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सत्यपाल मलिक की ‘वफादारी’ पर पाकिस्तान फिदा, आतंकी मुल्क की संसद में गूँजा नाम: पहलगाम अटैक से पल्ला झाड़ने के लिए The Wire को दिए इंटरव्यू का इस्तेमाल, जानिए क्या कहा था?

भारत में कुछ ऐसे तत्व हैं, जिन्हें अपनी सरकार से दिक्कत है, सेना से दिक्कत है, और यहाँ तक कि हमारे देश की संस्कृति और परंपराओं से भी दिक्कत है। असल में ‘The Wire’ पर पत्रकार करण थापर ने जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का इंटरव्यू लिया, जिसके बाद उनकी चर्चा पाकिस्तान के संसद में भी हो रही है। बता दें कि 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के 13 दिन बाद भारत ने पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया है।

ऐसे संवेदनशील समय में जब पूरा देश एक होकर अपनी सेना व सरकार के साथ खड़ा है, सत्यपाल मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘बेशर्म’ और ‘डरपोक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, साथ ही लिखा कि उन्हें पहलगाम हमले के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस्तीफे तक की माँग कर दी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी जनता की परवाह नहीं करते, उनकी सरकार को ‘निर्दयी’ और ‘संवेदनहीन’ तक बता दिया। करण थापर ने कहा कि पीएम मोदी देश को डरा रहे हैं, वहीं सत्यपाल मलिक ने कह डाला कि भारत युद्ध झेल ही नहीं सकता है।

साफ़ है, ये दोनों महानुभाव खुलकर हर उस एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं, जो पाकिस्तान चाहता है। शायद तभी तो पाकिस्तान की संसद में इनकी चर्चा हो रही है। पाकिस्तान की संसद में एक महिला सांसद ने कहा, “लोग सवाल कर रहे हैं। भारत अधिकृत जम्मू कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि ये तो बड़ा सुरक्षित इलाक़ा है, यहाँ फौज और पुलिस होनी चाहिए थी लेकिन एक अहलकार नहीं था। उन्होंने मोदी सरकार से उन्होंने सवाल किया।” (नोट: पाकिस्तान वाले जम्मू कश्मीर को ‘भारत अधिकृत’ कहते हैं जबकि उन्होंने प्रदेश का एक हिस्सा अवैध रूप से कब्जा रखा है)

इसके अलावा उक्त महिला सांसद ने एंकर करण थापर का भी नाम लेते हुए कहा कि उनके शो में सत्यपाल मलिक ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शर्म आनी चाहिए और सुरक्षा चूक के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए। पाकिस्तान की महिला सांसद ने आगे कहा कि भारत के भीतर से सवाल उठ रहे हैं और उन सवालों को दबाया जा रहा है। बता दें कि सत्यपाल मलिक राज्यपाल पद से हटने के बाद से लगातार मोदी सरकार पर हमलावर रहे हैं, और झूठ फैलाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

कोई माँग रहा सबूत तो कोई कह रहा चील-कौवे मारे, किसी को ‘सिंदूर’ शब्द से ही दिक्कत: पाकिस्तान पर कार्रवाई के बाद भारत में बिलबिला कर निकल रहे ‘पाकिस्तानपरस्त’

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम की बैसारन घाटी में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमलों के जवाब में भारतीय सेना ने मंगलवार (6 मई, 2025) की रात ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान में बसे 9 आंतकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। पूरा देश इस बात पर जश्न मना रहा है। 24 हिंदुओं समेत कुल 26 पर्यटकों की मौत पर हुए एक्शन में लगभग 100 आतंकियों को मार गिराया गया।

जहाँ एक ओर पूरे देश में पहलगाम के हमले के बदले को लेकर खुशी का माहौल है। पहलगाम हमले के बाद गमगीन देश संतोष में है, क्योंकि ‘न्याय’ हुआ है। वहीं, दूसरी ओर विपक्ष के राजनेताओं को भारतीय सेना के इस शौर्य पर भी संदेह है। जिन्हें संदेह नहीं है, उन्हें इस मिशन के नाम से परेशानी हो रही है।

कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने सरकार पर साधा निशाना

‘ऑपरेशन सिंदूर’ से कई कॉन्ग्रेस नेता परेशान दिख रहे हैं। जहाँ एक ओर नेता प्रतिपक्ष और कॉन्ग्रेस के मुखिया राहुल गाँधी और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने एक साथ सामने आकर इस ऑपरेशन की सराहना की थी तो वहीं दूसरी ओर कई अन्य कॉन्ग्रेसी नेताओं को इस ऑपरेशन के नाम या काम में खामियाँ नजर आईं।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता पृथ्वीराज चौहान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कह दिया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम रखकर सरकार इसका भावनात्मक लाभ ले रही है। चौहान ने कहा, “युद्ध विमानों, बंदूकों और बमों का उपयोग करके लड़ा जाता है, भावनाओं या प्रतीकात्मकता से नहीं।”

हालाँकि, पृथ्वीराज चौहान के इस बयान से कॉन्ग्रेस पार्टी ने किनारा कर लिया। कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने ही चौहान के बयान को गलत बता दिया। खेड़ा ने कहा, “इस समय किसी को भी मिशन पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। सरकार कोई भी कदम उठाए, कॉन्ग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है।”

राशिद अल्वी ने फिर माँगे सबूत

कॉन्ग्रेस के नेता राशिद अल्वी भी भारतीय सेना के इस मिशन की सफलता पर सवाल खड़े करने में पीछे नहीं रहे। उन्होंने यह तक पूछ डाला कि ऑपरेशन में क्या हर एक आतंकवादी मारा गया है?

राशिद अल्वी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को सबसे न्यूनतम जवाब माना है। उन्होंने कहा, “क्या सभी आतंकवादी खत्म हुए? मोदी ने कहा था कि आतंकवादियों का नामोनिशान मिटा देंगे। अगर यह हुआ तो अच्छा है।” बता दें कि राशिद अली पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक पर सबूत माँग चुके हैं।

उदित राज ने नाम पर जताई आपत्ति

उनके अलावा कॉन्ग्रेस के ही वरिष्ठ नेता उदित राज ने भारतीय सेना के इस मिशन के नाम पर ही आपत्ति जताई। उदित राज ने कहा,”सिंदूर एक विशेष धर्म से संबंधित है। बेहतर होता कि मिशन का कोई और नाम दिया होता।”

उदित ने यह भी कहा कि सरकार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में स्पष्टता रखनी चाहिए। पाकिस्तान के पीएम का संसद में 3 राफेल मार गिराने पर भी अपना पक्ष रखना चाहिए और बताना चाहिए कि पाक पीएम झूठे हैं। कॉन्ग्रेसियों के अलावा ‘झारखंड मुक्ति मोर्चा’ (JMM) की राज्यसभा सांसद महुआ माजी को भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का नाम नहीं पसंद आया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।

माजी ने कहा, “जब तीनों सेनाओं को अपने लक्ष्य और समय चुनने की छूट दी गई तो भी प्रधानमंत्री मोदी ने इसका नाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रख दिया, इसलिए इसमें कुछ राजनीति ज़रूर है, नाम कुछ और भी हो सकता था।” माजी ने इसके बाद पाकिस्तान की परमाणु धमकी को भी दोहराया।

इमरान मसूद ने कहा, पाकिस्तान हँस रहा

इनके अलावा सहारनपुर से कॉन्ग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता पर सवाल उठा दिए। उन्होंने सरकार से इस मिशन का पूरा हिसाब माँग लिया। मसूद ने कहा, “हमने बार-बार कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लीपा-पोती नहीं सख्त एक्शन होना चाहिए, जो सेना ने करके दिखाया।” इसके अलावा एक न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए इमरान मसूद ने सर्जिकल स्ट्राइक पर भी कहा, “पाकिस्तान हमारे हम लोग का मजाक उड़ाता है। उनका कहना है कि सर्जिकल स्ट्राइक में हिंदुस्तानियों ने हमारे तीन कौवे मार दिए। इससे पूरी दुनिया में हमारा मजाक बन गया है।”

विपक्ष को पहले मौका मिला था कि पहलगाम पर कोई कड़ा एक्शन नहीं लिया गया। अब जब सरकार ने एक्शन ले लिया तो उसमें भी उन पर सवाल खड़े कर दिये। कुल मिलाकर विपक्ष को एक्शन तो चाहिए था लेकिन उस एक्शन को हजम करना नहीं आ पाया।

लाहौर का एयर डिफेन्स सिस्टम उड़ाया, 15 सैन्य ठिकानों पर पाकिस्तानी हमले किए नाकाम: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद ‘आतंकी मुल्क’ ने देर रात दागे थे ड्रोन-मिसाइल, सब फुस्स

भारत ने पाकिस्तान के भीतर गुरुवार (8 मई, 2025) की सुबह कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। भारत ने इस हमले में लाहौर के एयर डिफेन्स सिस्टम और राडार तबाह कर दिए हैं। यह हमला पाकिस्तान के भारतीय सैन्य ठिकानों पर किए गए हमले के जवाब में किया गया है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह ऐसी सभी हरकतों का माकूल जवाब देगा।

इस संबंध में सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है। इसमें लिखा गया, “7-8 मई 2025 की रात को पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों का उपयोग करके अवंतीपुरा, श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, आदमपुर, भटिंडा, चंडीगढ़, नल, फलोदी, उत्तरलाई और भुज सहित उत्तरी और पश्चिमी भारत में कई सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की। इन हमलों को इंटिग्रेटेड काउंटर UAS ग्रिड और एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा बेअसर कर दिया गया।”

भारत ने बताया कि इन हमलों के मलबे अब कई जगह से बरामद किए जा रहे हैं जो इनका सबूत हैं। भारत ने लाहौर में किए गए हमले के विषय में बताया, “आज सुबह भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान में कई स्थानों पर एयर डिफेंस रडार और सिस्टम को निशाना बनाया। भारत ने भी पाकिस्तान की ही तरह उसी तीव्रता से जवाब दिया है। विश्वसनीय जानकारी के अनुसार, लाहौर में एयर डिफेंस सिस्टम को बेकार कर दिया गया है।”

इसी बयान में बताया गया कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, बारामूला, उरी, पुंछ, मेंढर और राजौरी सेक्टरों में मोर्टार और भारी तोपों का इस्तेमाल करते हुए LOC पर बिना उकसावे के गोलीबारी बढ़ा दी है। सरकार ने बताया है कि इस गोलीबारी में तीन महिलाओं और पाँच बच्चों समेत सोलह निर्दोष लोगों की जान चली गई है। सरकार ने बताया है कि इस कार्रवाई का जवाब सेना ने माकूल तरीके से दिया है। भारत ने साफ़ कर दिया है कि वह तनाव घटाने का पक्षधर है लेकिन पाकिस्तानी फ़ौज को भी शांत होना पड़ेगा।

गौरतलब है कि भारत ने 7 मई, 2025 को रात में ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस स्ट्राइक में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के भीतर 9 ठिकानों को निशाना बनाया था। यह लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के अड्डे थे। इनमें 80 से अधिक इस्लामी आतंकी मारे गए थे। इसके बाद से पाकिस्तान ने भारत में ड्रोन हमले किए और सीमा पर गोलीबारी की। इनका ही जवाब भारत ने दिया है।

पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने धर्म पूछकर हिंदुओं को गोली मारी, दरभंगा में मजहबी लोगों ने राह चलते हिंदुओं पर धर्म पूछ लाठी-तलवार से किए हमले: 21 पर केस, 4 गिरफ्तार

पहलगाम आतंकी हमले में 22 अप्रैल को हिंदुओं को धर्म पूछकर मौत के घाट उतारा गया और अब बिहार के दरभंगा में धर्म पूछकर हिंदुओं पर हमला करने का मामला सामने आया है। पीड़ितों ने बताया है कि सड़क किनारे खड़े होकर कुछ मजहबी लोगों ने उनसे पहले उनका धर्म पूछा और फिर बाद में उनपर लाठी-डंडा और तलवार से हमला किया।

इस घटना में कई लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की बात सामने आई है और पुलिस द्वारा 4 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पूरी घटना जाले थाना क्षेत्र की है। पीड़ितों की पहचान राजकिशोर यादव, रामसागर यादव, अमित कुमार, सुमित कुमार, रंजीत यादव, ऋतिक यादव, मिथिलेश यादव, लक्ष्मण यादव, सोनू कुमार, दिनेश मांझी के तौर पर हुई है।

पीड़ितों ने बताया कि वो लोग 6 मई को शाम 7 बजे बहेड़ा पोखर के पास मुस्लिम समुदाय के युवक लाठी, भाला, तलवार, रॉड और पिस्टल लेकर खड़े थे। जैसे ही वो लोग उस रास्ते से गुजरे वहाँ उनसे पहले उनका धर्म पूछा गया और फिर जानलेवा हमला कर दिया गया।

घायलों में एक अमित कुमार भी हैं। अमित ने बताया कि उन लोगों ने पहले धर्म पूछा और जैसे ही हमने खुद को हिंदू बताया, उन लोगों ने हमला कर दिया। वो लोग बस हिंदुओं को मार रहे थे।

वहीं, धर्म पूछकर निशाना बनाने वाली जानकारी स्थानीयों ने भी दी है। साफ बताया गया है कि मुस्लिम युवक धर्म पूछ-पूछकर हिंदुओं को निशाना बना रहे थे।

घटना में कुल 11 लोग घायल हुए हैं। इनमें एक इन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाले में भर्ती कराया गया है। कुछ लोगों की हालत गंभीर है। वहीं कुछ को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।

घटना के संबंध में लक्ष्मण कुमार यादव, मनोज कुमार यादव, सोनू यादव, दिनेश यादव, संजय यादव ने थाने में शिकायत दी है।

एफआईआर में 21 आरोपितों का नाम दिया गया है। इनमें कुरबान कुरैशी इरफान कुरैशी, सलमान इब्रान कुरैशी, पप्पू कुरैशी, मेराज, रेयाज, आसिफ, इम्तियाज, सरफरराज, एजाज, शहनवाज, दर्जी रिजवान के नाम हैं।

इस पूरे मामले में बता दें कि ये भी कहा जा रहा है कि ये विवाद स्कूटी में टक्कर लगने के बाद शुरू हुआ। टक्कर ऋतिक और दर्जी नूर आलम की बेटे की स्कूटी के बीच हुई थी। ऋतिक ने जब नुकसान का मुआवजा माँगा तो नूर का बेटा आनाकानी करने लगा। ऋतिक ने स्कूटी अपने पास रख ली और कहा स्कूटी अगले दिन मिलेगी।

इसके बाद दोनों को समझाया गया और मामला शांत कराकर उन्हें वापस भेज दिया गया। लेकिन, अगले दिन मुस्लिम भीड़ इकट्ठा हुई और फिर हिंदुओं को निशाना बनाने लगी।

पुलिस कार्रवाई की बात करें तो यही पता चला है कि इस केस में 4 लोग गिरफ्तार हुए हैं और आगे की कार्रवाई के लिए जाँच जारी है। पूरे मामले में पुलिस ने शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए थाना परिसर में शांति समिति की बैठक कराई। थानाध्यक्ष ने बताया कि अन्य आरोपितों की तलाश के लिए छापेमारी जारी है।

सिद्धार्थनगर में 1990 में थे 16 मदरसे, 2023 आते-आते हो गए 597: खाड़ी देशों से आ रहा धड़ाधड़ पैसा, नेपाल बॉर्डर पर अब योगी सरकार का चल रहा ‘समतल अभियान’

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार नेपाल सीमा पर बने अवैध मस्जिद-मदरसों पर लगातार कार्रवाई कर रही है। उत्तर प्रदेश और नेपाल के बीच 7 जिलों की 570 किलोमीटर की सीमा पर रोज अवैध ढाँचे समतल किए जा रहे हैं। महराजगंज से लेकर सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में इन कब्जों को चिन्हित किया जा रहा है। बीते लगभग एक माह में सैकड़ों ऐसे अवैध ढाँचे गिराए गए हैं।

सिद्धार्थनगर में तेजी से हो रही कार्रवाई

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट बताती है कि सिद्धार्थनगर जिले में वर्ष 1990 में केवल 16 मान्यता प्राप्त मदरसे थे। यह साल 2000 तक बढ़कर 147 हो गए, लेकिन तब इनमें से केवल 45 को ही सरकारी मान्यता मिली थी। यह आँकड़ा 2023 तक बढ़ते-बढ़ते यह संख्या 597 तक पहुँच गई। इनमें से 452 ही रजिस्टर्ड हैं जबकि 145 मदरसे अभी भी गैर-मान्यता प्राप्त हैं।

सबसे अधिक मदरसे सिद्धार्थनगर की डुमरियागंज तहसील में हैं। यहाँ 152 मदरसे संचालित हो रहे हैं जबकि इटवा तहसील में 134, नौगढ़ तहसील में 119 और शोहरतगढ़ तहसील में 102 और बांसी तहसील में 90 मदरसों का संचालन हो रहा है।

यहाँ सिर्फ मदरसों की संख्या ही नहीं बढ़ी, बल्कि इन पर कई गंभीर आरोप भी हैं। कुछ मदरसों में नकली नोट छापने जैसी गतिविधियों के सबूत मिले हैं। इसके साथ ही, इन संस्थानों को विदेश से फंडिंग मिलने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे मामलों को देखते हुए प्रशासन को कई जगहों पर अवैध मदरसों पर कार्रवाई की है।

सिद्धार्थनगर में योगी सरकार ने 17 अवैध मदरसे चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा 4 अवैध मजहबी स्थल भी चिन्हित किए गए हैं। इन पर भी कार्रवाई जारी है। इनमें से कई पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जा चुकी है। इनके अलावा कई मजहबी स्थल भी हैं।

सबसे बड़ी कार्रवाई श्रावस्ती में

श्रावस्ती जिला भी नेपाल से लम्बी सीमा साझा करता है। यहाँ प्रशासन सबसे अधिक सख्त है। यहाँ बीते कुछ वर्षों में तेजी से मस्जिद-मदरसे बढ़े हैं। इस बढ़ोतरी को लेकर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने गंभीर चिंता जताई है और इसे संभावित डेमोग्राफिक बदलाव का संकेत बताया है।

SSB अधिकारियों के अनुसार, इन इलाकों में 15 किलोमीटर के दायरे में मजहबी संरचनाओं की संख्या में 26% तक का इजाफा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2018 में इन सीमावर्ती इलाकों में कुल 738 मस्जिदें थीं, जो 2021 तक बढ़कर 1000 हो गईं। वहीं, मदरसों की संख्या 500 से बढ़कर 645 हो गई है।

श्रावस्ती में प्रशासन अब सख्त हो गया है। श्रावस्ती में योगी सरकार ने 100 से अधिक मदरसे सील कर दिए हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि श्रावस्ती में लगभग आधे दर्जन मदरसे गिराए भी जा चुके हैं। कई जगह मजारों पर भी कार्रवाई हुई है।

बहराइच में भी मदरसे सील, कब्जे खाली

बहराइच जिले की नेपाल सीमा के आसपास भी उत्तर प्रदेश सरकार कार्रवाई कर रही है। यहाँ 24 अवैध मदरसे चिन्हित किए गए हैं जिनमे से 9 को सील कर दिया गया है। इन पर बुलडोजर कार्रवाई भी चालू हो गई है। बहराइच में 384 अतिक्रमण के मामले चिन्हित किए गए हैं। इनमें से कुल 89 कब्जे ध्वस्त किए जा चुके हैं। आगे और भी ऐसे ही कब्जों पर कार्रवाई चल रही है।

बहराइच में नेपाल सीमा के पास बड़ी संख्या में बीते वर्षों में कई अवैध ढाँचे बन गए थे। इनसे डेमोग्राफी चेंज का खतरा भी बढ़ा है। इसके बाद योगी सरकार ने चिन्हित करना चालू किया था। अब इन पर सिलसिलेवार ढंग से कार्रवाई चालू हो गई है।

बलरामपुर जिले में भी 25 मदरसों पर कार्रवाई

बलरामपुर जिले में भी योगी सरकार ने 25 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे ढूंढ निकाले हैं। इनमें से 23 को सील कर दिया गया है। बाकी 2 मदरसों को नोटिस जारी किए गए हैं। कई लोग कार्रवाई के डर से अपने अवैध कब्जे खुद ही हटा लिए हैं। बलरामपुर जिले में बाकी ढाँचे भी तोड़े जा रहे हैं।

बलरामपुर जिले से नेपाल जिले की खुली सीमा है। इस जिले में जंगल का इलाका भी है। बीते कुछ वर्षों में तेजी से इन इलाकों में मस्जिद-मदरसे बढे थे। जहाँ पहले कोई नहीं रहता था, वहाँ भी मुस्लिम आबादी दिखने लगी थी। इस तेजी से होते बदलाव को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता भी जताई है।

इनके अलावा महाराजगंज, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी जैसे जिलों में भी दर्जनों मदरसे सील किए गए हैं। इन पर प्रशासन बुलडोजर कार्रवाई कर रहा है। इसकी रिपोर्ट गृह मंत्रालय को भेजी जा रही है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से नेपाल सीमा के 15 किलोमीटर के इलाके तक हो रही है।

नेपाल सीमा से सटे इन जिलों में मजहबी ढांचे और मदरसों की तेजी से बढ़ती संख्या न केवल सामाजिक संतुलन के लिए चुनौती बन रही है, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी चिंता का विषय है। 2023 में पुलिस की जाँच में सामने आया था कि इन जिलों में मस्जिद -मदरसे बनाने के लिए ₹150 करोड़ की फंडिंग खाड़ी देशों से आई थी।

उत्तराखंड के नेपाल सीमा वाले जिले भी प्रभावित

नेपाल सीमा से लगे सिर्फ उत्तर प्रदेश के ही नहीं बल्कि उत्तराखंड के जिले भी प्रभावित हैं। इन क्षेत्रों में भी मुस्लिम आबादी में 2.5 गुना इजाफा हुआ है। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर, चम्पावत और पिथौरागढ़ जिलों को गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। खास तौर पर पिथौरगढ़ के धारचूला और जौलजीवी कस्बों को अतिसंवेदनशील घोषित किया गया है।

उत्तराखंड में बनबसा और टनकपुर जैसे इलाकों से नेपाल में काफी आवाजाही होती है। इस आवाजाही पर कोई विशेष रोकटोक नहीं रही है। यह दोनों बॉर्डर चम्पावत जिले हैं। चम्पावत की सीमा उत्तराखंड के US नगर और उत्तर प्रदेश के पीलीभीत-बरेली जैसे जिलों से मिलती है। यहाँ बड़ी मुस्लिम आबादी है।

मुस्लिम पट्टी बसाने की है योजना

इन बढ़ती गतिविधियों को लेकर बीते वर्ष दैनिक जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि उत्तर भारत में एक ‘मुस्लिम पट्टी‘ बनाने की साजिश चल रही है, जिसमें पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्य शामिल होंगे।

यह पट्टी बांग्लादेश से सटे पश्चिम बंगाल से शुरू होकर पाकिस्तान तक जाएगी। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि असम में घुसपैठियों के खिलाफ हुए आंदोलनों के बाद कई मुस्लिमों को इस संभावित ‘पट्टी’ में बसाने की रणनीति अपनाई गई है।

ऐसे में भारत के लिए यह सीमावर्ती क्षेत्र रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बन गया है। नेपाल से लगे यूपी और उत्तराखंड के सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में वृद्धि, मुस्लिम आबादी में इजाफा और पड़ोसी देशों की संदिग्ध गतिविधियाँ इन सभी कारकों ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को बढ़ा दिया है।

‘ग्लोबल टाइम्स’ को भारतीय दूतावास ने लताड़ा, DW और Bloomberg ने चलाया पाकिस्तानी प्रोपेगंडा: इस्लामी आतंकियों को आतंकवाद कहने में फिर झिझका विदेशी मीडिया

पहलगाम में 22 अप्रैल को आतंकी हमला होता है, जिसमें 26 निर्दोष लोगों को उनका धर्म पूछ-पूछकर मार डाला जाता है। इसके बाद विदेशी मीडिया उन आतंकवादियों के लिए ‘बंदूकधारी’ और ‘बाग़ी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करता है। फिर इस घटना के 13 दिन बाद भारत पाकिस्तान में 9 आतंकी ठिकानों पर हमला कर उन संरचनाओं को तबाह कर देता है, जहाँ वर्षों से भारत की धरती पर ख़ून बहाने की साजिशें रची जा रही थीं। इनमें मसूद अजहर के ठिकाने भी शामिल थे, जिसे छुड़ाने के लिए 1999 में एक भारतीय विमान को हाईजैक करके कंधार ले जाया गया था।

जर्मनी के DW को फिर आतंकी को आतंकी कहने में आई शर्म

अब विदेशी मीडिया का वही धड़ा एक बार फिर से भारत के विरुद्ध प्रपंच फैलाने में लग गया है। अब जर्मन मीडिया संस्थान DW को ही ले लीजिए। वो अपने शीर्षक में लिखता है, “भारत ने कहा कि उसने पाकिस्तान में ‘आतंकी’ ठिकानों को निशाना बनाया”। यानी, एक बार फिर से उसने आतंकी को आतंकी कहने में हिचक दिखाई है। जिस शख्स को छुड़ाने के लिए विमान हाईजैक कर लिया जाता है, वो आतंकी नहीं? साथ ही इस ख़बर में उसने पाकिस्तानी एजेंडा चलाते हुए कहा है कि भारत ने नागरिकों को निशाना बनाया।

DW ने पाकिस्तान के एजेंडे को आगे बढ़ाया

जबकि भारत स्पष्ट कर चुका है कि उसने न नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है और न ही सैन्य ठिकानों को। साथ ही इसे DW द्वारा ‘तथाकथित ऑपेरशन सिंदूर’ नाम दिया गया। सबसे पहले उसके वीडियो में यही कहा गया कि पाकिस्तान ने 26 नागरिकों के मारे जाने की बात कही है। साथ ही इसकी दिल्ली ब्यूरो चीफ सैंड्रा पीटर्समैंन ने कहा कि भारत के प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल पूछने की अनुमति नहीं थी। साथ ही लश्कर-ए-तैय्यबा को सीधे आतंकी संगठन कहने की बजाए घुमा-फिर कर उन्होंने कहा कि ये एक ‘समूह’ है जिसे UN ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है।

ब्लूमबर्ग ने बिना तथ्य जाँचे चलाया पाकिस्तानी एजेंडा

ब्लूमबर्ग भी पीछे नहीं रहा। उसने ख़बर चला दी कि पाकिस्तान ने भारत के 5 लड़ाकू विमानों को मार गिराया गया है। ये विशुद्ध रूप से पाकिस्तान का एजेंडा था। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री तक से जब इसके सबूत माँगे गए तो उन्होंने कह दिया कि सोशल मीडिया पर देखकर उन्होने ये दावा किया है।

फिर भी, बिना पुष्टि किए Bloomberg ने इस ख़बर को चला दिया। जब भारत के विमानों ने सीमा पार किया ही नहीं, फिर कैसे ये संभव हो सकता है कि पाकिस्तान ने उन्हें मार गिराया हो। इस तरह ब्लूमबर्ग ने ख्वाजा मोहम्मद आसिफ के बयान का फैक्ट-चेक करने की भी जहमत नहीं उठाई।

भारतीय दूतावास ने चीन के ‘ग्लोबल टाइम्स’ को लताड़ा

वहीं चीन के प्रोपेगंडा पोर्टल ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने तो ऐसा झूठ चलाया कि भारतीय दूतावास को इसका खंडन करना पड़ा। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने उसे चेताया कि भ्रामक ख़बरों को प्रकाशित करने से पहले वो कम से कम तथ्यों की जाँच कर ले या उनकी पुष्टि तो कर ले। ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने एक तस्वीर पोस्ट करके दावा किया था कि पाकिस्तान ने भारत के 3 लड़ाकू विमानों को मार गिराया है। उसने कुछ ऐसे झूठ फैलाया कि ‘X’ को उसके पोस्ट पर ‘कम्युनिटी पोस्ट’ में नोट डालकर सही करना पड़ा।

‘ग्लोबल टाइम्स’ की पोस्ट के नीचे लगाए गए नोट में स्पष्ट कहा गया है कि ख़ुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ ने कहा है कि भारतीय विमानों ने सीमा पार नहीं किया, फिर उन्हें मार गिराने की बात ही झूठी है। साथ ही ये भी कहा गया कि पाकिस्तान TV चैनलों ने पाकिस्तान में स्ट्राइक की पुष्टि की है। नोट में बताया गया कि ‘ग्लोबल टाइम्स’ के दावे की पुष्टि का कोई आधार नहीं है। असल में कई पाकिस्तानी हैंडल ये झूठ फैला रहे थे, जिसे उठाकर चीन के मीडिया संस्थान ने प्रकाशित कर दिया।

जिस ‘सालार गाजी’ ने की थी सोमनाथ में लूटपाट, हिंदुओं को उतारा था मौत के घाट… बहराइच में नहीं लगेगा अब उसके नाम से मेला: योगी सरकार का फैसला, HC ने भी राहत देने से किया मना

उत्तर प्रदेश के बहराइच में इस्लामी आक्रान्ता सैयद सलार मसूद गाजी की दरगाह पर होने वाले जेठ मेला को लेकर अनुमति देने से प्रशासन ने मना कर दिया है। इसके विरोध में इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँची मस्जिद कमिटी को भी कोई राहत नहीं मिली है। इस मेले में लाखों की भीड़ हर साल जुटा करती थी। इससे पहले उत्तर प्रदेश के संभल में सालार मसूद के नाम पर होने वाले मेले को भी अनुमति देने से प्रशासन ने इनकार कर दिया था।

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश के बहराइच में इस्लामी आक्रान्ता सालार मसूद की बड़ी दरगाह है। यहीं पर उसे वीर हिन्दू राजा सुहेलदेव ने मौत के घाट उतार दिया था। सालार मसूद की इसी दरगाह पर प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ महीने (मई-जून) में एक बड़ा मेला लगता आया है। यह मेला एक महीने चलता है। इस मेले में लगभग 15 लाख लोग शामिल होते रहे हैं।

इस मेले में इस एक महीने के भीतर हर शनिवार को सालार मसूद की बारात देश-विदेश के अलग-अलग हिस्से से जायरीन लाते हैं और रविवार को दरगाह पर जाते हैं। इसके बाद वह सोमवार को लौटते हैं। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऐसी लगभग 200 प्रतीकात्मक बारातें आक्रान्ता सालार मसूद की दरगाह पर लाई जाती हैं।

कई और भी दरगाहों से यहाँ आक्रान्ता मसूद की बारात आती है। इन बारातों में मुस्लिम शेरवानी, पलंग और शादी से जुड़ा और भी सामान लाते हैं। यहाँ आने से पहले लोग बाराबंकी में स्थित एक बूढ़े बाबा की मजार पर जाते हैं जो असल में सालार मसूद के बाप की मजार है। उसका नाम सैयद सालार साहू गाजी उर्फ बूढ़े बाबा की दरगाह है।

हिन्दू संगठन इस मेले का लगातार विरोध करते आए हैं। हिन्दू संगठन इस मेले के दौरान पास में ही महाराजा सुहेलदेव के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित करते हैं। वह इस दौरान हिन्दुओं को इस आक्रान्ता की सच्चाई से भी अवगत करवाते हैं। हिन्दू संगठन माँग करते आए हैं कि इस मेले पर रोक लगाई जाए।

प्रशासन ने नहीं दी अनुमति

2025 में भी दरगाह वालों ने मेले का आयोजन करने का प्लान बनाया था। हालाँकि, हिन्दू संगठनों के विरोध और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने इससे मना कर दिया। प्रशासन ने हवाला दिया कि संभल में पहले ही एक ऐसे ही मेले की अनुमति नहीं दी गई थी और यहाँ भी विरोध चल रहा है।

बहराइच प्रशासन ने स्पष्ट किया कि स्थानीय लोग भी इस मेले के आयोजन के पक्ष में नहीं हैं। उसने हाल ही में हुई हिंसक घटनाओं के विषय में भी जानकारी देते हुए मेले ना करवाने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने इसे कानून व्यवस्था के लिए एक समस्या बताया है। इसी के चलते दरगाह कमिटी को इसकी अनुमति नहीं दी गई।

हाई कोर्ट से भी झटका

प्रशासन के इनकार करने के बाद बाद दरगाह कमिटी इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुँची थी। इस मामले पर बुधवार (7 मई, 2025) को इस मामले में सुनवाई हुई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में दरगाह कमिटी को अंतरिम तौर पर राहत देने से इनकार कर दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि वह अब सब पक्षों को सुनने के बाद ही कोई आदेश देगा।

अब इस मामले में 12 मई, 2025 को सुनवाई होगी। हाई कोर्ट में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि दरगाह कमिटी ने उनसे कोई अनुमति नहीं माँगी बल्कि सिर्फ सुरक्षा इंतजाम करने को ही कहा। प्रशासन ने स्पष्ट तौर पर बताया कि स्थिति को देखते हुए वह आयोजन करवाने में अभी सक्षम नहीं है।

प्रशासन ने कहा, “दरगाह परिसर के अंदर मजहबी गतिविधियों में हस्तक्षेप नहीं किया जा रहा है… जिस चीज को अनुमति नहीं दी गई है, वह है दरगाह परिसर के बाहर मेला आयोजित करने की अनुमति, जिसमें मुख्य रूप से व्यावसायिक गतिविधियाँ शामिल हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उसने किसी भी संवैधानिक या कानूनी अधिकारों का उल्लंघन नहीं किया है।

इससे पहले संभल में मार्च, 2025 में संभल में आयोजित होने वाले नेजा मेला को भी अनुमति नहीं दी गई थी। यह मेला भी सालार मसूद गाजी के लिए होता था। इसकी अनुमति माँगने पर ASP श्रीश चन्द्र दीक्षित भड़क गए थे और स्पष्ट किया था कि आक्रान्ताओं की याद में लगने वाले किसी मेले को अनुमति नहीं दी जाएगी।

कौन था सैयद सालार मसूद गाजी

सैयद सालार मसूद गाजी का जन्म 11वीं सदी में सन 1014 ईस्वी में राजस्थान के अजमेर में हुआ था। हालाँकि, सालार के जन्म को लेकर भी संशय है और इतिहासकारों में एकमत नहीं है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सालार का जन्म अफगानिस्तान में हुआ था और वह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था। खैर, उसका जन्म जहाँ कहीं भी हुआ हो, लेकिन वह बेहद ही क्रूर और हिंदुओं से नफरत करने वाला था।

यह प्रमाणित सत्य है कि अफगानिस्तान के गजनी के शासक महमूद गजनवी का भाँजा था। इसके साथ ही वह गजनवी के सेना का सेनापति भी था। यह वहीं गजनवी है, जिसने सबसे पहले सन 1001 में भारत पर हमला किया था। इसके बाद उसने एक-के-बाद एक करके लगातार 17 बार हमले किए और भारत के सोमनाथ मंदिर सहित भारत के कई मंदिरों को लूटा और उन्हें ध्वस्त कर दिया था।

सन 1930 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से छपी ‘द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ सुल्तान महमूद ऑफ गाजना’ नाम की पुस्तक में इतिहासकार मोहम्मद नाजिम ने इसके बारे में बताया है। उन्होंने लिखा है कि वह गजनी के नेतृत्व में सन 1026 ईस्वी में सैयद सालार मसूद गाजी ने सबसे बड़ा हमला सोमनाथ मंदिर पर किया था। रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों, रियासतों और हिंदुओं का नरसंहार करता आया।

‘अनवार-ए-मसऊदी’ नाम की अपनी किताब में बहराइच के रहने वाले और इतिहासकार मौलाना मोहम्मद अली मसऊदी ने लिखा है कि सोमनाथ और आसपास की रियासतों पर लूटने-पाटने केबाद सैयद सालार गाजी आगे बढ़ा। वह 1030 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के सतरिख पहुँचा। वहाँ से वह श्रावस्ती पहुँचा और वहाँ के राजा सुहेलदेव से उसका मुकाबला हुआ।

सन 1034 ईस्वी में बहराइच जिला मुख्यालय के पास सालार मसूद का मुकाबला महाराजा सुहेलदेव से हुआ। कहा जाता है कि महाराजा सुहेलदेव ने 21 अन्य छोटे-बड़े राजाओं के साथ मिलकर उसका सामना किया और आखिरकार इस गाजी का उपाधि धारण करने वाले इस आक्रांता को मार गिराया। इसके बाद स्थानीय मुस्लिमों ने उसके शव को दफना दिया।

इसके बाद उस जगह पर मेला लगने लगा जिसे अब रोक दिया गया है।

कितनों से भी हों महिला के संबंध… गैंगरेप-गैंगरेप होता है: बॉम्बे हाईकोर्ट ने वसीम खान और कादिर शेख को सुनाई 20 साल की सजा, पहले मिली थी उम्रकैद

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2014 के गैंगरेप मामले में दोषी वसीम खान और कादिर शेख की सजा बरकरार रखा है। बुधवार (7 मई 2025) को बॉम्बे हाइकोर्ट ने कहा कि एक महिला का चरित्र इस बात पर निर्भर नहीं करता कि उसके कितने लोगों से संबंध हैं। अगर उसने संबंधों के लिए न बोला तो इसका मतलब न ही है। उसकी तथाकथित किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधियों के आधार पर न को हाँ नहीं कहा जा सकता।

बॉम्बे हाईकोर्ट में जस्टिस नितिन सूर्यवंशी और जस्टिस एम डब्ल्यू चंदवानी की खंडपीठ ने वसीम खान और कादिर शेख के साथ और एक नाबालिग किशोर को महिला के साथ गैंगरेप करने के मामले में सजा सुनाई। आरोपितों ने लोअर कोर्ट में मिली सजा को चुनौती दी थी। सत्र न्यायालय ने गैंगरेप के लिए आईपीसी की धारा 376 डी के तहत दोषियों को सजा सुनाई थी।

महिला अपने पति को तलाक दिए बिना दिनेश नाम के व्यक्ति के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रह रही थी। आरोपित वसीम ने कोर्ट में कहा कि शादीशुदा होने के बावजूद वह दिनेश के साथ रहने चली गई जिसकी वजह से उसका पारिवारिक जीवन प्रभावित हुआ।

इस पूरे मामले पर बॉम्बे हाइकोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि किसी भी महिला के साथ उसकी सहमति के बिना या जबरदस्ती दुष्कर्म करना अपराध है। बलात्कार को केवल यौन अपराध के रूप में नहीं देखा जा सकता बल्कि इसे आक्रामकता से जुड़ा अपराध भी मानना चाहिए क्योंकि यह महिला की निजता के अधिकार का हनन है।

कोर्ट में जजों ने कहा एक महिला यदि किसी पुरुष के साथ यौन संबंधों की सहमति देती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि पुरुष कभी भी महिला के साथ यौन संबंधों के लिए तैयार हो जाए। यह माहिला की सहमति पर निर्भर है।

लोअर कोर्ट ने वसीम और कादिर को कठोर कारावास के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसे हाईकोर्ट ने 20 साल के सश्रम कारावास में बदल दिया।

क्या था मामला

गैंगरेप पीड़िता पति से अलग एक अन्य व्यक्ति के साथ किराए के कमरे में रह रही थी। 5 नवंबर 2014 को वसीम, कादिर और एक नाबालिग अपराधी घर में घुसे। पीड़िता को संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। साथ ही उसे हिंदू व्यक्ति दिनेश के साथ संबंधों पर आपत्ति जताई।

पीड़िता और दिनेश ने जब इसका विरोध किया तो वसीम और कादिर ने दिनेश और पीड़िता पर हमला किया। दिनेश को जबरदस्ती शराब पिलाकर रेलवे ट्रैक पर फेंकने की कोशिश भी की लेकिन वह नशे में होने के बावजूद बचकर भाग निकला। इसके बाद तीनों आरोपियों ने पीड़िता को जंगल ले जाकर बारी-बारी से उसके साथ रेप किया।

तिलक-कलावा हटाने को कह रहा था मदर टेरेसा नर्सिंग कॉलेज, विरोध में पहुँचे हिन्दू कार्यकर्ता तो मुस्लिम लड़की ने लगाया ‘अल्लाह हू अकबर’ का नारा: हो गई निलंबित, सहारनपुर का मामला

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक नर्सिंग कॉलेज में हिन्दू छात्रों से कलावा उतारने और तिलक ना लगाने को कहा गया। ऐसा करने पर छात्रों को परेशान भी किया गया। इस शिकायत पर हिन्दू संगठन पहुँचे तो कॉलेज प्रशासन ने गलती नहीं मानी। इसी बीच एक मुस्लिम छात्रा ने इस्लामी नारे लगाने चालू कर दिया और वहाँ मौजूद लोगों को भड़काया। मामले में मुस्लिम छात्रा को कॉलेज ने निष्कासित किया है और उससे स्पष्टीकरण तलब किया है।

यह पूरा वाकया बुधवार (7 मई, 2025) का है। सहारनपुर की दिल्ली रोड स्थित स्थित मदर टेरेसा कॉलेज में कुछ हिन्दू छात्रों को लगातार परेशान किया जा रहा था। यहाँ आने वाले छात्रों को कॉलेज का स्टाफ तिलक लगाने को लगातार मना करता था। कलावा बाँधने को लेकर भी परेशान किया जाता था एक छात्र पर तिलक लगाने के लिए कार्रवाई भी की गई थी।

पीड़ित छात्र की माँ ने इस संबंध में बात भी की थी। मामले की सूचना के बजरंग दल और अन्य हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता मदर टेरेसा कॉलेज पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने पीड़ित छात्र के साथ न्याय की माँग की। उन्होंने कॉलेज स्टाफ को स्पष्ट तौर पर कहा कि वह हिन्दू छात्र-छात्राओं को परेशान ना करें।

यहाँ इस बातचीत के बीच हिन्दू कार्यकर्ताओं को देख कर एक मुस्लिम छात्रा भड़क गई। उसने यहाँ ‘अल्लाह-हू-अकबर’ और बाकी इस्लामी नारे लगाने चालू कर दिए। उसने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को भड़काना चालू कर दिया। मुस्लिम छात्रा ने कई बार यहाँ यह नारे लगाए। उसका नाम महविश राव है।

इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद हिन्दू कार्यकर्ता नाराज हो गए और उन्होंने प्रदर्शन करना चालू कर दिया। उन्होंने इस छात्रा को निलंबित करने की माँग की। ऑपइंडिया ने इस मामले में प्रदर्शन नेतृत्व कर रहे बजरंग दल के पदाधिकारी हरीश कौशिक से बात की।

उन्होंने बताया, “हम तो तिलक ना लगाने देने की शिकायत को लेकर मदर टेरेसा कॉलेज गए थे। हम कॉलेज में स्टाफ से बात कर रहे थे। वहाँ मौजूद मुस्लिम लड़की से इसका कोई लेना-देना नहीं था। वह आकर जबरदस्ती इस्लामी नारे लगाने लगी। इस पर हमारे कार्यकर्ता नाराज हो गए और उसके निलंबन की माँग की।”

बजरंग दल के विरोध प्रदर्शन के बाद कॉलेज प्रशासन ने महविश राव को निलंबित कर दिया। कॉलेज प्रशासन ने इस विषय में स्पष्टीकरण भी महविश से माँगा है। कॉलेज ने चेतावनी दी है कि अगर महविश ने स्पष्टीकरण नहीं दिया तो उसके खिलाफ और भी कार्रवाई की जाएगी। ऑपइंडिया के पास कॉलेज की कार्रवाई का पत्र मौजूद है।

हिन्दू कार्यकर्ताओं ने कॉलेज में तिलक लगाने वाले छात्रों पर की गई करवाई को भी वापस करवा लिया। मामले में पुलिस ने भी संज्ञान लिया है। पुलिस ने कॉलेज पहुँच कर हिन्दू कार्यकर्ताओं को समझाया बुझाया है और विवाद को शांत करवाया है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने दी ‘परमाणु युद्ध’ की गीदड़भभकी, PM शहबाज शरीफ ने सेना पर बोला झूठ: रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा- इंडिया के सैन्य ठिकानों को बनाएँगे निशाना

पाकिस्तान ने माना है कि ऑपरेशन सिंदूर में उसके 26 लोग मारे गए हैं और 40 से ज्यादा घायल हैं। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भारत को ‘भारी कीमत चुकाने’ की धमकी दी है। शहबाज शरीफ ने कहा “भारत ने जो गलती पिछली रात (7 मई) की, उसे इसकी कीमत चुकानी होगी” पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दावा किया कि भारत की सेना सीमा के अंदर घुसने की कोशिश की थी लेकिन उसे कुछ ही घंटों के भीतर खदेड़ दिया गया।

पाकिस्तान का बड़बोलापन

पाकिस्तानी पीएम के बड़बोलेपन को मात देते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने और भी ज्यादा बड़ा दावा कर दिया। उनका कहना है कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच गतिरोध ज्यादा लंबा चला तो परमाणु युद्ध की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान न्यूज चैनल जियो न्यूज को दिये एक साक्षात्कार में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान सिर्फ भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करेगा।

पाकिस्तान ने फैलाई अफवाह

इस बीच पाकिस्तान ने 8 मई को फिर गुजरांवाला में ड्रोन अटैक की अफवाह फैलाई है। पाकिस्तान के अधिकारी ने एक और झूठ बोलते हुए कहा है कि एक दिन पहले यानी 7 मई को फाइटर से जंग हुई थी यानी पाकिस्तानी सेना ने भारत का मुकाबला किया। जबकि भारत ने जो अटैक पाकिस्तान स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर किया उस पर पाकिस्तानी फौज सकते में आ गई और कुछ नहीं कर पाई।

पंजाब के कई शहरों में छाया अँधेरा

इस बीच भारत में पाक से लगे सीमा क्षेत्रों पर अलर्ट जारी है। बुधवार देर रात पंजाब के अमृतसर, जालंधर, लुधियाना जैसे शहरों में ब्लैक आउट हुआ। अमृतसर में तीन धमाके सुनाई दिए और फिर ब्लैक आउट हो गया। यहाँ लोगों को घरों में ही रहने के आदेश दिए गये हैं। एयरपोर्ट खाली करा दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक अमृतसर में रात करीब 2 बजे धमाके सुनाई दिए जिसके बाद ब्लैक आउट हो गया। प्रशासन ने लोगों को संयम बरतने की अपील की है। 7 मई को भी पंजाब के गुरदासपुर में धमाके हुए थे और लोग डर के कारण घरों में दुबक गए थे। ये धमाका खेत में हुआ था।