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12 साल की बच्ची, दरिंदा 65 साल का उस्मान… लेकिन न्यूजलॉन्ड्री के लिए नैनीताल रेप ‘लव अफेयर’ और ‘छोटी घटना’, भद्द पिटी तो माफी माँग Video हटाया

न्यूज़लॉन्ड्री ने शनिवार (3 मई, 2025) को अपने पॉडकास्ट ‘हफ्ता’ का 535वाँ एपिसोड जारी किया, जिसमें विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस और पहलगाम हमले पर चर्चा की गई। इस एपिसोड के दौरान पैनलिस्ट रमन किरपाल ने उत्तराखंड के नैनीताल में 65 वर्षीय साल के व्यक्ति मुहम्मद उस्मान द्वारा 12 वर्षीय लड़की के साथ हुए बलात्कार की घटना पर अपमानजनक टिप्पणी की।

उन्होंने इस गंभीर अपराध को ‘एक मुस्लिम लड़के और हिंदू लड़की के बीच प्रेम संबंध’ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की। उन्होंने दर्शकों के समक्ष इस घटना को कमतर आँकने का प्रयास किया। किरपाल ने यह भी कहा कि इस घटना के चलते मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है और दावा किया कि स्थानीय हिंदुओं ने केवल इसलिए हमला किया क्योंकि मामला एक मुस्लिम पुरुष और हिंदू लड़की के कथित संबंध से जुड़ा था। इस बयान ने कार्यक्रम की चर्चा को विवादास्पद बना दिया।

किरपाल ने इस घटना को ‘छोटी घटना’ बताते हुए कहा कि नैनीताल में एक लड़के और लड़की के बीच प्रेम प्रसंग या कोई अन्य समस्या थी, जिसके चलते हिंसा भड़क उठी – इसके बाद मुस्लिमों को निशाना बनाकर पीटा गया और शहर की कई प्रमुख दुकानों को जबरन बंद करवाया गया।

फिलहाल पूरा इलाका बंद है और माहौल तनावपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह हिंसा सीधे तौर पर मुस्लिमों के खिलाफ की गई है। किरपाल के इस बयान से अभिनंदन सेखरी और मनीषा पांडे ने सहमति जताई। उन्होंने आगे कहा, “इसीलिए, वे अलग-थलग पड़ गए हैं। और ये सभी घटनाएँ हो रही हैं, और मोदी ने कभी इसके बारे में बात नहीं की।”

हालाँकि, बाद में जब इस बयान ने विवाद का रूप ले लिया तब अपने बयान पर माफी माँगते हुए रमन किरपाल ने ‘X’ पर ट्वीट किया कि वो नैनीताल में नाबालिग के साथ यौन उत्पीड़न की घटना का वर्णन करते समय अनजाने में हुई गलती के लिए ईमानदारी से माफ़ी माँगना चाहते हैं। उन्होंने लिखा, “मुझे अपने शब्दों पर बहुत खेद है। एक संपादक और पत्रकार के रूप में, कोई भी बयान देने से पहले पूरी जानकारी लेना मेरी ज़िम्मेदारी थी।”

उन्होंने आगे लिखा, “हमने गलत वाक्य को हटाने के बाद वीडियो को फिर से अपलोड किया है। मैं फिर से ईमानदारी से माफ़ी माँगता हूँ।”

नैनीताल में 65 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति ने 12 वर्षीय नाबालिग हिंदू के साथ किया बलात्कार

यह घटना 12 अप्रैल, 2025 की है, जब पीड़िता कुछ सामान ख़रीदने के लिए स्थानीय बाजार गई थी। उसी दौरान आरोपित ने उसे 200 रुपए का लालच देकर अपने घर बुलाया और गैराज में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। घटना के बाद आरोपित ने उसे धमकाया कि वह इस बारे में किसी को कुछ न बताए। धमकी से डरकर पीड़िता ने यह बात अपने परिवार से भी छुपा ली।

पीड़ित लड़की ने अचानक से स्कूल जाना बंद कर दिया वही परिवार ने उसके व्यवहार में हो रहे बदलाव को भी देखा। उसने लोगों से बात करना बंद कर दिया, परिवार में किसी को उस घटना के बारे में भी नहीं बताया। इसके कुछ दिनों बाद दोनों बहनों ने स्कूल जाना बंद कर दिया और नानी ने उनका नाम स्कूल से कटवा दिया।

इसके बाद पीड़िता ने पूरी बात अपनी माँ को बताई, और उस्मान के खिलाफ मल्लीताल थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और POCSO अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ।

Newslaundry ने भी माँगी माफ़ी

वहीं ‘न्यूजलॉन्ड्री’ ने भी इस बयान को लेकर माफीनामा जारी किया है। मीडिया संस्थान ने अपने एडिटर-इन-चीफ के बयान पर खेद जताते हुए कहा कि यौन शोषण की इस घटना को ‘छोटा’ बताकर उन्होंने गलत किया, ये एक तथ्यात्मक गलती थी। उसने लिखा कि संपादकों को किसी भी घटना पर बोलने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी लेनी चाहिए। न्यूजलॉन्ड्री ने इस प्रकरण की पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि इस वीडियो के आपत्तिजनक हिस्से को हटाया जा रहा है।

न्यूजलॉन्ड्री ने अपनी भद्द पिटने के बाद कहा, “हम संवेदनशील और तथ्यपरक पत्रकारिता की आवश्यकता के पक्ष में हैं, विशेषकर उन स्थितियों में जहाँ गलत सूचना और सांप्रदायिक तनाव वास्तविक नुकसान पहुँचा सकते हैं।”

क्या भाँग खाकर सुप्रिया श्रीनेत ने पोस्ट किया था PM मोदी का ‘सर तन से जुदा’ वाला पोस्टर? कॉन्ग्रेस कवर करने वाली महिला पत्रकार के खुलासे से उठा सवाल

कॉन्ग्रेस पार्टी ने मंगलवार (29 अप्रैल, 2025) को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक ऐसी तस्वीर पोस्ट की, जिसमें उनका सिर कटा हुआ दिख रहा था। पीएम मोदी को हत्या की कई धमकियाँ मिल चुकी हैं, ऐसे में इस संवेदनहीन पोस्ट के लिए लोगों ने भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी को लताड़ लगाई। कॉन्ग्रेस पार्टी पर ‘सर तन से जुदा’ की इस्लामी कट्टरपंथी सोच को आगे बढ़ाने का आरोप लगा, वो भी ख़ासकर तब जब इसके एक सप्ताह पहले ही जम्मू कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने धर्म पूछकर 28 पर्यटकों की हत्या कर दी थी।

अब ‘लल्लनटॉप’ के एक शो में कॉन्ग्रेस की बीत कवर करने वाली ‘इंडिया टुडे’/आजतक की पत्रकार मौसमी सिंह ने सौरभ द्विवेदी से बातचीत करते हुए इस विषय पर ये तक कह डाला कि क्या भाँग खाकर कॉन्ग्रेस पार्टी के सोशल मीडिया हैंडलों पर पोस्ट की जाती है। मौसमी सिंह ने कहा कि किसी को भी हैरानी होगी कि ऐसी पोस्ट कॉन्ग्रेस पार्टी के हैंडल से कैसे आ सकती है। मौसमी सिंह ने बताया कि पार्टी का सोशल मीडिया डिपार्टमेंट सुप्रिया श्रीनेत हेड करती हैं।

उन्होंने आगे बताया, “मेरी सुप्रिया श्रीनेत से बहुत अच्छी बातचीत व तालमेल है, हम ख़बरों के लिए उन्हें फोन भी करते हैं। लेकिन, ये सच है कि डिलीट करने के लिए कहे जाने के बावजूद पूरे दिन इस पोस्ट को डिफेंड किया गया। जनरल सेक्रेटरी जयराम रमेश और मीडिया चेयरपर्सन पवन खेड़ा ने फोन करके पोस्ट डिलीट करने के लिए कई बार कहा। लेकिन, सुप्रिया श्रीनेत इसे जायज ठहराती रहीं और बतौर प्रवक्ता इसे डिफेंड किया। पार्टी की और भद्द पिटी, छीछालेदर हुई।”

मौसमी सिंह ने आगे बताया कि राहुल गाँधी की बातों के विपरीत कॉन्ग्रेस का एक पूरा डिपार्टमेंट चलता रहे, कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा वहाँ फोन कर कर के पूछा जाता रहा कि ये क्या हो रहा है। बकौल मौसमी, भाजपा के लिए ये खुला मौका था। इससे पहले छत्तीसगढ़ भाजपा यूनिट द्वारा पहलगाम हमले को लेकर किए गए पोस्ट ‘जाति नहीं, धर्म पूछा’ पर हंगामा हुआ था। मौसमी सिंह ने बताया कि पूरी कॉन्ग्रेस उस दौरान भाजपा के खिलाफ लामबंद हो गई थी और राजनीति करने का आरोप लगाया, लेकिन कुछ दिन बाद ख़ुद पार्टी ऐसा करने लगी।

मौसमी सिंह ने इस पोस्ट के बचाव में दिए गए तर्कों को भी हास्यास्पद बताते हुए कहा कि एक फिल्म के पोस्टर से इसे जोड़ा गया, जिसमें जींस-टाई पहने एक अभिनेता का पोस्टर था जबकि ये उससे मैच भी नहीं करता था। सुप्रिया श्रीनेत ने इसे डैमेजिंग पोस्ट बताते हुए कहा कि सच्ची में कुछ भाँग खाकर क्या सोशल मीडिया के लोग पोस्ट डालते हैं या उन्होंने पार्टी को ध्वस्त करने का ठेका ला रखा है। उस दौरान उन्होंने ये भी बताया कि रायबरेली दौरे पर गए राहुल गाँधी ने फोन करके कहा तब जाकर रात को ये पोस्ट डिलीट हुआ। राहुल गाँधी उस दौरान पहलगाम हमले में मारे गए शुभम द्विवेदी के परिजनों से मिलने गए थे।

योगी सरकार की नेपाल बॉर्डर पर फिर कार्रवाई, सील किए 80+ मदरसे: मस्जिदों पर भी एक्शन, पीलीभीत से लेकर सिद्धार्थनगर तक चल रहा बुलडोजर

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार राज्य की नेपाल सीमा पर अतिक्रमण और अवैध कब्जे को लगातार हटा रही है। नेपाल सीमा पर फिर कार्रवाई करते हुए योगी सरकार ने दर्जनों मदरसों को सील कर दिया है। कई मदरसों का कब्जा हटा भी दिया गया है, कुछ मस्जिदों पर भी कार्रवाई हुई है। यह कार्रवाई पीलीभीत जिले से लेकर सिद्धार्थ नगर तक हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, योगी सरकार ने नेपाल से सीमा साझा करने वाले जिलों के भीतर विशेष अभियान चला रखा है। इसके तहत नेपाल सीमा के 15 किलोमीटर के दायरे में अतिक्रमण को चिन्हित कर उसे सील किया जा रहा है। नोटिस देने के बावजूद कब्जा ना हटाने वालों पर बुलडोजर भी चल रहा है।

योगी सरकार के आदेश के बाद नेपाल से सीमा साझा करने वाले श्रावस्ती जिले में 68 मदरसे सील हो चुके हैं। प्रशासन ने इसके साथ ही 164 मदरसों से कब्जा खाली करवा लिया है। एक अवैध मजहबी स्थल के ऊपर भी कार्रवाई की गई है। कई मदरसों को लगातार नोटिस भी भेजे जा रहे हैं। यह सभी नेपाल सीमा से सटे हुए हैं।

इसके अलावा बलरामपुर जिले में 16 अवैध मदरसे बंद करवाए गए हैं। इसके अलावा 18 और भी मजहबी स्थल चिन्हित किए गए हैं। इन पर भी कार्रवाई की जा रही है। एक ईदगाह पर भी कार्रवाई जारी है। कई जगह पर बलरामपुर के भीतर बुलडोजर भी चला है।

सिद्धार्थनगर जिले में भी नेपाल सीमा से सटे इलाकों में अतिक्रमण पर कार्रवाई हो रही है। सिद्धार्थनगर में 17 अवैध मदरसे चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा 4 अवैध मजहबी स्थल भी चिन्हित किए गए हैं। इन पर भी कार्रवाई जारी है। बहराइच में भी 6 मदरसे सील किए गए हैं जबकि 384 अतिक्रमण के मामले चिन्हित किए गए हैं।

योगी सरकार ने महाराजगंज में अवैध मिले 34 मदरसों को नोटिस भेज दिया है और 2 पर बुलडोजर भी चला दिया है। पीलीभीत में भी 7 मदरसों को नोटिस योगी सरकार ने भेज दिया है। यहाँ 77 अवैध मजहबी स्थलों को भी चिन्हित किया गया है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की लम्बी सीमा नेपाल से लगती है। यहाँ के सीमाई इलाकों में बीते वर्षों में तेजी से मस्जिद-मदरसे उगे हैं। इनमें से तमाम अवैध तरीके से कब्ज़ा कर बनाए गए हैं। कई जगह गाँवों की डेमोग्राफी तक बदल गई है। ऑपइंडिया ने भी इस विषय में अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में यहाँ की भयावहता को बताया था। अब इस मामले में एक्शन देखने को मिल रहा है।

भारत ने बगलिहार बाँध से चिनाब का रोका पानी, पहलगाम अटैक के बाद तोड़ दी थी पाकिस्तान से सिंधु जल संधि: किशनगंगा से झेलम का प्रवाह रोकने की भी योजना

पाकिस्तान को सबक सिखाने की शुरुआत हो चुकी है! जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 26 हिंदू पर्यटकों के नृशंस नरसंहार के बाद भारत ने पड़ोसी मुल्क की नकेल कसना शुरू कर दिया है। सीमा पर दोनों देशों की सेनाएँ आमने-सामने हैं, और भारत ने अपनी सेना को खुली छूट दे दी है। लेकिन यह केवल सैन्य मोर्चे की बात नहीं है; भारत ने पानी के मोर्चे पर भी पाकिस्तान को करारा झटका दिया है। चेनाब नदी पर बने बगलिहार डैम के फाटक बंद कर दिए गए हैं, जिससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पानी की भारी किल्लत होने वाली है।

यह कदम सिंधु जल संधि को तोड़ने के महज 10 दिनों बाद उठाया गया है, जिसे विश्व बैंक की मध्यस्थता में 1960 में लागू किया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बगलिहार डैम, जो रन-ऑफ-द-रिवर हाइड्रो पावर प्लांट के रूप में बनाया गया था, अब पानी के प्रवाह को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले इस डैम से बिना रुकावट पानी बहता था और बिजली पैदा की जाती थी, लेकिन अब भारत ने इसे हथियार बना लिया है। चेनाब नदी का पानी पाकिस्तान के पंजाब में खेतों की सिंचाई के लिए जीवन रेखा है। इस कदम से वहाँ की कृषि और अर्थव्यवस्था को गहरा नुकसान होगा।

इतना ही नहीं, भारत अब झेलम नदी पर बने किशनगंगा डैम के जरिए भी पानी रोकने की तैयारी कर रहा है। इन डैमों से भारत पानी के प्रवाह को नियंत्रित कर सकता है, यानी बिना चेतावनी के पानी कम या ज्यादा कर सकता है, जो पाकिस्तान के लिए तबाही ला सकता है।

बता दें कि सिंधु जल संधि के तहत छह नदियों का बँटवारा हुआ था। पूर्वी नदियाँ (सतलुज, ब्यास, रवि) भारत को और पश्चिमी नदियाँ (सिंधु, चेनाब, झेलम) पाकिस्तान को मिली थीं। लेकिन भारत में लंबे समय से इस संधि पर सवाल उठते रहे हैं। कई लोग मानते हैं कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसमें जरूरत से ज्यादा उदारता दिखाई। 1965, 1971 और 1999 की जंगों में भी भारत ने यह संधि नहीं तोड़ी, लेकिन इस बार पाकिस्तान की आतंकी हरकतों का जवाब देने के लिए भारत ने कड़ा रुख अपनाया है।

पहलगाम हमले के बाद संधि को निलंबित कर चेनाब का पानी रोकना भारत का कूटनीतिक और रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक है। पाकिस्तान, जो अपनी 80% कृषि के लिए सिंधु नदी सिस्टम पर निर्भर है, अब जंग की धमकी दे रहा है। लेकिन भारत का यह वाटर अटैक तो बस शुरुआत है, आगे और सबक सिखाए जाएँगे!

जहर खाकर मर गई एक और हिंदू बेटी… कॉलेज जाती तो रोककर छेड़खानी करता था रिजवान-भेजता था गंदे मैसेज: पुलिस से शिकायत करने पर कहा- तुम्हारे पूरे परिवार को मार डालूँगा

उत्तर प्रदेश के इटावा में एक हिन्दू छात्रा ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा रिजवान नाम के युवक की प्रताड़ना से परेशान हो गई थी। छात्रा के पुलिस के पास शिकायत करने के बाद रिजवान ने उसे घर जाकर धमकाया भी। इससे तंग आकर पीड़िता ने अपनी जान ले ली। पुलिस ने अब इस विषय में FIR दर्ज कर रिजवान और उसके भाई को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना इटावा के ऊसराहार थाना क्षेत्र के एक गाँव की है। यहाँ एक 19 वर्षीय छात्रा में बीएससी सेकेंड इयर में पढ़ती थी। उसके पिता और भाई दिल्ली में नौकरी करते हैं। घर पर माँ और बेटी ही रहती थीं। 25 अप्रैल 2025 को छात्रा के भाई और पिता गाँव पहुँचे।

तब पीड़िता ने खुद पर बीती परेशानी की जानकारी दी। छात्रा के भाई ने बताया कि 24 अप्रैल 2025 को रिजवान ने बहन को धमकी दी थी कि तुम्हारे पूरे परिवार को मार देंगे। बहन ने पिता को सूचना दी, जिसके बाद रिजवान के परिजनों से शिकायत की। लेकिन उसके परिवार वाले पिता को ही धमकाने लगे।

26 अप्रैल 2025 को छात्रा के पिता ने थाने में रिजवान और उसके दो साथियों के खिलाफ तहरीर दी। पिता ने तहरीर में बताया, “रिजवान आए दिन मेरी बेटी के मोबाइल पर अश्लील मैसेज भेजता है। जबरदस्ती मिलने के लिए बुलाता है। इनकार करने पर भाई को मारने की धमकी भी देता है। बेटी साइकिल से कॉलेज जाती है तो रास्ते में रोककर उसके साथ छेड़खानी करता है।”

छात्रा के भाई ने कहा कि पुलिस से शिकायत के बाद रिजवान बहन को धमकाने के लिए घर तक पहुँच गया। जिससे परेशान होकर बहन ने 26 अप्रैल 2025 की रात को जहर खाकर जान दे दी। छात्रा की मौत के बाद गाँव में तनाव का माहौल है। इसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज की और रिजवान तथा उसके भाई सलमान को गिरफ्तार कर लिया।

शनिवार (03 अप्रैल 2025)को शव गाँव पहुँचते ही ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन शुरु किया। ग्रामीणों ने घटना के बाद थानाध्यक्ष मंसूर अहमद के खिलाफ कार्रवाई प्रदर्शन किया है और कार्रवाई की माँग की है। हिंदू संगठन भी मामले को लेकर आक्रोश में हैं।

पीड़िता का अंतिम संस्कार करवाया गया है। वहीं लापरवाही बरतने के चलते मंसूर अहमद को लाइन हाजिर कर दिया गया है। इलाके में तनाव के चलते भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

‘दत्तात्रेय गोत्री-कौल ब्राह्मण’ राहुल गाँधी नहीं रहे हिंदू, शंकराचार्य ने किया बहिष्कृत: बोले अविमुक्तेश्वरानंद- मनुस्मृति को नहीं मानने वाला हमारे धर्म का नहीं, मंदिरों में न मिले प्रवेश

उत्तराखंड के रुद्रप्रायग स्थित ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने राहुल गाँधी को हिन्दू धर्म से निष्कासित किए जाने का ऐलान किया है। संसद में मनुस्मृति के विरुद्ध दिए गए उनके बयान के कारण शंकराचार्य ने ये ऐलान किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज में महाकुंभ हो रहा था और धर्म-संसद में सनातनधर्मियों के प्रश्न आते थे जिनका जवाब सभासदों द्वारा दिया जाता था। उसी दौरान राहुल गाँधी को लेकर प्रश्न आया था। बकौल अविमुक्तेश्वरानंद, राहुल गाँधी ने कहा था कि बलात्कारी बाहर घूम रहे हैं और पीड़िता बिटिया अंदर रहने को मजबूर हैं।

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि घटना पर चर्चा से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है और पीड़िता को पीड़ा को समझकर संसद में उठाना अच्छी बात है और संवेदनशील व्यक्ति इसे लेकर प्रश्न उठाएगा। हालाँकि, उन्होंने आगे कहा कि राहुल गाँधी ने इस पीड़ा को व्यक्त करते हुए आगे कहा कि बलात्कारी को संरक्षण देना हमारे संविधान में नहीं लिखा है, फिर उन्होंने सत्तापक्ष की तरफ उँगली दिखाकर कहा कि ‘तुम्हारी किताब’ में ऐसा लिखा है। शंकराचार्य ने पूछा कि वो किताब कौन सी है?

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “राहुल गाँधी ने अगले वाक्य में ख़ुद साफ़ कर दिया कि मनुस्मृति में ऐसा लिखा है। मनुस्मृति इस संसार का पहला संविधान है, हम हिन्दू इसे मानते हैं। उससे ही प्रेरणा लेकर कई संविधान रचे गए, हम आज भी उसके अनुसार अपना जीवन चलाते हैं। इसकी किसी बात से आप सहमत न हो सकते हैं या हो सकता है कि कुछ आपको समझ में न आ रहा हो या परिस्थितियों में बदलाव के कारण कोई बात आपको अच्छी नहीं लग रही हो और आप कहें कि आप इसे नहीं मान पा रहे हैं।”

अविमुक्तेश्वरानंद ने मनुस्मृति को आक्षेप करने का विरोध करते हुए कहा कि राहुल गाँधी के बयान से साफ़ हो गया कि राहुल गाँधी इसे अपनी किताब नहीं मानते, अगर वो हिन्दू होते तो इसे अपनी किताब मानते। अविमुक्तेश्वरानंद ने सभी 18 स्मृतियों को हिन्दुओं की किताब बताते हुए इन्हें धर्मशास्त्र करार दिया। उन्होंने कहा कि जो मनुस्मृति को अपनी किताब नहीं मानता वो हिन्दू नहीं हो सकता, उनके हिन्दू होने में समस्या है। शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि राहुल गाँधी को हिन्दू धर्म का न माना जाए और मंदिरों में प्रवेश न दिया जाए।

याद दिला दें कि राहुल गाँधी ने दिसंबर 2024 में कहा था कि भाजपा के लिए संविधान से ऊपर मनुस्मृति है। वहीं पिछले साल राजद की प्रवक्ता प्रियंका भारती द्वारा ‘इंडिया टीवी’ के एक शो में मनुस्मृति के पन्ने फाड़ने के बाद इसे लेकर विवाद हो गया था। इसे दलित विरोधी पुस्तक बताया गया, जबकि डॉ आंबेडकर ने संविधान निर्माण के दौरान मनु महाराज द्वारा महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिए जाने की प्रशंसा की थी। इस विवाद के बाद मनुस्मृति की बिक्री भी बंपर तरीके से बढ़ गई थी।

त्रिपुरा के रेलवे स्टेशन पर धड़ाधड़ पकड़े जा रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए, आखिर ये घुसते कैसे हैं: गिरफ्तारी के बाद इनका क्या होता है?

उत्तरपूर्व का राज्य बीते कई दशकों से अवैध घुसपैठ का दंश झेलता रहा है। यह घुसपैठ पिछले डेढ़ वर्षो में तेजी से बढ़ी है। घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुस्लिम और बांग्लादेशी नागरिक हैं जो भारत और बांग्लादेश के बीच कई जगह पर खुली सीमा का फायदा यह घुसपैठिए उठाते हैं।

अगस्त, 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद से यह स्थिति और भी बिगड़ी है। इस्लामी हिंसा के बाद बांग्लादेश की सत्ता पर कब्जा जमाने वाले ‘मुख्य सलाहकार’ मोहम्मद यूनुस की देखरेख में अब वहाँ इस्लामी कट्टरपंथ को बढ़ावा मिल रहा है। इस बीच बांग्लादेश के हालात खराब हो रहे हैं, इसके चलते बड़ी संख्या में घुसपैठिए भारत आते हैं।

लेकिन इस बीच त्रिपुरा में घुसपैठियों पर लगातार एक्शन चल रहा है। त्रिपुरा पुलिस की ओर से साझा किए गए एक डाटा के अनुसार, 1 जनवरी 2024 से 28 फरवरी 2025 के बीच त्रिपुरा में 816 बांग्लादेशी और 79 रोहिंग्या मुस्लिम अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते हुए पकड़े गए।

त्रिपुरा पुलिस ने बताया कि अगस्त, 2025 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद 483 अवैध घुसपैठिए त्रिपुरा में घुसे। इसके अलावा त्रिपुरा के अगरतला और बाकी रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में बांगलादेशी घुसपैठिए देश के अलग-अलग हिस्सों के लिए जाने की तैयारी करते हुए गिरफ्तार हुए हैं।

इन सब संकेतों से है कि बांग्लादेशी घुसपैठिए और रोहिंग्या हमारे देश में आने के लिए त्रिपुरा को अपना एंट्री पॉइंट बना रहे हैं और फिर यहाँ से बड़े मेट्रोपोलिटन शहरों में पहुँच रहे हैं। त्रिपुरा में घुसने के बाद इनका अगला लक्ष्य पुणे, दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे शहरों को जाना होता है।

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की ओर से प्रकाशित हुई एक रिसर्च रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई जिसमें अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं के देश की राजधानी दिल्ली में भी सामाजिक-आर्थिक प्रभाव पर अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में रोहिंग्या घुसपैठियों और अवैध बांग्लादेशियों के रहने की जगहों पर भी रिपोर्ट तैयार की गई है।

दिल्ली पहुँचे से पहले अवैध घुसपैठियों के एंट्री प्वाइंट

इस सूची में त्रिपुरा तीसरे स्थान पर है, जिसमें बताया गया है कि 8.7 प्रतिशत घुसपैठिये दिल्ली तक पहुँचने के लिए इस पूर्वोत्तर राज्य का इस्तेमाल करते हैं। 2016 के अनुमान के अनुसार, भारत में दो करोड़ से भी अधिक बांग्लादेशी घुसपैठिए रह रहे हैं।

त्रिपुरा ने घुसपैठियों को पकड़ने के लिए बनाई MTF

त्रिपुरा में अवैध घुसपैठियों को पकड़ने के लिए एक विशेष ‘मोबाइल टास्क फोर्स’ (एमटीएफ) बनाई गई है। इसे पहली बार 1970 में बनाया गया था। तब यह हर जिले के एसपी की निगरानी में बनाई गई थी। 5 वर्ष बाद, 1975 में ‘मोबाइल टास्क फोर्स’ को एक अलग यूनिट के तौर पर घुसपैठियों को गिरफ्तार करने के लिए स्थापित किया गया।

मोबाइल टास्क फोर्स के उद्देश्य है-

  1. घुसपैठियों की पहचान करना।
  2. अवैध घुसपैठियों पर मुकदमे दायर करना।
  3. भारत में आए बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजना।
  4. प्रत्येक व्यक्ति की नागरिकता के बारे में जाँच करना।
  5. संदिग्ध नागरिकता का सर्टिफिकेट लिए लोगों के बारे में जाँच करना।
  6. देश के अंदर किसी भी तरह की मजहबी कट्टरवाद या देश- विरोधी गतिविधियों में बांग्लादेशियो की मौजूदगी की जाँच करना।
  7. सीमा पार होने वाले अपराधों की जानकारी एकत्र करना।

‘मोबाइल टास्क फोर्स’ का संचालन त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), केंद्रीय गृह मंत्रालय और त्रिपुरा के गृह एवं राजनीतिक विभाग से मिले निर्देशों के आधार पर किया जाता है। इस बात पर गौर करना जरूरी है कि असम समझौते के अनुसार, 25 मार्च 1971 के बाद बांग्लादेशी जो अवैध रूप से भारत में आए हैं उन्हें ‘घुसपैठिया’ माना जाता है।

अवैध घुसपैठियों के त्रिपुरा में पकड़े जाने के बाद क्या होता है

त्रिपुरा में अवैध घुसपैठियों को पकड़ने के लिए मोबाइल टास्क फोर्स के अलावा बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) और राज्य पुलिस के पास भी शक्तियाँ और मंजूरी है। BSF के एक सूत्र द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, त्रिपुरा में अगर BSF किसी अवैध प्रवासी को पकड़ती है तो वह उसे स्थानीय पुलिस को सौंप देती है।

इसके बाद आरोपित के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाती है। स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) यह कहता है कि घुसपैठियों को पुलिस के हवाले किया जाए। त्रिपुरा पुलिस उन अवैध घुसपैठियों को 1920 के भारत में प्रवेश के अधिनियम की धारा 4 के तहत गिरफ्तार कर सकती है।

भारत में अवैध रूप से घुसने के आरोपित पर 2025 के इमीग्रेशन और विदेशी अधिनियम, जिसे पहले फॉरेनर्स एक्ट 1946 के तौर पर जाना जाता था, के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है। यहाँ पर ये बताना जरूरी है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की शक्तियाँ दी हैं।

लेकिन असम की तरह त्रिपुरा में अवैध बांग्लादेशियों के लिए अब तक कोई स्थायी हिरासत केंद्र (डिटेंशन सेंटर) नहीं बने हैं। न ही वहाँ पर कोई सुव्यवस्थित विदेशी न्यायाधिकरण प्रणाली है। ऐसे में अगर कोई घुसपैठिया पकड़ा जाता है तो उसे स्थानीय कोर्ट में पेश किया जाता है। मुकदमे के दौरान आरोपित को जेल में रखा जाता है।

ऑपइंडिया ने त्रिपुरा के एक पुलिस के एक उच्च अधिकारी से बात की। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया के विषय में हमें बताया। उन्होंने बताया कि स्थानीय कोर्ट अवैध प्रवासियों द्वारा किए गए अपराधों की गंभीरता के आधार पर जुर्माना और कैद की सजा सुनाती है। घुसपैठिए इसके बाद जेल में उस सजा को काटते हैं और सजा पूरी होने तक वहीं रहते हैं।

सजा पूरी करने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को आवश्यक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के आधार पर उनके देश वापस भेज दिया जाता है। इसके तहत उन्हें सीमा पर तैनात बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के हवाले किया जाता है।

पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि अगर घुसपैठिए के पास उन्हें बांग्लादेशी साबित करने के जरूरी दस्तावेज नहीं होते हैं तो उनको वापस भेजना काफी मुश्किल हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में, BGB भी इस तरह के व्यक्ति को स्वीकार करने से मना कर देती है।

इस तरह के घुसपैठियों के लिए जब तक बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ पूरा मामला नहीं सुलझता, तब तक उन्हें अस्थायी डिटेंशन सेंटर्स में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

बांग्लादेश वापस भेजे गए लोगों की संख्या

एक समस्या यह भी है कि भारत और बांग्लादेश के बीच भारत में घुसने वाले अवैध प्रवासियों को वापस भेजने के लिए कोई संधि या समझौता नहीं हुआ है। समझौता न होने की वजह से ही कम संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिया वापस भेजे जा सके हैं। हालाँकि, इसके बावजूद त्रिपुरा ने 2022 से 31 अक्टूबर 2024 के बीच 1746 बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया है।

त्रिपुरा, बांग्लादेश के साथ तीन दिशाओं से 856 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इस सीमा में कई ऐसे भी हिस्से हैं जहाँ पर अब तक स्थानीय मसलों के कारण सीमा (बाड़) नहीं बनाई जा सकी है। ऐसे में अवैध प्रवासी, जो भारत के लिए एक खतरा हैं वह पकड़े जाने के डर के बिना त्रिपुरा को ही भारत में आने का जरिया बना रहे हैं।

भूख से माता-पिता-बहन की मौत, खुद 128 साल जीवित रहे: कौन थे योग गुरु शिवानंद बाबा, क्यों उनके निधन को PM मोदी ने बताया ‘अपूरणीय क्षति’

वाराणसी में रह रहे लोकप्रिय योग गुरु शिवानंद बाबा का 128 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। माना जाता है कि वो इस धरती पर सबसे उम्रदराज़ व्यक्ति थे। शनिवार (3 मई, 2025) को उनका निधन हुआ। उन्हें मार्च 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों पद्मश्री का सम्मान प्राप्त हुआ था। BHU के अस्पताल में उन्होंने अंतिम साँस ली। डॉ देवाशीष ने बताया कि रात के साढ़े 8 बजे उन्होंने अंतिम साँस ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दुःख जताया है।

पीएम मोदी ने ‘X’ पर लिखा, “योग साधक और काशी निवासी शिवानंद बाबा जी के निधन से अत्यंत दुःख हुआ है। योग और साधना को समर्पित उनका जीवन देश की हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहेगा। योग के जरिए समाज की सेवा के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित भी किया गया था। शिवानंद बाबा का शिवलोक प्रयाण हम सब काशीवासियों और उनसे प्रेरणा लेने वाले करोड़ों लोगों के लिए अपूरणीय क्षति है। मैं इस दुःख की घड़ी में उन्हें श्रद्धांजलि देता हूँ।”

बता दें कि शिवानंद बाबा अन्न ग्रहण नहीं करते थे। वो योग साधना में दक्ष थे। इस उम्र में भी वो प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में स्नान करने के लिए पहुँचे थे। दुर्गाकुंड स्थित आश्रम पर उनका पार्थिव शरीर लाया गया। शिष्यों द्वारा हरिश्चंद्र घाट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ। शिवानंद बाबा ने पूरी उम्र ब्रह्मचर्य का पालन किया। वो लंबे समय से भेलूपुर स्थित कबीरनगर में रह रहे थे। 8 अगस्त, 1896 में पश्चिम बंगाल के श्रीहट्टी में एक भिक्षुक गोस्वामी परिवार में जन्मे शिवानंद बाबा के परिवार को विभाजन के बाद देश छोड़ना पड़ा था। आज ये जगह बांग्लादेश में है।

उनके माता-पिता भीख माँगकर जीवन-यापन चलाते थे। उनके परिवार ने उन्हें नवद्वीप के रहने वाले बाबा ओंकारनंद गोस्वामी के सुपुर्द कर दिया, जिनसे उन्हें आध्यात्मिक शिक्षा मिली। वो मात्र 6 वर्ष के थे जब माता-पिता और बहन तीनों भूख से चल बसे। उनकी कहानी संघर्ष भरी है। वो वाराणसी में अपने मताधिकार का प्रयोग करना नहीं भूलते थे। शिवानंद बाबा अपने स्वास्थ्य का राज बताते हुए कहते थे कि इच्छा ही समस्त समस्याओं की जड़ है, उन्हें न किसी चीज से लगाव है और न तनाव।

बताया जाता है कि वह स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस के काफी करीब रहे थे। दोनों के बीच बेहद ही अच्छा रिश्ता था। बताया जाता है कि दोनों हमउम्र थे और एक ही एरिया में रहते थे। इसके अलावा यह भी दावा किया जाता है कि उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को काफी करीब से देखा है। 1977 में वृंदावन चले गए। दो साल वृंदावन में रहने के बाद 1979 में वाराणसी आ गए। तब से यहीं रह रहे थे। आने वाले हर शख्स को बाबा खुद अपने हाथों से खाना परोस कर खिलाते हैं। विश्वमारी के दौरान कोरोना टीका लगाने के बाद उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को आशीर्वाद भी दिया था।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने फाजिल के परिवार को दिए ₹25 लाख, इसी पैसे से हिंदुवादी सुहास शेट्टी की हत्या के लिए अब्दुल सफवान गैंग को दी ‘सुपारी’: पुलिस जाँच के हवाले से रिपोर्ट में बताया

कर्नाटक के मंगलुरु में हिन्दू कार्यकर्ता सुहास शेट्टी की हत्या के लिए ₹3 लाख दिए गए थे। यह रकम आदिल ने अब्दुल सफवान गैंग को दी थी। फिरौती का यह पैसा कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार से मिले मुआवजे से दिया गया था। यह सारी बातें पुलिस की जाँच में सामने आई हैं। आदिल अपने भाई की मौत का बदला सुहास शेट्टी की हत्या से लेना चाहता था।

न्यूज 18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने 2023 में मोहम्मद फाजिल नाम के एक शख्स की मौत के बाद ₹25 लाख का मुआवजा दिया था। उसकी हत्या का आरोप सुहास शेट्टी पर था। फाजिल का भाई आदिल इसका बदला सुहास शेट्टी की हत्या करवा के लेना चाहता था।

रिपोर्ट बताती है कि इसके लिए आदिल ने अब्दुल सफवान नाम के गुंडे से सम्पर्क किया था। अब्दुल सफवान भी किसी बात को लेकर सुहास शेट्टी से बदला लेना चाहता था। आदिल ने इसके बाद सुहास शेट्टी की हत्या के लिए ₹5 लाख में अब्दुल सफवान से डील की। अब्दुल सफवान को आदिल ने ₹3 लाख इस काम के लिए पहले ही दिए।

सुपारी का यह पैसा कॉन्ग्रेस सरकार के मुआवजे के ₹25 लाख में से दिया गया था। यह भी पता चला है कि इस हत्या की साजिश एक महीने पहले से रची जा रही थी। इसके लिए अब्दुल सफवान ने कई और लड़कों को भी अपने गैंग में शामिल कर लिया था।

पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह बदला लेने के लिए किया गया मर्डर है। पुलिस कमिश्वर अनुपम अग्रवाल ने बताया है कि हत्या की साजिश को 8 लोगों के ग्रुप ने मिलकर अंजाम दिया था। पुलिस ने इस हत्या के मामले में अब्दुल सफ़वान, मोहम्मद मुजामिल, मोहम्मद रिजवान, कलंधर शफी, आदिल महरूफ, नियाज, रंजीत और नागराज को गिरफ्तार किया है।

पुलिस कमिश्नर ने यह भी बताया है कि अब्दुल पर साल 2023 में हमला किया गया था। इसी के बाद से उसने बदला लेने की ठान ली थी। गौरतलब है कि 1 मई 2025 को हिंदू कार्यकर्ता सुहास शेट्टी की हत्या कर दी गई थी। सुहास शेट्टी की हत्या 1 मई, 2025 को मंगलुरु के बाजपे इलाके में कर दी गई थी।

अब्दुल सफवान के गैंग ने घेर कर तलवारों से काट कर सुहास शेट्टी की हत्या की थी। अस्पताल ले जाते वक्त सुहास शेट्टी की मौत हो गई थी। भाजपा ने ₹25 लाख का मुआवजा सुहास शेट्टी के परिवार को दिया था।

बांग्लादेश से पहले खुद घुसा चाँद मियाँ, फिर भारत में घुसपैठियों को बसाने के लिए चलाने लगा गैंग: ₹25 हजार में एंट्री-रोजगार भी, दिल्ली पुलिस ने 44 को पकड़ा

दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के एक गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस बांग्लादेशी गैंग के दिल्ली से लेकर चेन्नई तक कनेक्शन सामने आए हैं। ये गैंग फर्जी दस्तावेजों के जरिए घुसपैठियों को भारत में रोजगार मुहैया कराता था। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने अब तक कुल 44 लोगों को गिरफ्तार किया है। गैंग का सरगना चाँद मियाँ है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में से 33 बांग्लादेशी नागरिक हैं और 5 भारतीय एजेंट हैं। इनमें 33 बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं। यह गैंग फर्जी दस्तावेज बनवाने और रहने की व्यवस्था कराने और ट्रांसपोर्टेशन में मदद करता था।

गिरफ्तार लोगों के पास से 11 फर्जी आधार कार्ड, आईडी प्रूफ के साथ दो बांग्लादेशी दस्तावेज,एक कंप्यूटर और 4 हार्ड डिस्क, एक कलर प्रिंटर और फिंगरप्रिंट स्कैनर, 8 मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद हुए हैं। इसके अलावा इनके पास से लगभग ₹20 हज़ार बरामद किए गए हैं।

दिल्ली पुलिस की जाँच में सामने आया कि गैंग के सदस्य बांग्लादेशी नागरिकों को अवैध रूप से सीमा पार कराकर भारत में लाते थे। फिर यहाँ उनके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाते थे। इसके बाद उन्हें किराए का मकान दिलवा कर दिल्ली, बंगलुरु, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में रोजगार भी मुहैया कराते थे।

पुलिस ने बताया है कि इनके चलते घुसपैठियों को पुलिस या सरकारी एजेंसी की नजर से बचने में आसानी होती थी। यह गैंग दिल्ली के सीमापुरी, संगम विहार, शाहीन बाग, महिपालपुर जैसे इलाकों में सक्रिय था। इन इलाकों में बांग्लादेशी नागरिक रहते हैं।

पुलिस के मुताबिक, गैंग का सरगना चाँद मियाँ दिल्ली के संगम विहार इलाके में रह रहा था। पुलिस की जाँच में सामने आया कि वह खुद भी बांग्लादेशी नागरिक है। जो पिछले 5 साल से पहले अवैध रूप से भारत आया था।

इसके बाद उसने एक पूरा नेटवर्क तैयार किया जो 3 साल से बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसा रहा है। चाँद मियाँ पश्चिम बंगाल, मेघालय और त्रिपुरा के बेनापोल सीमा के ज़रिए बांग्लादेशियों को अवैध तरीके से भारत में घुसपैठ करवाता था। वह इस काम के ₹25 हजार लेता था।

दिल्ली पुलिस के DCP रवि कुमार सिंह ने बताया कि 12 मार्च 2025 को पुलिस को सूचना मिली कि एक बांग्लादेशी नागरिक असलम उर्फ मसूम मोहम्मद तैमूर नगर में अवैध रूप से रह रहा है। पूछताछ में उसने बताया कि वह बांग्लादेश के नोआखाली का रहने वाला है और हाल ही में भारत में आया है।

असलम से पूछताछ के चलते ही सरगना चाँद मियाँ तक पहुँचा जा सका। पुलिस ने सभी सबूतों के आधार पर खोजबीन शुरु की। कनेक्शन जोड़ते हुए मुख्य सरगना चाँद मियां को विजयवाड़ा से गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हो गया। बाकी साथियों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ सकती है।

  • दिल्ली पुलिस की जाँच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह भी बताया गया कि कुछ बांग्लादेशी घुसपैठिए ट्रांसजेंडर का वेश धारण कर दिल्ली की सड़कों, रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में जबरन पैसे वसूलते थे। कई ने तो कानून और समाज धोखा देने को सर्जरी और हार्मोनल इलाज से पहचान तक छिपा ली थी।

ये लोग विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले इलाकों में काम करते थे और खुद को पहचान छिपाने के लिए नकली पहचान पत्रों का इस्तेमाल करते थे। पुलिस का मानना है कि यह गैंग केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था बल्कि इसकी पहुँच देश के दक्षिणी राज्यों तक थी।