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जनरल मुनीर ने पहलगाम अटैक के लिए उकसाया: अपने ही प्रोफेसर ने पाकिस्तान की खोल दी पोल, कहा- चीन में इस्लाम खत्म किया जा रहा और हम हिंदू घृणा से ग्रस्त हैं

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान की पोल खोलने का काम पाकिस्तान के ही प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने किया है। उन्होंने पाकिस्तान के फौज के प्रमुख जनरल असीम मुनीर की सोच पर भी गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि मुनीर यह बयान कि ‘हम हिंदुओं से अलग हैं’ बेहद भड़काऊ है। उनके बयान के कुछ दिन बाद ही मासूम लोगों की आतंकियों ने हत्या कर दी।

प्रोफेसर इश्तियाक ने कहा कि जनरल मुनीर ने ‘टू नेशन थ्योरी’ को एक बार फिर हवा दी है। यह बयान आंतरिक बवाल से जनता का ध्यान भटकाने के लिए फौज के मुखिया द्वारा दिया गया है। इश्तियाक अहमद ने कहा कि पाकिस्तान पड़ोसी मुल्क भारत के साथ संबंध नहीं रखना चाहता, लेकिन चीन के हमारा कौन सा रिश्ता है। क्या वो हमारा मामा लगता है? चीन तो वैसे भी नास्तिक है और वहाँ इस्लाम को खत्म किया जा रहा है।”

उन्होंने पाकिस्तान के फौजी जनरल से पूछा, “वहाँ (चीन के मामले में) तो आप चुप हैं। पाकिस्तान को आपने (मुनीर ने) फिर से मुसीबत में डाल दिया है।” भारत के बँटवारे पर सहित विभिन्न मामलों को पर कई किताबें लिखने वाले प्रोफेसर इश्तियाक ने कहा कि उनके जैसे कई लोगों भारत के साथ पाकिस्तान के हालात बेहतर करने में लगे हैं, ताकि व्यापार शुरू हो सके और पाकिस्तान के हालात बेहतर हो सकें।

कश्मीर को लेकर भी उन्होने पाकिस्तान के हुक्मरानों को लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तानी के हुक्मरान और फौजी ऐसी-ऐसी दलीलें दे रहे हैं, जो पहले ही पिट चुकी हैं। उन्होंने पाकिस्तान की सैन्य और कूटनीतिक असफलताओं की बात करते हुए कहा, “हम भारत से चार जंगें हार चुके हैं और भारत का एक इंच जमीन नहीं ले पाए, उल्टे अपना मुल्क ही तुड़वा लिया (बांग्लादेश)”।

प्रोफेसर ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की दुनिया में फिर से बदनामी होगी और उसे अराजकता फैलाने वाला देश कहा जाएगा। तहव्वुर राणा को भी भारत वापस ले लाया है और उससे वह चीजें उगलवाई जाएगी, जिससे पाकिस्तान को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने पाकिस्तान की शहवाज शरीफ की पोल खोलते हुए कहा कि मुल्क में असली पावर तो सेना प्रमुख के पास है।

प्रोफेसर ने कहा कि बलूचिस्तान के बाद अब सिंध के लोग भी बगावत के लिए उठ खड़े हुए हैं। नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर वैसे ही आतंकवाद की आग में जल रहा है। इसलिए जनरल मुनीर ने पाकिस्तान के लोगों का ध्यान इनकी तरफ की चीजों से हटाने के लिए टू-नेशन थ्योरी को फिर से रिवाइव करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का विदेश विभाग भी बेवकूफ है, वहाँ कोई काबिल व्यक्ति नहीं है।

प्रोफेसर इश्तियाक अहमद ने आगे कहा कि भारत में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की यात्रा जब भारत आए हुए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब सऊदी अरब में मौजूद होने के दौरान कश्मीर में हमले से पाकिस्तान की बदनामी हो रही है। उन्होंने पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख को लताड़ते हुए कहा कि ‘खुदा का खौफ होना चाहिए’।

पहलगाम के इस्लामी आतंकियों को ‘मिलिटेंट्स’ बता रहा था NYT, अमेरिकी संसद की कमेटी ने रगड़ा: ‘बंदूकधारी-चरमपंथी’ की खाल में पहचान छिपा रहा विदेशी मीडिया

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए आतंकी हमले पर वैश्विक मीडिया की कवरेज ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच, अमेरिकी संसद की हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के बहुमत पक्ष (House Foreign Affairs Committee Majority) ने न्यूयॉर्क टाइम्स को आड़े हाथों लिया है। कमेटी ने ट्वीट करके कहा कि न्यूयॉर्क टाइम्स ने पहलगाम में हुए हमले को आतंकी हमला कहने के बजाय ‘मिलिटेंट्स’ यानी उग्रवादियों द्वारा हमला बताया, जो पूरी तरह गलत है।

हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी ने साफ कहा कि चाहे भारत हो या इजरायल, आतंकवाद को लेकर न्यूयॉर्क टाइम्स हकीकत से कोसों दूर है। कमेटी ने न्यूयॉर्क टाइम्स की हेडलाइन को ठीक करते हुए लिखा, “यह साफ-साफ आतंकी हमला था।”

बता दें कि पहलगाम में आतंकियों ने 28 निर्दोष लोगों की हत्या कर दी, जिसमें से अधिकतर पर्यटक थे। पीड़ितों ने बताया कि हमलावरों ने पुरुषों की पैंट खोलकर यह चेक किया कि उनका खतना हुआ है या नहीं। जिनका खतना नहीं हुआ, उन्हें हिंदू समझकर गोली मार दी गई। आईडी कार्ड चेक किए गए और पूछा गया कि ‘मुस्लिम हो?’

इस हमले में 28 लोग मारे गए, जबकि न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में 24 लोगों के मारे जाने की बात कही। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हमले को क्षेत्र में नागरिकों पर सालों में सबसे खराब हमला बताते हुए इसे ‘आतंकी हमला’ करार दिया और दोषियों को सजा दिलाने का वादा किया।

लेकिन इस घटना को वैश्विक मीडिया ने जिस तरह से पेश किया, उसने कई सवाल खड़े कर दिए। ऑपइंडिया पहले ही अपनी रिपोर्ट में बता चुका है कि किस तरह से अल जजीरा, बीबीसी, न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट और पाकिस्तानी मीडिया डॉन जैसे बड़े संस्थानों ने आतंकियों को आतंकी कहने से परहेज किया। अल जजीरा ने आतंकियों को ‘सशस्त्र व्यक्ति’ और ‘बंदूकधारी’ कहा। उसने “आतंकी हमला” शब्द को डबल कोट में लिखा, जैसे कि उसे इस शब्द पर भरोसा ही न हो।

पाकिस्तानी मीडिया डॉन ने भी आतंकियों को ‘बंदूकधारी’ लिखा और जम्मू कश्मीर को ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ कहकर भारत का हिस्सा मानने से इनकार किया। डॉन ने पहलगाम को ‘मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्र’ करार दिया और हमले की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन ‘कश्मीर रेजिस्टेंस’ को ‘लिटिल नोन ग्रुप’ कहकर छोटा दिखाने की कोशिश की।

वाशिंगटन पोस्ट ने भी आतंकियों को ‘बंदूकधारी’ कहा और लिखा कि हमला ‘बिना किसी भेदभाव’ के किया गया, जबकि पीड़ितों ने साफ बताया कि हमला धर्म के आधार पर किया गया। वाशिंगटन पोस्ट ने यह भी लिखा कि भारत सरकार ने मुस्लिम बहुल इलाकों में असहमति को दबाने के लिए सख्त कार्रवाई की, जो इस हमले से ध्यान हटाने की कोशिश लगती है।

बीबीसी ने भी जम्मू कश्मीर को ‘भारत प्रशासित कश्मीर’ लिखा और आतंकवाद को ‘अलगाववादी विद्रोह’ कहकर हल्का करने की कोशिश की। बीबीसी ने यह भी दावा किया कि जम्मू कश्मीर में 5 लाख भारतीय सैनिक तैनात हैं, जो अतिशयोक्ति लगता है। बीबीसी ने आतंकियों को ‘चरमपंथी’ और ‘बंदूकधारी’ कहकर संबोधित किया। जर्मन मीडिया डीडब्ल्यू ने भी ‘भारत प्रशासित कश्मीर’ और ‘बंदूकधारी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।

यह पहली बार नहीं है जब वैश्विक मीडिया ने आतंकवाद को हल्का दिखाने की कोशिश की हो। भारत में आतंकवाद को लेकर पहले भी कई बार ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो आतंकियों का बचाव करते नजर आते हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान आतंकवाद को सही तरीके से पेश करने से पीछे हटते हैं और सिर्फ अपने हितों को ध्यान में रखकर काम करते हैं।

पहलगाम आतंकी हमले और गुजरात में पकड़े गए ₹21000 करोड़ के ड्रग्स के बीच कनेक्शन: हमले के लिए लश्कर जुटा रहा था फंडिंग, NIA ने सुप्रीम कोर्ट को बताया

राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) ने पहलगाम हमले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक बड़ा खुलासा किया है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने बताया है कि पहलगाम में जो आतंकी हमला हुआ है, उसका सीधा संबंध गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़े गए 21,000 करोड़ रुपए के ड्रग्स के जखीरे से है। एजेंसी ने सितंबर 2021 में तकरीबन 3,000 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी थी।

NIA ने कहा है कि पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT) नाम का आतंकी संगठन ड्रग्स बेचकर जेहाद के लिए पैसा जुटा रहा था। एजेंसी का कहना है कि लश्कर-ए-तैयबा उन पैसों का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा एवं अंजाम देने के लिए करना चाह रहा था। इसके साथ ही वह देश के युवाओं को नशे का आदी बनाकर भारत को कमजोर करना चाहता था।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट में कहा, “देखिए पहलगाम में उन्होंने (आतंकी) पर्यटकों के साथ क्या किया? उन्होंने मासूम पर्यटकों पर गोली चलाई।” उन्होंने आगे इस खेप के जरिए भी वह ऐसा ही करना चाह रहा था। पहले भी इसी तरह से ड्रग्स की खेप अफगानिस्तान से भारत लाई गई थी। यह खेप वैध कागजात के साथ लाया गया था, जिनमें टाल्क स्टोन होने की बात कही गई थी।

एनआईए का कहना है कि ड्रग्स बेचकर जो भी पैसा मिलता था, उसे दिल्ली के कुछ गोदामों में रखा जाता था और फिर वहाँ से एलईटी तक पहुँचाया जाता था। एनआईए ने साफ कहा कि यह भारत में पकड़ी गई ड्रग्स की सबसे बड़ी खेप है। एजेंसी ने हरप्रीत सिंह तलवार उर्फ कबीर तलवार नाम के एक व्यक्ति को भी इस ड्रग्स के धंधे में शामिल बताया है, जो फिलहाल जमानत माँग रहा है।

एनआईए ने कोर्ट में कहा है कि अफगानिस्तान में बैठे ड्रग्स तस्करों ने 2,999.2 किलोग्राम की बड़ी मात्रा में हेरोइन भारत भेजी थी। इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और ईरान के कुछ लोगों ने मदद की थी। इसकी कीमत 21,000 हजार करोड़ रुपए थी। इसे ईरान के रास्ते लाया गया था और टाल्क स्टोन बताकर मुंद्रा पोर्ट पर उतारा गया था।

एजेंसी ने यह भी कहा कि इस मामले में गवाह ने एक व्यक्ति ने बयान दिया था कि लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) के मारे गए गुर्गे लतीफ राथर ने उसे बताया था कि दिसंबर 2021 में मोहम्मद इकबाल अवान और अफगानिस्तान/पाकिस्तान स्थित ड्रग तस्करों ने उसके साथ कश्मीर मुद्दे, अनुच्छेद 370 पर चर्चा की थी।

उस गवाह ने NIA को आगे कहा था कि लतीफ ने अपने कोड नाम मलिक को हरियाणा के एक व्यक्ति से 10 और 15 लाख वसूलने के लिए दिल्ली/हरियाणा सीमा पर भेजा था। एजेंसी ने अदालत को बताया, “इस पैसे का इस्तेमाल लश्कर-ए-तैयबा के नए रंगरूटों के लिए हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए किया गया था।”

यूँ ही अडानी के पीछे नहीं पड़ा था हिंडनबर्ग, राहुल गाँधी के अंकल सैम पित्रोदा का हाथ होने का रिपोर्ट में दावा: मोसाद ने बिगाड़ दिया गेम, OpIndia ने भी इस नेक्सस को लेकर जताया था संदेह

भारतीय कारोबारी समूह अडानी ग्रुप के मुखिया की गौतम अडानी की मदद मोसाद और इजरायली प्रधानमन्त्री नेतन्याहू ने की थी। उन्होंने यह मदद अमेरिकी शोर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग के हमले के बाद की थी ताकि कारोबारी समूह इसका सामना कर सके।

इजरायल के जवाबी हमले के चलते ना सिर्फ अडानी समूह वापस बाजार में उभर कर वापस आया, बल्कि उसके ऊपर आरोप लगाने वाली हिंडनबर्ग रिसर्च पर ताला जड़ गया। यह सारी बातें हाल ही में सामने आई रिपोर्ट्स में खुली हैं। इन्हीं रिपोर्ट में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और सैम पित्रौदा का भी नाम है।

नेतन्याहू ने बढ़ाया मदद का हाथ

समाचार वेबसाइट स्पुतनिक इंडिया की एक रिपोर्ट में इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के अडानी को सहायता करने का जिक्र किया गया है। इस रिपोर्ट बताया गया है कि जनवरी, 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च के अडानी के खिलाफ आरोपों से भरी रिपोर्ट प्रकाशित की।

रिपोर्ट बताती है कि इसके एक सप्ताह बाद ही 31 जनवरी, 2023 को अडानी समूह ने इजरायल के हाइफा पोर्ट को खरीदा। इसी दौरान उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हुई। रिपोर्ट बताती है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अडानी से इस रिपोर्ट के विषय में पूछा, इसका जवाब में अडानी ने बताया कि रिपोर्ट झूठ है और इससे उनके व्यापार को कोई खतरा नहीं है।

स्पुतनिक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने लेकिन इस पर चिंता जताई और साफ़ कर दिया कि वह किसी भी ऐसे हमले को स्वीकार नहीं करेंगे। नेतन्याहू की चिंता के पीछे हाइफा पोर्ट की डील थी जो अडानी के साथ पूरी हुई थी, यह इजरायल के लिए काफी महत्वपूर्ण थी और इसे अडानी ने कई हजार करोड़ में खरीदा था।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के बारे में कहा, “हाँ, हम जानते हैं कि यह फर्जी है। लेकिन अगर आपको कोई खतरा नहीं दिखता है, तो भी हमें चिंतित होना चाहिए। अगर यह आपको कमजोर करता है, तो यह न केवल इस पोर्ट डील को बल्कि भारत के साथ मिलकर हमने जो कुछ भी अब तक हासिल किया है, उसे नुकसान पहुँचा सकता है।”

इसी मामले पर एक ऑनलीफैक्ट्स नाम की एक वेबसाइट ने भी एक बड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमे कमोबेश यही जानकारियाँ हैं। उसके अनुसार, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के इस वादे के बाद मोसाद ने एक ऑपरेशन चालू किया। यह ऑपरेशन मोसाद की ज़ोमेत और केशेत नाम की दो यूनिट ने चालू किया।

रिपोर्ट कहती है कि एक साइबर जबकि एक परम्परागत तरह से खुफिया ऑपरेशन करने में माहिर है। इसके बाद इन्होने अमेरिका से लेकर यूरोप और भारत तक जानकारी जुटाना चालू कर दिया। यह टीमें हिंडनबर्ग के ऑफिस तक पहुँचे।

ऑफिस हैक किया, सारी जानकारी निकाली

ऑनलीफैक्ट के अनुसार, मोसाद के एजेंट इसके बाद न्यूयॉर्क स्थित हिंडनबर्ग के दफ्तर पहुँचे। मोसाद के एजेंटों ने इसके बाद इस दफ्तर में आने-जाने वाले हर आदमी के बारे में जानकारी इकट्ठा की। उन्होंने यहाँ दरवाजों, दीवालों और बाकी जगह अपने खुफिया डिवाइस लगाए और सारी जानकारी इकट्ठा करना चालू किया।

रिपोर्ट बताती है कि इसके बाद उन्हें पता चला कि हिंडनबर्ग सिर्फ अकेले ही काम नहीं कर रही बल्कि उसकी मदद तमाम NGO, मीडिया, वकील और बाकी लोग कर रहे हैं। इस काम में कई ऐसे लोग भी जुड़े हुए थे, जिनको पैसा कमाना था। रिपोर्ट बताती है कि अडानी के खिलाफ इस हमले में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी भी शामिल थी।

इस खुलासे में बताया गया है कि मोसाद को हिंडनबर्ग की जाँच के दौरान अमेरिका के एक और पते के बारे में पता चला जो कि अडानी के खिलाफ शामिल था। स्पुतनिक की रिपोर्ट कहती है कि यह पता कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदा से जुड़ा हुआ था। वहीं ऑनलीफैक्ट की वेबसाइट बताती है कि इस पते का कम्यूटर भी हैक कर लिया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, हैक किए गए कम्यूटर से कई चौंकाने वाली जानकारियाँ मिली। बताया गया कि इसी कम्यूटर में अडानी को नुकसान पहुँचाने सम्बन्धी ईमेल मिले। यह भी पता चला कि इस साजिश में और भी कई लोग जुड़े थे जो भारत के थे। कई बड़े कारोबारी घराने भी इस कम में शामिल मिले।

अडानी ने वापस हिंडनबर्ग पर किया वार

यह सब पता चलने के बाद अडानी ने हिंडनबर्ग पर वार किया। इसके लिए मोसाद ने ‘ऑपरेशन जेपलिन’ लॉन्च किया। दरअसल, जेपलिन भी एक हवाई गुब्बारे का नाम था। इस ऑपरेशन के लिए अडानी से मोसाद के लोग स्विट्ज़रलैंड में मिले थे। यह मुलाक़ात जनवरी, 2024 में हुई थी।

अडानी को पता चला कि तीन अलग-अलग देशों में बैठे हुए शेयर मार्केट ऑपरेटर उनके खिलाफ गड़बड़ी कर रहे हैं। यह पता चला कि वह यह काम एक अमेरिकी फंड के लिए कर रहे थे जो कि चीन के भरोसे चल रही थी।

अडानी को सिर्फ यही नहीं पता चला, बल्कि उन्हें यह भी मालूम हुआ कि भारत के भीतर से भी कई प्रतिद्वंदी कारोबारी घराने भी उनके खिलाफ साजिश में शामिल हैं। यही नहीं, अडानी के खिलाफ एक राजनीतिक पार्टी के लोग भी शामिल थे, यह भी पता चला।

रिपोर्ट बताती है कि अडानी ने इसके बाद अहमदाबाद में एक अपनी टीम बिठाई। इसने इस बात की जाँच की कि कहाँ से उनके खिलाफ सूचनाएँ फैलाई जा रही हैं। इसके बाद अडानी ने अमेरिका में तब सत्ताधारी डेमोक्रेट पार्टी में भी खेमे ढूंढ लिए। उनका समर्थन उस खेमे ने किया जो चीन के खिलाफ थे।

अडानी ने अक्टूबर, 2024 तक 350+ पेज का एक डोजियर हिंडनबर्ग के खिलाफ बनाया। इसमें उनके खिलाफ साजिश करने वाले NGO, कारोबारी घराने, एक महिला नेता और पत्रकारों समेत बाकी के विषय में सबूत थे। यहाँ तक कि अडानी ने उन अख़बारों की भी जानकारी निकाली जो उनके खिलाफ प्रोपेगेंडा कर रहे थे।

रिपोर्ट कहती है कि इसके बाद कैसे अमेरिका, USAID और बाकी ने मिलकर अडानी पर हमला किया, यह बात फ्रांसीसी संस्थान मीडियापार्ट ने छाप दी। इसके बाद सच्चाई सामने आई।

हिंडनबर्ग को भी करवा दिया बंद

रिपोर्ट कहती है कि यह सब सामने आने के बीच अमेरिका बायडेन प्रशासन ने एक बार फिर अडानी को एक मुकदमे के माध्यम से पीछे धकेलने का प्रयास किया लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ा। यहाँ तक भारत ने खुले तौर पर अमेरिका की इस बीच आलोचना की।

अडानी समूह ने इसके बाद हिंडनबर्ग को कानूनी तौर पर चुनौती देने का फैसला किया। अडानी समूह ने हिंडनबर्ग के फाउंडर नाथन एंडरसन को एक 7 पन्ने का कानूनी नोटिस भेजा। इसमें उनके सारे कारनामों की लिस्ट थी और उस पर होने वाली कानूनी कार्रवाई के विषय में भी जानकारी थी।

इसके चलते एंडरसन को समझ आया कि उसने कहाँ हाथ डाला है। एंडरसन इसके बाद समझौते के लिए रास्ता ढूंढना लगा। उसने एक बार अडानी समूह से जुड़े एक व्यक्ति से भी मुलाकात की। रिपोर्ट कहती है कि एंडरसन ने इसके बाद हामी भरी कि वह हिंडनबर्ग पर ताला जड़ देंगे अगर अडानी उन पर मुकदमा ना करें।

यह समझौता हो गया और जनवरी, 2025 में हिंडनबर्ग ने अपना बोरिया बिस्तर समेटने का ऐलान कर दिया। इसे ऐसे दिखाया गया कि हिंडनबर्ग को नाथन अपने मन से बंद कर रहे हैं, लेकिन असल में यह अडानी के दबाव का कमाल था। इस बीच अमेरिका में सरकार भी बदल गई और ट्रम्प प्रशासन का रवैया अडानी के प्रति और नर्म था।

इस तरह कभी जो हिंडनबर्ग रिसर्च कहता था कि वह अडानी समूह पर ताला डलवाएगा, वह खुद ही 2 साल के भीतर बोरिया बिस्तर समेटने पर मजबूर हो गया। इसमें सबसे बड़ा किरदार रहा गौतम अडानी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का।

सैम-पित्रोदा के NGO और राहुल गाँधी के विदेशी दौरों को लेकर उठते रहे हैं सवाल

जैसे इस पूरे मामले में मोसाद ने सैम पित्रोदा को लेकर जो सन्देश जताया है, इसी तरह के सवाल उनके NGO की USAID से फंडिंग पर प्रश्न ऑपइंडिया ने उठाए थे। इसके अलावा राहुल गाँधी की विदेश यात्राओं और भारतीय हितों को नुकसान पहुँचाने के प्रयास सम्बन्धी बात भी ऑपइंडिया ने की थी।

मेरा नाम ‘भारत’ है… सुनते ही इस्लामी आतंकियों ने पत्नी और 3 साल के बेटे के सामने मार दी गोली, पहलगाम में सुशील की इसलिए हुई हत्या क्योंकि नहीं पढ़ पाए ‘कलमा’

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल 2025) को किया गया आतंकी हमला धर्म के नाम पर की गई थी। इस हमले में जान गँवाने वाले अधिकांश लोगों से धर्म पूछकर उनको गोली मारी गई थी। हमले में जान गँवाने वालों में भारत भूषण, सुशील नथानियल, नीरज उधवानी और दिनेश मिरानिया भी हैं, जिनसे आतंकियों ने धर्म पूछा, कलमा पढ़ने को कहा और फिर गोली मार दी।

बेंगलुरु के रहने वाले 35 वर्षीय ‘भारत भूषण’ को आतंकियों ने केवल ‘नाम’ सुनकर गोली मार दी। वे अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने के लिए कश्मीर गए थे। वहाँ आतंकियों ने उन्हें और उनके परिवार को घेर लिया और नाम पूछा। भारत भूषण का एक 3 साल का बेटा है, जो हमले के समय उनकी गोद में था। उन्होंने आतंकियों को बता, “मेरा नाम भारत है”।

फिर पूछा कि वह हिंदू है या मुस्लिम। इस पर भारत भूषण ने जवाब दिया कि वह हिंदू हैं। इसके बाद आतंकियों ने उनके गोद से बच्चे को पास में खड़ी पत्नी को सौंपने के लिए कहा और फिर उन्हें गोली मार दी। भारत भूषण की हत्या उनकी पत्नी डॉक्टर सुजाता और तीन साल के मासूम बेटे के सामने की गई। डॉक्टर सुजाता एक अस्पताल में बच्चों की डॉक्टर हैं।

पहलगाम आतंकी हमले में इंदौर के रहने वाले ईसाई परिवार के 58 वर्षीय सुशील नथानियल को भी गैर-मुस्लिम होने के कारण गोली मार दी गई। सुशील नथानियल LIC में कार्यरत थे। वे अपनी पत्नी जेनिफर, बेटी आकांक्षा और बेटे ऑस्टिन के साथ बैसरन में थे। परिजनों के मुताबिक, आतंकियों ने पहले उन्हें घुटनों पर बैठाया और फिर कलमा पढ़ने के लिए कहा।

हालाँकि, सुशील कलमा नहीं पढ़ पाए। इसके बाद आतंकियों ने उनसे उनका धर्म पूछा तो उन्होंने ईसाई बताया। इसके बाद आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। वहीं, पास में खड़ी उनकी बेटी आकांक्षा के पैर में भी गोली लग गई। इस दौरान सुशील की पत्नी जेनिफर भागने की कोशिश की और इसमें वह घायल हो गईं। बेटा ऑस्टिन भी फिलहाल सुरक्षित है।

राजस्थान के जयपुर के रहने वाले नीरज उधवानी को वहाँ अपनी जान गँवानी पड़ी। मालवीय नगर के मॉडल टाउन निवासी नीरज दुबई में चार्टर्ड एकाउंटेंट के तौर पर कार्यरत थे। वे अपनी पत्नी आयुषी के साथ शादी समारोह में शामिल होने के लिए शिमला आए हुए थे। शिमला में शादी अटेंड करने के बाद दोनों कश्मीर घूमने चले गए।

इस्लामी आतंकियों ने हमले के दौरान नीरज उधवानी से उनका परिचय पत्र (आई कार्ड) दिखाने के लिए कहा था। इसके बाद उनसे उनका धर्म पूछा गया। उन्हें भी गैर-मुस्लिम होने के कारण आतंकियों ने अपनी गोली का निशाना बना लिया। जानकारी के अनुसार, हमले के दौरान नीरज की पत्नी आयुषी होटल में थी। दोनों की दो साल पहले ही शादी हुई थी।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कारोबारी दिनेश मिरानिया को भी इस हमले में अपनी जान गँवानी पड़ी है। घटना के दिन दिनेश परिवार के साथ बैसरन घाटी पहुँचे। वे अपने बच्चों के साथ घूम ही रहे थे। इतने में वहाँ आतंकी आ गए लोगों की घेराबंदी कर ली। आतंकियों ने नाम जानने के बाद उनके पूछा कि ‘तेरा धर्म क्या है।’

जैसे ही उन्होंने अपना धर्म हिंदू बताया, आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। जिस दिन आतंकियों ने दिनेश की गोली मारकर हत्या की, उस दिन उनकी शादी की साल गिरह थी। दिनेश के चचरे भाई मनीष सिंघानिया ने बताया कि हमले के बाद उन्होंने फोन किया तो बच्चों ने बताया कि आतंकियों ने उनसे धर्म पूछकर और हिंदू सुनने पर गोली मार दी।

पहलगाम पहला नहीं, जब कश्मीर में इस्लामी आतंकियों ने हिंदुओं का किया कत्लेआम… हिंदू नरसंहार की ये 27 घटना आपको पता होनी चाहिए

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 22 अप्रैल 2025 को चुन-चुनकर हिंदुओं को निशाना बनाया। जिनके परिजनों को गोली लगी उन्होंने खुद कैमरे पर बताया कि आतंकी आए और नाम पूछकर गोलियाँ मारीं। जिन लोगों पर उन्हें थोड़ा भी संदेह हुआ उनसे उन्होंने कलमा पढ़वाया, पुष्टि करने के लिए हिंदुओं की पैंट उतरवाई गई, खतना देखा गया। जब उन्हें लगा कि अब ये सब करने का उनपर समय नहीं है तो उन्होंने अंदाजा लगाकर ये कहते हुए गोलियाँ चला दीं, ‘ये मुस्लिम नहीं लग रहा मारो गोली।’

धर्म पूछ-पूछकर पर्यटकों पर निर्ममता से मौत के घाट उतारने की जानकारी मीडिया में सामने आई तो पूरा देश दहल गया। जगह-जगह हिंदुओं की सुरक्षा पर दोबारा सवाल उठने लगे। लोग इस तरह सहमे कि उनके सामने 90 के दशक का कश्मीर घूमने लगा। वो कश्मीर जहाँ हिंदुओं का नरसंहार कोई नया हीं है। और न ही नया है इस्लामी कट्टरपंथ या उनका आतंक।

35 साल पहले भी कश्मीर ने ऐसा ही नरसंहार देखा था। फर्क बस इतना है आज कश्मीर घूमने गए हिंदुओं को निशाना बनाया गया है और उस समय स्थानीय हिंदुओं को चुन-चुनकर मारा गया था। आज मृतकों के नाम बीतन अधिकारी, समीर गुप्ता, मनीष रंजन, विनय नरवाल, शुभम द्विवेदी, प्रशांत कुमार सतपथी, एन रामचंद्रन, दिनेश अग्रवाल, भारत भूषण, जेएस चंद्रमौली, सुमित परमार समेत 28 लोग हैं। तब टीका लाल टपलू, नीककंठ गंजू, गिरिजा टिकू, पीएन कौन, एल गंजू नवीन सप्नू समेत तमाम नाम थे।

आज हम आपको 35 सालों में कश्मीर में घटी उन 25 घटनाओं का ही संक्षिप्ट विवरण देने जा रहे हैं जिनके कारण सैंकड़ों हिंदू घाटी से पलायन को मजबूर हुए।

  1. शुरुआत 1989 से हुई थी। घाटी में कश्मीरी पंडितों के सबसे बड़े और चहेते नेता टीका लाल टपलू थे। 14 सितंबर 1989 को आतंकियों ने उन्हें उस समय गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतारा था जब वह एक बच्ची को चुप कराने घर से निकले थे। इस हमले में उनका परिवार बच गया था क्योंकि घटना से 1 हफ्ता पहले दिल्ली आ गया था।
  2. दूसरी कहानी नीलकंठ गंजू की है। 4 नवंबर 1989 को जस्टिस नीलकंठ गंजू को दिनदहाड़े हाईकोर्ट के सामने मारा गया था। उनका गुनाह इतना था कि उन्होंने आतंकी मकबूल भट्ट को एक हत्या के बदले सजा ए मौत दी थी। इसी का बदला लेने के लिए जस्टिस नीलकंठ को मौत के घाट उतारा गया।
  3. गिरिजा टिकू वो अगला नाम हैं जिन्हें आतंकियों ने अपना निशाना बनाया था। वह एक स्कूल में नौकरी करती थीं और डर से जम्मू रहती थीं। एक दिन उन्हें पता चला कि स्थिति सामान्य हो गई है तो वह वापस अपनी सैलरी लेने बांदीपोरा गईं। लेकिन आतंकियों ने वहाँ उन्हें पकड़ा। उनका रेप किया और फिर उन्हें जिंदा ही उनके शरीर को आरी से दो हिस्सों में चीर दिया।
  4. 22 मार्च 1990 को अनंतनाग जिले के दुकानदार पी एन कौल के साथ ऐसी ही बर्बरता को अंजाम दिया गया। बताया जाता है कि पीएन कौल की चमड़ी जीवित अवस्था में शरीर से उतार दी गई थी और उन्हें मरने को छोड़ दिया गया था। तीन दिन जाकर उनकी लाश मिली थी।
  5. 7 मई 1990 को प्रोफेसर एल गंजू को पत्नी समेत आतंकियों ने मौत के घाट उतारा। मगर उससे पहले उनकी पत्नी से सामूहिक बलात्कार भी किया। बीके गंजू जो कि एक टेलीकॉम इंजीनियर थे और आतंकियों से बचने के लिए चावल के डिब्बे में घुसे थे। आतंकियों ने उन्हें पूरे घर में ढूँढा लेकिन वो कहीं नहीं मिले। बाद में जब आतंकी जाने लगे तभी बीच में कुछ पड़ोसियों ने चावल के डिब्बे की ओर इशारा कर दिया और आतंकियों ने उसी डिब्बे में उन्हें गोलियों से भून डाला। बाद में उनके खून से सना चावल उनकी पत्नी को खिलाया गया जिसका दृश्य कश्मीर फाइल्स में दिखाया गया है।
  6. अगली कहानी कृष्ण राजदान की है। कृष्ण को 12 फरवरी 1990 को बस में जाते हुए गोली मारी गई थी। इसके बाद उनका शरीर बस से निकाल कर बाहर किया गया था और लोगों से कहा गया था कि उन्हें लातों से मारें। पूरे शरीर को घसीट कर दिखाया गया था कि वे हिंदुओं का क्या हाल करने वाले हैं। 
  7. 24 फरवरी को अशोक कुमार के घुटनों में गोली मारी गई। फिर उनके बाल उखाड़े गए, उन पर थूका गया और फिर पेशाब किया गया। 
  8. नवीन सप्रू को भी घाटी में इसी तरह मारा गया और उनके तो मुख्य अंग में गोली मारकर उनके शरीर को जलाया गया था।
  9. 30 अप्रैल को कश्मीरी कवि सर्वानंद कौल को उनके बेटे वीरेंद्र कौल के साथ भी निर्ममता की हर हद पार कर दी गई। पहले विश्वास दिलाकर कट्टरपंथी उन्हें और उनके बेटे को अपने साथ ले गए। फिर दो दिन बाद जाकर उनकी लाश मिली। माथे पर की चमड़ी उधेड़ दी जा चुकी थी। सिगरेट से शरीर जला दिया गया था। हड्डियाँ टूटी हुई थी। आँखें निकाल ली गई थीं। इसके बाद उन्हें मारने के लिए गोली भी दागी गई थी।
  10. उन्हीं की तरह अशोक सूरी के भाई को भी पहले आतंकियों ने सिगरेट जलाकर खूब टॉर्चर किया था और बाद में कहा कि वो तो अशोक सूरी को मारना चाहते हैं जब भाई ने अधमरी अवस्था में अपने भाई को कश्मीर छोड़ने को कहा तो उन्होंने बात नहीं मानी। नतीजन आधीर रात आतंकी घर आए और धारधार हथियार से उनकी गर्दन काटकर चले गए।
  11. 26 जून 1990 को बीएल राना उस समय मौत के घाट उतारे गए जब वो अपने परिवार को लेने जा रहे थे। उनसे पहले 3 जून को आतंकियों ने उनके पिता दामोदर को मार डाला था।
  12. मुजू और दो अन्य कश्मीरी पंडितों के साथ तो ऐसी निर्ममता हुई कि उन्हें पहले खून देने के बहाने उठाया गया और फिर उनके शरीर का सारा खून निकालकर उन्हें तड़प कर मरने को छोड़ दिया गया।
  13. सोपोर के चुन्नी लाल शल्ला का भी खून बहाकर उन्हें मारा गया था। आतंकी पहले उनकी दाढ़ी देख उन्हें पहचान न सके। लेकिन तभी इंस्पेक्टर शल्ला के एक साथी सिपाही ने ही आतंकियों को बुलाया और उनके गाल की चमड़ी उतरवा उतरवा कर उन्हें तड़प कर मरने को छोड़ दिया।
  14. 28 अप्रैल 1990 को भूषण लाल रैना मारे गए। भूषण लाल अपनी माँ के साथ घाटी छोड़ने वाले थे। देर रात दोनों सामान बांध रहे थे कि तभी आतंकी आए और उनके सिर में नुकीली चीज घुसाकर उन्हें घर से बाहर खींच लिया। बाद में उन्हें नंगा करके शरीर में कील ठोंकी और जब तक दम नहीं थोड़ा तब तक तड़पाते रहे।
  15. इसके बाद 1998 को 23 कश्मीरी हिंदू मारे गए। वो उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो घाटी में हिंदुओं की वापसी की संभावना देखने वहाँ गए थे। इन सबकों एक आदेश पर रायफलों से मौत के घाट उतारा गया फिर इनके मंदिर तोड़े गए, घर में आग लगा दी गई।
  16. कश्मीरी पंडितों को मारने के क्रम में एक अमित नाम का नौजवान भी मारा गया था। उन्हें मारने का आतंकियों का प्लॉन नहीं था। उन्हें तो एक ऐसे शख्स को मारना था जो आतंकी बिट्टा कराटे को बचपन में पढ़ाई के पैसे देता। उन्हीं के धोखे में 26 साल का नौजवान बीच सड़क पर मार डाला गया था।
  17. इसी प्रकार कश्मीरी पंडितों पर हुए जुल्म की एक कहानी कश्मीरी महिला ने हाल में ‘ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे’  में शेयर की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे उनके घर के सामने भैरव मंदिर ध्वस्त कर दिया गया था और एक युवा बैंक कर्मचारी को सैंकड़ों लोगों के सामने मार दिया गया था। भीड़ ने अंतिम सांस लेने तक उस शरीर को मारा था और उस पर पेशाब भी किया था।
  18. इसी प्रकार पीड़िता मंजू को जहाँ कट्टरपंथियों ने दीवार से सटाकर पूरे शरीर पर हाथ फेरा था। वहीं मधुसूदन कौल थीं जिनकी एक हाथ की उंगली ही आतंकियों  की गोली से चली गई थी।
  19. एक पीड़ित ने बताया था कि कैसे उनके पिता को मारकर उनके शरीर को ईंट के साथ बाँधकर नदी में फेंक दिया गया था।
  20. अनुराधा नाम की महिला ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए कहा था कि कभी किसी ने अपने पिता को नंगा नहीं देखा होगा लेकिन उन्होंने देखा था। उनके पिता के शरीर में इतनी गोलियाँ दागीं गई थीं कि शरीर ढंग से पोस्टमार्टम के बाद सिला भी नहीं गया।
  21. इसी तरह रवींद्र पंडित ने हाल में बताया कि कैसे उनके पिता सरकारी नौकरी के कारण कश्मीर रहते थे और आतंकियों ने उन्हें उनके ही बाग में लेजाकर मारा था। पाकिस्तान जिंदाबाद न कहने पर उनके शरीर में कील ठोंकी गई थीं उन्हें कंटीली तार से फंदा बनाकर लटकाया था।
  22. द कश्मीर फाइल्स फिल्म बनने के क्रम में जो रिसर्च हुई उस बीच एक महिला ने पल्लवी जोशी बताया था कि कैसे उनके पिता को मार कर 15 टुकड़ों में काटा गया और फिर झेलम नदी में बहा दिया गया।
  23. अगली कहानी सतीश कुमार टिकू की है। टिकू को भी कश्मीरी पंडित होने के कारण मारा गया था। बिट्टा कराटे ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वो सतीश पंडित था और आरएसएस से जुड़ा था इसलिए उसे मारा था। कराटे वही आतंकी है जिसने 20 कश्मीरी हिंदुओं को मौत के घाट उतारा था।
  24. साल 2003 में दक्षिण कश्मीर के पुलवामा क्षेत्र के नदीमार्ग गाँव में 24 कश्मीरी पंडितों को  लाइन से मौत के घाट उतारा गया था। ये वो लोग थे जिन्होंने 90 के दशक में अपना घर छोड़ने से मना कर दिया था। मरने वालों में 70 साल की बुजुर्ग महिला और 2 साल का मासूम बच्चा भी था।
  25. इसी तरह हालिया हमलों की बात करें तो 2022 में भी कश्मीरी पंडितों को निशाना बनाया गया था। स्कूल में चुन-चुन कर इसी पैटर्न के साथ गैर-मुस्लिम शिक्षक निशाना बनाए गए थे।
  26. इससे पहले वहीं माखनलाल बिंदरू की भी गोली मार कर पिछले साल हत्या की गई थी।
  27. उससे पहले अनंतनाग में जिले के सरपंच अजय पंडिता को मौत के घाट उतारा गया था।

पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे, CM नीतीश कुमार का सख्त संदेश, बिहार को पहली नमो रैपिड रेल: बाबा विदेश्वर नाथ की भूमि से इस्लामी आतंक के खिलाफ उद्घोष

बिहार के मधुबनी जिले के झंझारपुर में गुरुवार (24 अप्रैल 2025) को आयोजित राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस की रैली में जबरदस्त जोश दिखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे ही मंच पर पहुँचे, भीड़ ने ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगाकर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया।

यह रैली पीएम मोदी की पहलगाम हमले के बाद पहली सार्वजनिक सभा थी। इस मौके पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आतंकवाद की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले की हम निंदा करते हैं। पूरा देश आतंक के खिलाफ एकजुट है।” नीतीश ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की।

पहलगाम हमले की गंभीरता को देखते हुए रैली को सादगी से आयोजित किया गया। न तो फूल-मालाओं से स्वागत हुआ, न ही कोई भव्य समारोह हुआ। पीएम मोदी ने अपने संबोधन से पहले दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने बिना पाकिस्तान का नाम लिए कहा, “यह नृशंस कृत्य था। पीएम उचित समय पर इसका जवाब देंगे।” रैली में एनडीए की एकजुटता भी दिखी, जहाँ बीजेपी, जेडीयू, लोजपा (रामविलास) और अन्य सहयोगी दलों के नेता मंच पर साथ नजर आए।

रैली में पीएम मोदी ने बिहार को कई सौगातें दीं। उन्होंने लगभग 13,500 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें गैस, बिजली और रेलवे से जुड़ी परियोजनाएँ शामिल हैं। गोपालगंज में 340 करोड़ की लागत से बनने वाले एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला रखी गई। सबसे खास रही नमो भारत रैपिड रेल और अमृत भारत एक्सप्रेस की शुरुआत। नमो भारत रैपिड रेल पटना, मधुबनी और जयनगर को जोड़ेगी, जिससे बिहार में तेज और आधुनिक रेल सुविधा मिलेगी। इसके अलावा सुपौल-पिपरा और हसनपुर-बिथान रेल लाइनों का उद्घाटन हुआ।

मधुबनी में बाबा विदेश्वर नाथ की भूमि पर आयोजित यह रैली आतंकवाद के खिलाफ देश की एकजुटता का प्रतीक भी बनी। यहाँ पीएम मोदी ने नीतीश कुमार को “लोकप्रिय मुख्यमंत्री और मित्र” कहकर उनकी तारीफ की।

पहलगाम में हमला करने आए 2 इस्लामी आतंकियों को विनय नरवाल ने दबोच लिया, लेकिन एक ने छूटकर सिर में मार दी गोली: हिमांशी ने सुनाई लेफ्टिनेंट पति की बहादुरी की कहानी

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में मारे गए नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल ने अंतिम समय में भी आतंकियों से लोहा लिया था। हालाँकि, अकेले होने के कारण आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी। विनय नरवाल की पत्नी हिमांशी ने घरवालों को फोन पर बताया था कि उनके पति विनय आतंकियों से लड़ते हुए बलिदान हुए हैं।

पहलगाम में हुए आतंकी हमले की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। विचलित करने वाली इस तस्वीर में दिखाई दे रहा है कि बैसरन में मौजूद घास के मैदान में एक व्यक्ति का शव पड़ा हुआ है। वह शव भारतीय नौसेना (नेवी) के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का था। पास में ही पत्नी हिमांशी गुमसुम बैठी है। दोनों की 16 अप्रैल 2025 को शादी हुई थी और 21 अप्रैल हनीमून मनाने जम्मू-कश्मीर आए थे।

हिमांशी का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें वह कहती हुई नजर आ रही हैं, “हम लोग भेलपुरी खाने लगे, तभी आतंकी आ गए और कहा कि मुस्लिम हो। हमने नहीं कहा तो गोली मार दी।” हिमांशी ने अपने घरवालों को फोन करके बताया था कि विनय ने हमले के दौरान दो आतंकियों को दबोच लिया था, लेकिन एक आतंकी ने जैसे-तैसे खुद को छुड़ा लिया और विनय के सिर में गोली मार दी।

हिमांशी ने परिजनों को बताया कि वे लोग होटल से घूमने के लिए निकले थे। पहलगाम की वादियों की सैर के दौरान एक जगह कुछ लोग नजर आए। आतंकियों ने वहाँ आते ही अपने-अपने हथियार निकाल लिए। इससे सारे लोग डर गए। इसके बाद आतंकियों ने लोगों से उनका नाम और धर्म पूछकर गोली मारनी शुरू कर दी।

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल 2025) को दोपहर करीब ढाई बजे आतंकियों ने पहलगाम के बैसरन घाटी इलाके में 28 पर्यटकों की हत्या कर दी। हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन टीआरएफ ने ली है। आतंकी हमले के बाद देश भर में ग़म का माहौल है। भारत ने साफ कहा है कि वह अपराधियों को किसी हाल में नहीं बख्शेगा।

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला उस क्षेत्र में हुआ, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है। यह इलाका पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है। इस घटना ने न केवल पीड़ित परिवारों को गहरा शोक पहुँचाया है, बल्कि पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। इस घटना ने कश्मीर के पर्यटन उद्योग पर भी एक गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

कल्पना से भी बड़ी सजा दूँगा, आतंकियों को मिट्टी में मिला दूँगा: पहलगाम अटैक पर PM मोदी का खुला ऐलान, मददगारों को भी खोज-खोजकर मारेगा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मधुबनी में आतंकियों और उनके आकाओं को कड़ी चेतावनी दी। पीएम मोदी ने कहा इस हमले में आतंकियों ने मासूम लोगों को जिस बेरहमी से मारा, उससे हर भारतीय दुखी और गुस्से में है। इस हमले में किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने भाई तो किसी ने अपना जीवनसाथी। करगिल से कन्याकुमारी तक पूरा देश इस दुख में एकजुट है और हमारा गुस्सा भी एक जैसा है।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा, “22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमला हुआ, जिससे पूरा देश व्यथित है। सभी पीड़ित परिवारों के दुख में पूरा देश उनके साथ खड़ा है। जिन परिवारजनों का अभी इलाज चल रहा है, वे जल्द स्वस्थ हों, इसके लिए भी सरकार हर प्रयास कर रही है।”

पीएम मोदी ने कहा, “मैं स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूँ कि जिन्होंने हमला किया है और जिन्होंने इसकी साजिश रची है, उन्हें उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी। सजा मिलकर रहेगी। मैं पूरी दुनिया को बिहार की धरती से कहता हूँ कि भारत हर आतंकी और उनके समर्थकों को ढूँढकर सजा देगा। हम उन्हें धरती के किसी भी कोने से खोज निकालेंगे। भारत की आत्मा को आतंकवाद से नहीं तोड़ा जा सकता। आतंकवाद को बख्शा नहीं जाएगा। हर आतंकी को ऐसी सजा दी जाएगी, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति आतंक आकाओं की कमर तोड़ कर रहेगी।”

पीएम ने उन देशों और उनके नेताओं का शुक्रिया अदा किया, जो इस मुश्किल वक्त में भारत के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा, “सभी पीड़ित परिवारों के दुख में पूरा देश साथ खड़ा है। इस हमले में किसी ने अपना बेटा, भाई, पति मारा गया। देश के दुश्मनों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है। जिन्होंने ये हमला किया है उन आतंकियों को, इस हमले की साजिश करने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी और मिलकर रहेगी। आतंक को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है।”

पीएम मोदी ने कहा, “मैं पूरी दुनिया को बिहार की धरती से कहता हूं कि भारत हर आतंकी और उनके समर्थकों को ढूँढकर सजा देगा। हम उन्हें धरती के किसी भी कोने से खोज निकालेंगे। भारत की आत्मा को आतंकवाद से नहीं तोड़ा जा सकता। आतंकवाद को बख्शा नहीं जाएगा। हर आतंकी को ऐसी सजा दी जाएगी, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति आतंक के आकाओं की कमर तोड़ देगी। सभी जो मानवता में विश्वास रखते हैं, वे हमारे साथ हैं। मैं उन देशों और उनके नेताओं का शुक्रिया अदा करता हूँ जो हमारे साथ खड़े हैं।”

पीएम ने आतंकवाद की जड़ें खत्म करने के लिए भारत के हर कदम उठाने का संकल्प जताया और कहा कि न्याय जरूर होगा। इसके साथ ही पीएम मोदी ने अपने भाषण में बिहार के विकास पर भी बात की। उन्होंने कहा कि गाँव मजबूत होंगे, तभी भारत मजबूत होगा। पूज्य बापू भी यही मानते थे कि गाँवों का विकास देश की तरक्की के लिए जरूरी है। पिछले एक दशक में पंचायतों को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। टेक्नोलॉजी के जरिए पंचायतों को सशक्त बनाया गया है। जमीनों के दस्तावेजों को डिजिटल करने से विवाद कम हो रहे हैं। 30 हजार नए पंचायत भवन भी बनाए गए।

इस दौरान बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पीएम का स्वागत किया और कहा कि केंद्र सरकार के नेतृत्व में बिहार में बहुत काम हुआ है। उन्होंने सड़क, बाढ़ नियंत्रण और स्वास्थ्य के लिए केंद्र की घोषणाओं का जिक्र किया। नीतीश कुमार ने मखाना बोर्ड के ऐलान की भी तारीफ की। पीएम मोदी ने इस मौके पर बिहार की 869 करोड़ की रेल परियोजनाओं का शुभारंभ किया और पीएम आवास योजना के तहत लोगों को घर की चाबियां सौंपीं।

जैसे हिंदू माँ-बहनों का सिंदूर उजाड़ा है, वैसे ही आतंकियों और उनके आकाओं का करेंगे सफाया: CM योगी, पहलगाम में जिसे पत्नी के सामने मारी गोली उसके परिजनों से मिले

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुस्सा प्रकट किया है। उन्होंने कहा है कि हिन्दू बहन-बेटियों का सिन्दूर उजाड़ा जाए, यह स्वीकार्य नहीं है। सीएम योगी ने यह बातें इस हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के घर पहुँच कर कही हैं। उन्हें आतंकियों ने पहलगाम में मार दिया था।

सीएम योगी ने कहा, “22 अप्रैल को कश्मीर के पहलगाम के अंदर हुए आतंकी हमले में कानपुर का एक परिवार प्रभावित हुआ है… यह एक क्रूर, वीभत्स और कायराना कृत्य है। इसकी देश और दुनिया के हर सभी समाज ने निंदा की है। यह घटना बताती है कि आतंक अपनी अंतिम सांस ले रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “जाति-धर्म पूछ कर हिन्दू बहन-बेटियों के सामने उनका सिन्दूर उजाड़ा जाए, यह कोई सभ्य समाज स्वीकार नहीं कर सकता। भारत में यह कतई स्वीकार्य नहीं है। भारत सरकार की आतंक के प्रति जीरो टोलरेंस की नीति रही है, उसी से इसका खात्मा होगा।”

उन्होंने कहा कि CCS बैठक में लिए गए निर्णयों से आतंक के खात्मे की शुरुआत हो चुकी है। सीएम योगी ने कहा कि पूरे भारत को इस दुखद घड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर विश्वास करना चाहिए। सीएम योगी ने कहा कि उन्होंने शुभम द्विवेदी के परिवार से उलाक्त कर संवेदना प्रकट की है।

सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि आतंकी छोड़े नहीं जाएँगे। उन्होंने कहा, “जिस तरीके से हिन्दू माँ-बहनों के सामने उनके सिन्दूर के साथ जो बर्बर कृत्य किया गया है, इसी प्रकार से आतंकियों और उनके आकाओं को इसकी सजा जरूर मिलेगी, इसमें कोई सन्देश किसी को नहीं होना चाहिए।”

सीएम योगी ने कहा है कि यह सरकार आतंकियों पर से मुकदमा वापस लेने वाली नहीं बल्कि उनका सफाया करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि इस घटना के परिणाम अब जो आएँगे, उसको पूरा देश देखेगा। सीएम योगी के साथ इस दौरान और कई बड़े नेता शुभम द्विवेदी के घर मौजूद रहे।

दो माह पहले हुई थी शुभम की शादी

12 फरवरी 2025 को शुभम का विवाह ऐशान्या के साथ हुआ था। शादी के बाद पूरे परिवार ने कश्मीर घूमने की योजना बनाई थी और 17 अप्रैल को वे सभी कश्मीर पहुँचे थे। जिस समय शुभम की हत्या की गई, उस समय वे पत्नी ऐशान्या के साथ घुड़सवारी करने के लिए ऊपर पहाड़ी पर निकले थे। वहीं, शुभम के पिता और अन्य परिजन नीचे ही ही रुक गए थे।

मृतक शुभम की पत्नी ऐशान्या ने बताया कि जब वे घुड़सवारी कर रहे थे, उसी समय हमलावर आए। आतंकियों ने उनसे उनका नाम पूछा और कलमा पढ़ने को कहा। इसके बाद आतंकियों ने उन्हें गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने आनन-फानन में उन्हें कश्मीर भेजा। कश्मीर के अस्पताल में शुभम की उपचार के दौरान मौत हो गई।