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लालू का MLA, दलित लड़की से रेप… लेकिन ‘बाबू साहब के सामने सीना तानकर चलते थे’ के नाम पर वोट!

जुमले में कहा जाता है “जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड”, यानि न्याय देने में देरी करना न्याय देने से इन्कार करना है। मगर क्या भारत की अदालतों की कार्यवाही में ऐसा ही होता है? एक नजर भी देखा जाए तो सच्चाई इस जुमले से कोसों दूर खड़ी मिल जाएगी। इसका एक नमूना बिहार की अदालतों में अभी हाल ही में देखने को मिला, जब एक पच्चीस साल पुराने मामले में सजाएँ सुनाई गईं।

जब तक ये फैसला आया तब तक अपराधियों में से एक मर चुका था, लेकिन पच्चीस साल बीतने पर भी एक दूसरा अपराधी फरार ही बताया जाता है। पच्चीस वर्ष पहले इस मामले के प्रकाश में आने पर हंगामा हुआ होगा?

सुपौल, जहाँ का ये बलात्कार का मामला था, बिहार की राजधानी से करीब तीन सौ किलोमीटर दूर है। जाहिर है वहाँ की खबरें स्थानीय अख़बारों में तो आती हैं, लेकिन कभी-कभी राज्य भर के अख़बार के एडिशन से छूट भी जाती हैं। इस मामले में आरोप लगाने वाली एक दलित युवती थी। जैसा कि अंदाजा लगाया जा सकता है, तब भी एफआईआर फ़ौरन दर्ज नहीं हुआ था, बल्कि अपराध के तीन दिन बाद दर्ज किया गया था।

अपराधियों का सरगना तब के जनता दल यानि लालू यादव की पार्टी का एक एमएलए योगेन्द्र नारायण सरदार था। उसके बेटे उमा सरदार और साथियों शम्भू और भूपेन्द्र यादव के अलावा रामपाल यादव और हरिलाल शर्मा पर भी अपहरण, बलात्कार, घर में जबरन घुसने और मार-पीट जैसे मुक़दमे दर्ज हुए थे।

तारीख पर तारीख पड़ती रही और मामला चलता रहा। चौबीस साल से ऊपर चली सुनवाई में अभियोजन पक्ष से 11 गवाहों के बयान जाँचें गए। तब त्रिवेणीगंज के एमएलए रहे योगेन्द्र नारायण सरदार ने 16 अक्टूबर 1994 की रात उस दलित युवती को उसके घर से उठाकर अपनी जीप में डाल लिया था।

अफ़सोस कि योगेन्द्र नारायण सरदार ने बलात्कार करने के लिए कोई कमजोर युवती नहीं चुनी! मौका पाते ही लड़की ने वार किया और योगेन्द्र नारायण यादव का बंध्याकरण कर डाला! भागने के बाद बड़ी मुश्किल से तीन दिन बाद जाकर मामला दर्ज हो पाया। इस मामले के आरोपी रामपाल यादव की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गई। हरिलाल शर्मा अभी भी (पच्चीस वर्ष बाद) फरार बताया जाता है।

इसी वर्ष जनवरी की एकत्तीस तारीख को इस मामले का फैसला आया और चार अपराधियों को जुर्माने और जेल की सजा हुई। वैसे अपराधियों के वकील एनपी ठाकुर का कहना है कि निचली अदालत के फैसले के खिलाफ वो उच्च न्यायलय में जाएँगे। झोपड़ी में रहने वाली दलित युवती तीन सौ किलोमीटर दूर पटना आकर ये मुकदमा कैसे लड़ेगी और कैसे जीतेगी, पता नहीं।

बंध्याकरण का शिकार हो चुका लालू की पार्टी का पूर्व विधायक योगेन्द्र नारायण सरदार मुक़दमे के उच्च न्यायालय और फिर पता नहीं सर्वोच्च न्यायालय में जाने तक जीवित बचे या नहीं। इस मामले की याद बिहार को अभी इसलिए आनी चाहिए क्योंकि ये अक्टूबर 1994 का ही मामला था और इस अक्टूबर में इसे पच्चीस वर्ष बीत गए।

चुनावी रैलियों के बीच दिए गए एक विवादित बयान में लालू के ही सुपुत्र पूछते हैं “बाबू साहब के सामने सीना तानकर चलते थे ना?” जातीय वैमनस्य बढ़ाने के लिए दिया गया ये बयान शायद उन्होंने चार वोट ज्यादा पाने के लालच में दिया होगा। सच्चाई इससे भी उतनी ही दूर है जितनी “जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड” के जुमले से हो सकती है।

अपराधियों और पीड़िता का नाम देखते ही पता चल जाता है कि कौन सा समुदाय दलितों पर ये अमानवीय अत्याचार कर रहा था। संभवतः फिल्मों के जरिए गढ़े गए अत्याचारी ठाकुर, धूर्त बनिए और ठगी करते ब्राह्मण के जरिए उन्हें अपना “नैरेटिव” चलाने की सुविधा भी मिल जाती है।

यहाँ समस्या ये है कि आज के दौर का बिहार, शिक्षा-रोजगार जैसे मामलों में उतना भी पिछड़ा नहीं रह गया, जितना “जंगलराज” के दौर में उसे बनाकर रखा गया था। बिहार में किताबों के पढ़े जाने की दर भी ज्यादा है और अधिकांश अख़बारों का रीडरशिप भी बिहार में काफी अधिक है।

पिछले चुनावों में राजद सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर जरूर उभरी थी, लेकिन इस बार भी पिछले प्रदर्शन को दोहरा पाना उसके लिए मुश्किल होगा। राजनैतिक समीकरणों के बदलने पर संकर्षण ठाकुर ने अपनी किताब “बन्धु बिहारी” में लिखा भी है। लालू यादव के वाकपटु होने का जो फायदा राजद को मिलता रहा था, वो अब उसके पास नहीं है।

पहले दौर का मतदान अब जब हो चुका है तो अधिकांश राजनैतिक विश्लेषक भी अब ये स्वीकार लेंगे कि “एंटी इनकमबेंसी” का जैसा फायदा वो राजद के लिए मान रहे थे, उसे वैसा फैसला होता नजर नहीं आ रहा।

कहीं ना कहीं ऐसे अपराधियों के लालू यादव और उसकी पार्टी के साथ जुड़ा होना भी इसका एक कारण होता है। जब तक ऐसे अपराधिक तत्वों से राजद खुद को अलग घोषित नहीं कर पाती, लगता नहीं कि महिलाओं के वोट राजद के समर्थन में जाएँगे।

बेरोजगारी की जड़ क्या? बिहार की बर्बादी की वजह क्या? | Why Bihar looks so bad?

बिहार में चुनाव के समय सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा हो रही है कि रोजगार और बेरोजगारी बहुत बड़ा मुद्दा है। हालाँकि, जमीनी सच्चाई बताती है कि इस बार भी जातीय समीकरण काम करने वाला है।

लोग खुल कर बेरोजागारी पर बात कर तो जरूर रहे हैं लेकिन यह मसला चुनावों में हार जीत का फैसला करेगा, ऐसा दिख नहीं रहा।

कुछ लोग हैं, जो बिहार में कारखाने खोले जाने की बात पर संशय व्यक्त कर रहे हैं और भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देकर मजबूरी दर्शा रहे हैं। किंतु सच्चाई यह है कि बिहार में जो कारखाने पहले से थे, और जो स्थानीय लोगों को एक समय में रोजगार प्रदान करते थे, वह वर्तमान में बंद हो चुके हैं और उनके जीर्णोद्धार का कार्य आज तक भी नहीं हुआ।

पूरी रिपोर्ट का वीडियो इस लिंक पर क्लिक करके देखें

मिर्जापुर 2 में जिस लेखक सुरेंद्र मोहन के उपन्यास ‘धब्बा’ को दिखाया, उन्होंने कहा – ‘चेंज करो इसे’

हाल ही में अमेज़न प्राइम पर आई वेब सीरीज़ मिर्जापुर 2 पर विवाद ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। कुछ ही दिनों पहले मिर्जापुर की सांसद अनुप्रिया पटेल ने इसके निर्माताओं पर आरोप लगाया था कि इस वेब सीरीज़ में शहर की छवि को बदनाम करने का प्रयास हुआ है। इसके बाद यह वेब सीरीज़ अब नए विवाद में फँसती नज़र आ रही है। हिन्दी के उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन ने मिर्जापुर के निर्माताओं पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इस सीरीज़ के भीतर उनके उपन्यास ‘धब्बा’ को गलत तरीके से पेश किया। 

उन्होंने इस संबंध में मिर्जापुर वेब सीरीज़ निर्माण से जुड़े संबंधित तमाम लोगों को नोटिस जारी करते हुए एक पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने बताया कि मिर्जापुर 2 के तीसरे एपिसोड के एक दृश्य में सत्यानन्द त्रिपाठी (कुलभूषण खरबंदा) को उनका उपन्यास ‘धब्बा’ पढ़ते हुए दिखाया गया है। यह उपन्यास साल 2010 में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि उस किरदार को जिस तरह उनका उपन्यास पढ़ते हुए दिखाया गया है, उसका मूल उपन्यास के किसी भी किस्से से कोई लेना देना नहीं है। 

इतना ही नहीं, उपन्यास में बलदेव राज नाम का कोई किरदार भी नहीं है जैसा कि उस संदर्भ में दिखाया गया है। इसके विपरीत दृश्य में जो पढ़ा या दिखाया गया है वह घोर अश्लीलता है। सुरेंद्र मोहन के अनुसार वह इस तरह की पंक्तियाँ कभी नहीं लिख सकते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पाठक भी उनसे इस तरह की पंक्तियों की आशा नहीं करते हैं।

सुरेंद्र मोहन ने मिर्जापुर 2 में पेश किए गए डायलॉग को घटिया बताया है। उनका यह भी कहना है कि जिस तरह एपिसोड के उस हिस्से में उनके उपन्यास को शामिल किया गया है, उससे पिछले 5 दशकों में बनाई गई उनकी छवि पर बेहद नकारात्मक प्रभाव डाला है। 

इसके अलावा अपने नोटिस में उन्होंने अपनी बात की अनदेखी होने पर क़ानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। उन्होंने कहा कि संबंधित दृश्य में जल्द से जल्द सुधार किया जाए, इस मामले पर ज़रूरी कदम उठाया जाए। अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो वह क़ानूनी कार्रवाई के लिए मजबूर होंगे। अंत में उन्होंने यह भी लिखा है कि वह एक हफ्ते के भीतर अपनी इस आपत्ति पर प्रतिक्रिया की उम्मीद रखते हैं। 

दरअसल सोशल मीडिया पर एक वरिष्ठ समीक्षक ने सबसे पहले इस बात पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद तमाम सोशल मीडिया यूज़र्स ने सीरीज़ के उस दृश्य को लेकर सवाल खड़े किए। अंत में यह बात धब्बा उपन्यास के लेखक सुरेंद्र मोहन पाठक के पास पहुँची। जिसके बाद उन्होंने इस मुद्दे पर अपनी तरफ से प्रतिक्रिया जारी की। उन्होंने अपनी शिकायत में फरहान अख्तर, रितेश सेध्वानी, अमेज़न प्राइम, एक्सेल मूवीज़, पुनीत कृष्ण समेत कई अन्य लोगों को शामिल किया है।    

हाल ही में उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की सांसद और अपना दल (सोनेलाल) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने अमेज़न प्राइम वीडियो की वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ को लेकर आपत्ति जताई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस वेब सीरीज के जरिए इस क्षेत्र को हिंसक बताते हुए इसे बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिर्जापुर विकास के पथ पर अग्रसर है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा था कि मिर्जापुर समरसता का केंद्र है, लेकिन जिले के नाम पर वेब सीरीज बना कर जातीय वैमनस्य फैलाया जा रहा है। बता दें कि ‘मिर्जापुर’ में यूपी की सीएम बनने से पहले माधुरी नामक किरदार एक डायलॉग बोलती है कि वो यादव की बेटी है और ब्राह्मण परिवार की बहू, इसीलिए उनके पार्टी को संभालने से इन दोनों ही जातियों में अच्छा सन्देश जाएगा। फिल्म में सारे गुंडे-बदमाशों को ब्राह्मण ही दिखाया गया है।

तेज म्यूजिक, पत्नी से छेड़खानी… विरोध करने पर मीट की दुकान से चाकू लेकर सुशील की हत्या: चाँद, हसीन, अब्दुल का परिवार शामिल

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में एक हैरान कर देने वाली घटना हुई है। महिंद्रा पार्क थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले भाड़ोला गाँव में कुछ लोगों ने 3 भाइयों पर तेज़ धार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में एक भाई सुशील (30) की मृत्यु हो गई जबकि दो अन्य भाई बुरी तरह घायल हुए हैं। मृतक सुशील के परिजनों ने आरोप लगाया है कि नज़दीक स्थित गली में रहने वाले चाँद, उसके भाई हसीन, पिता अब्दुल सत्तार समेत अन्य कई लोगों ने उनकी बहु के साथ छेड़खानी की। 

सुशील ने अपनी पत्नी के साथ हुई छेड़खानी का विरोध किया था इसके बाद चाँद, हसीन, अद्बुल सत्तार और अन्य लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस मामले में पुलिस ने अभी तक अब्दुल सत्तार, उसकी पत्नी समेत कुल 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। फ़िलहाल पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। इसके अलावा मुख्य आरोपित चाँद और उसके भाई हसीन की खोजबीन भी कर रही है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुशील के परिवार वालों के अनुसार पूरा विवाद म्यूज़िक की आवाज़ को लेकर शुरू हुआ था। भाड़ोला गाँव में पीछे की गली में रहने वाला चाँद कई लोगों के साथ म्यूज़िक की आवाज़ कम करवाने आया। इस बात पर सुशील के परिवार और चाँद के बीच बहस शुरू हो गई, बहस बहुत जल्द विवाद में तब्दील हो गई। इस दौरान चाँद और उसके साथ आए लोगों ने सुशील की पत्नी के साथ छेड़खानी की। सुशील ने इस बात का विरोध किया और तब चाँद, उसके भाई हसीन, पिता अब्दुल और कई लोगों ने पास के मीट की दुकान से चाकू लेकर सुशील पर हमला कर दिया। 

इस दौरान सुशील के दो भाई भी मौजूद थे, हमलावरों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा। उन पर भी हमला हुआ, जिसमें वह बुरी तरह घायल हुए। इसके बाद सुशील और उसके भाइयों को जहांगीर पुरी स्थित जगजीवन राम अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपचार के दौरान सुशील की मृत्यु हो गई। उसके दोनों भाई अनिल और सुनील फ़िलहाल अस्पताल में ही भर्ती हैं। मृतक के भाई सुरजीत ने इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा, 

“मेरे भाइयों पर हमारे पड़ोसियों ने चाक़ू और छूरी से हमला कर दिया। उन्होंने इस बात की योजना पहले से ही बना रखी थी कि हमसे विवाद करेंगे। विवाद के बीच ही उन लोगों ने चाक़ू और छूरी निकाल कर हमला कर दिया। हमला करने वालों के साथ कुल 5 लड़के मौजूद थे जो इस वारदात को अंजाम देने के बाद मौके से फरार हो गए थे। मुख्य आरोपित का नाम चाँद है और इसमें उसका भाई भी शामिल था। अभी तक पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं हुई है।”           

मृतक की परिजन सीमा ने भी इस घटना पर जानकारी दी। उन्होंने कहा, “विवाद गाना बजाने को लेकर शुरू हुआ था। सभी ने इस वारदात को अंजाम देने की तैयारी पहले से ही कर ली थी। मुख्य आरोपित के पिता ने मृतक और उसके भाई को खुद पकड़ रखा था, फिर सभी ने मिल कर धारदार हथियार से हमला किया। इतना ही नहीं आरोपित की माँ भी चाक़ू से हमला कर रही थी। तीनों भाई फेरी लगाते हैं और कम्बल बेचते हैं, उनका किसी से कोई विवाद नहीं था।”

भारत के हमले से ‘फटी’ पड़ी थी पाकिस्तान की… और ये 11 लिबरल इमरान खान के नाम पर गीत गा रहे थे

भारतीय सेना (थल, नभ या वायु) की वीरता के किस्से पूरी दुनिया में मशहूर हैं। लेकिन इनके चरम शौर्य का किस्सा सुनना हो तो दुश्मन देश की सेना पर क्या बिती है, वह सुनिए। ताजा किस्सा भारतीय वायु सेना के फायटर पायलट अभिनंदन को लेकर है। इनके माध्यम से पाकिस्तान की संसद में भारतीय सेना की खौफ के चर्चे हुए।

पाकिस्तान की संसद में भारतीय सेना की खौफ के चर्चे! जी हाँ, यह सच है – 100 फीसदी सच। लेकिन दूसरा सच यह भी है कि दुश्मन देश जहाँ हमारी सेना और सेना के पीछे स्टील-फ्रेम की भाँति खड़े राजनीतिक दल की चर्चा कर रहा है, वहीं अपने देश के चंद लिबरल (धूर्त) इस घटना के वक्त अपने देश की सेना और सत्ता के साथ न खड़े होकर दुश्मन देश के PM इमरान खान की तारीफ में गीत गा रहे थे।

पहले नंबर पर हैं राजदीप। उन्होंने इसे भारतीय नेताओं (मतलब जो सत्ता में थे, मतलब बिना नाम लिए PM मोदी को टारगेट) के लिए वोट का मसला बता दिया था जबकि इमरान को विजेता घोषित कर दिया था।

फिर नंबर आता है बरखा जी का। ये इमरान के स्वागत में ट्वीट कर रही थीं।

शोभा डे तो पाकिस्तानियों को ही धन्यवाद कहने लगी थीं।

रिफत जावेद तो अपने देश के TV चैनलों को ज्ञान देने लगे थे। इसमें ज्ञान से ज्यादा PM मोदी के नाम पर तंज था।

प्रशांत भूषण कैसे पीछे रहते। इमरान खान को उन्होंने परिपक्व और बड़ा निर्णय लेने वाला करार दिया था।

लेकिन इन 11 लिबरलों (धूर्तों) को शायद यह नहीं पता था कि वो या तो किसी (दुश्मन देश) के हाथों कठपुतली की भाँति खेल रहे हैं या फिर अपने ही देश के किसी खास पार्टी के इशारे पर केंद्र सरकार को नीचा दिखाने का अजेंडा चला रहे हैं। पता तो शायद उन्हें यह भी नहीं होगा कि एक दिन उनकी धूर्तता की पोल कोई और नहीं बल्कि पाकिस्तान का ही एक सांसद खोल कर रख देगा।

‘अल्लाह के वास्ते अभिनंदन को छोड़ दो नहीं तो…’ – Pak सांसद ने खोली अपने विदेश मंत्री के ‘डर से काँपने’ वाली बात

पाकिस्तानी राजनीतिक दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग एन (पीएमएल-एन) के एक सांसद ने भारतीय वायु सेना के पायलट विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई को लेकर बड़ा खुलासा किया है। सांसद ने पाकिस्तान की संसद में दावा किया कि इमरान खान ने भारत के हमले के डर से मार्च 2019 अभिनंदन को रिहा किया था। सांसद के मुताबिक़ अभिनंदन की रिहाई नहीं होने पर भारत पकिस्तान पर हमले के लिए तैयार बैठा था।

पीएमएल-एन के नेता अयाज सादिक ने पाकिस्तान की संसद नेशनल असेंबली में इस मुद्दे पर खुलासा किया। उन्होंने कहा, “विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने एक अहम बैठक में कहा था कि अगर हम विंग कमांडर अभिनंदन को नहीं छोड़ते हैं तो भारत 9 बजे तक हम पर हमला कर देगा।” पाकिस्तानी सांसद के इस बयान का वीडियो फ़िलहाल पूरे सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है, जिसमें देखा जा सकता है कि वह पाकिस्तानी सरकार और सेना के भय की वास्तविकता बता रहे हैं। 

इसके बाद पाकिस्तानी सांसद अयाज सादिक ने कहा कि इस घटना के ठीक बाद विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने पीएमएल-एन, पीपीपी और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के अलावा अन्य नेताओं और अधिकारियों के साथ एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक के बारे में बात करते हुए अयाज सादिक ने कहा, “मुझे बहुत अच्छे से याद है कि बैठक के दौरान सेना प्रमुख बाजवा कमरे में दाखिल हुए थे। उस दौरान बेहद घबराए हुए थे, वह पसीना-पसीना थे और उनके पैर तक काँप रहे थे।” 

फिर अयाज सादिक ने कहा, “पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस बैठक में शामिल होने से साफ़ मना कर दिया था और विदेश मंत्री कुरैशी ने तो सेना प्रमुख से गुजारिश करते हुए कहा था कि अल्लाह के वास्ते अभिनंदन को छोड़ दो नहीं तो भारत की सेना 9 बजे तक हमला कर देगी।” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सादिक ने यहाँ तक कहा कि विपक्ष ने उस वक्त अभिनंदन समेत कई अन्य मुद्दों पर पाकिस्तान की सरकार का समर्थन किया था लेकिन उन्होंने कहा था कि वह आगे से नहीं कर पाएँगे। 

गुज़रे साल फरवरी के दौरान भारतीय सेना ने बालाकोट में स्थित आतंकवादी कैम्प पर एयर स्ट्राइक किया था। इसके ठीक बाद पाकिस्तानी सेना ने भी अपने विमान भारत पर हमले के लिए भेजे थे, जिसे भारतीय वायु सेना ने खदेड़ दिया था। तब इस एयर-फाइट में विंग कमांडर अभिनंदन ने मिग-21 से पाकिस्तानी वायु सेना के विमान एफ़-16 को मार गिराया था। इसी कड़ी में वह पाकिस्तानी सीमा के भीतर चले गए थे और एक पाकिस्तानी मिसाइल से उनका प्लेन हिट हुआ था, जिसके कारण वो इजेक्ट कर पाकिस्तानी सीमा में गिरे थे। वहाँ की सेना ने उन्हें हिरासत में ले लिया था और उनसे पूछताछ भी की थी। 

इसका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें देखा जा सकता है कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारी विंग कमांडर अभिनंदन को चाय के लिए पूछ रहे थे। इस वीडियो के ज़रिए पाकिस्तान यह दिखाने का प्रयास कर रहा था कि वह अभिनंदन की किस कदर खातिरदारी कर रहे हैं। भारत की तरफ से बरकरार रहे कड़े रवैये ने पाकिस्तान को झुकने के लिए मजबूर किया था, नतीजतन पाकिस्तान ने अभिनंदन को रिहा किया था। 1 मार्च 2019 को विंग कमांडर अभिनंदन अटारी वाघा बॉर्डर से भारत आए थे।    

धर्म परिवर्तन के लिए नहीं झुकने वाली निकिता तोमर की हत्या में शामिल अजरु गिरफ्तार, इसी ने दिया था तौसीफ को कट्टा

निकिता तोमर की हत्या मामले में तीसरी गिरफ्तारी कर ली गई है। तीसरे गिरफ्तार किए गए शख्स का नाम अजरु है। अजरु ने ही निकिता तोमर की हत्या के मुख्य आरोपित तौसीफ को देशी कट्टा दिया था। इसी कट्टे से हत्या को अंजाम दिया गया।

फरीदाबाद क्राइम ब्रांच ने दर्जनों स्थान पर छापेमारी के बाद नूंह जिले से अजरु को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही उस आई-20 कार को भी जब्त कर लिया गया है, जिससे तौसीफ आया था और निकिता को अगवा करने की नाकाम कोशिश के बाद गोली मार कर उसकी हत्या कर दी थी।

रेवान भी गिरफ्तार

निकिता तोमर की हत्या के मामले में मुख्य आरोपित तौसीफ के अलावा पुलिस ने दूसरे आरोपित रेवान को भी धर-दबोचने में कामयाबी पाई। मृतका के परिजनों ने इसे ‘लव जिहाद’ का मामला बताया है। निकिता तोमर हत्याकांड के दोनों ही आरोपितों को नूँह से गिरफ्तार किया गया।

तौसीफ की अम्मी ने बनाया था धर्म परिवर्तन का दबाव

निकिता तोमर के पिता का दावा है कि आरोपित तौसीफ ही नहीं बल्कि उसकी माँ भी उनकी बेटी निकिता पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाती रहती थी। छात्रा के पिता ने आरोपित तौसीफ की माँ पर आरोप लगाया है कि वह बार-बार फोन कर के उनकी बेटी पर दबाव डालती थी कि उनका मजहब कबूल कर लो। यह सिलसिला उस वक्त से चल रहा था, जब 2018 में तौसीफ ने पहली बार निकिता का अपहरण किया था।

पीड़िता के पिता का कहना है कि पहली बार जब बच्ची का अपहरण हुआ था तो उसे छुड़ा लिया गया था। लेकिन उस हादसे के बाद से ही तौसीफ की माँ बार-बार निकिता को फोन कर कहती थी, “तुम हमारा मजहब कबूल कर लो। अब तुमसे कौन शादी करेगा। तुम्हारा अपहरण भी हो गया है और अब तुम्हारा क्या होगा। तुम हमारा मजहब कबूल कर मेरे बेटे की हो जाओ।”

अर्नब पर कानूनी, आर्थिक, मानसिक रूप से अटैक के लिए दाउद कर रहा प्रबंध, हो सकता है शारीरिक हमला: पूर्व ब्यूरोक्रेट RVS मणि

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क पर हो रहे लगातार हमलों के बीच भारतीय सरकार के एक पूर्व ब्यूरोक्रेट ने अर्नब गोस्वामी को लेकर आगाह किया है कि उन पर हमला हो सकता है। गृह मंत्रालय में आतंरिक सुरक्षा विभाग के अवर सचिव का पद संभाल चुके आरवीएस मणि (RVS Mani) ने गोवा क्रॉनिकल से बात करते हुए ये खुलासा किया।

उन्होंने कहा कि अर्नब ने  मुंबई अंडरवर्ल्ड द्वारा संगठित क्रिमिनल सिंडिकेट की गलत नब्ज को छुआ है जिसे वैश्विक स्तर पर ड्रग सरगना और आतंकी दाऊद इब्राहिम, कई राजनेताओं, ड्रग व बॉलीवुड नेक्सस द्वारा संचालित किया जाता है।

अर्नब गोस्वामी और उनके चैनल पर हो रहे लगातार हमलों पर प्रकाश डालते हुए RVS मणि ने कहा कि अर्नब और रिपब्लिक टीवी पर कानूनी, आर्थिक और मानसिक तौर से हमला करने का प्रबंध दाउद द्वारा किया जा रहा है। इसलिए मुमकिन है कि उन पर शारीरिक हमला भी हो।

ध्यान रहे कि इससे पहले गोवा क्रॉनिकल के चीफ ने दावा किया था दाउद की ओर से 50 मिलियन डॉलर की ‘सुपारी’ रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क और अर्नब गोस्वामी को रोकने के लिए दी जा चुकी है।

ब्यूरोक्रेट RVS मणि ने साक्षात्कार में बताया कि बॉलीवुड और ड्रग्स के बीच का रिश्ता बहुत गहरा है, जिसका खुलासा करने की हिम्मत अर्नब ने की। वह इस बीच पालघर साधु, बॉलीवुड ड्रग नेक्सस, दिशा सालियान व सुशांत सिंह जैसे कई मुद्दों को लेकर चर्चा में थे।

उन्होंने कहा, “ड्रग ट्रैफिकिंग में दाउद मुख्य शख्स है। रणबीर कपूर, संजय दत्त जैसे बॉलीवुड स्टार मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल रहे हैं। सुपरस्टार शाहरुख खान की पत्नी-गौरी खान, फरहा खान के पति, रणबीर कपूर, ये सभी बड़े सितारे अलग-अलग समय पर दुबई में मादक पदार्थों की तस्करी करते पकड़े गए हैं, मेरा मानना ​​है कि वे डी-कंपनी के कोरियर के रूप में काम कर रहे थे।”

उन्होंने बताया कि ड्रग से मिले पैसों से कश्मीर में आतंकी गतिविधियाँ संचालित होती हैं। पहले ऐसे आँकड़े  20% होते थे, लेकिन अब इनमें 27% के साथ बढ़ौतरी हुई है क्योंकि यहाँ आतंकी गतिविधियाँ भी बढ़ी हैं। इसके अलावा हाथरस और बेंगलुरु जैसे दंगों को भी करवाने के लिए फंड इकट्ठा हुए।

परमबीर सिंह कर रहे दाउद के इशारों पर काम?

परमबीर सिंह को लेकर पूर्व ब्यूरोक्रेट ने आशंका जताई है कि हो सकता है कि उन्हें और उनकी टीम जिसमें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सचिन वजे (Sachin Vaze) व प्रदीप शर्मा शामिल हैं, को ऐसे स्रोतो (डी कंपनी) से समर्थन मिल रहा हो, जिनके कहने पर उन्होंने एक बार एनकाउंटर किया था। इनमें सचिन वजे को तो अर्नब के ख़िलाफ़ जाँच के आदेश दिए गए हैं। खास बात यह है कि वजे को 2003 में सस्पेंड किया गया था लेकिन परमबीर सिंह के आते ही उसे वापस ले आया गया।

पूर्व ब्यूरोक्रेट के मुताबिक इन एनकाउंटर स्पेशलिस्टों पर आरोप है कि इन्होंने दाउद के कहने पर एनकाउंटर किए। वह पूछते हैं कि आपको क्यों लगता है कि वज़े को 2019 में मुंबई पुलिस में बहाली दी गई थी?” उन्हें अर्नब के लिए लाया गया।

उन्होंने परमबीर सिंह की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए इसमें बाहरी हस्तक्षेप की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि परमबीर सिंह को साक्षात्कार से पहले कुछ कॉल आए थे और यह जानकारी खुद उन्हीं के एक अधिकारी ने दी है। ब्यूरोक्रेट का यह भी दावा है कि उनके द्वारा कही गई बातें सारी पब्लिक डोमेन में सत्यापित हैं।

उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान के ‘मरुन बेरेट्स’ कमांडिग ऑफिसर ने मुंबई फोर्ट इलाके में कॉल किया था, जहाँ मुंबई पुलिस मुख्यालय भी है। इतना ही नहीं पाकिस्तान के अलावा कई वीआईपी नंबर भी मुंबई के लोगों को कॉल करते हैं। इसलिए अगर इन सब बिंदुओं को जोड़ा जाए तो रिपब्लिक टीवी पर हमले के तार समझ आते हैं।

उन्होंने चिंता जताई कि परमबीर सिंह खुद ही अपने स्रोत्रों के आदेशों का पालन कर रहे हैं और खुद ही इसकी जाँच कर रहे हैं। उन्होंने अपनी सारी बात रखते हुए महाराष्ट्र सरकार पर भी सवाल उठाए और परमबीर सिंह पर कार्रवाई की बात की। साथ ही महा विकास आघाड़ी सरकार के गठबंधन का मुद्दा उठाया और ठाकरे सरकार में संजय दत्त पर हुई कार्रवाई पर गौर करवाया।

मीडिया के बदलते रुख पर भी खड़े किए सवाल

उन्होंने टाइम्स नाऊ के बदलते रुख की ओर भी ध्यान आकर्षित करवाया कि जो चैनल पहले सख्ती से ड्रग केस में कुछ बॉलीवुड हिरोइनों का नाम ले रहा था, उसी चैनल ने अब अपना पूरा स्टैंड बदल लिया है। इस बदलते रवैये के पीछे उन्होंने किसी ताकतवर हस्तक्षेप को जिम्मेदार ठहराया।

इंडिया टुडे पर राय रखते हुए उन्होंने कहा कि जिस मीडिया नेटवर्क का नाम असलियत में टीआरपी में आया है, उनका खुद का रिकॉर्ड पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ मधुर संबंधों का रहा है, जो हाफिज सईद के गैर आधिकारिक रूप से साझेदार भी रहे हैं। अपनी इस बात को कहते हुए उन्होंने इंडिया टुडे द्वारा लिए गए इमरान के उस इंटरव्यू को याद दिलाया जिसे 26/11 के कुछ समय बाद लिया गया था जब लोगों के घाव तक नहीं भरे थे

अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी पर हुए हमले

गौरतलब है कि अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी पर पिछले दिनों मुंबई पुलिस द्वारा कई हमले किए गए। साधु लिंचिंग केस में उनसे 12 घंटे पूछताछ हुई। बांद्रा में रिपोर्टिंग के लिए भी उन पर केस किया गया। नवी मुंबई पर रिपोर्ट करने गए उनके पत्रकार को भी गैर कानूनी ढंग से उठा लिया गया। फिर प्रदीप भंडारी के साथ सड़क पर बदसलूकी हुई। पिछले दिनों मुंबई पुलिस आयुक्त ने ही बिना किसी सबूत के टीआरपी स्कैम में रिपब्लिक मीडिया चैनल का नाम ले लिया, जबकि उनका नाम पूरी एफआईआर में था ही नहीं।

मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुझे पोर्न दिखाया, गंदे सवाल किए, अंगों को ले कर अश्लील गालियाँ दी: साध्वी प्रज्ञा

रिपब्लिक टीवी को साक्षात्कार देते हुए भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा ने आज अर्नब गोस्वामी और पूरे देश के सामने लगातार कई चौंकाने वाले खुलासे किए। इस इंटरव्यू में उन्होंने मुंबई पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने कहा है कि 3-4 पुलिसकर्मियों की उपस्थिति में उनको व्यक्तिगत रूप से बहुत ज्यादा प्रताड़ित किया और हिरासत में लेकर उन्हें बेल्ट से इस तरह पीटा गया कि उन्हें वेंटीलेटर तक पर जाना पड़ा। उनकी रीढ़ की हड्डी भी टूट गई।

इतना ही नहीं भगवा आतंक के नाम पर पुलिस बर्बरता झेल चुकी साध्वी प्रज्ञा का कहना है कि जब जब उनकी बेल की बात चली तो न्यायाधीशों तक को धमकी देने का काम हुआ। उन्होंने परमबीर सिंह पर आरोप लगाया है कि उन्हें हिरासत के दौरान पॉर्न वीडियो दिखाई गईं और उनसे भद्दे सवाल किए गए।

साध्वी प्रज्ञा ने यह भी कहा कि उन्हें 7-8 लोगों के सर्कल के बीच में उन्हें मारा गया। उनके पैरों के तलों तक में बेल्ट से पिटाई हुई। साध्वी ने इस इंटरव्यू में कहा है कि वह परमबीर के षड्यंत्र के विरुद्ध कुछ करने वाली हैं, जिन जिन लोगों ने उन्हें प्रताड़ित किया, उन पर भी केस होगा और उन्हें दंड दिलवाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि पहले उनको भगवा आतंकी कहा गया कहा गया और फिर भारत को आतंकवादी देश घोषित करवाने का प्रयास हुआ। उनका आरोप है कि ये सारा षड्यंत्र कॉन्ग्रेस का था।

तू कौन? मैं ख़ामख़ा: इमरान खान ने पूरे समुदाय को लिखी चिट्ठी, कहाँ पहुँची, पता नहीं

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार यूरोप में बढ़ रहे इस्लामोफोबिया के ख़िलाफ़ मजहबी देशों को इकट्ठा करने में जुटे हुए हैं। उन्होंने एक बार दोबारा मजहबी देशों को पत्र लिख कर पश्चिमी देशों का विरोध करने के लिए उकसाया है। हालाँकि, ये पत्र कहाँ पहुँचा है इसका किसी को कुछ मालूम नहीं चला।

इस पत्र में इमरान खान ने कश्मीर का मुद्दा भी उठाया। साथ ही इस्लामोफोबिया का मुकाबला करने के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने की बात की है।

इमरान खान ने लिखा, “हम अपने उम्मा के बीच बढ़ती चिंता और बेचैनी का सामना कर रहे हैं क्योंकि वे इस्लामोफोबिया और इस्लाम पर हमलों के बढ़ते ज्वार को देखते हैं, पश्चिमी देशों में ऐसा हो रहा है, विशेष रूप से यूरोप में तो ऐसा हमारे प्यारे पैगंबर का उपहास और मजाक उड़ाकर हुआ।”

इमरान खान ने अपने पत्र में कुरान की मर्यादा का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि इस्लामोफोबिया बहुत तेजी से यूरोपीय देशों में बढ़ रहा है। वहाँ मस्जिदों को भी बंद कर दिया गया है। महिलाओं के कपड़े पहनने की पसंद और अधिकार को भी नकारा जा रहा है, वहीं सार्वजनकि स्थानों पर नन और पुजारियों को उनके धार्मिक पहनावे के साथ रहने में किसी को कोई आपत्ति नहीं है। इन देशों में भेदभाव सिर्फ़ समुदाय की महिलाओं के साथ बढ़ रहा है।

इमरान खान ने इस्लामी देशों के सामने अपनी अपील रखते हुए यूरोपीय लीडरशिप पर सवाल उठाया और लिखा कि यूरोप की लीडरशिप ये समझने में असमर्थ है कि समुदाय को अपने पैगंबर मोहम्मद साहब व कुरान में कितना विश्वास है या वह उसे कितना प्यार करते हैं।

यूरोप देश समेत पूरे विश्व भर में इस्लामी आतंक को मात्र प्रतिक्रिया भर कहकर जस्टिफाई करते हुए इमरान खान ने कहा कि जो यूरोप का नेतृत्व उनकी भावनाओं को समझ नहीं पा रहा उसके परिणाम खतरनाक क्रिया-प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आ रहे हैं क्योंकि मजहब के लोग देख रहे हैं कि उनके विश्वास, सबसे अजीज पैगंबर मोहम्मद को निशाना बनाकर उनसे भेदभाव किया जा रहा है, उनको प्रभावहीन बनाया जा रहा है। इसलिए वह लोग भी गुस्से में ऐसे कदम उठा रहे हैं जिससे दक्षिणपंथी ताकतों को हालात भड़काने में मदद मिल रही है।

इमरान खान कहते हैं कि इस्लामी देश के नेताओं को घृणा और अतिवाद जो हिंसा और मृत्यु को बढ़ावा दे रहा है, उसके खिलाफ एकजुट होकर पहल करनी होगी। उन्होंने अपील की है कि सभी मजहबी नेता अपनी आवाज बुलंद करें और दूसरे देशों को पवित्र पुस्तक कुरान व पैगंबर मोहम्मद साहब की प्रति प्रेम भावना और श्रद्धा से परिचित कराएँ।

इमरान खान ने इस्लामी देशों के नेताओं से कहा कि उन्हें पश्चिमी देशों को यह बताना चाहिए कि सभी व्यवस्थाओं में सामाजिक, धार्मिक और जातीय समूह के जीवन मूल्य अलग-अलग होते हैं। यहूदियों के सर्वनाश से जुड़े नाजी की तबाही, जिसने पश्चिम, खास तौर पर यूरोपीय देशों को उस रास्ते पर पहुँचाया जहाँ यहूदी पर अत्याचार को अपराध माना गया है। वह इसको समझते हैं और सम्मान भी करते हैं।

पाक पीएम ने कश्मीर को अपने पत्र में घुसाते हुए कहा कि अब समय है कि समुदाय के लोगों को भी ऐसे ही सम्मान दिया जाए, जिन्होंने बड़ी-बड़ी तादाद में बोस्निया से लेकर इराक, अफगानिस्तान, भारत द्वारा कब्जा किए गए कश्मीर में अपने लोगों को मरते देखा है, लेकिन उनके लिए उनके पैगंबर का मजाक उड़ाना, उनके विश्वास पर हमला होता देखा सबसे बड़ा दुख है, इससे वह आहत होते हैं। उन्होंने कहा है कि उनके मजहब में पैगंबर की ईशनिंदा अस्वीकार्य है।

इस्लामोफोबिया के ख़िलाफ़ मजहबी देशों से स्पष्ट संदेश देने की अपील भी इमरान खान ने की। बता दें कि इससे पहले प्रधानमंत्री इमरान खान ने फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग को भी पत्र लिख कर इस्लामोफोबिया संबंधित सामग्री पर नकेल कसने को कहा था।

उनके इस हालिया पोस्ट पर कई समुदाय विशेष के लोगों ने उनकी सरहाना की है। वहीं, कई ऐसे हैं जिन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर हमले के मामलों को उठाकर उन्हें सलाह दी है कि वह अपने देश में माइनॉरिटी की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उनके धार्मिक स्थलों को बचाएँ।