भारी हंगामे के बीच शुक्रवार (21 मार्च 2025) को कर्नाटक विधानसभा में मुस्लिमों को सरकारी ठेके में 4 प्रतिशत कोटा देने का बिल पास हो गया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने बजट में इसकी घोषणा की थी और कुछ दिन पहले इसे कैबिनेट में मंजूरी दी थी। भाजपा ने इसे असंवैधानिक बताते हुए सदन में जमकर विरोध किया और कोर्ट में चुनौती देने की कसम खाई।
भाजपा के विधायकों ने विधानसभा के वेल में घुसकर सत्तारूढ़ कॉन्ग्रेस की सिद्धारमैया सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। भाजपा नेताओं ने बिल की कॉपी को फाड़ दिया और स्पीकर पर कागज फेंके दिया। इतना ही नहीं, वे विधानसभा अध्यक्ष स्पीकर की सीट पर भी चढ़ गए। भाजपा नेताओं ने अपने विरोध प्रदर्शन का बचाव किया और कहा कि उन्होंने जो भी किया सही किया।
#WATCH | Ruckus erupts in Karnataka Assembly as BJP MLAs enter the Well of the House and also tear and throw papers before the Speaker's chair
भाजपा विधायक भरत शेट्टी ने कहा, “हनी ट्रैप घोटाले पर चर्चा करने के बजाय मुख्यमंत्री मुस्लिमों को चार प्रतिशत आरक्षण का बिल पेश करने में व्यस्त थे। इसलिए हमने विरोध किया। सरकार पक्ष के विधायकों ने भी कागज फाड़े और हम पर किताबें फेंकी। हमने किसी को नुकसान नहीं पहुँचाया।” विपक्षी दल भाजपा ने सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।
वहीं, सत्ताधारी कॉन्ग्रेस सरकार ने अपने कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह अल्पसंख्यकों के लिए सामाजिक न्याय और आर्थिक अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दरअसल, इस कानून में प्रावधान किया गया है कि मुस्लिम ठेकेदारों को सरकारी निविदाओं में 4 प्रतिशत कोटा मिलेगा। इससे वे सार्वजनिक अनुबंधों के लिए अधिक प्रभावी ढंग से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे।
इससे पहले कर्नाटक के भाजपा के वरिष्ठ विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनाल ने बुधवार (19 मार्च 2025) को मुस्लिम कोटा विधेयक को खारिज करने की माँग करते हुए राज्यपाल थावरचंद गहलोत को एक चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने इसे असंवैधानिक बताया। बता दें कि इससे पहले बुधवार (19 मार्च) को कर्नाटक विधानसभा ने केंद्र के वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया।
उस समय भाजपा सदन से वॉकआउट कर चुकी थी। प्रस्ताव को कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एचके पाटिल ने पेश किया था। पाटिल ने विधानसभा में प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा, “यह सदन सर्वसम्मति से केंद्र सरकार से आग्रह करता है कि वह वक्फ (संशोधन) विधेयक 2024 को तुरंत वापस लेकर देश की सर्वसम्मत राय का सम्मान करे, जिसमें ऐसे प्रावधान हैं जो संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं।”
तलाक की माँग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी द्वारा पोर्न देखना और हस्तमैथुन करना पति के लिए तलाक का आधार नहीं हो सकता है। कोर्ट ने कहा कि पोर्न में महिलाओं को अपमानजनक तरीके से दिखाया जाता है। लंबे समय तक पोर्न देखने से दर्शक पर नकारात्मक असर पड़ता है। इसलिए, यह नैतिक रूप से गलत हो सकता है, लेकिन निजी तौर पर इसे देखना अपराध नहीं है।
हाई कोर्ट के जस्टिस जीआर स्वामीनाथन और जस्टिस आर. पूर्णिमा की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि निजी तौर पर पोर्न देखना अपराध नहीं है। पत्नी द्वारा अपने पति को शामिल किए बिना ही अकेले में पोर्न देखना वैवाहिक क्रूरता नहीं मानी जाएगी। साथ ही पत्नी पर हस्तमैथुन करने का आरोप भी तलाक का आधार नहीं है। इस तरह कोर्ट ने पति द्वारा तलाक की माँग वाली याचिका खारिज कर दी।
खंडपीठ ने 19 मार्च 2025 को दिए को दिए अपने फैसले में आगे कहा, “नैतिकता के व्यक्तिगत और सामुदायिक मानक एक बात है और कानून का उल्लंघन दूसरी बात है। केवल निजी तौर पर पोर्न देखना याचिकाकर्ता (पति) के लिए क्रूरता नहीं माना जा सकता। यदि पोर्न देखने वाला व्यक्ति अपने पति या पत्नी को साथ शामिल होने के लिए मजबूर करता है तो यह क्रूरता माना जाएगा।”
मद्रास हाई कोर्ट की खंडपीठ ने आगे कहा, पोर्न देखने वाले पति या पत्नी के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।” हाई कोर्ट ने पोर्न की लत को लेकर आगे कहा, “यदि इस लत के कारण किसी के वैवाहिक दायित्वों के निर्वहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो यह कार्रवाई योग्य आधार प्रदान कर सकता है।” कोर्ट ने कहा कि पोर्न देखना या हस्तमैथुन करना महिला की यौन स्वच्छंदता है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायालय ने कहा कि किसी महिला से इस तरह के आरोप पर जवाब माँगना उसकी यौन स्वायत्तता का घोर उल्लंघन होगा। न्यायालय ने सवाल उठाया कि यदि एक महिला हस्तमैथुन करती है तो इसे इतना कलंकित क्यों माना जाता है, जबकि हस्तमैथुन करने वाले पुरुषों के साथ ऐसा कोई कलंक नहीं जुड़ा है।
कोर्ट ने कहा, “जब पुरुषों में हस्तमैथुन को आम माना जाता है तो महिलाओं द्वारा हस्तमैथुन को कलंकित नहीं माना जा सकता है। यह भी सच है कि पुरुष हस्तमैथुन करने के तुरंत बाद संभोग में शामिल नहीं हो सकते, लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा नहीं होता। यह स्थापित नहीं है कि अगर पत्नी को हस्तमैथुन की आदत है तो पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध प्रभावित होंगे।”
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि अगर शादी के बाद कोई महिला विवाहेतर संबंध बनाती है तो यह तलाक का आधार बन सकता है। हालाँकि, आत्म-सुख पाने के लिए पोर्न देखना और हस्तमैथुन करना तलाक का कारण नहीं हो सकता। कोर्ट ने कहा कि पत्नी के इन व्यवहारों को किसी तरह से नहीं कहा जा सकता है कि यह पति के प्रति क्रूरता है।
अपनी याचिका में पति ने यह भी दावा किया कि उसकी पत्नी यौन रोगों (STD) से पीड़ित है। हालाँकि, कोर्ट ने पाया कि पति ने केवल आयुर्वेदिक केंद्र की कुछ रिपोर्टों का हवाला दिया था। मेडिकल ब्लड टेस्ट रिपोर्ट के अभाव में कोर्ट ने पति के आरोप को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इन रोगों का पता सिर्फ खून जाँच से ही लगाया जा सकता है। कोर्ट ने इन दावों को अपुष्ट बताया।
खंडपीठ ने क्रांतिकारी कवि और कार्यकर्ता नामदेव ढसाल की पत्नी मल्लिका अमार शेख का उदाहरण भी दिया, जिन्होंने अपनी आत्मकथा में बताया है कि कैसे उनके पति ने उन्हें यौन रोग दिए। इसको लेकर कोर्ट ने कहा, “क्या नामदेव ढसाल इस आधार पर तलाक की याचिका दायर कर सकते थे कि उनकी पत्नी एसटीडी से पीड़ित है? इसका जवाब ‘नहीं’ है।”
दरअसल, यह मामला तमिलनाडु के करूर जिले के एक व्यक्ति और उसकी पत्नी से जुड़ा है। दोनों की शादी जुलाई 2018 में हिंदू रीति-रिवाजों के तहत एक मंदिर में हुई थी। दोनों की यह दूसरी शादी थी। शादी के बाद दोनों को संतान भी नहीं है। दिसंबर 2020 में पति-पत्नी अलग हो गए। इस दौरान पत्नी से पति से भरण-पोषण की माँग की, जबकि पति ने तलाक की माँग की।
तलाक की माँग करते हुए पति ने फरवरी 2024 में करूर के पारिवारिक न्यायालय में एक याचिका दी। याचिका में उसने पत्नी पर आरोप लगाया था कि वह बहुत खर्चीली है। वह घरेलू काम करने से मना करती है और ससुराल वालों से बुरा व्यवहार करती है। इसके अलावा, वह पोर्न देखने की आदी है, हस्तमैथुन करती है और फोन पर लंबी बातचीत करती है। साथ ही वह यौन रोगों से ग्रसित है।
पारिवारिक न्यायालय ने पति के सभी तर्कों को सुनने के बाद उसकी याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि इसमें तलाक के लिए आधार नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता पति ने पारिवारिक न्यायालय के फैसले को साल 2024 मद्रास हाई कोर्ट में चुनौती दी। हालाँकि, मद्रास हाई कोर्ट ने पति के तर्कों को एक बार फिर से खारिज कर दिया।
उत्तराखंड में इन दिनों अवैध मदरसों के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्ती खूब चर्चा में है। गुरुवार (20 मार्च 2025) को ऊधम सिंह नगर में 16 और हरिद्वार में 2 मदरसों को सील कर दिया गया। अब तक राज्य में 110 मदरसों पर ताला लग चुका है। पिछले एक महीने से प्रशासन लगातार ऐसे मदरसों पर कार्रवाई कर रहा है, जो बिना सरकार की अनुमति के चल रहे थे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में 4, किच्छा में 8, बाजपुर में 3, जसपुर में 1 और हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र में 2 मदरसे सील हुए। इससे पहले देहरादून और पौड़ी में 92 मदरसों पर भी ऐसी ही कार्रवाई हो चुकी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा है कि राज्य के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी। उनके इस बयान से लोगों में उम्मीद जगी है कि गलत काम करने वालों को सबक मिलेगा। धामी ने कहा, “जो भी धर्म की आड़ में अवैध गतिविधियां चलाएगा, उसके खिलाफ सख्त एक्शन होगा।”
हरिद्वार के गैंडीखाता की गुर्जर बस्ती में दो मदरसे बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे थे, जिन्हें गुरुवार (20 मार्च 2025) को सील कर दिया गया। हरिद्वार के एसडीएम अजयवीर सिंह ने कहा, “हमें सीएम के आदेश मिले हैं। उन मदरसों पर कार्रवाई करने और उन्हें सील करने के आदेश दिए गए हैं जो न तो मदरसा बोर्ड और न ही शिक्षा विभाग से पंजीकृत हैं। आदेश आज ही आए हैं इसलिए जैसे-जैसे हमें पता चलता जाएगा हम सील की कार्रवाई करते जाएँगे।”
#WATCH | Haridwar, Uttarakhand: Ajayveer Singh, SDM Haridwar says, "Orders have been given to take action and seal those madrasas which are neither registered with the Madrasa Board nor with the Education Department. Two madrasas have been sealed in Gandi Khata of Shyampur police… pic.twitter.com/orxxstcC3b
प्रशासन अब ये भी जाँच कर रहा है कि इन मदरसों के पीछे कौन लोग हैं और वहाँ बच्चों को क्या सिखाया जा रहा था। हरिद्वार के डीएम कर्मेंद्र सिंह ने बताया कि जिले में 60 से ज्यादा अवैध मदरसे चिन्हित किए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक, बीते माह अधिकारियों ने बिना पंजीकरण के चल रहे 200 से ज़्यादा मदरसों की पहचान की, जिनमें उधम सिंह नगर ज़िले में सबसे ज़्यादा 129 मदरसे थे, उसके बाद देहरादून में 57 और नैनीताल में 26 मदरसे थे।
देश को 2026 तक नक्सलमुक्त करने की तरफ सुरक्षाबलों ने एक और कदम बढ़ाया है। छत्तीसगढ़ में 2 अलग-अलग जगह पर 30 नक्सली मार गिराए गए हैं। यह 2025 में तीसरा ऐसा बड़ा एनकाउंटर है, जिसमें 1 दर्जन या उससे अधिक नक्सली मारे गए हैं। इस बीच कई बड़े नक्सली कमांडर या तो मारे गए हैं, या फिर उन्होंने सरेंडर का रास्ता अपनाया है।
बीजापुर-कांकेर में 30 ढेर
छतीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में गुरुवार (20 मार्च, 2025) को नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों ने बड़ा ऑपरेशन चलाया। बीजापुर में सुरक्षाबलों के साथ लम्बी मुठभेड़ में 26 नक्सली मार गिराए गए। इस ऑपरेशन के दौरान 1 जवान भी बलिदान हो गया। यह ऑपरेशन बीजापुर-दंतेवाड़ा सीमा पर चलाया गया था।
नक्सलियों के गंगालूर थाना क्षेत्र में होने की सूचना सुरक्षाबलों को मिली थी। इसके बाद CRPF, पुलिस और DRG के जवान बुधवार को भेजे गए थे। वह गुरुवार सुबह जब यहाँ के पहाड़ी इलाके में पहुँचे तो नक्सलियों ने उन पर फायरिंग कर दी। इसका सुरक्षाबलों ने जवाब दिया। यह मुठभेड़ सुबह 7 बजे चालू हुई और शाम तक चली।
इसके बाद जब फायरिंग रुकी तो सर्च अभियान चलाया गया। इसमें 26 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं। इनके पास से बड़ी मात्रा में हथियार भी बरामद किए गए हैं। भारी गोलीबारी में DRG जवान राजू ओयाम घायल हो गए और जब तक उन्हें इलाज के लिए ले जाया जाता, तब वह वीरगति को प्राप्त हुए। ।
इस ऑपरेशन के साथ महाराष्ट्र सीमा से लगे कांकेर में भी मुठभेड़ हुई। यहाँ भी नक्सलियों ने BSF की एक सर्च पार्टी पर फायरिंग की। जवानों ने इसका जवाब दिया। इस ऑपरेशन में 4 नक्सलियों के शव बरामद हुए हैं। यहाँ जवानों को हथियारों का जखीरा मिला है।
2025 में 119 नक्सली ठिकाने लगाए
वर्ष 2025 में सुरक्षाबलों को नक्सलियों के खिलाफ लगातार बड़ी सफलताएँ हाथ लगी हैं। अब तक तीन ऐसे ऑपरेशन छत्तीसगढ़ में हो चुके हैं, जिनमें एक दर्जन से ज्यादा नक्सली एक साथ मार गिराए गए हों। एक रिपोर्ट बताती है कि अब तक 2025 के भीतर छत्तीसगढ़ में 119 नक्सली मार गिराए गए हैं।
2025 के पहले दिन से ही सुरक्षाबलों ने नक्सलियों पर शिकंजा कसना चालू कर दिया था। 2 जनवरी, 2025 को बीजापुर में हुई मुठभेड़ में 5 नक्सली मारे गए थे। उसके बाद यह सिलसिला चलता ही रहा। 16 जनवरी को हुई एक मुठभेड़ में 18 नक्सली मार गिराए गए थे।
21 जनवरी, 2025 को गरियाबंद पहाड़ी पर हुई एक मुठभेड़ में 16 नक्सली मारे गए थे। इनमें नक्सलियों का टॉप कमांडर चलापति भी था। चलापति ₹1 करोड़ का इनामी नक्सली था। उसके साथ ही एक-दो और भी बड़े कमांडर मारे गए थे।
इस वर्ष की सबसे बड़ी मुठभेड़ 9 फरवरी को हुई थी। नेशनल पार्क क्षेत्र में हुए ऑपरेशन के दौरान यहाँ 31 नक्सली मार गिराए गए थे। यह ऑपरेशन महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के सुरक्षाबलों ने मिलकर किया था। यह हमला नक्सलियों की एक मीटिंग पर हुआ था। इसी तरह के बड़े ऑपरेशन के चलते नक्सलियों की अब कमर टूट गई है।
सुरक्षाबल अब उन इलाकों में घुस रहे हैं, जहाँ पहले नक्सली एकक्षत्र राज कर रहे थे। उन्हें ग्रामीणों से मिलने वाला समर्थन भी अब कम हो चुका है। दुर्गम इलाकों में चौकियाँ बनाने के चलते सुरक्षाबल उनकी हर एक मूवमेंट पर नजर रख रहे हैं।
2024 में मारे थे नक्सली 290
वर्ष 2024 भी नक्सलियों के लिए कुछ अच्छा नहीं गया था। इस दौरान 290 नक्सली अलग-अलग मुठभेड़ में मार गिराए गए थे। इनमें से 239 नक्सली छतीसगढ़ में मारे गए थे। 2024 में भी 4 ऐसे बड़े ऑपरेशन हुए थे, जिनमें एक दर्जन अधिक नक्सली मारे गए थे।
इसमें सबसे बड़ा ऑपरेशन 4 अक्टूबर, 2024 को हुआ था। 4 अक्टूबर, 2024 को दंतेवाड़ा के थुलथुली में 38 नक्सलियों का सफाया एक ही ऑपरेशन में हो गया था। 16 अप्रैल, 2024 को हुए एक ऑपरेशन में भी 29 नक्सली मारे गए थे। रिपोर्ट बताती हैं कि 2024 के भीतर 100 से अधिक एनकाउंटर हुए थे। इनमें ₹9 करोड़ से अधिक के इनामी नक्सली खत्म किए गए थे।
सिर्फ एनकाउंटर ही नहीं, आत्मसमर्पण पर भी जोर
सुरक्षाबल नक्सलियों का सिर्फ एनकाउंटर ही नहीं कर रहे हैं, उन्हें मुख्यधारा से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। नक्सलियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि अगर वह हिंसा का रास्ता छोड़ते हैं तो उन्हें सरकार सारा समर्थन देगी लेकिन हथियार उठाने पर उनके पास कोई रास्ता नहीं होगा।
गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, 2024 में 881 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ के अलावा तेलंगाना में भी आत्मसमर्पण किया है। यह सिलसिला 2025 में भी जारी है। 2025 में अब तक सुरक्षाबलों के सामने 104 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
जंगल में ठिकाने ना बना पाने के चलते नक्सली गिरफ्तार भी हो रहे हैं। वर्ष 2024 में 1090 में नक्सली गिरफ्तार किए गए थे। 2025 में 104 नक्सली गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनके खिलाफ अब कार्रवाई चल रही है।
10% जिलों में सिमटे नक्सली
लगातार एनकाउंटर, आत्मसमर्पण और गिरफ्तारियों के चलते नक्सली अंतिम साँसे गिन रहे हैं। इसका असर भी दिख रहा है। 2014 में जब मोदी सरकार आई थी, तो 126 जिले नक्सली हिंसा से प्रभावित थे। अब यह संख्या लगभग 90% घट चुकी है। वर्तमान में मात्र 12 जिले ही नक्सल हिंसा से प्रभावित हैं। इनमें से भी कई जिले आंशिक रूप से ही प्रभावित हैं।
वहीं हिंसा की घटनाएँ भी आधी हो चुकी हैं। वर्ष 2004 से 2014 के बीच नक्सली हिंसा की कुल 16,463 घटनाएँ हुई थीं, जबकि मोदी सरकार में 2014 हिंसक घटनाओं की संख्या 53% घटकर 7744 हो गई। नक्सली हमलों में जान गँवाने वाले सुरक्षाबलों और नागरिकों की संख्या में भी मोदी सरकार में गिरावट हुई है।
2004-2014 के बीच देश में अलग-अलग नक्सली हमलों में 1851 जवानों की वीरगति हुई थी। इसी दौरान दंतेवाड़ा के ताड़मेटला में हुए एक हमले में 76 जवानों को जान गँवानी पड़ी थी। 2011 में झीरम घाटी में हुए एक हमले में राज्य के कॉन्ग्रेस नेतृत्व को नक्सलियों ने मार दिया था। इस हमले में पूर्व केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ला भी मारे गए थे।
2014 के बाद से नक्सली हमले में वीरगति को प्राप्त हुए जवानों की संख्या एक तिहाई से भी कम हो चुकी है। 2014 से 2024 के बीच 509 जवान हमलों में मारे गए हैं। इस दौरान नागरिकों की मौतों में भी कमी आई है। 2004 से 2014 के बीच 4700 से अधिक नागरिकों को जान गँवानी पड़ी थी। 2014 के बाद से यह संख्या लगभग 1400 हो चुकी है।
2026 तक सफाए का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने साफ़ कर दिया है कि अब नक्सलवाद ज्यादा दिन देश में नहीं चल सकता। गृह मंत्री अमित शाह ने सुरक्षाबलों को टारगेट दिया है कि वह 31 मार्च, 2026 तक देश को नक्सलमुक्त कर दें। इसी कड़ी में यह बड़े ऑपरेशन और गिरफ्तारियाँ चल रही हैं।
बीजापुर और कांकेर के ऑपरेशन के बाद भी गृह मंत्री ने यही बात दोहराई है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक ट्वीट में कहा, “नक्सलमुक्त भारत अभियान की दिशा में आज हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में हमारे सुरक्षा बलों के 2 अलग-अलग ऑपरेशन्स में 22 नक्सली मारे गए।”
‘नक्सलमुक्त भारत अभियान’ की दिशा में आज हमारे जवानों ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ के बीजापुर और कांकेर में हमारे सुरक्षा बलों के 2 अलग-अलग ऑपरेशन्स में 22 नक्सली मारे गए।
मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध रुथलेस अप्रोच से आगे बढ़ रही है और समर्पण से लेकर समावेशन की…
आगे उन्होंने लिखा, “मोदी सरकार नक्सलियों के विरुद्ध रुथलेस अप्रोच से आगे बढ़ रही है और समर्पण से लेकर समावेशन की तमाम सुविधाओं के बावजूद जो नक्सली आत्मसमर्पण नहीं कर रहे, उनके खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। अगले साल 31 मार्च से पहले देश नक्सलमुक्त होने वाला है।”
कर्नाटक में टोयोटा बोशोकू ऑटोमोटिव इंडिया के दो श्रमिकों ने भीमनहल्ली स्थित कंपनी के बाथरूम में पाकिस्तान के समर्थन में नारे लिखे। इसके साथ ही उन्होंने कर्नाटक के लोगों के लिए गाली भी लिख दी। कर्नाटक पुलिस ने आरोपितों की पहचान करके बुधवार (19 मार्च) को 24 साल के हामिद हुसैन और 20 साल के सादिक एच. को गिरफ्तार कर लिया। दोनों कंपनी में ठेका पर काम करते हैं।
टोयोटा बोशोकू ऑटोमोटिव इंडिया का यह प्लांट रामनगर जिले के बिदादी स्थित भीमनहल्ली में स्थित है। कंपनी में काम करने वाले कुछ लोगों ने देखा कि बाथरूम की दीवारों पर ‘पाकिस्तानकी जय’, ‘पाकिस्तान की जीत हो’ जैसे नारे लिखे हुए हैं। इस के साथ कन्नड़ लोगों के लिए ‘कन्नड़ लोग कु**या/र**डी की औलाद हैं’ जैसे अपमानजनक शब्द लिखे हुए हैं।
इसकी जानकारी कंपनी और फिर पुलिस को दी गई। पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज करके आरोपितों की पहचान शुरू कर दी। इसके लिए दर्जनों सीसीटीवी फुटेज की जाँच की गई और 50 से अधिक संदिग्ध लोगों की लिखावट की जाँच की गई। बिदादी पुलिस ने पाया कि भाषा शैली पर ध्यान दिया तो पाया कि जो शब्द लिखे गए हैं, वह कन्नड़ शब्द उत्तर कर्नाटक की बोली के थे।
इसके बाद पुलिस ने इस पर ध्यान केंद्रित किया और कंपनी की इस यूनिट में काम करने वाले लोगों से पूछताछ शुरू की। यूनिट में उत्तर कर्नाटक के बहुत कम लोग थे। अंत में पुलिस ने 50 से अधिक लोगों में से 10 लोगों को अंतिम रूप से छाँट कर बाथरूम में लिखे गए शब्दों को एक कागज पर लिखने के लिए कहा। इस दौरान दोनों आरोपितों ने अपनी भाषा शैली बदलने की कोशिश की, लेकिन हस्तलेखन विशेषज्ञों ने उन्हें पहचान लिया।
आखिरकार पुलिस ने बिदादी के रहने वाले हैमद/हामिद हुसैन और सादिक को गिरफ़्तार कर लिया। दोनों बताया कि इस साल फरवरी में दुबई में आयोजित चैंपियंस ट्रॉफी मैच में भारत से हार के बाद उनके सहकर्मियों ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम को भला-बुरा कहा था। यह बात आरोपितों को बुरी लगी थी। इसलिए दोनों ने बाथरूम में यह बात लिख दी। पुलिस ने कहा कि आरोपितों का किसी से बहस हुई थी या नहीं, ये पता लगाना है।
उत्तरी कर्नाटक के बीदर के रहने वाले दोनों आरोपित पिछले एक साल से कंपनी की इस यूनिट में काम कर रहे थे। हुसैन स्टोर में हेल्पर के तौर पर काम करता था, जबकि सादिक प्रोडक्शन लाइन में असिस्टेंट के तौर पर काम करता था। मामले की जानकारी जब प्रबंधन को दी गई तो उसने दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ़ चेतावनी नोटिस करके छोड़ दिया।
प्रबंधन के इस रूख से कंपनी के कर्मचारी नाराज हो गए। सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद आखिरकार कंपनी के मानव संसाधन (HR) विभाग ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जाँच शुरू की और दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को गुरुवार (20 मार्च) को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
रामनगर के SP श्रीनिवास गौड़ा ने बताया, “एफआईआर में कहा गया है कि मामला 15 मार्च की सुबह सामने आया, जब एक ऑपरेटर ने नारे देखे। कुछ समय बाद हाउसकीपिंग स्टाफ ने इन नारों को मिटा दिया। तब तक किसी ने इसकी तस्वीरें ले लीं और इसे अन्य कर्मचारियों को भेज दिया। हमने अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अन्य लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं। तब तक जाँच जारी रहेगा।”
In Bidadi’s Toyota factory restroom, Ahmed Hussain & Sadik wrote "Pakistan Jai" and "Kannadigas are Sons of Bchs"** on the walls!
Ever since @INCKarnataka took power, Pak sympathizers are openly insulting Kannadigas. Will this Halal Sarkara shield them as "mentally unstable" &… pic.twitter.com/4XWmO2MoVm
इस घटना को लेकर भाजपा ने सीएम सिद्धारमैया की नेतृत्व वाली कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार पर हमला बोला है। कर्नाटक भाजपा ने कहा, “जब से कॉन्ग्रेस ने सत्ता सँभाली है, पाक समर्थक कन्नड़ लोगों का खुलेआम अपमान कर रहे हैं। क्या यह हलाल सरकार उन्हें ‘मानसिक रूप से अस्थिर’ बताकर बचाएगी और अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए एफआईआर रद्द करेगी? या वह कम-से-कम एक बार ही सही, कभी कन्नड़ लोगों के साथ खड़ी होगी?”
SP श्रीनिवास गौड़ा ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 67 (अश्लील सामग्री का प्रकाशन या प्रसारण), धारा 193 (अपनी संपत्ति पर गैरकानूनी सभाओं या दंगों को रोकने या रिपोर्ट करने में विफल रहने के लिए भूमि मालिकों या कब्जाधारियों की देयता) और भारत न्याय संहिता की धारा 356 (मानहानि) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
बांग्लादेशी घुसपैठिए अब दिल्ली, मुंबई, पुणे और बेंगलुरु छोड़ कर देश के छोटे शहरों में घुस रहे हैं। ऐसा इन शहरों में सख्ती और बढ़ती महँगाई के चलते हो रहा है। इन घुसपैठियों की मदद के लिए एक पूरा नेटवर्क सीमा पर काम कर रहा है। यह सीमा पार करवाने से लेकर फर्जी कागज बनवाने तक संभालते हैं।
यह सारे खुलासे महाराष्ट्र के सांगली में पकड़े गए एक बांग्लादेशी घुसपैठिए से हुए हैं। सांगली पुलिस ने रात को गश्त के दौरान मोहम्मद आमिर नाम के एक बांग्लादेशी घुसपैठिए को पकड़ा। उससे जब पूछताछ की गई तो उसने दावा किया कि वह दिल्ली का रहने वाला है।
यह सिद्ध करने के लिए उसने अपनी जेब से कई सरकारी दस्तावेज भी निकाल कर दिखा दिए। हालाँकि, पुलिस इनसे संतुष्ट नहीं हुई। पुलिस को उसकी बोली पर शक हुआ। जब उससे गहन पूछताछ हुई तो पता चला कि वह एक बांग्लादेशी घुसपैठिया है।
वह सांगली के अलग-अलग लॉज में फर्जी दस्तावेज के सहारे रह रहा था। उसने इन दस्तावेज पर ₹20 हजार खर्च किए थे। उसके फोन की जाँच की गई तो पता चला कि वह असल में ढाका का रहने वाला है। यह भी पता चला है कि वह बांग्लादेश की एक राजनीतिक पार्टी से जुड़ा हुआ है।
पता चला है कि वह त्रिपुरा के रास्ते बांग्लादेश से भारत में घुसा था। त्रिपुरा में घुसने के बाद वह अगरतला पहुँचा और इसके बाद वह कोलकाता आ गया। यहाँ से वह महाराष्ट्र पहुँचा था। अब इस मामले की जाँच पुलिस के साथ ही महाराष्ट्र की ATS कर रही है।
उसने ATS की पूछताछ में भी कई बड़े खुलासे किए हैं। उसने बताया है कि भारत और बांग्लादेश सीमा पर पूरा एक नेटवर्क काम कर रहा है। यह नेटवर्क लोगों को बांग्लादेश से भारत में प्रवेश करवाने, उनके फर्जी कागज बनवाने, यहाँ तक कि उन्हें भारत में काम दिलाने का भी जिम्मा लेता है।
घुसपैठिए के नए खुलासों के चलते एजेंसियाँ अब बाकी ऐसे ही मामलों का पता लगाने में जुट गई हैं। गौरतलब है कि बीते कुछ समय से भारत भर में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ बड़ा अभियान चल रहा है। दिल्ली में ही हाल में 7 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया गया था।
इससे पहले बीएसएफ ने मेघायल और त्रिपुरा बॉर्डर पर कार्रवाई करते हुए 11 घुसपैठियों और 4 भारतीय सहायकों को पकड़ा था। इनमें से 7 बांग्लादेशी घुसपैठिए हैं, तो 4 रोहिंग्या। इन्हें इन राज्यों के सीमावर्ती ग्रामीण इलाकों से रविवार (16 मार्च 2025) को पकड़ा गया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएसएफ ने इस ऑपरेशन के दौरान 187 सेकंड हैंड मोबाइल फोन भी बरामद किए थे। मोबाइल फोनों की बरामदगी त्रिपुरा के सेपाहिजला जिले से हुई है। इनसे खुलासा हुआ था कि सीमा पार करवाने वाले घुसपैठिए ₹25 हजार तक में प्रति व्यक्ति को भारत प्रवेश करवाते हैं।
नागपुर दंगा का बांग्लादेशी कनेक्शन सामने आया है। पुलिस को पता चला है कि बांग्लादेश के सोशल मीडिया अकाउंट नागपुर में मुस्लिमों को हिंसा करने के लिए भड़का रहे थे। पुलिस ने इस संबंध में जाँच चालू कर दी है। पुलिस ने तमाम ऐसी पोस्ट भी हटाई हैं, जिनमें आपत्तिजनक सामग्री थी। इस बीच हिंसा के मामले में 84 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
पुलिस को बांग्लादेश के कई ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट मिले हैं, जिनसे हिंसा भड़काने की धमकियाँ दी गई थीं। अभी तक 97 सोशल मीडिया अकाउंट की पहचान की गई है। इनमें से ज़्यादातर पोस्ट बांग्लादेशी IP एड्रेस वाले कंप्यूटर से किए गए थे।
ऐसे ही एक बांग्लादेशी IP एड्रेस से की गई पोस्ट में कहा गया था कि यह दंगा तो बस एक शुरुआत है। महाराष्ट्र साइबर सेल ने अफ़वाह फैलाने और हिंसा भड़काने के आरोप में 34 सोशल मीडिया अकाउंट के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है। पुलिस अभी तक 10 FIR दर्ज कर चुकी है।
पुलिस ने 140 ऐसी पोस्ट सोशल मीडिया पर से हटाई हैं, जिनमें दंगा भड़काने वाली बातें लिखी हैं। नागपुर दंगे के बाद पुलिस अब धरपकड़ में भी लगी है। पुलिस ने अब तक 84 लोगों को गिरफ्तार किया है। हिंसा का मास्टरमाइंड फहीम शमीम खान भी गिरफ्तार हो गया है।
गिरफ्तार होने वालों में 8 विश्व हिन्दू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी शामिल हैं। हालाँकि, उन्हें जमानत मिल गई थी। गिरफ्तार किए गए 19 आरोपितों को 21 मार्च तक पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है। बाकी भी लोगों को पुलिस गिरफ्तार करने का प्रयास कर रही है।
गौरतलब है कि 17 मार्च को इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने कुरान जलाने की अफवाह के नाम पर नागपुर में काफी उत्पात मचाया था। इस दौरान मुस्लिम भीड़ ने पुलिसवालों पर पथराव किया था। उनके पथराव में 30+ अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
मुस्लिमों ने एक महिला पुलिसकर्मी को भी दबोच कर उसके साथ छेड़छाड़ की थी और उनके कपड़े फाड़ने का प्रयास किया था। एक DCP पर कुल्हाड़ी से हमला हुआ था, इसमें वह गंभीर रूप से घायल हुए थे। दंगे के दौरान हिन्दुओं की दुकानों और घरों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया था। उनकी गाड़ियाँ भी जलाई गईं थी।
इस दंगे के बाद छत्रपति संभाजीनगर में औरंगजेब की कब्र पर ASI ने सुरक्षा बढ़ाई है। ASI ने बताया है कि इसके चारों तरफ टिन और तार की बाड़ लगाई गई है। अब यह कब्र पूरी तरह ढक दी गई है। पुलिस ने भी इस कब्र की सुरक्षा व्यवस्थाओं को देखा है।
बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की मौत को 5 साल हो गए हैं। 8-9 जून 2020 की रात उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में 14वीं मंजिल से गिरकर मौत हुई थी। प्राथमिक जाँच के बाद पुलिस द्वारा इसे ‘आत्महत्या’ माना गया था, लेकिन कुछ लोगों ने इसे बाद में ‘हत्या’ करार दिया था और मामले में विस्तृत जाँच की माँग की थी। अब 2025 में ये केस दोबारा से चर्चा में है क्योंकि दिशा के पिता बॉम्बे हाईकोर्ट पहुँचे हैं ये माँग लेकर कि उनकी बेटी की मौत मामले में जाँच दोबारा हो और साथ ही उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे के विरुद्ध एफआईआर की जाए।
उनका कहना है कि सुशांत सिंह राजपूत और उनकी बेटी की हत्या एक दूसरे से जुड़ी हुई है। बेटी ने सुसाइड नहीं की थी, बल्कि उसकी हत्या हुई थी। सालियान ने याचिका में सूरज पंचोली और डिनो मोर्या पर भी आरोप लगाए हैं। वहीं पुलिस को लेकर उन्होंने कहा है कि पुलिस ने उन्हें नजरबंद रखा और अपने द्वारा पेश सबूतों को सच मानने को मजबूर किया। उनका कहना है, “मैं पाँच साल तक चुप था, लेकिन अब सच्चाई सामने आनी ही चाहिए। जो भी करना पड़े, मेरी बेटी को न्याय मिलना चाहिए।”
देखिए अर्नब के साथ दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की एक्सक्लूसिव बातचीत रिपब्लिक भारत पर :… pic.twitter.com/znkfXiEAqd
— Republic Bharat – रिपब्लिक भारत (@Republic_Bharat) March 19, 2025
बता दें कि 2020 के बाद दिशा सालियान का मामला समय-समय पर लोगों के बयानों के कारण गर्माता रहा है। साल 2023 में खबर आई थी दिशा सालियान की मौत की फाइल फिर से खुलेगी और एसआईटी नए सिरे से इसकी जाँच करेगी। बार-बार इस मामले के उठने के पीछे यही वजह है कि कई लोग इसे आज भी हत्या ही मानते हैं और चश्मदीद भी यही दावा करते रहे हैं कि उस दिन दिशा सालियान का रेप हुआ था। इन बयानों पर कई मीडिया रिपोर्ट पूर्व में प्रकाशित हो चुकी हैं। आइए आज उन्हीं बयानों को दोबारा से याद दिलाएँ कि किसने कब और क्या कहा।
दिशा के शरीर से बह रहा था खून – एंबुलेंस का ड्राइवर
दिशा सालियान के मृत शरीर को ले जाने के लिए बुलाई गई एंबुलेंस के ड्राइवर पंकज सैदन ने रिपब्लिक भारत के साथ बातचीत में कहा था, “दिशा सालियान के पूरे शरीर पर घाव थे। उनकी ठुड्डी के बगल में 1.5 इंच का छेद था। उनकी आँख, नाक, दाँत से खून बह रहा था। उनका हाथ भी मुड़ गया था।”
रेप हुआ था- चश्मदीद का दावा
एक चश्मदीद, जो एक एक्टर भी हैं उन्होंने न्यूजनेशन से बातचीत में दावा किया था कि दिशा सालियान का उस रात रेप हुआ था। उन्होंने बताया था कि घटना वाली रात पार्टी चल रही थी जिसमें म्यूजिक काफी तेज था, इसी कारण दिशा सालियान की चीख-पुकार उसमें दब गई थी।
प्राइवेट पार्ट में थे चोट के निशान
इसी प्रकार नारायण राणे ने भी इस संबंध में एक बयान दिया था। उन्होंने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके दावा किया था कि दिशा की हत्या हुई थी। उन्होंने एक रिपोर्ट का भी उल्लेख किया था जिसके हवाले से वो कह रहे थे कि दिशा के प्राइवेट पार्ट में चोट लगी थी।
मौत से पहले की वीडियो देख उठे सवाल
भाजपा नेता नितेश राणे ने तो इस मामले में आदित्य ठाकरे का नार्को टेस्ट तक कराने की माँग की थी। वहीं दिशा के मंगेतर रोहन राय से अपील की थी कि वो सामने आकर पूरा सच पुलिस को बताएँ। ये भी मालूम हो कि जिस रात दिशा सालियान की मौत हुई।
उसी रात की एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब प्रसारित हुई थी। इसमें दिशा हँसते-मुस्कुराते डांस करती दिख रही थीं। लोगों ने सवाल किया था कि आखिर दिशा ने क्यों सुसाइड किया होगा, जब उनके चेहरे पर ऐसी कोई चिंता दिख ही नहीं रही।
केवल गिरने की वजह से नहीं थे शरीर पर चोट के निशान- फॉरेंसिक विशेषज्ञ
वहीं रिपब्लिक टीवी पर फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने भी कहा था कि दिशा के शव पर दो तरह के चोट के निशान थे। एक गिरने से पहले और दूसरा गिरने के बाद के। डॉ दिनेश राव ने कहा था, “दिशा के शव पर चोट के पैटर्न को देखकर मैं इसमें एक अहम जानकारी जोड़ना चाहता हूँ। मैंने निश्चित तौर पर दो तरह की चोट के निशान देखे थे। एक चोट ऊँचाई से गिरने की वजह से आई थी और दूसरी गिरने से पहले की है, जिसकी जाँच होनी चाहिए।”
विशेषज्ञ ने यह भी कहा था कि या तो दिशा के साथ मारपीट की गई या उन्हें प्रताड़ित किया गया था। या यह भी ही सकता है कि उन्होंने हमले से बचने की कोशिश की हो जो उनकी मौत की वजह बन गई हो।
शायद सुशांत की मौत का सच भी आए सामने- सुशांत के पिता
गौरतलब है कि ये सारे बयान उस समय के हैं जब दिशा सालियान की मौत का मामला गरमाया हुआ था और ये कहा जा रहा था कि दिशा की मौत और सुशांत की मौत में कुछ कनेक्शन जरूर है। आज भी इस पर सवाल खड़े होते ही हैं। ताजा याचिका को लेकर सुशांत सिंह राजपूत के पिता से भी प्रतिक्रिया ली गई।
#WATCH पटना: दिशा सालियान मामले पर दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने कहा, "पहले दिशा सालियान के पिता ने कहा था वे कुछ नहीं जानते हैं आत्महत्या ही होगी। बाद में किस बात पर वे कह रह हे हैं कि ये आत्महत्या नहीं हत्या है ये मुझे नहीं पता… उन्होंने जो किया है ठीक किया है।… pic.twitter.com/CJ0YI5Fv9J
इस पर उन्होंने कहा, “पहले दिशा सालियान के पिता ने कहा था वे कुछ नहीं जानते हैं आत्महत्या ही होगी। बाद में किस बात पर वे कह रह हे हैं कि ये आत्महत्या नहीं हत्या है ये मुझे नहीं पता… उन्होंने जो किया है ठीक किया है। इससे सुशांत का केस भी साफ हो जाएगा कि क्या हुआ था। पहले की सरकार और अब की सरकार में फर्क है। वर्तमान मुख्यमंत्री अपने स्तर पर जो भी करेंगे सही करेंगे।”
मद्रास हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी विवाहित महिला का पोर्न देखना अपराध नहीं माना जा सकता और इस आधार पर तलाक नहीं हो सकता। हाई कोर्ट ने इस तर्क के आधार पर तलाक माँगने वाले पति को कोई राहत देने से इनकार किया है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला का खुद को यौन सुख देना भी कोई अपराध नहीं है।
क्या था मामला?
यह सारी बातें मद्रास हाई कोर्ट ने तलाक के एक मामले में याचिका की सुनवाई में कही हैं। दरअसल, तमिलनाडु के करूर के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी से तलाक की माँग करते हुए एक याचिका डाली थी। दोनों की शादी 2018 में हुई थी और 2020 से दोनों अलग-अलग रहते थे। यह दोनों व्यक्तियों की दूसरी शादी थी।
बात बिगड़ने के चलते 2021 में दोनों का मामला कोर्ट में चला गया। महिला ने कोर्ट से उसके वैवाहिक स्थिति को बहाल करने की माँग की थी। वहीं उसके पति ने कहा था कि वह तलाक चाहता है। हालाँकि, निचली अदालत ने तलाक देने से मना कर दिया और पत्नी की याचिका को सही माना।
इसका विरोध करते हुए पति ने मद्रास हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। मद्रास हाई कोर्ट से पति ने माँग की कि उसको तलाक दिया जाए क्योंकि उसकी पत्नी उसके साथ क्रूरता करती है। उसने क्रूरता सिद्ध करने के लिए कई आरोप भी पत्नी पर जड़े।
क्या थे महिला पर आरोप?
पति ने अपनी याचिका में दावा किया कि उसकी पत्नी को सेक्सुअल बीमारियाँ हैं। उसने दावा किया कि यह बीमारियाँ ऐसी हैं जो सम्बन्ध बनाने से उसे भी हो सकती हैं। उसने एक आयुर्वेदिक सेंटर के कुछ दस्तावेज भी अपनी पत्नी के संबंध में दिखाए।
इसके अलावा पति ने दावा किया कि उसकी पत्नी पोर्न देखती है। पति ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ‘हस्तमैथुन’ में लिप्त रहती है। इसके अलावा उसने पत्नी पर घर का काम ना करने, सास-ससुर की सेवा ना करने, मोबाइल पर देर तक बात करने और पैसा अधिक खर्च करने का आरोप भी लगाया। पति ने इन सभी को क्रूरता बताया और तलाक की माँग की।
क्या बोला मद्रास हाई कोर्ट?
मद्रास हाई कोर्ट में यह मामला जस्टिस स्वामीनाथन और जस्टिस पूर्णिमा की बेंच ने सुना। मद्रास हाई कोर्ट ने पति का सेक्सुअल बीमारियों का आरोप मानने से इनकार कर दिया और कहा कि इस संबंध में कोई भी पक्का सबूत नहीं मिला है, ऐसे में इसे नहीं माना जा सकता।
वहीं हाई कोर्ट ने पोर्न देखने और इसकी आदत लगने को लेकर भी टिप्पणियाँ की। हाई कोर्ट ने कह़ा कि निजी स्थान पर पोर्न देखना (प्रतिबंधित के अलावा) अपराध नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने इसे क्रूरता मानने से मना किया और कहा कि यह तलाक का कोई आधार नहीं बन सकता।
वहीं ‘हस्तमैथुन’ के मुद्दे पर भी हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने कहा, “आरोप यह है कि महिला हस्तमैथुन में लिप्त थी। किसी महिला से इस आरोप का जवाब देने को कह़ा जाना ही उसकी यौन स्वायत्तता पर हमला है। अगर शादी के बाद कोई महिला विवाह से अलग संबंध बनाती है तो यह तलाक का आधार माना जा सकता है।”
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया, “लेकिन, खुद को संतुष्ट करना विवाह को खत्म किए जाने का कारण नहीं माना जा सकता।” हाई कोर्ट ने इसके अलावा पति के परिजनों के प्रति क्रूरता के संबंध में भी सबूत नहीं पाए, ऐसे में यह भी सिद्ध नहीं हुआ।
हाई कोर्ट ने कहा, “यदि पति द्वारा लगाए गए आरोप सही होते, तो यह असंभव है कि वे करीब 2 साल तक साथ रहते। पति ने यह दिखाने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है कि पत्नी घर के काम करने में विफल रही। सभी सबूत की जाँच के बाद निचली अदालत इस निष्कर्ष पर पहुँची कि पति ने आरोप साबित नहीं किए।”
हाई कोर्ट ने यह फैसला बरकरार रखने का निर्णय लिया है। कोर्ट ने कहा, “रिकॉर्ड पर मौजूद अभी सबूत फिर से जाँचने के बाद , हम निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कोई नजरिया नहीं अपना सकते। हम निचली अदालत द्वारा दिए गए आदेश की पुष्टि करते हैं।”
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कासगंज में एक नाबालिग लड़की से हुए यौन उत्पीड़न के एक मामले में आरोपितों को राहत देते हुए एक चौंकाने वाली टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि किसी लड़की के स्तन को पकड़ना, उसके पायजामे के नाड़े को तोड़ना और उसे पुलिया के नीचे खींचना… रेप या रेप के प्रयास वाले अपराध में नहीं आता है।
यह निर्णय जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ द्वारा दिया गया। हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बलात्कार के प्रयास का आरोप नहीं बनता क्योंकि अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होता है कि आरोपितों की कार्रवाई अपराध करने की तैयारी से आगे बढ़ चुकी थी, जो कि साबित नहीं हुआ।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बलात्कार के प्रयास और अपराध की तैयारी के बीच अंतर को सही तरीके से समझना चाहिए। अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जारी समन आदेश को संशोधित करते हुए निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह आरोपितों के खिलाफ धारा 376(बलात्कार) के बजाय धारा 354-बी (निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 9/10 (गंभीर यौन हमला) के तहत नया आदेश जारी करें।
बता दें कि यह मामला 11 वर्षीय पीड़िता से संबंधित है, जिसके साथ 10 नवंबर 2021 को आरोपित पवन, आकाश और अशोक ने पुलिया के पास खींचकर यौन उत्पीड़न करने की कोशिश की थी। इनमें एक ने उसके स्तन दबाए थे और एक ने पीड़िता के पायजामे का नाड़ा तोड़ दिया था। जब शोर बढ़ा तो इस मामले में राहगीरों ने हस्तक्षेप किया और आरोपित वहाँ से फरार हो गए। बाद में मामला पॉक्सो की धाराओं में दर्ज हुआ और आरोपित राहत पाने हाई कोर्ट पहुँचे। यहाँ इन्होंने यही तर्क दिया कि उन्होंने रेप नहीं किया। कोर्ट ने भी इनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते किया और यह निर्णय सुनाया।