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नकली देशभक्त बनना बंद कर… आमिर खान की ‘सितारे जमीन पर’ का ट्रेलर आते ही उठी बहिष्कार की माँग: नेटिजन्स बोले- देशविरोधी, पहलगाम से लेकर ऑपरेशन सिंदूर के वक्त कहाँ था

बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। खान ग्रुप की नकली देशभक्ति से हर कोई भली भाँति अवगत है। आने वाली फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ के प्रमोशन के लिए अमीर खान की देशभक्ति जाग उठी,  फिल्म ‘सितारे जमीन पर’ के ट्रेलर रिलीज के साथ ही सोशल मीडिया खासकर X पर #BoycottAamirKhan और #BoycottSitareZameenPar ट्रेंड्स ने जोर पकड़ा।

आमिर पर पहलगाम आतंकी हमले (22 अप्रैल 2025) और भारतीय सेना के ऑपरेशन सिंदूर (7 मई 2025) पर चुप्पी साधने का आरोप है। X यूजर्स ने इसे उनकी ‘नकली देशभक्ति’ का सबूत बताया, खासकर जब उन्होंने फिल्म के प्रचार के समय देशभक्ति का प्रदर्शन किया।

इसके अलावा, उनके पुराने विवाद- 2015 का ‘असहिष्णुता’ बयान, फिल्म PK में हिंदू प्रथाओं पर कथित व्यंग्य, और तुर्की-चीन से संबंध- ने जनता का गुस्सा और बढ़ाया। यह लेख आमिर खान की कथित ‘नकली देशभक्ति‘ और हिंदू विरोधी छवि को समय रेखा के साथ उजागर करता है।

22 अप्रैल 2025: पहलगाम आतंकी हमला और आमिर की चुप्पी

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में टीआरएफ ने पर्यटकों पर हमला किया, जिसमें 26 लोग मारे गए। इसने देश में गुस्सा पैदा किया, और कई बॉलीवुड सितारों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी।

आमिर ने 15 दिन बाद, 7 मई 2025 को एबीपी शिखर सम्मेलन में कहा, “हमें यकीन है कि पीएम मोदी जी इस पर जरूर कुछ करेंगे। लोगों को न्याय मिलना चाहिए।” X यूजर्स ने इसे देर से दी गई प्रतिक्रिया माना और उनकी चुप्पी को ये कहते हुए ‘असंवेदनशील’ करार दिया कि “भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय आमिर ने सेना के लिए एक भी ट्वीट नहीं किया।”

7 मई 2025: ऑपरेशन सिंदूर और आमिर की खामोशी

भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान और PoK में 9 आतंकी ठिकानों को नष्ट किया, जिसमें 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। कई सितारों ने सेना की तारीफ की। आमिर ने इस दौरान कोई पोस्ट या बयान नहीं दिया। X यूजर्स ने इसे उनकी ‘देश विरोधी’ मानसिकता से जोड़ा।

12 मई 2025: देर से पोस्ट और “नकली देशभक्ति”

पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद, आमिर खान के प्रोडक्शन हाउस ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया: ‘ऑपरेशन सिंदूर के हीरोज को सलाम। हमारे सशस्त्र बलों की हिम्मत और बहादुरी के लिए आभार। पीएम मोदी को उनकी लीडरशिप के लिए धन्यवाद।’

X यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘नकली देशभक्ति’ और फिल्म प्रचार का हथकंडा बताया। एक यूजर ने लिखा, “सुबह हो गई? ट्रेलर रिलीज के साथ ही ट्रोल होना शुरू हो गया। लोग उनकी चुप्पी को भुला नहीं रहे।”

#BoycottSitareZameenPar और #BoycottAamirKhan ट्रेंड्स चले। यूजर्स ने आमिर की चुप्पी, पुराने विवाद (PK, असहिष्णुता बयान), और तुर्की-पाकिस्तान से कथित संबंधों को आधार बनाया।

एक यूजर ने लिखा, “देश पर इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ और आमिर चुप रहे। अब फिल्म रिलीज होने वाली है, तो देशभक्ति दिखा रहे हैं।”

2014: PK में हिंदू धर्म का कथित अपमान

आमिर खान की फिल्म PK ने मूर्ति पूजा और हिंदू बाबाओं पर व्यंग्य किया। डायलॉग जैसे ‘कौन हिंदू, कौन मुसलमान, थप्पा किधर है दिखा’ को हिंदू समुदाय ने अपमानजनक माना। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल ने फिल्म को “हिंदू विरोधी” करार दिया। #BoycottPK ट्रेंड चला, लेकिन फिल्म ने 600 करोड़ से अधिक कमाई की।

2015: “असहिष्णुता” बयान

रामनाथ गोयनका अवार्ड्स में आमिर ने भारत में ‘बढ़ती असहिष्णुता’ की बात की, यह कहते हुए कि उनकी पत्नी किरण राव ने देश छोड़ने की सोची थी। यह बयान दादरी हत्याकांड के समय आया।

इस पर बीजेपी और हिंदू संगठनों ने इसे ‘देश को बदनाम करने की साजिश’ बताया। हिंदू महासभा ने आमिर को ‘पाकिस्तान जाने’ की सलाह दी और देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की मांग की। #BoycottAamirKhan ट्रेंड शुरू हुआ।

2020: तुर्की और चीन से कथित संबंध

RSS की पत्रिका ने आमिर को ‘चीन का पसंदीदा खान’ कहा, उनकी फिल्म दंगल की चीन में सफलता और वीवो के ब्रांड एम्बेसडर होने पर सवाल उठाए। तुर्की के राष्ट्रपति की पत्नी से मुलाकात को ‘पाकिस्तान समर्थक’ तुर्की से संबंध के रूप में देखा गया।

RSS ने इसे ‘भारत के दुश्मनों से दोस्ती’ बताया। एक बार फिर #BoycottAamirKhan ट्रेंड को बल मिला। आमिर ने इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया।

2021: सीएट टायर विज्ञापन विवाद

आमिर के सीएट टायर विज्ञापन में बच्चों को सड़कों पर पटाखे न जलाने की सलाह दी गई, जिसे दिवाली की परंपरा का अपमान माना गया। इसके बाद #BoycottCeat और #BoycottAamirKhan ट्रेंड्स चले।

X यूजर्स ने आमिर पर हिंदू त्योहारों को निशाना बनाने और अपने धर्म के मुद्दों पर चुप रहने का आरोप लगाया। इस पर आमिर ने कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

आमिर खान की नकली देशभक्ति का पर्दाफाश

आमिर खान की देशभक्ति पर सवाल उठने के पीछे कई कारण हैं। जैसे कि सही समय पर चुप्पी, प्रचार में बोलना। पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर आमिर की चुप्पी, और फिर फिल्म प्रचार के समय देशभक्ति दिखाने को जनता ने ढोंग माना। उनकी 12 मई की पोस्ट को ‘नकली देशभक्ति’ का सबूत बताया गया।

इसके अलावा पिछले विवादों का बोझ भी कम नहीं है। PK, असहिष्णुता बयान, सीएट विज्ञापन, और तुर्की-चीन से कथित संबंधों ने उनकी छवि को ‘हिंदू विरोधी’ और ‘देश विरोधी’ बनाया। X यूजर्स ने इन्हें बार-बार उठाकर बॉयकॉट को हवा दी।

संवेदनशील समय में आमिर का फिल्म प्रमोशन करना भी एक कारण है। ‘सितारे जमीन पर’ का ट्रेलर ऐसे समय में रिलीज हुआ, जब भारत-पाक तनाव चरम पर था। इसे असंवेदनशील माना गया।

इसके साथ साथ लोगों में बॉलीवुड के खिलाफ सामान्य गुस्सा भी बना हुआ है। X पर आमिर के साथ-साथ शाहरुख और सलमान जैसे कलाकारों को भी निशाना बनाया गया, जो बॉलीवुड को ‘पाकिस्तान समर्थक’ या ‘हिंदू विरोधी’ मानने वाली भावना का हिस्सा है।

आतंकवादियों के बाद अब उग्रवादियों की बारी… सेना ने मणिपुर में 10 को किया ढेर: भारी मात्रा में हथियार-गोला बरामद, भारत-म्यांमार सीमा पर हुई कार्रवाई

भारत- म्यांमार सीमा के पास मणिपुर के चंदेल में असम राइफल्स ने 10 उग्रवादियों को मार गिराया है। दरअसल वहाँ मौजूद असम राइफल्स को इसकी खुफिया जानकारी मिली। इसके बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया गया।

उग्रवादियों ने इस दौरान सेना पर फायरिंग की और एनकाउंटर शुरू हुआ। सेना ने 10 उग्रवादियों को मौत के घाट उतार दिया।सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है। ऑपरेशन में किसी भी जवान के घायल होने की खबर नहीं आई है। मणिपुर में जारी अशांति के बीच सेना की ये बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।

भारतीय सेना की पूर्वी कमान ने ट्वीट किया, “भारत-म्यांमार सीमा के पास चंदेल जिले के खेगजॉय तहसील के न्यू समतल गांव के पास सशस्त्र कैडरों की आवाजाही की खुफिया जानकारी मिली। असम राइफल्स इकाई ने 14 मई 2025 को एक ऑपरेशन शुरू किया। ऑपरेशन के दौरान सैनिकों पर संदिग्ध कैडरों द्वारा गोलीबारी की गई। इस पर एक्शन लेते हुए 10 उग्रवादियों को ढेर कर दिया गया है और बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया। ऑपरेशन अभी भी जारी है…”

कुछ दिनों पहले भारत सरकार और भारतीय सेना ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए म्यांमार बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया है और फ्री आवाजाही को बंद कर दिया गया है। हालाँकि मणिपुर की दो अहम जातियाँ नागा और कुकी ने इसका विरोध किया था लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए ये करना जरूरी था। इसका असर भी दिखने लगा है और उग्रवादियों के मूवमेंट पर सेना आसानी से नजर बनाए रख पा रही है। पहले उग्रवादी मणिपुर में आतंक फैला कर म्यांमार भाग जाते थे।

उग्रवादी काफी समय से भारत-म्यांमार वाले इलाके में जोलैंड के रूप में नया राज्य बनाना चाहते हैं।

ड्रोन-मिसाइल दाग-दागकर पस्त हो गया पाकिस्तान, पर भारत में इस बार नहीं दिखी युद्ध काल की वह आपाधापी: आर्मी ब्रैट का सैल्यूट स्वीकार करिए PM मोदी

मैं पूजा राणा। कलम की सिपाही हूँ। आजकल दिल्ली में रहती हूँ। आर्मी ब्रैट हूँ। पिता के तबादलों के साथ ही मेरे दोस्त, स्कूल, शहर सब बदल जाते थे। पर इस यात्रा में जो कभी नहीं बदला, वह है सरहदों और वर्दी से मेरा रिश्ता।

भारतीय थल सेना की 24 साल तक सेवा करने वाले मेरे पिता दो साल पहले ही रिटायर हुए हैं। इस दौरान देश के सामने आई हर चुनौती को उन्होंने करीब से देखा। 1999 में पाकिस्तान के साथ हुई जंग के दौरान वे कारगिल में मोर्चे पर थे। उस समय मेरा जन्म भी नहीं हुआ था। लेकिन मेरे घर की दीवारों पर उस समय की किस्से-कहानियाँ अब भी अंकित हैं।

मेरी माँ ने कई बार सुनाया है कि कैसे कारगिल युद्ध के दौरान उनकी हर सुबह रेडियो से होती थी। रेडियो से चिपक कर घंटों युद्ध की खबरें सुनना ही उनकी दिनचर्या हो गई थी। वह मोबाइल-सोशल मीडिया का जमाना नहीं था। सूचना क्रांति दूर थी। लेकिन अपने बेटे की खबर लेने की मेरी दादी की जिद्द के आगे ये सब बाधा नहीं थी। उन्होंने किसी तरह पापा की यूनिट का नंबर खोज निकाला। पापा के कमांडिंग ऑफिसर से बात की।

माँ बताती हैं कि उस समय केवल सेना ही नहीं, पूरा देश भी लड़ रहा था। गाँव के लोग अनाज जमा करने लगे थे। किचन का सारा राशन सहेज कर रखा गया था। आशंका थी कि युद्ध का असर देश के भीतर नागरिकों पर भी पड़ सकता है। उन्हें सामान्य वस्तुओं की किल्लत भी झेलनी पड़ सकती है।

यानी, युद्ध भले सीमा पर लड़ा जा रहा था। भले लोगों के जज्बे में कोई कमी नहीं ​थी। लेकिन हर मन के एक कोने में कहीं न कहीं डर भी था और उससे उनकी सामान्य दिनचर्या भी प्रभावित थी।

युद्ध और अपने पड़ोस में बैठे आतंकी मुल्क (पाकिस्तान) की करतूतों से भले मेरा बचपन का वास्ता रहा हो, पत्रकारिता में आने के बाद भले मैंने रूस-यूक्रेन युद्ध की खबरों पर लगातार नजर रखी हो, पर युद्ध काल के उस ‘समय’ को मैंने जीवन में कभी महसूस नहीं किया था।

पर पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने जब धर्म पूछकर हिंदुओं का कत्लेआम किया, जब भारतीय सेना ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर दिया, बौखलाए पाकिस्तान ने जब देश के कई शहरों में ड्रोन-मिसाइल अटैक किए, कई जगहों से ब्लैकआउट की खबरें आने लगी, संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रिहायशी इलाकों पर गोलाबारी हुई, यहाँ तक कि देश की राजधानी दिल्ली पर मिसाइल दागा गया जिसे रास्ते में ही सेना ने मार गिराया… मैंने उस डर को महसूस नहीं किया जो पहले से सुन रखा था।

जिस दिल्ली में मैं काम करती हूँ, वहाँ दिनचर्या सामान्य थी। सड़कों पर ट्रैफिक का वही शोर था। मेरठ के उस शहर में भी सब कुछ अपनी गति से चल रहा था, जहाँ आज मेरे रिटायर पिता रहते हैं। मेरे उस गाँव में भी सब कुछ सामान्य था, जहाँ 1999 में सब इकट्ठे होकर रेडियो पर कारगिल युद्ध की खबरें सुना करते थे। न अपने घरों में सामान जमा करने की कोई होड़ देखी। न ही किसी चेहरे पर यह भय दिखा कि अब क्या होगा।

आखिर क्या कारण था कि युद्ध काल को लेकर जैसे अनुभव मेरी मम्मी-दादी के रहे हैं, वैसा मेरा नहीं है? पाकिस्तान के ड्रोन मिसाइल अटैक से जब इसका विस्तार होने की आशंका थी, तब भी सामान्य भारतीयों के शिकन पर चिंता क्यों नहीं थी? 1971 के बाद जब देशभर में पहली बार ‘रेड सायरन’ की गूँज सुनाई पड़ी तो भी कहीं कोई पैनिक नहीं था?

इसका सबसे बड़ा कारण देश में उस नेतृत्व का होना है, जिसने आम लोगों में यह भरोसा पैदा किया है कि देश मजबूत हाथों में है। जिसने सेना का सशक्तिकरण और आधुनिकीकरण साथ-साथ किया है। इस सरकार ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से देशवासियों को सुरक्षित होने का भरोसा दिलाया था। यह विश्वास पैदा किया था कि हम इस्लामी आतंकियों को पाकिस्तान में घुसकर मारने में सक्षम है। याद कीजिए नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले का वह समय, जब रक्षा मंत्री यह कहा करते थे कि हथियार खरीदने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं है। जब राजनीति के लिए सेना के नाम का इस्तेमाल कर मीडिया में तख्तापलट के लिए सेना के आगरा से कूच करने की खबरें प्लांट करवाई गई थी।

युद्ध काल के उस भय को खत्म करने के लिए, हम में यह विश्वास पैदा करने के लिए, भारतीय सेना को गर्व के क्षण देने के लिए, भारत के पराक्रम का डंका बजाने के लिए इस आर्मी ब्रैट का सैल्यूट स्वीकार करिए प्रधानसेवक नरेंद्र मोदी जी!

बराक-8, हारोप, हेरोन… ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मित्र राष्ट्र के हथियार ने भी दिखाया पराक्रम: जानिए पाकिस्तान को घुटने पर लाने में इजरायल-भारत की जुगलबंदी कितनी निर्णायक

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुए घातक आतंकी हमले में 26 हिंदू पर्यटकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर है, जिससे दोनों देशों के बीच सीमावर्ती संघर्ष तेज़ हो गया। जवाबी कार्रवाई में ड्रोन, लड़ाकू विमान और मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। हालाँकि यह संघर्ष एक अनिश्चित युद्धविराम की घोषणा के साथ अचानक थम गया, लेकिन इस घटना ने भारत-पाक प्रतिद्वंद्विता को एक नए, अधिक खतरनाक चरण में प्रवेश करा दिया।

इस हमले का जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू किया। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस दौरान इजरायल के बनाए अत्याधुनिक हथियारों का खूब इस्तेमाल हुआ, जिसने भारत और इजरायल की गहरी दोस्ती और रक्षा सहयोग को दुनिया के सामने दिखाया।

भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों पर हमला करने और उनकी मिसाइलों व ड्रोनों को नाकाम करने के लिए इजरायल, रूस और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का शानदार इस्तेमाल किया। इस ऑपरेशन में भारत ने अपनी तकनीकी ताकत का परिचय दिया। भारत, इजरायल, अमेरिका, रूस और फ्रांस जैसे देशों से हथियार खरीदने वाला दुनिया का एक बड़ा देश है।

हारोप ड्रोन

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इजरायल के हारोप ड्रोन ने पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणालियों पर सटीक हमले किए। इसे ‘आत्मघाती’ या ‘कामिकेज’ ड्रोन कहते हैं, जो रडार को खोजकर नष्ट करने में माहिर है। इन ड्रोनों ने पाकिस्तान के कई अहम ठिकानों पर हमला किया, जिसमें लाहौर की एक बड़ी वायु रक्षा सुविधा को तबाह कर दिया।

भारत ने पुष्टि की कि उसकी मानवरहित हवाई प्रणालियों और वायु रक्षा ग्रिड ने कई पाकिस्तानी ड्रोन, हथियारों और मिसाइलों को नष्ट किया, जो पठानकोट और श्रीनगर जैसे 15 भारतीय वायुसेना ठिकानों को निशाना बना रहे थे। भारत ने 2009 से 2019 के बीच इजरायल से कम से कम 25 हारोप ड्रोन खरीदे, जो अब सक्रिय हैं और इस ऑपरेशन में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) का हारोप ड्रोन और मिसाइल की खूबियों को विकसित किया गया है। यह वायु रक्षा इकाइयों और रडार जैसे बड़े लक्ष्यों को खुद खोजकर नष्ट कर सकता है। इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की रिपोर्ट के मुताबिक, हारोप भारत की मानव रहित सटीक हमला करने की क्षमता का अहम हिस्सा है।

हारोप एक सटीक आत्मघाती ड्रोन है, जिसे गहरे हमलों के लिए बनाया गया है। यह इलेक्ट्रो-ऑप्टिक सीकर की मदद से अलग-अलग दिशाओं से लक्ष्य को पहचान सकता है और नौ घंटे तक हवा में रह सकता है। यह सैटेलाइट जैमिंग (GNSS) और युद्धक्षेत्र में मानवीय दखल के खिलाफ मजबूत है, जिससे मुश्किल हालात में भी यह काम करने में सक्षम बना रहा है।

50 पाउंड के वारहेड से लैस हारोप, कैमरा और ऑपरेटर की मदद से चलते लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है या रेडिएशन सीकर से रडार साइट्स को खुद निशाना बना सकता है। अगर रडार पहले सक्रिय होकर बंद हो जाए, तो हारोप उसकी आखिरी जगह पर जाकर इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल तकनीक से उसे खोजकर नष्ट कर देता है। यह स्थिर और गतिशील दोनों तरह के जमीन पर मौजूद लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।

हारोप को ट्रक, मोबाइल प्लेटफॉर्म या नौसैनिक जहाजों से लॉन्च किया जा सकता है और यह 600 किलोमीटर की दूरी या छह घंटे तक उड़ सकता है। इसे ऑपरेटर नियंत्रित कर सकता है या यह पूरी तरह आटोमेटिक तरीके से भी काम कर सकता है।

हेरोन एमके 2 यूएवी

हेरॉन Mk2 एक उन्नत मध्यम-ऊँचाई, लंबी उड़ान वाला (MALE) ड्रोन है, जिसे इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने विकसित किया है। यह भारतीय वायुसेना और सेना की निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने में मदद करता है। नवंबर 2022 में भारतीय सेना ने दो हेरॉन Mk2 शामिल किए, जबकि सितंबर 2023 तक पूर्वोत्तर में दो और तैनात किए। अगस्त 2023 में भारतीय वायुसेना ने चार और नवंबर में दो और खरीदे।

यह ड्रोन 32,000 फीट की ऊंँचाई पर उड़ सकता है और 35,000 फीट तक जा सकता है। यह 40 घंटे से ज्यादा उड़ान भर सकता है, जिससे सीमा पर दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और खुफिया जानकारी जुटाने में बहुत प्रभावी है। इसकी पेलोड क्षमता 500 किलोग्राम है, जिसमें उन्नत सेंसर, कैमरे और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण लगाए जा सकते हैं।

यह ड्रोन दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, समय से चेतावनी देने और युद्ध क्षति का आकलन करने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी ऊँची उड़ान और लंबी अवधि की क्षमता इसे ज्यादातर जमीन आधारित खतरों से दूर रखती है, जिससे यह भारतीय वायुसेना की रणनीतिक ताकत बन गया है।

स्काईस्ट्राइकर के घूमते हथियार

स्काईस्ट्राइकर ड्रोन को इजरायल की एल्बिट सिक्योरिटी सिस्टम्स ने भारत की अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज के साथ मिलकर बनाया है। इसे 2021 में भारतीय सेना में शामिल किया गया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इन ड्रोनों का इस्तेमाल हुआ। इसे लोइटरिंग मुनिशन कहते हैं और इसे बेंगलुरु के पश्चिमी हिस्से में बनाया गया है।

यह ड्रोन मिसाइल की तरह हमला करता है, लेकिन यूएवी (UAV) की तरह उड़ता है। यह सटीक हथियार है, जिसे मैन्युअल या स्वायत्त रूप से चलाया जा सकता है। यह लक्ष्य क्षेत्र में मंडराकर लक्ष्यों को खोजता और नष्ट करता है। इसका कम शोर और कम ऊँचाई पर सीक्रेट तरीके से उड़ान इसे खुफिया कामों के लिए आदर्श बनाती है। इसकी रेंज 100 किलोमीटर है और इसमें 5 से 10 किलोग्राम का बम होता है।

स्काईस्ट्राइकर का इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन इसे सीक्रेट ऑपरेशनों के लिए बेहतर बनाता है। यह ऑपरेटर द्वारा बताए गए लक्ष्यों को खोजकर उन पर हमला कर सकता है। जीपीएस या कनेक्टिविटी न होने पर भी यह सटीक हमले कर सकता है। अगर कोई लक्ष्य न मिले, तो यह ऑपरेटर को सुरक्षित वापस लौटने या हमला रोकने की सुविधा देता है।

यह ड्रोन लंबी दूरी के सटीक हमलों के लिए किफायती यानी सस्ता भी है और जमीनी सेना को एयर फायर मिशनों में मदद करता है। बालाकोट हमले के बाद भारतीय सेना ने इमरजेंसी खरीदी के तहत 100 स्काईस्ट्राइकर ड्रोन खरीदे।

बराक-8

पाकिस्तान ने दिल्ली पर फतह-II बैलिस्टिक मिसाइल दागी, लेकिन भारत की बराक-8 मिसाइल रक्षा प्रणाली ने इसे हरियाणा के सिरसा में रोक दिया। बराक-8 को भारत और इजरायल ने मिलकर बनाया है। यह लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है, जिसकी रेंज 70 किलोमीटर है और इसे 100 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है।

बराक को DRDO और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने मिलकर संयुक्त रूप से विकसित किया। ‘बराक’ का मतलब हिब्रू में ‘बिजली’ होता है। यह मिसाइल मोबाइल लॉन्चर से नौसेना के जहाजों या जमीन पर इस्तेमाल हो सकती है। 275 किलोग्राम की यह मिसाइल 60 किलोग्राम का वारहेड ले जाती है, जो लक्ष्य के पास विस्फोट करता है। इसमें दोहरी पल्स रॉकेट मोटर और थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल है, जो इसे मैक 2 की गति देता है।

बराक-8 में दोतरफा डेटा लिंक, डिजिटल रडार, RF सेंसर और सिस्टम वाइड कम्युनिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकें हैं। IAI ने 2021 में बताया कि इसने हवाई लक्ष्यों को रोकने और नष्ट करने में सफलता पाई। यह 360 डिग्री कवरेज देती है और दिन-रात, किसी भी मौसम में कई लक्ष्यों को निशाना बना सकती है।

बराक-8 मिसाइल प्रणाली लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, क्रूज मिसाइलों, बैलिस्टिक मिसाइलों, एंटी-शिप मिसाइलों और मानव रहित हवाई वाहनों (UAVs) से सुरक्षा प्रदान करती है। इसका दूसरा संस्करण, एमआरएसएएम, एक भूमि-आधारित मिसाइल प्रणाली है, जिसमें मोबाइल लॉन्चर, ट्रैकिंग रडार, और कमांड और कंट्रोल सिस्टम शामिल हैं।

सीकर, एंडगेम एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी भारत में विकसित तकनीकों के साथ, प्रणोदन रॉकेट सिस्टम और थ्रस्ट वेक्टर सिस्टम सहित कुछ अन्य घटक DRDO प्रयोगशालाओं द्वारा निर्मित किए गए हैं। इस प्रणाली को भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 17 (ए) फ्रिगेट और विक्रमादित्य विमान वाहक नौका पर तैनात किया गया है, जिसमें रेंज 70 किलोमीटर तक है।

स्पाइस-2000 बम

इजरायल की स्पाइस-2000 किट आम बमों को सटीक स्टैंड-ऑफ हथियारों में बदल देती है, जो आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हैं और नागरिकों को कम नुकसान पहुँचाते हैं। इन्हें लड़ाकू विमानों से छोड़ा जाता है।

इन्हें इजरायल की राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स की अमेरिकी इकाई ने बनाया है। इसमें INS/GPS सिस्टम और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सीकर है, जो जीपीएस की गैर-मौजूदगी में भी सटीक हमले करता है। राफेल के मुताबिक, यह किट 1000 और 2000 पाउंड के बमों को सटीक हथियारों में बदल देती है।

राफेल वेबसाइट के आनुसार, “अत्यधिक परिष्कृत और युद्ध-सिद्ध स्पाइस गाइडेंस किट आज के जटिल होते युद्धक्षेत्रों की ज़रूरतों को पूरा करते हैं। वे 1000 पाउंड और 2000 पाउंड वर्ग के सामान्य उद्देश्य और प्रवेश वारहेड को सटीक स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक हथियारों में बदल देते हैं जो जीपीएस-रहित वातावरण में सटीक सटीकता के साथ एक साथ हमले करते हैं।”

स्पाइस-2000 बम में एडवांस नेविगेशन, मार्गदर्शन और होमिंग Dopamine एल्गोरिदम है, जो सटीकता के साथ कई लक्ष्यों पर हमला करता है। यह ‘फायर एंड फॉरगेट’ तकनीक पर काम करता है, यानी पायलट बम को मिशन सौंपता है और यह खुद लक्ष्य तक पहुँचता है। 900 किलोग्राम के वारहेड के साथ, यह कठोर लक्ष्यों को भेद सकता है।

26 फरवरी 2019 को बालाकोट हमले में भारतीय वायुसेना ने इन बमों का इस्तेमाल कर जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों को नष्ट किया। चार बम छतों से इमारतों में घुसे और सटीक हमला किया।

जब आतंकवादी सो रहे थे, भारतीय वायुसेना के विमानों ने पाँच स्पाइस-2000 बमों को दागा, जिनमें से कम से कम चार बम छतों के जरिए इमारत में घुस गए। इस सटीक हमले के दौरान, भारतीय वायुसेना के विमानों ने अपने लक्ष्यों पर बम गिराने के बाद तुरंत अपने ठिकानों पर वापसी की।

टैवोर X95 असॉल्ट राइफलें

2010 के दशक में भारत ने अपने विशेष बलों के लिए टैवोर X95 राइफलें शामिल कीं। बाद में इन्हें अन्य अर्धसैनिक बलों के लिए भी खरीदा गया। इजरायल वेपन्स इंडस्ट्रीज ने पुँज लॉयड रक्षा सिस्टम को इनके निर्माण का लाइसेंस दिया।

भारतीय सेना के विशेष बल, नौसेना के MARCOS, वायुसेना के गरुड़ कमांडो और सीमा सुरक्षा बल इन राइफलों का इस्तेमाल करते हैं। ये छोटी, बुलपप डिज़ाइन वाली राइफलें नजदीकी लड़ाई के लिए बेहतर हैं।

इन असॉल्ट राइफलों को पहले IWI से आयात किया जाता था, जो एक पूर्व इज़राइली सरकारी कंपनी थी, जिसे 2005 में निजीकरण के बाद स्वामित्व में लिया गया था। बाद में, ‘आत्मनिर्भर भारत’ कार्यक्रम के तहत इन्हें भारत में उत्पादित किया गया और हाल ही में एयरो इंडिया 2021 में प्रदर्शित किया गया, जहाँ इन हथियारों पर ‘मेड इन इंडिया’ का टैग लगा था।

ऑपरेशन सिंदूर

भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों से जुड़े 9 ठिकानों पर हमला करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया। यह ऑपरेशन 7 मई को सुबह 1:05 बजे शुरू हुआ और 23 मिनट तक चला। इस दौरान आर्मेमेंट एयर-सोल मॉड्यूलेयर (AASM) हैमर बम और स्कैल्प मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। इसके अतिरिक्त, विशेष लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए स्काईस्ट्राइकर ड्रोन का भी उपयोग किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 100 आतंकी मारे गए, जिनमें जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मुहम्मद मसूद अजहर अल्वी के परिवार के लोग और कंधार अपहरण कांड के मास्टरमाइंड अब्दुल रऊफ अजहर शामिल थे। लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर मुदस्सर (अबू जुंदाल) को भी ढेर कर दिया गया। पाकिस्तान ने जवाबी हमला करने की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने उसे नाकाम कर दिया।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में इजरायली हथियारों का इस्तेमाल भारत और इजरायल के बीच मजबूत रक्षा सहयोग का प्रतीक है। बराक-8, हारोप, हेरॉन Mk2, स्काईस्ट्राइकर, स्पाइस-2000 और टैवोर X95 जैसे हथियारों ने भारत की सैन्य ताकत को बढ़ाया। यह दोस्ती न सिर्फ रक्षा क्षेत्र में, बल्कि तकनीक और रणनीति के आदान-प्रदान में भी गहरी होती जा रही है, जो दोनों देशों को और मजबूत बनाएगी।

मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

राजस्थान मे 1000+ बांग्लादेशी घुसपैठिए पकड़े, डिटेंशन सेंटर में किया बंद: 140+ को किया डिपोर्ट, एक्शन में भजनलाल सरकार

राजस्थान की भजनलाल सरकार ने बांग्लादेशी घुसपैठियों पर तगड़ा एक्शन लिया है। राजस्थान के भीतर सरकार ने 1000 से अधिक बांग्लादेशियों को गिरफ्तार किया है। इन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। इन्हें वापस भेजने की कार्रवाई भी चालू हो गई है। इनका पहला जत्था भरके बांग्लादेश रवाना कर दिया गया है।

यह कार्रवाई भजनलाल सरकार ने बुधवार (14 मई, 2025) को की है। बुधवार को राजस्थान पुलिस ने 148 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ कर जोधपुर में वायुसेना के एयरबेस पर छोड़ा है। यहाँ से उन्हें एक विशेष विमान के जरिए पश्चिम बंगाल भेजा गया है। यहाँ BSF से सहयोग करके उन्हें बांग्लादेश भेजा जाएगा।

राजस्थान में पुलिस ने अब तक 1008 बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ा है। यह बांग्लादेशी घुसपैठिए राजस्थान के 17 जिलों से गिरफ्तार किए गए हैं। जयपुर रेंज से सबसे बड़ी संख्या में घुसपैठिए गिरफ्तार हुए हैं। सबसे अधिक गिरफ्तारियाँ सीकर में हुई हैं।

सीकर से पुलिस ने 393 बांग्लादेशी घुसपैठिए गिरफ्तार किए हैं। इनमें से अधिकांश ईंट भट्ठों पर काम कर रहे थे। राजस्थान में बांग्लादेशी घुसपैठियों को पकड़ने के बाद उन्हें जयपुर स्थित एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया था। राजस्थान में 6 ऐसे डिटेंशन सेंटर बनाए गए हैं।

जो घुसपैठिए अभी राजस्थान के भीतर बचे हैं, जल्द ही उन्हें भेजा जाएगा। बांग्लादेश सरकार को भी उसके नागरिकों के विषय में सूचना दी जा रही है। यह कार्रवाई 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद चालू हुई थी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य भर में घुसपैठिए ढूँढने का आदेश दिया था।

राजस्थान में इन्हें पकड़ने के लिए विशेष टीमों का भी गठन किया गया था। इन टीमों ने राजस्थान में लोगों की आईडी एवं उनके फोन तथा बैंक खातों की जाँच करके नागरिकता का पता लगाया है। राजस्थान के अलावा भी देश के बाकी राज्यों में घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है।

इससे पहले असम के मटिया डिटेंशन कैंप में रखे गए 100 से अधिक रोहिंग्या भी वापस बांग्लादेश भेज दिए गए थे। इसकी पुष्टि असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने भी की थी।

पाकिस्तान को ड्रोन सप्लाई पड़ी भारी, तुर्की का तेल निकालने में जुटे भारतीय: ‘आतंकियों के साथी’ का मार्बल-सेब नहीं बेचेंगे कारोबारी, टूरिज्म इंडस्ट्री पर भी संकट

तुर्की का जब भी मुश्किल समय आया तो भारत उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा। लेकिन ‘उम्माह’ का नया खलीफा बनने चले तैयब अर्दोगान ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भारत के विरुद्ध खड़ा रहने का फैसला किया। पाकिस्तान ने भारतीय शहरों पर जो बायरकटर टीबी-2 ड्रोन दागे, वह उसे तुर्की से ही मिले थे। ऑपरेशन सिंदूर के बीच इस बात की चर्चा खूब रही कि तुर्की का एक विमान हथियारों के साथ पाकिस्तान में उतरा था।

तुर्की के साथ अजरबैजान की भी आतंकी मुल्क को समर्थन करने में कहीं न कहीं भागीदारी रही है। इन देशों का पाकिस्तान को समर्थन करने की खबर फैलते ही भारत में लोगों ने इनसे किनारा करने की ठान ली। यहाँ तक कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी #BoycottTurkey, #BoycottAzerbaijan और #NoTravelToTurkey जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

भारतीयों में तुर्की के खिलाफ आक्रोश सिर्फ यात्रा तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि भारत का हर वर्ग अब तुर्की को इसकी सजा देने को तैयार है। व्यापारियों ने भी तुर्की के सामानों के आयात से मनाही कर दी है। एक ओर व्यापारियों ने तुर्की से सेब, ग्रेनाइट मार्बल समेत अन्य सामान खरीदने बंद कर दिए तो वहीं आम लोगों ने भी तुर्की और अजरबैजान घूमने के लिए किए टिकट कैंसिल करवा दिए। इससे तुर्की के पर्यटन उद्योग पर काफी असर पड़ सकता है।

कंपनियों ने बंद की ट्रैवेल बुकिंग

तुर्की, अजरबैजान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों के बॉयकॉट के लिए ट्रैवल कंपनियों और उनकी वेबसाइटों ने यात्रियों को पाकिस्तान का समर्थन देने वाले देशों की टिकट न करने की सलाह दी है। कई साइटों पर बुकिंग बंद कर दी गई है।

इक्सिगो, ईजमाईट्रिप और कॉक्स एंड किंग्स जैसी बड़ी ट्रैवल कंपनियों ने पाकिस्तान और तुर्की के लिए टिकट बुक करना बंद कर दिया है। यहाँ तक किसी को ग्रुप के सीईओ आलोक बाजपेई ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह ऐलान कर दिया टिकट नहीं बुक करेंगे।

लोगों ने भी अपना देशप्रेम दिखाया और इन देशों की टिकट कैंसिल कर दी। न्यूज 18 की एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईजमाइट्रिप के सह-संस्थापक प्रशांत पिट्टी ने बताया कि तुर्की के लिए 22% और अजरबैजान के लिए 30% लोगों ने अपनी टिकट कैंसिल करवाया है। 2024 में भारत से इन दोनों देशों में 3.8 लाख लोगों ने यात्रा की थी।

MakeMyTrip के प्रवक्ता ने कहा, “अज़रबैजान और तुर्की के लिए बुकिंग में 60% की कमी आई है जबकि इसी अवधि के दौरान करीब 250% बुकिंग कैंसलेशन में बढ़ोतरी हुई है। अपने देश के साथ एकजुटता और अपने सशस्त्र बलों के प्रति गहरे सम्मान के कारण, हम इस भावना का दृढ़ता से समर्थन करते हैं और सभी को अज़रबैजान और तुर्की की सभी गैर-ज़रूरी यात्राओं के खिलाफ सलाह देते हैं।”

तुर्की और अजरबैजान में भारतीयों की यात्रा रद्द करवाने से होने वाले नुकसान पर प्रशांत ने बताया कि अगर औसतन एक यात्री का खर्च 60 से 70 हजार रुपए माना जाए तो इस लिहाज से भारतीयों द्वारा लगभग 2500 से 3000 करोड़ रुपए इन देशों में खर्च किया जाता है।

व्यापारियों में भी गहरा आक्रोश

तुर्की के भारत के बीच व्यापार का एक बड़ा हिस्सा काम करता है। आतंकी मुल्क के साथ तुर्की की नजदीकी व्यापारियों को भी पसंद नहीं आई। तुर्की के बदलते हुए रुख को देखकर भारतीय व्यापारियों ने तुर्की के किसी भी सामान का आयात करने से मना कर दिया है।

इसी कड़ी में उदयपुर मार्बल प्रोसेसर्स कमेटी के अध्यक्ष कपिल सुराणा ने भी बयान दिया है। उन्होंने कहा, “भारत सरकार अकेली नहीं है। अपने देश के साथ हम सभी व्यापारी खड़े हैं।”
भारत में आयात होने वाले मार्बल का 70% हिस्सा तुर्की से आता है।

कपिल सुराणा ने बताया कि उदयपुर एशिया का सबसे बड़ा मार्बल निर्यातक है। उन्होंने आगे कहा, “हमारी समिति ने यह फैसला लिया है कि हम तुर्की के साथ व्यापार बंद कर रहे हैं। अगर हम तुर्की के साथ व्यापार बंद करते हैं तो भारतीय मार्बल की तो माँग बढ़ेगी। साथ में दूसरे देशों को भी ये संदेश पहुँचेगा कि भारत किसी भी फैसले को लेने में सक्षम है।”

तुर्की के सेब व्यापारियों से किनारा

मार्बल से पहले पुणे के व्यापारियों ने तुर्की के सेब व्यापारियों से किनारा किया था। व्यापारियों ने निर्णय लिया के अब तुर्की से सेब आयात नहीं करेगें। इसके बजाय देश में उगाए जा रहे सेब ही बेचे जाएँगे। व्यापारी अब केवल हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और ईरान से सेब खरीद रहे हैं।

तुर्की से आने वाला सेब पुणे में लगभग 3 महीने तक बेचा जाता है। इससे लगभग 1200 से 1500 करोड़ रुपए का कारोबार होता है।

पाकिस्तान से जुड़े हर सामान पर लगे प्रतिबंध

व्यापारियों के संघ कनफेडरेशन का ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्रालय के मंत्री पीयूष गोयल से भारत में पाकिस्तानी झंडा टी-शर्ट समेत अन्य चीजों के बिक्री पर रोक लगाने की माँग की है।

CAIT राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भारतीय ने पीयूष गोयल को पत्र लिखकर कहा है कि ऑनलाइन और ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर पाकिस्तान के झंडा, लोगो, टी-शर्ट समेत कई अन्य चीजें बड़ी आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। इन सभी को बैन किया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी लिखा कि इस बात की भी जाँच की जानी चाहिए कि पाकिस्तान से जुड़े किन उत्पादों की बिक्री की अनुमति है। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा को देखते हुए इस तरह के उत्पाद बेचने वाले प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

भारतीय ने पीयूष गोयल को लिखा, “राष्ट्रीय सुरक्षा और लोगों की भावनाओं को आहत करने वाले सामान बेचने वाले ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।”

CAIT के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने भी इस बात पर जोर दिया कि भारतीय नागरिकों को तुर्की और अजरबैजान की यात्रा का बहिष्कार करने से इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं, विशेषकर उनके पर्यटन क्षेत्र पर काफी असर पड़ सकता है।

खंडेलवाल ने बताया कि तुर्की में 2024 में लगभग 6 करोड़ 22 लाख विदेशी पर्यटक गए। इनमें से लगभग 3 लाख पर्यटक सिर्फ भारत से थे। 2023 की तुलना में भारतीय पर्यटकों में 20.7 फीसदी की बढ़ोतरी भी हुई।

CAIT बीते कई वर्षों से चीनी उत्पादों के बहिष्कार के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चला रहा है। अब यह इस आंदोलन को तुर्की और अजरबैजान तक बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

घुटने पर आया तुर्की

भारतीयों के बहिष्कार से जाहिर तौर पर तुर्की को नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इसे लेकर तुर्की के पर्यटन विभाग की ओर से कथित तौर पर एक पत्र एक्स पर वायरल हो रहा है। पत्र में अंकारा ने भारतीय पर्यटकों द्वारा बढ़ते बहिष्कार को इस रूप में प्रकाशित किया है कि भारतीयों के लिए तुर्की सुरक्षित है।

इस पत्र में भारतीय पर्यटकों को आश्वस्त किया गया कि भारत-पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का तुर्की के सामान्य जनजीवन या पर्यटन माहौल पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। तुर्की की स्थानीय आबादी की एक बड़ी संख्या को इस संघर्ष की जानकारी ही नहीं है। तुर्की में सभी पर्यटन गतिविधियाँ सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं।

पत्र में यह भी लिखा गया है कि भारतीय यात्रियों का हमेशा की तरह पूरे सम्मान और आतिथ्य के साथ स्वागत किया जा रहा है। चाहे वह होटल हों, रेस्तरां, दुकानें या अन्य पर्यटन स्थल। सभी यात्रा ऑपरेशन पूर्ववत जारी हैं और भारतीय मेहमानों को लेकर किसी भी प्रकार की सुरक्षा या प्रतिबंध की स्थिति नहीं है।

इस पत्र से तो यह साफ जाहिर हो रहा कि तुर्की पर्यटन के बॉयकॉट को लेकर काफी डरा है और माहौल में नरमी लाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। लेकिन भारतीयों की मंशा साफ है कि जो देश के साथ नहीं, हम उसके साथ नहीं।

‘गाँव के सभी हिंदुओं को खत्म करना चाहते हैं मुस्लिम’: देवी स्थान से पूजा कर लौट रही थी बारात, दावा- मस्जिद के सामने दूल्हे के पिता की हत्या: बिहार पुलिस बता रही DJ का विवाद

बिहार के गया में एक मुस्लिम बहुल गाँव में हिन्दुओं पर बारात निकालने के दौरान हमला हुआ। इस हमले में दूल्हे के पिता की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। हमले में कई लोग घायल हुए हैं। लेकिन पुलिस ने मुस्लिमों के साथ साथ दूल्हे के परिजनों का नाम FIR में डाल दिया है। पुलिस का कहना है कि विवाद बरात में डीजे बजाने को लेकर हुआ, इसके चलते दो पक्षों में हुए पथराव के बाद गाँव में तनाव फ़ैल गया।

पुलिस ने बताया डीजे का विवाद

यह मामला गया जिले के गुरुडु प्रखंड में गुरुआ गाँव का है। ऑपइंडिया ने इस मामले में पीड़ित के परिजनों से भी बात की है। यहाँ 7 मई, 2025 को इसी गाँव में ननकु यादव के घर शादी का कार्यक्रम था। यहाँ बारात की विदाई से पहले गाँव के देवी स्थान पर पूजा करने के लिए बारात समेत तमाम हिन्दू गए हुए थे। वापस आने के दौरान मुस्लिम बहुल इलाके में मुस्लिमों ने उनसे लड़ाई कर दी। पुलिस ने बताया कि यहाँ मुस्लिमों ने हिन्दुओं से डीजे ना बजाने को लेकर दबाव डाला।

पुलिस के अनुसार, मस्जिद के सामने डीजे बजाने को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि पत्थरबाजी चालू हो गई, इसके चलते बारात में कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने बताया है कि इस पथराव में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ है, जिसकी मौत हो गई है। SHO सरफराज इमाम ने ऑपइंडिया को बताया कि वह मामले में दोनों पक्षों के खिलाफ FIR दर्ज कर चुके हैं और आगे की कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कुछ लोगों को गिरफ्तार किए जाने की बात भी कही है। उन्होंने अभी का माहौल शान्तिपूर्वक होने की बात कही है।

इस मामले में दर्ज FIR में पुलिस ने चाँद, जाकिर, लुकमान, इलियास, शाइस्ता, राणा, शमीम समेत 25 लोगों को आरोपित बनाया है। इसमें कुछ हिन्दुओं का भी नाम है। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी भी मौजूद है। कई लोगों का इलाज चल रहा है।

पीड़ित बोले- डीजे बंद था तब भी हुआ हमला

जहाँ पुलिस ने इस मामले में डीजे बजने पर विवाद होने की बात कही तो वहीं दूल्हे के बड़े भाई गया यादव ने कहा है इस दौरान डीजे बंद था। उन्होंने बताया कि मुस्लिम भीड़ ने उनके पिता की हत्या लाठी डंडों से पीट पीटकर बेरहमी से कर दी। उन्होंने बताया कि उनके दो चाचा भी लगातार लाठी लगने से गंभीर रूप से घायल हैं। यह बातें उन्होंने एक चैनल को दिए इंटरव्यू में कहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिजनों को अस्पताल ले जाने के बजाय पुलिस ने जेल में बंद कर दिया है। उनके साथ मौजूद ग्रामीणों ने बताया है कि यहाँ मुस्लिम हिन्दुओं को ख़त्म कर देना चाहते हैं। एक ग्रामीण ने बताया कि इस्लामी त्योहारों के समय मुस्लिम हिन्दू घरों के सामने आकर चिढ़ाने के अंदाज में हरकतें करते हैं।

ग्रामीणों ने बताया है कि हिन्दुओं के त्योहारों के समय मुस्लिम दबाव बनाते हैं कि किसी भी तरह का जुलुस या DJ नहीं बजना चाहिए। मृतक के परिजन सोनू ने आरोप लगाया कि यह सब कुछ मुस्लिमों ने सुनियोजित ढंग से किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम दूल्हे को मारना चाहते थे लेकिन उसके ना मिलने पर पिता की हत्या कर दी।

सर्च एंड डिस्ट्रॉय… कश्मीर में लश्कर-TRF के कमांडर ढेर, हथियारों का जखीरा मिला: क्या है ‘ऑपरेशन केलर’, भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के साथ शुरू किया नया एक्शन

एक तरफ पहलगाम आतंकी हमले पर कार्रवाई करते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया है। वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ में आतंकियों को ढूँढ़कर उनका सफाया करने के लिए ‘ऑपरेशन केलर’ चलाया गया है।

‘ऑपरेशन केलर’ के तहत, भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ जिले के शोकल केलर इलाके में भारी गोलीबारी के दौरान 3 खूंखार आतंकवादियों को मार गिराया है। जानकारी के अनुसार मारे गए आतंकियों के पास से गोला असला और बारूद मिला है। इसमें ए के-46, लगभग 200 एके राउंड, कई मैगज़ीन, 3 ग्रेनेड और कुछ नकदी शामिल हैं।

मारे गए तीनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जु़डे़ थे। आतंकियों की पहचान शाहिद अहमद कुट्टे, अदनान शफी डार और अहसान अहमद शेख के रूप में हुई है।

आतंकियों को खत्म करने का मिशन ‘ऑपरेशन केलर’

ऑपरेशन केलर भारतीय सेना का एक खास अभियान है जो जम्मू और कश्मीर के शोपियाँ इलाके में चलाया गया। इस अभियान को 13 मई 2025 को आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत शुरु किया गया है। इस ऑपरेशन का सीधा मतलब है आतंकियों को ढूँढकर मारना यानि ‘सर्च एंड डिस्ट्रॉय’।

जी न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक ‘ऑपरेशन केलर’ का नाम शोपियाँ के शोकल केलर क्षेत्र से लिया गया गया है, जहाँ से राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट को आतंकियों की खूफिया जानकारी हाथ लगी थी। केलर गाँव के शुकरू के जंगलों में आतंकी छिपे हुए थे, जिसे भारतीय सेना ने ढूँढ़कर खत्म किया है। इस ‘ऑपरेशन केलर’ की सूचना भारतीय सेना ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट के माध्यम से दी।

अन्य जानकारी के अनुसार, भारतीय सेना ने ऑपरेशन केलर के तहत एक एक्शन वाला फोटो जारी किया है। फोटो में बताया कि ऑपरेशन के दौरान आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसकी जवाबी कार्रवाई में सेना ने लश्कर-ए-तैयबा के 3 आतंकी ढेर किए।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, शोपियाँ का जंगली इलाका आतंकियों का गढ़ इसलिए बना है, क्योंकि यह इलाका घने जंगलों के बीच है और 100 मीटर की दूरी पर किसी भी हलचल के देख पाना मुश्किल है। शोपियाँ जिला सिर्फ 141 किमी दूर पीर पंजाल की पहाड़ियों से है। पीर पंजाल के आसपास कुपवाड़ा, उरी, तंगधार, पुंछ और राजौरी जैसे इलाके है, जहाँ आतंकी आसानी से घुसपैठ कर सकते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, शोपियाँ में आतकियों को लोकल सपोर्ट मिलता है। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल के अनुसार घना जंगल और सेब का खेत होने की वजह से आतंकियों के लिए यह सेफजोन है।

ऑपरेशन केलर इसलिए चलाया गया ताकि इलाके से आतंकवाद को खत्म किया जा सके और वहाँ शांति बनी रहे। पहलगाम में हुए हमले के बाद लोगों में डर का माहौल था, इसलिए सेना ने यह सख्त कदम उठाया ताकि लोगों को भरोसा हो कि वे सुरक्षित हैं। यह ऑपरेशन दिखाता है कि भारतीय सेना आतंकियों के खिलाफ कितनी सख्त है और उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शने वाली नहीं है। अभी भी इलाके में तलाशी अभियान चल रहा है ताकि बचे हुए आतंकियों को भी पकड़ा जा सके।

अमेरिकी यूनिवर्सिटी को मुस्लिम-ईसाई-यहूदी के आयोजन कबूल, पर हिंदू हेरिटेज मंथ नहीं मनेगा: बर्कले यूनिवर्सिटी छात्र संघ के विरोध ने सनातन घृणा पर छेड़ी नई बहस

अमेरिका में यूसी बर्कले यूनिवर्सिटी छात्र संघ एएसयूसी यानी एसोसिएटेड स्टूडेंट्स ऑफ द यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया ने हिंदू हेरिटेज माह का विरोध किया है। ये हेरिटेज अक्टूबर में मनाने का प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन छात्रसंघ ने इसके खिलाफ मतदान किया। दरअसल अलग-अलग महीने में दूसरे कई हेरिटेज मनाने का प्रस्ताव भी था, जो पास हो गया। हिन्दू हेरिटेज माह के प्रस्ताव को कथित तौर पर ‘हिन्दू राष्ट्रवाद’ से जोड़ा गया जो उस प्रस्ताव में भी नहीं था। प्रस्ताव पास नहीं होने से हिन्दू छात्र और संगठनों में काफी निराशा देखी गई।

राजनीति नहीं, सांस्कृतिक उत्सव पर आधारित प्रस्ताव

प्रस्तावित सीनेट प्रस्ताव संख्या 2024/2025-042 एक कैरेबियाई हिंदू छात्र द्वारा पेश किया गया था। यह मुख्य रूप से यूसी बर्कले और अमेरिकी समाज में हिंदुओं के योगदान को सराहने के लिए लाया गया था। प्रस्ताव में विज्ञान और प्रौद्योगिकी से लेकर कला और शिक्षा तक के क्षेत्रों में उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। इसमें कहीं भी भारत का नाम नहीं लिया गया था। इसके बावजूद कई छात्र सीनेटरों ने इस पर आपत्ति जताई। इनका कहना था कि ये हिन्दू राष्ट्रवादी विचारधारा को सही ठहराने की कोशिश है।

उत्तरी अमेरिका के हिंदुओं के गठबंधन (CYAN) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा, “भारतीय और गैर-भारतीय मूल के हिंदू छात्रों में कई ऐसे हैं जो हिंदू राष्ट्रवाद के बारे में बहुत कम जानते हैं। ऐसे में हिन्दू हैरिटेज का जश्न मनाकर हम छात्रों को भारतीय राजनीति पर अपना रुख साफ के लिए मजबूर नहीं कर सकते।”

वहीं CYAN ने 5 मार्च 2025 को सार्वजनिक सीनेट बैठक के दौरान छात्र सीनेटरों द्वारा दिए गए “हिंदू विरोधी बयानों” की भी निंदा की। संगठन ने सीनेटर ईशा चंदर की आलोचना की, जिन्होंने कथित तौर पर एक सांस्कृतिक घोषणा का राजनीतिकरण किया और सीनेटर जस्टिन टेलर को धमकाने की कोशिश का विरोध किया। CYAN ने छात्र चुनावों के दौरान फेसबुक से बैठक की रिकॉर्डिंग को अस्थायी रूप से हटाने पर भी चिंता जताई, उन्होने कई सीनेटरों से हिंदू समुदाय और सीनेटर टेलर से माफी माँगने की बात कही।

CYAN ने प्रस्ताव और सीनेटरों के वक्तव्यों को किया साझा

चर्चा का एक वीडियो CYAN ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया है। इसमें अजीबोगरीब बातचीत सुनाई दे रही है, इसमें एक छात्र खुद का गला घोंट रहा है और ऐसे इशारे करता हुआ दिखाई दे रहा है जैसे कि उसे घुटन महसूस हो रही हो।

कुछ वक्ताओं ने कहा कि चूंकि हिंदू हैरिटेज माह दूसरे जगहों पर राजनीतिक आंदोलनों से जुड़ा रहा है, इसलिए सतर्कता जरूरी है। जबकि हिन्दू हेरिटेज माह का समर्थन करने वाले लोगों ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि ये गैर-राजनीतिक है और इसे भारतीय राजनीति के साथ जोड़ कर हिंदू समुदाय को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।

इस प्रस्ताव पर बहस के दौरान विरोधाभास साफ नजर आया। हिन्दू हेरिटेज माह का समर्थन करते हुए एक वक्ता ने कहा कि तीन धर्मों यहूदी, मुस्लिम और ईसाई को ASUC में औपचारिक प्रतिनिधित्व मिला हुआ है जबकि हिंदू अलग-थलग हैं। यूसी बर्कले यहूदी, मुस्लिम, ईसाई और लैटिन पहचान का जश्न मनाने पर गर्व करता है, लेकिन जब हिंदुओं की बात आती है, तो ASUC में विरोध के स्वर उठते हैं। एक सीनेटर ने इसकी तुलना “विचार को शौचालय में फ्लश करने” से की।

रंगीनमिजाजी में हनी ट्रैप हुआ पाकिस्तान का हाई कमिश्नर? होटल के कमरे में लड़की के साथ… किस्सों से बाजार गरम, बांग्लादेश से दुबई वाया इस्लामबाद भागा

बांग्लादेश में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर जैसे सबसे बड़े पद पर बैठे सैयद अहमद मारूफ की कथित रंगीन-मिजाजी की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स की मानें, तो सैयद अहमद मारूफ बांग्लादेश में समंदर के किनारे बसे कॉक्स बाजार इलाके के एक होटल में युवती के साथ रंगरेलियाँ मनाते रंगे-हाथ पकड़ा गया। इसी वजह से सैयद अहमद मारूफ बांग्लादेश से पाकिस्तान भाग गया है। खबरों के मुताबिक, मारुफ रविवार (11 मई 2025) को ढाका से दुबई होते हुए इस्लामाबाद के लिए निकल गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैयद अहमद मारूफ खान छुट्टी पर चला गया है और उसके बांग्लादेश छोड़ने की जानकारी बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय को दे दी गई है। इस दौरान उप उच्चायुक्त मुहम्मद आसिफ कार्यवाहक उच्चायुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहा है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार (9 मई 2025) को कॉक्स बाजार दौरे के दौरान मारूफ जाँच के दायरे में आए।

बीडी डाइजेस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद अहमद मारूफ को कॉक्स बाजार के होटल सी पर्ल में एक युवती के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ा गया। महिला की पहचान हफीजा हक शाह के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश बैंक के विदेशी मुद्रा विभाग में सहायक निदेशक के पद पर कार्यरत है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि होटल में मारूफ और हफीजा के अवैध संबंधों का खुलासा हुआ, जिससे राजनयिक हलकों में विवाद पैदा हो गया।

विवाद में फँसी बांग्लादेश बैंक की अधिकारी हफीजा हक शाह की फेसबुक प्रोफाइल से पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद अहमद मारूफ के साथ पुरानी तस्वीरें सामने आई। हालाँकि, विवाद बढ़ने के बाद महिला ने अपना फेसबुक अकाउंट डीएक्टिवेट या डिलीट कर दिया है।

बीडी डाइजेस्ट की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हफीजा अक्सर पाकिस्तानी दूतावास जाकर मारूफ से मुलाकात करती थी। न्यूज़ पोर्टल का कहना है कि इस मामले से जुड़े सबूत कई मीडिया संस्थानों के पास मौजूद हैं, लेकिन बांग्लादेश की यूनुस सरकार के प्रेस विंग के दबाव के चलते उन्होंने रिपोर्ट प्रकाशित नहीं किया। इस दबाव और बढ़ते विवाद के कारण पाकिस्तान को अपने हाई कमिश्नर को वापस बुलाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

पाकिस्तानी दूतावास ने अभी तक इस मामले पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया है।

इस बीच, सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के उच्चायुक्त सैयद अहमद मारूफ को कॉक्स बाजार के एक होटल में कथित रूप से आपत्तिजनक हालत में पकड़े जाने की तस्वीरें-वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।

यूज़र्स का दावा है कि मारूफ हनीट्रैप का शिकार हुआ है और उसका एक एमएमएस वीडियो भी सोशल मीडिया पर लीक हुआ है। हालाँकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन घटनाक्रम को लेकर अटकलें तेज़ हैं और मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।

कुछ यूजर्स का ये भी दावा है कि युवती के साथ रंगे-हाथों पकड़े जाने के बाद मारूफ थाईलैंड जैसे किसी तीसरे देश में भाग गया है।

ऑपइंडिया स्वतंत्र रूप से इन दावों की पुष्टि नहीं कर रहा है।

गौरतलब है कि सैयद अहमद मारूफ को दिसंबर 2023 में बांग्लादेश में पाकिस्तान का हाई कमिश्नर बनाया गया था। हाई कमिश्नर का पद किसी भी हाई कमीशन में सबसे बड़ा पद होता है। सैयद अहमद मारूफ बांग्लादेश में पाकिस्तान के अहम एसेट थे, लेकिन उनकी कथित रंगरेलियों की वजह से उन्हें वापस बुलाने के लिए सरकार मजबूर हो गई।