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हिंदू लड़की का रेप कर रहा था फरहान, फोन पर चीखें सुन रहा था भाई: इंदौर तक फैला है भोपाल के ‘मुस्लिम गैंग’ का जाल, कहा- गिरफ्तारी का पता होता तो वायरल कर देता Video

मध्य प्रदेश के भोपाल में लव जिहाद के मामले में रोज नई परतें खुल रही हैं। जाँच के दौरान अब पुलिस को पता चला है कि इस केस का कनेक्शन इंदौर के कॉलेज तक था। मुख्य आरोपित फरहान ने वहाँ भी कई छात्राओं को फँसाया था और उनको टॉर्चर करता था। उसके फोन से लगभग 6 आपत्तिजनक वीडियोज मिली हैं। वहीं सारे आरोपितों के फोन की जाँच में कुल वीडियो 10 से 12 वीडियोज बरामद की गई हैं।

पूछताछ में फरहान कबूला है कि अगर उसे थोड़ा भी अंदेशा होता कि वो गिरफ्तार होने वाला है तो वो सबकी गंदी वीडियोज वायरल कर देता, लेकिन उसे इसका भान नहीं था। छानबीन में ये भी सामने आया है फरहान ने दो सगी बहन समेत 3 लड़कियों को फँसाया हुआ था। इनमें एक ऐसी नाबालिग थी जो फरहान को भाई-भाई कहती थी। मगर, जब ‘मुस्लिम गैंग’ ने उसे भी अपना निशाना बनाया।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने बातचीत में बताया कि साल 2022 में उसकी उम्र मात्र 16 साल थी। उस समय वह अपनी बहन के आईटी कॉलेज जाती थी। फरहान से उसकी मुलाकात वहीं हुई थी। एक दिन फरहान ने कहा – “मैं तुझे पसंद करता हूँ और मुझसे बात करने में बुराई क्या है।”

शुरू में बच्ची ने मना किया, मगर बार-बार कहने दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई। एक दिन फरहान नाबालिग पीड़िता को अपने साथ अशोक गार्डन अपने रूम पर ले गया। पीड़िता के अनुसार, रूम पर पहुँचते ही वहाँ फरहान ने अपने कपड़े उतारे। लड़की ने मना किया तो उसे धमकी देते हुए उसका बलात्कार कर लिया। और आखिर में उसे कहा भी अगर किसी को ये सब बताया तो उसके फोटो-वीडियो उसके बाप को भेज दिए जाएँगे और भाई को भी मार दिया जाएगा।

इतना ही नहीं फरहान ने एक पीड़िता को निकाह के लिए और धर्मांतरण के लिए बहुत ज्यादा दबाव बनाया था। वह साफ कहता था- “तुमको बुर्का पहनना होगा, इस्लाम अपनाना होगा।” जब लड़की फरहान से दूरी बनाने लगी तो वो एक दिन उसके रूम पर आ धमका। तब, लड़की अपने भाई से बात कर रही थी।

फरहान ने पहले कहा कि उसे बस माफी माँगनी है। हालाँकि कमरे में घुसते ही उसने फिर पीड़िता से रेप किया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि रेप के वक्त जब लड़की चीख रही थी तब फोन ऑन रह गया था और ये चीखें उसके भाई ने भी सुनी थीं। भाई ने हड़बड़ी में पुलिस को मदद के लिए कॉल भी की, लेकिन वहाँ से कोई जवाब नहीं आया।

अब पुलिस इस मामले में फरहान समेत मुस्लिम गैंग के अन्य सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वहीं महिला पुलिस अधिकारी भी अपने काम में जुटी है और पीड़िताओं की काउंसलिंग करते हुए उन्हें शिकायत दर्ज करने को कहा जा रहा है।

अब पुलिस इस मामले में फरहान समेत मुस्लिम गैंग के अन्य सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वहीं महिला पुलिस अधिकारी भी अपने काम में जुटी है और पीड़िताओं की काउंसलिंग करते हुए उन्हें शिकायत दर्ज करने को कहा जा रहा है।

अभी तक इस मामले में 12 नामजद आरोपितों समेत कई अन्य का नाम जोड़ा गया है। केस शहर के अलग-अलग पाँच थानों (बागसेवनिया, अशोक गार्डन, जहाँगीराबाद, बैरागढ़, श्यामा हिल्स) में दायर हुआ है। पुलिस ने फरहान, साहिल, शाहरुख, जोया समेत 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। केस में पहली शिकायत कराने वाली पीड़िता का कहना है कि उसने फरहान की हरकतों से तंग आकर केस दर्ज कराया था।

वहीं बाकी पीड़िताओं ने भी खुलासे किए कि ये गैंग उनका ब्रेनवॉश करती थी। उन्हें बुर्का पहनने को, रोजा रखने को मजबूर करती थी और निकाह व धर्मांतरण का दबाव बनाती थी। इतना ही नहीं गाँजा पिलाकर रेप किया जाता था, चलती कार में बलात्कार होता था, पोर्न देखने को मजबूर किया जाता था, बात न सुनने पर गले पर छुरी रखकर दुष्कर्म होते थे, और मीट भी जबरन खिलाया जाता था।

पुलिस अब आरोपितों को पकड़कर बिहार से बंगाल तक दबिश दे रही है। मामले की जाँच के लिए एसआईटी भी गठित है। वहीं मुख्यमंत्री यादव ने स्कूल, कॉलेज की छात्राओं के हुए घिनौने काम पर चिंता जताते हुए इस मामले में सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं।

कॉन्ग्रेस नेताओं को उन हिंदू पीड़ितों के कहे पर नहीं भरोसा, जिनके अपनों को पहलगाम में इस्लामी आतंकियों ने मारा: कहा- नहीं पूछा धर्म, TMC नेता बोली- BJP ने करवाया हमला

पहलगाम आतंकी हमले पर कॉन्ग्रेस और विपक्ष के नेता विवादित बयान देने से रुक नहीं रहे हैं। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता ने अब दावा किया है कि आंतकियों ने पहलगाम में लोगों को धर्म पूछ कर नहीं मारा। उनका दावा है कि पहलगाम में आतंकियों के पास धर्म पूछने का समय नहीं था। वहीं तृणमूल कॉन्ग्रेस की एक नेता ने भाजपा को इस हमले का जिम्मेदार बताया है।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता विजय वडेट्टीवार ने यह विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा, “आतंकियों के पास इतना टाइम कहाँ होता है कि वह लोगों के कान में जाकर पूछें कि तुम्हारा धर्म क्या है?” विजय वडेट्टीवार ने यह भी दावा किया कि आतंकियों का कोई मजहब नहीं होता। उन्होंने कहा कि धर्म पूछने के बारे में लोग अलग-अलग बातें कर रहे हैं।

वडेट्टीवार ने इस बीच सुरक्षाबलों पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि आतंकियों के धर्म पूछ कर मारने वाली बात असल मुद्दे से ध्यान भटकाना है। विजय वडेट्टीवार के इस बयान पर अब विवाद हो रहा है। हालाँकि, वह अकेले ऐसे नेता नहीं है जो इस मामले पर ऐसी बातें कर रहे हैं।

TMC नेता ने बताया भाजपा की साजिश

TMC नेता मरजीना खातून ने भी पहलगाम हमले को लेकर ऐसी ही विवादित टिप्पणी की है। मालदा में एक कार्यक्रम में मरजीना खातून ने पहलगाम हमले को भाजपा का काम बताया और दावा किया कि यह सब वक्फ कानून से ध्यान हटाने को लेकर करवाया गया है।

मरजीना खातून ने कहा, “भाजपा ने नए वक्फ कानून से जनता का ध्यान हटाने के लिए यह हमला किया..बीजेपी आतंकियों को पनाह देती है, इसलिए वहाँ सेना नहीं लगाई गई थी।” मरजीना खातून ने दावा किया कि जल्द ही चुनाव होने वाले हैं इसलिए यह सब करवाया गया है।

कॉन्ग्रेस नेता बोला- पाक का पानी मत रोको

जम्मू कश्मीर से आने वाले नेता और पूर्व केन्द्रीय सैफुद्दीन सोज ने भारत सरकार से सिंधु जल समझौता ना रोकने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सिंधु नदी पाकिस्तान की लाइफलाइन है और इस डाइवर्ट नहीं किया जा सकता। सोज ने दावा किया है कि इससे पंजाब और कश्मीर डूब जाएँगे।

उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत को पाकिस्तान की पहलगाम हमले में शामिल ना होने की बात भी स्वीकार कर लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कभी कभार बंदूकधारी पगला जाते हैं। उन्होंने लगातार पाकिस्तान की सारी बातें मानने का अनुरोध भारत सरकार से किया।

कॉन्ग्रेस के मंत्री ने भी पीड़ितों को झुठलाया था

इससे पहले कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री RB तिम्मापुर ने पहलगाम हमले के पीड़ितों को झुठलाया था। तिम्मापुर ने दावा किया था कि आतंकियों ने हमले से पहले किसी का धर्म नहीं पूछा था और यह सब इस मामले को एक मजहबी रंग देने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने नाम पूछने वाली बात को खुफिया तंत्र की विफलता छुपाने का बहाना बताया था।

तिम्मापुर ने कहा था, “मुझे निजी तौर पर नहीं लगता कि हमलावरों ने पर्यटकों का नाम और धर्म पूछा होगा…यह खुफिया विफलता में मजहबी रंग जोड़ने के लिए है। कारगिल, कारगिल, पुलवामा और अब पहलगाम केंद्रीय एजेंसियों की विफलता का परिणाम हैं।”

तिम्मापुर ने कहा कि हमले के चलते एक विशेष मजहब को निशाने पर नहीं लिया जाना चाहिए। मंत्री तिम्मापुर ने यह बयान तब दिया है जब कर्नाटक के ही कई लोग पहलगाम में मारे गए हैं और उन्होंने स्पष्ट तौर पर इस बात की पुष्टि की है कि इस्लामी आतंकियों ने हिन्दू बताने पर ही उनके परिजनों की हत्या की।

‘पाकिस्तान से हुआ जंग तो नहीं लड़ेगे सिख सैनिक’: खालिस्तानी आतंकी पन्नू को ‘हथियार’ बना पाकिस्तानी मीडिया कर रहा प्रोपेगेंडा, पहलगाम अटैक को बताया भारत की साजिश

पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल आजाद सियासत ने रविवार (27 अप्रैल 2025) को भारत-विरोधी खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू का इंटरव्यू किया। इस इंटरव्यू में गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कई जहरीले, बेबुनियाद और उत्तेजक दावे किए, जो भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने की उसकी नापाक मंशा को साफ दिखाते हैं। इसने दावा किया कि पंजाब के दो करोड़ सिख भारत सरकार को कभी भी पाकिस्तान पर हमला करने की इजाजत नहीं देंगे।

साथ ही इसने हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले को भारतीय खुफिया एजेंसियों की साजिश करार दिया और कहा कि इसका मकसद बिहार विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को फायदा पहुँचाना था। यह इंटरव्यू उस वक्त सामने आया, जब पहलगाम हमले में 27 मासूम हिंदू पर्यटकों की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया।

इस आतंकी ने इंटरव्यू में पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित इस्लामी आतंकवाद को बचाने की घटिया कोशिश की। पन्नू ने बेशर्मी से दावा किया कि पहलगाम हमला पाकिस्तान का काम नहीं, बल्कि भारतीय एजेंसियों की करतूत थी। इसके मुताबिक, यह हमला बीजेपी को बिहार चुनाव में वोटों का ध्रुवीकरण करने और राजनीतिक फायदा लेने के लिए करवाया गया। इस नीच ने यह भी कहा कि ऐसे हमले अक्सर तब होते हैं, जब अमेरिका के बड़े नेता भारत आते हैं, ताकि पाकिस्तान की छवि अंतरराष्ट्रीय मंच पर खराब की जा सके। इसके इन दावों का कोई सबूत नहीं है, और ये सिर्फ भारत को बदनाम करने की इसकी साजिश का हिस्सा हैं।

गुरपतवंत सिंह पन्नू नाम के इस देशद्रोही ने एक और घिनौना दावा किया कि पंजाब के लोग और भारतीय सेना में तैनात सिख सैनिक और अधिकारी इसके इशारे पर पाकिस्तान के साथ खड़े हैं। इसने भारत के उस फैसले का जिक्र किया, जिसमें कहा गया कि भारत अब सिंधु जल संधि का पूरी तरह पालन नहीं करेगा। इस आतंकी ने इसे भारत की आक्रामकता बताते हुए दावा किया कि भारत-पाकिस्तान का पानी रोकना चाहता है।

पन्नू ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री के उन बयानों का हवाला दिया, जिनमें पानी रोकने को युद्ध की कार्रवाई माना गया है। पन्नू ने भारतीय पंजाब में रहने वाले सिखों की आड़ लेकर सवाल उठाया कि अगर भारत-पाकिस्तान में जंग हुई, तो सिखों का क्या होगा? यह साफ दिखाता है कि यह आतंकी सिख समुदाय को भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहा है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने दावा किया कि सिख समुदाय पाकिस्तान के साथ खड़ा होगा और भारत को पंजाब के रास्ते हमला करने से रोकेगा। इसने कहा कि 2025 में हालात 1965 और 1971 जैसे नहीं हैं, और सिख अब इसके साथ हैं। लेकिन इसने यह शर्त रखी कि सिख तभी पाकिस्तान का साथ देंगे, अगर पाकिस्तान खुलकर खालिस्तान की माँग का समर्थन करे। इस आतंकी ने पाकिस्तानी सरकार से माँग की कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में खालिस्तान का मुद्दा उठाए और खालिस्तान रेफरेंडम को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के रूप में मान्यता दे। यह साफ है कि यह भारत को तोड़ने की साजिश में पाकिस्तान को उकसा रहा है।

पन्नू ने आगे कहा कि अगर पाकिस्तान खालिस्तान का समर्थन करता है, तो दुनिया भर के सिख इसके साथ एकजुट हो जाएँगे। उसने 1971 के युद्ध का जिक्र किया, जब भारत की मदद से बांग्लादेश बना। इस नीच ने आरोप लगाया कि अब भारत बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करना चाहता है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने बयानों में जिक्र किया। इसने दावा किया कि खालिस्तान का समर्थन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार हो सकता है। उससे भारत के पंजाब में लाखों सिख इसके साथ आ जाएँगे। यह भारत की एकता के लिए खुला खतरा है, और इसकी मंशा साफ है कि यह सिखों को भारत के खिलाफ हथियार बनाना चाहता है।

इस खालिस्तानी आतंकी ने दावा किया कि इसने भारतीय सेना के सिख सैनिकों को भारत के प्रति वफादारी छोड़ने के लिए उकसाने की कोशिश की है। इसने कहा कि इसके इन गंदे कामों की वजह से भारत में इस पर देशद्रोह के कई मामले दर्ज हैं। इस नीच ने भारतीय सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सिखों को अब समझ आ गया है कि उनका असली दुश्मन पाकिस्तान नहीं, बल्कि भारत सरकार है। इसने 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार का जिक्र किया, जब भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके अलावा, इसने नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों और 1984 से 1995 तक पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाइयों का हवाला दिया, जिनमें हजारों सिख युवा मारे गए। यह साफ है कि यह आतंकी पुरानी घटनाओं को तोड़-मरोड़कर सिखों में भारत के खिलाफ नफरत फैलाना चाहता है।

इंटरव्यू के दौरान पन्नू ने पाकिस्तान सरकार की तारीफ की, जो सिख तीर्थयात्रियों को करतारपुर साहिब जाने की इजाजत देती है, लेकिन भारतीयों को वीजा नहीं देती। इसने इसे एक अच्छा कदम बताया, लेकिन कहा कि भारत की कथित आक्रामकता को रोकने के लिए यह काफी नहीं है। इसने फिर जोर दिया कि पाकिस्तान को खालिस्तान का खुलकर समर्थन करना चाहिए, ताकि सिख इसके साथ खड़े हों। यह साफ दिखाता है कि यह आतंकी भारत के खिलाफ पाकिस्तान को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है।

गुरपतवंत सिंह पन्नू ने खालिस्तान रेफरेंडम का जिक्र किया और कहा कि यह सिख समुदाय के दम पर चल रहा है, भले ही किसी सरकार का समर्थन न हो। इसने बताया कि जल्द ही यह रेफरेंडम भारत के पंजाब में होगा, जिसमें हिंदू और मुस्लिम भी वोट दे सकेंगे। उसने 17 अगस्त 2025 को वाशिंगटन डीसी में होने वाले रेफरेंडम को अहम बताया और कहा कि यह ‘पंजाब वोट फॉर इंडिपेंडेंस’ कैंपेन के तहत व्हाइट हाउस और अमेरिकी कॉन्ग्रेस में लॉबिइंग कर रहा है। यह साफ है कि यह आतंकी विदेशी धरती पर बैठकर भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है।

इस नीच ने भारत पर खालिस्तानी आतंकियों और समर्थकों के खिलाफ सख्ती का आरोप लगाया। इसने कनाडा में खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या और यूके में इसके सहयोगी परमजीत सिंह पम्मा पर हुए कथित हमले का जिक्र किया। पन्नू ने दावा किया कि एक बीजेपी सांसद ने उसके सिर पर 5 लाख डॉलर का इनाम रखा है, लेकिन वो मौत से नहीं डरता। पन्नू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बेशर्मी से चुनौती दी कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और सिखों के बीच सीधा मुकाबला करें। यह इसकी हिमाकत दिखाता है कि यह भारत के नेतृत्व को खुलेआम धमकी दे रहा है।

इस आतंकी ने कश्मीर के तथाकथित आजादी आंदोलन का समर्थन किया और जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वालों को ‘आजादी का लड़ाका’ बताया। लेकिन इसने अमेरिका, यूके और कनाडा में रहने वाले कश्मीरियों पर निशाना भी साधा, जो कश्मीर में सक्रिय आतंकियों के समर्थन में भारतीय दूतावासों के बाहर प्रदर्शन नहीं करते। यह दिखाता है कि यह आतंकी न सिर्फ खालिस्तान, बल्कि कश्मीर में भी अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है।

बता दें कि पहलगाम आतंकी हमला 22 फरवरी को हुआ था, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी द रेसिस्टेंस फोर्स (टीआरएफ) ने 27 मासूम हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया। हमलावरों ने पीड़ितों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी, कलमा पढ़ने को कहा और उनके कपड़े उतारकर जाँच की कि उनका खतना हुआ है या नहीं। जो इस जाँच में ‘फेल’ हुए, उन्हें बेरहमी से गोली मार दी गई।

गौरतलब है कि गुरपतवंत सिंह पन्नू एक अमेरिकी-कनाडाई नागरिक है, जो खुद को वकील बताता है। यह सिखों के अधिकारों की आड़ में खालिस्तानी भावनाएँ भड़काता है और भारत के खिलाफ जहरीली धमकियाँ देता है। भारत ने इसे गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकी घोषित किया है। इसका संगठन ‘सिख्स फॉर जस्टिस‘ भी भारत में आतंकी संगठन की सूची में है। यह भारत का कट्टर दुश्मन है, जो विदेशी धरती से भारत की एकता और शांति को भंग करने की साजिश रच रहा है।

BBC को मोदी सरकार ने फटकारा, पहलगाम हमले के बाद आतंकवादियों को बताया था ‘मिलिटेंट’: कश्मीर को भी लेकर प्रोपेगेंडा करता रहा है ब्रिटिश मीडिया संस्थान

ब्रिटिश समाचार संस्थान BBC को मोदी सरकार ने करारी लताड़ लगाई है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भी BBC लगातार प्रोपेगेंडा कर रहा था। वह इस्लामी आतंकियों को ‘मुजाहिद’ बता रहा था। उसे अब विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है। BBC की इस संबंध में कोई प्रतिक्रया सामने नहीं आई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विदेश मंत्रालय की XP डिवीजन ने BBC को पहलगाम हमले की रिपोर्टिंग को लेकर पत्र लिखा है। विदेश मंत्रालय ने यह पत्र भारत में BBC के मुखिया जैकी मार्टिन को लिखा है। इसमें विदेश मंत्रालय ने पहलगाम हमले को लेकर भारतीयों की भावना को स्पष्ट कर दिया है।

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा है कि वह आगामी समय में इस मामले पर BBC की रिपोर्टिंग को ‘मॉनिटर’ करेगा। BBC को यह पत्र उसकी रिपोर्टिंग के भारत विरोधी रवैये को लेकर लिखा गया है। BBC पहलगाम में हमला करने वाले आतंकियों को ‘मिलिटेंट’ (लड़ाके) लिखता है। वह इन हमलावरों को आतंकी लिखने से बचता आया है।

BBC रिपोर्ट
BBC लगातार हमले को लेकर प्रोपेगेंडा कर रहा है

मिलिटेंट शब्द का एक मतलब ‘मुजाहिद’ भी होता है। मुजाहिद का अर्थ जिहाद के लिए लड़ने वाला होता है। इस तरह से वह एक तरह से आतंकियों को सही ठहरा रहा होता है। हिंदी की वेबसाइट पर भी BBC आतंकी ना लिख कर ‘चरमपंथी’ लिखता है। चरमपंथी शब्द किसी गैर हिंसक व्यक्ति के लिए भी लिखा जा सकता है।

पहले भी फैलाता आया है प्रपंच

BBC की करतूतें सिर्फ यहीं तक नहीं रुकती बल्कि वह कश्मीर को लेकर बाकी मामलों में भी प्रोपेगेंडा करता आया है। वह अपनी रिपोर्टिंग में लगातार भारत को ‘इंडियन एडमिनिस्टर्ड कश्मीर’ या ‘भारत प्रशासित कश्मीर’ लिखता आया है। जबकि असल में बात यह है कि भारत प्रशासित कश्मीर जैसी कोई जगह नहीं है। जम्मू कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग है।

BBC पाकिस्तान द्वारा कब्जाए गए कश्मीर को पाकिस्तान एडमिनिस्टर्ड यानी प्रशासित कश्मीर लिखता है। BBC यह नहीं बताता कि PoK पर पाकिस्तान का अनाधिकृत कब्जा है और यह इलाका कानूनी तौर पर भारत का है। वह कश्मीर ही नहीं बल्कि बाकी मुद्दों को लेकर भी फर्जी नैरेटिव फैलाता है।

उसने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर डाक्यूमेंट्री भी बनाई थी। इसमें गुजरात दंगों का दोषी पीएम मोदी को बताने की कोशिश की गई थी जबकि हर बार पीएम मोदी को देश की अदालतें क्लीन चिट दे चुकी हैं। यह डॉक्यूमेंट्री भारत में बैन कर दी गई थी।

बाकी विदेशी मीडिया संस्थान भी नहीं पीछे

BBC के अलावा बाकी कई और विदेशी मीडिया संस्थान भी पहलगाम हमले के बाद लगातार प्रोपेगेंडा कर रहे हैं। क़तर के सरकारी मीडिया संस्थान ‘अल जज़ीरा’, पाकिस्तान के ‘द डॉन’, अमेरिका के ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ (NYT) और ब्रिटेन के सरकारी मीडिया BBC ने शब्दों का हेरफेर करके आतंकियों का महिमामंडन करने का प्रयास किया है।

किसी मीडिया संस्थान ने आतंकियों को बंदूकधारी लिखा तो किसी ने उन्हें चरमपंथी बताया। उन्होंने घटना की भी कई जानकारियाँ छुपा ली थीं। उन्होंने यह भी नहीं बताया था कि हमले के दौरान इस्लामी आतंकियों ने धर्म पूछ कर हत्याएँ की थीं।

मोदी सरकार ने 16 पाकिस्तानी यूट्यूब चैनल पर लगाया बैन, भारत से कमाई कर चलाते थे पाक फौज का प्रोपेगेंडा : पहलगाम हमले के बाद हुई ‘डिजिटल स्ट्राइक’

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत की पाकिस्तान पर कार्रवाई जारी है। भारत ने इसी कड़ी में पाकिस्तान पर ‘डिजिटल स्ट्राइक’ की है। मोदी सरकार ने अब पाकिस्तान के कई यूट्यूब चैनल का प्रसारण भारत में रोक दिया है। इन्हें दिखाने पर भारत में बैन लगा दिया गया है। यह काम गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद किया गया है।

भारत ने पाकिस्तान के 16 यूट्यूब चैनल को भारत में दिखाने पर रोक लगाई है। अब यह चैनल भारतीय दर्शक यूट्यूब पर एक्सेस नहीं कर सकेंगे। भारत ने डॉन न्यूज, जियो टीवी, ARY न्यूज, SAMAA टीवी, GNN समेत 16 चैनल बंद कर दिए हैं। इनमें से कई न्यूज चैनल हैं और कई पत्रकारों के खुद के चैनल।

कुछ स्पोर्ट्स चैनल पर भी भारत ने यह पाबंदी लगाई है। इन सबके कुल मिलाकर 63 करोड़ से अधिक सब्सक्राइबर हैं। इनके दर्शकों में एक बड़ा हिस्सा भारतीय है और इससे यह मोटी कमाई करते हैं। कुछ चैनल्स की 50% से अधिक व्यूअरशिप भारत से आती है।

इसके बावजूद यह चैनल लगातार पाकिस्तानी फ़ौज का प्रोपेगेंडा चलाते हैं। इन पर फर्जी खबरें भी लगातार प्रसारित होती हैं। यह भारतीय सेना के खिलाफ भी झूठी खबरें प्रसारित करते हैं। हालिया पहलगाम हमले को भी इन चैनलों ने झूठा करार देने का प्रयास किया था।

कई मौकों पर इन चैनल के ऊपर भारतीय नेताओं को लेकर अभद्र टिप्पणियाँ भी की जाती हैं। हालाँकि, अब यह भारत में यूट्यूब पर दिखेंगे ही नहीं।

इन चैनल को यूट्यूब पर सर्च करने पर एक मैसेज प्रसारित हो रहा है। इसमें लिखा है, “राष्ट्रीय सुरक्षा या कानून व्यवस्था से संबंधित सरकार के आदेश के कारण यह कंटेंट वर्तमान में इस देश में उपलब्ध नहीं है।” इन चैनल का कोई भी वीडियो यूट्यूब पर नहीं दिख रहा है।

कुछ ऐसे चैनल भी हैं जिनका नाम इस प्रतिबन्ध वाली लिस्ट में नहीं शामिल है, लेकिन वह भी अब भारत में एक्सेस नहीं हो रहे। इसका एक उदारहण ‘वासे और इफ्फी’ का यूट्यूब चैनल है। यह स्पोर्ट्स को लेकर वीडियो जारी करते थे और भारतीय क्रिकेट प्रशंसक इन्हें बड़ी संख्या में देखते थे।

यूट्यूब चैनल से पहले भारत पाकिस्तान के सोशल मीडिया हैंडल्स पर भी कार्रवाई कर चुका है। यह लगातार भारतीय सेना, सरकार और बाकी मामलों से जुड़ी झूठी खबरें फैलाया करते थे। इसके अलावा भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद अटारी वाघा सीमा से होने वाला व्यापार भी बंद कर दिया है।

पाकिस्तान लौटने की मियाद पूरी, 600+ वापस गए, जो नहीं गए उन्हें हो सकती है 3 साल की जेल-₹3 लाख जुर्माना भी: 800+ भारतीय स्वदेश लौटे





पहलगाम आतंकी हमले के बाद केन्द्र सरकार ने पाकिस्तानियों को भारत छोड़ने की जो मियाद दी थी वो पूरी हो गयी है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में पाकिस्तानी भारत नहीं छोड़ पाए हैं। भारत छोड़ने में विफल रहने वाले पाकिस्तानियों को 3 साल की जेल या 3 लाख रुपए का जुर्माना या दोनों का सामना करना पड़ सकता है।

रविवार (27 अप्रैल 2025) अटारी बॉर्डर से लगभग 627 लोग पाकिस्तान लौटे। इनमें 9 डिप्लोमैट और अधिकारी शामिल हैं। भारत ने 12 कटैगरी के अंतर्गत सार्क वीजा रखने वाले पाकिस्तानियों को रविवार तक भारत छोड़ने का आदेश दिया था। हालाँकि मेडिकल वीजा रखने वालों के लिए अंतिम तिथि 29 अप्रैल है।

जिन 12 कटैगरी के वीजा धारकों को रविवार तक भारत छोड़ना था, वे हैं – आगमन पर वीजा, व्यवसाय, फिल्म, यात्रा, तीर्थयात्रा, ग्रुप तीर्थयात्रा, पर्यटन, सम्मेलन, पर्वतारोहण, स्टूडेंट्स वीजा और मेडिकल वीजा।

महाराष्ट्र में 5 हजार से ज्यादा पाकिस्तानी हैं जिनमें से करीब 1 हजार शॉर्ट टर्म वीजा पर हैं। इनलोगों को पाकिस्तान भेजा जा रहा है। बिहार सरकार ने 27 अप्रैल की डेडलाइन तक 19 पाकिस्तानियों को वापस भेजा।

तेलंगाना में 208 पाकिस्तानियों की उपस्थिति की जानकारी है जिनमें से 156 लॉन्ग टर्म वीजा और 13 शॉर्ट टर्म वीजा और 39 मेडिकल और व्यापार वीजा पर आए हुए हैं जिन्हें वापस भेजा गया है। केरल में 104 पाकिस्तानी के होने की जानकारी मिली है जिनमें से 99 लॉन्ग टर्म वीजा और बाकी टूरिस्ट और मेडिकल वीजा पर हैं।

राजस्थान की बात करें तो यहां सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तानियों की संख्या काफी है। जैसलमेर में 6 हजार से अधिक पाकिस्तानी लॉन्ग टर्म वीजा पर हैं। कुल पाकिस्तानी नागरिक की बात करें तो ये आँकड़ा करीब 20 हजार है।

भारत ने पाकिस्तान से अपने लोगों को वापस बुलाया है। रविवार को 116 भारतीय जिनमें एक डिप्लोमैट शामिल हैं, वो भारत पहुंचे। 26 अप्रैल को 342 भारतीय जिनमें 13 डिप्लोमैट्स शामिल हैं, भारत की धरती पर कदम रखा। 25 अप्रैल को 287 भारतीय वापस लौटे जबकि 24 अप्रैल को 105 भारतीय पाकिस्तान से वापस आए थे यानी 27 अप्रैल तक कुल 849 भारतीय वापस स्वदेश लौट चुके हैं।

17 मदरसे सीज, 89 अवैध निर्माण समतल… नेपाल बॉर्डर पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: ऑपइंडिया ने किया था ‘डेमोग्राफी जिहाद’ का खुलासा

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर अवैध रूप से बने ढाँचों पर कार्रवाई की है। यहाँ कब्जा कर बनाए गए 80 से अधिक ढाँचे गिरा दिए गए हैं। नेपाल सीमा में मदरसों पर भी कार्रवाई हुई है। योगी सरकार ने एक दर्जन से अधिक मदरसे सील कर दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई 25 अप्रैल, 2025 से 27 अप्रैल, 2025 के बीच की गई है। इसमें नेपाल से सीमा साझा करने वाले जिले बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर और लखीमपुर खीरी में कार्रवाइयाँ की गई हैं। कई जगह अवैध रूप से बनाई गई मस्जिदों को चिन्हित भी किया गया है।

योगी सरकार ने श्रावस्ती जिले में बिना किसी अनुमति के चल रहे 17 मदरसे सील कर दिए हैं। यह मदरसे नेपाल से सटी जमुनहा और भिनगा तहसील में चल रहे थे। इनको चलाने वाले मुस्लिम कोई भी वैध अनुमति पूछे जाने पर नहीं दिखा पाए, इसके बाद प्रशासन ने इन पर ताला जड़ दिया।

वहीं बहराइच जिले में नेपाल सीमा के 10 किलोमीटर के इलाके में बनाए गए 89 अतिक्रमण हटाए गए हैं। इनमें से 63 पहले हटाए गए थे जबकि 26 को बाद में जमींदोज कर दिया गया। बहराइच में ऐसे और भी निर्माण चिन्हित किए जा रहे हैं, जिन पर आगे कार्रवाई हो सकती है।

इसके अलावा नेपाल से सीमा साझा करने वाले जिले सिद्धार्थनगर में भी प्रशासन ने 5 जगह मस्जिद-मदरसे का अवैध अतिक्रमण पाया है। उनको भी चिन्हित कर लिया गया है। महाराजगंज जिले में 19 अवैध कब्जे पाए गए हैं, जिनको खाली करने की कवायद चालू हो गई है।

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले की सीमा भी नेपाल से सटती है। यहाँ भी 67 अवैध कब्जे हटाए जाने की कार्रवाई चल रही है। प्रशासन के डर के चलते कई लोग अपने कब्जे खुद हटा रहे हैं। लखीमपुर खीरी जिले में भी अवैध नमाज स्थल पर कार्रवाई की गई है।

लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील में एक जगह पर अवैध रूप से नमाज पढ़वाई जा रही थी, यहाँ मस्जिद बनाने की तैयारी थी। इसे प्रशासन ने खाली करवा दिया है। लखीमपुर खीरी में और भी ऐसी जगहें पहचानी जा रही हैं, जहाँ अवैध कब्जा किया गया है।

गौरतलब है कि ऑपइंडिया ने उत्तर प्रदेश की नेपाल से सटने वाली सीमा पर ग्राउंड रिपोर्ट की थी और बताया था कि यहाँ कैसे इस्लाम अपने पैर फैला रहा और डेमोग्राफी भी तेजी से बदल रही है। इस ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया था कि मात्र बलरामपुर जिले में ही नेपाल सीमा पर 108 मदरसे और 150 मस्जिदें बन गई थीं।

यह भी सामने आया था कि नेपाल सीमा के इलाकों में बाहर से भी पैसा आया है। कई जगह पर मंदिरों की जमीन कब्जे की भी बात सामने आई थी। इसके बाद यूपी सरकार ने सीमाई इलाकों में एक्शन भी लिया था। यह एक्शन भी उसी कड़ी का हिस्सा है।

‘अपने घर बुलाकर कपड़े उतारने को कहा’ एक्ट्रेस ने साजिद खान के लिए कहा- इससे घटिया आदमी नहीं देखा: फिल्म प्रोड्यूसर पर पहले भी कई अभिनेत्रियों ने लगाए थे यौन उत्पीड़न के केस

टीवी सीरियल ‘इश्कबाज’ और ‘मिले जब हम तुम’ में नजर आईं एक्ट्रेस नवीना बोले ने बॉलीवुड डायरेक्टर साजिद खान पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कास्टिंग काउच को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा किया है। नवीना ने साजिद को ‘बहुत बुरा आदमी’ बताया और कहा कि साजिद ने उन्हें अपने घर बुलाकर कपड़े उतारने के लिए कहा था। यह खुलासा नवीना ने सुभोजीत घोष के यूट्यूब चैनल पर दिए एक इंटरव्यू में किया। उन्होंने यह भी बताया कि साजिद ने इंडस्ट्री में कई दूसरी महिलाओं के साथ भी बुरा बर्ताव किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नवीना ने कहा, “एक ऐसा भयानक आदमी था, जिससे मैं जिंदगी में कभी नहीं मिलना चाहती। उसका नाम साजिद खान है। उसने महिलाओं की बेइज्जती करने की सारी हदें पार कर दीं।” उन्होंने बताया कि यह वाकया 2004-2006 के बीच का है, जब वे ग्लैड्रैग्स में हिस्सा ले रही थीं। उस वक्त साजिद फिल्म ‘हे बेबी’ पर काम कर रहे थे। नवीना ने कहा, “जब साजिद ने मुझे बुलाया, मैं बहुत खुश थी। लेकिन उनके घर पहुँचने पर उन्होंने कहा, ‘तुम कपड़े उतारकर लॉन्जरी में क्यों नहीं बैठ जातीं? मुझे देखना है कि तुम कितनी सहज हो।'”

नवीना ने आगे बताया कि साजिद ने उनसे कहा, “तुमने स्टेज पर बिकिनी पहनी थी, तो इसमें क्या दिक्कत है? तुम यहाँ आराम से बैठ सकती हो।” नवीना ने जवाब दिया, “मुझे घर जाना है। अगर आपको मुझे बिकिनी में देखना है, तो फिल्म में पहनूँगी, लेकिन अभी मैं कपड़े नहीं उतार सकती।” किसी तरह वे वहाँ से निकलने में कामयाब रहीं। एक्ट्रेस नवीना बोले ने बताया कि इसके बाद साजिद ने उन्हें कम से कम 50 बार फोन किया और पूछा कि वे क्यों नहीं आ रही हैं और कहाँ हैं।

नवीना ने यह भी खुलासा किया कि एक साल बाद, जब वे मिसेज इंडिया में हिस्सा ले रही थीं, साजिद ने फिर उन्हें फोन कर किसी रोल के लिए बुलाया। नवीना ने कहा, “वो शायद इतनी सारी लड़कियों के पीछे पड़ता था कि उसे याद ही नहीं था कि एक साल पहले उसने मेरे साथ ऐसा बर्ताव किया था।”

बता दें कि साजिद खान पर पहले भी कई महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। साल 2018 में भारत के #MeToo आंदोलन के दौरान कई अभिनेत्रियों और मॉडल्स ने साजिद पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। इनमें शर्लिन चोपड़ा, रेचल व्हाइट और एक पत्रकार शामिल थीं। हालाँकि बाद में साजिद को इंडियन फिल्म एंड टेलीविजन डायरेक्टर्स एसोसिएशन (IFTDA) से क्लीन चिट मिल गई थी। इस नए खुलासे ने एक बार फिर साजिद खान को विवादों में ला दिया है।

दुश्मन देश की भाषा बोले कर्नाटक के CM सिद्धारमैया, बोले- युद्ध की जरूरत नहीं: भाजपा ने कहा- पड़ोसी की कठपुतली हैं कॉन्ग्रेस नेता, मिले निशान-ए-पाकिस्तान पुरस्कार

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बयान सुर्खियों में है। हमले में 26 लोग मारे गए थे, जिनमें कर्नाटक के दो लोग भी शामिल थे। पत्रकारों ने जब सिद्धारमैया से पूछा कि भारत को पाकिस्तान के खिलाफ कितना सख्त रुख अपनाना चाहिए, तो उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के साथ जंग की कोई जरूरत नहीं है। हम जंग के हक में नहीं हैं। हमें सख्त कदम उठाने चाहिए और अपनी सुरक्षा को और मजबूत करना चाहिए।”

सिद्धारमैया के बयान का वीडियो पाकिस्तानी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। पाकिस्तानी मीडिया इसे दिखाकर दावा कर रहा है कि भारत में ही सरकार के खिलाफ आवाजें उठ रही हैं।

इस बयान पर बीजेपी ने सिद्धारमैया पर तीखा हमला बोला है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कहा, “सिद्धारमैया पाकिस्तान की कठपुतली की तरह बोल रहे हैं। ऐसे संवेदनशील वक्त में, जब सीमा पर जंग का खतरा है, उनका बयान शर्मनाक है।” अशोक ने तंज कसते हुए सिद्धारमैया को ‘पाकिस्तान रत्न‘ कहा और ‘X’ पर लिखा, “बधाई हो! अगर आप पाकिस्तान गए, तो शाही स्वागत होगा। शायद पाकिस्तान आपको निशान-ए-पाकिस्तान पुरस्कार दे दे।”

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ‘X’ पर लिखा, “कॉन्ग्रेस पाकिस्तान को बचाने में लगी है। सिद्धारमैया मुस्लिम वोटों के लिए ऐसा बोल रहे हैं, जबकि पाकिस्तानी आतंकी हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं।” उन्होंने एक पाकिस्तानी न्यूज़ चैनल की क्लिप भी शेयर की, जिसमें सिद्धारमैया का बयान दिखाया गया था।

इस मामले में खुद को चारों तरफ से घिरता देख सिद्धारमैया ने सफाई दी। उन्होंने ‘X’ पर लिखा, “मैंने कहा कि जंग आखिरी रास्ता है, पहला नहीं। केंद्र ने भी माना कि पहलगाम हमला हमारी खुफिया और सुरक्षा चूक की वजह से हुआ। पहले इसे ठीक करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि केंद्र ने सिंधु जल संधि रद्द करने जैसे कदम उठाए हैं, जिनका वे स्वागत करते हैं। सिद्धारमैया ने यह भी कहा, “पाकिस्तान आर्थिक रूप से टूट चुका है। उसे कुछ खोने का डर नहीं। भारत को सोच-समझकर कदम उठाने चाहिए। दुनिया भारत के साथ है। हमें इसका फायदा उठाकर पाकिस्तान को सबक सिखाना चाहिए।”

सिद्धारमैया ने देशवासियों से एकजुट होने की अपील की और कहा कि कुछ लोग देश में युद्धोन्माद फैलाकर माहौल खराब कर रहे हैं। केंद्र को ऐसे लोगों पर भी कार्रवाई करनी चाहिए।

जिस पाकिस्तान के लोगों के जख्मों पर भारत लगाता मरहम, वही पीठ में घोंपते रहे खंजर: भारत ने पहली बार मेडिकल वीजा भी किया रद्द, कहा- 29 अप्रैल तक लौट जाओ

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को इस्लामी आतंकवादियों ने खौफनाक हमला किया। उन्होंने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया, 26 लोगों की जान ली और कई को घायल कर दिया। इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन द रेजिस्टेंट फ्रंट (TRF) ने ली। पाकिस्तान के समर्थन वाला यह हमला उसकी भारत के प्रति दुश्मनी को फिर से उजागर करता है। इसके बाद भारत सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं।

भारत ने सभी पाकिस्तानी नागरिकों को 27 अप्रैल तक देश छोड़ने का आदेश दिया है। हालाँकि, दीर्घकालिक वीजा (लॉन्ग टर्म वीजा-LTV) वाले पाकिस्तानी हिंदुओं को इससे छूट दी गई है। मेडिकल वीजा पर आए पाकिस्तानी नागरिकों को भी 29 अप्रैल तक वापस जाने को कहा गया है। भारत ने सालों तक पाकिस्तान जैसे दुश्मन देश के प्रति उदारता दिखाई, लेकिन अब साफ कर दिया है कि विश्वासघात का जवाब दया नहीं होगा।

भारत की निर्णायक प्रतिक्रिया- सामान समेटो और निकलो

पाकिस्तान बार-बार भारत की पीठ में छुरा घोंपता रहा है। अब भारत ने सहनशीलता छोड़ दी है। विदेश मंत्रालय ने मेडिकल वीजा धारकों को 29 अप्रैल तक वापस जाने का आदेश दिया है। किसी भी तरह के वीजा विस्तार की अनुमति नहीं होगी। मौजूदा वीजा भी रद्द किए जा रहे हैं। यह आदेश गंभीर बीमारियों का इलाज करा रहे मरीजों पर भी लागू है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान ने अपने दोगलेपन से भारत के सब्र की कितनी परीक्षा ली।

ये निर्देश सख्ती से लागू किए गए हैं ताकि कोई शक न रहे। भारत ने साफ कर दिया है कि आतंक फैलाने वाले देश के नागरिकों का स्वागत नहीं किया जा सकता, भले ही वे इलाज के लिए आए हों।

पाकिस्तानियों के लिए खुला रहा भारत का दिल

दशकों से भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए अपने दरवाजे खुले रखे, खासकर उन लोगों के लिए जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे। जिनका इलाज रुकना नहीं चाहिए था, उनके लिए वीजा की प्रक्रिया को तेज किया गया। हार्ट सर्जरी, कैंसर का इलाज, अंग प्रत्यारोपण जैसे मामलों में हजारों पाकिस्तानियों को भारत में प्रवेश मिला।

भारत ने दोनों देशों के बीच तनाव के बावजूद वीजा नियमों में ढील दी। कई बार दस्तावेजों की दिक्कतों को नजरअंदाज किया, जो पाकिस्तानियों के लिए आम बात थी। भारत ने उनके शरीर को ठीक किया, कई बार मुफ्त इलाज दिया, लेकिन दूसरी तरफ पाकिस्तान अपनी आतंकी फैक्ट्रियों से भारत का खून बहाता रहा। भारत ने बार-बार करुणा दिखाई, लेकिन विश्वासघात की भी एक सीमा होती है।

अब नहीं सहेगा हिंदुस्तान


पहलगाम हमले से बहुत पहले भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों, खासकर मेडिकल वीजा के लिए साफ और व्यवस्थित नियम बनाए थे। मेडिकल वीजा के लिए आवेदन डिप्लोमेटिक चैनल से करना पड़ता था। इलाज के लिए आने वालों को सिर्फ तीन महीने का वीजा मिलता था। अगर राज्य सरकार या FRRO सिफारिश करता, तो चिकित्सा दस्तावेजों के आधार पर वीजा बढ़ाया जाता था। मरीज के साथ सिर्फ एक तीमारदार को अनुमति थी।

सुरक्षा मंजूरी लेना अनिवार्य था। फिर भी, भारत ने ज्यादातर मामलों में मानवीय आधार पर प्रक्रिया को तेज किया। आवेदकों को अपनी पूरी जानकारी, इलाज की जरूरत का सबूत और बैकग्राउंड जांच की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती थी। इसके बाद ही वीजा मिलता था।

केवल कुछ चुनिंदा मान्यता प्राप्त अस्पतालों को ही पाकिस्तानी मरीजों का इलाज करने की इजाजत थी। यह सुनिश्चित करता था कि इलाज सरकार की निगरानी में हो। तीमारदारों को भी अलग से सुरक्षा मंजूरी लेनी पड़ती थी।

इतने सख्त नियमों के बावजूद, भारत ने गंभीर मामलों में लचीलापन दिखाया। वीजा विस्तार, फॉलो-अप सर्जरी या अतिरिक्त परामर्श के लिए विशेष अनुमति दी जाती थी। मेडिकल वीजा धारकों को वापस भेजने का फैसला अचानक नहीं लिया गया। यह सावधानीपूर्वक बनाई गई नीति का हिस्सा है, जो पाकिस्तान की आतंकी गतिविधियों के समर्थन से कमजोर पड़ गई।

हजारों पाकिस्तानियों को भारत में जीवन रक्षक इलाज मिला। कुछ मामले खास तौर पर चर्चा में रहे।

पाकिस्तान किशोरी आयशा राशन का हृदय प्रत्यारोपण

अप्रैल 2024 में, पाकिस्तान की 19 वर्षीय आयशा राशन की चेन्नई के एमजीएम हेल्थ केयर अस्पताल में जीवन रक्षक हृदय प्रत्यारोपण सर्जरी हुई। इस सर्जरी में 35 लाख रुपए तक का खर्च अनुमानित था, पर इसे निःशुल्क तौर पर किया गया। ऐश्वर्यम ट्रस्ट की ओर से आर्थिक सहायता दी गई।

पाकिस्तानी लड़की अफशीन गुल की रीढ़ की सर्जरी

2022 में पाकिस्तान के सिंध से आई 13 वर्षीय अफशीन गुल को करेक्टिव स्पाइन सर्जरी के लिए भारत के दिल्ली में अपोलो अस्पताल में भर्ती किया गया। बचपन में गिरने के कारण वह गर्दन में गंभीर विकृति से जूझ रही थी। डॉ राजगोपालन कृष्णन ने इस जटिल सर्जरी को निःशुल्क किया। सर्जरी के बाद अफशीन जीवन में पहली बार खुद चलने, बोलने और खाना खा सकने में सक्षम हुई।

पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज मेडिकल वीजा के लिए हस्तक्षेप

2017 में तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने तीन साल की पाकिस्तान बच्ची की ओपन हार्ट सर्जरी और एक पाकिस्तानी व्यक्ति के लिवर ट्रांसप्लांट के लिए सामने से तत्काल आधार पर वीजा की अनुमति दी थी।

पाकिस्तानी व्यक्ति जफर अहमद लाली के लिए जटिल हृदय सर्जरी

2015 में 57 वर्षीय जफर अहमद लाली को भारत में जटिल हृदय सर्जरी के लिए मुंबई के एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में लाया गया था। एक खराब वाल्व और कई ब्लॉकेज होने की जटिलता के बावजूद डॉक्टरों ने भारत में यह सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की और अहमद को नई जिंदगी दी।

पाकिस्तानी बच्ची नूर फातिमा की हृदय सर्जरी

2003 में पाकिस्तानी बच्ची नूर फातिमा को भारत में निःशुल्क हृदय सर्जरी की गई और उसे नया जीवन दिया गया। इस तरह के इलाज भारत पाकिस्तान के रिश्तों में मजबूती लाने और सद्भावना के इरादे से किए गए थे।

पाकिस्तान की छुरा घोंपने की न बदलने वाली आदत

भारत ने कई बार पाकिस्तान के सामने दोस्ती का हाथ बढ़ाया, लेकिन जवाब में सिर्फ विश्वासघात ही मिला। भले ही भारतीय अस्पतालों ने असंख्य पाकिस्तानियों की जान बचाई हो, पर पाक की सेना और आतंकी संगठनों ने सीमा पर मौत ही भेजी। लाहौर वार्ता के ठीक बाद कारगिल युद्ध से लेकर 26/11 के मुंबई हमले और अब पहलगाम आतंकी हमलों समेत तमाम आतंकी साजिशों के जरिए पाकिस्तानी आतंकियों ने शांति प्रयासों को भंग किया है।

पाकिस्तान की ओर से यह संदेश दशकों से ही बगैर बदले चल रहा है – यह दोस्ताना रिश्ते नहीं जंग चाहता है। कितनी भी सद्भावना, वीजा, जीवन रक्षक सर्जरी हो जाए लेकिन ये सभी दशकों से भरी नफरत को मिटा नहीं पाएंगे।

बस अब काफी हो गया


हर देश के लिए एक समय आता है जब उसे संवेदनशीलता छोड़कर आत्मसम्मान चुनना पड़ता है। पाकिस्तानी मेडिकल वीजा धारकों को वापस भेजने का फैसला क्रूर नहीं है। यह भारत के अस्तित्व की बात है। बार-बार दया का बदला निर्दोष लोगों की मौत से नहीं लिया जा सकता। भारत ने आखिरकार सख्ती दिखाने का फैसला किया है। अब राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं होगा।

पाकिस्तानी जनता को भी समझना चाहिए कि सहानुभूति की एक सीमा होती है। हिंसा को बढ़ावा देने वाले देश के साथ उदारता नहीं चल सकती।

भारत की सद्भावना को कभी अहमियत नहीं दी गई। आतंकी मुल्क को यह मुफ्त में दी गई। खासकर तब, जब उनके नेता जंग की हर कोशिश करते रहे। हमारा भरोसा टूट चुका है और इसके जुड़ने की उम्मीद हर पल कम हो रही है। पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेजने का आदेश सिर्फ प्रशासनिक कदम नहीं है। यह एक प्रतीक है, जो पाकिस्तान को बताता है कि भारत की उदारता को कमजोरी न समझा जाए। जब तक पाकिस्तान अपने आतंकी नेटवर्क को खत्म नहीं करता, उसे न मदद मिलेगी, न सहानुभूति, और न ही खुला दरवाजा।

मूल रूप से ये समाचार अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।