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‘वो नशेड़ी है, कुछ भी बोलता रहता है’ – राहुल गाँधी का वो इंटरव्यू, जिसे कॉन्ग्रेस और तरुण तेजपाल ने दबा दिया

“मुझे एक सम्पूर्ण राजनीतिज्ञ बनना है। इसके लिए मुझे एकाध चुनाव हारने पड़ेंगे। अगर मैं चुनाव नहीं हारता हूँ तो मैं एक अच्छा नेता नहीं बन पाऊँगा। मैं हार से डरता नहीं हूँ। ये मेरी ज़िंदगी का हिस्सा है।“- ये पंक्तियाँ पहली बार सांसद बने एक ऐसे व्यक्ति की है, जो इसके 12 साल बाद देश की सबसे पुरानी पार्टी का अध्यक्ष बना। ये इंटरव्यू उन्होंने ‘तहलका’ में दिया था, जिससे कॉन्ग्रेस की फजीहत हुई थी और तरुण तेजपाल को कहा गया कि वो इसे फेक साबित कर दें।

क्या कहा था पत्रकार विजय सिम्हा ने

ये इंटरव्यू ‘तहलका’ के लिए विजय सिम्हा ने लिया था। बाद में ‘ज़ी न्यूज़’ से बात करते हुए उन्होंने बताया था कि ‘तहलका’ के संपादक तरुण तेजपाल ने राहुल गाँधी के 2005 के इस इंटरव्यू को दबा दिया था। सेक्स स्कैंडल में फँसे तरुण तेजपाल फ़िलहाल जेल में हैं। विजय सिम्हा ने कहा था कि शुरुआत में तरुण तेजपाल की आवाज़ में दम होता था और बैठक वगैरह में वो काफी प्रभाव डालते थे।

उन्होंने बताया कि वो 2005 में राहुल गाँधी से मिले थे, जो उस समय नए-नए राजनीति में आए थे और उन्होंने कॉन्ग्रेस व राजनीति के बारे में काफी चीजें कही थीं। कॉन्ग्रेस की समस्याओं पर भी उस इंटरव्यू में बात हुई थी। बकौल विजय सिम्हा, उस समय कई लोग कॉन्ग्रेस में इस चिंता में पड़ गए थे कि उनकी ‘नौकरी’ चली जाएगी और वो कहने लगे थे कि ये किस व्यक्ति से बात कर लिया, ये तो नशेड़ी है।

उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद तरुण तेजपाल दबाव में आ गए। पहले तो उन्होंने डिफेंड किया कि उनके पत्रकार ने कुछ भी गलत नहीं किया है और सब ठीक है लेकिन बाद में वो अचानक से पलट गए। सिम्हा बताते हैं कि इस प्रकरण के कारण ही उनके मन में पहली बार तेजपाल को लेकर शंका हुई। बाद में पत्रकार विजय सिम्हा पर ही आरोप लगाए गए कि उन्होंने स्टिंग कर दिया या फिर काल्पनिक बातचीत को छाप दिया।

कैसे तरुण तेजपाल ने दबा दी राहुल गाँधी की स्टोरी: पत्रकार का आरोप (सभी: ज़ी न्यूज़)

जबकि सिम्हा इन बातों को नकारते हैं। वो कहते हैं कि इन आरोपों की कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया था कि तरुण ने इस स्टोरी को ‘किल’ कर दिया, दबा दिया। उनके अनुसार ऐसे कई पत्रकार थे, लेकिन हाथ में चीजें न होने के कारण वो कुछ कर नहीं पाते थे। ऊपर संलग्न किए गए ‘ज़ी न्यूज़’ के वीडियो में आप देख सकते हैं कि कैसे विजय सिम्हा ने उस इंटरव्यू को दबाए जाने के बारे में खुलासा किया।

राहुल गाँधी ने क्या कहा था ‘तहलका’ के इस इंटरव्यू में

ट्विटर पर ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ की ट्रेजरर शीला भट्ट ने इस इंटरव्यू के स्क्रीनशॉट्स शेयर किए और कहा कि उनकी आलमारी से ये राहुल गाँधी का पुराना इंटरव्यू निकल आया है, जो काफी प्रभावी है। सितम्बर 2005 के इस इंटरव्यू के बारे में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के पत्रकार दीप्तिमान तिवारी ने याद दिलाया कि कैसे इस इंटरव्यू को दबाने के लिए कॉन्ग्रेस ने ‘तहलका’ पर भारी दबाव बनाया था।

तिवारी ने याद दिलाया कि कैसे कॉन्ग्रेस पार्टी के आगे झुकते हुए ‘तहलका’ ने इसे पहले अनौपचारिक बातचीत करार दिया। तब मैगजीन की ओर से कहा गया था कि ये तो सिर्फ एक बातचीत है, जिसे इंटरव्यू समझा जा रहा है लेकिन ये इंटरव्यू तो है ही नहीं। और तो और, इंटरव्यू लेने वाले विजय सिम्हा को बेइज्जत तक किया गया। दरअसल, उस इंटरव्यू में राहुल गाँधी ने ऐसी-ऐसी बातें की थीं कि कॉन्ग्रेस पार्टी की खासी फजीहत हुई थी।

राहुल गाँधी ने इस इंटरव्यू की शुरुआत भारत को नंबर-1 बनाने की बात से की थी और कहा था कि इसके लिए 30 से कम उम्र वाले हर युवा को कोशिश करना होगा और वो इतिहास दोहराने का रिस्क नहीं ले सकते। नीचे हम बिंदुवार तरीके से राहुल गाँधी द्वारा दिए गए बयानों को उनके शब्दों में हूबहू पेश कर रहे हैं। इसके बाद आप समझ सकते हैं कि कॉन्ग्रेस ने इसे दबाने के लिए क्यों इतना प्रयास किया:

  • अमेठी में काफी मुद्दे हैं। मैं तो सिर्फ एक सांसद हूँ। मुझे MPLAD फण्ड में 2 करोड़ रुपए मिलते हैं। इससे मैं ज्यादा से ज्यादा 8 किलोमीटर सड़क बना सकता हूँ। लेकिन हम अमेठी में 500 किलोमीटर सड़क बनाने में सक्षम हुए हैं। इससे ज्यादा हम क्या कर सकते हैं? कुछ भी तो नहीं। मैं अपने प्रभाव का उपयोग कर के मंत्रियों के सामने हाथ जोड़ कर कह सकता हूँ कि ‘भैया, ये कर दो’ और काम हो सकता है।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार अलग ही कैटेगरी में आते हैं। यहाँ सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। (ये पूछे जाने पर कि कॉन्ग्रेस फिर भी मुलायम सिंह यादव की सरकार का समर्थन क्यों कर रही है): ये ऐसा नहीं चलेगा। मैं इसका समर्थन नहीं करता। मैं इसे लेकर कुछ करूँगा।
  • (मुलायम और लालू के समर्थन पर): मैं घूम-घूम कर लोगों को नहीं कह सकता कि मुलायम और लालू का क्या करना है। इसमें कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शामिल हैं। वही ये सब निर्णय लेते हैं। ये एक जटिल मुद्दा है। इसे छोड़ कर विकास पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
  • (अमेठी में कैसे काम करते हैं): मैं NGO के माध्यम से काम करता हूँ और मीडिया की इसमें कोई रूचि नहीं है। भारत 150 करोड़ लोगों का देश है। मीडिया चाहता है कि सब कुछ कल ही चुटकियों में हो जाए। ऐसा नहीं होता है। आप एक महीने बाद अमेठी आएँगे तो पाएँगे कि हर कॉन्ग्रेस नेता एक-दो छात्रों को पढ़ा रहा है। मेरा यही तरीका है।
  • (शिक्षा में आईटी के उपयोग पर): आईटी को लेकर मीडिया में कुछ ज्यादा ही हाइप है। मुझे इसका प्रभाव एक सीमित क्षेत्र में ही दिख रहा। कर्नाटक व तमिलनाडु में अच्छे कार्य हो रहे लेकिन हर जगह ऐसी स्थिति नहीं है।
  • मुझे कोई कहता है कि आप फेल हो रहे हो तो मैं कहता हूँ कि ये ठीक है। उत्तर प्रदेश में कहीं कुछ भी अच्छा हो रहा है तो ये मेरी सफलता है। देश में कोई भी सांसद इतना काम नहीं कर रहा, जितना मैं कर रहा हूँ।
  • दम्भ को लेकर मेरा पहला पाठ मुझे यूके में एक बाथरूम में मिला, जब मैं एक कम्पनी में काम करता था। (एक अजीब कहानी जो समझ नहीं आई।)
  • कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी का सदस्य होकर मैं प्रधानमंत्री को नहीं बोल सकता कि आप क्या करो और क्या नहीं। मैं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों को कुछ करने, न करने नहीं बोल सकता हूँ।
  • लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं विदेश क्यों जाता हूँ। मैं बने-बनाए ढर्रे पर राजनीति करने नहीं बल्कि उसे बदलने आया हूँ। मैं अलग-अलग देशों के लोगों से मिलूँगा, वो हमसे हमारी समस्याओं के बारे में पूछते हैं, उसके समाधान पर बात होती है।

राहुल गाँधी इस इंटरव्यू में काफी कन्फ्यूज नज़र आ रहे हैं। वो खुद को लाचार दिखाने के लिए कहते हैं कि उनके पास फंड्स नहीं है, वो विदेश आना-जाना जारी रखेंगे क्योंकि इससे भारत का फायदा है, पीएम व मंत्रियों को वो कुछ करने, न करने को नहीं बोल सकते। वो ये भी कहते हैं कि हाथ जोड़ के निवेदन कर सकते हैं। लालू-मुलायम के समर्थन पर भी वो कुछ-कुछ बोलते हैं। बाथरूम वाली कहानी क्या थी, ये हमारे समझ में अब तक नहीं आई।

इन्हीं कारणों से कॉन्ग्रेस ने इसे दबा दिया और इसके लिए तरुण तेजपाल का सहारा लिया। विजय सिम्हा ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वो सीनियर एडिटर थे लेकिन रिपोर्ट तो तेजपाल को ही करते थे, इस कारण वो कुछ नहीं कर पाए। एक पत्रकार की मेहनत को एक पार्टी विशेष को खुश करने के लिए दबा दिया गया। हालाँकि खुलासा तो यह भी होना चाहिए कि किन कॉन्ग्रेस नेताओं ने राहुल गाँधी को नशेड़ी बताते हुए कहा था कि ये कुछ भी बोलते रहते हैं।

राजस्थान: 2 महीने में छठे पुलिसकर्मी ने की आत्महत्या, घर की टंकी में तैरता मिला कॉन्स्टेबल का शव

राजस्थान में पुलिसकर्मियों की आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बीते दो महीने के कम समय में 6 पुलिसकर्मी अपनी जान ले चुके हैं। ताजा मामला सीकर के डोढ थाना क्षेत्र का है। कॉन्स्टेबल योगिन्द्र सिंह का शव रविवार (अगस्त 9, 2020) को पानी के टैंक में तैरता मिला।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्सटेबल योगिन्द्र सिंह अपने रूम से लापता थे। इसके बाद उनका शव पानी के टैंक से मिला। डोढ थाने के एसएचओ अमित कुमार ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि कॉन्स्टेबल 6-7 महीने से मेडिकल लीव पर थे। उनका डिप्रेशन का इलाज चल रहा था। रविवार को परिवार वाले उनके कमरे में गए तो वह वहाँ नहीं मिले। इसके बाद उन्हें ढूँढने की कोशिश की गई। अंत में उनका शव घर की टंकी में मिला।

लीव पर जाने से पहले मृतक की पोस्टिंग भनक्रोटा पुलिस थाने में थी। वह पिछले 6 साल से ड्यूटी में थे। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस फौरन घटनास्थल पर पहुँची। उन्हें अस्पताल लेकर गई, जहाँ मृत घोषित कर दिया गया।

परिजनों ने बताया कि योगिन्द्र चार भाई थे। एक भाई बीएसएफ में है जबकि वह खुद राजस्थान पुलिस में थे। परिजन कहते हैं कि योगिन्द्र की सगाई हो चुकी थी और आने वाले समय में उनकी शादी होनी थी।

गौरतलब है कि राजस्थान में पुलिसकर्मियों की मौत का सिलसिला जारी है। लगभग दो महीने के समय में 6 पुलिसकर्मी अपनी जान ले चुके हैं। ऐसे में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इन घटनाओं को लेकर चिंता है। क्योंकि अभी तक किसी मामले में सुसाइड का पक्का कारण नहीं मालूम चल सका है। पुलिस अलग-अलग कोणों से इन मामलों की तहकीकात कर रही है।

23 मई को सबसे पहले एसएचओ विष्णुदत्त बिश्नोई की आत्महत्या का मामला सामने आया था। उन्होंने अपने सरकारी क्वार्टर में पँखे से फाँसी का फंदा लगा कर आत्महत्या कर ली थी। घटना की जानकारी होते ही पुलिस खेमे में हड़कंप मच गया था। इस मामले कॉन्ग्रेस नेता व विधायक कृष्णा पूनिया पर भी सवाल उठे थे।

26 मई को श्रीगंगानगर में गार्ड कमांडर जसविंदर सिंह ने ड्यूटी के दौरान सर्विस रिवॉल्वर से खुद को गोली मार ली। वहीं 30 मई को दौसा में हेडकॉन्सटेबल गिरिराजसिंह ने अपने क्वार्टर में फाँसी लगा ली। 31 मई को जयपुर जिला पुलिस के जवान सुरेश यादव ने पुलिस लाइन के वाटर टैंक के पास फंदे पर लटक कर जान देने की कोशिश की। हालाँकि, अन्य जवानों की नजर पड़ने के कारण सुरेश को बचा लिया गया।

इसके बाद 31 मई को ही जैसलमेर के पोकरण में को कॉन्स्टेबल मायाराम मीणा ने होटल में ख़ुदकुशी कर ली और फिर 4 जुलाई को राज्य के टोंक जिले में अदालत परिसर के अंदर कथित तौर पर फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

सुशांत केस: ‘आदित्य ठाकरे और संजय राउत से पूछताछ करे CBI, दोनों का हो नार्को टेस्ट’

भाजपा ने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए शिवसेना सांसद संजय राउत और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे के नार्को टेस्ट की माँग की है। भाजपा ने कहा है कि इन दोनों नेताओं से सीबीआई को पूछताछ करनी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा है कि इस मामले में सबूतों के साथ साथ जबरदस्त छेड़छाड़ हो रही है और उन्हें नष्ट किया जा रहा है।

निखिल आनंद ने इस दौरान शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ में उसके संपादक संजय राउत द्वारा लिखे लेख की भी आलोचना की और उसे बेतुका बताया। उन्होंने कहा कि इस लेख में सुशांत सिंह राजपूत के फैंस, बिहार सरकार और बिहार पुलिस का अपमान किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना के नेता सीबीआई जाँच से भाग रहे हैं और घबरा रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि इस मामले में एनसीपी, शिवसेना और कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेता सवालों के घेरे में हैं। उन्होंने पूछा कि केवल आदित्य ठाकरे से ही स्पष्टीकरण क्यों माँगा जा रहा है, क्या राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा को इस मामले में चुप्पी नहीं तोड़नी चाहिए? उन्होंने महाराष्ट्र सरकार पर भी गन्दी राजनीति में संलिप्त होने का आरोप लगाया और कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ हो रही है।

बता दें कि मुंबई पुलिस भी सीबीआई जाँच का विरोध कर रही है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में शनिवार (अगस्त 8, 2020) को मुंबई पुलिस ने कहा कि वो पेशेवर और निष्पक्ष तरीके से इस मामले की जाँच कर रही है। बिहार के पटना में दर्ज किए गए केस को मुंबई ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है, जिस पर सुनवाई चल रही है। मुंबई पुलिस के कहना है कि सीबीआई जाँच से पहले इस फैसले का इन्तजार करना चाहिए था।

ज्ञात हो कि ‘सामना’ के लेख में संजय राउत ने कहा था कि अगर ये मामला मुंबई पुलिस के हाथ में रहता तो इससे आसमान नहीं टूट पड़ता। लेकिन इस मामले में राजनीतिक दबाव और रुचि के कारण इसे सीबीआई को दिया गया है। उन्होंने आरोप लगया कि इस मामले की पटकथा पहले ही लिख ली गई थी और परदे के पीछे कुछ भी हुआ हो सकता है ताकि महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ साजिश रची जाए। उन्होंने मुंबई पुलिस को दुनिया की सर्वोच्च जाँच तंत्र बताते हुए कहा कि वो प्रोफेशनल है और दबाव में नहीं आती।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में शिवसेना की सरकार को गिरा नहीं पा रही है, इसीलिए पार्टी ने समाचार चैनलों के साथ मिल कर ‘गॉसिपिंग’ कर इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है ताकि सरकार को बदनाम किया जा सके। उन्होंने लिखा कि सुशांत सिंह राजपूत का बिहार से कोई संबंध नहीं था और वो पूरी तरह मुंबईकर बन गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि संघर्ष के दिनों में बिहार उनके साथ नहीं था, उन्हें सारा वैभव मुंबई ने दिया।

आयुष्मान खुराना ने किया रिया चक्रवर्ती का समर्थन, कंगना रनौत ने कहा – ‘चापलूस आउटसाइडर’

सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या मामले में अब आयुष्मान खुराना भी चर्चा का हिस्सा बन रहे हैं। आयुष्मान खुराना ने एक कमेन्ट कर के रिया चक्रवर्ती का समर्थन किया था, जिसके बाद कंगना रनौत और कमाल आर खान ने उन पर निशाना साधा है। केआरके ने कहा है कि आयुष्मान द्वारा रिया का समर्थन किए जाने के पीछे 3 कारण हैं। उन्होंने पहला कारण ये गिनाया कि आयुष्मान को बॉलीवुड में सर्वाइव करना है।

केआरके ने दूसरा कारण गिनाया कि आयुष्मान खुराना यशराज फिल्म्स के अभिनेता हैं, इसीलिए वो रिया का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने तीसरा कारण गिनाया कि सुशांत सिंह राजपूत सिनेमा इंडस्ट्री में उनके प्रतिद्वंद्वी थे। केआरके ने कहा कि खुराना को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, उनकी भी फिल्में रिलीज होंगी और तब जनता उन्हें उचित जवाब देगी।

वहीं कंगना रनौत ने भी खुराना द्वारा रिया चक्रवर्ती का समर्थन किए जाने पर नाराज़गी जताई। टीम कंगना ने कहा कि ‘चापलूस आउटसाइडर्स’ बॉलीवुड के माफिया गैंग का समर्थन इसीलिए कर रहे हैं क्योंकि उनके भीतर सामान्य प्रतिभा ही है और उन्हें किसी से कोई परेशानी नहीं है क्योंकि वो लोग कंगना और सुशांत के कारण उपजे विवादों का फायदा उठाने में लगे रहते हैं। ये लोग खुलेआम इन दोनों का मजाक उड़ाते हैं।

दरअसल, आयुष्मान खुराना ने रिया चक्रवर्ती के पोस्ट पर हार्ट वाली इमोजी डाल कर उनका समर्थन किया था। साथ ही उन्होंने ब्रोकन हार्ट वाली इमोजी भी कमेन्ट में डाली थी। इसके बाद लोगों ने गुस्सा जताया था कि वो आउटसाइडर होते हुए भी ऐसी हरकत कर रहे हैं। उनके अलावा राकुल प्रीत सिंह, साकिब सलीम और टाइगर श्रॉफ ने भी रिया का समर्थन किया। आयुष्मान और रिया ‘ओ हीरिये’ गाने में साथ काम भी कर चुके हैं।

उधर सुशांत आत्महत्या मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने रिया के साथ ही उनके भाई शोविक से भी काफी लंबी पूछताछ की है। शोविक को करीब 18 घंटे की लंबी पूछताछ के बाद रविवार (अगस्त 9, 2020) को सुबह 6.40 पर छोड़ा गया। इस केस में यह अब तक की सबसे लंबी पूछताछ बताई जा रही है।  ईडी की पूछताछ में फर्जी शेल कंपनी का खुलासा हुआ है। जानकारी के मुताबिक जाँच में 10 करोड़ रुपए से ज्यादा का मामला सामने आया है। 

इस मामले में कूदते हुए संजय राउत ने आरोप लगाया कि भाजपा राज्य में शिवसेना की सरकार को गिरा नहीं पा रही है, इसीलिए पार्टी ने समाचार चैनलों के साथ मिल कर ‘गॉसिपिंग’ कर इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है ताकि सरकार को बदनाम किया जा सके। उन्होंने लिखा कि सुशांत सिंह राजपूत का बिहार से कोई संबंध नहीं था और वो पूरी तरह मुंबईकर बन गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि संघर्ष के दिनों में बिहार उनके साथ नहीं था, उन्हें सारा वैभव मुंबई ने दिया।

IPL-13 का टाइटल स्पॉन्सर बन सकती है बाबा रामदेव की पतंजलि, Vivo के निकाले जाने के बाद आगे आई कंपनी

बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद भी अब IPL के टाइटल स्पॉन्सर की दौर में शामिल हो गई है। बता दें कि हाल ही में BCCI ने IPL की स्पॉन्सरशिप के लिए Vivo से करार ख़त्म कर दिया था क्योंकि भारत-चीन तनाव के बीच चाइनीज कंपनियों के बहिष्कार की बात चल रही थी और लोगों ने इसके लिए क्रिकेट बोर्ड का जबरदस्त विरोध किया था। अब बाबा रामदेव की पतंजलि इसमें कूद पड़ी है।

पतंजलि के प्रवक्ता तिजारावाला ने ‘इकोनॉमिक टाइम्स’ से कहा कि वो लोग इस बार IPL की टाइटल स्पॉन्सरशिप के लिए विचार कर रहे हैं क्योंकि पतंजलि को वैश्विक मंच पर ले जा कर मार्केटिंग करने का ये एक अच्छा मौक़ा हो सकता है। साथ ही कम्पनी इस सम्बन्ध में जल्द ही BCCI के साथ चर्चा भी करने वाली है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीनी कंपनियों के मुकाबले पतंजलि में कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं है और MNC जैसा स्टार पावर नहीं है।

ऐसे में चाइनीज कंपनियों के बहिष्कार के बीच राष्ट्रवादी सोच वाली स्वदेशी कम्पनी का आगे आना लोगों को पसंद आ सकता है। ब्रांड रणनीतिकार हरीश बिजूर ने कहा कि अगर कम्पनी ऐसा करने में कामयाब होती है तो इससे IPL से ज्यादा उसका ही फायदा है। भारत में चीन-विरोधी सोच के बीच राष्ट्रवादी भावनाएँ शबाब पर हैं और ऐसे में उसका आगे आना एक कारगर रणनीति हो सकती है।

हालाँकि, इस दौर में कई अन्य कम्पनियाँ भी शामिल हैं। Vivo के निकाले जाने के बाद BCCI के साथ करार की दौर में जिओ, अमेजन, टाटा समूह, अडानी ग्रुप, ड्रीम 11 और Byjus भी इस दौर में शामिल हैं। पिछले 2 सालों में बिस्किट और नूडल्स के बाजार में पतंजलि पिछड़ गई क्योंकि इसके प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता समान नहीं रही है और इसे तगड़ा कम्पटीशन भी मिला है। हाल ही में इसने कोरोना के लिए इम्युनिटी बूस्टर भी लॉन्च किया है।

ज्ञात हो कि Vivo ने 2017 में BCCI के साथ 2199 करोड़ रुपए का करार किया था, जो 5 साल के लिए हुआ था। चाइनीज प्रोडक्ट्स का बहिष्कार किए जाने के लिए लगातार अभियान चला रहे स्वदेशी जागरण मंच ने तो यहाँ तक कहा था कि अगर BCCI इस निर्णय को वापस नहीं लेता है तो लोगों को IPL का ही बॉयकॉट करना चाहिए। संस्था ने इसे देश की वर्तमान भावनाओं के विपरीत बताया था।

 IPL-13 कब आयोजन 19 सितंबर से लेकर 10 नवंबर तक किया जाना है। शाम में होने वाले मैच 7:30 PM से शुरू होगा। 10 नवंबर को फाइनल मैच होगा। सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए दो मैचों के बीच पर्याप्त गैप भी दिया गया है। मैच में दर्शकों की उपस्थिति के विषय में UAE से बातचीत के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सभी फ्रेंचाइजियों को वीजा की प्रक्रिया शुरू करने की सलाह दे दी गई है।

लाल किला एक्सरसाइज: चीन पर लेफ्टिनेंट जनरल थोराट ने 1960 में चेताया, नहीं सँभले नेहरू, फिर हुआ 1962…

चीन के साथ युद्ध की स्थिति तो साल 1960 से पहले ही पैदा हो चुकी थी। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने हालातों को गंभीरता से लेना उचित न समझा। इन बातों का खुलासा पूर्व आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एसएसपी थोराट के उन निष्कर्षों से होता है, जिसे उन्होंने उस समय एक साल तक स्थिति का मुआयना करने के बाद लिखा था।

बात 1959 से शुरू होती है, जब चीन ने सर्वप्रथम पाकिस्तान से गैरकानूनी ढंग से अक्साई चीन अपने कब्जे में ले लिया और घोषणा कर दी कि मैकमोहन रेखा को सीमा रेखा नहीं मानता और तिब्बत उसका अखंड हिस्सा है। ये वो समय था जब जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री होते हुए देश की सेना की स्थिति बेहद खराब थी और चीन इसका भरपूर फायदा उठाने को तैयार था।

इन्हीं हालातों के मद्देनजर पूर्व सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल एसएसपी थोराट ने स्थिति को देखते हुए एक निष्कर्ष तैयार किया। इस निष्कर्ष को उन्होंने ‘लाल किला’ अभ्यास का नाम दिया। इन सीक्रेट पेपर को साल 2012 में इंडिया टुडे ने एक्सेस कर एक रिपोर्ट तैयार की। इससे पता चलता है कि चीन के साथ युद्ध में भारतीय वायुसेना का आक्रमक भूमिका में होना सेना की युद्ध योजनाओं का अभिन्न अंग था।

अपने इन निष्कर्षों में उन्होंने साफ बताया था कि भारत-चीन सीमा के बीच जैसे संबंध 1960 से पहले रहे हैं। उनमें आने वाले समय में बदलाव आ सकता है। अपनी बात रखते हुए उन्होंने इन बदलावों का कारण उन क्षेत्रों को बताया था जो स्पष्ट तौर पर भारत के थे। लेकिन चीन उन पर कब्जा करना चाहता था।

उन्होंने इन दस्तावेजों में लिखा था कि चीन अब मैकमोहन सीमा को अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा मानने से इनकार कर रहा है और लद्दाख के कुछ क्षेत्रों में अपना कब्जा करना चाहता है। इसलिए भारत को चीन के पूर्ण प्रतिरोध का विरोध करने और किसी भी प्रकार के घुसपैठ को दूर करने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, उस समय में आर्मी कमांडर रहे लेफ्टिनेंट जनरल एसएसपी थोराट ने अपने निष्कर्ष में कहा:

“पहले हमारे लिए सबसे बड़ा ख़तरा सिर्फ़ पाकिस्तान था। इस ख़तरे के साथ ही अब चीन का ख़तरा भी जुड़ गया है। चीन हमारी धरती पर कब्ज़ा करने की फ़िराक़ में है। चीन ने मैकमोहन लाइन को अंतर्राष्ट्रीय बॉर्डर मानने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही उसने लद्दाख, उत्तर प्रदेश और North East Frontier Agency के इलाकों में घुसपैठ भी की है…“

जनरल थोराट ने अपने निष्कर्षों से यह चेतावनी ठीक चीनी हमले के दो साल पहले दे दी थी। लेकिन नेहरू सरकार ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया। अंतत: साल 1962 में 20 अक्टूबर को चीनी सैनिकों ने भारत पर हमला बोला। जिसके बाद साबित हो गया कि लेफ्टिनेंट जनरल थोराट का अनुमान कितना सटीक था।

17 मार्च 1960 को लाल किला अभ्यास हुआ। उस समय ऐसा लगा जैसे लेफ्टिनेंट जनरल जानते थे कि चीन हमला करने वाला है। दरअसल, उन्होंने मैकमोहन रेखा के पार सैन्य और बुनियादी ढाँचे के निर्माण का आंकलन कर लिया था।

साल 2012 की एक रिपोर्ट के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल गुरु बख्शी व पूर्व महानिदेशक और तत्कालीन युवा कप्तान कहते हैं कि 1959 में हम सभी युवा अधिकारियों को जनरल थिमैया ने अड्रेस किया था। उस समय उनकी बातों से हमें समझ आया कि तत्कालीन रक्षा मंत्री वीके कृष्णा सेना की सलाह लेने में दिलचस्पी नहीं ले रहे थे।

लेफ्टिनेंट जनरल थोराट ने अपने निष्कर्ष में साफ कहा था कि पाकिस्तान और चीन से आक्रामकता के खिलाफ हमारे क्षेत्र और सिक्किम की रक्षा करें और नेपाल को सैन्य सहायता देने और नागा हिल्स और तुएनसांग एजेंसी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयार रहें।

बता दें जनरल थोराट ने यह सभी बातें बिना किसी आधार पर नहीं कही थीं। उन्होंने विस्तृत खुफिया जानकारी की मदद से चीन के सैन्य निर्माण व सड़क और हवाई क्षेत्र निर्माण योजनाओं का आकलन कर अपनी रिपोर्ट पेश की थी। मगर, तब भी उनकी बात की सुनवाई नहीं हुई। इसका परिणाम हमें 1962 में देखने को मिला।

सेना के पूर्व उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल शांतनु चौधरी ने उस समय को याद करते हुए दुख जताया था और कहा था कि दुख की बात है कि उस समय शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व के बीच समन्वय का अभाव था।

जब लेफ्टिनेंट जनरल ने चेतावनी दी थी और उस पर काम किया गया होता तो हालात बिलकुल अलग होते। लेफ्टिनेंट जनरल थोराट भी चाहते थे कि युद्ध में एयरफोर्स की अहम भूमिका हो। बता दें पूर्व एयर चीफ मार्शल भी इस बात को कह चुके हैं कि अगर तब हवाई शक्ति का इस्तेमाल होता तो परिणाम बिलकुल अलग होते।

इसके अलावा लेखक और इतिहासकार कुमार वर्मा भी बता चुके हैं कि उस समय के रक्षा मंत्री ही इस बात को मानने को तैयार नहीं थे कि चीन कभी भारत पर हमला कर सकता है। इसलिए नेहरू भी उन्हीं के मत के साथ आगे बढ़े। बाकी जो हुआ सब इतिहास है। उस समय अगर लेफ्टिनेंट जनरल की रिपोर्ट पर सकारात्मक रूप से विचार होता तो भारत हालातों के लिए तैयार होता।

’15 अगस्त के बाद दोबारा CAA-NRC के खिलाफ प्रोटेस्ट… इंशाल्लाह’ – SC के वकील की प्लानिंग, अलीगढ़ को बताया खास

कोरोना वायरस के कारण स्थगित हुए (ऐसा वो कहते हैं) एंटी CAA-NRC प्रोटेस्ट को दोबारा से शुरू करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। दिल्ली के शाहीन बाग आंदोलन से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता महमूद प्राचा ने कहा है कि जल्द ही पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन फिर शुरू होगा, जिसके लिए उन्होंने तैयारी शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने मोहर्रम को लेकर कहा कि देश में हर धर्म के लिए कानून है। ऐसा सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस भी कहती है। उन्होंने कहा कि जिस तरह पुरी की जगन्नाथ यात्रा को सशर्त अनुमति दी गई कि 500 से अधिक लोग इस रथयात्रा में उपस्थित नहीं होंगे, इसी तरह उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से माँग की है कि मोहर्रम के जुलूस को भी शर्तों के साथ अनुमति दी जाए। क्योंकि जो नियम एक धर्म के लिए हो सकता है, वह अन्य धर्म पर भी लागू हो सकता है।

उनका कहना है कि वह आंदोलन के अलावा मोहर्रम से जुड़ी धार्मिक गतिविधियों के बारे में भी समुदाय के लोगों को जानकारी देंगे। उन्होंने कहा कि समुदाय के लोगों को बताया जाएगा कि किस प्रकार कानूनी दायरे में रहकर मोहर्रम में गतिविधियाँ पूरी की जाएँगी। इसके अलावा अगर उन्हें कोई गलत तरह से प्रताड़ित करे, तो उससे कैसे बचा जाएगा- ये भी वह समुदाय के लोगों को समझाएँगे।

महमूद प्राचा ने कहा कि भारत सरकार की अनलॉक स्टेज काफी एडवांस स्टेज पर पहुँच गई है। सरकार ने भी अनलॉक गाइडलाइन जारी कर दी है। पूरे देश में हर प्रकार की गतिविधि को सरकार अनुमति दे रही है। ऐसे में न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, प्राचा कहते हैं, “15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के आसपास से दोबारा ‘संविधान बचाओ आंदोलन शुरू होगा इंशाल्लाह।”

उनका कहना है कि वह इस आंदोलन की शुरुआत एक बार दोबारा संविधान बचाओ कानून और आरक्षण बचाओ मिशन के तहत करेंगे। मगर, अभी फिलहाल वह हर शहर में जाकर इसके लिए लोगों को तैयार कर रहे हैं। उनके मुताबिक अलीगढ़ में इस आंदोलन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होगी क्योंकि अलीगढ़ से एक संदेश पूरे देश और दुनिया में जाता है, इसलिए यह आंदोलन के लिए बेहद खास है।

प्राचा ने अपनी बात को रखते हुए उन लोगों के बारे में भी बात की, जिन्हें कई आरोपों के तहत जेल में बंद किया गया है। वे कहते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आंदोलन करने वाले लोगों को झूठे मुकदमे लगा कर जेलों में बंद किया गया। उन्हें देश के सामने खलनायक प्रस्तुत किया गया जो कि उचित नहीं है। अब वह सही तस्वीर सामने लाएँगे।

बता दें कि महमूद प्राचा की इन बातों के बाद उनके खिलाफ सिविल लाइन थाने में तहरीर दी गई है। तहरीर में कहा गया है कि वह सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करके भावनाओं को भड़काने का प्रयास कर रहे हैं। अब मामले में थाना पुलिस ने मेडिकल चौकी इंचार्ज को जाँच सौंप दी है। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से भी शिकायत की गई है।

J&K में भाजपा के OBC नेता की हत्या, सिक्यॉरिटी सेंटर में ठहराए जाने के बावजूद आतंकियों ने बनाया निशाना

जम्मू कश्मीर में भाजपा नेताओं की हत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बडगाम में भाजपा OBC मोर्चा के जिलाध्यक्ष अब्दुल हामिद नज़र की हत्या कर दी गई है। आतंकियों ने उन्हें रविवार (अगस्त 9, 2020) को गोली मार दी थी। कहा जा रहा है कि जम्मू कश्मीर में हो रही कार्रवाई से बौखला कर आतंकियों ने ऐसा किया। उन्हें गोली लगने के बाद उनकी हालत गंभीर बनी हुई थी। अब उनकी मौत हो गई है।

भाजपा ओबीसी प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अब्दुल हामिद सिक्यॉरिटी सेंटर से सैर के लिए निकले थे। तभी बाइक सवार आतंकियों ने उन्हें गोली मार दी। सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया है और लगातार तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है। आशंका जताई जा रही है कि यह द रेसिस्टैंट फ्रंट या फिर अल बदर मुजाहिद्दीन की करतूत हो सकती है।

38 वर्षीय अब्दुल हामिद नज़र बडगाम के मेहदीपोरा के रहने वाले थे। वो सौर-ए-अफाक होटल में बनाए गए सिक्योरिटी सेंटर से 3 किलोमीटर दूर ओमपोरा क्षेत्र में टहल रहे थे। आतंकियों ने उन्हें सामने से गोली दागी। बाइक पर 2 आतंकी सवार थे। गोलियाँ उनके पेट में लगीं। स्थानीय लोगों ने खून से लथपथ भाजपा नेता को अस्पताल पहुँचाया। वहाँ उन्हें श्रीनगर के महाराज हरि सिंह अस्पताल में ले जाया गया।

आतंकी उन्हें गोली मार कर फरार भी हो गए। डॉक्टरों ने बताया था कि पेट में गोली लगने के कारण उनके लीवर को नुकसान पहुँचा था। बताया गया है कि जब उन्हें जब गोली लगी तो वो ओमपुरा रेलवे स्टेशन तक पहुँच गए थे और उस समय वहाँ लोगों की आवाजाही भी कम थी। उन्हें काफी समय से आतंकियों की धमकियाँ मिल रही थीं, जिसके बाद उन्हें सिक्योरिटी सेंटर में ठहराया गया था। उन्हें अकेला देख आतंकियों को मौका मिल गया।

इससे पहले बडगाम में ही आतंकियों ने जम्मू कश्मीर के भाजपा राज्य कार्यकारिणी की सदस्य डॉक्टर अनीसा गुल को भी निशाना बनाया था। उन्हें भी फिलहाल सिक्योरिटी सेंटर में ही ठहराया गया है। उन्हें श्रीनगर के छिन्नपोरा में निशाना बनाने का प्रयास किया गया था। रात को 1 बजे 5 आतंकियों ने उनके घर को घेर लिया था। किसी तरह पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस के गाड़ियों के आने के बाद आतंकी फरार हो गए थे।

हाल ही में कश्मीर के कुलगाम जिला स्थित काजीगुंड ब्लॉक के वेसू गाँव में आतंकवादियों ने भाजपा सरपंच सज्जाद अहमद खांडे की उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया था। सज्जाद अहमद खांडे एक सुरक्षित प्रवासी शिविर में कई सरपंचों के साथ रह रहे थे। वह बृहस्पतिवार (अगस्त 05, 2020) सुबह अपने घर जाने वाले थे और उन्हें आतंकवादियों ने तब गोली का निशाना बनाया, जब जब वह अपने घर से मात्र 20 मीटर दूर थे।

भाजपा पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने सभी सरपंचों के लिए सुरक्षा की माँग करते हुए कहा, “यह हताशा के कारण उठाया गया कदम है क्योंकि भाजपा पैर जमा रही है। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि लड़ाई वैचारिक होनी चाहिए। आप उन लोगों को मारते हैं, जो गरीबों और वंचितों के लिए लड़ते हैं। मुझे लगता है कि उन सभी सरपंचों को जिन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है, अब उन्हें सुरक्षा दी जानी चाहिए।”

चोरों ने चुराया 100 किलो गोबर, कॉन्ग्रेसी सरकार की ‘गोबर’ योजना के बाद चिंता में किसान

छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के रोझी गाँव में चोरी का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि वहाँ चोर ने पैसे या जेवरातों की चोरी नहीं की बल्कि उसकी जगह 100 किलो से ज्यादा गाय का गोबर चुराया है। इस संबंध में गाँव के दो किसानों ने स्थानीय गोठान समिति में अपनी शिकायत भी दर्ज करवाई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, किसानों ने बताया कि उन्होंने अपने बाड़े में गायों का इकट्ठा हुआ गोबर रखा था, जिसे वह राज्य सरकार को बेचने वाले थे। लेकिन सुबह के वक्त दोनों की पत्नियाँ फूलमति और रिचबुधिया अपने-अपने बाड़े में जब गोबर जमा करने की जगह पर पहुँचीं तो वहाँ से गोबर का ढेर गायब था।

इसके बाद दोनों किसानों ने गोठान समिति पहुँचकर इस चोरी की शिकायत को दर्ज करवाया। उन्होंने बताया कि चोर उनके बाड़े से करीब 100 किलो गोबर चुरा कर ले गए। उन्होंने अपने बाड़े में यह गोबर इकट्ठा किया था। मगर जब सुबह सोकर उठे तो वहाँ से सारा गोबर गायब था।

गोठान समिति के अध्यक्ष ने चोरी की घटना पर कहा कि गोबर चोरी होने की घटना एक तरह की नई समस्या है। इस समस्या को रोकने के लिए चोरों का पकड़ा जाना बहुत जरूरी है। समिति के सदस्यों ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कहा कि वह इस संबंध में पुलिस से संपर्क करेंगे और उनके पास ही शिकायत दर्ज करवाएँगे।

दिलचस्प यह है कि आज तक देश में शायद ही गोबर चोरी का कोई मामला सामने आया हो। मगर, छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली बाघेल सरकार द्वारा गोधन न्याय योजना नाम की ‘निराली’ स्कीम लॉन्च किए जाने के बाद यह घटना सामने आई है।

इस स्कीम के अंतर्गत कहा गया है कि राज्य सरकार गाय के गोबर को पशुपालक से 2 रुपए प्रति किलो की दर से खरीदेगी और इसका इस्तेमाल वर्मीकम्पोस्ट या जैविक खाद बनाने के लिए करेगी।

बता दें कि पिछले 5 अगस्त को राज्य सरकार ने पशुओं के गोबर की कीमत पहली बार पशुपालकों को अदा की। उन्होंने 46000 पशुपालकों के अकाउंट में इस नई योजना के तहत 1.65 करोड़ रुपए ट्रांस्फर करवाए, जिससे इस योजना को और मजबूती मिली। साथ ही चोरों की नजर भी गोबर पर आ अटकी।

इस नई योजना के जरिए छत्तीसगढ़ में गोबर की खाद बनाने के साथ कई तरह के उपयोगी सामान गोठान समितियाँ बाजारों में लेकर आ रही हैं। जैसे पिछले दिनों गोबर से बनी राखियाँ बाजारों में उपलब्ध थीं। इनके अलावा गोबर के कंडे, मूर्तियाँ, अच्छी की किस्म की जैविक खाद और कुछ अन्य चीजें भी बन रही हैं।

लटका मिला था भाजपा MLA देबेन्द्र नाथ रॉय का शव: मुख्य आरोपी माबूद अली गिरफ्तार, नाव से भागने की थी योजना

पश्चिम बंगाल पुलिस ने भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय के कथित आत्महत्या मामले में मुख्य आरोपित माबूद अली को गिरफ्तार कर लिया है। नॉर्थ दिनाजपुर के हेमताबद में हुई इस घटना के मामले में सीआईडी और पुलिस ने ये गिरफ्तारी की है। मालदा के चंचल से माबूद अली को गिरफ्तार किया गया, जो मोठाबरी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आने वाले पंचनंदपुर से धर दबोचा गया। वो झारखंड भागने की तैयारी में था।

अब माबूद अली को रायगंज लाया जा रहा है। पुलिस ने बताया है कि माबूद अली 15 जुलाई से ही बबला के कंलपुत गाँव में अपने रिश्तेदारों के यहाँ रुका हुआ था। इससे पहले एक अन्य आरोपित को मालदा से गिरफ्तार किया गया था। जब अली को गिरफ्तार किया गया, तब वो नाव से झारखंड निकलने की तैयारी में था। इससे पहले सीआईडी ने एक अन्य आरोपित निलॉय सिन्हा को गिरफ्तार किया था।

भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय की पत्नी के बयान के आधार पर निलॉय सिन्हा और माबूद अली को गिरफ्तार किया गया। माबूद जब बाइक से कसिमबाजार जा रहा था, तब उसे गिरफ्तार किया गया। विधायक की लाश 13 जुलाई को एक चाय की दुकान के पास लटकते हुए मिली थी। इसके बाद ममता बनर्जी की आलोचना शुरू हो गई थी।

2016 के विधानसभा चुनाव में देबेन्द्र नाथ रॉय ने सीपीएम के टिकट पर चुनाव जीते थे। उन्होंने नार्थ दिनाजपुर के हेमताबाद से जीत दर्ज की थी। वो ग्राम पंचायत चुनाव में भी सीपीएम के लिए हैट्रिक जीत दर्ज कर चुके थे। उन्होंने कोऑपरेटिव सोसाइटी की मदद से गाँव में कई लोगों की वित्तीय रूप से मदद की थी। उन्होंने 2019 में दिल्ली में भाजपा की सदस्यता ली थी। विधायक की पत्नी और पूर्व पंचायत प्रमुख चांदीमा रॉय ने भी अपने पति की साजिशन हत्या की आशंका जताई थी। 

इसके बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने इस मामले से जुड़ी कुछ और जानकारी अपने ट्विटर एकाउंट पर साझा की। ट्वीट में दी गई जानकारी के मुताबिक़ देबेन्द्र नाथ रॉय की शर्ट की जेब से एक सुसाइड नोट मिला है। जिसमें हत्या के लिए दो ज़िम्मेदार लोगों का नाम सामने आया था।

पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना था कि विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय की मौत संबंधी जाँच के लिए सारे ज़रूरी कदम उठाए जा रहे हैं, मौके पर फॉरेंसिक एक्सपर्ट की ही मदद ली गई थी और ट्रैकर डॉग भी छोड़े गए थे।