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प्रेमिका फैसल ने मंगेतर जुबेर और माँ शाहीन के साथ मिलकर नीरज गुप्ता का सिर धड़ से अलग किया: शव के टुकड़े कर ट्रेन से फेंका

देश की राजधानी दिल्ली में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। जहाँ प्रेमिका फैसल ने अपनी माँ शाहीन नाज और मंगेतर जुबेर के साथ मिलकर मॉडल टाउन इलाके के कारोबारी नीरज गुप्ता की बेरहमी से हत्या कर दी। वहीं पुलिस से बचने के लिए उसके शव के टुकड़े कर उसे राजधानी ट्रेन से गोवा और दिल्ली के बीच ले जाकर फेंक दिया। पुलिस ने मामले के तीनों आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, सन्न कर देने वाली यह घटना दिल्ली के आदर्श नगर इलाके की है। दरसल, 14 नवंबर को कारोबारी नीरज गुप्ता घर से किसी से मिलने के लिए गए थे। लेकिन जब घर पर वापस नहीं आए तो उनकी पत्नी ने आदर्श नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि फैसल नाम की महिला जो नीरज गुप्ता के यहाँ काम करती थी, उसका नीरज गुप्ता से अवैध संबंध चल रहा था।

मामले की जाँच कर रहे डीसीपी नॉर्थ वेस्ट विजयंता आर्या के मुताबिक, नीरज गुप्ता के ऑफिस में फैसल नाम की युवती जॉब करती थी। इसी दौरान नीरज से उसका प्रेम प्रसंग चलने लगा। नीरज शादीशुदा थे और बच्चे भी हैं। इस बीच फैसल के घर वालों ने उसकी सगाई जुबेर नाम के शख्स से कर दी। इसका पता नीरज को लगा तो उसने फैसल से इस बारे में बात की। जिसके बाद दिवाली से दो दिन पहले फैसल ने आदर्श नगर केवल पार्क स्थित अपने घर पर नीरज को बुलाया। वहीं जब नीरज वहाँ पहुँचे तो वहाँ मौजूद फैसल, उसकी माँ शाहीन और मंगेतर जुबेर से उनकी बहस हो गई।

पुलिस के मुताबिक, बहस इतनी बढ़ गई कि सब हाथापाई पर उतर आए। वहीं गुस्से में नीरज ने फैसल को धक्का दे दिया। क्रोधित जुबेर ने ईंट से नीरज के सिर पर प्रहार कर दिया। और लोहे की रॉड से भी हमला कर दिया। मगर जुबेर का गुस्सा इतने पर ही नहीं रुका उसने हैवानियत की हद पार करते हुए नीरज के पेट पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया। फिर उसका गला धड़ से अलग कर दिया। नीरज की हत्या के बाद तीनों ने उसके शव को ठिकाने लगाने की प्लानिंग की।

कथिततौर पर नीरज को मरने के बाद तीनों ने मिलकर उसके बॉडी के टुकड़े कर दिए। और एक बड़ा सूटकेस खरीदा शरीर को अंदर भर दिया, एक ऐप-आधारित टैक्सी किराए पर ली और इसे निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर ले गए। रिपोर्ट के अनुसार जुबेर ट्रेन में पैंट्री में काम करता था जिसकी वजह से उसका काम और आसान हो गया। लिहाजा उसने आसानी से नीरज के शव को राजधानी ट्रेन से ले जाकर उसे दिल्ली गोवा के बीच भरूच में फेंक दिया।

बता दें पुलिस ने हत्या में कथित रूप से इस्तेमाल चाकू, लोहे की रॉड और ईंट बरामद की है। पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया है अधिकारी ने कहा, हम शव को बरामद करने के प्रयास कर रहे हैं। साथ ही आगे की जाँच पड़ताल जारी है।

ओबामा के खिलाफ हो FIR वरना सड़कों पर फैलेगी अराजकता: राहुल और मनमोहन सिंह पर टिप्पणी से आहत हुए कॉन्ग्रेसी

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक वकील ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के ख़िलाफ़ लालगंज दीवानी कोर्ट में शिकायत दर्ज करवाई है। वकील का नाम ज्ञान प्रकाश शुक्ल है जो ऑल इंडिया रूरल बार असोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। 

ज्ञान प्रकाश की नाराजगी ओबामा की किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड (A promised Land)’ में राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह पर की गई टिप्पणियों से संबंधित है। इस शिकायत में माँग की गई है कि भारतीय नेताओं के अपमान और उनके समर्थकों की भावना को आहत करने के लिए ओबामा के ख़िलाफ़ एफआईआर होनी चाहिए। अब इस शिकायत पर 1 दिसंबर में सुनवाई होगी ।

शिकायतकर्ता का कहना है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह के ख़िलाफ़ अवांछित बयान देकर भारतीय निर्वाचन प्रणाली की अवहेलना की है और साथ ही निर्वाचन आयोग जैसे नियामक संस्थान के साथ संविधान की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया है।

वकील का दावा है कि जिन नेताओं के लिए ओबामा ने अपनी किताब में टिप्पणी की है उनके करोड़ों समर्थक हैं और वह ऐसी टिप्पणी से आहत हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि आहत हुए समर्थक किताब के ख़िलाफ़ सड़कों पर आ गए तो अराजकता फैल सकती है इसलिए ओबामा के ख़िलाफ एफआईआर हो। उनका यह भी कहना है कि अगर यह एफआईआर नहीं हुई तो वह अमेरिकी दूतावास के बाहर उपवास पर चले जाएँगे।

‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में राहुल गाँधी और मनमोहन सिंह पर टिप्पणी

17 नवंबर को बाजार में आई ओबामा की ‘ए प्रॉमिस लैंड’ नामक किताब में उन्होंने अपनी भारतीय यात्रा का जिक्र करते हुए यूपीए कार्यकाल पर चर्चा की है। उन्होंने इस किताब में राहुल गाँधी को एक अनगढ़ छात्र लिखा है।

उन्होंने कहा है, “उनमें (राहुल गाँधी) एक ऐसे ‘घबराए हुए और अनगढ़ (Unformed- जो तराशा न गया हो)’ छात्र के गुण हैं, जिसने अपना पूरा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है और वह अपने शिक्षक को प्रभावित करने की चाहत रखता है, लेकिन उसमें ‘विषय में महारत हासिल’ करने की योग्यता या फिर जूनून की कमी है।”

ऐसे ही पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ हुई मुलाकात को याद करते हुए उन्होंने लिखा कि मनमोहन सिंह ने 26/11 के बाद पाकिस्तान पर हमला करने की माँग का विरोध किया था, लेकिन उनका यह निर्णय उन्हें राजनीतिक तौर पर महँगा पड़ गया।  उन्होंने मनमोहन सिंह के लिए लिखा, “उन्हें (मनमोहन सिंह) डर था कि मुस्लिमों के ख़िलाफ बन रही भावना ने भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के प्रभाव को मजबूती दी है।”

‘जमीन पर जीरो है कॉन्ग्रेस’: सिब्बल के बाद पी चिदम्बरम ने पार्टी को बताया महागठबंधन की सबसे कमज़ोर कड़ी

हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनावों और कई राज्यों के उपचुनावों में लचर प्रदर्शन के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी को अपने ही दिग्गज नेताओं से तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। इस कड़ी में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के बाद अब यूपीए सरकार में वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने बयान दिया है। उन्होंने कॉन्ग्रेस के नीतिगत ढाँचे की आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी के प्रदर्शन में पिछले कुछ समय से लगातार गिरावट ही आई है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को इतना साहसी बनना होगा कि गिरावट के उन कारणों को पहचाने और उन पर काम करे। 

कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम की तरफ से यह प्रतिक्रिया बिहार विधानसभा और मध्य प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश उपचुनाव में दयनीय प्रदर्शन के बाद सामने आई है। चिदंबरम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने अपनी संगठनात्मक क्षमता से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा। दैनिक भास्कर को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कॉन्ग्रेस के प्रदर्शन पर खुल कर आलोचना की। चिदंबरम ने कहा कि उपचुनाव इस बात प्रमाण हैं कि कॉन्ग्रेस की संगठनात्मक दृष्टिकोण से कोई पकड़ नहीं रह गई है। इतना ही नहीं जिन राज्यों में उपचुनाव हुए हैं उनमें कॉन्ग्रेस कमज़ोर ही हुई है। 

महागठबंधन की हार अपना नज़रिया रखते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि महागठबंधन के जीतने की उम्मीदें थीं फिर भी हम जीतते जीतते हार गए। इन तमाम आलोचनात्मक दलीलों के बाद कॉन्ग्रेस पार्टी के लिए आशावादी नज़र आते हुए उन्होंने कहा कि कुछ ही समय पहले कॉन्ग्रेस ने हिन्दी बेल्ट 3 राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के चुनावों में जीत हासिल की थी। 

इसके बाद एआईएमआईएम और सीपीआई (एमएल) का उल्लेख करते हुए चिदंबरम ने कहा कि छोटे दल अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं क्योंकि इनकी ज़मीनी स्तर पर पकड़ बेहद मजबूत है। कॉन्ग्रेस, राजद के नेतृत्व वाले महागठबंधन की सबसे कमज़ोर कड़ी साबित हुई है। पार्टी को तमाम तरह के बदलावों की ज़रूरत है और ऐसे बदलाव नहीं होने की सूरत में राजनीतिक नुकसान बढ़ता ही जाएगा। 

अंत में कॉन्ग्रेस नेता ने कहा कि पार्टी ने अपनी संगठनात्मक क्षमता से ज़्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा। यह एक बड़ा कारण था कि कॉन्ग्रेस इतनी कम सीटों पर जीत हासिल हुई जबकि भाजपा और उसके सहयोगी दल पिछले 20 वर्षों से चुनाव जीत रहे हैं। पार्टी को सिर्फ 45 उम्मीदवार उतारने चाहिए थे, शायद तब बेहतर नतीजे हासिल होते। इसके ठीक पहले कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने भी संगठन के शीर्ष नेतृत्व पर कई सवाल खड़े किए थे। 

उनका कहना था कि हार दर हार के बाद पार्टी के नेतृत्व ने इस प्रक्रिया को अपनी नियति मान कर स्वीकार कर लिया। कपिल सिब्बल के इस बयान पर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सलमान खुर्शीद ने आलोचना की थी। इन्होंने यहाँ तक कह दिया था कि पार्टी के भीतर रह कर पार्टी को नुकसान पहुँचाने वाले नेता खुद बाहर चले जाएं। इसके अलावा लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन ने भी कपिल सिब्बल के बयान पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कपिल सिब्बल को पार्टी छोड़ ही देनी चाहिए।     

महाराष्ट्र: डिप्टी CM अजित पवार के पड़ोसी ने की आत्महत्या, NCP नेताओं पर लगाया उत्पीड़न का आरोप

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पड़ोसी ने बारामती में आत्महत्या कर ली। उसने अपने सुसाइड नोट में अनेक स्थानीय एनसीपी नेताओं का ज़िक्र किया है और उन्हें ही अपनी मृत्यु के लिए जिम्मेदार ठहराया है। समाचार वेबसाइट ‘आज तक’ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़, बारामती के व्यवसायी प्रीतम शाह ने इसलिए आत्महत्या कर ली क्योंकि कई स्थानीय एनसीपी नेता रुपयों के लिए उनका उत्पीड़न कर रहे थे। 

बारामती के पुलिस इंस्पेक्टर ने इस घटना पर बात करते हुए विस्तार से जानकारी दी। इंस्पेक्टर नामदेव शिंदे ने बताया कि व्यवसायी प्रीतम शाह ने बेटे ने एनसीपी के नेताओं के विरुद्ध इस संबंध में मामला दर्ज कराया है। उसने आरोप लगाया है कि एनसीपी नेताओं ने उसके पिता का उत्पीड़न किया था। फ़िलहाल यह घटना पूरे बारामती में चर्चा का मुद्दा बनी हुई है, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ आरोपित एनसीपी नेता ने प्रीतम शाह को 30 फ़ीसदी की ब्याज दर पर कुछ धनराशि दी थी। 

प्रीतम शाह ने पूरी राशि लौटा दी थी इसके बावजूद एनसीपी नेताओं ने उनसे रुपए ऐंठना चाहते थे और इसके लिए उसने प्रीतम शाह को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था। इतना ही नहीं रिपोर्ट्स की मानें तो आरोपित एक बँगला तक अपने नाम करवाना चाहते थे। प्रीतम शाह के बेटे प्रतीक शाह ने दर्ज कराई गई शिकायत में कई नामों का उल्लेख किया है जिसमें अधिकांश एनसीपी के ही नेता हैं। 

इसमें जयसिंह अशोक देशमुख, कुणाल चंद्रकांत काले, संजय कोंदिबा काटे, विकास नागनाथ धनके, प्रवीण दत्तात्रेया गलिंदे,  हनुमंत सर्जेराव गवली, सुनील अवले (सनी), संघर अवले, मंगेश अमस का नाम शामिल है। इसमें से एक आरोपित बारामती बाज़ार समिति का पूर्व चेयरमैन है और अन्य सक्रिय रूप से एनसीपी का हिस्सा हैं।

तमाम आरोपितों में से बारामती नगरपालिका का पार्षद है और एक बारामती सहकारिता बैंक का निदेशक है। बारामती पुलिस ने इस प्रकरण में व्यवसायी का उत्पीड़न करने की धाराओं के अंतर्गत आरोपित नेताओं पर मामला दर्ज कर लिया है। अभी तक कुल 6 आरोपित नेता गिरफ्तार किए जा चुके हैं और 3 फ़रार चल रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी हुई है।   

पटाखे जलाने पर राशिद ने की मीना देवी और उसके बच्चों से मारपीट, महिला की मौत

उत्तर प्रदेश स्थित एटा जिले की एक घटना में पड़ोस में रहने वाले राशिद ने एक माँ और उसके बच्चों को पटाखे फोड़ने के लिए बुरी तरह पीटा। महिला को निर्ममता से पीटने पर उसे नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ महिला की मृत्यु हो गई। उसके बेटे ने गाँव के ही आरोपित युवक (राशिद) पर मामला दर्ज कराया है। फ़िलहाल आरोपित फ़रार चल रहा है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। 

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ घटना एटा जनपद के जैथरा थाना अंतर्गत झूरा गाँव की है। मंगलवार (17 नवंबर 2020) को 45 वर्षीय मीना देवी के बेटे नेपाल सिंह ने इस मामले पूरे की जानकारी दी। उसने बताया कि उसका छोटा भाई करन पड़ोस में रहने वाले हेमराज के बेटे के साथ रात के लगभग 8:30 बजे पटाखे फोड़ रहा था। इनके साथ गाँव का ही एक और युवक पटाखे जला रहा था। 

जिस जगह पर तीनों लोग पटाखे फोड़ रहे थे उसके ठीक सामने राशिद (पुत्र लाल मोहम्मद उर्फ़ लल्लन खान) नाम के युवक की परचून की दुकान है। उसने पटाखे फोड़ने की बात पर तीनों लड़कों की बुरी तरह पिटाई कर दी। शोरगुल होने पर मीना देवी बाहर आई और बचाव करने का प्रयास किया। राशिद ने मीना देवी के साथ भी उसी तरह का बर्ताव किया और उन्हें पीट पीटकर घायल कर दिया। इसके बाद उसने मीना देवी का गला दबा दिया, जिसकी वजह से वह बेहोश होकर गिर गई। 

अपनी माँ को बेहोश देखकर मीना देवी का बेटा करन घटनास्थल पर ही रोने लगा जिससे वहाँ गाँव के लोग इकट्ठा हुए। उन्होंने मीना देवी को जैथरा स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना पर विस्तार से जानकारी देते हुए थानाध्यक्ष विनय कुमार शर्मा ने बताया कि पूरा विवाद पटाखे फोड़ने को लेकर शुरू हुआ था।

उन्होंने कहा कि मारपीट के दौरान महिला को गंभीर चोट आई थी जिसकी वजह से उसकी मृत्यु हुई थी। शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और आरोपित राशिद की तलाश जारी है। महिला के शव का पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंपा जा चुका है।    

अक्षय बनकर 2 बच्चों का बाप डॉ. अकरम करता रहा नर्स का बलात्कार: अश्लील वीडियो बनाए, गर्भवती होने पर धर्मांतरण का बनाया दबाव

लव जिहाद का एक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में अकरम कुरैशी नाम के चिकित्सक (डॉक्टर) पर एक नर्स ने बलात्कार करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि जब नर्स गर्भवती हुई तब उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव भी बनाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, निजी क्लीनिक में काम करने वाले अकरम ने नर्स को अपने प्रेम जाल में फँसाया। फिर उसने शादी का झांसा देकर महीनों तक उस नर्स के साथ बलात्कार किया। 

विवाह की बात आने पर अकरम कुरैशी ने नर्स पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया। सबसे ज़्यादा हैरानी की बात है, नर्स 6 महीने की गर्भवती है। डॉक्टर अकरम कुरैशी पर यह आरोप भी लगाया गया है कि सबसे पहले उसने अपनी पहचान छुपाई और अपना नाम अक्षय बताया था। इसके अलावा उसने यह बात भी सामने नहीं आने दी कि वह शादीशुदा है और उसके दो बच्चे हैं। नर्स ने यह आरोप भी लगाया है कि अकरम ने कई महीनों तक उसे जबरन बंधक बना कर यातनाएं भी दी।   

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पीड़ित महिला एक निजी क्लीनिक में बतौर नर्स काम कर रही थी। आरोपित अकरम ने अपनी मज़हबी पहचान छुपा कर उसे बहलाना फुसलाना शुरू किया। आरोपों के मुताबिक़ अकरम कुरैशी ने कहा कि उसका तलाक हो चुका है और वह उससे (नर्स) से शादी करना चाहता है। इस दौरान उसने महीनों तक नर्स का शारीरिक शोषण किया, नर्स ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपित डॉक्टर ने आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए थे। जब भी वह शादी की बात करती थी डॉक्टर वही वीडियो के ज़रिए धमका कर उसे चुप करा देता था। 

जब नर्स गर्भवती हुई तब अकरम ने गर्भपात कराने का दबाव बनाया। जब नर्स ने ऐसा कराने से मना कर दिया तब डॉक्टर ने उसके साथ मारपीट की और धर्म परिवर्तन करने का दबाव बनाया। नर्स ने यह भी आरोप लगाया कि मंगलवार (17 नवंबर 2020) को जब वह डॉक्टर की पत्नी से मिली तब डॉक्टर की पत्नी ने उसके पेट पर लात मारी। इस हरकत की वजह से उसकी सेहत बदतर हो गई। इसके बाद वह किसी तरह वहाँ से बच कर निकली और पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई। नर्स के आरोपों के अनुसार अकरम कुरैशी ने उसका धर्म परिवर्तन कराने की पूरी तैयारी तक कर ली थी। उसने निकाहनामा (इस्लामी क़ानून के अनुसार वैवाहिक प्रमाण पत्र) तक तैयार करा लिया था। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पीड़ित महिला की साल 2012 में शादी हुई थी लेकिन कुछ कारणों की वजह से उसका तलाक हो गया था। तब से वह एक अस्पताल में बतौर नर्स काम कर रही थी। इसके बाद वह मुस्लिम डॉक्टर से संपर्क में आई जिसने खुद तलाकशुदा होने का दावा किया। डॉक्टर ने कहा था कि उसका एक बेटा है लेकिन सच तब सामने आया जब वह गर्भवती हुई। 

मुख्य आरोपित फरार

पुलिस ने इस मामले में अभी तक कुल 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। 

पुलिस द्वारा जारी किए गए बयान के मुताबिक़ इस मामले में दो लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। आरोपित अकरम कुरैशी की पत्नी और उसके भाई की गिरफ्तार हो चुकी है और संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

स्वरा ने लव-जिहाद को बताया हेट स्पीच, Zomato से विज्ञापन वापस लेने की माँग पर लोगों ने याद दिलाए भड़काऊ ट्वीट

ट्विटर ट्रोल स्वरा भास्कर ने एक बार फिर सस्ती लोकप्रियता के लिए फ़ूड डिलीवरी एप्लीकेशन जोमैटो (Zomato) को सोशल मीडिया वेबसाइट ट्विटर पर इसलिए घेरने प्रयास किया क्योंकि उसका प्रचार के बहाने समाचार चैनल रिपब्लिक टीवी (Republic TV) पर आ रहा था। 

स्वरा भास्कर के मुताबिक़, रिपब्लिक भारत ‘लव-जिहाद’ के विषय पर चर्चा करके समाज में घृणा फैलाता है और उस पर जोमैटो का विज्ञापन नज़र आने का मतलब है कि जोमैटो कथित तौर पर घृणा के प्रचार में रिपब्लिक टीवी का समर्थन करता है। इस पर नेटिज़न्स ने स्वरा भास्कर को उनके उन दिनों की याद दिलाई, जब दिल्ली दंगों के दौरान वह उपद्रवी और उग्र दंगाई मजहबी भीड़ को सड़कों पर उतरने के लिए उकसा रही थी।

इस पर ‘Defund the Hate’ नाम के ट्विटर हैंडल ने भी एक ट्वीट किया और अपने ट्वीट में रिपब्लिक भारत पर आने वाले ‘जोमैटो’ के विज्ञापन पर टिप्पणी की। टिप्पणी में उसने लिखा, “जोमैटो और दीपिंदर गोयल ने फीडिंग इंडिया (feeding india) का आर्थिक सहयोग किया क्योंकि उन्हें उस पर भरोसा था। क्या हम यह मान सकते हैं कि आप (जोमैटो) इस हेट स्पीच का समर्थन करते हैं क्योंकि आपका विज्ञापन रिपब्लिक भारत पर आता है? अगर हम गलत हैं तो अपने विज्ञापन आज ही वापस लीजिए।” इस ट्वीट में रिपब्लिक भारत में हुई पैनल चर्चा का छोटा सा हिस्सा दिखाया गया था जिसमें एक संत तर्कों के साथ लव जिहाद के मुद्दे पर अपने विचार रख रहे थे। 

इस ट्वीट का जवाब देते हुए स्वरा भास्कर ने ‘विवाद के बहाने चर्चा’ में आने का एक और अवसर लपक लिया और अपने ट्वीट में लिखा, “मैं जोमैटो की रेगुलर ग्राहक हूँ, क्या आप नफरत (उनके मुताबिक़ हेट स्पीच) को डीफंड (Defund) करने की योजना बना रहे हैं? क्या आप इन नफ़रत फैलाने वालों चैनलों (रिपब्लिक भारत) से अपना विज्ञापन बंद करवा सकते हैं। मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ कि मेरे द्वारा दिए गए रुपयों से इस तरह के सांप्रदायिक उन्माद को बढ़ावा दिया जाए। कृपया अपने ग्राहकों को इस बारे में स्पष्ट जानकारी दें।” 

इस मुद्दे पर चर्चा और विवाद का दायरा बढ़ने के बाद जोमैटो ने स्वरा भास्कर का जवाब दिया। जोमैटो ने अपने ट्वीट में लिखा, “हम अपने कंटेंट के अलावा किसी के भी कंटेंट को बढ़ावा नहीं देते हैं। फ़िलहाल हम इस मुद्दे को देख रहे हैं।”

लेकिन यहाँ तक पूरे मुद्दे के सिर्फ एक पहलू पर चर्चा हो रही थी, इसके बाद ट्विटर की जनता ने स्वरा भास्कर के साम्प्रदायिक कारनामों की लिस्ट सामने रख दी। दिल्ली दंगों के दौरान स्वरा भास्कर ने तमाम ट्वीट किए थे, जिसमें लोगों को सड़कों पर इकट्ठा होने से लेकर भारी संख्या में पहुँच कर उग्र होने की बात तक शामिल थी। 

एक ट्विटर यूज़र ने तो स्वरा भास्कर से पूछा कि देश की राजधानी में दंगों जैसे हालात के वक्त वह भीड़ को उकसा रही थीं। अगर रिपब्लिक नफरत फैला रहा है तो स्वरा की हरकतों को प्रेम फैलाना नहीं कहा जा सकता है। 

इसके बाद एक और ट्विटर यूज़र ने लिखा कि राष्ट्रवादियों और देशभक्तों की आबादी का एक बड़ा ग्राहक वर्ग जोमैटो से भी जुड़ा हुआ है। वह वर्ग अर्णब को देखता है और पूरे दिल से पसंद करता है, ये सभी लोग इंतज़ार में हैं कि जोमैटो इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है। 

एक ट्विटर यूज़र ने तो स्पष्ट तौर पर लिखा कि जोमैटो को अच्छी भली संख्या में अनइनस्टॉल करने के लिए तैयार रहिए। कोई भी रैंडम स्वरा किसी संस्थान पर अपना हुकुम नहीं चला सकती है, हम इस मुद्दे को बहुत करीब से देख रहे हैं। 

यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब जोमैटो इस तरह के सांप्रदायिक विवाद की वजह से सुर्ख़ियों में बना हुआ है। ऐसे ही हलाल-झटका का विवाद ज़ोमैटो विवाद के दौरान खुल कर सामने आया था। इसमें रेस्टोरेंट से घर पर खाने की डिलीवरी सर्विस देने वाली,ऐप-आधारित कंपनी पर आरोप लगा था कि एक तरफ वह ‘खाने का कोई मज़हब नहीं होता’ जैसी नैतिकता का ज्ञान बाँचती है, दूसरी ओर मुस्लिमों का तुष्टिकरण करने के लिए, 

उनकी ‘हलाल माँस ही चाहिए’ की माँग पूरा करने के लिए वह हर तरीके से तैयार रहता है। गौरतलब है कि हलाल माँस, अपनी मूल प्रकृति से ही भेदभाव वाली प्रथा है, जो गैर-मुस्लिमों को रोजगार के अवसर से वंचित करती है। यानि, हलाल माँस को वरीयता देने वाले ज़ोमैटो, मैक्डॉनल्ड्स आदि कॉर्पोरेट खुल कर कार्यस्थल पर भेदभाव (वर्कप्लेस डिस्क्रिमिनेशन) को बढ़ावा देते हैं, और बराबर के अवसरों (ईक्वल ऑपर्च्युनिटी) के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं।

इस्लाम अपनाने को मजबूर दलित महिला ऑटो-चालक, केरल की वामपंथी सरकार पर लगाया जातिगत भेदभाव का आरोप

केरल के कन्नूर की रहने वाली चित्रा लेखा नाम की एक दलित महिला ऑटो चालक ने घोषणा की है कि वह राज्य में सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के हाथों कथित रूप से जातिगत भेदभाव का सामना करने के बाद इस्लाम में धर्मांतरण करने जा रही हैं। केरल की चित्रा लेखा ने सोमवार, 16 नवंबर को एक फेसबुक पोस्ट के माध्यम से यह घोषणा की।

कथित तौर पर, चित्रा लेखा ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि केरल की सत्तारूढ़ सीपीएम पार्टी द्वारा उनकी जाति के कारण उन्हें लगातार निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि उसने सरकार या अदालतों से न्याय पाने की सारी उम्मीदें खो दी हैं। इसलिए, वह इस्लाम में परिवर्तित होकर अपनी दलित पहचान से छुटकारा पाने की योजना बना रही थी।

चित्रा ने लिखा कि उन्होंने 20 साल तक सीपीएम के जातिगत भेदभाव के खिलाफ अकेले संघर्ष किया और वह अब और नहीं सहन कर सकती। उन्होंने कहा कि वह सीपीएम को फर्जी धर्मनिरपेक्ष पार्टी कहते हुए कहा कि वह उसके डर में जीना नहीं चाहती।

सीपीएम सरकार ने छीन ली थी पिछली सरकार द्वारा आवंटित जमीन

कथित तौर पर, चित्रा लेखा ने पहले आरोप लगाया था कि सीपीएम कार्यकर्ताओं ने उन्हें जातिगत भेदभाव के कारण काम नहीं करने दिया। उसका ऑटोरिक्शा भी कथित रूप से जला दिया गया था।

चित्रा लेखा को दो साल पहले कन्नमपल्ली, कन्नूर में राज्य की पिछली यूडीएफ सरकार द्वारा एक मकान के लिए कुछ जमीन और धन आवंटित किया गया था।लेकिन, सीपीएम सरकार ने उसे आवंटित भूमि को रद्द कर दिया और उसे आवंटित धन प्रदान करने से इनकार कर दिया। चित्रा लेखा ने कलक्ट्रेट कार्यालय के सामने विरोध प्रदर्शन किया था लेकिन केरल की वामपंथी सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला।

क्या एक कॉन्ग्रेस नेता दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता की बीवी को लेकर सच में फरार हो गया?: जानें क्या है वायरल सच

सोशल मीडिया पर एक न्यूजपेपर की कटिंग काफी वायरल हो रही है। इस कटिंग में यह खबर है कि एक कॉन्ग्रेसी नेता दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता की पत्नी को लेकर भाग गया।

एक तरफ जहाँ एक बार फिर कॉन्ग्रेस के घोटालों की चर्चा आम है वहीं सोशल मीडिया पर यह खबर भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सोशल मीडिया यूज़र्स कॉन्ग्रेसी नेता के इस कारनामें पर जमकर मजे ले रहे, वहीं कई लोग आश्चर्यचकित होते हुए खबर की सच्चाई को लेकर एक हिंदी अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या सच में एक कॉन्ग्रेसी नेता दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता की पत्नी को लेकर भाग गया?

फैक्ट चेक

बता दें पहली नजर में यह खबर देखने पर किसी को भी लगेगा सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वायरल हो रही यह तस्वीर फर्जी है, और किसी ने शरारत करते हुए यह खबर छाप दी होगी। हालाँकि, बारीकी से निरीक्षण करने पर, यह बात सामने आई कि कॉन्ग्रेस नेता की किसी अन्य कॉन्ग्रेस नेता की पत्नी के साथ भागने की प्रकाशित रिपोर्ट सच है।

घटना मध्य प्रदेश से संबंधित है और इस साल फरवरी की है। मामला इंदौर के भवर कुँआ थाना क्षेत्र का है। मिली जानकारी के अनुसार बता दें इस साल की शुरुआत में एक कॉन्ग्रेसी नेता की पत्नी अपने दो बच्चों के साथ लापता हो गई थी। महिला के पति ने इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज खँगाले तो पता चला कि उसकी पत्नी और बच्चे एक अन्य कॉन्ग्रेस नेता के साथ दोपहिया वाहन से जाते हुए दिखे।

जिसके बाद अपनी लापता पत्नी के लिए पुलिस से संपर्क करने के बजाय कॉन्ग्रेस नेता ने भोपाल के कॉन्ग्रेस कार्यालय का दरवाजा खटखटाना ज्यादा सही समझा। और दूसरे कॉन्ग्रेसी नेता की शिकायत की। जिसके बाद पार्टी कार्यालय से कॉन्ग्रेस नेता को इंदौर वापस भेज दिया गया और उन्हें डीआईजी रूचि वर्धन शर्मा से संपर्क करने को कहा गया।

पुलिस थाने में उन्होंने माँग की थी कि उनकी पत्नी को उनके पास वापस लाया जाए। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया था कि जिस कॉन्ग्रेस नेता पर दूसरे नेता की पत्नी को भगाने का आरोप था, वह सेवादल का एक पदाधिकारी था और एक महिला कॉन्ग्रेस नेता के साथ भी जुड़ा था।

योगी सरकार की राह पर MP पुलिस: शातिर बदमाश साजिद चंदनवाला की संपत्ति पर चलाया बुलडोजर, अवैध निर्माण ध्वस्त

मध्य प्रदेश की इंदौर पुलिस ने शहर में अपराध कम करने के लिए योगी सरकार के नक़्शे-कदम पर चलते हुए बदमाशों और गुंडों के खिलाफ अभियान चला रखा है। इसी कड़ी में बुधवार (नवंबर 18, 2020) को शहर के हिस्ट्रीशीटर और शातिर बदमाश साजिद चंदनवाला के अवैध कब्जों को पुलिस ने गिरा दिया।

इस मामले में इंदौर के डीआईजी ने बताया, “हमने पहले भी इस तरह के अभियान चलाए हैं। अब हमने जिला प्रशासन और नगरपालिका के साथ मिलकर ऐसे लोगों के अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया है, जो आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं।”

माफिया साजिद चंदनवाला ने रानीपुरा क्षेत्र में अवैध रूप से तीन दुकानों और एक मकान पर कब्जा करके रखा था। जहाँ से वह कई अवैध गतिविधियों को संचालित करता था। मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने रानीपुरा क्षेत्र में बनी इन दुकानों और मकान को जेसीबी मशीन से गिरा दिया। 

उसके अवैध निर्माणों को जमींदोज करने की कार्रवाई 10 महीने पहले भी हुई थी। तब चंदनवाला ने मकान और दुकान पर कब्जा कर उसे खाली करने के एवज में पीड़ित से 40 लाख रुपयों की माँग की थी। इतना ही नहीं, उसने मकान मालिक को धमकाया भी था, तब पुलिस ने खातीवाला टैंक निवासी पीड़िता की शिकायत पर चंदनवाला के खिलाफ केस दर्ज किया था।

पीड़ित ने पुलिस को बताया था कि उनका रानीपुरा के पत्ती बाजार में पुश्तैनी मकान है। उसी में दो दुकानें भी हैं, जिन पर चंदनवाला ने कब्जा कर रखा है। दुकानों का किराया भी वही वसूलता है, जब भी उसे मकान और दुकान खाली करने को कहा, तो धमकाते हुए 40 लाख रुपए माँगता है। शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी भी देता है। पीड़ित तत्कालीन एसएसपी रुचि वर्धन मिश्र के पास पहुँचे, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा था कि उनके पास चंदनवाला के अवैध कब्जों की पूरी लिस्ट है।

बदमाश साजिद चंदनवाला के खिलाफ 40 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं, वह एनएसए और जिला बदर जैसी बड़ी धाराओं में जेल जा चुका है। साजिद ने शहर में करोड़ों की सरकारी जमीन और लोगों की दुकानों पर कब्जा करके रखा था। उसके खिलाफ शहर के लगभग सभी थानों में कोई न कोई मामला दर्ज था। लिहाजा पुलिस ने साजिद के खिलाफ कार्रवाई शुरु की है।

पुलिस का कहना है कि साजिद के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। शहर में जहाँ-जहाँ उसने अवैध कब्जा किया है वहाँ से उन्हें हटाने की कार्रवाई चलती रहेगी। पुलिस का कहना है कि शहर के सभी बदमाशों का रिकॉर्ड बना लिया गया है और सभी के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करेगी।