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रोहिंग्या घुसपैठियों को नहीं बचा पाया प्रशांत भूषण, सुप्रीम कोर्ट ने निर्वासन में दखल देने से किया इनकार: कहा- ये दूसरे देश के, इन पर विदेशी अधिनियम के तहत हो एक्शन

सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों के डिपोर्टेशन और उनकी रहने की स्थिति से जुड़े मामलों में गुरुवार (8 मई 2025) को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने डिपोर्टेशन पर कोई रोक नहीं लगाई और मामले को 31 जुलाई, 2025 को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। सुनवाई के दौरान कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने आरोप लगाया कि सुनवाई से ठीक एक रात पहले कुछ रोहिंग्या शरणार्थियों (महिलाएँ और बच्चे भी शामिल) को पुलिस ने हिरासत में लिया और संभवतः म्यांमार डिपोर्ट कर दिया गया। ये शरणार्थी संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (UNHCR) के कार्डधारक थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह शामिल थे। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 8 अप्रैल, 2021 के एक आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि डिपोर्टेशन केवल कानून के अनुसार होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस और प्रशांत भूषण ने दावा किया कि रात में शरणार्थियों को हिरासत में लिया गया और यह कोर्ट की अवमानना है। गोंसाल्वेस ने कहा कि यह घटना ‘चौंकाने वाली’ है और पिछले 10 साल से कोर्ट ने रोहिंग्या शरणार्थियों को संरक्षण दिया था।

प्रशांत भूषण ने बताया कि मणिपुर सरकार ने हाल ही में एक हलफनामा दायर कर कहा कि म्यांमार रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस स्वीकार नहीं कर रहा, क्योंकि उन्हें वहाँ ‘राज्यविहीन नागरिक’ माना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि UNHCR संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है, जो भारत में दो दशक से काम कर रही है। हालाँकि, सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि भारत शरणार्थी संधि का हिस्सा नहीं है और 2021 के आदेश के आधार पर डिपोर्टेशन का अधिकार है।

जस्टिस दीपांकर दत्ता ने 2021 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि रोहिंग्या शरणार्थी UNHCR कार्ड के आधार पर कोई विशेष अधिकार नहीं माँग सकते। उन्होंने यह भी कहा कि एक अंतरिम आदेश बाद के चरणों में रेस ज्यूडिकाटा (पहले तय हो चुका मामला) के रूप में काम करता है। भूषण ने तर्क दिया कि मामला केवल शरणार्थी संधि तक सीमित नहीं है, बल्कि नरसंहार संधि (जिसे भारत ने स्वीकार किया है) को भी देखना होगा।

जस्टिस सूर्य कांत ने कहा, “हम इन मामलों की अंतिम सुनवाई करेंगे। यह बेहतर होगा कि अंतरिम आदेश (स्टे ऑर्डर) देने के बजाय हम यह तय करें कि क्या उनके पास यहाँ रहने का अधिकार है। अगर है, तो इसे स्वीकार किया जाएगा, और अगर नहीं, तो कानून के अनुसार डिपोर्टेशन होगा।”

जस्टिस दत्ता ने असम में रोहिंग्या डिपोर्टेशन से जुड़े एक पुराने मामले का जिक्र किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में खारिज कर दिया था। गोंसाल्वेस ने इसे ‘प्रवासियों’ का मामला बताया, लेकिन जस्टिस दत्ता ने इसे शरणार्थियों का मामला माना। जस्टिस दत्ता ने कहा, “रोहिंग्या विदेशी हैं और अगर वे विदेशी अधिनियम के दायरे में आते हैं, तो उनके साथ उसी के अनुसार व्यवहार होगा।” गोंसाल्वेस ने NHRC बनाम अरुणाचल प्रदेश मामले का हवाला दिया, लेकिन जस्टिस दत्ता ने कहा कि यह दो जजों की बेंच का फैसला था, जो मौजूदा तीन जजों की बेंच पर बाध्यकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार तो हैं, लेकिन अनुच्छेद 19(1)(e) के तहत भारत में बसने का अधिकार नहीं है।

बता दें कि कुछ समय पहले सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या बच्चों के दिल्ली के स्कूलों में दाखिले से जुड़ी एक याचिका को खारिज करते हुए कहा कि बच्चों को पहले सरकारी स्कूलों में आवेदन करना चाहिए। अगर दाखिला नहीं मिलता, तो वे दिल्ली हाई कोर्ट जा सकते हैं। एक अन्य जनहित याचिका में कोर्ट ने कहा कि सभी बच्चों को बिना भेदभाव शिक्षा मिलनी चाहिए, लेकिन पहले रोहिंग्या परिवारों की निवास स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।

पहलगाम नरसंहार, भारत की 9 स्ट्राइक, ढाई मोर्चा और जम्मू पर पाकिस्तान का हमला… जानिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में कब क्या हुआ, कैसे युद्ध के मुहाने पर पहुँचे दोनों देश

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है, देश के स्वतंत्र होने के साथ ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का कारण जम्मू कश्मीर बना था। पाकिस्तान जब सीधे युद्ध से जीत नहीं पाया तो उसने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा दिया पाकिस्तान ने भारत में एक के बाद एक आतंकी हमले किए। 2008 में मुंबई में 26/11 के हमले में 166 जानें ले लीं। भारत डोजियर पर डोजियर देता रहा,वैश्विक मंच पर कोई भाव नहीं मिला। उधर पाकिस्तान की हिम्मत और बढ़ती ही चली गई।

इस पैटर्न में शिफ्ट तब देखने को मिला, जब सितंबर 2016 में उरी में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक किया गया। पाकिस्तान को एक बार और सबक सिखाया गया फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद। उरी में हमारे 19 जवान बलिदान हुए थे, पुलवामा में 40 जवानों का बलिदान हुआ। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक किया। पाकिस्तान को बता दिया गया कि अब भारत की भूमि को लहूलुहान किया जाएगा तो हम भी चुप बैठने वालों में से नहीं हैं।

इसके बावजूद पाकिस्तान पोषित आतंकियों ने 22 अप्रैल, 2025 को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला किया। धर्म पूछ-पूछकर 26 पर्यटकों को मार डाला गया। पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई। जम्मू कश्मीर में कारोबार ठप्प होने लगा। वहाँ हुए शांतिपूर्ण चुनाव और सरकार गठन से बौखलाए आतंकियों की इस करतूत के बाद भारत ने भी ठान लिया कि इस बार ऐसा जवाब दिया जाएगा कि दुश्मन फिर से ऐसी हिमाकत करने की सोचे भी नहीं। ऐसा हुआ भी। भारत के जवाब के बारे में जानेंगे, लेकिन उससे पहले आइए जानते हैं कि पहलगाम में क्या हुआ।

पहलगाम में क्या हुआ था, कैसे धर्म पूछ-पूछकर मारा

जम्मू कश्मीर का पहलगाम वो जिला है, जहाँ अमरनाथ धाम है, जहाँ बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू होती है। यहाँ की बैसरन घाटी पर्यटकों के आकर्षण का एक मुख्य केंद्र है। 22 अप्रैल के दिन भी यहाँ बड़ी संख्या में पर्यटक मौजूद थे। कई घोड़े से यात्रा कर रहे थे। इसी दौरान भीड़ में आतंकी घुस गए और इन सबको फ़ूड कोर्ट की तरफ ले गए। वहाँ से एग्जिट का रास्ता संकरा था। आतंकियों ने हिन्दुओं और मुस्लिमों को अलग-अलग किया, पैंट खोल-खोलकर चेक किया कि खतना हुआ है या नहीं – फिर मारा। महिलाओं को जीवित छोड़कर कहा गया, “जाओ, मोदी से बता देना।”

NIA इस मामले की जाँच कर रही है। शेख सज्जाद गुल को इस घटना के मास्टरमाइंड के रूप में चिह्नित किया गया। वो लश्कर-ए-तैय्यबा के मुखौटे ‘द रजिस्टेंस फोर्स’ का कमांडर है। TRF ने इस हमले के तुरंत बाद इसकी जिम्मेदारी ले ली थी, लेकिन भारत के सख़्त रवैये को देखते हुए इसने अपना बयान वापस ले लिया था। शेख बेंगलुरु से MBA कर चुका है। कई स्थानीय लोगों के भी आतंकियों से मिले होने की बात सामने आई। हाशिम मूसा इस आतंकी हमले में शामिल था, जो दक्षिणी कश्मीर के जंगलों में अब भी छिपा हुआ है।

पहलगाम में हमला करने वाले आतंकियों ने AK47 राइफल और M4 कार्बाइन रखे हुए थे। वो मिलिट्री यूनिफॉर्म में थे। मृतकों में कई ऐसे थे, जो नई-नई शादी के बाद हनीमून के लिए यहाँ पहुँचे थे। पहलगाम हमले में मारे जाने वालों में महाराष्ट्र के 6, गुजरात व कर्नाटक के 3, पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश के 2 पर्यटक शामिल थे। इनके अलावा आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, केरल, ओडिशा और उत्तर प्रदेश के एक-एक पर्यटक शामिल थे। अनुच्छेद-370 और 35A को निरस्त कर जम्मू कश्मीर व लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बनाए जाने के बाद ये सबसे बड़ा आतंकी हमला था।

‘ऑपरेशन सिंदूर’: पाकिस्तान में घुसकर भारत ने दिया करारा जवाब

पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले के 13 दिनों बाद भारत ने बुधवार (6 मई, 2025) की रात पाकिस्तान में 9 ठिकानों पर मिसाइलें दागीं। इनमें PoK (पाक अधिकृत कश्मीर) के अलावा पाकिस्तान के भीतर के कई इलाक़े भी शामिल थे। इस कार्रवाई को उन महिलाओं के सम्मान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया, आतंकियों ने जिनके सुहाग उजाड़े थे। भारतीय संस्कृति में सिंदूर का महिलाओं के लिए विशेष महत्व है, विवाहित स्त्रियों के लिए ये सुहाग की सुरक्षा का प्रतीक है। विवाह कार्यक्रम भी सिंदूर के बिना पूरा नहीं होता। इसीलिए, भारतीय महिलाओं के सम्मान में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया।

अब आपको बताते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया गया। पाकिस्तान ने इसे ‘अकारण’ हुआ हमला बताया। वहाँ के प्रधानमंत्री ने इसे जघन्य अपराध बताते हुए धमकाया कि बिना दण्डित किए नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को ऐसे अपराध के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है जो उसने किया ही नहीं। भारत की कार्रवाई रात के समय 2 बजे के आसपास शुरू हुई और लगभग आधे घंटे तक चली। पाकिस्तानी हुक्मरान बैठकों के लिए सुबह का इंतजार करते रहे। पाकिस्तान ने 31 आम नागरिकों के मारे जाने का दावा किया, भारत ने 2 दिन बाद स्पष्ट कर दिया कि 100 आतंकियों को मार गिराया गया है।

पाकिस्तान ने 5 भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया। हालाँकि, ये झूठा साबित हो गया क्योंकि ख़ुद उसके पीएम ने माना था कि भारतीय विमानों ने सीमा पार ही नहीं किया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री से जब CNN पर सबूत माँगा गया तो उन्होंने सोशल मीडिया का नाम लिया। परिणामस्वरूप उन्हें एंकर से बेइज्जत होना पड़ा। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में उन ठिकानों को निशाना बनाया जहाँ आतंकियों को प्रशिक्षण मिलता था, जहाँ से भारत में हमलों की साजिशें रची जाती थीं।

कौन से 9 ठिकाने, जिन्हें भारतीय मिसाइलों ने कर दिया तबाह

आइए, अब आपको बताते हैं कि वो कौन-कौन से 9 ठिकाने थे, जहाँ भारत की मिसाइलों ने आतंकियों को तबाह किया। इनमें प्रमुख है बहावलपुर का मरकज़ सुभान अल्लाह मस्जिद। ये जमात-ए-इस्लामी का मुख्यालय था। यहीं से पुलवामा हमले की साजिश रची गई थी। आतंकी मौलाना मसूद अज़हर यहीं रह रहा था। इस हमले में उसके परिवार के 10 लोग और 4 सबसे करीबी सहयोगी मारे गए। 18 एकड़ में फैले इस परिसर में आतंकी सरगना अपने परिवार वालों को भी साथ रखते थे। उसकी बहन, बहनोई, बीवी, भतीजा, भांजा और भाई ढेर हुए। मसूद अज़हर कहने लगा कि काश वो भी इस हमले में मारा जाता। ये वही मसूद अजहर है जिसे छुड़ाने के लिए पाकिस्तानी आतंकियों ने दिसंबर 1999 में भारत के विमान एयर इंडिया IC814 को हाईजैक किया था।

बहावलपुर की स्ट्राइक इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान की सीमा में 100 किलोमीटर भीतर घुसकर इसे अंजाम दिया गया। हमले का दूसरा ठिकाना बना पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त के मुरीदके स्थित मरकज़ तैबा। अंतरराष्ट्रीय सीमा में 25 किलोमीटर भीतर स्थित यही वो जगह है जहाँ 26/11 मुंबई हमले के आतंकियों को ट्रेनिंग दी गई थी। इसके निर्माण के लिए अलकायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन ने भी 1 करोड़ रुपए दिए थे। अमेरिका ने ऐब्टाबाद में घुसकर लादेन को मार कर 2001 के 9/11 हमले का बदला लिया और उसकी लाश को समुद्र में दफ़न कर दिया। मरकज़ तैबा में 1000 से अधिक छात्रों को रखा गया था और उनका ब्रेनवॉश किया जा रहा था। अजमल कसाब सहित 26/11 के अन्य आतंकियों को ‘दौरा-ए-रिब्बत’, यानी ख़ुफ़िया प्रशिक्षण यहीं दी गई थी। 26/11 के अन्य साजिशकर्ता डेविड हेडली और तहव्वुर राणा यहाँ आए थे। वो अब्दुल रहमान सैयद पाशा, हारून और खुर्रम सहित अन्य साजिशकर्ताओं के साथ यहाँ आए थे। उन्हें आतंकी सरगना जकीउर्रहमान लखवी से निर्देश प्राप्त होते थे।

सरजल में चल रहा जैश-ए-मोहम्मद का संचार नेटवर्क भी ध्वस्त कर दिया गया। ये नरोवाल जिले के शकरगढ़ तहसील में स्थित था। जैश-ए-मुहम्मद कई वर्षों से भारत के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इंटरनेशनल बॉर्डर से 6 km भीतर स्थित सरजल के तेहरा कलाँ गाँव में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) बनाकर उसकी आड़ में आतंकी शिविर चलाया जा रहा था। मार्च 2025 में जम्मू कश्मीर में हमला कर 4 पुलिस अधिकारियों की हत्या कर दी गई थी। 2 आतंकी भी मारे गए थे। इस हमले की पूरी साजिश सरजल में ही रची गई थी। यहीं से सीमा पर सुरंग बनाने का काम किया जाता था। घाटी में घुसपैठ कराए जाते थे। ड्रग्स भेजने के लिए भी इस जगह का इस्तेमाल होता था। भारत की सीमा में ड्रोन भेजे जाते थे। यानी, ये हथियार तस्करी का भी एक अड्डा था। जम्मू कश्मीर का संबा सेक्टर इससे नज़दीक ही है, ऐसे में ये जगह महत्वपूर्ण थी।

इसके बाद नंबर आता है सियालकोट स्थित मेहमूना जोया का, जो सीमा से 12 किलोमीटर भीतर स्थित है। यहाँ हिज़्बुल मुजाहिद्दीन का ट्रेनिंग कैम्प था। आतंकी सरगना मोहम्मद इरफ़ान खान, या इरफ़ान टांडा यहाँ का पूरा कामकाज देखते थे। यहाँ किसी भी समय पर 20-25 आतंकी मौजूद रहते थे।

हिज़्बुल का भी भारत में हुए कई आतंकी हमलों में हाथ रहा है। जम्मू कश्मीर में जिस बुरहान वानी के मारे जाने के बाद उसके जनाजे में लाखों लोग उमड़े थे, वो इसी आतंकी संगठन का कमांडर था। जनवरी 2016 में भारतीय वायुसेना के पठानकोट एयर बेस पर हुए हमले की साजिश यहीं रची गई थी। इसके बाद चौथा ठिकाना जहाँ भारत ने स्ट्राइक किया वो था भिम्बर का मरकज़ अहले हदीथ बरनाला। LoC से 9 km भीतर स्थित इसी जगह पर IED बमों को लेकर आतंकियों को प्रशिक्षित किया जाता था। जंगलों में इन आतंकियों को कैसे सर्वाइव करने है, ये भी यहीं सिखाया जाता था। उन्हें कई ख़तरनाक हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी जाती है। अब इसे समतल कर दिया गया है। यहाँ 100-150 आतंकी कैडर मौजूद हुआ करते थे।

भारत का छठा निशाना बना – कोटली का अब्बास। LoC से 13 किलोमीटर अंदर। LeT (लश्कर-ए-तैय्यबा) के आतंकियों को आत्मघाती बनने की ट्रेनिंग यहाँ दी जाती थी। यहाँ का पूरा प्रबंधन सँभालता था मुफ़्ती अब्दुल रउफ असगर। उसका साथ देता था हाफिज अब्दुल सकूर उर्फ़ काज़ी जर्रार। वो NIA की लिस्ट में भी वॉन्टेड है। उनका ब्रेनवॉश होता था, 72 हूर का लालच दिया जाता था और फिर भारत में भेज दिया जाता था। यहाँ भी 100-125 आतंकी मौजूद रहते थे। LoC से 13 किलोमीटर भीतर स्थित कोटली का गुलपुर सातवाँ निशाना बना। जम्मू कश्मीर के राजौरी और पुँछ में जो भी आतंकी ऑपरेट करते हैं, उन्हें यहीं से दिशानिर्देश मिलते थे। पुँछ में अप्रैल 2023 में हुए हमले की साजिश यहीं रची गई थी। इसी तरह, रियासी में वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं से भरी बस पर गोलीबारी की साजिश यहीं रची गई थी। इसमें मरने वालों में महिलाओं और छोटे बच्चे भी शामिल थे। 9 श्रद्धालु मारे गए थे। यहाँ आतंकियों को पहाड़ियों में हमलों की ट्रेनिंग दी जाती थी।

इन 7 ठिकानों के अलावा भारत ने मुज़फ़्फ़राबाद स्थित सवाई नाला को निशाना बनाया, यहाँ भी LeT वालों ने अपना एक बड़ा ट्रेनिंग सेंटर स्थापित करके रखा हुआ था। इसे बैत-उल-मुजाहिद्दीन के नाम से भी जाना जाता है। ये मुज़फ़्फ़राबाद-नीलम रोड पर चेलाबन्दी पुल के पास स्थित था। 21वीं सदी की शुरुआत से ही ये सेंटर लगातार चल रहा था। यहाँ LeT कमांडरों का पंजीकरण होता था। यहाँ दौरा-ए-आम की ट्रेनिंग होती थी, जिसके तहत इस्लामी से लेकर GPS-मैप तक की ट्रेनिंग दी जाती थी। ये LoC से 30 किलोमीटर भीतर स्थित है। 200-250 आतंकियों वाले इस सेंटर से उत्तरी कश्मीर में आतंकी भेजे जाते थे। मुज़फ़्फ़राबाद का ही सैयद बिलाल 9वाँ और अंतिम निशाना बना। यहाँ भी JeM के आतंकियों को गोला-बारूद और हथियारों का प्रशिक्षण दिया जाता था। ये मुजफ्फराबाद के लाल किले के पास स्थित था। अब्दुल्लाह जिहादी उर्फ़ अब्दुल्लाह कश्मीरी और भारतीय भगोड़ा आशिक नांगरू यहीं मौजूद रहता था। पाकिस्तानी सेना का ‘स्पेशल सर्विस ग्रुप’ (SSG) भी यहाँ आतंकियों को ट्रेनिंग देता था।

इन निशानों में JeM के 4, LeT के 3 और हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के 2 ठिकाने शामिल थे। इनमें से 4 पाकिस्तान में थे, जबकि 5 पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जो हिस्सा तो भारत का ही है लेकिन पाकिस्तान ने अवैध रूप से कब्जा रखा है। इन सारे ट्रेनिंग सेंटरों पर आतंकी संगठनों को पाकिस्तानी फ़ौज और ख़ुफ़िया एजेंसी ISI से लगातार सहयोग मिलता रहता था। फंडिंग से लेकर प्रोपेगंडा तक के लिए आतंकियों ने यहाँ सेंटर बना रखे थे। मरकज़ सुभान अल्लाह 2015 से आतंकियों का गढ़ बना हुआ था, वहीं मुरीदके स्थित मरकज़ तैबा से मुल्ले-मौलवी ब्रेनवॉश का अभियान भी चलाते थे।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सक्रिय हुआ भारत का ‘ढाई मोर्चा’

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि भारत में बैठे कुछ लोगों को भी मिर्ची लग गई। जब कॉन्ग्रेस पार्टी के लोग मीडिया के सामने आए तो राहुल गाँधी समेत सभी नेताओं के चेहरे उतरे हुए थे। पत्रकार व फिल्मकार अविनाश दास सोशल मीडिया पर युद्ध के ख़िलाफ़ कविताएँ लिखने लगे। वहीं ईरान की अभिनेत्री व मॉडल मंदाना करीमी ने हिन्दू धर्म को भला-बुरा कहा, जबकि उन्होंने ख़ुद गौरव गुप्ता से शादी के लिए हिन्दू धर्म अपनाया था। हालाँकि, उनका तलाक़ हो चुका है। कॉन्ग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने कहा कि भारत अपने स्ट्राइक में पाकिस्तान में चील-कौवे मार गिराता है।

जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की ख़बर आई थी, उसी समय कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कह दिया था कि सुरक्षा बलों को इसके बारे में नहीं बताया गया है। कॉन्ग्रेस पार्टी के एक अन्य पदाधिकारी उदित राज ने सिंदूर को एक धर्म विशेष का चिह्न बता दिया। ‘The Hindu’ समूह की पत्रिका Frontline की संपादक वैष्णा रॉय ने सिंदूर को ‘जुनूनी हिंदुत्व’ से जोड़ते हुए इसे पितृसत्तामक प्रतीक बता दिया। इस दौरान ये सभी लोग ये भूल गए कि पहलगाम में आतंकियों ने धर्म पूछकर निशाना बनाया था, शुरू पाकिस्तान ने किया था। भारत ने तो केवल ‘न्याय’ किया, जवाबी कार्रवाई की।

‘The Wire’ की आरफा खानम शेरवानी ने पाकिस्तानी प्रोपेगंडा चलाते हुए दावा किया कि भारत ने आम नागरिकों की हत्या की है, आतंकियों को नहीं मारा है। शायद ये वही भीतर ‘ढाई मोर्चा’ है जिससे देश की लड़ाई है, जिसका जिक्र दिवंगत CDS जनरल बिपिन रावत ने किया था। वैसे विदेशी मीडिया भी पीछे नहीं रहा। पहलगाम के आतंकियों को ‘बंदूकधारी’ और ‘बाग़ी’ बताने वाले DW, BBC और ग्लोबल टाइम्स जैसे मीडिया संस्थानों ने भी पाकिस्तानी नैरेटिव को आगे बढ़ाने की कोशिश की। पाकिस्तान ने जमकर झूठे प्रचार-प्रसार का बहाना बनाया।

दिन में शांति, रात में तनाव: युद्ध के मुहाने पर भारत-पाकिस्तान

भारत की स्ट्राइक के बाद ही पाकिस्तान की रातों की नींद उड़ी हुई है। पाकिस्तानी जाग रहे हैं, क्योंकि उन्हें भारत की जवाबी कार्रवाई से भय है। भारतीय जाग रहे हैं, क्योंकि उन्हें ‘गुड न्यूज़’ का इंतज़ार है। गुरुवार (8 मई, 2025) को पाकिस्तान ने जम्मू, पंजाब और राजस्थान पर मिसाइल एवं ड्रोन्स से हमला बोल दिया। वो तो भला हो रूस के साथ सौदे में मिले S-400 एयर डिफेंस सिस्टम का, जिसने उन सभी को मार गिराया। जम्मू एयरपोर्ट और यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया गया। अमृतसर को निशाना बनाया गया। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में चल रहे IPL के मैच को रोकना पड़ गया।

इससे पहले दिन में भारत ने लाहौर का एयर डिफेंस सिस्टम उड़ा दिया था। पाकिस्तान इस्लामाबाद और लाहौर से वीडियो बना-बना कर ये साबित करने की कोशिश में लगे रहे कि उनके यहाँ सब ठीक है। राजस्थान के जैसलमेर में भारत ने पाकिस्तान के F-16 फाइटर जेट को भी मार गिराया। जम्मू कश्मीर के साम्बा में घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया गया। कश्मीर में बॉर्डर के कई इलाक़ों में देर रात तक भारी गोलीबारी चलती रही। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि पूरे चंडीगढ़ में ब्लैकआउट करना पड़ा था। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में स्कूल भी बंद करने पड़े।

उधर पूरा का पूरा वामपंथी गिरोह एक नया शब्द लेकर आ गया – De-escalation. ये लोग लगातार युद्ध के खिलाफ लिखने लगे, जैसे भारत ने ही सबकुछ शुरू किया हो। विनोद कापड़ी से लेकर आरफा खानम शेरवानी तक ये भूल गए कि वो पाकिस्तान ही था जिसने 1947, 1965, 1971 और 1999 में भारत पर हमला किया और हमेशा मुँह की खाई। वो पाकिस्तान ही था जिसने 26/11 मुंबई हमले को अंजाम दिया और 166 निर्दोष लोग मारे गए। पठानकोट, पुलवामा, उरी, रियासी और पहलगाम में हमले किए गए। यूपीए काल में दिल्ली, पुणे, हैदराबाद, जयपुर, असम, पटना और वाराणसी तक में बम धमाके हुए – इन सबके पीछे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद ही था।

पाकिस्तान परस्तों को एक और झटका? वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ का दावा- भारत सरकार ने ब्लॉक किया उसका प्लेटफॉर्म

पाकिस्तान ने भारत के पश्चिमी बॉर्डर पर बसे शहरों पर एक सुनियोजित और सटीक हवाई हमला किया। इसके ठीक एक दिन बाद लेफ्टविंग मैगजीन ‘द वायर’ ने दावा किया कि भारत सरकार ने पूरे देश में उसके प्लेटफॉर्म तक पहुँच को ब्लॉक कर दिया है।

‘द वायर’ ने अपने बयान में कहा, “भारत सरकार ने संविधान में दी गई प्रेस की आजादी की गारंटी का खुला उल्लंघन करते हुए thewire.in को पूरे भारत में ब्लॉक कर दिया है। इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स का कहना है कि ‘द वायर’ को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आदेश के तहत आईटी एक्ट, 2000 के आधार पर ब्लॉक किया गया है।”

हालाँकि, ‘द वायर’ ने आरोप लगाया कि सरकार ने उसका प्लेटफॉर्म ब्लॉक किया, लेकिन कई यूजर्स ने बताया कि उनकी वेबसाइट अब भी Accessible है। यह ‘द वायर’ की पुरानी रणनीति मानी जा रही है, जिसमें वह खुद को पीड़ित दिखाकर सरकार पर दबाव बनाती है और नीतियों को बदलवाने की कोशिश करती है।

‘ऑपइंडिया’ ने पाया कि ‘द वायर’ की वेबसाइट भारत में अब भी खुल रही है, जैसा कि नीचे दिखाया गया है।

The Wire की वेबसाइठ का स्क्रीनशॉट

शायद ‘द वायर’ ने सरकार के उस निर्देश को भाँप लिया, जिसमें एक दिन पहले पाकिस्तान से आने वाले कंटेंट को स्ट्रीम करने पर रोक लगाई गई थी।

‘द वायर’ ने अपने बयान में कहा, “हम इस खुली सेंसरशिप का विरोध करते हैं, खासकर ऐसे नाजुक वक्त में जब भारत के लिए सच्ची, निष्पक्ष और तर्कसंगत खबरें और सूचनाएँ सबसे बड़ी ताकत हैं।”

हालाँकि, कई यूजर्स ने दावा किया कि वे ‘द वायर’ की वेबसाइट नहीं खोल पा रहे हैं।

‘द वायर’ ने कहा कि वह इस कदम को चुनौती देगा, लेकिन कैसे और कब, इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी।

भारत ने पाकिस्तानी कंटेंट पर लगाई रोक

केंद्र सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने एक बड़ा फैसला लेते हुए पाकिस्तान में बने सभी कंटेंट – वेब सीरीज, फिल्में, पॉडकास्ट और गानों को भारत में चलने वाले सभी ओटीटी और मीडिया स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर बैन कर दिया। यह आदेश 8 मई 2025 से लागू हो गया है। मंत्रालय ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ के हित में उठाया गया कदम बताया।

यह फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच आया है, जो 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद और गहरा गया। इस कदम को सरकार की जीरो-टॉलरेंस नीति का संकेत माना जा रहा है। यह आदेश ठीक उस दिन आया, जब पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान की फिल्म ‘अबीर गुलाल’ भारत में रिलीज होने वाली थी।

यह कोई इकलौता कदम नहीं है। कुछ दिन पहले ही भारत सरकार ने पाकिस्तानी डिजिटल मौजूदगी पर सख्ती की थी। करीब 16 यूट्यूब चैनल, कई इंस्टाग्राम अकाउंट्स खासकर हानिया आमिर और माहिरा खान जैसे सेलेब्रिटीज के अकाउंट्स को बैन किया गया। साथ ही पाकिस्तानी कलाकारों के साथ किसी भी तरह के सहयोग पर रोक लगा दी गई।

रूस से आया S-400 ही नहीं, ‘मेक इन इंडिया सिस्टम’ ने भी फेल किए पाकिस्तानी हमले: AKASH-L70 ने हर ड्रोन मार गिराया, जानिए कैसे देश में ही बने मिसाइलों से बचाने वाले कवच

8 मई, 2025 को पाकिस्तान ने जम्मू, अमृतसर, पठानकोट, जैसलमेर समेत कई भारतीय शहरों को अपना निशाना बनाया। उसने इन शहरों पर ड्रोन स्वार्म (ड्रोन का समूह) दागा। पाकिस्तान इसके जरिए भारत के सैन्य ठिकानों और रिहायशी इलाकों में नुकसान पहुँचाना चाहता था। इसका भारत ने करारा जवाब दिया, उन्होंने यह सभी हमले नाकाम कर दिए। भारत ने इसके अपनी उन्नत रक्षा प्रणालियों का इस्तेमाल किया। जहाँ रूस से लिए गए S-400 सिस्टम ने कई हमले नाकाम किए तो वहीं अधिकांश को जवाब भारतीय सिस्टमों ने ही दिया।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से S-400 और उसको भारतीय सेना में शामिल करने को लेकर काफी चर्चा हुई है। हालाँकि, इस चर्चा में भारतीय एयर डिफेन्स सिस्टम AKASH, उन्नत L-70 तोपों और MRSAM जैसे सिस्टमों के विषय में ज्यादा बात नहीं हुई। पाकिस्तान के इस हमले को नाकाम करने में इनका सबसे बड़ा रोल रहा है। पाकिस्तान ने हमला जरूर किया लेकिन यह इतने भी जबरदस्त नहीं थे कि इनके लिए हजारों करोड़ के S-400 जैसे सिस्टम का इस्तेमाल लगातार किया जाए। नीचे हम बता रहे हैं कि कौन-कौन से भारतीय सिस्टम इस्तेमाल हुए हैं।

AKASH मिसाइल सिस्टम

AKASH मिसाइल सिस्टम को DRDO ने विकसित किया है। यह एक सरफेस टू एयर मिसाइल (SAM) सिस्टम है। इसका मुख्य काम दुश्मन के हवाई हमले का जावाब देना है। यह दुश्मन के विमानों इसे भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) ने विकसित किया है। AKASH सिस्टम वर्ष 2009 में भारतीय सेना में शामिल है।

इसका इस्तेमाल थल सेना और वायु सेना, दोनों ही करती है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत के पास वर्तमान में 15000+ से अधिक AKASH मिसाइल हैं। एक AKASH सिस्टम की कीमत लगभग ₹2.5 करोड़ है। इसकी एक यूनिट में एक राडार और चार लॉन्चर होते हैं। इसमें शामिल राडार का नाम राजेन्द्र है।

यह दुश्मन के हवाई टारगेट को ट्रैक करता है। यह दुश्मन की मिसाइलें, लड़ाकू विमान और ड्रोन जैसे चीजों को ट्रैक करता है। इसके बाद AKASH सिस्टम में शामिल 3 लॉन्चर इन पर मिसाइलें दागते हैं। AKASH सिस्टम एक बार में 64 ऐसे टारगेट ट्रैक कर सकता है और उनमें से 12 को निपटा सकता है।

यह लगभग 50 किलोमीटर दूर से खतरे को ट्रैक कर सकता है और 18 किलोमीटर तक की ऊँचाई पर उड़ रहे किसी दुश्मन के किसी मिसाइल-विमान को गिरा सकता है। AKASH सिस्टम को भारत ने सीमाई इलाकों में तैनात किया हुआ है। यह भारत के कई एयरबेस और सीमाई पोस्ट पर तैनात है।

पाकिस्तान के हमलों को इसी सिस्टम ने बड़े पैमाने पर रोका है। AKASH मिसाइल सिस्टम ने पाकिस्तान द्वारा फायर किए गए ड्रोन मार गिराए हैं। सैन्य अधिकारीयों ने भी इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा है कि इसका पूरा इस्तेमाल इस हमले में किया गया है।

MRSAM मिसाइल सिस्टम

भारत ने इस हमले में MRSAM सिस्टम भी इस्तेमाल किया हैं। यह भी सरफेस टू एयर मिसाइल (SAM) सिस्टम है लेकिन यह AKASH सिस्टम से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम है। इसे भी DRDO ने विकसित किया है। इसे इजरायल के साथ मिलाकर बनाया गया है।

MRSAM में सुपरसोनिक मिसाइल शामिल होती हैं। यह लगभग 70 किलोमीटर तक के लक्ष्यों को उड़ाने में सक्षम है। MRSAM को वर्तमान में भारतीय वायुसेना और नौसेना इस्तेमाल करते हैं। MRSAM को ट्रकों पर लगाया जा सकता है और इसे जहाजों पर भी लगाया जाता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इसे भी भारत के वायुसेना के अड्डों पर भी तैनात की गई है।

MRSAM सिस्टम लगभग 2000 किलोमीटर का इलाका कवर करता है और इसमें आने वाले किसी हवाई खतरे को तुरंत उड़ा देता है। MRSAM को भी रिपोर्ट्स के अनुसार इस हमले में इस्तेमाल किया गया है। वायुसेना में MRSAM को 2021 में शामिल किया गया था। MRSAM को और भी विकसित करने पर वर्तमान में काम चल रहा है।

L-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन

इन मिसाइल सिस्टम के अतिरिक्त भारत ने पाकिस्तानी ड्रोन गिराने के लिए बड़े पैमाने पर L-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन भी इस्तेमाल की। यह स्वीडन की बोफोर्स कम्पनी ने बनाई है और इसका निर्माण भारत में ही लार्सन एंड टुब्रो कम्पनी करती है। भारत के पास ऐसी 1000 ऐसी एंटी एयरक्राफ्ट गन हैं।

भारत ने इन्हें राडार समेत अन्य कई तकनीकी मोर्चों पर मजबूत भी किया है। L-70 एंटी एयरक्राफ्ट गन अब ड्रोन हमले नाकाम में करने में भी बड़े स्तर पर सक्षम है। यह लगभग 4 किलोमीटर दूरी तक मार करती है। यह दुश्मन के ड्रोन को केवल फायर करके ही नहीं गिराती बल्कि उन्हें जाम भी कर देती है।

L-70 को भारत ने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कई जगह लगा रखा है। L-70 के कई ड्रोन को गिराने के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। कई विशेषज्ञों ने बताया है कि जम्मू के ऊपर हुए अधिकांश हमले इसी एंटी एयरक्राफ्ट गन ने नाकाम किए हैं।

DRDO का काउंटर UAS सिस्टम

पाकिस्तान के हमले को नाकाम करने के लिए DRDO का कौन्ते UAS सिस्टम भी इस्तेमाल किया गया है। आधिकारिक तौर भी इस बात की पुष्टि की जा चुकी है। DRDO ने D4 नाम से एक ड्रोन विरोधी सिस्टम तैयार किया है। इसका नाम D4 है। इसे एक ट्रक पर लगाया जाता है।

इसका निर्माण BEL करती है। BEL ने इसके बारे में बताया है कि यह काउंटर ड्रोन सिस्टम (डी4 सिस्टम) उड़ते हुए ड्रोन (माइक्रो/स्मॉल यूएवी) को तुरंत खोजने, पता लगाने, ट्रैकिंग और न्यूट्रलाइजेशन (सॉफ्ट/हार्ड किल) करने में सक्षम है। DRDO का यह सिस्टम भी फायर के अलावा ड्रोन को जाम करके गिरा सकता है।

यह एकदम नई तकनीक है लेकिन इसे भी कई जगह तैनात किया जा चुका है।

इन भारतीय सिस्टम के अलावा भारत ने शिल्का, ZU-23 और S-400 समेत कई ऐसे ही एयर डिफेन्स तकनीकों का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ किया है। इसके चलते पाकिस्तान कोई भी नुकसान भारतीय शहरों को नहीं पहुँचा पाया है। हालाँकि, भारत द्वारा किए गए हमलों में लाहौर का एयर डिफेन्स तबाह कर दिया गया है।

कोयला खदान ही नहीं… ऑस्ट्रेलिया में अब समंदर वाले पोर्ट पर भी अडानी ग्रुप का कब्जा: सिंगापुर की कंपनी से हुआ सौदा, कैश की जगह शेयरों में की लेनदेन

अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने सिंगापुर की कारमाइकल रेल एंड पोर्ट सिंगापुर होल्डिंग्स से एबॉट पॉइंट पोर्ट होल्डिंग्स की 100% हिस्सेदारी खरीदते हुए उसका अधिग्रहण कर लिया है। यह सौदा 17,244 करोड़ रुपये का है और इसे नकद के बजाय शेयरों के आदान-प्रदान (FDI-ODI शेयर स्वैप) के जरिए पूरा किया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सौदे की शेयर खरीद और सदस्यता समझौता 17 अप्रैल 2025 को साइन किया गया, लेकिन इसे पूरा होने के लिए नियामक और शेयरधारकों की मंजूरी की जरूरत है। इस अधिग्रहण से अडानी पोर्ट्स की वैश्विक उपस्थिति मजबूत होगी, क्योंकि एबॉट पॉइंट पोर्ट ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्वींसलैंड में एक प्रमुख निर्यात टर्मिनल है।

एबॉट पॉइंट पोर्ट का अधिग्रहण इसलिए भी खास है, क्योंकि ये ऑस्ट्रेलिया के उन चंद पोर्ट्स में से है, तो तट (2.75 किमी) से सबसे नजदीक गहरे पानी का पोर्ट है। यानी यहाँ से बड़े मालवाहक जहाज कोयले का परिवहन कर सकते है। इसके अलावा इस पोर्ट प्वॉइंट तक जाने के लिए विशेष तौर पर एक रेलवे लाइन भी बनाई गई है, जिससे सामान आसानी से पहुँचाया जा सकता है।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया में अडानी की कंपनी के पास कोयले के खदान भी है। ऐसे में ये अधिग्रहण कंपनी के लिए बेहद फायदे का सौदा साबित हो सकता है।

इस सौदे के लिए सिरिल अमरचंद मंगलदास ने कानूनी सलाह दी। सिरिल अमरचंद की टीम का नेतृत्व रुतविज पंड्या, परिधि अडानी, सुभलक्ष्मी नस्कर और मोल्ला हसन ने किया, जिन्हें कई सहयोगियों ने सहायता दी। पिछले साल भी सिरिल अमरचंद ने अडानी पोर्ट्स को गोपालपुर पोर्ट और एस्ट्रो ऑफशोर के अधिग्रहण में सलाह दी थी।

यह सौदा सेबी (ICDR) नियमों के तहत प्राथमिकता आधार पर शेयर जारी करके किया गया। अडानी पोर्ट्स भारत की सबसे बड़ी पोर्ट और लॉजिस्टिक्स कंपनी है, जो 13 स्थानों पर मौजूद है। यह अधिग्रहण अडानी समूह की पूर्वी और पश्चिमी तटों पर समानता की रणनीति का हिस्सा है।

भारत ने 1 ही रात में गिराए 50+ पाकिस्तानी ड्रोन, फाइटर जेटों को भी मिसाइल से उड़ाया: 15 शहरों पर हमले करने की कोशिश पूरी तरह नाकाम, ‘सुदर्शन’ देश की सुरक्षा में तैनात

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए धवस्त किया। भारत के हमले से पाकिस्तान में लगी आग के बाद पाकिस्तानी फौज लगातार LOC पर फायरिंग कर शांति समझौते को तोड़ रही है। इस बीच भारतीय सेना ने पुष्टि की है कि 8 और 9 मई 2025 देर रात और सुबह पाकिस्तान द्वारा भारत में कई स्थानों पर किए गए हमलों के प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया गया है। पाकिस्तान के 3 फाइटर जेट समेत उसकी दर्जनों मिसाइल और 50 से अधिक ड्रोन को हवा में ही साफ कर दिया।

पाकिस्तान ने मुख्य रूप से उत्तरी और पश्चिमी भारत के 15 महत्वपूर्ण शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। पाकिस्तान ने जिन शहरों पर हमले किए थे, उनमें मुख्य रुप से अमृतसर, पठानकोट, जम्मू, और भुज शामिल थे। इसके अलावा पाकिस्तान ने उधमपुर, सांबा, जम्मू, अखनूर, नगरोटा सहित कई क्षेत्रों को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया था, जिसका जवाब भारतीय सेना की वायु रक्षा इकाइयों और सुरक्षा बलों ने मुँहतोड़ दिया है। जानकारी के मुताबिक L-70 गन, जेडयू-23 मिमी, शिल्का सिस्टम और कुछ एडवांस काउंटर-यूएएस उपकरणों के जरिए भारतीय सेना ने पाकिस्तानी ड्रोन को खत्म किया। इसके अलावा पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामूला, उरी, पुंछ, मेंढर और राजौरी सेक्टरों में मोर्टार और भारी कैलिबर आर्टिलरी का इस्तेमाल किया और LOC पर गोलीबारी तेज की, जिसका जवाब भारतीय सेना ने दिया।

भारतीय सेना के प्रवक्ता ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “कल रात (8 मई 2025) से, हमने पाकिस्तान की ओर से कई उकसाने वाले ड्रोनऔर मिसाइल हमलों के प्रयासों को देखा। हमारी मजबूत और बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली ने इन सभी खतरों को समय पर पहचान कर निष्प्रभावी कर दिया। किसी भी नागरिक या सैन्य संपत्ति के नुकसान की कोई खबर नहीं है। हमारे जवान पूरी तरह से सतर्क हैं और देश की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

सेना के सूत्रों के अनुसार, भारत की वायु रक्षा प्रणाली, जिसमें स्वदेशी रूप से विकसित आकाश मिसाइल प्रणाली और अन्य आधुनिक रडार प्रणालियाँ शामिल हैं, ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोनों को सीमा के पास ही नष्ट कर दिया। इसके अलावा, सीमा सुरक्षा बल (BSF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने घुसपैठ की कोशिशों को भी विफल कर दिया। माना जा रहा है कि S-400 ‘सुदर्शन कवच‘ जैसी एडवांस निगरानी प्रणालियों ने इन हमलों के प्रयासों का पता लगाने और उन्हें नाकाम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह प्रणाली उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग और थर्मल सेंसर से लैस है, जो दुश्मन की गतिविधियों की सटीक जानकारी प्रदान करती है।

भारतीय वायु सेना (IAF) ने पाकिस्तान के भीतर कुछ चिन्हित लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। जानकारी के मुताबिक, इन लक्ष्यों में पाकिस्तानी वायु रक्षा रडार स्टेशन और लॉजिस्टिक्स ठिकाने शामिल थे। यह कार्रवाई पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों के जवाब में ‘उसी क्षेत्र और उसी तीव्रता’ के सिद्धांत पर आधारित थी।

कुल मिलाकर, पाकिस्तान के भारत में हमले करने के सभी प्रयास विफल रहे हैं। जबकि पाकिस्तान के हमले दिशाहीन और नाकाम साबित हुए हैं, भारत की जवाबी कार्रवाई सटीक और प्रभावी रही है, जिसने दुश्मन के सैन्य ढाँचे को नुकसान पहुँचाया है। सीमा पर तनाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन भारतीय सेना पूरी तरह से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

बलूचिस्तान ने भी उड़ाई पाकिस्तानी फौज की धज्जियाँ… BLA ने ट्रक बम से उड़ाया, गैस पाइपलाइन में भी विस्फोट: 6 जगह ताबड़तोड़ हमले; बलोच बोले- हमें मिल गई आजादी

आतंकवादियों को पनाह देकर उन्हें पालने पोसने वाले इस्लामिक स्टेट पाकिस्तान की खैर मुश्किल में है। भारत से बैर लेकर एक ओर लाहौर और इस्लामाबाद को अपने निशाने पर ले लिया तो वहीं दूसरी ओर दशकों से मन में आजादी की ज्वाला लिए बलोच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने भी मौका देखकर पाकिस्तान पर धावा बोल दिया है।

बलूचिस्तान के प्रसिद्ध लेखक और बलूच लोगों की अधिकारों के लिए लड़ने वाले करने वाले मीर यार बलूच ने दावा किया है कि BLA ने पाकिस्तान के डेरा बुगती के गैस क्षेत्रों पर हमला कर दिया था। इस जगह पर 100 से भी अधिक गैस के कुएँ बने हैं। ये पाकिस्तान के लिए गैस आपूर्ति की मुख्य जगहों में से एक है।

इसके अलावा BLA ने पाकिस्तान की सेना की अलग अलग चौकियों पर हमला कर दिया। BLA का दावा है कि उनकी सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले बलूचिस्तान के कीच, मुस्तंग, कच्ची और जामरान समेत अलग अलग 6 जगहों पर हमले किए हैं। रिमोट कंट्रोल बम और अन्य हथियारों के जरिए किए गए हमलों में पाक सेना को नुकसान भी हुआ है।

इसके साथ ही मीर यार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर संयुक्त राष्ट्र से बलूच को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित करने की माँग की है।

अपनी पोस्ट में मीर यार बलूच ने लिखा, “हमने अपनी आजादी का ऐलान कर दिया है। पाकिस्तान का अंत निकट है। हम भारत से अनुरोध करते हैं कि नई दिल्ली में बलूचिस्तान का दूतावास बनाने की अनुमति दें। साथ ही UN से अनुरोध है कि वे ‘डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान’की आझादी को मान्यता देकर सदस्य देशों की बैठक के साथ समर्थन दें।”

बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए लेखक मीर यार काफी सक्रिय भूमिका में नजर आते हैं। एक्स पर वह भारत और बलूचिस्तान की दोस्ती की तस्वीरें साझा करते रहते हैं। एक अन्य पोस्ट में मीर यार ने पाकिस्तान के सैन्य ट्रक को उड़ाने की वीडियो साझा की है। इसमें 14 पाकिस्तानी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया गया है।

मझधार में पाकिस्तान

भारतीय सेना ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बसे 9 आतंकी ठिकानों को मिसाइल अटैक कर ध्वस्त कर दिया। इसमें जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के घर के 14 लोगों समेत जैश, लश्कर- ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिद्दीन के लगभग 100 आतंकियों के मारे जाने की बात सामने आई। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने भारत पर जवाबी हमले किए लेकिन भारतीय सैन्य प्रणालियों ने सभी हमलों को नाकाम कर दिया।

अब पाकिस्तान को एक तरफ भारत की अभेद सैन्य शक्तियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं बलोच ने भी मौका देखकर आजादी का मोर्चा खोल दिया है। इससे पाकिस्तानी सेना को देश के बाहर के साथ अपने मुल्क के अंदर भी जंग लड़नी पड़ रही है।

भारत की मिसाइलों से दहला पाकिस्तान का जर्रा-जर्रा, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के घर से मात्र 20KM दूर गिरा बम: इस बार लाहौर, कराची समेत 9 शहर लिए निशाने पर

भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई करते हुए 300 किलोमीटर तक अंदर मौजूद ज्यादातर अहम ठिकानों पर जबरदस्त हमले किये जिससे पाकिस्तान थर्रा उठा। 8 मई की रात पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद समेत 9 अहम शहरों पर भारत ने मिसाइलों और ड्रोन की बौछार कर दी। एबटाबाद जहाँ कभी आतंकवादी ओसाम बिन लादेन छिपा हुआ था उस शहर पर भी मिसाइल दागे गए।

इतना ही नहीं एलओसी पर हो रहे गोलीबारी और ड्रोन अटैक का भी जबरदस्त जवाब दिया। न सिर्फ पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल अटैक को निरस्त किया बल्कि ताबड़तोड़ जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की नाक में दम कर दिया। भारत ने जिन शहरों पर हमले किये उसमें इस्लामाबाद, लाहौर, कराची, सियालकोट, पेशावर, बहावलपुर शामिल हैं। भारत की वायु सेना. नौसेना और थल सेना ने कदम से कदम मिलाते हुए पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।

कराची पर जबरदस्त हमला

अरब सागर में तैनात विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत ने कराची पर बड़ा हमला किया और एक के बाद एक कई मिसाइलें और ड्रोन दागे। पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कहा जाने वाला शहर कराची पर अटैक से पाकिस्तान तिलमिला उठा है। ये पाकिस्तान का अहम बंदरगाह है जो भारत से करीब 350 किलोमीटर दूर है।

इस्लामाबाद- लाहौर पर अटैक

भारत के गोले राजधानी इस्लामाबाद तक पहुँच गए। यहाँ राष्ट्रपति, पीएम कार्यालय, सुप्रीम कोर्ट, संसद भवन जैसे अहम संस्थान हैं। वहीं पाकिस्तानी पंजाब का अहम शहर लाहौर भारत के निशाने पर रहा।

पेशावर और रावलपिंडी पर हमला

खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर कई मायने में पाकिस्तान के लिए अहम है। भारत के ड्रोन ने यहाँ स्थित पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला किया। वहीं रावलपिंडी पाकिस्तानी सेना का मुख्यालय है। भारत ने पाकिस्तानी सेना के गढ़ पर हमला कर ये साबित किया कि हम घर में घुस कर मारेंगे.

सियालकोट पर जवाबी कार्रवाई

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के उत्तर पूर्व में स्थित सियालकोट पाकिस्तानी फौज के लिए काफी अहम है और व्यावसायिक शहर भी है। ये अमृतसर से 100 किलोमीटर दूर है जबकि जम्मू से 47 किलोमीटर दूर है। भारत ने जवाबी कार्रवाई में पाकिस्तान के अंदर 300 किलोमीटर से ज्यादा दूर शहरों पर भी बम बरसाए। इसके अलावा गुजरांवाला, अटॉक, मिआनो, खेनजूं, बहावा जैसे शहरों में भी धमाके हुए. यहाँ तक कि पाकिस्तान के एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम यानी AWACS को भी नष्ट कर दिया।

8 मई को देर रात रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा, “केवल पाकिस्तान ही ये फैसला ले सकता है कि वो भारत के साथ तनाव कम कर सकता है या नहीं क्योंकि भारत ने पहलगाम हमले का जवाब दिया था। इससे पहले भारत ने जम्मू से जैसलमेर तक पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमले को नाकाम कर दिया. भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम सुदर्शन ने इन हमलों को नाकाम किया है. पाकिस्तान के हमले को देखते हुए जम्मू कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल समेत कई राज्यों के कई शहरों में ब्लैक आउट किया गया था. भारतीय सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान के अत्याधुनिक विमान F-16 और JF-17 को मार गिराए. भारत ने 7 मई को कई शहरों में पाकिस्तानी वायु रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया था

जिस ‘द आयरिश टाइम्स’ ने चलाया पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा, उसी में लेख लिख कर भारतीय राजदूत ने लगाई लताड़: ऑपइंडिया को बताया – ये हमेशा चलाते हैं हिन्दू विरोधी एजेंडा

आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले पर ‘द आयरिश टाइम्स’ के संपादकीय की तीखी आलोचना की। उन्होंने अखबार पर हिंसा की स्पष्ट रूप से निंदा न करने और इसके बजाय आतंकवादियों तथा उनके समर्थकों को अप्रत्यक्ष रूप से संरक्षण देने का आरोप लगाया। अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ के दृष्टिकोण को पक्षपातपूर्ण और संवेदनहीन बताया।

मंगलवार (6 मई, 2025) को भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ द्वारा फैलाए गए दुष्प्रचार का एक विस्तृत खंडन प्रकाशित किया। उन्होंने इस पर गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि अखबार ने पहलगाम आतंकवादी हमले के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित ‘तलवारें लहराने’ की आलोचना पर तो ज़ोर दिया, लेकिन हमले के पीड़ितों के प्रति संवेदना या एकजुटता दिखाने में पूरी तरह विफल रहा।

‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने कहा, “पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले पर ‘द आयरिश टाइम्स’ के दुर्भावनापूर्ण संपादकीय पर अखिलेश मिश्रा का जवाब – यह लेख आतंकवाद की स्पष्ट निंदा करने और निर्दोष पीड़ितों के प्रति सहानुभूति जताने की बजाय, प्रधानमंत्री मोदी पर ‘तलवारें लहराने’ का आरोप लगाता है और भारत की तुलना पाकिस्तान से करता है, जिससे आतंकवादियों और उनके प्रायोजकों को अप्रत्यक्ष रूप से कवर फायर मिलता है।”

‘द आयरिश टाइम्स’ के संपादक को लिखे एक पत्र में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने कहा कि जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले पर अखबार के संपादकीय में न केवल पेशेवर निष्पक्षता का अभाव है, बल्कि यह आयरलैंड के आम नागरिकों और नेताओं, विशेषकर ताओसीच माइकल मार्टिन द्वारा भारत के प्रति व्यक्त की गई सहानुभूति के भी विपरीत है। मिश्रा ने उल्लेख किया कि मार्टिन ने स्पष्ट रूप से कहा था कि आयरलैंड इस दुखद घटना के मद्देनज़र भारत के लोगों के साथ एकजुटता में खड़ा है।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया कि यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने ‘द आयरिश टाइम्स’ के संपादकीय में महत्वपूर्ण विवरणों की अनुपस्थिति को भी उजागर किया, विशेष रूप से उन बयानों की, जिनमें हमले के अपराधियों को जवाबदेह ठहराने की संयुक्त राष्ट्र की अपील शामिल थी। मिश्रा ने आलोचना की कि अखबार ने इन गंभीर पहलुओं को दरकिनार करते हुए जम्मू और कश्मीर में भारत सरकार की नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना चुना।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ को संबोधित अपने पत्र में जोर देकर कहा कि पहलगाम आतंकी हमले की वैश्विक स्तर पर कड़ी निंदा की गई है। उन्होंने उल्लेख किया कि यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन इस हमले की निंदा करने वाली पहली वैश्विक नेताओं में से थीं, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी सर्वसम्मति से इस नृशंस कृत्य की आलोचना करते हुए अपराधियों, आयोजकों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे में लाने की आवश्यकता पर बल दिया। मिश्रा ने आलोचना की कि ‘द आयरिश टाइम्स’ ने संयुक्त राष्ट्र के इस महत्वपूर्ण बयान को अपने संपादकीय में नज़रअंदाज़ कर दिया।

उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि निर्दोष पीड़ितों के साथ खड़े होने के बजाय अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘तलवारें लहराने’ का आरोप लगाया और भारत की पाकिस्तान से तुलना की—एक ऐसा देश जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादियों को शरण देने और ओसामा बिन लादेन को वर्षों तक छिपाने के लिए जाना जाता है। मिश्रा ने यह भी रेखांकित किया कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू और कश्मीर में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है, जिसमें तेज़ आर्थिक विकास, विदेशी निवेश में वृद्धि और पर्यटन क्षेत्र का विस्तार शामिल है।

पत्र में ‘द आयरिश टाइम्स’ की इस धारणा को भी गलत बताया गया कि जम्मू कश्मीर में प्रत्यक्ष शासन और सुरक्षा उपायों के चलते स्थानीय लोगों को ‘झटका’ लगा है। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि इसके विपरीत, इन कदमों ने क्षेत्र में स्थायित्व और समृद्धि को बढ़ावा दिया है।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ को लिखे पत्र में बताया कि 2019 में भारतीय संविधान से अस्थायी अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद जम्मू और कश्मीर में अभूतपूर्व आर्थिक और अवसंरचनात्मक विकास हुआ है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, पर्यटन तेज़ी से बढ़ा है, और एक पूर्ण लोकतांत्रिक राजनीतिक प्रक्रिया का पुनरुद्धार हुआ है। इसका प्रमाण 2024 में हुए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव हैं, जिसमें 63.9 प्रतिशत मतदान के साथ लोगों ने लोकतांत्रिक सरकार चुनी।

मिश्रा ने आगे कहा कि पहलगाम में हुए इस्लामिक आतंकी हमले के बाद भारत में गहरा आक्रोश है। पूरा देश—जिसमें कश्मीर घाटी के नागरिक, सभी राजनीतिक दल, विपक्षी नेता, प्रमुख मुस्लिम नेता और नागरिक समाज शामिल हैं—सरकार के उस संकल्प के साथ खड़ा है, जिसके तहत इस जघन्य हमले के अपराधियों और साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाया जाएगा।

आयरलैंड में भारत के राजदूत ने ऑपइंडिया से की बात

ऑपइंडिया को ईमेल पर दी गई प्रतिक्रिया में आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ पर भारत के प्रति ‘बेहद नकारात्मक’ रवैया अपनाने का आरोप लगाया। अखिलेश मिश्रा ने कहा कि भले ही अखबार की भारत से जुड़ी अधिकांश खबरें समाचार एजेंसियों से ली जाती हैं, लेकिन इसके संपादकीय और राय लेख लगातार एकतरफा रहे हैं, जिनमें भारत की आलोचना और विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति कठोर टिप्पणियाँ प्रमुख रही हैं। उन्होंने इस रुख को भारत की छवि खराब करने और उसके खिलाफ पक्षपातपूर्ण बयानबाज़ी को बढ़ावा देने का ‘सुनियोजित प्रयास’ बताया।

राजदूत मिश्रा ने स्पष्ट किया कि भारतीय दूतावास ने ‘द आयरिश टाइम्स‘ को बार-बार इस तरह की मोदी-विरोधी और भारत-विरोधी सामग्री प्रकाशित करने पर चेताया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अखबार न केवल पक्षपाती है, बल्कि ‘हिंदुओं की भावनाओं के प्रति संवेदनहीन’ भी रहा है।

भारतीय राजदूत अखिलेश मिश्रा ने ‘द आयरिश टाइम्स’ पर एक बार फिर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हाल ही में प्रकाशित संपादकीय ‘भारत और पाकिस्तान पर आयरिश टाइम्स का दृष्टिकोण व्यापक संघर्ष से बचना चाहिए’ के अलावा, आयरिश मीडिया आउटलेट ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ एक हिटजॉब भी प्रकाशित की थी। इस लेख का शीर्षक था – “भारतीय चुनाव पर आयरिश टाइम्स का दृष्टिकोण, मोदी ने अपनी पकड़ मजबूत की”, जिसमें भारत पर ‘असहिष्णु हिंदू-प्रथम बहुसंख्यकवाद’ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया।

अखबार ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करते हुए दावा किया कि भारत की ‘लोकतांत्रिक साख को भारी नुकसान पहुँचा है’ और प्रधानमंत्री मोदी की तुलना तुर्की के इस्लामवादी नेता रेसेप तैय्यप एर्दोआन से की। उस समय भी राजदूत अखिलेश मिश्रा ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए ‘द आयरिश टाइम्स’ के प्रचार और पूर्वाग्रह से भरे रुख की कड़ी निंदा की थी।

अगस्त 2023 में ‘द आयरिश टाइम्स’ ने एक और मोदी-विरोधी संपादकीय प्रकाशित किया था, जिसमें उसने बिना पर्याप्त तथ्यों के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़काने के लिए दोषी ठहराया। इस लेख में न केवल मैतेई हिंदू समुदाय को बदनाम किया गया, बल्कि कुकी ईसाई समूहों की संलिप्तता, विशेष रूप से म्यांमार और मणिपुर से मिज़ोरम और बांग्लादेश के माध्यम से होने वाली अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी में उनकी भूमिका को नजरअंदाज किया गया। इसके अलावा, अखबार ने ‘दक्षिणपंथी हिंदू चरमपंथियों से मुस्लिम अल्पसंख्यकों को खतरा’ जैसे भ्रामक आरोप लगाए, जबकि इस्लामी हिंसा के कई मामलों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने उस समय भी इस पक्षपातपूर्ण और भ्रामक संपादकीय का स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दिया था। उन्होंने बताया कि उनके जवाब  द आयरिश टाइम्स की वेबसाइट के “संपादक को पत्र” खंड में प्रकाशित तो हुए, लेकिन अखबार ने उनके पत्रों को “गंभीर रूप से विकृत” कर प्रस्तुत किया। जब ऑपइंडिया ने पूछा कि क्या अखबार ने उन खंडनों का कोई उत्तर दिया या अपने दृष्टिकोण में कोई बदलाव किया, तो अखिलेश मिश्रा ने स्पष्ट किया कि न तो अखबार ने कोई प्रतिक्रिया दी, न ही भारत और विशेष रूप से हिंदू समुदाय के प्रति अपने पूर्वाग्रही और संवेदनहीन दृष्टिकोण को बदला।

ऑपइंडिया द्वारा पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब में अखिलेश मिश्रा ने बताया कि पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा 26 निर्दोष लोगों की धार्मिक आधार पर हत्या किए जाने वाले पहलगाम आतंकी हमले को लेकर आयरलैंड के प्रधानमंत्री ने भारत और पीड़ितों के प्रति संवेदना और एकजुटता प्रकट की थी।

हालाँकि, जब पाकिस्तान में भारत द्वारा की गई आतंकवाद विरोधी कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर आयरलैंड की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि ‘अब तक आयरिश पक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर पर कोई बयान जारी नहीं किया है।’

आयरिश टाइम्स या पाकिस्तान टाइम्स: पीड़ित को ही दिखाता है उपद्रवी

28 अप्रैल को प्रकाशित द आयरिश टाइम्स  के संपादकीय ‘भारत और पाकिस्तान पर आयरिश टाइम्स का दृष्टिकोण व्यापक संघर्ष से बचना चाहिए’ की भारत में तीव्र आलोचना हुई, विशेष रूप से आयरलैंड में भारतीय राजदूत अखिलेश मिश्रा द्वारा, जिन्होंने इसे ‘पाकिस्तानी प्रचार’ के अनुरूप बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संपादकीय ने भारत को पाकिस्तान प्रायोजित इस्लामी आतंकवाद का शिकार होने के बावजूद एक हमलावर के रूप में दिखाया, जबकि पाकिस्तान को एक भयभीत पीड़ित की तरह पेश किया गया।

संपादकीय में पाकिस्तान के ‘जिम्मेदारी से इनकार’ और ‘स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जाँच’ में सहयोग की बात तो की गई, लेकिन भारत की ओर से वर्षों से आतंकवाद पर प्रस्तुत किए गए ठोस सबूतों की पूरी तरह से अनदेखी की गई। उदाहरणस्वरूप, 26/11 मुंबई हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान को लश्कर-ए-तैय्यबा और जमात-उल-दावा प्रमुख हाफ़िज़ सईद की संलिप्तता के साथ कई डोजियर सौंपे।

मार्च 2012 में पाकिस्तानी न्यायिक आयोग को भारत आकर गवाहों के बयान दर्ज करने की अनुमति भी दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद पाकिस्तान की अदालतों ने सईद को दोषमुक्त कर दिया। इसी तरह, पठानकोट (2016) और पुलवामा (2019) आतंकी हमलों में भी भारत ने पाकिस्तान को सबूत सौंपे, जिसमें हमलावरों की पहचान, DNA नमूने और वित्तीय दस्तावेज शामिल थे, लेकिन पाकिस्तान ने न तो कोई कार्रवाई की, न ही जाँच में सहयोग दिया।

राजदूत अखिलेश मिश्रा ने यह भी इंगित किया कि द आयरिश टाइम्स को यह अपेक्षा है कि भारत पाकिस्तान को सबूत देता रहे, जबकि पाकिस्तान उनका वर्षों तक उपयोग न करे, उन्हें खारिज कर दे या आतंकवादियों की मौजूदगी से ही इनकार कर दे। उन्होंने कहा कि यह नजरिया इस हकीकत को नजरअंदाज करता है कि पाकिस्तान की धरती से सक्रिय इस्लामी आतंकी संगठनों को वहाँ की सरकार, सेना और ISI का संरक्षण प्राप्त है, जो उन्हें भारत के खिलाफ प्रॉक्सी के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

संपादकीय ने अनुच्छेद 370 और 35A के निरसन पर भी विरोध जताते हुए कहा कि मोदी सरकार ने भारत के एकमात्र मुस्लिम-बहुल राज्य की सीमित स्वायत्तता छीन ली। अखिलेश मिश्रा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि द आयरिश टाइम्स ने कश्मीर की धार्मिक जनसांख्यिकी के इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया और यह बताना उचित नहीं समझा कि 1990 के दशक में कश्मीरी हिंदुओं को जिहादी हिंसा के चलते उनके ही घरों से मार-भगाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 370 और 35A का हटाया जाना मुस्लिम समुदाय पर अत्याचार नहीं, बल्कि एक संवैधानिक सुधार था। जिसे भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी बरकरार रखा है।

अखिलेश मिश्रा के अनुसार, यह वही हिंदू-विरोधी मानसिकता है जो कश्मीरी पंडितों के पलायन और हाल के पहलगाम आतंकी हमले दोनों की जड़ में है। उन्होंने द आयरिश टाइम्स के रुख को भारत और विशेष रूप से हिंदुओं के प्रति पूर्वाग्रही, पक्षपातपूर्ण और ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी करने वाला बताया।

द आयरिश टाइम्स के संपादकीय में लेख के अंत में यह दावा किया गया कि “पहलगाम पर तनाव में भयावह वृद्धि, विभाजन के समय से चली आ रही कटु सांप्रदायिक विभाजन का परिणाम है, जिससे दोनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध की आशंका है।” इस कथन की तीखी आलोचना करते हुए भारत ने इसे वास्तविकता से पूरी तरह विपरीत बताया।

राजदूत अखिलेश मिश्रा और अन्य विश्लेषकों ने स्पष्ट किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव सांप्रदायिक विभाजन का नहीं, बल्कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित इस्लामी आतंकवाद और हिंदुओं तथा अन्य समुदायों के प्रति उसकी गहरी घृणा का परिणाम है। यह भावना हाल ही में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर द्वारा सार्वजनिक रूप से दोहराई गई थी।

भारत में हिंदू बहुल आबादी के बीच मुसलमानों, सिखों और अन्य धार्मिक समुदायों के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की एक समृद्ध परंपरा रही है। इसके विपरीत, इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान ने 1947 के बाद से लगातार अपने हिंदू और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हत्या, बलात्कार, उत्पीड़न और व्यवस्थित भेदभाव किया है।

“ऑपरेशन सिंदूर” के जरिए भारत ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि अब वह अपने नागरिकों की धार्मिक पहचान के आधार पर लक्षित हत्याओं को बर्दाश्त नहीं करेगा और न ही ‘अमन की आशा’ (शांति की आशा) के नाम पर चुप्पी साधेगा। यह कार्रवाई पाकिस्तान और इस्लामी आतंकवाद को समर्थन देने वाले तत्वों के लिए एक कड़ा संदेश था।

(यह खबर मुख्य रूप से हमारे यहाँ ऑपइंडिया इंग्लिश टीम की श्रद्धा पांडे ने लिखी है।)

CJI ने राष्ट्रपति और PM को भेजी जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जाँच रिपोर्ट, कैश मिलने की पुष्टि फिर भी इस्तीफा देने से किया इनकार: चल सकता है महाभियोग

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने आंतरिक जाँच समिति की रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दी है। समिति का गठन जस्टिस यशवंत वर्मा के घर में लगी आग में नकदी मिलने के दावों की जाँच के लिए किया गया था।

समिति की रिपोर्ट के साथ जस्टिस वर्मा की प्रतिक्रिया भी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई। हालाँकि रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं है कि जस्टिस वर्मा ने अपनी प्रतिक्रिया में क्या कहा है। इससे पहले खबरें आई थी कि आंतरिक जाँच समिति ने जस्टिस वर्मा के घर आगजनी में कैश जलने की बात सही पाई है।

सुप्रीम कोर्ट की ओर से 8 मई 2025 को जारी बयान में कहा गया है, “मुख्य न्यायाधीश ने आंतरिक जाँच प्रक्रिया के तहत राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को 3 मई 2025 की 3 सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट की कॉपी और जस्टिस यशवंत वर्मा का 6 मई 2025 का पत्र/जवाब भेजा दिया है।”

आंतरिक जाँच समिति में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे। इन्होंने 25 मार्च को जाँच शुरू की थी। जस्टिस वर्मा के घर में 14 मार्च 2025 को आग लगी थी। उसके बाद बेहिसाब कैश बरामद होने की बात सामने आई थी। जले हुए नोटों की तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए थे।

जिस समिति ने इस मामले की जाँच की है उसमें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस GS संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश अनु सिवारमन शामिल थे। 25 मार्च को समिति ने जाँच की प्रक्रिया शुरू की थी और 4 मई को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को रिपोर्ट सौंप दी थी। बताया जाता है कि जब आग लगी थी तब जज अपनी पत्नी के साथ मध्य प्रदेश में थे, जबकि घर में उनकी बुजुर्ग माँ और बेटी मौजूद थी।

जले हुए कैश का वीडियो भी सामने आया था। हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने बताया था कि इसके वीडियो जिन पुलिसकर्मियों ने बनाए थे वो उनके फोन से डिलीट करवा दिए गए, ताकि ये गलत जगह न पहुँच जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक ने कहा था कि बिना CJI की अनुमति के जज के विरुद्ध FIR दर्ज करने के अधिकार पुलिस के पास नहीं हैं। हालाँकि, अब भी जस्टिस यशवंत वर्मा ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है, जबकि जाँच समिति ने माना है कि उनके यहाँ से कैश मिला।

ऐसे में अगर वो दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें महाभियोग की प्रक्रिया के तहत भी हटाया जा सकता है। उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी इस मामले को लेकर सार्वजनिक रूप से बयान दिया था और न्यायपालिका की साख पर बट्टा बताते हुए कहा था कि जो भी मामला है वो बाहर आना चाहिए।