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व्यंग्य: मुसलमानों से दिवाली मनवाने की साजिश कर रहे मोदी: बकैत कुमार | Ravish Kumar Prime Time

रवीश बकैत कुमार की प्राइम टाइम स्क्रिप्ट लीक हो गई है, मोदी के 5 अप्रैल वाले प्रोग्राम पर क्या सब कहा! रवीश कुमार ने कहा कि मुसलमानों से दिवाली मनवाने की साजिश कर रहे हैं मोदी। 9 बजे टीवी पर एक आदमी आता है और बत्ती, फ्लैशलाइट, दीया, टॉर्च आदि जलाने के लिए कहता है। ये लिबरल और सेकुलर लोगों पर हमला नहीं है?

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UP: तबलीगी जमात के 34 सदस्यों पर FIR, 211 विदेशियों के पासपोर्ट किए गए जब्त

कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण के बीच नियमों और निर्देशों का उल्लंघन कर मस्जिदों में छिपे विदेशियों के ख़िलाफ़ योगी सरकार सख्त रुख अख्तियार कर रही है। ताजा जानकारी के मुताबिक, यूपी के विभिन्न मस्जिदों में छिपे 287 विदेशियों में से 211 के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए हैं। साथ ही इनके ख़िलाफ़ 34 मुकदमे दर्ज हुए है। अन्य जमातियों के ख़िलाफ़ भी बड़ी संख्या में महामारी अधिनियम के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। केवल मेरठ और आसपास के जिलों की बात करें तो 450 लोगों पर मुकदमे दर्ज हुए हैं। बता दें कि तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होने वाले 2058 लोग बिजनौर, सहारनपुर, शामली, मुजफ्फरनगर और बागपत से पकड़े गए हैं।

राज्य के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (गृह) अवनीश कुमार अवस्थी ने बताया है कि विदेश से आए लोगों के वीजा की निरंतर समीक्षा हो रही है। तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए अन्य लोगों को भी चिह्नित किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों को खुद आगे आना चाहिए। साथ ही आम लोगों से भी इनके बारे पुलिस-प्रशासन को सूचना देने की अपील की है।

प्रयागराज में थाइलैंड के 9 नागरिकों समेत 10 लोगों के खिलाफ शहर के करेली थाने में गुरुवार देर रात रिपोर्ट दर्ज की गई है। शरण देने के आरोप में मस्जिद के मौलाना के खिलाफ भी मुकदमा दायर किया गया है। एसपी सिटी बृजेश श्रीवास्तव का कहना है कि इन लोगों पासपोर्ट भी जब्त किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि तबलीगी जमात के सदस्यों द्वारा अस्पताल में मनमानी करने के कई मामले सामने आए हैं। लेकिन, गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल में तो इन्होंने हद ही कर दी। नर्स के सामने नंगा होने और बीड़ी-सिगरेट की डिमांड करने को लेकर जमात के 6 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इन्हें एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भी शिफ्ट कर दिया गया है। अब इनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सख्त रुख अपनाया है।

नर्सों के साथ दुर्व्यवहार पर योगी आदित्यनाथ ने कहा, “ये ना कानून को मानेंगे, ना व्यवस्था को मानेंगे। ये मानवता के दुश्मन हैं। इन्होंने महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ जो किया है वो जघन्य अपराध है। इन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जा रहा है। हम इन्हें छोड़ेंगे नहीं।”

IIT-AIIMS के पूर्व छात्रों ने तैयार किया Covid-19 वायरस को केमिकल की जगह पानी की बूँदों को आवेशित कर निष्क्रिय करने वाला डिवाइस

कोरोना वायरस (COVID-19) से लड़ाई में पूरा देश एकजुट होकर अपने हिस्से का योगदान कर रहा है। ऐसे में स्टैन्फोर्ड यूनिवर्सिटी, आईआईटी और एम्स के कुछ पूर्व शोधकर्ताओं ने ‘एयरलेंस माइनस कोरोना’ (Airlens Minus Corona) नाम से एक डिवाइस तैयार किया है, जिसमें कोरोना वायरस के संक्रमण पर व्यापक रोक लगाने में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

स्टैन्फोर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व शोधकर्ता डॉक्टर शशि रंजन ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि, उन्होंने और आईआईटी खड़गपुर के पूर्व छात्र देबायन शाह की स्टार्टअप कंपनी PerSapien ने एक ऐसा उपकरण विकसित किया है, जो रिमोट कंट्रोल से संचालित होता है। इसमें एक कैमरा भी जुड़ा है जो चालक की सीट से दूर तक डिजिटल स्क्रीन पर चित्र देता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल जरूरत यह है कि देशभर में और भी इंजीनियर्स और शोधकर्ता ऐसे उपकरण तैयार करें जो कोरोना वायरस के संक्रमण पर रोक लगा सकें।

डॉक्टर शशि रंजन ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें सेनिटाइज़र्स के रूप में कैमिकल की जगह पानी के ही सूक्ष्म बूँदों को ही चार्ज (आवेशित) कर के वायरस को नष्ट किया जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वर्तमान में देश में केमिकल की बढ़ी हुई खपत के कारण कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए केमिकल पर निर्भरता समाप्त हो जाएगी।

PerSapien ने कोरोना वायरस के खिलाफ तैयार किया गया यह डिवाइस सड़कों पर चलते हुए शहर को संक्रमण मुक्त करने के साथ ही अस्पताल, स्कूल, बस स्टॉप, रेलवे स्टेशन, शॉपिंग मॉल और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आवेशित बूंदों के जरिए सतह को संक्रमण मुक्त करता है। जिससे कि कोरोना वायरस के प्रसार पर रोक लगती है।

शशि रंजन के अनुसार, “कोरोना वायरस को मारने के लिए पानी की बूँदों को चार्ज किया जाता है, जो कि इस काम का सबसे बड़ा चैलेंज भी है।” ऐसे आयनित पानी की बूँदे प्रोटीन के ऑक्सीकरण के जरिए गैर हानिकारक अणु बनने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि ऑक्सीकरण सबसे शक्तिशाली रोगाणुरोधी उपायों में से एक है और यह तकनीक पूरे शहर को संक्रमण मुक्त कर सकती है।

वर्तमान में जिस तेजी से देशभर में इस वायरस के संक्रमण को आगे बढ़ने और फैलने से रोकने की आवश्यकता है, उसमें यह बहुत मददगार साबित हो सकता है। बहुत सूक्ष्म नम बूँदों के छिड़काव से कोरोना वायरस को आसानी से निष्‍क्र‍िय किया जा सकता है।

डॉक्टर शशि रंजन के अनुसार – “यह वाटर बेस्ड तकनीक है, जिसमें पानी और बिजली इस्तेमाल हो रही हैं। हम पानी की बूँदों को वोल्टेज के जरिए चार्ज करते हैं, हाइड्रॉक्सिल OH- जैसे जिससे इसमें आयन्स (अणु) जेनरेट हो जाते हैं। ये आयन्स (अणु) वायरस की बाह्य त्वचा, जो कि प्रोटीन और वसा से बनी होती है उसका ऑक्सीकरण कर के वायरस को निष्क्रीय करते हैं।”

“इसमें पानी की बूँदों को सूक्ष्म बूंदों में बदलने पर हमने काम किया और फिर इन बूँदों को आवेशित करना लक्ष्य था। जहाँ भी इनका छिड़काव किया जाएगा, उन जगहों पर कोरोना वायरस के प्रसार को रोका जा सकेगा। जिस तकनीक को इस्तेमाल किया जा रहा है वह केमिकल बेस्ड है, जिसकी कि अधिक इस्तेमाल होने के कारण समय के साथ आपूर्ति कम हो सकती है।”

उन्होंने बताया कि वह इस पर पहले से भी काम कर रहे थे, लेकिन कोरोना वायरस की महामारी के कारण उन्होंने इस पर तत्परता से अपना योगदान देने का निर्णय लिया। यदि इस तकनीक को पूरे भारत में इस्तेमाल करने के लिए बड़े स्तर पर तैयार करना हो तो इस आपूर्ति को वह महज एक से दो सप्ताह के भीतर पूरी करने में सक्षम हैं।

इस उपकरण के बारे में बात करते हुए डॉक्टर शशि रंजन ने कहा कि हमारा प्रमुख प्रयास इस आपातकाल में देश की मदद करना है। कोलकाता में एक मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के साथ मिलकर इसे तैयार कर रहे हैं।

डॉक्टर शशि रंजन PerSapien स्टार्ट अप के को-फाउंडर हैं। इससे पहले वो एम्स अस्पताल में रिसर्च प्रोजेक्ट से जुड़े थे, साथ ही स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में भी कार्यरत थे। वर्तमान में इस टीम में आईआईटी से पास-आउट छात्र काम कर रहे हैं। यह उपकरण तैयार करने से पहले भी डॉक्टर शशि रंजन वायु प्रदूषण जैसे मुद्दों पर कार्य कर रहे थे। उन्होंने बताया कि यह उपकरण अभी तक बिक्री के रूप से तैयार नहीं किया गया है और पहला मकसद सिर्फ कोरोना वायरस के तेजी से हो रहे संक्रमण को रोकने के लिए कुछ आधुनिक और प्रभावी यंत्र तैयार करना ही था।

कार्डिनल ने की पादरियों से अपील, कोरोना से मरने वाले ईसाइयों को दफ़नाएँ नहीं जलाएँ

देश में कोरोना के मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के बीच ईसाई कार्डिनल ने मुंबई के सभी चर्च पादरियों से अपील की है कि वह कोरोना से मरने वाले लोगों के शवों को दफनाएँ नहीं बल्कि उनकी डेडबॉडी का अंतिम संस्कार कराएँ। इसके साथ ही पादरी ने ईसाईयों से लॉकडाउन के बीच सरकार के नियमों का पालन और कोरोना से बचने के लिए कुछ उपाय भी बताए हैं। हालाँकि, इस अपील को पिछले दिनों बीएमसी द्वारा जारी की गई गाईडलाइन से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल, कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस ने एक वीडियो जारी कर मुंबई के पादरियों से ईसाइयों के शवों को ना दफनाने की अपील करते हुए कहा कि वो सभी बीएमसी के निर्देशों का पालन करें और ईसाइयों के शवों को जलवाएँ। ओसवाल्ड ने इसके अलावा वीडियो के माध्यम से ही लोगों को घर से बाहर न निकलने, बार-बार हाथ साफ करने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसी कई चीजों के बारे में भी जागरूक किया है।

इससे पहले कोरोना वायरस से मरने वाले रोगियों के शवों को जलाने के लिए मुंबई में बीएमसी ने सोमवार को एक सर्कुलर जारी किया था। सर्कुलर में कहा गया था कि कोरोना संक्रमण से मरने वाले रोगियों के शवों का बिना धर्म की परवाह किए अंतिम संस्कार किया जाए यानी उन्हें जलाया जाए। उन्हें दफनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। शव को दफनाने से दूसरे लोगों में संक्रमण फैसले की संभावना ज्यादा होती है। संक्रमण को रोकने के लिए शव को जलाना ज्यादा बेहतर होगा।

हालाँकि, सरकार की ओर से दबाव पड़ने के बाद इस आदेश को एक घंटे के अंदर ही वापस ले लिया गया था। वहीं इसके बाद तमाम मुस्लिम उलेमाओं ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि इस्लाम में शव जलाने की इजाजत नहीं होती। ऐसे में सरकार को दूसरे विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए और उसी के मुताबिक फिर से गाइडलाइन जारी किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि WHO की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की बीमारी से मरे व्यक्ति का शव जलाने से कोरोना के फैलने का खतरा नहीं रहता है। एक जानकारी के मुताबिक जब चिता पर या फिर इलेक्ट्रिक मशीन में शव को जलाया जाता है तो उसका तापमान करीब 700- 1000 डिग्री सेल्सियस तक होता है। इससे वायरस मर जाता है और उसके फैलने का खतरा भी नहीं रहता।

लेकिन, अगर कोरोना की वजह से मरे शख्स की डेडबॉडी को दफनाया जाता है तो वायरस के फैलने का खतरा बना रहता है। WHO की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर ऐसे शव को जमीन में दफनाया जाए तो ध्यान रखा जाए कि दफनाने की जगह के 30 मीटर के दायरे में कोई भी पानी का सोर्स ना हो।

हैदराबाद के हॉस्पिटल में पुलिस तैनात: डॉक्टर पर जमाती ने किया था हमला, सामूहिक रूप से हुई थी नमाज

समुदाय विशेष के कोरोना वायरस संक्रमितों की मनमानी और उत्पात को देखते हुए हैदराबाद के गॉंधी हॉस्पिटल में पुलिस तैनात कर दी गई है। यहॉं एक अप्रैल को डॉक्टर को निशाना बनाया गया था। उसके अगले दिन आइसोलेशन वार्ड में रखे गए लोगों की सामूहिक रूप से नमाज अदा करती तस्वीरें सामने आई थी।

गौरतलब है कि दिल्ली में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लेकर लौटे दो भाइयों कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद इस अस्पताल में एडमिट किए गए। इनमें से एक की तबीयत बिगड़ने के कारण एक अप्रैल को मौत हो गई। इसके बाद दूसरे भाई ने डॉक्टर एवं स्टाफ पर न केवल हमला बोल दिया, बल्कि उन पर थूक भी दिया था। इस अपराध में घरवालों ने भी युवक का साथ दिया। बाद में घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर अस्पताल पहुँचे। उन्होंने हमलावरों को हिरासत में लेकर मामला शांत करवाया।

हालाँकि, इस घटना के बाद हमलावर को आइसोलेट कर दिया गया था। लेकिन बावजूद इसके जूनियर डॉक्टरों ने असुरक्षित परिस्थियों पर डर जताया था। इसके मद्देनजर राज्य सरकार ने इस पर संज्ञान लिया और आश्वासन दिया कि आरोपित के ख़िलाफ़ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। इसी अस्पताल में कल सामूहिक नमाज अदा की गई थी। नमाज अदा करने वालों को संक्रमण संदिग्ध होने के कारण क्वारंटाइन किया गया था। लेकिन अस्पताल प्रशासन के निर्देशों को ताक पर रख कर इन्होंने सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर नमाज अदा की।

बता दें कि जमात के मरकज़ से निकले लोगों द्वारा अस्पताल में मनमानी का यह पहला मामला नहीं है। दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भी मरकज से निकले लोगों द्वारा डॉक्टरों और इधर-उधर थूक कर संक्रमण फैलाने का मामला सामने आया है। ये लोग जॉंच कराने और अस्पताल में भर्ती होने से भी आनाकानी कर रहे थे। इसके बाद यहाँ भी अस्पताल में पुलिस की तैनाती करनी पड़ी थी।

नर्सों के सामने नंगा होने वाले जमाती पर CM योगी सख्त, कहा- छोड़ेंगे नहीं, लगेगा NSA

तबलीगी जमात के सदस्यों द्वारा अस्पताल में मनमानी करने के कई मामले सामने आए हैं। लेकिन, गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल में तो इन्होंने हद ही कर दी। नर्स के सामने नंगा होने और बीड़ी-सिगरेट की डिमांड करने को लेकर जमात के 6 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई है। इन्हें एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भी शिफ्ट कर दिया गया है। अब इनके खिलाफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सख्त रुख अपनाया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इनलोगों को जेल में ही आइसोलेशन सेंटर बनाकर रखने पर भी विचार किया जा रहा है।

यूपी सरकार ने इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही यह फैसला किया गया है कि प्रदेश में जहाँ भी तबलीगी जमात के लोगों को क्वारंटाइन किया गया है या फिर आइसोलेशन में रखा गया है, वहाँ न तो महिला स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी लगेगी और न ही किसी महिला पुलिसकर्मी की तैनाती होगी।

शुक्रवार (अप्रैल 4, 2020) को टीम 11 के साथ बैठक में सीएम योगी ने इनके खिलाफ सख्ती से पेश आने के निर्देश दिए। साथ ही डॉक्टरों और नर्सों से बदसलूकी के बाद अब जमातियों के लिए जेल में ही आइसोलेशन सेंटर बनाने पर भी विचार शुरू हो गया है। नर्सों के साथ दुर्व्यवहार पर योगी आदित्यनाथ ने कहा, “ये ना कानून को मानेंगे, ना व्यवस्था को मानेंगे। ये मानवता के दुश्मन हैं। इन्होंने महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ जो किया है वो जघन्य अपराध है। इन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जा रहा है। हम इन्हें छोड़ेंगे नहीं।” 

मुख्यमंत्री ने गाजियाबाद की घटना पर संज्ञान लेते हुए कहा कि इंदौर जैसी घटना यूपी में कहीं नहीं दिखनी चाहिए। इसके लिए कानूनन जो भी कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी हो वो करिए। सीएम ने कहा कि गाजियाबाद में जिन लोगों ने ये हरकत की है, उस प्रवृत्ति के लोगों के साथ पूरी सख्ती की जाएगी। 

बता दें कि गुरुवार (अप्रैल 2, 2020) को एमएमजी हॉस्पिटल के सीएमओ ने जिले के डीएम से हॉस्पिटल में बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती तबलीगी जमात के लोगों द्वारा नर्सों से बदतमीजी करने की शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुँच कर जाँच की थी। सीएमओ ने शिकायत में बताया कि क्वारंटाइन में रखे गए तबलीगी जमात के लोग बिना पैंट के घूम रहे हैं। नर्सों को देखकर भद्दे इशारे करते हैं। बीड़ी और सिगरेट की डिमांड करते हैं। 

4 शो में ही 170000000 व्यूज, 5 साल का सबसे बेस्ट: रामायण ने इस दौर में भी गढ़े नए रिकॉर्ड

कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। इस दौरान जनता की मॉंग पर 80-90 के दौर के कई सीरियल का दोबारा प्रसारण शुरू किया गया है। इनमें से एक रामायण भी है। रामानंद सागर द्वारा बनाए गए इस सीरियल ने अस्सी के दशक के आखिर में नया इतिहास रचा था। टीआरपी के आँकड़े बता रहे हैं कि रामायण का जादू आज भी कायम है।

हालाँकि रामायण के री टेलीकास्ट पर वामपंथियों और कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया में अपनी खुंदक निकाली थी। इसके प्रसारण को उन्होंने एक एजेंडा बताया था। लेकिन आँकड़े बताते हैं कि रामायण के ख़िलाफ़ जहर उगलने वाले गिने-चुने लोग हैं, बाकी इस रामकथा को अपार प्रेम देने में लगे हैं। टीआरपी के लिहाज से इसने पिछले 5 साल का हर रिकॉर्ड कायम दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इन दिनों रामायण की टक्कर में दूसरा कोई शो नहीं है। यह शो पिछले पाँच सालों में यानी 2015 से लेकर अब तक जनरल एंटरटेनमेंट केटेगरी (जीईसी) में बेस्ट सीरियल बन गया है। इस बात की जानकारी प्रेस इन्‍फर्मेशन ब्‍यूरो ने ट्वीट कर दी है। BARC रेटिंग में रामायण के रिपीट शो ने बाजी मारी है। इसे 4 शोज में ही 170 मिलियन व्यूज यानी 17 करोड़ दर्शक मिले हैं।

पीआईबी ने ट्वीट किया, “BARC के मुताबिक, हमने 2015 से टीवी ऑडियंस को मीजर करना शुरू किया। उस वक्‍त से किसी भी हिंदी जीईसी शो को इतनी ज्‍यादा रेटिंग नहीं मिली है, जितनी रामायण के री-टेलिकास्‍ट को मिली है।”

इसके बाद प्रसार भारती के CEO ने लिखा, “मुझे यह बताते हुए काफी ख़ुशी हो रही है कि दूरदर्शन पर प्रसारित हो रहा शो ‘रामायण’ 2015 से अब तक का सबसे अधिक टीआरपी जनरेट करने वाला हिंदी जनरल एंटरटेनमेंट शो बन गया है।”

यहाँ बता दें कि सोशल मीडिया यूजर्स की भारी माँग के बाद रामायण का प्रसारण इसी 28 मार्च से शुरू हुआ है। हर रोज दो बार इसका प्रसारण हो रहा है। दोनों समय दो अलग-अलग एपिसोड प्रसारित होते हैं। यानी दर्शको को एक ही दिन में दो एपिसोड देखने को मिल रहे हैं। ये दूरदर्शन पर रोज सुबह 9 बजे और रात में 9 बजे प्रसारित होता है।

उल्लेखनीय है कि रामानंद सागर के प्रयासों से पर्दे पर आई रामकथा ने 1988 में भी अनोखा इतिहास रचा था। उस दौरान लोगों से मिले अपार प्रेम का ही नतीजा है कि आज भी दर्शक का मोह इसके प्रति कम नहीं हुआ। 1988 में पहली बार प्रसारित हुआ ये धारावाहिक और इसका हर किरदार लोगों में इस तरह घर कर गया कि रामायण के प्रसारण से पहले लोग टीवी की आरती उतारते थे।

जानकारी के लिए ये भी बता दें कि लॉकडाउन के इस समय में दूरदर्शन ने रामायण के अलावा महाभारत, ब्योमकेश बक्शी, शक्तिमान, चाणक्या सहित और भी कई सीरियल्स का प्रसारण शुरू किया है।

7 राज्य जहाँ तबलीगी जमातियों, कोरोना मरीजों को घर, मस्जिदों में छिपा ‘मजहबी भीड़’ ने पुलिस और डॉक्टरों की टीम पर किया हमला

एक तरफ पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। तो वहीं दूसरी ओर मजहबी भीड़ लगातार जमातियों को बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम के साथ पुलिस प्रशासन को भी अपना निशाना बना रही है। निजामुद्दीन की घटना के बाद एक के बाद एक देश के विभिन्न हिस्सों से डॉक्टरों के काम में बाधा डालने और पुलिस प्रशासन पर हमले की खबरें सामने आ रही हैं। यह खबरें चिंताजनक तो हैं ही साथ ही सभ्य समाज को शर्मसार कर देने वाली भी हैं।

गुरुवार को एक खबर झारखंड से आई, जहाँ रांची के हिंदपीढ़ी इलाके में मलेशिया की एक महिला कोरोना पॉजिटिव पाई गई है। जिस घर से महिला मिली, उसके आसपास के घरों में रहने वालों के स्वास्थ्य की जाँच के लिए गुरुवार को जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम को वहाँ भेजा। टीम जैसै ही लोगों की जाँच करने पहुँची तो स्थानीय लोगों ने इनका विरोध किया। इतना ही नहीं लोगों के विरोध के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम को वहाँ बैरंग लौटना पड़ा।

कुछ ऐसी ही एक खबर कर्नाटक से आई, जहाँ बेंगलुरु में कोरोना वायरस से जुड़ा डेटा कलेक्ट करने गई एक आशा कार्यकर्ता पर लोगों ने हमला कर दिया। कार्यकर्ता कृष्णा वेनी का आरोप है कि एक मस्जिद से लोगों को भड़काया गया और इसके बाद उन पर हमला किया गया। दरअसल, आशा कार्यकर्ता कोरोना के मरीजों की हिस्ट्री पता करते हुए एक लिस्ट बना रही थी।

वहीं राजस्थान के टोंग कोतवाली इलाके में सर्वे करने पहुँची स्वास्थ्य विभाग की 6 सदस्यीय टीम पर लोगों ने हमला कर दिया। इस दौरान लोगों ने टीम का विरोध करने के नाम पर पहले तो गालीगलौच की और फिर सभी को जमकर पीटा। इतना ही नहीं डॉक्टरों के हाथों में लगे कागजों को भी फाड़कर नाली में फेंक दिया। हालाँकि, इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है।

वहीं छत्तीसगढ़ के रायपुर में लॉकडाउन के दौरान सैनिटाइजेशन कर रहे नगर निगम के कर्मिचारियों का पहले तो कुछ लोगों ने विरोध किया और फिर उनसे कुछ लोगों ने बदसलूकी करते हुए उनके साथ मारपीट की। इस दौरान कर्मचारियों को वहाँ से अपना जान बचाकर भागना पड़ा।

बिहार के मुजफ्फरपुर में 11 साल की बच्ची की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम लोगों की जाँच करने गई थी। लेकिन, भीड़ ने टीमों पर हमला कर दिया। दो पुलिस जवानों को पीट-पीटकर घायल कर दिया। घटना बुधवार की है। जब स्वास्थ्य विभाग ने जागरूक करने की कोशिश की तो कहने लगे मौत कोरोना की वजह से नहीं हुई। ऐहतियात बरतने को कहा तो पथराव कर दिया।

वहीं बुधवार को मध्य प्रदेश इंदौर शहर के टाटपट्टी बाखल क्षेत्र में मिले एक कोरोना मरीज के बाद वहाँ स्थानीय लोगों की जाँच करने गई मेडीकल टीम पर लोगों ने हमला कर दिया। इतना ही नहीं सूचना मिलने पर पहुँची पुलिस पर भी लोगों ने पत्थर बरसाए थे। डॉक्टरों की टीम में दो महिला डॉक्टर भी शामिल थीं। इसके बाद पुलिस ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक मोहम्मद मुस्तफा, मोहम्मद गुलरेज, सोयब उर्फ शोभी और मज्जू उर्फ मजीद के खिलाफ में रासुका के तहत कार्रवाई की गई है। साथ ही चारों आरोपितों को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के तहत इंदौर से बाहर केंद्रीय जेल रीवा में रखने के आदेश जारी किए गए हैं।

गौरतलब है कि निजामुद्दीन स्थित मरकज की इमारत से जमातियों को जब निकालकर अस्पताल ले जाया जा रहा था उस दौरान वह लोग लगातार रास्ते में थूकते हुए जा रहे थे। वहीं गाजियाबाद के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए संभावित कोरोनावायरस तबलीगी जमाती मरीजों के खिलाफ बीते दिन सीएमओ गाजियाबाद ने कोतवाली घंटाघर में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि आइसोलेशन में रखे गए तबलीगी जमाती बिना कपड़ों, पैंट के नंगे घूम रहे हैं। यही नहीं, आइसोलेशन में रखे गए जमाती अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही नर्सों को गंदे-गंदे इशारे भी कर रहे हैं।

इन घटनाओं को देखते हुए सरकार ने ऐसे लोगों के खिलाफ सख्ती से पेश आने के लिए पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं। वहीं योगी सरकार ने कहा है कि लॉकडाउन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ में अब रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी।

आतंकी संगठनों के लिए फिदायीन तैयार करता है तबलीगी जमात, लगे प्रतिबंध: शिया वक्फ बोर्ड

दिल्ली में तबलीगी जमात के इज्तिमा में सैकड़ों लोगों का जुटान हुआ। निजामुद्दीन स्थित उसके मरकज से दो हजार से ज्यादा लोग निकाले गए हैं। इनमें से कई कोरोना वायरस से संक्रमित हैं। हालत यह है कि देश में संक्रमण के जो नए मामले सामने आए हैं उनमें से दो तिहाई जमात से ही जुड़े हुए हैं। इस संगठन के खिलाफ शिया वक्फ बोर्ड ने प्रतिबंध लगाने की मॉंग की है।

यूपी के मंत्री मोहसिन रजा ने तबलीगी जमात को एक चरमपंथी संगठन बताया है। उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के प्रमुख वसीम रिजवी ने कहा है कि तबलीगी वो जमात है, जो आतंकियों के लिए सुसाइड बॉम्बर तैयार करती है। दोनों नेताओं ने देश विरोधी गतिविधियों में कथित संलिप्तता के लिए ऐसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की माँग की है। वसीम रिजवी ने कहा कि निजामुद्दीन मरकज के जमातियों ने अल्लाह के घर को बदनाम किया है। ये लोग मस्जिदों से क्या मौत बाँटने निकले थे। मौलाना साद के खिलाफ हत्या का मुकदमा होना चाहिए।

मोहसिन रजा ने कहा, “एक चरमपंथी संगठन ने भारत-विरोधी गतिविधि ऐसे समय में प्रदर्शित किया है, जब देश एकजुट होकर कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ रहा है। उन्होंने मजहबी सभा आयोजित करके सरकारी आदेश को धता बता दिया। संगठन के अंतर्राष्ट्रीय वित्त पोषण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए और कानूनी कार्रवाई भी की जानी चाहिए।”

इससे पहले अपने विडियो संदेश में भी वसीम रिजवी ने तबलीगी जमात को समुदाय विशेष का एक खतरनाक समूह बताया था। उन्होंने कहा था कि तबलीगी जमात दुनिया का सबसे खतरनाक जमात है जो आतंकी संगठनों के लिए नौजवान लड़कों को गलत इस्लाम समझाकर तैयार करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमात ने अपने यहाँ लोगों में कोरोना वायरस डेवलप कराकर हिंंदुस्तान भेजा, ताकि ज्यादा से ज्यादा मौतें हों। ये मौतों के सौदागर हैं और इंसानियत के दुश्मन हैं। इनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए और पूरे हिंदुस्तान में इसको प्रतिबंधित कर देना चाहिए।

वसीम रिजवी ने कहा कि इस संगठन को दुनिया के कट्टरपंथी और आतंकी चला रहे हैं। इसका पैसा पूरी दुनिया से इसी काम के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह संगठन नौजवान लड़कों को बताता है कि काफिरों को मारना सवाब है।

इससे पहले अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य सरदार परविन्दर सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा गया कि निजामुद्दीन मरकज में जिस तरह कोरोना से बचाव की मुहिम का उल्लघंन किया, वह देश के लिए बड़ा खतरा बन गया है। इस नाते जमात पर प्रतिबंध लगाया जाए। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी कहा था कि निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के मुख्यालय मरकज में एक धार्मिक आयोजन में शामिल लोगों के जमावड़े की घटना किसी तालिबानी अपराध से कम नहीं है और अधिकारियों को इससे सख्ती से निपटना चाहिए।

निजामुद्दीन मरकज का असर अब नेपाल तक: 18 लोगों को किया क्वारंटाइन, बाकियों की तलाश में सभी जिले अलर्ट

नेपाल के सप्तरी जिले में बुधवार (मार्च 2, 2020) को वहाँ के प्रशासन ने कम से कम 18 मुस्लिमों को पकड़कर लक्ष्मी नारायण स्कूल में क्वारंटाइन किया। सभी निजामुद्दीन मरकज में तब्लीगी जमात द्वारा आय़ोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद वापस लौटे थे। इसके साथ ही उनके अन्य साथियों की तलाश में सभी जिलों को अलर्ट कर दिया गया है।

नेपाल पुलिस के अनुसार 200 से अधिक लोग दिल्ली के तब्लीगी मरकज के लिए गए थे, जो वापस नेपाल आ चुके हैं। कोरोना जैसी महामारी देश में न फैले, इसलिए जल्द से जल्द सभी को पुलिस कस्टडी में क्वारंटाइन करने का फरमान नेपाल सरकार ने दिया है। नेपाल के सप्तरी और बारा जिले में गुरुवार को नेपाल पुलिस ने मदरसों में छापेमारी कर 20 लोगों को हिरासत में लिया है। 

वहीं एक अन्य मामले में नेपाल के विभिन्न भागों में गए 400 भारतीयों के बीरगंज इलाके में बॉर्डर बंद होने के कारण फँसे होने की सूचना है। परसा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) गंगा पांटा के अनुसार, बॉर्डर पार कर भारत की ओर जाने वाले भारतीय नागरिकों के विशाल जनसमूह को एक शिक्षा संकाय भवन में रखा गया है। इन्हें नेपाल पुलिस खाना मुहैया करवा रही है।

इसके अलावा बता दें कि सप्तरी से नेपाल के काठमांडू पहुँचे 13 इंडोनेशियाई लोगों को गोदावरी विलेज रिज़ॉर्ट में कोरोंटाइन के लिए भेजा गया है। उन्हें शुरुआत में पुलिस द्वारा एक मस्जिद में ले जाया गया था, लेकिन जल्द ही सीमित सुविधाओं के कारण उन्हें रिसोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसमें 50 लोगों को रखा जा सकता है।

अब तक नेपाल में कोरोनोवायरस के केवल 5 मामलों के पुष्टि होने की सूचना है। लेकिन तब्लीगी जमात के कारण यहाँ पर इस संख्या में बढ़त होने के आसार हैं। क्योंकि, यदि भारत के संदर्भ में देखें तो अब तक जिस राज्य में भी इस जमात में शामिल लोग लौटें, वहाँ पर अकस्मात संक्रमण के मामलों में इजाफा हुआ।

बता दें कि नेपाल ने अपने देश को इस प्रकोप से बचाने के लिए काफी उपाय किए हैं। उन्होंने 23 मार्च से ही भारत और चीन की सीमा को सील किया हुआ है। साथ ही अपने देश के कई इलाकों में लॉकडाउन भी कर रखा है।

गौरतलब है कि जिस तब्लीगी जमात ने पूरे भारत में कोरोना के केसों को बढ़ाकर नेपाल की ओर अपने पैर बढ़ाए हैं। उसके प्रमुख की वायरल ऑडियो ने इस कार्यक्रम की मंशा को साफ कर दिया था। जिसमें वो कहता सुना जा सकता था कि लोग लॉकडाउन करके मस्जिदों को बंद करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इन सबसे कुछ नहीं होगा। इस समय में मस्जिदों को आबाद रखना सबसे ज्यादा जरूरी है और डॉक्टरों से ज्यादा अल्लाह पर विश्वास करना सबसे बड़ा काम।