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UN में उतर गया ‘दुष्ट पाकिस्तान’ का नकाब, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के कबूलनामे पर घिरा: आतंकियों को समर्थन-फंडिंग पर पूरी दुनिया के सामने भारत की योजना ने किया जलील

संयुक्त राष्ट्र में भारत की उप स्थाई प्रतिनिधि योजना पटेल ने पाकिस्तान के कबूलनामे को ही सबूत के रूप में पेश करते हुए जमकर पाकिस्तान की बखिया उधेड़ी। उन्होने कहा कि रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का कबूलनामा ये साबित करने के लिए काफी है कि इनका आतंकवाद को बढ़ावा देने का इतिहास रहा है जो पाकिस्तान को एक दुष्ट देश के रूप में स्थापित करता है।

आतंकवाद के शिकार देशों के नेटवर्क की शुरुआत के अवसर पर बोलते हुए उन्होने कहा कि “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक विशेष प्रतिनिधिमंडल ने इस मंच का दुरुपयोग करने और इसे कमजोर करने का विकल्प चुना है ताकि वह दुष्प्रचार में शामिल हो सके और भारत के खिलाफ निराधार आरोप लगा सके।”

आतंकवादी संगठनों को प्रशिक्षण, फंडिंग दे रहा पाकिस्तान- भारत

उन्होने कहा कि “पूरी दुनिया ने हाल ही में एक टेलीविजन साक्षात्कार में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ को आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और पैसे देने के पाकिस्तान के अतीत को स्वीकार करते हुए सुना है। यह रक्षा मंत्री का खुला कबूलनामा है जो किसी को भी आश्चर्यचकित नहीं करता है बल्कि पाकिस्तान को एक दुष्ट राज्य के रूप में उजागर करता है जो वैश्विक आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है और क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है। दुनिया अब और आंखें मूंद कर नहीं रह सकती।”

योजना पटेल ने कहा कि 2008 के मुंबई धमाके के 17 साल बाद पहलगाम में आतंकी हमले में सबसे ज्यादा लोगों की मौत हुई है। भारत लगातार सीमा पार आतंकवाद से पीड़ित रहा है इसलिए आतंकवादी हमले के असर को बखूबी समझता है।

दुनिया ने इस हमले की तीखी आलोचना की है और ज्यादातर अहम देशों के नेताओं का समर्थन भारत को मिला है। ऐसे में पाकिस्तान जबरदस्ती प्रोपेगैंडा फैलाकर दुनिया को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का बयान

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में एक टीवी चैनल को दिये इंटरव्यू में कहा था कि पाकिस्तान का आतंकियों को फंडिंग करने का इतिहास रहा है । उन्होने कहा था कि” पिछले 30 सालों से पाकिस्तान इस गंदे काम को अमेरिका के लिए करता रहा है।”

ख्वाजा आसिफ ने इंटरव्यू के दौरान स्वीकार किया था कि “लश्कर ए तैयबा का पाकिस्तान से कनेक्शन रहा है। यहां लश्कर के कई लिंक हैं हालाँकि अब ये संगठन खत्म हो चुका है।”

जिस राज्य के स्टेडियम में कपड़े सूखते हो, मैदान में जलकुंभी उगते हो… उसे इस ‘वैभव’ पर इतराना नहीं, नाला रोड के नाले में डूब मरना चाहिए

2025 में ही बालिग (18वाँ संस्करण) होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) ने प्रशंसकों को क्रिकेट के कई अविस्मरणीय क्षण दिए हैं। हमने कई शानदार इनिंग्स देखी है। गजब के बॉलिंग स्पेल देखे हैं। फील्डिंग के ऐसे पल देखे हैं कि अपनी ही आँखों पर विश्वास न हो। फिर भी वैभव सूर्यवंशी (Vaibhav Suryavanshi) के शतकीय प्रदर्शन ने सोशल मीडिया पर भावनाओं के फाटक खोल दिए हैं।

यह आश्चर्यजनक है, क्योंकि क्रिकेट स्किल और टाइमिंग का खेल है। भावनाओं पर नियंत्रण रखना होता है। परिस्थिति के अनुसार खुद को ढालना होता है। ऐसे में वैभव सूर्यवंशी को लेकर हम जो भावनाओं का ज्वार देख रहे हैं, उसके दो मोटे कारण समझ आते हैं।

पहली, उनकी उम्र। वैभव 14 साल के हैं। इतनी छोटी उम्र में इससे पहले किसी ने आईपीएल में शतक नहीं लगाया। वे सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय बन गए हैं। आईपीएल के इतिहास की दूसरी सबसे तेज सेंचुरी ठोक दी है। 38 गेंदों पर करीब 266 के स्ट्राइक रेट से उन्होंने 101 रन बनाए। इसमें 7 चौके और 11 छक्के हैं।

स्ट्राइक रेट, चौके और छक्कों की संख्या बताती है कि इतनी कम उम्र में वे पावर हिटिंग के बड़े उस्ताद हैं। उन्होंने यह कारनामा गुजरात टाइटंस की उस बॉलिंग लाइनअप के सामने किया है जिसमें मोहम्मद सिराज, राशिद खान, वाशिंगटन सुंदर जैसे इंटरनेशनल प्लेयर मौजूद थे। जाहिर है आड़ा-तिरछा बैट भाँज के उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के लिए रन नहीं जुटाए हैं। बताया है कि उनके भीतर स्किल भी मौजूद है।

वैभव के जय-जयकार का दूसरा कारण उनका बिहार से होना है। जो राज्य अपने ही नेताओं का मारा हो, जहाँ की जनता पलायन को अभिशप्त हो, जहाँ के लोग ‘बिहारी’ कहकर अपमानित किए जाने के अभ्यस्त हो, जिस राज्य में रहने का मतलब भविष्य को अंधकार में ढकेल देना माना जाता हो, यदि उसी राज्य के समस्तीपुर के एक गाँव से निकल कर कोई लड़का इस तरह का प्रदर्शन कर दिखाए तो भावनाओं का सैलाब आना स्वभाविक है।

पर यह केवल बिहार के आम लोगों तक ही सीमित नहीं है। पक्ष हो या विपक्ष बिहार का हर नेता इस सैलाब के साथ बहना चाहता है। ऐसा प्रदर्शित करने की कोशिश की जा रही है कि बिहार ने देश को एक ऐसी प्रतिभा तैयार करके दी है, जिसका डंका अंतरराष्ट्रीय पटल पर अगले कुछ दशकों तक बजने वाला है।

पर जमीनी वास्तविकता यह है कि वैभव सूर्यवंशी की यह सफलता केवल उसके जिद्द और जुनून के कारण संभव हुई है। केवल और केवल उसके परिवार के समर्पण के कारण संभव हुई है। इसमें बिहार के उन नेताओं का कोई योगदान नहीं है, जिन पर राज्य में खेल की आधारभूत संरचना तैयार करने की जिम्मेदारी है/थी।

बिहार की राजधानी पटना में ही एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम है। नाम है- मोइनुलहक स्टेडियम। कई साल पहले जब मैंने आखिरी बार इस स्टेडियम को देखा था तो इसमें सीआरपीएफ का कैंप लगा था। 1969 में बने इस स्टेडियम में 1996 के विश्व कप का मैच भी हुआ था। आखिरी इंटरनेशल मैच 1997 में महिलाओं का वनडे था।

उसके बाद इस स्टेडियम को धीरे-धीरे मर जाने के लिए छोड़ दिया गया। सालों बाद इस स्टेडियम की चर्चा 2018 में हुई, जब 15 साल बाद रणजी ट्रॉफी में बिहार की वापसी हुई। पर जब मैच हुआ तो स्टेडियम खेल के कारण चर्चा में नहीं आया। इसकी छत और टूटी दीवारें चर्चा में थी। दर्शक गैलरी में कपड़े सुख रहे थे।

अब इस स्टेडियम के पुनर्निर्माण की योजना बनी है। जिला मुख्यालयों के स्टेडियम तो और भी बुरे हाल में हैं। अपने गृह जिले मधुबनी के स्टेडियम को मैंने जब भी देखा वह तालाब की तरह ही दिखा। यहाँ बैट और बॉल का मुकाबला नहीं होता। जलकुंभी के बीच फैलने का मुकाबला होता है। इसी तरह राज्य के कई स्टेडियम पशुओं के चारागाह बने हुए हैं।

राज्य में प्रशिक्षण अकादमी का घोर अभाव है। जो चल रहे हैं उनमें ज्यादातर प्राइवेट हैं। यह भी कुछ शह​रों तक सीमित है। जिलों में निरंतरता से चलने वाले टूर्नामेंट नहीं हैं। ऐसा कोई सिस्टम नहीं है जो गाँव-देहात के खिलाड़ियों को चिह्नित करें, उनके कौशल को निखारे और फिर उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करे। जो कुछ भी हो रहा है, वह निजी या सामाजिक स्तर पर ही अधिक दिखता है।

यह बदहाली केवल क्रिकेट तक सीमित नहीं है। बिहार में हर खेल ​व्यवस्था की उदासीनता के कारण दम तोड़ चुका है। वैसे हाल के वर्षों में सरकार के स्तर पर कुछ हद तक यह तंद्रा टूटती दिख रही है। नीतीश सरकार ने अलग से खेल विभाग का गठन किया है। अभी राज्य सरकार का खेल बजट करीब 700 करोड़ रुपए है।

राजगीर में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और ओलंपिक संघ के मापदंडों के हिसाब से स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं। पटना जिले के पुनपुन प्रखंड में 100 एकड़ में स्पोर्ट्स सिटी बनाने की घोषणा हुई है। बिहार स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी बन रही है। यहाँ खेल से जुड़े पाठ्यक्रमों में डिग्री देने के साथ-साथ करीब 24 खेलों के प्रशिक्षण के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएँ जुटाने की योजना है। इसी तरह राज्य में 37 एकलव्य स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर, 32 खेलों इंडिया ट्रेनिंग सेंटर और भारतीय खेल प्राधिकरण के 3 सेंटर चल रहे हैं।

दरअसल बिहार में खेलों की बर्बादी की कथा भी लालू यादव-राबड़ी देवी के उस जंगलराज से ही शुरू होती है जिसने एक तरफ राज्य में पहले से मौजूद हर क्षेत्र की आधारभूत संरचनाओं को ध्वस्त किया, दूसरी तरफ नई संरचनाओं को खड़ा नहीं होने दिया ताकि ‘अपहरण इंडस्ट्री’ के लिए गली-गली ‘खिलाड़ी’ पैदा किए जा सके। इसका दूसरा पक्ष यह है कि 2005 से बिहार में शासन कर रहे नीतीश कुमार की सरकार ने इस स्थिति को ठीक करने की जो पहल की है वह काफी देर से की गई है और उसे एक खास हिस्से में सीमित कर दिया गया है।

असल में वैभव सूर्यवंशी की सफलता बिहार की व्यवस्था पर तमाचा है। परिचायक है हर उस बिहारी की जिजीविषा का जो अपने पुरुषार्थ से अपना भाग्य लिखता है। व्यवस्था और उससे जुड़े लोगों को इस सफलता का जश्न मनाने की जगह शर्म से पटना के नाला रोड के नाले में डूब जाना चाहिए। वे उन सैकड़ों वैभव की भ्रूण हत्या के जिम्मेदार हैं, जिन्होंने गाछी, खेत, उबड़-खाबड़ मैदान को पिच बनाकर पसीना बहाया, पर व्यवस्था के आगे अकाल मौत मर गए। जो खिलाड़ी से मजदूर बन गए। जो आज सूरत से लेकर दमन तक की फैक्ट्री में पसीना बहा रहे हैं।

पहलगाम अटैक के समय जो कश्मीरी ऑपरेटर लगा रहा था ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे, वह अब NIA की कस्टडी में: वीडियो में गोलियों की आवाज सुनते ही बाहर आ गया था ‘इस्लाम’

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसारन घाटी में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकवादी हमले की जानकारियाँ लगातार सामने आ रही हैं। अब इस हमले का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें एक जिप-लाइन ऑपरेटर को गोलियों की आवाज के बीच ‘अल्लाहू अकबर’ चिल्लाते और एक पर्यटक को जिपलाइन पर धक्का देते देखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पहलगाम आतंकी हमले के बाद वीडियो के सामने आने के बाद जिपलाइन ऑपरेटर को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इस हमले में उसके प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से शामिल होने की आशंका है। यह वीडियो कश्मीर घूमने आए अहमदाबाद के ऋषि भट्ट ने जिपलाइन करते समय रिकॉर्ड की थी।

सोशल मीडिया पर उनके वीडियो पोस्ट करने के कुछ ही देर में ये वीडियो वायरल हो गई थी। वीडियो में साफ दिखता है कि जैसे ही गोलियों की आवाज आने के बाद जिपलाइन ऑपरेटर तीन बार ‘अल्लाह-हू-अकबर‘ चिल्लाता है और ऋषि को जिपलाइन पर आगे की ओर भेज देता है।

नीचे अफरा-तफरी मची है, लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं, कुछ जमीन पर गिरते हैं क्योंकि गोलियाँ उनकी तरफ आ रही होती हैं। ऋषि के भी हाव-भाव कुछ समय के लिए असमंजस वाले लगते हैं लेकिन वे इस घटना के ठीक तरह से समझ नहीं पाते और अंत तक आते आते वीडियो रिकॉर्ड करते हैं।

ऋषि भट्ट की वीडियो के आधार पर ही अब NIA के अधिकारियों ने जिपलाइन ऑपरेटर को हिरासत में ले लिया है। उससे घटना से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ की जाएगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि स्थानीय लोगों का भी इस हमले से कोई जुड़ाव हो सकता है। NIA इस पर भी जाँच कर रही है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ऋषि ने बताया कि उनसे पहले उनकी पत्नी और बच्चे समेत 9 लोग जिपलाइन पर गए। उस समय ऑपरेटर ने कुछ नहीं कहा। जब वो आए तब ही उसने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाया। उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया।

इस बीच ऑपरेटर ने उन्हें आगे जाने के लिए हल्का धक्का दे दिया। आगे आने के बाद ऋषि को जब एहसास हुआ कि गोलियाँ चल रहीं हैं तो वह घबरा गए, नीचे कई लोग निढाल पड़े थे। उन्होंने तुरंत ही जिपलाइन बीच में रोका और हुक खोलकर लगभग 20 फीट की ऊंचाई से कूद गए। नीचे आकर अपनी पत्नी और बच्चे को लेकर वहाँ से जान बचाकर भागे।

पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने हिन्दुओं का धर्म पूछ कर चुन-चुन कर गोली मार दी थी। खास तौर पर हिंदुओं को निशाना बनाया गया। मरने वालों में 25 भारतीय पर्यटक, एक नेपाली नागरिक और एक स्थानीय मुस्लिम समेत कुल 28 लोग थे।

पहलगाम आतंकी हमले में हमलावरों ने पुरुषों की पैंट उतारकर यह भी चेक किया गया कि वे मुस्लिम हैं या नहीं। कई लोगों को सीधे सिर में गोली मारी गई। हमले की जिम्मेदारी पहले लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटे संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी, लेकिन बाद में कार्रवाई के डर से उसने अपना बयान वापस ले लिया।

‘मुस्लिम गैंग’ के मर्द करते थे रेप, औरतें करती थी हिंदू लड़कियों का ब्रेनवॉश: भोपाल कोर्ट में पेशी के दौरान वकीलों ने कूटा, पुलिस ने उठक-बैठक करवाई

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिन्दू लड़कियों को फंसा कर उनका रेप करने वाले ‘मुस्लिम गैंग’ की कोर्ट के भीतर वकीलों ने पिटाई कर दी। मुस्लिम गैंग में शामिल लड़कों को कोर्ट में पेशी के दौरान भगवा गमछा डाल कर लाया गया था। इस पर वकील भड़के। उनकी पेशी से पहले पुलिस ने उनका जुलूस भी निकाला। यह मुस्लिम गैंग बड़ी संख्या में हिन्दू लड़कियों को निशाना बना चुका है। मामले की जाँच में सामने आया है कि इस गैंग की मदद मुस्लिम 2 लड़कियाँ किया करती थीं।

भोपाल कोर्ट में हुई पिटाई

सोमवार (28 अप्रैल, 2025) को शाम को मुस्लिम गैंग के फरहान खान, अली खान और साहिल खान को कोर्ट में पेश किया। इन आरोपितों के मामले की सुनवाई 6 बजे तक हुई। इसके बाद पुलिस इन्हें वापस ले जाने लगी। इस दौरान इनके शरीर पर भगवा गमछा देख कर कोर्ट परिसर में मौजूद वकील भड़क गए।

वकीलों ने इसके बाद नारेबाजी चालू कर दी। फरहान और अली के निकलने पर वकीलों ने पिटाई चालू कर दी। खींचतान के बीच पुलिस किसी तरह उन्हें बचा कर वापस ले गई। वकील इस दौरान काफी गुस्से में थे। कोर्ट ने 2 आरोपितों को रिमांड पर भेज दिया है। इससे पहले पुलिस ने तीनों आरोपितों का जुलूस निकलवाया।

पुलिस ने उन्हें कोर्ट लाते वक्त रास्ते भर चलवाया और उनसे सड़क पर उठक बैठक लगवाई। वहीं भोपाल में हिन्दू संगठनों ने भी तीनों को अस्पताल में मेडिकल के दौरान पीटने का प्रयास किया। इससे वह बच गए। इसके चलते पुलिस को दो बार मेडिकल के लिए जाना पड़ा। यह भी पता चला है कि अली ने पुलिस से बचने के लिए भागने का प्रयास किया जिससे उसका पैर टूट गया।

मुस्लिम लड़कियों पर पुलिस की जाँच

पुलिस अब इस मामले में इन मुस्लिम गैंग के लड़कों की जिन मुस्लिम लड़कियों से दोस्ती थी, उनकी जाँच कर रही है। पुलिस को 2 ऐसी लड़कियों के विषय में पता चला है। यह लडकियाँ इन मुस्लिम लड़कों के लिए एजेंट की तरह काम कर रही थीं और हिन्दू लड़कियों की दोस्ती इनसे करवाती थीं।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि इनमें से एक लड़की कॉस्मेटिक की दुकान पर काम करती है और यहाँ आने वाले हिन्दू लड़कियों को साहिल की डांस क्लास जाने को कहती थी। उसका निशाना गरीब हिन्दू लडकियाँ होती थीं, उनको वह साहिल से सेक्स करने कहती थी ताकि फीस ना पड़े।

यह भी सामने आया है कि मुस्लिम लड़कियाँ हिन्दू पीड़िताओं को बुर्का पहनने को, रोजा रखने को मजबूर करती थी और निकाह व धर्मांतरण का दबाव बनाती थी। पुलिस इनके बारे में जाँच कर पता लगाने का प्रयास कर रही है।

ब्यावर जैसा है मामला

भोपाल का यह मामला भी ब्यावर जैसा है, जहाँ मुस्लिम गैंग ने हिन्दू लड़कियों को अपने जाल में फंसाया था। इस मामले में 18 अप्रैल, 2025 को FIR दर्ज की गई थी। इसमें पता चला था कि फरहान खान ने अपने कॉलेज में ग्रेजुएशन कर रही छात्रा को फँसाया था। इस मामले म अब तक 5 FIR हो चुकी हैं, जिनमें 12 लोग आरोपित हैं।

इसके बाद उसने पीड़िता के साथ संबंध बनाए और वीडियो में सब रिकॉर्ड करके उसे धमकाने लगा। आगे चलकर फरहान ने ही पीड़िता पर दबाव बनाया कि वो साहिल और अली से अपनी सहेलियों की दोस्ती करवाए।

जब डरकर पीड़िता ने ऐसा किया तो साहिल और अली ने बाकी दो लड़कियों को अलग-अलग जगह मिलने बुलाया और पहली मुलाकात में ही उनके साथ संबंध बनाकर उनकी वीडियो बना ली। इसके बाद तीनों आरोपित पीड़िताओं पर धर्म बदलने का दबाव डाल रहे थे और बार-बार निकाह करने को कह रहे थे।

इसके अलावा आरोपित कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं से आए दिन पैसे भी माँगते थे। इस केस में फैजान, मोहम्मद अली, अबरार खान, हामिद, अरशद और सिराज समेत कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। एक पीड़िता ने बताया कि उसे जबरन पोर्न दिखवाया जाता था। बात न मानने पर कार में पीटा जाता था। 

गले पर छुरी रखकर धमकी दी जाती थी। धर्म बदलकर शादी करने के लिए दबाव डाला जाता था। पीड़िताओं ने यह भी बताया था कि उनका रेप गाँजा पिलाकर किया जाता था। इस मामले में पुलिस अब बंगाल और बिहार समेत मध्य प्रदेश के हिस्सों में छापे मार रही है।

फायरिंग, अल्लाहू अकबर, भागते हिंदू… हवा में झूल रहे जिस शख्स के कैमरे में रिकॉर्ड हुआ पहलगाम अटैक, उसे जमीन पर गिरती लाशों की भनक तक न लगी: देखिए Video

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए खौफनाक आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिला दिया। अनंतनाग जिले के बैसरन घाटी में उस दिन पाँच हथियारबंद आतंकियों ने हमला बोला, जिसमें 26 हिंदुओं की जान चली गई और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए। मरने वालों में 25 भारतीय पर्यटक, एक नेपाली नागरिक और एक स्थानीय मुस्लिम समेत कुल 27 लोग थे। अब इस हमले का एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें एक जिप-लाइन ऑपरेटर को गोलियों की आवाज के बीच ‘अल्लाहू अकबर’ चिल्लाते और एक पर्यटक को जिप-लाइन पर धक्का देते देखा गया है।

यह वीडियो पर्यटक ऋषि भट्ट ने खुद रिकॉर्ड किया था, जो बैसरन के खूबसूरत नजारे को कैमरे में कैद करना चाहते थे। वीडियो में साफ दिखता है कि जैसे ही गोलियों की आवाज गूँजती है, जिप-लाइन ऑपरेटर तीन बार ‘अल्लाहू अकबर‘ चिल्लाता है और ऋषि को जिप-लाइन पर भेज देता है। नीचे अफरा-तफरी मच जाती है, लोग जान बचाने के लिए भागते हैं, कुछ जमीन पर गिरते हैं क्योंकि गोलियाँ उनकी तरफ आ रही होती हैं। इस वीडियो ने सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या स्थानीय लोग भी इस हमले में शामिल थे।

हमले के दिन आतंकियों ने एम4 कार्बाइन और एके-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया। उन्होंने पहले पर्यटकों से उनकी धर्म पूछा, इस्लामी कलमा पढ़ने को कहा और जो गैर-मुस्लिम थे, उन्हें गोली मार दी। पुरुषों को पैंट उतारकर यह भी चेक किया गया कि वे मुस्लिम हैं या नहीं। यह हमला इतना भयानक था कि कई लोग सिर में गोली लगने से मरे। आतंकियों ने औरतों और बच्चों को छोड़ दिया, लेकिन पुरुषों को निशाना बनाया। हमले की जिम्मेदारी पहले द रेसिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने ली, जो पाकिस्तान की लश्कर-ए-तैयबा का हिस्सा है, लेकिन बाद में उसने अपना बयान वापस ले लिया।

भारतीय जाँच एजेंसियों ने पाया कि हमले के तार पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद और कराची से जुड़े हैं। तीन संदिग्धों के स्केच जारी किए गए और उनकी जानकारी देने वालों के लिए 60 लाख रुपये का इनाम रखा गया। भारत ने जवाब में सख्त कदम उठाए, इसमें पाकिस्तान के साथ 1960 की सिंधु जल संधि को रद्द करना, अटारी बॉर्डर बंद करना और पाकिस्तानी राजनयिकों को निकाल देना। पाकिस्तान ने भी जवाब में भारतीयों के वीजा रद्द कर दिए और हवाई क्षेत्र बंद कर दिया। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया, और नियंत्रण रेखा पर झड़पें भी हुईं।

दुनिया भर के नेताओं ने इस हमले की निंदा की और भारत के साथ एकजुटता दिखाई। लेकिन इस हमले ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कश्मीर में शांति कितनी नाजुक है। बैसरन की खूबसूरत घाटी, जो कभी पर्यटकों की पसंदीदा जगह थी, आज खून से सनी है। इस हमले ने न सिर्फ मासूम लोगों की जान ली, बल्कि वहाँ के स्थानीय लोगों पर भी सवाल खड़े कर दिए, क्योंकि ये वीडियो खुद ब खुद बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या स्थानीय लोगों को इस हमले की जानकारी नहीं थी?

शरिया अदालत, कोर्ट ऑफ काजी, दारुल कजा… जो भी कहना हो कहिए, पर इनकी कानूनी औकात कुछ भी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ, कहा- इनका आदेश मानने की बाध्यता नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि भारत में शरिया अदालत, काजी कोर्ट, दारुल कजा या इसी तरह के किसी भी संस्थान की कोई कानूनी मान्यता नहीं है। इनके द्वारा दिए गए कोई भी आदेश या फैसले कानूनन लागू नहीं किए जा सकते। यह फैसला जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच ने सुनाया।

इस मामले में एक महिला शहजाहन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा गया था। फैमिली कोर्ट ने शहजाहन को भरण-पोषण देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उसने एक काजी कोर्ट के समझौता पत्र के आधार पर यह माना था कि शहजाहन ही वैवाहिक विवाद की जिम्मेदार थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान फैमिली कोर्ट के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि काजी कोर्ट या शरिया अदालत का कोई कानूनी आधार नहीं है। जस्टिस अहसनुद्दीन अमानुल्लाह ने अपने फैसले में लिखा, “काजी कोर्ट, दारुल कजा कजियत कोर्ट, शरिया कोर्ट आदि, चाहे इन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए, इनकी कानून में कोई मान्यता नहीं है। जैसा कि विश्व लोचन मदन बनाम भारत सरकार (2014) में कहा गया, ऐसे संस्थानों द्वारा दी गई कोई भी घोषणा या फैसला किसी पर बाध्यकारी नहीं है और इसे जबरन लागू नहीं किया जा सकता। ऐसी घोषणा या फैसला तभी कानूनी जाँच में टिक सकता है, जब संबंधित पक्ष इसे स्वीकार करें और उसका पालन करें, बशर्ते यह किसी अन्य कानून से टकराव न पैदा करे। फिर भी, ऐसी घोषणा या फैसला केवल उन पक्षों के बीच ही मान्य होगा, जो इसे स्वीकार करते हैं, न कि किसी तीसरे पक्ष पर।”

यह मामला शहजाहन और उनके शौहर के बीच निकाह और तलाक से जुड़ा है। शहजाहन का निकाह 24 सितंबर 2002 को उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति के साथ इस्लामी रिवाजों से हुई थी। यह दोनों का दूसरा निकाह था। साल 2005 में शौहर ने भोपाल, मध्य प्रदेश के काजी कोर्ट में ‘तलाक मुकदमा नंबर 325’ दायर किया, जो 22 नवंबर 2005 को दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के आधार पर खारिज हो गया। समझौते में दोनों ने साथ रहने और एक-दूसरे को शिकायत का मौका न देने का वादा किया था।

साल 2008 में शौहर ने दारुल कजा कजियत कोर्ट में फिर से तलाक के लिए मुकदमा दायर किया। उसी साल शहजाहन ने फैमिली कोर्ट में आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत भरण-पोषण की माँग की। साल 2009 में दारुल कजा कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दे दी और तलाकनामा जारी हुआ। लेकिन फैमिली कोर्ट ने शहजाहन की भरण-पोषण की माँग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शौहर ने शहजाहन को नहीं छोड़ा, बल्कि उनके स्वभाव और व्यवहार की वजह से ही विवाद हुआ और वह खुद घर छोड़कर चली गईं।

सुप्रीम कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के इस तर्क को गलत ठहराया। कोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने यह मान लिया कि चूँकि यह दोनों का दूसरा निकाह था, इसलिए दहेज की माँग की संभावना नहीं थी। जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा, “फैमिली कोर्ट का यह तर्क कानून के सिद्धांतों से परे है और केवल अनुमान पर आधारित है। कोर्ट को यह मान लेना कि दूसरे निकाह में दहेज की माँग नहीं हो सकती, गलत है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि 2005 के समझौता पत्र में शहजाहन ने अपनी गलती स्वीकार नहीं की थी, जैसा कि फैमिली कोर्ट ने माना था। समझौता पत्र में केवल यह लिखा था कि दोनों पक्ष साथ रहेंगे और एक-दूसरे को परेशान नहीं करेंगे। कोर्ट ने कहा कि इस आधार पर शहजाहन को भरण-पोषण से वंचित करना गलत है।

सुप्रीम कोर्ट ने शौहर को आदेश दिया कि वह शहजाहन को हर महीने 4,000 रुपये भरण-पोषण के रूप में दे, और यह राशि उस तारीख से लागू होगी, जब शहजाहन ने फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा कि बच्चों के लिए दी गई भरण-पोषण राशि भी आवेदन की तारीख से लागू होगी, लेकिन बेटी के लिए यह केवल तब तक लागू होगा, जब तक वह नाबालिग थी। शौहर को चार महीने के भीतर फैमिली कोर्ट में यह राशि जमा करने का निर्देश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि धारा 125 एक कल्याणकारी कानून है, जिसका मकसद बीवी और बच्चों को बेसहारा होने से बचाना है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में देरी की वजह से आवेदक को नुकसान नहीं होना चाहिए। इस फैसले ने न केवल शरिया अदालतों की कानूनी स्थिति को स्पष्ट किया, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत संदेश भी दिया।

₹63000 करोड़ में भारत ने खरीदे परमाणु बम दागने में सक्षम 26 राफेल मरीन: जानिए कब तक मिलेगा पहला फाइटर जेट, कैसे फ्रांस के साथ इस डील से बदल जाएँगे समंदर के समीकरण?

भारत ने अपनी नौसेना को और मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली में सोमवार (28 अप्रैल 2025) को भारत और फ्रांस के बीच 63 हजार करोड़ रुपए की मेगा डील साइन हुई, जिसमें भारत को 26 राफेल मरीन फाइटर जेट्स मिलेंगे। ये विमान न सिर्फ समुद्र में भारत की ताकत बढ़ाएँगे, बल्कि दुश्मन देशों जैसे पाकिस्तान और चीन के लिए भी एक सख्त संदेश होंगे।

ये डील इसलिए भी खास है, क्योंकि ये फ्रांस के साथ भारत की अब तक की सबसे बड़ी हथियार डील है। राफेल मरीन विमानों को INS विक्रांत जैसे विमानवाहक पोत पर तैनात किया जाएगा, जो भारत को समुद्र में एक नई ताकत देगा। आइए इस डील को, राफेल मरीन की खासियतों को और इसके महत्व को आसान भाषा में समझते हैं।

राफेल मरीन की विशेषताएँ: एक ताकतवर फाइटर जेट

राफेल मरीन एक ऐसा फाइटर जेट है, जो समुद्र में भारत की ताकत को कई गुना बढ़ा देगा। इसकी खासियतों को समझें:

डिज़ाइन और ताकत: राफेल मरीन की लंबाई 50.1 फीट और चौड़ाई 10.80 मीटर है। इसका वजन 15 हजार किलो तक हो सकता है। इसमें 11,202 किलो फ्यूल भर सकता है, जिससे ये लंबे समय तक उड़ान भर सकता है। ये 52 हजार फीट की ऊंचाई तक जा सकता है और इसकी रफ्तार 2205 किमी प्रति घंटा है।

रेंज और ताकत: इसकी रेंज 3700 किमी है, यानी ये इतनी दूर तक हमला कर सकता है। इसमें 30 एमएम की ऑटो कैनन गन और 14 हार्ड प्वाइंट्स हैं, जहां हथियार लगाए जा सकते हैं।

खास फीचर्स: ये विमान सिर्फ एक मिनट में 18 हजार मीटर की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसमें फोल्डिंग विंग्स हैं, जो इसे विमानवाहक पोत पर आसानी से रखने में मदद करते हैं। ये बहुत कम जगह पर भी लैंड कर सकता है।

हथियारों की ताकत: राफेल मरीन में कई तरह की मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, जैसे स्काल्प (Scalp) मिसाइल, जो 300 किमी तक मार कर सकती है, और मेटियोर (Meteor) मिसाइल, जो हवा में 120-150 किमी दूर तक दुश्मन के विमानों को मार गिरा सकती है। इसके अलावा, इसमें 70 किमी रेंज वाली एक्सोसेट (Exocet) एंटी-शिप मिसाइल भी है, जो समुद्र में दुश्मन के जहाजों को तबाह कर सकती है।

एडवांस टेक्नोलॉजी: ये विमान परमाणु हथियार दागने में सक्षम है। इसमें एडवांस रडार है, जो पनडुब्बियों को खोजकर उन्हें नष्ट कर सकता है। साथ ही, ये 10 घंटे तक फ्लाइट रिकॉर्ड कर सकता है।

बीच हवा में रीफ्यूलिंग: राफेल मरीन को हवा में ही रीफ्यूल किया जा सकता है, जिससे इसकी रेंज और बढ़ जाती है।

भारत के लिए कस्टमाइजेशन: दसॉ एविएशन ने इन विमानों को भारत की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया है। इसमें एंटी-शिप स्ट्राइक, न्यूक्लियर हथियार लॉन्च करने की क्षमता और मजबूत फ्रेम जैसे फीचर्स शामिल हैं। कंपनी भारत को हथियार प्रणाली, स्पेयर पार्ट्स और जरूरी टूल्स भी देगी।

राफेल मरीन क्यों जरूरी था?

भारतीय नौसेना के पास अभी INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत जैसे दो विमानवाहक पोत हैं, जहाँ पुराने मिग-29के फाइटर जेट्स तैनात हैं। लेकिन इन मिग-29के विमानों में कई समस्याएँ हैं, जैसे रखरखाव की ज्यादा जरूरत और कम उपलब्धता। नौसेना को 2022 में ही कहना पड़ा था कि INS विक्रांत को मिग-29के के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन अब उसे एक बेहतर डेक-बेस्ड फाइटर जेट चाहिए। राफेल मरीन इस कमी को पूरा करेगा।

एडवांस टेक्नोलॉजी की जरूरत: राफेल मरीन में मिग-29के से कहीं ज्यादा एडवांस रडार, सेंसर और हथियार ले जाने की क्षमता है।

पुराने विमानों का विकल्प: मिग-29के की जगह लेने के लिए राफेल मरीन एकदम सही है, क्योंकि भारत पहले से ही वायुसेना के लिए 36 राफेल जेट्स इस्तेमाल कर रहा है। इससे रखरखाव और ट्रेनिंग में आसानी होगी।

सामरिक जरूरत: भारत की समुद्री सीमाओं पर पाकिस्तान और चीन जैसे देशों का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे में राफेल मरीन जैसे मॉडर्न जेट्स की जरूरत थी।

स्वदेशी विमान में देरी: भारत का अपना ट्विन-इंजन डेक-बेस्ड फाइटर (TEDBF) बनने में अभी 10 साल लग सकते हैं। तब तक राफेल मरीन एक अंतरिम समाधान है।

ट्रायल में जीत: 2022 में नौसेना ने गोवा में राफेल मरीन और अमेरिका के F/A-18 सुपर हॉर्नेट का ट्रायल किया था। राफेल मरीन ने इसमें बाजी मारी, जिसके बाद भारत ने इसे चुना।

इंडियन नेवी को क्या ताकत मिलेगी?

राफेल मरीन की तैनाती से भारतीय नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

समुद्र में मजबूत पकड़: INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य पर राफेल मरीन की तैनाती से भारत समुद्र में अपनी पकड़ मजबूत करेगा। ये विमान समुद्र, जमीन और हवा में हमला करने में सक्षम हैं।

एडवांस हथियार और रडार: राफेल मरीन के एडवांस रडार और हथियार दुश्मन की पनडुब्बियों, जहाजों और विमानों को आसानी से निशाना बना सकते हैं।

लंबी रेंज और रीफ्यूलिंग: 3700 किमी की रेंज और हवा में रीफ्यूलिंग की सुविधा से ये विमान लंबे मिशन पर जा सकते हैं।

न्यूक्लियर स्ट्राइक की ताकत: परमाणु हथियार दागने की क्षमता इसे एक रणनीतिक हथियार बनाती है।

पाकिस्तान और चीन पर कैसे भारी पड़ेगा?

राफेल मरीन की ताकत पाकिस्तान और चीन जैसे दुश्मन देशों के लिए एक बड़ा खतरा है।

पाकिस्तान के F-16 से बेहतर: राफेल मरीन पाकिस्तान के F-16 से कहीं ज्यादा एडवांस है। इसकी मेटियोर मिसाइल 120-150 किमी दूर तक दुश्मन के विमानों को मार सकती है, जो F-16 की रेंज से बाहर है।

चीन के J-20 को टक्कर: चीन का J-20 विमान भी राफेल मरीन की रडार टेक्नोलॉजी और हथियारों के सामने कमजोर पड़ सकता है। राफेल की लंबी रेंज और सटीक हमले की क्षमता इसे बेहतर बनाती है।

समुद्र में बढ़त: समुद्र में चीन और पाकिस्तान की नौसेना पर भारत की पकड़ मजबूत होगी। राफेल मरीन की एंटी-शिप मिसाइलें दुश्मन के जहाजों को आसानी से नष्ट कर सकती हैं।

रणनीतिक दबाव: परमाणु हथियार दागने की क्षमता दुश्मन देशों पर रणनीतिक दबाव बनाएगी।

भारत और फ्रांस के बीच सोमवार (28 अप्रैल 2025) को नई दिल्ली में 26 राफेल मरीन विमानों की डील साइन हो गई। भारत की तरफ से रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने डील पर साइन किए। डील के तहत भारत, फ्रांस से 22 सिंगल सीटर विमान और 4 डबल सीटर विमान खरीदेगा। इन फाइटर जेट्स की खरीद को 23 अप्रैल 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में मंजूरी मिली थी। यह मीटिंग पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद बुलाई गई थी।

राफेल मरीन डील भारत के लिए एक गेम-चेंजर है। ये न सिर्फ नौसेना को मॉडर्न बनाएगा, बल्कि समुद्र में भारत की ताकत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगा। 2028 से शुरू होने वाली इसकी डिलीवरी 2031 तक पूरी हो जाएगी और तब तक भारत समुद्र में एक नई ताकत के रूप में उभरेगा।

‘गायत्री मंत्र नहीं बोलने पर मुस्लिम को मार डाला’: पहलगाम अटैक पर LinkedIn यूजर के झूठ को The Quint ने दी हवा, बाद में चुपके से खबर हटाई

कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले में हिन्दुओं की हत्या के बाद अब लिबरल और वामपंथी जमात वापस अपने काम में लग गई है। हिन्दुओं की पीड़ा बताने के बजाय उसका पूरा ध्यान अब सोशल मीडिया पर कश्मीरियों के ‘उत्पीड़न’ की झूठी और पुरानी कहानियाँ साझा करने पर है। 24 हिन्दुओं की हत्या के बाद भी उसका फोकस ‘मुस्लिम विक्टिम’ बनाने पर है।

शुक्रवार (25 अप्रैल 2025) को सोशल मीडिया वेबसाइट LinkedIn पर ईशान सक्सेना नाम के एक यूजर ने एक फर्जी पोस्ट डाली। पोस्ट में उसने दावा किया कि उसका एक करीबी मुस्लिम दोस्त बेंगलुरु के अस्पताल में ICU में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।

ईशान ने लिखा कि उसका मुस्लिम दोस्त (जिसका नाम उसने नहीं बताया) एक प्रसिद्ध वाहन निर्माता फैक्ट्री में काम करता है। ईशान ने दावा किया कि उसके मुस्लिम दोस्त को उसके सहकर्मियों ने बुरी तरह पीटा है। ईशान का दावा था कि मारपीट करने वाले हिंदू लोग थे और उन्होंने मुस्लिम युवक के गायत्री मंत्र न बोलने और पहलगाम आतंकी हमले पर कुछ न कहने के कारण उसके मुस्लिम दोस्त को पीटा।

ईशान सक्सेना के पोस्ट का स्क्रीनशॉट

अपनी पोस्ट में ईशान ने लिखा, “उसने (मुस्लिम दोस्त) अपने स्थानीय दोस्तों के साथ लंच के समय हाल ही में हुए पहलगाम हमले के बारे में कुछ न बोलना ठीक समझा। उसने शांति से इस पर कुछ भी कहने से मना कर दिया और चर्चा में भाग न लेकर उससे दूरी बनाई। बाद में जब उसकी शिफ्ट खत्म हुई तो कुछ लोग उसके पास आए और उससे गायत्री मंत्र बोलने को कहा। उसने मना किया तो उसके साथ बुरी तरह मारपीट की गई।”

ईशान ने आगे लिखा कि इस पूरे मामले पर अब तक कोई FIR भी दर्ज नहीं की गई है। उसने आगे लिखा, “पिछली रात उसकी पत्नी का मेरे पास फोन आया। वह टूट चुकी है। इससे भी अधिक बुरी बात है कि कोई FIR नहीं लिखी गई। और जिस संस्थान में उसे ईमानदारी के साथ काम किया उसने भी कोई बयान नहीं दिया।”

लिंक्डइन पोस्ट का स्क्रीनशॉट

ईशान की ये पोस्ट तुरंत वायरल हो गई। कुछ ही समय में यह 400 से भी अधिक लाइक पा गई। एक अन्य LinkedIn यूजर ने जब मुस्लिम पीड़ित के बारे में पूछा तो ईशान ने दावा किया कि उसकी मौत हो चुकी है। पोस्ट पर उसने कमेंट किया, “वह अब नहीं रहा। 30 मिनट पहले उसकी मौत हो गई।”

बेंगलुरु जैसे विविधता वाले शहर में एक मुस्लिम कॉर्पोरेट कर्मचारी से जबरन गायत्री मंत्र बुलवाना और पहलगाम आतंकी हमले पर कुछ न बोलने पर हत्या कर देना काफी संवेदनशील मामला बनता। पहलगाम हमले जैसी राष्ट्रीय समस्या के समय इससे सामाजिक तनाव और सांप्रदायिक अशांति फैलाने का भी खतरा था।

हालाँकि, अंग्रेजी मीडिया में इस तरह के उत्पीड़न (या हत्या) पर कहीं भी कोई रिपोर्ट नहींं दिखी। यहाँ तक कि कन्नड़ न्यूज चैनल या अखबारों में भी इस तरह की विस्फोटक खबर का अता पता नहीं था। इसके कारण इस पोस्ट की सच्चाई पर शक और अधिक बढ़ गया।

ऑपइंडिया जर्नलिस्ट द्वारा लिया गया ट्वीट का स्क्रीनशॉट

ऑपइंडिया अंग्रेजी के सहायक संपादक दिबाकर दत्ता ने इस मामले को लेकर बेंगलुरू पुलिस से संपर्क किया। उन्होंने अलग-अलग जोन के डिप्टी कमिश्नर के एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल को टैग कर इससे सम्बन्धित जानकारी माँगी लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके कुछ ही घंटे बाद ईशान सक्सेना वह LinkedIn पोस्ट डिलीट कर दी।

इसके बाद ईशान ने अपना LinkedIn अकाउंट भी डिएक्टिवेट कर दिया। इसके बाद लगातार सामने आई जानकारियों से स्पष्ट होता गया कि ईशान की ‘करीबी मुस्लिम दोस्त’ के पहलगाम हमले पर कुछ न बोलने पर हिंदू साथियों द्वारा हत्या की कहानी झूठी है।

ईशान ने अपने LinkedIn में दावा था कि वह ‘कैश करो’ कम्पनी के HR विभाग में काम करता था। इस मामले में दिबाकर दत्ता और कुछ स्थानीय लोगों ने भी कंपनी से संपर्क करने की कोशिश की। शनिवार (26 अप्रैल 2025) को कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा कि ईशान सक्सेना ‘कैश करो’ कंपनी का वर्तमान में कर्मचारी नहीं है।

कैश करो ने कहा,”हमारे संज्ञान में आया है कि सोशल मीडिया पर ईशान सक्सेना (पूर्व-कैश करो कर्मचारी) द्वारा एक पोस्ट की गई है। हम इस बात को स्पष्ट करना चाहते हैं कि ईशान सक्सेना को कैश करो कंपनी की जिम्मेदारियों से 27 अप्रैल 2025 को मुक्त कर दिया गया है।”

उन्होंने आगे बताया, “उनकी ओर से साझा किए गए पोस्ट व्यक्तिगत थे और इसका कंपनी के विचार, मूल्य और स्थिति से कोई लेना देना नहीं है। कैश करो सम्मामनजनक, समावेशी और जिम्मेदार वातावरण को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है, चाहे वह हमारे संगठन के भीतर हो या उन समुदायों में जिनके लिए हम काम करते हैं।”

ईशान सक्सेना के झूठे दावों का बढ़ावा देता द क्विंट

शुक्रवार (25 अप्रैल 2025) को द क्विंट ने इस खबर को ‘मुस्लिमों को पीड़ित दिखाने की’ खबरों की सीरीज में शामिल किया। मामले के तथ्यों को जाने बिना उसने ईशान सक्सेना के पोस्ट को दोबारा प्रकाशित किया।

द क्विंट में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

क्विंट ने इसके लिए सब हेड लगाते हुए खबर लिखी, “एक ऑटो कंपनी के कर्मचारी को कथित तौर पर बुरी तरह से पीटा गया।” (इसे अब हटा दिया गया है।)

क्विंट की ‘पत्रकार’ अलीज़ा नूर ने न तो पुलिस से संपर्क किया और न ही कोई अन्य पुष्टि करने वाले स्रोतों को ढूँढने की कोशिश की।

‘द उम्माह इनसाइट’ की इंटाग्राम पोस्ट का स्क्रीनशॉट

ईशान सक्सेना के झूठे दावों को इंस्टाग्राम पर एक इस्लामी पेज ‘द उम्माह इनसाइट’ (The Ummah Insights) ने दिल को झकझोर देने वाले ग्राफिक्स के साथ रीपोस्ट किया। खबर के लिखने के समय तक इसे 1428 लाइक्स मिल चुके थे।

ईशान सक्सेना ने इश पर क्या कहा

ऑपइंडिया ने इस मामले में तह तक जाने के लिए शनिवार (26 अप्रैल 2025 को) को ईशान सक्सेना से बात की। उसने दावा किया कि उसने लिंक्डइन के एक अन्य यूजर की इस पोस्ट को कॉपी किया लेकिन उसे उस यूजर का नाम नहीं याद है।

जब उससे ‘मुस्लिम दोस्त’ की मौत पर सवाल पूछा गया तो ईशान सक्सेना ने दावा किया कि उसने एक अन्य व्यक्ति के कमेंट में ऐसा लिखा देखा था तो उसने भी वही लिख दिया। उसने इस बात को माना कि ये घटना झूठी हो सकती है। उसने हमें बताया यह बताया कि बेंगलुरू पुलिस ने उससे पूछताछ की थी।

ईशान सक्सेना के मुताबिक, पुलिस ने बताया कि इस तरह की कोई भी घटना संज्ञान में नहीं आई है। पुलिस ने ईशान से इस पोस्ट को डिलीट करने और भविष्य में इस तरह के सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील कंटेंट को बिना जाँच किए पोस्ट करने से मना किया है।

ईशान सक्सेना ने ऑपइंडिया को अपना आधिकारिक बयान दिया, “मेरा नाम ईशान है और हाल ही में मैंने लिंक्डइन पर एक मुस्लिम व्यक्ति पर उसके साथियों द्वारा हमले की बात लिखी थी। असल में ये पोस्ट लिंक्डइन पर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा लिखी गई थी जिसे मैंने कॉपी किया था।”

आगे ईशान ने कहा, “मैंने इसे हमारे देश में हो रही घटनाओं के प्रति दुखी महसूस करते हुए जल्दबाजी में साझा कर दिया। मुझे इस घटना के तथ्यों की जाँच परख करनी चाहिए थी जो मैंने नहीं किया और इसलिए मैं अपने कृत्य के लिए माफी माँगता हूँ कि मैंने बिना जाँच किये ऐसी पोस्ट लिखी जिसके बारे में मुझे लगा कि सत्य होगी।”

ऑपइंडिया को गूगल कैशे में ईशान सक्सेना के अलावा इस तरह की किसी भी अन्य पोस्ट की जानकारी नहीं मिली, जिसमें मुस्लिम कॉर्पोरेट कर्मी की गायत्री मंत्र न बोलने और पहलगाम पर चुप रहने के लिए मार दिये जाने की जानकारी हो। अन्य सोशल मीडिया पोस्ट भी सिर्फ ईशान की लिंक्डइइन प्रोफाइल और दावे के बारे में ही बताती दिखी।

निष्कर्ष

बार-बार, सोशल मीडिया पर ऐसी फर्जी कहानियाँ सामने आती हैं, जिनका उद्देश्य हिंदू समुदाय को बदनाम करना या इसकी छवि को धूमिल करना होता है। उपरोक्त उदाहरण में भी एक कहानी चली जिसमें ना तो नामों का उल्लेख किया गया और न ही अपराध के बारे में बताया गया। फिर भी एक प्रमुख मीडिया संगठन (द क्विंट) ने केवल इस कारण से सामने रखा क्योंकि यह ‘मुस्लिम पीड़ित’ दिखाने की धारणा में फिट बैठती थी।

पहलगाम आतंकी हमले में 24 हिंदुओं के इस्लामिक आतंकियों द्वारा मारे जाने पर से ध्यान हटाने के लिए ‘द क्विंट’ ने ऐसा किया। पहलगाम में में हिंदुओं को अपना नाम बताने, पहचान पत्र दिखाने, कलमा पढ़ने और यहाँ तक ​​कि ‘खतना’ का सबूत दिखाने के लिए अपनी पैंट उतारने तक के लिए मजबूर किया गया।

पहलगाम की सच्चाई बताने की बजाय क्विंट का फोकस पीड़ा की फर्जी खबरगढ़ने पर रहा। इस तरह की खबरों के जरिए आतंकी हमलों के पीड़ितों की ‘धार्मिक पहचान’ को छुपाने की भी कोशिश की जा रही है। द क्विंट ने ईशान सक्सेना की साझा की गई फेक न्यूज को बढ़ावा देने के बावजूद कोई माफी नहीं माँगी और चुपचाप खबर को हटा दिया।

इससे पहले भी हिंदू त्योहारों को बदनाम करने के इरादे से होली पर वीर्य से भरे गुब्बारे फेंके जाने जैसी कई झूठी कहानियाँ फैलाई गई। बाद में जाँच करने पर पता चला कि इस तरह की घटना हुई ही नहीं। तब भी बिना किसी माफीनामे के चुपचाप खबर हटा दी गई।

हिंदू लड़की का रेप कर रहा था फरहान, फोन पर चीखें सुन रहा था भाई: इंदौर तक फैला है भोपाल के ‘मुस्लिम गैंग’ का जाल, कहा- गिरफ्तारी का पता होता तो वायरल कर देता Video

मध्य प्रदेश के भोपाल में लव जिहाद के मामले में रोज नई परतें खुल रही हैं। जाँच के दौरान अब पुलिस को पता चला है कि इस केस का कनेक्शन इंदौर के कॉलेज तक था। मुख्य आरोपित फरहान ने वहाँ भी कई छात्राओं को फँसाया था और उनको टॉर्चर करता था। उसके फोन से लगभग 6 आपत्तिजनक वीडियोज मिली हैं। वहीं सारे आरोपितों के फोन की जाँच में कुल वीडियो 10 से 12 वीडियोज बरामद की गई हैं।

पूछताछ में फरहान कबूला है कि अगर उसे थोड़ा भी अंदेशा होता कि वो गिरफ्तार होने वाला है तो वो सबकी गंदी वीडियोज वायरल कर देता, लेकिन उसे इसका भान नहीं था। छानबीन में ये भी सामने आया है फरहान ने दो सगी बहन समेत 3 लड़कियों को फँसाया हुआ था। इनमें एक ऐसी नाबालिग थी जो फरहान को भाई-भाई कहती थी। मगर, जब ‘मुस्लिम गैंग’ ने उसे भी अपना निशाना बनाया।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने बातचीत में बताया कि साल 2022 में उसकी उम्र मात्र 16 साल थी। उस समय वह अपनी बहन के आईटी कॉलेज जाती थी। फरहान से उसकी मुलाकात वहीं हुई थी। एक दिन फरहान ने कहा – “मैं तुझे पसंद करता हूँ और मुझसे बात करने में बुराई क्या है।”

शुरू में बच्ची ने मना किया, मगर बार-बार कहने दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। एक दिन फरहान नाबालिग पीड़िता को अपने साथ अशोक गार्डन अपने रूम पर ले गया। पीड़िता के अनुसार, रूम पर पहुँचते ही वहाँ फरहान ने अपने कपड़े उतारे। लड़की ने मना किया तो उसे धमकी देते हुए उसका बलात्कार कर लिया। और आखिर में उसे कहा भी अगर किसी को ये सब बताया तो उसके फोटो-वीडियो उसके बाप को भेज दिए जाएँगे और भाई को भी मार दिया जाएगा।

इतना ही नहीं फरहान ने एक पीड़िता को निकाह के लिए और धर्मांतरण के लिए बहुत ज्यादा दबाव बनाया था। वह साफ कहता था- “तुमको बुर्का पहनना होगा, इस्लाम अपनाना होगा।” जब लड़की फरहान से दूरी बनाने लगी तो वो एक दिन उसके रूम पर आ धमका। तब, लड़की अपने भाई से बात कर रही थी।

फरहान ने पहले कहा कि उसे बस माफी माँगनी है। हालाँकि कमरे में घुसते ही उसने फिर पीड़िता से रेप किया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि रेप के वक्त जब लड़की चीख रही थी तब फोन ऑन रह गया था और ये चीखें उसके भाई ने भी सुनी थीं। भाई ने हड़बड़ी में पुलिस को मदद के लिए कॉल भी की, लेकिन वहाँ से कोई जवाब नहीं आया।

अब पुलिस इस मामले में फरहान समेत मुस्लिम गैंग के अन्य सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वहीं महिला पुलिस अधिकारी भी अपने काम में जुटी है और पीड़िताओं की काउंसलिंग करते हुए उन्हें शिकायत दर्ज करने को कहा जा रहा है।

अब पुलिस इस मामले में फरहान समेत मुस्लिम गैंग के अन्य सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वहीं महिला पुलिस अधिकारी भी अपने काम में जुटी है और पीड़िताओं की काउंसलिंग करते हुए उन्हें शिकायत दर्ज करने को कहा जा रहा है।

अभी तक इस मामले में 12 नामजद आरोपितों समेत कई अन्य का नाम जोड़ा गया है। केस शहर के अलग-अलग पाँच थानों (बागसेवनिया, अशोक गार्डन, जहाँगीराबाद, बैरागढ़, श्यामा हिल्स) में दायर हुआ है। पुलिस ने फरहान, साहिल, शाहरुख, जोया समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। केस में पहली शिकायत कराने वाली पीड़िता का कहना है कि उसने फरहान की हरकतों से तंग आकर केस दर्ज कराया था।

वहीं बाकी पीड़िताओं ने भी खुलासे किए कि ये गैंग उनका ब्रेनवॉश करती थी। उन्हें बुर्का पहनने को, रोजा रखने को मजबूर करती थी और निकाह व धर्मांतरण का दबाव बनाती थी। इतना ही नहीं गाँजा पिलाकर रेप किया जाता था, चलती कार में बलात्कार होता था, पोर्न देखने को मजबूर किया जाता था, बात न सुनने पर गले पर छुरी रखकर दुष्कर्म होते थे, और मीट भी जबरन खिलाया जाता था।

पुलिस अब आरोपितों को पकड़कर बिहार से बंगाल तक दबिश दे रही है। मामले की जाँच के लिए एसआईटी भी गठित है। वहीं मुख्यमंत्री यादव ने स्कूल, कॉलेज की छात्राओं के हुए घिनौने काम पर चिंता जताते हुए इस मामले में सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।

कॉन्ग्रेस नेताओं को उन हिंदू पीड़ितों के कहे पर नहीं भरोसा, जिनके अपनों को पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने मारा: कहा- नहीं पूछा धर्म, TMC नेता बोली- BJP ने करवाया हमला

पहलगाम आतंकी हमले पर कॉन्ग्रेस और विपक्ष के नेता विवादित बयान देने से रुक नहीं रहे हैं। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता ने अब दावा किया है कि आंतकियों ने पहलगाम में लोगों को धर्म पूछ कर नहीं मारा। उनका दावा है कि पहलगाम में आतंकियों के पास धर्म पूछने का समय नहीं था। वहीं तृणमूल कॉन्ग्रेस की एक नेता ने भाजपा को इस हमले का जिम्मेदार बताया है।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने यह विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, “आतंकियों के पास इतना टाइम कहाँ होता है कि वह लोगों के कान में जाकर पूछें कि तुम्हारा धर्म क्या है?” विजय वडेट्टीवार ने यह भी दावा किया कि आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता। उन्होंने कहा कि धर्म पूछने के बारे में लोग अलग-अलग बातें कर रहे हैं।

वडेट्टीवार ने इस बीच सुरक्षाबलों पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि आतंकियों के धर्म पूछ कर मारने वाली बात असल मुद्दे से ध्यान भटकाना है। विजय वडेट्टीवार के इस बयान पर अब विवाद हो रहा है। हालाँकि, वह अकेले ऐसे नेता नहीं है जो इस मामले पर ऐसी बातें कर रहे हैं।

TMC नेता ने बताया भाजपा की साजिश

TMC नेता मरजीना खातून ने भी पहलगाम हमले को लेकर ऐसी ही विवादित टिप्पणी की है। मालदा में एक कार्यक्रम में मरजीना खातून ने पहलगाम हमले को भाजपा का काम बताया और दावा किया कि यह सब वक्फ कानून से ध्यान हटाने को लेकर करवाया गया है।

मरजीना खातून ने कहा, “भाजपा ने नए वक्फ कानून से जनता का ध्यान हटाने के लिए यह हमला किया..बीजेपी आतंकियों को पनाह देती है, इसलिए वहाँ सेना नहीं लगाई गई थी।” मरजीना खातून ने दावा किया कि जल्द ही चुनाव होने वाले हैं इसलिए यह सब करवाया गया है।

कॉन्ग्रेस नेता बोला- पाक का पानी मत रोको

जम्मू कश्मीर से आने वाले नेता और पूर्व केन्द्रीय सैफुद्दीन सोज ने भारत सरकार से सिंधु जल समझौता ना रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सिंधु नदी पाकिस्तान की लाइफलाइन है और इस डाइवर्ट नहीं किया जा सकता। सोज ने दावा किया है कि इससे पंजाब और कश्मीर डूब जाएँगे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत को पाकिस्तान की पहलगाम हमले में शामिल ना होने की बात भी स्वीकार कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी कभार बंदूकधारी पगला जाते हैं। उन्होंने लगातार पाकिस्तान की सारी बातें मानने का अनुरोध भारत सरकार से किया।

कॉन्ग्रेस के मंत्री ने भी पीड़ितों को झुठलाया था

इससे पहले कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री RB तिम्मापुर ने पहलगाम हमले के पीड़ितों को झुठलाया था। तिम्मापुर ने दावा किया था कि आतंकियों ने हमले से पहले किसी का धर्म नहीं पूछा था और यह सब इस मामले को एक मजहबी रंग देने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने नाम पूछने वाली बात को खुफिया तंत्र की विफलता छुपाने का बहाना बताया था।

तिम्मापुर ने कहा था, “मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमलावरों ने पर्यटकों का नाम और धर्म पूछा होगा…यह खुफिया विफलता में मजहबी रंग जोड़ने के लिए है। कारगिल, कारगिल, पुलवामा और अब पहलगाम केंद्रीय एजेंसियों की विफलता का परिणाम हैं।”

तिम्मापुर ने कहा कि हमले के चलते एक विशेष मजहब को निशाने पर नहीं लिया जाना चाहिए। मंत्री तिम्मापुर ने यह बयान तब दिया है जब कर्नाटक के ही कई लोग पहलगाम में मारे गए हैं और उन्होंने स्पष्ट तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि इस्लामी आतंकियों ने हिन्दू बताने पर ही उनके परिजनों की हत्या की।