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अब पश्चिम बंगाल में बीजेपी ऑफिस को किया आग के हवाले: TMC पर लगे राजनीतिक हत्याओं सहित कई गंभीर आरोप

पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता की हत्या के बाद बीजेपी कार्यालय में बुधवार की रात आग लगने से सियासत गरमा गई है। कथिततौर बीजेपी का आरोप है कि उत्तरी 24 परगना जिले में स्थित भाजपा कार्यालय को तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा आग लगाया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीती रात मोहनपुर ग्राम पंचायत के बबनपुर इलाके में भाजपा कार्यालय को जला दिया गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस घटना के पीछे टीएमसी का हाथ है और वह बीजेपी से डरते हुए ऐसे सस्ते हथकंडे अपना रही है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बीजेपी कार्यकर्ताओं का कहना हैं कि टीएमसी उन्हें डरना चाहती है, लेकिन वे एकजुट हैं और एकजुट रहेंगे। टीएमसी सस्ते ट्रिक का इस्तेमाल कर रही है।

पश्चिम बंगाल में 2021 चुनावों से पहले राजनीतिक हिंसा की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ता अक्सर निशाना बनते रहे हैं और उनके साथ मारपीट, अपहरण व हत्या की कई खबरें सामने आती हैं। माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में जनता के बीच भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता और कार्यकर्ताओं के प्रयासों को देखते हुए भाजपा कार्यालय पर हमला हुआ है।

इस घटना को लेकर बीजेपी बंगाल के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से ट्वीट किया गया, “उपद्रवियों ने नोआपारा ग्रामीण मंडल में भाजपा पार्टी कार्यालय में आग लगा दी। सत्ता को बने रहने की एक बेताब कोशिश में टीएमसी भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं की राजनीतिक हिंसा-हत्या, पार्टी कार्यालयों को जलाना जैसे अन्य आतंकी हिंसा को अंजाम दे रही है। जल्द ही टीएमसी को उखाड़ फेंका जाएगा।”

पश्चिम बंगाल में नहीं थम रही BJP नेताओं की हत्या का सिलसिला

गौरतलब है कि तुफानगंज इलाके में कल ही एक भाजपा कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। मृतक बीजेपी नेता के परिवार वालों ने टीएमसी के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया था। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में पाँच टीएमसी कार्यकर्ताओं का नाम लिया था।

परिवार वालों का आरोप है कि पाँचों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से बीजेपी नेता की पिटाई की, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आई। जब इलाज के लिए उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बीजेपी ने टीएमसी पर राजनीतिक हत्याओं का आरोप लगाया और यह दावा किया कि बंगाल के लोग कभी इसका समर्थन नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले 1 नवम्बर को पश्चिम बंगाल के नदिया में 34 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता बिजॉय शील की लाश एक पेड़ से लटकते हुए पाई गई थी। पश्चिम बंगाल भाजपा ने अपने ट्विटर हैंडल पर तस्वीरें शेयर करते हुए इस घटना को लेकर दुःख जताते हुए आरोप लगाया था कि अब बीजेपी को रोकने के लिए आतंक का सहारा लिया जा रहा है।

वहीं पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के मथुरापुर में गुरुवार (30 जुलाई, 2020) को भाजपा बूथ सचिव गौतम पात्र का शव पेड़ से लटका मिला था। बीते 24 घंटे के भीतर बंगाल में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के शव पेड़ से लटके मिले थे। इससे पहले पूर्वी मिदनापुर जिले के कछुरी गाँव में बीजेपी कार्यकर्ता पूर्णचंद्र दास का शव पेड़ से लटका मिला था।

13 जुलाई को पश्चिम बंगाल के सुदर्शनपुर में हेमताबाद के भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का मृत शरीर एक फंदे से झूलता हुआ पाया गया था। विधायक का मृत शरीर बंद चाय की एक दुकान के सामने झूलता हुआ मिला था। परिजनों ने इसे हत्या करार दिया था।

पश्चिम बंगाल के कलना में पाथर घाटा गाँव में राबिन पॉल नाम के एक भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई थी। घटना के दौरान, उन्हें पहले टीएमसी समर्थकों द्वारा बेरहमी से पीटा गया और फिर गाँव में दूसरी जगह ले जाया गया जहाँह पॉल को टीएमसी के उप प्रमुख ने कथित रूप से बेरहमी से पीटा था।

गणेश रॉय नामक एक भाजपा कार्यकर्ता का शव 13 सितंबर को राज्य के हुगली जिले के गोघाट में एक पेड़ पर लटका मिला था। रॉय एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता के रूप में इस क्षेत्र में प्रसिद्ध थे। उनके बेटे ने आरोप लगाया है कि रॉय की हत्या तृणमूल कॉन्ग्रेस के पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई थी। उसने दावा किया कि उन्होंने उसका शव पेड़ पर हत्या के बाद लटकाया गया था।

वहीं उत्तर 24-परगना के टीटागढ़ में 5 अक्टूबर को भाजपा के पूर्व पार्षद मनीष शुक्ला को गोली मार दी गई थी। हेलमेट पहने हमलावरों ने मनीष शुक्ला को कई गोलियाँ मारी थी। कुछ दिनों बाद, पश्चिम बंगाल पुलिस ने भाजपा नेता मनीष शुक्ला के हत्यारों को शरण देने के लिए एक ‘टीएमसी कार्यकर्ता’ को गिरफ्तार किया था और बाइक, कार्बाइन और पिस्तौल बरामद की थी।

चैट बंद करते ही गायब हो जाएँगे मैसेज, स्क्रीनशॉट की भी होगी खबर: फेसबुक ने मैसेंजर-इंस्टा पर रोल आउट किए ये 3 नए फीचर

फेसबुक ने बुधवार (नवंबर 18, 2020) को मैसेंजर और फोटो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के लिए तीन नए फीचर्स को रोल आउट किया है। पहला फीचर वॉच टुगेडर (Watch Together) है। दूसरा TinyTan है। और तीसरा व सबसे खास वैनिश मोड (Vanish mode) है।

इनमें वॉच टुगेडर ऐसा मोड है जिसका एक्पीरियंस हो सकता है मैसेंजर पर अब तक कई लोग पहले ही कर चुके हैं क्योंकि इसे सितंबर में लाने की घोषणा कर दी गई थी। जबकि टिनीटैन और वैनिश मोड बिलकुल नए हैं।

क्या है इनकी खासियतें?

Watch Together: इस फीचर की मदद से यूजर्स अपने दोस्तों के साथ वीडियो चैट करते हुए एक साथ आईजीटीवी, रील्स, टीवी शो, मूवी और ट्रेंडिंग वीडियो रियल टाइम पर साथ में देख सकते हैं। इसके लिए आपको मैसेंजर और इंस्टाग्राम का बिलकुल नया वर्जन अपने फोन में अपडेट करना होगा। इसका इस्तेमाल एक साथ 8 लोग वीडियो कॉल पर रहते हुए कर सकते हैं।

TinyTAN:इस दूसरे फीचर में यूजर्स मैसेंजर और इंस्टाग्राम पर टिनीटैन थीम एक्टिवेट करने में सक्षम हो जाएँगे और अपनी भावनाओं का इजहार लव इमोजीज के जरिए कर पाएँगे। इस थीम को एक्टिवेट करने के बाद आपको बीटीएस प्रेरित टिनीटैन कैरेक्टर्स नजर आएँगे जिनका इस्तेमाल आप अपने इस थीम को एक्सपीरियंस करने के लिए कर सकते हैं।।

तस्वीर साभार: रोलिंग स्टोन

Vanish Mode: यह मोड फेसबुक दोनो प्लेटफॉर्म के लिए जल्द लेकर आ रहा है। मैसेंजर पर यह कुछ जगहों पर अपडेट किया जा चुका था लेकिन जल्द ही इस तकनीक का उपयोग हर कोई कर पाएगा। इस मोड में आपके चैट थ्रेड को छोड़ते ही सिर्फ़ टेक्सट ही नहीं बल्कि स्टिकर्स, फोटोज, वॉयस मैसेज वगैरह भी खुद से गायब हो जाएँगे।

यह मोड यूजर्स के लिए पूर्ण रूप से वैकल्पिक होगा। यह यूजर की इच्छा है कि वह इसका इस्तेमाल करेगा या नहीं। फेसबुक का दावा है कि यदि कोई आपकी चैट का स्क्रीनशॉट भी लेगा तो भी आपको इस बारे में सूचित किया जाएगा और इसके बाद अगर असुरक्षित महसूस करते हैं तो आप किसी को ब्लॉक कर या फिर उसकी रिपोर्ट कर सकते हैं।

अभी यह मोड यूएस में उपलब्ध हैं। बाकी देशों में इसे जल्द से जल्द लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस वैनिश मोड के आने के बाद यूजर्स इसका इस्तेमाल अपनी एप को अपडेट करके कर पाएँगे। इसमें वैनिश मोड में चैट करने के लिए सिर्फ स्वाइप अप करना होगा और बाद में रेगुलर चैट पर भी स्वाइप अप करके लौटने की सुविधा होगी।

फेसबुक ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि मैसेंजर में वैनिश मोड जारी करते हुए हम काफ़ी उत्साहित हैं। इसके तहत आप ऐसे मैसेज भेज पाएँगे जो ख़ुद से ग़ायब हो जाएँगे। जैसे ही आप मैसेज देख लेंगे और चैट से हटेंगे मैसेज ख़ुद ग़ायब हो जाएँगे।

फेसबुक ने इस तीन फीचर्स को रोलआउट करने के अलावा यह भी कहा है कि वह दो नए शो लेकर आ रहे हैं। इनके नाम- Post Malone’s Celebrity World Pong League और Here for It With Avani Gregg होंगे। इन्हें मैसेंजर और इंस्टाग्राम पर वॉच टुगेडर फीचर के जरिए लेकर आया जाएगा।

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी का इस्तीफा: तेजस्वी यादव पर करेंगे 50 करोड़ की मानहानि का केस

भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच बिहार के शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी ने आज (नवंबर 19, 2020) अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके बाद इस विभाग का अतिरिक्त प्रभार प्रदेश मंत्री अशोक चौधरी को दिया गया है। अशोक चौधरी के पास शिक्षा विभाग के अलावा भवन निर्माण और समाज कल्याण विभाग की भी जिम्मेदारी है यानी राज्यपाल के अगले आदेश तक अब वह तीन विभागों को संभालेंगे।

कुछ देर पहले ही अशोक चौधरी ने अपने ट्वीट पर कुछ तस्वीरें पोस्ट करके जानकारी दी है कि उन्होंने आज ही सुबह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भवन निर्माण विभाग, समाज कल्याण विभाग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का कार्यभार ग्रहण किया।

उल्लेखनीय है कि डॉ मेवालाल चौधरी ने आज ही 1 बजे शिक्षामंत्री का पदभार संभालते हुए शपथ ली थी लेकिन कुछ ही देर बाद ही यह खबर आई कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

उन्होंने तेजस्वी यादव पर पलटवार करते हुए कहा, “जो हमारे खिलाफ बोल रहे हैं और यह कह रहे है कि मेरी पत्नी की मौत के लिए मैं जिम्मेवार हूँ, उनके खिलाफ आज ही 50 करोड़ की मानहानि का केस करूँगा और आज ही उनके पास लीगल नोटिस जाएगा।”

उन्होंने कहा कि कोई भी केस तब साबित होता है जब आपके खिलाफ़ कोई चार्जशीट हुई हो या कोर्ट ने कुछ फैसला किया हो। न उनके खिलाफ अभी कोई चार्जशीट हुई है न ही उनके ऊपर कोई आरोप दर्ज़ हुआ है। अपने ऊपर लगे इल्जामों को डॉ मेवालाल ने ख़ारिज करते हुए कहा कि वो तेजस्वी यादव पर 50 करोड़ का मानहानि का केस करेंगे।

जानकारी के लिए बता दें कि डॉ मेवालाल चौधरी पर आरोप है कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) के कुलपति रहते समय उन्होंने प्रोफेसरों की भर्ती में भ्रष्टाचार किया था। इस मामले में उन पर एफआईआर भी हुई थी। इसके बाद जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से उन्हें निलंबित कर दिया गया था।

डॉ मेवालाल चौधरी पर भवन निर्माण मामले में भी आरोप लगे हुए हैं। नियुक्ति घोटाले में फरवरी 2017 में IPC 409, 420, 467, 468, 471 और 120B के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया था। इसलिए जब उनके शिक्षामंत्री बनने की बात खबरों में आई तो विपक्ष ने उनके साथ नीतिश सरकार पर भी निशाना साधना शुरू कर दिया।

मोस्‍ट वॉन्‍टेड आतंकी हाफिज सईद को पाकिस्तान की एंटी टेरर कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा: मुंबई हमलों का था मास्‍टरमाइंड

अवैध फंडिंग के सिलसिले में जमात उत दावा के मुखिया और मोस्‍ट वॉन्‍टेड आतंकी हाफिज सईद को 10 साल की सजा सुनाई गई है। पाकिस्तान की एंटी टेरर कोर्ट ने सईद को टेरर फंडिंग से जुड़े दो मामलों में सजा सुनााई है। हाफिज के साथ साथ याहया मुजाहिद, अब्दुल रहमान मक्की और याजिद इकबाल को भी 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई है।

संयुक्त राष्ट्र ने सईद को आतंकवादी घोषित किया था और अमेरिका ने उसपर एक करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा की थी। उसे आतंकी कृत्यों के लिए वित्तीय मदद उपलबध कराने के मामले में पिछले साल 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था।

पाकिस्तान में इस साल हाफिज सईद को चौथी बार सजा सुनाई गई है। हाफिज सईद इस समय लाहौर में एक और टेरर फंडिंग मामले में 5 साल की सजा काट रहा है। पाकिस्तान की आतंकवाद रोधी अदालत ने आतंकी कृत्यों के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराने के दो मामलों में उसे इस साल फरवरी में 11 साल कैद की सजा सुनाई थी। वह लाहौर की उच्च सुरक्षा वाली कोट लखपत जेल में बंद है।

अदालत के एक अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ‘‘लाहौर स्थित आतंकवाद रोधी अदालत ने बृहस्पतिवार को जमात उद दावा के सरगना सईद सहित इसके चार नेताओं को दो और मामलों में सजा सुनाई।’’

सईद और उसके दो साथियों-जफर इकबाल तथा याहया मुजाहिद को 10-10 साल कैद की सजा सुनाई गई है, जबकि उसके साले अब्दुल रहमान मक्की को छह महीने कैद की सजा सुनाई गई है।

अधिकारी ने कहा, ”एटीसी कोर्ट नंबर-1 के जज अरशद हुसैन भुट्टा ने काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट द्वारा दायर मामले संख्या 16/19 और 25/19 की सुनवाई की, जिसमें नसीरुद्दीन नैय्यर और मोहम्मद इमरान की गवाही के बयानों की जाँच के बाद फैसला सुनाया गया है।”

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सईद पर आतंक वित्तपोषण, मनी लॉन्ड्रिंग, अवैध रूप से जमीन हड़पने समेत 29 मामले चल रहे हैं।

गौरतलब है कि मुंबई में 26 नवंबर 2008 को 10 आतंकियों ने दिलदहलाने वाले एक हमले को अंजाम दिया था, जिसमें 160 से ज्यादा लोगों की मौत हुई और 300 से ज्यादा घायल हुए। आतंकियों ने रेलवे स्टेशन, ताज और ट्राइडेंड होटल समेत कई इलाकों को निशाना बनाया था। इस हमले ने भारत के साथ-साथ विदेशी देशों के खून भी खौला दिए थे। क्योंकि हमले में दर्जनों विदेशी नागरिक भी मारे गए थे।

बता दें इस खौफनाक हमले के पीछे का मास्टरमाइंड भी खूंखार आतंकी हाफिज सईद ही था। जाँच पड़ताल के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को इस बात का पता चला था। जिस पर सख्त रवैया दिखाते हुए भारत ने पाकिस्तान को हाफिज और मुंबई हमले के बीच के कनेक्शन को लेकर कई सबूत भी सौंपे थे। लेकिन पाकिस्तान हर बार कार्रवाई करने से भागता रहा था। वहीं इस हमले के बाद अमेरिका ने हाफिज को ब्लैक लिस्ट कर दिया था।

कुणाल कामरा के आपत्तिजनक ट्विट्स को प्लेटफॉर्म पर क्यों दी गई जगह?: ट्विटर से संसदीय समिति ने 7 दिन के अंदर माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के ऊपर आपत्तिजनक ट्वीट करने वाले कुणाल कामरा के मामले पर एक संसदीय कमेटी ने ट्विटर से सवाल पूछे हैं। कमेटी का पूछना है कि आखिर ट्विटर ने सुप्रीम कोर्ट व सीजेआई पर किए गए कामरा के आक्रामक ट्विट्स को क्यों प्लेटफॉर्म पर जगह दी और उसके ख़िलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की। कमेटी ने इन सवालों के जवाब देने के लिए ट्विटर को 7 दिन का समय दिया है।

भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सोशल मीडिया कंपनी की पॉलिसी हेड महिमा कौल से सख्ती से इस संबंध में प्रश्न किए हैं। मीनाक्षी लेखी के अलावा इस समिति में कॉन्ग्रेस सांसद विवेक तन्खा भी शामिल थे। तन्खा ने भी इस मामले में अपना ट्विटर के ख़िलाफ सख्त रुख व्यक्त किया।

लेखी ने बताया, “यह शर्मनाक है कि ट्विटर सुप्रीम कोर्ट और CJI के खिलाफ स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा की अपमानजनक टिप्पणियों को अपने मंच पर अनुमति दे रहा है।” उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट और CJI जैसे शीर्ष संवैधानिक अधिकारियों को गाली देने के लिए ट्विटर अपने मंच का दुरुपयोग कर रहा है।”

कमेटी अध्यक्ष ने बताया कि उनकी समिति में अलग-अलग पार्टी के राजनेता शामिल थे। इसमें कॉन्ग्रेस सांसद विवेक तन्खा, बसपा सांसद रितेश पांडे और बीजेडी सांसद भर्तृहरि महताब शामिल थे। इन सबने ट्विटर पर अपना गुस्सा व्यक्त किया।

गौरतलब है कि पिछले दिनों अर्णब गोस्वामी की रिहाई के बाद सोशल मीडिया पर आई कुणाल कामरा की टिप्पणी पर कोर्ट में अवमानना का केस चलाने का निर्णय लिया गया था। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कुणाल कामरा के आपत्तिजनक ट्वीट पर अवमानना का केस चलाने की मंजूरी दी थी।

उन्होंने मंजूरी देते हुए लिखा था:

“लोग समझते हैं कि कोर्ट और न्यायाधीशों के बारे में कुछ भी कह सकते हैं। वह इसे अभिव्यक्ति की आजादी समझते हैं। लेकिन संविधान में यह अभिव्यक्ति की आजादी भी अवमानना कानून के अंतर्गत आती है। मुझे लगता है कि ये समय है कि लोग इस बात को समझें कि अनावश्यक और बेशर्मी से सुप्रीम कोर्ट पर हमला करना उन्हें न्यायालय की अवमानना कानून, 1972 के तहत दंड दिला सकता है।”

इसके बाद पिछले सप्‍ताह कुणाल कामरा ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना करने वाले अपने ट्वीट्स के लिए अवमानना के आरोपों का सामना करते हुए कहा कि वह न तो अपनी टिप्पणी को वापस लेंगे, और न ही उनके लिए माफी माँगेंगे।

कामरा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए अपना एक पत्र ट्वीट किया, जिसमें उसने लिखा था: “मैं अपने ट्वीट को वापस लेने या उनके लिए माफी माँगने का इरादा नहीं रखता। मेरा मानना है कि वे खुद के लिए बोलते हैं।”

दिल्ली में कोरोना से हर 10 मिनट में एक मौत, कब्रिस्तान भरे पड़े हैं, शाम और रात में भी जलाई जा रही चिताएँ: हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना महामारी के चलते हालात एक बार फिर अनियंत्रित हो चुके हैं। महामारी की अनियंत्रित स्थिति पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने चिंता जाहिर की है और दिल्ली सरकार को जम कर फटकार लगाई है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार (19 नवंबर 2020) को कोरोना महामारी के मुद्दे पर चिंता जताते हुए कई अहम बातें कही। 

न्यायालय ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने वैवाहिक समारोहों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या सीमित करने के लिए 18 दिन का इंतज़ार क्यों किया। इसके अलावा न्यायालय ने यह भी पूछा कि कब्रिस्तानों में जगह नहीं है, लाशें शाम और रात के वक्त भी जलाई जा रही हैं, क्या आपको इस बात की ख़बर है?  

दिल्ली उच्च न्यायालय ने आम आदमी पार्टी सरकार के लापरवाही भरे रवैये पर टिप्पणी करते हुए कहा, “आप लोग (दिल्ली सरकार) गहरी नींद में थे और आपको झकझोर कर नींद से उठाना पड़ा। जब हम आपको झकझोरते हैं तब आप कछुए की चाल चलने लगते हैं।” दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली सरकार की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए न्यायालय की तरफ से यह टिप्पणी तब आई है जब पिछले सिर्फ एक दिन के भीतर कोरोना की वजह से दिल्ली में लगभग 131 मौतें हुई। 

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे विस्तार से टिप्पणी करते हुए कहा, “हमें क्यों 11 नवंबर को आपको (दिल्ली सरकार) गहरी नींद से जगाना पड़ा? आपने 1 नवंबर से 11 नवंबर के बीच क्या किया? आपने कोई भी निर्णय लेने के लिए 18 दिन का (18 नवंबर तक) इंतज़ार क्यों किया? क्या आपको अंदाज़ा भी है कि इस दौरान कितने लोगों की जानें गई? क्या मरने वालों से जुड़े लोगों को जवाब दे सकते हैं या उन्हें कुछ भी समझा सकते हैं?” 

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने कोरोना महामारी के बढ़ते वालों को लेकर जो जानकारी न्यायालय में साझा की थी। वह जानकारी आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्रियों द्वारा प्रेस वार्ताओं में साझा की गई जानकारी से बिलकुल अलग है। इसका मतलब यह हुआ कि दिल्ली में कोरोना महामारी की वजह से हर 10 मिनट में एक मौत हो रही है या हर घंटे में 5 मौतें हो रही हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि मास्क नहीं पहनने पर लगाया जाने वाला जुर्माना और सामाजिक दूरी नहीं बनाना, यह दो बातें भी प्रभावी सिद्ध नहीं हो रही हैं। 

इसके अलावा दिल्ली उच्च न्यायालय ने कब्रिस्तान के भयावह हालातों पर भी टिप्पणी की। न्यायालय ने कहा, “कब्रिस्तान भरे पड़े हैं, शाम और रात के वक्त भी चिताएँ जलाई जा रही हैं। क्या आपको इस बात की भनक भी है?” इसके बाद न्यायालय ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को सख्ती से निर्देश दिया कि वह अंतिम संस्कार वाली जगहों पर उचित सुविधाएँ उपलब्ध कराए। इसके अलावा भी न्यायालय ने दिल्ली की सरकार को तमाम अहम कदम उठाने को लेकर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 26 नवंबर को होगी। 

इसके पहले भी दिल्ली उच्च न्यायालय ठीक इसी मुद्दे पर केजरीवाल सरकार को लताड़ लगा चुकी है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार (नवंबर 11, 2020) को अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। न्यायालय ने राजधानी में बढ़ रहे कोरोना मामले पर AAP सरकार को फटकार लगाते हुए पूछा था कि क्या इस स्थिति से निपटने के लिए उनके पास कोई नीति या रणनीति है? जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की बेंच ने कहा कि पिछले 2 सप्ताह में कोरोना के मामले में दिल्ली ने महाराष्ट्र और केरल को भी पीछे छोड़ दिया है। ऐसे में AAP सरकार ने कोरोना से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं।

चावल भरे ट्रक में छिपे 4 जैश आतंकियों को जवानों ने किया ढेर: मसूद अजहर का भाई कश्मीर में ख़ूनीखेल को देना चाहता था अंजाम

जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है। सुरक्षाबलों ने आज सुबह जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकियों को ढेर कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, इन चारों आतंकी को पाकिस्तान की ओर से चुनाव को बाधित करने के मकसद से भेजा गया था। यह साजिश खूंखार जैश सरगना मसूद अजहर के भाई रऊफ लाला ने रची थी, जोकि फिलहाल पाकिस्तान में है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मौत के घाट उतारे गए चारों आतंकियों ने भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से मंगलवार और बुधवार की रात घुसपैठ की थी। जिनकी मदद मसूद अजहर के भाई ने की थी। रऊफ कुछ दिनों से जम्मू के सांबा और हीरानगर सेक्टर के उस पार पाकिस्तान के शक्करगढ़ इलाके में देखा गया था।

भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब रऊफ ने भारत में ऐसे किसी हमले की साजिश रची है। इससे पहले भी उसने 31 जनवरी, 2020 को घुसपैठ कराने और किसी बड़े हमले को अंजाम देने के फिराक में था। लेकिन तब भी सुरक्षाबलों ने आतंकियों को बन टोल प्लाजा के पास घेरकर मार गिराया था।

बता दें सुबह 5 बजे के करीब चावल से लदे एक ट्रक में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों का समूह जम्मू-श्रीनगर हाईवे के रास्ते कश्मीर जा रहा था। ट्रक को नाके पर रोका गया और चेकिंग की गई। सुरक्षाबलों से खुद को घिरता देख ट्रक में छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर फायरिंग कर दी।

वहीं अपना बचाव करते हुए आतंकी जंगल की तरफ छिपने के लिए भाग निकले। जिसके बाद जवानों ने तत्काल उनकी धरपकड़ करने के लिए तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान आतंकियों ने फिर से सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए चारों आतंकियों को मार गिराया। जबकि हमारे भी एसओजी के दो जवान घायल हुए हैं। जिन्हें उपचार के लिए भर्ती कराया गया है।

मुठभेड़ की जानकारी देते हुए कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक विजय कुमार ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान ने इस तरफ आतंकियों की घुसपैठ कराने और आगामी चुनावों को बाधित करने की कोशिशें बढ़ा दी हैं। इसके लिए जम्मू पुलिस और सुरक्षाबलों ने चार पाकिस्तानियों (आतंकियों) को धराशायी कर अच्छा काम किया है। उनका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए कश्मीर आना था।”

चुनाव को मद्देनजर सुरक्षा बलों की पुख्ता तैयारियों के बारे बताते हुए आईजीपी ने कहा, ‘‘चाहे कोई चुनाव हो या 15 अगस्त या 26 जनवरी या यहाँ तक कि कोई महत्वपूर्ण व्यक्ति आ रहा हो, आतंकियों के हमले की आशंकाएँ हमेशा बनी रहती हैं, लेकिन हम पूरी तरह से तैयार हैं… हम उम्मीदवारों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं और उन्होंने कल से चुनाव प्रचार के लिए मैदान में जाना शुरू कर दिया है और डरने की कोई बात नहीं है।”

बता दें मारे गए 4 आतंकवादी के पास से सुरक्षाबलों ने 11 एके-47 राइफल, 3 पिस्तौल, चीन में बने हुए 29 ग्रेनेड और रॉकेट लॉन्चर से दागे जाने वाले 6 ग्रेनेड, 3 पिस्टल, 2 आईईडी रिमोट, 2 कटर, दवाई, कंबल, सूखे मेवे और अर्धनिर्मित विस्फोटक बरामद किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने आई है कि शक्करगढ़ लॉन्चिंग पेड में मौजूद फिदायीन आतंकियों की भारत में घुसपैठ कराने के लिए रऊफ कई दिनों से कोशिश कर रहा था। सभी आतंकी चार और दो के ग्रुप में थे। वहीं अब सुरक्षा एजेंसियाँ मामले को गंभीरता से लेते हुए जाँच-पड़ताल में जुटी है।

कॉन्ग्रेस अलगाववाद और अराजकता की समर्थक, स्पष्ट करे 370 पर अपनी राय, दोहरा रवैया घातक: CM योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कश्मीर मुद्दे पर कॉन्ग्रेस को घेरते हुए जमकर हमला बोला है। योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जम्मू कश्मीर को लेकर कॉन्ग्रेस का दोहरा रवैया अब उजागर हो गया है। इनके द्वारा वहाँ आतंकवाद और अलगाववाद में शामिल लोगों को प्रोत्साहित करना राष्ट्रीय एकता औऱ अखंडता के साथ सीधे-सीधे खिलवाड़ है। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को नहीं बनने देने के लिए आज कॉन्ग्रेस ही जिम्मेदार है।

कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए सीएम ने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस सदैव राष्ट्रीय अस्मिता के साथ खिलवाड़ करती रही है और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से उन तत्वों को प्रोत्साहित करती रही है, जो देश के अंदर अलगाववाद और अराजकता को बढ़ावा देते हैं।”

उन्होंने बताया, “अनुच्छेद-370 हटने के उपरांत जम्मू-कश्मीर के कुछ नेताओं ने जो एक आपसी समझौता किया था, यह गुपकार कन्वेंशन कहलाता है। इस पर हस्ताक्षर करने वाले जो लोग हैं, उनमें वहाँ के क्षेत्रीय दलों के साथ ही कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता भी हैं। पी चिदम्बरम, गुलाम नबी इसका सपोर्ट करते हैं।”

कश्मीर के तमाम मुद्दों पर योगी ने कॉन्ग्रेस से सवाल भी किया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस दिल्ली में कुछ औऱ बोलेगी और कश्मीर में कुछ और। कश्मीर को लेकर कॉन्ग्रेस को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि धारा 370 के बारे में उसकी क्या राय है? कॉन्ग्रेस का दोहरा रवैया घातक है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का आभारी है, जिन्होंने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर एक भारत श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार किया। जम्मू और कश्मीर विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है, उसी की बौखलाहट गुपकार समझौते के रूप में सामने आई है, जिस पर कॉन्ग्रेस के नेताओं के भी हस्ताक्षर हैं।

योगी आदित्यनाथ ने कश्मीर के नामचीन लोगों के भ्रष्टाचार को लेकर उन्होंने कहा कि कश्मीर के तमाम चेहरे अपने बच्चों को विदेश में पढ़ाते थे और कश्मीर के विकास का पैसा हड़प जाते थे। मोदी की नीतियों के तहत अब जिला परिषद के जरिए गाँव तक पैसा जा रहा है तो बौखलाहट हो रही है। जिस तरह फारूख अब्दुल्ला और महबूबा के बयान आए हैं उससे कॉन्ग्रेस का जुड़ना खतनाक है। जब सीमा पर जवान लड़ रहे हैं तो दुश्मन देश से मदद लेने की बात करना क्या साबित करता है?

सुदर्शन न्यूज का ‘UPSC जिहाद’ आपत्तिजनक लेकिन एपिसोड में बदलाव के साथ हो सकता है ब्रॉडकास्ट: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय

सुदर्शन न्यूज के प्रोग्राम बिंदास बोल-UPSC जिहाद पर सुनवाई के बीच सुप्रीम कोर्ट में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपना हलफनामा दायर कर दिया है। इस हलफनामे में मंत्रालय ने प्रोग्राम को आपत्तिजनक कहा है लेकिन फिर भी प्रोग्राम के बाकी बचे 4 एपिसोड को प्रोग्राम कोड के मुताबिक काट-छाँट करके चलाने की अनुमति दे दी है।

सुदर्शन टीवी को भविष्य में सावधानी बरतने की होगी जरूरत

इस हलफनामे में मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि चैनल को अपनी विषय सामग्री को लेकर भविष्य में सावधानी बरतनी होगी। हलफनामे में लिखा है, “मामले में सभी तथ्यों और परिस्थियों को जाँच करने और ब्रॉडकास्टर के मौलिक अधिकारों को संतुलित करने के बाद भविष्य में सावधान रहने के लिए ये कुछ ‘सावधानियाँ’ हैं। यह निर्देश दिया जाता है कि आगे यदि प्रोग्राम कोड का उल्लंघन भविष्य में किया गया तो कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”

मंत्रालय ने चैनल के शो को इस तरह से मॉडरेट करने के लिए कहा है कि प्रोग्राम कोड का कोई उल्लंघन न हो। इसमें किसी धर्म या समुदाय पर हमला, या विजुअल्स और ऐसे शब्द इस्तेमाल न करने को कहा गया जो सांप्रदायिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देते हैं। इसके साथ ही मंत्रालय ने चैनल से कहा कि वह अश्लील, अपमानजनक, गलत चीजें भी अपने शो से हटाएँ।

इससे पहले मंत्रालय ने चैनल को केबल टीवी नेटवर्क रेगुलेशन एक्ट के तहत प्रोग्राम कोड उल्लंघन से संबंधित शिकायतें मिलने के बाद नोटिस भेजा था। अब मंत्रालय का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अधीन है वही इस मामले पर आगे सुनवाई करेंगे।

UPSC जिहाद प्रोग्राम पर सुदर्शन टीवी के ख़िलाफ़ मुकदमा

सितंबर में सुदर्शन टीवी ने बिंदास बोल प्रोग्राम के कुछ एपिसोड प्रसारित किए थे। इसमें दावा किया गया था कि कुछ समूह हैं जो मुस्लिम युवाओं को सिविल परीक्षाओं के लिए तैयार कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘यूपीएससी जिहाद’ कहते हुए कई ऐसे प्रमाण दिखाए थे जिससे उनका दावा मजबूत हो। इस प्रोग्राम के प्रसारण के बाद कई मुस्लिम संगठनों ने इस पर विरोध किया था और माँग की थी कि इसके अन्य भाग ब्रॉडकास्ट होने से रोके जाएँ।

मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा था कि जिन्हें शो नहीं पसंद है वो अपना टीवी बंद कर लें। साथ ही सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इस केस पर जाँच करने को कहा था कि क्या यह मामला प्रोग्राम कोड का उल्लंघन है। सुनवाई के दौरान सुदर्शन टीवी ने भी एनडीटीवी के ऐसे शो दिखाए थे कि जिसमें हिंदुओं की खराब छवि दिखाने का प्रयास हुआ था।

ऑपइंडिया का हस्तक्षेप

गौरतलब है कि कुछ समय पहले जब इस मामले ने तूल पकड़ा था और चैनल की ओर से इसके प्रसारण पर रोक हटाने की माँग की गई थी तब ऑपइंडिया, इंडिक कलेक्टिव ट्रस्ट और अपवर्ड ने भी इस संबंध में ‘इंटरवेंशन एप्लीकेशन’ (हस्तक्षेप याचिका) दायर की थी। ‘फ़िरोज़ इक़बाल खान बनाम यूनियन ऑफ इंडिया’ मामले में अनुमति-योग्य फ्री स्पीच को लेकर रिट पेटिशन दायर की गई थी।

‘हस्तक्षेप याचिका’ में कहा गया था:

“सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचार के लिए जो मुद्दे आए हैं, जाहिर है कि उसके परिणामस्वरूप फ्री स्पीच की पैरवी करने वालों पर प्रकट प्रभाव पड़ेगा। साथ ही ऐसी संस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा, जो जनता के लिए सार्वजनिक कंटेंट्स का प्रसारण करते हैं। इसलिए याचिकाकर्ता की ओर से ये निवेदन है कि इन्हें भी इस मामले में एक पक्ष बनाया जाए। इस प्रक्रिया में एक पक्ष बना कर भाग लेने की अनुमति दी जाए।”

‘तुम सब इतने लेफ्ट हो कि अपने राइट हाथ से भी नफ़रत करने लगे हो’: सोनू निगम ने ट्रिब्यून सहित वामपंथी मीडिया को लगाई फटकार

17 नवंबर को मशहूर गायक सोनू निगम ने आपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो साझा किया था जिस पर 1.2 मिलियन सब्सक्राइबर्स हैं। इस वीडियो में सोनू निगम जहाँ बैठे हुए थे वहाँ से हिमालयन रेंज नज़र आ रही थी, उन्होंने खासतौर से वामपंथी मीडिया की जम कर आलोचना की। इस दौरान उनके निशाने पर रहे ट्रिब्यून (Tribune) और सीएनएन लोकमत (CNN Lokmat)। 

वीडियो में सोनू निगम ने कहा कि वह जगे और उन्होंने एक लेख पढ़ा जिसमें इस बात का ज़िक्र था कि वह अपने बच्चे को भारत में गायक बनते हुए नहीं देखना चाहते हैं। इसके बाद उन्होंने कहा कि लेख में उनके विचारों पर की गई ‘ट्रोल टिप्पणियों’ का उल्लेख था। सोनू निगम ने वीडियो में लेख प्रकाशित करने वाले मीडिया समूह के संबंध में कहा, “यह वीडियो उन दल्लों के लिए है।” फिर उन्होंने ट्रिब्यून के संपादक को संबोधित करते हुए कहा, “तू सोता कैसे है दल्ले?”

अपने बेटे के बारे में बात करते हुए सोनू निगम ने कहा कि उनका बेटा बहुमुखी प्रतिभा का धनी है और उसकी जो मर्ज़ी होगी वह अपने जीवन में वही करेगा। उन्होंने कहा, “मेरा बेटा गाता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह गायक बनेगा।” अपनी आलोचना जारी रखते हुए बॉलीवुड गायक ने कहा कि मीडिया इतना लेफ्टिस्ट हो चुका है कि उन्हें अपने राईट (दाहिने) हाथ से नफ़रत हो चुकी है। और तो और वह अपनी दाईं आँख की पलकें तक नहीं झपकाते हैं। मीडिया को ऐसा भ्रम ही चुका है कि हर इंसान जो उनके राईट साइड खड़ा है वह पक्का ‘राईट विंग’ का है। 

फिर सोनू निगम ने कहा, “मैं जो हूँ वह तुम कभी नहीं हो सकते हो, मैं एक सच्चा भारतीय हूँ। मैं केंद्रित व्यक्ति हूँ न लेफ्ट और न ही राईट और बतौर पत्रकार तुम्हें भी कुछ ऐसा ही देखना और समझना चाहिए था।” ट्रिब्यून के संपादक को एक बार फिर दल्ला कहते हुए सोनू निगम ने सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद बॉलीवुड में भाई भतीजावाद (नेपोटिज्म) पर छिड़ी बहस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। 

उन्होंने कहा इस मुद्दे को लेकर बॉलीवुड में कहा जाता है कि गायक अपने बच्चों को गायक बनाते हैं, अभिनेता अपने बच्चों को अभिनेता बनाते हैं और यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है। मीडिया को इस बात की सराहना करनी चाहिए कि वह गायक होने के बावजूद अपने बेटे को गायक नहीं बनाना चाहते हैं। ट्रिब्यून को अपने दायरे में रहने की नसीहत देते हुए सोनू निगम वीडियो के अंत में News18 लोकमत की भी आलोचना करते हैं। वह कहते हैं, “News18 लोकमत तू भौंक मत” और यहीं पर वह अपना वीडियो ख़त्म करते हैं।

जिस रिपोर्ट पर सोनू निगम को आया गुस्सा

15 नवंबर को टाइम्स नाउ डिजिटल ने सोनू निगम के गाने ‘ईश्वर का वह सच्चा बन्दा’ के लॉन्च के मौके पर एक साक्षात्कार प्रकाशित किया था। 

टाइम्स नाउ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार सोनू निगम से पूछा गया कि क्या उनका बेटा नीवन भी गायक बनने की ख्वाहिश रखता है। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “सच कहूँ तो मैं नहीं चाहता हूँ कि मेरा बेटा गायक बने और कम से कम इस देश में तो नहीं। वैसे भी वह भारत में नहीं रहता है, दुबई में रहता है। मैंने उसे पहले ही भारत से बाहर भेज दिया है, वह पैदाइशी गायक है लेकिन उसकी रुचि अन्य चीज़ों में है। फ़िलहाल वह यूएई के सबसे उम्दा ‘गेमर्स’ में से एक है। वह फोर्टनाइट (Fortnite) में दूसरे पायदान पर है, यह एक तरह का गेम है और वह इसे खेलने के मामले में यूएई का सबसे अच्छा गेमर माना जाता है। वह तमाम गुणों और हुनर के साथ एक शानदार बच्चा है और मैं उसे यह नहीं बताना चाहता हूँ कि उसे क्या करना चाहिए। देखते हैं कि वह खुद से क्या करना चाहता है।” 

इसके बाद सोनू निगम ने इस बात का भी ज़िक्र किया कि कैसे तमाम लोग अच्छे संगीत को पसंद कर रहे हैं। लेकिन ट्रिब्यून और अन्य मीडिया समूहों ने वही हिस्सा उठाया जिसमें उन्होंने कहा कि वह अपने बच्चे को गायक नहीं बनने देना चाहते हैं। ट्रिब्यून ने मुख्य रूप से वह तथ्य हैडलाइन में सामने रखा है जिसमें उनका बेटा दुबई जा चुका है। इसके बाद ट्रिब्यून ने तमाम ट्रॉल्स की टिप्पणियों का भी उल्लेख किया जिसमें दुबई जाने की बात पर सवाल किए गए थे। इसके पहले सोनू निगम ने अज़ान के लिए लाउडस्पीकर्स पर भी सवाल खड़े किए थे। 

ट्रिब्यून ने एक ट्रोल का उल्लेख करते हुए कहा, “मैं इस बात से खुश हूँ कि सोनू निगम एक ऐसे देश चले गए हैं जहाँ उन्हें अज़ान नहीं सुनाई देती है। वह भारत में अज़ान की आवाज़ से बहुत ज्यादा परेशान थे और स्पीकर्स पर पाबंदी लगाने की बात कही थी। #dubailife” 

अप्रैल 2017 में सोनू निगम के एक ट्वीट में काफी विवाद खड़ा किया था, जिसमें उन्होंने अज़ान के लिए इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर्स पर गुस्सा जताया था। इसके बाद तमाम इस्लामी कट्टरपंथियों ने इस मुद्दे को लेकर उनकी जम कर आलोचना की थी, कुछ ने तो यहाँ तक कह दिया था कि सोनू निगम को गले का कैंसर हो जाए। इस ट्वीट के चर्चा में आने के बाद रिज़वान मलिक नाम के व्यक्ति ने उनके सिर पर 21 करोड़ रुपए का ईनाम रख दिया था। पश्चिम बंगाल के एक मौलवी ने इस बात पर फतवा जारी करते हुए सोनू निगम का सिर मुंडवाने वाले व्यक्ति को 10 लाख रुपए देने की बात कही थी।   

इसके बाद सोनू निगम खुद टकले हो कर फतवा स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद मौलवी ने रुपयों का भुगतान करने से मना कर दिया था। ऐसा करने पर उसने दो वजहों का हवाला दिया था, कोई सोनू निगम को फटे पुराने जूतों की माला पहनाए और पूरे देश का भ्रमण कराए। इसके बाद सोनू निगम का समर्थन करने पर दो युवकों को चाक़ू मार दिया गया था। उज्जैन के निवासी शिवम राय ने फेसबुक पर बॉलीवुड गायक का समर्थन करते हुए कहा था कि वह सिर्फ सोनू निगम के गाने ही सुनेगा। इस बात पर बेगमगंज के कुछ युवक भड़क गए और उनके बीच विवाद हो गया, इसके बाद मोहम्मद नागोरी और फैज़ान खान नाम के युवक ने फोन पर उसे धमकी दी। बाद में अपने दोस्तों के साथ मिल कर उस पर चाक़ू से हमला भी कर दिया। 

जबकि सोनू निगम ने असल में लाउडस्पीकर के विषय में कुछ गलत नहीं कहा था। फिर भी उन्हें इतना ट्रोल किया गया कि अंत में उन्हें अपना एकाउंट डिएक्टिवेट करना पड़ गया था। साल 2015 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने खुद कहा था कि ऐसी लगभग 822 मस्जिद और 90 मंदिर हैं जिनके पास लाउडस्पीकर इस्तेमाल करने का लाइसेंस नहीं है। इसके बाद साल 2014 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि नवी मुंबई स्थित इस तरह के असंवैधानिक लाउडस्पीकर्स को हटाया जाए। इस आदेश का मुस्लिम नेताओं ने स्वागत भी किया था। सोनू निगम इस बात पर गुस्सा हुए थे कि ट्रिब्यून ने वह विवाद सामने लेकर आने का प्रयास किया जो कई साल पुराना है। इतना ही नहीं मीडिया समूहों ने अपनी बात रखने के लिए उनके बेटे का उपयोग किया।