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बारूद और खून की गंध से अपना मनोरंजन करने वाला हत्यारा: चे ग्वेरा, जिसने नेहरू को गिफ्ट किया था सिगार

ला कबाना जेल, क्यूबा। 14 साल का एक बच्चा कराहते हुए लाया जा रहा था। सैनिकों ने उसे पकड़ के जेल में ठूँस दिया। उसकी ग़लती? उसने क्यूबा के सैनिकों द्वारा फायरिंग में मारे गए अपने पिता को बचाने की कोशिश की थी। थोड़ी देर बाद वहाँ एक व्यक्ति आता है। उसके सामने लड़के को लाया गया। उसने उसे घुटनों पर झुकने का आदेश दिया। इसके बाद उसकी गर्दन पर बंदूक है और लड़के की लाश वहाँ लुढ़क गई। इसी व्यक्ति का नाम था- चे ग्वेरा। क्यूबा का चे ग्वेरा।

अर्जेंटीना में जन्मे वामपंथी चे ग्वेरा को आज भी मार्क्सवादी एक नायक की तरह पेश करते हैं। उसे क्रांति का अग्रदूत कहने से लेकर भारतीय क्रांतिकारियों तक से उसकी तुलना करने तक, वामपंथी उसकी तारीफ में कसीदें पढ़ने में कोई कसर नहीं छोड़ते। चे ग्वेरा को क्यूबा में हुई क्रांति का सबसे बड़ा चेहरा बताया जाता है। कहा जाता है कि क्यूबा में अमेरिका के कठपुलती शासक को हटाने के लिए उसने फिदेल कास्त्रो के साथ मिल कर संघर्ष किया था।

ग्वेरा को अधिकतर लोगों ने मिलिट्री यूनिफॉर्म में देखा है और वो लम्बे बूट पहना करता था। जून 1959 में वो भारत यात्रा पर आया था। इस दौरान उसकी मुलाक़ात भारत के तत्कालीन पीएम जवाहरलाल नेहरू से हुई, जिन्हें उसने फिदेल कास्त्रो की तरफ से सिगार का डब्बा उपहार स्वरूप दिया था। अपनी भारत यात्रा के दौरान जब किसी ने उसे कम्युनिस्ट कहा तो उसने कहा कि वो सोशलिस्ट हैं। उसने योग पर चर्चा किया, शीर्षासन भी किया।

ये तो था चे ग्वेरा का परिचय और उसके भारत यात्रा की बात। वही भारत यात्रा, जिसके क्रम में वो कोलकाता भी गया था और रास्ते में उसने कई गायों के फोटो खींचे थे। लेकिन, क्या वो सच में उतना बड़ा क्रन्तिकारी, महानायक या फिर ग़रीबों का मसीहा था- जिस तरह से वामपंथी उसे पेश करते आए हैं? इसका सीधा जवाब है- नहीं। उसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। दूसरे देशों के ग़रीबों को दिवास्वप्न दिखाने के लिए उसका इस्तेमाल किया गया।

उसे एक तरह से कास्त्रो का एक्सेकशनेर-इन-चीफ कहा जाता है, जो लोगों को मारने में विश्वास रखता था। संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली में भी उसने स्वीकार किया था कि हाँ, वो सज़ा-ए-मौत देता है और क्रांति के दुश्मनों के लिए ये ज़रूरी भी है। उस समय जब वह अमेरिका गया था तो लोग उसके विरोध में खड़े थे। एक महिला तो चाकू लेकर ‘हत्यारा’ चिल्लाते हुए उसकी तरफ़ दौड़ी भी थी, जिसे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था।

दरअसल, ग्वेरा के मास्क के पीछे एक हत्यारा ही छिपा था। बोलिवियन जंगल में उसकी मौत होने के 4 दशक बाद ठीक से उसके कारनामों की परत खुली। वो विरोधियों को ‘देशद्रोही’ कहता था, उन्हें ‘कीड़ा’ कहा करता था, फिदेल कास्त्रो को सत्ता देने में और फिर उसे गतिमान रखने में उसके कितनी हत्याएँ की, इसकी कोई गिनती नहीं है। ‘The Hidden Face of Che’ के लेखक जैकबो मशोबर कहते हैं कि उसे एक ऐसा नायक बना दिया गया, जिसे कोई छू भी नहीं सकता और उसके बचाव के लिए पूरी फ़ौज आज भी तैयार रहती है।

2004 में उस पर बनी फिल्म ‘द मोटरसाइकिल डायरीज’ में उसके पीछे के जीवन का महिमामंडन किया गया था, जब वह मेडिकल स्टूडेंट था। इसके बाद उसके चाहने वालों की संख्या और बढ़ गई। टीशर्ट से लेकर बिकनी तक पर उसकी तस्वीरें उकेर कर उसे एक आइकॉन की तरह पेश किया गया। ग्वेरा अपनी डायरी लिखने के लिए जाना जाता था लेकिन उसने अपनी हत्याओं पर शायद ही कहीं ईमानदारी से कुछ लिखा हो।

एक किसान और मिलिट्री नेता एउटैमिओ ग्वेरा को उसने कैसे मारा, ये उसने लिख रखा है। उसकी भाषा देखिए, जो किसी ऐसे साइको की लगती है, जिसे हत्या से प्यार था। वो लिखता है, “मैंने अपने पॉइंट 32 कैलिबर बन्दूक से उसके दिमाग के दाहिने हिस्से पर गोली मारी, जो सीधे उसके दिमाग के बाएँ हिस्से से बाहर निकली। वो कुछ देर कराहता रहा, फिर उसकी मौत हो गई।” ऐसे-ऐसे कितने ही ‘देशद्रोहियों’ को उसने ‘न्याय’ दिया है। यही तरीका था उसका।

कोर्ट, सुनवाई, जाँच- ये सब क्या होता है? एक अन्य किसान अरिस्टीडीओ के बारे में तो वो लिखता है कि उसे मारने से पहले उसने थोड़ी देर जाँच-पड़ताल की और फिर उसकी हत्या कर दी। बकौल ग्वेरा, देशद्रोह तो दूर की बात, गद्दारी का संदेह या आरोप भी बर्दाश्त के लायक नहीं है। क्यूबन सेन्ट्रल बैंक का चेयरमैन ग्वेरा सिगार के शौक के लिए जाना जाता था और बैंक के नोटों पर अपना हस्ताक्षर करता था।

वह जेल में एक बार में कई क़ैदियों को मार डाला करता था या मरवा देता था। उसकी ही टीम का एक सैनिक कहता है कि ग्वेरा अपने हाथ में सिगार लेकर एक दीवार के ऊपर चढ़ जाया करता था, फिर वहीं से सज़ा-ए-मौत की प्रकिया को मजे लेते हुए देखा करता था। एक समय तो उसने कास्त्रो काल के 6 महीने के भीतर 180 कैदियों को मौत के घाट उतार दिया था। एक वकील ने बताया था कि ग्वेरा सुनवाई की बातों को नकारते हुए कहता था कि चीजों को लम्बा मत खींचों क्योंकि हम ‘हत्यारों और अपराधियों’ को सुन रहे हैं, ये क्रांति है।

तभी तो अमेरिका द्वारा ट्रेंड किए गए बोलिवियन सेना के जवानों ने जब उसे खदेड़ा था तो उसने गोली न चलाने की गुहार लगाते हुए कहा था कि वो चे ग्वेरा है और उसे मारने की बजाए ज़िंदा पकड़ने में फायदा है। ज़िंदगी भर हत्या का साम्राज्य चलाने वाले ग्वेरा के पैर में गोली क्या लगी, वो जीवन की गुहार लगाने लगा। अमेरिका तो उसे ज़िंदा ही चाहता था लेकिन बोलिविया को लगता था कि सुनवाई होगी तो उसे और सहानुभूति मिलेगी।

मिट्टी से लथपथ ग्वेरा को वहीं मार गिराया गया। जब वामपंथी आज उसका महिमामंडन करते हैं तो उसके द्वारा अपने ही देश के लोगों के बहाए गए ख़ून के बारे में बात क्यों नहीं करते? ग्वेरा कहता था कि पकड़े गए दुश्मन को हमेशा महसूस होना चाहिए कि उसकी औकात एक जानवर से ज्यादा कुछ नहीं है और उसे मार डाला जाना चाहिए, बिना देर किए। ला कबाना जेल में तो जेलर, जज और जूरी- सब वही था।

सही आँकड़े तो इतिहास के पन्नों में दब से गए लेकिन अकेले उस जेल में उसने 500 को मौत के घाट उतारा था। वो कहता था कि बन्दूक की बारूद और ख़ून की गंध से उसके नाक में चंचल सी मच जाती है। स्पष्ट है, हत्या उसके लिए मनोरंजन था, मज़बूरी नहीं। क्या पत्रकार, क्या व्यापारी और क्या किसान, जो उससे सहमत नहीं होते वो सभी मारे जाते। और हाँ, वो उतना बड़ा गुरिल्ला वॉरियर भी नहीं था क्योंकि क्यूबा के बाद हर जगह उसके दाँव फेल ही हुए।

कोरोना की आड़ में विस्तार कर रहे इस्लामी आतंकी संगठन, लॉकडाउन का फायदा उठा कर रची जा रही साजिश

मजहबी कट्टरता पर नज़र रखने वाले संगठनों ने आशंका जताई है कि बोको हराम जैसे आतंकी संगठन कोरोना वायरस आपदा की आड़ में अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। साथ ही 2014 में सीरिया और इराक में कत्लेआम मचाने वाला दाएश भी कोरोना की आड़ में अपने संगठन का विस्तार कर रहा है। वहाँ भी नॉन-मुस्लिमों को निशाना बनाया जा रहा है। इन हमलों को नरसंहार की श्रेणी में रखा जा सकता है।

फिलहाल देश-दुनिया लॉकडाउन से उबरने की कोशिश में लगी है और लोग चहारदीवारी के भीतर बंद रह कर उकता गए हैं। धीरे-धीरे जनजीवन सामान्य बनाने के लिए सभी प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसी आपदा की स्थिति में भी आतंकी संगठनों को चैन नहीं है और वो अपना विस्तार करने में लगातार लगे हुए हैं। बोको हराम और दाएश जैसे आतंकी संगठनों ने कोरोना को अपने लिए एक मौका के रूप में देखा है।

बोको हराम के सबसे बड़े सरगना अबूबकर शेकाउ ने हाल ही में बयान दिया था कि कोविड-19 या कोरोना वायरस संक्रमण आपदा शैतानों द्वारा लाई गई है और इस वायरस की काट के लिए एक ही एंटी-वायरस है और वो है इस्लाम। कई लोग कह रहे हैं कि कोरोना आपदा के बीच दुनिया के सभी देशों को आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में ढील नहीं देनी चाहिए, नहीं तो ‘न्यू ऑर्डर वर्ल्ड’ में इससे निपटने के लिए कोई रणनीति नहीं होगी।

आतंकी संगठन बोको हराम ख़ुद को एक जिहादी संगठन बताता है। इसके बारे में पहली बार 2003 में चर्चा हुई थी। उसके द्वारा किए गए अपराधों में कुछ भी बाकी नहीं रहा है और इसके धीरे-धीरे अपना ख़ासा प्रसार किया है। कहने को तो ये नॉर्थ-ईस्ट नाइजीरिया में आधारित है लेकिन इसने आसपास के सभी पड़ोसी देशों को अपने आतंक से हलकान कर रखा है। एक बात जानने लायक है कि इसके आतंकी हमलों के पीछे इनका मकसद क्या होता है।

जैसे, जो भी पश्चिमी विचारधारा का समर्थन करते पाए जाते हैं या फिर बोको हराम की आलोचना करते हैं, इसके आतंकी उन लोगों के दरवाजे पर दस्तक देने में देर नहीं करते। ये ज्यादातर ईसाइयों को निशाना बनाता है। बताया जाता है कि इसके पीछे उन्हें काफिर मानने वाली सोच है क्योंकि ईसाई अल्लाह को नहीं मानते। महिलाओं और बच्चों पर हमला करना इसका ट्रेंड रहा है। महिलाओं और लड़कियों का यौन शोषण, उनसे जबरन मजदूरी करवाना और उनका बलात्कार करना इसके लिए आम बात है।

‘इस्लामिक स्टेट वेस्ट अफ्रीका प्रोविंस (ISWAP)’ भी इससे सम्बद्ध आतंकी संगठन ही है। ये बुर्किना फासो, कैमरून, चाड, नाइजर और नाइजीरिया में आतंकी हमले करता है। ज्यादातर हमले नॉन-मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर होते हैं। मजहबी अत्याचार पर नज़र रखने वाले संगठन ‘ओपन डोर्स’ ने बताया है कि बोको हराम अपने संगठन विस्तार के लिए बेचैन है। इसने मार्च 2020 में चाड में हमला बोल कर 98 सैनिकों को मार डाला।

अफ्रीका के सब-सहारा क्षेत्रों में ये अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। वहीं अगर दाएश की बात करें तो उसके अपराधों में हजारों लोगों को मार डालना, महिलाओं और लड़कियों को यौन दासता के लिए मजबूर करना और लड़कों को जबरदस्ती अपने संगठन में भर्ती करना शामिल है। 6 साल पहले किए गए अपराधों के कई पीड़ित अभी तक मिसिंग हैं। अल्पसंख्यक समुदायों की जनसंख्या वहाँ आधी रह गई है। जो बचे हैं, वो डर के जी रहे हैं।

हालाँकि, दाएश के ख़िलाफ़ सफलता जरूर मिली है लेकिन अमेरिका का कहना है कि युद्ध अभी ख़त्म नहीं हुआ है। हाल ही में उसने इराक में कुछ सैनिकों को मार डाला था। विशेषज्ञों का कहना है कि दाएश भी इराक के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। इसने अपने आतंकियों को पश्चिमी देशों और उनके लोगों पर हमले करने को कहा है। पश्चिम की कमजोरियों का फायदा उठाया जा रहा है क्योंकि वो फ़िलहाल कोरोना से निपटने में व्यस्त हैं।

अगर भारत की बात करें तो यहाँ भी जम्मू कश्मीर में आतंकियों की गतिविधि बढ़ गई है। हाल ही में घाटी में सरपंच अजय भारती पंडिता की हत्या कर दी गई। सुरक्षा बलों ने 2 सप्ताह में 22 आतंकियों को मार गिराया है, जिनमें से 6 बड़े सरगना थे। इससे पता चलता है कि यहाँ भी वो कोरोना की आड़ में सक्रियता बढ़ा रहे हैं लेकिन सेना पहले से सख्त थी।

पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ FIR: छुट्टी के दिन सुनवाई करेगी सुप्रीम कोर्ट, फेक न्यूज फैलाने का है आरोप

यौन शोषण आरोपित पत्रकार विनोद दुआ ने सुप्रीम कोर्ट में अपने ख़िलाफ़ हुई एफआईआर (FIR) को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी। अब जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता में एक पीठ इस पर सुनवाई करेगी। सुनवाई के लिए रविवार (जून 14, 2020) का दिन मुक़र्रर किया गया है। विनोद दुआ के ख़िलाफ़ कई एफआईआर (FIR) हैं, जिन्हें रद्द करने के लिए उन्होंने गुहार लगाई थी।

विनोद दुआ ने अपनी याचिका में शिमला में हुए एफआईआर (FIR) को मुख्य मुद्दा बनाया है। शनिवार को 10.47 बजे उन्होंने याचिका दायर की, जिसे उसी दिन दोपहर 2.48 बजे सुनवाई हेतु रजिस्टर कर लिया गया। इसके अगले ही दिन सुनवाई की तारीख़ दे दी गई। सुनवाई करने वाली पीठ में मोहन एम शान्तनागौडर और जस्टिस विनीत सरन भी शामिल होंगे। विनोद दुआ पर आरोप है कि उन्होंने फेक न्यूज़ फैलाया।

साथ ही उन पर अपने यूट्यूब शो ‘द विनोद दुआ शो’ में शांति भंग करने और सांप्रदायिक तनाव को न्योता देने जैसे बयान देने का आरोप है। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत लिबर्टी के लिए याचिका में गुहार लगाई है। इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ दायर की गई एक एफआईआर (FIR) पर रोक लगा दी थी और जाँच रोक दी थी। दुआ ने दावा किया था कि हिमाचल पुलिस ने उनके घर आकर कुमारसैन पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाने को कहा था।

विनोद दुआ के खिलाफ हुई एफआईआर (FIR) की एडिटर्स गिल्ड ने भी निंदा की थी। एडिटर्स गिल्ड के अध्यक्ष शेखर गुप्ता हैं, जिन पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। पत्रकार सुधीर चौधरी ने एडिटर्स गिल्ड को इसके बाद मजाक करार दिया था। गिल्ड ने पश्चिम बंगाल में पत्रकारों के उत्पीड़न पर चुप्पी साध रखी थी। अर्नब गोस्वामी मामले में भी एडिटर्स गिल्ड ने कुछ नहीं कहा था। अर्नब ने इससे इस्तीफे का ऐलान भी किया था।

जहाँ तक ‘मी टू’ के आरोपित रह चुके विनोद दुआ की बात है, उन्होंने सोमवार (जून 1, 2020) को अपने डेली शो में भारतीयों को उसी तरह से हिंसा और दंगा करने के लिए उकसाया था, जैसा कि फिलहाल अमेरिका में हो रहा है। विनोद दुआ ने दुकानों में तोड़फोड़ और लूटपाट करने वालों को ‘मानवाधिकार के धर्मयोद्धा’ की संज्ञा दी थी। उनका कहना था कि अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के खिलाफ अपने आक्रोश को प्रदर्शित करने में विफल रहे।

भाजपा प्रवक्ता नवीन कुमार ने अपनी शिकायत में ‘द विनोद दुआ शो’ के माध्यम से फर्जी खबर फैलाने, अनर्गल बातों व फालतू के तर्कों को वीडियो के माध्यम से लाकर समाज में जहर फैलाने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि दुआ ने प्रधानमंत्री को ‘कागजी शेर’ बताया था। उन्होंने एफआईआर को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया था। उन पर भारत की छवि को ख़राब करने का भी आरोप है।

BJP नेता अपूर्वा सिंह पर अश्लील टिप्पणी: तीसरा आरोपित गिरफ्तार, मो. आसिम पहले से पुलिस के शिकंजे में

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने भाजपा नेता अपूर्वा सिंह को धमकी देने के मामले में दो लोगों को गिरफ़्तार किया है। बिहार से पकड़े गए इन दोनों पर आरोप है कि इन्होने दिल्ली भाजपा आईटी सेल की सह-संयोजक अपूर्वा सिंह की तस्वीरों को आपत्तिजनक रूप में सर्कुलेट किया था। इससे पहले भी इस मामले में 2 की गिरफ़्तारी की जा चुकी है। पुलिस ने बताया कि ताज़ा गिरफ़्तारी को लेकर जाँच चल रही है।

इससे पहले भाजपा युवा नेता अपूर्वा सिंह के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए आपत्तिजनक टिप्पणी को डिलीट करने के साथ ही मोहम्मद आसिम नाम के एक शख्स को गिरफ्तार कर लिया गया था। इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम डिपार्टमेंट ने सोमवार (मई 18, 2020) को दी थी। साइबर क्राइम डिपार्टमेंट ने बताया था कि अपूर्वा सिंह की शिकायत पर ट्विटर से सभी आपत्तिजनक पोस्ट और फेसबुक से 26 पोस्ट को डिलीट कर दिया गया था।

बता दें कि भाजपा नेता अपूर्वा सिंह की एडिट की हुई अश्लील फोटोज भी शेयर किए गए थे। उन्हें निशाना बनाने वाले अधिकतर ट्विटर हैंडल्स मुस्लिमों के थे। बीजेपी आईटी सेल की सह-संयोजक युवा नेता अपूर्वा सिंह ने आरोप लगाया था कि कॉन्ग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी और इस्लामवादी समर्थकों ने उन्हें प्रताड़ित करने के लिए सोशल मीडिया पर उनकी मॉर्फ्ड अश्लील तस्वीरें भी पोस्ट की गई हैं।

भाजपा नेता अपूर्वा सिंह ने ट्विटर पर कहा था कि विपक्षी दलों के समर्थक, विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के लोग किसी और की पोर्नोग्राफिक अश्लील फोटोज़ को उनकी तस्वीर के साथ लगा कर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। अपूर्वा सिंह ने अपनी शिकायत पर कार्यवाही न करने के लिए पुलिस अधिकारियों की निष्क्रियता पर भी निराशा व्यक्त की थी, जो उन्होंने दो महीने पहले दर्ज कराई थी।

नेपाल की संसद में नया विवादित ‘राजनीतिक नक्शा’ बहुमत से पास, भारत ने दी सख्त प्रतिक्रिया

नेपाल की संसद ने देश के विवादित राजनीतिक नक्शे को लेकर पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इस दौरान सदन में 275 में से मौजूद रहे सभी 258 सांसदों ने विधेयक को अपना समर्थन दिया है। इसके साथ ही कहा जा रहा है कि भारत से चल रहे सीमा विवाद पर बातचीत की गुंजाइश को लगभग विराम लग गया है। हालाँकि, भारत ने इस पर अपना सख्त जवाब दिया है।

शनिवार (13 जून, 2020) को नेपाल की संसद में पेश किए गए संविधान संशोधन विधेयक को लेकर हुई वोटिंग के दौरान विपक्षी नेपाली काँन्ग्रेस और जनता समाजवादी पार्टी- नेपाल ने भी विधेयक के पक्ष में मतदान किया।

निचले सदन से पारित होने के बाद अब विधेयक को नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहाँ उसे एक बार फिर इसी प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा। नेशनल असेंबली से विधेयक के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल किया जाएगा।

वहीं नेपाल के इस कदम पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम इस मामले में अपना पक्ष साफ कर चुके हैं। इस तरह का कृत्रिम विस्तार ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है। यह कदम सीमा मुद्दे पर आपसी बातचीत और समझ के खिलाफ भी है।

दरअसल, विवादित नक्शे के खिलाफ शुक्रवार से ही नेपाल की राजधानी काठमांडू में लोग सड़कों पर उतर आए थे और इस राजनीतिक नक्शे के खिलाफ जगह-जगह विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। इस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया था।

यह विरोध प्रदर्शन सैकड़ों लोगों की संख्या की मौजूदगी में ऐसे समय में किए जा रहे थे कि जब पूरा विश्व कोरोना महामारी के संकट से जूझते हुए इससे बचाव करने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहा है।

इन विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने मीडिया के माध्यम से प्रदर्शनकारियों से अपील की थी कि वो किसी भी प्रकार के सरकार विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा ना लें। इससे गलत संदेश जाएगा। सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन कर एकजुटता दिखाई है। इसलिए आम लोगों को भी सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार का साथ देते हुए नक्शा पास होने की खुशी में प्रदर्शन करना चाहिए।

दरअसल, नेपाल ने 18 मई को नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इसमें कालापानी, लिपुलेख और लिमिपियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया था। नेपाल ने अपने नक़्शे में कुल 335 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया था। इसके बाद 22 मई को संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था।

इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल को भारत की संप्रभुता का सम्मान करने की नसीहत दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था, “हम नेपाल सरकार से अपील करते हैं कि वो ऐसे बनावटी कार्टोग्राफिक प्रकाशित करने से बचें। साथ ही भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।”

ये इलाके भारत की सीमा में आते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लोग यह आशंका भी व्यक्त करते नजर आ रहे हैं कि हो सकता है नेपाल यह सब चीन के इशारे पर कर रहा हो।

गौरतलब है कि 8 मई को भारत ने उत्तराखंड राज्य के लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर के लिए सड़क का उद्घाटन किया था, जिसे लेकर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद ही नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था।

‘द वायर’ और CAA विरोधियों का संदिग्ध गठजोड़: भारत के आंतरिक मुद्दों में क्यों हस्तक्षेप कर रहे हैं अमेरिकी नागरिक वरदराजन

संसद के दोनों सदनों में सीएए का बिल पास होने के साथ ही पूरे भारत में योजनाबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन हुए, जो बाद में दंगों में बदल गए। पूरे देश में हिंसा का एक माहौल बना दिया गया। इसे लेकर सरकार के खिलाफ बड़े स्तर का प्रपंच रचा गया। भारत-विरोधी और हिन्दू-विरोधी भावनाएँ भड़काई गई, कभी नारों तो कभी पोस्टरों के जरिए। विदेशी विश्वविद्यालयों में भी विरोध प्रदर्शन कराए गए, ताकि भारत पर डिप्लोमेटिक दबाव बनाया जा सके। सीएए विरोध में ‘द वायर’ के एक गठजोड़ का मामला सामने आया है, जिस पर हम आगे बात करेंगे।

एक अभियान ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट हिंदुत्व (SAH)’ भी विदेशों में लांच किया गया, ताकि भारत में दंगे भड़काए जा सकें। इसका नाम बदल कर अब ‘स्टूडेंट्स अगेंस्ट हिंदुत्व आइडियोलॉजी (SAHI)’ कर दिया गया है। उन्हें संदिग्ध फंड मिलते हैं और साथ ही डेमोक्रैट पार्टी के साथ उनका सम्बन्ध है। इसने एक डेटाबेस तक तैयार कर रखा है, जिसके द्वारा पश्चिम बंगाल के लोगों को सीएए के खिलाफ भड़काया जाता है।

इनके पास कई ऐसी सूचनाओं के स्रोतों की सूची है, जो संदिग्ध हैं। साथ ही एक ऐसे क़ानून के विरोध के लिए प्रपंच रचा जा रहा है, जिसे भारत की संसद के दोनों सदनों ने क़ानूनी तरीके से पास किया है। विश्व भर के विश्वविद्यालयों में प्रदर्शन के लिए उकसाया जा रहा है। उनके डेटाबेस में एक भारतीय पत्रकार का भी नाम है, जो इन प्रदर्शनों को जम कर प्रमोट कर रहा है, जो भारत सरकार के खिलाफ है।

ये हैं ‘द वायर’ के संस्थापक-संपादक सिद्धार्थ वरदराजन, जो भारतीय नागरिक भी नहीं हैं लेकिन हिंदुत्व के खिलाफ प्रोपेगंडा चलाने में और फेक न्यूज़ फैलाने में इनका कोई सानी नहीं है। इसमें एक संगठन ‘आजाद इंडिया कलेक्टिव’ का नाम है, जो सीएए विरोधी संगठनों में से एक है। एआईसी ने ही SAHI के द्वारा सीएए विरोधी डेटाबेस मेन्टेन किया हुआ है। इसमें प्रदर्शन से जुड़े लेख और याचिकाओं को लिस्ट किया गया है।

यहीं से हमें उनका इंस्टाग्राम अकाउंट मिला, जहाँ लोगों को विरोध प्रदर्शन के लिए भड़काया जा रहा था। यहाँ पता चला कि उन्होंने ‘होली अगेंस्ट हिंदुत्व’ का भी अभियान चलाया था। एआईसी हर उस विदेशी संगठन के साथ साझेदारी बनाने में लगा हुआ था, जो भारत पर दबाव बना कर सीएए को वापस लेने को कहें। भारतीय लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए ये सारे कुचक्र रचे जा रहे थे। इसे जैनाब फिरदौसी और स्पर्श अग्रवाल नामक दो लोगों द्वारा स्थापित किया गया था।

‘आज़ाद इंडिया कलेक्टिव’का इंस्टाग्राम पेज

शिकागो के साप्ताहिक अख़बार ‘हाईड पार्क हेराल्ड’ के अनुसार, एआईसी के लिए किए गए उनके कार्यों को अमेरिकी कॉन्ग्रेस की लाइब्रेरी में भारत से जुड़े आर्काइव्स में रखा जाएगा। उन्होंने अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए वामपंथी बर्नी सैंडर्स का समर्थन किया था। हालाँकि, सैंडर्स को जो बिडेन से मात मिली और बिडेन डेमोक्रेट्स के उम्मीदवार बने, इससे ये तो पता चलता ही है कि इस संगठन का फार-लेफ्ट ग्रुप से सम्बन्ध काफ़ी अच्छे हैं।

जैनाब और स्पर्श का हमें एक यूट्यूब इंटरव्यू मिला, जो उन्होंने ‘द मेश’ नामक चैनल को दिया था। इंटरव्यू में दोनों ने स्वीकार किया कि वो दोनों तो बस एआईसी का चेहरा हैं लेकिन कई ऐसे लोग भी हैं जो इस अभियान में बढ़-चढ़ कर मदद कर रहे हैं। उन्होंने कबूल किया कि वो भारत में सीएए के विरोध में हुए कई आन्दोलनों का हिस्सा रह चुके हैं। इंटरव्यू में ये भी खुलासा हुआ कि उन्होंने सीएए विरोध को लेकर ‘द वायर’ के साथ गठजोड़ किया था।

होली अगेंस्ट हिंदुत्व का अभियान चलाते हुए प्रपंची

उन दोनों ने बताया कि वो लोग इस बिल को लोकसभा में टेबल किए जाने से लेकर वर्तमान समय तक हुए प्रदर्शनों के बारे में पूरी टाइमलाइन तैयार करना चाह रहे थे। उन्होंने कई अन्य भारतीय संगठनों के साथ गठजोड़ की बात स्वीकार की और कहा कि उनके पास वेबसाइट पर लगाने के लिए कई ‘प्रबुद्ध’ लोग विरोध प्रदर्शन की तस्वीरें भेजते थे। आप सोचिए, ‘द वायर’ जैसा मीडिया संस्थान एक संगठन के साथ गठजोड़ करता है और वो भी लोकतान्त्रिक रूप से पारित क़ानून के विरोध के लिए।

यूट्यूब पर जैनाब और स्पर्श का इंटरव्यू

हमें तो ये भी नहीं पता कि अमेरिकी नागरिक वरदराजन ख़ुद ये सब कर रहे हैं या अमेरिका में बैठा राजनीतिक आकाओं से उन्हें इंस्ट्रक्शंस मिल रहे हैं। भारत के लिए विदेशी हस्तक्षेप चिंता का विषय है और वो भी आंतरिक मुद्दों में। नार्थ-ईस्ट को भारत से अलग करने की धमकी देने वाला और महात्मा गाँधी को फासिस्ट बताने वाला शरजील इमाम ‘द वायर’ में लेख लिखता था। दिल्ली दंगों को लेकर भी इसने फेक न्यूज़ फैलाई थी।

नए नक्शे के खिलाफ काठमांडू की सड़कों पर उतरे लोग, नेपाल सरकार के खिलाफ जमकर किया विरोध प्रदर्शन

राजधानी काठमांडू सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में नेपाल के नए मैप के खिलाफ प्रदर्शन चल रहे हैं। कोरोना संक्रमण से निपटने में नाकामी, गरीबों की मदद करने में सरकार की असफलता और भ्रष्टाचार को लेकर नेपाल की जनता लॉकडाउन तोड़कर भी सरकार के खिलाफ सड़कों पर निकल रही है।

नेपाल की ओर से जारी किए गए नए नक्शे को लेकर विवाद थमता हुआ दिखाई नहीं दे रहा है। एक तरफ तो नए नक्शे को लेकर भारत और नेपाल के संबंधों में तल्खी बनी हुई है, दूसरी ओर अब नेपाल में भी लोग इसके खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में किया जा रहा है कि जब कोरोना का संकट पूरे विश्व में जारी है।

शनिवार (13 जून, 2020) को नेपाल की राजधानी काठमांडू में बड़ी संख्या में लोग नक्शे के खिलाफ जगह-जगह सड़कों पर उतर आए और सुबह से ही सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

वहीं आज नेपाली संसद में नए नक्‍शे के प्रस्‍ताव पर वोटिंग हुई। इससे पहले भी शुक्रवार (12 जून, 2020) को भी कई प्रदर्शनकारी सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे थे। इसके बाद नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने मीडिया के माध्यम से लोगों से प्रदर्शन रोकने की अपील की थी। साथ ही निवेदन के साथ विदेश मंत्री ने लोगों से कहा था कि वो किसी भी प्रकार के सरकार विरोधी प्रदर्शन में हिस्सा ना लें। इससे गलत संदेश जाएगा।

प्रदीप ग्यावली ने कहा कि हम अपनी जमीन को वापस नक्शे में शामिल कर एक मिसाल कायम करने जा रहे हैं। सभी राजनीतिक दलों ने भी इसका समर्थन कर एकजुटता दिखाई है। इसलिए आम लोगों को भी सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार का साथ देते हुए नक्शा पास होने की खुशी में प्रदर्शन करना चाहिए।

दरअसल, नेपाल ने 18 मई को नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था। इसमें कालापानी, लिपुलेख और लिमिपियाधुरा को अपने क्षेत्र के रूप में दिखाया था। नेपाल ने अपने नक़्शे में कुल 335 वर्ग किलोमीटर के इलाके को शामिल किया था। इसके बाद 22 मई को संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव पेश किया था।

इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने नेपाल को भारत की संप्रभुता का सम्मान करने की नसीहत दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था, “हम नेपाल सरकार से अपील करते हैं कि वो ऐसे बनावटी कार्टोग्राफिक प्रकाशित करने से बचें। साथ ही भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करें।”

ये इलाके भारत की सीमा में आते हैं। वहीं सोशल मीडिया पर लोग यह आशंका भी व्यक्त करते नजर आ रहे हैं कि हो सकता है नेपाल यह सब चीन के इशारे पर कर रहा हो।

गौरतलब है कि 8 मई को भारत ने उत्तराखंड राज्य के लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर के लिए सड़क का उद्घाटन किया था, जिसे लेकर नेपाल ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद ही नेपाल ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था।

कोरोना के 77% नए मामले महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु से, दिल्ली की मृत्यु दर राष्ट्रीय औसत से 10 गुना ज्यादा: अध्ययन

वुहान से फैले कोरोना वायरस महामारी ने मार्च महीने से भारत में अपना पाँव पसारना शुरू कर दिया था। दिन पर दिन कोरोना वायरस की वजह से महानगरों की स्थिति काफी नाजुक होती जा रही हैं। वहीं भारत में फैले कोरोना वायरस ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए 3 लाख का आँकड़ा पार कर लिया है।

शनिवार (13 जून, 2020) को 11,458 संक्रमितों का मामला सामने आया हैं। ये एक दिन के अंदर सामने आई अब तक की सबसे बड़ी संख्या है। जबकि मौतों के आँकड़ो में भी 386 की बढ़ोतरी के साथ अब कुल मरने वालों का संख्या 8,884 हो गया है।

दुनियाभर में फैले इस महामारी के आँकड़ो में भारत अब चौथे स्थान पर पहुँच गया है। जहाँ कोरोना संक्रमितों का आँकड़ा अन्य देशों के मुकाबले दुगुना या तिगुना ज्यादा है। विशेषज्ञों का दावा है कि भारत कोरोना संक्रमितों के मामले में पहले स्थान पर पहुँचने में अभी समय है। वर्तमान में कुल 3,08,993 मामले भारत में रजिस्टर्ड हैं। जिनमें 1,54,000 से अधिक लगभग 50 प्रतिशत मामले इस संक्रमण से ठीक भी हो चुके हैं।

प्रोफेसर शमिका रवि द्वारा ट्विटर पर पब्लिश किए गए अध्ययन के अनुसार, देश में लगभग 77 प्रतिशत नए कोरोनोवायरस मामलों को महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली कोविड-19 हॉटस्पॉट नगरों में देखा जा सकता है। उन्होंने दावा किया है कि देश में कोरोनोवायरस मामले 3.1 प्रतिशत की वृद्धि दर के साथ बढ़ रहे हैं, जो 23 दिनों की अवधि में मामलों को दोगुना होने का संकेत देता है।

रवि ने यह बताने के लिए अपने अध्ययन के ग्राफ़ को साझा किया। जो यह दिखाता है कि कोरोनोवायरस के मामले देश भर में फैल गए हैं, लेकिन महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली जैसे हॉटस्पॉट संक्रमण के प्रमुख इलाके बने हुए हैं। उनके ट्वीट्स में संलग्न ग्राफ़ में, देखा जा सकता है कि महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली को छोड़कर देश भर के बाकी राज्यों में की तुलना में यहाँ मामले कितने हैं।

दूसरी ओर महाराष्ट्र, दिल्ली और तमिलनाडु के कोरोनावायरस हॉटस्पॉट में संक्रमण का बढ़ता प्रकोप यह भी दर्शाता है कि इन राज्यों में कोरोनोवायरस के मामलें जल्द ही चरम सीमा को पर कर जाएँगे।

भारत के कुल मृत्यु दर का 10 गुना ज्यादा दिल्ली की मृत्यु दर

वहीं दिल्ली में बढ़ते कोरोनोवायरस के मामलों के बारे में सबसे अधिक जानकारी देने वाले आँकड़े, संक्रमण के रोगियों की मृत्यु दर से पता चलता है कि दिल्ली में मृत्यु दर पूरे भारत के मृत्यु दर का 10 गुना है। जिसको देखते हुए प्रोफेसर शामिका रवि ने आगाह किया है कि दिल्ली में लगातार मृत्यु दर अभी भी बढ़ता जा रहा है।

ग्राफ के अनुसार प्रति मिलियन संक्रमण के मामले तुलना में प्रति मिलियन टेस्ट पर महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली और गुजरात ऐसे बाहरी राज्य बने हुए हैं, जिन्हें अपनी परीक्षण क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता है, जो कि उनके मौजूदा बढ़ते मामलों को देखते हुए अति आवश्यक है।

भारत में कोरोना वायरस संक्रिमतों के आँकड़े चरम सीमा तक पहुँचने के कितने दूर है

भारत में अधिकांश राज्य अपने संक्रमण के चरम सीमा की ओर बढ़ रहे हैं, कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने यह संकेत दिए हैं कि उनके यहाँ संक्रमण के मामले अभी भी बहुत कम है। 3 जून से 7 जून और 8 जून से 12 जून के बीच की अवधि में कोरोनोवायरस के मामलों की वृद्धि की तुलना करते हुए, एक समय में नए मामलों की दर में गिरावट से पता चलता है कि कुछ राज्य जल्द ही संक्रमण के चरम सीमा तक पहुँच जाएँगे।

हालाँकि, उत्तराखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने अपने पुराने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए संक्रमण के नए मामलों को संख्या में काफी बढ़ोतरी की है।

जम्मू और कश्मीर और कर्नाटक दो ऐसे राज्य है। जिन्होंने 3 जून से 7 जून और 8 जून से 12 जून के बीच की अवधि में बढ़ते संक्रमण दर को कम किया है। जिसका अर्थ है कि इन राज्यों में कोरोनोवायरस का प्रकोप अपनी चरम सीमा पर पहुँचने के काफी दूर हो चुका है।

‘अंकल जी, सड़ा हुआ सेब भी..’: महुआ मोइत्रा ने राज्यपाल धनखड़ पर की व्यक्तिगत टिप्पणी, कहा- वो BJP के तीर चला रहे

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को बुरा-भला कहा है। उन्होंने राज्यपाल से बहस की। शनिवार (जून 12, 2020) को महुआ ने राज्यपाल पर ‘सड़ा हुआ सेब’ वाला कमेंट किया, जिसके बाद दोनों के बीच शब्दों का वाकयुद्ध शुरू हो गया। इस दौरान महुआ ने सीमाएँ लाँघी। राज्यपाल ने कहा कि महुआ अपनी पार्टी की मुखिया ममता बनर्जी की चहेती बनने के लिए ये सब कर रही हैं।

ये सब शुरू हुआ एक वायरल वीडियो को लेकर। उस वीडियो में कुछ लाशों को दिखाया गया था। कोलकाता पुलिस ने लिखा कि ये कोरोना संक्रमित मरीजों की लाशें नहीं थीं। उसने बताया कि ये ऐसी लाशें थीं, जिनका कोई रिश्तेदारों या परिवार ने क्लेम नहीं किया और उन्हें ही हॉस्पिटल से ले जाया जा रहा था। कोलकाता पुलिस ने उन्हें कोविड-19 के मरीजों की लाशें बताने वाले के ख़िलाफ़ क़ानूनी एक्शन की बात भी कही।

इस घटना को लेकर राज्यपाल ने कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए इसे शर्मनाक करार दिया था। महुआ ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ममता बनर्जी सरकार पर ‘भाजपा के तीर’ चला रहे हैं और वो भी ऐसे समय में जब राज्य कोरोना वायरस, प्रवासी श्रमिक समस्या और अम्फान तूफ़ान का एक साथ सामना कर रहा है। महुआ मोइत्रा ने इसके बाद कहा कि सड़ा हुआ सेब कभी पेड़ से दूर नहीं गिरता है। कइयों ने इसे अपमानजनक टिप्पणी बताया।

इसके बाद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने महुआ को याद दिलाया कि उन्होंने कभी अपने ही राज्य सरकार की पंचायती योजनाओं में भ्रष्टाचार को लेकर ऊँगली उठाई थी। उन्होंने लिखा कि पंचायती विभाग पर निशाना साधने वाली महुआ अब उन पर हमले कर के ममता बनर्जी का विश्वास जीतना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि ये लाचारी वाली स्थिति है, जिसमें महुआ जैसे कई योग्य नेता फँसे हुए हैं।

इसके बाद महुआ ने राज्यपाल को ‘अंकल जी’ कहते हुए 3 बिंदु गिनाए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा इस आधार पर अपने नेताओं को प्रमोट करती है कि किसके हाथ कितने ख़ून से रंगे हुए हैं। साथ ही उन्होंने राज्यपाल पर व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि आपका वकालत वाला करियर अच्छा नहीं रहा है, इसीलिए कम से कम राजभवन की प्रतिष्ठा तो बचा कर रखिए। अंत में उन्होंने कहा कि आप राजस्थान के अगले चुनाव में लड़ सकते हैं, इसके लिए फिट रहिए।

बता दें कि कुछ दिनों पहले सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि कई पंचायतें 60% का बजट भी खर्च करने में अक्षम रही है। इसके बाद राज्य के पंचायत मंत्री और उनकी ही पार्टी के नेता सुब्रत मुखर्जी ने मोइत्रा के आरोपों को नकार दिया था। इसी की याद दिलाते हुए राज्यपाल ने बंगाल के ‘कट मनी’ की बात की, जो तृणमूल वाले घूस लेते हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल में कोरोना के कारण स्थिति पहले ही बदतर है।

जुलाई 2019 में ZEE मीडिया कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता और सांसद महुआ मोइत्रा के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि का मुक़दमा दायर किया था। मीडिया हाउस ने खुद को कथित तौर पर ‘चोर’ और ‘पेड न्यूज़’ कहने पर यह कदम उठाया था। आरोप था कि मोइत्रा ने ज़ी न्यूज़ के मालिक को चोर और चैनल से जुड़े लोगों को ‘अशिक्षित’ और ‘बुड़बक’ (बेवकूफ़) कहा था।

‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ दंगाइयों ने गुजराती रेस्टॉरेंट किया तबाह, भारतीयों को कहा गन्दगी: महिला ने प्रोटेस्ट के समर्थकों से पूछे सवाल

अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद वहाँ ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ नाम का प्रोटेस्ट शुरू हुआ, जिसके कारण वहाँ भीषण दंगे हुए। इन दंगों की आग यूरोप में भी कई देशों तक पहुँची। ब्रिटेन में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। अब यूके में रह रही एक भारतीय महिला ने भारत के उन लोगों पर निशाना साधा है, जो ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने लंदन में भारतीय रेस्टॉरेंट को निशाना बनाया, हमला किया।

मूल रूप से गुजरात की दीक्षा ने बताया कि गुजराती समुदाय यूके में एक अल्पसंख्यक समुदाय है, यहाँ तक कि इसकी जनसंख्या वहाँ रह रहे ब्लैक लोगों से भी कम है। उन्होंने जानकारी दी कि इन सबके बावजूद ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ के प्रदर्शनकारियों ने लंदन के वेम्ब्ले के ईलिंग रोड में स्थित मीरा नाम की एक भारतीय महिला के रेस्टॉरेंट पर हमला बोल दिया। दीक्षा ने कहा, “भारतीयो! तुम ब्लैक लाइव्स मैटर्स को प्रमोट करते रहो।“

इस दौरान उन्होंने क्षतिग्रस्त रेस्टॉरेंट की तस्वीरें भी शेयर कीं, जिसमें चीजें इधर-उधर अस्त-व्यवस्त सी बिखरी दिख रही हैं। रेस्टॉरेंट में ऐसी तबाही मचाई गई कि सारे फर्नीचर तोड़ डाले गए और चीजों के साथ उठापटक की गई। तस्वीरों से पता चलता है कि बर्तनों को भी उठा कर इधर-उधर फेंका गया। अंदर किचन तक में जाकर दंगाइयों ने उत्पाद मचाया। चूल्हे तक को नहीं बक्शा गया। दीक्षा ने इन तस्वीरों को शेयर किया।

साथ ही उन्होंने एक अन्य तस्वीर शेयर की, जिसमें दंगाइयों ने भारत के लोगों को गाली दी है। उक्त रेस्टॉरेंट की दीवार पर दंगाइयों ने लिखा- “Fucking Indian Scum”, अर्थात भारतीयों को नीच और गन्दगी बताया गया। इसके बाद दीक्षा ने ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ का विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को दोहरे रवैये वाला रेसिस्ट बताया। उन्होंने कहा कि दूसरे अल्पसंख्यकों को लूटना उनके सही चरित्र को दर्शाता है।

दीक्षा ने रेस्टॉरेंट्स में किए गए हमले के बाद की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि ये लोग प्रदर्शनकारी नहीं हैं बल्कि लुटेरे हैं, तबाही मचाने वाले हैं। लंदन में प्रदर्शन हिंसक हो चुका है, जिसके बाद मेट्रोपोलिटन पुलिस कमांडर बस जावीद ने चेताया है कि इस बार पिछले सप्ताह की तरह हिंसा नहीं होनी चाहिए। यहाँ प्रोटेस्ट के साथ-साथ ‘काउंटर प्रोटेस्ट’ भी चल रहा है। ब्रिटेन में अब तक 200 प्रदर्शन हो चुके हैं और 130 को गिरफ़्तार किया गया है।

हाल ही में कंगना रनौत ने भी उन सेलेब्रिटीज को सवालों के घेरे में लिया था, जो पालघर में साधुओं की हत्या पर तो चुप थे लेकिन ‘ब्लैक लाइव्स मैटर्स’ पर खुल कर बोल रहे हैं। उन्होंने यह भी बोला था कि कैसे एक तरफ ये लोग ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ जैसे आंदोलनों के समर्थन में खड़े होते हैं, वहीं दूसरी ओर यही लोग काले को गोरा बनाने वाली क्रीम का समर्थन भी करते हैं। कंगना ने पूछा था कि क्यों मशहूर हस्तियाँ, राजनेता अपने आस-पास हुए घिनोंने अपराधों की निंदा नहीं करते है?