दिल्ली पुलिस ने राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख, उसकी पत्नी, डॉक्टर और वकील के खिलाफ फर्जी दस्तावेज जमा करने का केस दर्ज किया गया है। फर्जी दस्तावेज इस साल फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जमानत पाने के लिए जमा किए गए थे।
एक हफ्ते पहले, दिल्ली के दंगों के मुख्य आरोपित फैजल फारुख ने फर्जी मेडिकल प्रमाण पत्र के आधार पर जमानत पाने की कोशिश की थी। वहीं फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने वाले डॉक्टर को दिल्ली मेडिकल काउंसिल की तरफ से पहले भी इस तरह के जाली दस्तावेज बनाने के कारण निलंबित किया गया था।
डॉक्टर ने फैजल की पत्नी के नाम से एक फर्जी मेडिकल प्रमाण-पत्र बनाया था, जिसमें लिखा गया था कि cyst निकालने के लिए उनका ऑपरेशन करना जरूरी है। फैजल ने अपने आवेदन में कहा कि उनकी पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर उन्हें अंतरिम जमानत मिलनी चाहिए। दिल्ली दंगे में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद अदालत उसकी जमानत याचिका दो बार रद्द कर चुकी है।
जब फैजल ने अदालत में जमानत याचिका को मेडिकल प्रमाण-पत्र और कुछ दस्तावेजों के साथ “बेहद जरूरी मामला” के रूप में प्रस्तुत किया, तो अदालत ने दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा से दस्तावेजों की वैधता की जाँच करने के लिए कहा।
जब जाँच अधिकारियों ने सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. गजेंद्र नायर से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने मामले में कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। इसके बाद जाँच अधिकारियों ने ग्रेटर नोएडा के बिसरख गाँव रोड स्थित उसके नर्सिंग होम का दौरा किया। वहाँ उन्हें पता चला कि फैजल की पत्नी के नाम पर नर्सिंग होम में कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं थे।
पुलिस ने अपनी जाँच रिपोर्ट में यह भी कहा कि उसकी पत्नी दिल्ली के यमुना विहार में रहती है। यह जगह नर्सिंग होम जगह से बहुत दूर है और दिल्ली में बहुत बेहतर और सस्ती मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
पुलिस के मुताबिक, जब उन्होंने डॉक्टर के बारे में और जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की, तो उन्हें पता चला कि उनके लाइसेंस को पिछले साल दिल्ली मेडिकल काउंसिल ने निलंबित कर दिया था।
दिल्ली मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. गिरीश त्यागी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने पूर्व में दो बार डॉ. गजेंद्र के खिलाफ कार्रवाई की थी। पहली बार उन्हें 6 महीने का निलंबन और दूसरी बार एक साल के लिए निलंबित किया गया था। वर्तमान में, वह एक निलंबित लाइसेंस पर काम कर रहा था। उसके निलंबन की अवधि नवंबर 2020 में समाप्त होगी।
जब क्राइम ब्रांच ने डॉ. गजेंद्र नायर ने पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि जमानत दिलाने में मदद करने के लिए वो पहले भी कई लोगों का फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट बना चुका है।
डॉक्टर ने यह भी स्वीकार किया कि उसने फैजल की पत्नी को कभी देखा भी नहीं है। एक ब्रोकर बुर्का पहने महिला के साथ आया और उससे महिला के पति की जमानत के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने के लिए कहा। फिलहाल पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों को तैयार करने में शामिल सभी के खिलाफ विभिन्न आरोपों के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
बता दें कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान फैजल फारुख के राजधानी स्कूल का इस्तेमाल अटैक बेस की तौर पर किया गया था। स्कूल की छत पर एक बड़ा गुलेल लगाया था। इसकी मदद से हिंदुओं और उनकी संपत्तियों और पेट्रोल बम से निशाना बनाया गया था। दंगों में इस स्कूल को कोई नुकसान नहीं पहुॅंचा था। लेकिन इस ठीक बगल में स्थित स्कूल तबाह हो गया था।
राजधानी पब्लिक स्कूल की छत से बड़ी गुलेल के जरिए पत्थर और एसिड बम आदि फेंके गए थे। फैजल दंगों से ठीक पहले निजामुद्दीन मरकज के प्रभावशाली लोगों के साथ ही जामिया कोऑर्डिनेशन कमिटी, देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों, पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप के संपर्क में था। स्कूल से सभी मुस्लिम बच्चों को पहले ही निकाल दिया गया था और फिर इसी स्कूल में शेष हिंदुओं के बच्चों को बंधक भी बनाया गया था।
24 और 25 फरवरी को हिंदू विरोधी दंगों के दौरान देश की राजधानी पूरी तरह दहल उठी थी। 53 लोगों ने अपनी जान गँवाई और सैकड़ों लोग घायल हुए। दो दिनों तक चले दिल्ली दंगों के मामले में स्पेशल सेल और दिल्ली पुलिस ने कई चार्जशीट तैयार की है। चाँद बाग़ दंगों के दौरान हिंसा से सबसे ज़्यादा प्रभावित क्षेत्रो में रहा। इसके अलावा शिव विहार ऐसा इलाक़ा था जहाँ के हालात दंगों के वक्त बदतर थे।
शिव विहार तिराहा तीन पुलिस थानों के अंतर्गत आता है। करावल नगर, दयालपुर और गोकुलपुरी। शिव विहार तिराहे की एक सड़क मुस्तफाबाद की तरफ जाती है जो कि मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र है। दूसरी सड़क शिव विहार और बाबू नगर की तरफ जाती है, जहाँ मिली-जुली आबादी रहती है। जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी ज़्यादा है, वहाँ भी मुस्लिमों के घर बने हुए हैं। शिव विहार तिराहे पर हुई हिंसा हिंदुओं के लिए भयावह थी।
24 फरवरी की दोपहर में जिस पहले व्यक्ति का शव मिला था, वह था दिलबर नेगी। उसके हाथ-पैर काट दिए गए थे और राजधानी स्कूल के सामने स्थित अनिल स्वीट्स में उसका शरीर जला दिया गया था।
हिंसा के दौरान भयावह नज़ारा सामने आया शिव विहार चौराहे स्थित राजधानी स्कूल की छत से। इस स्कूल के मालिक का नाम है फैजल फारुख। इस स्कूल की छत से इस्लामी भीड़ ने गोलियाँ चलाई, एसिड की बोतलें फेंकी और पत्थर भी चलाए। दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जो पहली चार्जशीट दायर की गई थी, उसका संबंध राजधानी स्कूल में हुई हिंसा की घटनाओं और 24-25 फरवरी के दिन हुई घटनाओं से भी था। इस मामले में यतेन्द्र शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई थी जो की डीआरपी स्कूल के मालिक हैं। डीआरपी स्कूल, राजधानी स्कूल के ठीक बगल में स्थित था।
डीआरपी स्कूल का मालिक एक हिंदू व्यक्ति था। राजधानी स्कूल की छत पर मौजूद भीड़ ने डीआरपी स्कूल को काफी नुकसान पहुँचाया था। उस दिन पुलिस कंट्रोल रूम को जितने भी फोन किए गए थे, उसमें ज़्यादातर डीआरपी स्कूल से धर्मेश शर्मा ने ही किए थे। पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में डीआरपी स्कूल के गार्ड का बयान भी दर्ज है। इससे दिल्ली दंगों के दौरान हिंदुओं के खिलाफ़ रची गई साज़िश का खुलासा होता है।
गार्ड ने अपने बयान में कहा, “जैसे ही वह डीआरपी स्कूल का मुख्य द्वार बंद करने गया तभी उसने देखा राजधानी स्कूल के सामने भारी संख्या में मुस्लिम लोग खड़े थे। उनके साथ राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख भी था। फैज़ल उस वक्त अपनी दो पहिया गाड़ी पर बैठा था। उसने राजधानी स्कूल के गार्ड (जो खुद हिन्दू था और उसकी पहचान छुपाई गई है) से कहा कि मुस्लिमों को स्कूल में दाखिल होने दिया जाए।”
इसके बाद डीआरपी स्कूल के गार्ड ने जो कहा वह हैरान कर देने वाला था। उसने फैज़ल को यह कहते हुए सुना “आज देख लेंगे हिंदुओं को।” इसके बाद फैज़ल के साथ मौजूद मुस्लिमों की भीड़ कई तरह के हथियारों के साथ डीआरपी स्कूल में दाखिल हुई। इसके बाद मुस्लिम दंगाइयों ने उसकी तरफ देखा और एक ने चीखते हुए कहा “शाहरुख भाई वह रहा हिंदू, मारो साले को।” इसी तरह एक और चश्मदीद ने (उसकी पहचान भी इस रिपोर्ट में छुपाई जा रही है) अपना बयान दर्ज कराया था।
उसने भी गार्ड के बयान से अलग कुछ नहीं बताया, दोनों ने लगभग एक घटनाक्रम ही बताया। उसने बयान में कहा कि उसने 24 फरवरी की दोपहर 2 बजे के आसपास फैज़ल को उसके कई मुस्लिम साथियों के साथ राजधानी स्कूल के सामने देखा। इसके बाद फैज़ल के साथियों ने राजधानी स्कूल के भीतर दाखिल होने की बात कही। इसके अलावा चश्मदीद ने फैज़ल को यह कहते हुए सुना “आज देख लेंगे हिंदुओं को।” एक चश्मदीद ने फैज़ल के उस ड्राइवर की भी पहचान की जिसने दंगों के दौरान डीआरपी स्कूल को तबाह करने में अहम भूमिका निभाई थी।
हिंदुओं के खिलाफ़ लॉन्च पैड की तरह इस्तेमाल किए गए राजधानी स्कूल के हिंदू गार्ड ने भी घटनास्थल पर कई मुस्लिमों के साथ फैजल की मौजूदगी की पुष्टि की थी। उसने कई बार स्कूल के भीतर दाखिल होने की बात कही थी। जैसे ही गार्ड ने मुस्लिम भीड़ को आते हुए देखा और अपने परिवार वालों के साथ वहाँ से भाग निकला।
दंगों के दूसरे दिन जब फैज़ल उस हिन्दू गार्ड से मिला तब उसने गार्ड से कहा कि दंगाई उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचाएंगे। लेकिन उस वक्त हिंदू गार्ड पर अपनी जान बचाने का डर हावी थी। जिसके कारण वह स्कूल गया ही नहीं। उसने चार्जशीट में इस बात का भी ज़िक्र है कि कैसे उसने सीसीटीवी फुटेज देख कर दंगाइयों को पहचाना।
चार्जशीट के मुताबिक़ एक खबरी की जानकारी के आधार पर पुलिस ने शाहरुख को पकड़ा था। गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ के दौरान उसने दंगों में फैज़ल के शामिल होने की बात कबूल की। इसके अलावा उसने दंगों में खुद भी शामिल होने की बात स्वीकार की थी। सबसे रोचक बात यह थी कि उसने फैज़ल की पहचान उस वक्त की जब पुलिस उससे दूसरे मामले में पूछताछ कर रही थी। शाहरुख ने पुलिस की पूछताछ के दौरान यह भी बताया कि फैज़ल उससे एक बात हमेशा कहता था, अगर सीएए और एनआरसी लागू हो गया तो सारे मुस्लिम देश के बाहर कर दिए जाएँगे।
शाहरुख का कहना था कि फैज़ल ने उससे कह दिया था कि वह अपनी कौम के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार रहे। शाहरुख के मुताबिक़ फैज़ल ने उसे हिंदुओं को ख़त्म करने के लिए 5 हज़ार रुपए दिए थे। उसने यह भी बताया कि फैज़ल के देवबंद से संबंध बहुत अच्छे थे और वह अक्सर वहाँ जाता रहता था।
चार्जशीट में इस बात भी भी ज़िक्र है कि राजधानी स्कूल के नज़दीक से जितने हथियार मिले थे उन्हें एक दिन में जमा नहीं किया जा सकता था। इतना ही नहीं फैज़ल अपने इलाके का नेता था, क्योंकि वह अमीर था और उसके पास संसाधन मौजूद थे। ऐसे लगभग हर मौकों पर वह मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए योजना तैयार करता था। राजधानी स्कूल की इमारत बड़ी थी, इसलिए इसका इस्तेमाल हिंदुओं पर हमला करने के लिए किया गया।
चार्जशीट में यह लिखा है कि सीसीटीवी फुटेज में यह साफ नज़र आया कि जिस वक्त राजधानी और डीआरपी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिवावक उन्हें लेने आए, उस वक्त रास्ते पूरी तरह खाली थे। पूरी सड़क पर सन्नाटा पसरा था। इसका मतलब साफ़ था कि दंगे पूरी तरह सुनियोजित थे। दंगों के दूसरे दिन यानी 25 फरवरी को फैज़ल ने दंगाइयों में 2 हज़ार रुपए बाँटे। हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए उन लोगों की तारीफ़ भी की।
पूछताछ के दौरान फैजल फारुख ने खुद यह बात स्वीकार की कि सीएए और एनआरसी मुस्लिम समुदाय के खिलाफ़ थे। इसलिए वह दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जारी विरोध-प्रदर्शन का सक्रिय रूप से हिस्सा बना रहा। चार्जशीट के मुताबिक़ उसने तमाम मौलवियों, पिंजरा तोड़, जेसीसी और इस्लामी आतंकी समूह पीएफआई के सदस्यों की बैठक की बात भी स्वीकार की। वह हर तरह की मदद और सहयोग के लिए पूरी तरह आश्वस्त था।
फैज़ल जेसीसी के माध्यम से सफूरा ज़रगर के संपर्क में भी था। जब सफूरा को दंगों में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया तब उसे बहुत सहानुभूति भी मिली। उस वक्त वह गर्भवती भी थी। इसके अलावा पिंजरा तोड़ के माध्यम से दिव्यांगना और नताशा नरवाल से फैज़ल मिला। अंत में उसकी मुलाक़ात पीएफआई दिल्ली के मुखिया मोहम्मद इलियास से भी हुई।
चार्जशीट के मुताबिक़ फैज़ल दंगों से एक दिन पहले 23 फरवरी की तारीख को देवबंद उत्तर प्रदेश गया था। वह सुबह 7 बजे दिल्ली से निकला था और रात 8 बजे वापस आ गया था। देवबंद इस्लामी कट्टरपंथियों का गढ़ माना जाता रहा है। साथ ही दारुल-उल-देवबंद का घर भी माना जाता है जहाँ से सुन्नी देवबंद इस्लामिक आन्दोलन की शुरुआत हुई थी। देश में कुछ भी इस्लाम विरोधी होने पर यहीं से ही फ़तवा भी जारी किया जाता है।
पुलिस का संदेह इस बात पर भी है कि फैज़ल का संबंध मरकज़ और तबलीगी जमात से भी हो सकता है। चार्जशीट पढ़ने के दौरान ऑपइंडिया को 13 ऐसे कॉल्स और मैसेज मिले जो फैज़ल और अब्दुल अलीम के बीच किए गए थे। अब्दुल अलीम मौलाना साद का करीबी रहा है। फिलहाल दिल्ली पुलिस इन पहलुओं की जाँच करने में जुटी हुई है।
पुलिस ने चार्जशीट में शिव विहार तिराहे में हिंदुओं के साथ हुई हिंसा की 6 घटनाओं का मुख्य रूप से ज़िक्र किया है,
24 फरवरी के दिन दिलबर नेगी का लगभग पूरा जला हुआ शरीर बरामद होना
24 फरवरी के दिन राहुल सोलंकी का गोली से घायल होना
25 फरवरी के दिन एसएसबी के जवानों पर एसिड फेंका गया
25 फरवरी के दिन शाम के 4:30 बजे वीर भान के सिर में गोली लगना। उस वक्त वह अपने दो पहिया वाहन से गुज़र रहा था
25 फरवरी के दिन शाम के 5 बजे दिनेश के सिर में गोली लगना
25 फरवरी के दिन ही रात के लगभग 10 बजे, आलोक के सिर में पत्थर की वजह से चोट लगी
दिल्ली दंगों के मामले में यह पहली ऐसी चार्जशीट जो दिल्ली पुलिस की तरफ से दायर की गई थी। इसके जरिए ज़रिये तमाम तरह की जानकारी सामने आई है। यह बात खुद में कितनी हैरान कर देने वाली है कि कैसे महीनों पहले इन दंगों की योजना तैयार की गई। इसके बाद 24 और 25 फरवरी के दिन देश की राजधानी में इन दंगों को अंजाम दिया गया। इन दंगों की विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ी जा सकती है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (अगस्त 3, 2020) को अयोध्या का दौरा कर 5 अगस्त को होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 500 सालों बाद यह ऐतिहासिक क्षण आया है।
इसके अलावा उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने के लिए चार और पाँच अगस्त को अपने घर में मिट्टी के दीए जलाएँ। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि साधु-संत मंदिरों को सजाएँ, दीपोत्सव के आयोजन के साथ अखंड रामायण का पाठ करें। उन्होंने कहा कि उन लोगों को जरूर याद करें जिन्होंने राम मंदिर के लिये स्वयं का बलिदान कर दिया।
To witness this historic moment, it’s essential that we light earthen lamps at our homes on 4th & 5th August, religious leaders decorate temples, organise ‘deepotsav’ & ‘akhand Ramayan Path’ at temples, and remember their ancestors who sacrificed themselves for Ram Temple: UP CM https://t.co/Xui5C3aJW2
CM योगी आदित्यनाथ ने कहा, “अयोध्या के साथ-साथ देश और दुनिया के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा जब प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या में लगभग 500 वर्षों की इस परीक्षा के परिणाम के साथ भगवान राम के भव्य मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखेंगे। इसके महत्व को समझते हुए, यहाँ अयोध्या में कार्यों का अवलोकन करने के लिए मैं स्वयं आया हूँ।”
We’ve made all arrangements to ensure that there is no laxity on any count. Main focus is on #COVID19. The protocol has to be enforced very strictly. Only those who are invited should come here. All devotees want to come but PM will represent all of them: UP CM Yogi Adityanath pic.twitter.com/1cjsObGLzi
उन्होंने आगे कहा, “व्यवस्था आदि देखने, निरीक्षण करने के लिए हम यहाँ आए हैं, कहीं भी कोई कोताही न बरती जाए, हम लोगों ने इसके लिए पूरी तत्परता के साथ तैयारी की है। कोविड-19 के प्रोटोकॉल को मजबूती से लागू करने पर प्रशासन का मुख्य फोकस है।”
Redevleopment and beautification of #Ayodhya Junction Railway station underway.
“Work slowed down due to lockdown. The final result will certainly be very beautiful… Four people made this painting (in pic 2) over a span of 7 days,” says an official. pic.twitter.com/JdtORGDJBV
इस बीच अयोध्या जंक्शन रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और सौंदर्यीकरण का कार्य चल रहा है। अयोध्या रेलवे स्टेशन के विकास का पहला फेज अगले वर्ष जून तक पूरा कर लेने का दावा रेलवे की ओर से किया गया है। एक अधिकारी का कहना है, “लॉकडाउन के कारण काम धीमा हो गया था। अंतिम परिणाम निश्चित रूप से बहुत सुंदर होगा।” उन्होंने भगवान राम की एक तस्वीर की ओर इशारा करते हुए बताया कि चार लोगों ने 7 दिनों के अंदर इस पेंटिंग को बनाया है।
We have also invited Iqbal Ansari (former litigant in Ayodhya land dispute case) and Padma Shri, Mohammed Sharif to the foundation stone laying ceremony: Champat Rai, general secretary of Sri Ramjanmbhoomi Teerth Kshetra trust. #RamTemplepic.twitter.com/wnSzP6DuI0
श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने भूमि पूजन के लिए भेजे जा रहे निमंत्रण को लेकर कहा, “हमने इकबाल अंसारी और पद्म श्री मोहम्मद शरीफ को शिलान्यास समारोह में आमंत्रित किया है।”
बता दें कि साइकिल मिस्त्री से लावारिस लाशों के मसीहा बने मोहम्मद शरीफ को समाजसेवा के क्षेत्र में पद्मश्री से विभूषित किया गया है। उन्होंने बिना भेदभाव किए करीब 3 हजार हिन्दू और 2 हजार से अधिक मुस्लिम लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर समाज सेवा की एक बड़ी मिसाल पेश की है।
शरीफ अब तक एक कब्रिस्तान के पास विषम परिस्थितियों में रह रहे थे। मगर आसरा आवास योजना के अंतर्गत अब उन्हें घर भी मिल गया है। आवास मिलने पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार प्रकट करते हुए उन्हें चिरकाल तक स्वस्थ रहने का आशीर्वाद दिया था।
वीर सपूतों की धरती झुंझुनूं का एक और बेटा भारत माता की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गया। बलिदानी मोहसिन खान राजस्थान के झुंझुनूं जिले के कोलिंडा गाँव के रहने वाले थे। 22 वर्षीय मोहसिन खान को बकरीद के दिन 1 अगस्त 2020 को अंतिम विदाई दी गई।
Why dnt these news of supreme sacrifices make front page news? Sep Mohsin Khan lost his life in Naushera on 31Jul20. Nobody celebrated #Eid in his village Kolinda Rajasthan. The young lad ws only 22,joined army jst 3 yrs bk. Belongs to family of patriots father retired as Subedar pic.twitter.com/E65AnGurdL
भारतीय सेना की 16 ग्रेनिडियर के सिपाही मोहसिन खान जम्मू-कश्मीर के नौशेरा सेक्टर में तैनात थे। शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) को पेट्रोलिंग के दौरान सरहद पार से हुई गोलीबारी में वे वीरगति को प्राप्त हो गए थे। शनिवार (अगस्त 1, 2020) शाम को बलिदानी मोहसिन खान का पार्थिव शरीर कोलिंडा गाँव पहुँचा। बेटे को तिरंगे में लिपटा देखकर हर किसी की आँखें नम हो गई। मां बलकेश बानो, दादा सन्नू खान समेत परिवार के अन्य का सदस्य रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
शाम को कोलिंडा के कब्रिस्तान में नमाज अदा कर मोहसिन के पार्थिव शरीर को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इससे पहले जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कमांडर परवेज अहमद हुसैन, सांसद नरेन्द्र खींचड़, प्रधान अलसीसर गिरधारी लाल खींचड़, सुशीला सीगड़ा, जिला परिषद सदस्य प्यारे लाल ढूकिया आदि ने बलिदानी की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित किए। इस दौरान तिरंगे को शहीद के पिता सूबेदार सरवर अली खान को सौंपा गया। जवानों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया।
परिजनों ने बताया कि मोहसिन खान की हाल ही में कोलाली गाँव निवासी युवती से रिश्ता तय हुआ था। कुछ दिनों पहले ही उनकी सगाई हुई थी। एक महीने के अवकाश के बाद महीने भर पहले ही वो ड्यूटी पर लौटे थे। चार भाई-बहनों में सबसे छोटे शहीद मोहसिन के परिवार से कई सदस्य सेना में हैं। पिता सरवर खान सेना से सूबेदार पद से रिटायर हुए हैं। भाई अमजद अली 14 ग्रेनेडियर में है। अभी ज्वाइनिंग मिलनी बाकी है। इनके अलावा चाचा और ताऊ भी सेना में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं।
बलिदानी के चचेरे भाई नवाब अली ने बताया कि ईद उलजुहा पर्व की रौनक हर चेहरे से गायब हो गई। ईद के पहले दिन ही गाँव को अपने लाडले की शहादत की जानकारी मिल चुकी थी। शनिवार को दिन भर गाँव में मातम छाया रहा।
सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने इंस्टाग्राम पर भाई के साथ बिताए पलों को याद करते हुए भावनात्मक मैसेज पोस्ट किया है। बचपन की एक तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है, “हैप्पी रक्षाबंधन मेरा स्वीट सा बेबी। बहुत प्यार करते हैं हम आपको जान… और हमेशा करते रहेंगे… आप थे, आप हो और आप हमेशा हमारा गर्व रहोगे।”
सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के बाद उनकी बहन का यह पहला रक्षाबंधन है। सुशांत की बहन श्वेता अपने भाई के बहुत करीब थी। श्वेता उनकी आत्महत्या से पहले उनके साथ दो दिन मुंबई में रही थी। कथित तौर पर उस वक्त सुशांत रिया के साथ हुए ब्रेकअप से बहुत परेशान थे।
श्वेता हमेशा सुशांत के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित रहती थी। सुशांत को न्याय दिलाने के लिए श्वेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट भी किया था। इसमें उन्होंने सुसाइड केस की तत्काल जाँच के लिए पीएम से अनुरोध किया था।
सुशांत सिंह आत्महत्या
प्रतिभाशाली अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून 2020 को अपना जीवन समाप्त कर लिया था। उन्होंने एम एस धोनी, डिटेक्टिव ब्योमकेश बख्शी, काई पो चे, शुद्ध देसी रोमांस जैसी कई फिल्में की थी। लोग उनकी एक्टिंग और अंदाज को काफी पसंद करने लगे थे। उनकी मृत्यु के पीछे का कारण पहले लोगों ने फ़िल्म इंडस्ट्री में चल रहे भाई-भतीजावाद को बताया था। लेकिन अब कहा जा रहा है कि उनकी पूर्व प्रेमिका ने उन्हें यह कदम उठाने के लिए मजबूर किया था।
बात दें सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने अपने बेटे की आत्महत्या को लेकर कई खुलासे किए थे। सुशांत के पिता केके सिंह ने रिया को सुशांत की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि रिया ने सुशांत को सुसाइड के लिए उकसाया है। सुशांत के पिता ने पटना में रिया और उनके परिवार समेत सहयोगियों पर भी एफआईआर दर्ज किया है।
सुशांत के पिता ने अपनी शिकायत में बताया कि रिया चक्रवर्ती सुशांत का लैपटॉप, उनका पॉसवर्ड और कई सारी ज्वैलरी लेकर चली गई थीं। सुशांत के पिता ने रिया पर पैसे हड़पने तक का आरोप लगाया था। दर्ज एफआईआर के बाद से सोशल मीडिया पर रिया चक्रवर्ती बुरी तरह ट्रोल होने लगी है। एफआईआर दर्ज होने के बाद बिहार पुलिस आत्महत्या की जाँच में जुट गई है। पुलिस की एक टीम जाँच के लिए मुंबई भी पहुँची है।
एसआईटी को इस मामले में यह पता चला कि 9 से 13 जून के बीच सुशांत सिंह के मोबाइल में 14 सिम बदले गए थे। वहीं बिहार पुलिस ने इस मामले में मुंबई पुलिस पर सहयोग ना करने का आरोप लगाया है। दोनों राज्यों की पुलिस के बीच सुशांत केस को लेकर खींचतान चल रही है। वहीं सुशांत सिंह राजपूत का परिवार, भाजपा सहित कई नेता और सुशांत के फैन न्याय और मामले की सीबीआई जाँच की माँग कर रहे है।
पश्चिम बंगाल में भाजपा के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय ने टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट को बकवास बताया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि राज्य में बीजेपी के 21 नेता तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो सकते हैं। इनमें 4 सांसद, 1 विधायक और 16 पार्षद शामिल हैं। मुकुल रॉय ने इस खबर को फर्जी, बेबुनियाद और मनगढ़ंत बताया।
@TimesNowhttps://t.co/TnDyiqdfkf Another baseless, bogus concoction. Such news can damage the credence of media in the larger society!
टाइम्स नाउ ने यह दावा तृणमूल कॉन्ग्रेस के सूत्रों के हवाले से किया। इसमें दावा किया गया कि आने वाले दिनों में 21 बीजेपी नेता टीएमसी में शामिल हो सकते हैं। इनमें 4 सांसदों में से तीन ऐसे सांसद हैं, जिन्होंने पिछले साल लोकसभा चुनाव से ठीक पहले या बाद में बीजेपी का दामन थामा था। इसके अलावा एक विधायक भी टीएमसी में घर वापसी की चाह में हैं।
पत्रकार तमाल साहा ने आगे दावा किया कि एक बीजेपी सांसद, जो दो बार सांसद रह चुके हैं और पश्चिम बंगाल से बताए जा रहे हैं, वह भी पिछले तीन महीनों से दिल्ली में टीएमसी नेताओं से संपर्क बनाए हुए हैं और टीएमसी में शामिल होने की इच्छा जता चुके हैं। बीजेपी ने पूरी रिपोर्ट को बकवास करार दिया।
टाइम्स नाउ ने आगे दावा किया कि राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष और मुकुल रॉय के बीच कथित रूप से तनातनी चल रही है। चैनल ने इस बात पर भी जोर दिया कि मुकुल रॉय भाजपा के प्रमुख नेताओं में से एक हैं, जो बीजेपी छोड़ने को इच्छुक थे।
भाजपा ने पार्टी के खिलाफ मनगढंत समाचारों के प्रचार के लिए चैनल के एडिटर इन चीफ को पत्र लिख कर फटकार लगाई। पत्र में बंगाल में भाजपा के मीडिया प्रभारी सप्तर्षि चौधरी ने लिखा, ”अपने चैनल द्वारा प्रसारित समाचार में आपने बताया है कि 4 सांसदों और 1 विधायक सहित 21 भाजपा नेताओं के टीएमसी में शामिल होने की संभावना है। आपने भ्रम पैदा करने के एकमात्र उद्देश्य से कई ज्ञात चेहरों के लिए संकेत दिया है। यदि आप अपनी खबरों के बारे में निश्चित हैं, तो आप आसानी से व्यक्तियों का नाम ले सकते हैं।”
पत्र में आगे लिखा गया, “आपने अपनी खबर में किसी का नाम नहीं लिया, जिससे साबित होता है कि आपकी खबर का जमीनी हकीकत से कोई वास्ता नहीं है। हाल के दिनों में, आपने पश्चिम बंगाल बीजेपी की छवि को धूमिल करने के लिए खबरें प्रकाशित की हैं।”
सप्तर्षि चौधरी ने पत्र में आगे लिखा, “आपसे अनुरोध है कि खबर के स्रोत का खुलासा करें और फर्जी कहानी को प्रसारित करने के लिए बिना शर्त माफी माँगें। आपसे यह भी अनुरोध है कि नामों का खुलासा करें अन्यथा कानून का रास्ता अपनाना होगा और इसके जिम्मेदार आप होंगे। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ कि भविष्य में ऐसी फर्जी कहानियों को प्रकाशित करने से खुद को रोकें अन्यथा मेरे पास कानूनी कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।”
All those people and news channels who are jealous of the rise of @BJP4Bengal in Paschim Banga are regularly circulating fake news. Shameful! pic.twitter.com/3UTfaVEfSc
दिलीप घोष ने कहा, “वे सभी लोग और समाचार चैनल जो पाश्चिम बंगाल में भाजपा के उदय से ईर्ष्या कर रहे हैं, वे नियमित रूप से फर्जी समाचार प्रसारित कर रहे हैं।” उन्होंने इसे शर्मनाक बताया है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के अन्य निर्वाचित प्रतिनिधि भी रिपोर्ट को बकवास करने के लिए आगे आए।
5 अगस्त को अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए भूमिपूजन की तैयारियाँ हो चुकी है। समूची अयोध्या रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के उल्लास में डूबी नजर आ रही है। घर-घर में तैयारी और उल्लास का माहौल है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ट्विटर पर ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए चुनी गई तारीख की अशुभ बताते हुए लोगों को भ्रामित करने की कोशिश की है।
उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीति करने के लिए बेशर्मी से गृहमंत्री अमित शाह की तबीयत पर निशाना साधा। सिंह का कहना है कि मुहूर्त शुभ नहीं है। प्रथा को अनदेखा करने की वजह से गृह मंत्री शाह से लेकर भाजपा के अन्य नेता कोरोना संक्रमित हो गए हैं। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी से इस कार्यक्रम को स्थगित करने का आग्रह किया।
कॉन्ग्रेस नेता ने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती द्वारा भूमि पूजन के मुहूर्त के बारे में दिए गए एक निराधार डर पैदा करने वाले बयान का भी उल्लेख किया। उन्होंने ट्वीट किया कि भूमि पूजन के लिए दिन अनुकूल न होने के बावजूद, इसे पीएम मोदी की सुविधा को ध्यान में रखते हुए चुना गया है।
उन्होंने कहा, “मोदी जी की सुविधा पर यह अशुभ मुहूर्त निकाला गया। यानी मोदी जी हिंदू धर्म की हजारो वर्षों की स्थापित मान्यताओं से बड़े हैं। क्या यही हिंदुत्व है?”
कॉन्ग्रेस नेता इतने पर ही नहीं रुके। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह, कर्नाटक सीएम बीएस येदियुरप्पा और भाजपा के कई नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये नेता इसीलिए कोरोना संक्रमण की चपेट में आए हैं, क्योंकि राम मंदिर भूमिपूजन के लिए अशुभ घड़ी को चुना गया है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन हिंदू धर्म की मान्यताओं को अनदेखा करने की वजह से भाजपा नेता और राममंदिर के पुजारी इसके शिकार हुए हैं।
दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा, “हम अनादि काल से देखते आ रहे हैं कि, जब भी कुछ अच्छा या शुभ हो रहा होता है तब ‘असुर’ समस्याएँ पैदा करने की कोशिश करते हैं। दिग्विजय भी ऐसा ही कर रहे हैं।”
We’ve been seeing since time immemorial, whenever something good is happening, ‘Asurs’ try to create problems. Digvijaya is doing the same: MP Minister Narottam Mishra on Digvijaya Singh’s tweet saying Home Min Amit Shah tested COVID positive as result of ignoring Hindu practices pic.twitter.com/AKqN3blDZb
राम मंदिर के लिए 5 अगस्त को भूमि पूजन होना है। तीन दिवसीय अनुष्ठान की शुरुआत आज गौरी गणेश पूजा से हुई। सुबह 11 बजे मंत्रों के जाप के साथ सुबह 8 बजे पूजा शुरू हुई। इसके अलावा अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में रामायण पाठ आयोजित किया गया।
48 घंटे से भी कम का वक्त बचा है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखेंगे। प्रधानमंत्री मोदी 5 अगस्त को सुबह 11 बजे अयोध्या पहुँचेंगे। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक अयोध्या में रहेंगे।
इस कार्यक्रम में कुल 200 लोग शिरकत करेंगे। कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बीच हो रहे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में सोशल डिस्टेन्सिंग और सैनिटाइजेशन के नियमों का ध्यान रखा जाएगा। इस दिन को न्यूयॉर्क में भी यादगार बनाने के लिए के लिए कोशिशें की जा रही हैं। 5 अगस्त को न्यूयॉर्क की प्रतिष्ठित इमारत टाइम्स स्क्वायर पर भगवान राम की भव्य तस्वीर प्रदर्शित होगी। 17,000 वर्ग फीट वाली एलईडी स्क्रीन पर उनकी त्रिआयामी (थ्रीडी) चित्रों का प्रदर्शन किया जाएगा।
अयोध्या में 5 अगस्त को होने वाले राम मंदिर भूमि पूजन के लिए आमंत्रण-पत्र भेजे जाने शुरू हो गए हैं। सोमवार (अगस्त 3, 2020) को कार्यक्रम का पहला आमंत्रण पत्र बाबरी मस्जिद के मुद्दई रहे इकबाल अंसारी को भेजा गया। निमंत्रण पत्र पाकर अंसारी काफी खुश दिखे। उन्होंने कहा, “यह भगवान राम की ही इच्छा होगी कि मंदिर निर्माण का पहला आमंत्रण पत्र मुझे मिले। मैं इसे स्वीकार करता हूँ।”
Iqbal Ansari, former litigant in Ayodhya land dispute case, receives invitation to attend the foundation laying ceremony of #RamTemple in Ayodhya. He says, “I believe it was Lord Ram’s wish that I receive the first invitation. I accept it.” pic.twitter.com/z1PZMJdwsw
बता दें कि इकबाल अंसारी के पिता हाशिम अंसारी बाबरी अयोध्या विवाद में बाबरी मस्जिद के मुद्दई थे। वे 1949 से मुकदमे की पैरवी कर रहे थे। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में हाशिम अंसारी कॉन्ग्रेस को दोषी मानते थे। वहीं, मुस्लिम नेताओं के भी आलोचक थे। उनके इंतकाल के बाद इकबाल ने बाबरी मस्जिद को लेकर कानूनी लड़ाई जारी रखी थी। हालॉंकि अदालत के फैसले के बाद उन्होंने इसका स्वागत किया था।
वैसे इकबाल पिछले साल उस समय भी चर्चा में आए थे जब अंतरराष्ट्रीय शूटर वर्तिका सिंह से उनका विवाद हुआ था। गौरतलब है कि 3 सितंबर को वर्तिका सिंह राम मंदिर को लेकर बात करने इकबाल अंसारी से के घर पहुँची थीं। इस दौरान दोनों में विवाद हो गया था। वर्तिका का कहना था कि बातचीत के दौरान इक़बाल अंसारी ने न सिर्फ़ पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को लेकर अपशब्द भी कहे।
वर्तिका सिंह की याचिका के बाद पुलिस ने इकबाल अंसारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 504, 505 (2) और 506 के तहत राम जन्मभूमि थाने में केस दर्ज किया था। वर्तिका ने कोर्ट में दी याचिका में इकबाल अंसारी पर मारपीट का आरोप लगाया था।
निमंत्रण मिलने के बाद अंसारी ने कहा कि भूमि पूजन के कार्यक्रम में भागीदार बनकर उन्हें मंदिर निर्माण में सहभागी बनने का मौका मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में फैसला सुनाकर विवाद खत्म कर दिया है। अब आगे कोई विवाद नहीं होना चाहिए। दोनों मिलकर रहें। अंसारी ने कहा कि भगवान राम किसी एक के नहीं सारे समुदाय के हैं। हम उनकी नगरी में ही रहते हैं, यह सौभाग्य की बात है।
इकबाल अंसारी ने पहले भी कहा था कि भूमिपूजन में अगर उन्हें निमंत्रण दिया जाता है तो वह जरूर जाएँगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रामनामी पटका से स्वागत करने की इच्छा भी जताई है। इसके अलावा इकबाल अंसारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रामचरित मानस भेंट करने की इच्छा जताई है।
बता दें कि 5 अगस्त को होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा संघ प्रमुख मोहन भागवत विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहेंगे।
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने अयोध्या और राम मंदिर भूमिपूजन को लेकर न्यूज़ चैनल पर हो रही एक डिबेट के दौरान कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद कुमार केतकर को ‘राइस बैग कन्वर्ट’ कहा। कॉन्ग्रेस सांसद ने दावा किया था कि भगवान श्रीराम इतिहास या फिर साहित्य की रचना है।
कॉन्ग्रेस नेता ने कहा था, “रामायण की वजह से राम का अस्तित्व है। हालाँकि, इस निष्कर्ष पर पहुँचना अभी बाकी है कि राम इतिहास इतिहास की रचना है या साहित्य की। वाल्मीकि ने एक महान महाकाव्य लिखा था और इसका प्रभाव भारत और विदेशों दोनों में महसूस किया गया था। लेकिन, मुझे नहीं पता कि वह इतिहास में मौजूद है या नहीं।”इस बयान पर संबित पात्रा ने उन्हें राइस बैग कन्वर्ट कहते हुए संबोधित किया।
केतकर के विवादित बयान पर मुँहतोड़ जवाब देते हुए संबित पात्रा ने कहा,”ये कॉन्ग्रेस का आदमी क्या कहना चाहता है? वह पूछ रहा है कि भगवान राम इतिहास या साहित्य की रचना हैं? ये हमें राम के अस्तित्व के सबूत दिखाने को कह रहा है। अगर आपने अल्लाह के बारे में ऐसे ही बात कही होती, तो अब तक आपका सर कट चुका होता। आभारी रहें कि आप एक हिंदू हैं, वरना आप ऐसा कुछ कहने का दुस्साहस नहीं कर पाते।”
राइस बैग कन्वर्ट का मतलब
राइस बैग कन्वर्ट या राइस क्रिश्चियन, शब्द का उपयोग ऐसे लोगों को संदर्भित करने के लिए किया जाता है, जो मिशनरियों से प्रेरित होकर अपने फायदे के लिए ईसाई धर्म में परिवर्तित हो जाते हैं। 19 वीं शताब्दी में प्रकाशित ब्रूअर डिक्शनरी ऑफ फ्रेज़ एंड फैबल ने राइस क्रिश्चियन को “सांसारिक लाभों के लिए ईसाई धर्म में धर्मान्तरित, जैसे कि भारतीयों को चावल की आपूर्ति के रूप में परिभाषित किया।” ईसाई धर्म का जन्म धन से हुआ है, विश्वास से नहीं।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के लिए एक लेख में जेसन वर्डी ने लिखा, “17 वीं सदी के अंत में इंडो-पैसिफिक का दौरा करने वाले एक अंग्रेज खोजकर्ता विलियम डाम्पियर के लेखन में राइस क्रिश्चियन शब्द का उल्लेख है। डाम्पियर ने इंडो-चाइना में उस समय सक्रिय फ्रांसीसी कैथोलिक पुजारियों के बारे में लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा कि उपदेश की जगह चावल की भिक्षा देने से अधिक लोग ईसाई धर्म में परिवर्तित हुए हैं।
उन्होंने आगे कहा, “16 वीं शताब्दी से यूरोपीय समुद्री यात्रा के लिए यूरोपीय यात्राओं के मद्देनजर भौतिक रूप से अवसरवादी धार्मिक अनुयायी इस क्षेत्र में पहुँचे। इन्हें लोग आमतौर पर “राइस क्रिश्चियन” के रूप में जानते थे। इन लोगों का हॉन्गकॉन्ग और अन्य जगहों पर एक लंबा और आमतौर पर अरुचिकर इतिहास है। इस प्रकार इसका मतलब सिर्फ यह नहीं कि लोग सिर्फ चावल का लालच देते थे या सिर्फ चावल तक ही सीमित थे। लेकिन चावल (खाने की सामग्री) ही धर्म परिवर्तन की प्रमुख वजह मानी जाती है।”
राइस बैग कन्वर्ट और राइस क्रिश्चियन
कहा जाता है कि, राइस बैग कन्वर्ट और राइस क्रिश्चियन से संबंधित मामले अक्सर भारत, जापान और चीन जैसे एशियाई देशों से आते हैं। इतिहास में जापान ने धर्म परिवर्तन को खत्म करने के ईसाई मिशनरियों के साथ युद्ध किया, क्योंकि वे उन्हें सांस्कृतिक और साथ ही राजनीतिक खतरा मानते थे।
बदलते दौर में अब ईसाई मिशनरी धर्मांतरण के लिए चावल के थैलों का इस्तेमाल नहीं करते हैं, क्योंकि अब लोगों को अलग-अलग वस्तु का लालच दिया जाता है। मिशन इंडिया, एक ईसाई संगठन है। इस संगठन ने अपने एक परियोजना का नाम राइस बैग प्रोजेक्ट रखा है। इस परियोजना में बच्चों को ‘मिशन इंडिया राइस बैग्स’ सौंपा जाता है।
वहीं कुछ ईसाई संगठनों ने इसके खिलाफ आवाज भी उठाई है, क्योंकि उनका मानना है कि लालच के माध्यम से किया गया रूपांतरण दिल से परिवर्तन नहीं होता, इसका परिवर्तन सिर्फ सतह पर होता है। उनमें से कुछ ने मिशनरियों को निर्देश भी जारी किए हैं ताकि दूसरे संगठन धर्मांतरण के लिए लालच का उपयोग करने से परहेज करें।
एक लेख में कहा गया है, “कंबोडिया के रिलेटिव रिलिजन फ्रीडम ने ईसाई समूहों को राज्य में दुकान स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया है, लेकिन वे गरीबों को उपदेश देते हुए उन्हें ‘राइस क्रिश्चियन’ बनाते हैं।”
एक और लेखक ने उल्लेख किया है, “अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के लिए मैंने इसे भली-भाँति समझाने की कोशिश की, लेकिन गुमराह करने वाले पादरी ने कहा कि क्रॉस-कल्चरल मिनिस्ट्री के लिए उनका दृष्टिकोण राइस राइस क्रिश्चियन के लिए बाध्य था जो अमेरिकन वकेशनलैंड का फ्री ट्रिप का लोगों को लालच देते थे।”
“समुदाय विशेष के भय से यह मकान बिकाऊ है। डर के कारण, यह मकान तत्काल बिकाऊ है।” हर तरफ थोड़े बहुत भाषा के अंतर के साथ बस एक ही बात- “मकान बिकाऊ है।” ऐसे एक दो नहीं बल्कि दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के आग में झुलसी और अब झूठे आरोपों में अपने ही परिवार जनों के लौट आने की आस लिए करीब 150-200 हिन्दुओं के घरों के बाहर या तो ऐसे ही पोस्टर लगे हैं और लोग अपने घरों में दुबके या घर के बाहर पोस्टर और दरवाजे पर ताला लगा के अपना सब कुछ छोड़ के चले गए हैं कि अगर ज़िन्दगी रही तो संपत्ति फिर बना लेंगे।
यह हालात किसी दूर-दराज के गाँव की नहीं बल्कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के नॉर्थ घोंडा का सुभाष मोहल्ला, मधुबन मोहल्ला और मौजपुर के मोहनपुरी क्षेत्र में हिन्दुओं की तीन गलियों का है। इस इलाके में हिन्दू अल्पसंख्यक रहते हैं। जहाँ हिन्दुओं के घरों के बाहर एक लाइन से ऐसे पोस्टर देखने को मिलेंगे। वैसे उस इलाके में पलायन की खबरें भले पहले रिपोर्ट न हुई हों लेकिन वहीं के कई लोगों ने बताया कि जब इन इलाकों में गुर्जर भी नहीं टिक सके तो भला वे हर रोज जान जाने का भय लिए कैसे रहें? वो भी तब जब दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों की आग अभी भी वहाँ रह गए हिन्दुओं को झुलसा रही है।
मामला इतना सीधा भी नहीं है। चलिए ऑपइंडिया आपको ले चलता है उन इलाकों में, जहाँ बस नाम पता चल जाए तो हो सकता है कि किसी झूठे आरोप में फँसा दिया जाए। अगर आप प्रतिष्ठित हैं इलाके में तो चांस ज़्यादा है। ऐसा मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि ऐसे कई स्याह सच से हमें वहीं के स्थानीय लोगों ने रू-ब-रू कराया। इसलिए वीडियो पर समस्याएँ बहुतों ने बताई पर इस दरख़्वास्त के साथ कि नाम न रिकॉर्ड करें तो सही रहेगा!
मोहनपुरी गली नंबर 6 से 8: पलायन को विवश हिन्दू परिवार
सबसे पहले ऑपइंडिया वहीं से शुरू कर रहा है, जहाँ हम पहली सूचना के आधार पर पहुँचे। यह इलाका है- उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर विधानसभा क्षेत्र में मौजपुर का मोहनपुरी मोहल्ला। जहाँ गली नंबर: 6-7-8 है, जिसमें ज़्यादातर रहने वाले परिवार हिन्दू हैं। और जिन गलियों का जिक्र यहाँ नहीं है, उनमें ज़्यादातर दूसरे मजहब वालों का सघन निवास है।
कहने का तात्पर्य यह है कि इस इलाके में हिन्दू घिरे हैं, एक तरह से दूसरे मजहब की आबादी से। और यही वजह भी रही कि दिल्ली दंगों में चौतरफा नुकसान हिन्दुओं को झेलना पड़ा। वहाँ के लोगों ने मुझे उन गेटों को दिखाया, जहाँ से भारी संख्या में दंगाई भीड़ हिन्दुओं के गलियों में प्रवेश करती है और 24-25 फरवरी 2020 को घटित दिल्ली दंगे, यहाँ के हालात और ख़राब कर देते हैं।
मैंने इन गलियों में जब दिल्ली दंगों में लूटे और जला दिए गए “पंडित जी रसोई” नामक ढाबे को देखा तो ठिठक गया। पूछने पर स्थानीय लोगों ने CCTV फुटेज का हवाला देते हुए बताया कि दिल्ली दंगों के दौरान पड़ोस के रुई के दुकान वाले ने ही दंगाई भीड़ को उकसा कर इसमें आग लगाने को कहा। और वहाँ के लोगों ने यह भी बताया कि यही भीड़ रसोई के सामने के एक बड़ी सी गंगा मेडिकल स्टोर को लूट कर आग के हवाले कर देती है।
गंगा मेडिकल स्टोर की जली हुई दरो-दीवार आज भी अपनी कहानी खुद ही बयाँ कर रही थी। इस मकान के गेट पर ही पहला पोस्टर दिखा- “यह मकान बिकाऊ है।” करीब 5 महीने पहले लूटी और जलाई गई दूकान अभी दोबारा नहीं खुल सकी है। बल्कि अब नौबत डर और दहशत से मकान बेचकर कहीं और आशियाना और सुकून ढूँढने की आ गई है। वैसे मुख्य सड़क पर ही चुन कर कई हिन्दुओं की दुकानें, मकान और गाड़ियाँ जला दी गई थीं।
यहाँ से सिलसिला शुरू हुआ तो दोनों तरफ लगभग हर हिन्दू घर के बाहर मकान बेचने के पोस्टर चिपके पड़े हैं। और जिस गेट पर खड़े हो जाइए वही अपनी पीड़ा सुनाने को तैयार ताकि हम उनकी बात देश के उन लोगों तक पहुँचा सकें, जो इन हिन्दू परिवारों को यह एहसास दिलाएँ कि वो अकेले नहीं हैं।
तीनों गलियों में मैंने कई चक्कर लगाए। हर दरवाजे पर चस्पा मकान बेचने के पोस्टर पढ़ता रहा। और जिस डर का सभी जिक्र कर रहे थे, उस ‘सन्नाटे की चीख’ भी महसूस की। लगभग पचासों लोगों से मैंने बातें कीं।
उन सभी से सवाल किए कि क्यों डरे हैं वो इतने? क्यों अपना मकान बेच कर यहाँ से चले जाना चाहते हैं? कौन लोग हैं, जो दिल्ली दंगों के बीत जाने के लगभग 5 महीने बाद तक उन्हें डराते आ रहे हैं? दंगों के दौरान इस मोहल्ले को कितना नुकसान हुआ? उन्हें और उनके परिवार को आखिर क्या-क्या समस्याएँ हैं? और उसके समाधान के लिए उन लोगों ने अब तक क्या किया?
अब आपको सीधे ले चलता हूँ मोहनपुरी के इन तीनों गलियों के इकलौते गली नंबर- 8 स्थित लक्ष्मी-नारायण मंदिर के बाहर खड़े कुछ लोगों के पास जिनके मकानों पर अपना घर बेच देने का पोस्टर और आँखों में डर है कि उन्हें कहीं कुछ हो न जाए। अपने लेवल पर इन सभी ने गलियों के हर प्रवेश द्वार पर गेट लगवा दिया है। कई तो दिन में भी बंद रहती हैं और रात में एक को छोड़कर सभी हिन्दुओं ने अपने पैसे से चौकीदार रख दिया है ताकि वह किसी खतरे के समय उन्हें सीटी बजाकर चौकन्ना कर दे।
लेकिन बात इतनी ही नहीं। लोगों को शिकायतें बहुत सारी हैं। वहाँ मंदिर तो है लेकिन वो उसमें लाउडस्पीकर पर भजन या हनुमान चालीसा नहीं बजा सकते। पूजा के समय आरती के स्वर भी मंदिर की चहारदीवारी में घुटकर रह जाती है। आवाज तेज हुई और पड़ोस के गलियों तक पहुँच गई तो पास के कई लोग आकर धमकी दे जाते हैं कि बंद कर लो, यहाँ यह सब नहीं चलेगा। यह आवाज हमारी कानों तक नहीं आने चाहिए।
जबकि वहाँ रहने वाले हिन्दुओं को हर पहर जब-जब अज़ान या कोई जलसा होता है, मस्जिद से आने वाली लाउडस्पीकर की तेज आवाज में अज़ान सुननी पड़ती है। चारो तरफ मस्जिद पर लाउडस्पीकर तो है ही, आस-पास के सभी ऊँचे दूसरे समुदाय के मकानों पर एक्सटेंशन वायर के जरिए लाउडस्पीकर लगा दिए गए हैं।
वहाँ रहने वाले हिन्दू परिवारों ने ही बताया कि अज़ान से उन्हें उतनी समस्या नहीं है। समस्या तो तब है, जब उनको अपने धार्मिक क्रियाकलापों और उत्सवों से भी वंचित करने की कोशिश हो रही है। दंगों के बाद से यह दबाव और बढ़ा है।
पड़ोस के मुहल्लों से कोई भी आदमी इधर से गुजरते हुए तंज कसता हुआ निकल जाता है कि बना लो मकान, रहना तो उन्हें ही है। छोड़ के जाना होगा। तो कोई घर के बाहर पोस्टर देखकर यही पूछता हुआ निकल जाता है कि यह मकान तो वही ख़रीदेंगे।
स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को यह भी बताया कि गलियों में लड़कियों-महिलाओं का खड़े रहना भी दुश्वार है। कब कोई समुदाय विशेष का झुण्ड तेजी से 4-5 की सवारी के साथ बाइक चलाता हुआ, फिकरे कसता हुआ निकल जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता। कुछ बोल दिया तो झगड़े की नौबत! अब कौन लड़े उनसे? अपना काम-धंधा करें, पढ़े-लिखें या उनसे लड़ें? उनमें से ज़्यादातर को कोई काम तो है नहीं, कोई पंचर बनाता है, कोई अंडे, जूस या ऐसे ही कुछ बेचता हुआ नजर आता है।
कभी दरवाजे तक आकर भी पास के लोग मोहल्ले का कोई झूठे केस में फँसा देने की धमकी देता हुआ निकल जाता है। डर का डोज कम न हो, इसके लिए रोजों के समय इनके उत्पात और बढ़ जाते हैं। ईद के समय तो जान-बूझकर हिन्दू मोहल्लों में हलाल करने वाले ऊँट जैसे जानवर आदि शोर-शराबे के साथ घुमाते हैं और हिन्दू सहम कर सब कुछ सहने को मजबूर।
मैंने पूछा कि क्या यहाँ के विधायक या पार्षद आपसे मिलने आए? तो लोगों ने जो बताया वो और भी चौकाने वाला और भेदभावपूर्ण नजर आया। लोगों ने कहा कि आप आदमी पार्टी के विधायक गोपाल राय पास के मोहल्ले नूर-ए-इलाही में तो आए, वहाँ खाना भी बँटवाया, मजहबी मोहल्लों में सरकारी पैसों से गेट आदि लगवाया लेकिन जब से जीते हैं तभी से, यहाँ तक कि दिल्ली दंगों के बाद भी इधर झाँकने तक नहीं आए।
स्थानीय लोगों का कहना है यहाँ के दूसरे मजहब वाले जिन लोगों को जानते थे, उनमें से कई लोगों को दिल्ली दंगों में ही बहुत बाद में झूठे केस में फँसा चुके हैं। इनके कई परिवारों के कमाने वाले लोग दिल्ली दंगों के बाद कई मामलों में फँसाए जा चुके हैं।
साहिल के पिता परवेज की हत्या के मामले में खुद से पुलिस की मदद के लिए क्राइम ब्रांच गए 16 लोग सिर्फ मोबाइल लोकेशन के आधार पर गिरफ्तार कर जेल में डाल दिए गए हैं। न कोई चार्जशीट फाइल हो रही है और न उन्हें जमानत मिल रही है और यहाँ के समुदाय के लोग हर रोज धमकी देकर जाते हैं कि जैसे उन लोगों को फँसा कर जेल भिजवाया, तुम सब जाओगे, सबका नंबर आएगा।
यह डर आए दिन बढ़ती धमकियों के साथ बढ़ता जा रहा है। हालाँकि, अपनी सुरक्षा के लिए हिन्दुओं ने अपने पैसे से चंदा जमा कर गेट लगा लिया है और वहाँ के एक मुख्य गेट पर रखे चौकीदार को देने के लिए और भी चंदा इकट्ठे करते दिखे।
उन सभी लोगों के परिवार बेहद डरे हैं। कई घरों में तो एकलौते वही कमाने वाले थे, जो किसी न किसी आरोप में फँसा दिए गए हैं। ज़्यादातर उसमें से वही हैं, जिनकी (उनके अनुसार) मजहबी दंगाई भीड़ द्वारा दुकानें लूटी और जलाई गईं। और उल्टा वो सभी एक ऐसे मामले में अभी जेल में हैं, जिसमें उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है। बस एक FIR में चुनकर कई लोगों के नाम लिखा दिए गए। इनमें से कई उस समय दिल्ली में भी नहीं थे और इसका उनके पास प्रमाण भी है।
अब आगे बढ़ने से पहले यहीं संक्षेप में यह भी जान लीजिए कि दिल्ली दंगों के दौरान वह मामला क्या था, किस आधार पर और कौन से 16 लोग पिछले करीब 4 महीनों से जेल में बंद हैं।
साहिल के पिता परवेज 3 बार में 3 तरह से, 2 अलग जगहों पर मरे… और 16 हिन्दुओं के नाम FIR में
दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों में मोहनपुरी इलाके में 25 फरवरी 2020 को एक लाश मिलती है। लाश की पहचान परवेज आलम के रूप में होती है। ये घटना 25 फरवरी के शाम सात बजे की बताया जाता है।
जाफराबाद पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में परवेज की जेब से 13 जिंदा कारतूस (गोलियाँ), एक नोकिया फोन और चाभियों का एक गुच्छा बरामद होने की बात है। इसके बाद यह लिखा गया कि इस व्यक्ति को घोंडा चौक से बाबू राम चौक की तरफ जाने वाली सड़क से घायल अवस्था में अस्पताल में दाखिल कराया गया। जहाँ बाद में उन्हें बताया गया कि उनकी मौत हो गई है।
साहिल के बयानों के अनुसार ही उसके पिता परवेज की हत्या तीन बार में, तीन तरह से दो अलग जगहों पर होती है। और लगभग 1 महीने बाद दर्ज शिकायत में चुनकर कई आरोपितों के नाम बढ़ाए जाते हैं।
वैसे, साहिल ने 25 फरवरी के बाद 19 मार्च 2020 को एक आवेदन पत्र लिखा जो कि भजनपुरा पुलिस स्टेशन के SHO के नाम था। 3 अप्रैल 2020 को साहिल के बयान को पुलिस ने लिखा है। जबकि चश्मदीदों ने ऑपइंडिया को बताया (आरोपितों के परिजन विक्रान्त त्यागी, शशि मिश्रा, चंद्रप्रकाश माहेश्वरी, निशा, श्रीमती चावला) मोहनपुरी इलाके में जो भी होना था, वो सब 24 फरवरी को हो चुका था।
मजहब भीड़ ने ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए त्यागी परिवार के घर में पेट्रोल बम फेंके, मोटर सायकिल को आग लगा दी, और गेट को तोड़ने की कोशिश की। साथ ही मुख्य सड़क पर हिन्दुओं के दुकान, मकान और गाड़ियों को निशाना बनाया गया।
मुख्य सड़क पर इस FIR में नामित 16 आरोपितों में से कइयों के दुकान आदि थे, जिन्हें बुरी तरह से तोड़ा गया, आग लगाई गई। जबकि उनके परिवारों का कहना है कि इलाके के हिन्दू लोगों में डर इतना ज्यादा था कि घरों में दुबके ये लोग ईश्वर से अपने बचने की प्रार्थना कर रहे थे और लगातार पुलिस को कॉल कर रहे थे।
ख़ैर, यह सब उस समय तक खत्म हो चुका था। इसके बाद सीधे 8 अप्रैल 2020 को 16 आरोपितों को पुलिस ने नोटिस भेज कर द्वारका स्थित क्राइम ब्रांच में पूछताछ के लिए बुलाया। इसके बाद, फिर अगले दिन भी इन्हें बुलाया और, चूँकि इन्होंने कुछ अपराध किया नहीं था, तो ये पुलिस के साथ जाँच में सहयोग देने की इच्छा से अपनी गाड़ियों में वहाँ गए। परिजन बताते हैं कि वहाँ से रात को फोन आया कि सारे लोग गिरफ्तार हो गए हैं। तब से आज तक परिजनों को न तो मिलने दिया गया, न बातचीत हुई।
यह पूरी कहानी कि कब क्या हुआ और कैसे लोगों ने अपनी बात रखी और ऑपइंडिया को भी तमाम सबूतों के साथ बताया वह आप इस विस्तृत रिपोर्ट में पढ़ सकते हैं। फिलहाल इसी रिपोर्ट के हवाले से इतना बता दूँ कि साहिल ने दो बार बताया कि हत्या के समय वो अपने पिता के साथ नमाज पढ़ने जा रहा था।
साहिल ने इनमें से एक बयान में रिवॉल्वर के गायब होने की बात की है। पुलिस ने लाश की जेब से तेरह जिंदा कारतूस के होने की बात अपनी प्राथमिकी में दर्ज की है। अब साहिल को यह भी बताना चाहिए कि क्या मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते हुए गोली और पिस्तौल रखना किस हिसाब से सही है? अब यह पूरा मामला जाँच का एक अलग विषय है। उस पर जाँच जरूर होनी चाहिए।
कौन हैं ये कथित रूप से गिरफ्तार हुए 16 लोग?
साहिल ने अपने 3 अप्रैल वाले बयान में कुल 16 लोगों पर आरोप लगाए हैं: सुशील, जयबीर, सुप्रीम, पवन, अतुल चौहान, वीरेन्द्र चौहान, सुरेश पंडित, अमित, नरेश त्यागी, उत्तम त्यागी, दीपांशु, राजपाल त्यागी, अखिल चौधरी, उत्तम मिश्रा, हरिओम मिश्रा, संदीप चावला। हत्या की वारदात 25 फरवरी को हुई, और इन सबको नोटिस 8 अप्रैल को मिले। उसके बाद इन्हें एक दिन द्वारका क्राइम ब्रांच में बुलाया गया और बाद में गिरफ्तारी हुई।
स्थानीय लोगों ने ही यह भी बताया कि जिन लोगों को इस झूठे आरोप में फँसाया गया है, उसमें से ज़्यादातर संघ और विश्व हिन्दू परिषद से जुड़े हैं। उनका यह भी कहना है कि साजिशन इसकी योजना हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए दंगों से प्रभावित कैंप में कट्टरपंथियों द्वारा बनाई गई। अब सच क्या है, यह जाँच का विषय है।
कट्टरपंथियों से डर की कहानी, वहाँ के हिन्दू परिवार की जुबानी:
नॉर्थ घोंडा का मधुबन मोहल्ला
इस मोहल्ले में जयप्रकाश माहेश्वरी और चौहान परिवार का मकान है। इनके घरों के बाहर भी मकान बिकाऊ है, के पोस्टर लगे हैं। जयप्रकाश माहेश्वरी ने ऑपइंडिया से अपने बेटे की उसी उपरोक्त मामले में गिरफ़्तारी का जिक्र करते हुए बताया कि उनके बेटे को झूठे आरोप में फँसा दिया गया है। उन्होंने बताया कि अब हर रोज अज्ञात लोगों द्वारा धमकियाँ मिल रही हैं।
उन्होंने कहा, “अननोन लोग आते हैं और कह कर जाते हैं कि अभी बेटा ही अंदर हुआ है। तुम भी छोड़ के जाओगे।” जयप्रकाश जी का कहना है, “बस मेरा निर्दोष बेटा बाहर आ जाए फिर यह इलाका छोड़कर कुछ भी करके कहीं जी-खा लेंगे। मुझे यहाँ नहीं रहना है अब।”
मधुबन मोहल्ले के ही अतुल और वीरेंद्र चौहान के घर के लोगों से भी ऑपइंडिया ने बात की तो उनका पूरा दर्द बाहर आ गया। परिवार में इकलौते वही लोग कमाने वाले थे। घर में बूढ़े बीमार पिता हैं, जिनके दवा के लिए भी अब पैसे नहीं बचे हैं।
घर में सिर्फ चार महिलाएँ- उन दोनों की पत्नियाँ, उनके बच्चे, बूढ़ी माँ और बीमार बिस्तर पर पड़े पिता हैं। साथ ही रक्षाबंधन पर उनकी बहन भी आई हैं, राखी बाँधने की उम्मीद लिए, जिसके पूरे होने की कोई सम्भावना नहीं नजर आ रही। रिश्तेदारों ने पैसा और मदद देने से मना कर दिया है। महिलाएँ हर रोज अपने परिजनों का इंतजार कर रही हैं। और चाहती हैं कि बस एक बार वो बाहर आ जाएँ तो वो मकान बेचकर चले जाएँगे।
मैं वहाँ खड़ा होकर बात ही कर रहा था तभी उस गली से एक तेज बाइक कमेंट करती हुई गुजर जाती है। मेरे पूछने पर कि क्या ऐसा अक्सर होता है, जवाब मिलता है कि आस-पास के लोग दबाव बना रहे हैं कि हम अपना मकान छोड़कर या बहुत कम दाम पर बेचकर यहाँ से चले जाएँ। उनका कहना है, “हिन्दू भय के मारे खरीदेगा नहीं और मजहबी लोग डरा के फ्री में कब्ज़ा कर लेंगे।”
काफी देर वहाँ रहने के बाद यह मैंने खुद भी महसूस किया कि आस-पास के छतों और गलियों में खड़े मजहबी परिवार का कोई भी व्यक्ति उन्हें आश्वासन देने या उनका डर दूर करने नहीं आया। पास-पड़ोस का तनाव वहाँ साफ़ दिन में ही नजर आ रहा था। जिसके आधार पर वहाँ रात के क्या हालात होंगे, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
नॉर्थ घोंडा सुभाष मोहल्ला
उत्तरी घोंडा के सुभाष मोहल्ले का गली नंबर-तीन। यहाँ भी शुरुआत में ही करीब 5-6 घर हैं, जिन पर- “भय से मकान बिकाऊ है” का पोस्टर चस्पा है। इसी गली में बहुत सारे समुदाय विशेष के लोग भी रहते हैं। जिन्होंने दबाव बनाकर गली के दोनों छोरों पर लोहे का गेट भी नहीं लगाने दिया।
घोंडा में यहीं के पहले मकान त्यागी के घर की बाइक फूँकी गई थी और घर में आग लगाने की कोशिश हुई लेकिन दंगाइयों के अंदर न पहुँच पाने और अंदर से त्यागी परिवार द्वारा पानी फेंककर पेट्रोल बम से लगे आग बुझा देने के कारण बड़ा हादसा टल गया था। लेकिन दंगों के कुछ अवशेष अभी भी शेष हैं। और साथ ही CCTV में मौजूद उस दिन क्या हुआ था, उसके प्रमाण।
इस परिवार के भी दो लोग साहिल के पिता परवेज वाले FIR में नाम होने से जेल में हैं। इस परिवार ने उनके छूट के आने और अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए यहाँ का मकान बेचकर चले जाने का निर्णय कर लिया है।
इसी गली के नुक्कड़ पर एक इलेक्ट्रॉनिक की दुकान भी लूटी और जला दी गई थी। उस मकान पर भी “मकान बिकाऊ है” का पोस्टर लगा है। और पूरी तरह तहस-नहस होने के बाद अब भी दुकान बंद। अब यह लोग यहाँ हर रोज दहशत और डर के साए में नहीं रहना चाहते बल्कि सब कुछ बेचकर कहीं और चले जाना चाहते हैं। जहाँ वह सुरक्षित रह सकें।
यहाँ के लोगों के डर से पलायन करते हिन्दू परिवारों से हाल ही में सांसद मनोज तिवारी भी मिलने गए थे। इलाके में पहुँचकर उन्होंने खुद पीड़ितों का दर्द जाना और मौजूदा हालात का मुआयना कर इलाके के सभी हिन्दू परिवारों को सुरक्षा का आश्वासन देते हुए गली के बाहर एक पिकेट लगाने की बात कही। साथ ही झूठे आरोप में गिरफ्तार 16 लोगों के मामले की जाँच का भी आश्वासन दिया। ऐसा वहाँ के लोगों ने ऑपइंडिया को बताया।
After my visit to the mohanpuri-maujpur, Babarpur vidhansabha in my north east Delhi parliament constituency along with @AjayMahawarBJP .. I have written to @CMODelhi@ArvindKejriwal Ji ? We should work together to bring peace and harmony. pic.twitter.com/PWcOfvzXR4
खास समुदाय के डर और दहशत से हिन्दुओं के पलायन की कहानी को शब्दों में समेटना आसान नहीं है। लोगों की आँखों में जो भय दिखा, उसे कहना और दूर करना भी आसान नहीं। बीजेपी सांसद के वहाँ आने के बाद भी माहौल अभी बदला नहीं है।
इलाके में भय और दहशत बनी हुई है। हमें यह भी नहीं पता कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में पलायन की सोच रहे इन हिन्दू परिवारों को प्रशासन रोक पाएगा या नहीं। उनका डर कम कर पाएगा या नहीं या फिर वहाँ के आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल राय और निगम पार्षद मामले की अनदेखी करते हुए देश की राजधानी दिल्ली में एक और मेवात, कैराना, कश्मीर की नींव तो नहीं रख देंगे!
जो कुछ भी हो रहा है और हिन्दू परिवारों को जो कुछ भी झेलना पड़ रहा है, उसे देखते और महसूस करते हुए एक सवाल जो वहीं के किसी आदमी ने पूछा कि आखिर गंगा-जमुनी तहजीब की जिम्मेदारी क्या हमेशा हिन्दुओं की ही रहेगी? हम कब तक भय के साए में रहेंगे? क्या कभी यह मंजर बदलेगा भी? मेरे पास तो कोई जवाब नहीं था, सोचिए शायद आपके पास हो!