचना चाहिए था। पश्चिम बंगाल सरकार ने यह भी प्रयास किया कि यह मामला कलकत्ता हाई कोर्ट में अब छुट्टियों के बाद सुना जाए। इस मामले की सुनवाई अब गुरुवार (5 जून, 2025) को है।

शर्मिष्ठा को शुक्रवार (30 मई, 2025) को गिरफ्तार किया था। उसे पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुग्राम से गिरफ्तार किया था। उसके खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों ने इससे पहले अभियान चलाया था।