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5 दिन में ही डोनाल्ड ट्रंप ने लिया U टर्न, भारत-पाकिस्तान के बीच सीजफायर कराने के दावे से पीछे हटे: अमेरिका का ‘जीरो टैरिफ’ वाला गुब्बारा S जयशंकर ने फोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम पर अपनी भूमिका को लेकर नया बयान देकर सबको चौंका दिया है। पहले उन्होंने दावा किया था कि अमेरिका की मध्यस्थता से 10 मई 2025 को भारत-पाकिस्तान में युद्धविराम हुआ, लेकिन अब वह इससे पलट गए हैं। एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा, “मैं ये नहीं कह रहा कि मैंने मध्यस्थता की, लेकिन मैंने भारत-पाकिस्तान के बीच खतरनाक तनाव को कम करने में मदद की।”

ट्रंप ने पहले ट्वीट कर कहा था कि वह दोनों देशों की समझदारी और बुद्धिमत्ता से खुश हैं, जिन्होंने पूर्ण युद्धविराम पर सहमति जताई। हालाँकि, भारत ने ट्रंप के दावे को सिरे से खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच सैन्य तनाव पर बात हुई, लेकिन ट्रेड का कोई जिक्र नहीं था। ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने दोनों देशों को ट्रेड में मदद की पेशकश की, जिसके बाद युद्धविराम हुआ।

जयशंकर ने ट्रंप के ‘जीरो टैरिफ’ वाले दावे को भी किया खारिज

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर स्थिति साफ की। उन्होंने कहा, “व्यापार वार्ता चल रही है, लेकिन अभी कुछ तय नहीं हुआ। कोई भी सौदा दोनों देशों के लिए फायदेमंद होना चाहिए।”

जयशंकर ने कश्मीर मुद्दे पर भारत का रुख दोहराया कि यह द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे देश का दखल बर्दाश्त नहीं होगा। ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत ने आतंकी ढाँचे को नष्ट किया और पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुँचाया। उन्होंने साफ किया कि पाकिस्तान ने भारत की सलाह को नजरअंदाज कर हमला किया, जिसका भारत ने मुँहतोड़ जवाब दिया।

निलंबित रहेगा सिंधु जल समझौता, PoK पर होगी बात

जयशंकर ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को आतंकियों की सूची सौंपनी होगी और उनके बुनियादी ढाँचे को खत्म करना होगा। साथ ही, सिंधु जल समझौता तब तक निलंबित रहेगा, जब तक सीमा पार आतंकवाद बंद नहीं होता। कश्मीर पर भारत का रुख साफ है कि अब केवल पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) की वापसी पर बात होगी।

जयशंकर ने युद्धविराम पर कहा कि यह स्पष्ट है कि गोलीबारी बंद करने की माँग पाकिस्तान की थी, क्योंकि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में अपने लक्ष्य हासिल कर लिए थे।

भाड़ में जाओ ट्रंप… बीत गए वे दिन जब दुनिया को नचाता था अमेरिका, ‘नया भारत’ किसी के दबाव में नहीं करता समझौते: अपने निर्णयों से पाकिस्तान को लाता है घुटनों पर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावा कर रहे हैं कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच गोलीबारी रुकवाने का श्रेय उन्हें मिलना चाहिए। लेकिन उनका यह दावा पूरी तरह गलत और आत्ममुग्धता से भरा है। भारत ने साफ कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर और उससे जुड़े फैसले पूरी तरह उसके अपने थे, न कि अमेरिका की मध्यस्थता से। भारत ने यह भी बताया कि कोई औपचारिक युद्धविराम हुआ ही नहीं। ऑपरेशन को रोकना भारत का रणनीतिक फैसला था, जो उसकी शर्तों पर लिया गया। अगर पाकिस्तान कोई गलती करता है, तो यह समझौता तुरंत खत्म भी हो सकता है।

भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों (DGMO) के बीच पहले से बातचीत चल रही थी, और उसी के तहत यह कदम उठाया गया। ऐसे में ट्रंप का दावा कि उन्होंने गोलीबारी रुकवाई, सरासर गलत है। भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और स्वतंत्र नीति के आधार पर यह फैसला लिया, न कि अमेरिकी दबाव में।

ट्रंप ने परमाणु युद्ध रोकने का किया फर्जी दावा, भारत ने किया खारिज

ट्रंप बार-बार कह रहे हैं कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान को युद्ध से रोका और एक संभावित परमाणु संघर्ष टाल दिया। अपने बयानों में वह खुद को शांति का ऐसा मसीहा बताते हैं, जिसने अपने शांतिपूर्ण नेतृत्व से एशियाई देशों को राह दिखाई और दुनिया को परमाणु युद्ध बचा लिया। लेकिन यह दावा न सिर्फ बढ़ा-चढ़ाकर किया गया, बल्कि हकीकत से कोसों दूर है।

सऊदी अरब में एक कार्यक्रम में ट्रंप ने फिर यही दावा दोहराया। उन्होंने कहा कि उनके व्यापारिक प्रभाव और शर्तों की वजह से दोनों देश समझौते के लिए तैयार हुए। उनके स्टाफ ने तालियाँ बजाकर और सिर हिलाकर उनका समर्थन किया। ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने तो यह भी कह दिया कि भारत और पाकिस्तान अब इतने अच्छे दोस्त हो गए हैं कि उन्हें जल्द डिनर करना चाहिए। यह बयान भी उनकी उसी पुरानी रणनीति का हिस्सा था, जिसमें वे खुद को वैश्विक संकटों का समाधानकर्ता देखते रहते हैं।

लेकिन भारतीय विदेश मंत्रालय ने 13 मई 2025 को ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान को शत्रुता छोड़ने और बातचीत की मेज पर आने के लिए भारत की सैन्य ताकत और सख्त रवैये ने मजबूर किया, न कि किसी विदेशी मध्यस्थता ने। उन्होंने साफ कहा कि भारत अपने फैसले खुद लेता है और अपने हितों के हिसाब से चलता है।

ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने व्यापार का इस्तेमाल करके भारत-पाकिस्तान को राजी किया, भी पूरी तरह निराधार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच हुई किसी भी बातचीत में व्यापार का जिक्र तक नहीं हुआ। उन्होंने दो टूक कहा कि यह दावा पूरी तरह निराधार है। उन्होंने कहा कि भारत ने अपने सभी फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीति के आधार पर लिए, न कि किसी व्यापारिक सौदेबाजी के तहत।

डोनाल्ड ट्रंप के परमाणु युद्ध रोकने के दावे को भी भारत ने खारिज कर दिया। जायसवाल ने उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “देखिए, हमारी तरफ से सैन्य कार्रवाई पूरी तरह से पारंपरिक दायरे में थी। कल रक्षा ब्रीफिंग में भी यह साफ तौर पर कहा गया था, जहाँ संबंधित सवालों पर चर्चा की गई थी। हालाँकि, ऐसी खबरें थीं कि पाकिस्तान की नेशनल कमांड अथॉरिटी 10 मई को बैठक करेगी, जो हमने देखी। लेकिन बाद में उन्होंने इसका खंडन किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने खुद सार्वजनिक रूप से किसी भी परमाणु पहलू से इनकार किया है।”

तो सवाल यह है कि ट्रंप यह दावा क्यों कर रहे हैं? क्या वे अपने MAGA समर्थकों को खुश करने के लिए खुद को दुनिया का उद्धारक दिखाना चाहते हैं? या उनके सहयोगी उन्हें गलत जानकारी देकर खुश रखना चाहते हैं? ट्रंप के बयान न सिर्फ गलत हैं, बल्कि भारत-पाकिस्तान जैसे जटिल संघर्ष को बेहद सरल और गलत तरीके से पेश करते हैं।

भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने इस संघर्ष की जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए ट्रंप ने इसे ऐसे पेश किया मानो यह उनके हस्तक्षेप से अचानक सुलझ गया हो, जो कि न तो कूटनीतिक रूप से सही है, न ही वास्तविकता के करीब है।

भारत अपने दुश्मन को जानता है, उसे कब और क्या निशाना बनाना है

ट्रंप के बयान कई वजहों से चिंता पैदा करते हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान को ऐसे दो बेवकूफ देशों की तरह दिखाने की कोशिश की, जो बिना वजह लड़ रहे हैं। यह न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि इस क्षेत्र के संघर्ष की वास्तविक ऐतिहासिक और राजनीतिक जटिलताओं को भी नजरअंदाज करता है।

हैरानी की बात है कि अगर कोई देश बिना ठोस कारण के युद्ध, बमबारी, प्रतिबंध और धमकियों से दुनिया में तनाव बढ़ाता रहा है, तो वह अमेरिका खुद है, खासकर ट्रंप के पिछले कार्यकाल में।

भले ही ट्रंप ने शांति की बातें की हों और व्यापार को प्राथमिकता देने का दावा किया हो, इससे उन्हें भारत की सैन्य रणनीति या कूटनीति को दिशा देने का कोई नैतिक या राजनीतिक अधिकार नहीं मिल जाता। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर और उससे जुड़े सभी निर्णय अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा प्राथमिकताओं के आधार पर लिए थे, न कि किसी बाहरी दबाव या मध्यस्थता के तहत।

भारत पिछले 75 वर्षों से पाकिस्तान के साथ जटिल और चुनौतीपूर्ण संबंधों को संभाल रहा है। इन दशकों में भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्ध लड़े हैं, कई दौर की बातचीत की है, कूटनीतिक प्रयास किए हैं और सीमित व्यापार भी किया है, और यह सब अमेरिका की वजह से नहीं, बल्कि उसके बावजूद किया है।

आज भारत एक सैन्य और रणनीतिक महाशक्ति बन चुका है। उसे ट्रंप और रुबियो जैसे नेताओं से यह सीखने की जरूरत नहीं कि पाकिस्तान से कैसे निपटना है। भारत अच्छे से जानता है कि उसका दुश्मन कौन है, उसे कब और कैसे निशाना बनाना है, और कब रुकना है।

भारत ने लगभग आठ दशकों तक इस पड़ोसी देश के साथ काम किया है। टकराव, संवाद और सामरिक संतुलन के जरिये। सच तो यह है कि पाकिस्तान को भारत से बेहतर कोई नहीं समझता, न अमेरिका, न उसके नेता।

ऑपरेशन सिंदूर का मकसद अपने लक्ष्य को सटीकता से भेदना और रणनीतिक जीत हासिल करना था। मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी आतंकी हमले को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। भारत ने पाकिस्तान की पुरानी ‘परमाणु धमकी’ की रणनीति को भी बेअसर कर दिया है।

भारत ने दुनिया को बता दिया कि अब पाकिस्तान यह बहाना नहीं बना सकता कि आतंकी संगठनों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है। हर आतंकी हमले के लिए न सिर्फ आतंकी संगठन, बल्कि पाकिस्तान सरकार और उसकी व्यवस्था भी जिम्मेदार होगी। यह भारत की नई रणनीतिक सोच और सख्त सुरक्षा नीति का हिस्सा है, जो निर्णायक कार्रवाई और स्पष्ट जवाबदेही पर आधारित है।

अगर ट्रंप वाकई स्थिति को समझते, तो उन्हें पता होता कि भारत अपनी जरूरत और रणनीति के हिसाब से पाकिस्तान में लक्ष्यों को निशाना बना सकता है। इसके लिए उसे वाशिंगटन या किसी बाहरी दबाव की जरूरत नहीं।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष की जटिलताओं को समझने का दिखावा करना, खासकर जब ट्रंप ‘व्यापार’ को एक लालच के तौर पर पेश करते हैं, यह पश्चिमी शक्तियों की उथली और अहंकारी मानसिकता को दर्शाता है। भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक फैसले पूरी तरह से उसकी स्वायत्तता, रणनीतिक समझ और राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं, न कि किसी विदेशी दबाव या मध्यस्थता से।

भारत-पाकिस्तान संघर्ष की जटिल गतिशीलता को समझने का केवल दिखावा करना, और यह मान लेना कि दोनों देश किसी बाहरी नेता के इशारे पर नाच सकते हैं। वह भी ‘व्यापार’ जैसे लालच के माध्यम से पश्चिमी शक्तियों की हल्की-फुलकी और घमंडी सोच को उजागर करता है।

व्यापार एक द्विपक्षीय प्रक्रिया है, न कि कोई परोपकारी कदम। भारत, जिसकी आबादी 1.4 अरब है, आज एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति है। अमेरिका भारत के साथ व्यापार इसलिए करता है क्योंकि इससे उसे आर्थिक रूप से लाभ होता है, न कि भारत पर किसी दबाव या एहसान के तहत।

ट्रंप का यह दावा कि उन्होंने व्यापार का लालच देकर भारत को सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए मजबूर किया, पूरी तरह हास्यास्पद है। ऑपरेशन सिंदूर भारत की एक सफल और निर्णायक कार्रवाई थी। इसके बाद जो भी समझौता हुआ, वह पाकिस्तान के अनुरोध पर और भारत की शर्तों पर हुआ, न कि किसी बाहरी दबाव या व्यापार के लिए।

दुनिया को नियंत्रित करने का भव्य भ्रम, एक खोखले दावे से दूसरे तक चलता हुआ।

यह वही डोनाल्ड ट्रंप हैं जिन्होंने कई बार बड़े दावे किए थे कि वह रूस-यूक्रेन युद्ध को एक ही दिन में खत्म कर देंगे। लेकिन अब उनके दोबारा पदभार संभाले करीब पाँच महीने हो चुके हैं, और युद्ध अभी भी पूरी ताकत से जारी है। उनके दावे एक बार फिर हकीकत से कोसों दूर साबित हुए हैं।

यह वही डोनाल्ड ट्रंप हैं जिन्होंने दावा किया था कि वे हमास को एक ही बार में सभी इज़रायली बंधकों को रिहा करने के लिए मजबूर कर देंगे, और यह भी कहा था कि हमास उनकी ताकत और श्रेष्ठता से काँप रहा है। लेकिन हकीकत यह है कि इज़रायल द्वारा ग़ाज़ा पर लगातार सैन्य हमलों, व्यापक तबाही और हर तरह के कूटनीतिक और सैन्य दबाव के बावजूद, कई बंधक अब भी हमास की हिरासत में हैं। ट्रंप के दावे एक बार फिर ज़मीनी सच्चाई से दूर और खोखले साबित हुए हैं।

यह वही डोनाल्ड ट्रंप हैं जिन्होंने बड़े-बड़े वादे किए थे। कि वे जेफरी एपस्टीन से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करेंगे, अमेरिकी अर्थव्यवस्था को तुरंत सुपर-तेज़ विकास के रास्ते पर ले जाएंगे, और एक जादुई छड़ी की तरह अवैध आव्रजन और देश में बढ़ते हिंसक अपराधों को रोक देंगे। लेकिन हकीकत यह है कि ऐसे मुद्दे बेहद जटिल होते हैं, और इनका समाधान किसी घमंडी राजनेता की सनक या दावे भर से नहीं होता। जमीनी समस्याएँ भाषणों या दिखावे से नहीं, ठोस नीति और गंभीर प्रयासों से हल होती हैं, जो अब तक देखने को नहीं मिले हैं।

जहाँ तक रूस-यूक्रेन युद्ध का सवाल है, यह तय करना पूरी तरह उन देशों के संबंधित नेताओं यूक्रेन के राष्ट्रपति और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का अधिकार है कि युद्ध को कैसे आगे बढ़ाना है, बातचीत कब और कैसे करनी है, तनाव को कैसे कम करना है और युद्ध को कैसे समाप्त करना है। अमेरिका चाहें तो मध्यस्थता की पेशकश कर सकता है या वार्ता में सहयोग दे सकता है, लेकिन व्लादिमीर पुतिन उसके आदेश मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। इस संघर्ष का समाधान केवल संबंधित पक्षों की राजनीतिक इच्छाशक्ति और कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है, न कि बाहरी दबाव या दावों से।

भारत की नीति या सैन्य रणनीति वाशिंगटन पर नहीं है निर्भर

अमेरिका और व्यापक रूप से पूरे पश्चिमी जगत को अक्सर दुनिया को उपदेश देने की आदत है। एक प्रकार का औपनिवेशिक हैंगओवर, जो उन्हें यह भ्रम देता है कि पूरी दुनिया, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण, अब भी उनकी आज्ञा का पालन करने के लिए बाध्य है, जैसे 1800 के दशक में हुआ करता था।

लेकिन भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है, जिसने आज़ादी के बाद से लगातार जटिल भू-राजनीतिक और सैन्य चुनौतियों का सामना करते हुए अपनी नीति और रणनीति स्वयं तय की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और भी अधिक मुखर और आत्मविश्वासी हुआ है, विशेष रूप से अपनी सामरिक क्षमताओं को लेकर।

भारतीय नौसेना आज हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बन चुकी है, चाहे वह सोमालिया के तटों पर समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना हो या बांग्लादेश के जल क्षेत्रों में प्रभाव बनाए रखना।

भारत क्षेत्रीय और वैश्विक मंच पर अपने हितों की रक्षा करने को तैयार है, बिना किसी बाहरी दबाव के। भारत अमेरिका के साथ दोस्ती और व्यापार का स्वागत करता है, लेकिन यह रिश्ता बराबरी और आपसी सम्मान पर आधारित होना चाहिए, न कि एकतरफा निर्देशों पर।

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर और उससे जुड़े फैसलों से साबित कर दिया कि वह अपनी सुरक्षा और रणनीति के मामले में पूरी तरह स्वतंत्र है। भारत-पाकिस्तान के रिश्तों को समझने में अमेरिका या उसके नेताओं की कोई जरूरत नहीं। भारत अपनी ताकत और समझ से हर चुनौती का सामना करने को तैयार है।

(यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में संघमित्रा ने लिखी है, इसका हिंदी अनुवाद विवेकानंद मिश्रा ने किया है)

पहलगाम आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तानी औरत ने बोला झूठ, हिन्दू महिला ने दिया जवाब: इस्लामी कट्टरपंथी दे रहे रेप-हत्या की धमकी, AIMIM प्रवक्ता भी दे रहा साथ

इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक हिंदू महिला को को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया है। महिला इंफ्लुएंसर ने पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सच बयान किया था। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए। इस्लामी कट्टरपंथियों ने शर्मिष्ठा को हत्या और रेप की धमकी दी। अब पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर यह वीडियो ट्रेंड कर रहा है।

दरअसल, शर्मिष्ठा ने एक वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड किया था। इसमें एक पाकिस्तानी महिला द्वारा पहलगाम आतंकी हमले में हिंदुओं के नरसंहार से इनकार करने पर प्रतिक्रिया दी गई थी। शर्मिष्ठा ने वीडियो में पाकिस्तान के खिलाफ गुस्सा दिखाया था।

वीडियो में एक पाकिस्तानी महिला का मजाक उड़ाते हुए शर्मिष्ठा ने कहा कि इस्लाम में जो जन्नत में ’72 हूर’ मिलने की अवधारणा है, वह असल में चकलाघर जैसी सोच है।

शर्मिष्ठा ने कहा कि पाकिस्तानी महिला को लगता है कि भारत ने बिना किसी कारण के युद्ध शुरू कर दिया है। उन्होंने पूछा कि क्या पाकिस्तानी महिला ने पहलगाम हमले और अतीत में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित अन्य आतंकी हमलों के बारे में सुना है। शर्मिष्ठा ने आगे पूछा कि क्या भारतीय सेना को इन आतंकी हमलों के बारे में कुछ नहीं करना चाहिए?

इस वीडियो में अपशब्द और अपमानजनक लहजे का इस्तेमाल किया गया था। हालाँकि, यह एक पाकिस्तानी नागरिक के प्रति प्रतिक्रिया और जिहादी आतंकवादियों का मजाक उड़ाने के लिए था। ऐसे आतंकी, जिनको काफिरों को मारने से खुशी मिलती है।

इस मामले में भारत के इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी पाकिस्तानियों का साथ दिया। उन्होंने वीडियो पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का समर्थन किया। इस वीडियो को पैगंबर के अपमान करने के दावे के साथ सोशल मीडिया पर शेयर किया गया। मुस्लिमों ने शर्मिष्ठा के सोशल मीडिया अकाउंट पर उनके खिलाफ अपशब्द और सर तन से जुदा की धमकियाँ देना शुरू कर दिया।

इसी क्रम में मोहम्मद शादाब खान नाम के एक व्यक्ति ने शर्मिष्ठा के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करने की धमकी दी। उसने कहा, “पैगंबर मुहम्मद (SAW) का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, कार्रवाई की जानी चाहिए! शर्मिष्ठा नाम की एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ने पाकिस्तान को निशाना बनाने की आड़ में हमारे प्यारे पैगंबर मुहम्मद (SAW) के खिलाफ एक घिनौनी और घृणित टिप्पणी की है।” उसने शर्मिष्ठा के खिलाफ पश्चिम बंगाल की ममता सरकार से कार्रवाई की माँग की।

इसी बीच झूठे मुस्लिम पीड़ित की कहानी सुनाकर इस्लाम का प्रोपेगेंडा फैलाने वाले पोर्टल ‘द ऑब्जर्वर पोस्ट’ ने कहा, “शर्मिष्ठा नामक एक ट्विटर यूजर ने पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ बार-बार घिनौनी कमेंट्स किए हैं। नेटिज़ेंस संबंधित BNS धाराओं के तहत उसके खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।”

अकबरुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई और इस्लामी कट्टरपंथियों को भड़काया। उसने भी हिंदू इंफ्लुएंसर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा, “यह शर्मिष्ठा है, जिसने हमारे पैगंबर (pbuh) के बारे में काफी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। इसे कोई भी मुसलमान बर्दाश्त नहीं करेगा।”

यह पूरा मामला साल 2022 में पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नुपुर शर्मा मामले की तरह है। उन्होंने पैगंबर मोहम्मद और उनकी शादी के बारे में कुछ कहा था। उनकी बातें एक टीवी शो की बहस के दौरान हुई थीं, जहाँ वे एक मुस्लिम नेता की अपमानजनक टिप्पणी का जवाब दे रही थीं।

लेकिन कुछ लोगों ने उनकी बातों का गलत अर्थ निकाल लिया और उन्हें गलत तरीके से पेश किया। AltNews के मोहम्मद जुबैर जैसे लोगों ने उनकी बातों की वीडियो क्लिप का एक छोटा-सा हिस्सा निकालकर ऑनलाइन वायरल कर दिया। इसके बाद नुपुर शर्मा और उनके परिवार को जान से मारने और बलात्कार की धमकियाँ मिलने लगी।

अब ऐसे ही शर्मिष्ठा को भी इस्लामवादियों से धमकियाँ मिल रही हैं। पहलगाम में पाकिस्तानी जिहादियों ने हिंदुओं की हत्या की थी और उनसे धर्म पूछकर गोली मार दी गई थी। लेकिन एक पाकिस्तानी महिला इस हिंदू नरसंहार और पाकिस्तान की भूमिका से इ्न्कार करती है, जिस पर एक हिंदू इंफ्लुएंसर ने गुस्से में जवाब दिया। लेकिन अंत में पीड़ित कौन होता है? मुसलमान नहीं, बल्कि वह हिंदू जो बोल रहा था। इस्लामी हिंदुओं के समर्थन में बोलने वालों को दबाने में माहिर हो गए हैं। वे हिंदुओं को ही परेशान करने का आरोप लगाते हैं और उन्हें धमकाते हैं।

सोशल मीडिया पर दी गई सबसे गंदी गालियों और धमकियों के स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए शर्मिष्ठा ने एक एक्स पोस्ट में लिखा, “मुझे खेद है… प्यारे भारतीयों, मुझे ट्रोल किया गया, हमला करने और रेप करने, हत्या करने और कट्टरपंथी पाकिस्तानी आतंकवादियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर करने के लिए सबक सिखाने की धमकी दी गई, जिन्होंने मेरे निर्दोष देशवासियों को भयानक पहलगाम आतंकी हमले में मार डाला। मैंने वो सब सहा, क्योंकि मेरे लिए मेरा देश पहले आता है।”

शर्मिष्ठा ने धमकियों के बीच बिना शर्त माफी माँगते हुए कहा कि उनका किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कहा, “मैं बिना शर्त माफी माँगती हूँ। मैंने जो कुछ भी लिखा, वह मेरी निजी भावनाएँ थीं और मैंने कभी जानबूझकर किसी को ठेस नहीं पहुँचाना चाहा। अगर किसी को ठेस पहुँची है तो मैं उसके लिए खेद प्रकट करती हूं। मैं सहयोग और समझदारी की अपेक्षा करती हूँ। अब से मैं अपने सार्वजनिक पोस्ट में सावधानी बरतूँगी। कृपया एक बार फिर मेरी माफी स्वीकार करें।”

बाँके बिहारी के नाम पर खरीदी जाएगी जमीन, योगी सरकार बनाएगी कॉरिडोर: सुप्रीम कोर्ट ने दी हरी झंडी, मंदिर के पैसे का भी होगा इस्तेमाल

उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में बाँके बिहारी मंदिर के आसपास कॉरिडोर बनाने को हरी झंडी मिल गई है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जमीन खरीदने को अनुमति दे दी है। इसके लिए मंदिर के आसपास जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। यह कॉरिडोर ₹500 करोड़ से बनाया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (15 मई, 2025) को एक फैसले में मंदिर के एफडी में जमा पैसे का इस्तेमाल जमीन खरीदने के लिए करने की अनुमति दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस पैसे का इस्तेमाल मंदिर के आसपास की 5 एकड़ जमीन खरीदने के लिए कर लिया जाए लेकिन जमीन को भगवान के नाम पर ही रजिस्टर करवाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “उत्तर प्रदेश सरकार ने कॉरिडोर विकसित करने के लिए ₹500 करोड़ से अधिक की खर्च करने का बीड़ा उठाया है। हालाँकि, वे जमीन खरीदने के लिए मंदिर का पैसा इस्तेमाल करना चाहते हैं, जिसे उच्च न्यायालय ने 08.11.2023 के आदेश द्वारा अस्वीकार कर दिया था।”

कोर्ट ने आगे कहा, “हम उत्तर प्रदेश को इस योजना को पूरी तरह से लागू करने की अनुमति देते हैं। बाँके बिहारी जी ट्रस्ट के पास देवता/मंदिर के नाम पर FD जमा है… राज्य सरकार को प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण के लिए सावधि जमा में पड़ी राशि का उपयोग करने की अनुमति है।”

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले को पलटा है। हाई कोर्ट ने कहा था कि जमीन खरीदने के लिए होने वाला खर्च उत्तर प्रदेश सरकार को स्वयं वहन करना होगा। वहीं योगी सरकार ने कुछ कानूनी समस्याओं के चलते इस खरीद के लिए मंदिर के पैसे का इस्तेमाल करने को कहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के दौरान इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ बाँके बिहारी मंदिर डेवलपमेंट बोर्ड के अलावा बाकी संस्थाएँ भी इस विकास के लिए जोर लगाएँ। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार काशी कॉरिडोर की तर्ज पर वृन्दावन में भी कॉरिडोर बनाना चाह रही है।

यह कॉरिडोर तीन हिस्सों में होगा और इसमें बाँके बिहारी मंदिर के अलावा भी कई मंदिर शामिल किए हैं। कॉरिडोर बनने के बाद यहाँ 10 हजार से अधिक श्रद्धालु एक साथ दर्शन कर सकेंगे। अभी हर बार वृन्दावन में बड़े मौकों पर भीड़ जमा हो जाती है।

200+ बंकर तबाह, 450 IED डिफ्यूज, 31 ढेर… 21 दिन में 1200 वर्ग किमी का नक्सल पहाड़ ध्वस्त: अमित शाह ने दोहराया 31 मार्च तक लाल टेरर का सफाया करने का संकल्प

छत्तीसगढ़ के कर्रेगुट्टा पहाड़ पर चलाया गया नक्सल विरोधी अभियान पूरा हो गया है। इस अभियान में गुफाओं में छुपे नक्सलियों को मार गिराया गया है। इन पर संयुक्त रूप से ₹1 करोड़ से अधिक का इनाम था। इस सफल ऑपरेशन की गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रशंसा की है। उन्होंने फिर स्पष्ट किया है कि 31 मार्च, 2026 तक देश नक्सलमुक्त हो जाएगा।

कर्रेगुट्टा पहाड़ पर यह ऑपरेशन 21 अप्रैल 2025 को चालू हुआ था। इस ऑपरेशन में सुरक्षाबलों ने 31 नक्सली मारे हैं। इनमें 16 महिला नक्सली और 15 पुरुष नक्सली शामिल हैं। इन नक्सलियों पर कुल मिलाकर ₹1 करोड़ 72 लाख का इनाम रखा गया था। इस ऑपरेशन के चलते 1200 स्क्वायर किलोमीटर का इलाका नक्सलमुक्त हो गया है।

नक्सलियों ने कर्रेगुट्टा पहाड़ पर 200 सुरंगों और बंकरों में अपना ठिकाना बना रखा था। वहाँ से यह अपनी कार्रवाइयों को अंजाम देते थे। सुरक्षाबलों ने यह सुरंगे भी तबाह कर दी। यहाँ उन्होंने 4 हथियार फैक्ट्रियाँ बना रखी थीं। उनको भी सुरक्षाबलों ने तहस नहस कर दिया है।

इस पहाड़ को नक्सलियों ने काफी और दुर्गम बना कर रखा था। उन्होंने यहाँ आसपास 400 से अधिक IED लगा रखीं थीं। इन्हें डिफ्यूज करके जवान आगे बढ़े। कुछ धमाके भी हुए, जिसके चलते 18 जवान घायल हुए। इन जवानों का इलाज चल रहा है।

यहाँ सुरक्षाबलों को 2 टन से अधिक विस्फोटक और बड़ी संख्या में हथियार भी बरामद हुए हैं। अब यहाँ से नक्सली भाग गए हैं। इस ऑपरेशन की प्रशंसा देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी की है। उन्होंने 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य दोहराया है।

उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “नक्सल मुक्त भारत के संकल्प में एक ऐतिहासिक सफलता प्राप्त करते हुए सुरक्षा बलों ने नक्सलवाद के विरुद्ध अब तक के सबसे बड़े ऑपरेशन में छत्तीसगढ़-तेलंगाना सीमा के कुर्रगुट्टालू पहाड़ (KGH) पर 31 नक्सलियों को मार गिराया। जिस पहाड़ पर कभी लाल आतंक का राज था, वहाँ आज शान से तिरंगा लहरा रहा है।”

उन्होंने बताया, “कुर्रगुट्टालू पहाड़ PLGA बटालियन 1, DKSZC, TSC & CRC जैसी बड़ी नक्सल संस्थाओं का Unified Headquarter था, जहाँ नक्सल ट्रेनिंग के साथ-साथ रणनीति और हथियार भी बनाए जाते थे।”

गृह मंत्री ने बताया है कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी सुरक्षाबल को जीवन का नुकसान नहीं हुआ। इस ऑपरेशन की प्रशंसा पीएम मोदी ने भी की है। उन्होंने लिखा, “सुरक्षा बलों की यह सफलता बताती है कि नक्सलवाद को जड़ से समाप्त करने की दिशा में हमारा अभियान सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। नक्सलवाद से प्रभावित क्षेत्रों में शांति की स्थापना के साथ उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

लगातार मारे जा रहे नक्सली

गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च, 2026 का समय सुरक्षाबलों को नक्सलियों का सफाया करने के लिए दिया है। इसे लिए लगातार ऑपरेशन हो रहे हैं। 2024 में सुरक्षाबलों ने 290 नक्सली मारे थे। वहीं 2025 में यह संख्या लगभग 130 पहुँच चुकी है। सैकड़ों की संख्या में नक्सली सरेंडर कर चुके हैं।

वर्ष 2025 में सुरक्षाबलों को नक्सलियों के खिलाफ लगातार बड़ी सफलताएँ हाथ लगी हैं। अब तक कई ऐसे ऑपरेशन छत्तीसगढ़ में हो चुके हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा नक्सली एक साथ मार गिराए गए हों। एक रिपोर्ट बताती है कि अब तक 2025 के भीतर छत्तीसगढ़ में 120 से अधिक नक्सली मार गिराए गए हैं।

2025 के पहले दिन से ही सुरक्षाबलों ने नक्सलियों पर शिकंजा कसना चालू कर दिया था। 2 जनवरी, 2025 को बीजापुर में हुई मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए थे। उसके बाद यह सिलसिला चलता ही रहा। 16 जनवरी को हुई एक मुठभेड़ में 18 नक्सली मार गिराए गए थे।

21 जनवरी, 2025 को गरियाबंद पहाड़ी पर हुई एक मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें नक्सलियों का टॉप कमांडर चलापति भी था। चलापति ₹1 करोड़ का इनामी नक्सली था। उसके साथ ही एक-दो और भी बड़े कमांडर मारे गए थे।

इस वर्ष की सबसे बड़ी मुठभेड़ 9 फरवरी को हुई थी। नेशनल पार्क क्षेत्र में हुए ऑपरेशन के दौरान यहाँ 31 नक्सली मार गिराए गए थे। यह ऑपरेशन महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुरक्षाबलों ने मिलकर किया था। यह हमला नक्सलियों की एक मीटिंग पर हुआ था। इसी तरह के बड़े ऑपरेशन के चलते नक्सलियों की अब कमर टूट गई है।

सुरक्षाबल अब उन इलाकों में घुस रहे हैं, जहाँ पहले नक्सली एकक्षत्र राज कर रहे थे। उन्हें ग्रामीणों से मिलने वाला समर्थन भी अब कम हो चुका है। दुर्गम इलाकों में चौकियाँ बनाने के चलते सुरक्षाबल उनकी हर एक मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं।

कुरान में शर्तों के साथ अनुमति, पर मुस्लिम मर्द स्वार्थ के लिए कर रहे एक से अधिक निकाह: इलाहाबाद हाई कोर्ट; जानिए एक से अधिक बीवी रखना कब ‘अपराध’, बताई UCC की जरूरत

मुस्लिम मर्द स्वार्थ में एक से अधिक निकाह कर रहे हैं। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि कुरान ने शर्तों के साथ एक से अधिक निकाह की अनुमति दी है। एक से अधिक निकाह तभी करना चाहिए जब मुस्लिम मर्द सभी बीवियों से एक सामान्य व्यवहार कर सके।

अदालत ने यह भी कहा कि इस्लाम की शुरुआत में एक से अधिक निकाह की इजाजत बेवा और अनाथों को सहारा देने के मकसद से दी गई थी। लेकिन अब मुस्लिम अपने ‘स्वार्थ’ के लिए इसका दुरुपयोग कर रहे हैं।

हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस्लामी कानून में भले एक से अधिक निकाह अपराध नहीं है, लेकिन शादीशुदा होने के बाद इस्लाम कबूल कर दूसरा निकाह करना अपराध की श्रेणी में आता है। इस दौरान अदालत ने समान नागरिक संहिता (UCC) की जरूरत पर भी जोर दिया।

क्या है मामला

ये टिप्पणी फुरकान, खुशनुमा और अख्तर अली की याचिका से जुड़ी हुई है। मुरादाबाद के मैनाठेर थाने में 2020 में याचियों ने दर्ज एक एफआईआर और सीजेएम कोर्ट द्वारा 8 नवंबर 2020 को चार्जशीट पर लिए गए संज्ञान और समन आदेश को रद्द करने की माँग की थी।

एफआईआर में फुरकान पर आरोप था कि उसने अपनी पहली शादी छुपाकर दूसरी शादी की और रेप किया। फुरकान के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार), 495 (दूसरी शादी छुपाकर विवाह), 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र), 504 (अपमान), और 506 (धमकी) के तहत केस दर्ज किया गया था।

फुरकान के वकील ने कोर्ट में ये दलील दी कि 1937 के शरीयत एक्ट और मुस्लिम कानून के अनुसार एक मुस्लिम पुरुष चार शादियाँ कर सकता है। ऐसे में उस पर धारा 494 लागू नहीं हो सकती। इसके लिए वकील ने 2015 के जाफर अब्बास रसूल मोहम्मद मर्चेंट बनाम गुजरात राज्य के फैसले का भी हवाला दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में राज्य सरकार ने कहा कि दूसरा विवाह हर स्थिति में वैध नहीं होता। अगर पहला विवाह हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत हुआ है और बाद में इस्लाम अपनाकर दूसरा निकाह किया गया हो तो ऐसे में ये अपराध होगा और व्यक्ति पर धारा 494 लागू होगी।

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने कहा कि यदि पहली शादी को अवैध घोषित किया गया है, तो इस अपराध के तहत मामला बन सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कोर्ट ने यह भी माना कि अगर पहली शादी विशेष विवाह अधिनियम, विदेशी विवाह अधिनियम, ईसाई विवाह अधिनियम, पारसी विवाह एवं तलाक अधिनियम, या हिंदू विवाह अधिनियम के तहत हुई थी और व्यक्ति इस्लाम में धर्म परिवर्तन कर इस्लामी कानून के अनुसार दूसरा निकाह करता है तब द्विविवाह का अपराध लागू होगा।

युद्ध में मिली थी अनुमति, अब हो रहा दुरुपयोग

पीठ ने कहा, “फैमिली कोर्ट को परिवार न्यायालय अधिनियम की धारा 7 के तहत मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार किए गए मुस्लिम निकाह की वैधता तय करने का अधिकार भी है।”

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पहले के समय में युद्ध के दौरान बेवा हुई महिलाओं और अनाथ बच्चों की देखरेख और रक्षा के लिए कुरान के तहत एक से अधिक निकाह को सशर्त अनुमति दी गई थी। हालाँकि अब इस प्रावधान का पुरुषों ने अपने ‘स्वार्थ के लिए दुरुपयोग’ करना शुरू कर दिया है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले सरला मुद्गल और लिली थॉमस मामले की सुनवाई करते हुए मुस्लिम पुरुषों के कई निकाह करने को लेकर कानूनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने वह स्थितियाँ बताई थीं, जिनके तहत किसी मुस्लिम के एक से ज्यादा निकाह करने पर कोई कानूनी कार्रवाई होगी या नहीं होगी।

फुरकान के मामले में जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले में दिए गए सुझाव से सहमति जताई। सरला और लिली के मामले में संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत बने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के प्रावधान को जोड़ा गया था।

बहुविवाह के साथ अपराध के दाँव पेंच

अपने आदेश में कोर्ट ने मुस्लिम आदमी द्वारा किए गए एक से अधिक निकाह की कानूनी स्थिति और भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 494 के कानूनी दाँव पेंच के बारे में बताया। यह भी निर्धारित किया कि किन परिस्थितियों में द्विविवाह को अपराध माना जा सकता है और कब नहीं।

कोर्ट ने कहा, “यदि कोई मुस्लिम पुरुष अपना पहला निकाह इस्लामी कानून के तहत करता है, तो दूसरा, तीसरा या चौथा निकाह अमान्य नहीं होगी। उस स्थिति में दूसरे निकाह के लिए आईपीसी की धारा 494 लागू नहीं होगी। हालाँकि इनमें वे मामले शामिल नहीं हैं जहाँ दूसरी शादी को शरीयत के अनुसार पारिवारिक न्यायालय अधिनियम की धारा 7 के तहत फैमिली कोर्ट या किसी सक्षम न्यायालय द्वारा बातील (अमान्य विवाह) घोषित किया गया हो।

यदि कोई व्यक्ति पहली शादी विशेष विवाह अधिनियम, 1954, विदेशी विवाह अधिनियम, 1969, ईसाई विवाह अधिनियम, 1872, पारसी विवाह और तलाक अधिनियम, 1936 और हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत करता है, और इस्लाम में धर्म परिवर्तन के बाद इस्लामी कानून के तहत दूसरा निकाह करता है, तो उसका दूसरा नितकाह अमान्य होगा, और इस तरह का निकाह आईपीसी की धारा 494 के तहत अपराध कहलाएगा।

सभी पत्नियों को मिले समान व्यवहार

हाईकोर्ट ने इस पर 18 पन्नों का फैसला दिया है। इसमें कहा गया है कि अगर कोई मुस्लिम पुरुष सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार नहीं कर सकता, तो उसे दूसरे निकाह का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।

कोर्ट ने इस मामले में पाया कि फुरकान और शिकायतकर्ता दोनों ही मुस्लिम हैं, इसलिए दूसरे निकाह को वैधता दी गई। हालाँकि कोर्ट ने आईपीसी की धारा 376, 495 और 120-बी के तहत अपराध नहीं होने की बात कही। कोर्ट ने शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी कर अगली सुनवाई 26 मई 2025 से शुरू होने वाले हफ्ते में तय की है।

भारत के खिलाफ फेल हुए हथियार तो चीन ने शुरू किया प्रोपेगेंडा, विदेशी मीडिया में करवाया PR: हर जगह छपवाया एक सा झूठ

भारत ने 7 मई, 2025 को पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए हमले किए। इसके बाद पाकिस्तानी फौज ने भारतीय सेना को निशाना बनाने का प्रयास किया। हालाँकि, वह बुरी तरह से फेल हुआ।

इस दौरान पाकिस्तानी फौज की नाकामी का बड़ा कारण चीन से लिए गए हथियार रहे। चाहे चीनी फाइटर जेट हों, एयर डिफेन्स सिस्टम हो या फिर उसके बनाए ड्रोन, सब बुरी तरह भारत के खिलाफ नाकाम हुए। अब इससे बिलबिलाया चीन प्रोपेगेंडा पर उतर आया है।

चीन अपने हथियारों की नाकामी को छुपाने के लिए अब ग्लोबल मीडिया पोर्टल्स में पीआर कर रहा है। इसमें यह पोर्टल्स उसका साथ भी दे रहे हैं। इन सभी जगह पर चीनी हथियारों की प्रशंसा करते हुए खबरें बनाई गई हैं।

रणभूमि में जो चीनी हथियार कबाड़ सिद्ध हुए हैं, उन्हें प्रभावी दिखाने का प्रयास चल रहा है। इसके लिए क्लिकबेट हेडलाइन्स का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस चीनी प्रोपेगेंडा को ब्लूमबर्ग, FRANCE24 और द गार्जियन जैसे विदेशी मीडिया संस्थान हवा दे रहे हैं।

अमेरिकी मीडिया संस्थान ने इस चीनी प्रोपेगेंडा को सबसे पहले हवा दी। उसने 13 मई, 2025 को एक खबर लिखी। इसकी हेडलाइन थी, ‘भारत-पाकिस्तान में तनाव के बाद बढ़ी चीनी हथियारों की विश्वसनीयता’ (Chinese Weapons Gain Credibility After India-Pakistan Conflict)।

इस खबर में चीन के हथियारों के विषय में बात की गई। खबर का मुख्य फोकस चीन के बनाए लड़ाकू विमान J-10C और PL-15 मिसाइल पर था। पूरी खबर में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने चीन में बने J-10C विमानों का उपयोग भारत के खिलाफ किया।

ब्लूमबर्ग ने यह भी दावा किया कि इस लड़ाकू विमान ने भारत के 5 फाइटर जेट गिरा दिए। इसके लिए उसने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और उसकी फौज के बयानों का सहारा लिया। उसने अपने स्तर पर कहीं यह नहीं पुष्टि की कि ऐसा कुछ हुआ भी है या नहीं।

सच्चाई यह है कि पाकिस्तान एक भी भारतीय विमान का मलबा तक नहीं दिखा पाया है। उसके रक्षा मंत्री को इस दावे के चलते सरेआम टीवी पर बेइज्जत होना पड़ा था। पाकिस्तानी फ़ौज ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मात्र दावे ही किए और कोई भी सबूत नहीं दिखाए।

ब्लूमबर्ग ने यह सूचनाएँ किनारे करते हुए चीनी विमान को विजेता घोषित कर दिया। उसने उस चीनी मिसाइल PL-15 की तारीफों के भी पुल बाँधे, जो भारत में आकर ताश के पत्ते की तरह गिर गई थी। यह मिसाइल होशियारपुर में बिना कुछ हिट किए पूरी बरामद हुई थी।

ब्लूमबर्ग ने इसे भी प्रभावित बताने की कोशिश की। इस खबर की लिखावट से ही समझ आ जाता है कि यह एक प्रोपेगेंडा आर्टिकल है। इसका सबूत भी ब्लूमबर्ग ने अपनी हरकतों से दे ही दिया। जब 13 मई, 2025 को यह खबर प्रकाशित की गई थी, तब इसके लेखकों के रूप में जोश शियाओ और यिआन ली का नाम दिख रहा था।

यह दोनों संभवतः चीनी प्रोपेगेंडा बढ़ाने वाले पत्रकार हैं। हवा-हवाई दावे को लेकर जब लोगों ने प्रश्न उठाए, तो ब्लूमबर्ग ने 14 मई, 2025 को चुपके से इसमें से एक नाम हटा कर एक भारतीय नाम सुधी रंजन सेन जोड़ दिया। ब्लूमबर्ग का यह कदम स्पष्ट तौर पर विश्वसनीयता बचाने का एक प्रयास नजर आया।

सिर्फ ब्लूमबर्ग ही नहीं बल्कि इस चीनी प्रोपेगेंडा की कतार में FRANCE24, द यूरेशियन टाइम्स और द गार्जियन और रायटर्स जैसे संस्थानों ने भी अपना-अपना हिस्सा दिया। FRANCE24 तो फ्रांस का सरकारी मीडिया संस्थान होने के बाद भी उसी देश में बने राफेल विमानों पर प्रश्न उठाते नजर आया।

FRANCE24 ने भी कुछ-कुछ वैसी ही बातें लिखीं जैसी ब्लूमबर्ग के लेख में लिखी गई थी। FRANCE24 ने भी चीन का J-10 को लेकर प्रोपेगेंडा आगे बढ़ाया। हालाँकि, उसने इस लेख में चीन के HQ-9 और HQ-16 एयर डिफेन्स सिस्टम की कमियाँ भी गिनाईं। यह एयर डिफेन्स सिस्टम भारतीय हमले को नहीं रोक सका था।

इसी तरह ब्रिटिश समाचार संस्थान द गार्जियन ने भी एक खबर छापी, इसमें तो हेडलाइन में ही चीन में बने J-10 और PL-15 मिसाइल को प्रभावी बता डाला। इसमें भी उन्हीं विशेषज्ञों की राय ली गई, जिनसे चीनी हथियारों के विषय में ब्लूमबर्ग या बाकी संस्थानों ने बात की थी।

इन सब लेखों में चीन के हथियारों के प्रभावी होने के दावे कहीं पाकिस्तानी तो कहीं चीन स्रोतों के आधार पर किए गए हैं। सभी मीडिया संस्थानों में एक ही तरह की टोन, भाषा और एक ही जैसे विचार रखने वाले दावे आना कोई सुखद संयोग वैसे भी नहीं हो सकता।

इसके अलावा चीन पर पहले भी पश्चिमी मीडिया संस्थानों में घुसपैठ करने के आरोप लगते ही रहे हैं। ऐसे में उनका एक साथ चीनी हथियारों को लेकर एक ही स्वर में हुआ-हुआ यही दिखाता है कि यह एक चीनी प्रोपेगेंडा है ना कि उसकी सैन्य क्षमताओं का ईमानदार आकलन।

चीनी हथियारों की सच्चाई और उनकी असल क्षमताएँ क्या हैं, यह भारतीय हमले में पहले ही स्पष्ट हो चुका है। पाकिस्तान, बीते कुछ वर्षों में चीन से लगभग ₹40 हजार करोड़ का सैन्य साजोसामान खरीदा है। इसमें ड्रोन से लेकर JF-17 जैसे विमान भी शामिल हैं। लेकिन भारतीय वायु सेना ने स्पष्ट किया है कि उसने पाकिस्तान के कुछ विमान उड़ाए हैं।

संभावना है कि यह JF-17 जैसे विमान रहे हों। चीन के ड्रोन भी भारत में नहीं घुस पाए और उन्हें मार गिराया गया। असल बात ये है कि भारत के हथियारों ने इस तनाव में अद्भुत प्रदर्शन दिखाया है जबकि चीनी हथियार कबाड़ साबित हुए हैं, इसका असर कुछ समय में अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में दिखेगा।

इस लड़ाई के दौरान चीनी हथियारों की हुई फजीहत उनकी बिक्री पर असर डालेगी। जबकि इस बात की बड़ी संभावना है कि भारतीय हथियार के लिए कई देश आगे आएँ। ऐसे में अपना आर्थिक नुकसान बचाने को भी चीन यह हरकत कर रहा है, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

‘क्या अदालत बताएगी हम कितने समय में लें फैसला’: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से पूछे 14 सवाल, गवर्नर-प्रेसीडेंट के लिए तय की थी डेडलाइन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि क्या कोर्ट राष्ट्रपति और राज्यपाल को ये बता सकता है कि उन्हें कितने समय में विधानसभा से पास हुए बिलों को मंजूरी देनी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 200, 201, 361, 143, 142, 145(3) और 131 से जुड़े सवाल पूछे हैं।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा था कि अगर राष्ट्रपति या राज्यपाल तय समय में बिल को मंजूरी नहीं देते, तो मान लिया जाएगा कि बिल पास हो गया। इसे ‘डीम्ड असेंट’ यानी ‘अपने-आप मंजूरी‘ कहते हैं।

ऐसे में राष्ट्रपति ने पूछा है कि जब राज्यपाल के पास कोई बिल आता है तो उनके पास क्या विकल्प होता है और क्या राज्यपाल मंत्री परिषद की सलाह मानने के लिए बाध्य है?

राष्ट्रपति का मानना है कि कोर्ट का ये फैसला उनके और राज्यपाल के संवैधानिक अधिकारों को कम करता है। इसलिए उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 143(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में राय माँगी है। अनुच्छेद 143(1) राष्ट्रपति को ये अधिकार देता है कि वो किसी बड़े कानूनी या सार्वजनिक महत्व के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट की राय ले सकते हैं। इसे प्रेसिडेंशियल रेफरेंस भी कहते हैं।

राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट को कुल 14 सवाल भेजे हैं। इन सवालों का जवाब देने के लिए सुप्रीम कोर्ट को कम से कम पाँच जजों की एक संवैधानिक पीठ बनानी होगी। ये सवाल बहुत अहम हैं क्योंकि ये राष्ट्रपति और राज्यपाल के अधिकारों, उनकी भूमिका और कोर्ट की शक्तियों से जुड़े हैं।

राष्ट्रपति ने ये भी कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 200 और 201, जो बिलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया बताते हैं, उनमें कोई ऐसा कोई नियम नहीं है जिसमें बिल को मंजूरी देने के लिए कोई समय-सीमा लिखी हो। न ही संविधान में ‘डीम्ड असेंट’ जैसी कोई बात कही गई है।

राष्ट्रपति ने पूछे हैं ये 14 अहम सवाल

  1. जब राज्यपाल के पास बिल आता है, तो उनके पास क्या-क्या विकल्प होते हैं?
  2. क्या बिल पर फैसला लेते वक्त राज्यपाल को मंत्रियों की सलाह माननी ही पड़ती है?
  3. क्या राज्यपाल का फैसला कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है?
  4. क्या संविधान का अनुच्छेद 361 कहता है कि राज्यपाल के फैसले को कोर्ट में नहीं ले जाया जा सकता?
  5. जब संविधान में कोई समय-सीमा नहीं है, तो क्या कोर्ट ये तय कर सकता है कि राज्यपाल को कब तक फैसला लेना है?
  6. क्या राष्ट्रपति का फैसला भी कोर्ट में चुनौती दी जा सकता है?
  7. क्या कोर्ट ये बता सकता है कि राष्ट्रपति को बिल पर कब और कैसे फैसला लेना है?
  8. अगर राज्यपाल कोई बिल राष्ट्रपति को भेजता है, तो क्या राष्ट्रपति को सुप्रीम कोर्ट से राय लेनी पड़ती है?
  9. क्या बिल के कानून बनने से पहले कोर्ट उसमें दखल दे सकता है?
  10. क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत राष्ट्रपति या राज्यपाल के फैसले को बदल सकता है?
  11. क्या बिना राज्यपाल की मंजूरी के विधानसभा से पास बिल कानून बन सकता है?
  12. क्या संविधान कहता है कि बड़े कानूनी सवालों को पाँच जजों की बेंच को भेजना जरूरी है?
  13. क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत ऐसा आदेश दे सकता है जो संविधान या कानून के खिलाफ हो?
  14. क्या केंद्र और राज्य सरकारों के बीच झगड़े सिर्फ अनुच्छेद 131 के तहत ही सुलझाए जा सकते हैं, या कोर्ट के पास और भी रास्ते हैं?

ये सवाल सिर्फ समय-सीमा तय करने की बात नहीं हैं। ये राष्ट्रपति और राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका, उनके अधिकारों और कोर्ट की शक्तियों के दायरे से जुड़े हैं। अब सुप्रीम कोर्ट को इन सवालों पर गहराई से विचार करना होगा और एक साफ राय देनी होगी। इस फैसले का असर देश की संवैधानिक व्यवस्था और केंद्र-राज्य संबंधों पर भी पड़ सकता है। इसलिए ये मामला बहुत अहम माना जा रहा है।

गालियाँ, आँखों पर पट्टी, ब्रश करने नहीं दिया… रिपोर्ट में बताया BSF जवान के साथ पाकिस्तान ने 21 दिनों तक कैसा किया सलूक, सीमा पर सेना की तैनाती की जानकारी निकालना चाहता था आतंकी मुल्क

पाकिस्तान ने 23 अप्रैल, 2025 को एक सीमा सुरक्षा बल (BSF) को जवान को हिरासत में लिया था। उसे 14 मई, 2025 को छोड़ दिया गया। लेकिन इन 21 दिनों में पाकिस्तानियों ने उसे काफी प्रताड़ित किया। पाकिस्तानियों ने उसे सोने नहीं दिया और गालियाँ भी दी।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तारी के बाद BSF पूर्णम कुमार शॉ जवान को पाकिस्तान में तीन जगह ले जाया गया था। इन लोकेशन के विषय में नहीं BSF जवान को नहीं पता है। यहाँ पाकिस्तानियों ने जवान से सीमा पर BSF की पोस्टिंग के विषय में जानकारी जुटाने की कोशिश की।

BSF जवान से पाकिस्तान के फौजियों ने आम नागरिक बन कर जानकारी जुटाने की कोशिश की। उससे यहाँ उन अधिकारियों के विषय में जानकारी जुटाने का प्रयास भी पाकिस्तान की फौज ने किया, जो पाकिस्तान की सीमा पर तैनात हैं।

इसके अलावा BSF के इन अधिकारियों के नम्बर भी साझा करने का दबाव जवान पर बनाया गया। यह जानकारियाँ निकालने की कोशिश के अलावा पाकिस्तानी फ़ौज ने जवान शॉ को मानसिक तौर पर प्रताड़ित भी किया।

रिपोर्ट बताती है कि उन्हें इस पाकिस्तान में कस्टडी के 21 दिनों के दौरान ढंग से सोने नहीं दिया गया, उन्हें फौजियों ने गालियाँ दी। इसके अलावा, अधिकांश मौकों पर उनकी आँखों पर पट्टी बाँध कर रखी गई। हालाँकि, उनके साथ शारीरिक तौर पर कोई प्रताड़ना नहीं की गई।

BSF जवान शॉ को 14 मई को वापस लाए जाने के बाद उनसे पाकिस्तान में हुए बर्ताव को लेकर भी जानकारियाँ ली गई हैं। उन्हें अटारी-वाघा बॉर्डर से BSF वापस लाई थी। भारत ने इस दौरान एक पाकिस्तानी रेंजर को भी वापस किया था।

BSF जवान शॉ को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद 23 अप्रैल, 2025 को पाकिस्तानी रेंजर ने पंजाब के फिरोजपुर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर से गिरफ्तार कर लिया था। पाकिस्तानियों ने दावा किया था कि वह उनकी जमीन पर आ गए थे। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद दबाव केचलते पाकिस्तान को उन्हें रिहा करना पड़ा था।

भारत की विजय पर विदेशी मीडिया की मुहर, NYT-वाशिंगटन पोस्ट ने माना- पाकिस्तान को घर में घुसकर मारा, 6 एयरबेस तबाह: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सैटेलाइट तस्वीरें दिखाई

भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान को काफी नुकसान हुआ है। भारत ने पहले भी इस बात की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए की थी। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में भी खुलकर ये बात लिख दी गई है।

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की जवाबी कार्रवाई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया था। 7 मई 2025 को शरू हुए इस मिशन में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर के 9 आतंकी ठिकाने धवस्त कर दिए थे।

इससे तिलमिलाए पाकिस्तान ने जब ड्रोन और मिसाइल से भारत के शहरों पर हमला करने की कोशिश की तो भारतीय सेना ने उसे नाकाम कर दिया। लेकिन इसके बाद चार दिन तक यह सैन्य संघर्ष जारी रहा।

भारत के हमलों से पस्त हुआ पाक

इस संघर्ष के दौरान भारत हमेशा से ही पाकिस्तान पर हावी रहा। भारतीय सेना ने कराची से 100 मील यानी लगभग 160 किलोमीटर दूर भोलारी एयरबेस, पाकिस्तानी फौज के मुख्यालय और प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के कार्यालय से लगभग 25 किमी की दूरी पर स्थित नूर खान एयरबेस, रहीम यार खान एयरफील्ड, सरगोधा एयरबेस, पसरूर और सियालकोट स्थित एयरबेस के रडार स्थलों समेत कई मुख्य जगहों पर हमला किया था।

देश के कई बड़े और महत्वपूर्ण जगहों पर एयर स्ट्राइक से हुए हमलों में पाकिस्तान को नुकसान भी हुआ लेकिन आतंकी मुल्क ने हमेशा से इस बात को नकारा कि पाकिस्तान में कोई भी नुकसान हुआ है।

अब न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में सैटेलाइट तस्वीरों के बिनाह पर यह बताया गया है कि पाकिस्तान को इस सैन्य संघर्ष में काफी नुकसान पहुंचा है। तस्वीरों में पहले और बाद की स्थिति को साफ तौर पर इसे दिखाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “सैटेलाइट तस्वीरों से साफ पता चलता है कि हमले काफी व्यापक थे। ज्यादातर नुकसान भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर पहुंचाया है।”

पाकिस्तान के भोलारी एयरबेस के पहले और बाद की सैटेलाइट तस्वीर (NYT)

रिपोर्ट में यह भी लिखा गया कि दोनों पक्षों का किए गए हमले सटीक और टारगेटेड थे जो कि हाईटेक युग के युद्ध की तस्वीर बयां करता है। हालाँकि पाक ने भारत में नुकसान के जितने दावे किए, उतने नहीं हुए हैं।

पाकिस्तान में 10 मई को एक नोटिस जारी कर कहा था कि रहीम यार खान हवाई अड्डे का रनवे क्रियाशील नहीं है पर इसका कोई कारण नहीं बताया था। सैटेलाइट तस्वीरों से हुए नुकसान से ये कारण भी साफ तौर पर सामने आ गया।

इसी तरह पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में सरगोधा एयरबेस के रनवे के दो हिस्सों पर भारत ने हमला किया। सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों में भी यह हमले से पहले और बाद की स्थिति साफ नजर आ रही है।

पाकिस्तान के झूठे दावों की खुली पोल

अपने नुकसान से बौखलाए पाकिस्तान के अधिकारियों ने यह झूठ फैलाने की कोशिश की कि पाकिस्तानी फौज ने भारत के उधमपुर एयरबेस को हमले से तबाह कर दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि 12 मई की सैटेलाइट की तस्वीरों में किसी तरह का नुकसान नहीं दिख रहा है।

उधमपुर एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीर (NYT)

सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए न्यूयॉर्क टाइम्स में साफ तौर पर लिखा गया है कि चार दिनों तक चले इस टकराव के दौरान भारत ने पाकिस्तान की सैन्य सुविधाओं और हवाई अड्डों को काफी नुकसान पहुँचाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच चली सैन्य संघर्ष परमाणु सशस्त्र दो देशों के बीच आधी सदी में सबसे व्यापक लड़ाई रही। दोनों देशों ने एक दूसरे की हवाई सुरक्षा का परीक्षण करने और सैन्य सुविधाओं पर हमले के लिए मिसाइल और ड्रोन्स का उपयोग किया और इसीलिए उन्होंने एक दूसरे पर गंभीर नुकसान पहुंचने का दावा भी किया।

वाशिंगटन पोस्ट ने भी बताया भारत को बताया विजेता

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के बाद वाशिंगटन पोस्ट की भी एक रिपोर्ट सामने आई। उसने रिपोर्ट में लिखा कि भारत ने पाकिस्तान के 6 एयरबेस पर हमला कर उन्हें ध्वस्त कर दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला देते हुए उसने भी लिखा है कि भारत ने पाक हवाई इड्डों के तीन हैंगर्स, दो रनवे और एयरफोर्स के 4 मोबाइल टावरों को तबाह कर दिया है। दो दर्जन सैटेलाइट तस्वीरों और वीडियों की समीक्षा के बाद इस नतीजों को साफ तौर पर लिखा गया है।

पाक के हमले बेअसर

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने रफीकी, मुरीदके, चकलाला, रहीम यार खान, सुक्कुर और चुनियन समेत कई पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर भी गंभीर हमले किए।

पाकिस्तान के पक्ष पर न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, “पाक ने जिन जगहों पर हमला करने का दावा किया है, उनकी सैटेलाइट तस्वीरें सीमित हैं। यह तस्वीर पाकिस्तानी हमलों से हुए नुकसान को स्पष्ट तौर पर नहीं दिखाती हैं। यहाँ तक कि जिन जगहों पर सैन्य कार्रवाई के पुष्ट सबूत हैं, उनकी भी तस्वीर पूरी तरह नहीं मिली है।”

यह बताता है कि पाकिस्तान की ओर से की गई कार्रवाई में भारत को हल्का-फुल्का नुकसान ही पहुंचा है। चार दिनों तक चले हमलों के बाद 10 मई 2025 को संघर्ष को समाप्त करने के लिए दोनों देशों के बीच सीजफायर का समझौता किया गया।