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गाँधी भी ख़ुद को बताते थे अंग्रेज वायसराय का ‘वफादार सेवक’: वीर सावरकर पर टिप्पणी को लेकर राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा – आपकी दादी भी करती थीं तारीफ़

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 अप्रैल, 2025) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। राहुल गाँधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान कहा था कि सावरकर अंग्रेजों के सहयोगी थे और उन्हें उनसे पेंशन मिलती थी।

इस पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और मनमोहन की पीठ ने नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे बयान स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के खिलाफ हैं और पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में राहुल गाँधी इस प्रकार के बयान देंगे, तो न्यायालय स्वतः संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई करेगा।

कोर्ट ने कहा, “हमारे स्वतंत्रता सेनानियों पर एक शब्द भी नहीं। उन्होंने हमें आज़ादी दिलाई और क्या हम उनके साथ ऐसा व्यवहार करेंगे?” कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि विवादास्पद बयानों के चलते मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी किए गए समन आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जाती है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि “क्या आपके मुवक्किल को पता है कि महात्मा गाँधी ने भी वायसराय को संबोधित करते समय ‘आपका वफादार सेवक’ शब्द का इस्तेमाल किया था? क्या आपके मुवक्किल को पता है कि उनकी दादी (इंदिरा गाँधी) जब प्रधानमंत्री थीं, तो उन्होंने भी स्वतंत्रता सेनानी सावरकर की प्रशंसा करते हुए एक पत्र भेजा था?”

पीठ ने राहुल गाँधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा, “क्या उन्हें ये बातें पता हैं? उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास और योगदान को समझे बिना इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए।” मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें राहुल गाँधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन को रद्द करने से इनकार किया गया था।

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि राहुल गाँधी को पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 के तहत सत्र न्यायालय में अपील करनी चाहिए थी। अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने नवंबर 2022 में राहुल गाँधी की टिप्पणी को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि गाँधी की टिप्पणियाँ समाज में नफरत फैलाने के इरादे से की गई थीं।

ट्रायल कोर्ट ने इन बयानों को प्रथम दृष्टया अपराध मानते हुए गाँधी को समन जारी किया था। बाद में कोर्ट ने गैर-हाजिर रहने पर उन पर 200 रुपए का जुर्माना भी लगाया। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने समन पर रोक लगाते हुए, यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में स्वतंत्रता सेनानियों पर कोई भी गैर-जिम्मेदाराना बयान अदालत की नजर में आएगा।

तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (25 अप्रैल 2025) को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी द्वारा स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर पर की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। राहुल गाँधी ने भारत जोड़ो यात्रा के दौरान कहा था कि सावरकर अंग्रेजों के सहयोगी थे और उन्हें उनसे पेंशन मिलती थी।

इस पर न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और मनमोहन की पीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे बयान स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के खिलाफ हैं और पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में राहुल गाँधी इस प्रकार के बयान देंगे, तो न्यायालय स्वतः संज्ञान लेते हुए उचित कार्रवाई करेगा।

कोर्ट ने कहा, “हमारे स्वतंत्रता सेनानियों पर एक शब्द भी नहीं। उन्होंने हमें आज़ादी दिलाई और क्या हम उनके साथ ऐसा व्यवहार करेंगे?” कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि विवादास्पद बयानों के चलते मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी किए गए समन आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जाती है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि “क्या आपके मुवक्किल को पता है कि महात्मा गाँधी ने भी वायसराय को संबोधित करते समय ‘आपका वफादार सेवक’ शब्द का इस्तेमाल किया था? क्या आपके मुवक्किल को पता है कि उनकी दादी (इंदिरा गाँधी) जब प्रधानमंत्री थीं, तो उन्होंने भी स्वतंत्रता सेनानी सावरकर की प्रशंसा करते हुए एक पत्र भेजा था?”

पीठ ने राहुल गाँधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा, “क्या उन्हें ये बातें पता हैं? उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के इतिहास और योगदान को समझे बिना इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना बयान नहीं देने चाहिए।” मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें राहुल गाँधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मजिस्ट्रेट कोर्ट द्वारा जारी समन को रद्द करने से इनकार किया गया था।

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि राहुल गाँधी को पहले दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-397 के तहत सत्र न्यायालय में अपील करनी चाहिए थी। अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने नवंबर 2022 में राहुल गाँधी की टिप्पणी को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि गाँधी की टिप्पणियाँ समाज में नफरत फैलाने के इरादे से की गई थीं। ट्रायल कोर्ट ने इन बयानों को प्रथम दृष्टया अपराध मानते हुए गाँधी को समन जारी किया था। बाद में कोर्ट ने गैर-हाजिर रहने पर उन पर 200 रुपए का जुर्माना भी लगाया।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने समन पर रोक लगते हुए, यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में स्वतंत्रता सेनानियों पर कोई भी गैर-जिम्मेदाराना बयान अदालत की नजर में आएगा। तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

‘नाले में फेंको हिंदू देवी-देवताओं की तस्वीर, ईसाई बनो’: राजस्थान के कोटा में हो रहा था 50+ लोगों का धर्मांतरण, पुलिस ने 1 विदेशी समेत 2 को दबोचा

राजस्थान के कोटा जिले के मोतीपुरा गाँव में ईसाई मिशनरी द्वारा 50 महिलाओं, बच्चों और पुरुषों का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा था । इतना ही नहीं हिन्दू देवी देवताओं की तस्वीरों को नाले में फेंकने की बात कह रहे थे। पुलिस ने इस मामले में ईसाई मिशनरी के जॉन मैथ्यू के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने, धमकाने और लालच देकर धर्मपरिवर्तन करवाने का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि जॉन मैथ्यू ने भील समाज के गरीबों को विदेश घुमने का मौका देने, घर बनाने और आर्थिक मदद देने का प्रलोभन दिया था। भील समाज के दो लोगों ने पुलिस को इसकी शिकायत की थी।

सोमवार (21 अप्रैल 2025) की रात बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने ईसाई प्रार्थना सभा में हंगामा किया। बजरंग दल के प्रांत संयोजक योगेश रेनवाल के मुताबिक ” सूचना मिली थी कि ईसाई मिशनरी जॉय मैथ्यू कुछ विदेशी नागरिकों के साथ हिंदुओं का धर्मांतरण करवा रहा है। जब वे मौके पर पहुँचे तो देखा कि ईसाई मिशनरी के साथ विदेशी नागरिकों में 3 बच्चे और पत्नी शामिल है। भील समाज के 50 लोगों को इकट्ठा करके हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर रहा है। भील समाज के लोगों में 50 महिलाएँ, बच्चें और पुरुष शामिल थे।”

वहीं भील समाज के लोगों ने बताया कि उनके गांव में जॉय मैथ्यू नाम का ईसाई मिशनरी का व्यक्ति रहता है। वहाँ उसका एक बड़ा प्लॉट है, जहाँ विश्राम घर बनाया हुआ है। ईसाई मिशनरी लोगों को राशन, पैसे देने की बात कहता है। कई लोगों के तो मकान भी बनवा कर दिए है। जॉय मैथ्यू लोगों से हिंदू देवी-देवताओं की फोटो नाले में फेंकने के लिए कहता है।

रेनवाल ने आरोप लगाया कि जॉय मैथ्यू उन लोगों से ईसाई प्रार्थना करवा रहा था और धर्मांतरण करके क्रॉस पहना रहा था। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस गतिविधि का विरोध किया और प्रार्थना सभा को तत्काल रोकने की माँग की, जिसके बाद हंगामा हुआ।

पुलिस ने बताया कि विदेशी नागरिकों में जॉय मैथ्यू का बेटी- दामाद और बच्चे हैं, जो टूरिस्ट वीजा पर अमेरिका से कोटा आए हैं। पुलिस ने मैथ्यू और उसके दामाद को हिरासत में ले लिया है।

पुलिस दामाद कॉलीन के खिलाफ विदेशी विषयक अधिनियम 1946 के तहत मामला दर्ज कर जाँच कर रही है। वहीं गाँव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान का शेयर बाजार धड़ाम, विकास दर भी लुढ़का: 1 दिन में ही भारत के एक्शन का दिखा असर, पड़ोसी मुल्क पर छाया भुखमरी का खतरा

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 28 लोगों की मौत के बाद भारत ने कई कड़े कदम उठाए हैं। इनमें से एक पाकिस्तान के साथ सन 1960 में हुई सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय भी शामिल है। इस कदम का पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था, जलविद्युत उत्पादन और पेयजल आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित होगी।

पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस कदम के बाद पाकिस्तान में महंगाई, खाद्य संकट, बिजली कटौती जैसी समस्याएँ और तेज़ हो जाएँगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, इन हालातों के चलते पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। पाकिस्तान के स्टॉक मार्केट लगातार इसकी झलक दे रहा है। वहाँ का बाजार भी क्रैश कर गया है।

वर्तमान स्थिति को देखकर अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक संगठनों ने भी पाकिस्तान की विकास दर को घटा दिया है। विश्व बैंक ने एक रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान के एक करोड़ लोग अब भूखमरी के कगार पर खड़़े हो गए हैं। उसने वर्तमान वित्त वर्ष के लिए पाकिस्तान के विकास दर को भी घटाकर 2.7 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले विश्व बैंक ने 2.8 प्रतिशत विकास दर का अनुमान लगाया था।

वहीं, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 22 अप्रैल 2025 को पाकिस्तान के विकास दर को घटाकर 2.6 कर दिया। लगभग तीन महीने पहले IMF ने पाकिस्तान की विकास के लिए 3 प्रतिशत का पूर्वानुमान लगाया था। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच ने पाकिस्तान से संरचनात्मक सुधारों के लिए कहा था, जो वर्तमान परिस्थिति में पाकिस्तान के असंभव दिख रहा है।

वाघा, हुसैनीवाला सहित तीन बॉर्डर बंद करने के भारत के फैसले से भी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान में रोजमर्रा के सामानों का भी अभाव हो जाएगा। इस बॉर्डर से छोटे व्यापारियों द्वारा बड़े पैमाने पर व्यापार किया जाता था। अटारी-वाघा क्रॉसिंग पर 2023-24 वित्तीय वर्ष में 38.86 अरब भारतीय रुपए का व्यापार हुआ था।

जल संकट और आर्थिक मंदी के कारण पाकिस्तान में खाद्य आपूर्ति बाधित हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, सिंधु जल संधि को निलंबित करने के कारण पाकिस्तान की कृृषि पर व्यापक एवं गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर ही आधारित है। ऐसे में भारत की कड़ी कार्रवाई के बाद पाकिस्तान का विकास दर और गिरने की संभावना है।

‘बार-बार मना करने के बावजूद जबरन ऊपर ले गए घोड़े वाले, तमाशा देख रहे थे कश्मीर पुलिस के जवान’: पहलगाम के मृतक के परिजनों ने सुनाया पूरा वाकया

पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के दुःख में पूरा देश गमगीन है। वहीं, दूसरी ओर इस हमले में शामिल और आतंकियों को नेस्तनाबूत करने की कार्रवाई भारतीय सशस्त्र बलों ने शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से कश्मीर घूमने गए शुभम द्विवेदी की मौत के बाद परिवार उनके शव के साथ कानपुर आया। उनकी पत्नी ऐशान्या समेत परिजनों को सांत्वना देने के लिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ भी पहुँचे।

सीएम योगी से मुलाकात करते ही ऐशान्या के सब्र का बाँध भी टूट गया। उन्होंने रोते-रोते सीएम को सारी घटना बताई। साथ ही उन्होंने कुछ ऐसी बातें भी कहीं जिसके बाद पहलगाम आतंकी हमले में कुछ स्थानीय स्लीपर सेल के शामिल होने की आशंका जताई जा रही है।

अमर उजाला‘ की रिपोर्ट के अनुसार, ऐशान्या ने बताया कि शुभम और वो घोड़े से ऊपर की ओर जा रहे थे। हालाँकि उन्हें दूर तक जाने का मन नहीं था। इसलिए घोड़ेवाले से ऊपर ले जाने से मना भी किया। ऐशान्या ने कहा कि वे लोग थक गए हैं और इससे ऊपर नहीं जाना चाहते। इसके बावजूद घोड़े वाले ने रुकना जरूरी नहीं समझा और कहा ऊपर तक तो चलना पड़ेगा। शुभम ने ये भी कहा कि चाहे तो पूरे पैसे ले लो पर हमें नीचे लेकर चलो। फिर भी घोड़े वाले ने उनकी बात नहीं मानी।

परिजनों ने भी सीएम को बताया कि पर्यटकों को टट्टू वाले ऊपर पहाड़ी पर बैठा के ले जा रहे थे। पर वे अपनी मर्जी से चल रहे थे। इसी तरह जब गोलियाँ चलने लगीं तो लोग इधर उधर भाग रहे थे। उस दौरान वहाँ पर तीन स्थानीय पुलिस कर्मी खड़े दिखाई पड़े थे। लेकिन उन्होंने किसी तरह की मदद नहीं की। लोग चिल्ला रहे थे कि उन्हें सुरक्षा दीजिए, कैंप तक ले चलिए लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नहीं की।

शुभम के पिता ने बताया कि पहलगाम के जिस होटल में वे लोग रुके थे वहाँ पर कुछ लोग थे जो पर्यटकों के निवास स्थान और उनकी संख्या आदि की पूछताछ कर रहे थे। इन सभी बातों से ऐसा लग रहा था कि वे लोग हमारी रेकी कर रहे थे।

परिजनों से मिलकर आने के बाद सीएम योगी ने मीडिया से कहा कि आतंकवाद का जड़ से सफाया होगा। शुभम के परिजनों से जो जानकारी मिली है उससे ऐसा लगता है कि वहाँ टट्टुओं से सफर कराने वालों समेत कुछ अन्य स्थानीय आतंकी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। इन सभी को मुँहतोड़ जवाब मिलेगा।

उधर एक अन्य महिला पर्यटक ने बताया कि एक घोड़े वाला बार-बार उनके डिटेल्स पूछ रहा था, कुरान को लेकर बोल रहा था। महिला पर्यटक ने ये भी बताया कि घोड़े वाला ये भी पूछ रहा था कि उनके साथ आए लोग हिन्दू हैं या मुस्लिम, महिला ने उसके इरादे भाँप लिए थे इसीलिए उसे बता दिया कि वो सब मुस्लिम हैं। साथ ही वो ये भी कह रहा था कि अभी अमरनाथ आइए तो वो बिना रजिस्ट्रेशन यात्रा करा देगा। महिला ने उसकी तस्वीर दिखाते हुए बताया कि उसने फोन निकाला, वो 35 बंदूकों की बात भी कर रहा था।

क्या है शिमला समझौता, कैसे इसके टूटते ही पाकिस्तान को घर में घुस कर मारने को स्वतंत्र हो जाएगा भारत: कारगिल में इसके कारण ही LOC पार नहीं गई सेना

कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन घाटी में मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को एक बड़ा आतंकी हमला हुआ। इसमें 26 भारतीय और दो विदेशी पर्यटकों की हत्या कर दी गई थी। हमले के बाद एक्शन लेते हुए भारत ने सिंधु जल समझौता स्थगित करने, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद करने, पाकिस्तानियों की तत्काल वापसी समेत पाँच बड़े फैसले ले लिए।

इन फैसलों से बौखलाया इस्लामी मुल्क़ पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई करने की कोशिश कर रहा है। इसीलिए, उसने आनन-फानन में शिमला समझौता रद्द करने की धमकी दे डाली। हालाँकि, ये धमकी महज एक गीदड़भभकी है। अगर पाकिस्तान ऐसा करता भी है तो फिर भारत भी पाकिस्तान को घर में घुसकर मरने को स्वतंत्र हो जाएगा, क्योंकि इसी समझौते का मान रखते हुए भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान LOC (लाइन ऑफ कन्ट्रोल) को पार नहीं किया था।

1972 में हुआ था शिमला समझौता

भारत पाकिस्तान के 1971 के युद्ध के बाद 2 जुलाई, 1972 को दोनो देशों के बीच शांति कायम करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और पाकिस्तान के पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसे शिमला समझौता कहा जाता है। इसका उद्देश्य भारत और पाकिस्तान के बीच शांति कायम करना और रिश्तों को सुधारना था। इसके तहत युद्ध विराम के समय की स्थिति के हिसाब से कश्मीर में LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) की व्यवस्था की गई, और दोनों देशों ने इसका सम्मान करने का वचन दिया।

इसके अलावा युद्ध में बंदी बनाए गए 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों को वापस उनके देश को सौंप दिया गया, और पाकिस्तानी से भारतीय सैनिक यहाँ वापस भेजे गए। व्यापार फिर से शुरू किया गया। इसी समझौते के तहत पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर स्वतंत्र मुल्क़ बांग्लादेश बन गया।

शिमला समझौते में कुछ बड़ी बातें तय की गईं। दोनों देशों ने तय किया कि हर विवाद को आपसी बातचीत के जरिए सुलझाया जाएगा। कश्मीर के मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नहीं ले जाया जाएगा। ये मसला भी दोनों देशों की आपसी बातचीत से हल होगा। नियंत्रण रेखा को कोई भी देश अकेले नहीं बदल सकेगा और दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ दुष्प्रचार, हिंसा और युद्ध नहीं करेंगे।

समझौता कायम रखने में नाकाम पाक

भले ही समझौते पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए हों लेकिन तय सीमाओं को सिर्फ भारत की ओर से ही निभाया गया। पाकिस्तान ने कई बार इस समझौते की खिल्ली उड़ाई। पाक ने 1999 में कारगिल में घुसपैठ से साथ ये समझौता ताक पर रख दिया। लागातार सीजफायर का उल्लंघन किया। कई बार अंतर्राष्ट्रीय मंच पर पाक ने कश्मीर का मुद्दा उठाया। विवाद सुलझाने के बजाए आतंकी संगठनों को पाला-पोसा और उनका सहारा लेकर भारत में अशांति फैलाई।

इसके बावजूद भारत ने शिमला समझौते का अब तक सम्मान किया और अपने दायरे में रहकर ही विरोध किया।

पाकिस्तान को उल्टा पड़ेगा दाँव

अब जब पाकिस्तान ने सामने से शिमला समझौता रद्द करने की धमकी दी है तो भारत के लिए कई मुद्दों पर अपनी राह को मंजिल तक पहुँचाने में आसानी होगी। भारत कभी भी कश्मीर मसले के अंतरराष्ट्रीयकरण का समर्थक नहीं रहा है और इसे द्विपक्षीय बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करता रहा है। शिमला समझौता रद्द करने की धमकी देने वाले पाकिस्तान UN से लेकर इस्लामी मुल्क़ों तक के मंच पर कश्मीर का रोना रोता रहा है।

अगर पाकिस्तान शिमला समझौते को रद्द करता है तो ये उसके लिए अपने ही पाँव पर कुल्हाड़ी मारने के समान होगा, क्योंकि इस समझौते का अबतक सम्मान करते आ रहे भारत के लिए भी तब LOC को पार करने में कोई मुश्किल नहीं होगी।

‘मेरे परिवार को कहे जा रहे अपशब्द, मेरे लिए देश पहले’: अरशद नदीम को आमंत्रण पर नीरज चोपड़ा की सफाई, बोले – पहलगाम हमले से मैं भी दुःखी

2020 के टोक्यो ओलंपिक में भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) में स्वर्ण पदक और 2024 के पेरिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी नीरज चोपड़ा ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद हो रही आलोचनाओं पर सफाई दी है। असल में भारतीय एथलीट ने ‘नीरज चोपड़ा क्लासिक्स’ आयोजन में पाकिस्तानी जेवलिन थ्रो खिलाड़ी अरशद नदीम को आमंत्रित किया था। इसके बाद उनकी आलोचना हो रही थी। पहलगाम आतंकी हमले में 28 निर्दोषों की जान गई है, जिसके बाद पूरे देश में शोक व आक्रोश का माहौल है।

नीरज चोपड़ा ने बयान जारी करके कहा कि वो सामान्यतः कम बोलते हैं, लेकिन इसका अर्थ ये नहीं है कि उन्हें कुछ गलत लगता है तो वो उसके विरुद्ध नहीं बोलेंगे – ख़ासकर के जब मामला उनके देशप्रेम पर सवाल उठाए जाने और परिवार के सम्मान व आदर की बात हो। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा आयोजित किए जा रहे टूर्नामेंट ‘NC क्लासिक्स’ में हिस्सा लेने के लिए अरशद नदीम को आमंत्रण भेजने के उनके फ़ैसले को लेकर काफ़ी कुछ कहा जा रहा है। नीरज चोपड़ा ने कहा कि आलोचना करते हुए उनके ख़िलाफ़ घृणा फैलाई जा रही है, उन्हें अपशब्द कहे जा रहे हैं।

उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि उनके द्वारा नीरज चोपड़ा को आमंत्रण भेजा जाना एक खिलाड़ी द्वारा दूसरे खिलाड़ी को आमंत्रण भर था – न इससे कुछ अधिक, न कम। नीरज चोपड़ा ने कहा कि उनलोगों ने उनके परिवार को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि ‘NC क्लासिक्स’ का उद्देश्य है कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी यहाँ आएँ और भारत विश्वस्तरीय खेल प्रतियोगिताओं का हब बने। उन्होंने बताया कि सोमवार (21 अप्रैल, 2025) को ही सभी खिलाड़ियों को आमंत्रण भेज दिया गया था, आतंकी हमले से 1 दिन पहले ही।

नीरज चोपड़ा ने कहा, “पिछले 48 घंटों में जो कुछ भी हुआ है, उसके बाद अरशद नदीम का नीरज चोपड़ा क्लासिक में शामिल होना पूरी तरह से असंभव था। मेरे लिए मेरा देश और उसके हित सबसे पहले हैं। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके लिए मेरी प्रार्थनाएँ और संवेदनाएँ हैं। आपके साथ, और पूरे देश के साथ, मैं भी जो घटना हुई है उसे लेकर दुःखी हूँ और गुस्से में हूँ। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारे देश की प्रतिक्रिया हमारी एकजुटता और ताक़त को दिखाएगी – एक राष्ट्र के रूप में, हम न्याय सुनिश्चित करेंगे।”

नीरज चोपड़ा ने कहा कि उन्होंने इतने वर्षों तक देश का प्रतिनिधत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया है, ऐसे में जब उनकी नीयत पर सवाल उठाई जाती है तो उन्हें तकलीफ होती है। उन्होंने ख़ुद को और अपने परिवार को बेवजह निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें दुःख हो रहा है कि सफाई देनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों ने जो ख़बरें फैलाई हैं, वो सिर्फ़ इसीलिए सच नहीं हो जातीं क्योंकि वो चुप रहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि वो और उनका परिवार बहुत साधारण हैं, उन्हें कुछ और न बनाया जाए।

साथ ही नीरज चोपड़ा ने इसपर भी आश्चर्य जताया कि लोग कैसे पाला बदल लेते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि जब उनकी सीधी-सादी माँ ने 1 वर्ष पूर्व एक मासूम टिप्पणी की थी तब उनके लिए तारीफों के ढेर लग गए थे। बता दें कि नीरज चोपड़ा की माँ ने कहा था कि अरशद नदीम भी उनके लिए बेटे की तरह ही है। नीरज चोपड़ा ने कहा कि आज वही लोग उसी टिप्पणी के लिए उनकी माँ को निशाना बना रहे हैं। नीरज चोपड़ा ने आश्वासन दिया कि वो और कड़ी मेहनत करेंगे, ताकि दुनिया भारत को याद रखे और इसे अच्छे सकारात्मक कारणों से गर्व व ईर्ष्या के भाव से देखे।

उधर अरशद नदीम ने नीरज चोपड़ा का आमंत्रण ठुकरा दिया है। असल में ‘एनसी क्लासिक्स’ का आयोजन 24 मई, 2025 को होना है, जबकि इससे 2 दिन पहले ही उन्हें एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए निकलना है। वो उस समय दक्षिण कोरिया में होंगे, ऐसे में भारत नहीं आ पाएँगे। 27 से 31 मई तक वहाँ इस टूर्नामेंट का आयोजन होना है। ‘NC क्लासिक्स’ बेंगलुरु में आयोजित हो रहा है, जिसमें 2 बार के विश्व चैंपियन एंडरसन पीटर्स, रियो 2016 ओलंपिक में गोल्ड मेडल अपने नाम करने वाले जर्मनी के थॉमस रोलर और 2015 वर्ल्ड कप चैंपियन केन्या के जूलियस यगो जैसे खिलाड़ी हिस्सा लेने आ रहे हैं।

अजमेर, ब्यावर के बाद अब भोपाल… ‘मुस्लिम गैंग’ ने हिंदू छात्राओं को फँसाकर किया रेप, वीडियो से ब्लैकमेल कर ऐंठे पैसे: इस्लाम कबूलने का बना रहे थे दबाव

मध्य प्रदेश के भोपाल में हिंदू लड़कियों के साथ रेप करने का मामला सामने आया है। पीड़िताओं का कहना है कि आरोपित लड़कों ने उन्हें अपना झूठा नाम बताकर प्रेम के जाल में फँसाया और फिर उनकी अश्लील वीडियोज बनाकर उन्हें पैसों और धर्मांतरण के लिए ब्लैकमेल करने लगे।

आरोपितों की पहचान फरहान खान, साहिल खान और अली खान के तौर पर हुई है। पुलिस ने इस मामले में 18 अप्रैल को केस दर्ज किया था, लेकिन मीडिया में ये लगभग एक हफ्ते बाद आया है। शिकायत में बताया गया है कि तीनों आरोपित उसी कॉलेज के MBA छात्र हैं जिससे पीड़िताएँ ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही थीं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे पहले फरहान खान ने अपने कॉलेज में ग्रेजुएशन कर रही छात्रा को फँसाया था। इसके बाद उसने पीड़िता के साथ संबंध बनाए और वीडियो में सब रिकॉर्ड करके उसे धमकाने लगा। आगे चलकर फरहान ने ही पीड़िता पर दबाव बनाया कि वो साहिल और अली से अपनी सहेलियों की दोस्ती करवाए।

जब डरकर पीड़िता ने ऐसा किया तो साहिल और अली ने बाकी दो लड़कियों को अलग-अलग जगह मिलने बुलाया और पहली मुलाकात में ही उनके साथ संबंध बनाकर उनकी वीडियो बना ली। इसके बाद तीनों आरोपित पीड़िताओं पर धर्म बदलने का दबाव डाल रहे थे और बार-बार निकाह करने को कह रहे थे।

इसके अलावा आरोपित कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं से आए दिन पैसे भी माँगते थे। जब ये डिमांड और ब्लैकमेलिंग ज्यादा बढ़ने लगी, तब एक पीड़िता ने पुलिस में शिकायत देने का निर्णय लिया। वह बागसेवनिया थाने पहुँची। उसने पुलिस को बताया कि उसकी दो अन्य सहेलियाँ भी इसी तरह से शिकार बनाई गई हैं।

पुलिस ने जाँच शुरू करने के दौरान उन दोनों लड़कियों की भी काउंसलिंग कराई और बाद में पूछताछ में दोनों पीड़िताओं ने बताया कि अली खान ने अशोका गार्डन के एक होटल में युवती के साथ संबंध बनाए थे और साहिल खान ने जहाँगीराबाद के एक कमरे में।

पुलिस ने पुलिस ने आगे की जाँच के लिए केस को अशोक गार्डन और जहाँगीराबाद थाने भेजा, जिसके बाद पुलिस ने फरहान खान और साहिल खान को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है जबकि अली खान की तलाश जारी है। इस केस के खुलने के बाद पुलिस को संदेह है कि जाँच में और खुलासे हो सकते हैं। तीन आरोपितों और तीन पीड़िताओं के अलावा केस में और भी पीड़िताओं का पता चल सकता है।

अभी तक की जाँच में पुलिस को फरहान के मोबाइल से कई अन्य लड़कियों की तस्वीरें मिली हैं। पुलिस ने बताया कि तीनों आरोपित मध्य प्रदेश से नहीं हैं। इनमें दो बंगाल के हैं। पुलिस इस मामले में हर एंगल से जाँच कर रही है। इस केस को रेप, पॉक्सो एक्ट समेत धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही निष्पक्ष जाँच के लिए SIT भी गठित की गई है।

बता दें कि कुछ समय पहले ऐसा ही पैटर्न अजमेर और ब्यावार से देखने को मिला था। उस समय भी मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू लड़कियों को इसी तरह निशाना बनाया गया था। आरोपित, स्कूल जाती पीड़िताओं को झाँसे में लेते थे, उनके साथ अश्लील हरकतें करते थे और फिर वीडियो वायरल करके उन्हें और प्रताड़ित करते थे।

पाकिस्तानी हिंदुओं को नहीं छोड़ना पड़ेगा भारत, विदेश मंत्रालय ने किया क्लियर- जारी रहेगा वीजा: ‘आतंकी मुल्क’ को पत्र लिख मोदी सरकार ने बताया- रोक रहे सिंधु जल समझौता

जम्मू कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार (22 अप्रैल, 2025) को हुए आतंकी हमले में 28 निर्दोष लोगों की जान चली गई। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सॉरी अरब दौरा बीच में छोड़कर भारत लौटना पड़ा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ख़ुद घटनास्थल पर पहुँचे। इसके बाद भारत ने CCS (कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी) की बैठक के बाद न केवल सिंधु जल समझौता को निलंबित कर दिया, बल्कि पाकिस्तानियों का वीजा भी रद्द कर दिया। साथ ही पाकिस्तान के रक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों को दूतावास छोड़ने का आदेश दिया गया। अटारी-वाघा सीमा को भी बंद कर दिया गया है।

अब भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीजा सेवा निलंबित किए जाने के संबंध में नया बयान जारी किया है। इसमें बताया गया है कि ये फ़ैसला ‘लॉन्ग टर्म वीजा’ पर आए लोगों पर लागू नहीं होता है। ये वो वीजा (LTV) हैं, जिन्हें उन पाकिस्तानी हिन्दू शरणार्थियों को दिया गया है जो प्रताड़ना के कारण भारत में आकर लंबे समय से रह रहे हैं। उन्हें देश नहीं छोड़ना होगा। बता दें कि पड़ोसी इस्लामी मुल्क़ों से प्रताड़ित हिन्दुओं के लिए CAA (नागरिकता संशोधन क़ानून) के तहत भारत की नागरिकता दिए जाने की भी व्यवस्था है। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर साफ़ किया कि पाकिस्तानी हिन्दुओं का वीजा रद्द नहीं होगा।

उधर जल शक्ति मंत्रालय के सचिव देवश्री मुखर्जी ने पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि हम सिंधु जल समझौते को निलंबित करते हैं। पत्र में कहा गया है कि पहले से अभी के समय में बहुत बुनियादी बदलाव आ गए हैं, जिनमें डेमोग्राफी परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने और जल बँटवारे को लेकर पहले जो सोच थी उसमें अब परिवर्तन आया है। पत्र में स्पष्ट लिख दिया गया है कि किसी भी संधि को निभाने के लिए भरोसे और ईमानदारी की ज़रूरत होती है, लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से पाकिस्तान ने सीमापार आतंकवाद को पोषित किया है, खासकर के जम्मू कश्मीर को निशाना बनाकर – उससे ये भरोसा टूटा है।

पत्र में आगे लिखा गया है, “सुरक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता की वजह से भारत अपने अधिकारों का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहा है, जो इस संधि के तहत उसे मिले थे। ऊपर से, जब भारत ने आपसे बातचीत का प्रस्ताव भी रखा, तो पाकिस्तान की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं आया। इन्हीं सब वजहों से भारत सरकार ने अब तय किया है कि Indus Water Treaty को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जा रहा है।”

इस्लामी आतंकवाद के खिलाफ देश एकजुट: पहलगाम अटैक पर सर्वदलीय बैठक का संदेश, पाकिस्तान पर मोदी सरकार के एक्शन का विपक्ष ने किया समर्थन

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हिंदुओं पर आतंकी हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ साफ है। हमले के बाद केंद्र की मोदी सरकार एक्शन मोड में आ गई है। गुरुवार (24 अप्रैल 2025) को दिल्ली में सर्वदलीय बैठक बुलाई गई, जिसमें कॉन्ग्रेस नेता राहुल गांधी समेत सभी विपक्षी दलों के नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में इस हमले की एकजुट होकर निंदा की गई और सभी नेताओं ने सरकार के हर कदम का समर्थन करने का भरोसा दिया।

बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि रक्षा मंत्री ने पहलगाम हमले और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) के फैसलों की जानकारी दी। रिजिजू ने कहा कि यह घटना बहुत दुखद है और पूरा देश चिंतित है। सरकार ने साफ कर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहे हैं। सभी नेताओं ने सरकार के अब तक के कदमों और भविष्य की कार्रवाइयों का समर्थन किया। भारत ने साफ कर दिया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता, सख्ती जारी रहेगी।

सरकार ने बताया कि पहलगाम रूट आमतौर पर जून में अमरनाथ यात्रा के लिए खोला जाता है, क्योंकि उस दौरान वहाँ तीर्थयात्री रुकते हैं। लेकिन इस बार स्थानीय टूर ऑपरेटर्स ने बिना प्रशासन को सूचित किए 20 अप्रैल 2025 से टूरिस्ट बुकिंग शुरू कर दी। इसकी वजह से वहाँ सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं हो पाई, जो हर साल जून में होती है। इस सुरक्षा चूक ने हमले का रास्ता आसान कर दिया। सरकार अब ऐसी लापरवाही रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।

पाकिस्तान ने भारत की कार्रवाइयों का जवाब देते हुए शिमला समझौता रद्द करने और अपने एयरस्पेस को बंद करने की गीदड़भभकी दी है। लेकिन भारत में सभी दल एकजुट होकर सरकार के साथ खड़े हैं और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम की माँग कर रहे हैं।

गीदड़भभकी पर उतरा भिखमंगा पाकिस्तान, कहा- पानी रोका तो इसे जंग मानेंगे, रद्द कर देंगे शिमला समझौता: चीन के भरोसे अब्दुल बासित ने बुने खून बहाने के ख्वाब

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में फिर तनाव बढ़ा दिया है। पहलगाम में हिंदुओं को निशाना बनाकर किए गए हमले के तार सीधे तौर पर पाकिस्तान से जुड़ रहे हैं। इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद किया और पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया। पाकिस्तान में इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। उसने जवाब में वाघा बॉर्डर और अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। साथ ही शिमला समझौते को रद्द करने और खून बहाने की गीदड़भभकी दे रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी (एनएससी) ने भारत के पानी रोकने के फैसले को युद्ध की कार्रवाई माना है। एनएससी का कहना है कि सिंधु नदी का पानी पाकिस्तान की 24 करोड़ जनता की जिंदगी की रीढ़ है। अगर भारत ने पानी रोका, तो इसे युद्ध माना जाएगा और पूरा दम लगाकर जवाब दिया जाएगा। बैठक में पाकिस्तान ने भारत के साथ सभी व्यापार बंद करने और भारतीय दूतावास के स्टाफ को 30 तक सीमित करने का भी ऐलान किया।

इस बीच, पाकिस्तान के पूर्व राजदूत अब्दुल बासित ने ‘एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ से कहा कि भारत जल्द ही सैन्य कार्रवाई कर सकता है। बासित ने 2016 के उरी और 2019 के पुलवामा हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत नियंत्रण रेखा पार हमला कर सकता है और आतंकी ठिकानों को नष्ट करने का दावा करेगा। बासित ने सिंधु जल संधि के निलंबन को ‘प्रतीकात्मक’ बताया, क्योंकि भारत के पास अभी पानी रोकने का ढाँचा नहीं है।

अब्दुल बासित ने डर जताया है कि बलूचिस्तान में आतंकी हमले बढ़ सकते हैं और पाकिस्तान को कानून-व्यवस्था की चुनौतियों के लिए तैयार रहना चाहिए। बासित ने यह भी कहा कि चीन इसमें पाकिस्तान का साथ दे सकता है।

पाकिस्तान की धमकियों के बावजूद भारत ने 20 देशों को हमले की जानकारी दी और साफ कहा कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, संधि निलंबित रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान अलग-थलग पड़ रहा है, लेकिन वह चीन के भरोसे गीदड़भभकी दे रहा है।