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‘जिस्म की गर्मी’: बॉलीवुड के लिए रेप ऐसे जैसे कुछ हुआ ही नहीं, फिल्मों के जरिए यौन शोषण का किया जाता है महिमांडन

बॉलीवुड का लोगों के जीवन और उनके सोच-विचार पर अच्छा-खासा असर पड़ता है। चाहे फ़िल्मी कलाकारों की नक़ल करना हो, उनके डायलॉग्स बोलना हो या फिर उनका ड्रेसिंग स्टाइल कॉपी करना हो- बॉलीवुड का समाज पर खासा प्रभाव है। आज जब बलात्कार के मामलों को लेकर देश आक्रोशित है, हम ये सोचने में लगे हैं कि किस मानसिकता के तहत ऐसे अपराधों को अंजाम दिया जाता है।

बलात्कार के मामले जब-जब सुर्ख़ियों में आते हैं, तब-तब हम इस पर हो रही राजनीति की निंदा करते हैं, लेकिन हमारे समाज में बलात्कार इतना सामान्य क्यों बना दिया गया है, इस बारे में हम नहीं सोचते। अगर समाज में बलात्कार आज दुर्भाग्य से इतना सामान्य बना दिया गया है, तो इसके पीछे बॉलीवुड द्वारा दिखाई गई सामग्रियों को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। बॉलीवुड ने पूरे 70 और 90 के दशक में ‘जिस्मी की गर्मी’ की धारणा के जरिए रेप का सामान्यीकरण किया।

जब भी कोई बलात्कार या इसके प्रयास या फिर किसी महिला को बुरी नज़र से देखता है तो फिल्मों में इसी धारणा का प्रयोग किया गया। बलात्कार जैसे घृणित अपराध को ‘जिस्म की गर्मी’ का नाम देकर इसे नॉर्मल बना दिया गया। ट्विटर हैंडल ‘जेम्स ऑफ बॉलीवुड’ ने कई वीडियो के जरिए बताया है कि कैसे बॉलीवुड में बड़ी-बड़ी फिल्मों में भी बलात्कार को एक सामान्य घटना बना कर रख दिया गया।

साथ ही इन फिल्मों में महिलाओं को भी एक ऑब्जेक्ट की तरह पेश किया गया। इसी तरह की एक फिल्म है ‘आ गले लग जा (1973)’, जिसमें शशि कपूर अस्वस्थ शर्मिला टैगोर को ठीक करने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब कुछ भी काम नहीं आता है तो कपड़े उतारकर ‘जिस्म की गर्मी देते’ हैं। इसमें दिखाया जाता है कि ‘साथ में सो कर जिस्म की गर्मी ट्रांसफर की जा सकती है, जिससे उसकी जान बच सकती है।‘

इसके बाद शशि कपूर एक कम्बल डालते हैं और कपड़े उतार कर शर्मिला टैगोर के साथ सोते हैं और ‘प्यार’ करते हैं। यहाँ बड़े आराम से ”जिस्म की गर्मी’ के जरिए बलात्कार को ठीक बताने की कोशिश की गई है। बाद में शर्मिला टैगोर भी कहती हैं कि एक जान बचाने की कोई कीमत नहीं है, वो भी शशि की जगह रहती तो यही करती। इस तरह से बेहोश महिला के बलात्कार को फिल्म में सही ठहराया गया।

इसी तरह की एक फिल्म ‘बदले की आग (1982)’ में सुनील दत्त इसी तरह की एक परिस्थिति में पड़ते हैं। अभिनेत्री रीना रॉय को बुखार है और वो बेहोश होती हैं। जब बात नहीं बनती है तो वो अभिनेत्री के कपड़े उतार कर फेंक देते हैं और ‘जिस्म की गर्मी’ ट्रांसफर करते हैं। बाद में अभिनेता इसे सही ठहराता है और अभिनेत्री को भी इससे कोई समस्या नहीं होती है। यहाँ भी बलात्कार का महिमामंडन किया गया है।

इसी तरह की फिल्म ‘गंगा यमुना सरस्वती (1988)’ की एक फिल्म में अमिताभ बच्चन का किरदार मीनाक्षी शेषाद्रि के किरदार का बलात्कार करते हैं और इसके लिए भी इसी बहाने के जरिए इसे ठीक ठहराने की कोशिश होती है। 1991 में आई अक्षय कुमार की ‘सौगंध’ में यही दिखाया गया है। बाद में गुस्से में अभिनेत्री को अक्षय का दोस्त कहता है कि उसने उसकी जान बचाने के लिए ऐसा किया और यहाँ भी इसे ठीक ठहराया गया है।

इसी तरह की एक फिल्म ‘बेनाम बादशाह’ में अनिल कपूर जूही चावला का रेप करते हैं। उसे 5000 रुपए दिए गए होते हैं, अभिनेत्री की शादी की रात ही बलात्कार करने के लिए। इसमें एक डायलॉग है, “दाग मिट सकता है, अगर दाग लगाने वाला सिंदूर लगा दे“, जिसके जरिए रेप को जस्टिफाई किया गया है। फिल्मों में यह सिलसिला लंबे समय से चलता आ रहा है।

सुशांत ‘चरित्रहीन’, मीडिया ‘हरामखोर’… बिल में है कंगना, गुप्तेश्वर को ‘गुप्तरोग’: शिवसेना ने सामना से दिखाया स्तर

शिवसेना के मुखपत्र सामना ने आज (अक्टूबर 5, 2020) अपने संपादकीय में सुशांत सिंह राजपूत को असफल और चरित्रहीन कलाकार बताया है। अपने संपादकीय में सामना ने कहा है कि बीते दिनों बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे को महाराष्ट्र द्वेष का गुप्तरोग हो गया था और देश के कई अन्य ‘गुप्तेश्वरों’ को (जो महाराष्ट्र पुलिस या सरकार पर सवाल उठा रहे थे) भी यह रोग हो गया था।

एम्स की रिपोर्ट का हवाला देकर महाराष्ट्र सरकार और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वालों के खिलाफ इस संपादकीय में मानहानि का मामला दर्ज कराने की बात कही गई है। इसमें पूछा गया है कि जिस ‘एम्स’ पर देश के गृह मंत्री को विश्वास है, उस ‘एम्स’ ने सुशांत मामले में जो रिपोर्ट दी है, उसे अंधभक्त नकारेंगे क्या?

लेख में कहा गया कि कलाकार (सुशांत) की मृत्यु को 110 दिन बीत गए हैं और इस दौरान मुंबई पुलिस की खूब बदनामी की गई। इसलिए मुंबई पुलिस की जाँच पर जिन्होंने सवाल उठाए, उन राजनेताओं को और कुत्तों की तरह भौंकने वाले चैनलों को महाराष्ट्र से माफी माँगनी चाहिए। वहीं महाराष्ट्र सरकार उन लोगों के ख़िलाफ़ मानहानि का दावा करे, जिन्होंने उनकी छवि पर कलंक लगाने का प्रयास किया।

सामना में प्रकाशित लेख के मुताबिक सीबीआई जाँच से यह पता चला है कि सुशांत एक चंचल और चरित्रहीन कलाकार थे। इसके अलावा उसमें यह भी लिखा है कि अगर पुलिस को इसकी जाँच करने दी जाती तो शायद सुशांत और उसके परिवार की रोज बेइज्जती होती। इसलिए बिहार राज्य व सुशांत के परिवार को उन लोगों का आभार मानना चाहिए।

सामना का कहना है कि नीतीश कुमार ने इस मुद्दे को उठवाया और पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर को वर्दी में नचाया। बाद में आखिरकार वह नीतीश कुमार की पार्टी में शामिल हो गए, इससे उनकी वर्दी भी चली गई।

इस लेख में मीडिया वालों के लिए भी अपशब्द का इस्तेमाल हुआ है। लेख में कहा गया, “खुद को पत्रकारिता में हरिश्चंद्र का अवतार समझने वाले हकीकत में हरामखोर और बेईमान निकले। उन बेईमानों के विरोध में मराठी जनता को एक बड़ी भूमिका लेनी चाहिए।”

इस संपादकीय में प्रत्यक्ष रूप से बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे पर निशाना साध कर मुंबई पुलिस का बखान किया गया। इसमें लिखा गया, “मुंबई पुलिस ने जो जाँच की, उस सच को सीबीआई और ‘एम्स’ के डॉक्टर भी नहीं बदल सके। यह मुंबई पुलिस की जीत है। कई गुप्तेश्वर आए और गए। लेकिन मुंबई पुलिस की प्रतिष्ठा का झंडा लहराता रहा।”

इसमें साफ-साफ कहा गया कि अगर मृत्यु के बाद भी मुकदमा दायर करने की कोई कानूनी व्यवस्था होती तो कलाकार पर ड्रग्स मामले में मादक पदार्थ सेवन का मुकदमा चलाया जाता।

इसके बाद कंगना रनौत के पीओके वाले बयान की चर्चा भी इस लेख में है। इसमें पूछा गया:

“सुशांत की मौत को जिन्होंने भुनाया, मुंबई को पाकिस्तान और बाबर की उपमा दी, वह अभिनेत्री अब किस बिल में छिपी है? हाथरस में एक युवती से बलात्कार करके मार डाला गया। वहाँ की पुलिस ने उस युवती के शरीर का अपमान करके अंधेरी रात में ही लाश को जला डाला। इस पर उस अभिनेत्री ने आँखों में ग्लिसरीन डालकर भी दो आँसू नहीं बहाए। जिन्होंने उस लड़की से बलात्कार किया, वे उस अभिनेत्री के भाई-बंधु हैं क्या? जिस पुलिस ने उस लड़की को जलाया, वे पुलिसकर्मी उस अभिनेत्री के घरेलू नौकर हैं क्या?”

लेख के आखिर में महाराष्ट्र व मराठी मानुस के रास्ते में आने वाले इंसान को खुलेआम धमकी दी गई और कहा गया कि जो भी महाराष्ट्र व मराठी मानुस के रास्ते में आएगा, उसका बर्बाद होना तय है। आगे फिर बेईमान और हरामखोर कहकर हाथरस मामले पर चुप रहने वालों से ये कहा गया कि महाराष्ट्र की मर्दानगी की परीक्षा न लें।

दंगे कराने, हिन्दुओं में फूट डालने की साजिश: हाथरस पर मोदी-योगी सरकार को बदनाम करने के लिए इस्लामी मुल्कों की फंडिंग

हाथरस मामले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी बदनाम करने की बड़ी साजिश रची गई थी। ख़ुफ़िया एजेंसियों को इस मामले में बड़े सुराग हाथ लगे हैं। इसके लिए एमनेस्टी इंटरनेशनल के साथ-साथ कई इस्लामी मुल्कों ने भी फंडिंग की थी। रातोंरात ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नाम से एक वेबसाइट भी बना ली गई थी। इस वेबसाइट पर विरोध प्रदर्शन की आड़ में देश-प्रदेश में दंगे करने और उसके बाद उससे बचने के तौर-तरीके बताए गए थे।

अफवाहों का बाजार गर्म करने के लिए मीडिया के साथ-साथ सोशल मीडिया का भी भरपूर उपयोग किया गया था। ख़ुफ़िया एजेंसियों के अनुसार, ‘जस्टिस फॉर हाथरस’ नामक वेबसाइट को एक साजिश के तहत सुर्ख़ियों में लाया गया और हजारों लोग देखते ही देखते इससे जुड़ गए। इस वेबसाइट से जुड़े लोगों में से अधिकतर की आईडी फर्जी निकली है। इस वेबसाइट के डिटेल्स खँगालने के बाद इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।

‘न्यूज़ 18’ की खबर के अनुसार, जिस तरह से अमेरिका में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद दंगे भड़क गए थे, ठीक उसी तरह से उत्तर प्रदेश को दंगों की आग में झोंकने की तैयारी थी। मुस्लिम मुल्कों और इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों ने हिन्दू समुदाय में फूट डालने के लिए फंडिंग की थी। ये भी सामने आया है कि हाथरस पर बनाई गई वेबसाइट के पीछे सीएए विरोधियों और देशविरोधी तत्वों का हाथ था, जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से बदला लेना चाहते थे।

साथ ही कोरोना वायरस की आड़ में पुलिस-प्रशासन से बचने के ‘नुस्खे’ भी इस वेबसाइट पर बताए गए थे। इस पर बताया गया था कि चेहरे पर मास्क लगा कर दंगे करने के बाद पुलिस-प्रशासन से बचा जा सकता है क्योंकि आजकल मास्क लगाना अनिवार्य भी है। साथ ही हिन्दू समुदाय में फूट डालने और उत्तर प्रदेश को नफरत की आग में झोंकने की ‘तरकीबें’ समझाई गई थीं। वेबसाइट पर कई अन्य आपत्तिजनक सामग्रियाँ भी थीं।

इस वेबसाइट पर ‘वॉलंटियर्स’ की मदद से हेट स्पीच और भड़काऊ राजनीति करने के लिए कई सामग्रियाँ तैयार की गई थीं, ताकि देश विरोधी तत्व इसका फायदा उठा सकें। पूरी स्क्रिप्ट तैयार करने और इसकी फंडिंग में पीएफआई और एसडीपीआई जैसे संगठनों का नाम सामने आ रहा है। रविवार (अक्टूबर 4, 2020) की देर रात जैसे ही पुलिस का तलाशी अभियान और छापेमारी शुरू हुई, ये वेबसाइट अचानक से बंद हो गया।

इसके लिए फेक न्यूज़ की एक बड़ी खेप तैयार की गई थी। साथ ही फोटोशॉप्ड तस्वीरें भी डाली गई थीं, जिन्हें वायरल कर नफरत का माहौल बनाया जा सके। दंगे भड़काने के लिए छेड़छाड़ किए हुए विजुअल्स का इस्तेमाल भी किया गया था। इसमें ये भी समझाया गया था कि पुलिसकर्मियों को कैसे निशाना बनाया जाए। इसके लिए मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया के एकाउंट्स का भी इस्तेमाल किया गया।

इससे पहले खबर आई थी कि हाथरस के पीड़ित परिवार को सरकार के खिलाफ भड़काने की साजिश के मामले में सबूत के तौर पर कई ऑडियो टेप पुलिस के हाथ लगे हैं। जाँच एजेंसियों ने ऑडियो टेप का संज्ञान लेकर जाँच शुरू कर दी है। ऑडियो टेप में कुछ राजनीतिक दलों के साथ ही कुछ पत्रकारों की भी आवाज शामिल है। इन ऑडियो टेप से पीड़ित परिवारों को सरकार के खिलाफ भड़काने के लिए 50 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक का लालच दिया गया।

कॉन्ग्रेस MLA के 15 ठिकानों पर CBI की रेड, ईसा मसीह की सबसे बड़ी मूर्ति के लिए जमीन दे कर आए थे चर्चा में

कर्नाटक में पिछले साल ईसा मसीह की सबसे ऊँची मूर्ति का निर्माण करने के लिए जमीन व निजी कोष से 10.80 लाख रुपए देकर विवादों में आने वाले कॉन्ग्रेस विधायक डीके शिवकुमार के घर में सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को सीबीआई की रेड पड़ी। उन पर भ्रष्टाचार का आरोप है। सीबीआई ने उनके 15 ठिकानों पर रेड मारी।

इन ठिकानों में उनके भाई व सासंद डीके सुरेश का घर भी शामिल है। इसके अलावा उनके पूर्व निवास डोड्डालहल्ली, कनकपुरा और सदाशिव नगर में भी सीबीआई ने रेड मारी। अधिकारियों ने कहा कि इन 15 ठिकानों पर कम से कम 60 अधिकारी छापेमारी कर रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक, सीबीआई ने छापेमारी सुबह 6 बजे कनकपुरा निर्वाचन क्षेत्र के डोड्डालहल्ली गाँव में स्थित विधायक शिवकुमार के निवास से शुरू की थी। बता दें कि सीबीआई ने कर्नाटक सरकार में मंत्री रहे डीके शिवकुमार और अन्य लोगों के खिलाफ अनुपातहीन संपत्ति के अधिग्रहण के आरोप में मामला दर्ज किया है और इसी संबंध में सीबीआई की टीम कर्नाटक, दिल्ली और मुंबई के ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। 

सीबीआई रेड की सूचना पाते ही पार्टी नेताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर कहा, “मोदी और येदियुरप्पा की जोड़ी डराने-धमकाने का खेल अपनी कठपुतली सीबीआई के द्वारा डीके शिवकुमार के यहाँ छापेमारी करवा कर कर रही है, लेकिन ये हमें नहीं रोक सकता है। सीबीआई को येदियुरप्पा सरकार में भ्रष्टाचार की परतों का पता लगाना चाहिए। लेकिन, ‘रेड राज’ उनकी एकमात्र ‘कपटपूर्ण चाल’ है!”

उन्होंने कहा, “मोदी व येदियुरप्पा सरकार और भाजपा के फ्रंटल संगठन यानी सीबीआई-ईडी-इनकम टैक्स को पता है कि इस तरह के कुटिल प्रयासों से कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को न तो डराया जा सकता है और न ही झुकाया जा सकता है। हम लोगों के लिए लड़ने का संकल्प लेते हैं।”

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने भी इस सीबीआई छापे की निंदा की। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “भाजपा ने हमेशा से ही प्रतिशोधी राजनीति में लिप्त होने और जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की है। डीके शिवकुमार के घर पर सीबीआई का हालिया छापा उपचुनावों के लिए हमारी तैयारी को पटरी से उतारने का एक और प्रयास है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूँ।”

गौरतलब है कि पिछले साल कर्नाटक के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस के विधायक डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु से 50 किमी दूर अपने कनकपुरा विधानसभा क्षेत्र के लोगों को क्रिसमस के तोहफ़े के रूप में ईसा मसीह की सबसे ऊँची प्रतिमा बनाने के लिए 10 एकड़ ज़मीन दी थी। इसकी क़ीमत उन्होंने अपने निजी कोष से 10.80 लाख रुपए देकर चुकाई थी।

इस खबर के आने के बाद येदियुरप्पा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा स्वीकृत भूमि की फिर से जाँच करने का फ़ैसला किया था। राजस्व मंत्री आर अशोका ने कहा था कि आवंटित भूमि गोमला (चारागाह के तौर पर इस्तेमाल होने वाली सामुदायिक ज़मीन) है, न कि एक बंजर भूमि, जिसका दावा शिवकुमार ने किया था। उन्होंने कहा था, “मैंने रामनगर ज़िले के डिप्टी कमिश्नर को भूमि आवंटन पर एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।”

बता दें कि साल 2017 में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने डीके शिवकुमार के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। दिल्ली में उनके करीबी के ठिकाने से करीब 8 करोड़ रुपए नकद भी मिले थे। इसके बाद इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने चार्जशीट दायर की थी। इस चार्जशीट के आधार पर ईडी ने शिवकुमार के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था।

‘तुम बिना कपड़ों के सोती हो?’ – ईसाई मिशनरी स्कूलों में ‘उपदेश’ देने वाला डायरेक्टर, करता है छात्राओं का पीछा

ट्विटर यूजर जोएल गिफ़्ट्सन ने ट्विटर पर एक थ्रेड के जरिए ईसाई मिशनरी स्कूलों के बारे में बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने लिखा कि ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ाई करने वालों को ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ नामक संस्था के बारे में पता होगा – जो एक ईसाई मिशनरी संस्था है और दुनिया भर के ईसाई मिशनरी स्कूलों में उपदेश देता है। अब इसी ईसाई मिशनरी संस्था के एक अधिकारी द्वारा नाबालिग छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजने की बात सामने आई है।

उन्होंने लिखा कि सैम जयसुंदर तमिलनाडु में कई वर्षों तक ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ का डायरेक्टर था। ये कई ईसाई मिशनरी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं को आपत्तिजनक मैसेज भेजते हुए उन्हें वीडियो कॉल करने और अकेले में मिलने की माँग करते हुए उन्हें आलिंगन करने की इच्छा जता रहा था। उन्होंने बताया कि ये सब 2016 से ही चल रहा है और अब कई लड़कियों ने आगे आकर इसका खुलासा किया है।

अब तक उस पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई भी नहीं की गई है। कई छात्राओं और उनके माता-पिता ने आवाज़ उठाई है कि सैम जयसुंदर नाबालिग लड़कियों को आपत्तिजनक मैसेज भेजता है। वो भारत के ईसाई मिशनरी स्कूलों में जीसस और गॉस्पेल के बारे में पढ़ाता है। साथ ही उस पर लड़कियों पर अश्लील टिप्पणियाँ करने के आरोप भी हैं। लड़कियों ने कई बार उसकी शिकायत भी की लेकिन ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ का सदस्य होने के कारण उस पर कार्रवाई नहीं हुई।

कई लड़कियों ने सोशल मीडिया पर बताया है कि वो एक ‘पीडोफाइल’ और ‘प्रिडेटर’ है। लड़कियों ने कहा है कि इस मामले में दो तरफ का कोई पक्ष ही नहीं है क्योंकि कई लड़कियों ने उसके इस व्यवहार का सामना किया है। लड़कियों ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो सैम जयसुंदर का बचाव कर रहे हैं। इंस्टाग्राम और व्हाट्सप्प पर स्टोरीज लगा कर इन लड़कियों ने कहा कि जो भी पीड़ित आरोपित के खिलाफ सामने आ रही हैं, वो काफी बहादुरी का कार्य कर रहीं।

साथ ही जोएल गिफ्टसन ने कई मैसेजों का स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किया, जो ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ के लोगों ने उन लड़कियों को भेजे थे। एक मैसेज में संस्था का एक व्यक्ति एक लड़की को स्कर्ट में अपनी ‘सुंदर तस्वीर’ भेजने को कह रहा है। एक अन्य लड़की से सैम जयसुंदर ‘साइड वाली तस्वीर’ भेजने को कह रहा है। इसके अलावा एक लड़की को उसने लिखा, “तुमने मेरी तस्वीरें लाइक की हैं, जिससे मुझे ख़ुशी हुई। अब अपनी सबसे क्यूट सी तस्वीर मुझे भेजो।“

एक लड़की से उसने पूछा कि क्या तुम कभी नंगा (फिर समझाते हुए उसने फिर पूछा- ‘बिना कपड़ों के?’) सोती हो? साथ ही वो लड़कियों को ‘स्वीटी’ कहते हुए उनसे फ्री होकर उससे बात करने को कहता भी दिख रहा है। एक 14 वर्षीय लड़की से उसने पूछा कि क्या वो और उसके साथी लड़का-लड़की एक-दूसरे को गले लगाते हैं? सैम ने नाबालिग से पूछा कि क्या किसी ने उसे आलिंगन में लिया है या किस किया है?

9वीं वर्ग की एक छात्रा से उसने कहा कि जब बारिश के दिनों में वो खेल रही थी तो उसके कपड़े भींग गए थे और उसके शरीर से चिपक रहे थे। एक लड़की को अपने बारे में बताते हुए उसने कहा कि चौथी वर्ग की एक छात्रा ने उसे गले लगाया था और किस भी किया था। उसने कहा कि उस लड़की के पिता नहीं हैं, वो उसे पसंद आई। एक छात्रा से उसने कहा कि वो ‘छोटे स्कर्ट्स में’ एकदम क्यूट दिख रही थी।

वो छात्राओं को अपने फोन नंबर देकर उन्हें कॉल करने को भी कहता था और कहता था कि वो उसकी आवाज़ सुनना चाहता है। साथ ही एक रुबेन क्लेमेंट नामक व्यक्ति का भी स्क्रीनशॉट वायरल हुआ है, जो ‘स्क्रिप्चर यूनियन’ से ही जुड़ा हुआ है। एक मैसेज में वो एक लड़की से पूछ रहा है कि उसके ‘पसंदीदा नाइट ड्रेस’ कौन सा है। वहीं सैम लड़कियों से उनके ‘बॉयफ्रेंड’ के बारे में भी पूछा करता था।

एक लड़की से उसने पूछा कि वो अपने पिता के साथ क्यों सोई हुई है? एक अन्य छात्रा से उसने ऐसी ड्रेस में तस्वीर भेजने को कहा, जिसमें उसका टीशर्ट ‘एक कंधे से नीचे’ लटक रहा हो। साथ ही उसने पूछा कि उसने अंतिम बार किस कब किया था? वो कई महीनों और सालों तक लड़कियों के पीछे पड़ा रहता था और उन्हें मैसेज भेजता रहता था। अधिकतर मैसेजों में वो तस्वीरों की डिमांड्स ही करता था।

बता दें कि मिशनरी स्कूलों में और चर्चों में यौन शोषण की कई ख़बरें अक्सर सामने आती रहती हैं और अधिकतर मामलों में आरोपित इतने पॉवरफुल होते हैं कि उन पर कार्रवाई नहीं होती। केरल की नन सिस्टर लूसी कलाप्पुरा ने अपनी आत्मकथा में खुलासा किया था कि पादरी और बिशप अपने पदों का दुरूपयोग करते हुए ननों के साथ जबरदस्ती यौन सम्बन्ध बनाते हैं। वो इसके लिए कई ननों की जबरन सहमति भी लेते हैं।

BJP नेता मनीष शुक्ला की गोली मार कर हत्या, बंगाल BJP ने कहा – ‘TMC का अंत निश्चित’

पश्चिम बंगाल में एक बार फिर भाजपा नेता की हत्या की घटना सामने आई है। खबर है कि बीजेपी के पार्षद व वकील मनीष शुक्ला की रविवार (अक्टूबर, 4 2020) को उत्तर परगना जिले में गोली मार कर हत्या कर दी गई। यह घटना टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के सामने हुई। कहा जा रहा है कि कुछ अज्ञात बदमाशों ने इसे अंजाम दिया। हालाँकि, भाजपा ने इसका आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगाया है।

घटना के बाद से इलाके में तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। इस मामले के सामने आने के बाद बंगाल की भाजपा ईकाई ने बैरकपुर में बंद का ऐलान किया है। वहीं राज्यपाल जयदीप धनखड़ ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर बात करने के लिए डीजीपी समेत कई आला अधिकारियों को राजभवन बुलाया है। वहीं ममता सरकार को भी समन भेजा। साथ ही पश्चिम बंगाल के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) हरि कृष्ण द्विवेदी को भी तलब किया है।

राज्यपाल ने इस घटना के मद्देनजर ट्विटर पर भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा, “पश्चिम बंगाल में एक और भाजपा नेता की हत्या। टीटागढ़ में पार्षद मनीष शुक्ला को गोली मारी गई। टीएमसी विरोधियों को डराना और उन्हें मारना चाहती है। उनके पाँव के नीचे से जमीन खिसक रही है। करीब 110 भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है। बेहतर बंगाल के लिए शांतिपूर्ण संघर्ष चलता रहेगा।”

वहीं, कैलाश वियजवर्गीय ने इस संबंध में सीबीआई जाँच की माँग की। उन्होंने कहा- “बीजेपी वर्कर मनीष शुक्ला को टीटागढ़ पुलिस स्टेशन (उत्तरी 24 परगना जिला) के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस मामले की जाँच सीबीआई के द्वारा की जानी चाहिए।”

पार्टी की बंगाल ईकाई ने भी इस घटना पर अपने अकॉउंट से टीएमसी पर निशाना साधा। भाजपा बंगाल के ट्विटर पर लिखा गया:

बंगाल अब ऐसी जगह बन चुका है, जहाँ हत्याएँ सामान्य हैं। टीटागढ़ से भाजपा पार्षद मनीष शुक्ला को टीएमसी गुंडों ने मार गिराया। TMC ये हत्याओं की श्रृंखला तुम्हारे निश्चित अंत की ओर संकेत करती है।

जानकारी के मुताबिक, भाजपा पार्षद पर हमला करने वाले दोनों हमलावर मोटरसाइकिल पर सवार थे और मास्क के साथ ही हेलमेट पहने हुए थे। उन्होंने मनीष शुक्ला पर पीछे से कई फायर किए और जब वो गिर गए तो उनके सीने में भी गोलियाँ दागी।

ये सब कुछ टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के पास हुआ, जहाँ से उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हमले में मनीष को बचाने की कोशिश कर रहे उनके दो साथी भी घायल हो गए।

उल्लेखनीय है कि पार्षद मनीष शुक्ला बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र के स्थानीय सांसद अर्जुन सिंह के करीबी थे और दो साल पहले उनके साथ ही बीजेपी में शामिल हो गए थे। उससे पहले दोनों टीएमसी में थे।

बता दें कि 4 अक्टूबर की इस घटना से पहले सितंबर में बंगाल के गूगली जिले में भी एक भाजपा समर्थक गणेश रॉय की मौत का मामला आया था। भाजपा नेता दिलीप घोष और कैलाश विजयवर्गीय ने इसका इल्जाम तृणमूल पर लगाया था और गणेश की मौत को हत्या बताया था।

‘क्राइम सीन को बर्बाद किया, ऑटोप्सी रिपोर्ट में कई खामियाँ’: सुशांत मामले में डेढ़ महीने में पलटे AIIMS के डॉ सुधीर

‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ ने सुशांत सिंह राजपूत के मामले में एम्स के पैनल की अध्यक्षता कर रहे डॉक्टर सुधीर गुप्ता का एक टेप जारी कर के बड़ा खुलासा किया है। उस ऑडियो टेप में डॉक्टर सुधीर गुप्ता कहते दिख रहे हैं कि क्राइम सीन ‘कंटेमिनेट’ कर दिया गया था और फॉरेंसिक रूप से जाँच के लिए कोई विश्वस्त साक्ष्य उपस्थित नहीं थे। अब ‘रिपब्लिक’ ने पूछा है कि कुछ हफ्ते पहले के इस बयान से वो पलट कैसे गए?

चैनल ने कहा कि आज सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले पर तब सवाल उठाने वाले डॉक्टर सुधीर गुप्ता अब इसे आत्महत्या कैसे बता सकते हैं? वायरल टेप में डॉक्टर गुप्ता कहते दिख रहे हैं कि जब तक क़ानूनन फैसला न हो जाए, तब तक सबूतों को बिना छेड़छाड़ किए रखने की जिम्मेदारी होती है। उस समय उन्होंने कहा था कि सुशांत से जुड़े सारे दस्तावेज अभी नहीं भेजे गए हैं, जिनका वो लोग इंतजार कर रहे हैं।

तब डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने कहा था कि सबूत आगे की जाँच के लिए उपयुक्त नहीं हैं और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कई खामियाँ हैं, लेकिन अब मीडिया में उनके हवाले से अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं कि सुशांत की मौत आत्महत्या है। साथ ही चैनल ने उनका एक व्हाट्सप्प चैट भी निकाला है, जिसमें वो दावा कर रहे हैं। वकील विकास सिंह ने भी कहा है कि सुशांत की बहन द्वारा लिए गए फोटोग्राफ्स को देख कर डॉक्टर गुप्ता ने कहा था कि ये हत्या का मामला है, आत्महत्या हो ही नहीं सकता।

ये सारा स्टिंग ‘रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के पत्रकार प्रकाश सिंह ने किया। इस पर बोलते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि इस टेप को दिखाने के लिए वो इसलिए बाध्य हो गए क्योंकि 43 दिन पहले (अगस्त 22, 2020) एक डॉक्टर ने ऑटोस्पी रिपोर्ट में इतनी खामियाँ देखीं और बताया कि उनके आधार पर रिपोर्ट तैयार नहीं की जा सकती। तब डॉक्टर गुप्ता ने कहा था कि सारे सबूतों को मिटा दिया गया। इसी को लेकर अर्नब ने पूछा कि अब सबूत वापस कैसे आ गया?

अर्नब गोस्वामी ने चुनौती दी कि अब डॉक्टर सुधीर गुप्ता ये कह कर दिखाएँ कि ये उनकी आवाज़ नहीं है। डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने ये भी कहा था कि क्राइम सीन को यथावत नहीं रखा गया और इसके साथ छेड़छाड़ हुई है। बकौल अर्नब गोस्वामी, डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने उस समय ये कहा था कि जो डिटेल्स हैं, उनके आधार पर निर्णयात्मक रिपोर्ट देना संभव नहीं है, क्योंकि क्राइम सीन ‘फॉरेंसिक्ली सुइटेबल’ नहीं है।

डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने ये भी पूछा था कि सुशांत के मृत शरीर को सीधे मॉर्चरी में क्यों ले जाया गया, उन्हें इमरजेंसी ट्रीटमेंट क्यों नहीं दिया गया? साथ ही एक न्यूज़ चैनल पर निशाना साधते हुए अर्नब गोस्वामी ने कहा कि ‘तक’ वाले दलाल लोग रिया चक्रवर्ती के पीआर मशीनरी हैं। डॉक्टर सुधीर गुप्ता ने तब प्रकाश सिंह से ये भी पूछा था कि मौत के समय को लेकर ऑटोप्सी रिपोर्ट में कुछ लिखा ही नहीं है – ऐसा चैनल ने दावा किया।

एनडीटीवी सहित कई मीडिया चैनलों और खबरिया पोर्टलों ने एम्स के जाँच पैनल की अगुवाई कर रहे डॉक्टर सुधीर गुप्ता के हवाले से खबर प्रकाशित की थी कि सुशांत मामले की गुत्थी सुलझ गई है और उनकी रिपोर्ट में आया है कि ये हत्या नहीं, आत्महत्या था। इससे 1 दिन पहले अर्नब गोस्वामी ने इन ख़बरों को ‘प्लांटेड स्टोरीज’ करार दिया था। उन्होंने पूछा था कि ये चीजें ऑन रिकॉर्ड क्यों नहीं बोली जा रही?

‘युवाओं में बढ़ती उत्सुकता’ और ‘इंटरनेट’ से बढ़ रहे रेप के मामले: सबसे ज्यादा बलात्कार वाले राजस्थान के DGP

राजस्थान के डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने राज्य में होने वाली बलात्कार की घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए बेतुका बयान दिया है। राजस्थान में बलात्कार की लगातार बढ़ती घटनाओं के पीछे का कारण बताते हुए डीजीपी ने ‘इंटरनेट’ और ‘युवाओं में बढ़ती उत्सुकता’ को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि आज की युवा जनरेशन रिलेशनशिप को ‘एक्सप्लोर’ कर रही है, इसीलिए ऐसी घटनाएँ हो रही हैं।

डीजीपी ने कहा कि उनका अनुभव ये कहता है कि पिछले कुछ वर्षों में न सिर्फ राजस्थान, बल्कि पूरे उत्तर भारत में हिंसक अपराध की घटनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इसके बहुत सारे कारण हैं।

उन्होंने कहा कि कुल मिला कर फोकस इस बात पर होना चाहिए कि बच्चों को किस प्रकार से शिक्षित किया जाए। उन्होंने कहा कि लड़कियों में आत्मविश्वास बढ़ा कर उन्हें बताना होगा कि कैसे वो अपने साथ होने वाली दुर्घटनाओं को ‘अवॉयड’ करें। राजस्थान डीजीपी भूपेंद्र सिंह यादव ने रेप के बढ़ते मामलों पर कहा,

“युवाओं की बढ़ती संख्या भी इसका कारण हो सकती है, बेरोजगारी भी हो सकती है, कुछ इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्रियाँ हैं, जिन्हें देख कर बच्चे प्रेरणा ले रहे हैं – वो भी इसका कारण हो सकता है। क़ानून कहता है कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे आपस में सम्बन्ध नहीं बना सकते हैं। ये अपराध की श्रेणी में आ जाता है। लेकिन बच्चों में क्यूरिऑसिटी है, वो मित्रता भी करते हैं। कई बार साथ निकल भी जाते हैं। ऐसे मामले भी आजकल काफी हो गए हैं।”

डीजीपी ने कहा कि दुर्घटना होने की स्थिति में लड़कियों को किससे संपर्क करना है, कैसे करना है – उन्हें ये सब बताना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि लड़कों को और उनके परिवारों को भी समझाना पड़ेगा। इससे पहले उन्होंने बताया था कि राजस्थान सरकार बलात्कार के मामलों में तेज़ी से एक्शन ले रही है और कुछ NGO के साथ मिल कर यौन हिंसा के विरोध में माहौल बनाने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है।

उधर भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान के सभी जिलों में सोमवार (अक्टूबर 5, 2020) को राज्य में महिलाओं, बच्चों और दलितों के खिलाफ बढ़ रहे अत्याचार और गैंगरेप की घटनाओं के विरोध में प्रदर्शन की योजना बनाई है। सुबह 11 बजे सभी जिलों के डीएम को भाजपा नेताओं की तरफ से ‘हल्ला बोल’ कार्यक्रम के तहत ज्ञापन सौंपा जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियाँ जयपुर स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय से सविल लाइंस फाटक तक पैदल मार्च करेंगे।

NCRB की सूची के मुताबिक, सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएँ राजस्थान में सामने आई हैं। वहाँ पिछले साल 5997 मामले दर्ज किए गए। यानी प्रतिदिन का औसत देखा जाए तो प्रदेश में हर दिन 16 रेप की घटना हुई। इतना ही नहीं, प्रदेश में प्रति लाख जनसंख्या पर अपराध की दर 15.9 है। साल 2019 में भारत में रेप के 30,641 मामले दर्ज किए गए थे।

2019 में राजस्थान में आए बलात्कार के मामलों में 1313 मामले ऐसे थे, जिनमें पीड़ित की उम्र 18 वर्ष से कम थी, वो नाबालिग थे। दिल्ली के बाद सबसे ज्यादा जयपुर में ही 517 मामले दर्ज किए गए। प्रति एक लाख की जनसंख्या में राजस्थान की राजधानी में बलात्कार के 35.6 मामले सामने आए, जो बड़े शहरों में सबसे ज्यादा है। इसी तरह 2017 में राज्य में बलात्कार के 3305 और 2018 में 4335 मामले सामने आए थे।

2017 से 2018 के बीच बलात्कार के मामलों में 2.4% की बढ़ोतरी हुई लेकिन 2018-19 में 4.2% की उछाल आई, जो पिछली वृद्धि की तुलना में लगभग दोगुनी थी। राजस्थान यूनिवर्सिटी में सोशियोलॉजी डिपार्टमेंट की हेड रश्मि जैन ने TOI को बताया कि राज्य के लोग अभी भी उसी सामंती सोच में रह रहे हैं, जिसमें महिलाओं को ऑब्जेक्ट की तरह ट्रीट किया जाता है। उन्होंने कहा कि रेप का शिक्षा से भी कोई सीधा सम्बन्ध नहीं क्योंकि सबसे ज्यादा साक्षरता दर वाले केरल में भी काफी मामले हैं।

कासिम ने 13 साल के बच्चे को मारते-मारते जान से मार दिया, दफना भी दिया… आरोप सिर्फ चॉकलेट चुराने का

बिहार के मधुबनी जिले के हरलाखी थानांतर्गत सोठगाँव में एक 13 वर्षीय बच्चे को बेरहमी से पीट-पीट कर मार देने का मामला सामने आया है। बच्चे पर चॉकलेट चोरी का आरोप था। उसकी पहचान गाँव के ही हवीव राइन के पुत्र मोहम्मद अहमद राइन के रूप में हुई। उसे मारने का आरोप गाँव के ही अन्य लोगों पर है।

हत्या के इस मामले में शिकायत घटना के चार दिन बाद हुई। आरोपितों ने बच्चे को मारकर तब तक दफन कर दिया था। शिकायत के बाद बच्चे के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए कब्र से निकाला गया और मुख्य आरोपित कासिम को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमद 30 सितंबर को अपने कुछ दोस्तों के साथ खेलने के लिए घर से निकला था। उसके पिता उस समय साबुन बेचने बाजार गए थे और माँ खेत में घास काटने गई थी।

दोस्तों के साथ खेलने के दौरान वह कासिम नाम के व्यक्ति के घर की ओर चला गया। जहाँ उसे कासिम और उसके घर वालों ने दुकान में चोरी का आरोप लगाकर पकड़ लिया और उसे खंबे से बाँधकर बुरी तरह पीट दिया, इससे बच्चे की मौत गई।

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स्थानीय समाचारों की मानें तो घटना के बाद सभी आरोपित बच्चे के घर गए और उसके घर वालों से माफी माँगते हुए मुआवजा देने की बात कही। इसके बाद बच्चे को भी कब्र में दफना दिया गया। हालाँकि, चार दिन बाद इस मामले में शिकायत हुई और बच्चे के पिता ने आरोप लगाया कि उन लोगों को इतने टाइम तक घर में कैद करके रखा गया था। अपनी शिकायत में बच्चे के पिता ने मो कासिम राइन, मो नाजिम राइन, नसीम राइन, मो जिलानी राइन, दाऊद राइन, रुवानी राइन व रजाउल्लाह राइन के खिलाफ FIR करवाई।

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपित मोहम्मद कासिम को गिरफ्तार किया। वहीं, एसपी के निर्देश पर मजिस्ट्रेट के सामने शव को कब्र से बाहर निकाला गया और बाद में पोस्टमॉर्टम के लिए भी भेजा गया। जानकारी के अनुसार, बच्चे को पीट-पीट कर मारने के बाद कासिम ने देखा कि बच्चे की मौत हो गई, तो वह बच्चे को उसके घर में छोड़ कर भाग आया। 

शव को देख कर परिजन ने पुलिस को बुलाना चाहा, तो समाज के कुछ लोगों ने कानूनी पचड़े में नहीं पड़ने की सलाह देते हुए शव को दफना दिया। साथ ही परिजनों के घर से निकलने पर पाबंदी लगा दी।

कासिम का आरोप है कि अहमद ने उसकी परचून की दुकान से चॉकलेट चुराई थी, जिसके बाद उसने बच्चे के साथ मारपीट की। थानाध्यक्ष प्रेम लाल पासवान ने इस मामले में बताया कि गिरफ्तार करने के बाद कासिम को जेल भेज दिया गया है। वहीं अन्य आरोपितों की तलाश जारी है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों हरलाखी थाना क्षेत्र के ही एक गाँव से एक बच्ची के अपहरण और धर्म-परिवर्तन का मामला सामने आया था। इस मामले में पुलिस ने करीब 20 दिनों बाद लड़की को अहमदाबाद से बरामद किया था। साथ ही गाँव के ही मो साबिर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

‘तुम डो# हो, विधानसभा में नहीं घुसने देंगे’ – तेजस्वी और तेज प्रताप पर FIR, दलित नेता की हत्या का मामला

बिहार में 37 वर्षीय दलित नेता शक्ति मलिक की हत्या के मामले में तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को आरोपित बनाया गया है। दलित नेता शक्ति मलिक की रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को पूर्णिया स्थित उनके आवास के बाहर ही गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। वो राष्ट्रीय जनता दल के ही नेता थे। मृतक नेता की पत्नी ने भी आरोप लगाया है कि उनकी हत्या राजनीतिक हत्या है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।

इस मामले में राजद दलित सेल के अध्यक्ष अनिल कुमार साधु, अररिया से पार्टी के नेता कालो पासवान, सुनीता देवी और एक अन्य राजद नेता को भी इस मामले में आरोपित बनाया गया है। शक्ति मलिक को राजद सुप्रीमो लालू यादव ने पार्टी से निकाल दिया था, जिसके बाद उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाने की ठानी थी। पुलिस इस हत्याकांड के खुलासे के लिए तलाशी अभियान चला रही है।

शक्ति मलिक ने एक वीडियो के माध्यम से आरोप लगाया था कि राजद नेता तेजस्वी यादव ने रानीगंज सीट से पार्टी का टिकट देने के एवज में उनसे 50 लाख रुपए का डोनेशन माँगा था। रविवार को तड़के सुबह 3 बजे मास्क पहने 3 अपराधी उनके घर में घुसे और उनकी गोली मार कर हत्या कर दी। उस समय घर में सिर्फ उनकी पत्नी, बच्चे और एक ड्राइवर थे। उन्हें सदर अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

के हाट पुलिस स्टेशन के एसएचओ सुनील कुमार मंडल ने कहा कि क्राइम सीन से एक देशी पिस्टल और एक खाली कारतूस बरामद किया गया है। एसपी विशाल शर्मा और सदर डीएसपी आनंद पांडेय ने भी घटनास्थल का दौरा किया। शक्ति मलिक को तीन गोलियाँ लगी थीं। पुलिस ने बताया कि हर एंगल से इस मामले की जाँच की जा रही है। क्राइम सीन से एक लोडेड हथियार की बरामदगी भी हुई है।

अब जब बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में 1 महीने के आसपास बचे हुए हैं, जदयू ने राजद पर निशाना साधते हुए कहा है कि तेजस्वी यादव ने अपना असली रंग देश के सामने दिखा दिया है। शक्ति मलिक ने अपने वीडियो में ये भी आरोप लगाया था कि तेजस्वी यादव ने उनकी जाति को लेकर उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनका कहना था कि वो राजद दलित प्रकोष्ठ के प्रमुख के साथ पूर्णिया दौरे पर आए थे, तब उन्होंने ऐसा किया था।

वीडियो में शक्ति मलिक के बयान के अनुसार, तेजस्वी यादव ने उन्हें ‘डो#’ जाति का बताते हुए कहा था कि तुम्हें विधानसभा नहीं जाने देंगे। उन्होंने अनिल कुमार साधु पर आरोप लगाते हुए कहा था कि उन्होंने यह कह कर धमकी दी थी, “राजद में एक से बढ़ कर एक क्रिमिनल सब है। जब तुम क्षेत्र में जाओगे या अच्छा काम करोगे तो मार कर फेंकवा दिए जाओगे।” जदयू के कई नेताओं ने इस हत्याकांड के लिए लालू परिवार पर निशाना साधा है।

बता दें कि बिहार में जब से विधानसभा चुनाव का ऐलान हुआ है, तब से हत्या की यह कोई पहली वारदात नहीं है। कुछ दिनों पहले भारतीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष राजेश कुमार झा उर्फ राजा बाबू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राजेश कुमार झा की पटना में हत्या हुई थी। वह बेउर थाना क्षेत्र के अंतर्गत तेज प्रताप नगर में अपने घर के नज़दीक टहलने के लिए निकले थे, तभी दो पहिया वाहन सवार नकाबपोश अपराधी उनके नज़दीक आए और उनकी कनपटी पर गोली मार दी।