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विदेशी लेखक वीजा पर यहाँ आता है और भारत के ही खिलाफ प्रोपेगेंडा फैलाता है: वीजा रद्द करने की माँग

लेखिका मोनिका अरोड़ा ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय को इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल की करतूतों को लेकर पत्र लिखा है। स्कॉटिश इतिहासकार विलियम डेलरिम्पल बिजनेस वीजा लेकर भारत में ही डेरा डाले रहते हैं और दिल्ली में छुट्टियाँ मनाते हैं। मोनिका अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि भारत में वीजा लेकर रहने वाले लोगों के लिए कुछ नियम-क़ानून हैं लेकिन विलयम डेलरिम्पल लगातार जानबूझ कर यहाँ के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया है कि विलियम सार्वजनिक रूप से ऐसे नैरेटिव बनाने में लगे रहते हैं और इंटरव्यूज देते हैं, जिनका भारत के लोकतांत्रिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं से सम्बन्ध है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे सीएए के खिलाफ चल रहे उपद्रव में हिस्सा लेने वाले कुछ विदेशी नागरिकों को वापस भेजा गया था। आईआईटी मद्रास में पढ़ाई कर रहा जर्मन नागरिक जैकोब लिंथेंडल, कोच्चि में रह रही नॉर्वे की जेनी-मेटी-जोहानसन और कोलकाता में रह रही बांग्लादेश की अफसर मीम को देश छोड़ने कहा गया था।

मोनिका अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि विलियम डेलरिम्पल अपने ट्विटर हैंडल से लगातार सीएए विरोधी बयान देते रहते हैं, अर्द्धसत्य वाली सूचनाएँ डालते हैं, भारत सरकार के खिलाफ टिप्पणी करते हैं, भारतीय नागरिकों के खिलाफ टिप्पणी करते रहते हैं। इसी तरह के एक ट्वीट में उन्होंने कैलिफोर्निया में रह रहे एक व्यक्ति से कहा था कि वो भारत आकर देखे कि सीएए से भारत में कैसी स्तिथि उत्पन्न हो गई है।

मोनिका अरोड़ा हिन्दू-विरोधी दंगों पर “Delhi Riots 2020: The Untold Story” नामक पुस्तक लिखी थी, जिसका प्रकाशन रुकवाने के लिए लिबरल गैंग ने पूरा जोर लगाया था। ब्लूम्सबरी पब्लिकेशन पर दबाव बना कर इस किताब के प्रकाशन को रोक दिया गया था, जिसके बाद ‘गरुड़ प्रकाशन’ ने ये जिम्मेदारी संभाली। किताब को ऑनलाइन रिलीज किया गया था। अरोड़ा का कहना है कि विलियम ने माना है कि प्रकाशन रुकवाने में उनकी प्रमुख भूमिका थी।

इस मामले में सितम्बर 3, 2020 को दिल्ली में आपराधिक मामला दर्ज कराया जा चुका है, जिसकी जाँच चल रही है। मोनिका अरोड़ा ने पत्र में पूछा है कि एक विदेशी होने के बावजूद विलियम डेलरिम्पल के पास क्या अधिकार है कि वो भारत के संविधान द्वारा उन्हें दिए गए अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का हनन करें? अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने डेलरिम्पल के ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए, जिसमें वो पुस्तक का प्रकाशन रुकवाने की बात कर रहे हैं।

विलियम डेलरिम्पल ने रुकवाया था मोनिका अरोड़ा की पुस्तक का प्रकाशन!

साथ ही उन्होंने आरोप लगया कि विलियम डेलरिम्पल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी पूर्व में कई लेख लिखे हैं, जिनमें उन्होने गुजरात दंगों में उनका रोल होने की बात की है। जबकि, कोर्ट इस मामले में उन्हें क्लीन चिट दे चुका है। मई 2014 में लिखे अपने एक लेख में उन्होंने लिखा था कि नरेंद्र मोदी ‘2002 नरसंहार में फँसे’ हुए हैं और उन्हें अब भारत का पीएम चुना गया है। इस लेख में उन्होंने पूछा था कि मोदी खतरनाक फासिस्ट हैं या फिर सुधारक?

इस लेख में विलियम डेलरिम्पल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को भारत-पाक विभाजन के दौरान नरसंहार का दोषी करार दिया है। मोनिका अरोड़ा ने आरोप लगाया है कि इस लेख में कई ऐसी बातें हैं, जिनके माध्यम से लेखक ने एक खास विचारधारा को प्रमोट किया है, जो भारतीय संवैधानिक प्रक्रिया और यहाँ संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों पर भरोसा नहीं करता। उन्होंने इसकी तुलना रूस में पुतिन के चुनाव से करते हुए लिखा था कि भारत के लोगों ने एक गैंबल किया है।

जम्मू कश्मीर पर फैलाया भारत-विरोधी प्रोपेगंडा

हाल ही में विलियम डेलरिम्पल ने एक कार्टून के जरिए एक आम कश्मीरी को रस्सियों से बँधा हुआ दिखाया था और कहा था कि उसकी आवाज़ भारत में कोई नहीं सुन रहा। ऐसा उन्होंने अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के निर्णय के खिलाफ किया था। मोनिका अरोड़ा ने ध्यान दिलाया है कि फॉरेनर्स एक्ट की धारा-14 के तहत कोई भी विदेशी अगर भारतीय वीजा के तय नियमों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो उसे 5 वर्षों से अधिक की जेल हो सकती है।

विलियम डेलरिम्पल ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल’ के डायरेक्टर भी हैं और उन्होंने इस बार फेस्ट में पाकिस्तानी अतिथियों की अनुपस्थिति के लिए भारत सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि चूँकि फेस्ट कॉन्ग्रेस के शासन वाले राजस्थान में हो रहा है, इसीलिए इस मामले में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। मोनिका अरोड़ा ने ‘मीरा सिंह फार्महाउस’ के मालिक की भी जाँच करने को कहा है, जहाँ वो हमेशा रुकते हैं।

‘जयपुर लिट् फेस्ट’ में पाकिस्तानियों को वीजा न मिलने पर डेलरिम्पल ने भारत सरकार को ठहराया जिम्मेदार

मोनिका अरोड़ा ने माँग की है कि इन सभी चीजों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार को न सिर्फ विलियम डेलरिम्पल का वीजा रद्द कर के उन्हें देश से निकाल बाहर करना चाहिए, बल्कि भविष्य में भी वो भारत न आ पाएँ, इसीलिए उन्हें ब्लैकलिस्ट भी किया जाना चाहिए। उन्होंने पत्र की एक कॉपी गृह मंत्रालय के इमीग्रेशन कमिश्नर को भी भेजी है। साथ ही सबूत के रूप में वीडियो, लेख व ट्वीट्स के लिंक्स भी एम्बेड किए हैं।

आतिश तासीर ने मोनिका अरोड़ा की दिल्ली दंगों पर आने वाली पुस्तक को सत्ता का प्रोपेगेंडा करार देते हुए कहा था कि विलियम डेलरिम्पल ने इसके प्रकाशन पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभाई है, जिसके लिए वो उनके आभारी हैं। उन्होंने तो यहाँ तक कहा था कि स्कॉटिश लेखक के बिना ये संभव नहीं हो पाता। मोनिका अरोड़ा की इस पुस्तक में जाँच और इंटरव्यूज के हवाले से दिल्ली दंगों का विश्लेषण किया गया है।

चीन के नेपाल की जमीन पर कब्जे और निर्माण के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग: बैनर-पोस्टर के साथ ‘बैक ऑफ चाइना’ के लगे नारे

भारत और चीन का सीमा विवाद अभी थमा नहीं कि चीन कि चीन की विस्तारवाद की नापाक हरकत नेपाल में भी शुरू हो गया। रिपोर्ट्स की मानें तो चीन ने नेपाल की जमीन पर कब्जा कर लिया है।

चीन के इस कब्जे के खिलाफ काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के बाहर युवाओं ने विरोध प्रदर्शन करते हुए चीन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने बैनर के साथ ‘चीन वापस जाओ’ और ‘चीन पीछे हटो’ के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों के पोस्टर्स पर नेपाल में हो रहे चीनी निर्माण की तस्वीरें थीं।

नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चीन ने हुमला जिले में 11 इमारतों का निर्माण किया है, जिसमें एक बॉर्डर पिलर नहीं है। इनमें से एक इमारत में चीनी फौज के जवान रह रहे हैं, बाकी की इमारतें खाली हैं। नाम्खा ग्रामीण नगर पालिका के अध्यक्ष बिष्णु बहादुर तमंग ने काठमांडू पोस्ट को बताया, “चीनी पक्ष ने दावा किया कि जिन क्षेत्रों में घर बने हैं, वे चीनी क्षेत्र में आते हैं।”

हालाँकि, नेपाली पक्ष का दावा है कि 11 नंबर का सीमा स्तम्भ ही गायब कर चीन ने नेपाली भूमि पर अतिक्रमण करते हुए इन भवनों का निर्माण किया है। जब नेपाली अधिकारी वहाँ पहुँचे तो चीन ने इमारत वाली जगह पर बात करने तक से इनकार कर दिया।

चीन के सैन्य अधिकारियों ने बताया कि सीमा संबंधी कोई भी बात सिर्फ सीमा क्षेत्र में ही होगी। इधर चीनी दूतावास के तरफ से भी एक बयान जारी कर कहा गया है कि चीन के द्वारा नेपाल की भूमि अतिक्रमण कर इमारत बनाए जाने की खबर झूठी है। नेपाल के पास अगर प्रमाण है तो चीन बातचीत के लिए तैयार है।

नेपाल का गृह मंत्रालय जल्द ही इस पर एक रिपोर्ट जारी कर सकता है। गृह मंत्रालय की एक टीम इस क्षेत्र का दौरा करने के बाद ये रिपोर्ट तैयार करेगी। नेपाल में चीनी दूतावास की ओर से इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई है। काठमांडू में चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा, “चीन और नेपाल मित्रवत पड़ोसी हैं। चीन ने हमेशा नेपाल की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया है।”

उन्होंने आगे कहा कि मीडिया ने जिन इमारतों का उल्लेख किया है, वे चीनी क्षेत्र में हैं और इसका सत्यापन किया गया है। नेपाल एक बार फिर अपनी ओर से सत्यापन करे। इस मामले में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने आगे कहा कि चीन और नेपाल का कोई सीमा विवाद नहीं है। दोनों पक्ष सीमा से जुड़ें मसलों पर हमेशा संपर्क में रहते हैं। 

पिछले दिनों खबर आई थी कि हुमला के लापचा-लिमी क्षेत्र में चीन ने अब तक आठ इमारतें बना ली थी। बावजूद इसके भारतीय इलाकों पर दावा ठोकने वाले नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने अपनी जमीनों पर हो रहे अतिक्रमण पर चुप्पी साधे रखी। जिला प्रशासन ने पीएम ओली को इस मामले की खबर देते हुए चिंता जाहिर की थी, लेकिन उन्हें उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला था।

गौरतलब है कि नेपाल की जाँच टीम में शामिल एक अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर ‘नेपाली 24 Hours’ को बताया था कि चीन ने नेपाल की सीमा में 2 किलोमीटर भीतर तक घुसपैठ की है, पिलर संख्या-12 से भी आगे बढ़ कर भूमि कब्जाई है। वहीं पिलर संख्या-11 का तो कोई अता-पता ही नहीं है कि वो कहाँ गायब हो गया। कहा जा रहा है कि वहाँ अवैध चीनी निर्माण 2010 में ही शुरू हो गया था।

केरल सोना तस्करी मामले में NIA ने कुरान ले जाने वाली गाड़ी के GPS और लॉग बुक को किया जब्त

केरल में सोना तस्करी की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एक स्वायत्त संस्थान के कार्यालय पहुँचकर संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से राजनयिक सामान के साथ लाए गए कुरान वितरण मामले की जानकारी ली। जाँच एजेंसी मंगलवार (सितंबर 22, 2020) सुबह तिरुवनंतपुरम स्थित केरल स्टेट सेंटर फॉर एडवांस प्रिंटिंग एंड ट्रेनिंग कार्यालय पहुँची। उसने एक अधिकारी और चालक से यूएई वाणिज्यिक दूतावास से लाए गए कुरान के वितरण के बारे में जानकारी ली।

एनआइए ने यह कदम विगत दिनों राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील से पूछताछ करने के बाद उठाया है। यह पूछताछ सोना तस्करी मामले में तथाकथित रूप से आतंकी पहलू के सामने आने के बाद हुई थी। इस मामले को लेकर भाजपा सहित कई विपक्षी दल सड़कों पर आ गए हैं। इनका आरोप है कि कुरान लाने के बहाने सोने की तस्करी की गई है। कहा जा रहा है कि कुरान की खेप को वितरण से पहले स्टेट सेंटर फॉर एडवांस प्रिंटिंग एंड ट्रेनिंग कार्यालय लाया गया था।

GPS रिकॉर्डर को जब्त कर लिया गया है। इससे पहले खबर आई थी कि कुरान को लाते समय जानबूझकर GPS रिकॉर्डर को बंद कर दिया गया था। ऐसी खबरें थीं कि वाहन बेंगलुरु गई थी। इसके बाद, NIA ने कार्यालय में उन कर्मचारियों से पूछताछ की जो वाहनों के आवा-जाही में शामिल थे। सूत्रों ने कहा कि NIA गाड़ी के आवागमन के बारे में पता करने के लिए ऑफिस लॉग बुक को सत्यापित करेगी, जिससे पता चल सकेगा कि गाड़ी राज्य के अंदर या बाहर कहाँ गई थी।

इससे पहले, विपक्ष ने आरोप लगाया था कि उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील वाणिज्य दूतावास से कुरान लाने के बहाने सोने की तस्करी में शामिल थे। एजेंसी ने ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) रिकॉर्डर और वाहन की लॉग बुक जब्त कर ली है, जो राजधानी से मलप्पनम तक कुरान पहुँचाती थी।

इससे पहले, जलील ने स्वीकार किया था कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात के वाणिज्य दूतावास से प्राप्त रमजान भोजन किटों के साथ कुरान की प्रतियाँ वितरित की थी। उनसे एनआईए ने पिछले सप्ताह कोच्चि में कार्यालय में पूछताछ की थी। इससे पहले सामने आया था कि उच्च शिक्षा विभाग के अधीन राज्य के स्वामित्व वाली संस्था ने कुरान की हजारों प्रतियाँ वितरित कीं जो यूएई वाणिज्य दूतावास से उपहार के रूप में प्राप्त हुईं। इनमें से 32 प्रतियों को मलप्पुरम में सी-एप के स्वामित्व वाले वाहन में ले जाया गया था।

गौरतलब है कि पिछले दिनों जाँच में पता चला था कि केटी जलील ने प्रोटोकॉल के मानदंडों को दरकिनार करते हुए मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश की मदद से संयुक्त अरब अमीरात से अवैध रूप से कुरान का आयात किया था। सीमा शुल्क विभाग ने बताया था कि, शुल्क में छूट मिलने के बाद यूएई वाणिज्य दूतावास द्वारा आयात की गई पवित्र कुरान की प्रतियाँ स्वीकार कर जलील ने सीमा शुल्क नियमों का भी उल्लंघन किया था।

वहीं माकपा ने शुक्रवार (सितंबर 18, 2020) को जाँच को सांप्रदायिक एंगल देते हुए दावा किया था कि मंत्री के खिलाफ विपक्ष का विरोध “कुरान विरोधी” था। माकपा के राज्य सचिव कोडिएरी बालाकृष्णन ने पार्टी के मुखपत्र ‘देशभीमनी’ में अपने साप्ताहिक कॉलम में केरल कम्युनिस्ट सरकार और मंत्री केटी जलील के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को ‘कुरान विरोधी’ बताया था।

‘सुशांत को थी ड्रग्स की लत, अपने करीबी लोगों का फायदा उठाता था’ – बेल के लिए रिया चक्रवर्ती ने कहा

सुशांत सिंह राजपूत की हत्या/आत्महत्या मामले में ड्रग्स का खेल अब खुल कर सामने आ रहा है। दिवंगत अभिनेता की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती के अनुसार सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स की लत थी। इसके लिए वो अपने करीबियों का फायदा उठाते थे।

सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स की लत थी, यह बात तब सामने आ रही है जब रिया चक्रवर्ती को बेल लेनी है। सुशांत सिंह राजपूत की हत्या/आत्महत्या मामले में ड्रग्स एंगल के निकल आने के बाद NCB द्वारा गिरफ्तार रिया चक्रवर्ती ने अपनी जमानत याचिका में सुशांत को ड्रग्स की लत वाली बात कही है।

रिया चक्रवर्ती ने अपनी जमानत याचिका में कहा, “सुशांत सिंह राजपूत ड्रग्स लेते थे। वह अपने स्टाफ को ड्रग्स खरीद कर लाने के लिए कहते थे। अगर आज वो जीवित होते, तो उन पर कम मात्रा में ड्रग्स लेने का आरोप लगाया जाता, जिसमें एक साल तक की सजा का प्रावधान है।”

अपनी जमानत के लिए सुशांत सिंह राजपूत पर आरोप लगाते हुए रिया चक्रवर्ती ने यह भी कहा, “उन्होंने (सुशांत ने) मुझे, मेरे भाई शौविक को और अपने घर के कर्मचारियों को ड्रग्स लाने के लिए इस्तेमाल किया। साथ ही वो यह भी सुनिश्चित करते थे कि ड्रग्स खरीद का कोई भी साक्ष्य (इलेक्ट्रॉनिक भी) या पेपर न रहे।”

रिया चक्रवर्ती ने बताया कि सुशांत सिंह राजपूत अपने रसोइए नीरज से जॉइंट्स बनवाते थे। फिर उन्हें एक बॉक्स में अपने बेडरूम में रखने के लिए कह देते थे। रिया के अनुसार सुशांत ने आखिरी बार नीरज को अपनी मृत्यु से तीन दिन पहले ऐसा करने के लिए कहा था। रिया ने अपनी जमानत याचिका में कहा कि सुशांत की मौत के बाद वह बॉक्स खाली था।

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती की जमानत की सुनवाई गुरुवार को होनी है। यह आज होती लेकिन मुंबई में भारी बारिश के कारण यह टल गई।

गौर करने लायक बात यह है कि बॉलीवुड इंडस्ट्री में सुशांत सिंह राजपूत की हत्या/आत्महत्या मामले के बाद से ड्रग्स का एंगल छाया हुआ है। इस मामले को लेकर बॉलीवुड दो हिस्सों में बँट चुका है। धीरे-धीरे काफी बड़े नाम भी अब सामने आ रहे हैं और इसकी गूँज संसद तक में सुनाई दे रही है।

ड्रग्स के साथ बॉलीवुड के कुछ बड़े नामों की बात करें तो टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी KWAN की इंप्लॉई जया साहा की चैट से दीपिका पादुकोण के अलावा श्रद्धा कपूर, सोनम कपूर, जैकलीन फर्नांडीज, दीया मिर्जा, नम्रता शिरोडकर और फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के प्रोड्यूसर मधु मांटेना का नाम सामने आया है।

सुदर्शन न्यूज़ केस: मेरी रोहिंग्या आदि टिप्पणियों की गलत व्याख्या हुई, हेट स्पीच कहा गया, संजीव नेवार ने दायर की इंटरवेंशन याचिका

सुदर्शन टीवी इन दिनों अपने ‘यूपीएससी जिहाद’ शो को लेकर सुर्खियों में है। वहीं अब दलित कार्यकर्ता संजीव नेवार ने शीर्ष अदालत में सुदर्शन टीवी मामले में इंटरवेंशन याचिका दायर करने की बात बुधवार (23 सितंबर, 2020) को ट्विटर के जरिए कही है। उन्होंने कहा कि चैनल पर ‘लाइव शो के दौरान उनकी टिप्पणियों की गलत व्याख्या की गई। इतना ही नहीं शो के प्रसारण के खिलाफ दायर याचिका में उनकी टिप्पणी को ‘हेट स्पीच’ और ‘फेक सूचना’ करार दिया गया।

संजीव ने ट्वीट किया, “मैं सुदर्शन न्यूज टीवी मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक इंटरवेंशन याचिका दायर कर रहा हूँ क्योंकि ज़कात की परिभाषा के अनुसार मेरे द्वारा प्रस्तुत की गई इस्लामिक जानकारी को ‘हेट स्पीच’ और ‘फर्जी जानकारी’ के रूप में प्रदर्शित किया गया है। मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्या कि क्या ये टेक्स्ट हेट स्पीच है।” उन्होंने यह भी बताया, “मेरे वकील शशांक शेखर झा हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि कैसे देश में रोहिंग्याओं की घुसपैठ के खतरे के बारे में उनकी टिप्पणियों को भी ‘हेट स्पीच’ के रूप में करार दिया गया था। संजीव नेवार ने लिखा, “इसी तरह रोहिंग्या घुसपैठ पर मेरी चिंता को भी जो कि सरकारी बयानों पर आधारित है, उसे भी हेट स्पीच के रूप में वर्गीकृत किया गया है।”

गौरतलब है कि इससे पहले लेखक और एक्टिविस्ट मधु पूर्णिमा किश्वर ने भी बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक हस्तक्षेप (इंटरवेंशन) याचिका दायर करने की जानकारी ट्विटर के जरिए दी थी। उन्होंने बताया है कि कोर्ट में उनके बयान का गलत अनुवाद करके उसे हेट स्पीच के सबूत की तरह पेश किया गया।

अपने ट्विटर पर मधु पूर्णिमा किश्वर लिखती हैं, “सुदर्शन टीवी के शो यूपीएससी जिहाद में डिबेट के दौरान मेरी टिप्पणी के छोटे से हिस्सा का बेहूदा अनुवाद करके, कोर्ट में हेटस्पीच के सबूत के तौर पर पेश किए जाने के बाद मैंने सुप्रीम कोर्ट में एक हस्तक्षेप याचिका दायर की है।”

उल्लेखनीय है कि 28 अगस्त को प्रसारित होने वाले एक कार्यक्रम के प्रोमो को प्रसारित करने के बाद हिंदी समाचार चैनल सुदर्शन न्यूज को लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। दरअसल, सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने जानकारी दी थी कि चैनल देश में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चुने गए समुदाय की संख्या में अचानक वृद्धि का विश्लेषण करेगा। साथ ही इस बात की भी जानकारी दी जाएगी कि कैसे अन्य लोगों की तुलना में मजहब विशेष के उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त अंकों में वृद्धि हुई है।

जिसके बाद प्रोमो को लेकर मजहबी कार्यकर्ता उत्तेजित हो गए और उन्होंने प्रसारण को रोकने के लिए कई मामले दायर किए। जिस पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस शो के प्रसारण पर रोक लगा दी। वहीं सूचना मंत्रालय और प्रसारण ने शो को प्रसारित करने का संकेत दे दिया। हालाँकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश पारित कर कार्यक्रम के प्रसारण को रोक दिया।

श्रद्धा कपूर के लिए खरीदा था CBD ऑयल, जया साहा ने NCB के सामने सब कुछ कबूला

सुशांत सिंह राजपूत केस में ड्रग ऐंगल की जाँच कर रहे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा जया साहा से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। अब तक की पूछताछ में जया साहा ने कुबूल किया है कि उन्होंने श्रद्धा कपूर के लिए सीबीडी ऑयल खरीदा था। 

वहीं नम्रता शिरोड़कर की चैट के सवाल पर जया ने बताया कि चैट तो उसी की है लेकिन उसे इस चैट के बारे में कुछ याद नहीं है। इसके अलावा उसने कुबूल किया है कि सुशांत सिंह राजपूत, रिया चक्रवर्ती, फिल्म मेकर मधु मांटेना वर्मा और खुद के लिए भी CBD ऑयल मँगवाया था। अभी तक ड्रग्स के लिए किसी भी पैडलर से संपर्क होने की बात से जया ने इंकार किया है। उसका कहना है कि CBD ऑयल का इंतजाम उसने ऑनलाइन किया था।

जया साहा की चैट से दीपिका पादुकोण के अलावा श्रद्धा कपूर, सोनम कपूर, जैकलीन फर्नांडीज, दीया मिर्जा, नम्रता शिरोडकर और फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ के प्रोड्यूसर मधु मांटेना का नाम सामने आया है। ये वो नाम हैं, जो सार्वजनिक हुए हैं। इनके अलावा कई और बॉलीवुड सेलेब्स भी एनसीबी की रडार पर हैं। एनसीबी ने आज प्रोड्यूसर मधु मांटेना को पूछताछ के लिए बुलाया है।

जया साहा से बुधवार (सितंबर 23, 2020) को मुंबई के एनसीबी कार्यालय में तीसरे दिन पूछताछ की जा रही है। जया को एनसीबी द्वारा ड्रग्स की खरीद और आपूर्ति के बढ़ते सबूतों के आधार पर गिरफ्तार किए जाने की संभावना है। इस तरह से ड्रग्स की खरीद और आपूर्ति एनडीपीएस अधिनियम के अनुसार अवैध है।

बता दें कि जया साहा की रिया चक्रवर्ती के साथ चैट सामने आई थीं, जिसमें वह खुलकर ड्रग्स की बात कर रही थीं। इसके बाद ही जया को एनसीबी ने पूछताछ के लिए बुलाया। जया साहा टैलेंट मैनेजमेंट कंपनी KWAN की इंप्लॉयी हैं, जो सुशांत सहित कई बड़े स्टार्स का काम देखती थी। पिछले दिनों सामने आए चैट्स में जया साहा (J) ने श्रद्धा (S) को सीबीडी ऑयल भेजने की बात करती हैं। वहीं, दीपिका K से ‘माल’ के बारे में पूछती है।

इससे पहले जया साहा और रिया चक्रवर्ती की लीक हुई व्हाट्सएप चैट से ये राज खुला था कि दोनों ड्रग्स के मामले में न सिर्फ लिप्त है, बल्कि जया साहा ने ही रिया को कुछ बूँदे चाय या कॉफी के साथ सुशांत को पिलाने की बात भी कही थी। जिससे 30-40 मिनट में एक्टर पर इसके असर होने का इशारा भी दिया था।

बता दें कि ड्रग्स मामले में रिया चक्रवर्ती 8 सितंबर को गिरफ्तार हुई थीं। उसके बाद से वे मुंबई की भायखला जेल में बंद हैं। 2 बार उनकी जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। रिया पर आरोप है कि वे सुशांत के लिए ड्रग्स का प्रबंध करती थीं। दावा है कि रिया ने करीब 25 बॉलीवुड सेलेब्स का नाम एनसीबी के सामने लिया है, जो ड्रग्स का सेवन करते हैं।

गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद पैसों की हेरफेर के दौरान कुछ चैट्स को खंगाला था, उसी के बाद उन्हें ड्रग एंगल के सबूत मिले, जिसे उन्होंने एनसीबी को भेज दिया। एनसीबी ने मामला संभालते ही सारी पड़ताल की और करीब 20 लोगों को हिरासत में लिया। इमें रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती का नाम भी पूरी पड़ताल में शामिल है।

‘ये न्यूकमर्स तो ऐसे निकल रहे हैं, जैसे बरसात में मेंढक- टर्र टर्र’: जब SRK ने आयुष्मान के सिर पर फोड़ दी थी बोतल

बॉलीवुड में अब जब नेपोटिज्म की चर्चा हो रही है, ऐसे में लगातार कई पुराने वीडियोज के जरिए ये ध्यान दिला रहे हैं कि कैसे न्यूकमर्स का यहाँ अपमान किया जाता है। इसी तरह के एक अवॉर्ड शो का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें शाहरुख खान न्यूकमर आयुष्मान खुराना पर टिप्पणी करते नज़र आ रहे हैं। ये वीडियो 2013 के IIFA अवॉर्ड्स का है, जब आयुष्मान खुराना को ‘विकी डोनर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ डेब्यू अभिनेता का पुरस्कार मिला था।

आयुष्मान खुराना ने ‘विकी डोनर‘ का जरिए ही बॉलीवुड में कदम रखा था। ऐसे में जब उन्हें अवॉर्ड मिला तो शाहरुख खान के साथ शो की एंकरिंग कर रहे शहीद कपूर उनसे पूछते नज़र आते हैं, “शाहरुख भाई, आपको नहीं लगता है कि इस साल न्यूकमर्स टाइप के लोग कुछ ज्यादा ही हो गए हैं?” इस पर जवाब देते हुए शाहरुख खान कहते हैं, “हाँ, ये न्यूकमर्स तो ऐसे निकल रहे हैं जैसे बरसात में मेंढक निकलते हैं- टर्र.. टर्र.. टर्र..“।

इसके बाद शाहिद कपूर ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आजकल तो जिसे देखो वो हीरो बनने चला आता है। आगे बढ़ने से पहले बता दें कि शाहिद कपूर वरिष्ठ अभिनेता पंकज कपूर और बॉलीवुड अभिनेत्री रहीं नीलिमा अज़ीम के बेटे हैं। नीलिमा ने पंकज कपूर के बाद दो और शादियाँ की थीं। अभिनेता ईशान खट्टर नीलिमा और उनके दूसरे पति राजेश खट्टर के बेटे हैं। शाहिद की इस टिप्पणी के दौरान सुशांत सिंह राजपूत भी ऑडियंस में बैठे देखे जा सकते हैं।

इसके बाद शाहिद कपूर ने सुझाव दिया कि अधिकतर प्रोफेशन में परीक्षाएँ होती हैं और उसमें लोग पास-फेल होते हैं, इसीलिए फिल्म इंडस्ट्री में भी ऐसे ही परीक्षाएँ होनी चाहिए। शाहरुख खान ने भी उनके इस सुझाव का समर्थन किया। इसके बाद शाहिद ने प्रस्ताव दिया कि न्यूकमर्स को स्टेज पर बुला कर ही उनकी ‘क्लास’ लेनी चाहिए। इस पर शाहरुख खान कहते दिखते हैं कि इन न्यूकमर्स को बेकार में फुटेज मत दो, ये हमलोगों के लिए अच्छा नहीं है।

इसके बाद आयुष्मान खुराना स्टेज पर आते हैं और सीढ़ियों पर चढ़ते वक्त झुक कर मंच को प्रणाम करते हैं, जिस पर टिप्पणी करते हुए शाहरुख खान कहते हैं कि तू गलत जगह पैर छू रहा है। इसके बाद आयुष्मान ने उनके भी पाँव छुए। उनके सिर पर शीशे की एक बोतल भी फोड़ी जाती है, जिसके बाद पूछा जाता है कि उन्हें लगी या नहीं? आयुष्मान जवाब में कहते हैं कि काफी जोर से लगी।

इस पर शाहरुख खान आयुष्मान के नितम्बों पर लात मारने की एक्टिंग करते हुए और नर्सों को बुलाते हुए कहते हैं कि आयुष्मान को हॉस्पिटल ले जाओ और इसे 2 साल तक बॉलीवुड में नहीं आने देना। IIFA ने इस वीडियो का एक हिस्सा अपने फेसबुक पेज से इसे ‘Fun’ बताते हुए पोस्ट किया। बॉलीवुड में अधिकतर शो स्क्रिप्टेड होते हैं और कई तो ‘रियलिटी’ बोल कर भी स्क्रिप्ट के हिसाब से ही चलते हैं।

शाहरुख़ खान और आयुष्मान खुराना IIFA अवार्ड शो 2013 में

लेकिन, इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों के मन में भी कुछ सवाल हैं कि क्या न्यूकमर्स को अवॉर्ड शो में मंच पर बुला कर उनके साथ जानबूझ कर ऐसा बर्ताव किया जाता है? क्या न्यूकमर्स पर जानबूझ कर फब्तियाँ कसी जाती हैं, भले ही ये स्क्रिप्ट का हिस्सा हो या फिर वास्तविक रूप में हो रहा हो। नेपोटिज्म डिबेट के बीच एक-एक ऐसी घटनाओं पर कई लोगों की नज़र है और वो इससे खुश नहीं हैं।

इसी तरह सुशांत के जिम पार्टनर सुनील ने खुलासा किया कि सुशांत सिंह आईफ़ा अवार्ड्स में शाहरुख खान और शाहिद कपूर के साथ मंच साझा करने वाले थे। शाहरुख ने शो के पहले सुशांत से बात की थी। उनसे कहा था कि वे मंच पर उनकी फिल्म ‘काई पो चे’ का ज़िक्र करेंगे। शाहरुख खान ने उनसे यह भी कहा था कि उसके (सुशांत) संघर्ष और अब तक के सफ़र के बारे में भी पूछेंगे। लेकिन इन सारी बातों से ठीक उलट उन्होंने मंच पर सुशांत को बेइज्ज़त करना शुरू कर दिया। इससे वो निराश थे।

बच्चे को मोलेस्ट किया, पता ही नहीं था सेक्सुअलिटी क्या होती है: अनुराग कश्यप ने स्वीकारा, शब्दों से पाप छुपाने की कोशिश

अनुराग कश्यप के खिलाफ अभिनेत्री पायल घोष ने बलात्कार का मामला दर्ज कराया है। इसके साथ ही अनुराग कश्यप के साथ काम कर चुकीं तापसी पन्नू और ऋचा चड्ढा के अलावा उनकी दोनों पूर्व-पत्नियों कल्कि कोचलिन और आरती बजाज ने उनका समर्थन किया है। इसी बीच उनके कुछ वीडियोज सामने आए हैं, जिनमें उन्होंने यौन शोषण या दुर्व्यवहार की बातें स्वीकार की हैं। कंगना रनौत ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है।

इनमें से एक वीडियो में अनुराग कश्यप दिखा रहे हैं कि ‘जॉइंट को कैसे रोल’ किया जाता है। एक वीडियो इंटव्यू में फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप कहते दिख रहे हैं कि कैसे जब वो काफी दिनों तक जूनियर थे तो सीनियर बनने पर एक जूनियर लड़के पर अपना गुस्सा उतारा। उन्होंने कहा कि वो उस लड़के को लेकर जाते थे और उसकी थप्पड़ों से पिटाई करते थे। उन्होंने बताया था कि वो उस बच्चे का यौन शोषण करते थे और उसे पता ही नहीं चलता था कि उसके साथ हो क्या रहा है।

बकौल अनुराग कश्यप, उनसे तंग आकर उस बच्चे ने अपने माता-पिता को सब कुछ बता दिया और उन्होंने आकर उनसे पूछा कि अनुराग ने उनके बच्चे के साथ क्या किया है। हालाँकि, बाद में उन्होंने कहा कि वो इन चीजों को लेकर शर्मिंदा थे और उन्हें तब यौन शोषण जैसी चीजों की समझ नहीं थी और उन्हें ये सब प्राकृतिक लगता था क्योंकि उन्हें इन सबके बारे में किसी ने नहीं समझाया था।

उन्होंने कहा कि जब क्लास में उनके दोस्त हस्तमैथुन वगैरह के बारे में बात करते थे और बताते थे कि ये कैसे किया जाता है, तो उन्हें कुछ भी समझ नहीं आता था। इसी तरह जब विकास बहल पर यौन शोषण के आरोप लगे थे तो अनुराग कश्यप ने कहा था कि उन्होंने विकास के खिलाफ कार्रवाई की थी और असल में उन्होंने कुछ नहीं किया बल्कि ‘शानदार’ फिल्म के निर्देशन के लिए उन्हें फिर से साइन कर लिया था।

राजीव सिंह राठौड़ ने ट्विटर पर एक थ्रेड के जरिए इन वीडियों को अपलोड किया है और आरोप लगाया है कि कैसे अनुराग कश्यप पर पायल घोष के यौन शोषण के आरोपों के बावजूद खुद को फेमनिस्ट कहने वाले गैंग के एक भी व्यक्ति ने पायल का समर्थन नहीं किया। उन्होंने फेमिनिस्ट गिरोह पर मूवी माफिया को बचाने का आरोप लगाया। बता दें कि पायल घोष ने एक वीडियो के जरिए अनुराग कश्यप के बारे में खुलासा किया था।

इस मामले में अनुराग कश्यप की वकील भी वही प्रियंका खिमानी हैं, जो कभी सुशांत सिंह राजपूत की वकील हुआ करती थीं। राजीव ने कहा कि ये एक बड़ा खेल है क्योंकि अनुराग इससे पहले सुशांत को ड्रग्स एडिक्टेड और साइको कहते रहे हैं लेकिन अब उनके लिए काम कर चुकी वकील को हायर कर रहे हैं। इसी तरह अपने मित्र और फिल्म निर्देशक दिबाकर बनर्जी का भी समर्थन किया था।

पायल रोहतगी ने दिबाकर पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे, तब अनुराग कश्यप ने कहा था कि जब पायल रोहतगी किसी फिल्म निर्देशक के साथ सोने की बात स्वीकार कर रही हैं तो फिर उन्हें किसी को अपना पेट दिखाने में क्या समस्या है? उन्होंने तब कहा था कि वो ‘Me Too’ के आरोपित दिबकर बनर्जी के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। उन्होंने दावा किया था कि उन्हें खुद रोज ऐसे-ऐसे 50 नए एक्टर्स के मैसेज आते रहते हैं।

अनुराग कश्यप और विकास बहल ‘फैंटम फिल्म्स’ में पार्टनर थे, जो अब टूट चुकी है। आरोप है कि बहल ने एक लड़की के ऊपर बैठ कर उसके ऊपर हस्तमैथुन कर दिया। वो लड़की आर्ट डायरेक्टर थी। श्रेया नारायण ने आरोप लगाया था कि जब अनुराग कश्यप के पास पीड़िता शिकायत लेकर गई तो वो 2 साल तक चुप-चाप बैठे रहे और कुछ नहीं किया। जब सार्वजनिक बेइज्जती शुरू हुई, तब उन्होंने फैंटम को ख़त्म कर दिया।

असल में अनुराग कश्यप और इस गैंग के लोगों की आदत है कि वो अंग्रेजी के भारी-भड़कम शब्दों के जरिए अपने कुकर्म छिपाने की कोशिश करते हैं और इसे आधुनिक सोच का रूप दे देते हैं। उनके हिसाब से उनके सारे पाप सही हो जाते हैं क्योंकि उन्होंने लिबरल चोला चोला ओढ़ लिया है, जबकि जो उनकी विचारधारा से मेल नहीं खाते, 100 साल पहले उनके पूर्वजों में से कोई साइकिल चलाते हुए भी गिर गया हो तो वो इसे ऐसा पाप मानते हैं, जिसके लिए कोई भी सज़ा कम ही है।

पायल घोष ने कहा था, “मैं अनुराग से बात करने के अगले दिन उनसे मिलने गई। वह शराब पी रहा था। मिलने के बाद वह मुझे दूसरे कमरे में ले गया। वहाँ उसने अपनी ज़िप खोली और मेरी सलवार कमीज खोलकर मेरी योनि (vagina) के अंदर अपने c**k (penis) को जबरदस्ती डालने की कोशिश की। उन्होंने मुझसे इस तरह बात की जैसे फिल्म इंडस्ट्री में शारीरिक संबंध बनाना गलत नहीं था। उन्होंने कहा कि हुमा कुरैशी, ऋचा चड्डा और मही गिल जैसी अभिनेत्रियाँ हमेशा उनसे फोन पर संपर्क में रहती हैं।”

लोकतंत्र के मंदिर से होता खिलवाड़, क्या उपवास के बहाने ही सही विपक्ष करेगा गाँधी को याद?

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश उपवास पर हैं। उपवास दूसरे की गलतियों के लिए। उपवास खुद पर हुए अलोकतांत्रिक हमले के खिलाफ। यही तो गाँधी का पथ है, हमारे बापू का पथ। उपवास करो पाप के खिलाफ। क्या विपक्ष हरिवंश के इस गाँधीवादी कदम से कोई सीख लेगा? क्या हमेशा गाँधी नाम की राजनीति करने की कोशिश में जुटा विपक्ष सही मायनों में इस गाँधीवादी तरीके से मिल रही सीख को अपने जीवन में उतारेगा? ये तो वक़्त ही बताएगा। 

ऐसा दृश्य राज्यसभा ने शायद ही देखा हो

संसद को हम बड़े गर्व से ‘लोकतंत्र का मंदिर’ कहते हैं। पर क्या वास्तव में जो हम कहते हैं उसे अमल में लाते भी हैं? भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं भारत रत्न डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने राष्ट्रपति काल के दौरान स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था, “सही राजनीति का सच्चा अर्थ यह है कि राजनीति, राजनीतिक-राजनीति होनी चाहिए, ना कि राजनीति के लिए राजनीति।” इसे व्यापक स्तर पर समझने की जरूरत है।

हाल ही में, कृषि बिल के विरोध में तृणमूल कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी, कॉन्ग्रेस और सीपीआई (एम) द्वारा अपनाया गया विरोध का तरीका बेहद ही असंवैधानिक तथा गैर-जिम्मेदाराना रहा। ये हम सब जानते हैं कि सोमवार को राज्यसभा में जो दृश्य था, वो पहले शायद ही कभी देखने को मिला हो। इनका विरोध इतना ज्यादा था कि कृषि विधेयक के विरोध में वेल में आकर हंगामा किया और रूल बुक फाड़ने की कोशिश की।

कृषि विधेयक पारित होने के दौरान इन सांसदों ने हंगामा तो किया ही किया, साथ ही साथ, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के साथ दुर्व्यवहार भी किया। इन सांसदों को इनके गलत रवैये के कारण ठीक दूसरे ही दिन सभापति वैंकेया नायडू द्वारा इन्हें एक हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया गया। निलंबित सांसदों में तृणमूल कॉन्गेरस के डेरेक ओ ब्रायन व डोला सेन, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, कॉन्ग्रेस के राजीव साटव, सैयद नासिर हुसैन, रिपुन बोरा और सीपीआई (एम) से एल्मलारान करीम और केके रागेश शामिल हैं। बता दें कि लोकसभा में यह विधेयक ध्वनि मत से पारित हो चुका है। 

इन नेताओं द्वारा लोकतंत्र के इस मंदिर में किए गए दुर्व्यवहार को भारतीय संसदीय इतिहास के पन्नों में एक काले अध्याय के रूप में याद किया जाएगा। एक स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपरा में विरोध की अपनी महत्ता है, परन्तु विरोध तार्किक एवं संवैधानिक होना चाहिए, केवल विरोध के लिए विरोध ठीक बात नहीं है। हमें यह समझने की जरुरत है कि विरोध के लिए विरोध राजनीति को रसातल की ओर ले जाता है।

विपक्ष इतने पर ही नहीं रुका बल्कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे सभापति वैंकेया नायडू ने खारिज कर दिया। इस घटनाक्रम से यह स्पष्ट रूप से साबित होता है कि विपक्ष का एजेंडा सदन को बिल पास करने से रोकना था।

क्या हरिवंश से गाँधीवादी रवैया सीखेगा विपक्ष?

एक महान व्यक्ति के क्या गुण होते हैं, यह हरिवंश ने अपने महान कृत्य से साबित किया। जब राज्यसभा से निलंबित ये 8 सांसद गाँधी प्रतिमा के सामने धरने पर बैठ गए, तब ठीक अगले ही सुबह सांसदों के धरनास्थल पर खुद उपसभापति हरिवंश उन्हें चाय पिलाने पहुँचे तथा उनसे बातें भी की। यह उनके बड़प्पन और उदारता को दर्शाता है। साथ ही साथ उनका यह कृत्य गाँधी जी के सिद्धांतो के मूल को आत्मसात करता हुआ दर्शाता है। उन्होंने यह साबित किया, ‘मतभेद भले ही हो, मनभेद नहीं होने चाहिए।’ लोकतंत्र की गरिमा को लज्जित करने वालों के समक्ष हरिवंश ने सर्वोत्तम उदाहरण पेश किया है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरिवंश के इस कदम की तारीफ करते हुए ट्वीट किया और कहा, “जिन सांसदों ने उन पर हमला किया और उनका अपमान किया, उनके लिए स्वयं चाय लेकर जाना उनके खुले विचार और बड़प्पन को दर्शाता है। यह हरिवंश जी की महानता को दिखाता है। मैं देश की जनता के साथ मिलकर इसके लिए हरिवंश जी को बधाई देता हूँ।” क्या इन विपक्षी दलों के नेताओं को हरिवंश जी से सीख लेने की जरूरत नहीं है? 

सदन में विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा किए गए गलत व्यवहार से दुखी हरिवंश ने एक दिन के उपवास का फैसला लिया है। इस सन्दर्भ में उन्होंने सभापति महोदय वैंकेया नायडू और राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा है, और बतलाया कि सदन में जो कुछ भी हुआ उससे वे बहुत दु:खी हैं। निश्चित तौर पर, हरिवंश का यह कदम मर्यादा की राजनीति को संरक्षित करने तथा आने वाली पीढ़ी के राजनेताओं को एक सबक के रूप में स्थापित होगा।

आज खुद से सवाल पूछने की जरूरत!

आज हमें खुद से कुछ प्रश्न करने की जरूरत है कि लोकतंत्र के मंदिर में हुई यह शर्मनाक हरकत से हम अपनी आने वाली पीढ़ी को क्या सीख दे रहें हैं? राजनीति की दशा और दिशा क्या हो, यह संसद के माध्यम से स्थापित होती है। पर क्या हम सही मायने में देश की राजनीति को सही दिशा देने हेतु प्रेरित एवं प्रतिबद्ध हैं? हमारे राजनेताओं को आज इन प्रश्नों को बारिकी से समझने की जरुरत है।

हाल ही में राज्यसभा सांसद डॉ विनय सहस्रबुद्धे ने संसद में अपने भाषण के दौरान राजनीति के मूल-तत्व को उद्घाटित करते हुए बड़ा ही सटीक कहा था कि दलगत राजनीति से ऊपर उठते हुए राजनेताओं को ‘पॉलिटिक्स ऑफ़ रिस्पॉन्सिबिलिटी’ को आत्मसात करने के जरूरत है। आज यह जरूरी है कि इस मूल-मंत्र के प्रति प्रतिबद्धता दिखाते हुए, सच्ची एवं सार्थक राजनीति का एक अप्रतिम उदाहरण स्थापित करने के दिशा में हमारे राजनेताओं को समझने एवं मनन करने की जरूरत है।

‘खून की प्यासी’ होती हैं तलाकशुदा महिलाएँ’ – कॉन्ग्रेसी उदित राज ‘सबसे बड़े दलित नेता’ ने दिया ‘दिव्य ज्ञान’

देश में किसी भी मुद्दे पर बहस चल रही तो और उसमें घुस कर पूर्व-सांसद उदित राज दलित-सवर्ण न खेलें तो फिर वो बहस ही अधूरी रह जाती है। भाजपा में टिकट न मिलने से कॉन्ग्रेस में आए उदित राज ने अब अनुराग कश्यप पर लगे यौन शोषण के आरोपों पर कमेंट्री करते हुए उन्हें सज्जन व्यक्ति करार दिया है और इस खबर की चर्चा की है कि कैसे उनकी दोनों पूर्व-पत्नियाँ कल्कि कोचलिन और आरती बजाज उनका समर्थन कर रही हैं नहीं तो तलाकशुदा महिलाएँ ‘खून की प्यासी’ होती हैं।

कभी अपने-आप को ‘सबसे बड़ा दलित नेता’ घोषित कर चुके उदित राज ने ट्विटर पर लिखा, “अनुराग कश्यप सज्जन व्यक्ति लगते हैं। तलाक़ की गई दोनो पत्नियाँ उनके पक्ष में खड़ी हैं, वर्ना खून की प्यासी होती हैं। कंगना रनौत और पायल घोष को जेल में बंद कर देना चाहिए जो सामाजिक भ्रष्टाचार फैला रही हैं।” उन्होंने दो महिलाओं को बिना मतलब जेल भेजने की बात की और सारी तलाकशुदा महिलाओं को ‘खून की प्यासी’ करार दिया।

यानी, उदित राज का मानना है कि जिन महिलाओं का तलाक हो जाता है, वो अपने पूर्व-पति के लिए ऐसी दुर्भावना रखती हैं कि उनका खून पीना चाहती हैं। वैसे, फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप को देख कर लगता नहीं कि उनके शरीर में खून की कमी है। महिला हितों की बात करने वाले उदित राज जैसे लोग जहाँ एक तरफ खुद को आधुनिक सोच वाला दिखाते हैं, वहीं महिलाओं के लिए इस तरह के तुच्छ विचार रखते हैं।

अगर सारी तलाकशुदा महिलाएँ ‘खून की प्यासी’ हैं फिर तो जितने भी तलाकशुदा पति हैं, वो ज़िंदा ही नहीं बचने चाहिए थे? या फिर उनमें से अधिकतर आज अस्पताल में खून की बोतलें चढ़ाते रहते। अरबाज खान और ऋतिक रौशन के बारे में ‘सबसे बड़े दलित नेता’ के क्या विचार हैं, ये अभी तक साफ़ नहीं हो सका है। लेकिन हाँ, महिलाओं को लेकर उनकी सोच पहले भी कई बार सामने आ चुकी है।

साथ ही उन्होंने बलात्कार के प्रयास की पीड़िता को सामाजिक भ्रष्टाचार फैलाने का आरोपित करार दिया। उदित राज की मानें तो बलात्कार का प्रयास करने वाले की तलाकशुदा पत्नियाँ उनके पक्ष में खड़ी हैं, तो पीड़िता को ही जेल भेज देना चाहिए और इसे सामाजिक भ्रष्टाचार का नाम दिया जाना चाहिए। वैसे 1996 में एक ‘खून की प्यासी’ नामक फिल्म आई थी लेकिन उसमें किसी तलाकशुदा महिला को नहीं दिखाया गया था।

इसी तरह उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने सूई से लेकर परमाणु बम तक बनाया लेकिन फिर भी उसे देशद्रोही कहा जाता है लेकिन भाजपा हवाई जहाज तक बेच कर भी देशभक्त है। भले ही कॉन्ग्रेस पार्टी ने सारी सरकारी कंपनियों को खटारा बना दिया और मोदी सरकार प्राइवेट प्लेयर्स को मौका देकर उन्हें उबारने की कोशिश में लगी हों, लेकिन उदित राज को इन सब से क्या मतलब, क्यों ही समझें इन चीजों तो… दलित घुसा दिया, नेहरू-गाँधी का याद किया, काफी है।

वैसे कल को उदित राज ये भी ना कह दें कि जवाहरलाल नेहरू ने खुद बैठ कर कुम्हार की तरह मिट्टी गूँथ कर हवाई जहाजों का निर्माण किया। कॉन्ग्रेस के लोगों ने हवाई जहाज का अविष्कार किया, राइट ब्रदर्स को इस तकनीक के बारे में बताया और फिर भारत में उसे उड़ाने लगे – शायद उदित राज कल को ये भी लिख सकते हैं। उनकी सोच है कि शायद मोदी सरकार ने ‘हवाई जहाज’ वैसे ही बेच दिया है, जैसे कोई खिलौना हो।

वहीं उदित राज का आरोप है कि उनसे Y+ सिक्योरिटी इसलिए छीन ली गई, क्योंकि वो आरक्षण का समर्थन करते हैं और कंगना रनौत आरक्षण का विरोध करती हैं, इसीलिए उन्हें सरकारी सिक्योरिटी दी गई है। वैसे आरक्षण का समर्थन और विरोध ही इसकी एकमात्र योग्यता है तो सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह को क्यों सुरक्षा मिली हुई है, ये उन्हें बताना चाहिए। क्या ये दोनों नेता भी आरक्षण के विरोधी हैं।

वहीं उन्होंने आरोप लगाया कि कंगना रनौत ने कहा था कि फिल्म में रोल पाने के लिए हीरो के साथ सोना पड़ता था तो क्या उन्होंने भी ये ‘अपराध’ किया है। उनकी सोच देखिए। एक महिला से वो सीधे पूछ रहे हैं कि क्या वो अभिनेताओं के साथ सोती थीं? ऐसी सोच वाले लोगों के लिए बलात्कार के खिलाफ आवाज़ उठाने वाली महिलाओं के लिए भी मन में ऐसे ही आपत्तिजनक और घृणित सवाल होते हैं, आश्चर्य है!

साथ ही उन्होंने ये भी बताया है कि राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष क्यों बनना चाहिए। क्योंकि उन्होंने ये सारी भविष्यवाणियाँ कीं- कोरोना आएगा, बेरोजगारी बढ़ेगी, अचानक लॉकडाउन से कुछ नहीं होगा। टेस्टिंग बढ़नी चाहिए और चीन परेशानी पैदा करेगा, आर्थिक स्थति बिगड़ेगी। इनमें से आधी बातें ऐसी हैं, जो सभी को पता हैं और आधी ऐसी हैं, जिनका कॉन्ग्रेस ने ही नैरेटिव बनाया है। और, अगर सारी सही हैं तो फिर राहुल गाँधी को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष नहीं, ‘राष्ट्रीय भविष्यवेत्ता’ घोषित किया जाना चाहिए।

असल में गाँवों में आजकल भी कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनका काम होता है लोगों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए बिना माँगे राय देना। बाद में कहीं कोई गड़बड़ होती है तो वो कहते हैं कि देखो, मैंने कहा था ऐसा मत करो। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बनने की अगर यही योग्यता है तो फिर इन्हीं लोगों की एक टीम बना कर उनमें से किसी एक को चुन लेना चाहिए। या फिर बहुत लोग तो आकाश देख कर बता देते हैं कि आज बारिश होगी।

उदित राज दलितों को हिन्दू नहीं मानते। उनका कहना है कि समुदाय विशेष को डराने के लिए ही दलितों को हिन्दू बताया जाता है। वो कहते हैं कि अगर गाँधी-नेहरू नहीं होते तो आज का भारत ब्रिटिश युग से भी बदतर होता। वो यूएन की रिपोर्ट का हवाला देकर कहते हैं कि दलित महिलाओं की औसत उम्र कम है, जिसके लिए सवर्ण जिम्मेदार हैं। वो सवर्णों को बलात्कारी कहने से भी नहीं हिचकते।

उदित राज ने लिखा था कि दलित महिलाओं का बलात्कार अधिकतर सवर्ण ही करते हैं। आजकल की वेब सीरीज में भी ऐसा ही दिखाया जाता है। वो उत्तर प्रदेश में प्रियंका गाँधी को दलितों की आवाज़ करार देते हैं। जब सचिन पायलट ने कॉन्ग्रेस से बगावत की थी तो उन्होंने कहा था कि पायलट इतनी कम उम्र में ही प्रदेश अध्यक्ष और उप-मुख्यमंत्री बन गए थे, जबकि कई लोग ज़िंदगी भर मेहनत कर के भी प्रधान तक नहीं बन पाते।

जब तक कोई भाजपा विरोधी वीर सावरकर को गाली नहीं दे तब तक उसका विरोध पूरा नहीं होता। उदित राज भी इस मामले में अपवाद नहीं हैं। उन्होंने तो आरोप लगाया था कि सावरकर ने 6 बार अंग्रेजों से माफ़ी माँगी थी और ब्रिटिश फ़ौज की मदद की थी। साथ ही ये भी कहा कि जिन्ना ने उनकी बात मान कर ही भारत का विभाजन करवाया। उन्होंने इसे भाजपा-संघ से जोड़ दिया। सावरकर को गाली देकर सभी कॉन्ग्रेस समर्थक खुद को ‘कूल’ मानते हैं।

इसी तरह उदित राज ने भाजपा पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति पद का अपमान किया था। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली से 2014 में बीजेपी के टिकट पर जीते और 2019 में टिकट न मिलने पर भाग खड़े हुए उदित राज ने ट्वीट कर ख़ुद को ‘बोलने वाला’ दलित नेता बताया था और कहा कि भाजपा को दलितों से नफ़रत है और वो ‘बोलने वाले’ दलित की जगह सीट हारना पसंद करेंगे। वो संवैधानिक पदों को भी दलित-सवर्ण के दौरे में बाँधते रहे हैं।