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पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार नहीं करेगी मुख्तार अंसारी को CM योगी के हवाले: फिर दिया स्वास्थ्य कारणों का हवाला

रूपनगर जेल में बंद बाहुबली और माफिया मुख्तार अंसारी को पंजाब सरकार ने उत्तर प्रदेश पुलिस के हवाले करने से मना कर दिया है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें कहा गया है कि मुख्तार अंसारी की गैरमौजूदगी की वजह से उत्तर प्रदेश में मामलों की सुनवाई नहीं हो पा रही है। 

दरअसल, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को 14 आपराधिक मामलों के लिए मुख्तार अंसारी की हिरासत की दरकार है। इसके लिए योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है लेकिन इसके जवाब में पंजाब सरकार ने हलफ़नामा दायर किया है। इसके ज़रिए मुख्तार अंसारी को योगी सरकार की हिरासत में भेजने से मना कर दिया है। पंजाब सरकार ने मुख्तार अंसारी के स्वास्थ्य को इसकी वजह बताया है। 

जेल अधीक्षक ने इस संबंध में दायर किए गए हलफ़नामे में कहा है कि मुख्तार अंसारी रक्तचाप, मधुमेह, अवसाद, पीठ दर्द, त्वचा की एलर्जी से पीड़ित हैं। इसके अलावा पंजाब सरकार ने योगी सरकार की याचिका को खारिज करने की माँग की है और कहा है कि वह चिकित्सकों के निर्देशानुसार काम कर रही है। योगी सरकार की याचिका विचार करने लायक नहीं है क्योंकि अंसारी को पंजाब की जेल में रखना मौलिक अधिकार है और योगी सरकार इसका उल्लंघन नहीं कर सकती है। 

वहीं योगी सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा गया है कि मुख्तार अंसारी पर प्रदेश के भीतर गंभीर धाराओं में मुक़दमे लंबित हैं। इसके बावजूद वह पंजाब की जेल में एक छोटे अपराध की वजह से दो साल से मौजूद है। योगी सरकार के मुताबिक़ कई बार गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया गया लेकिन पंजाब सरकार अब तक इस बात को टालती रही है। पंजाब सरकार स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए मुख्तार अंसारी को सौंपने में टालमटोल कर रही है। 

वहीं दूसरी तरफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी बैनामे से सरकारी ज़मीन पर होटल बनाने के मामले में मुख्तार अंसारी की पत्नी आशफां अंसारी की अग्रिम जमानत को मंज़ूरी दी है। हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत के साथ-साथ नियमों का पालन करने का आदेश भी दिया है। दरअसल, आशफां अंसारी पर अनधिकृत बैनामे के ज़रिए सरकारी बंजर ज़मीन पर ग़ैरकानूनी रूप से होटल बनाने का आरोप है। 

इस मामले की जाँच के लिए बनाई गई समिति ने रिपोर्ट पेश की थी जिसके आधार पर गाजीपुर कोतवाली में सदर तहसील के लेखपाल ने षड्यंत्र, धोखाधड़ी और अन्य गंभीर आरोपों के अंतर्गत एफ़आईआर दर्ज की गई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सरकारी ज़मीन का बैनामा दो नाबालिग बेटों अब्बास अंसारी और उमर अंसारी के नाम कराया गया था।   

मिया खलीफा, ग्रेटा, रिहाना से टिकैत को दिक्कत नहीं लेकिन इनके बारे में पूछे जाने पर कहा- वैसे ये हैं कौन?

बीते कुछ दिनों में किसान आंदोलन की आड़ में जारी उपद्रव अंतरराष्ट्रीय हो चुका है। अमेरिकी- कैरेबियाई गायिका रिहाना और स्वीडन की जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी इस मुद्दे पर प्रोपेगेंडा फ़ैलाने के साजिशों का हिस्सा रहीं। मिया खलीफा सहित जब इन अंतरराष्ट्रीय चेहरों का समर्थन मिलने पर भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से सवाल पूछा गया तो उनका जवाब था कि इसमें परेशानी ही क्या है। लेकिन जब उनसे इन हस्तियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। इस पर राकेश टिकैत ने कहा, “मैं उन्हें क्यों जानू, किया होगा समर्थन, मुझे क्या पता? वैसे ये हैं कौन?”

राकेश टिकैत से बातचीत में उन्हें बताया गया कि अमेरिकी गायिका रिहाना, जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और वयस्क फिल्मों में काम करने वाली मिया खलीफा ने ‘किसान आंदोलन’ का समर्थन किया है। इस पर राकेश टिकैत ने कहा, “कौन हैं ये विदेशी कलाकार, मैं इन्हें नहीं जानता हूँ। लेकिन कोई विदेशी अगर हमारा समर्थन कर रहा है तो इससे क्या परेशानी हो सकती है, न तो हमसे कुछ ले रहा है और न ही हमें कुछ दे रहा है।” 

इसके अलावा राकेश टिकैत ने किसान आंदोलन को जारी रखने की योजनाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस रणनीति के तहत यह कथित किसान आंदोलन आगे बढ़ेगा। टिकैत के मुताबिक़, “हर गाँव से एक ट्रैक्टर, 15 लोग लगभग 10 दिन तक यहाँ रहेंगे। विरोध प्रदर्शन इस रणनीति के आधार पर आगे बढ़ेगा। सरकार कृषि क़ानून के प्रदर्शन को लंबा खींचना चाहती है, वह बातचीत से इस मुद्दे का हल नहीं निकालना चाहती है। सरकार यही चाहती है तो प्रदर्शनकारी भी इसे लंबा खींचने के लिए तैयार हैं।” 

इसके अलावा गाजीपुर बॉर्डर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से मिलने के लिए 15 सांसद आए थे। जिनका प्रयास असफल रहा था, इसकी वजह ये थी कि दिल्ली पुलिस ने सांसदों को रोक दिया था। नतीजतन 15 सांसद अवरोधक के दूसरी तरफ ज़मीन पर बैठे थे। उनकी प्रदर्शनकारियों से कोई बात नहीं हो पाई थी, कई प्रयासों के बावजूद वह सफल नहीं हो पाए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गुरुवार को पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, मथुरा और अलीगढ़ के कई किसान समर्थक भी गाजीपुर बॉर्डर पर पहुँचे थे।        

रिपब्लिक टीवी के एंकर विकास शर्मा के असामयिक निधन पर जश्न मनाते दिखे मजहबी

समाचार चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ के एंकर विकास शर्मा का निधन हो गया है। विकास शर्मा तीन दिनों से बीमार थे। बृहस्पतिवार (फ़रवरी 04, 2021) शाम उन्होंने नोएडा के कैलाश अस्पताल में आखिरी सांस ली। 35 वर्षीय विकास कानपुर के रहने वाले थे और आजकल रिपब्लिक चैनल पर ‘ये भारत की बात है’ कार्यक्रम में देखे जाते थे। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले ही कोविड-19 से संक्रमित होने के बाद ठीक होकर घर भी लौट आ गए थे।

विकास शर्मा के निधन पर तमाम मीडियाकर्मियों ने दिवंगत आत्मा के प्रति संवेदना व्यक्त की हैं। समाचार चैनल रिपब्लिक के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी ने भी चैनल के प्राइम टाइम एंकर विकास शर्मा के देहांत पर दुःख प्रकट किया और कहा कि रिपब्लिक चैनल को खड़ा करने में उनका अहम योगदान रहा।

रिपब्लिक टीवी के ही एंकर प्रदीप भंडारी ने भी विकास शर्मा के निधन पर शोक प्रकट करते हुए उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की हैं। लेकिन विचारधारा के विरोध में सोशल मीडिया पर देखा जा रहा है कि दिवंगत विकास शर्मा के खिलाफ बदजुबानी लगातार जारी है।

प्रदीप भंडारी के ट्वीट के जवाब में ही एक ट्विटर यूजर ने लिखा है, “वो तुम्हारे जैसा ही एक घृणा फ़ैलाने वाला आदमी था। अच्छा हुआ मर गया यहाँ बीमारी फैला रहा था।”

मेजर गौरव आर्या ने भी विकास शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “विकास शर्मा नहीं रहे। इतना विनम्र आदमी, इतना प्रतिभाशाली और अच्छा आदमी। आपको याद करेंगे विकास.. आपकी ऊर्जा, गर्मजोशी। भगवान शिव आपको आशीर्वाद दें, मेरे मित्र।”

लेकिन इस ट्वीट के जवाब में भी विकास शर्मा को लेकर जहर उगलने वालों की कमी नहीं थी। वसीम अहमद नाम के एक ट्विटर यूजर ने अपने जवाब में लिखा, “ये वही ड्रामेबाज है न, जो सुबह शाम पाकिस्तान पर भौंकता था। अच्छा हुआ मर गया %****”

उइगरों के शोषण को अमेरिका ने बताया चिंताजनक: कहा- अंतरराष्ट्रीय जाँचकर्ताओं को आने दे चीन, वरना भुगतने होंगे गंभीर परिणाम

चीन के शिनजियांग प्रांत में मुस्लिम महिलाओं के साथ हो रहे अमानवीय बर्ताव को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका चिंतित नजर आ रहा है। हाल ही में एक खबर सामने आई थी कि वहाँ किस तरह री-एड्यूकेशन के नाम पर उइगर महिलाओं का एक सिस्टम के तहत बलात्कार किया जाता है और कैसे शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन का मकसद किसी समुदाय में कोई सुधार करना नहीं, बल्कि उन्हें पूरी तरह बर्बाद करना है।

अमेरिका के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता का इन महिलाओं पर हो रहे अत्याचार पर कहना है कि ये जानकारियाँ परेशान करने वाली हैं। उन्होंने इन डिटेंशन कैम्प में नियोजित तरीके से उइगर व अन्य मुस्लिम महिलाओं पर होने वाले यौन शोषण को घोर अमानवीय बताया है। प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका पहले ही शिनजियांग प्रांत की घटनाओं को मानवता के खिलाफ और नरसंहार की संज्ञा दे चुका है।

संयुक्त राज्य अमेरिका का कहना है कि चीन को अंतरराष्ट्रीय जाँचकर्ताओं को वहाँ जाने की अनुमति देनी होगी और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर कम्युनिस्ट राष्ट्र के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाने पर विचार कर रहा है। इससे पहले, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति चीन की इस प्रवृत्ति के कारण उस पर पहले ही कई प्रकार के प्रतिबंध आरोपित कर चुके हैं।

इस मामले को लेकर, अमेरिका में चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के जबरदस्ती जनसंख्या नियंत्रण प्रयासों और शिनजियांग उइगर क्षेत्र में मानवाधिकारों के हनन के बारे में संयुक्त राज्य के कानून मंत्री एंटनी ब्लिन्केन और सुलिवन के पास 45 कानूनविदों ने लिखित रूप में चिंता व्यक्त की है।

इन सदस्यों ने लिखा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीन संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक है। इस चुनौती का सामना करने के प्रशासन के प्रयास के तहत, हम आपसे शिनजियांग में चल रहे नरसंहार के लिए चीनी सरकार को जवाबदेह ठहराने का आग्रह करते हैं। यह सभी लोगों के लिए जीवन, मानव गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों के लिए।”

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने भी बृहस्पतिवार को जरी एक बयान में कहा कि वो चीन की विभिन्न क्षेत्र में की जा रही मनमानियों और गुस्ताखियों पर फैसला लेगा लेकिन जहाँ अमेरिका को फायदा होगा, वो उसे भी प्रभावित नहीं होने देंगे। बायडेन सरकार के रक्षा सचिव लॉयड ऑस्टिन को लिखे एक पत्र में, सीनेटर रिक स्कॉट ने लिखा है कि कम्युनिस्ट चीन की धमकी पेंटागन के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

सीनेटर स्कॉट ने ऑस्टिन को लिखा, “कम्युनिस्ट चीन निस्संदेह हमारे सबसे बड़े दुश्मन हैं और उन्हें इस तरह से माना जाना चाहिए। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) ने उइगरों के खिलाफ नरसंहार की नीति, अमेरिकी तकनीक की चोरी, अपनी सैन्य उपस्थिति और संयुक्त राज्य अमेरिका की सुरक्षा को खतरा पैदा करने के लिए खतरनाक कार्रवाई की हैं। इसके सहयोगियों को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।”

गौरतलब है कि इससे पूर्व, चीन द्वारा ट्रंप सरकार में विदेश मंत्री रहे माइक पोंपियो के उइगर मुस्लिमों पर अत्याचार के संबंध में दिए गए बयान को ‘रद्दी कागज’ बताया था। चीन ने इन तमाम बातों को निराधार बताते हुए कहा था कि पोंपियो का शिनजियांग प्रांत में अल्पसंख्यक मुस्लिमों पर अत्याचार का आरोप दुर्भावना से और महज सनसनी फैलाने के लिए दिया गया है।

लाल किले और कैपिटल हिल पर हुई हिंसा समान: विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राज्य विभाग को दिया दो टूक जवाब

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार (4 फरवरी, 2020) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिल्ली हिंसा को लेकर बड़ा बयान दिया। अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि 26 जनवरी को दिल्ली के लाल किला में और 6 जनवरी को अमेरिका के कैपिटल हिल में भड़की हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं से एक जैसी प्रतिक्रियाएँ और भावनाओं ने जन्म लिया।

प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ”भारत और अमेरिका दोनो एक गतिशील लोकतांत्रिक देश है। गणतंत्र दिवस पर 26 जनवरी को हिंसा की घटनाएँ, लाल किले में तोड़फोड़ ने भारत में उसी तरह की भावनाएँ और प्रतिक्रियाएँ उत्पन्न की, जैसा कि 6 जनवरी को (अमेरिका में) कैपिटल हिल घटना के बाद देखने को मिला था। भारत में हुई घटनाओं से हमारे संबद्ध स्थानीय कानूनों के मुताबिक निपटा जा रहा है।”

बता दें, MEA प्रेस कॉन्फ्रेंस, अमेरिकी राज्य विभाग द्वारा किसान विरोध के बारे में की गई टिप्पणियों के जवाब में आयोजित की गई थी। दरअसल, अमेरिकी विदेश विभाग ने भारत द्वारा कृषि सुधारों की दिशा में उठाए गए कदमों को स्वीकार किया। इस दौरान एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग के लीक हुए दस्तावेज को भी ध्यान में रखा गया है।

श्रीवास्तव ने कहा कि हमने कृषि कानूनों पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों पर ध्यान दिया है। किसी भी प्रदर्शन को भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार और गतिरोध को खत्म करने के लिए सरकार और संबंधित किसान समूहों के जारी प्रयासों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

वहीं श्रीवास्तव ने 26 जनवरी को 4 जी इंटरनेट व अन्य चीजों पर लगाई गई रोक को लेकर कहा, “दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में इंटरनेट एक्सेस पर जो रोक लगाई गई थी वह हिंसा रोकने के लिए लगाई गई थी।”

इसके अलावा विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख की टिप्पणी को लेकर कहा कि भारत आतंक, शत्रुता और हिंसा से मुक्त वातावरण में पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंधों की इच्छा रखता है। इस तरह का माहौल बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है।

जो राम मंदिर भारत की संस्कृति का प्रतीक है, उससे हिंदुओं को नीचा क्यों दिखा रही कॉन्ग्रेस?

अयोध्या में बन रहा राम मंदिर क्या है? भारत की सनातन संस्कृति का प्रतीक। इस्लामी अक्रांताओं की बर्बरता पर मानवता की विजय का चिह्न। या जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2020 में कहा था, “सोमनाथ के पुनर्निर्माण से सरदार पटेल ने भारत के सांस्कृतिक गौरव को लौटाने का जो यज्ञ शुरू किया था, उसका विस्तार देश ने अयोध्या में भी देखा है।” या फिर वेद, हिंदुत्व, योग, आयुर्वेद और वैदिक एस्ट्रोलॉजी पर कई किताबें लिख चुके डेविड डेविड फ्रॉली का यह कहना कि राम मंदिर निर्माण नेहरूवादियों, मार्क्सवादियों, मीडिया, शिक्षाविदों की हार है, जिन्होंने इतिहास, पुरातत्व और आस्था सबको नकारने की कोशिश की।

असल में राम मंदिर यह सब कुछ है। या डेविड फ्रॉली के ही शब्दों में कहे तो राम मंदिर का निर्माण देश की आजादी के बाद आधुनिक भारत की सबसे महत्वपूर्ण घटना है। राम मंदिर भारत के वास्तविक भाग्य को जागृत करेगा। 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या में भूमि पूजन हो चुका है। राम मंदिर निर्माण के लिए देशव्यापी निधि समर्पण अभियान चल रहा है। ऐसे में आप की सहज जिज्ञासा हो सकती है कि राम मंदिर को लेकर यह सवाल एक बार फिर पूछे जाने का क्या तुक है?

इसकी दो वजहें। पहला, इतिहास के नाम पर काल्पनिक कहानियॉं गढ़ने वाले डीएन झा यानी द्विजेंद्र नारायण झा का गुरुवार (4 फरवरी 2021) को निधन हो गया। इस शख्स की दो महत्वपूर्ण ‘उपलब्धि’ थी;

  • राम मंदिर में रोड़े डाले। एक मनगढ़ंत रिपोर्ट सरकार को बनाकर दी जिसमें दावा किया मंदिर तोड़कर बाबरी मस्जिद नहीं बनाई गई थी।
  • एक अभिनव खोज की जिसके मुताबिक हम हिंदू प्राचीन काल में गाय का भक्षण करते थे।

यदि बात डीएन झा के मरने की ही होती तो सवाल खड़ा नहीं होता। दूसरी वजह वह कॉन्ग्रेस है, जिसने इतिहास के नाम पर प्रोपेगेंडा परोसने वाले इन वामपंथी कहानीकार इतिहासकारों को पोषित किया है। राम के अस्तित्व को लगातार नकारते रही है। जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला आई तो मन ही मन इस बात को लेकर खीझी कि वह इस औकात में नहीं रही कि शाहबानो जैसा कोई प्रपंच रच सके। लेकिन, उसने अपना चरित्र नहीं त्यागा है।

अचानक से राम मंदिर के लिए जुटाए रहे निधि समर्पण अभियान को लेकर उसके नेताओं ने ऐसे बयान देने शुरू किए जिससे बहुसंख्यक हिंदुओं को नीचा दिखाया जा सके। इतना ही नहीं उसके पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी से ट्विटर पर इस्लामवादी सीधे सवाल पूछे रहे और कॉन्ग्रेस उनको जवाब नहीं देकर भी हिंदुओं का एहसास दिला रही है कि राम भले उनके अराध्य हों, कॉन्ग्रेस उनके अस्तित्व को आज भी नहीं स्वीकारती।

कॉन्ग्रेस नेताओं के हालिया बयानों पर गौर करें। मनमोहन सिंह की सरकार में मंत्री रहे पवन बंसल का कहना है कि वह घर में हिंदू और बाहर सेकुलर हैं। उनका दावा है कि उनसे भी राम मंदिर के लिए चंदा मॉंगा गया, लेकिन उन्होंने नहीं दिया। भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से कैबिनेट से इस्तीफा देने को मजबूर हुए बंसल कॉन्ग्रेस के कोषाध्यक्ष भी हैं। राम मंदिर के लिए धन संग्रह स्वैच्छिक है। बंसल को अधिकार है कि वह इसमें योगदान न करें। लेकिन, इसे सार्वजनिक तौर पर खुलकर कहने और खुद के सेकुलर होने की बात बताने के पीछे उनकी मंशा क्या रही होगी?

साभारः दैनिक भास्कर

पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्य प्रदेश के झाबुआ से कॉन्ग्रेस के विधायक कांतिलाल भूरिया ने तो बंसल को भी पीछे छोड़ते हुए राम मंदिर के लिए किए जा रहे धन संग्रह को दारूबाजी से जोड़ दिया। इन सबके बीच यह खबर भी आई थी कि राजस्थान में कॉन्ग्रेस की छात्र विंग एनएसयूआई (NSUI) ने राम मंदिर निर्माण के लिए अभियान शुरू किया है। इस अभियान का नाम है, ‘1 रुपया राम के नाम’। इस कैंपेन को लेकर वामपंथियों ने खुलेआम कॉन्ग्रेस को चुनौती दी और चेताया कि यदि इसे बंद नहीं किया तो कॉन्ग्रेस परंपरागत वोट खो देगी। इस्लामवादी पत्रकार राणा अयूब ने तो ट्विटर पर टैग कर सीधे राहुल गॉंधी से सवाल ही पूछ लिया। लेकिन कॉन्ग्रेस ने इस पर भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

राणा अयूब ने अब यह ट्वीट डिलीट कर दिया है

क्या कॉन्ग्रेस के लिए राम मंदिर, राम भक्त और बहुसंख्यक हिंदुओं की भावना का सम्मान सांप्रदायिकता है? अतीत तो यही बतलाता है, क्योंकि ये वही कॉन्ग्रेस है जिसने सत्ता में रहते हुए सुप्रीम कोर्ट में रामसेतु को लेकर एक हलफनामा दायर किया था और राम के अस्तित्व को नकार दिया था। यह वही कॉन्ग्रेस है जिसके पितृ पुरुष और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने गर्भगृह से रामलला की मूर्तियों को हटाने के लिए तत्कालीन उत्तर प्रदेश की सरकार और फैजाबाद प्रशासन पर पूरा दबाव डाल रखा था। आजाद भारत में राम को झुठलाने की यह कॉन्ग्रेस की पहली कोशिश थी।

कॉन्ग्रेस के राजनीतिक रूप से कमजोर होने की वजह से आज भले राम मंदिर की राह आसान दिख रही हो, लेकिन हमें यह ध्यान रखना होगा कि इन प्रपंचों का जवाब नहीं दिया गया, इसे रिहाना, ग्रेटा और कथित किसान आंदोलन के नाम पर रची जा रही देश विरोधी साजिशों के बीच भूला दिया गया तो, मथुरा-काशी की राह लंबी हो सकती है।

लाल किले पर हुआ तिरंगे का अपमान, पुलिस ने जारी की वीडियो: दंगाई ने कहा- प्यार से गेट खोल दो, वरना हथियार…

26 जनवरी को दिल्ली में भड़की हिंसा के दौरान तिरंगे का अपमान होने से इंकार कर रही लुटियन लॉबी के झूठ का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ा है। पुलिस ने वीडियो जारी कर साबित कर दिया है कि ऑपइंडिया रिपोर्ट के ख़िलाफ़ द वायर का फैक्टचेक हो या फिर शिव सेना का दावा सब के सब निराधार थे और उस दिन तिरंगे का अपमान हुआ था।

टाइम्स नाऊ के अनुसार, दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच द्वारा जारी वीडियो में एक इकबाल सिंह नाम का उपद्रवी स्पष्ट रूप से लाल किले में भीड़ को उकसाकर ऊँचाई से तिरंगे को हटाने की बात कह रहा है। साथ ही वह वहाँ निशान साहिब का चिह्न लगाने को भी बोलता सुनाई दे रहा है।

वीडियो में उसे दंगाइयों से अपील करते सुना जा सकता है कि अगर कोई लाल किले में घुसने से रोके तो पुलिस वालों से बंदूकें लेकर उनपर गोली चलाएँ। इस संबंध में कुल तीन वीडियो सार्वजनिक की गई हैं। इनमें इकबाल सिंह भीड़ को उकसा रहा है। वहीं पुलिस लगातार लाल किले में जाने से भीड़ को रोक रही है।

वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है, “जल्दी करो और तिरंगा नीचे करो। वाहे गुरू, वाहे गुरू…. हम अपील करते हैं कि मोदी कि तिरंगा हटाकर वहाँ निशान साहिब को लगा। कुछ शर्म कर। बेशर्म मत हो। हम लाल किले के बाहर हैं और शांति से गेट खोलने को कह रहे हैं। बाबाजी एक शांतिपूर्ण क्रांति शुरू हो चुकी है। अगर इन्होंने गेट नहीं खोला तो हम इनकी बंदूक लेकर इन्हें मारेंगे। इसलिए बेहतर है ये मान जाएँ वरना हमारे पास हथियार हैं। हम उन्हें गोली मार देंगे।”

गौरतलब है कि एक ओर ये वीडियो सामने आई हैं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने भी खुलासा किया है कि उस समय 300 से अधिक सोशल मीडिया अकॉउंट से फर्जी जानकारी व अफवाहें फैलाई जा रही थीं। पुलिस ने इस संबंध में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ विभिन्न समूहों में शत्रुता फैलाने के आरोप में और उन्हें भड़काने के लिए मुकदमा दर्ज किया है।

इतना ही नहीं, लाल किले में भड़की हिंसा मामले में एक धर्मेंद्र सिंह हरमन नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। क्राइम ब्राँच की एसआईटी ने उसे एक वीडियो मिलने के बाद पकड़ा, इसमें वह कार पर खड़े होकर भीड़ को भड़का रहा था। वहीं दूसरी वीडियो में वह दंगाइयों के साथ हिंसा में शामिल भी नजर आ रहा था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस को लगभग 1,700 वीडियो क्लिप और सीसीटीवी फुटेज लाल किला हिंसा के संबंध में मिले हैं। अब पुलिस सिर्फ फॉरेंसिक एक्सपर्ट की राय लेकर दंगाइयों को एक एक करके पकड़ने में जुटी है।

Toolkit से क्या है कॉन्ग्रेस का लिंक? क्यों पार्टी ने किया अपना पुराना ट्वीट डिलीट: रहस्य गहराया

पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग और अंतरराष्ट्रीय गायिका रिहाना द्वारा किसान आंदोलन के समर्थन में किए गए ट्वीट्स के बाद अब इस पूरे मामले में कॉन्ग्रेस का लिंक सामने आने लगा है। दरअसल, ऑपइंडिया ने कुछ ही देर पहले आपको बताया कि कैसे टूलकिट डॉक्यूमेंट में ऐसा कंटेंट है जो साबित करता है कि प्रदर्शन को अंतरराष्ट्रीय समर्थन पहले से पूर्व निर्धारित था। अब इसी डॉक्यूमेंट की सामग्री और पार्टी के एक ट्वीट से पता चला है कि इसमें कॉन्ग्रेस का भी हाथ शामिल था।

जिस ट्वीट का हम जिक्र कर रहे हैं उसे अब डिलीट किया जा चुका है। हालाँकि, इसका स्क्रीनशॉट अब भी उपलब्ध है। ये ट्वीट 18 जनवरी 2021 को केरल प्रदेश महिला कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से किया था। इसमें लिखा था, “मोदी सरकार ने बड़े पैमाने पर आबादी के एक बड़े हिस्से के अस्तित्व पर हमला किया है। ये तीन कृषि कानून आने वाले समय में उन महिलाओं की जिंदगी और बदतर कर देंगे जो पहले से ही बुनियादी जरूरतों की आसमान छूती कीमतों के कारण परेशान हैं।”

डिलीट किया जा चुका ट्वीट

पहली नजर में ये ट्वीट लग सकता है कि कॉन्ग्रेस का कोई नया रोना है। लेकिन वास्तविकता ये है कि केरल कॉन्ग्रेस का यह ट्वीट उस टूलकिट में मौजूद ट्वीट से शब्दश: मिलता है, जिसके ख़िलाफ़ अब दिल्ली पुलिस जाँच कर रही हैं।

इस ट्वीट में और नीचे डॉक्यूमेंट में उल्लेखित टेक्स्ट में कोई अंतर नहीं है। इसलिए ये एक बड़ा सवाल है कि क्या कॉन्ग्रेस इन सबमें पहले से शामिल थी। अगर हाँ, तो आने वाले समय में यह पार्टी के लिए गंभीर समस्य़ा का कारण बन सकती है क्योंकि पुलिस इसी बात की जाँच कर रही है कि टूलकिट को आखिर किसने बनाया।

कॉन्ग्रेस के ट्वीट की शब्दश: कॉपी टूलकिट में शामिल

कॉन्ग्रेस लिंक और रिहाना का ट्वीट- क्या हो चुका था 2 हफ्ते पहले प्लान?

यहाँ यह भी गौर करने वाली बात है कि यदि 18 जनवरी को कॉन्ग्रेस का यह ट्वीट इसी डॉक्यूमेंट से पोस्ट किया गया था तो मतलब साफ है कि इस टूलकिट को 18 जनवरी से पहले बनाया गया था। जिसमें रिहाना का ट्वीट भी शामिल है। मुमकिन है कि रिहाना को पहले से हिंसक दंगाई और खालिस्तानियों को साथ शामिल किए जाने की बात पता चल गई थी और अगर ऐसा इसलिए है कि ट्वीट की तारीख और रिहाना के समर्थन वाले ट्वीट में 15 दिन का फासला है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस का टूलकिट के साथ संबंध होना केवल कयासों का हिस्सा है। दिल्ली पुलिस इसकी जाँच कर रही है। उम्मीद है सच जल्द ही सामने आएगा। मगर, तब भी दो बातें कही जा सकती हैं:

  1. 1. टूलकिट तक कॉन्ग्रेस की पहुँच थी। यह इस तथ्य से साबित होता है कि उनका यह ट्वीट टूलकिट से शब्दशः लिया गया था।
  2. 2. रिहाना को 18 जनवरी के पहले से ही किसान समर्थन में खड़ा होने के लिए तैयार कर लिया गया था।

ऐसी प्लानिंग जो भारत को बदनाम करने के लिए तैयार की गई, उसमें दिल्ली पुलिस की पड़ताल और भी आवश्यक हो जाती है ताकि पता चल सके कि इस तरह का प्लान किसने तैयार किया।

जहाँ बाकी खिलाड़ी भारत के साथ वहीं जॉर्ज फ्लाइड के नाम पर, रिहाना के समर्थन में उतरे इरफान पठान

पॉप स्टार रिहाना द्वारा किसान आंदोलन के पक्ष में किए ट्वीट के बाद सोशल मीडिया दो धड़ों में बँटा नजर आ रहा है। एक धड़े ने जहाँ इसे भारत के खिलाफ दुष्प्रचार बताया है तो दूसरे धड़े ने रिहाना का समर्थन किया है। वहीं अब भारतीय पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान भी अब तथाकथित बुद्धिजीवियों के गिरोह में शामिल हो गए है। और उन्होंने इशारों-इशारों में रिहाना की बातों का समर्थन किया है।

बता दें, हाल ही रिहाना, ग्रेटा थुनबर्ग, अमांडा सेर्नी, लिली सिंह, जे सीन जैसे विदेशी हस्तियों ने किसानों के समर्थन में ट्वीट किया था। उनके विरोध के बाद सोशल मीडिया पर मानो भूचाल आ गया हो। हालाँकि, बाद में यह पता चला कि उनके समर्थन में एक समन्वित अभियान का हिस्सा थे, जिसके बाद भारतीय दिग्गजों ने उन्हें जमकर लताड़ा था।

अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, करण जौहर, एकता कपूर, कैलाश खेर जैसे दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों से लेकर भारतीय क्रिकेटरों सहित दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, टीम इंडिया के मुख्य कोच रवि शास्त्री, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने भी अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटीज़ के ट्वीट के खिलाफ भारतीयों से एकता का आह्वान किया था।

गौरतलब है कि इस जरूरत के समय में जब पूरी क्रिकेट टीम ‘भारत के खिलाफ हो रहे दुष्प्रचार के खिलाफ एकजुट रहने के लिए अपना समर्थन देते हुए भारत की एकता के साथ खड़े होकर और हैशटैग #IndiaAgainstPropegenda के साथ ट्वीट कर रहे थे। तब ऐसे में भारत के पूर्व खिलाड़ी इरफान पठान ने अंतरराष्ट्रीय सेलेब्रिटीज़ का समर्थन करना ज्यादा सही समझा।

इरफान पठान ने कटाक्ष करते हुए गुरुवार को एक ट्वीट किया, “जब अमेरिका में एक पुलिसवाले द्वारा जॉर्ज फ्लॉयड (अश्वेत नागरिक) की हत्या की गई थी, तब हमारे देश ने भी इस पर अपना दुख जताया था।” इसके साथ ही उन्होंने हैश टैग #Justsaying का इस्तेमाल किया है।”

उल्लेखनीय है कि इस ट्वीट के जरिए न केवल इरफान पठान ने 26 जनवरी को किसानों की आड़ में दिल्ली में हिंसा फैलाने वाले दंगाइयों का समर्थन किया बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से इस मामले को जॉर्ज फ्लॉयड घटना के साथ जोड़कर लोगों को भी उकसाया और फिरंगियों का मुँहतोड़ जवाब दे रहे सेलेब्रिटीज़ और क्रिकेटर्स की भी आलोचना की।

बता दें कि अमेरिका में पुलिस द्वारा एक अफ्रीकी अमेरिकी, जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या कर दी गई थी। जिसके तुरंत बाद इस मामले को लेकर भारत में तथाकथित बुद्धिजीवियों के गिरोह ने देश के मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की कोशिश की थी। वे चाहते थे कि मुसलमान इस तथाकथित ‘मुस्लिम लाइव्स मैटर’ के विरोध के लिए सड़कों पर उतरें।

आपको बता दें कि पॉप गायिका रिहाना ने मंगलवार को एक खबर को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, “हम इसके बारे में बात क्यों नहीं कर रहे? इसके साथ उन्होंने Farmer’s Protest हैशटैग भी लिखा।” वहीं इस खबर को साझा करते हुए एक्टिविस्ट ग्रेटा थुनबर्ग ने भी प्रदर्शनकारियों के साथ अपनी ‘एकजुटता’ व्यक्त की थी।

जिसके बाद विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा था कि देश के कुछ हिस्सों में किसानों के एक बहुत छोटे से वर्ग को कृषि सुधारों के बारे में कुछ आपत्तियाँ हैं और आंदोलन पर जल्दबाजी में टिप्पणी करने से पहले इस मुद्दे को समझने की जरूरत है।

ट्विटर पर फैल रहे दुष्प्रचार पर लगाम लगाते हुए विदेश मंत्रालय ने रिहाना और ग्रेटा थुनबर्ग जैसे चर्चित लोगों के ट्वीट को लेकर कहा कि सनसनीखेज सोशल मीडिया हैशटैग और कमेंट्स को लुभाने का तरीका, खासकर यह मशहूर हस्तियों द्वारा किया गया हो, तो यह न तो सटीक है और न ही जिम्मेदाराना है। यह लोगों को लुभाने का आसान तरीका है।

इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने आगे कहा, “इस तरह के मामलों पर टिप्पणी करने से पहले हम आग्रह करते हैं कि तथ्यों का पता लगाया जाए और मुद्दों की उचित समझ बनाई जाए। भारत की संसद ने पूर्ण बहस और चर्चा के बाद कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी कानून पारित किए।” हालाँकि इस दौरान मंत्रालय की ओर से विशेष रूप से किसी का नाम नहीं लिया गया है।

विदेशी षड्यंत्र के खुलासे के बाद अमित शाह की हाई लेवल मीटिंग, संसद पहुँचे NSA डोभाल और दिल्ली के CP

किसान आंदोलन के बीच विदेशी षड्यंत्र का खुलासा होने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाई लेवल मीटिंग की है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल, दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएसएन श्रीवास्तव और आईबी चीफ ने संसद पहुँचकर उनसे मुलाकात की।

इससे पहले अमित शाह ने बुधवार (फरवरी 3, 2021) को ट्वीट कर कहा था कि कोई प्रोपेगेंडा देश की एकता को नहीं तोड़ सकता। एकजुट होकर प्रगति की ओर चलेंगे। कोई भी दुष्प्रचार भारत को ऊँचाइयों तक जाने से नहीं रोक सकता। 

गृहमंत्री का यह ट्वीट ग्रेटा थनबर्ग के टूलकिट शेयर किए जाने के बाद सामने आया था। जिस पर दिल्ली पुलिस ने आज संज्ञान लिया है। उन्होंने इस दस्तावेज को देखने के बाद षड्यंत्र की आशंका जताई। उनका कहना है कि 26 जनवरी को हुई हिंसा का कार्यान्वयन इसकी नकल थी, जिसमें भारत के खिलाफ आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय युद्ध छेड़ने का आह्वान किया गया था।

दिल्ली पुलिस ने बताया है कि उन्होंने इस टूलकिट की जाँच को लेकर शिकायत दर्ज की है। मामले में जाँच की जा रही है। दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त ने एफआईआर में ग्रेटा का नाम होने को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि एफआईआर में किसी का नाम नहीं जोड़ा गया है। यह केवल टूलकिट को बनाने वालों के खिलाफ है, जो जाँच का विषय है। दिल्ली पुलिस इस मामले की जाँच करेगी।

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी टूलकिट के मुद्दे को बेहद गंभीर बताया है। उनके अनुसार, कुछ विदेशी ताकतें भारत को बदनाम करने का प्रयास कर रही हैं।

मालूम हो कि दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन को अचानक विदेशी हस्तियों का समर्थन मिलना शुरू हुआ था। इसके बाद एक डॉक्यूमेंट टूलकिट सोशल मीडिया पर सामने आया। जिसमें बाकायदा ये बताया गया था कि पूरी दुनिया के लोग भारत में चल रहे किसान-प्रदर्शन में कैसे समर्थन कर सकते हैं। इससे पढ़कर ये स्पष्ट हो गया था कि विदेशी ताकतें भारत की छवि बिगाड़ने के लिए प्रोपेगेंडा चला रही हैं।