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राम मंदिर निर्माण के लिए भिखारियों ने इकट्ठा कर दिए ₹2425, कहा- खुद को रोक न सके

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की खबर के बाद से देश के कोने-कोने से हर वर्ग के लोग चंदा दे रहे हैं। ऐसे में झारखंड से कुछ ऐसे रामभक्त सामने आए हैं जिनकी श्रद्धा आपके भी दिल में घर कर जाएगी। ये कोई साधारण राम भक्त नहीं है। इनका गुजर बसर स्वयं भीख माँग माँगकर चलता है, लेकिन बावजूद इसके इन्होंने श्रीराम के नाम 2425 रुपए समर्पित किए हैं।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ये भिखारी झारखंड के रामगढ़ जिला मुख्यालय स्थित लेप्रोसी कॉलोनी में रहते हैं। यहाँ की एक निवासी सरस्वती देवी ने बताया कि वे लोग रोज भीख माँग और कचरा बीन पर जीवन-यापन करते हैं। मगर बात जब राम मंदिर की आई तो वे लोग खुद को रोक नहीं पाए। कॉलोनी के रहने वाले जीतू महतो ने भी भगवान राम के प्रति आस्था और श्रद्धा दिखाते हुए राम मंदिर के लिए 1 हजार रुपए दान दिए।

लेप्रोसी कॉलोनी में चंदा लेने गए राम मंदिर निर्माण समिति के सदस्यों और पदाधिकारियों ने ऐसी श्रद्धा देख कहा कि समाज का हर वर्ग राम मंदिर निर्माण के वास्ते बढ़-चढ़कर चंदा दे रहा है। सभी भव्य राम मंदिर के सपने को साकार होते देखना चाहते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले ऐसी ही खबर मध्यप्रदेश के बैतूल जिले से सामने आई थी। वहाँ एक आदिवासी महिला देवकू बाई जो भीख माँगती थीं, उन्होंने सौ रुपए की चिल्लर मंदिर निर्माण में दान दी थी। विकास नगर के कार्यकर्ताओं को एक-एक रुपए की चिल्लर सौंपते हुए उन्होंने कहा कि चाहे जितना भी समय लग जाए पर भगवान आते जरूर हैं।

इसी प्रकार अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए ऋषिकेश नीलकंठ पैदल मार्ग पर गुफा में रहने वाले 83 वर्षीय संत स्वामी शंकर दास ने बीते दिनों एक करोड़ रुपये का दान दिया था। स्‍वामी शंकर दास ने अपने गुरु टाट वाले बाबा की गुफा में मिलने वाले श्रद्धालुओं के अनुदान से यह रकम जुटाई थी। वह वहाँ पिछले 60 वर्षों से गुफा में रह रहे हैं।

कृषि कानूनों में ‘काला’ क्या है? ‘खून से खेती’ सिर्फ कॉन्ग्रेस ही कर सकती है, BJP नहीं: राज्यसभा में जमकर बरसे कृषि मंत्री

देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन जारी है। केंद्र द्वारा पारित कृषि कानूनों के मसले पर शुक्रवार (5 फरवरी, 2021) को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में कहा कि भारत सरकार लगातार किसानों से बात करने में लगी हुई है। दुनिया जानती है कि पानी से खेती होती है। लेकिन सिर्फ कॉन्ग्रेस है जो खून से खेती कर सकती है।

किसान आंदोलन को मुद्दा बनाकर अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने वाले विपक्षी पार्टियों पर आज केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर राज्यसभा में जमकर बरसे। उन्होंने कॉन्ग्रेस को घेरते हुए कहा, “दुनिया जानती है कि पानी से खेती होती है। खून से खेती सिर्फ कॉन्ग्रेस ही कर सकती है, भारतीय जनता पार्टी खून से खेती नहीं कर सकती।”

केंद्रीय कृषि मंत्री ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “हमने किसान संगठनों के साथ 12 दौर की वार्ता की, उनके विरुद्ध कुछ नहीं कहा और बार-बार यही कहा है कि आप क्या बदलाव चाहते हैं वो हमें बता दीजिए। भारत सरकार कानूनों में किसी भी संशोधन के लिए तैयार है इसके मायने ये नहीं लगाए जाने चाहिए कि कृषि कानूनों में कोई गलती है। पूरे एक राज्य में लोग गलतफहमी का शिकार हैं। किसानों को इस बात के लिए बरगलाया गया है कि ये कानून आपकी जमीन ले जाएँगे।”

वहीं मोदी सरकार द्वारा पारित तीनों कृषि कानून को काला कानून बताने वाले विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “मैं प्रतिपक्ष का धन्यवाद करना चाहूँगा कि उन्होंने किसान आंदोलन पर चिंता की और आंदोलन के लिए सरकार को जो कोसना आवश्यक था उसमें भी कंजूसी नहीं की और कानूनों को जोर देकर काले कानून कहा। मैं किसान यूनियन से 2 महीने तक पूछता रहा कि कानून में काला क्या है?”

कृषि मंत्री बोले कि नए एक्ट के तहत किसान अपने सामान को कहीं भी बेच सकेगा। यदि एपीएमसी के बाहर कोई ट्रेड होता है, तो किसी तरह का टैक्स नहीं लगेगा। केंद्र सरकार का एक्ट राज्य सरकार के टैक्स को समाप्त करता है, मगर राज्य सरकार का कानून टैक्स देने की बात करता है। नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जो टैक्स लेना चाह रहा है, आंदोलन उनके खिलाफ होना चाहिए मगर यहाँ उल्टी गंगा बह रही है।

कॉन्ग्रेस पार्टी पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा, “कुछ लोग मनरेगा को गड्ढों वाली योजना कहते थे। जब तक आपकी सरकार थी उसमें गड्ढे खोदने का ही काम होता था। लेकिन मुझे ये कहते हुए प्रसन्नता और गर्व है कि इस योजना की शुरुआत आपने की लेकिन इसे परिमार्जित हमने किया।”

उन्होंने कहा, “कई बार विपक्ष की तरफ से ये बात सामने आती है कि आप कहते हैं कि सब मोदी जी की सरकार ने किया है पिछली सरकारों ने तो कुछ भी नहीं किया। मैं इस मामले में ये कहना चाहता हूँ कि इस प्रकार का आरोप लगाना उचित नहीं है। मोदी जी ने सेंट्रल हॉल में अपने पहले भाषण में और 15 अगस्त को भी उन्होंने कहा था कि मेरे पूर्व जितनी भी सरकारे थी उन सबका योगदान देश के विकास में अपने-अपने समय पर रहा है।”

मोदी सरकार के कामों को लेकर राज्यसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार गाँव, गरीब और किसान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और आने वाले कल में भी रहेगी। किसान की आमदनी दोगुनी हो इसके लिए सरकार ने प्रधानमंत्री किसान योजना के माध्यम से 6,000 रुपए का योगदान दिया। आज हम ये कह सकते हैं कि दस करोड़ 75 लाख किसानों को 1,15,000 करोड़ रुपए डीबीटी से उनके अकाउंट में भेजने का काम किया है।”

भारत, अमेरिका के बाद अब ईरान ने भी पाकिस्तान को घर में घुसकर धोया, सर्जिकल स्ट्राइक कर छुड़ा लाया अपने 2 सैनिक

पाकिस्तान पर एक और सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया है। इस बार ईरान ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर अपने 2 सैनिकों को छुड़ाया है। बताया जा रहा है कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने पाकिस्तान में घुसकर अपने सैनिकों को रिहा करा लिया। ईरान की फोर्स ने दावा किया है कि पाकिस्तान के अंदर एक खुफिया ऑपरेशन में अपने दो सैनिकों को छुड़ा लिया गया है।

इसके साथ ही, पाकिस्तान की सीमा के अंदर जाकर सर्जिकल स्ट्राइक करने वाला अब ईरान तीसरा देश बन गया है। इससे पहले, अमेरिका और भारत ने पाकिस्तान पर ऐसे सर्जिकल स्ट्राइक किए थे। जानकारी के मुताबिक, सर्जिकल स्ट्राइक को मंगलवार (जनवरी 02, 2021) रात अंजाम दिया गया था।

बताया जा रहा है कि इस ऑपरेशन में कई पाकिस्तानी सैनिक भी मारे गए हैं, जो आतंकवादियों को कवर फायर दे रहे थे। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खुफिया जानकारी के आधार पर पाकिस्तान के काफी अंदर जाकर ऑपरेशन को अंजाम दिया। इसमें उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे से अपने दो सैनिकों को भी छुड़ा लिया है।

आईआरजीसी ने बताया कि ईरान के सैनिकों ने बलूचिस्तान में घुसकर जैश अल-अदल के कब्जे से अपने सैनिकों को मुक्त कराया है। इसी अल-अदल आतंकी संगठन ने ही भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को भी अगवा किया था। जिसके बाद आतंकी संगठन ने कुलभूषण को पाकिस्तानी एजेंसी को सौंप दिया। कुलभूषण तभी से पाकिस्तान की जेल में बंद हैं और भारतीय विदेश मंत्रालय लगातार उन्हें मुक्त कराने की कोशिश में लगा है।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से जारी आधिकारिक बयान में भी सर्जिकल स्ट्राइक की पुष्टि की है। बयान में कहा गया है कि आतंकी समूह की ओर से अगवा किए गए दो बॉर्डर गार्ड्स को मुक्त कराने के लिए मंगलवार को सफलतापूर्वक इस ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

जैश उल-अदल या जैश अल-अदल एक सलाफी जिहादी आतंकी संगठन है, जो मुख्यतौर पर दक्षिणी-पूर्वी ईरान में सक्रिय है। यह आतंकवादी संगठन ईरान में नागरिक और सैन्य ठिकानों पर कई हमले कर चुका है।

बलूचिस्तान में निर्दोष लोगों के नरसंहार के लिए इस आतंकी संगठन को पाकिस्तानी सेना से पूरा समर्थन मिलता है। ईरान द्वारा मुक्त कराए गए ईरानी बॉर्डर गार्ड्स के जवानों को 2018 में अगवा किया गया था और पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी समूह ने पाकिस्तान में तब से बंधक बना रखा था। अब सर्जिकल स्ट्राइक के जरिए उन्हें छुड़ा लिया गया है। इस ऑपरेशन को बलूचिस्तान प्रांत में अंजाम दिया गया।

दलाल, संघी कुत्ता और भी बहुत कुछः राम मंदिर के लिए दान दिया तो उदय प्रकाश के ‘अपने’ हुए बेगाने

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण अभियान चल रहा है। इसके लिए घर-घर जाकर लोगों से दान माँगा जा रहा है। आम से लेकर खास तक इसमें योगदान कर रहे हैं। लेकिन, वामपंथियों और इस्लामवादियों को यह नहीं सुहा रहा। कवि उदय प्रकाश को भी इस जमात ने राम मंदिर के लिए दान देने पर जमकर खरी-खोटी सुनाई है। वैसे उदय प्रकाश कभी इस जमात की ऑंखों के तारे होते थे।

उदय प्रकाश ने दान की जानकारी अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए गुरुवार (फरवरी 4, 2021) को दी। उन्होंने लिखा  “आज की दान-दक्षिणा। अपने विचार अपनी जगह पर सलामत।”

बता दें कि उदय प्रकाश पत्रकार होने के साथ-साथ शिक्षाविद, कवि और आलोचक भी हैं। उन्होंने साल 2015 में कन्नड़ साहित्यकार एमएम कलबुर्गी की हत्या के बाद साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटा दिया था। उस समय वह वामपंथी गिरोह के प्रिय चेहरों में से एक थे। लेकिन जब उन्होंने राम मंदिर के लिए दान देने का प्रमाण दिया, तो यही लोग उन पर बिफर गए।

जगदीप सिंह ने कहा, “बहुत से प्रगतिशीलों का पतन बुढ़ापे में होते देख रहे हैं। खैर आपका व्यक्तिगत मसला है। आप स्वतंत्र हैं। इससे जाहिर होता है अवस्था के अनुसार व्यक्ति के सरोकार बदल जाते हैं। आपके लिखे को आपके व्यक्तित्व से अलग करके ही देखना होगा।”

शेषनाथ पांडे लिखते हैं, “कहीं कुछ भी ठीक नहीं चल रहा सर। आपका यह कदम ‘ठीक नहीं चलने देने’ की तरफ धकेल रहा है। विनम्र असहमति आप से।”

फैक अतीक किदवई कहते हैं, “मुस्लिमों पर ये किसी अट्टहास से कम नहीं है।”

मजदूर झा ने कहा, “आपने जो किया उस पर बात हो सकती है लेकिन आपकी दलीलें तो दलाली है। आप जैसे दलित चिंतको की आखिरी परिणति यही है। राजेन्द्र जी ने कहा था कि रोना बंद कीजिए और अपने समाज के लिए काम कीजिए। लेकिन आपको तो कायराना आँसू टपकाने की आदत है। डूब मरो और सिम्पैथी कार्ड खेलो।”

लेखक अनुराग अनंत लिखते हैं, “उदय सदैव उदय नहीं होता वह अस्त भी होता है। यह दौर आँखों से पर्दा हटने का दौर है। मैं भीतर से इस नतीज़े पर पहुँच रहा हूँ कि कोई भी व्यक्ति सेलिब्रिटी नहीं। कोई हीरो नहीं। कोई आदर्श नहीं। सब बस हैं। जैसे होना चाहते हैं वैसे हैं। जैसे आप इस समय नृत्य करना चाहते हैं और आप कर रहे हैं।”

शादाब आनंद लिखते हैं, “हिंदी साहित्य का बड़ा वर्ग अंदर से हमेशा साम्प्रदायिक रहा है, हम जिसे प्रगतिशील धड़ा समझते हैं उनमें भी ऐसे लोग भरे पड़े हैं। शर्मनाक।”

विजेंद्र सोनी कहते हैं, “थोड़ा सा पाने के चक्कर में बहुत कुछ खो दिया, वैसे भी उदय प्रकाश के आगे सिंह लगाना इस समय उनके अपने इलाके की फौरी जरूरत है।”

अब्बास पठान ने लिखा है, “इसी बिना रीढ़ के साहित्यकार वर्ग पर अक्सर मैं लानत भेजता रहता हूँ। क्या आपकी कलम में ये पूछने की हिम्मत है कि इससे पहले किया गया अरबों रुपये का चन्दा किधर है और ऐसी कौनसी इमारत का नक्शा जारी कर दिया गया है, जिसकी लागत 5000 करोड़ आने वाली है।”

6 फरवरी को ‘शांतिपूर्ण’ चक्का जाम का राकेश टिकैत का ऐलान, 26 जनवरी की हिंसा देख दिल्ली पुलिस मुस्तैद

कृषि सुधार क़ानूनों का विरोध बीते 72 दिनों से जारी है और कथित ‘आंदोलन’ की आड़ में अराजकता की कई घटनाएँ सामने आईं। इस बात की सटीक मिसाल थी 26 जनवरी 2021 को राजधानी दिल्ली में हुई ‘ट्रैक्टर रैली’ जिसमें बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। हाल ही में प्रदर्शनकारियों ने ऐलान किया था कि 6 फरवरी को दोपहर 12 बजे से दिन के 3 बजे तक चक्का जाम किया जाएगा। अब इस बारे में राकेश टिकैत ने बयान दिया है। उनका कहना है कि ये चक्का जाम 'शांतिपूर्ण' होगा। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने 6 फरवरी के चक्का जाम पर अपने समर्थकों से अपील की। अपील में उन्होंने कहा कि जो लोग प्रदर्शन स्थल पर नहीं आ सकते हैं, वह जहाँ कहीं भी हैं वहाँ रह कर ‘शांतिपूर्ण तरीके’ से चक्का जाम करें। चक्का जाम के दौरान किसी भी तरह की हिंसा और उपद्रव नहीं होना चाहिए। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों की किसानों के ‘चक्का जाम’ को लेकर दिल्ली पुलिस कमिश्नर के साथ बैठक जारी है। पुलिस अपनी तरफ से हर आपात स्थिति से निपटने की तैयारी कर रही है।    

इसके पहले संयुक्त किसान मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा था कि 6 फरवरी को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन होगा और इस दौरान वह रास्तों को बंद भी करेंगे। सरकार कुछ भी सुनने के लिए तैयार नही हैं ऐसे में अपनी बात पहुँचाने का इकलौता तरीका यही बचता है। किसान नेता जगतार सिंह बाजवा ने भी चक्का जाम को लेकर कहा था, “देश के तमाम प्रदेशों और शहरों के राजमार्गों पर 6 फरवरी को चक्का जाम किया जाएगा। प्रदर्शनकारी पहले ही दिल्ली में बैठे हुए हैं इसलिए यहाँ चक्का जाम के हालात नहीं होगे। देश के अन्य क्षेत्रों में कल (6 फरवरी 2021) चक्का जाम किया जाएगा।” 

गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर किसानों की ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसा को लेकर अभी तक कुल 38 FIR दर्ज़ की जा चुकी है और 84 आरोपितों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। यह जानकारी शनिवार (जनवरी 30, 2021) को दिल्ली पुलिस की ओर से दी गई थी। गणतंत्र दिवस के दिन दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों में किसान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच संघर्ष हुआ था, जिसमें कई लोग घायल हुए और काफी जगह तोड़-फोड़ हुई थी। 

इस दौरान सबसे बड़ा विवाद लाल किले पर फहराए गए झंडे और वहाँ हुई तोड़-फोड़ को लेकर हुआ था। लाल किला परिसर में हजारों प्रदर्शनकारियों ने घुसकर वहाँ मौजूद सामानों को तोड़ा और प्राचीर के पास एक धार्मिक झंडा फहरा दिया था। इस दौरान झड़प में करीब 300 से अधिक पुलिसवाले घायल हो गए थे। इस घटना की दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच जाँच कर रही है। कई टीमों को दोषियों की पहचान करने में लगाया गया है।

हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने वाले मुनव्वर फारूकी को SC ने दी अंतरिम जमानत, यूपी के प्रॉडक्शन वारंट पर भी रोक

हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में जेल में बंद स्टैंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी को सुप्रीम कोर्ट ने राहत प्रदान करते हुए अंतरिम जमानत दे दी है। सुप्रीम कोर्ट में मुनव्वर फारूकी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे अंतरिम जमानत पर रिहा करने से मना कर दिया गया था।

न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ के समक्ष फारूकी की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश पुलिस को नोटिस भी जारी किया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 28 जनवरी को अपने आदेश में फारूकी को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा था कि सौहार्द्र को बढ़ावा देना उनका संवैधानिक कर्तव्य है।

मध्य प्रदेश में उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के न्यायाधीश रोहित आर्य की एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि प्रकरण में जाँच जारी है, लिहाजा गुण-दोष के आधार पर फिलहाल निष्कर्ष नहीं निकाला जा रहा है, लेकिन प्रथम दृष्टया दोनों आवेदकों के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप सही दिखाई देते हैं। ऐसी परिस्थिति में आवेदकों को जमानत नहीं दी जा सकती हैं।

इस फैसले में न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि हमारा देश बेहद खूबसूरत है, विविध संस्कृति, भाषा, धार्मिक मत, भौगोलिक विविधता का सुंदर ताना-बाना है। हमारा संविधान जहाँ हम नागरिकों को कई अधिकार देता है, वहीं हम नागरिकों के कई संवैधानिक दायित्व भी हैं। प्रदत्त अधिकारों और कर्तव्यों के बीच संतुलन रख हम इस विविधता को संरक्षित रखें, किसी की भावनाओं को आहत नहीं करें।

सुप्रीम कोर्ट ने फारूकी के खिलाफ दूसरे राज्यों में दाखिल मुकदमों को खारिज किए जाने की माँग वाली याचिका पर भी नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने फारूकी की जमानत याचिका पर मध्यप्रदेश सरकार सहित कई अन्य को भी नोटिस जारी किया है। इसके अलावा कोर्ट ने यूपी के दर्ज केस में जारी प्रॉडक्शन वारंट पर भी तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

दम भर मार खाया था

इंदौर के एक इवेंट में मुनव्वर ने देवी-देवताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। तब घटना की जानकारी मिलते ही हिन्दू संगठन के कई सदस्यों ने वहाँ पहुँच कर उसकी पिटाई कर दी थी। इसके बाद वे मुनव्वर फारूकी और आयोजक को थाने लेकर गए थे।

अहमदाबाद निकाय चुनाव में PM मोदी की भतीजी को भी नहीं मिला टिकट: पार्टी का यह नियम आया आड़े हाथ

एक तरफ जहाँ देश की राजनीति में परिवारवाद और भाई भतीजावाद पर बहस छिड़ी है। वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भतीजी सोनल मोदी को आगामी अहमदाबाद निकाय चुनाव (ahemdabad municipal body election) के लिए भाजपा का टिकट नहीं मिला।  

पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी की भतीजी को अहमदाबाद के बोदकदेव वार्ड से निकाय चुनाव लड़ने के लिए टिकट देने से इंकार कर दिया है। गुजरात की भाजपा इकाई द्वारा जारी की उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम मौजूद नहीं था। सोनल मोदी गृहिणी हैं, उनका कहना है कि वह प्रधानमंत्री मोदी की भतीजी के रूप में चुनाव नहीं लड़ना चाहती हैं बल्कि एक आम प्रत्याशी के रूप में चुनाव का हिस्सा बनना चाहती हैं। संगठन उन्हें चुनाव लड़ने के लिए टिकट दे या न दे वह पार्टी के लिए समर्पित होकर अपना काम जारी रखेंगी। 

1 फरवरी 2021 को भारतीय जनता पार्टी की गुजरात इकाई ने ऐलान किया था कि पार्टी के किसी भी नेता के रिश्तेदार को टिकट नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा ऐसे नेता जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है या जो 3 बार चुने जा चुके हैं उन्हें भी पार्टी चुनाव का टिकट नहीं देगी। गुजरात भाजपा मुखिया सीआर पाटिल ने इस मुद्दे पर कहा कि यही नियम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भतीजी सोनल मोदी पर भी लागू होते हैं इसलिए उन्हें पार्टी के टिकट से वंचित रखा गया है।

इस बारे में मीडिया वालों से बात करते हुए नरेन्द्र मोदी के भाई और सोनल मोदी के पिता प्रहलाद मोदी ने कहा, “यह परिवारवाद का विषय नहीं है। हमारे परिवार ने अपने फ़ायदे के लिए कभी नरेन्द्र मोदी के नाम का इस्तेमाल नहीं किया। हम सभी ने अपनी रोटी खुद से कमाई है, मैं खुद एक राशन की दुकान चलाता हूँ। मैं नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद उनके बंगले पर कभी नहीं गया। हम खुद एक साधारण जीवन जीते हैं।” प्रहलाद मोदी नरेन्द्र मोदी के बड़े भाई हैं और गुजरात उचित दर दुकान संघ (Gujarat Fair Price Shops Association) के अध्यक्ष भी हैं। 

गुजरात में 21 फरवरी को 6 नगरपालिका के चुनाव होने हैं, इसमें सूरत, अहमदाबाद, वड़ोदरा, राजकोट, जामनगर और भावनगर शामिल है। हाल ही में भाजपा की प्रदेश इकाई ने निकाय चुनाव के लिए 576 प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। इसके अलावा 28 फरवरी को 81 नगरपालिकाओं, 231 तालुका पंचायत और 31 जिला पंचायत के चुनाव होने हैं।

1857 से लेकर 1947 के बीच स्वतंत्रता संग्राम के लिए बलिदान देने वाले वीरों को सम्मानित करेगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार (फरवरी 04, 2021) को घोषणा की कि राज्य सरकार उन स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित करेगी, जिनकी मृत्यु 1857 और 1947 के बीच हुई थी, और जिन सैनिकों ने स्वतंत्रता के बाद हुए युद्ध में अपनी जान गँवाई।

बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने गोरखपुर में चौरी-चौरा घटना के शताब्दी समारोह का शुभारंभ करते हुए कहा कि इस अवसर पर पुलिस बैंड स्मारक पर देशभक्ति गीत बजाएगा, वहीं कवि गोष्ठी और दीपोत्सव का भी आयोजन किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों पर, शहीद स्मारक में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। विद्यालयों में वाद-विवाद, चित्रकला, निबंध लेखन प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा।”

कल के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को भी सम्मानित किया और शारीरिक रूप से विकलांग लोगों को 100 ट्राइ-साइकिल दीं। ऐतिहासिक चौरी-चौरा घटना में जान गँवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि के रूप में, सीएम आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से अपनी तस्वीर हटाकर डिस्प्ले पिक्चर भी इस ऐतिहासिक घटना की ही लगाई। अधिकारियों ने कहा कि यह पहली बार था जब किसी सीएम ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से अपनी तस्वीर हटा दी।

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौरी-चौरा घटना के शताब्दी समारोह पर एक डाक टिकट जारी किया और कहा कि कई कारणों से इस घटना को बस आगजनी की मामूली घटना के रूप में संदर्भित किया गया था, लेकिन यह उससे भी कहीं अधिक महत्वपूर्ण था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 100 वर्ष पहले चौरी चौरा में जो हुआ वो सिर्फ एक आगजनी की घटना या एक थाने में आग लगा देने की घटना नहीं थी, चौरी चौरा का संदेश बहुत बड़ा और व्यापक था। उन्होंने कहा कि आग सिर्फ थाने में नहीं लगी थी, आग जन-जन के मन में लगी थी। यह देश के सामान्य नागरिकों का स्वत: स्फूर्त संग्राम था।

दिल्ली पुलिस के एनकाउंटर में कुख्यात शाहिद को लगी गोली: 8 राज्यों की पुलिस को थी तलाश, 40 मामलों में आरोपित

उत्तर प्रदेश पुलिस की तर्ज पर दिल्ली पुलिस ने भी अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव किया है। अपराधियों को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस कार्रवाई के लिहाज़ से आक्रामक होती नजर आ रही है। संभवतः, यही वजह है कि दिल्ली पुलिस को हाल ही में कार्रवाई के दौरान एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। 

गुरुवार (4 फरवरी 2021) की रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और अपराधियों के बीच मुठभेड़ (एनकाउंटर) हो गई। इस मुठभेड़ के दौरान एक बदमाश को गोली लगी, रिपोर्ट्स के मुताबिक़ उस बदमाश पर अलग-अलग पुलिस थानों में लगभग 40 मामले दर्ज हैं। फ़िलहाल उस बदमाश को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

7 राउंड गोलियाँ चलाई गई

एनकाउंटर की घटना राजधानी दिल्ली के सरिता विहार इलाके में हुई, दिल्ली पुलिस के इस एनकाउंटर में लगभग 7 राउंड गोलियाँ चलाई गई। इस बीच एक बदमाश को पैर में गोली लगी और वह बुरी तरह घायल हुआ। पुलिसकर्मियों ने घायल अपराधी की पहचान शाहिद के रूप में की है।

इस मुठभेड़ के ठीक बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल उसे नज़दीकी अस्पताल लेकर गई और वहाँ उसका उपचार जारी है। घटना के समय शाहिद कालिंदीकुंज से देर रात लौट कर रेलवे लाइन के पास सरिता विहार की ओर जा रहा था। पुलिस ने शाहिद के पास से .32 की एक सेमीऑटोमैटिक पिस्तौल, 6 ज़िंदा कारतूस और 4 खाली गोलियाँ बरामद की हैं।  

8 राज्यों की पुलिस कर रही थी तलाश

शाहिद हरियाणा स्थित मेवात के अपराधियों के गिरोह का सदस्य है और उस पर दिल्ली समेत अन्य राज्यों में लूट और एटीएम तोड़ कर डकैती करने का आरोप है। देश के कुल 8 राज्यों की पुलिस शाहिद को इन अपराधों की वजह से तलाश रही थी लेकिन अब तक वह पुलिस से बचने में कामयाब रहा था। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस शाहिद पर आगे की कार्रवाई करेगी।  

उत्तर प्रदेश पुलिस का एनकाउंटर

हाल ही में उत्तर प्रदेश के बागपत में पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। ये मुठभेड़ बिनौली पुलिस चौकी से कुछ दूर स्थित बाईपास पर मंगलवार (फ़रवरी 2, 2021) की देर रात हुई थी। दोनों ओर से हुई गोलीबारी में 1 लाख का इनामी बदमाश जावेद मारा गया था। बड़ौत क्षेत्र में मारा गया जावेद दिल्ली पुलिस के एक सिपाही की हत्या के मामले में पहले से ही वॉन्टेड था। घटनास्थल से कार्बाइन और पिस्तौल भी बरामद हुई थी।   

मीडिया गिरोह के कोरोना वैक्सीन से 19 स्वास्थ्यकर्मियों की मौत वाले नैरेटिव को मोदी सरकार ने बताया फर्जी

केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार (फरवरी 04, 2021) को ‘COVID-19 वैक्सीन से 19 स्वास्थ्यकर्मियों की मृत्यु’ की बात को एकदम निराधार नैरेटिव बताया है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि कोरोना वैक्सीन लगने और स्वास्थ्यकर्मियों की मौत के बीच सम्बन्ध बैठाती हो, ऐसी कोई भी लिंक नहीं मिलती और जो भी मौत हुई हैं उनका जो भी विवरण होगा, विशेषज्ञों द्वारा विचार-विमर्श के बाद सार्वजनिक किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि 16 जनवरी को राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था, जिसमें तीन करोड़ से अधिक स्वास्थ्य देखभाल और फ्रंटलाइन वर्कर्स को शुरू में प्राथमिकता दी गई। इसके बाद ही कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि इन स्वास्थ्यकर्मियों की मौत वैक्सीन लगने के कारण हुई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक सवाल के जवाब में, स्वास्थ्य मंत्रालय में सचिव राजेश भूषण ने कहा कि भारत में टीकाकरण की निगरानी के बाद प्रतिकूल घटनाओं के लिए एक बहुत ही सशक्त और मजबूत प्रणाली (AEFI) है और 19 लोगों की मृत्यु के कारण के बारे में जानकारी जल्द ही सार्वजानिक की जाएगी।

निति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा कि अभी तक टीकों को किसी भी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। पॉल ने कहा, “यह निर्धारित किया जाता है कि ये टीके सुरक्षित हैं। 45 लाख दवा देने के बाद, कुछ समय में कम से कम दुष्प्रभाव होते हैं, जैसे 1,150 व्यक्तियों में से एक व्यक्ति में साइड इफेक्ट मिला है और किसी वैक्सीन के कारण कोई भी मौत नहीं हुई है। यह साबित करता है कि ये टीके बेहद सुरक्षित हैं।”

टीकाकरण से होने वाली मौतों के बारे में विस्तार से बताते हुए, स्वास्थ्य मंत्रालय में सचिव राजेश भूषण ने कहा कि राज्य एईएफआई समितियों ने सभी 19 मौतों पर विचार-विमर्श किया है और इसके पीछे वैक्सीन का प्रभाव होने का कोई सबूत नहीं है, लेकिन एक बार जब राष्ट्रीय एईएफआई समिति की बैठक और विचार-विमर्श होगा, तो स्पष्ट हो जाएगा।

उन्होंने कहा, “टीका लेने वाले 19 लोगों की मौतें हुई हैं। इन सभी मौतों का पोस्टमार्टम तीन डॉक्टरों के एक बोर्ड द्वारा किया गया। राज्य की AEFI समितियों ने इन सभी मामलों पर विचार-विमर्श किया है। इनकी मौत टीकाकरण के कारण हुई हो, इसका कोई सबूत नहीं है। राष्ट्रीय AEFI समिति इस पर विचार और विमर्श कर रही है और सार्वजनिक डोमेन पर साझा किया जाएगा।