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हिंदू देवी-देवताओं को गाली को जो बताते थे ‘बोलने की आजादी’, अब वही मौलाना का मजाक बनाने पर मुनव्वर फारूकी को बता रहे ‘छपरी’: किसी ने कहा- जाहिल, तो कोई बोला- तू भी तो मुसलमान है…

स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर हिंदू घृणा फैलाने वाले मुनव्वर फारूकी से इस बार इस्लामी कट्टरपंथी नाराज हैं। कारण है कि एक शो में फारूकी ने एक मौलाना का मजाक उड़ा दिया और उससे इशारों में ये पूछ लिया कि नमाज के वक्त वो शो देखने क्यों आए हैं। इसके बाद उसने मौलाना को देख गाना गुनगुनाया- ‘कन्फर्म जहन्नुमी है-कन्फर्म जहन्नुमी’ है।

फारूकी की यही ‘कॉमेडी’ देख इस्लामी कट्टरपंथी भड़क उठे। देख सकते हैं कि सोशल मीडिया पर फारूकी को गालियाँ दी गईं। उसे ‘छपरी’ करार दिया गया।

उसे बोला गया कि उसे मौलाना से बात करने की तमीज नहीं है। मुसलमान ये बताने भी आ गए कि मौलाना जिस समय शो में आए वो नमाज का वक्त था ही नहीं।

एक यूजर ने लिखा- मुनव्वर फारूकी जाहिलों वाली हरकत कर रहा है।

एक ने कहा- “तू भी तो मुसलमान है न भाई, तू क्यों यहाँ पर झक मार रहा है।”

इतना ही नहीं, कई मुस्लिम यूजर्स ने तो ये भी अपील कर दी कि सारे मुस्लिम मुनव्वर फारूकी को अनफॉलो करें।

दिलचस्प बात ये है कि यही मुनव्वर फारूकी कुछ समय पहले तक जब हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाकर कॉमेडी करता था तो यही लोग इसे सराहते थे। ज्ञान दिया जाता था कि किसी के अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला न हो। हालाँकि, अब मौलाना का मजाक उड़ते ही सबको मजहब की बातें याद आती हैं।

गौरतलब है कि मुनव्वर फारूकी को 2021 में इंदौर में एक स्टैंड-अप शो के दौरान हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक टिप्पणियों के लिए गिरफ्तार किया गया था। इस शो में उसने भगवान राम और सीता माता पर अभद्र टिप्पणी की थी, जिससे धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। इस घटना के बाद उसके खिलाफ कई FIR दर्ज की गईं, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसने जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।

‘तुम्हें (छात्राओं) बाकी लोगों के साथ भी सोना पड़ेगा’: प्रिंसिपल रहे मश्‍कूर अली की करतूतों के विरोध में लड़कियों का हंगामा, कार में बैठाकर करता था छेड़छाड़-गंदे मैसेज भेजता था

राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रतापनगर में स्थित महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज की छात्राओं ने पूर्व प्रिंसिपल सैयद मश्कूर अली पर यौन शोषण का आरोप लगाकर हंगामा किया है। छात्राओं का आरोप है कि पूर्व प्रिंसिपल छात्राओं को साथ सोने का दबाव बनाता था। इसके साथ ही वह कहता था कि वह लड़कियों की सप्लाई भी करता है। कॉलेज में 7 छात्राओं ने अपने बयान दर्ज करवाएँ हैं।

दरअसल, इस संबंध में छात्राओं और कॉलेज के स्टाफ ने 3 फरवरी को तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव से शिकायत की थी। इसके बाद जाँच के लिए एक कमिटी की गई। जाँच में दोषी पाए जाने पर मश्कूर को निलंबित कर दिया था। हालाँकि, मश्कूर ने खुद को निर्दोष बताया। इसके बाद जाँच कमिटी सोमवार (10 मार्च) को जाँच के लिए दोबारा कॉलेज पहुँची, जिसका छात्राओं ने विरोध किया।

छात्राओं का आरोप है कि मश्कूर अली को बचाने के लिए दोबारा जाँच करवाई जा रही है। छात्राओं का कहना है कि पूर्व प्रिंसिपल सैयद मश्कूर अली को साल 2023 में प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था। इसके बाद से ही वह छात्राओं से अभद्रता करता था। उनका कहना है कि मश्कूर लाइब्रेरी के कोने में अलमारी के पीछे बैठता था, जो सीसीटीवी कैमरे की रेंज में नहीं आता था।

इसके अलावा, पूर्व प्रिंसिपल खुद को छात्राओं के पर्सनल व्हाट्सएप ग्रुप में जुड़वा रखा है। वह लड़कियों को अश्‍लील मैसेज भी करता था। र‍िपोर्ट्स के मुताबिक, वह बड़े-बड़े लोगों से संपर्क होने का झाँसा देकर छात्राओं की अपनी कार में ले जाता था और चलती कार में अभद्रता करता था। इस दौरान वह हॉस्‍टल वार्डन और छात्राओं के परिजनों को इस संबंध में जानकारी भी नहीं देता था।

छात्राओं का आरोप है कि पूर्व प्रिंसिपल मश्कूर अली छात्राओं को धमकी देता था कि अगर किसी ने पुल‍िस या पर‍िजनों से शिकायत की तो वह उनका वीडियो वायरल कर देगा। छात्राओं का कहना है कि वीड‍ियो वायरल होने के डर से किसी ने थाने में र‍िपोर्ट दर्ज नहीं करवाई थी। छात्राओं और कॉलेज के स्टाफ ने मश्कूर अली के खिलाफ महिला आयोग, मुख्यमंत्री और राजस्थान संपर्क पोर्टल पर भी शिकायत की थी।

अमर उजाला से बातचीत में लड़कियों ने कहा, “प्रिंसिपल मश्कूर अली कहता था कि तुम्हें (लड़कियों से) बाकी लोगों के साथ भी सोना पड़ेगा। वह कहता था कि उसके बड़े-बड़े लोगों से लिंक हैं। वह लड़कियों की सप्लाई भी करता है। बात नहीं मानने पर वह लड़कियों को कॉलेज से निकालने की धमकी भी देता था।”

अरविंद केजरीवाल पर FIR का कोर्ट ने दिया आदेश, सरकारी पैसे पर होर्डिंग लगाकर AAP नेताओं ने किया प्रचार: कहा- यह सार्वजनिक उपद्रव, आँखों में खटकने वाला

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार (11 मार्च) को आम आदमी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। यह FIR दिल्ली संपत्ति विरूपण रोकथाम अधिनियम के तहत एक शिकायत पर की गई है। इसमें केजरीवाल एवं उनके नेताओं पर सरकारी धन का दुरुपयोग करके अपनी होर्डिंग लगाने का आरोप लगाया था।

कोर्ट की ACJM नेहा मित्तल ने सुनवाई करते हुए कहा, “शिकायतकर्ता ने प्रथम दृष्टया दर्शाया है कि संज्ञेय अपराध किया गया है।” कोर्ट ने कहा, “अपराध की गंभीरता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि यह न केवल आंखों में खटकने वाला और सार्वजनिक उपद्रव है, जिससे शहर की सौंदर्य भावना नष्ट हो रही है, बल्कि यातायात के सुचारू प्रवाह के लिए भी खतरनाक है।”

कोर्ट ने आगे कहा, “यह (अवैध होर्डिंग्स) पैदल यात्रियों और वाहनों के लिए सुरक्षा चुनौती पेश करता है। अवैध होर्डिंग्स के गिरने से होने वाली मौतें भारत में नई नहीं हैं।” अब मामले की अगली सुनवाई कोर्ट 18 मार्च 2025 को करेगा। इसके साथ ही कोर्ट ने उस दिन FIR को लेकर दिल्ली पुलिस से अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

दरअसल, शिव कुमार सक्सेना ने CrPC की धारा 156 (3) के तहत एफआईआर दर्ज करने की माँग की थी। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि साल 2019 में तत्कालीन सीएम केजरीवाल और तत्कालीन AAP विधायक गुलाब सिंह एवं तत्कालीन AAP निगम पार्षद निकिता शर्मा ने द्वारका में चौराहों, सड़कों, बिजली के खंभों, डीडीए पार्क एवं अन्य सार्वजनिक स्थानों पर आम जनता के लिए शुभकामनाओं वाले बड़े आकार के होर्डिंग्स लगाकर जनता के पैसे का दुरुपयोग किया।

सक्सेना ने इस संबंध में साल 2019 में दिल्ली पुलिस में इसकी शिकायत की थी। हालाँकि, उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने कोर्ट का रूख किया। वहीं, दिल्ली पुलिस ने सक्सेना की इस याचिका का कोर्ट में विरोध किया। दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि शिकायत 2019 में दर्ज की गई थी और वर्तमान में उस स्थान पर कोई होर्डिंग प्रदर्शित नहीं है। इसलिए इसमें कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता है।

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को यह भी बताया कि होर्डिंग पर प्रिंटिंग प्रेस का विवरण नहीं दिया गया था। इसलिए यह तय करना असंभव होगा कि उन्हें कहाँ से और किसके कहने पर छापा गया था। पुलिस ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने पुलिस थाने में दी गई शिकायत में पीएम नरेन्द्र मोदी सहित लगभग 8-10 लोगों को आरोपित बनाया था, लेकिन अदालत में दायर आवेदन में अधिकांश नाम हटा दिए गए गए।

पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, एक होर्डिंग में कहा गया है कि दिल्ली सरकार करतारपुर साहिब में दर्शन के लिए पंजीकरण शुरू करेगी, जिस पर केजरीवाल और गुलाब सिंह की तस्वीरें और नाम हैं। एक अन्य होर्डिंग में गुरुनानक देव जयंती और कार्तिक पूर्णिमा की शुभकामनाएँ थीं, जिस पर निकिता शर्मा की तस्वीर और नाम था। शिकायतकर्ता ने एक अन्य होर्डिंग का भी हवाला दिया जिसमें नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा, प्रवेश वर्मा और रमेश बिधूड़ी की तस्वीरें थीं।

सारी बातों पर गौर करने के बाद कोर्ट ने कहा कि बैनर बोर्ड टाँगना या होर्डिंग लगाना संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के समान है। जज ने कहा कि पुलिस का यह बयान कि जाँच की तारीख पर कोई होर्डिंग नहीं मिली, यह अदालत को गुमराह करने का प्रयास लगता है। उन्होंने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता ने कई लोगों के नाम छोड़ दिए हैं।

हाईजैक ट्रेन छुड़ाने में पाकिस्तान अब तक नाकाम, बलूच विद्रोहियों ने ढेर किए 30 फौजी: धमकी देकर बोले- अगर आगे बढ़े तो औरों का भी करेंगे काम तमाम; 200 यात्री फँसे

पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हाइजैक की गई ट्रेन को वापस लाने में फौज नाकाम रही है। बलोच विद्रोही लगातार ट्रेन पर कब्जा बनाए हैं। उन्होंने इसे मुक्त करवाने आई फौजी टीमों को निशाना बनाया है। पाकिस्तान की फ़ौज ने दावा किया है कि उसने 16 विद्रोही मारे हैं। वहीं बलोचों ने इसे फर्जी करार देते हुए कई दर्जन फौजी मारने की बात कही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बलूचिस्तान के बोलान दर्रे में हाइजैक की गई जाफर एक्सप्रेस से सभी यात्री रिहा नहीं करवाए जा सके हैं। पाकिस्तान फ़ौज के प्रोपेगेंडा विभाग ISPR ने दावा किया है कि उसने 104 बंधकों को मुक्त करवा लिया है। उसने 16 विद्रोही मारने का दावा भी किया है। फ़ौज ने कहा है कि ऑपरेशन अभी जारी है।

वहीं बलोच विद्रोहियों ने कहा है कि उन्होंने ही यात्रियों को रिहा किया है। बलोच विद्रोहियों ने बताया है कि उनके कब्जे में अभी भी 200 से अधिक यात्री हैं। इनमें से बड़ी संख्या पाकिस्तान के फौजियों की है। वह इस ट्रेन से क्वेटा से पेशावर जा रहे थे। विद्रोहियों ने कहा है कि ट्रेन हाइजैक के दौरान पाकिस्तान के 30 फौजी मारे गए हैं।

बलोच विद्रोहियों ने इस बीच चेतावनी भी जारी की है। उन्होंने कहा है कि हाइजैक ट्रेन तभी छोड़ी जाएगी जब उनकी माँगे पूरी हो जाएंगी। उन्होंने कहा है कि वह इन यात्रियों को तभी छोड़ेंगे जब पाकिस्तान गिरफ्तार किए गए बलोच विद्रोहियों को छोड़ेगा। उन्होंने बंधकों की अदला बदली करने की बात कही है।

इस अदला बदली के लिए 48 घंटे का समय दिया गया है। विद्रोहियों ने धमकी दी है कि अगर पाकिस्तान की फ़ौज ने एक भी गोली चलाई तो वह 10 बंधकों को मार देंगे। यदि उनकी माँगे नहीं मानी जाती तो वह हर घंटे 5 बंधकों को मारना चालू कर देंगे। उन्होंने यह भी साफ़ किया है कि अब तक की कार्रवाई में कोई बलोच विद्रोही मारा नहीं गया है।

वहीं पाक फ़ौज इस बीच डैमेज कंट्रोल में जुटी हुई है। उसका दावा है कि जल्द ही यह सैन्य ऑपरेशन पूरा हो जाएगा और ट्रेन मुक्त करवा ली जाएगी। उन्होंने बलोच विद्रोहियों को घेरने का दावा किया है। फ़ौज का दावा है कि इलाके में मौजूद सभी बलोच विद्रोही मार गिराए जाएँगे।

गौरतलब है कि मंगलवार (11 मार्च, 2025) को क्वेटा से पेशावर जा रही जाफर एक्सप्रेस पर बलोच विद्रोहियों ने हमला किया था। बोलान इलाके में एक सुरंग के पास इस ट्रेन का नियंत्रण उन्होंने ले लिया था। ट्रेन का लोको पायलट इस हमले में मारा गया है।

विद्रोहियों ने बलोच लोगों, महिलाओं, बुजर्गों और बच्चों को छोड़ दिया था। पाकिस्तान के इतिहास में यह हाइजैक की सबसे बड़ी घटना है।

शेख हसीना सरकार के बाद बांग्लादेश की फौज में तख्तापलट की थी तैयारी: ISI ने रची थी साजिश, ‘जमाती जनरल’ दे रहा था साथ

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद अब अगला निशाना उसकी फ़ौज के मुखिया को बनाया जा रहा है। शेख हसीना की देश से बेदखली के समय फ़ौज के हाथ बाँधने वाले जनरल वकार उज़ जमान के तख्तापलट की तैयारी पाकिस्तान कर रहा है। इसके लिए लगातार साजिश रची जा रही है। इसके लिए बांग्लादेशी फ़ौज के ही बड़े अफसर लगाए गए हैं। वह फ़ौज के भीतर जनरल जमान के खिलाफ समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।

तख्तापलट करना चाहता है ‘जमाती जनरल’

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में बांग्लादेश फ़ौज के मुखिया जनरल वकार उज जमान ने लेफ्टिनेंट जनरल फैजुर रहमान पर नजर रखने का आदेश दिया है। फैजुर रहमान वकार उज जमान का तख्तापलट करना चाहता है। रहमान बीते कुछ दिनों में बांग्लादेशी फ़ौज के कई बड़े अधिकारियों से मिल रहा है।

यह अधिकारी फ़ौज के अलग-अलग कमान का नेतृत्व करते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह इन अधिकारियों का समर्थन जनरल जमान के खिलाफ जुटा रहा है। जनरल रहमान जमात-ए-इस्लामी से लिंक रखने वाला माना जाता रहा है। बांग्लादेशी फ़ौज में बड़ा हिस्सा अब भी इस्लामी कट्टरपंथियों का समर्थक है।

जनरल रहमान फ़ौज के अलावा पाकिस्तान के कई राजनयिकों से भी मिल रहा था। उसने ISI के कुछ समर्थकों से भी मुलाक़ात की थी। उसने फ़ौज के दूसरे बड़े जनरल के साथ बैठकें मार्च के पहले सप्ताह में की थीं। इसके बारे में भनक लगने पर जनरल जमान ने चूड़ियाँ कसी हैं। बताया गया है कि फैजुर रहमान की इन हरकतों के बारे में दूसरे अधिकारियों ने ही सूचित किया था।

जिस जमाती जनरल रहमान के ऊपर बांग्लादेशी फ़ौज के मुखिया ने कार्रवाई की है, उसका कद अगस्त, 2025 में शेख हसीना के तख्तापलट होने के बाद बढ़ा था। उसे अगस्त में बांग्लादेशी फ़ौज की खुफिया विंग का मुखिया बनाया गया था। उस दौरान वह मेजर जनरल था।

इसके बाद उसका कद बढ़ा कर लेफ्टिनेंट जनरल बना दिया गया था। गौरतलब है कि तख्तापलट के बाद ISI की हरकतें बांग्लादेश में बढ़ी हैं, खुफिया विंग का प्रमुख होने के चलते उसका पाकिस्तान से भी सम्पर्क हुआ था। ऐसे में वह जनरल जमान को हटाना चाहता था।

जनरल जमान ने दी थी चेतावनी

तख्तापलट की इन बातों को हाल ही में जनरल जमान द्वारा दिए गए एक बयान से भी बल मिला है। जनरल जमान ने हाल ही में देश के नेताओं को चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि देश के नेता आपस में लड़ने में व्यस्त हैं और देश के अस्तित्व को खतरा है। उन्होंने फ़ौज के लगातार बांग्लादेश में तैनात रहने पर भी चिंता जताई थी।

जनरल जमान ने बताया था कि नेताओं के आपस में लड़ने के चलते अपराध लगातार बढ़ते जा रहे थे। उनका यह निशाना मोहम्मद यूनुस सरकार की तरफ माना गया था। यूनुस सरकार पर निशाने के बाद ही तख्तापलट की यह बातें सामने आई हैं। हालाँकि, अभी इस पर आधिकारिक रूप से कुछ सामने नहीं आया है।

जनरल जमान का रुख भी बीते कुछ महीनों में यूनुस सरकार से थोड़ा अलग दिखा है। उन्होंने जनवरी, 2025 में एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है और बांग्लादेश उसके हितों को कभी नुकसान नहीं पहुँचाएगा। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बताया था। यह रुख यूनुस सरकार से थोड़ा अलग था।

तख्तापलट में फ़ौज की भूमिका पर सवाल

बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्तापलट में फ़ौज की भूमिका पर भी प्रश्न उठे थे। तख्तापलट में जब इस्लामी कट्टरपन्थी लगातार पुलिस पर हमला कर रहे थे और सड़कों पर उत्पात मचा रहे थे तब फ़ौज हाथ बाँधे खड़ी थी। फ़ौज ने आखिर वक्त में शेख हसीना की सरकार का साथ देने से मना कर दिया था।

इसके बाद शेख हसीना भारत चली आईं थी। कयास लगाया जा रहा है कि जनरल वकार उज जमान तब से ही परदे के पीछे से सरकार चला रहे हैं। हालाँकि, अब उनको हटाने की भी साजिश सामने आ गई है। हाल ही में सामने आया था कि बांग्लादेश की फ़ौज ने शेख हसीना की सरकार को संयुक्त राष्ट्र (UN) के दबाव में नहीं बचाया था।

5 मार्च, 2025 को BBC के हार्डटॉक कार्यक्रम में UNHCR प्रमुख वोल्कर तुर्क से गाजा, सूडान, बांग्लादेश समेत बाकी इलाकों पर बात की थी। वोल्कर तुर्क ने कहा था, “मैं आपको बांग्लादेश का उदाहरण दे रहा हूँ। जुलाई-अगस्त के दौरान, छात्रों द्वारा वहाँ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था। वह शेख हसीना सरकार से तंग आ चुके थे, वहाँ बड़े पैमाने पर दमन हो रहा था।”

उन्होंने आगे बताया था, “उनके लिए (प्रदर्शनकारियों) सबसे बड़ी उम्मीद वास्तव में हमारी आवाज़, मेरी आवाज़ और हम जो कर पाए, वह थी। हमने स्थिति पर ध्यान दिया और फ़ौज को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोका, तो उन्हें शांति अभियानों में सैनिक नहीं भेजने दिए जाएँगे। इसके बाद फ़ौज के रुख में बदलाव आया।”

क्यों UN की धमकी से डरी बांग्लादेशी फ़ौज

गौरतलब है कि बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र के शान्ति मिशन में बड़ी संख्या में सैनिक भेजता है। वर्तमान में बांग्लादेश ने लगभग 5000 सैनिक UN मिशन में भेजे हुए हैं। UN मिशन में गए सैनिकों को औसत तनख्वाह से अधिक पैसा मिलता है और फ़ौज को भी इससे कमाई होती है।

बांग्लादेश को शान्ति मिशन से हर साल लगभग ₹2600 करोड़ की कमाई होती है। इनमें से आधा ही वह अपने सैनिकों को देता है। बाकी पैसा फ़ौज के हिस्से जाता है। इससे उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बड़ी जगह मिलती है।

ऐसे में UN की यह धमकी फ़ौज पर काम कर गई थी और उन्होंने अंत समय में शेख हसीना के आदेश मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और दंगाइयों ने हिंसा जारी रखी। मोहम्मद यूनुस ने इसके बाद सत्ता पर कब्जा कर लिया था। लेकिन अब फ़ौज के भीतर उथलपुथल से नए संकेत मिल रहे हैं।

‘केरल के एक शहर से 400+ ईसाई लड़कियाँ गायब, बेटियों की जल्दी कर दें शादी’: केरल के नेता ने ‘लव जिहाद’ के जिस खतरे से चेताया, वह नई नहीं… जानिए कितनी विकट है स्थिति

केरल के कोट्टायम जिले के पाला में शनिवार (8 मार्च 2025) को एक सम्मेलान में बीजेपी नेता पीसी जॉर्ज ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने ईसाई समुदाय से कहा कि अपनी बेटियों की शादी 24 साल की उम्र से पहले कर दें, नहीं तो वो लव जिहाद का शिकार हो सकती हैं। उनका दावा था कि सिर्फ मीनाचिल तालुक में ही 400 से ज्यादा ईसाई लड़कियाँ लव जिहाद की शिकार हो चुकी हैं। ये सम्मेलन नशे के खिलाफ जागरूकता के लिए था, जिसे पाला के बिशप जोसेफ काललरंगट और केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (KCBC) ने आयोजित किया था।

केरल के ईसाई समुदाय में लव जिहाद को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ये कोई नई बात नहीं है, बल्कि सालों से इस मुद्दे पर चर्चा होती रही है। इस लेख में हम इसे आसान भाषा में समझेंगे कि ये बहस अभी क्यों तेज हुई, इसका इतिहास क्या है, और लोग इसे लेकर क्या-क्या कह रहे हैं।

दरअसल, लव जिहाद के मामले पर बोलते हुए पीसी जॉर्ज ने कहा कि मीनाचिल में गायब हुई 400 लड़कियों में से सिर्फ 41 को ही वापस लाया जा सका। उन्होंने एक ताजा घटना का जिक्र किया कि 8 मार्च को ही एक 25 साल की लड़की रात 9:30 बजे घर से चली गई और अभी तक उसका पता नहीं चला। जॉर्ज का कहना था कि अगर लड़कियों की शादी 22-23 साल की उम्र में कर दी जाए, तो वो इस खतरे से बच सकती हैं। उनका ये बयान सुनकर वहाँ मौजूद लोगों में हलचल मच गई, क्योंकि ये इलाका ईसाई बहुल है और लोग इस बात से चिंतित हैं।

जॉर्ज ने ये भी कहा कि अगर लड़की 28-29 साल की हो जाए और नौकरी करने लगे, तो वो शादी नहीं करना चाहती। फिर उसकी कमाई पर परिवार निर्भर हो जाता है और यहीं से दिक्कत शुरू होती है। उनका मानना है कि लव जिहाद से बचने का आसान तरीका है कि समय रहते शादी कर दी जाए।

पीसी जॉर्ज को ये बयान देने की जरूरत क्यों पड़ी?

पीसी जॉर्ज का ये बयान अचानक नहीं आया। दरअसल, केरल में लव जिहाद का मुद्दा सालों से चल रहा है, खासकर ईसाई समुदाय इसे लेकर पहले भी आवाज उठाता रहा है। जॉर्ज ने ये बात इसलिए कही, क्योंकि उन्हें लगता है कि ईसाई लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है और समाज में इस पर खुलकर बात नहीं हो रही। वो चाहते हैं कि लोग इस खतरे को समझें और अपनी बेटियों को बचाने के लिए कदम उठाएँ।

ये कोई नई चिंता नहीं है। ईसाई समुदाय के लोग लंबे वक्त से कहते आ रहे हैं कि उनके समुदाय की लड़कियों को प्यार के जाल में फँसाकर उनका धर्म बदलवाया जा रहा है। चर्च भी इस मुद्दे को कई बार उठा चुका है। मसलन कुछ साल पहले चर्च ने कहा था कि लव जिहाद के नाम पर लड़कियों को विदेश भेजा जा रहा है, जहां उनका गलत इस्तेमाल होता है।

पीसी जॉर्ज का बयान इसी पुरानी चिंता को फिर से ताजा करने की कोशिश है। उनके मुताबिक, मीनाचिल जैसे इलाकों में ये समस्या बढ़ती जा रही है, जहाँ ईसाई आबादी ज्यादा है। वो इसे एक सामाजिक खतरे के तौर पर देखते हैं और चाहते हैं कि लोग जागरूक हों।

लव जिहाद को लेकर 2019 में गृहमंत्री को लिखा गया था पत्र

केरल में लव जिहाद का मुद्दा कोई आज का नहीं है। सालों पहले 24 सितंबर 2019 को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि ईसाई लड़कियाँ लव जिहाद का आसान शिकार बन रही हैं। कुरियन ने दावा किया था कि 2005 से 2012 तक 7 साल में 4000 ईसाई लड़कियों को प्यार के जाल में फँसाकर उनका मजहब बदला गया। वो चाहते थे कि इसकी एनआईए से जाँच हो और सख्त कानून बने।

कुरियन ने अपने पत्र में कुछ घटनाओं का जिक्र किया था। जैसे केरल के कोझीकोड में एक ईसाई लड़की के साथ रेप हुआ और उसे ब्लैकमेल करके इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया गया। एक दूसरी घटना में भी ऐसा ही हुआ और लड़की का अपहरण कर लिया गया। कुरियन का कहना था कि ये सब सुनियोजित तरीके से हो रहा है और ईसाई लड़कियाँ इस्लामी कट्टरपंथियों का सॉफ्ट टारगेट बन रही हैं। इस पत्र के बाद भी कोई बड़ा कदम नहीं उठा, लेकिन चर्च और समुदाय में ये डर बढ़ता गया।

इसके अलावा चर्च भी इस मुद्दे पर सक्रिय रहा है। 2020 में साइरो मालाबार चर्च ने एक रिपोर्ट दी थी, जिसमें कहा गया कि लव जिहाद के नाम पर ईसाई लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। चर्च ने वामपंथी सरकार पर इसे नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। पादरी फादर वर्गीज वल्लिकट्ट ने एक वीडियो में कहा था कि लव जिहाद सच है, और लड़कियों को सीरिया-अफगानिस्तान जैसे देशों में भेजकर सेक्स स्लेव बनाया जा रहा है। चर्च ने इसके खिलाफ स्क्रीनिंग भी शुरू की थी, ताकि लोग जागरूक हों।

बीजेपी नेता पीसी जॉर्ज इस मुद्दे को पहले भी उठाते रहे हैं। सीरियन कैथोलिक ईसाइयों का गढ़ मीनाचिल तालुक में वो लोगों से अपील करते हैं कि अपनी बेटियों को बचाएँ। उनके मुताबिक, 400 लड़कियों के गायब होने का आँकड़ा सिर्फ एक छोटा हिस्सा है। वो कहते हैं कि माता-पिता को सख्ती करनी चाहिए और शादी की उम्र पर ध्यान देना चाहिए। उनका ये बयान चर्च के उस रुख से मिलता-जुलता है, जो लव जिहाद को सामाजिक बुराई मानता है।

चर्च की चिंताओं की कवरेज-TOI में, साल 2019

इस मुद्दे पर ‘द केरला स्टोरी’ जैसी फिल्में बनीं, जिसने लव जिहाद और आतंकवाद की कहानी दिखाती हैं। चर्च स्कूलों और समुदाय में स्क्रीनिंग कर रहा है, ताकि लोग इस खतरे को समझें। साल 2020 में KCBC ने सरकार से कहा था कि लापता लड़कियों की जाँच हो, लेकिन वामपंथी सरकार ने इसे खारिज कर दिया। फिर भी चर्च और बीजेपी जैसे संगठन इस मुद्दे को उठाते रहते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि ये ईसाई समुदाय के लिए बड़ा खतरा है।

केरल में लव जिहाद की बहस कोई नई नहीं है। पीसी जॉर्ज का ताजा बयान हो या चर्च की पुरानी चेतावनियाँ, ये मुद्दा बार-बार सामने आता है। ईसाई समुदाय इसे अपनी लड़कियों की सुरक्षा से जोड़कर देखता है, जबकि केरल की वामपंथी सरकार इसे सिरे से नकारती है। 400 लड़कियों का आँकड़ा हो या 4000 का दावा, सच क्या है, ये जाँच का विषय है। लेकिन इतना साफ है कि ये बहस अभी खत्म होने वाली नहीं है।

मेरे नाम से डरते थे, जमींदार को खत्म (हत्या) कर दिए, जेल क्यों जाएँगे… बिहार के वामपंथी MLA ने खुद सुनाई अपने ‘आतंक’ की कहानी, Video वायरल: यूँ ही लालू-राबड़ी के शासनकाल को नहीं कहते ‘जंगलराज’

बिहार के एक वामपंथी विधायक ने अपने आतंक की कहानी कैमरे पर सुनाई है। उन्होंने एक जमींदार की हत्या करने की बात कैमरे पर कबूली है और अपनी दहशत को भी बताया है। यह सारी बातें MLA ने एक इंटरव्यू में बताई है। इस इंटरव्यू की कुछ क्लिप अब सामने आ रही हैं।

CPI (ML) के विधायक सत्यदेव राम ने यह सारी बातें बताई हैं। उन्होंने पहले बताया कि वह किस तरह एक गरीब परिवार से आने के बाद भी अमीर बने। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद उन्हें गाँव का ही जमींदार परेशान करने लगा। जिसके बाद उन्होंने हत्या की।

सत्यदेव राम ने कहा, “मैंने तय कर लिया जमींदारी ठाट को खत्म करेंगे। हमने इस पार्टी (CPI-ML) में शामिल हुए। हम देखे थे कि ये लोग लड़ता है। एक साल तक गाँव में लड़े। उस जमींदार को खत्म कर दिए। उसका समाप्ति कर दिए। इसके बाद राजनीतिक समझ आ गई।”

इस बीच पत्रकार ने सत्यदेव राम को टोका कि क्या उन्होंने जमींदार को जान से मार दिया था। इस पर उन्होंने कहा, “और क्या ऐसे ही, और कौन चीज।” इस पर पत्रकार ने पूछा कि क्या इस अपराध के लिए आप जेल नहीं गए। इस पर MLA ने कहा. “जेल क्यों जाएँगे, जेल में क्यों रहेंगे?”

नीचे लगे वीडियो में यह बातचीत वाला यह हिस्सा आप 11 मिनट से 15 मिनट के बीच सुन सकते हैं।”

सत्यदेव राम ने इसके बाद बताया, “वो लोग तो केस भी हम पर नहीं किए। डर के चलते केस नहीं किए। पुलिस ने रात 9 बजे तक गाँव घेरा रखा। लेकिन हम अपने तरीके से निकल गए। वो लोग इसके बाद डर गए। इसके बाद इधर राजनीतिक सूझबूझ बढ़ गई।” सत्यदेव राम ने बताया कि उनके डर से तब लोग दरवाजा बंद कर लेते थे।

सत्यदेव राम ने इसके बाद बताया कि वह दूसरे गाँव में जमींदारों से लड़ने लगे। उन्होंने बताया कि इसके बाद वह कई इलाकों में हमले करते रहे। सत्यदेव राम ने बताया कि उनका लक्ष्य जमींदारों के खिलाफ लड़ना था। सत्यदेव राम ने इस दौरान यह भी स्वीकार किया वह हत्या के बाद कई जगह घूमते रहे।

61 वर्षीय सत्यदेव राम पाँच बार के विधायक हैं। वह पहली बार मैरवा से 1995 में विधायक बने थे। यहाँ से वह 3 बार विधायक बन चुके हैं। 2015 और 2020 में वह CPI (ML) के टिकट से सीवान जिले की दरौली विधानसभा से विधायक बने हैं। इसके बावजूद भी वह कैमरे पर कबूल रहे हैं कि उन्होंने एक व्यक्ति की हत्या की और उनका कुछ नहीं हुआ।

दरअसल, सत्यदेव राम जो कह रहे हैं, वह सुनने में अटपटा लग सकता है। लेकिन यही 1990 के दशक के बिहार की सच्चाई है। यह लालू यादव और राबड़ी देवी के जंगलराज की सच्चाई है। यह उस दौर की सच्चाई है जब के भी खेत पर लाल झंडा गाड़ दिया जाता था और विरोध करने पर आदमी जान-माल से हाथ धो बैठता था।

इसी दौर ने कई वामपंथी हत्यारे बिहार को दिए। आज वह माननीय का दर्जा लेकर बैठे हैं। कैमरे पर शान से बताते हैं कि कैसे उन्होंने एक जमींदार की हत्या कर दी। वह यह भी स्वीकार करते हैं कि हत्या के बाद उन्होंने लोगों को डराए रखा और कभी भी कानून के शिकंजे में नहीं आए। आज यही क़ानून बनाने बैठे हैं।

शेख ने ‘राम’ बनकर बिहार में 16 साल की हिंदू लड़की से शादी की, हरियाणा लाकर कराने लगा देह का धंधा: निकली HIV पॉजिटिव, स्पा सेंटर पर छापेमारी के बाद हुआ खुलासा

हरियाणा के करनाल में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक मुस्लिम युवक ने हिंदू बनकर बिहार की 16 साल की नाबालिग लड़की से शादी की। उसने अपना नाम राम बताया, लेकिन बाद में उसका असली नाम शेख निकला। शादी के तुरंत बाद उसने लड़की को स्पा सेंटर में नौकरी पर लगवा दिया और उसे देह व्यापार में धकेल दिया। यह खुलासा तब हुआ जब लड़की एक हादसे में घायल हुई और उसकी जाँच में वह एचआईवी पॉजिटिव पाई गई। अब पुलिस और बाल कल्याण समिति इस मामले की गहराई से जाँच कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़की ने बताया कि वह बिहार की रहने वाली है। शादी के समय उसे लगा कि उसका पति हिंदू है, लेकिन बाद में सच सामने आया। शेख ने उसे स्पा सेंटर में काम करने के लिए मजबूर किया। जब लड़की को अपनी बीमारी का पता चला, तो उसने शेख को बताया, लेकिन उसने फिर भी उसे वहाँ काम करने के लिए छोड़ दिया। लड़की का कहना है कि हर दिन एक से दो लोग उसके साथ संबंध बनाते थे। शनिवार (8 मार्च 2025) को महिला दिवस के मौके पर पुलिस ने करनाल के एक स्पा सेंटर पर छापा मारा, जहाँ यह नाबालिग मिली।

छापे के बाद लड़की को बाल कल्याण समिति के पास लाया गया। काउंसलिंग में उसने सारी बातें बताईं। समिति के अध्यक्ष उमेश चानना ने कहा कि लड़की अभी सदमे में है और उसे बाल संरक्षण गृह में रखा गया है। समिति अब लड़की के परिवार को ढूँढ रही है। दूसरी तरफ सिटी थाना पुलिस ने शेख, स्पा सेंटर संचालक और अन्य लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपितों की तलाश जारी है।

स्पा सेंटर के रिकॉर्ड से उन लोगों की पहचान की जा रही है, जो लड़की से संबंध बना चुके हैं, ताकि उनकी जाँच और इलाज हो सके। बाल कल्याण समिति को शक है कि यह धर्मांतरण का मामला भी हो सकता है। इस घटना के लव जिहाद से भी जुड़ने की बात सामने आ रही है।

पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में शेख इंदू ने मंदिर पर किया हमला, माँ शीतला की मूर्तियों को तोड़ा, लगा दी आग: पुलिस ने बताया ‘मानसिक बीमार’

पश्चिम बंगाल के बरुईपुर शहर में शुक्रवार (7 मार्च 2025) को शेख इंदू नाम के एक मुस्लिम शख्स ने माँ शीतला की मूर्ति को तोड़ा और आग लगा दी। यह घटना दक्षिण 24 परगना जिले में हुई। सोशल मीडिया पर जली हुई मूर्तियों और क्षतिग्रस्त मंदिर की तस्वीरें वायरल हुईं। स्थानीय लोगों ने आरोपित शेख इंदू को पकड़ लिया, जिसने यह हरकत की थी। बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया।

हिंदुओं ने आरोपित शेख इंदू को पकड़ा (फोटो साभार: X_KrishanuOnline)

माँ दुर्गा की मूर्ति तोड़े जाने के विरोध में बीजेपी नेता अग्निमित्रा पॉल ने बारुईपुर पुलिस स्टेशन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया।

वहीं, पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) के विधायक बिभास सरदार ने इस मामले का दोष हिंदुओं पर ही डालने की कोशिश की, ताकि लोगों का ध्यान शेख इंदू के कारनाम से हट जाए।

इसे इत्तेफाक कहें या कुछ और, बरुईपुर पुलिस ने एक्स पर शुक्रवार (7 मार्च 2025) को ही ये दावा कर दिया कि आरोपित शेख इंदू मानसिक रूप से अस्थिर यानी बीमार है।

पुलिस ने एक्स पर लिखा, “स्थानीय लोगों ने आरोपित को पकड़ा और पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। केस दर्ज कर उसकी जाँच शुरू कर दी गई है। हिरासत में लिया गया व्यक्ति ‘बाहरी’ है और मानसिक समस्याओं से जूझ रहा है।”

बरुईपुर पुलिस का ट्वीट

पुलिस ने लोगों को सावधान करते हुए लिखा है कि स्थिति शांत है। लेकिन जो लोग सांप्रदायिकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और गलत जानकारियाँ फैला रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएँगे।

विजय जुलूस में शामिल लोगों को माँ-बहन की गालियाँ दी, कहा- हमने पहले से प्लान बना रखा था… FIR ने खोली महू की जामा मस्जिद के पास हुए हमले की साजिश: पहले से जमा कर रखे थे ईंट-पत्थर

मध्य प्रदेश के महू में हिन्दुओं पर पथराव के मामले में दर्ज की गई FIR से मुस्लिमों की प्लानिंग का खुलासा हुआ है। चैंपियंस ट्रॉफी मैच के बाद जीत का जश्न मनाते लोगों पर पथराव की पहले से प्लानिंग की गई थी। इस मामले में 17 मुस्लिम नामजद आरोपित बनाए गए हैं।

महू में हुई हिंसा के बाद 10 मार्च, 2025 को महू थाने में FIR दर्ज करवाई गई है। FIR में मुस्लिमों पर दंगा, मारपीट, हमला समेत अन्य कई धाराएँ लगाई गई हैं। FIR में 17 नामजद आरोपितों के साथ ही कई अज्ञात लोगों को आरोपित बनाया गया है। FIR हमले के पीड़ित एक हिन्दू की तरफ से दर्ज करवाई गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

FIR में पीड़ित ने बताया है कि वह रविवार (9 मार्च) को चैंपियंस ट्रॉफी में न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की जीत के बाद अपने कई दोस्तों के साथ जश्न मनाने निकला था। पीड़ित ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ शांतिपूर्वक जीत का जुलूस निकाल रहे थे।

पीड़ित ने बताया कि इसी दौरान मोती महल चौराहे पर बबलू, तैय्यब, गोलू, एहमद, पप्पू, अहमद, जमशेद, अब्दुल अनीस, शेरू, लल्लू, सैय्यद, इमरान, अफजल, सोहेल, रफीक और इमरान (2) समेत बाकी अज्ञात लोग आ गए। पीड़ित के अनुसार, इन मुस्लिमों ने पहले जीत का जश्न मना रहे हिन्दुओं को गालियाँ बकीं।

FIR के अनुसार मुस्लिमों ने कहा, “हमने तो पहले से प्लान बनाकर रखा था कि तुम सालों चिल्ला-चिल्लाकर जश्न मनाओगे तो आज तुम्हारा इलाज कर देंगे। हम सभी नें गालियाँ देने से मना किया तो सभी नें षडयंत्र पूर्वक इकट्ठा होकर ईंट-पत्थर जो पहले से इकट्ठा करके रखें थे, जिससे हम पर पथराव कर दिया।”

पीड़ित ने बताया कि इस पथराव के चलते वह और उनके साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। पीड़ित ने यह भी बताया कि मुस्लिमों ने इसके बाद धमकी दी कि अगर हिन्दुओं ने दोबारा जुलूस निकाला तो उनकी हत्या कर दी जाएगी। पीड़ितों की बसों में तोड़फोड़ की गई

पुलिस अब इस मामले में जाँच करके गिरफ्तारियाँ कर रही है। इंदौर एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया, “अभी एक FIR दर्ज हुई है, 17 लोग इसमें नामजद हैं। कुछ शिकायत और आई हैं। इन पर कार्रवाई हो रही हैं। 12 लोगों को पकड़ा गया है। बाकी को पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। FIR में बलवा जैसी धाराएँ लगाई जा रही हैं।”

वहीं इंदौर ग्रामीण एसपी हितिका वत्सल ने 2 FIR की जानकारी दी है। उन्होंने बताया है कि अब स्थिति सामान्य है। गौरतलब है कि रविवार को महू में भारतीय टीम की जीत का जश्न मनाते लोगों पर मुस्लिमों ने हमला कर दिया था, इसमें कई लोग घायल हुए थे।