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कौन है जामिया से पढ़ने वाला बद्र खान, आतंकी संगठन हमास से क्या हैं रिश्ते, अमेरिका ने क्यों रद्द किया वीजा: जानिए सब कुछ

अमेरिका में पढ़ने वाले एक भारतीय छात्र बद्र खान सूरी का वीजा खत्म कर दिया गया है। उस पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास से जुड़े होने का आरोप है। उसे गिरफ्तार भी किया गया है। अब ट्रम्प सरकार उसके ऊपर आगे की कार्रवाई की तैयारी में है। इस बीच उसके वकील उसे बचाने में लग गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सूरी को वर्जिनिया राज्य में सोमवार (17 मार्च, 2025) को हिरासत में लिया गया। उसके घर के बाहर एजेंसियाँ पहुँची और अपने साथ ले गईं। उसे वर्तमान में एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है।

सूरी का अमेरिकी वीजा भी सरकार ने खत्म कर दिया है। बद्र खान सूरी ने सरकार से खुद को छोड़े जाने की याचिका भी लगाई थी। हालाँकि, ट्रम्प सरकार इस मामले में सख्त है और उसने एक विशेष कानून का इस्तेमाल करके उसे निर्वासित किए जाने का आदेश जारी किया है।

बद्र खान सूरी अमेरिका के जार्जटाउन विश्वविद्यालय में रिसर्चर है। वह यहाँ पढ़ाता भी था। उसने एक अमेरिकी महिला से निकाह किया है। वह यहाँ के अल वलीद बिन तलाल मुस्लिम-ईसाई सेंटर में शोधार्थी था। अमेरिका में वीजा, पासपोर्ट और आंतरिक सुरक्षा देखने वाले डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्युरिटी (DHS) ने बद्र खान पर कार्रवाई चालू की है।

DHS ने अपने बयान में कहा, “बद्र खान सूरी जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय में एक छात्र था जो हमास का प्रचार कर रहा था और सोशल मीडिया पर यहूदी विरोधी भावना को बढ़ा रहा था। सूरी के हमास के एक आतंकी से संबंध हैं, यह आतंकी हमास में सलाहकार है।”

DHS ने बताया, “विदेश मंत्री ने 15 मार्च, 2025 को एक निर्णय जारी किया है कि सूरी की अमेरिका में हरकतों के चलते उसे INA धारा 237(a)(4) के तहत निर्वासित किया जा सकता है।” बद्र खान सूरी के विषय में उसके जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय ने भी एक बयान जारी किया है। विश्वविद्यालय ने कहा कि उन्हें सूरी पर लगे आरोपों की जानकारी नहीं है।

सूरी के विषय में और भी जानकारी निकली है। पता चला है कि वह 2020 तक जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, दिल्ली में पढ़ता था। सूरी हमास के समर्थन के चलते अमेरिका की कार्रवाई का सामने करने वाला दूसरा भारतीय छात्र है।

इससे कुछ ही दिन पहले भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन पर भी यही आरोप लगे थे। हालाँकि, उसे गिरफ्तार नहीं किया गया था। रंजनी श्रीनिवासन इसके बाद चुपके से खुद ही अमेरिका से निकल कर चली गई थी। उसने DHS के एक एप का इस्तेमाल करके खुद को निर्वासित किया था। इसके बाद वह कनाडा गई थी।

रंजनी श्रीनिवासन कोलंबिया विश्वविद्यालय में शहरी नियोजन में डॉक्टरेट की छात्रा के रूप में F-1 छात्र वीज़ा पर अमेरिका गई थी। उसके ऐसे कुछ निबन्ध सामने आए थे जहाँ वह कथित ब्राम्हणवादी मानसिकता को कोस रही है। रंजनी श्रीवास्तव अमेरिका जाने से पहले भारत में अहमदबाद के भीतर CEPT विश्वविद्यालय में पढ़ती थी। 

दिशा सालियान केस में आदित्य ठाकरे पर हो FIR, CBI करे जाँच: पीड़ित पिता की हाई कोर्ट से गुहार, कहा- मेरी बेटी के शरीर पर नहीं थे चोट के निशान

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान का केस एक बार दोबारा खुलने को है। खबर आई है कि उनके पिता सतीश सालियान ने अपनी बेटी की मौत की दोबारा से जाँच कराने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनकी माँग है कि शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो और पूरा मामला सीबीआई को सौंपने का निर्देश दिया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने कहा कि वे अभी इस मामले में याचिका दायर करने की प्रक्रिया में हैं और 20 मार्च को उच्च न्यायालय रजिस्ट्री विभाग में केस दर्ज कराएँगे। याचिका में आरोप है कि दिशा सालियान की रेप के बाद हत्या हुई थी और बाद में कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को बचाने के लिए इस मामले में साजिश रची गई।

वहीं सतीश सालियान ने भी मीडिया से बात करते हुए कहा है कि उनकी बेटी के शव पर कोई चोट के निशान नहीं थे। उसने आत्महत्या नहीं की थी। उसकी मौत और बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह की मौत के तार जुड़े थे।

शिवसेना प्रवक्ता ने उठाए सवाल

सतीश सालियान की याचिका की बात सामने आने पर शिवसेना की प्रवक्ता किशोरी पेडनेकर ने इस पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि ये ताजा याचिका डाले जाने के पीछे जरूर कोई न कोई है और इसके पीछे साजिश जरूर है, वरना चार साल बाद मामला कैसे स्पॉटलाइट में आ सकता है? सीआईडी ने जाँच की है और इस मामले पर पहले से एक एसआईटी टीम काम कर रही है।

वहीं, भाजपा नेता नीतेश राणे ने इस नए अपडेट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आदित्य ठाकरे को मामले में सामने आकर सच बोलना चाहिए और विधायक पद से इस्तीफा देकर, जाँच करनी चाहिए।

भाजपा ने माँगा आदित्य ठाकरे का इस्तीफा

बता दें कि नीतेश राणे वहीं नेता हैं जिन्होंने दावा किया था कि दिशा सालियान की हत्या हुई है और सीसीटीवी फुटेज गायब की जा चुकी है। वहीं महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम का कहना है कि अगर दिशा सालियान के पिता के पास कोई सबूत हैं तो उन्हें गृह विभाग को देने चाहिए। जाँच में कोई राजनीति नहीं की जाएगी, जो निर्देश हाईकोर्ट देगा वही माना जाएगा।

दिशा सालियान ‘हत्या’ या ‘आत्महत्या’

गौरतलब है कि बॉलीवुड अभिनेता दिशा सालियान की मृत्यु मलाड में एक इमारत से गिरने के कारण हुई थी। प्रारंभिक जाँच में, पुलिस ने इसे आत्महत्या माना था। हालाँकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में चोट और अन्य अप्राकृतिक चोटों का उल्लेख किया गया था, जिससे यह मामला संदिग्ध बन गया। दिशा की मौत के कुछ दिन बाद सुशांत सिंह राजपूत का शव भी उनके फ्लैट में पाया गया था, जिसने इस मामले पर और प्रश्न खड़े कर दिए।

शंभू बॉर्डर से भगाए गए ‘आंदोलनकारी किसान’, पुलिस ने टेंट पर चलाया बुलडोजर : दल्लेवाल-पंढेर हिरासत में, 400 दिन बाद खुलेगी हरियाणा-पंजाब की सड़क

हरियाणा और पंजाब की सीमा पर एक वर्ष से अधिक समय से बैठे आंदोलनकारी किसान आखिरकार भगा दिए गए। पंजाब की पुलिस ने शंभू और खन्नौरी बॉर्डर पर बैठे किसानों को हटा दिया है। पुलिस ने किसान नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया है। जल्द ही पंजाब-हरियाणा बॉर्डर को खोल दिया जाएगा।

बुधवार (19 मार्च, 2025) शाम को पंजाब पुलिस शंभू और खन्नौरी सीमा पहुँची। यहाँ उसने धरने पर बैठने वाले अधिकांश किसानों को हिरासत में ले लिया। इसके पहले पुलिस ने यहाँ बिजली सप्लाई रोक दी थी। पुलिस ने दोनों सीमाओं पर 200 से अधिक किसानों को हिरासत में ले लिया।

पुलिस ने किसानों को हिरासत में लेने से पहले उन्हें बसों में बैठ कर वापस चले जाने को कहा। हालाँकि, किसान नहीं माने। DIG मनदीप सिंह ने कहा, “हम 3,000 से ज़्यादा है और तुमलोग सिर्फ कुछ 100 हैं। हम साइट खाली करके रहेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए। आपके नेताओं को चंडीगढ़ में पहले ही हिरासत में लिया जा चुका है… हम बल नहीं प्रयोग करना चाहते।”

पंजाब पुलिस ने किसान नेता सरवन सिंह पंढेर और जगजीत सिंह दल्लेवाल को भी हिरासत में लिया है। यह दोनों नेता ही इस धरने की अगुवाई कर रहे थे। पुलिस ने धरना देने वाले किसानों को गिरफ्तार करने के बाद सीमा पर बनाई गई झोपड़ियों और टेंट पर बुलडोजर चला दिया।

पंजाब पुलिस ने इन सीमाओं पर बनाया गया आंदोलन का सारा इन्फ्रा खत्म कर दिया। पंजाब पुलिस के DIG हरमनबीर गिल ने बताया कि ये आंदोलन अवैध था और पंजाब सरकार ने लगातार इनका सहयोग किया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन के चलते व्यापारियों और आम लोगों को परेशानी हो रही थी।

उन्होंने कहा कि किसानों को पहले इस बात के लिए मनाया गया कि वह प्रदर्शन खुद ही खत्म कर लें लेकिन वह नहीं माने। DIG गिल ने बताया कि इन गाँव के आसपास रहने वाले जमींदारों ने खुद ही पुलिस को ट्रैक्टर और बाकी सामान दिया है, ताकि किसानों का इन्फ्रा तोड़ा जा सके।

पंजाब के कारोबारियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है। कयास लगाए गए हैं कि AAP सरकार पर राज्य में लगातार दबाव बढ़ता जा रहा था, जिसके चलते यह एक्शन लिया गया। बीते कुछ दिनों में भगवंत मान सरकार राज्य में रोज होने वाले धरना प्रदर्शन को लेकर सख्त हुई है।

गौरतलब है कि यह आंदोलनकारी किसान 13 फरवरी, 2024 से ही सीमा पर कब्जा करके बैठे थे। इसके चलते दिल्ली-हरियाणा की तरफ से पंजाब या हिमाचल प्रदेश जाने वाले वाहनों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता था। हजारों करोड़ के कारोबार का नुकसान हो चुका था। लगभग 400 दिनों के बाद यह आंदोलन खत्म कर दिया गया।

आशा जताई जा रही है कि अब इन दोनों सीमाओं पर हरियाणा की तरफ से लगाए गए बैरिकेड तोड़ दिए जाएँगे और कुछ ही दिनों में यह रास्ता फिर से बहाल हो जाएगा।

संभल ही नहीं… जहाँ-जहाँ डाला डेरा, वहाँ-वहाँ मुस्लिम लगाते हैं ‘मेला’: हिंदू घृणा से सैयद सालार बना ‘गाजी’, जानिए क्यों हो रही बहराइच के ‘जेठा मेला’ को भी बंद करने की माँग

उत्तर प्रदेश के संभल में पिछले 800 सालों से विदेशी आक्रांता सालार मसूद के कब्र पर आयोजित होने वाले ‘नेजा मेले’ की अनुमति नहीं दी गई है। सालार मसूद क्रूर आक्रांता था, जिसने बड़े पैमाने पर हिंदुओं का नरसंहार किया और मंदिरों को ध्वस्त किया। इसी कारण उसे ‘गाजी’ (इस्लाम के लिए काफिरों से लड़ने वाला) की उपाधि मिली थी। संभल के बाद सालार के लिए बहराइच में लगने वाले जेठा मेला और बाराबंकी में उसके बाप की कब्र पर लगने वाले मेले पर रोक की माँग उठने लगी है।

संभल में सालार मसूद गाजी के कब्र पर मेला (उर्स) के इजाजत देने से इनकार करते हुए ASP श्रीश चन्द्र दीक्षित ने कहा कि किसी लुटेरे आक्रान्ता की याद में मेला आयोजित नहीं किया जाएगा। यह अपराध है। उन्होंने कहा कि अगर कोई ऐसा करने का प्रयास करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि वह महमूद गजनवी का सेनापति था, उसने सोमनाथ को लूटा था।

ASP ने कहा, “किसी भी लुटेरे के प्रति आप कहेंगे कि यह बहुत अच्छा है तो यह बिलकुल नहीं माना जाएगा। अगर आप लोग अभी तक कर रहे थे तो यह कुरीति थी और आप अज्ञानता में यह कर रहे थे। अगर जानबूझ कर रहे थे तो आप देशद्रोही थे।” उन्होंने कहा कि उसने इस देश के प्रति अपराध किया था। लुटेरे की याद में कोई नेजा (झंडा-निशान) नहीं गड़ेगा। अगर ये झंडा गड़ गया तो वह देशद्रोह है।

सालार मसूद गाजी भारत में आक्रमण करने के दौरान जहाँ-जहाँ डेरा डाला था, वहाँ-वहाँ आज मुस्लिमों द्वारा उर्स मनाया जाता है। इनमें मेरठ का नौचंदी मेला, पुरनपुर (अमरोहा) का नेजा मेला, थमला और संभल के मेले प्रमुख हैं। इसके अलावा, कई अन्य स्थानों पर आज भी उर्स भी मनाए जाते हैं।

सालार मसूद गाजी का बाराबंकी में है मजार

बाराबंकी में सालार मसूद गाजी के अब्बू सैयद सालार साहू गाजी उर्फ बूढ़े बाबा की दरगाह है। यहाँ भी यह सालाना उर्स हर साल के ज्येष्ठ माह (जेठ महीना) के पहले शनिवार को मनाया जाता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यहाँ रहने वाले मोहम्मद सिद्दीकी और अन्य कार्यकर्ताओं ने बताया कि बूढ़े बाबा अफगानिस्तान का रहने वाले था। वह अफगानिस्तान के गजनी के शासक महमूद गजनवी का बहनोई था।

कहा जाता है कि 1400 साल पहले वह अपनी बीवी और बेटों के साथ अजमेर शरीफ आ गया था। यहीं पर सालार मसूद गाजी का जन्म हुआ। कहा जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद उसकी बीवी वापस अफगानिस्तान चली गई। वहीं, अबू सैयद सालार साहू गाजी बूढ़े बाबा अपने बेटे सैयद सालार मसूद गाजी के साथ बाराबंकी के सतरिख आ गया। यहाँ पर अबू सैयद मर गया और दफना दिया गया।

इसे ही आज बूढ़े बाबा की दरगाह कहा जाता है। समय-समय पर बूढ़े बाबा के कब्र को भी मजार का रूप दे दिया गया इसके बाद उसे दरगाह में तब्दील कर दिया गया। उसे गाजी के बाद बूढ़ा बाबा नाम के संत के रूप में प्रचारित किया गया। इसके कारण बड़ी संख्या में हिंदू भी इस मजार पर आते हैं। इन हिंदुओं की इन आक्रांताओं के इतिहास के बारे में कोई जानकारी नहीं है।

कौन था सैयद सालार मसूद गाजी

सैयद सालार मसूद गाजी का जन्म 11वीं सदी में सन 1014 ईस्वी में राजस्थान के अजमेर में हुआ था। हालाँकि, सालार के जन्म को लेकर भी संशय है और इतिहासकारों में एकमत नहीं है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि सालार का जन्म अफगानिस्तान में हुआ था और वह महमूद गजनवी के साथ भारत आया था। खैर, उसका जन्म जहाँ कहीं भी हुआ हो, लेकिन वह बेहद ही क्रूर और हिंदुओं से नफरत करने वाला था।

यह प्रमाणित सत्य है कि अफगानिस्तान के गजनी के शासक महमूद गजनवी का भाँजा था। इसके साथ ही वह गजनवी के सेना का सेनापति भी था। यह वहीं गजनवी है, जिसने सबसे पहले सन 1001 में भारत पर हमला किया था। इसके बाद उसने एक-के-बाद एक करके लगातार 17 बार हमले किए और भारत के सोमनाथ मंदिर सहित भारत के कई मंदिरों को लूटा और उन्हें ध्वस्त कर दिया था।

सन 1930 में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से छपी ‘द लाइफ एंड टाइम्स ऑफ सुल्तान महमूद ऑफ गाजना’ नाम की पुस्तक में इतिहासकार मोहम्मद नाजिम ने इसके बारे में बताया है। उन्होंने लिखा है कि वह गजनी के नेतृत्व में सन 1026 ईस्वी में सैयद सालार मसूद गाजी ने सबसे बड़ा हमला सोमनाथ मंदिर पर किया था। रास्ते में पड़ने वाले मंदिरों, रियासतों और हिंदुओं का नरसंहार करता आया।

‘अनवार-ए-मसऊदी’ नाम की अपनी किताब में बहराइच के रहने वाले और इतिहासकार मौलाना मोहम्मद अली मसऊदी ने लिखा है कि सोमनाथ और आसपास की रियासतों पर लूटने-पाटने केबाद सैयद सालार गाजी आगे बढ़ा। वह 1030 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बाराबंकी के सतरिख पहुँचा। वहाँ से वह श्रावस्ती पहुँचा और वहाँ के राजा सुहेलदेव से उसका मुकाबला हुआ।

सन 1034 ईस्वी में बहराइच जिला मुख्यालय के पास सालार मसूद का मुकाबला महाराजा सुहेलदेव से हुआ। कहा जाता है कि महाराजा सुहेलदेव ने 21 अन्य छोटे-बड़े राजाओं के साथ मिलकर उसका सामना किया और आखिरकार इस गाजी का उपाधि धारण करने वाले इस आक्रांता को मार गिराया। इसके बाद स्थानीय मुस्लिमों ने उसके शव को दफना दिया।

पृथ्वीराज चौहान के साथ संभल में युद्ध

कहा जाता है कि दिल्ली के अंतिम हिंदू शासक पृथ्वीराज चौहान का का भी सालार मसूद गाजी के साथ युद्ध हुआ था। संभल जिला प्रशासन की वेबसाइट के अनुसार, दोनों के बीच दो युद्ध हुए। इसमें पहले युद्ध में पृथ्वीराज चौहान ने सालार गाजी को करारी शिकस्त दी। वहीं, सालार के साथ दूसरे युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की हार की बात कही जाती है। हालाँकि, ऐतिहासिक रूप से इसके साक्ष्य नहीं हैं।

इतिहासकार बृजेंद्र मोहन शंखधर की किताब ‘संभल: अ हिस्टोरिकल सर्वे’ नाम की अपनी किताब में इसका जिक्र किया है। इसमें उन्होंने लिखा पृथ्वीराज चौहान के संभल में रहने के दौरान एक वाकया हुआ था। किताब के अनुसार, “यहाँ सैयद पचासे नाम का एक मुस्लिम व्यक्ति रहता था। इसकी कब्र फिलहाल मोहल्ला नाला कुस्साबान में है। वह सँभल के किले में रहता था। उसकी एक अत्यंत सुंदर बेटी थी।”

किताब में आगे लिखा है कि एक दिन पृथ्वीराज चौहान के घराने का एक राजकुमार ने उस लड़की को देखा और उसके प्रति आकर्षित हो गया। उसकी बेटी भी राजकुमार से आकर्षित हो गई। इससे सैयद पचासे गुस्सा हो गया और गजनी जाकर महमूद गजनवी से सारी बात बताई। इसके बाद महमूद गजनवी ने अपनी बहन के बेटे सैयद सालार मसूद गाजी के साथ एक विशाल सेना लेकर निकला।

वह सिंध को पारकर मुल्तान, मेरठ और पुरनपुर (अमरोहा) होते हुए संभल पहुँचा। यहाँ पर युद्ध में दोनों ओर से हजारों सैनिक मारे गए। इसमें पृथ्वीराज चौहान के पुत्र भी मारे गए। बाद में सालार ने संभल के किले पर कब्जा कर लिया गया। यहाँ से वह बहराइच भी गया और वहाँ मारा गया।

हालाँकि, इतिहासकारों से लेकर सत्यापित ग्रंथों में इसे एक लोककथा माना जाता है, क्योंकि पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1166 ईस्वी में माना जाता है, जबकि मृत्यु मोहम्मद गोरी के साथ युद्ध में 1192 में हुई थी। वहीं, सालार मसूद ने सन 1026 में 16 साल की अवस्था में सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था। इस तरह, दोनों में 166 साल का अंतर है।

सैयद सालार मसूद गाजी की कब्र

इसके बाद जिला मुख्यालय के पास पहने वाली नदी के पास चित्तौरा झील के किनारे उसे दफना दिया गया। यह भी कहा जाता है कि जिस जगह पर सालार मसूद को दफनाया गया, वहाँ बालार्क ऋषि का आश्रम था। उस आश्रम में सूर्यकुण्ड नाम का एक कुंड भी थी। बहराइच जिला को वेदों में गंधर्व वन बताया गया है।

बीतते के साथ, उस कब्र को मजार का रूप दे दिया गया। सालार गाजी की मौत के 200 वर्षों के बाद सन 1250 में दिल्ली का मुगल शासक नसीरुद्दीन महमूद ने कब्र को मकबरा का रूप दे दिया। आगे चलकर एक और मुगल शासक फिरोजशाह तुगलक ने इस मकबरे के बगल में कई गुंबदों का निर्माण करा दिया।

वहीं पर अब्दी गेट भी लगवाए। यही अब्दी गेट आगे चलकर सालार मसूद गाजी की दरगाह के नाम पर विख्यात हुआ। चूँकि सालार मसूद को मुस्लिम गाजी मानते थे। इसलिए मुस्लिम उसके कब्र पर सालना उर्स का आयोजन करने लगे और उसे संत ‘बाले मियाँ’ और ‘हठीला’ कहकर प्रचारित करने लगे।

संभल और बहराइच की ओर बढ़ते समय मुस्लिम आक्रांता सालार मसूद गाजी और उसके सैनिकों ने जहाँ-जहाँ डेरा डाला था, वहाँ-वहाँ आज भी मेले आयोजित किए जाते हैं। इनमें मेरठ का नौचंदी मेला, अमरोहा का पुरनपुर का नेजा मेला, थमला का मेला, संभल का मेला और बहराइच का मेला प्रमुख है। इन सभी स्थानों पर उर्स मनाए जाते हैं।

गाजी सैयद सालार मसूद का इतिहास: इस्लामी आक्रांता, जिसे दिखाया गया संत

इन आक्रांताओं की मौत के बाद उसे दरगाह का रूप दे दिया गया। इसके बाद इन्हें संत के रूप में नाम बदलकर प्रसारित किया गया। इसके बाद बड़ी संख्या में हिंदू भी इन मजारों पर आने लगे और लाखों-करोड़ों रुपए की कमाई इन दरगाह समितियों को होने लगी। इसके लिए की तरह के अफवाह एवं भ्रांतियाँ फैलाई गईं।

कहा जाता है कि सालार मसूद ने ज़ुहरा बीबी नाम की एक लड़की से शादी की थी। उसने अपने चमत्कार से उस लड़की का अंधापन ठीक कर दिया था। इसके बाद उससे निकाह कर लिया था। इतिहासकार एना सुवोरोवा ने तो गाजी मियाँ कहलाने वाले सालार मसूद गाजी की तुलना भगवान श्रीकृष्ण और भगवान श्रीराम तक से कर दी है। साथ ही यह भी कहा कि हिन्दू उन्हें इसी रूप में देखते थे।

इसी तरह का चमत्कार सैयद सालार मसूद गाजी के अब्बू अबू सैयद सालार साहू गाजी को लेकर प्रसारित किया गया। उन्हें बूढ़े बाबा के नाम से प्रसारित किया गया और उनके चमत्कारिक किस्से की बात कही जाने लगी। हिंदुओं को तो ये भी नहीं पता कि ये भारत में आक्रमण करने वाले थे और मूर्तिपूजा एवं मंदिरों के सख्त विरोधी थे।

आज हालात ऐसे हैं कि उर्स लगने वाले इन सभी जगहों पर भारी संख्या में हिंदू आते हैं। ये राज्य के अलग-अलग इलाकों से आते हैं और मन्नत मानते हैं। मन्नत पूरा होने के बाद ये यहाँ फिर आते हैं। इस तरह आक्रांता को संत के रूप में प्रसारित करके उन्हें अवतार घोषित करने की कोशिश की गई, जो अब तक सफल भी रही।

286 दिन, 7 मिनट का ब्लैकआउट, कल्पना चावला की आने लगी थी याद: पृथ्वी पर लौट आईं सुनीता विलियम्स, जानिए शारीरिक-मानसिक तौर पर क्या हो सकता है असर

NASA की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स धरती पर वापस लौट आईं। स्पेसएक्स का एक शटल उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से वापस लेकर लौटा है। उनके साथ में बुच वालमोर भी वापस धरती पर लौटे हैं। उनकी इस वापसी के लिए एक बार पहले भी प्रयास हो चुका था। हालाँकि, इस बार उन्हें वापस लाने में सफलता मिली है।

9 महीने बाद लौटीं सुनीता

सुनीता विलियम्स 5 जून, 2024 को अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन गईं थी। बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट के जरिए वह ISS तक गईं थी। उनका मिशन मात्र 8 दिनों का था लेकिन तकनीकी समस्याओं के चलते वह फंस गईं और 286 दिन उन्हें रुकना पड़ा। असल में उन्हें वापस लाने के फिर से बोईंग स्टारलाइनर का इस्तेमाल होना था। लेकिन इसमें हीलियम लीक समेत बाकी समस्याएँ हो गईं थी।

इसके बाद इसे यात्रा पर नहीं भेजा जा सकता था। वैज्ञानिकों ने बताया था कि यह विमान सुरक्षित नहीं है। इसके बाद उन्हें वापस लाने के लिए बाकी इंतजाम किए गए। इसमें एलन मस्क की अंतरिक्ष कंपनी स्पेसएक्स काम आई और वह उन्हें लेकर लौटी।

सुनीता विलियम्स और बच वालमोर मंगलवार देर रात 3:27 पर वापस धरती लौट आए। उनकी लैंडिंग फ्लोरिडा के समुद्र में हुई है। यह यात्रा 17 घंटे में पूरी हुई है। अंतरिक्ष से सुनीता विलियम्स पूरी तरह सुरक्षित वापस आ गईं हैं और वर्तमान में वह NASA वैज्ञानिकों की देखरेख में हैं।

7 मिनट के लिए टूटा कनेक्शन

वापस लौटते समय उनके स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल का 7 मिनट के लिए धरती से सम्पर्क टूट गया था। दरअसल, ऐसा तापमान बढ़ने के चलते होता है। अंतरिक्ष से धरती के वायुमंडल में प्रवेश करते समय ड्रैगन कैप्सूल का तापमान 1650 डिग्री सेल्सियस हो गया था। इसी के चलते धरती से उनका सम्पर्क टूटा।

NASA ने हालाँकि वापस कुछ देर में सम्पर्क स्थापित कर लिया। जिस कैप्सूल में यह यात्री वापस आए, उसका नाम ‘फ्रीडम’ है। इसके बाहर लगे पेंट और शील्ड ने इतने तेज तापमान से इसे बचाया। ऐसे में कोई दुर्घटना नहीं हुई। इस तेज तापमान से सम्पर्क टूटने की घटना ने लोगों को वापस 2003 में धकेल दिया।

2003 में कल्पना चावला की अंतरिक्ष से वापसी के दौरान ही एक बड़ी दुर्घटना हुई थी। इसमें उनकी मौत हो गई थी। वह अंतरिक्ष जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला थीं। उनके साथ 6 और अंतरिक्षयात्रियों की मौत इस हादसे में हुई थी।

विमान जलने से हुआ था हादसा

कल्पना चावला 1 फरवरी, 2003 को वापस लौट रहीं थीं। उनको NASA का कोलंबिया शटल वापस ला रहा था। इस मामले में बाद में विशेषज्ञों ने जाँच की थी। उन्होंने बताया था कि इस कोलंबिया एयरक्राफ्ट में उड़ान के दौरान फ्यूल से निकला फोम पंख से टकराया था। यह फ्यूल टैंक विमान के बाहर पंख पर लगे हुए थे।

इसके चलते इस विमान के ऊपर लगीं शील्ड वाली प्लेटें उखड़ गईं थी। जब यह विमान धरती के वायुमंडल में घुसा तो इसका सामना तेज तापमान और गैसों से हुआ। सुरक्षा करने वाली शील्ड ना होने के चलते विमान जल गया और लुइसियाना के आसमान में इसमें धमाका होकर यह टूट गया।

इसे धरती पर उतरने में तब मात्र 16 मिनट शेष थे। इस हादसे में कल्पना चावला की मौत हो गई थी। उनके साथ 6 और अंतरिक्ष यात्री मारे गए थे। मारे जाने वालों में इजरायल के पहले अंतरिक्ष यात्री इलान रामोन भी थे। इस हादसे के बाद 2011 में स्पेस शटल प्रोग्राम रद्द कर दिया गया था।

सुनीता विलियम्स पर लम्बे समय तक रहने का क्या असर

अंतरिक्ष में रहने वाले यात्रियों को कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण नहीं है। ऐसे में शरीर को खड़ा रखने में मदद करने वाली हड्डियाँ और मांसपेशियाँ काम नहीं आती। इसके चलते वह कमजोर हो जाती हैं और उनमें फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। यहाँ तक कि उनका संतुलन भी बिगड़ता है।

यह भी पाया गया है कि अंतरिक्ष में रहने वाले यात्रियों को लम्बे से तक रुकने पर वहाँ के रेडिएशन का नुकसान होता है। यह इन यात्रियों का इम्युनिटी सिस्टम भी कमजोर करता है। यहाँ तक कि घावों को ठीक करने की क्षमता भी कम हो जाती है।

शारीरिक के अलावा मानसिक तौर पर भी अंतरिक्ष यात्रियों को समस्याएँ झेलनी पड़ती हैं। उन्हें लम्बे समय तक अकेला रहना होता है और अपनों से दूर रहकर काम करना होता है। इसके चलते डिप्रेशन तक की समस्या हो सकती है। ऐसे में उन्हें पहले मानसिक तौर पर तैयार किया जाता है।

अब सुनीता विलियम्स और वालमोर को NASA के ह्यूस्टन सेंटर में ले जाया जाएगा। यहाँ उनके कई मेडिकल चेकअप होंगे। कुछ दिन उन्हें यहीं पर रखा जाएगा। सारी चीजें सामान्य मिलने पर ही उन्हें वापस घर जाने के लिए फिट घोषित किया गया।

80 साल की हिंदू महिला से रेप, आँखें निकालने की कोशिश… मीडिया ने नहीं बताया कि दरिंदा ‘छोटू आलम’ है, पर हेडलाइन में होली ठूँसना नहीं भूली

बिहार के गोपालगंज जिले में 80 साल की दलित महिला से रेप का मामला सामने आया है। घटना 14 मार्च 2025 की है। बुजुर्ग महिला अपने गेहूँ के खेतों में घास काटने गई थी। उसी समय ‘छोटे आलम’ नाम का आरोपित वहाँ आया और महिला को दबोचकर रेप किया। उसके बाद उसने बुजुर्ग की आँखें निकालने की भी कोशिश की और उसे आखिर में मरा हुआ समझकर वहाँ से फरार हो गया।

जानकारी के मुताबिक, पूरी घटना 14 मार्च शाम करीब 4:30 बजे की है। इस संबंध में महिला के परिजनों ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में बताया गया कि महिला अधमरी अवस्था में एक गाँव की लड़की को मिली थी। उसी ने पीड़िता के बारे में सबको बताया और आखिर में महिला को घर लाया गया, फिर डॉक्टर बुलवाकर प्राथमिक इलाज हुआ।

पीड़ित बुजुर्ग की हालत इतनी ज्यादा खराब थी कि उन्हें होश 19 घंटे बाद जाकर आया। उन्होंने चेत अवस्था में जब सबको आपबीती बताई तो सब हैरान रह गए। वहीं उनका लड़का घटना के बाद सैयद अली के घर गया, मगर वहाँ- सैयद अली, बबुद्दीन, शहाबुद्दीन, सद्दाम, हशमत और जुम्मादीन ने उन्हें धक्का मारकर बाहर कर दिया।

इस दौरान उन्हें गालियाँ भी दी गईं- “सा%$, चम@$ सियार, हमारे दरवाजे पर आकर शिकायत करने आ गया…. भागो, नहीं तो यहीं चम@$ सियार, माद$^$ जान से मार देंगे।”

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित के अलावा चार उसके परिजनों के विरुद्ध भी केस को दर्ज किया है। बैकुंठपुर थाने के एसएचओ का कहना है कि इस मामले में अब तक एक गिरफ्तारी हो गई है जबकि मुख्य आरोपित अब भी फरार है।

वहीं आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, सदर एसडीपीओ अभय कुमार रंजन ने बताया कि पीड़िता को मेडिकल परीक्षण के लिए ले जाया गया है और मेडिकल रिपोर्ट में रेप की बात सामने नहीं आई है। हालाँकि शारीरिक शोषण की पुष्टि हुई है। अधिकारी ने यह भी बताया कि मुख्य आरोपित गिरफ्तार हो चुका है।

मीडिया ने छिपाया आरोपित का नाम

बता दें कि बिहार की इस घटना को कई मीडिया संस्थानों ने कवर किया, लेकिन कुछ ने बहुत चालाकी से अपनी रिपोर्ट में आरोपित का नाम छिपा लिया। इसमें टाइम्स ऑफ इंडिया, ईटीवी भारत और द ऑब्जर्वर पोस्ट जैसे संस्थान शामिल हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया वाली रिपोर्ट में मुस्लिम आरोपित का नाम छिपाकर इसे एक होली पर हुई हिंसा और रेप की घटना की तरह प्रदर्शित किया गया।

रिपोर्ट में लिखा गया। 14 मार्च को होली पर गोपालगंज जिले में एक 80 साल की दलित महिला के साथ कथिततौर पर रेप हुई। हेडलाइन दी गई- होली पर बुजुर्ग महिला के साथ रेप।

इसी प्रकार ईटीवी भारत में भी ऐसे ही दिखाया गया कि दलित महिला के साथ होली पर रेप हुआ और उसकी आँख निकालने की कोशिश हुई। हालाँकि यहाँ भी मुस्लिम आरोपित का नाम छिपाया गया।

इसके बाद इस्लामी नैरेटिव को बढ़-चढ़कर आगे बढ़ाने वाला ‘ऑब्जर्वर पोस्ट’ भी इस घटना के नाम पर होली त्योहार को बदनाम करते देखा गया। उसने ये तो बताया कि दलित परिवार को गालियाँ दी गईं, लेकिन ये गालियाँ किसने दी, ये नहीं बताया गया।

अजीब बात ये है कि जब शिकायत में पूरी तरह आरोपित का नाम बताया गया है तो फिर आखिर क्यों इन मीडिया संस्थानों ने अपनी खबरों से आरोपित को नाम छिपाया और पाठकों को ये दिखाया कि होली पर दलित के साथ अत्याचार हुआ। खैर, ऑब्जर्वर पोस्ट और टाइम्स ऑफ इंडिया में ऐसे भ्रामक हेडलाइन दिखना कोई हैरान करने वाला भी नहीं है। पूर्व में कई ऐसे मामले हुए हैं जब आरोपित की पहचान छिपाते हुए इन मीडिया हैंडल्स पर रिपोर्ट प्रकाशित हुई।

‘किसी भी हिंदू को छोड़ेंगे नहीं, पुलिस को अब दिखा देंगे’: कौन है नागपुर दंगों का मास्टरमाइंड फहीम खान, 1200 पर FIR

नागपुर में दंगे के बाद पुलिस अब हिंसा फैलाने वालों की धर-पकड़ में जुटी है। पुलिस ने इस बीच हिंसा के मास्टरमाइंड की एक तस्वीर जारी की है। फहीम खान को नागपुर के हिन्दू विरोधी दंगे का मास्टरमाइंड बताया गया है। फहीम खान ने दंगे से पहले भड़काऊ तक़रीर दी थी। उसको पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

फहीम की तक़रीर से बिगड़े हालात

फहीम खान के विषय में कई जानकारियाँ सामने आई हैं। पता चला है कि फहीम खान ‘अल्पसंख्यक डेमोक्रेटिक पार्टी’ का अध्यक्ष है। वह 2024 में नागपुर लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुका है। उसने यह चुनाव केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी के खिलाफ लड़ा था लेकिन बुरी तरह हारा था।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि भीड़ को फहीम खान ने ही इकट्ठा किया था और इसके बाद उनको भड़काने वाली तक़रीर दी थी। फहीम खान ने लगभग 500 लोगों को पुलिस थाने के पास बुलाया था। फ़हीम खान नागपुर शहर में ही संजय नगर कॉलोनी में रहता है।

फहीम खान ने कहा था कि पुलिस हिन्दुओं की है और वह मुस्लिमों की कोई सहायता नहीं करेगी। उसने कहा था, “पुलिस सामने आ रही है… इन्होंने ही सारा खेल खेला है। इन्होंने ही ये सब किया है।” इसके बाद भीड़ उग्र हो गई।

दंगाई भीड़ ने गाड़ियाँ जलाई, पेट्रोल बम फेंके

इस मामले में हुई FIR में यह सारी बातें लिखी हुई हैं। इस मामले में दर्ज हुई FIR में 51 मुस्लिमों को नामजद किया गया है। 500-600 की भीड़ को अज्ञात तौर पर आरोपित बनाया गया है। इस FIR में बताया गया है कि मुस्लिम भीड़ लाठी-डंडे, कुल्हाड़ी और पत्थरों से लैस थी।

इस भीड़ ने विशेष रूप से हिन्दुओं और पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। पुलिसकर्मियों पर मुस्लिम भीड़ ने आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की, उनपर हिन्दुओं का साथ देने का आरोप लगाया। इसके बाद उन पर पत्थर बरसाए गए और लाठियाँ चलाई गईं। पुलिस पर पेट्रोल बम भी फेंके गए।

मुस्लिम भीड़ ने चिल्लाया कि हिन्दू और पुलिस को छोड़ना नहीं है और यह लोग मजहबी निशान जलाने में मददगार रहे हैं। FIR में बताया गया है कि हमले के दौरान मुस्लिम भीड़ ने महिला पुलिसकर्मियों को घेर लिया और उनसे छेड़खानी की। एक महिला पुलिस अधिकारी के कपड़े फाड़ने की कोशिश हुई।

पुलिस पर हमले के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं की भी गाड़ियाँ जलाई और उनके घरों पर पत्थर फेंके। इस FIR में पुलिस ने दंगाई भीड़ के खिलाफ 57 धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इनमें से भारतीय न्याय संहिता की 46 धाराएँ हैं।

हमले में लगभग 70 लोग घायल हुए हैं, इनमें आधे से अधिक पुलिसकर्मी हैं। हमले के दौरान मुस्लिम भीड़ ने 50 से अधिक गाड़ियाँ जलाई हैं। इनमें 2 रोड निर्माण के लगाई गईं क्रेन भी शामिल हैं। यह भी सामने आया है कि मुस्लिम भीड़ ने 2 होमगार्ड को घेर लिया था और उनकी मॉब लिंचिंग का प्रयास किया गया।

पुलिस का एक्शन जारी

एक रिपोर्ट के अनुसार, CRPF के एक कमांडेट को भी घेर कर उनकी गाड़ी पर पत्थर बरसाए गए। नागपुर के DCP निकेतन कदम के हाथ पर कुल्हाड़ी मारी गई। उनकी सर्जरी की गई है। बाकी पुलिसकर्मियों का भी इलाज चल रहा है। अब पुलिस इस मामले में एक्शन मोड में आ गई है।

अब तक नागपुर हिंसा में 6 FIR दर्ज हो चुकी हैं। इनमें 1200 से अधिक लोग आरोपित बनाए गए हैं। बड़ी संख्या में आरोपित अज्ञात लोग बनाए गए हैं। पुलिस की छापेमारी में 50 से अधिक दंगाई पकड़े जा चुके हैं। नागपुर में कुछ इलाके में बुधवार (19 मार्च, 2025) तक कर्फ्यू लगा हुआ है। फहीम खान भी पकड़ा जा चुका है।

वो ‘डॉक्टर’, जिसने फोड़ ली आँखें… अब मौत: रैगिंग के कारण मर गई जिनकी बेटी, बीड़ी बनाने वाली उस बूढ़ी माँ के लिए केरल की वामपंथी सरकार के पास पैसे नहीं

केरल के कासरगोड जिले की सावित्री डॉक्टर बनकर अपने परिवार को बेहतर जीवन देना चाहती थीं। बचपन में वे अपनी माँ से कहा करती थीं, “मैं आपके लिए बड़ा घर बनवाऊँगी।” अफसोस ऐसा हो न सका। सावित्री की मां की जिंदगी बीड़ी बनाते हुए ही निकल गई। आज भी वे बिना दरवाजे वाले घर में रहने को मजबूर हैं। केरल की वामपंथी सरकार ने घर की नींव तो खड़ी कर दी लेकिन छत को अब भी तिरपाल से ढकना पड़ रहा है। त्रासदी भरी इस कहानी के पीछे सिर्फ एक शब्द का कारण है – रैगिंग।

सावित्री मुंडावलप्पिल कॉलेज में रैगिंग के कारण अवसाद में चली गई थीं। अवसाद भी ऐसा कि उन्होंने अपनी दाहिनी आँख तक फोड़ ली थी। विभिन्न पुनर्वास केंद्र में जीवन बिताने के 30 साल बाद 17 मार्च 2025 को हृदयघात के चलते उन्होंने अंतिम साँस ली।

सावित्री की माँ और उनके शिक्षकों को भरोसा था कि वो छोटी सी लड़की अपने परिवार को गरीबी से मुक्त कर उनका जीवन सुधारेगी। सावित्री भी यही चाहती थी। स्कूल में मन लगाकर पढ़ाई करती थी। मेहनत ने सफलता दिलाई। 377 नंबर लाकर फर्स्ट डिवीजन से पास हुईं। तब इतने मार्क्स के भी जलवे होते थे। साल 1996 में नेहरू कला और विज्ञान महाविद्यालय में प्रवेश मिला।

कॉलेज का पहला दिन सावित्री शायद खुशियों और सपनों के साथ गई होंगी। अफसोस कि जिस कॉलेज में सपनों को उड़ान मिलना था, वहीं हुई रैगिंग के कारण पूरा जीवन ही पुनर्वास केंद्र में गुजारना पड़ा। 3 दिन, सिर्फ 3 दिन ही उस कॉलेज में जा पाईं सावित्री। तीनों दिन रैगिंग झेली। इतना झेली कि चौथे दिन कॉलेज गई ही नहीं, न ही कभी आगे जा पाईं।

‘बायपोलर अफेक्टिव डिस्ऑर्डर’ नाम की मानसिक बीमारी से ग्रसित सावित्री अब अपने परिवार के लिए बोझ बन गई थीं। मनोचिकित्सकों के अनुसार उन्हें खुद को दर्द/चोट पहुँचाने का आदेश देने जैसी आवाजें सुनाई देने का आभास होता था। ऐसे मानसिक हालात और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के चलते सावित्री को विभिन्न पुनर्वास केंद्रों में स्थानांतरित किया गया।

सावित्री के परिवार में उनकी माँ मुंडावलप्पिल वट्टीची और तीन बड़ी बहनें – शांता, थंकामणि और सुकुमारी हैं। ये सभी केरल बीड़ी वर्कर्स सेंट्रल को-ऑपरेटिव सोसाइटी में मजदूरी करती हैं। उनका पूरा जीवन बीड़ी बनाते ही निकल गया। जब सावित्री बच्ची थीं, तभी उनके पिता की मृत्यु हो गई थी। बचपन में जिसने बाप को खो दिया, जवानी में रैगिंग के कारण परिवार का साथ भी छूट गया। जिस मेधावी बच्ची के साथ प्रशासनिक चूक के कारण इतनी बड़ी त्रासदी हुई, वामपंथी सरकार ने उसके लिए क्या किया – यह भी जानने लायक है।

वर्ष 2021 में राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने राज्य सरकार से पीड़िता के परिवार को पक्का मकान दिलाने की माँग की। इसके बाद केरल सरकार ने मामले को संज्ञान में लिया और परिवार के लिए पक्का मकान बनाने की प्रक्रिया शुरू की – सरकारी प्रक्रिया! अभी तक मकान का सिर्फ ढाँचा बनकर तैयार हुआ है, घर अब तक पूरा नहीं हुआ है। राज्य सरकार से सावित्री की माँ लगातार घर को पूरा कराने की अपील में लगी हुई हैं।

सावित्री की माँ अपने परिवार के साथ आज भी ऐसे घर में रहती हैं, जिसमें दरवाज़े नहीं हैं, तिरपाल से झोपड़ी को ढका हुआ है। सरकार ने उन्हें पक्के मकान का वादा तो कर दिया लेकिन अब तक मकान बनकर तैयार नहीं हुआ है। मामले को लेकर सीपीएम नेता श्रीधरन कहते हैं, “अब घर की नींव का काम पूरा हो गया है। फंड की कमी के कारण अगला चरण रुका हुआ है।”

सावित्री के साथ हुई रैगिंग की घटना न तो पुलिस को जगा पाई, न ही माननीय न्यायालय को। ऐसा कोई आदेश कोर्ट की ओर से आ ही नहीं पाया, जिसे लैंडमार्क जजमेंट कहा जा सके। तारीख के पन्नों में दब कर रह गया सावित्री को मिलने वाला न्याय… और रैगिंग करने वाले आरोपितों पर अपराधी का ठप्पा भी नहीं लगा। जब सावित्री मानसिक रोगी बनी तो पुनर्वास केंद्र में स्थानीय पत्रकार ने उनकी कहानी पर गौर किया, जिससे बात बाहर आई कि उनकी यह हालत रैगिंग के कारण हुई है।

सावित्री की कहानी को गौर करते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग (SHRC) ने राज्य सरकार को रिपोर्ट भेजी, उनके परिवार के लिए घर की माँग की। इसे सरकार ने मंजूर तो कर लिया लेकिन प्राथमिकता नहीं दी। वामपंथी सरकार के इस रवैये के कारण रैगिंग पीड़िता का परिवार आज तक बेहतर जीवन की तलाश में है।

‘बुलडोजर’ से कुचल दिया माफिया-गुंडों का राज, देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना UP, मिथकों को किया ध्वस्त: CM योगी ने 8 साल में ही ‘बीमारू’ से बना दिया ‘बेजोड़’

योगी आदित्यनाथ 19 मार्च 2017 को जब राजधानी लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन स्थल में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वे उत्तर प्रदेश के सर्वाधिक समय तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाएँगे। यह वो दौर था जब इस देश के पॉलिटिकल पंडित कहते थे की योगी आदित्यनाथ के पास कोई प्रशासनिक अनुभव पहले से नहीं है।

इन सब अटकलों के बावजूद सीएम योगी ने 5 साल का अपना कार्यकाल पूरा किया और साल 2022 के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनवाने में मदद की। इसके बाद वे एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश में सरकार बनी और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने।

आज योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में सफलतापूर्वक अपने मुख्यमंत्रित्व काल के 8 वर्ष पूरे कर लिए, जो उत्तर प्रदेश जैसे विशाल प्रदेश के लिए एक रिकॉर्ड है। 25 करोड़ जनता के साथ देश को सर्वाधिक प्रधानमंत्री देने वाले उत्तर प्रदेश में सन 1952 से लेकर अब तक सबसे लंबे कार्यकाल तक मुख्यमंत्री रहने वाले योगी आदित्यनाथ ने रिकॉर्ड ऐसे ही नहीं बनाया है।

इसका कारण उत्तर प्रदेश की जनता के प्रति मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का समर्पण, त्याग, कठिन परिश्रम और निष्ठा है, जिसका परिणाम जनता उनके ऊपर विश्वास जताकर देती रहती है। चाहे कानून व्यवस्था हो, अर्थव्यवस्था हो, सुरक्षा हो या फिर धर्म एवं आस्था का विषय… योगी आदित्यनाथ ने हर दृष्टिकोण से उत्तर प्रदेश को आगे बढ़ाने का काम किया।

किसी भी प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए वहाँ पर कानून व्यवस्था का सुचारू रूप से होना अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि तभी व्यापारी सुकून महसूस करते हैं, अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और लोगों को रोजगार मिलता है। इसके लिए उन्होंने पहले की सरकारों के दौरान चल रहे जिलों में संगठित अपराधों पर लगाम लगाई। तमाम आलोचनाओं के बावजूद भी अपराधियों पर बुलडोजर चलता रहा।

आज उत्तर प्रदेश में किसी भी जिले में कोई बड़ा अपराधी नहीं है। ये अपराधी या तो जेल में हैं या फिर यमलोक में। उत्तर प्रदेश के डीजीपी प्रशांत कुमार के अनुसार, प्रदेश में करीब 222 दुर्दांत अपराधियों का एनकाउंटर किया गया है। 8118 अपराधी घायल हुए हैं और 20,221 इनामी अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 79,984 के पर गैंगस्टर एक्ट की कार्रवाई हुई है।

इसके अलावा, 930 अपराधियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत करवाई की गई। 142 अरब से अधिक अपराधियों की संपत्ति जब्त की गई है। ये सब इसलिए किया गया, ताकि उत्तर प्रदेश की जनता सुकून की साँस ले सके, व्यापारी सुरक्षित महसूस कर सके, अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके और बहन बेटियाँ सुरक्षित महसूस कर सकें।

आजादी से लेकर साल 2017 तक उत्तर प्रदेश पुलिस में जितनी महिलाओं की भर्ती हुई है, उसका तीन गुना भर्ती केवल योगी आदित्यनाथ ने पिछले 8 वर्षों में की है। इतना ही नहीं, साल 2017 से दिसंबर 2024 तक अदालतों में प्रभावी पैरवी करके 31 माफिया और 74 अपराधियों को आजीवन कारावास और दो अपराधियों को फाँसी की सजा दिलवाई गई है।

इससे पहले की सरकारों की स्थिति यह थी कि इन माफियाओं के खिलाफ गवाही देने वाले गवाह या तो मुकर जाते थे या वे मार दिए जाते थे। अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है। आज विश्वास नहीं होता कि ये वही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जिन्हें सांसद रहने के दौरान सदन में कहा जाता था कि ‘संत हो मंदिर में जाकर घंटा बजाओ… राजनीति तुम्हारे बस की बात नहीं है’।

आज उत्तर प्रदेश 20 एयरपोर्ट के साथ पूरे देश भर में नंबर एक स्थान पर है। यहाँ पाँच अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हैं। जेवर एयरपोर्ट एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन चुका है। जब योगी आदित्यनाथ साल 2017 में मुख्यमंत्री बने तब ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में उत्तर प्रदेश 14वें नंबर पर था। यह योगी आदित्यनाथ के कठिन परिश्रम की बदौलत दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुँच चुका है।

साल 2017 में जिस उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था 3.4 लाख करोड़ रुपए की थी, वह बढ़कर आज करीब 8 लाख करोड़ रुपए की हो चुकी है। अर्थव्यवस्था को लेकर योगी आदित्यनाथ की सरकार कितनी प्रतिबद्ध है, वो इससे पता चलता है कि जो प्रदेश पहले ‘वन जिला वन माफिया’ के नाम से जाना जाता था, वह ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ के नाम से जाना जाता है।

आज उत्तर प्रदेश के हर जिले का अपना एक विशेष उत्पाद है, जो उसकी पहचान बनकर उभरी है। इतना ही नहीं, ये योगी आदित्यनाथ की उस आकांक्षा को भी पूरा करने में सहयोगी है, जो उन्होंने यूपी के। लिए सोचा है। योगी आदित्यनाथ ने 2027-28 तक उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डालर की इकनॉमी बनाने का लक्ष्य रखा है। इसकी तरफ वह और उनकी सरकार लगातार प्रयासरत हैं।

साल 2017 में उत्तर प्रदेश छठी-सातवीं अर्थव्यवस्था के रूप में योगी आदित्यनाथ को विरासत के रुप में मिला था। आज वह देश भर में दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के बन चुकी है। यहाँ तक पहुँचने के लिए योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार ने कई प्रयास किए हैं। व्यापार एवं आवाजाही को बढ़ाने प्रदेश में 13 एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया गया है, जो कुल 55 जिलों को जोड़ते हैं।

आज उत्तर प्रदेश के 75 जनपदों में 77 से अधिक मेडिकल कॉलेज हैं। एक समय था, जब उत्तर प्रदेश का कोई मुख्यमंत्री नोएडा केवल इसलिए नहीं जाता था क्योंकि उसकी कुर्सी ना चली जाए। योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के रूप में नोएडा का बार-बार दौरा करके इस अंधविश्वास एवं मिथक को तोड़ा और खुद उपस्थित होकर कई परियोजनाओं का शुभारंभ किया।

ना केवल विकास, सुरक्षा और अर्थव्यवस्था, बल्कि आस्था के मामले पर भी भगवाधारी संत योगी आदित्यनाथ ने खूब काम किया। विश्वास ही नहीं होता कि सिर्फ 45 दिन के महाकुंभ में आस्था की नगरी प्रयागराज में 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया। ये अपने आपमें एक रिकॉर्ड है। कल्पना कीजिए कि यदि महाकुंभ मेला एक देश होता तो विश्व का तीसरा सबसे बड़ा देश होता।

सृष्टि की शुरुआत से अभी तक शायद आस्था का इस तरह का जनसैलाब कभी भी किसी देश या शहर ने नहीं देखा होगा। पूरी दिव्यता एवं आध्यात्मिकता के साथ महाकुंभ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सामाजिक समरसता के दृष्टिकोण से भी ये महाकुंभ शानदार रहा, जहाँ लोग जाति और धर्म के बंधन को तोड़कर सिर्फ आस्था के नाम पर एकत्रित हुए और एक-दूसरे की मदद भी की।

यह केवल योगी आदित्यनाथ जैसे भगवाधारी संत के कार्यकाल में ही संभव था, जिन्होंने पूरे प्रदेश एवं देश को अपना परिवार माना है। लोगों ने पर उन पर विश्वास जताया। श्रद्धालुओं के चेहरे पर आस्था की चमक और होठों पर माँ गंगा के जयकारे थे। इस महाकुंभ में ना केवल उत्तर प्रदेश और देश, बल्कि विदेश के भी लाखों लोगों ने अपने-अपने हिस्से का पुण्य कमाया।

प्रयागराज में 45 दिन तक चले धार्मिक संगम में सभी को एक दूसरी सभ्यता और संस्कृति को जानने एवं समझने का मौका मिला। धर्म और आस्था का मजाक उड़ाने वाले लोगों को योगी आदित्यनाथ ने तब जवाब दिया, जब पता चला कि महाकुंभ के आयोजन में शासन द्वारा ₹7,500 करोड़ खर्च करने के बदले में लगभग ₹3 लाख करोड़ तक की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न होने का अनुमान है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति, समर्पण, त्याग एवं कुछ कर गुजरने की चेष्टा हो तो इस धरती पर कुछ भी असंभव नहीं है। ऐसा लगता है कि रामराज्य की परिकल्पना में इससे बेहतर शासन शैली नहीं हो सकती, जहाँ मुख्यमंत्री लगातार यह कहते हों कि प्रदेश की 25 करोड़ जनता ही ‘मेरा परिवार’ है।

विश्वास नहीं होता कि यह वही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं, जिसके बारे में मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही मीडिया के एक वर्ग के द्वारा लगातार भ्रामक खबरें चलाई जाती हैं। ऐसी खबरें चलाई जाती रहती हैं कि योगी अब गए कि तब गए। इन्हीं अटकलों के बीच योगी आदित्यनाथ ने देश के सबसे बड़े सूबे में सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री बने रहने का रिकॉर्ड बना दिया।

नागपुर के दंगाइयों का मजहब तो आपको पता होगा ही, हम 51 का नाम लेकर भी आए हैं: पीड़ित हिंदू बोले- कब तक निभाएँगे ‘भाईचारा’, आज दुकान तोड़ी है… कल घर में घुसेंगे

नागपुर के दंगे में हिन्दू दुकानों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया। उनके पास ही मुस्लिमों की दुकानें भी थीं, उन्हें छोड़ दिया गया। मुस्लिम भीड़ के दंगे के दौरान प्रभावित हिन्दुओं ने पूछा है कि आखिर वह इस तरह से कैसे एकतरफा भाईचारे को निभा पाएँगे। इस बीच पुलिस लगातार नागपुर के दंगाइयों पर कार्रवाई कर रही है।

मीडिया से बात करते हुए एक पीड़ित हिन्दू ने कहा, “भाईचारे से रह रहे थे तो फिर इनको दुकान तोड़ने-गाड़ियाँ जलाने की क्या जरूरत थी? यहीं पर बुरहानपुर (मुस्लिम इलाका) है जहाँ एक भी दुकान नहीं तोड़ी गई। हम हिन्दू लोग हैं, हमारे ऊपर ही सब चीजें हो रही हैं। कब तक हम भाईचारे से रहेंगे।”

उन्होंने आगे पूछा, “क्या हमने एक भी दुकान उनकी तोड़ी, ना हमने कुछ किया। हम तो पैसे कमाने के लिए हैं… ये बात पैसे की नहीं है, बात की इज्जत नहीं है। आज इन्होंने हमारी दुकान पर हमला किया है। कल को यह घर में घुसेंगे। तो फिर क्या होगा।” पीड़ित को आप इस वीडियो में 1 मिनट 28 सेकंड के बाद सुन सकते हैं।

पीड़ित हिन्दू ने पूछा कि अभी तो रोज बवाल के बाद लोग अपने घर वापस चले जाते हैं लेकिन ऐसे कब तक चलेगा। एक और पीड़ित ने बताया, “रात को 4-5 लोग पहले आए। उनके बाद 100 से ज्यादा लोग पेट्रोल बम, तलवार और लाठी-डंडे लेकर आ गए।”

पीड़ित ने बताया कि उसकी गाड़ी को निशाना बनाकर आग लगाई गई। पीड़ित को मुस्लिमों को फेंके पत्थर भी लगे, जिसमें वह घायल हो गए। एक हिन्दू महिला ने बताया कि दंगाई भीड़ ने घरों में घुसने का प्रयास भी किया। दंगे के बाद पुलिस अब FIR दर्ज कर रही है।

ऐसी ही एक FIR में मुस्लिम दंगाइयों को नामजद किया गया है। इसमें यासिर, फयाज, अल्ताफ, इकबाल, अक्सार और वसीम समेत 51 लोग आरोपित बनाए गए हैं। पुलिस ने 500-600 अज्ञात आरोपितों के खिलाफ भी FIR लिखी है। इस बीच यह भी सामने आया है कि दंगे के दौरान भीड़ ने एक महिला पुलिस अधिकारी को घेर लिया था।

उसकी वर्दी फाड़ी गई थी और अश्लील इशारे भी किए गए थे। इस मामले में FIR भी दर्ज की गई है। गौरतलब है कि सोमवार (17 मार्च, 2025) इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने कुरान जलाने की अफवाह के नाम पर नागपुर में काफी उत्पात मचाया था। उन्होंने पुलिस पर पथराव किया था और पार्किंग में खड़ी गाड़ियाँ भी जला दी थीं।