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भारत आग के साथ खेल रहा है: चीनी दूतावास के सामने ताइवान के पोस्टर देख भड़का चीनी भोंपू ग्लोबल टाइम्स

ताइवान आज (अक्टूबर10, 2020) अपना ‘राष्ट्रीय दिवस’ मना रहा है। इस ख़ास दिन की झलक राजधानी दिल्ली स्थित चीनी दूतावास के सामने भी नज़र आई। भारत में चीनी दूतावास के सामने ‘हैप्पी नेशनल डे’ (ताइवान) के पोस्टर लगे हुए थे, यह पोस्टर भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता तेजिंदर पाल बग्गा द्वारा लगवाए गए थे। उन्होंने खुद अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस पोस्टर की तस्वीर ट्वीट की थी। 

इन पोस्टर की तस्वीरों के सुर्ख़ियों में आने के बाद चीनी सरकार ने अपने मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ के ज़रिए इस पर प्रतिक्रिया दी है। इस से झुँझलाए चीनी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने कहा, “नई दिल्ली में चीनी दूतावास के सामने ताइवान को राष्ट्रीय दिवस की बधाई देते हुए सैकड़ों पोस्टर लगाए गए हैं। पोस्टर में भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा का नाम लिखा हुआ है। यह आग से खेलने जैसा है। इस तरह की गतिविधियों का दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों पर बुरा प्रभाव पड़ने वाला है।”  

इसके अलावा ‘सेंटर फॉर एशिया पैसिफिक स्टडीज़’ के निदेशक ज्हाओ गनचेंग (Zhao gancheng) ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “चीन की ‘वन चाइना नीति’ का उपहास करके भारत आग के साथ खेल रहा है। भारत सरकार वन चाइना नीति को स्वीकार करती है लेकिन वहाँ होने वाली मीडिया कवरेज, अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर अक्सर इसका मज़ाक बनाती है। यह भारत और चीन के रिश्तों के लिए बिलकुल भी अच्छा नहीं है।” 

इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल रिलेशन ऑफ़ शंघाई एकेडमी ऑफ़ सोशल साइंसेज के शोधार्थी हू जियोंग (Hu zhiyong) ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा, “भाजपा की राष्ट्रवादी सरकार चीन और भारत रिश्तों की आड़ में ताइवान मुद्दे पर चीन को उकसा रही है। अब इस मामले में भारत सरकार चीन द्वारा तय की गई सीमाएं पार कर चुकी है। भारत सरकार को ऐसा लगता है कि वह ताइवान कार्ड खेल कर चीन का सामना कर लेगी लेकिन ऐसा नहीं है। इस तरह के उकसावे से भारत को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है। बल्कि इस तरह की कोशिशों से दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी पर ही नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।”

हालाँकि तमाम बातों और विवादों के बीच ताइवान की राष्ट्रपति त्साई इंग वेन (Tsai Ing-wen) ने राष्ट्रीय दिवस की शुभकामनाएँ दी। इसके अलावा उन्होंने कई ट्वीट करते हुए लिखा कि उन्हें अपने देश और यहाँ के लोगों पर गर्व है।

गौरतलब है कि चीन की नाराजगी उन देशों से रहती है जी ताइवान से दोस्‍ताना संबंध रखते हैं। भारत के सम्बन्ध भी ताइवान के साथ बेहतरीन रहे हैं। इसी बीच ताइवान के राष्ट्रीय दिवस पर भाजपा नेता तजिंदर पाल बग्गा द्वारा दिल्‍ली में चीनी दूतावास के बाहर ताइवान को बधाई देते पोस्‍टर्स लगाए गए। इन पर ‘ऑक्‍युपाइड मेनलैंड चीन’ का नक्‍शा बना है और बड़े अक्षरों में ताइवान के नीचे ‘हैप्‍पी नैशनल डे’ लिखा है।

ताइवान को अपना हिस्सा मानता है चीन

उल्लेखनीय है कि विस्तारवादी चीन, ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और भारतीय मीडिया को नसीहत देता रहा है कि ताइवान को अलग देश न पुकारे। चीन चाहता है कि पूरी दुनिया उसे उसके ही हिस्से के तौर पर स्वीकार करे। खास बात यह है कि ‘वन चाइना’ की दुहाई देने वाला चीन लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने को ‘अवैध’ बताता आया है, जो भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता का अपमान है।

ग्लोबल टाइम्स के हवाले से चीन की तरफ से ऐसी प्रतिक्रिया आने के बाद कई ट्विटर यूज़र्स ने भी ग्लोबल टाइम्स के इस ट्वीट का जवाब दिया। 

एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, “चीन और ग्लोबल टाइम्स को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे (विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस) की शुभकामनाएँ।”

एक और ट्विटर यूज़र ने लिखा, “भारत आज़ाद चीन और आज़ाद ताइवान में भरोसा करता है। चीन अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख पर अक्सर अपनी बात रखता है, वैसे ही हम भी अपनी बात रख रहे हैं। हम तिब्बत को भी आज़ाद देश के तौर पर देखना चाहते हैं, आने वाले समय में इस तरह के कई बदलाव होंगे। 

एक ट्विटर यूज़र ने सोशल मीडिया की एक चर्चित तस्वीर साझा की। 

वहीं एक और ट्विटर यूज़र ने लिखा, “हम सभी ताइवान के राष्ट्रीय दिवस की ख़ुशी मना रहे हैं। भारत ताइवान से लगाव रखता है और उसका सम्मान करता है। इन दोनों देशों की दोस्ती लंबे समय तक बनी रहे।” 

बीते 7 अक्टूबर को चीन और ताइवान के बीच इस मुद्दे को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई थी। दरअसल चीन ने भारतीय मीडिया को कहा था कि उसे ‘वन चाइना नीति’ का पालन करना चाहिए। चीन के मुताबिक़ भारतीय मीडिया द्वारा ताइवान को एक अलग देश कहना गलत है। चीन का कहना था कि ताइवान को राष्ट्र (देश), चीनी गणतंत्र (रिपब्लिक ऑफ़ चाइना) या चीन स्थित ताइवान के किसी नेता को राष्ट्रपति के तौर पर प्रचारित नहीं किया जाए। इससे आम लोगों के बीच गलत संदेश जाता है।

चीन द्वारा यह निर्देश जारी किए जाने के बाद ताइवान ने भी अपनी तरफ से प्रतिक्रिया जारी की। बुधवार को ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ़ वू ने कहा कि वह आशा करते हैं कि भारतीय मीडिया चीन को एक जवाब देगी, “Get Lost” (दफ़ा हो जाओ)।

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने पूरे जवाब में लिखा, “भारत पूरे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है जहाँ की प्रेस – मीडिया और आम लोग स्वच्छंद अभिव्यक्ति पसंद लोग हैं। ऐसा लगता है कि वामपंथी चीन सेंसरशिप थोप कर महाद्वीप में दखल देना चाहता है।” 

हैदराबाद: पूजा के दौरान भजन बजाने पर ईसाई पड़ोसी ने महिला पर किया हमला, सिर में गहरी चोट

हैदराबाद में अपने घर के अंदर बने मंदिर में पूजा करने एवं भजन बजाने पर एक 29 वर्षीय महिला के ऊपर ईसाई पड़ोसी ने हमला कर दिया। घटना शुक्रवार (अक्टूबर 9, 2020) की है।

हैदराबाद के अतापुर इलाके में पूजा के दौरान भजन बजाने को लेकर दो पड़ोसियों के बीच झड़प हो गई। 29 वर्षीय महिला कविता और उसकी माँ पर उनके ईसाई पड़ोसी येशु ने हमला कर दिया। पड़ोसियों ने कविता और उनकी माँ को लोहे की छड़ से मारा। कविता के सिर में गहरी चोट लगी है।

पुलिस के अनुसार, हैदराबाद के राजेंद्र नगर की रहने वाली कविता, प्रतिदिन अपने घर के अंदर बने तुलजा भवानी मंदिर में पूजा करती थी। इसी दौरान भजन बजाने पर उनका पड़ोसी के साथ झड़प हो गया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि इलाके के अन्य लोगों को भी कविता के लाउडस्पीकर पर भजन बजाने से परेशानी थी।

ऑपइंडिया से बात करते हुए हैदराबाद पुलिस ने कहा कि इलाके के लोगों ने इसके बारे में पुलिस को सूचित किया। गश्त कर रही पुलिस की एक टीम ने कविता के घर का दौरा किया और महिला से लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं करने को कहा।

शिकायत के बाद लाउडस्पीकर के मुद्दे पर महिला और उनके पड़ोसी येशु के बीच बहस छिड़ गई। येशु अपने परिवार के साथ कविता के घर में घुस गया और लोहे की छड़ से हमला कर दिया।

यह पूर्व नियोजित हमला है, पड़ोसी नहीं चाहते थे कि हम पूजा करें

इस बीच, पीड़ित कविता ने कहा कि उनके पड़ोसी को इससे लंबे समय से समस्या थी। पड़ोसी ने घर के अंदर बने मंदिर में उनके पूजा करने पर आपत्ति जताई थी। कविता ने आरोप लगाते हुए कहा, “यह हमारे खिलाफ पूर्व नियोजित हमला था। हमारे ईसाई पड़ोसी एक साल से अधिक समय से हमारे खिलाफ साजिश रच रहे थे।”

पीड़िता ने कहा कि येशु ने अपने पिता और माँ के साथ मिलकर न केवल उनकी, बल्कि उनकी 55 वर्षीय माँ की भी पिटाई की। उन्होंने कहा कि पूजा करने और भजन बजाने के लिए पड़ोसी हर दिन उन्हें गंदी-गंदी गालियाँ देते थे।

कविता ने बताया कि येशु और उसका परिवार उनके घर में बने तुलजा भवानी मंदिर में पूजा-पाठ करने, विशेष कर घंटी बजाने पर आपत्ति जताते हुए झगड़ा कर रहे थे। वो लोग इस झगड़े को सामान्य रूप से ले रहे थे।

कविता ने आगे कहा, “बाकी दिनों की तरह जब मैं आज सुबह अपने घर पर पूजा कर रही थी, तो घंटी की आवाज सुनकर येशु ने अपने पिता और माँ के साथ मुझे और मेरी 55 वर्षीय माँ को बेरहमी से पीटा। मुझे अपने सिर पर नौ टाँके लगवाने पड़े। उन्होंने जान-बूझकर झगड़ा किया और फिर बाद में मुझे पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने बंदूक और फावड़े से मुझ पर हमला किया।”

हमलों की पुष्टि करते हुए, पुलिस ने कहा कि उन्होंने महिला पर हमला करने के लिए पड़ोसी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। उन्होंने आगे कहा कि वे मामले में दोषी को गिरफ्तार करेंगे। बता दें कि येशु के खिलाफ राजेंद्रनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है।

हाथरस: दिल्ली पुलिस व खुफिया विभाग से मिली थी दंगे भड़काने की साजिश की जानकारी, UP पुलिस ने दायर किया हलफनामा

हाथरस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रहीं सुनवाई के बीच यूपी पुलिस ने शीर्ष अदालत में एक हलफनामा दायर किया है। दायर हलफनामे में यूपी पुलिस ने दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए हाथरस मामले को विपक्ष की सोची समझी साजिश बताया है।

यूपी पुलिस द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि कुछ राजनीतिक दलों के पदाधिकारी पीड़िता की मौत के तुरंत बाद सफदरजंग अस्पताल पहुँचे और परिवार को उकसाते हुए कहा कि जब तक उनकी माँगे पूरी नहीं होती, तब तक वे शव नहीं लेंगे।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 29 सितंबर की खुफिया विभाग की एक रिपोर्ट भी हलफनामें में संलग्न की है। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि वाल्मीकि समुदाय, भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी से जुड़े संगठन बड़ी संख्या में हाथरस में इकट्ठा होकर विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं, जो हिंसक मोड़ ले सकता है।

इसके अलावा, हलफनामे में उत्तर प्रदेश पुलिस ने दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले के डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस द्वारा गृह विभाग, टुर्न गाबा के सचिव को 4 अक्टूबर को भेजी गई एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि जैसे ही मृतक का पोस्टमार्टम शुरू हुआ, दलित नेता उदित राज, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्र शेखर आजाद, कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद पीएल पुनिया और उनके समर्थकों सहित बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होने लगे। इसके बाद AAP विधायक राखी बिड़ला ने विरोध शुरू कर दिया। पुलिस ने उनसे शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वहाँ मौजूद लोग मृतका के परिजनों को भड़का रहे थे कि जब तक उनकी न्याय की माँग पूरी नहीं हो जाती, तब तक वे पीड़िता का शव न लें। कुछ प्रदर्शनकारी माँग कर रहे थे कि मुख्यमंत्री को अस्पताल आना चाहिए और परिवार को आश्वासन देना चाहिए। परिवार इन नेताओं के प्रभाव में था और भीड़ ने परिवार को घेर लिया। यहाँ तक की पुलिस अधिकारियों को भी परिवार से बात नहीं करने दी गई।

यूपी पुलिस ने 29 सितंबर को एसपी, कानून व्यवस्था द्वारा साझा की गई एक खुफिया रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि हाथरस पीड़िता का शव आते ही, परिवार, समर्थक और राजनीतिक संगठन उसका शव लेने और दाह संस्कार करने से इनकार कर सकते हैं।

ऐसी जानकारी मिली हैं कि वे पीड़िता के शव को सड़क पर रखकर हिंसक विरोध प्रदर्शन कर सकते थे। इसके अलावा, वे प्रदर्शन की आड़ में पथराव और बवाल भी कर सकते हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि प्रदर्शनकारी गाड़ियों को रोक सकते हैं, पुतले जला सकते हैं और हंगामा कर सकते हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि प्रदर्शनकारी गाड़ियों को रोक सकते हैं, पुतले जला सकते हैं और हंगामा कर सकते हैं। मूल रूप से रिपोर्ट्स में इस बात की चेतावनी दी गई थी कि, हाथरस की घटना पर अशांति फैलाने के लिए एक साजिश रची जा रही थी। रिपोर्ट से मिली जानकारी के आधार पर यूपी पुलिस ने 19 एफआईआर दर्ज कीं।

एफआईआर में 700 लोगों के नाम हैं, जिन पर हिंसक घटना में साजिश रचने का आरोप है। इसी तरह के कारणों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले को उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जाँच का आदेश दिया था।

राजस्थान: पुजारी ने मरने से पहले बताया जलाने वाले का नाम, फिर भी आत्मदाह बताती रही पुलिस; जमीनी विवाद को जातीय रंग देने की कोशिश

राजस्थान के करौली जिला स्थित सपोटरा तहसील के बूकना गाँव में पुजारी बाबूलाल वैष्णव की मौत के मामले ने प्रदेश में हलचल मचा दी है। मामला वैसे तो सिर्फ एक जमीन से जुड़े विवाद का है, लेकिन यह मामला जिस जातीय विवाद की ओर जाता दिख रहा है, उसे रोका नहीं गया तो बात बिगड़ सकती है। जातीय विद्वेष की आग कई जगह फैलाने की कोशिशें चल रही है। ऐसे में यह मामला बाहरी तत्वों के हाथ में ना जाए- इसकी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और पुलिस की ही नहीं, वहाँ के स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी है।

हालाँकि पूरे मामले में पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। ‘दैनिक भास्कर’ की खबर के अनुसार, प्रशासन इस मामले को शुरुआत में ‘आत्मदाह’ बताती रही। पुजारी ने मौत से पहले ही आरोपित कैलाश का नाम ले लिया था, बावजूद इसके उसे गिरफ्तार करने में पुलिस ने 24 घंटे का समय लगा दिया। लोगों की माँग है कि इस मामले के जाँच अधिकारी को भी हटाया जाए। शाम 6 बजे पुजारी का शव गाँव पहुँचा, जिसके बाद पीड़ित परिजनों ने दाह संस्कार से इनकार कर दिया।

करौली की सपोटरा तहसील का बूकना गाँव करीब 5000 की आबादी वाला है। यहाँ एक राधाकृष्ण का मंदिर है, जो करीब 200 साल पुराना बताया जाता है। गाँव में 70 प्रतिशत लोग मीणा हैं। गाँव की पंचायत में भी इस इस समुदाय के कई लोग शामिल हैं। बूकना गाँव के इस मंदिर की सेवा पूजा काफी वर्षों से बाबूलाल वैष्णव ही करते आ रहे थे। यह मंदिर इस गाँव का ही नहीं, बल्कि आसपास के कई गाँवों की आस्था का केन्द्र है।

बूकना के पुजारी की गुजर-बसर के लिए गाँव के ही लोगों ने कुछ जमीन मंदिर के नाम कर रखी थी। इसी जमीन से सटती हुई कुछ जमीन और है, जो कुछ समय पहले तक एक पहाड़ी जैसी थी। मंदिर के पुजारी को वह जमीन उपयोगी लगी तो उन्होंने उसे समतल करवा लिया और गाँव की पंचायत बुला कर यह जमीन भी मंदिर के नाम कराने की सहमति ले ली। गाँव की पंचायत ने एकमत हो कर यह जमीन मंदिर के नाम करवा देने की सहमति दे दी।

पंचायत में कैलाश मीणा के परिवार ने इस फैसले का विरोध किया, लेकिन पंचों ने पुजारी के पक्ष में फैसला दिया। सात अक्टूबर को कैलाश मीणा और उसके परिवार के कुछ लोग जब इस समतल की हुई जमीन पर कब्जा करने पहुँचे तो पुजारी ने इसका विरोध किया और कहा कि पंचायत जमीन मंदिर को दे चुकी है तो अब तुम कब्जा क्यों कर रहे हो। इस बात को लेकर दोनो के बीच विवाद हुआ और गर्मागर्मी में ही कैलाश मीणा और इसके साथियों ने बाबूलाल वैष्णव पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी।

पुजारी के परिवार वालों और गाँव वालो ने उन्हें अस्पताल पहुँचाया, जहाँ से उन्हें जयपुर रेफर कर दिया गया और शुक्रवार यानी नौ अक्टूबर को उपचार के दौरान पुजारी की मौत हो गई। इस घटना के एक तथ्य में असमंजस है कि पुजारी ने स्वयं आत्मदाह किया अथवा कैलाश और उसके समर्थकों ने जलाया या कैलाश मीणा जो छप्पर बना रहे थे, बाबूलाल वैष्णव उसको आग लगाने गए और उसमें झुलस गए ।

गाँव से जुड़े लोग बताते हैं कि यह घटना सिर्फ एक जमीनी विवाद है और बिल्कुल अचानक हुई है। आरोपित कैलाश का परिवार भी गाँव का दबंग या रसूखदार परिवार नहीं है, बल्कि एक सामान्य परिवार है। परिवार या आरोपित का कोई अपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं बताया जाता है। आरोपित कैलाश मीणा पुलिस की गिरफ्त में आ भी गया है और जिले के पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा का कहना है कि पहले मामला धारा 307 में दर्ज किया गया था, लेकिन पीड़ित की मृत्यु के बाद धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है। बाकी आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई गई हैं और वे भी जल्द ही पकड़ में आ जाएँगे।

कानून-व्यवस्था की दृष्टि से तो यह मामला निश्चित रूप से सरकार की विफलता को दिखाता है और कहीं ना कहीं यह सामने आता है कि लोगों में कानून का डर खत्म होता जा रहा है। प्रदेश की प्रतिपक्षी पार्टी भाजपा इसी को मुद्दा भी बना रही है। पिछले कई दिनों से प्रदेश में जिस तरह से अपराधिक मामले सामने आ रहे हैं, उसी कड़ी में इस मामले ने भाजपा को सरकार के खिलाफ एक और बड़ा मुददा दे दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियाँ, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ही नहीं, केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह राठौड़ तक ने इस मामले पर सरकार को घेरा है।

पार्टी की ओर से एक जाँच दल भी गठित कर घटनास्थल पर भेजा गया है। वहीं खुद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है और कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। राजनीतिक आरेाप-प्रत्यारोप अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन सामाजिक दृष्टि से देखा जाए तो यह बहुत नाजुक मामला है। गाँव के लोग आरोपित के जाति से भले ही हैं, लेकिन पूरा गाँव और गाँव की पंचायत पुजारी के साथ दिख रही है। बूकना के सरपंच और अन्य पंच पुजारी के परिवार को मुआवजा देने और आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे है।

स्थानीय विधायक रमेश मीणा ने भी इस घटना की निंदा की है और पीड़ित परिवार को सहायता देने की बात कही है। ऐसे में पुलिस और प्रशासन ही नहीं, बल्कि स्थानीय जनप्रतिनिधियो और स्वयं ग्रामीणों का इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि यह मामला ग्राम स्तर पर ही निपट जाए। मामले की निष्पक्ष जाँच हो और पीड़ित परिवार की सुरक्षा व मुआवजे की पूरी व्यवस्था कर दी जाए।

इस मामले में बाहरी तत्वों का हस्तक्षेप हो गया तो यह मामला गलत दिशा में चला जाएगा। प्रदेश जातीय विद्वेष की आग को हाल में डूंगरपुर में देख चुका है। ऐसे तत्व पूरे देश में इन मामलों अलग-अलग तरह से हवा दे रहे हैं। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय समाज की सतर्कता बहुत जरूरी है। विशेषकर युवाओं के बीच ऐसे तत्व सक्रिय ना हों, इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

इसमें कोई शक नहीं है कि पुजारी बाबूलाल वैष्णव की बहुत दुःखद मौत हुई है, इसलिए उनके परिवार की जो सहायता चाहिए, वह जरूर मिले, लेकिन यह मामला इससे आगे नहीं बढ़े, अन्यथा स्थितियाँ भविष्य के लिए गम्भीर हो सकती हैं।

UP: योगी सरकार का ‘शेरनी दस्ता’, एंटी रोमियो स्क्वायड के साथ मनचलों को लगाएगी ठिकाने

उत्तर प्रदेश में महिलाओं के साथ बढ़ती आपराधिक घटनाओं को लेकर योगी सरकार ने एक अहम ऐलान किया है। महिलाओं और लड़कियों के साथ छेड़छाड़ करने वालों पर कार्रवाई के लिए ‘शेरनी दस्ता’ बनाया जाएगा। इसके पहले प्रदेश में एंटी रोमियो स्क्वायड भी तैनात किया गया था। शेरनी दस्ते को सार्वजनिक स्थानों जैसे बाज़ार, मॉल और धार्मिक स्थलों पर तैनात किया जाएगा। 

हिन्दुस्तान लाइव द्वारा प्रकाशित ख़बर के अनुसार बड़े शहरों के भीड़ वाले चौराहे, प्रमुख धार्मिक स्थल, मॉल, बाज़ार, एटीएम समेत ऐसी हर जगहें जहाँ महिलाओं का आवागमन जारी रहता है, शेरनी दस्ते को तैनात किया जाएगा। गोरखपुर के एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने शेरनी दस्ते के लिए ड्यूटी चार्ट बनाने का निर्देश जारी कर दिया है। इस चार्ट को बहुत जल्द लागू भी कर दिया जाएगा। 

कोरोना महामारी के दौर में बाज़ार और सार्वजनिक स्थानों पर आम जनजीवन सामान्य हो रहा है। भीड़ वाले इलाकों में लोग वापस इकट्ठा हो रहे हैं। नवरात्र का त्योहार भी निकट है। विद्यालयों को खोले जाने की तैयारियाँ भी शुरू हो चुकी हैं। इन सभी बातों को मद्देनज़र रखते हुए योगी सरकार ने यह कदम उठाया है। प्रदेश में महिलाओं के साथ होने वाले अपराध की दर कम करने के लिए शेरनी दस्ते को तैनात किया जा रहा है।

शेरनी दस्ता सुबह 10 बजे से लेकर रात के लगभग 8:30 बजे तक निर्धारित सार्वजनिक स्थलों पर तैनात रहेगा। दो घंटे के निश्चित अंतराल पर शेरनी दस्ते की मूल लोकेशन भी ली जाएगी। 

एसएसपी द्वारा जारी किए गए ड्यूटी चार्ट में इस बात का विस्तार से उल्लेख है कि शेरनी दस्ते में तैनात महिला सिपाहियों को किस प्रकार कार्रवाई करनी है। आदेश में महामारी के दौर में महिला सिपाहियों को खुद की सुरक्षा और बच्चों से सम्बंधित आपराधिक मामलों को सँभालने से जुड़ी बातों का भी ज़िक्र है। 

साथ ही एंटी रोमियो स्क्वायड के साथ किस तरह तालमेल बैठाना है, घटना में किन धाराओं के तहत कार्रवाई करनी है और विपरीत हालातों में साधन (स्कूटी) खराब हो जाने पर क्या करना है, इस तरह के तमाम पहलुओं पर जानकारी दी गई है। घटना के दौरान वायरलेस या हथियार (लाठी) के प्रयोग के सम्बंध में भी महिला सिपाहियों 3 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा चुका है।    

फादर स्टेन स्वामी के साथ कॉन्ग्रेस-झामुमो, भीमा-कोरेगाँव हिंसा में ‘एक्टिविस्ट पादरी’ को NIA ने किया है गिरफ्तार

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अब भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले में आरोपित पादरी स्टेन स्वामी के समर्थन में उतर आए हैं। स्टेन स्वामी को NIA ने हिरासत में लिया है। हेमंत सोरेन ने पूछा, “गरीब, वंचितों और आदिवासियों की आवाज़ उठाने’ वाले 83 वर्षीय वृद्ध ‘स्टेन स्वामी’ को गिरफ्तार कर केंद्र की भाजपा सरकार क्या संदेश देना चाहती है?” साथ ही कहा है, “अपने विरोध की हर आवाज को दबाने की ये कैसी जिद?“

कई कांग्रेस नेता भी स्टेन स्वामी के बचाव में आ गए हैं। झारखंड कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सह राज्य के वित्त तथा खाद्य आपूर्ति मंत्री डॉ. रामेश्वर उराँव ने कहा कि फादर स्टेन स्वामी को ‘अर्बन नक्सलवाद’ के नाम पर गिरफ्तार किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मोदी सरकार पर देश के विभिन्न हिस्से में रहने वाले बुद्धिजीवियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि स्टेन स्वामी 25 वर्षों से राँची में जनजातीय वर्ग के उत्थान में जुटे हैं।

डॉक्टर उराँव ने कहा कि स्टेन स्वामी को फँसाने की साजिश रची गई है। ‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, प्रदेश कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता आलोक कुमार दुबे ने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न जाँच एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। राज्य में पार्टी के एक अन्य प्रवक्ता लाल किशोरनाथ शाहदेव ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को कम किया जा रहा है, जिसका परिणाम आने वाले दिनों में देश की जनता को भुगतना पड़ेगा।

राजेश गुप्ता छोटू और आदित्य विक्रम जायसवाल सहित झारखण्ड के कई कॉन्ग्रेस नेताओं ने स्टेन स्वामी का समर्थन किया है। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस पार्टी के लोग खुल कर भीमा-कोरेगाँव के आरोपितों का समर्थन करते आए हैं। वामपंथी पार्टियाँ और नेतागण पहले से ही कहते आ रहे हैं कि सरकार भीमा-कोरेगाँव मामले में ‘एक्टिविस्ट्स को फँसा’ रही है। हालाँकि, इनमें से कई के खिलाफ चार्जशीट दायर हो चुकी है।

कई कैथोलिक संस्थाएँ और तथाकथित एक्टिविस्ट्स पहले से ही विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और स्टेन स्वामी की गिरफ़्तारी को NIA की ‘एकतरफा कार्रवाई’ बता रहे हैं। इन सभी ने झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की भी माँग की है। 2000 ‘बुद्धिजीवियों’ ने इसे मोदी सरकार का ‘विच हंट’ करार दिया है। वहीं झारखंड पुलिस ने मीडिया से कहा कि वो सारे सवाल NIA से पूछे, पुलिस से नहीं।

ज्ञात हो कि फादर स्टेन स्वामी पर दो साल पहले महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगाँव में हुई हिंसा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश रचने में संलिप्तता का आरोप है। बताया जा रहा है कि स्टेन स्वामी पर भीमा-कोरेगाँव मामले में एनआईए ने आतंकवाद निरोधक क़ानून (यूएपीए) की धाराएँ भी लगाई गई हैं। एनआईए की एक टीम ने नामकुम स्टेशन परिसर में फादर स्टेन स्वामी को गिरफ्तार किया था।

हाथरस: घूँघट काढ़े ‘भाभी’ बन नक्सली रह रही थी मृतका के घर, ‘ठाकुरों की बेटियों के रेप’ की दी थी धमकी

हाथरस मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है। ‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, एक महिला पीड़ित परिवार में मृतका की ‘भाभी’ बन कर रह रही थी और परिवार की तरफ से बयान भी दे रही थी। इसके बाद से हाथरस मामले का नक्सली कनेक्शन सामने आ रहा है। बताया जा रहा है कि उक्त ‘भाभी’ सितम्बर 16 से 22 तारीख तक परिवार के साथ रही और इस दौरान अपने नक्सली आकाओं से भी संपर्क में थी।

हालाँकि, हमारे सूत्रों का कहना है कि वो काफी समय से पीड़ित परिवार के साथ रह रही थी और उसके वहाँ रहने की अवधि का कोई सटीक विवरण उपलब्ध नहीं हो पाया है। कहा जा रहा है कि वो घटना के दो दिन बाद ही पीड़ित परिवार के पास आ गई थी। फोरेंसिक रिपोर्ट्स में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई थी। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक SIT का गठन किया था, जो इस मामले की जाँच कर रही है।

SIT के अनुसार, उक्त महिला मध्य प्रदेश के जबलपुर की रहने वाली है और वो मृतका की असली भाभी के साथ लगातार संपर्क में थी। इसका खुलासा तब हुआ, तब SIT ने जाँच के लिए पीड़िता की भाभी के फोन कॉल रिकॉर्ड्स को खँगाला। अब नक्सली महिला को गिरफ्तार करने के लिए SIT ने तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। मृतका की नकली ‘भाभी’ और असली भाभी आपस में लगातार संपर्क में थी।

नक्सली महिला भाभी बन कर घूँघट के भीतर रहती थी, जिससे उसे कोई पहचान भी न सके। इस मामले में ‘लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU)’ ने पहले ही पाया था कि हाथरस मामले को लेकर दंगा भड़काया जा सकता है। अब SIT इस मामले में दो एंगल से जाँच कर रही है- एक हत्या का और दूसरा इस केस द्वारा सांप्रदायिक दंगे की बड़ी साजिश का। इस मामले में बड़ी फंडिंग के भी संकेत मिले थे।

SIT अब इस बात की जाँच कर रही है कि उक्त नक्सली महिला ने पीड़ित परिवार के साथ रहने के लिए उसे प्रलोभन दिया था, या फिर डराया-धमकाया था। साथ ही इस बात की भी जाँच की जा रही है कि नक्सली महिला उर्फ़ ‘नकली भाभी’ ने पीड़ित परिवार का ब्रेनवॉश कर के उन्हें कहीं ये तो नहीं विश्वास दिला दिया था कि स्थानीय प्रशासन और अन्य जाति के लोग उनका जीवन मुश्किल कर देंगे और वे उनके दुश्मन हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ‘भाभी’ ने क्षत्रिय समुदाय की लड़कियों के बलात्कार की भी धमकी दी थी। ‘इंडिया टीवी’ से उसने कहा था कि क्षत्रिय समुदाय की 2-4 लड़कियों को लाकर ‘उनके’ पुरुषों के साथ 6 दिन के लिए छोड़ दिया जाए। साथ ही कहा था कि वो पंचायत की तरफ से तुरंत निर्णय दे देंगी- जो उनके घर की बेटी के साथ हुआ, वही क्षत्रियों की लड़कियों के साथ भी होना चाहिए। ‘भाभी’ ने कहा था, “अपनी लड़कियों को यहाँ छोड़ो, फिर देखो।“

‘भाभी’ ने कहा था कि परिजनों को उनकी बेटी का अंतिम दर्शन भी नहीं करने दिया गया, वो लोग भी ‘ठाकुरों की बेटियों’ के साथ भी यही कर के उन्हें सबक सिखाएँगे। बता दें कि कॉन्ग्रेस पार्टी सहित कई अन्य दलों के नेता लगातार इस मामले को जातिवादी रूप देने में। ‘भीम आर्मी’ भी इस मामले को लेकर अशांति फैलाने में लगा हुआ है। राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की थी।

इससे पहले राहुल गाँधी के क़रीबी कॉन्ग्रेस नेता श्योराज जीवन वाल्मीकि वीडियो में कहते दिखे थे, “दंगा तो कोई भी रोक नहीं पाएगा, जो स्थिति बनती जा रही है। वाल्मीकि समाज ही मार्शल कौम है। हमलोगों को आप गाँव में मार सकते हैं। बहुत काट दिए जाएँगे, बहुत मार दिए जाएँगे। शहर में हमलोग अच्छी-खासी तादाद में हैं। तैयारी पूरी है। इसके लिए हम पूरे तरीके से लगे हुए हैं।” पुलिस उनसे पूछताछ में लगी हुई है।

प्रदीप भंडारी के बाद रिपब्लिक टीवी के CFO को समन, इंडिया टुडे पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं

मुंबई पुलिस ने शुक्रवार (9 अक्टूबर 2020) को रिपब्लिक टीवी के CFO (चीफ़ फाइनेंसियल ऑफिसर) शिवा सुब्रमण्यम सुंदरम को ‘फ़ेक टीआरपी स्कैम’ मामले में समन भेजा। जबकि इस मामले में दर्ज एफ़आईआर में इंडिया टुडे का नाम शामिल है, न कि रिपब्लिक टीवी का। शनिवार सुबह उन्हें पुलिस के सामने पेश होना है। 

असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस शशांक संदभोर द्वारा भेजे नोटिस में लिखा है, “इस बात पर भरोसा करने के लिए पर्याप्त वजहें उपलब्ध हैं कि आप इस मामले से जुड़े तथ्यों से पूरी तरह परिचित होंगे। इस मामले से सम्बंधित जानकारियों की पुष्टि भी आपके द्वारा ही होगी, इसलिए घटनाक्रम पर आपका बयान आवश्यक हैं।” इसके अलावा समन में यह बात दोहराई गई है कि रिपब्लिक टीवी के सीएफ़ओ 10 अक्टूबर सुबह 11 बजे असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ़ पुलिस के सामने पेश होना है। 

इस सम्बंध में भारतीय दंड संहिता की धारा 34 (सामान्य आशय को अग्रसर करने में कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कार्य), 120 B (आपराधिक षड्यंत्र), 409 (लोक सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन), 420 (धोखाधड़ी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। सुंदरम के अतिरिक्त मुंबई पुलिस ने दो अन्य समाचार चैनल्स के अकाउंटेंट को समन भेजा है। इनमें बॉक्स सिनेमा और फ़क्त मराठी शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस हंसा रिसर्च के दो कर्मचारियों विशाल भंडारी, बोम्पल्ली राव (संजू राव) और बॉक्स सिनेमा तथा फ़क्त मराठी के मालिकों को गिरफ्तार कर चुकी है।  

मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के (सीएफ़ओ) को भेजा गया समन (साभार – times of india)

असल में एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम कहीं नहीं मौजूद है, बल्कि इंडिया टुडे का नाम स्पष्ट तौर पर लिखा है। फिर भी मुंबई पुलिस ने इंडिया टुडे के किसी कर्मचारी को अभी तक समन नहीं भेजा गया है, जिससे मामले की जाँच आगे बढ़ सके। 

रिपब्लिक टीवी को मंशा पूर्वक बदनाम करने के प्रयास में मुंबई पुलिस ने शुक्रवार को इसके कंसल्टिंग एडिटर और पत्रकार प्रदीप भंडारी को समन भेजा था। प्रदीप भंडारी के विरुद्ध मुंबई स्थित खार पुलिस थाने में धारा 188, 353 और बॉम्बे पुलिस एक्ट की धारा 37 (1) और 135 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके बाद पत्रकार प्रदीप भंडारी ने ट्विटर पर लिखा था कि रिपब्लिक टीवी की लड़ाई जारी रहेगी, भले पुलिस बदला लेने की कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले। 

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने रिपब्लिक टीवी पर टीआरपी से छेड़छाड़ का आरोप लगाया था। अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी पर हमला बोलते हुए परमबीर सिंह ने दावा किया था कि ये चैनल आम लोगों को चैनल देखने के लिए पैसे देता है ताकि उनकी टीआरपी बढ़े।

हालाँकि कुछ घंटों बाद ही ये पता चल गया कि मूल एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम कहीं नहीं लिखा था। इसके विपरीत उस एफ़आईआर में इंडिया टुडे का नाम शामिल था। बाद में खुद परमबीर सिंह ने यह बात स्वीकार की थी। 

इस पूरे मामले में 6 अक्टूबर को एफ़आईआर दर्ज की गई थी, जिसमें इंडिया टुडे का नाम शामिल था। फिर भी 7 अक्टूबर को मुंबई पुलिस ने BARC को आदेश दिया कि वह रिपब्लिक टीवी से टीआरपी सम्बंधी जानकारी इकट्ठा करे, न कि इंडिया टुडे से। इसके बाद 8 अक्टूबर को परमबीर सिंह जिनका इतिहास खुद विवादों से घिरा रहा है, उन्होंने प्रेस वार्ता करते हुए रिपब्लिक टीवी और अर्नब गोस्वामी पर इल्जाम लगाया। इस दौरान उन्होंने इंडिया टुडे का ज़िक्र भी नहीं किया। यहाँ याद रखने लायक बात है कि जिस वक्त परमबीर सिंह ने प्रेस वार्ता आयोजित की उस वक्त तक एफ़आईआर में रिपब्लिक टीवी का नाम कहीं शामिल नहीं था। 

बाद में रिपब्लिक टीवी के पत्रकार से बात करते हुए एक चश्मदीद ने हैरान करने वाला खुलासा किया था। उसने बयान दिया था कि इंडिया टुडे वालों ने उसके बेटे को उनका चैनल देखने के लिए रुपए दिए थे, जिससे उनकी टीआरपी में इज़ाफा हो। इतने के बावजूद मुंबई पुलिस ने इंडिया टुडे पर कोई कार्रवाई नहीं की। 

इसके बाद ऑपइंडिया के खुलासे में यह बात सामने आई थी कि 31 जुलाई को इंडिया टुडे को व्यूअरशिप प्रक्रिया से छेड़छाड़ करने का दोषी पाया गया था। जिसके बाद BARC और BARC विजिलेंस काउंसिल ने इंडिया टुडे को 5 लाख रुपए का जुर्माना भरने का आदेश दिया था। इस ख़बर के सामने आने के घंटों बाद इंडिया टुडे ने व्यूअरशिप में गड़बड़ी करने पर जुर्माने की बात स्वीकार की थी। हालाँकि इंडिया टुडे ने यह भी कहा था कि कार्रवाई गोपनीय रखी जानी चाहिए थी। इसके लिए इंडिया टुडे BARC पर क़ानूनी कार्रवाई करेगा। 

बंगाल पुलिस की सफाई- ‘अपनेआप’ खुल गई पगड़ी: सेना में रहे सिख की पिटाई का सामने आया था Video

पश्चिम बंगाल में एक सिख बलविंदर सिंह की पगड़ी खोले जाने के आरोपों के बाद पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी किया है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने कहा कि उक्त सिख व्यक्ति शुक्रवार (अक्टूबर 9, 2020) को हो रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान बंदूक लेकर घूम रहा था। उसे पकड़ने के दौरान उसकी पगड़ी अपनेआप ही खुल गई और इसमें पुलिस का कोई दोष नहीं है।

सिख व्यक्ति की पगड़ी खुलने के आरोपों का जवाब देते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस घटना का वीडियो जारी करते हुए लिखा कि उसके अधिकारियों द्वारा बिना कुछ किए ही पगड़ी अपनेआप ही खुल गई, जैसा कि आप वीडियो में देख सकते हैं। साथ ही पश्चिम बंगाल पुलिस ने कहा कि है कि उनका इरादा किसी भी समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का नहीं है। पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए ये स्पष्टीकरण जारी किया।

पश्चिम बंगाल की पुलिस ने कहा है कि वो सभी धर्मों का सम्मान करती है। साथ ही दावा किया कि उसके अधिकारियों ने उक्त सिख व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले खास तौर पर उससे कहा कि वो अपनी पगड़ी वापस पहन ले। साथ ही पुलिस ने पगड़ी पहने उक्त सिख व्यक्ति की तस्वीर भी शेयर की। इस तस्वीर के बारे में पुलिस ने बताया कि उसे थाने ले जाने से ठीक पहले इसे क्लिक किया गया था।

पश्चिम बंगाल पुलिस ने कहा कि वो राज्य में क़ानून-व्यवस्था को बनाए रखने को लेकर प्रतिबद्ध है। बता दें कि पुलिस से संघर्ष के दौरान सिख व्यक्ति की पगड़ी खुलने को लेकर काफी हंगामा हुआ था और दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इसकी तुलना 1984 सिख नरसंहार से की थी। उस दौरान की तस्वीरों को साझा करते हुए इस घटना की तुलना की जा रही थी। अब पुलिस ने इन आरोपों का जवाब दिया है।

बता दे कि भाजपा नेता प्रियांगु पांडेय के सुरक्षा गार्ड बलविंदर सिंह पर उस समय हमला हुआ, जब पश्चिम बंगाल पुलिस ने गुरुवार को कोलकाता की सड़कों पर भाजपा कार्यकर्ताओं को बेरहमी से पीटा और बड़े पैमाने पर लाठीचार्ज किया गया। भाजपा युवा मोर्चा और बीजेपी कार्यकर्ता पश्चिम बंगाल में हो रहे राजनीतिक हत्याओं के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे।

बलविंदर सेना में भी रहे हैं। उनकी पिटाई और पगड़ी खोलने का वीडियो सामने आने के बाद काफी रोष देखने को मिला। अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने वीडियो शेयर करते हुए कहा, “बंगाल पुलिस का गुंडाराज, जो सामने दिखा उसी पर डंडे बरसा दिए। सिक्योरिटी अफसर बलविंदर सिंह की पगड़ी उतारकर उन्हे सड़क पर घसीटा गया। दस्तार का अपमान सिख धर्म का अपमान। पुलिस की ऐसी गुंडागर्दी भारतीय लोकतंत्र पर कलंक।”

‘रेप की घटनाओं के कारण स्विस खिलाड़ी नहीं आई भारत’: एंटी-रेप एक्टिविस्ट ने फैलाया झूठ, PM मोदी को बनाया निशाना

खुद को एंटी-रेप एक्टिविस्ट बताने वाली योगिता भयाना ने शुक्रवार (अक्टूबर 9, 2020) को महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे को लेकर भी राजनीति की और फेक न्यूज़ फैलाया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर उन्होंने एक खबर शेयर किया, जिसमें दावा किया गया था कि स्विट्ज़रलैंड की स्क्वैश खिलाड़ी एम्ब्रे एलिन्क्से ने बलात्कार और महिला सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं के कारण भारत का दौरा करने से इनकार कर दिया है।

2018 में ‘नवभारत टाइम्स’ अख़बार द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट की कोई को ट्विटर पर साझा करते हुए योगिया भयाना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए तंज कसा और लिखा, “हमें एक वैश्विक शक्ति बनाने के लिए धन्यवाद।” उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है। योगिता भयाना के लगभग हर सोशल मीडिया पोस्ट में इसी तरह की बातें भरी पड़ी हैं।

उन्होंने जिस खबर को शेयर किया, उसका शीर्षक था, “रेप की वारदात से डरी खिलाड़ी, नहीं आई भारत“। साथ ही इसमें लिखा था कि उन्होंने इंटरनेट पर भारत की ख़बरें पढ़ कर चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। साथ ही एम्ब्रे के माता-पिता के हवाले से बयान छापा गया कि वो ‘भारत में रेप की बढ़ती घटनाओं’ के कारण नहीं चाहते हैं कि उनकी बेटी चेन्नई जाए। साथ ही इसमें लिखा है कि ईरान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने भी अपनी महिला खिलाड़ियों को बाहर न जाने को कहा है।

योगिता भयाना ने शेयर की झूठी ख़बर

योगिता भयाना ने जिस खबर को शेयर किया, उसके कैप्शन में लिखा था, “विदेशों में हुआ भारत का नाम रौशन“। हालाँकि, 2018 में आई ये खबर पहले ही झूठी साबित हो चुकी है, क्योंकि एंबर एलिन्क्से के माता-पिता पहले ही कह चुके हैं कि भारतीय मीडिया में चल रही ये खबरें झूठी थीं और उन्हें भारत में अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं थी। उन्होंने इन ख़बरों को ‘पत्रकारों की झूठी खोज’ करार दिया था।

एम्ब्रे के माता पिता ने कहा था, “हमें भारत में अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं है। हम गर्मियों में एक पारिवारिक छुट्टियाँ मनाना चाहते थे और कुछ काम की वजह से ये तय समय में मई में नहीं हो पाया, जुलाई में हुआ। इसीलिए, हमारे निर्णय का महिला सुरक्षा से कोई लेना-देना नहीं है।” ‘टाइम्स नाउ’ से लेकर ‘पत्रिका’ तक ने इस झूठी खबर को प्रकाशित किया। अब हाथरस की घटना के बाद इसे फिर से फैलाया जा रहा है।