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‘तारीफ मेरे ईमान के लिए खतरनाक, दुआ करें कि अल्लाह मेरी कमियों को नजरअंदाज करें’

तबलीगी जमात पर टिप्पणी कर सुर्खियों में आईं दबंग गर्ल बबीता फोगाट द्वारा जायरा वसीम का नाम लेने के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस शुरू हो गई है। इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व एक्ट्रेस जायरा ने लोगों से अपनी तारीफ न करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि यह उनके लिए सही नहीं है और उनके ईमान के लिए खतरनाक भी है।

जायरा वसीम ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “अस्सलाम वालेकुम। मैं विनम्रता के साथ यह स्वीकार करती हूँ कि सभी लोग मुझे प्यार करते हैं। साथ ही मैं इस बात पर ज्यादा जोर नहीं दे सकती कि मुझे मिल रही तारीफ कैसे मेरे लिए संतोषजनक नहीं है और कैसे यह मेरे लिए बहुत बड़ी परीक्षा है और कैसे यह मेरे ईमान के लिए खतरनाक है। मैं इतनी बड़ी धार्मिक नहीं हूँ कि लोगों को प्रभावित कर सकूँ?”

जायरा ने आगे लिखा है, “मैं सभी से आग्रह करती हूँ कि किसी भी तरह से मेरी तारीफ न करें। यह दुआ करें कि अल्लाह मेरी कमियों को नजरअंदाज करें, जो अनगिनत हैं। मेरे दिल को दया की रोशनी और ईमान के साथ भर दे। मेरे इरादे को सुधार दे और मुझे वह ज्ञान दे, जो फायदेमंद हो। एक जुबान और दिल दे, जो हमेशा उसे याद रखे और अक्सर उसके पास ही पश्चाताप के लिए जाऊँ। मुझे केवल उसके लिए धार्मिक काम करने की अनुमति दे। मुझे स्थिर रहकर मुस्लिम के रूप में जीने और मरने का मौका दे। (पूरी तरह उसे समर्पित कर दूँ)।”

माना जा रहा है कि यह पोस्ट दबंग गर्ल बबीता फोगाट के बयान के जवाब में आया है। बबीता ने कहा था कि लोग उन्हें जायरा न समझें, जो एक धमकी से घर बैठ जाए। बबीता ने कहा था कि मुझे लगातार सोशल मीडिया पर धमकियाँ मिल रही हैं, लेकिन मैं इनसे डरने वाली नहीं। मैं हमेशा सच के साथ हूँ। देश के लिए लड़ीं हूँ और देश के लिए ही लड़ूँगी। उन्होंने अपने उस ट्वीट पर भी कायम रहने की बात कही थी, जिसमें तबलीगी जमात को कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

ज्ञात हो कि सोशल मीडिया पर बबीता का ट्वीट आने के बाद मीडिया गिरोह के लोग उनपर अचानक हमलावर हो गए। लगातार उनके ख़िलाफ़ रिपोर्टिंग हुई और उनपर आरोप लगा दिए गए कि वे नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। हकीकत ये है कि अपने ट्वीट में उन्होंने सिर्फ़ जमातियों के बारे में टिप्पणी की है, जिनके कारण हर राज्य में कोरोना तेजी से फैला।

वाह! केजरीवाल सरकार अच्छा खाना खिलाते हो… अब जहाँगीरपुरी के Video से घिरी AAP सरकार

देश इस समय कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रहा है। इससे बचने का एकमात्र उपाय है- सोशल डिस्टेंसिंग। इसके लिए सरकार की तरफ से लगातार अपील की जा रही है। पश्चिमी दिल्ली से बीजेपी सांसद प्रवेश वर्मा ने एक वीडियो शेयर करते हुए केजरीवाल सरकार की व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं।

ये वीडियो दिल्ली के जहाँगीरपुरी का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि खाने के लिए काफी संख्या में लोग एक जगह पर इकट्ठे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का कोई पालन नहीं हो रहा है। प्रवेश वर्मा ने सीएम केजरीवाल को टैग करते हुए वीडियो ट्विटर पर शेयर किया। उन्होंने लिखा, “दिल्ली को इस तरह खाना खिला रहे हैं आप (AAP)। ये वीडियो आया है जहाँगीर पुरी से। सामाजिक दूरी ताक पर, कितना निराशाजनक है इस तरह से लोगों को खाने के लिए झुंड में देखना। लोग मजबूर हैं और दिल्ली सरकार का प्रशासन क्या कर रहा है ये विज्ञापन से बाहर की सच्चाई।”

इसके अलावा दिल्ली बीजेपी ने पाने ट्विटर हैंडल से ये वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है, “मुख्यमंत्री जी, कोरोना महामारी के समय जहाँ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना बेहद महत्वपूर्ण है, जहाँगीरपुरी में लोगों का एक साथ एकत्रित होना बहुत चिंताजनक है। कृप्या, प्रचार-प्रसार से समय निकालकर इस ओर भी अपना ध्यान केंद्रित करें।”

जहाँगीरपुरी Video पर यूजर्स की प्रतिक्रिया

इस वीडियो के सामने आने के बाद ट्विटर यूजर्स ने भी इस पर आक्रोश जाहिर करते हुए कड़ी आपत्ति जताई। एक यूजर ने लिखा, “केजरीवाल जी ये क्या है? पहले शाहीन बाग, फिर आनंद विहार, फिर निजामुद्दीन कांड अब ये नया ड्रामा ? दिल्ली को सेफ रहने दो लॉकडाउन-2 चल रहा है।”

वहीं प्रवेश वर्मा के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एक यूजर ने लिखा, “सही कह रहे हो वर्मा जी आप ने तो हद ही कर रखी है। आप का मतलब (AAP) है कुछ और मत समझ लीजिएगा।”

प्रियांशु सिंह नाम के एक यूजर ने लिखा, “वाह केजरीवाल सरकार अच्छा खाना खिलाए हो खिलाओ। खिलाओ अगली सरकार में पब्लिक तुम्हें खिलाएगी, वह भी घास। ना गिर गई यह सरकार तो देखना।”

प्रियांशु ने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “अगर यहाँ मोदी सरकार होती। बीजेपी सरकार होती तो आज दिल्ली का नजारा ही कुछ अलग होता। दिल्ली की पब्लिक आज भूख से ना मर रही होती, ना ही जमाती इतना नुकसान करते देश का। अगली बार मोदी सरकार। अगली बार बीजेपी सरकार। दिल्ली में होगा बीजेपी राज। हर-हर मोदी, घर-घर मोदी मोदी है तो देश है। मोदी सरकार होगी तभी दिल्ली सुरक्षित होगी।”

आशीष खन्ना नाम के एक यूजर ने इसे केजरीवाल की सोची-समझी साजिश करार दिया।

एक ने लिखा, “भैया ये चाहते ही नही हैं कोरोना मुक्त हो भारत। रोज टीवी पर आकर ज्ञान देने से कोरोना मुक्त नहीं होगा भारत। अगर इनके हाथ में रहा तो 14000 से कब 150000 हो जाएँगे पता नही चलेगा। आप बीजेपी आलाकमान से बात कर दिल्ली को केंद्र सरकार के हवाले कर करवाई करे तब जा कर कोरोना मुक्त होगा भारत।”

एक अन्य यूजर का कहना है, “दिल्ली प्रशासन फेल हो चुका है। इनके विधायक और अवैतनिक वालंटियर सारा राशन गटक रहे हैं जरूरतमंद लाइन में ही खड़ा रह जाता है। ऐसी नीचता भरा काम इनके विधायक ही कर सकते है। जब राशन डीलरों से विधायक मंथली लेंगे फिर भला वह राशन क्यों नहीं ब्लैक करेंगे? सच्चाई यही है।” वहीं अनुराग सिंह चंदेल का कहना है कि केजरीवेल ने दिल्ली का सत्यानाश कर दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रवेश वर्मा ने एक विडियो शेयर किया था, जिसने केजरीवाल के दावों की पोल खोल कर रख दी थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि गरीबों को खिचड़ी के नाम पर उल्टी जैसा दिखने वाला पीला पानी परोसा जा रहा है। वर्मा ने कहा था कि ये भोजन कीड़ों से भी भरा हुआ है।

‘मस्जिद के सदर ने उकसाया’: देवास में सफाईकर्मियों पर कुल्हाड़ी से हमला, आदिल, हबीब और गोप खान गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के देवास जिले के खातेगाँव में सफाईकर्मियों पर कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला किया गया है। मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। एक आरोपित फरार है। खातेगाँव पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक सज्जन सिंह मुकाती ने बताया कि आशीष राजौर की शिकायत पर पुलिस ने आदिल खान, आदिल के पिता हबीब खान और गोप खान को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत गिरफ्तार किया है। आदिल का भाई आरिफ खान फिलहाल फरार है।

हमले में तीन सफाईकर्मी घायल हुए। एक सफाईकर्मी को गंभीर अवस्था में देवास रेफर किया। मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुलिस पूछताछ में आदिल ने चाैंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया, “जामा मस्जिद के सदर गाेप खान ने हमले के लिए उकसाया था और कहा था कि जब से लाॅकडाउन चालू हुआ है, तब से ये लाेग हम नमाजियाें काे परेशान कर रहे हैं। तुम लाेग उन्हें माराे। इसी बहकावे में आकर हमने इस घटना को अंजाम दिया।”

आशीष ने पुलिस को बताया कि वह, दीपक कलोसिया और चंकी कोयला मोहल्ला में नाली की सफाई कर रहे थे। इसी दौरान आदिल ने यह कहते हुए उन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया कि नाली साफ करने से बहुत बदबू आती है। तीनों सफाईकर्मी वहाँ से भागे तो आदिल ने उनका पीछा किया और दीपक एवं चंकी पर भी कुल्हाड़ी से हमला कर दिया। शोर सुनकर अन्य लोगों के आ जाने के बाद आदिल वहाँ से भाग गया। 

उन्होंने बताया कि आदिल के साथ उसका भाई आरिफ और पिता हबीब भी सफाईकर्मियों को मारने दौड़े थे। पुलिस ने आदिल और उसके पिता हबीब खान को कन्नौद के पास जंगल से गिरफ्तार कर लिया। गोप खान को भी गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आदिल की तलाश की जा रही है। जानलेवा हमले के बाद सफाई कर्मचारियों के संगठन ने उस मोहल्ले में जाने से इनकार कर दिया है। हमले से अक्रोशित सफाईकर्मियों ने वीडियो जारी कर कहा कि वे वर्ग विशेष के बाहुल्य वाले इलाके में सफाई करने नहीं जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के खिलाफ अग्रिम मोर्च में जाकर लड़ाई लड़ रहे डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों और सफाईकर्मियों पर हो रहे हमले हैरान करने वाले हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से बार-बार अपील की जा रही है कि ऐसे लोगों को और समर्थन की जरूरत है। लेकिन फिर भी कुछ लोगों बेहद लापरवाह और अपील को अनसुना करते नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के इंदौर से ऐसी दो घटनाएँ सामने आई थी। इनमें से एक में गश्ती कर रहे जवानों पर पत्थरबाजी की गई तो दूसरी घटना में बाइक सवार युवकों ने रोके जाने पर पुलिसकर्मियों पर थूक दिया। इसके अलावा कोरोना वायरस संदिग्ध की जाँच करने गई मेडिकल टीम पर मुस्लिम भीड़ ने पथराव करने के साथ ही पुलिस पर भी हमला किया था।

मुस्लिम नरसंहार के लिए मोदी सरकार कर रही कोरोना का इस्तेमाल: अरुंधति ने विदेशी मीडिया के जरिए फैलाया झूठ

घनघोर वामपंथन अरुंधति रॉय को भारतीय मीडिया में अब कवरेज नहीं मिल रहा है। ऐसे में उन्होंने अपना प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए एक जर्मन मीडिया संस्थान का सहारा लिया। ‘डीडब्ल्यू न्यूज़’ को इंटरव्यू देते हुए अरुंधति ने न सिर्फ़ भारत में कोरोना वायरस के प्रसार को लेकर अफवाह फैलाई, बल्कि मोदी सरकार को बदनाम करने के चक्कर में लोगों के बीच डर का माहौल बनाने का भी प्रयास किया। बिना किसी सबूत के उन्होंने भारत में कोरोना के आँकड़ों को ग़लत बताना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि ये आधिकारिक आँकड़े मोदी सरकार के हैं, वो इस पर जरा भी विश्वास नहीं करतीं।

इसके बाद अरुंधति अपना वही पुराना ‘हिन्दू-मुस्लिम विवाद’ और ‘मुस्लिमों पर अत्याचार’ वाला राग लेकर बैठ गईं और कहा कि कोरोना के कारण भारत की ‘पोल खुल गई’ है। उन्होंने दावा किया कि भारत न सिर्फ़ कोरोना वायरस, बल्कि घृणा और भूख से भी बेहाल है। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण मुस्लिमों के ख़िलाफ़ घृणा में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों को भी मुस्लिमों के नरसंहार करार दिया और कहा कि उसके बाद से ही घृणा में बढ़ोतरी हुई है। वो यहाँ तक झूठ बोल बैठीं कि दिल्ली में हुए दंगे सीएए के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर अत्याचार के रूप में हुए थे।

जमातियों को बचाने के लिए पगलाई हैं अरुंधति रॉय

दरअसल, अरुंधति रॉय का ये बयान तबलीगी जमात वालों को बचाने की मुहिम सी लगती है, जिन्होंने देश भर में कोरोना फैलाया। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में हज़ारों लोगों का जुटना और फिर लॉकडाउन तोड़ने वाली हरकत छिपी नहीं है। जगह-जगह मोहल्ले में पुलिस और मेडिकल टीम पर हमले हुए। इसलिए, अरुंधति एक ऐसा नैरेटिव बनाना चाह रही हैं, जैसे मुस्लिमों पर ही अत्याचार हुआ हो। ताज़ा हिंसा की घटनाओं को देखें तो स्पष्ट है कि कई कट्टरपंथी इसे ‘काफिरों को दिए सज़ा’ के रूप में देख रहे हैं।

तबलीगी जमात का मुख्यालय भारत में कोरोना का हॉटस्पॉट बन गया। जमातियों ने पुलिस व प्रशासन के साथ सहयोग नहीं किया। जमातियों को खोजने गई पुलिस पर हमले हुए। उनके मोहल्लों में मेडिकल टेस्ट करने गए स्वास्थ्यकर्मियों को खदेड़ दिया गया। इन सबका दोषी कौन है? क्या अरुंधति रॉय इसे ही ‘समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ अत्याचार’ मानती हैं? दिल्ली दंगों को लेकर उनके दावे झूठे हैं, क्योंकि ताहिर हुसैन जैसों की हरकतों पर उन्होंने चुप्पी साध ली। दिल्ली में हुए दंगे शाहीन बाग़ और जाफराबाद में मुस्लिम भीड़ द्वारा सड़कों पर कब्ज़ा किए जाने और स्थानीय लोगों को लगातार परेशान करने के बाद हुआ। पेट्रोल बम भी उन्होंने ही फेंके।

अरुंधति का दावा है कि मोदी सरकार कोरोना की आड़ में मीडिया को दबा रही है। युवा नेताओं को गिरफ़्तार किया जा रहा है और विरोधियों को कुचला जा रहा है। वो राजद छात्र नेता हैदर की ओर इशारा कर रही थीं, जिसे दिल्ली दंगों में उसकी भूमिका के कारण गिरफ्तार किया गया है। अरुंधति दंगा करने वालों पर कार्रवाई का विरोध करती हैं। साथ ही वे जिन पत्रकारों और कथित एक्टिविस्ट्स की बात कर रही हैं, उनमें से कई हिंसा फैलाने के आरोपित हैं। किसे नहीं पता कि भीमा-कोरेगाँव हिंसा मामले में जो आज जेल में हैं, वो भी एक्टिविस्ट्स ही कहे जाते हैं।

विदेशी मीडिया के सहारे अरुंधति का प्रोपेगेंडा

साथ ही अरुंधति इसके बाद आरएसएस को गाली बकने लगीं। उन्होंने कहा कि भाजपा और संघ भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। यहाँ तक कि वो हिटलर के नाजी काल से मोदी सरकार की तुलना करने लगीं और कहा कि जैसे जर्मनी में उस दौर में यहूदियों के नरसंहार के लिए तिकड़म आजमाए जाते थे, ठीक उसी तरह आज कोरोना का इस्तेमाल भारत में किया जा रहा। जबकि, मुल्ला-मौलवियों ने ही अधिकतर सरकारी दिशा-निर्देशों को धता बताते हुए मेडिकल सलाहों का मखौल उड़ाया। मोदी सरकार कोरोना से प्रभावी तरीके से निपट रही है, ऐसे में अरुंधति का ‘नाजी कार्ड’ खेलना वामपंथियों का पुराना पेशा है।

ये वामपंथी ‘नरसंहार’ जैसे शब्द का ऐसे प्रयोग करते हैं, जैसे किसी को एक थप्पड़ लगने का मतलब भी यही हुआ। उन्होंने झूठा आरोप लगाया कि मोदी सरकार समुदाय विशेष के लिए डिटेंशन सेंटर बनवा रही है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे अरुंधति रॉय फिक्शन लिखते-लिखते कथा-कहानियों की दुनिया में ही जीने लगी हैं। अरुंधति रॉय फेक न्यूज़ फैलाने वाले और झूठे फैक्ट चेकिंग करने वाले ‘ऑल्टन्यूज़’ को भी डोनेशन देती रही हैं।

शरजील के खिलाफ चार्जशीट दाखिल: देशद्रोही भाषण देने और दंगे भड़काने का आरोप

सीएए और एनआरसी का विरोध करते-करते पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की बात कहने वाले शरजील के खिलाफ चार्जशीट अंततः दाखिल कर दी गई। दिल्ली पुलिस ने यह चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने शरजील को देशद्रोही भाषण देने और दंगे उकसाने के लिए आरोपित बनाया है।

शरजील पर 13 दिसंबर 2019 को जामिया में देशद्रोही भाषण देने और दंगे भड़काने का आरोप है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 124 ए और 153 ए के तहत केस दर्ज किया गया था।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया और अलीगढ़ में भड़काऊ भाषण देने के मामले में दिल्ली पुलिस ने शरजील को 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद से गिरफ्तार किया था। शरजील भड़काऊ भाषण देने के मामले में राजद्रोह का मामला दर्ज किए जाने के बाद से फरार था। दिल्ली पुलिस ने शरजील के खिलाफ 25 जनवरी को मामला दर्ज किया था।

चर्चा में क्यों आया शरजील?

एक ऑडियो क्लिप में शरजील इमाम को यह कहते हुए सुना गया कि असम को भारत के शेष हिस्से से काटना चाहिए और सबक सिखाना चाहिए क्योंकि वहाँ बंगाली हिंदुओं और मुस्लिम दोनों की हत्या की जा रही है या उन्हें निरोध केंद्रों में रखा जा रहा है। उसने यह भी कहा था कि अगर वह पाँच लाख लोगों को एकत्रित कर सकें, तो असम को भारत के शेष हिस्से से स्थायी रूप से अलग किया जा सकता है। अगर स्थायी रूप से नहीं तो कम से कम कुछ महीनों तक तो किया ही जा सकता है। भारत के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात करते हुए शरजील ने कहा था कि ‘चिकेन्स नेक’ वाले क्षेत्र को ब्लॉक कर के पूरे उत्तर-पूर्व को शेष भारत से अलग-थलग कर देने का लक्ष्य होना चाहिए।

शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील इमाम भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक वह कट्टरपंथ से बहुत ज्यादा प्रभावित है। पुलिस की पूछताछ में उसने कबूल किया था कि उसके ​अलग-अलग भाषणों के वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है और न ही उसे अपनी गिरफ्तारी पर कोई पछतावा है। उसने मस्जिदों में भड़काऊ पर्चे बँटवाए थे। उसने सीएए और एनआरसी को लेकर कई पैम्पलेट तैयार किए थे, जिनमें भयभीत करने वाली भड़काऊ बातें लिखी हुई थी।

कौन है शरजील इमाम?

शरजील इमाम बिहार के जहानाबाद का रहने वाला है। वह जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज का छात्र है। शरजील की फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक, वह आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में पोस्ट ग्रैजुएशन भी कर चुका है।

बरेली में नर्स पर हमला: इमामबाड़ा के पास घेरा, बदसलूकी, रजिस्टर फाड़ा, भागकर बचाई जान

कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ जंग में केंद्र सहित सभी राज्य सरकारें युद्ध स्तर पर जुटी हैं। वहीं दूसरी ओर वर्ग विशेष के कुछ लोग जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं। कोरोना से लोगों को बचाने में लगे डॉक्टर, नर्स और पुलिस टीम पर हमले की कई घटनाएँ चुकी है। अब उत्तर प्रदेश के बरेली में नर्स पर हमला हुआ है।

यहाँ सर्वे करने गई नर्स को निशाना बनाया गया। नर्स ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। आरोपितों की संख्या 20-25 बताई जा रही है। इससे पहले यूपी के मुरादाबाद में स्वास्थ्य विभाग की टीम पर हमला किया गया था।

नर्स का आरोप है कि बरेली के फरीदपुर तहसील के ऊँचा मोहल्ला में वह सर्वे करने गई थी। इस दौरान लोगों ने उसका रजिस्टर और मोबाइल छीन लिया और बदतमीजी की। नर्स ने किसी तरह वहाँ से भागकर जान बचाई।

जानकारी के मुताबिक, प्रवासी और संदिग्ध लोगों के बारे में सर्वे करने के लिए फतेहगंज पूर्वी के नवीन प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र पर तैनात एएनएम महादेव और ऊँचा मोहल्‍ले में गई थी। नर्स के अनुसार कई परिवारों ने अपना नाम और पता बताया, लेकिन कुछ लोग जानकारी देने से इनकार करने लगे। 

मोबाइल छीना, रजिस्टर फाड़े और अभद्रता की

नर्स मोहल्‍ले से बाहर आई तो इमामबाड़ा के पास काफी लोगों ने उसे घेर लिया और तरह-तरह के सवाल करने लगे। आईडी कार्ड की माँग की। आरोप है कि आईडी कार्ड दिखाने के बाद भी भीड़ में शामिल कई लोगों ने उससे रजिस्टर छीन लिया, उसे फाड़ने का प्रयास किया और मोबाइल भी झपट लिया। उनसे अभद्रता करने लगे। इसके बाद वह रजिस्‍टर और मोबाइल को लेकर किसी तरह अपनी जान बचाकर भागी।

एएनएम ने उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दी। फरीदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर वासित अली मौके पर पहुँचे। लोगों से जानकारी लेकर रिपोर्ट अफसरों को दी। इसके बाद विभाग की ओर से कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ फरीदपुर थाना कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी हुई है। घटना अंजाम देने के संदेह में पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है।

एसएसपी शैलेश पाण्डेय ने बताया कि सरकारी कर्मचारियों के साथ अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी बदसलूकी करेगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आशा कार्यकर्ता से अभद्रता के मामले में जाँच कर दोषियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

पहले भी हो चुके हैं स्वास्थ्यकर्मी और पुलिस पर हमले

गौरतलब है कि इससे पहले मुरादाबाद में मेडिकल टीम पर हमले का ऐसा ही मामला सामने आया था। वहाँ डॉक्टरों समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। जाँच दल के साथ पत्थरबाजी की घटना में चोटिल डॉ. एससी अग्रवाल ने कहा, “हम मुरादाबाद के नवाबपुरा में एक COVID-19 पॉजिटिव मरीज के 4 परिवार वालों को लेने गए थे। जैसे ही हमने उन्हें एम्बुलेंस में बिठाया, कुछ लोगों ने हमें घेर लिया और विवाद शुरू हो गया। लोगों ने हम पर हमला कर दिया।”

कुछ दिनों पहले बेंगलुरु के सादिक मोहल्ले में कोरोना संक्रमण के लक्षणों की जाँच पड़ताल करने और नमूने लेने के लिए गई नर्स और आशा कार्यकर्ता पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था। आशा वर्कर ने बताया कि मस्जिद से घोषणा करने के बाद तकरीबन 100 लोगों की भीड़ ने आकर उन्हें घेर लिया। इस हमले के बाद से हेल्थ वर्कर्स को लेकर लोगों की चिंताएँ भी बढ़ गई हैं। वहीं कश्मीर में कोरोना संदिग्ध की जाँच करने पहुँची मेडिकल टीम को स्थानीय लोगों ने बंधक बना लिया था। जब पुलिस उन्हें छुड़ाने पहुँची तो उन पर भी पथराव किया गया।

पाकिस्तान में जमाती मौलाना की मौत: मलेशिया और ब्रूनेई में भी तबलीगी ने फैलाया कोरोना

तबलीगी जमात के फैसलाबाद यूनिट के प्रमुख की कोरोना वायरस की वजह से मृत्यु हो गई है। फैसलाबाद पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित है, जहाँ कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 1100 के पार हो गई है। 69 वर्षीय मौलाना सुहैब रूमी फैसलाबाद में तबलीगी जमात का कामकाज सँभालता था और उस क्षेत्र के जमातियों का मुखिया भी था। बुजुर्ग मौलवी ने लाहौर के रायविंड में हुए जमात के मजहबी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। भारत की तरह पाकिस्तान में भी जमातियों के कारण कई मामले बढ़ गए हैं।

जमातियों ने पाकिस्तान में फैलाया कोरोना

मौलाना सुहैब के परिवार के 5 अन्य लोग भी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, जिनमें उसके 2 पोते भी शामिल हैं। फैसलाबाद के डिप्टी कमिश्नर मुहम्मद अली ने बताया कि मौलाना के सभी परिवार वालों को एक आइसोलेशन सेंटर में रखा गया है। पाकिस्तान स्थित पंजाब के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रान्त के 1100 से भी अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। पाकिस्तान में उन सभी मौलानाओं को ट्रैक किया जा रहा है, जिन्होंने रायविंड में हुए जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

पाकिस्तान की सरकार ने पहले ही जमात को सलाह दी थी कि वो अपने वार्षिक कार्यक्रम को स्थगित कर दे। लेकिन उसने इन सलाहों के ख़िलाफ़ जाते हुए आयोजन किया और इसमें पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि विदेशी मौलाना भी शामिल हुए थे। हज़ारों लोगों ने भाग लिया था। भारत के अलावा पाकिस्तान, मलेशिया और ब्रूनेई में तबलीगी जमात वाले ही कोरोना के सबसे बड़े कैरियर बन कर उभरे हैं। पाकिस्तान की बात करें तो वहाँ पंजाब की जेलों में भी कोरोना फ़ैल रहा है। क़रीब 100 कैदी संक्रमित हो चुके हैं।

पाकिस्तान में बड़ी संख्या में डॉक्टर भी कोरोना संक्रमित

पाकिस्तान में अब तक 140 लोग कोरोना वायरस के कारण अपनी जान गँवा चुके हैं, जबकि 7500 लोग संक्रमित हैं। टेस्टिंग की प्रक्रिया शिथिल होने के कारण माना जा रहा है कि संक्रमितों की संख्या इससे काफ़ी अधिक हो सकती है। लाहौर के एक कार्डियक हॉस्पिटल में 12 मेडिकल कर्मचारी ही संक्रमित हो गए हैं। पूरे पाकिस्तान में 110 मेडिकल कर्मचारी कोरोना के शिकार हुए हैं, जिनमें से 53 डॉक्टर्स हैं। युवा डॉक्टर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वो उन्हें ज़रूरी चीजें एवं उपकरण मुहैया नहीं करा रही है।

हाल ही में पाकिस्तानी डॉक्टरों का चिट्टी-गोला गाने पर मरीजों के सामने नृत्य करने वाला वीडियो वायरल हुआ था। वहाँ लोगों को राशन देने में भी भेदभाव किया जा रहा है। प्रशासन अल्पसंख्यकों को राशन देने से न केवल मना कर रहा है, बल्कि राशन के लिए उनपर धर्मांतरण का दबाव भी बना रहा है। इन्हीं खबरों के आधार पर पाकिस्तान की आलोचना विश्व का हर देश करने लगा है। इसी कड़ी में दुनियाभर के धार्मिक मसलों पर राय देने वाले अमेरिकी आयोग ने भी पाकिस्तान से आ रही इन खबरों की निंदा की थी।

योगी सरकार देगी 4-4 लाख रुपए का मुआवजा: 48 घंटों में मिले आर्थिक सहायता, DM को आदेश

उत्तर प्रदेश में आँधी, भारी बारिश और ओले गिरने से मची तबाही पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। योगी सरकार ने प्रदेश के कई जिलों में आकाशीय बिजली गिरने की घटना पर दुख जताया। योगी सरकार ने मुआवजा के तहत प्रशासन को तत्काल हरसंभव मदद पहुँचाने के निर्देश दिए। 

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बारिश और ओलावृष्टि के कारण हुए हादसों में मारे गए लोगों के परिजन को चार-चार लाख रुपए की सहायता मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मकान व पशुधन की क्षति के मामलों में भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। जिलाधिकारी स्वयं पर्यवेक्षण करें कि 48 घंटे में पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्राप्त हो जाए।

जिला अधिकारियों को घायलों को सभी चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने के लिए भी कहा गया है। बता दें कि शुक्रवार (अप्रैल 17, 2020) की देर रात बारिश के बाद आई आँधी के कारण अलीगढ़, कानपुर देहात, औरैया और आस-पास के अन्य स्थानों पर खड़ी फसलें क्षतिग्रस्त हो गईं।

किसानों ने सरकार से लगाई मदद की गुहार

बेमौसम बारिश और तेज तूफान के कारण कानपुर में खड़ी गेहूँ की फसल खराब हो गई। इस पर किसानों ने सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए कहा था, “हम सरकार से हमारी मदद करने का आग्रह करते हैं। हम लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए हैं और अब बारिश ने हमारी फसल को नुकसान पहुँचाया है। अब हम क्या खाएँगे?”

जानकारी के मुताबिक कानपुर के ननर्वल थाना क्षेत्र के चकेरी पाल्हेपुर मार्ग स्थित पाली के पास बिजली गिरने से राजेंद्र नामक युवक की मौत हो गई। वहीं बेंहटा सकट का रहने वाला वंशी पाल झुलस गया। दोनों खेतों से सुबह 7 बजे घर वापस लौट रहे थे, तभी तेज कड़क के साथ बिजली गिरी और दोनों चपेट में आ गए। बिधनू के पिपरगवा गाँव में भी बिजली गिरने से एक की मौत हुई है। मुख्यमंत्री ने इनकी मौत पर शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया है।

पंजाब में भी ओलावृष्टि ने फसल पर डाला असर

इसी के साथ पंजाब के गुरदासपुर में भी बेमौसम बारिश की वजह से फसल की कटाई में देरी हो गई है। पंजाब के कुछ हिस्सों में गेहूँ के सुरक्षित भंडारण का काम किया जा रहा है। पंजाब के किसानों का कहना है कि यदि लगातार बारिश होती रही तो खड़ी फसल बर्बाद हो जाएगी। लॉकडाउन और बारिश ने उन्हें बुरी तरह से प्रभावित किया है।

वहीं लुधियाना में किसानों ने कहा कि बेमौसम बारिश और भीषण तूफान की वजह से खड़ी गेहूँ की फसल का 20-25 फीसदी हिस्सा बर्बाद हो गया है। आने वाले दो-तीन दिनों में फसल की कटाई होनी थी। गौरतलब है कि पंजाब में 15 अप्रैल से गेहूँ की खरीद का काम शुरू हुआ है।

इससे पहले योगी सरकार ने 11 लाख मजदूरों के खाते में ₹1-1 हजार डालकर 4 लाख शहरी वेंडर्स को भी मदद पहुँचाई थी। इसके साथ ही सीएम ने घोषणा की थी कि देश में कहीं भी रहने वाले यूपी के गरीब मजदूरों के खाने-पीने का खर्च सरकार उठाएगी।

मो. माहिर, इरफ़ान ने 60 गुंडों के साथ वारिसलीगंज दलित बस्ती में की गोलीबारी: 1 की हत्या, कई महिलाएँ घायल

बिहार के नवादा स्थित वारिसलीगंज से एक हत्या की घटना सामने आई है। यहाँ वारिसलीगंज के मुड़चालक में दो पक्षों के बीच मारपीट और गोलीबारी हुई। इस घटना में मुख्य आरोपित मोहम्मद इरफान ने 55 वर्षीय रविदास की गोली मार कर हत्या कर दी। एक महिला सहित 6 अन्य लोग घायल हैं। पुलिस ने 8 आरोपितों को हिरासत में लिया है लेकिन इरफ़ान अभी भी फरार बताया जा रहा है। गाँव में पिछले 20 दिनों से दोनों पक्षों के बीच तनातनी चल रही थी, जिसके बाद शुक्रवार (अप्रैल 18, 2020) को इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया।

ये विवाद मुख्यतः किशोर राजा रविदास और मोहम्मद माहिर के बीच हुई थी। विवाद का कारण स्पष्ट नहीं है। ये विवाद विवेकानंद पब्लिक स्कूल के पास हुई। इसके बाद मोहम्मद माहिर के परिजन रविदास के घर पहुँच गए और उन्हें बाहर निकाल कर उनके साथ मारपीट की। इस घटना की सूचना तब तक पुलिस को नहीं दी गई थी। रविदास दलित टोले में रहते थे, जहाँ शुक्रवाह की सुबह मोहम्मद माहिर 60 लोगों के साथ पहुँच गया और उसने मारपीट शुरू कर दी।

जब दलितों ने इसका विरोध किया तो मुस्लिम पक्ष की ओर से ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया गया। दलितों ने भी उन गुंडों को भगाने के लिए पत्थरबाजी की लेकिन बस्ती में लगातार तोड़फोड़ मचाया जाता रहा। इसके बाद मोहम्मद इरफ़ान ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में घायल हुए सभी लोग दलित ही थे, जिसमें से रविदास की इलाज के दौरान मौत हो गई। घायलों में 20 वर्षीय पापु माँझी और महिलाएँ भी शामिल थीं। उन सभी का इलाज जारी है। पप्पू और रविदास की हालत चिंताजनक होने के कारण दोनों को विम्स पावापुरी रेफेर कर दिया गया था।

‘दैनिक जागरण’ के नवादा संस्करण में प्रकाशित ख़बर

वारिसलीगंज में पहले भी हुई थी मारपीट

विम्स में ही इलाज के दौरान दलित रविदास की मौत हुई। गाँव स्थित एक गड्ढे में मछली मारने को लेकर दोनों पक्षों के बीच 29 मार्च को भी झड़प हुई थी। उस समय भी 8 लोग जख्मी हो गए थे। स्थानीय बुद्धिजीवियों ने पंचायत कर के किसी तरह मामले को ठीक कर दिया था। तब दोनों ही पक्षों द्वारा कोई मामला दर्ज नहीं कराया गया था लेकिन पुलिस ने सावधानी से काम लेते हुए दोनों पक्षों के कई लोगों के ख़िलाफ़ लॉकडाउन के उल्लंघन का मामला दर्ज किया था। हालाँकि, कोई गिरफ़्तारी नहीं की गई थी।

घटना की सूचना मिलते ही एएसपी और स्थानीय थानाध्यक्ष दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। जिला मुख्यालय से अतिरिक्त जवानों को मँगाया गया। आरोपितों के पास से चार बड़े तलवार भी जब्त किए गए। सघन छापेमारी और नाकाबंदी कर के आरोपितों को शिकंजे में लिया गया। इरफ़ान की तलाश अभी भी जारी है। हाल ही में मधुबनी में 5 अप्रैल की रात सुलेमान नदाफ, मलील नदाफ और शरीफ नदाफ ने 70 वर्षीय दलित महिला काला देवी (उर्फ कैली देवी) की हत्या कर दी थी। सरपंच फकरे आलम हत्यारों को बचाने की पूरी कोशिश की थी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक बदलवाने का प्रयास किया था।

जिन रोहिंग्याओं को दी रहने की जगह, वो भी गए मरकज में: गृह मंत्रालय ने पुलिस को कहा – सबको ढूँढो

देश में जारी कोरोना के कहर के बीच शुक्रवार (अप्रैल 17, 2020) को गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखकर रोहिंग्याओं का पता लगाने का आदेश दिया है। इसमें कहा गया है कि ऐसी रिपोर्ट मिली है कि निजामुद्दीन मरकज की शिविर में तबलीगी जमात के लोगों के साथ कुछ रोहिंग्या भी शामिल हुए थे। मंत्रालय ने इन रोहिंग्याओं को खोजने के लिए चार राज्यों को प्रमुख स्थानों के रूप में चिह्नित किया है। ये राज्य हैं- नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा।

गृह मंत्रालय द्वारा राज्य पुलिस प्रमुखों और मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि रोहिंग्याओं ने तबलीगी जमात के ‘इज्तेमास’ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया है और उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की संभावना है। पत्र में हैदराबाद, तेलंगाना, दिल्ली, पंजाब, जम्मू और मेवात में शिविरों में रोहिंग्या शरणार्थियों की पहचान के लिए विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है, जहाँ पर अधिकतर रोहिंग्या रहते हैं।

सभी राज्यों के पुलिस प्रमुखों को रोहिंग्या शरणार्थियों का पता लगाने के लिए एक गहन अभ‍ियान चलाने को कहा गया है क्योंकि उनमें से कई अपने निर्धारित श‍िविरों से लापता हैं। मंत्रालय ने कहा कि हैदराबाद के शिविर में रहने वाले रोहिंग्या हरियाणा के मेवात में आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे और वे दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित मरकज भी आए थे। इसी तरह, दिल्ली के श्रम विहार और शाहीनबाग इलाके में रह रहे रोहिंग्या भी तबलीगी जमात के कार्यक्रम में गए थे लेकिन वे वापस अपने शिविरों में नहीं लौटे।

मंत्रालय ने बताया कि ऐसी खबर है कि पंजाब के डेराबस्सी और जम्मू-कश्मीर के जम्मू इलाके में रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं और वे तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होकर लौटे हैं। राज्यों से किए गए संवाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि रोहिंग्या मुस्लिमों और उनके संपर्क में आने वालों की कोविड-19 जाँच कराने की जरूरत है और इसी के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाने की जरूरत है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक देश में 40 हजार रोहिंग्या दिल्ली, जम्मू और हैदराबाद सहित देश के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं। पिछले महीने जम्मू में रहने वाले आठ रोहिंग्या मुस्लिमों को निजामुद्दीन स्थित मरकज में शामिल होकर लौटने के बाद क्वारंटाइन में रखा गया था। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश में 500 से अधिक कोरोना वायरस पॉजिटिव केस और देश में लगभग 20 मौतें दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात कार्यक्रम से जुड़े पाए गए।

कौन हैं रोहिंग्या

रोहिंग्या मुस्लिम जाति (ज्यादातर, कुछ हिंदू भी) एक का समुदाय है, जो म्यांमार के रखाइन राज्य से ताल्लुक रखता है। पलायन से पहले म्यांमार में रोहिंग्याओं की जनसंख्या लगभग 10 लाख थी। इनकी अपनी भाषा और संस्कृति है। म्यामांर इन्हें सिर्फ गैरकानूनी बांग्लादेशी प्रवासी मानता है।