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केरलः मदरसे के उलेमा ने 11 साल के बच्चे का किया यौन उत्पीड़न, अदालत ने सुनाई 20 साल की सजा-₹50000 जुर्माना

केरल के कासरगोड में एक मदरसे के उलेमा को यौन उत्पीड़न के आरोप में 20 साल कारावास की सजा सुनाई गई। अब्दुल हनीफ मधानी नाम के 41 वर्षीय उलेमा पर 11 साल के बच्चे के यौन उत्पीड़न का आरोप था। सत्र न्यायालय के न्यायाधीश टीके निर्मल ने अब्दुल हनीफ को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

पॉक्सो केसों के पब्लिक प्रॉजिक्यूटर प्रकाश अमनय ने बताया कि उसे इस संबंध में कहा कि उसे पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 और आईपीसी की धारा 377 में उसे 10 साल की सजा सुनाई गई। दोनों सजा साथ-साथ चलेगी। कोर्ट ने अब्दुल पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की राशि नहीं दिए जाने पर उसकी सजा को 12 माह और बढ़ा दी जाएगी।

सरकारी वकील के मुताबिक, आरोपित ने पीड़ित बच्चे का कई बार यौन शोषण किया। आखिरी बार उसने ऐसा 31 मई 2016 को हुआ था। इसके बाद अंबलथारा थाने में उसके ख़िलाफ़ शिकायत हुई। लेकिन वह बेल पर रिहा हो गया। कोर्ट ने हाल में उसे दोषी पाया, जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

गौरतलब है कि साल 2018 में ऐसा ही मामला हैदराबाद से आया था। वहाँ एक मदरसे के मौलवी ने 6 नाबालिगों का यौन उत्पीड़न किया था। अभिभावकों की शिकायत के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया था कि मौलवी पर 10 से 12 साल के बच्चों से रेप का आरोप है। शिकायत के बाद उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ था।

इसी प्रकार, साल 2020 में बांग्लादेश के एक मदरसा टीचर मो शाहिदुल्लाह पर आरोप लगा था कि उसने 15 दिन तक मदरसे में एक 16 साल के लड़के को नींद की गोलियाँ दे देकर उसका रेप किया। एक दिन जब लड़का मदरसे से भागने में कामयाब हुआ तो उसने अपने माता-पिता को आपबीती बताई। इसके बाद पुलिस में शिकायत हुई और शाहिदुल्लाह को गिरफ्तार किया गया।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना: मई-जून में 5 किलो अनाज देगी मोदी सरकार, 80 करोड़ लोगों को मिलेगा लाभ

कोरोना वायरस की दूसरी लहर ने पूरे देश में कहर मचा रखा है। ऐसे में गरीबों की हालत फिर से बिगड़ने लगी है। लिहाजा केंद्र सरकार ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAN) के तहत मुफ्त खाद्यान्न देने का ऐलान किया है।

इसके तहत मोदी सरकार मई और जून के महीने में हर गरीब को 5 किलो अनाज मुफ्त देगी। इससे 80 करोड़ जरूरतमंदों को लाभ मिलेगा। मोदी सरकार गरीबों को राशन उपलब्ध कराने के लिए 26 हजार करोड़ रुपए खर्च करेगी।

अधिकारियों ने बताया कि गरीबों के लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिबद्धता के अनुरूप सरकार ने 80 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त अनाज देने का फैसला किया है, जैसा कि पिछले साल लॉकडाउन के दौरान किया गया था। इसके तहत दो महीनों के लिए प्रति माह प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज दिया जाएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसका स्वागत करते हुए कहा है कि मोदी सरकार कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में गरीबों के साथ खड़ी है। उन्होंने ट्वीट किया, “कोरोना वायरस के प्रभाव को देखते हुए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत दो महीने के लिए 5 किलोग्राम अनाज प्रदान करने के लिए 26,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएँगे। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसके लिए बधाई देता हूँ। इस कदम से लगभग 80 करोड़ लोगों को लाभ होगा। मोदी सरकार इस आपदा में हर कदम पर देशवासियों के साथ खड़ी है।”

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर देकर महामारी के बीच गरीबों के लिए पोषण की व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया था। गौरतलब है कि पिछले साल जब पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था उस समय भी मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 80 करोड़ गरीबों को अनाज दिया था। उस दौरान राशनकार्ड धारकों को अप्रैल, मई और जून के महीने में 5 किलो गेहूँ या चावल के साथ एक किलो दाल मुफ्त दिया गया था। बाद में इसे बढ़ाकर 30 नवंबर 2020 तक के लिए लागू कर दिया था।

बंगाल: पेड़ से लटके मिले BJP के एक और कार्यकर्ता, पार्टी ने बताया- सुनियोजित हत्या

पश्चिम बंगाल में 7वें चरण के मतदान से पहले शुक्रवार (अप्रैल 23, 2021) को वर्धमान जिले के जमुरिया के अलीनगर गाँव में एक भाजपा कार्यकर्ता का शव पेड़ से लटका मिला। कार्यकर्ता की पहचान किरंजन घोष के रूप मे हुई है। जमुरिया में 26 अप्रैल को वोट डलेंगे।

मृतक के परिजनों ने बताया कि घोष गुरुवार (अप्रैल 22, 2021) को घर नहीं लौटे और शुक्रवार को उनका शव घर के पास एक जंगल वाले इलाके में पेड़ से लटका मिला। स्थानीय लोगों ने फौरन घटना की जानकारी पुलिस को दी। बाद में डिप्टी कमिशनर अभिषेक गुप्ता ने मौके पर पहुँचकर पड़ताल की।

इलाके में अभी पंदबेश्वर पुलिस थाने की पुलिस और सुरक्षाबल को तैनात किया गया है। इस बीच भाजपा ने आरोप लगाया कि ये एक सुनियोजित हत्या है और उनके कार्यकर्ता को मारने के बाद पेड़ से लटकाया गया।

जमुरिया विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी तापस रॉय ने मामले में 24 घंटे के अंदर जाँच पूरी करने की की माँग की है। साथ ही आरोपितों को भी सजा देने को कहा। वहीं मृतक के परिवार ने अभी इस संबंध में शिकायत नहीं दर्ज कराई है। लेकिन बंगाल के राजनीतिक माहौल के कारण इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले 18 अप्रैल को नादिया जिले के रोआवरी गाँव में भाजपा कार्यकर्ता का शव मिला था। मृतक की पहचान दिलीप कार्तनिया के रूप में हुई थी, वह इलाके में भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता थे। वह बूथ स्तर पर पार्टी के लिए काम कर रहे थे।

उनका शव उनके घर के पीछे झाड़ियों से बरामद किया गया था। चश्मदीदों ने बताया था कि दिलीप कीर्तानिया की नाक, कान और मुँह से खून बह रहा था। उनकी हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत चकदाहा स्टेट जनरल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

3 घंटे तक तड़पी शोएब-पांडे-पटेल की माँ, नोएडा में मर गए सबके नाना: कोरोना से भी भयंकर है यह ‘महामारी’

आपदा हो या त्योहार, अवसर लेकर आते हैं। पिछले एक वर्ष से चीन से चलकर दुनिया भर में किसी नए धर्म की भाँति फैलने वाली महामारी भी अवसर लेकर आई है। लोग अपनी-अपनी औकात के अनुसार अवसर निकाल ले रहे हैं।

किसी के लिए सेवा करके पुण्य कमाने का अवसर है तो किसी के लिए दवाइयाँ और इंजेक्शन पाँच गुने दामों पर बेच कर पैसे कमाने का। किसी अस्पताल के किसी कर्मचारी के लिए मरीज के शरीर से गहने उतार कर धनी बन जाने का अवसर है तो किसी के लिए दिन रात काम करके मानवता के लिए नए आविष्कार करने का अवसर है।

सब अपने-अपने अवसर तलाश कर कुछ न कुछ कर डाल रहे हैं पर इस आपदा में सबसे बड़े अवसरवादी वे हैं जिन्हें यह विश्वास है कि उनके लिए सत्ता पाने का राष्ट्रीय राजमार्ग सोशल मीडिया की जमीन से होकर गुजरता है।

अब इसका असर यह हुआ है कि ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ऐसा कोई प्लेटफॉर्म नहीं है, जहाँ इन प्रोपगैंडाबाजों ने कहर न ढाया हो। बिना नाम और पते वालों द्वारा बेड से लेकर ऑक्सीजन माँगने तक का सीरियल प्रोपगैंडा जगह-जगह बिखरा पड़ा है। कोई 2018 की मणिकर्णिका घाट की तस्वीर लगाकर बता रहा है कि लाशें ही लाशें जल रही हैं। पत्रकारों के साथ-साथ बोट्स को भी लाशों से इतना लगाव हो चला है कि वे भी लाशों वाले ट्वीट रीट्वीट किए जा रहे हैं।

ये ऊपर लगे स्क्रीनशॉट के दर्शन करें, जिसमें पटेल, पांडेय, वर्मा, शोएब सबकी माँ तीन घंटे तक लगातार तड़पी और फिर छोड़कर चली गई। स्क्रीनशॉट देखने के बाद लोगों ने अनुमान लगाना शुरू किया कि सबकी माँ एक ही थी या अलग-अलग थी। यदि अलग-अलग थी तो क्या इन्हें चीनी वाइरस के किसी खास प्रकार के वेरिएंट ने संक्रमित किया, जिसमें मरीज तीन घंटे तड़पता है?

एक और स्क्रीनशॉट देखा जिसमें पता चला कि स्वाति मालीवाल के नानाजी का जब नोएडा के शारदा अस्पताल में आधे घंटे तक एडमिशन नहीं मिला तो उनका देहांत हो गया। स्वाति जी के नानाजी के देहांत की खबर जैसे ही फैली एडाल्फ हिट्लर, कल्पना मीना और वेंकट आर के नानाजी लोग भी नोएडा के उसी अस्पताल में पहुँचे ताकि आधे घंटे तक एडमिशन का इंतजार करें और एडमिशन न मिलने पर मर सकें।

इधर इस स्क्रीनशॉट के भी दर्शन हुए जिसमें AIIMS में काम करने वाली डॉक्टर बहन जी लोगों ने बताया कि कैसे वे अस्पताल में बीस दिन से लगातार काम कर रही हैं और इसकी वजह से तीनों चीनी वारस से संक्रमित हो गई हैं। पर ये सारी समस्या नहीं है। दरअसल असली समस्या यह है कि इन तीनों की एक-एक बेटी है और संयोग देखिए कि तीनों बेटियाँ भी दो-दो वर्ष की हैं। इन डॉक्टर बहन जी लोगों ने फ़िल्मी डॉक्टरों की तरह ही लोगों से (विनोद) दुआ करने की अपील की है।

चीनी वाइरस द्वारा फैलाई गई इस महामारी में सोशल मीडिया पर प्रोपगैंडा कोई नई बात नहीं है। पिछले वर्ष लगभग इसी समय हरियाणा के अस्पताल में तथाकथित रूप से कार्यरत एक महिला डॉक्टर ने मास्क और ज़रूरी उपकरणों की कमी का फ़र्ज़ी हाफा पीटा था और जब लोगों ने सवाल करना शुरू किया तो अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट कर गई थी। इस तरह से आपदा में अवसर खोजने वालों की संख्या दूसरी लहर के समय बहुत है।

पिछले वर्ष चलाए गए प्रोपगैंडा के तत्व अलग थे। इस वर्ष पिछले वर्ष से बिलकुल अलग हैं। लोग माँ से लेकर नाना और नानी तक को मारने में नहीं हिचक रहे हैं। एक समय था जब कहानियों में राज पाने के लिए जानवरों की क़ुर्बानी देने के किस्से लिखे जाते थे। अब समय अलग है। अब राज पाने के लिए काल्पनिक माँ, नाना, नानी, बाप वग़ैरह को मार दिया जा रहा है। यह बात अलग है कि काल्पनिक क़ुर्बानियों से राज भी सोशल मीडियाटिक और काल्पनिक ही मिलेगा।

ममता बनर्जी की हैट्रिक पूरी: कोरोना पर PM संग बैठक से इस बार भी रहीं नदारद, कहा- मुझे बुलाया ही नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (23 अप्रैल 2021) को कोरोना के गहराते संकट के मद्देनजर पैदा हुई परिस्थितियों की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। इस बैठक से भी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नदारद रहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति और ऑक्सीजन की सप्लाई से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्रियों के साथ यह बैठक की थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय इस बैठक में शामिल हुए। तीन महीने में ऐसा तीसरी बार हुआ है जब ममता बनर्जी ने Covid-19 की बैठक में शामिल नहीं हुईं।

हालाँकि ममता बनर्जी का दावा है कि उन्हें बैठक के लिए बुलाया ही नहीं गया था। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें बैठक में शामिल होने के लिए बुलाया जाता तो वह निश्चित तौर पर शामिल होतीं। बंगाल की मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बंगाल की ऑक्सीजन को उत्तर प्रदेश को भेज रही है। ममता बनर्जी के इस बयान पर लोगों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।

दुर्गापुर में चुनाव प्रचार के दौरान एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता बनर्जी ने कहा, “पीएम मोदी ने किसी भी बैठक में हमसे ऑक्सीजन के बारे में चर्चा नहीं की। मैंने सुना है कि आज भी एक बैठक हुई है, लेकिन हमें बैठक के लिए नहीं बुलाया गया। यदि बैठक के लिए बुलाया जाता तो मैं जरूर जाती। लेकिन मैंने यह भी सुना है कि अधिक संक्रमण वाले सिर्फ 10 राज्यों को बुलाया गया था।”

प्रश्न यह उठता है कि यदि बैठक में पश्चिम बंगाल को नहीं बुलाया गया था तो राज्य के मुख्य सचिव बैठक में कैसे शामिल हुए। यह सही है कि पीएम मोदी की बैठक में उन 10 राज्यों को बुलाया गया था, जहाँ संक्रमण की रफ्तार काफी तेज है अथवा स्थिति गंभीर है। पश्चिम बंगाल भी उनमें से एक था। बैठक में दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, गुजरात और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री शामिल हुए।

केन्द्रीय सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि 2 लाख केन्द्रीय सुरक्षा बल के जवान बाहर से बंगाल में लाए गए और उनके साथ 1 लाख भाजपा के कार्यकर्ता भी दूसरे राज्यों से बंगाल में आए। यही राज्य में Covid-19 का कारण बने हुए हैं।

भाजपा के अमित मालवीय ने कहा, “बंगाल में Covid-19 की परिस्थितियों से निपटने में ममता बनर्जी की असफलता के विषय में सभी जानते हैं। वह फिलहाल एक भी बैठक में शामिल नहीं हुई हैं।“ उन्होंने यह भी कहा कि ममता बनर्जी बंगाल में असफल हैं और आज की बैठक भी ज्यादा संक्रमित राज्यों के लिए ही थी।

पिछले तीन महीनों में ममता बनर्जी एक बार भी पीएम मोदी और मुख्यमंत्रियों की बैठक में शामिल नहीं हुई हैं। इस महीने हुई बैठक में भी वह चुनाव प्रचार के चलते अनुपस्थित रहीं। आज भी वह Covid-19 की एक उच्च स्तरीय बैठक में शामिल नहीं हुईं।

ममता बनर्जी ने पिछली बैठकों से गायब रहने के पीछे चुनाव प्रचार को कारण बताया था जिससे उनकी जगह पर राज्य के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय बैठक में शामिल हुए। ऐसे में लोग ममता के बैठक में नहीं बुलाए जाने के दावे की सच्चाई बखूबी जान रहे हैं।

एंटीलिया केस: मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच का तीसरा अधिकारी गिरफ्तार, सचिन वाजे को मदद और कनेक्शन

उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर के पास विस्फोटक से भरी कार खड़ी करने और बिजनेसमैन मनसुख हीरेन की हत्या के दोहरे मामले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार को मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सुनील माने को गिरफ्तार कर लिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक इंस्पेक्टर सुनील माने से गुरुवार को कड़ी पूछताछ की गई थी। गिरफ्तार किए गए इंस्पेक्टर सुनील माने पर निलंबित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की मदद करने का शक है, जो उनकी इस केस में संलिप्तता की ओर इशारा करता है।

माने को दो अन्य गिरफ्तार पुलिसवालों वाजे और रियाजुद्दीन काजी के साथ शुक्रवार को एनआई की विशेष कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। वाजे और रियाजुद्दीन की रिमांड की अवधि शुक्रवार को ही समाप्त हो रही है।

एंटीलिया केस में क्राइम ब्रांच के तीसरे अधिकारी की गिरफ्तारी

सुनील माने, वाजे और रियाजुद्दीन के बाद पिछले दो महीने में इस मामले में गिरफ्तार होने वाले क्राइम ब्रांच के तीसरे अधिकारी हैं। एंटीलिया बम विस्फोट मामले की जाँच के सिलसिले में एनआईए द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद मुंबई पुलिस ने एपीआई रियाजुद्दीन काजी को निलंबित कर दिया। एनआईए के एक अधिकारी ने तब बताया भी था, “वह न केवल पूरी साजिश का हिस्सा था, बल्कि यह बताने के लिए गवाह है कि उसने वाजे के निर्देशों पर सबूत कैसे नष्ट किए।”

25 फरवरी को 20 जिलेटिन छड़ों से भरी एक स्कॉर्पियो एसयूवी और एक धमकी भरे खत को अंबानी के घर एंटीलिया के करीब बरामद किया गया था। 5 मार्च को मनसुख हीरेन की लाश थाने क्रीक से बरामद हुआ था। देश भर में सुर्खियाँ बटोरने वाले इस मामले में दो अन्य आरोपियों पूर्व पुलिसकर्मी विनायक शिंदे और क्रिकेट बुकी नरेश गोर को भी गिरफ्तार किया गया था।

इस मामले के उजागर होने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने पुलिस बल में बड़ा बदलाव करते हुए उस समय के पुलिस कमिश्नर परमवीर सिंह का तबदला स्टेट होम गार्ड्स के कमांडेंट जनरल के रूप में कर दिया था, जबकि हेमंत नागराले को उनकी जगह नया पुलिस कमिश्नर बनाया गया।

बंगाल में अब PM मोदी ने झोंकी ‘वर्चुअल’ ताकत, कोलकाता को ‘सिटी ऑफ फ्यूचर’ बनाने का किया वादा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (अप्रैल 23, 2021) वर्चुअल रैली को संबोधित किया। कोलकाता, बीरभूम और मुर्शिदाबाद की जनता के सामने वर्चुअली अपनी बात रखते हुए पीएम ने बताया कि कोविड नियमों के मद्देनजर भाजपा कार्यकर्ताओं ने सब तैयारी कर ली थी, लेकिन हालातों के कारण वह वहाँ नहीं आ सके।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बंगाल में अच्छे से मतदान हो रहा है। मतदाता भेदभाव से मुक्त, सद्भाव से युक्त, व्यवस्था के लिए वोट दे रहे हैं। लोगों को यहाँ रोजगार के अवसर, अच्छा जीवन और व्यापार करने के लिए सहायता चाहिए, भाजपा यह सब बंगाल को देगी।

इस पहली वर्चुअल रैली में पीएम ने आशावादी बंगाल पर बात करते हुए कहा कि इस बार परिवर्तन तय है। उन्हें कोने-कोने से प्यार मिला, जिससे वह अभिभूत हैं। उन्हें बंगाल को पुराना गौरव लौटाना है। अब तक यहाँ जो सरकारे रहीं, उन्होंने बंगाल को गुलाम बनाकर रखा, लेकिन इस बार जनता मुक्ति चाहती है। बीजेपी के लोग इस सपने को पूरा करेंगे।

पीएम ने बंगाल की जनता को बताया कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत पिछले 18 हजार रुपए बंगाल के हर किसान को मिले, इसके लिए सरकार बनते ही काम शुरू किया जाएगा।

पीएम ने कोलकाता के लिए कहा, “कोलकाता की तो पहचान सिटी ऑफ जॉय के रूप में रही है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से इसको सिटी ऑफ फ्यूचर के रूप में विकसित किया जाएगा।

इसके अलावा पीएम ने जानकारी दी कि पीएम आवास योजना के अंतर्गत देश भर में उनकी सरकार द्वारा गरीबों के लिए दो करोड़ से अधिक घर बनवाए गए हैं। बंगाल में भाजपा सरकार बनने के बाद गरीबों के लिए घर निर्माण की गति को बहुत तेजी से बढ़ाया जाएगा।

पीएम ने बताया कि भारत में बहुत निवेश हो रहा है। इसका एक बड़ा हिस्सा वह बंगाल में उद्योग और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं। पार्टी इसके लिए पूरी कोशिश करेगी।

सिल्क और जूट उद्योग आत्मनिर्भर भारत में महत्वपूर्ण कारक है। इन्हें बढ़ावा देने की जिम्मेदारी भाजपा उठाएगी। साथ ही फल और सब्जियों की बचत के प्रयास होंगे और किसानों को हर संभव तरीके से मदद दी जाएगी।

नारी सशक्तिकरण पर पीएम ने कहा कि बहनों-बेटियों की सक्रिय भागीदारी के बिना विकास अधूरा है। भाजपा सरकार की ये कोशिश है कि बेटियों के जन्म से लेकर बुढ़ापे तक उनको हर वो सुविधा और प्रोत्साहन मिले, जिससे वो बेहतर समाज का निर्माण कर सके।

कोरोना के मद्देनजर बचाव पर बात करते हुए पीएम ने कहा टीके के दौरान भी, टीके के बाद भी, मास्क जरूरी है, पूरे चेहरे को मास्क से ढँकना जरूरी है। दवाई भी, कड़ाई भी, इस मंत्र को हमें याद रखना है।

Virafin (PegIFN) को मंजूरी: कोरोना मरीजों की ऑक्सीजन आवश्यकता को करेगी नियंत्रित, जायडस कैडिला का दावा

जायडस कैडिला की विराफिन (Virafin) दवा को ड्रग्स जनरल कंट्रोलर ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) की आपातकालीन मंजूरी मिल गई है। विराफिन (Virafin) वयस्कों में Covid-19 के संक्रमण के ईलाज में उपयोगी है।

विराफिन (Virafin) ब्रांड नाम के इस दवा का ड्रग नाम है – पेगिलेटेड इन्टरफेरेन अल्फा-2b (Pegylated Interferon alpha-2b, PegIFN)। इसे बनाने वाली कंपनी जायडस ने दावा किया है कि एंटी वायरल दवा Virafin (PegIFN) से ईलाज करने के बाद 91.15% कोविड मरीजों की रिपोर्ट सातवें दिन निगेटिव आई है। इसके अलावा जायडस की यह दवा गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की ऑक्सीजन की आवश्यकता को भी कम करती है।

जायडस कैडिला ने इसी महीने Virafin (PegIFN) दवा को अप्रूव करने का आवेदन दिया था। कंपनी ने बयान जारी करके कहा कि Virafin (PegIFN) से मरीजों में ऑक्सीजन सप्लिमेंट की जो आवश्यकता 84 घंटे की होती है, वो घटकर 56 घंटे की हो जाती है। जायडस के प्रेस रिलीज में यह भी कहा गया है कि Virafin (PegIFN) की सहायता से मरीज शीघ्रता से रिकवर कर रहे हैं।

प्रेस रिलीज में जायडस ने Virafin (PegIFN) के विषय में बताया कि मरीजों के लिए इस दवा का उपयोग सस्ता और आसान होगा। यह सिंगल खुराक आधारित दवा है। इसके अतिरिक्त इस दवा के बेहतर परिणाम हैं।

फार्मा कंपनी ने बताया कि Virafin (PegIFN) के उपयोग से अतिरिक्त ऑक्सीजन की आवश्यकता घट जाती है, जिससे यह पता चलता है कि दवा श्वसन से संबंधित कठिनाईयों और श्वसन तंत्र के निष्क्रिय होने से बचाने में सहायक है।

भारत में कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर चिंताजनक स्तर पर पहुँच गई है। देश में रोजाना मिलने वाले मरीजों की संख्या 3 लाख से ऊपर हो गई है। तेजी से बढ़ते इस संक्रमण के बीच कई राज्य ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं।

हत्या के बाद माँ की शव के किए 1000 टुकड़े, फ्रिज में रख कुत्ते के साथ धीरे-धीरे खाता रहा: बेटे के खिलाफ सुनवाई शुरू

स्पेन के मैड्रिड में उस युवक के खिलाफ अदालत में सुनवाई शुरू हो गई है, जिस पर अपनी माँ की हत्या कर शव को खाने का आरोप है। यह घटना 2019 की है। मैड्रिड निवासी 28 वर्षीय एल्बर्टो सांचेज गोमेज (Alberto Sánchez Gómez ) पर अपनी माँ मारिया गोमेज को मारने का आरोप है। हत्या के बाद उसने शव को हजार टुकड़े में काट दिया। फिर उसे अपने कुत्ते के साथ मिल कर खाता रहा। मारिया के एक दोस्त की शिकायत पर पुलिस सांचेज के घर पहुँची थी और उसे गिरफ्तार किया था। 

दोस्त ने पुलिस को मारिया के अचानक गायब होने के बारे में बताया। इसके बाद वहाँ की पुलिस ने अपनी पड़ताल शुरू की। शिकायत के आधार पर जब पुलिस गोमेज के घर पहुँची तो उसकी माँ मारिया गोमेज के शरीर के कुछ हिस्से फ्रिज में पड़े मिले, कुछ प्लास्टिक कंटेनर में और कुछ अपार्टमेंट में इधर-उधर पड़े थे।

पुलिस के मुताबिक जब वह घर पहुँची तो शव के टुकड़े देख उनके होश उड़ गए। दरवाजा सांचेज ने ही खोला था। जब मारिया की गुमशुदगी को लेकर उससे सवाल किया गया तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने कहा कि मारिया गोमेज यहीं पर हैं, लेकिन अब वह मर चुकी हैं।

युवक ने पूरी घटना बताते हुए कहा, “मैंने और मेरे कुत्ते ने उन्हें पूरी तरह से खा लिया है।” युवक की बात सुन पुलिस ने घर की छानबीन शुरू की। देखा तो फ्रिज और प्लास्टिस बैग में मारिया गोमेज के टुकड़े पड़े थे।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सांचेज गोमेज का पूरा मामला इस समय कोर्ट में है। उसके बचाव में हाल में दलील दी गई कि उसे याद भी नहीं है कि उसने अपनी माँ को खाया। कथित तौर पर युवक पर्सनालिटी डिसॉर्डर से ग्रसित है। इसके अलावा वह ड्रग का आदी भी रह चुका है।

विदेशी रिपोर्ट्स बताती हैं कि सांचेज को जब पुलिस पकड़ने पहुँची, उस समय वह अपनी माँ के बचे हुए टुकड़ों को पका कर खाने वाला था। गिरफ्तारी के बाद उसने स्वीकारा कि उसने अपनी माँ की गला दबाकर हत्या की थी और बाद में उसने उन्हें टुकड़ों में काटकर अपने कुत्ते के साथ खाया।

ऑक्सीजन सिलिंडर, दवाई, एम्बुलेंस, अस्पताल में बेड… UP में मदद के लिए RSS के इन नंबरों पर करें कॉल

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने भी कमर कस ली है। हमने पिछले साल भी RSS और इससे जुड़ी ‘सेवा भारती’ सहित कई संस्थाओं को देश के सुदूर इलाकों तक में जनसेवा में रत देखा था। बाढ़, भूकंप और तूफ़ान की स्थिति में RSS दशकों से सेवाकार्य करता आ रहा है। देश भर में फैले अपने नेटवर्क के माध्यम से संघ प्रशासन के साथ मिल कर काम करता है, ताकि ज़रूरतमंदों की मदद हो सके।

देश में फ़िलहाल ऑक्सीजन, अस्पताल बेड्स और दवाओं के लिए स्थिति खासी संवेदनशील बनी हुई है। सोशल मीडिया पर लोग मदद के लिए गुहार लगा रहे हैं। उन्हें पता नहीं चल रहा है कि आपदा के इस काल में किससे संपर्क करें। देश के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले राज्य उत्तर प्रदेश में भी स्थिति ठीक नहीं है। ऐसे में आप RSS द्वारा जारी की गई इस सूची को देख कर इसमें दिए गए नाम और नंबर पर संपर्क कर सकते हैं:

उत्तर प्रदेश के लोग आपात स्थिति में इन नंबरों पर करें संपर्क

ऑक्सीजन सिलिंडर और उसकी रिफिलिंग नहीं हो पा रही है, आपको डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाइयाँ नहीं मिल रही हैं, अस्पतालों में मरीज को भर्ती नहीं कर पा रहे हैं, निजी अस्पतालों के बारे में आपको कुछ पता नहीं है, एम्बुलेंस नहीं मिल रही है या फिर भोजन-पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है तो आप ऊपर की सूची में ‘कार्य विभाग’ देख कर RSS के इन पदाधिकारियों को फोन कॉल कर सकते हैं।

सूची में इनके नाम के साथ दायित्व और फोन नंबर भी दिए गए हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी कोरोना पीड़ितों की मदद के लिए पहल कर रहा है और उससे भी संपर्क किया जा सकता है। परिषद ने भी यूपी में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए प्रदेश के अलग-अलग प्रान्तों में संक्रमण से जूझ रहे लोगों की सहायता के लिए अपने कार्यकर्ताओं की सूची तैयार की है। उस सूची में दिए गए संपर्कों पर भी आप कॉल कर सकते हैं।

ऊपर के ट्वीट थ्रेड में आपको विभिन्न राज्यों में ABVP के हेल्पलाइन नंबरों पर फोन कॉल करने पर सहायता मिल जाएगी। RSS पार्क और खुले मैदान में लगने वाली शाखाओं को पिछले साल ही बंद कर चुकी है लेकिन ऑनलाइन कार्य जारी रहा है। घरों में शाखाएँ लगीं। प्रतिदिन लगने वाली 1 घंटे की शाखा ही संघ की बड़ी ताकत है, जहाँ से इसके पूर्णकालिक सदस्य भी निकलते हैं। अब संघ जनसेवा में ताकत झोंक रहा है।