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शिवहर: जिस दिन एक कैंडिडेट को गोलियों से भून दिया गया, उसी दिन हमने क्या देखा…

शिवहर बिहार का सबसे छोटा जिला है। पिछड़ा भी। बाढ़ से प्रभावित भी। पूर्वी चंपारण के ढाका से शिवहर की ओर जाने वाली सड़क बागमती के किनारे-किनारे बेहद उबड़-खाबड़ है। या यूँ कहें कि बाढ़ से हुई तबाही के बाद चलने लायक जुगाड़ कर दिया गया है। इस सड़क पर हमारी कार ने जितने हिचकोले खाए, उससे कहीं ज्यादा शिवहर की चुनावी राजनीति हमें हिचकोले खाते दिखी। इकलौते विधानसभा वाले इस जिला में मुकाबला मुकाबला चतुष्कोणीय है। शिवहर विधानसभा के लिए दूसरे चरण में 3 नवंबर को मतदान होना है।

हालाँकि चतुष्कोणीय मुकाबले में श्रीनारायण सिंह नहीं थे, जिनकी शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को हत्या कर दी गई। उन्हें जनसंपर्क के दौरान गोलियों से भून दिया गया था। श्रीनारायण सिंह जिस नयागाँव के रहने वाले थे, हम कल वहाँ से गुजरे भी थे।

श्रीनारायण सिंह राजद के ही नेता थे। टिकट के दावेदार भी। लेकिन टिकट आखिर समय में पार्टी में शामिल हुए चेतन आनंद को मिला। इसकी वजह से पार्टी में बगावत हो गई। रंजन यादव की पार्टी जनता दल राष्ट्रवादी से श्रीनारायण सिंह मैदान में उतर गए।

इसी तरह बसपा के टिकट पर लड़ रहे संजीव गुप्ता भी राजद से टिकट चाहते थे। इस सीट से उनके पिता सत्यनारायण प्रसाद और भाई संजय गुप्ता विधायक भी रह चुके हैं। संजय गुप्ता को राजद ने बेलसंड से उम्मीदवार बनाया है। लेकिन संजीव को चुनाव नहीं लड़ने से वह नहीं मना पाई। चतुष्कोणीय मुकाबले का एक कोण संजीव भी हैं। संजीव जिस वैश्य समाज से आते हैं, उनके मतदाता इस सीट पर प्रभावी हैं।

राजद में बगावत के कई कोण होने के बावजूद चेतन आनंद की स्थिति मजबूत बताई जा रही है। इसका कारण जदयू के निवर्तमान विधायक शरफुद्दीन और नीतीश कुमार से लोगों की नाराजगी है। शरफुद्दीन के गाँव से हमने एक रिपोर्ट भी की है, जिसे आप जल्द ऑपइंडिया पर पढ़ पाएँगे।

शरफुद्दीन के गाँव के मोहम्मद वामिक भी चुनाव लड़ रहे हैं। मोहम्मद वामिक का भी क्षेत्र में खासा प्रभाव है। विधायक पर हमले के आरोप में हाल तक जेल में बंद रहे वामिक, पप्पू यादव की पार्टी से मैदान में हैं। दोनों का घर अगल-बगल ही है और इस गाँव में तनाव पसरा हुआ है। लोग बात करने को तैयार नहीं होते। हम दोनों उम्मीदवारों के दरवाजे तक भी गए थे। पर लोगों ने हाथ जोड़ लिए और कहा कि आप गाँव की दूसरी तरफ चले जाइए। इधर माहौल ठीक नहीं है।

इन चार के अलावा श्रीनारायण सिंह जैसे कुछ और भी हैं, जिनको मिलने वाले वोट नतीजे तय करने में निर्णायक होंगे। असल में इस सीट पर राजद की स्पष्ट दिख रही जीत में राजद के बागी हो रोड़े हैं। राजद के एक स्थानीय नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया, “चेतन जी के पक्ष में माहौल ठीक है। पर धीरे-धीरे कार्यकर्ता टूट रहा है। अभी चुनाव में काफी टाइम है। इसको ठीक नहीं किए तो मामला गड़बड़ा सकता है।”

हमने चेतन आनंद से संपर्क करने की कई बार कोशिश की पर बात नहीं हो सकी। बता दूँ कि चेतन आनंद, पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे हैं। वैसे जिला पार्षद, मुखिया और राजद ​जिला उपाध्यक्ष रहे नारायण सिंह का भी जरायम की दुनिया से संबंध रहा है।

बिहार में NDA बनाएगी सरकार, BJP जीत सकती है अधिकतम सीटें: ABP-CVoter ओपिनियन पोल के नतीजे

बिहार विधानसभा चुनाव के मतदान की तारीख नजदीक आते ही सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपना पूरा जोर झोक दिया है। एक तरफ जहाँ प्रचार में तेजी देखने को मिल रही वहीं दूसरी ओर राजनेताओं के बड़े-बड़े वादे भी सामने आ रहे है। इसी बीच, बिहार विधानसभा चुनाव के लिए ABP-CVoter ने अपना ओपिनियन पोल जारी किया है। बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर हुए ओपिनियन पोल में नीतीश कुमार की अगुवाई वाला NDA 135-159 सीट से सबसे आगे नजर आ रहा है जबकि BJP इस चुनाव में सर्वाधिक सीट जीतने वाली पार्टी बन सकती है।

बिहार में पहले चरण में 28 अक्टूबर को 71 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। बता दें कि महागठबंधन का मुकाबला जेडीयू-भाजपा से है। आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कॉन्ग्रेस और वामपंथी दल साथी हैं।

बिहार चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, राहुल गाँधी भी उतर चुके हैं। एलजेपी के चिराग पासवान अकेले चुनावी समर में उतरे हैं। पहले चरण वोटिंग से पहले एबीपी न्यूज-सी वोटर सर्वे के मुताबिक नीतीश-भाजपा के खाते में 135-159 सीट, राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन को 77-98 सीट और एलजेपी को 1-5 सीट मिल सकती हैं, वहीं अन्य के खाते में 4 से 8 सीटें जा सकती हैं।

कुल 243 सीटों पर वोट प्रतिशत की बात करें तो NDA को 43% वोट मिल सकते हैं, महागठबंधन को 35% वोट मिल सकते हैं, चिराग पासवान की LJP को 4% और अन्य खातों में 18% वोट मिल रहे हैं।

गौरतलब है कि सर्वे के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरेगी। भाजपा को 73 से 81 सीटें मिल सकती हैं, जबकि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पार्टी जदयू को 59 से 67 सीटें मिल सकती हैं। वहीं विकासशील इन्सान पार्टी (VIP) को 3 से 7 सीटें मिल सकती हैं और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) को 0 से 4 सीटों के बीच कुछ भी मिल सकता है। दूसरी ओर राजद को महागठबंधन में 56-64 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कॉन्ग्रेस को 12-20 सीटें मिल सकती हैं। ओपिनियन पोल के मुताबिक वामदल 9-14 सीटें में सिमटती नजर आ रही है।

एबीपी न्यूज सी वोटर के सर्वे में यह देखने को मिला कि 60 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे नीतीश कुमार से नाराज हैं और मुख्यमंत्री को बदलना चाहते हैं। 26% लोगों ने नीतीश कुमार से नाराजगी के बाद भी उन पर भरोसा जताया है। सिर्फ 14% लोग ऐसे हैं जो न नाराज हैं और न ही नीतीश को बदलना चाहते हैं।

सर्वे के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री के लिए लोगों से उनकी पहली पसंद के बारे में राय माँगी गई थी। जिस पर लोगों ने पिछले 15 वर्षों से राज्य में शासन कर रहे नीतीश कुमार पर 30 %, तेजस्वी यादव पर 20 %, चिराग पासवान पर 14% तो मौजूदा डिप्टी सीएम और भाजपा नेता सुशील मोदी पर 10% लोगों ने भरोसा जताया। यानी चेहरों की लड़ाई में नीतीश कुमार अपने बाकी सभी प्रतिद्वंदियों से कई कदम आगे खड़े हैं।

गुपकार गठबंधन के लीडर बने फारूक अब्दुल्ला: 370 की बहाली के लिए महबूबा, सज्जाद के साथ मिलकर खाई कसम

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, पूर्व अलगाववादी और राजनेता सज्जाद लोन और कुछ अन्य लोगों ने एकजुट होकर ‘पीपल्स एलायंस फ़ॉर गुपकार डिक्लेरेशन’ का गठन किया है। गुपकार गठबंधन का उद्देश्य कथित तौर पर अनुच्छेद 370 और 35A की बहाली के साथ ही जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाने का है।

‘पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लेरेशन’ ने डॉ फारूक अब्दुल्ला को अपना अध्यक्ष और महबूबा मुफ्ती को 6 पार्टी समूह का उपाध्यक्ष घोषित किया है। यह निर्णय पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के गुपकार रोड पर स्थित निवास पर आयोजित अलायंस में शामिल घाटी के शीर्ष नेताओं की दो घंटे तक चली बैठक में लिया गया।

वहीं, सज्जाद लोन को गठबंधन का प्रवक्ता बनाया गया है। उन्होंने अलायंस के प्रवक्ता की जिम्मेदारी सँभालते हुए अधिकारिक तौर पर पत्रकारों के समक्ष अलायंस के नवनियुक्त पदाधिकारियों के नामों की घोषणा की। गठबंधन ने जम्मू-कश्मीर राज्य के पुराने झंडे को अपना प्रतीक माना है।

6 दलों के समूह से बना ‘गुपकार गठबंधन’ 

6 दलों – राष्ट्रीय सम्मेलन (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी), पीपुल्स सम्मेलन (पीसी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी (सीपीआई-एम), पीपुल्स मूवमेंट (पीएम) और अवध नेशनल कॉन्फ्रेंस (एएनसी) – इस महीने की शुरुआत में एक साथ आए थे ताकि गठबंधन का गठन किया जा सके और राज्य की विशेष स्थिति की बहाली के लिए शांति से काम किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र के लोगों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ने की कसम खाई।

नया प्रभार सँभालने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने एलायंस के उद्देश्य को उजागर करते हुए कहा, “हम भाजपा के विरोधी हैं और इसका मतलब ये नहीं है कि राष्ट्र विरोधी हैं। यह राष्ट्र विरोधी जमात नहीं है। हमारा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों का अधिकार बहाल हो।”

बता दें कि महबूबा मुफ्ती के 13 अक्टूबर को नजरबंदी से रिहाई के बाद इसी माह 15 को फारूक के घर पर 6 दलों की पहली बैठक हुई थी। जिसमें महबूबा मुफ्ती ने भी भाग लिया गया था। उस दिन फारूक की तरफ से कहा गया था कि कुछ दिनों में बैठक करके आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

उन्होंने कहा था, “जम्मू कश्मीर और लद्दाख से जो कुछ छीन लिया गया है, उसकी बहाली के लिए हम संघर्ष करेंगे। हमारी एक संवैधानिक लड़ाई है, हम चाहते हैं कि भारत सरकार 5 अगस्त, 2019 से पहले के राज्य के लोगों के अधिकारों को वापस करे।” उसके बाद शनिवार को बैठक हुई।

महबूबा मुफ्ती ने J&K के अलावा दूसरा झंडा उठाने से किया इनकार 

महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को श्रीनगर में अपने आवास पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि जब तक उनका झंडा (जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा) वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह दूसरा झंडा (तिरंगा) नहीं उठाएँगी। मुफ्ती ने कहा कि उनका झंडा डाकुओं ने ले लिया है।

14 महीने तक हिरासत में रहने के बाद हाल ही में रिहा हुई महबूबा मुफ्ती ने कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा था, “जब तक केंद्र सरकार हमारे हक (अनुच्छेद 370) को वापस नहीं करते हैं, तब तक मुझे कोई भी चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं है।” उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा। वह कश्मीर को पुराना दर्जा दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगी।

‘कश्मीरी चाहते हैं कि भारत पर चीन शासन करे’

वहीं ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस’ के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि चीन ने कभी भी अनुच्छेद 370 को लेकर भारत सरकार के फैसले को स्वीकार नहीं किया है। साथ ही उन्होंने उम्मीद जताई कि चीन की मदद से फिर से अनुच्छेद 370 को वापस लाया जा सकेगा।

उन्होंने वामपंथी साइट ‘द वायर’ को दिए इंटरव्यू में कहा था, “पिछले साल 5 अगस्त को उन्होंने (मोदी सरकार ने) जो किया, वह भारत के ताबूत में आखिरी कील था। आज जब चीन हमारी तरफ बढ़ रहा है, कश्मीरी लोग चाहते हैं कि वो भारत में घुस जाएँ जबकि उन्हें पता है कि चीन ने मुस्लिमों के साथ क्या किया है, फिर भी वो चीन में जाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हम मुस्लिम बहुमत वाले राज्य थे, फिर भी हम पाकिस्तान नहीं गए। हम गाँधी के भारत में रहे, हमें मोदी का भारत नहीं चाहिए।” अब्दुल्ला ने कहा कि धारा 144 हटने के बाद लाखों कश्मीरी मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ भविष्य में सड़कों पर उतरेंगे।

गौरतलब है कि भाजपा सरकार जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 को रद्द करने के फैसले के बाद से ही विरोधी दल इस कदम के खिलाफ लगातार द्वेषपूर्ण अभियान चला रहे हैं। बता दें कि अनुच्छेद 370 जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता था, जो कि अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। 

दाढ़ी कटाकर ड्यूटी पर ‘चकाचक’ होकर लौटे सब इंस्पेक्टर इंतसार अली, एसपी ने लिया सस्पेंशन वापस

बिना अनुमति दाढ़ी रखने पर निलंबित किए गए दारोगा इंतसार अली ने आखिरकार अपनी दाढ़ी कटवा ली है। दाढ़ी कटवाने के बाद शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को वह एसपी बागपत के समक्ष पेश हुए, जिसके बाद एसपी अभिषेक सिंह ने उनका निलंबन वापस लेते हुए उन्हें बहाल कर दिया। पुलिस के यूनिफॉर्म कोड को लेकर अनुशासनहीनता बरतने पर उनको निलंबित कर दिया गया था। 

बागपत पुलिस द्वारा इसकी जानकारी देते हुए ट्विटर पर लिखा गया, ‘‘दाढ़ी काटकर निर्देशों का पालन करने के उपरान्त उपनिरीक्षक इंतसार अली को पुलिस अधीक्षक बागपत द्वारा निलंबन से बहाल किया गया।”

मामले में सब इंस्पेक्टर इंतसार अली ने भविष्य में पुलिस विभाग के निर्देशों का पालन करने का आश्वासन दिया। उन्होंने पुलिस अधीक्षक के सामने बहाल करने के लिए प्रत्यावेदन दिया, इस पर उन्हें बहाल कर दिया गया।

बागपत के एसपी अभिषेक सिंह के अनुसार, “इंतसार अली एक आवेदन पत्र के साथ आया था जिसमें कहा गया था कि उसने गलती की है और अब उसने आदेशों का पालन किया है। वह क्लीन शेव था और मैंने उसे तुरंत बहाल कर दिया।”

बागपत के रमाला थाने में तैनात सब इंस्पेक्टर इंतसार अली को 20 अक्टूबर को

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के बागपत जिला स्थित रमाला थाने में इंतसार अली बतौर सब इंस्पेक्टर (एसआई) तैनात थे। उन्होंने बिना अनुमति पिछले कुछ समय से लंबी दाढ़ी रखी हुई थी नतीजतन उन्हें पुलिस अधीक्षक ने निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद उन्हें पुलिस लाइन भेज दिया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्हें कई बार दाढ़ी रखने के लिए विभाग से अनुमति लेने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने बिना किसी भी तरह की अनुमति लिए पिछले काफी समय से दाढ़ी रखी थी।    

एसपी अभिषेक सिंह ने कहा था कि पुलिस में सिर्फ सिख समुदाय को ही दाढ़ी रखने की अनुमति है। हिन्दू-मुस्लिम सहित अन्य समाज को इसकी अनुमति नहीं दी गई है। पुलिस में अनुशासन का पालन करना सभी के लिए जरूरी है। इंतसार को कई बार नोटिस भेजा गया था कि दाढ़ी रखने के अनुमति लें, लेकिन लगातार इसकी अनदेखी की गई। अनुशासनहीनता में विभागीय स्तर पर निलंबित करने की कार्रवाई की गई। इसको किसी मजहब से जोड़कर न देखा जाए।

उन्होंने कहा था, “पुलिस मैनुएल के दिशा-निर्देशों के अनुसार सिख समुदाय के पुलिस कर्मियों के अलावा किसी भी अन्य समुदाय का व्यक्ति पुलिस विभाग में तैनात रहते हुए दाढ़ी नहीं रख सकता है। इस आदेश में कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक सभी आते हैं। अगर पुलिस विभाग से जुड़ा हुआ कोई भी व्यक्ति ऐसा करना चाहता है तो उसे सबसे पहले अनुमति लेनी होती है। इतने महत्वपूर्ण आदेश के बिना इंतसार अली बिना किसी भी तरह की आज्ञा लिए दाढ़ी रख रहे थे।”

वहीं इंतसार अली का कहना था कि वह अनुमति के लिए पिछले कई सालों से लगे हुए थे। उनके अनुसार वो एसपी और आईजी कार्यालय में भी अनुमति के लिए गए थे। हर जगह उनका पत्र लंबित पड़ा हुआ है और उनके निवेदन पर कोई सुनवाई नहीं हुई। 

ड्यूटी पर वेशभूषा को लेकर यह नियम हैं –

  • सिखों को छोड़कर यदि अन्य कोई सेवा में रहते हुए दाढ़ी रखता है तो उसको अनुमति लेना आवश्यक है।
  • पुलिस में रहते केवल मूंछ रखने की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती।
  • एसपी या एसएसपी के अधीन सेवारत लोगों को पहले स्थानीय स्तर पर अनुमति का प्रार्थना पत्र देना होता है।
  • यदि वहाँ से प्रार्थना पत्र निरस्त होता है तो आईजी स्तर पर अपील की जा सकती है। 

दिल्ली की जनता को मुफ्त कोरोना वैक्सीन देने को लेकर केजरीवाल ने नहीं दिखाया ‘इंट्रेस्ट’, कहा- ‘सोचेंगे’

कोरोना की वैक्सीन मुफ्त हो या इसके लिए सरकार कीमत वसूले, इस मुद्दे पर लंबी बहस चल पड़ी है। बीजेपी द्वारा बिहार में सत्ता में आने पर हर व्यक्ति को मुफ्त कोरोना वैक्सीन की घोषणा के बाद कई दलों ने कहा है कि उन्हें भी केंद्र से नि:शुल्क कोरोना वैक्सीन मिले। हालाँकि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली के लोगों के लिए कोरोना वायरस वैक्सीन मुफ्त देने के मुद्दे पर गैर-कमिटेड नजर आ रहे हैं।

शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) को मीडिया से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से कहा कि पूरे देश को फ्री वैक्सीन मिलनी चाहिए, ये पूरे देश का अधिकार है। केजरीवाल ने कहा कि सारे लोग कोरोना से परेशान हैं। इसलिए हर भारतीय को कोरोना का वैक्सीन मिलनी चाहिए। हालाँकि खुद दिल्ली के लोगों को मुफ्त टीके उपलब्ध कराने के बारे में उन्होंने कहा कि टीका विकसित होने के बाद सरकार इस पर निर्णय करेगी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केजरीवाल ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दो फ्लाईओवरों का उद्घाटन करने के बाद संवाददाताओं से कहा, “जब टीका आएगा तब हम इस बारे में विचार करेंगे। तब देखेंगे कि इसकी क्या कीमत है और यह कितने लोगों को मुहैया कराई जा सकती है।”

अरविंद केजरीवाल की विमुखता दिल्ली में कोरोना वायरस वैक्सीन के संबंध में उनकी सरकार की नीति को स्पष्ट रूप से बता रही है। चूँकि स्वास्थ्य ‘राज्य’ का विषय है, इसलिए दिल्ली सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह कोरोना वायरस वैक्सीन के देश भर में लॉन्च होने के बाद दिल्ली के लोगों का उचित टीकाकरण सुनिश्चित करे।

हालाँकि, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल मुफ्त में वैक्सीन प्रदान करने और केंद्र में जिम्मेदारी को स्थानांतरित करने के प्रयास के बारे में बहुत ज्यादा इच्छुक नहीं हैं। देश भर में मुफ्त टीके उपलब्ध कराने के मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ विपक्षी दलों के हमले के बीच केजरीवाल का गैर जिम्मेदाराना बयान आया है।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को आगामी चुनावों के लिए बिहार में भाजपा के घोषणापत्र को जारी करते हुए कहा कि बीजेपी बिहार में मुफ्त कोरोना वायरस टीके का वादा करती है। जिस तरह से दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने चुनाव से पहले फ्री पानी, फ्री बिजली का वादा किया था, उसी तरह बीजेपी ने फ्री टीका का वादा किया है।

उन्होंने कहा कि जब भी टीका उपलब्ध होगा, बिहार के लोगों को मुफ्त में दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट रूप से यह उल्लेख नहीं किया कि केवल बिहार के निवासी ही टीका प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे और यह तो निश्चित रूप से नहीं कहा था कि अन्य राज्यों को टीका नहीं मिलेगा।

हालाँकि, ट्रोल और कॉन्ग्रेस समर्थक ‘ऑनलाइन कार्यकर्ताओं’ ने भाजपा और केंद्रीय मंत्री पर हमला करने के लिए अपनी कोरी कल्पना का सहारा लिया। उनमें से कई लोगों ने COVID-19 के मुफ्त टीकाकरण देने के सरकार के कदम को को ‘क्रूर’ कदम बताया। अन्य विरोधियों ने यह कहकर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी कि टीका अन्य राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा या नहीं।

दरअसल, सच्चाई यह है कि चुनाव से पहले बिहार को केंद्र से खास तवज्जो नहीं मिल रही है। जब भी वैक्सीन विकसित होगी, केंद्र सभी राज्यों को वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी, फिर यह राज्य सरकारें तय करेंगी कि इसे मुफ्त में दिया जाए या लोगों से इसके लिए शुल्क लिया जाए।

टीकाकरण राज्य का विषय है। उन्होंने बताया कि अन्य सभी टीकाकरण कार्यक्रमों की तरह, केंद्र राज्यों को मामूली दर पर टीके प्रदान करेगा। इसमें भाजपा शासित और गैर-भाजपा शासित दोनों राज्य शामिल होंगे। फिर यह राज्यों पर निर्भर है कि वे टीके नि:शुल्क लगाएँ या इसके लिए शुल्क लें।

स्वास्थ्य ‘राज्य’ का विषय है और बिहार में बीजेपी ने सत्ता में आने पर नि:शुल्क टीका देने का वादा किया है। इसी तरह, गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल या तो सभी के लिए टीके मुफ्त करने का विकल्प चुन सकते हैं या फिर अपने नागरिकों से इसके लिए शुल्क ले सकते हैं।

केजरीवाल भी गैर- कमिटेड बयान देते हुए अन्य की तरह ही कोरोना वैक्सीन का राजनीतिकरण कर रहे हैं और यह दावा करते हुए केंद्र पर दोषारोपण कर रहे हैं कि उन्होंने मुफ्त में टीकाकरण प्रदान नहीं किया।

मुंबई: अस्पताल के शौचालय में मिला 14 दिन से लापता कोरोना मरीज का सड़ा हुआ शव

मुंबई में कोरोना वायरस को लेकर एक बेहद ही चौंकाने वाली घटना सामने आई है। मुंबई के सेवरी टीबी अस्पताल में 14 दिन से लापता एक 27 वर्षीय कोरोना संक्रमित मरीज की लाश अस्पताल के ही शौचालय में पाया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मरीज की पहचान सूर्यभान यादव के रूप में की गई है। 30 सितंबर को गोरेगाँव में एक डॉक्टर द्वारा रेफर किए जाने के बाद वह टीबी अस्पताल आए थे। जिसके बाद यादव को अस्पताल की पहली मंजिल पर कोरोना वायरस वार्ड में रखा गया था। हालाँकि, 4 अक्टूबर को अचानक वह वार्ड से लापता हो गए थे। यादव कोरोनो वायरस संक्रमण के अलावा टीबी से भी पीड़ित थे।

बता दें कि अस्पताल के रिकॉर्ड के मुताबिक मरीज का शव 14 दिनों के बाद टॉयलेट ब्लॉक से बरामद किया गया। शौचालय अन्य रोगियों द्वारा नियमित रूप से इस्तेमाल किया जाता था, इसके बावजूद किसी को इसकी खबर नहीं हुई। कथित तौर पर 14 दिन तक शौचालय में पडे़ रहने की वजह से मरीज का शव इतना खराब हो चुका था, कि उसके लिंग की पहचान करना भी मुश्किल हो गया था। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, 18 अक्टूबर तक किसी भी मरीज या कर्मचारी ने बदबू आने की शिकायत नहीं की।

खबरों के अनुसार, 18 अक्टूबर को अस्पताल के एक वार्ड बॉय ने शिकायत की कि उसे तीन बंद क्यूबिकल्स में से एक से बदबू आने का एहसास हुआ, उसके बाद दीवार फाँदकर देखने पर अंदर शव होने का पता चला। अस्पताल ने तुरंत पुलिस को घटना की सूचना दी, जिसके बाद शव को केईएम अस्पताल पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। वहीं फोरेंसिक विभाग के प्रमुख डॉ हरीश पाठक ने मरीज की मौत प्राकृतिक कारणों से होने की पुष्टि की है।

घटना के उजागर होने के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने इस मामले की जाँच के लिए निर्देश दिया है और अस्पताल के 40 से अधिक कर्मचारियों को नोटिस जारी किया है, जो विशेष वार्ड में काम कर रहे थे।

इस बीच वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक (आरएके मार्ग पुलिस स्टेशन) सुनील सोहोनी ने बताया, “हम अस्पताल के कर्मचारियों को पूछताछ के लिए बुलाएँगे ताकि यह समझ सके कि यह कैसे हुआ। साथ ही किसी प्रकार की हिंसा या अपराध का पता लगाने के लिए हमने मामले की तहकीकात भी शुरू की है।” यह भी बताया गया कि हाउसकीपिंग स्टाफ कोरोनावायरस वार्ड में प्रवेश करने या बाथरूम की सफाई करने से परहेज किया करते थे।

इस घटना पर बात करते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ ललित कुमार आनंदी ने कहा कि टीबी के मरीजों का अस्पताल से फरार होना आम बात है। उन्होंने दावा किया कि, जब उन्हें पता चला कि मरीज वार्ड से लापता है, जिसके बाद उन्होंने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। टीबी के मरीजों का अस्पताल से फरार होना आम बात है।

डॉ आनंद ने आगे कहा कि, “शौचालय को एक दिन में तीन बार साफ किया जाता है, लेकिन कभी-कभी मरीज इस पर अपना कब्जा जमा लेते हैं, इसलिए क्लीनर चला जाता है। लेकिन मरीज नियमित रूप से उन शौचालयों का इस्तेमाल करते है और उन्होंने शरीर के गलाने की गंध आनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर तैनात वार्ड में सभी कर्मचारियों को नोटिस जारी किया गया है।

शौचालय के अंदर मृत मिली थी कोरोना वायरस संक्रमित महिला

गौरतलब है कि इससे पहले महाराष्ट्र के जलगाँव के एक सरकारी अस्पताल से एक सप्ताह से लापता 82 वर्षीय कोरोनावायरस पॉजिटिव मरीज अस्पताल के ही एक शौचालय के अंदर मृत पाई गई थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 मई को बुजुर्ग महिला का कोरोनोवायरस रिपोर्ट पॉजिटिव आया था, जिसके बाद से उसका इलाज जलगाँव सिविल अस्पताल में चल रहा था। वहीं से वह 2 जून को लापता हो गई। महिला के लापता होने के बाद उसके रिश्तेदारों और अधिकारियों ने उसकी तलाश की लेकिन वह नहीं मिली। वहीं 8 दिन बाद अस्पलात के ही शौचालय से उसका शव बरामद किया गया था।

फैक्ट चेक: शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ का आरोप- सरकार सिर्फ बिहार को देगी मुफ्त COVID-19 वैक्सीन

शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में पार्टी ने भाजपा के खिलाफ नया झूठ फैलाया है। ‘सामना’ ने यह झूठ बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी द्वारा किए गए वादों में बिहार के लोगों के लिए कोरोना की वैक्सीन मुफ्त देने की घोषणा को लेकर फैलाया है।

भाजपा पर निशाना साधते हुए, ‘सामना’ के संपादकीय में आरोप लगाया गया कि यह COVID -19 वैक्सीन केवल बिहार के निवासियों के लिए उपलब्ध होगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार से सवाल किया गया है कि क्या देश के बाकी राज्य पाकिस्तान में हैं, जो उन्हें कोरोना वैक्सीन नहीं दी जाएगी?

शिवसेना ने आरोप लगाया कि देश के अन्य राज्यों में COVID-19 वैक्सीन नहीं मिलेगी

सामना के लेख में कहा गया, “भारतीय जनता पार्टी की असली नीति क्या है? उनका दिशा-निर्देशक कौन है? प्रधानमंत्री ने वादा किया कि टीका वितरण में जाति, धर्म, प्रांत, राजनीति नहीं होगी। लेकिन अब भाजपा नेताओं ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एक विचित्र कदम उठाया है। वे बिहार के निवासियों को मुफ्त वैक्सीन दे रहे हैं। बाकी राज्यों के नागरिक पाकिस्तान में नहीं रहते हैं।”

क्या अन्य राज्य को COVID-19 वैक्सीन नहीं मिलेगी?

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को आगामी चुनावों के लिए बिहार में भाजपा के घोषणापत्र जारी करते हुए कहा कि बीजेपी बिहार में मुफ्त कोरोना वायरस टीके का वादा करती है। जब भी टीका उपलब्ध होगा, बिहार के लोगों को मुफ्त में दिया जाएगा। हालाँकि केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट रूप से यह उल्लेख नहीं किया कि केवल बिहार के निवासी ही टीका प्राप्त करने के लिए पात्र होंगे और यह तो निश्चित रूप से नहीं कहा था कि अन्य राज्यों को टीका नहीं मिलेगा।

हालाँकि, ट्रोल और कॉन्ग्रेस समर्थक ‘ऑनलाइन कार्यकर्ताओं’ ने भाजपा और केंद्रीय मंत्री पर हमला करने के लिए अपनी कोरी कल्पना का सहारा लिया। उनमें से कई लोगों ने COVID-19 के मुफ्त टीकाकरण देने के सरकार के कदम को को ‘क्रूर’ कदम बताया। अन्य विरोधियों ने यह कहकर भ्रम की स्थिति पैदा कर दी कि टीका अन्य राज्यों को उपलब्ध कराया जाएगा या नहीं।

अमित मालवीय ने भ्रम को दूर किया

बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए बिहार को लेकर उन सभी मिथकों का खंडन कर दिया, जो बीजेपी के चुनावी वादे के बारे में आधे-अधूरे तरीके से सोशल मीडिया पर पेश किया जा रहा था।

उन्होंने कहा कि टीकाकरण राज्य का विषय है। उन्होंने बताया कि अन्य सभी टीकाकरण कार्यक्रमों की तरह, केंद्र राज्यों को मामूली दर पर टीके प्रदान करेगा। इसमें भाजपा शासित और गैर-भाजपा शासित दोनों राज्य शामिल होंगे। फिर यह राज्यों पर निर्भर है कि वे टीके नि:शुल्क लगाएँ या इसके लिए शुल्क लें। स्वास्थ्य राज्य का विषय है और बिहार में बीजेपी ने सत्ता में आने पर नि:शुल्क टीका देने का वादा किया है। इसी तरह, गैर-भाजपा शासित राज्यों जैसे दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल या तो सभी के लिए टीके मुफ्त करने का विकल्प चुन सकते हैं या फिर अपने नागरिकों से इसके लिए शुल्क ले सकते हैं।

संक्षेप में कहा जाए तो नागरिकों को मुफ्त टीकाकरण प्रदान करने या इसके लिए राशि वसूलने के लिए व्यक्तिगत निर्णय राज्य का होगा। वास्तव में, केंद्र चुनाव से पहले बिहार को कोई खास तवज्जो नहीं दे रहा बल्कि जब भी वैक्सीन विकसित होगी, केंद्र सभी राज्यों को वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी, फिर यह राज्य सरकारें तय करेंगी कि इसे मुफ्त में दिया जाए या लोगों से इसके लिए शुल्क लिया जाए।

हाथरस कांड में SIT के सदस्य DIG चंद्र प्रकाश की पत्नी ने लगाई फाँसी, तहकीकात में जुटी पुलिस

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज हैरान करने वाली घटना घटित हुई। जहाँ पुलिस उप महानिरीक्षक चंद्र प्रकाश की पत्नी ने कथित तौर पर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डीआईजी चंद्र प्रकाश की पत्नी पुष्पा प्रकाश ने सुशांत गोल्फ सिटी इलाके में आज शनिवार (अक्टूबर 24, 2020) सुबह करीब 11 बजे घर में फंदे से लटककर सुसाइड कर लिया।

खबरों के अनुसार, आनन-फानन में कुछ लोगों द्वारा डीआइजी की 36 वर्षीय पत्नी पुष्पा प्रकाश को लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहाँ पर डॉक्टरों ने चेकअप के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को कब्जे में ले लिया और जाँच शुरू कर दी है। पुष्पा प्रकाश की आत्महत्या लगाने की वजह अभी साफ नहीं हो पाई है और न ही मौके से सुसाइड नोट बरामद हुआ है।

हाथरस कांड में SIT के सदस्य हैं DIG चंद्र प्रकाश

2004-बैच के आईपीएस अधिकारी डीआईजी चंद्र प्रकाश वर्तमान में उन्नाव में तैनात हैं। वह यूपी के गृह सचिव भगवन स्वरूप की अध्यक्षता वाली उस तीन सदस्यीय एसआईटी के सदस्य भी हैं, जिसे हाथरस मामले के संबंध में गठित किया गया था।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के हाथरस में 19 साल की एक दलित लड़की का चार लोगों ने कथित तौर पर गला घोंटकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद पीड़िता की हालत बिगड़ने के बाद उसे दिल्ली के अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया जहाँ उसने दम तोड़ दिया। मरने से पहले उसने चार लोगों पर बलात्कार का आरोप लगाया था।

पीड़िता की मौत के बाद विपक्षी दलों ने अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए घटना को चुनावी मुद्दे की तरह इस्तेमाल किया। जहाँ जाति के नाम पर राजनेताओं द्वारा लोगों को बरगलाने का काम भी किया गया। मामले के बढ़ता देख और निष्पक्ष जाँच के लिए योगी सरकार ने आखिरकार अपराध की जाँच के लिए एक सीबीआई जाँच के निर्देश दिए।

गाली-गलौज करने पर महिला ने की मुंबई पुलिस की बीच सड़क पर पिटाई, संजय राउत ने कहा- प्रतिष्ठा का सवाल

एक महिला द्वारा मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेबल की पिटाई का वीडियो वायरल हो गया। इस वीडियो को देखने के बाद संजय राउत भड़क उठे और उन्होंने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। संजय राउत ने कहा कि ये मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा का सवाल है।

ट्विटर पर पिटाई का वीडियो वायरल

मुस्तफा शेख नाम के व्यक्ति ने महिला द्वारा कॉन्स्टेबल की पिटाई का वीडियो ट्विटर पर डाला। उन्होंने लिखा कि ये वीडियो कालबादेवी का है, जहाँ मुंबई ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेलबल की पिटाई की जा रही है। वीडियो में कॉन्स्टेबल अपनी वर्दी में दिख रहा है और एक महिला उसे कॉलर से पकड़े हुए है और थप्पड़ों की बरसात कर रही है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में मुस्तफा शेख ने बताया कि एलटी मार्ग पुलिस ने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को 30 वर्षीय साद्विका रमाकांत तिवारी को कलाबदेवी के सुरती होटल के पास ऑन ड्यूटी ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेबल एकनाथ परते के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार किया।

शिकायत के अनुसार, साद्विका रमाकांत तिवारी मोहसिन शेख (26) के साथ थी। हेलमेट नहीं पहनने की वजह से कॉन्सटेबल परते ने उन पर जुर्माना लगाया था। इसी बीच उनकी बहस शुरू हुई। देखते ही देखते महिला ने कॉन्सटेबल परते को वर्दी से पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। मामले के सह-आरोपित मोहसिन शेख मारपीट का वीडियो बनाते दिख रहे हैं।

साद्विका तिवारी इस वीडियो में कई बार ट्रैफिक सिपाही को थप्पड़ मारती हुई दिखाई दे रही हैं। महिला ने पुलिसवाले पर बदसलूकी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वो जुर्माना देने को तैयार थी, लेकिन पुलिसवाले ने बदसलूकी करनी शुरू कर दी। वहीं, पुलिस का कहना है कि महिला ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया। मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने हस्तक्षेप किया और परते को बचाया। तिवारी और शेख को गिरफ्तार कर थाने लाया गया।

संजय राउत का रिएक्शन

ये वीडियो देखते ही संजय राउत का गुस्सा आसमान पर पहुँच गया। उन्होंने इसे मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा से जोड़ा और मुंबई पुलिस, विश्वास नगर पुलिस के साथ ही राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख को मेंशन करते हुए तुरंत कार्रवाई की बात कही।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

ये वीडियो हजारों बार देखा जा चुका है। कुछ लोग इसे आपसी झगड़े से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ लोग मुंबई पुलिस की कथित बदसलूकी और अकर्मण्यता पर चुटकी ले रहे हैं।

महबूबा मुफ्ती को भगा-भगा कर पाकिस्तान क्यों भेजना चाहते हैं कश्मीर के जावेद कुरैशी, देखें Video

जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री व पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के तिरंगा न थामने के बयान पर अब जम्मू कश्मीर की आम जनता में इसकी नाराजगी देखने को मिल रही है। जहाँ एक तरफ स्थानीय हिंदू और मुस्लिम लोगों ने उनके बयान को लेकर विरोध प्रदर्शन किया वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में भाजपा नेता जावेद कुरैशी महबूबा मुफ्ती को भगा-भगा कर पाकिस्तान भेजने की बात कहते हुए नज़र आए।

सोशल मीडिया तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में देश के प्रति जावेद कुरैशी का देशप्रेम देखा जा सकता है। शुरुआती वीडियो में जावेद अपने कपड़े फाड़ते और महबूबा मुफ़्ती को चुनौती देते हुए बोलते हैं कि, “कपड़े फाड़ के, ये कपड़े फाड़ के… हिंदुस्तान कहाँ पर बसता है- (दिल की और इशारा करते हुए) दिल में, हिंदुस्तान कहाँ पर बसता है- दिल में, तिरंगे की इज्जत इस दिल में है। इस दिल से इस तिरंगे को कोई निकल नहीं सकता है। मैं कहना चाहता हूँ, अगर आपने (महबूबा मुफ्ती) दोबारा ऐसी कोशिश की ऐसे बयान देने की तो मैं आपको भगा-भगा के पाकिस्तान भेज दूँगा और आप तैयारी कीजिए, पाकिस्तान जाने की। आप इस बात को गोल कर के रखो, मैं जावेद कुरैशी आपको कहता हूँ कि आपको मैं खोटी सियासत यहाँ पर नहीं करने दूँगा।”

गौरतलब है कि महबूबा मुफ्ती ने शुक्रवार (अक्टूबर 23, 2020) को श्रीनगर में अपने आवास पर हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि जब तक उनका झंडा (जम्मू कश्मीर का पुराना झंडा) वापस नहीं मिल जाता, तब तक वह दूसरा झंडा (तिरंगा) नहीं उठाएँगी। मुफ्ती ने कहा कि उनका झंडा डाकुओं ने ले लिया है।

मुफ्ती ने कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “जब तक केंद्र सरकार हमारे हक (अनुच्छेद 370) को वापस नहीं करते हैं, तब तक मुझे कोई भी चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं है।” उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करने तक उनका संघर्ष खत्म नहीं होगा। वह कश्मीर को पुराना दर्जा दिलवाने के लिए जमीन आसमान एक कर देंगी।

पूरे भारत पर निशाना साधते हुए महबूबा मुफ्ती ने कहा कि भारत सिर्फ़ जम्मू कश्मीर की जमीन चाहता है उसके लोगों को नहीं। इसलिए वह अनुच्छेद 370 के दोबारा बहाल होने तक कोई झंडा नहीं उठाएँगी। उन्होंने पत्रकारों के सामने कहा कि देश के झंडे से उनका संबंध इस झंडे (जम्मू कश्मीर के पुराने) की वजह से है। अब जब पुराना झंडा हाथ में आएगा तभी वह उस झंडे को भी उठाएँगी।

उल्लेखनीय है कि देश के तिरंगे झंडे को लेकर मुफ्ती द्वारा दिए गए विवादित बयान ने हंगामा मचा दिया है, जिसकी बीजेपी के साथ-साथ कॉन्ग्रेस ने भी निंदा की। वहीं तिरंगा न उठाने का विवादित बयान देने वाली महबूबा मुफ्ती के खिलाफ एफआईआर की माँग को लेकर पुलिस कमिश्नर को शिकायत भेजी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील विनीत जिंदल की ओर से पुलिस कमिश्नर को भेजी शिकायत में कहा गया कि महबूबा मुफ्ती ने राष्ट्रीय ध्वज का अपमान किया है, लोकतांत्रिक तरीक़े से चुनी सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काया है। उनके खिलाफ नेशनल ऑनर एक्ट और धारा 121, 151, 153A, 295, 298, 504 और 505 के तहत FIR दर्ज होनी चाहिए।