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आतंकियों के जिस एनकाउंटर पर रोईं थी सोनिया गाँधी उसमें बलिदान हुए इंस्पेक्टर को गैलेंट्री अवॉर्ड

शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैलेंट्री अवॉर्ड का ऐलान किया। इसमें साल 2008 के बाटला हाउस एनकाउंटर में वीरगति प्राप्त हुए दिल्ली पुलिस के इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा का नाम भी है। उन्हें मरणोपरांत सातवीं बार वीरता पदक से सम्मानित किया जाएगा।

मोहन शर्मा के अलावा उनकी टीम के इंस्पेक्टर कैलाश सिंह बिष्ट (फिलहाल स्पेशल सेल में हैं), देवेंद्र मलिक और धर्मेंद्र समेत स्पेशल सेल के 6 बहादुरों को इस बार गैलेंट्री अवॉर्ड से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।

कुल मिलाकर देश के 215 पुलिसकर्मियों को (मरणोपरांत भी) गैलेंट्री अवॉर्ड के लिए चुना गया है। वहीं 80 पुलिसकर्मियों को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक और मेधावी सेवा के लिए 631 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया जाएगा।

सातवीं बार वीरता पदक से सम्मानित होने वाले इंस्पेक्टर मोहन शर्मा के बारे में याद दिला दें कि उन्होंने मात्र 44 वर्ष की आयु में अपने प्राण देश की सेवा में गॅंवाए थे।। उन्हें बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान 3 गोलियाँ लगी थीं, जिसके बाद उन्होंने अस्पताल में अपना दम तोड़ा था।

जानकारी के अनुसार, 19 सितंबर 2008 को मोहन शर्मा को यह सूचना मिली थी कि इंडिया मुजाहिद्दीन के 5 आतंकी बाटला हाउस के एक मकान में मौजूद हैं। इसके बाद पुलिस टीम सतर्क हो गई। मोहन शर्मा ने भी अपने डेंगू से पीड़ित बेटे को अस्पताल पहुँचाया और पूरी टीम का नेतृत्व करने बाटला हाउस पहुँचे।

आतंकियों के फ्लैट में घुसने पर मुठभेड़ शुरू हुई। इस मुठभेड़ में पुलिस ने दो आतंकियो को ढेर कर दिया। इसी दौरान मोहन शर्मा भी घायल हो गए। बाद में पुलिस ने दो अन्य आतंकियों को भागते हुए गिरफ्तार कर लिया था।

मोहन शर्मा को तीन गोलियाँ लगी थीं। एक पेट में, एक जाँघ में और एक दाहिने हाथ में। अपने पूरे जीवन में 60 आतंकियों को मारने वाले और 200 से ज्यादा अपराधियों को पकड़ने वाले मोहन चंद शर्मा ने उस एनकाउंटर में घायल होने के बाद होली फैमिली अस्पताल में अपने प्राण त्याग दिए थे।

बता दें कि बाटला हाउस एनकाउंटर की नींव 13 सितंबर 2008 को राजधानी में हुए सीरियल बम ब्लास्ट के बाद पड़ी थी जिसे इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया था।

इस सीरियल बम ब्लास्ट में 26 लोग मारे गए थे और कई घायल हुए थे। लेकिन, पुलिस कार्रवाई में जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ तो हर जगह यह फैलाया गया कि दिल्ली पुलिस ने छात्रों को आतंकी समझकर मार गिराया।

इस एनकाउंटर पर काफी विवाद हुआ था। कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने तो एक चुनाव प्रचार के दौरान यह भी कहा था कि जब उन्होंने बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीरें कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को दिखाईं तो वह रो पड़ी। साथ ही तस्वीरों को देखकर यह भी कहा कि एनकाउंटर की जाँच होनी चाहिए।

बेंगलुरु दंगे में SDPI का नाम आने पर इसे बैन करने की तैयारी: कर्नाटक सरकार के मंत्री ने कहा- 20 अगस्त को फैसला

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू में भड़की हिंसा के पीछे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) का नाम सामने आया है। सूबे की येदियुरप्पा सरकार इस पर प्रतिबंध लगा सकती है। कर्नाटक के मंत्री केएस ईश्वरप्पा ने कहा कि SDPI एक बेकार संगठन है हम इसे बैन करने के बारे में विचार कर रहे हैं।

मंत्री ने कहा, “SDPI एक वाहियात संगठन है और इस पर बैन लगाने पर विचार किया जा रहा है। जल्द ही दो फैसले लिए जाएँगे। पहला ये कि बेंगलुरू हिंसा में शामिल लोगों की संपत्ति जब्त की जाएगी। दूसरा एसडीपीआई पर प्रतिबंध। 20 अगस्त को कैबिनेट की बैठक में इन 2 मामलों पर चर्चा की जाएगी।”

बता दें, एसडीपीआई इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का राजनीतिक संगठन है। गत गुरुवार को बेंगलुरु पुलिस ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता केजे जॉर्ज के करीबी सहयोगी एसडीपीआई के सदस्य कलीम पाशा को बेंगलुरु हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया है। जिला सचिव मुज़म्मिल पाशा सहित दो अन्य लोगों को बुधवार को गिरफ्तार किया गया था।

सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के नेता मुजम्मिल पाशा को दंगों का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि बेंगलुरु में 11 अगस्त की हिंसा के सिलसिले में 60 और लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें कलीम पाशा को मिलाकर हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या 206 हो चुकी है। वहीं उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण के अनुसार हिंसा के संबंध में इसके 4 सदस्यों को गिरफ्तार किए जाने के बाद सरकार SDPI पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रही थी।

पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, 5 लोगों के एक गिरोह ने 200 से 300 लोगों की भारी सशस्त्र भीड़ का नेतृत्व किया और उन्हें पुलिस पर हमला करने के लिए कहा था।

बेंगलुरु के जीडे हल्ली इलाके में मंगलवार रात करीब 9.30 बजे उपद्रवियों ने कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के घर को निशाना बनाया था। इस दौरान विधायक के घर का एक हिस्सा आग के हवाले कर दिया गया था। दरअसल, विधायक श्रीनिवास के भतीजे ने सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया था, जिसके बाद संप्रदाय विशेष के लोगों ने जमकर बवाल मचाया था। करीब 250 गाड़ियाँ फ़ूंक दी गई। वहीं हिंसा के दौरान हमले में एडिशनल पुलिस कमिश्नर समेत 60 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं थीं।

नहीं महसूस किया कोई भेदभाव, मिले बराबर अवसर: IAF की आपत्ति के बाद गुंजन सक्सेना ने भी बयाँ किया अनुभव

नेटफ्लिक्स (Netflix) की फिल्म ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’ में अनुचित नकारात्मक चित्रण पर IAF की आपत्ति के बाद गुंजन सक्सेना ने अपने वास्तविक अनुभवों पर बयान जारी किया है। 

उन्होंने अपनी बात रखते हुए यह स्पष्ट किया कि उनके साथ उनके वरिष्ठों ने, साथियों ने और कमांडिंग ऑफिसर्स ने किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया। उन लोगों ने तो हर प्रकार से उनका सहयोग किया।

IANS से बात करते हुए सक्सेना ने भारतीय वायु सेना की संस्कृति के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि IAF के प्रशिक्षण और मजबूत नीतियों ने ही उन्हें असाधारण रूप से साहसी उपलब्धियाँ हासिल करने के लिए साहस प्रदान किया।

उन्होंने बताया कि भारतीय सशस्त्र बल की सभी शाखाओं की सभी महिला अधिकारी जिन्होंने संगठन में रहकर देश की सेवा की है या कर रही हैं, वह सभी वायुसेना के मजबूत मूल्यों और समृद्ध सांस्कृतिक लोकाचार से प्रेरित हैं।

साल1994 में प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करके IAF से जुड़ने वाली सक्सेना बताती हैं, “हाँ, कमर्शियल फिल्म के रूप में या फिक्शन के रूप में, फिल्म ने मेरी कहानी को दिखाने की कोशिश की है। लेकिन जो बात किसी भी संदेह से परे है वो ये कि मेरे लिए दरवाजों खोले गए और कई अवसर दिए गए। और ये चीज फिल्म में भी दिखाई गई है।”

सक्सेना का यह भी कहना है कि भारतीय वायुसेना में रहते हुए उन्होंने कोई भेदभाव का सामना नहीं किया। उन्हें और अन्य अधिकारियों को बराबर अवसर दिए गए। उन्होंने इस बात पर भी गौर करवाया कि भारतीय वायु सेना में महिला अधिकारियों की बढ़ती दर संगठन की समतावादी नीतियों की प्रमाण हैं।

भारतीय वायुसेना में जाने के बाद शुरुआती सालों में जब उनसे लैंगिक भेदभाव पर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “IAF भारत की एक बेहद सम्मानित संस्था है। वह आप में बदलाव लाने के बारे में प्रगतिशील और सकारात्मक है।”

गौरतलब है कि गुंजन सक्सेना के जीवन व संघर्षों पर आधारित फिल्म में नकारात्मक चित्रण पर एयरफोर्स ने आपत्ति जताई थी। इंडियन एयर फोर्स ने सेंसर बोर्ड को लिखे अपने पत्र में बातें साफ-साफ समझाई थी। IAF ने कहा था, “नेटफ्लिक्स और धर्मा प्रोडक्शंस ने भारतीय वायु सेना का प्रतिनिधित्व प्रामाणिकता के साथ करने की सहमति व्यक्त की थी ताकि यह फिल्म अगली पीढ़ी को वायु सेना में ज्वाइन करने के लिए प्रेरित करने में मदद करती।”

IAF के अनुसार जब फिल्म का ट्रेलर हाल ही में जारी किया गया, तो यह देखा गया कि इसमें भारतीय वायुसेना को अनुचित ढंग से दिखाया गया है। गुंजन सक्सेना मतलब श्रीदेवी की बेटी जाह्णवी कपूर (बॉलीवुड में नेपोटिजम) के स्क्रीन कैरेक्टर को महिमामंडित करने के लिए फिल्म में जबरन ऐसी परिस्थितियाँ प्रस्तुत की गईं, जो वायु सेना की कार्य संस्कृति के विपरीत है।

मैं इस्लाम मानने वालों को भाई समझता था, उन्होंने मेरे घर पर पेट्रोल बम फेंके: रो पड़े कॉन्ग्रेस के दलित MLA

कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंड श्रीनिवास मूर्ति ने पत्रकारों से बात करते हुए दुखी मन से कहा, “मैं इस्लाम मानने वालों को अपना भाई मानता था और कम से कम 25 साल से हम मिल-जुलकर रह रहे थे… फिर भी आज मैंने अपना 50 साल पुराना घर खो दिया।”

हाल ही में बेंगलुरु में हुए दंगों के दौरान, उग्र इस्लामवादियों ने पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ कर हिंसक प्रदर्शन किया। संप्रदाय विशेष की भारी भीड़ ने सड़कों पर जमकर तोड़फोड़ की और कॉन्ग्रेस विधायक आर मूर्ति के घर को जला दिया। इसके साथ दंगाइयों ने डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस स्टेशनों पर हमला किया। पुलिस वाहनों और कई अन्य वाहनों को आग लगा दी और सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान पहुँचाया।

दिल दहला देने वाली घटना को याद करते हुए कॉन्ग्रेस विधायक ने कहा कि उनके घर पर संप्रदाय विशेष के 3000-4000 दंगाइयों की भीड़ पहुँची, पथराव किया, पेट्रोल डाला, टायर जलाए और घर में आग लगा दी।” उन्होंने बताया कि उग्र दंगाइयों ने तलवार, कुल्हाड़ी, लाठी से हमला किया और उनके आवास पर पेट्रोल बम भी फेंके।

कैमरे के सामने अपने दुख को व्यक्त करते हुए विधायक ने कहा कि दंगाइयों ने जिसे जलाया वह मेरा पुश्तैनी घर था। वहीं वे अपने भाई-बहनों के साथ बड़े हुए है और अपने माता-पिता के साथ रह रहे थे। उन्होंने बताया कि परिवार पिछले 50 वर्षों से उस घर में रह रहा था।

विधायक श्रीनिवास मूर्ति दलित समुदाय से हैं। अपने निर्वाचन क्षेत्र में संप्रदाय विशेष के भारी वोट शेयर होने के बावजूद, वे पिछले 4 चुनावों से अच्छे अंतर से जीत रहे हैं। उनके संप्रदाय विशेष के स्थानीय नेताओं के साथ अच्छे संबंध होने की भी खबर है। विधायक ने दंगों को उकसाने के लिए बाहरी लोगों को भी दोषी ठहराया और स्थानीय निवासियों से उन दोषियों को पकड़ने में मदद करने का आग्रह किया।

सीबीआई या सीआईडी जाँच की जाँच की माँग

कॉन्ग्रेस MLA ने कहा, “सवाल यह उठता है कि अगर कानून बनाने वाले को यह भुगतना पड़े तो मैं आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे कर सकता हूँ?” उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपने परिवार को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की अपील की है। साथ ही मामले की जाँच सीबीआई या सीआईडी ​​को सौंपने की अपील की है।

उन्होंने कहा, “एक विधायक होने और कर्नाटक में सबसे बड़े मार्जिन से जीतने के बावजूद आज मेरी यह हालत है। अन्य विधायकों की क्या स्थिति हो सकती है?”

बेंगलुरु दंगे में कॉन्ग्रेस के लिंक आए सामने

गौरतलब है कि इस भयावह दंगों के तुरंत बाद जो डिटेल सामने आए थे, उससे संकेत मिलता है कि नगवारा कॉर्पोरेटर इरशाद बेगम के पति कलीम पाशा ने अन्य एसडीपीआई नेताओं के साथ मिलकर दंगों को अंजाम दिया।

कलीम पाशा नागवारा वार्ड का पूर्व कॉर्पोरेटर है। कथित तौर पर वह राज्य में कॉन्ग्रेस लीडर के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है। वह कर्नाटक के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता केजे जॉर्ज के सहयोगी के रूप में भी जाना जाता है।

उसकी फेसबुक प्रोफाइल इस तथ्य पर भी प्रकाश डालती है कि वह एक सक्रिय कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता था। बेंगलुरु हिंसा मामले में पाशा और स्थानीय एसडीपीआई नेता मुज़म्मिल पाशा के खिलाफ बेंगलुरु पुलिस ने केस दर्ज भी किया है।

ऑड-ईवन बन गई कोर्ट की अवमानना: कभी लेफ्ट-लिबरल्स जताते थे अवमानना में सजा पर ख़ुशी, आज उनके समर्थक हैं नाराज

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण अदालत की अवमानना के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए गए हैं। प्रशांत भूषण को सजा 20 अगस्त को सुनाई जाएगी। अपने लिबरल गिरोह के आदमी को दोषी पाए जाने पर सोशल मीडिया लिबरल जमात एकबार फिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आपत्ति जताते हुए देखा जा रहा है, लेकिन उन्हें प्रशांत भूषण द्वारा 2017 में किया गया एक ट्वीट याद करना चाहिए, जिसमें प्रशांत भूषण ने अदालत की अवमानना में पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीएस कर्णन को दोषी ठहराए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की थी।

प्रशांत भूषण ने लिखा था – “ख़ुशी की बात है कि सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार कर्णन को अदालत की घोर अवमानना ​​के लिए जेल में डाल दिया। उन्होंने जजों पर लापरवाही से आरोप लगाए और फिर SC के जजों के खिलाफ ‘बेतुके’ आदेश पारित किए!”

ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों के ख़िलाफ़ लिखे गए न्यायमूर्ति कर्णन के कई पत्रों पर स्वत: संज्ञान लिया था। जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इस संबंध में उन्होंने सीबीआई को आदेश दिया था कि मामले की जाँच की जाए और इसकी रिपोर्ट संसद को सौंपी जाए।

इन आरोपों के जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने इसे अदालत की आवमानना बताया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सात जजों की एक खंडपीठ गठित की, जिसने जस्टिस कर्णन के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना से जुड़ी कार्रवाई शुरू की।

कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति सीएस कर्णन को वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवमानना ​​के लिए जेल भेजा गया था। न्यायमूर्ति कर्णन, जून 2017 में सेवानिवृत्त हुए थे, जब तत्कालीन CJI जेएस खेहर की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की संविधान पीठ ने अदालत की अवमानना ​​के मामले में उन्हें 6 महीने की जेल की सजा सुनाई और वो गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हो गए।

बाद में उन्हें कोयंबटूर से पश्चिम बंगाल सीआईडी ​​ने गिरफ्तार कर लिया था। देश में अपनी तरह का यह पहला मामला रहा जब अवमानना के आरोप में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाईकोर्ट के न्यायाधीश को जेल भेजा गया।

लेकिन अब प्रशांत भूषण के मामले में इन्टरनेट पर मौजूद तमाम वाम-उदारवादी वर्ग ‘ऑड-इवन’ की तर्ज पर इस बार उच्चतम न्यायालय के फैसले से नाराज नजर आ रहा है और प्रशांत भूषण को दोषी ठहराए जाने पर सुप्रीम कोर्ट की गरिमा पर सवालिया निशान लगाते हुए नजर आ रहा है।

गालिबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के ट्वीट पर इन्टरनेट पर मौजूद वकीलों से इसे कोर्ट की अवमानना साबित करने की अपील करते हुए देखी गई हैं। एक से अधिक बार उन्होंने अदालत की अवमानना के आधार पर मोदी सरकार को भी घेरने के प्रयास किए हैं। लेकिन आज प्रशांत भूषण के केस में यही गालीबाज स्वाति चतुर्वेदी सुप्रीम कोर्ट को उसके दायित्व पर पाठ पढ़ाते हुए देखी जा सकती है।

इन्टरनेट ट्रोल और इंडिया टुडे के पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने प्रशांत भूषण पर अदालत के फैसले के बाद कश्मीर के अपराधियों से इसकी तुलना करते हुए ट्वीट में लिखा है कि कश्मीर में हिरासत में लिए गए लोगों की बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉरपस) याचिकाएँ भी एक साल से अधिक समय से लंबित हैं!

हालाँकि, यही राजदीप सरदेसाई कुछ समय पहले राम मंदिर के विषय पर अदालत की अवमानना जैसे हथियारों को याद करते देखे जा रहे थे। इसी क्रम में निखिल वागले सुप्रीम कोर्ट की विश्वसनीयता तक पर सवाल खड़े करते देखे जा रहे हैं।

प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन कश्मीर में 4G इन्टरनेट सेवा को लेकर मोदी सरकार पर और पूर्व CJI की पीएम मोदी से मुलाकात को अदालत की अवमानना का विषय बता चुके हैं।

प्रोपेगेंडाबाज वामपंथी कविता कृष्णन भाजपा नेताओं के बयान पर अदालत की अवमानना का ही जिक्र करते हुए देखी गईं हैं।

मतभेद और अवमानना में फर्क

प्रशांत भूषण को दोषी ठहराए जाने पर भारत का वाम-उदारवादी वर्ग यह दलीलें देते हुए नजर आ रहा है कि प्रशांत भूषण ने जो भी कहा था वह सिर्फ उनके ‘विचार’ थे। वामपंथी लिबरल वर्ग तर्क दे रहा है कि मतभेदों को अवमानना नहीं मन जाना चाहिए।

लेकिन सवाल यह है कि प्रशांत भूषण द्वारा जितने भी आरोप सुप्रीम कोर्ट के फैसलों और मुख्य न्यायाधीशों पर लगाए गए, वह सब बेबुनियाद और हर दूसरे राह चलते आदमी के निष्कर्षों से भी ज्यादा वाहियात थे।

प्रशांत भूषण ने एक ट्विटर ट्रोल की तरह तंज भरा ट्वीट करते हुए लिखा था कि जब उच्चतम न्यायालय लॉकडाउन की अवस्था में नागरिकों को न्याय के उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर रहा है तब नागपुर स्थित राजभवन में प्रधान न्यायाधीश बगैर मास्क या हेलमेट के भाजपा नेता की 50 लाख की मोटरसाइकिल की सवारी कर रहे हैं।

प्रशांत भूषण के इन गंभीर आरोपों में न ही मतभेद नजर आते हैं और ना ही तर्क नजर आते हैं। वास्तविकता यही है कि ये प्रशांत भूषण जैसे लोग ही हैं, जो अपने बेबुनियाद और बिना सर-पैर के आरोपों के कारण ही हर्ष मंदर जैसे लोग नागरिकों को न्याय में यकीन न करकर सड़क पर उतर जाने के लिए उकसाते हुए नजर आते हैं।

प्रशांत भूषण जैसे लोग ही सस्थाओं को महत्वहीन साबित करने का हर संभव प्रयास कर समाज के ढाँचों को अस्थिर करते नजर आते हैं। और आखिर में इन आरोपों की परिणति बेंगलुरु दंगों और दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों के रूप में देखी जाती है, जब कोई अब्दुल पेट्रोल बम लेकर पहले वाहन और फिर थोड़ा सा हौंसला और बढ़ाकर पुलिस थानों को ही फूँकने निकल पड़ता है।

370-CAA-बाबरी से गुस्से में था, जकात के फंड से भड़काए दंगे: जामिया के मीरान हैदर का कबूलनामा

जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के छात्र मीरान हैदर ने दिल्ली में फरवरी में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के सिलसिले में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। हैदर लालू यादव की पार्टी राजद के युवा विंग की दिल्ली इकाई का अध्यक्ष भी है। उसे दिल्ली पुलिस ने दंगा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार किया था।

जी न्यूज़ की एक रिपोर्ट के अनुसार, हैदर ने जाँचकर्ताओं को बताया है कि जामिया हिंसा के बाद पूर्वोत्तर दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों की योजना बनाई गई थी। उसने पुलिस को बताया कि केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 हटाने, सुप्रीम कोर्ट द्वारा बाबरी मस्जिद के फैसले और फिर CAA के लागू होने से उसके मन में गुस्सा और नफरत भर गया था और उसने सरकार के खिलाफ संप्रदाय विशेष के लोगों को एकजुट करने के बारे में सोचा।

जरूरत पड़ने पर उसने केंद्र के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों के लिए तैयार रहने का भी आह्वान किया। आरोपित मीरान हैदर ने पुलिस को बताया कि वह खुद सभी राज्यों में सहायता जुटाने और सीएए-एनआरसी के खिलाफ लोगों को उकसाने के लिए गया था।

मीरान हैदर के अनुसार, दिसंबर 15, 2019 को JCC (जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी) का गठन किया गया। फिर इसी JCC के नाम से ही व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया, जिस पर आगे की प्लानिंग होने लगी। इसी ग्रुप में AAJMI ( Allumani Association of Jamia Milliya islamaiya) और कई छात्र संगठन भी शामिल थे।

मीरान हैदर ने दिल्ली पुलिस को बताया था कि जामिया विश्वविद्यालय के परिसर में भड़की हिंसा के बाद दंगों को लेकर साजिश रची गई थी। मीरान को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन और दंगों के लिए भीड़ इकट्ठा करने के साथ ही अन्य व्यवस्थाओं की देखरेख करने का काम सौंपा गया था।

संप्रदाय विशेष बहुल इलाकों को चुना

उसने खुलासा किया कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने दिल्ली में सांप्रदायिक दंगों के लिए फंड उपलब्ध कराया था। हैदर ने खुद दंगों के लिए लगभग 5 लाख रूपए इकट्ठा किए थे। हैदर ने दिल्ली पुलिस को बताया कि दिल्ली के संप्रदाय विशेष बहुल इलाकों जाफराबाद और सीलमपुर को पहले दंगों के लिए चुना गया था, जिसके लिए मीरान और अन्य लोगों ने चाकू, पेट्रोल और पत्थर आदि इकट्ठा किए थे।

मीरान हैदर, जिसे UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था और न्यायिक हिरासत में है, ने दंगों से पहले एक रजिस्टर तैयार किया था, जिसमें उसने इस उद्देश्य के लिए एकत्रित किए जा रहे सभी फंड्स का रिकॉर्ड रखा था।

मीरान हैदर के मुताबिक दिल्ली में दंगा करवाने के लिए सबसे पहले दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट सीलमपुर और जाफराबाद को ही चुना गया था, क्योंकि संप्रदाय विशेष बाहुल्य इलाके में ऐसी गतिविधियाँ चलाना उन्हे ज्यादा आसान लगा। खुद हैदर ने लोगों से चाकू, पेट्रोल और पत्थर इकठ्टा करने के लिए कहा था।

जकात के फंड से दिल्ली दंगे किए

फंड्स की मदद से उसके निर्देश पर गैजेट्स खरीदे गए। हैदर ने बताया कि ‘ज़कात’ के रूप में जुटाए गए धन का उपयोग उसने पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों के लिए किया गया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, मीरान हैदर ने खुलासा किया कि दंगे की स्क्रिप्ट को 3 हिस्सो में बाँटा गया था- पहला प्रोटेस्ट, दूसरा रोड ब्लॉक और आखिर में भयानक दंगे। दिल्ली पुलिस को दिए अपने बयान में आरोपित मीरान हैदर ने बताया की वो दंगों के पहले से ही जेनयू (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद और खालिद सैफी को जानता था।

मीरान हैदर ने दिल्ली पुलिस को बताया कि वह भी 2014 से 2017 तक आम आदमी पार्टी में था, लेकिन नगर निगम चुनाव लड़ने के लिए टिकट ना मिलने पर उसने 2017 में पार्टी छोड़ दी और राजद में शामिल हो गया।

’14 साल के रोहित को मारकर दुर्गा मंदिर के प्रांगण में बने कुएँ में फेंक दिया’: सराजुद्दीन, इस्ताक और शहन पर केस

बिहार के छपरा प्रखंड में एक गाँव है- नैनी। इस गाँव में 31 जुलाई को उर्मिला देवी नामक विधवा के 14 वर्षीय बेटे रोहित की कथित तौर पर हत्या कर दी गई। महिला का आरोप है कि उनके घर के पास रहने वाले दूसरे समुदाय के कुछ लड़कों ने ही उनके बेटे की हत्या की और अगले दिन खोजबीन के बहाने उसका शव लाकर घर के बाहर रख दिया।

इस मामले में पुलिस पर भी आरोप लग रहे हैं। बताया जा रहा है कि नामजद आरोपित अभी तक गिरफ्तार नहीं किए गए हैं। उनकी गिरफ्तारी को लेकर आवाज उठाने पर भाजपा के कुछ नेताओं पर भी केस दर्ज कर दिया गया।

14 वर्षीय रोहित

ऑपइंडिया ने इस संबंध में भारतीय जनता पार्टी के किसान मोर्चा उपाध्यक्ष शैलेंद्र सेंगर से बात की। उनके ख़िलाफ़ भी शांति भंग करने के आरोप में मामला दर्ज हुआ है। उन्होंने हमें केस की पूरी जानकारी देते हुए बताया कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को इंसाफ नहीं मिला है।

शैलेंद्र के मुताबिक, मृतक की माँ ने आरोपितों के ख़िलाफ़ नामजद एफआईआर लिखवाई। लेकिन कोई कार्रवाई अब तक नहीं की गई है। उनका कहना है कि जब उन लोगों ने इसका विरोध किया तो उनके ख़िलाफ़ ही उलटा एफआईआर हो गई। शैलेंद्र ने बताया कि पोस्टमार्टम हो चुका है। लेकिन उसमें क्या कहा गया है, इसका अभी पता नहीं चल रहा है। भाजपा नेता की मानें तो चुनाव नजदीक होने के कारण इस मामले की सच्चाई लोगों को नहीं बताई जा रही है। न ही ये बताया जा रहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आखिर क्या कहा गया है।

रोहित हत्याकांड पर मीडिया रिपोर्ट्स

शैलेंद्र की बातें सुनकर हमने सारे मामले की पुष्टि करने के लिए मुफस्सिल थाना इंचार्ज से संपर्क किया। लेकिन थाना इंचार्ज ने कोई संतोषजनक जवाब देने की जगह यह कहकर फोन काट दिया कि वह बाद में संपर्क करेंगे। आगे अगर इस संबंध में वो हमसे बात करते हैं तो हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।

रोहित की मॉं

रोहित की माँ अपने बेटे की मृत्यु के बाद से ही इंसाफ की माँग कर रही हैं। वह बार-बार यही कहती हैं, “31 जुलाई को सराजुद्दीन, इस्ताक और शहन शाह बबुआ को खेलने के बहाने ले गए। जब वह वापस नहीं आया तो हमने उसकी छानबीन की। रात के 11 बजे तक हम उसे ढूँढते रहे। हमें कुछ पता नहीं चला। उन लोगों ने उसे कुएँ में फेंक दिया था और अगले दिन वही लोग शव लाकर घर पर रख गए। अब हमें बस इंसाफ चाहिए।”

उर्मिला देवी ने इस संबंध में तीनों आरोपितों के ख़िलाफ़ एफआईआर करवाई है और अपना लिखित बयान भी दिया है। उनका कहना है कि 1 अगस्त को आरोपित रोहित के चचेरे को भाई को लेकर उसे ढूँढने गए और थोड़ी देर उन लोगों ने उसे इधर-उधर घुमाया। फिर उसे घटनास्थल पर सीधे ले गए। कुएँ में रोहित मृत अवस्था में था। आनन-फानन में आरोपितों ने ही उसका शव निकाला और उनके दरवाजे पे ले जाकर रख दिया। रोहित का शव देखकर जब घर में हल्ला हुआ तो पड़ोसी इकट्ठा हुए और उन्होंने पुलिस को सूचना दी। बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।

रोहित की माँ उर्मिला देवी का बयान

रोहित के मामा ने बताया कि वे चाहते हैं कि दोषी पकड़े जाएँ और उन्हें फॉंसी हो। लेकिन इस मामले में प्रशासन ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। गाँव के ही आकाश का कहना है कि रोहित को संप्रदाय विशेष के लोगों ने बेरहमी से मारा। इसके बाद दुर्गा मंदिर के प्रांगण में जो कुआँ है उसमें फेंक दिया। घटना को कई दिन बीत चुके हैं। अभी तक दोषी इस मामले में गिरफ्तार नहीं हुए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामवासियों ने जब रोहित के लिए इंसाफ माँगा तो प्रशासन ने उलटा उन्हीं के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर दिया।

ग्रामीण आकाश ने बताया कि रोहित को मारकर दुर्गा माँ के प्रांगण में बने कुएँ में फेंका गया।
रोहित मर्डर पर पर ग्रामीण आकाश

इस मामले में कार्रवाई में देरी से ग्रामीणों और हिंदुवादी संगठनों में रोष है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए बीजेपी किसान मोर्चा उपाध्यक्ष के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सड़क जाम किया था। इसके बाद शैलेंद्र सेंगर, भाजपा मंडल अध्यक्ष विश्वास गौतम, बालेश्वर सिंह, ज्ञानरंजन, राजू कुमार सिंह, संतोष महतो, हन्नी सिंह, प्रकाश कुमार सिंह, विकास कुमार सिंह सहित कई लोगों पर शांति भंग करने के आरोप में विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।

रोहित मर्डर पर चश्मदीद

पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी पर मेरठ पुलिस ने दर्ज किया FIR: कर्नाटक कॉन्ग्रेस MLA के भतीजे के सर पर रखा था ₹51 लाख का इनाम

कर्नाटक कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन के सर कलम करनें पर 51 लाख रूपए का ईनाम देनें का ऐलान करनें वाले पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी (Shahzeb Rizvi) पर यूपी के मेरठ में एफआईआर दर्ज हो गई है। रिजवी ने संप्रदाय विशेष के लोगों को इनाम के लिए पैसे इक्कठा करने के लिए भी कहा था।

खबरों के मुताबिक, सपा नेता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने की के बाद, मेरठ एसएसपी अजय साहनी ने वीडियो का संज्ञान लेते हुए मामले की जाँच के आदेश दिए थे।

जिला पंचायत चुनाव लड़ चुके पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी के खिलाफ 13 अगस्त की देर रात को मेरठ पुलिस द्वारा फलावदा पुलिस स्टेशन में IPC की धारा 153A, 505(2) के तहत केस दर्ज हुआ है, आरोपी रिजवी के घर पर पुलिस ने दबिश दी, लेकिन वो फरार मिला।

मेरठ (ग्रामीण) के एसपी अविनाश पांडे ने कहा, “यहाँ के एक शख्स ने बेंगलुरु हिंसा के सिलसिले में 51 लाख रुपए का ईनाम घोषित किया है। उनके खिलाफ सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश के तहत मामला दर्ज किया गया है और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”

शाहजेब रिजवी का विवादित बयान

गौरतलब है कि संप्रदाय विशेष के नेता शाहजेब रिजवी ने गुरुवार को एक विवादित वीडियो पोस्ट करते हुए कहा था कि, “फेसबुक पोस्ट के माध्यम से उसनें हुजूर के शान में जो गुस्ताखी की है, मैं उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूँ, रिजवी ने ऐलान किया की इस युवक जो सर कलम करके लाएगा उसे मैं 51 लाख का नगद ईनाम दूँगा। रिजवी ने संप्रदाय विशेष के लोगों से अपील की है कि सब मिलकर 51 लाख रुपए जमा करो।”

शाहजेब रिजवी उत्तरप्रदेश के मेरठ में फलावदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर गाँव के रहने वाला हैं। वह पहले समाजवादी पार्टी का अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव रह चुका है। लेकिन इस वक्त वह सपा में सक्रिय नहीं हैं। पिछली बार जिला पंचायत के चुनाव में वह हार गया था। वर्तमान में वह अपने आप को सामाजिक कार्यकर्ता बताता है।

बेंगलुरु दंगा

कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन के फेसबुक पोस्ट को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ था। उस पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर विवादित पोस्ट डालने का आरोप है। जिसकी वजह से मंगलवार शाम को संप्रदाय विशेष के लोग हिंसा पर उतर आए।

बेंगलुरु दंगों में शामिल अब तक हिंसा करने वालों में से 150 को गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने लोगों को शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना में 3 लोग मारे गए और 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके साथ ही दंगाइयों ने 250 के करीब गाड़ियों को आग लगा दी और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है।

फिर सामने आया विकिपीडिया का वामपंथी चेहरा, संप्रदाय विशेष को बचाने के लिए बेंगलुरु दंगों को बताया ‘टकराव’

11 अगस्त को जहाँ एक तरफ देश में जन्माष्टमी का त्योहार मनाया जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ संप्रदाय विशेष के कुछ लोग फेसबुक पर एक पोस्ट से आहत हो गए। इस हद तक आहत हुए कि पूरे बेंगलुरु को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ द्वारा किए गए दंगों में 3 लोगों ने अपनी जान गॅंवाई और 60 लोग घायल हुए। कट्टरपंथी भीड़ ने केजे हल्ली और डीजे हल्ली नामक पुलिस स्टेशन पर जम कर तोड़फोड़ की और गाड़ियाँ तक फूँक दी। इसकी वजह सिर्फ इतनी थी कि कॉन्ग्रेस नेता के रिश्तेदार ने पैगंबर मोहम्मद पर एक फेसबुक पोस्ट में टिप्पणी कर दी थी।   

इस घटना पर विकिपीडिया में जानकारी साझा कर दी गई है। इन दंगों पर दी गई जानकारी के शुरुआती हिस्से में “clash” शब्द का इस्तेमाल किया गया है। यानी विकिपीडिया के अनुसार यह बेलगाम दंगा टकराव था। उनके मुताबिक़ यह घटना एक सांप्रदायिक टकराव का नतीजा थी। जबकि टकराव के असल मायने यह होते हैं, जब दो अलग धर्म या समुदाय के लोगों के बीच किसी विवाद को लेकर टकराव की स्थिति बनती है। उन दंगों के वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि दंगों के दौरान अल्लाह-हु-अकबर के नारे लग रहे थे। लेकिन विकिपीडिया पर लिखने वाला व्यक्ति दंगों की इस घटना में संप्रदाय विशेष द्वारा फैलाई गई हिंसा को छिपाना चाहता है।   

अभी तक सामने आई ख़बरों में यह बात कहीं नहीं मौजूद है कि हिंदू समुदाय के लोगों का इन दंगों से कोई लेना-देना है। हिंसा भड़काने में सिर्फ संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ का हाथ था जो मोहम्मद पर की गई पोस्ट से आहत हुए थे। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि भीड़ ने इस्लामी नारे लगाते हुए कॉन्ग्रेस विधायक के घर पर पत्थर चलाए। इसके बाद पुलिस स्टेशन में तोड़फोड़ करती है और गाड़ियाँ जलाती है।   

इस मामले में कलीम पाशा की गिरफ्तारी हो चुकी है और पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में उसका नाम भी दर्ज किया है। फिर भी विकिपीडिया में कलीम पाशा के नाम का कोई ज़िक्र ही नहीं है। कलीम पाशा, बेंगलुरु नगरपालिका से कॉन्ग्रेस पार्षद इरशाद बेगम का पति है। इसके अलावा पूर्व कॉन्ग्रेस मंत्री केजे जॉर्ज का सहयोगी और करीबी भी रह चुका है। पुलिस ने इस मामले में कलीम पाशा समेत लगभग 206 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।   

पुलिस ने दंगों के मामले में कलीम पाशा को 7वॉं आरोपित बनाया है। उसे दंगों का षड्यंत्र रचने वाला मुख्य आरोपित भी बताया जा रहा है। इसके पहले वह खुद नगवाड़ा वार्ड से पार्षद रह चुका है और उसके कॉन्ग्रेस में अच्छे संबंध हैं। कलीम पाशा के अलावा SDPI के नेता मुज़ाम्मिल पाशा को भी बेंगलुरु दंगों के मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है। इन बातों के अलावा विकिपीडिया ने इस मुद्दे पर अपने “Talk” पेज पर कई हैरान कर देने वाली बातों का ज़िक्र किया है।   

विकिपीडिया Talk पेज

विकिपीडिया के इस पेज पर दिल्ली में दंगों (2020) के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। साथ ही यह भी बताया गया है कि कैसे हिंदुओं ने उपद्रव किया। लेकिन बेंगलुरु में हुई घटना पर जानकारी देते समय संप्रदाय विशेष के बारे में सीधे तौर पर एक शब्द भी नहीं लिखा गया है। उन्होंने दिल्ली दंगों की घटना में हिंदुओं को आरोपित घोषित कर दिया, लेकिन बेंगलुरु की घटना में संप्रदाय विशेष को आरोपित नहीं कहा।   

इस मामले में एक और उल्लेखनीय बात यह है कि 2020 के दिल्ली दंगों में विकिपीडिया ने ताहिर हुसैन का ज़िक्र बस एक बार किया है। जबकि उस पर अंकित शर्मा की हत्या का आरोप भी लग चुका है। लेकिन विकिपीडिया ने अपने पेज में इस तरह का कोई खुलासा नहीं किया है। न ही पुलिस द्वारा दी गई किसी तरह की जानकारी उस पेज पर जोड़ी गई है। जब बेंगलुरु दंगों से जुड़ी जानकारी के मामले में विकीपीडिया से शिकायत की गई (ऑपइंडिया द्वारा), तब विकिपीडिया ने दिशा-निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगा दिया।   

मंगलवार (11 अगस्त 2020) को कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए दंगों में उग्र भीड़ द्वारा ‘पुलिसकर्मियों को मार डालो, उन्हें मत छोड़ो, उन्हें खत्म करो’ के नारे भी लगाए गए। नवीन को भी फिलहाल गिरफ्तार कर लिया गया है। विधायक के आवास और डीजे हाली के एक थाने में संप्रदाय विशेष के उपद्रवियों ने उत्पात मचाया, जिन्होंने कई पुलिस और निजी वाहनों को भी आग लगा दी और लूटपाट भी मचाई। 

मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्ति के आवास पर संप्रदाय विशेष के हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे, जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं।  

यह पहला मौक़ा नहीं था जब वामपंथी मानसिकता के प्रति विकिपीडिया का झुकाव सामने आया हो। इसके पहले 25 फरवरी को दिल्ली में हुए दंगों के मामले में विकिपीडिया पर एक लेख प्रकाशित हुआ था। जिसके शुरूआती हिस्से में दंगों की तस्वीर नहीं बल्कि भाजपा नेता कपिल मिश्रा की तस्वीर लगी हुई थी। लेख का शीर्षक है  North East Delhi riots और इसके एडिटर का नाम है  DBigXray। इस लेख का एक अलग हिस्सा है जिसमें कपिल मिश्रा को दिल्ली दंगों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है।   

वहीं आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान ने भी उस दौरान कई भड़काऊ भाषण दिए थे। लेकिन उन बातों को भी विकिपीडिया से हटा दिया गया है। दिल्ली दंगों के मामले में अमानतुल्लाह खान पर मामला भी दर्ज किया गया है। लेकिन विकिपीडिया ने ऐसा कहा है कि वह मामले दूसरी घटनाओं की वजह से दर्ज किए गए हैं। सीएए और एनआरसी के विरोध में जारी प्रदर्शन के दौरान मोहम्मद शाहरुख नाम के व्यक्ति ने पिस्टल से गोलियाँ चलाई थीं। लेकिन विकिपीडिया ने इस व्यक्ति का कोई ज़िक्र ही नहीं किया है।   

बहुत से लोग तो उसे हिंदू बताने लग गए थे और उन्होंने कहा कि वह सीएए एनआरसी का समर्थन कर रहा था। जबकि एक पत्रकार ने वीडियो भी साझा किया था जिसमें वह साफ़ तौर पर विरोध करने वाले भीड़ के साथ नज़र आ रहा था। इसके अलावा लेख में अशोक नगर में मौजूद मस्जिद पर हमले की बात लिखी गई है। उसमें ऐसा कहा गया है कि मस्जिद पर हमले के दौरान जय श्री राम और और हिंदुओं का हिंदुस्तान जैसे नारे लग रहे थे।   

जबकि संप्रदाय विशेष द्वारा किए गए हमलों की घटना का कहीं कोई उल्लेख ही नहीं मिलता है। ऐसे तमाम वीडियो हैं जिसमें अल्लाह-हु-अकबर और नारा-ए-तकबीर जैसे नारे लग रहे हैं। लेकिन उन वीडियो के बारे में कहीं कोई चर्चा ही नहीं की गई है। आम तौर पर विकिपीडिया के लेख कोई भी एडिट कर सकता है, उनमें बदलाव कर सकता है। लेकिन दिल्ली में हुए दंगों के मामले में ऐसा कुछ नहीं है, उन लेखों को सुरक्षित रखा गया है। इन लेखों में सिर्फ कुछ ही लोग बदलाव कर सकते हैं।   

इस संबंध में ऑपइंडिया की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ और यहाँ पढ़ी जा सकती है।   

इसके अलावा ऐसी तमाम घटनाएँ हैं जिसमें विकिपीडिया का ऐसा चेहरा सामने आता है। कुछ समय पहले एक इस्लामी यूज़र ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पेज से छेड़छाड़ करते हुए संगठन को आतंकवादी समूह बताया था। जिस यूज़र ने ऐसा किया वह पहले भी इस तरह के हिंदू विरोधी बदलाव कर चुका है। इसके अलावा विकिपीडिया ने तबलीगी जमात पर लिखे गए लेख को भी हटा दिया था। जिसमें यह बताया गया था कि कैसे जमात के लोगों ने देश भर में कोरोना वायरस फैलाया। इसके अलावा नौखली दंगों के मामले में भी हिंदू शब्द को संप्रदाय विशेष से बदल दिया था।     

AAP नेता ने शादी का झाँसा देकर 2 साल तक किया महिला का यौन शोषण: दी उसे और बच्चों को जान से मारने की धमकी, गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (14 अगस्त, 2020) को आम आदमी पार्टी के नेता मुकेश टोकस को 25 वर्षीय महिला के साथ बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। मुकेश दिल्ली के आर के पुरम निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के संगठन प्रभारी हैं।

पंजाब केसरी की रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश पिछले दो साल से पीड़िता को शादी का झाँसा देकर उसके साथ यौन शोषण कर रहा था। महिला दो बच्चों की माँ है। वहीं महिला को हाल ही में मुकेश के शादीशुदा होने का पता चला।

जब महिला ने सच्चाई जानकर रिश्ते पर आपत्ति जताई तो आप नेता मुकेश टोकस ने उसे और उसके बच्चों को मारने की धमकी दी। कथित तौर पर, पीड़िता ने फिर किशनगढ़ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की, जिसके बाद मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

पंजाब केसरी से लिया गया स्क्रीनशॉट

आप नेता ने झूठ बोल कर फँसाया पीड़िता को अपने झाँसे में

बिहार के मोतिहारी जिले की रहने वाली पीड़िता ने किशनगढ़ पुलिस को बताया कि वह दो साल पहले आरोपित से मिली थी। रिपोर्ट के अनुसार, मुकेश ने महिला को बताया कि उसकी कोई संतान नहीं है और पत्नी के गुजर जाने के बाद वह अकेला हो गया था। फिर उसने पीड़िता से शादी करने और उसके बच्चे की जिम्मेदारी उठाने की बात उससे कही। इस तरह उसने उसे झाँसे में ले लिया।

कथित तौर पर, आरोपित AAP नेता ने एक स्थानीय मंदिर में महिला से शादी की थी। उसे घर ले जाने का वादा किया था। फिर उसने महिला को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया। शादी के बहाने वह फिर पीड़िता का यौन शोषण करता रहा।

गौरतलब है कि पीड़िता को हाल ही में पता चला था कि मुकेश की पत्नी जिंदा है और उसके बच्चे भी है। पीड़िता की शिकायत के अनुसार, जब उसने बात का विरोध किया, तो मुकेश ने उसे और उसके बच्चों को जान से मारने की धमकी दी। मुकेश द्वारा की गई धोखाधड़ी से निराश होकर, पीड़िता ने उसके खिलाफ मामला दर्ज किया, जिसके बाद आरोपित को गिरफ्तार किया गया।

मुकेश टोकस की गिरफ्तारी की खबर के बाद, आप के शीर्ष नेताओं के साथ उसकी फोटो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। जिससे आम आदमी पार्टी से उसके नजदीकी संबंध होने का पता चलता है। शेयर की गई तस्वीरों में, मुकेश आम आदमी पार्टी के कार्यक्रमों में भाग लेते हुए और आप नेता संजय सिंह और सीएम अरविंद केजरीवाल के साथ तस्वीरों के लिए पोज़ देते नज़र आ रहे हैं।