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पाकिस्तान भी 15 अगस्त को ही स्वतंत्र हुआ था, फिर हर साल 14 अगस्त को क्यों मनाता है आज़ादी का जश्न?

शनिवार (अगस्त 15, 2020) को भारत अपना 74वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से इस बार अन्य सालों के मुकाबले जश्न कुछ फीका है। इससे एक दिन पहले पाकिस्तान ने अपना स्वतंत्रता दिवस मनाया था।

अब आप सोच रहे होंगे कि भला पाकिस्तान हमसे पहले क्यों आज़ाद हो गया, या फिर पाकिस्तान के प्रति ब्रिटिश ज्यादा मेहरबान थे? जैसा कि हमें पता है, भारत की आज़ादी से पहले ही ‘पाकिस्तान मूवमेंट’ शुरू हो गया था, जिसमें इस्लाम मानने वालों के लिए एक अलग मुल्क पाकिस्तान की माँग की गई थी। ‘ऑल इंडिया मुस्लिम लीग’ ने मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में देश भर में इसके लिए अभियान चलाया था।

1947 में 14 अगस्त के दिन रमज़ान महीने के 26वाँ दिन था। रमजान के 27वें दिन के पहले की शाम और रात को इस्लाम में काफी पवित्र माना गया है। इसके पीछे कहा गया है कि इसी दिन अल्लाह ने फ़रिश्ते गेब्रियल के जरिए पैगम्बर मुहम्मद को कुरान का ज्ञान दिया था, इसीलिए इसे ‘लायलत-अल-कद्र’, अर्थात प्रकाश और सौभाग्य वाली रात करार दिया गया। इस्लाम के शिया और अहमदिया सेक्ट के लोगों को प्रताड़ित करने वाले पाकिस्तान में तभी से सुन्नियों का वर्चस्व रहा है।

सुन्नी ही इस दिन को सबसे ज्यादा पवित्र मानते हैं, क्योंकि धरती पर कुरान का ज्ञान आने के लिए इस्लाम के अलग-अलग पंथों में अलग-अलग तारीखों को पवित्र माना जाता है। अगस्त 14, 1947 को वही शाम थी जब ब्रिटिश ने पाकिस्तान नाम के एक अलग मुल्क को औपचारिक रूप से सत्ता हस्तांतरित की, लेकिन इस दिन समारोह हुआ था जो माउंटबेटन की मज़बूरी थी। वहीं भारत को सत्ता हस्तांतरित करने के लिए लॉर्ड माउंटबेटन ने अगस्त 15,1947 का दिन मुक़र्रर किया।

दरअसल, इस दिन 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इसी दिन जापान ने आत्मसमर्पण किया था, इसीलिए ब्रिटिश को ये दिन खासा प्रिय था। जापान के सम्राट द्वारा आत्मसमर्पण की घोषणा के बाद ही द्वितीय विश्व युद्ध समाप्ति की ओर चल निकला था। हालाँकि, इस पर औपचारिक हस्ताक्षर सितम्बर 2, 1945 को हुई थी। अमेरिका और ब्रिटिश ने चीन के साथ मिल कर जापान के आत्मसमर्पण की शर्त रखी थी और जापान की नौसेना भी किसी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने में अक्षम नज़र आ रही थी।

एक और कारण ये है कि लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत की स्वतंत्रता से एक दिन पहले पाकिस्तान के गठन एवं स्वतंत्रता का निर्णय इसीलिए लिया क्योंकि वो दोनों ही देशों के समारोहों में हिस्सा लेना चाहते थे और एक ही दिन में ऐसा करना संभव नहीं था। इसीलिए उन्होंने दो अलग-अलग दिन मुक़र्रर किया। लेकिन, यहाँ एक और पेंच है। दरअसल, अगर आप ‘इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट, 1947’ को पढ़ेंगे तो पाएँगे कि भारत और पकिस्तान, दोनों की आज़ादी की आधिकारिक तारीख अगस्त 15, 1947 ही है।

इसमें लिखा है कि इसी दिन भारत और पाकिस्तान नाम के दो Dominions का जन्म हुआ। पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना ने भी जब अपने मुल्क को सम्बोधित किया तो उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि संप्रभु एवं आज़ाद मुल्क पाकिस्तान का जन्मदिन 15 अगस्त को मनाया जाएगा। इस तरह से देखा जाए तो पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस गलत तारीख पर मनाता आ रहा है, क्योंकि अपने भाषण में जिन्ना ने स्पष्ट रूप से इस तारीख का जिक्र किया था। आधिकारिक रूप से 15 अगस्त ही वो तारीख है।

दरअसल, इंडियन इंडिपेंडेंस बिल को ब्रिटिश संसद में 4 जुलाई को पेश किया गया था। इसे 15 जुलाई को क़ानून का रूप दिया गया एवं 14-15 की अर्द्धरात्रि से भारत एवं पाकिस्तान की आज़ादी की घघोषणा की गई। पेंच ये था कि लॉर्ड माउंटबेटन को व्यक्तिगत रूप से दोनों देशों के समारोहों में उपस्थित रह कर औपचारिक रूप से सत्ता का हस्तांतरण करना था और क़ानूनी रूप से वो 15 अगस्त को दिल्ली में ऐसा करने के बाद कराची जाकर ये काम नहीं कर सकते थे, क्योंकि तब तक वो ‘डोमिनियन ऑफ इंडिया’ के गवर्नर जनरल बन गए होते।

ब्रिटिश संसद में पारित ‘इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट’ में दर्ज है 15 अगस्त की तारीख

ब्रिटिश ने ‘डोमिनियन ऑफ इंडिया’ और ‘डोमिनियन ऑफ पाकिस्तान’ के रूप में विभाजन और आज़ादी की घोषणा की थी, जो बाद में क्रमशः ‘रिपब्लिक ऑफ इंडिया’ और ‘इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ पाकिस्तान’ बना। बंगाल और पंजाब जैसे बड़े प्रदेशों को दोनों देशों के बीच बाँट दिया गया। इसी एक्ट में अंग्रेजों ने गवर्नर जनरल के पद के गठन की घोषणा की और दोनों देशों के बीच संपत्ति के बँटवारे का ऐलान किया। मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल के रूप में शपथ ली।

इसके अलावा और भी कई सबूत हैं जो बताते हैं कि पाकिस्तान का असली स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को है। जिन्ना पाकिस्तान की आज़ादी के 13 महीने बाद ही चल बसे थे। 1948 में भी पाकिस्तान ने 14 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस मनाया था, जो जिन्ना के जीवनकाल का भी आखिरी था। साथ ही पाकिस्तान का पहला कमेमोरेटिव स्टाम्प भी 15 अगस्त की ही बात करता है। हर साल 14 अगस्त को वहाँ जिन्ना का रेडियो मैसेज चलाया जाता है, लेकिन उसमें तारीख 15 अगस्त बताई जाती है।

यहाँ बात पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के तारीख को लेकर हो रही है लेकिन जब भी विभाजन की बात आएगी तो 20 लाख लोगों की मौत की भी बात की जाएगी, जो सांप्रदायिक दंगों में मारे गए। साथ ही क़रीब 2 करोड़ लोग विस्थापित हुए। महात्मा गाँधी ने ऐसे समय में सक्रियता दिखाने की बजाए बंगाल जाकर बैठना उचित समझा था। नेहरू और जिन्ना जैसे नेता अपने-अपने देशों में सांप्रदायिक दंगों को रोकने में पूरी तरह असफल रहे। इधर दोनों देशों की राजधानियों और कुछ इलाक़ों में जश्न चल रहा था, वहीं अधिकतर क्षेत्रों में खून बह रहा था।

हालाँकि, पाकिस्तान के गठन की माँग और इसके लिए हिन्दुओं के नरसंहार की धमकी तो 30 के दशक से ही दी जा रही थी, लेकिन लाहौर में 22-24 मार्च, 1940 को हुए ‘ऑल इंडिया मुस्लिम लीग’ के सेशन में इस्लाम मानने वालों के लिए औपचारिक रूप से अलग देश की माँग करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया, जिसे ‘लाहौर रिजॉल्यूशन’ नाम दिया गया। इसीलिए, 1956 में पकिस्तान जब डोमिनियन से गणतंत्र बना, तो उसने इसके लिए 23 मार्च का दिन चुना और इसे ‘पाकिस्तान डे’ घोषित किया।

इसी तरह भारत ने 1950 में 26 जनवरी की तारीख को गणतंत्र दिवस के रूप में अपनाया। आज गलत दिन पर स्वतंत्रता दिवस मनाने वाले पाकिस्तान की स्थिति ये है कि वो कंगाल हो चला है और चीन की कृपा से सऊदी का लोन सधा रहा है, वहीं भारत दिन पर दिन उन्नति की नई गाथा लिख रहा है। पाकिस्तान अभी भी कश्मीर लेने के सपने देख रहा है, जबकि भारत सही मायनों में स्वतंत्रता के ध्येय को साकार करने की ओर बढ़ चला है।

BJP का चीन से याराना बताने के चक्कर में कॉन्ग्रेस की हुई फजीहत, जापानी PM को बता दिया चीनी

चीन के साथ अपने संबंधों की सच्चाई का खुलासा होता देख, कॉन्ग्रेस लोगों का ध्यान भटकाने के लिए भाजपा पर चीन से जुड़े होने के आरोप लगा रही है। अपनी इन कोशिशों में उसकी लगातार फजीहत भी हो रही है। हालिया मामले में भाजपा को निशाना बनाने के लिए कॉन्ग्रेस ने एक वीडियो शेयर किया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के पीएम शिंजो आबे के साथ नजर आ रहे थे।

हास्यस्पद बात ये है कि अपने ट्वीट में कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि चीन ने भारतीय सीमा पर कब्जा कर लिया है और भाजपा चीन के साथ याराना दिखा रही है। इस ट्वीट में कॉन्ग्रेस की ओर से यह भी दावा किया गया कि भारतीय माता की आजादी के हजारों-लाखों बलिदान हुए हैं। मगर आजादी के संघर्ष से दूरी बनाने वाले लोग इसकी अहमियत कैसे समझेंगें।

चीन के साथ भाजपा नेताओं के रिश्तों पर निशाना साधते हुए इस वीडियो में कॉन्ग्रेस ने जापानी प्रधानमंत्री और भारतीय पीएम की मुस्कुराती फोटो के नीचे कैप्शन लिखा कि भाजपा की चुनावी प्रचार के लिए चीनी कंपनियों को करोड़ों रुपया दिया गया।

हालाँकि, इस ट्वीट पर जैसे ही कॉन्ग्रेस की फजीहत होना शुरू हुई, उन्होंने इसे डिलीट कर दिया। लेकिन ये ध्यान रखने वाली बात है कि भाजपा पर निशाना साधने की होड़ में ऐसी जगहँसाई कॉन्ग्रेस की पहली बार नहीं हुई है। इससे पहले भी कॉन्ग्रेस नेता निखिल अल्वा ने प्रधानमंत्री की ऐसी तस्वीर शेयर की थी, जिसमें पीएम मोदी किर्गिस्तान के राष्ट्रपति जेनबकोव के साथ थे। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता ने उस तस्वीर को लेकर दावा किया कि भाजपा के सीसीपी के साथ संबंध हैं।

यहाँ बता दें कि LAC पर भारतीय-चीन सेना के बीच तनाव बढ़ने के बाद से कॉन्ग्रेस अपने बयानों और चीन के साथ संबंधों को लेकर चर्चा में है। पहले तो उसके साल 2008 में चीन के साथ हुए गुप्त समझौते का खुलासा हुआ। फिर राजीव गाँधी फाउंडेशन के कारण उसकी भद पिटी। मालूम चला कि राजीव गाँधी फाउंडेशन को सिर्फ़ चीन के एंबेसी से पैसा नहीं मिला, बल्कि चीन की सरकार भी उसे पैसे देती थी।

‘तुम चुप हो जाओ, वरना तुम्हें भी इंजेक्शन देकर सुला देंगे’: महेश भट्ट ने मुझे भी धमकाया था, मेरी बेटी जैसा ही सुशांत का केस

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद अब बॉलीवुड नेक्सस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी बहस को आगे बढ़ाते हुए जिया खान की माँ राबिया खान ने सुशांत मामले में सीबीआई जाँच का समर्थन किया है। साथ ही महेश भट्ट को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया है कि जिया के अंतिम संस्कार के समय में महेश भट्ट ने उन्हें धमकाने की कोशिश की थी।

इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में राबिया खान ने बताया जिया के अंतिम संस्कार पर भट्ट ने उनको कहा कि उनकी बेटी (जिया) डिप्रेशन में थी। उन्होंने इसका खंडन किया। लेकिन भट्ट ने उनसे कहा, “तुम चुप हो जाओ वरना तुम्हें भी इंजेक्शन देकर सुला देंगे।”

बता दें जिया खान की मौत 3 जून 2013 को हुई थी। उनकी मौत के बाद साल 2016 में बॉम्बे कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनकी मौत को आत्महत्या करार कर दिया गया था। हालाँकि राबिया खान इसे हमेशा हत्या बताती रहीं और सूरज पंचोली पर इल्जाम मढ़ती रहीं। साल 2018 में इसके बाद मुंबई की एक अदालत में सूरज पर आत्महत्या का आरोप लगा। ये मामला आज भी सुलझा नहीं है।

अपने हालिया साक्षात्कार में राबिया खान ने महेश भट्ट की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उनकी निंदा की है और बताया है कि जिया ने भट्ट के लिए 16 साल की उम्र में काम करना शुरू किया था और तब भी भट्ट ने उनसे जिया को अकेले छोड़ने को कह दिया था।

अपने इंटरव्यू में उन्होंने जिया के ब्वॉयफ्रेंड सूरज पंचोली को मतलबी बताया और ये भी कहा कि उसने जिया को वैलेंटाइन डे पर मारा भी था। जिसे जानने के बाद उन्होंने जिया को भारत लौटने से मना किया। पर सूरज ने बरगला कर उसे वापस मुंबई बुला लिया।

राबिया कहती हैं कि उन्होंने जिया की मौत के बाद उसे इंसाफ दिलाने के लिए बहुत प्रयास किए। वे लंदन से हर महीने आती थीं। लेकिन सूरज कोर्ट में टाइम से नहीं जाता था और जब उससे सवाल पूछा जाता था तो वह ऐसे बर्ताव करता था जैसे कुछ हुआ ही नहीं। साक्षात्कार में उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान जिया को न्याय जरूर दिलाएँगे, उन्हें पूरा यकीन है।

उनका कहना है कि सुशांत और जिया के मामले में कई समानताएँ हैं। उनके मुताबिक, जिया के केस में जैसे उनकी मौत को आत्महत्या बताया गया। वैसे ही सुशांत के केस में भी हुआ।

राबिया खान ने सुशांत मामले में सीबीआई जाँच को लेकर अपना पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने सीबीआई जाँच की माँग करते हुए कहा कि पुलिस पर राजनीतिक दबाव के कारण सच सामने नहीं आ पाएगा।

सोशल मीड‍िया पर शेयर पोस्ट में जिया की माँ ने लिखा, “सुंशात को जिया की तरह मरता देखने के बाद मुझे इससे ज्यादा मजबूर, बेबस और उदास कभी महसूस नहीं हुआ। दोनों सुशांत और जिया को पहले झूठा अटेंशन और प्यार दिया गया। जब दोनों उनके नार्स‍िस्टि साइकोपैथ‍िक गैस लाइट‍िंग पार्टनर्स के जाल में फँस गए तो उन्हें शारीरिक तौर पर नुकसान पहुँचाया गया और उन्हें गाली दी गई।”

उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों कलाकारों का साथ पैसों के लिए इस्तेमाल किया गया और उन्हें पर‍िवार-चाहने वालों से दूर कर दिया गया। जिया और सुशांत दोनों को मानस‍िक तौर पर डिसेबल करार दिया गया और उन्हें काम ना होने की वजह से डिप्रेस्ड कहा गया। जब पार्टनर्स अपना कंट्रोल खोते गए तो उनके होमिसाइडल डेथ को सुसाइड कहा गया।

उन्होंंने आगे पोस्ट में लिखा कि जिया खान और सुशांत के नार्स‍िस्ट‍िक क्रिमिनल पार्टनर्स ताकतवर बॉलीवुड माफ‍ियाओं और नेताओं से जुड़े हुए हैं, इसल‍िए उन्होंने इनका सपोर्ट ले रखा है, क्योंकि उन्हें पता है कि ये बॉलीवुड माफ‍िया और नेता के पास क्रिमिनल्स के बिहेवियर को जानने की ताकत है।

वे लिखती हैं कि मुंबई पुलिस राजनीतिक दबाव के कारण सबके सामने सच नहीं ले पा रही और उन्होंने बस अपना समय सबूत मिटाने व इस केस को होमिसाइडल डेथ करार देने में बिताया।

आगे राबिया खुले तौर पर बॉलीवुड माफिया से जुड़े लोगों को सजा दिलाने की बात कहती हैं। वे बताती हैं कि सीबीआई को इन मामलों में तह तक जाकर अपराधियों को सजा दिलवानी चाहिए। वरना ये लोग हैवान बन जाएँगे और मासूमों को मारते रहेंगे।

राबिया खान ने टाइम्स नाऊ को दिए अपने इंटरव्यू में भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नेता पुलिस पर दबाव डालते हैं कि इस मामले की जाँच मत करना और पुलिस ऐसा ही करती है। देश में रोज़ लोगों के मर्डर होते हैं। क्या ये नेता हर मर्डर के खिलाफ आवाज़ उठाते हैं? तब कोई नेता आवाज़ नहीं उठाता।

वे पूछती हैं, “अब क्यों नेता इस केस में इन्वॉल्व हो गए हैं, क्योंकि उनके अपने लोग इसमें फँस रहे हैं। ज़िया और सुशांत के केस में इसलिए नेता शामिल हुए क्योंकि उनके अपने लोग फँस रहे। वे उन्हें बचाना चाहते हैं।”

वाह री लिबरल मीडिया! नवीन की हत्या के लिए जेहादियों को उकसाने वाली डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट पर चुप्पी

बेंगलुरु में एक फेसबुक पोस्ट में पैगंबर मुहम्मद के ख़िलाफ़ टिप्पणी पढ़कर आहत हुई मुस्लिम भीड़ ने अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारों के बीच पथराव और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम दिया। उन्होंने इस हिंसा में कॉन्ग्रेस विधायक के घर को जलाया और 60 से अधिक पुलिस वालों को घायल भी किया।

अब ऐसी स्थिति में कोई भी यही समझेगा कि इस घटना के बाद मीडिया जाहिर तौर पर इस्लामिक भीड़ के ख़िलाफ़ सख्त रुख अख्तियार करेगी और इस बात का विश्लेषण करेगी कि कैसे मुस्लिम समुदाय के लोग जरा सी बात पर दंगों के लिए तैयार हो जाते हैं। खासतौर पर ईशनिंदा के आरोपित कमलेश तिवारी की हत्या के बाद से तो यह उम्मीद मीडिया से की ही जा रही थी कि वह निष्पक्ष होकर सच्चाई बोले।

हालाँकि, मीडिया ने इस बार भी ऐसा कुछ नहीं किया। उन्होंने फेसबुक पोस्ट करने वाले कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन को अपना निशाना बना लिया। डेक्कन हेराल्ड ने नवीन के ख़िलाफ़ एक ऐसी रिपोर्ट लिखी जिसमें उसे serial offender बताया गया है। रिपोर्ट में लिखा गया कि नवीन की यह आदत है कि वह पैगंबर मुहम्मद का अपमान करता है और उन्हें लेकर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग भी करता है।

डेक्कन हेराल्ड ने अपने सूत्रों का हवाला देते हुए कि विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति का भतीजा नवीन का ऐसा इतिहास है जिसमें वह लगातार आपत्तिजनक कंटेंट डालकर नफरत फैलाने की कोशिश करता है। उन्होंने 5 अगस्त को पदराणयपुर की घटना के बारे में अपमानजनक सामग्री पोस्ट की थी।

पदरायणपुर हिंसा के बारे में याद दिला दें कि ये हिंसा 19 अप्रैल को भड़की थी, जब कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने वाले अन्य लोगों ने क्वारंटाइन होने से मना कर दिया था और हंगामा भी किया था। इस पूरी हिंसा में पुलिस ने 119 लोगों को गिरफ्तार किया था।

दिलचस्प बात ये हैं कि डेक्कन हेराल्ड कहता है कि इन दोनों घटनाओं में नवीन ने भावनाओं को आहत किया। जबकि वास्तविकता ये है कि चाहे पदरायणपुर की हिंसा हो या नवीन के पोस्ट के बाद भड़की हिंसा, हर जगह मुस्लिम समुदाय के लोग उसमें शामिल रहे। लेकिन, तब भी मीडिया संस्थान ने हिंसा का विरोध नहीं किया, बल्कि नवीन को लगातार अपराध दोहराने वाला बताया।

यहाँ ये बात गौर करने वाली है कि एक ओर जहाँ हजारों लोगों की भीड़ ने एक मात्र फेसबुक पोस्ट पर इतनी हिंसा भड़का दी और डेक्कन हेराल्ड तब भी नवीन को जिम्मेदार बताता रहा। तो आखिर पाठक कैसे इस बात को समझेगा कि मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथी कैसे काम करते हैं और कैसे एक-दूसरे को समर्थन के नाम पर बढ़ावा देते हैं। मीडिया संस्थान की यह कोशिशें बिलकुल ऐसी हैं, जैसे वह जिहादियों को उनके उद्देश्य को पूरा करने के निर्देश दे रहे हो।

मुख्यधारा का मीडिया भी वैसे तो हमेशा सच्चाई बताने की बातें करता है। लेकिन जब भी ऐसे कोई भी मौके आते हैं तो वह इनसे खुद को अलग कर लेता है। वास्तविकता में ये सब इसलिए नहीं होता कि वह इंसान के दुश्मनों की छवि निर्माण चाहते हैं। बल्कि इसलिए होता है क्योंकि संस्थान खुद को इस तरह ढाल लेते हैं कि वह अपनी निष्ठाओं को ही धोखा देने लगते हैं।

ये भी ध्यान रखने की बात है कि मुस्लिम समुदाय के सबसे घटिया तत्वों के लिए मुख्यधारा का मीडिया प्रचार तंत्र में बदल गया है। उनकी रिपोर्टें में इस बात का खास तौर पर ध्यान दिया जाता है कि वह मुस्लिम समुदाय के कट्टरपंथियों के मनमुताबिक हो और इसके लिए वह पूर्ण रूप से अपनी सारी कोशिश करते हैं।

इस संबंध में हमें याद रखना चाहिए कि आलोचकों की हत्यााओं का सिलसिला खुद पैगंबर मुहम्मद के समय से चला आ रहा है। ट्रिब्यूट, स्पॉइल्स एंड रुलरशिप (किताब अल-खराज, वाल-फे ‘वाल-इमराह में) में इस्लाम के पैगंबर के समय के दौरान एक दिलचस्प घटना का उल्लेख किया गया है।

साभार Sunnah.com

इसमें बताया गया है कि काब बिन अल अशरफ एक ऐसा व्यक्ति था जो पैगंबर मोहम्मद पर व्यंग्य करता था और पैगंबर और उनके अनुयायियों को आहत करता था। जब उसने नबी के अपमान को न करने की बात पर इनकार किया तो मोहम्मद ने उसकी हत्या का आदेश दिया।

व्यंग्यकार को मारने के लिए मुहम्मद बिन मसमल्लाह को भेजा गया। इस घटना के बाद से यहूदियों और बहुदेववादियों को डर लग गया और वह नबी से मिलने आए। फिर एक समझौते पर हस्ताक्षर हुए कि गैर मुस्लिम कभी भी पैगंबर का अपमान नहीं करेंगे।

इस्लामिक उलेमाओं काब बिन अल अशरफ को भी सीरियल ऑफेंडर के तौर में पेश करते हैं। वे इस कहानी को ऐसे समझाते हैं कि कैसे अल्लाह ने मुहम्मद के अपमान पर शुरू में उन्हें धैर्य रखने व क्षमा करने का आदेश दिया। लेकिन जब उस समय भी उसने इस बात को नहीं माना तो उन्होंने उसे मार दिया।अब बेंगलुरु पर डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट भी बिलकुल इसी तरह है।

21वीं सदी में आने के बाद भी पैगंबर के अपमान पर भयानक हिंसा की प्रथा आज भी चालू है। ऐसे में कोई मुख्यधारा मीडिया से उम्मीद की जा सकती है कि वह हिंसा की संस्कृति को खत्म करने की बात करें, जो एक समुदाय में बढ़ती ही जा रही है। लेकिन नहीं, वह तो अब भी उन लोगों की छवि निर्माण करते हैं जिन्होंनें हिंसा को जन्म दिया।

जब डेक्कन हेराल्ड ने नवीन को serial offender बताया तो यह सर्वविदित है कि आगे क्या परिणाम होंगे। कमलेश तिवारी के साथ जो हुआ इसके बाद कोई इनसे इनकार नहीं कर सकता। लेकिन तब भी ये ऐसा करने को आगे आए और ऐसा किया भी। जब बात आगे बढ़ जाएगी तो कोई भी मीडिया संस्थान के इन निष्कर्षों को दोष नहीं दे पाएगा कि ये लोग मानते थे कि पैगंबर पर बोलने के लिए नवीन को मौत की सजा हो।

एक ओर जहाँ इस पूरे मामले पर मेनस्ट्रीम मीडिया बोलने से बचती रही। वहीं डेक्कन हेराल्ड ने सभी सीमाओं को लांघ दिया है। उन्होंने नवीन को serial offender कहकर हिंसा को वाजिब ठहराया है। जिसके कारण आगे कई अनहोनी हो सकती हैं और तब मीडिया ऐसी घटनाओं पर पछतावा करने को आगे आएगा।

शाहजेब रिजवी को यूपी पुलिस ने दबोचा, दलित MLA के भतीजे के सर पर रखा था ₹51 लाख का इनाम

कर्नाटक कॉन्ग्रेस के दलित विधायक आर मूर्ति के भतीजे नवीन का सिर काटने पर 51 लाख रुपए का इनाम घोषित करने वाले पूर्व सपा नेता शाहबेज रिजवी को उत्तर प्रदेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इसकी जानकारी भाजपा के प्रवक्ता शलभ मणि त्रिपाठी ने अपने ट्विटर हैंडल से दी है।

त्रिपाठी ने ट्विटर पर शाहजेब की हालिया तस्वीर शेयर की। इसमें वह पुलिस की हिरासत में नजर आ रहा है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “ज़्यादा दूर भाग नहीं पाया, यूपी पुलिस ने धर दबोचा !!”

गौरतलब है कि बेंगलुरु में इस्लामिक भीड़ का भयावह चेहरा देखने के बाद भी 13 अगस्त को शाहजेब रिजवी ने एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उसने कहा था, “फेसबुक पोस्ट के माध्यम से नवीन ने हुजूर के शान में जो गुस्ताखी की है, मैं उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूँ। इस युवक का जो सर कलम करके लाएगा उसे मैं 51 लाख का नगद ईनाम दूँगा।” इसके लिए रिजवी ने संप्रदाय विशेष के लोगों से मिलकर 51 लाख रुपए जमा करने की भी अपील की थी।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद यूपी के मेरठ में जिला पंचायत चुनाव लड़ चुके पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। 13 अगस्त की देर रात को मेरठ पुलिस द्वारा फलावदा पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 153A, 505(2) के तहत केस दर्ज हुआ था।

दूसरी ओर मेरठ एसएसपी अजय साहनी ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए मामले की जाँच के आदेश दिए थे। लेकिन जब पुलिस ने रिजवी के घर दबिश दी, तो वो फरार मिला। इसके बाद से पुलिस लगातार उसे ढूँढने का प्रयास कर रही थी।

शाहजेब रिजवी उत्तर प्रदेश के मेरठ में फलावदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर गाँव के रहने वाला हैं। वह पहले समाजवादी पार्टी का अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव रह चुका है। लेकिन इस वक्त वह सपा में सक्रिय नहीं हैं। पिछली बार जिला पंचायत के चुनाव में वह हार गया था। वर्तमान में वह अपने आप को सामाजिक कार्यकर्ता बताता है।

सुवर्णा न्यूज के पत्रकारों पर बेंगलुरु पुलिस ने नहीं, संप्रदाय विशेष की भीड़ ने किया था हमला: एडिटर्स गिल्ड के झूठ की चैनल ने खोली पोल

बेंगलुरु में हुई हिंसा के बाद सुवर्णा न्यूज 24×7 ने एडिटर्स गिल्ड के फेक न्यूज की पोल खोली है। न्यूज चैनल ने अपना बयान उस समय दिया है जब एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने हाल में दिल्ली और बेंगलुरु में मीडिया कर्मियों पर हुए हमले की निंदा की।

सुवर्णा न्यूज ने इस बात को स्पष्ट किया कि उनके पत्रकारों पर पुलिस ने कोई हमला नहीं किया, बल्कि वह तो उपद्रवी भीड़ का शिकार हुए थे।

बता दें कि बेंगलुरु में एक फेसबुक पोस्ट के बाद भड़की हिंसा में उपद्रवियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर, कई पुलिसकर्मियों पर हमला बोला था। इसी बीच कुछ मीडियाकर्मी भी घायल हुए थे। लेकिन एडिटर्स गिल्ड ने अपने बयान में हिंसक भीड़ का समर्थन करने के लिए सारा इल्जाम पुलिस पर मढ़ दिया।

बयान में कहा गया, “बेंगलुरु में उस दिन इंडिया टुडे, द न्यूज मिनट और सुवर्णा न्यूज के 4 पत्रकारों पर कथित तौर पर हमला किया गया। ये पत्रकार उस समय ड्यूटी पर थे और शहर में हिंसा के मद्देनजर नुकसान और पुलिस गोलीबारी पर रिपोर्ट कर रहे थे।”

एडिटर्स गिल्ड के इस बयान को पूर्ण रूप से खारिज करते हुए सुवर्णा न्यूज ने कहा कि उनके पत्रकारों पर बेंगलुरु पुलिस ने हमला नहीं बोला था। संस्थान ने पत्रकारों के लिए दिखाई चिंता पर एडिटर्स गिल्ड का धन्यवाद दिया। साथ ही यह समझाया कि गिल्ड ने हमलावरों को पहचानने में गलती की।

अपने बयान में सुवर्णा न्यूज ने लिखा, “हालाँकि, हम स्प्ष्ट करना चाहेंगे कि हमारे पत्रकारों पर हमला भीड़ द्वारा किया गया था, न कि बैंगलोर सिटी पुलिस ने, जैसा 13 अगस्त को एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया द्वारा जारी बयान में संकेत दिया गया।”

चैनल ने यह भी बताया कि भीड़ ने उनके तीन पत्रकारों को मारा। इनमें से एक को चोट भी आई। इसके अलावा हिंसक भीड़ ने मीडिया हाउस के एक कैमरा और दो खबर एकत्रित करने वाले वाहन को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। चैनल ने बाद में इस संबंध में उपद्रवियों के ख़िलाफ़ बेंगलुरु सिटी पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई।

सुवर्णा न्यूज के इस बयान से साफ होता है कि उनके पत्रकारों को भीड़ ने नुकसान पहुँचाया। लेकिन एडिटर्स गिल्ड ने इसका आरोप भीड़ को देने की बजाय उस बेंगलुरु पुलिस को हमले का जिम्मेदार ठहराया, जो खुद उस हिंसक भीड़ के निशाने पर थे।

अंकिता ने शेयर किए फ्लैट के रजिस्ट्रेशन और बैंक डिटेल, बताया- उनकी ईएमआई नहीं भरते थे सुशांत

अंकिता लोखंडे ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया है जिसमें दावा किया गया था कि सुशांत सिंह राजपूत उनके फ्लैट की ईएमआई भरते थे। अंकिता ने फ्लैट का रजिस्ट्रेशन और बैंक डिटेल शेयर करते हुए बताया है कि ईएमआई हर महीने उनके ही बैंक अकाउंट से जाती है।

अंकिता ने ट्वीट कर कहा है, “यहॉं मैं सभी अटकलों को विराम देती हूॅं। मैं इससे ज्यादा चीजों को साफ-साफ नहीं बता सकती। यहॉं मैं अपने फ्लैट के रजिस्ट्रेशन और अपने बैंक खातों (1 जनवरी 2019 से 1 मार्च 2020 तक) का पूरा व‌िवरण रख रही हूॅं। मेरे अकाउंट से हर महीने सभी ईएमआई के अमाउंट कटे हैं। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकती। सुशांत को न्याय मिले।”

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया था कि सुशांत सिंह राजपूत उस फ्लैट की ईएमआई भी भरते थे, जिसमें उनकी एक्स गर्लफ्रेंंड अंकिता लोखंडे रहती हैं। ईडी सुशांत सुसाइड मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जॉंच कर रही है।

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सुशांत मलाड में स्थित 4.5 करोड़ रुपए के एक फ्लैट का ईएमआई भर रहे थे। ये शायद वही फ्लैट है जिसमें अंकिता रहती हैं। सूत्रों के मुताबिक सुशांत के खाते से हर महीने इस फ्लैट का ईएमआई कट रहा था। यह फ्लैट सुशांत के ही नाम पर है।

बताया जा रहा था कि रिया चक्रवर्ती ने भी पूछताछ के दौरान इस फ्लैट का जिक्र किया था। उसने दावा किया था कि सुशांत चाह कर भी अंकिता से ये फ्लैट खाली करने को नहीं कह पा रहे थे। उल्लेखनीय है कि सुशांत की आत्महत्या की खबर आने के बाद से ही अंकिता मुखर रही हैं और लगातार इस मामले की जॉंच की मॉंग करती रही हैं। दोनों 6 साल तक एक-दूसरे के साथ रिलेशनशिप में थे।

इस बीच ED ने मुंबई पुलिस पर जॉंच में सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है। उसका कहना है कि चार बार चिट्ठी लिखे जाने के बावजूद मुंबई पुलिस सुशांत का फोन उसे सौंप नहीं रही है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) सुशांत सिंह राजपूत के खातों से 15 करोड़ रुपए के गबन के मामले की जाँच कर रही है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक ईडी को अपनी तफ्तीश आगे बढ़ाने के लिए सुशांत के मोबाइल फोन के रिकॉर्ड की जरूरत है। लेकिन अभी तक मुंबई पुलिस से सहयोग नहीं मिला है।

ईडी सुशांत की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती और उसके परिवार के सदस्यों से मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ कर रही है। ईडी ने कथित तौर पर 2 आईपैड और एक लैपटॉप सहित परिवार से संबंधित मोबाइल फोन जब्त किए हैं। ईडी के डायरेक्टर ने मुंबई पुलिस को चार बार पत्र लिखकर कहा कि उन्हें अपनी जाँच में सुशांत के फोन की जरूरत है। इसके बावजूद मुंबई पुलिस ने सुशांत का फोन ईडी को नहीं सौंपा है।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने देश को किया संबोधित, गलवान के बलिदानियों को किया याद

74वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शुक्रवार को देशवासियों को संबोधित किया। देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि स्वाधीनता सेनानियों के बलिदान के बल पर ही, हम सब, आज एक स्वाधीन देश के निवासी हैं। हम सौभाग्यशाली हैं कि महात्मा गाँधी हमारे स्वाधीनता आंदोलन के मार्गदर्शक रहे। उनके व्यक्तित्व में एक संत और राजनेता का जो समन्वय दिखाई देता है, वह भारत की मिट्टी में ही संभव था।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के उत्सवों में हमेशा की तरह धूम-धाम नहीं होगी। इसका कारण स्पष्ट है। पूरी दुनिया एक ऐसे घातक वायरस से जूझ रही है जिसने जन-जीवन को भारी क्षति पहुँचाई है और हर प्रकार की गतिविधियों में बाधा उत्पन्न की है। यह बहुत आश्वस्त करने वाली बात है कि इस चुनौती का सामना करने के लिए, केंद्र सरकार ने पूर्वानुमान करते हुए, समय रहते, प्रभावी कदम उठा‍ लिए थे।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र उन सभी डॉक्टरों, नर्सों तथा अन्य स्वास्थ्य-कर्मियों का ऋणी है जो कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में अग्रिम पंक्ति के योद्धा रहे हैं। ये हमारे राष्ट्र के आदर्श सेवा-योद्धा हैं। इन कोरोना-योद्धाओं की जितनी भी सराहना की जाए, वह कम है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इसी दौरान, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए ‘अम्फान’ चक्रवात ने भारी नुकसान पहुँचाया , जिससे हमारी चुनौतियाँ और बढ़ गयीं। इस आपदा के दौरान, जान-माल की क्षति को कम करने में आपदा प्रबंधन दलों, केंद्र और राज्यों की एजेंसियों तथा सजग नागरिकों के एकजुट प्रयासों से काफी मदद मिली। इस महामारी का सबसे कठोर प्रहार, गरीबों और रोजाना आजीविका कमाने वालों पर हुआ है। संकट के इस दौर में, उनको सहारा देने के लिए, वायरस की रोकथाम के प्रयासों के साथ-साथ, अनेक जन-कल्याणकारी कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने कहा कि ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ की शुरुआत कर सरकार ने करोड़ों लोगों को आजीविका दी है, ताकि महामारी के कारण नौकरी गँवाने, एक जगह से दूसरी जगह जाने तथा जीवन के अस्त-व्यस्त होने के कष्ट को कम किया जा सके।

किसी भी परिवार को भूखा न रहना पड़े, इसके लिए जरूरतमन्द लोगों को मुफ्त अनाज दिया जा रहा है। इस अभियान से हर महीने, लगभग 80 करोड़ लोगों को राशन मिलना सुनिश्चित किया गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अपने सामर्थ्य में विश्वास के बल पर, हमने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में अन्य देशों की ओर भी मदद का हाथ बढ़ाया है। अन्य देशों के अनुरोध पर, दवाओं की आपूर्ति करके, हमने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि भारत संकट की घड़ी में, विश्व समुदाय के साथ खड़ा रहता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता के लिए, हाल ही में सम्पन्न चुनावों में मिला भारी समर्थन, भारत के प्रति व्यापक अंतर्राष्ट्रीय सद्भावना का प्रमाण है। आज जब विश्व समुदाय के समक्ष आई सबसे बड़ी चुनौती से एकजुट होकर संघर्ष करने की आवश्यकता है, तब हमारे पड़ोसी ने अपनी विस्तारवादी गतिविधियों को चालाकी से अंजाम देने का दुस्साहस किया।

उन्होंने कहा कि जवानों के शौर्य ने यह दिखा दिया है कि यद्यपि हमारी आस्था शांति में है, फिर भी यदि कोई अशांति उत्पन्न करने की कोशिश करेगा तो उसे माकूल जवाब दिया जाएगा। हमें अपने सशस्त्र बलों, पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों पर गर्व है जो सीमाओं की रक्षा करते हैं, और हमारी आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।

सीमाओं की रक्षा करते हुए, हमारे बहादुर जवानों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। भारत माता के वे सपूत, राष्ट्र गौरव के लिए ही जिए और उसी के लिए मर मिटे। पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन करता है। हर भारतवासी के हृदय में उनके परिवार के सदस्यों के प्रति कृतज्ञता का भाव है।

राष्ट्रपति ने बताया कि कृषि क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं। किसान बिना किसी बाधा के, देश में कहीं भी, अपनी उपज बेचकर उसका अधिकतम मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। किसानों को नियामक प्रतिबंधों से मुक्त करने के लिए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ में संशोधन किया गया है। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि हमारे देश और युवाओं का भविष्य उज्ज्वल है। केवल दस दिन पहले अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का शुभारंभ हुआ है और देशवासियों को गौरव की अनुभूति हुई है। पूरा देश गलवान घाटी के बलिदानियों को नमन करता है।

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह ने इंडिया टुडे को बताया ‘सुस्त’, कहा- स्टिंग से पहले हो चुकी थी कार्रवाई

इंडिया टुडे समूह ने एक ‘स्टिंग ऑपरेशन’ किया था। इसमें सरकार पर एजेन्ट्स और ट्रैवल ऑपरेटर्स पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया था। इस स्टिंग में ऐसा खुलासा किया गया था कि एजेन्ट्स और ट्रैवल ऑपरेटर्स एयर इंडिया की वन्दे भारत के टिकट मन मुताबिक़ दाम पर बेच रहे थे। इस पर नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह ने इंडिया टुडे को फटकार लगाई है।   

इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए उड्डयन मंत्री ने कहा कि ऐसा स्टिंग करने के लिए किसी भी मीडिया समूह को पूरा होम वर्क कर लेना चाहिए। हालाँकि उन्होंने अपने ट्वीट में इंडिया टुडे का नाम नहीं लिया है।

इंडिया टुडे ने इस स्टिंग के आधार पर कई बड़े दावे किए थे। उनका कहना था कि महामारी के बाद इस योजना के तहत देश के कई हिस्सों में टिकट की कालाबाज़ारी हो रही है। सरकार इस पर कोई कड़ी कार्रवाई नहीं कर रही है, जिसकी वजह से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 

इन दावों का जवाब देते हुए हरदीप सिंह ने कहा कि मंत्रालय ऐसी घटनाओं पर हमेशा से निगरानी रख रहा था। मंत्रालय ने यात्रियों को ऐसे बिचौलियों से बचने के लिए अक्सर चेतावनी भी जारी की है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि टिकट केवल आधिकारिक तौर पर तय किए गए दामों पर ही खरीदे जाएँ।   

मंत्रालय की कोशिश लगातार यही रही है कि आम लोगों को किसी भी तरह की असुविधा नहीं हो। उड्डयन मंत्री ने एयर इंडिया द्वारा हाल ही में जारी किए गए सर्कुलर का भी हवाला दिया। इस आदेश में मंत्रालय ने लिखा है कि पिछले कुछ समय में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिसमें बिचौलिए वंदे भारत मिशन के तहत चलने वाली हवाई जहाज के लिए ज़्यादा रुपए वसूल रहे थे।    

इस आदेश में यह भी साफ़ किया गया है कि मंत्रालय ने इस मामले में 3 एजेन्ट्स को चेतावनी भी जारी की है। इसके अलावा मंत्रालय ने तीन एजेंट्स का लाइसेंस भी रद्द कर दिया है। यह सब कुछ इंडिया टुडे के स्टिंग के बहुत पहले ही हो चुका है। इस संबंध में 2 जून 2020 को आरोपित एजेन्ट्स पर मामला भी दर्ज किया गया था। इस घटना को अब दो महीने से ज्यादा का समय हो चुका है और इंडिया टुडे इस मुद्दे पर अब स्टिंग कर रहा है।   

हरदीप सिंह ने कहा, “लेज़ी जर्नलिज्म (सुस्त पत्रकारिता) अपने लिए गड्ढे खोदने जैसा है। अगर मीडिया समूह (इंडिया टुडे) ने एयर इंडिया से ही जानकारी माँग ली होती या सोशल मीडिया पर इस मुद्दे से संबंधित जानकारी खोज ली होती तो उन्हें ऐसे नतीजे कभी हासिल नहीं होते।” हरदीप सिंह ने यह भी कहा कि जो लोग स्टिंग में शामिल हुए हैं वह असल में एजेन्ट्स हैं भी नहीं। एजेन्ट्स और सब एजेन्ट्स को IATA नियुक्त करता है। आरोपित बिचौलियों पर भी मामला दर्ज कर लिया गया है।    

यह पहला मौक़ा नहीं है जब उड्डयन मंत्रालय को वंदे भारत मिशन पर मीडिया द्वारा फैलाई गई झूठी ख़बरों के संबंध में सफाई जारी करनी पड़ी हो। इसके पहले मंत्री हरदीप सिंह ने ऐसे ही स्टिंग के लिए इकोनॉमिक टाइम्स को फटकार लगाई थी। इकोनॉमिक टाइम्स ने दावा किया था कि जो लोग भारत वापस आना चाहते हैं या भारत से कहीं जाना चाहते हैं, वह वंदे भारत मिशन से परेशान हो चुके हैं। इसके अलावा यह भी कहा था कि एयर इंडिया दूसरे देश में मौजूद भारतीय नागरिकों को वापस लेकर आने के लिए अत्यधिक दाम वसूल रही है। इस पर हरदीप सिंह ने सिलसिलेवार तरीके से जवाब दिया था। साथ ही इस रिपोर्ट को बेहद निचले स्तर की पत्रकारिता करार दिया था।    

वंदे भारत मिशन भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी योजना थी। इसके तहत दुनिया के तमाम देशों में फँसे भारतीय नागरिकों वापस लाया जाना था। इस योजना के तहत एयर इंडिया ने अब तक विदेश में फँसे हज़ारों भारतीय नागरिकों को वापस बुलाया है। महामारी के दौर में भारत सरकार की इस योजना ने दूसरे देशों में फँसे नागरिकों की बहुत मदद की।  

कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए अमित शाह, 12 दिन पहले पाए गए थे पॉजिटिव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कोरोना टेस्ट की रिपार्ट निगेटिव आई है। पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कोरोना निगेटिव होने की जानकारी खुद ट्वीट कर दी है।

गृहमंत्री ने अपने ट्वीट में कहा, “मैं ईश्वर का धन्यवाद करता हूँ और इस समय जिन लोगों ने मेरे स्वास्थ्य लाभ के लिए शुभकामनाएँ देकर मेरा और मेरे परिजनों को ढांढस बँधाया उन सभी का ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
डॉक्टर्स की सलाह पर अभी कुछ और दिनों तक होम आइसोलेशन में रहूँगा।”

एक और ट्वीट में उन्होंने अपना इलाज करने वाले डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को शुक्रिया कहते हुए लिखा, “कोरोना संक्रमण से लड़ने में मेरी मदद करने वाले और मेरा उपचार करने वाले मेदांता अस्पताल के सभी डॉक्टर्स व पैरामेडिकल स्टाफ का भी आभार व्यक्त करता हूँ।”

गृह मंत्री अमित शाह का हरियाणा के मेदांता अस्पताल में इलाज चल रहा था। 2 अगस्त को कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद डॉक्टरों की सलाह पर वह मेदांता में भर्ती हुए थे। इसकी जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट करके दी थी। उन्हें कोरोना के हल्के लक्षण थे। वायरस के पता चलने के 12 दिन बाद उनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई है।

बता दें, इससे पहले कुछ लोगों ने अमित शाह के कोरोना टेस्ट के रिपोर्ट को निगेटिव बताते हुए फर्जी अफवाह फैला दी थी। जिसके बाद 9 अगस्त को गृह मंत्रालय ने इस खबर को फर्जी बताते हुए स्पष्टीकरण जारी किया था। वहीं एमएचए ने भी बताया था कि अभी तक गृहमंत्री का टेस्ट नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि अमित शाह का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद, सोशल मीडिया पर इस्लामवादियों ने गृह मंत्री की मृत्यु की कामना की थी और जश्न भी मनाया था। कोरोना वायरस संक्रमित होने की वजह से अमित शाह भूमिपूजन में भी हिस्सा नहीं ले सके थे।