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पहलगाम में हिंदुओं की हत्या करवाने के बाद साइबर अटैक पर उतरा पाकिस्तान, लेकिन रहा नाकाम: देर रात LOC पर की हिमाकत तो भारतीय सेना ने दिया मुँहतोड़ जवाब

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के सर पर भारत का खतरा मंडरा रहा है। हमले से बचने के लिए पाकिस्तान हर संभव प्रयास कर रहा है। इस बीच पाकिस्तान की एक नापाक कोशिश सामने आई है। पाकिस्तानी हैकर भारत के साइबर सिक्योरिटी को हैक करने की कोशिश कर रहे हैं हालाँकि ये वार भी खाली गया है।

जानकारी के अनुसार IOK हैकर यानि ‘इंटरनेट ऑफ़ खिलाफ़ा’ नामक समूह भारत की ऑनलाइन सेवाओं को रोकने और पर्सनल इंफोर्मेशन चुराने का काम कर रही थी। जिसके बाद भारतीय साइबर सुरक्षा प्रणाली को पाकिस्तान की इस नापाक हरकत की भनक लगी और ये हमला समय रहते विफल कर दिया गया।

इसके अलावा भारत की साइबर सुरक्षा प्रणाली को आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गनाइजेशन (AWHO) के डेटाबेस चुराने की जानकारी मिली। इसके अलावा भारतीय वायु सेना प्लेसमेंट संगठन पोर्टल को भी हैक करने का एक साथ प्रयास किया गया। सभी चार साइटों को तुरंत अलग कर दिया गया और कार्रवाई की गई, जिसके चलते समय रहते किसी भी तरह की कोई डेटा चोरी नहीं हो पाई।

शायद पाकिस्तान जानता नहीं है, कि वे कितने भी प्रयास भारत के खिलाफ कर ले, अंत में विफल ही होना है। क्योंकि भारतीय सेना अपनी डिजिटल स्पेस की रक्षा करने के लिए, साइबर सिक्योरिटी को लगातार अपग्रेड करती रहती है और हमेशा अलर्ट रहती है।

पाकिस्तान को हमले का डर

वहीं भारत के एक्शन के बाद पाकिस्तान में हमले के डर का माहौल है। और इसी बीच पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बुधवार (30 अप्रैल 2025) को बताया कि उन्हें “विश्वसनीय खुफिया जानकारी” मिली है, कि भारत अगले 24 से 36 घंटों के भीतर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

यह दावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंगलवार (29 अप्रैल 2025) को बैठक के बाद किया गया। बैठक में पीएम मोदी ने भारतीय सशस्त्र बलों को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब देने के लिए खुली छूट दी है।

एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक बयान में, तरार ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह के हमले का जवाब वे देगा और भारत को ही जवाबदेह ठहराया जाएगा।

तरार ने कहा, “पाकिस्तान के पास विश्वसनीय खुफिया जानकारी है कि भारत पहलगाम की घटना को झूठा बहाना बनाकर अगले 24 से 36 घंटों के भीतर सैन्य हमला करने का इरादा रखता है।”

यह दावा ऐसे समय में आया है जब नियंत्रण रेखा (LoC) पर पहले से ही पाकिस्तानी सेना द्वारा गोलीबारी की जा रही है और भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज कर दिया है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद LOC पर गोलीबारी

22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा (LOC) पर उकसावे के लिए छोटे हथियारों से गोलीबारी कर रही है, जिसका जवाब भी पाकिस्तानी सेना को प्रभावी ढंग से दिया जा रहा है। 29-30 अप्रैल 2025 की रात पाकिस्तानी सेना की ओर से कश्मीर के नौशेरा, सुंदरबनी और अखनूर सेक्टरों में फिर से गोलीबारी की गई, जिसका भारतीय सेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया।

भारतीय सेना ने 28-29 अप्रैल 2025 की रात को भी कुपवाड़ा और बारामूला जिलों के विपरीत क्षेत्रों के साथ-साथ जम्मू और कश्मीर के अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पार पाकिस्तान सेना द्वारा फिर से गोलीबारी कर उकसाने की प्रक्रिया को विफल कर दिया।

भारतीय सेना के अनुसार, भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सेना द्वारा बिना उकसावे के की गई गोलीबारी का तेजी से और प्रभावी ढंग से जवाब दिया। 25-26 अप्रैल 2025 की रात को भी पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलीबारी के बाद भारत के जवाब का लगातार पाँचवाँ दिन है।

इससे पहले भी भारतीय सेना ने 27-28 अप्रैल 2025 की रात को कुपवाड़ा और पुंछ जिलों के विपरीत क्षेत्रों में LoC के पास पाकिस्तान सेना की गोलीबारी का मुँहतोड़ जवाब दिया था।

अपने तरीके से जवाब देने को स्वतंत्र है भारत, उसे आत्मरक्षा का पूरा अधिकार: इजरायल का खुला समर्थन, पहलगाम आतंकी हमले को 7 अक्टूबर के हमास अटैक जैसा बताया

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने भारत के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया। यह भारत में पुलवामा हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला था। अजार ने साफ तौर पर कहा कि इजरायल भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है और भारत की संप्रभुता का सम्मान करता है।

न्यूज चैनल WION के साथ बातचीत में रुवेन अजार ने पहलगाम हमले की तुलना 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में हमास के हमले से की। उन्होंने कहा, “इस हमले का तरीका, लोगों को सिर में गोली मारना, धर्म के आधार पर निशाना बनाना, और छुट्टियाँ मना रहे आम लोगों को मारना, बिल्कुल वैसा ही है जैसा हमने इजरायल में देखा। वहाँ लोग म्यूजिक फेस्टिवल में थे, अपने घरों में सो रहे थे, तभी आतंकियों ने उन्हें मार डाला, लूटा और जलाया।”

उन्होंने इस हमले को आतंकवाद की वैश्विक समस्या का हिस्सा बताया और कहा कि भारत और इजरायल दोनों एक ही तरह के दर्द से गुजर रहे हैं। उन्होंने भारत के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा, “हम भारत के आत्मरक्षा के हक को पूरी तरह समर्थन देते हैं। यह हक संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में भी दर्ज है। भारत को कोई सलाह देने की जरूरत नहीं, वह खुद जानता है कि उसे क्या करना है।” हमले के तुरंत बाद इजरायल ने भारत के प्रति संवेदना जताई और हर तरह की मदद की पेशकश की।

रुवेन अजार ने बताया कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और कहा, “हमने संवेदना के साथ-साथ हर तरह की मदद का भरोसा दिया। भारत के पास पहले से ही बहुत कुछ है, लेकिन हम खुफिया जानकारी, तकनीक, और आतंकवाद से निपटने के तरीकों में सहयोग को और बढ़ाने को तैयार हैं।” बता दें कि भारत और इजरायल के बीच पहले से चले आ रहे गहरे रिश्ते की बात की और कहा कि यह सहयोग सिर्फ संकट के समय नहीं, बल्कि हर दिन होता है। वैसे, हम आपको याद दिला दें कि कारगिल युद्ध के दौरान, जब अमेरिका ने मदद से इनकार कर दिया था, तब इजरायल ने भारत का साथ दिया था।

इजारयली राजदूर रुवेन अजार ने भारत की भौगोलिक और मौसमी चुनौतियों का जिक्र किया और कहा कि इजरायल भारत से बहुत कुछ सीख सकता है, खासकर इतने बड़े देश में आतंकवाद से निपटने के तरीकों से। उन्होंने कहा, “भारत को विशाल इलाकों और मुश्किल मौसम में काम करना पड़ता है, यह हमारे लिए सीखने की बात है। वहीं, इजरायल के पास कुछ अलग अनुभव हैं, जैसे आतंकियों द्वारा बनाई गई सुरंगों से निपटना या मजहबी उन्माह में बौखलाए आतंकियों को रोकना।” उन्होंने इन अनुभवों को साझा करने की बात कही, ताकि दोनों देश एक-दूसरे की मदद कर सकें।

आतंकवादी संगठनों के बीच वैश्विक साठगांठ पर चिंता जताते हुए अजार ने कहा कि हाल ही में हमास की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूदगी को भारत और इजरायल दोनों ने गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा, “आतंकी संगठन एक-दूसरे से प्रेरणा लेते हैं, ट्रेनिंग देते हैं, और मजहबी उन्माद फैलाते हैं। हमास ने 7 अक्टूबर को जो बर्बरता की, उसे वह अपने समर्थकों को दिखा रहा था, ताकि अपने दुश्मनों में डर पैदा कर सके। यही चिंता की बात है।” उन्होंने पहलगाम हमले को भी इसी तरह की रणनीति का हिस्सा बताया, जहाँ आतंकियों ने छुट्टियाँ मना रहे लोगों को निशाना बनाया।

पाकिस्तान के ‘स्वतंत्र जाँच’ के प्रस्ताव को अजार ने पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने इसे ‘धोखा’ करार देते हुए कहा, “एक तरफ आतंकियों को पनाह देना और दूसरी तरफ जाँच की बात करना, यह दोहरा चरित्र है।” उन्होंने मुंबई 26/11 और पठानकोट हमलों का जिक्र किया, जब भारत ने पाकिस्तान को सबूत दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का यह प्रस्ताव सिर्फ दुनिया को भ्रमित करने की कोशिश है।” भारत की कूटनीतिक कार्रवाइयों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपने क्षेत्र और पड़ोसी देशों की स्थिति को अच्छे से समझता है और उसे कोई सलाह देने की जरूरत नहीं।

रुवेन अजार ने आतंकवाद को एक वैश्विक समस्या बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने भारत द्वारा कुछ YouTube चैनलों पर बैन लगाने जैसे कदमों की सराहना की और कहा कि ऐसी कंपनियों को सजा मिलनी चाहिए जो आतंकियों को अपने प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने देती हैं। उन्होंने आतंकवाद को पैसा और पनाह देने वाले देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत की। उन्होंने कहा, “सीरिया, लेबनान, ईरान जैसे देशों को सजा मिली है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र इस दिशा में कुछ खास नहीं कर रहा। भारत और इजरायल जैसे देशों को मिलकर काम करना होगा।”

पहलगाम हमले को इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा मोड़ बताया, जैसा कि हमास का हमला उनके क्षेत्र के लिए था। उन्होंने कहा, “यह हमला इसलिए खास है क्योंकि आतंकियों ने छुट्टियाँ मना रहे लोगों को निशाना बनाया, ताकि उस इलाके में डर फैल जाए।” उन्होंने उम्मीद जताई कि यह घटना दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट करेगी। उन्होंने कहा, “आतंकवाद अब सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं। यूरोप, अमेरिका, भारत, इजरायल हर जगह लोग धर्म के नाम पर मारे जा रहे हैं। हमें इसे रोकने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा।”

इस इंटरव्यू के आखिर में रुवेन अजार ने भारत के आत्मरक्षा के हक को फिर से दोहराया और कहा, “हम भारत के साथ खड़े हैं। भारत को जो करना है, वह उसकी अपनी मर्जी है, लेकिन हम उसका पूरा समर्थन करते हैं।”

सेना को खूली छूट, PM मोदी ने कहा- कब-कहाँ-कैसे लेना है एक्शन तय करिए: पहलगाम आतंकी हमले के बाद तीनों आर्मी चीफ संग की बैठक, NSA-CDS-रक्षा मंत्री भी थे मौजूद

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया, जिसके बाद देश में गुस्सा और आक्रोश फैल गया। भारत सरकार ने इस हमले का जवाब देने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेना को खुली छूट दे दी है।

प्रधानमंत्री आवास पर सोमवार और मंगलवार (28-29 अप्रैल 2025) को दो हाई-लेवल बैठकें हुईं। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और वायुसेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह शामिल रहे। करीब 90 मिनट तक चली इन बैठकों में पहलगाम हमले के बाद की सुरक्षा स्थिति, आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशनों और भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा हुई।

पीएम मोदी ने कहा, “आतंकवाद का समूल नाश करना हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।” उन्होंने सेना की पेशेवर क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए जवाबी कार्रवाई के तरीके, समय और लक्ष्य तय करने का पूरा अधिकार सशस्त्र बलों को सौंप दिया।

इससे पहले, सोमवार (28 अप्रैल 2025) को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने डर जताया था कि पहलगाम हमले के पलटवार में भारत पाकिस्तान पर कभी भी हमला कर सकता है। आसिफ ने रॉयटर्स से कहा था कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सैन्य हमला कर सकता है। ऐसे में पाकिस्तान ने अपनी सेना को मजबूत किया है और सैन्य हमले की आशंका में रणनीतिक फैसले लिए हैं। आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान हाई अलर्ट पर है और वजूद का खतरा होने पर पाकिस्तान परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल कर सकता है।

बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार (Government of India) ने कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी सख्त कदम उठाए थे। सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया गया, अटारी सीमा (Atari Border) को तत्काल बंद किया गया, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द किए गए और पाक उच्चायोग के रक्षा, वायु और नौसेना अताशे को एक हफ्ते में भारत छोड़ने का आदेश दे दिया। इस आदेश के बाद पाकिस्तानियों के भारत से वापस लौटने की भीड़ बढ़ गई, तो देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी धरपकड़ भी तेज हो गई।

मुस्लिम दुकानदारों के साथ कारोबार जारी रखेगा बाँके बिहारी मंदिर, पहलगाम अटैक के बाद बहिष्कार की हो रही थी माँग: पुजारियों ने बताया ‘अव्यावहारिक’

वृंदावन के मशहूर बाँके बिहारी मंदिर ने मुस्लिम समुदाय के साथ व्यापार बंद करने की माँग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। मंदिर के पुजारी और प्रबंध समिति के सदस्य ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने इस माँग को व्यवहारिक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि वृंदावन में हिंदू और मुस्लिम बरसों से शांति और भाईचारे के साथ रहते हैं।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने वृंदावन और मथुरा में प्रदर्शन किए। इन संगठनों ने हिंदू तीर्थयात्रियों और दुकानदारों से मुस्लिम समुदाय के साथ लेन-देन न करने की अपील की। साथ ही, मुस्लिम दुकानदारों से कहा गया कि वे अपनी दुकानों पर मालिक का नाम लिखें, ताकि उनकी पहचान हो सके।

काशी विद्वत परिषद के सदस्य नागेंद्र महाराज ने कहा था, “हमने मुस्लिम दुकानों की पहचान कर ली है। हिंदू दुकानदारों से कहा गया है कि वे उनके साथ व्यापार न करें और न ही उस समुदाय के लोगों को नौकरी दें।”

मुस्लिमों की बाँके बिहारी में आस्था

लेकिन मंदिर प्रशासन ने इस माँग को खारिज कर दिया। मंदिर के पुजारी और प्रबंधन समिति के सदस्य ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने सोमवार (28 अप्रैल 2025) को बयान दिया, “यह माँग व्यवहारिक नहीं है। मुस्लिम कारीगर और बुनकर यहाँ बाँके बिहारी के लिए वस्त्र बुनते हैं। कई मुस्लिम भक्त भी मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।” उन्होंने बताया कि भगवान के लिए मुकुट और चूड़ियाँ जैसे सामान भी मुस्लिम कारीगर बनाते हैं। गोस्वामी ने कहा कि ज्यादातर स्थानीय लोग भी मानते हैं कि मंदिर में सभी समुदायों का योगदान बना रहना चाहिए।

पहलगाम हमले पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “हमले के दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। हम सरकार के साथ हैं। लेकिन वृंदावन में हिंदू और मुस्लिम शांति से रहते हैं।”

बता दें कि पिछले महीने भी मंदिर प्रशासन ने एक प्रस्ताव खारिज किया था, जिसमें मुस्लिम बुनकरों के बनाए भगवान कृष्ण के वस्त्रों पर रोक की बात थी। उस समय मंदिर ने कहा था कि वस्त्रों की पवित्रता और शुद्धता सबसे जरूरी है। अगर मुस्लिम कारीगर आस्था के साथ वस्त्र बनाते हैं, तो उनके वस्त्र लेने में कोई परेशानी नहीं है।

जस्टिन ट्रूडो के जाते ही कनाडा की जनता ने बाँध दिया खालिस्तानियों का बोरिया-बिस्तर: जगमीत सिंह खुद चुनाव हारे, पार्टी राष्ट्रीय दर्जा बचाने में रही नाकाम

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने सोमवार को संघीय चुनाव में जीत हासिल की है। वहीं पियरे पोलिएवरे की कंजर्वेटिव पार्टी ने हार स्वीकार कर ली है। चुनाव के नतीजों से सबसे बड़ी बात ये रही कि लिबरल पार्टी जो कुछ महीने पहले तक प्रधानमंत्री रहे जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में भारी हार का सामना कर रही थी, उसने जीत हासिल की है।

इस चुनाव में खालिस्तानी नेता जगमीत सिंह की पार्टी एनडीपी को करारी शिकस्त मिली है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह भी खुद ब्रिटिश कोलंबिया के बर्नाबी सेंट्रल से चुनाव हार गया है। इतना ही नहीं उसकी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का नेशनल पार्टी का दर्जा भी छिन गया है। राष्ट्रीय पार्टी के लिए कम से कम 12 सीटों की जरूरत थी लेकिन उसे सिर्फ 7 सीटें हासिल हुई हैं। करारी हार का जिम्मा उठाते हुए जगमीत सिंह ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। जगमीत सिंह पिछले 8 सालों से पार्टी प्रमुख था।

हार स्वीकार करते हुए जगमीत सिंह ने कहा, ” मैं निराश हूँ कि हम ज्यादा सीटें नहीं जीत सके लेकिन हमारी पार्टी को लेकर मैं आशावादी हूँ। “

हालाँकि जगमीत सिंह की पार्टी की करारी हार को कनाडा में खालिस्तानियों को करारा झटका के तौर पर देखा जा रहा है। उसकी हार से भारत और कनाडा के बीच राजनयिक और व्यापारिक संबंधों को फिर से स्थापित करने में मदद मिलेगी। हाल के वर्षों में जगमीत सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की गठजोड़ ने भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ते खराब किए। इनलोगों ने आतंकवादी हरदीप निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप भी लगाया। यही नहीं प्रधानमंत्री ट्रूडो ने 2020 में भारत में किसान आंदोलन के पक्ष में बयान दिया था। ऐसा करने वाले वो दुनिया के एकमात्र नेता थे। भारत ने ट्रूडो प्रशासन पर खालिस्तानियों के प्रति नरम रूख अपनाने का आरोप भी लगाया था। अब नए हालात में भारत-कनाडा के रिश्ते में सुधार हो सकता है। पीएम मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को जीत की बधाई दी है।

कनाडा चुनाव के नतीजों को ट्रंप की नीतियों से प्रभावित भी माना जा रहा है। देश के पब्लिक ब्रॉडकास्टर सीबीसी के मुताबिक लिबरल पार्टी की यह वापसी राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीतियों और कनाडा पर हमलों के कारण हुई है क्योंकि कुछ दिनों पहले तक पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में पार्टी भारी हार का सामना कर रही थी। अपने विजय भाषण में भी कार्नी ने अमेरिका की आलोचना की है।

उन्होंने कहा, ” हम अमेरिकी विश्वासघात के सदमे से उबर चुके हैं, लेकिन हमें सबक कभी नहीं भूलना चाहिए। जैसा कि मैं महीनों से चेतावनी दे रहा हूं, अमेरिका हमारी जमीन, हमारे संसाधन, हमारा पानी, हमारा देश चाहता है। ये बेकार की धमकियाँ नहीं हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अमेरिका हम पर कब्ज़ा कर सके। ऐसा कभी नहीं होगा। लेकिन हमें इस वास्तविकता को भी पहचानना चाहिए कि हमारी दुनिया मौलिक रूप से बदल गई है।”

बांग्लादेश में हिंदू मंदिर तोड़ा, 200 साल पुराने श्मशान को ‘पशु बाजार’ में बदलने की साजिश: भेद खुला तो अधिकारी बोले- भूल से गिर गया पिलर

बांग्लादेश में हिंदुओं के निर्माणाधीन मंदिर और 200 साल पुराने श्मशान को नष्ट किया जा रहा है, ताकि उसे ‘पशु बाजार’ बनाया जा सके। ये मामला मैमनसिंह जिले के उचाखिला यूनियन का है, जहाँ रविवार (27 अप्रैल 2025) को हिंदुओं ने मंदिर में तोड़फोड़ और 200 साल पुराने श्मशान को ‘पशु बाजार’ में बदलने के प्रयासों के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।

जानकारी के अनुसार, हिंदुओं का आरोप है कि ईश्वरगंज उपजिला के निर्बाही अधिकारी (UNO) मोहम्मद एरशादुल अहमद हिंदू मंदिर और श्मशान को जबरन ध्वस्त करवा रहा है, ताकि वो वहाँ पर पशु बाजार बना रहे।

स्थानीय हिंदू नेता पिंटू चौधरी ने बताया कि उचाखिला यूनियन का श्मशान करीब 200 साल पुराना है और इसके समीप ही एक मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर था। पिंटू चौधरी ने बताया कि UNO ने शनिवार (26 अप्रैल 2025) को मंदिर को गिराने का आदेश जारी कर दिया और श्मशान को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की घोषणा भी कर दी है।

हिंदू नेता पिंटू चौधरी ने कहा, “यह श्मशान और मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। सनातन धर्म के अनुयायी इस घटना से अत्यंत क्रोधित हैं और इसीलिए सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जता रहे हैं।”

एक अन्य स्थानीय हिंदू नेता परेश साहा ने बताया कि एक इस्लामी ग्रुप हिंदुओं को इलाके से भगाने के लिए धमका रहा है, लेकिन उसके खिलाफ सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही। परेश साहा ने यह भी आरोप लगाया कि श्मशान भूमि को पशु बाजार बनाने के उद्देश्य से रेत से भरा जा रहा है। इसके अलावा शनिवार (26 अप्रैल 2025) को मंदिर के खंभों को भी तोड़ डाला।

बांग्लादेश पूजा उदजापन फ्रंट के सचिव बिजोय मित्रा शुवो ने बताया कि विध्वंस को रोकने के लिए हिंदुओं द्वारा पहले ही जानकारी दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। हालाँकि, यूएनओ मोहम्मद एरशादुल अहमद ने इस पूरी घटना को मामूली बताने की कोशिश की और कहा कि मंदिर के खंभों का गिरना ‘अनजाने में’ हुआ है।

एक तरफ प्रशासन इसे गिरा रहा है, तो दूसरी तरफ मुस्लिम संगठन मामले से जुड़ी खबरों को दबाने में जुट गए हैं। इस्लामी आंदोलन की ईश्वरगंज उपजिला शाखा, इस घटना को तूल न देने का प्रयास कर रही है। सोमवार (28 अप्रैल 2025) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मंदिर और श्मशान के विध्वंस की खबरों को झूठा कहा।

बांग्लादेश में निशाने पर हिंदू

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त 2024 को सत्ता से हटने के बाद से ही हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। ऑपइंडिया इन मामलों की विस्तृत पड़ताल और रिपोर्टिंग करता रहा है।

ढाका के पतन के 3 दिनों के भीतर हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हुए हैं। ऑपइंडिया ने सबसे पहले खुलासा किया था कि कैसे मुस्लिम छात्रों ने 60 हिंदू शिक्षकों, प्रोफेसरों और सरकारी अधिकारियों को उनके पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।

मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर, असद नूर ने हाल ही में खुलासा किया है कि अल्पसंख्यक समुदाय को अब ‘जमात-ए-इस्लामी‘ में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

इसके बाद 28 सितंबर 2024 और 1 अक्टूबर 2024 के दौरान को ऋषिपारा बारवारी पूजा मंडप में कुल 4 मूर्तियों को और मणिकादी पालपारा बारवारी पूजा मंडप में 5 हिंदू मूर्तियों को तोड़ा था। फिर 3 अक्टूबर 2024 को, बांग्लादेश के ढाका डिवीजन के किशोरगंज में गोपीनाथ जिउर अखरा दुर्गा पूजा मंडप में 7 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को नष्ट किया गया।

5 नवंबर 2024 को, चटगांव शहर के हजारी गली में हिंदू समुदाय पर पुलिस और कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने हमला किया। 29 नवंबर 2024 को, एक हिंसक मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमला किया और 3 मंदिरों में तोड़फोड़ की। हमला जुम्मे की नमाज खत्म होने के तुरंत बाद हुआ। 30 नवंबर 2024 को, कारवान बाजार से पुलिस ने मुन्नी साहा नामक एक प्रमुख हिंदू पत्रकार को गिरफ्तार किया।

13 दिसंबर 2024 को चरमपंथियों के एक समूह ने महाश्मशान काली माता मंदिर पर हमला किया, 7 देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ी और सोने के आभूषण चुरा लिए। इसके बाद 19 दिसंबर 2024 को, अलाउद्दीन नामक एक मुस्लिम व्यक्ति ने पोलाशकंडा काली मंदिर में एक मूर्ति को तोड़ी। एक अन्य 37 वर्षीय अजहरुल नामक मुस्लिम व्यक्ति ने मैमनसिंह जिले के हलुआघाट उपजिला में कई देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ी।

चिनमोय कृष्ण दास प्रभु और उनके सहयोगियों की हालिया गिरफ्तारी, हिंदू संगठन इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास और ‘राजद्रोह’ के मामलों के साथ हिंदू विरोध प्रदर्शनों को दबाना मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार द्वारा हिंदुओं के संगठित उत्पीड़न को दिखाता है।

लिबरल गैंग ने पहले खूब किया प्रचार- जामिया में कश्मीरी छात्रा से हुई छेड़छाड़, जैसे ही दरिंदा निकला मेवात का आबिद अली छाया सन्नाटा: पत्रकार से कहा- खबर दबाओ

दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में एक कश्मीरी लड़की से छेड़छाड़ की घटना हुई। पहले इसे वामपंथी गैंग ने प्रचारित किया लेकिन बाद में आरोपित मुस्लिम निकलने खबर दबाने को कहा गया। इस मामले की पूरी सच्चाई अब सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जामिया मिलिया इस्लामिया विश्विद्यालय में रविवार (27 अप्रैल 2025) की रात एक कश्मीरी छात्रा से कैंपस में ही छेड़छाड़ की गई। इस खबर को खूब हवा दी गई और बताया गया कि पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कश्मीरी छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है।

यह घटना जामिया मिलिया इस्लामिया के गेट नंबर आठ पर रविवार (27 अप्रैल 2025) को हुई। छात्रा लगभग 9.30 बजे छात्रा घर जा रही थी। इसी दौरान एक लड़के ने उसे रोककर बदसलूकी की। साथ ही उसे गलत तरीके से छुआ। घटना के समय विश्वविद्यालय की सुरक्षाकर्मी भी वहाँ थे। छात्रा ने विश्वविद्यालय प्रशासन को घटना की जानकारी दी। 

जामिया के छात्रों ने प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की माँग की। विश्वविद्यालय के प्रॉक्टोरियल और सुरक्षा दलों ने जामिया नगर पुलिस स्टेशन को बताया। पुलिस ने जाँच की तो पता चला कि आरोपित हॉस्टल की कैंटीन में काम करने वाला मोहम्मद आबिद है। वह हरियाणा के मेवात (नूह) के भैसी गाँव का रहने वाला है।

यह सूचना सामने आने के बाद कथित तौर पर इस खबर को दबाने का प्रयास किया गया। इस मामले को लेकर पत्रकार उबैर उल हमीद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इस संबंध में लिखा। उन्होंने कहा, “कल जामिया मिलिया इस्लामिया के कश्मीरी छात्रों ने हमसे एक स्टोरी हटाने को कहा, क्योंकि उन्हें डर था कि इससे समस्याएँ पैदा होंगी।”

हमीद ने बताया, “हमने हटा दिया, लेकिन आज यह हर जगह प्रकाशित हुई है। रातों-रात क्या बदल गया और अब यह ‘सुरक्षित’ क्यों है?” इस मामले में एक और खुलासा पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि संभवतः खबर दबाने को इसलिए कहा गया क्योंकि आरोपित मुस्लिम है और मेवाती है।

पहलगाम में हिन्दुओं पर हमले के तुंरत बाद यह नैरेटिव चलाया गया था कि देश भर में कश्मीरी छात्रों पर हमले हुए हैं। हालाँकि, एकाध जगह को छोड़ कर, ऐसी घटनाएँ सामने नहीं आई थीं। लेकिन इसे बड़ा बताने के लिए जामिया से सम्बन्धित खबर चलाई और गई जब आरोपित मुस्लिम और मेवाती निकल गया, तो इसे दबाने को कहा गया।

देश की सुरक्षा के लिए पेगासस का इस्तेमाल करना गलत नहीं: सुप्रीम कोर्ट, रिपोर्ट सार्वजनिक करने से इनकार; कहा- ऐसे मसलों पर सड़क पर नहीं होगी चर्चा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (29 अप्रैल 2025) को पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए जासूसी सॉफ्टवेयर (स्पाइवेयर) का इस्तेमाल करने में कोई गलती नहीं है, लेकिन इसका निजी व्यक्तियों के खिलाफ दुरुपयोग नहीं होना चाहिए। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इस मामले में कई याचिकाओं पर सुनवाई की, जिसमें आरोप लगाया गया है कि भारत सरकार ने पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल पत्रकारों, जजों, कार्यकर्ताओं और अन्य लोगों की जासूसी के लिए किया।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान देश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे कठिन समय में सावधानी बरतनी जरूरी है। एक वकील ने जब कहा कि अगर सरकार ने स्पाइवेयर खरीदा है तो उसे इस्तेमाल करने से कोई नहीं रोक सकता, तो जस्टिस सूर्यकांत ने जवाब दिया, “अगर देश इस स्पाइवेयर का इस्तेमाल खतरनाक तत्वों के खिलाफ कर रहा है तो इसमें क्या गलत है? स्पाइवेयर रखने में कोई गलती नहीं है… हम देश की सुरक्षा के साथ समझौता नहीं कर सकते। निजी नागरिक, जिन्हें निजता का अधिकार है, उनकी रक्षा संविधान के तहत होगी… उनकी शिकायतों को हमेशा देखा जा सकता है।”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पेगासस के कथित दुरुपयोग की जाँच के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि यह रिपोर्ट देश की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ी है, इसलिए इसे सड़कों पर चर्चा का विषय नहीं बनाया जा सकता। हालाँकि कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रभावित व्यक्तियों को उनकी स्थिति के बारे में सूचित किया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “हाँ, व्यक्तिगत शंकाओं का समाधान होना चाहिए, लेकिन इसे सड़कों पर चर्चा का दस्तावेज नहीं बनाया जा सकता।”

यह मामला 2021 में उस समय सुर्खियों में आया था, जब न्यूज पोर्टल्स ने खुलासा किया था कि इजरायल की कंपनी एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल भारत में पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, वकीलों, अधिकारियों, एक पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और अन्य लोगों के मोबाइल फोन में सेंधमारी के लिए किया गया। इन रिपोर्ट्स में एक लिस्ट का जिक्र था, जिसमें संभावित टारगेट्स के फोन नंबर शामिल थे। एमनेस्टी इंटरनेशनल की जाँच में कुछ फोन नंबरों में पेगासस की घुसपैठ के निशान मिले, जबकि कुछ में घुसपैठ की कोशिश के सबूत थे।

इस खुलासे के बाद सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दाखिल हुईं, जिनमें वकील एमएल शर्मा, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, हिंदू ग्रुप के निदेशक एन. राम, एशियानेट के संस्थापक शशि कुमार, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, पत्रकार रूपेश कुमार सिंह, इप्सा शताक्षी, परंजॉय गुहा ठाकुरता, एसएनएम आबिदी और प्रेम शंकर झा शामिल हैं। इन याचिकाओं में पेगासस के कथित इस्तेमाल की स्वतंत्र जाँच की माँग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में इस मामले की जाँच के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आरवी रविंद्रन की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित की थी। समिति ने जुलाई 2022 में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी। रिपोर्ट में कहा गया कि जाँच किए गए 29 मोबाइल फोनों में पेगासस स्पाइवेयर नहीं मिला। हालाँकि 5 डिवाइस में कुछ मालवेयर पाए गए, लेकिन वे पेगासस नहीं थे। समिति ने यह भी बताया कि भारत सरकार ने जाँच में सहयोग नहीं किया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि अमेरिका की एक जिला अदालत में व्हाट्सएप ने स्वीकार किया है कि पेगासस के जरिए हैकिंग हुई थी। सिब्बल ने कहा, “अब कोर्ट का सबूत है और व्हाट्सएप का सबूत है।” उन्होंने माँग की कि कम से कम समिति की जाँच रिपोर्ट याचिकाकर्ताओं को दी जाए। लेकिन कोर्ट ने कहा, “यह एक ऑब्जेक्टिव प्रश्न-उत्तर प्रकार का हो सकता है। आप पूछ सकते हैं कि क्या मैं इसमें शामिल हूँ। हम हाँ या ना में जवाब दे सकते हैं।”

वकील श्याम दीवान ने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा, “राज्य ने अपने नागरिकों के खिलाफ स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया। यह और भी बुरा है।” उन्होंने कहा कि इसमें पत्रकारों और जजों के खिलाफ इस्तेमाल के सबूत हैं। जवाब में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि ऐसी दलीलें किसी और मंशा के साथ दी जा रही हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ये अभी सिर्फ आरोप हैं और व्यक्तियों को यह जानने का हक है कि क्या वे प्रभावित हैं, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 30 जुलाई 2025 को तय की है। सिब्बल को दो हफ्ते में अमेरिकी कोर्ट का फैसला और अन्य दस्तावेज जमा करने की इजाजत दी गई है।

पाकिस्तानी फौज का पूर्व कमांडो है पहलगाम में हमला करने वाला आतंकी हाशिम मूसा, लश्कर के लिए करता है जिहाद: कश्मीरी मददगारों ने पूछताछ के बाद उगला राज

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला करने वाले एक आतंकी की पहचान हाशिम मूसा के रूप में हुई है। हाशिम एक पाकिस्तानी है और वहाँ की फ़ौज का कमांडो भी रहा है। यह जानकरी पहलगाम में हुई आंतकी घटना की जाँच के बाद सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह जानकारी पहलगाम हमले के बाद 15 कश्मीरी ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) से पूछताछ के दौरान सामने आई है। उन्हें पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकवादियों को सहायता प्रदान करने के संदेह में हिरासत में लिया गया है।

इसके अलावा ओजीडब्ल्यू पर आरोप है कि आतंकवादियों के लिए लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था करने और हमले से पहले इलाके की रेकी करने में मदद की है। जिससे पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की संभावित भूमिका की ओर भी इशारा मिलता है।

इस मामले से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “संभावना है कि हाशिम मूसा को पकिस्तान के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) के द्वारा लश्कर-ए-तैयबा (LeT) को सौंपा गया था ताकि वह जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सके।”

जाँच में यह भी पता चला है कि हाशिम मूसा पहले भी कई आतंकी हमलों में शामिल रहा है। इसमें अक्टूबर 2024 में गांदरबल के गांगनगीर में हुआ हमला शामिल है, जिसमें कई निर्दोष लोग मारे गए थे। इसके अतिरिक्त, वह बारामूला के बूटा पथरी में हुए हमले में भी शामिल था, जिसमें दो भारतीय सेना के जवान और दो पोर्टर बलिदान हो गए थे।

पाकिस्तान में ट्रेन्ड दो स्थानीय आतंकवादी, जुनैद अहमद भट और अरबाज मीर गांगनगीर और बूटा पथरी के हमलों में भी शामिल थे। हालांकि, दोनों बाद में सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए थे।

इसी के साथ, खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई है कि कश्मीर में कई पर्यटन स्थलों पर पहलगाम जैसे और आतंकी हमलों हो सकते हैं है। जिसके चलते कश्मीर के 87 पर्यटन स्थलों में से 48 को तत्काल रुप से बंद कर दिए गए है। 

इंडिया टूडे की रिपोर्ट के अनुसार कम्यूनिकेशन इंटरसेप्ट ने पुष्टि की है कि पहलगाम हमले और भारत की जवाबी कार्रवाई के बाद घाटी में कुछ स्लीपर सेल सक्रिय हो गए हैं, जिन्हें फिर से हमला करने के निर्देश मिले हैं। बताया गया है , आतंकवादियों के घरों को गिराने की कार्रवाई का बदला फिर से पहलगाम से बड़े पैमाने पर हमलों की योजना हो सकती है।

पहलगाम में हिंदू पर्यटकों पर हुए हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए हैं। भारत ने सिंधु समझौता रद्द कर दिया है। इसके अलावा भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा भी रद्द कर दिए हैं।

ST लड़की को जबरन मुस्लिम बनाने पर उबला झारखंड, अपहरण कर बंगाल में कराया धर्मांतरण: पूर्व CM बोले- निकाह करने वाला तस्लीम आलम पहले से ही 3 बच्चों का अब्बू

झारखंड के सरायकेला- खरसावाँ में एक मुस्लिम युवक को अपने से 13 वर्ष छोटी जनजातीय लड़की का धर्मांतरण करवाने के लिए गिरफ्तार किया गया है। मुस्लिम युवक ने लड़की का धर्मांतरण करवाने के बाद उसे पश्चिम बंगाल ले जाकर निकाह किया। आक्रोशित लोगों ने उसके घर पर भी पथराव किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि 32 साल के तस्लीम आलम ने 19 वर्षीय जनजातीय समाज की लड़की का अपहरण किया। उनका आरोप है कि इसके बाद जबरन उसका धर्मांतरण करवाया गया। यह घटना यहाँ के झिमरी गाँव में हुई।

लड़की की उम्र 19 वर्ष है। वह इंटरमीडिएट की छात्रा है। लड़की को इस्लाम कबूल करवाने के बाद तस्लीम ने पश्चिम बंगाल के बीरभूमि ले जाकर उससे निकाह किया। स्थानीय लोग इस पर आक्रोशित हैं। उन्होंने तस्लीम आलम के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है।

पुलिस ने तस्लीम को गिरफ्तार कर लिया है। हालाँकि, कार्रवाई में देरी के चलते लोग आक्रोशित हो गए औए उन्होंने तस्लीम के घर पथराव कर दिया और आग लगा दी। स्थानीय लोगों को समझाने के लिए गई पुलिस टीम पर भी पत्थरबाजी हुई। इसके लिए कुछ स्थानीय लोगों को हिरासत में लिया गया है।

पुलिस ने तस्लीम को गिरफ्तार करने के साथ ही लड़की से भी पूछताछ की है। वह कुड़मी समुदाय की है। लड़की का कोर्ट में बयान भी दर्ज करवाया गया है। पुलिस ने कहा है कि आगे की कार्रवाई लड़की के बयान के आधार पर होगी।

धर्मांतरण के इस पूरे मामले को बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उठाया है। उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन से इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने पोस्ट में निकाहनामे के दस्तावेज भी लगाए हैं। उन्होंने बताया है कि तस्लीम तीन बच्चों का बाप है।

बाबूलाल ने एक्स पर लिखा, “सरायकेला, झारखंड की एक बेटी का धर्म परिवर्तन कर बंगाल में विवाह कराने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार युवक तस्लीम, तीन बच्चों का पिता है, जबकि युवती इंटरमीडिएट की छात्रा बताई जा रही है। 19 वर्षीय युवती की उम्र भी संदेहास्पद मानी जा रही है। पुलिस इस मामले का संज्ञान लेकर शीघ्र उचित कारवाई करे।”

इसी के साथ उन्होंने सीएम सोरेन पर भी निशाना साधा। अपनी पोस्ट में आगे उन्होंने लिखा, “हम उम्मीद करते हैं कि ‘समर स्पेशल हॉली डे और शॉपिंग फेस्टिवल’ से वापस लौटने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई का आदेश बिना विलम्ब देंगे।”