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जमात की नंगई पर केजरीवाल के मंत्री ने कहा- भाषा की परेशानी है, उन्हें हिंदी-अंग्रेजी नहीं आती है

कल्पना कीजिए आप गैर हिंदी भाषी प्रदेश में हैं। आपको जाँच के लिए अस्पताल ले जाया जाता है। आपको वहॉं की भाषा समझ में नहीं आती। तो आप क्या करेंगे? आप डॉक्टर पर थूकेंगे? आप नर्स के सामने अपनी पतलून उतार लेंगे? आप बीड़ी-सिगरेट मॉंगेंगे? या फिर आप अश्लील गाने सुनेंगे और अस्पताल की महिला कर्मचारियों को भद्दे इशारे करेंगे?

आप यह सब कर सकते हैं, क्योंकि आपको वहॉं की भाषा समझ में नहीं आती। ये हम नहीं कह रहे। ऐसा मानना है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन का। जैन केजरीवाल कैबिनेट में स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा सॅंभालते हैं। बकौल जैन, “एक तो भाषा की परेशानी है। ज्यादातर लोगों को ना तो हिंदी आती है और ना ही अंग्रेजी आती है। वे दूर-दूर के राज्यों के हैं। कई विदेशी हैं। दूसरा उनको लगता है कि हमको अस्पताल में क्यों रखा गया है। पुलिस से मदद मॉंगी गई है।” जैन ने यह बात तबलीगी जमात के सदस्यों द्वारा अस्पताल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कही।

उल्लेखनीय है कि नियम-कायदों की धज्जियॉं उड़ाकर तबलीगी जमात ने दिल्ली में मजहबी कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों के अलावा विदेशियों ने भी शिरकत की। खुद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया था कि निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से अभियान चलाकर 2361 लोगों को निकाला गया था। ये दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों और क्वारंटाइन में हैं। हालत यह है कि बीते दो दिनों में देश के 14 राज्यों में 647 कोरोना वायरस संक्रमण के ऐसे मामलों की पुष्टि हुई है जो मरकज से जुड़े हैं।

जब इनलोगों को यहॉं से निकाला जा रहा था तो उन्होंने सड़क और पुलिसकर्मियों पर थूक कर संक्रमण फैलाने की कोशिश की। इसके बाद भी इनकी मनमानी जारी है। दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में जॉंच में इनकी आनकानी देखते हुए पुलिस तैनात करनी पड़ी। यह मामला केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के एक अस्पताल में तो जमात के लोग हदें पार करते हुए नर्सों के सामने नंगे हो गए। हैदराबाद के गॉंधी अस्पताल में यहॉं से संक्रमित होकर गए एक शख्स ने डॉक्टर पर हमला किया। उस पर थूका।

आप गिनते जाएँगे, लेकिन पिछले कुछ दिनों में सामने आए जमात सदस्यों के कारनामें खत्म नहीं होंगे। बावजूद इनकी करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिश करते हुए ‘भाषा’ का जैन का तर्क समझ से परे है। वैसे जमात की करतूत पर पर्दा डालने की कोशिश करने वाले जैन आप के अकेले नेता नहीं है। मुख्यमंत्री केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले विधायक अमानतुल्लाह खान ने ट्वीट कर कहा है, “मुख़्तार अब्बास नक़वी और आरिफ़ मुहम्मद खॉं जैसे दलाल बताएँगे कि मौलाना साद साहब जैसे बुज़ुर्ग क्या हैं और मरकज़ निज़ामुद्दीन में क्या होता है। इन जैसे लोगों ने कोरोना को भी मुस्लिम बना दिया अफ़सोस।” नकवी केंद्र सरकार में मंत्री और आरिफ मुहम्मद केरल के राज्यपाल हैं। जिस मौलाना साद का अमानतुल्लाह बचाव कर रहे हैं, वह मुकदमा दर्ज होने के बाद से फरार है। जिस मरकज के लिए वे नकवी और आरिफ मुहम्मद को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, वह देश में कोरोना वायरस संक्रमण का एपिक सेंटर बनकर उभरा है।

यह भी दीगर है कि लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के पलायन और यूपी बॉर्डर पर अचानक जुटी भीड़ को लेकर भी दिल्ली की आप सरकार आरोपों के घेरे में है। घर लौटे मजदूरों का कहना है कि उनके बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए गए। उनसे कहा गया कि बॉर्डर से बसें उन्हें लेकर उनके घरों तक जाएगी। डीटीसी की बसों से उन्हें वहॉं तक पहुॅंचाया गया।

आज जिस तरह से तबलीगी जमात के लोगों की करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है, ऐसा उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान भी देखने को मिला था। पार्षद ताहिर हुसैन इन दंगों का मुख्य सूत्रधार बनकर उभरा था। उसके घर से हिंदुओं को निशाना बनाकर पेट्रोल बम फेंके गए। आईबी के अंकित शर्मा की हत्या में भी उसका हाथ बताया जाता है। हालॉंकि जब ताहिर की संलिप्तता को लेकर लगातार तथ्य सामने आने लगे तो आप ने उसे निलंबित कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। लेकिन, अमानतुल्लाह जैसे ​आप विधायक फिर भी उसका बचाव करते रहे। अमानतुल्लाह ने आरोप लगाया था कि मुसलमान होने के कारण ताहिर को फॅंसाया गया है।

दिल्ली: जीबी रोड़ स्थित रेडलाइट एरिया में RSS कार्यकर्ताओं ने वितरित की खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुएँ

देश में जारी लॉकडाउन और कोरोना महामारी से जंग लड़ने के दौरान विभिन्न समस्याओं के लिए जूझ रहे देश वासियों के लिए तमाम तरह की सामाजिक संस्थाएँ सहयोग के लिए सामने आ रही हैं। कुछ इसी तरह अपनी पहचान के अनुरूप विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस समय असहाय लोगों की मदद करने में जुटा हुआ है। इसी के तहत दिल्ली के जीबी रोड़ स्थित रेडलाइट इलाके में आरएसएस के कार्यकर्ता वैश्यावृत्ति से जुड़ी महिलाओं को खाद्य सामग्री वितरित की।

दिल्ली के रेडलाइट एरिया से आई तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि आरएसएस के कार्यकर्ता वैश्यावृत्ति से जुड़ी महिलाओं को आवश्यक वस्तुओं की एक किट वितरित कर रहे हैं। दिल्ली प्रांत कार्यवाहक अनिल गुप्ता के मुताबिक जीबी रोड़ इलाके में 986 सेक्स वर्कर कार्य करती हैं। इन सभी की संघ के कार्यकर्ताओं ने पहले एक सूची तैयार की और फिर इनको 250 जोड़ों में विभाजित किया। इसके बाद सभी 250 जोड़ों को आवश्यक वस्तुओं की एक-एक किट वितरित की।

यह पहली बार नहीं इससे पहले भी देश में लॉकडाउन होने के बाद से ही संघ के स्वयंसेवक और दायित्ववान कार्यकर्ता पात्र लोगों की मदद करने में लगे हुए हैं। पिछले दिनों ऐसी ही एक खबर राजस्थान के एक जिले आई जहाँ संघ के स्वयंसेवक एक स्थान पर बड़ी मात्रा में गरीब मजदूरों के लिए भोजन पैकेट बनाते हुए देखे गए। वहीं पिछले दिनों एक केरल के एक अस्पताल में संघ के स्वयंसेवक साफ-सफाई करते हुए नजर आए।

इससे पहले भी आरएसएस के स्वयंसेवक सिर पर काली टोपी और खाकी हाफ नेकर पहने हाथ में सेनेटाइजर लेकर लोगों के हाथ साफ कराने में लगे हुए थे। वहीं दूसरी दूसरी तस्वीर में स्वयंसेवक हाथ में लाउडस्पीकर लिए लोगों को कोरोना से बचाव के उपाय बता रहे थे। साथ ही लोगों को घरों से न निकलने की अपील कर रहे थे। इतना ही नहीं स्वयंसेवक घर-घर जाकर लोगों को मास्क भी बाँटे।

आपको बता दें कि संघ नेतृत्व ने देश में लॉकडाउन घोषित होते ही अपने स्वयंसेवकों से अपने घरों में ही शाखा, मिलन, मंडली जैसे कार्यकर्म आयोजित करने का अपील की थी। साथ ही स्वयंसेवकों से आह्वाहन किया था कि वह घरों से निकलकर अपने आस-पास यथासंभव लोगों की मदद करें।

PMNRF vs PM CARES: क्या आपको पता था कि PMNRF की प्रबंधन कमेटी में हमेशा ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को रखने की व्यवस्था थी?

प्रधानमंत्री मोदी ने जब से वुहान कोरोना वायरस से लड़ने के लिए PM CARES फण्ड की स्थापना की है, PM CARES फंड और PMNRF फंड के बीच मौजूद समानताओं और विषमताओं पर विचार विमर्श शुरू है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहायता कोष यानी PMNRF की स्थापना 1948 में की गई थी जिसका प्रारम्भिक उद्देश्य विभाजन की विभीषिका के बाद पाकिस्तान से खदेड़े गए, जान बचाकर भागे लोगों की सहायता करना था। आज के समय में PMNRF का उपयोग मुख्यतः प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, चक्रवात, भूकंप, आदि में मारे गए बेघर हुए लोगों की सहायता करना, साथ ही बड़ी दुर्घटनाओं, दंगों के पीड़ितों की सहायता करना हो चुका है।

इसके अतिरिक्त इस फंड का प्रयोग असहाय अथवा निर्धन व्यक्तियों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं यथा हार्ट सर्जरी किडनी ट्रांसप्लांटेशन कैंसर के इलाज आदि में मदद करने के लिए भी किया जाता है। यह फंड पूर्णतः जन सहयोग पर निर्भर करता है जिसके लिए बजटीय प्रावधानों की व्यवस्था नहीं है। यह कोष कामर्शियल बैंकों और दूसरी एजेंसियों के द्वारा निवेशित किया जाता है जिससे धन की निकासी प्रधानमंत्री की सहमति से ही होती है।

यहाँ यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि PMNRF फंड संसद द्वारा गठित नहीं किया गया है। देश के विभाजन के समय प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि हालाँकि भारत सरकार अपने कोष का उपयोग कर विस्थापितों को दोबारा बसाने में लगी हुई है, किन्तु यह कोष पूरा नहीं पड़ रहा। अतः विस्थापितों को दोबारा खड़ा करने के लिए राष्ट्र के सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। इस उद्देश्य के साथ PMNRF की स्थापना की गई थी जो कालांतर में सभी प्रकार की आकस्मिक दुर्घटनाओं, आपदाओं आदि के समय उपयोग किया जाने लगा।

हालाँकि, जो तथ्य तबसे आज तक कम ही लोग जानते हैं, वह है – PMNRF कोष की मैनेजिंग कमेटी में हमेशा से कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष की मौजूदगी थी। जिस समय फंड बनाया गया उसकी मैनेजिंग कमेटी में निम्न लोग शामिल थे :

i) भारत का प्रधानमंत्री
ii) भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष
iii) देश के उप प्रधानमंत्री
iv) देश का वित्त मंत्री
v) टाटा ट्रस्ट का प्रतिनिधि
vi) FICCI द्वारा चुना गया, इंडस्ट्री और कॉमर्स जगत का प्रतिनिधि

1948 Notification announcing formation of PMNRF by PM Jawaharlal Nehru

यहाँ तक की 1985 में किसी समय इस कोष की मैनेजिंग कमेटी ने कोष के प्रबंधन से संबंधित सभी अधिकार प्रधानमंत्री को सौंप दिए। प्रधानमंत्री को अधिकार मिल गया कि वह अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी को “कोष का सचिव” नियुक्त कर सकता था जिसके पास अन्य बातों के अलावा यह भी कोष के बैंक अकाउंट संचालित करने का भी अधिकार था। बतातें चलें कि यह निर्णय उस वक्त लिया गया जब राजीव गाँधी देश के प्रधानमंत्री थे।

वुहान कोरोना वायरस के इस संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने PM CARES फंड लॉन्च किया है, जिसमें सहयोग करने के लिए उन्होंने पूरे देश का आह्वाहन किया है। यह एक आपातकालीन कोष है जिसका उपयोग कोरोना वायरस से निपटने के लिए किया जाएगा। PM CARES यानी ‘प्राइम मिनिस्टर सिटीजन्स असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन’ कोष की स्थापना पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में की गई है। प्रधानमंत्री जहाँ इस ट्रस्ट के चेयरमैन हैं, वहीं देश के रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री तथा गृह मंत्री इस ट्रस्ट के सदस्य हैं।

जैसे ही यह कोष लॉन्च हुआ, देश के हर ख़ास ओ आम से इसे अपार सहयोग मिलना प्रारम्भ हो गया। जिसमें आम जनता से लेकर उद्योगपतियों फिल्म स्टार्स आदि ने अपना अपना अंशदान करना शुरू कर दिया। यहाँ ये सवाल लगातार पूछा जा रहा कि आखिर PM CARES फंड नामक नए फंड की जरूरत क्या थी जब कि PMNRF मौजूद था ही।

बिजनेस स्टैंडर्ड ने अपने एक आर्टिकल में लिखा है कि PM CARES फंड PMNRF की तुलना में कहीं ज्यादा लोकतान्त्रिक है। वो लिखता है:

PMNRF के अंतर्गत कोष से पैसे का वितरण पूरी तरह प्रधानमंत्री के निर्देशों पर आधारित था। जबकि मोदी के PM CARES में निर्णयकर्ताओं में मोदी के साथ भारत सरकार के तीन महत्त्वपूर्ण पोर्टफोलियो संभालने वाले मिनिस्टर भी शामिल हैं। ट्रस्ट के चेयरमैन होने के नाते अभी भी मोदी के ही पास अपने मंत्रियों की किसी भी सलाह आदि पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सुरक्षित है लेकिन PMNRF की भाँति मोदी ही ‘जज वकील और जल्लाद’ की भूमिका में नहीं हैं। इस तरह से मोदी ने खुद ही खुद के ऑफिस की शक्तियों पर अंकुश लगाने का काम किया है।

PMNRF और PM CARES के बीच का अंतर:

Difference between PM CARES Fund and PMNRF (By Business Standard)

संक्षेप में PM CARES, PMNRF की तुलना में कहीं ज्यादा पारदर्शी और सक्षम है हालाँकि, PMNRF भी समय-समय पर नागरिकों की मदद के लिए आगे आता रहा है। यहाँ यह भी बताते चलें कि PM CARES में 13 विशेषज्ञों को भी शामिल करने का प्रावधान है जो अपनी सेवाएं देश के लिए निःशुल्क प्रदान करेंगे। इसमें सलाहकारी बोर्ड के तौर पर भी 10 व्यक्तियों को शामिल करने की व्यवस्था है- जिन्हें ट्रस्टीज द्वारा डॉक्टरों, स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनलों, अकादमिक जगत के लोगों, अर्थशास्त्रियों और वकीलों में से चुना जाएगा।

बीजेपी के एक सीनियर नेता ने PM CARES पर कॉन्ग्रेस के विरोध को खुद के स्वार्थों से प्रेरित बताते हुए कहा कि वे सिर्फ इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकी PM CARES में PMNRF की भाँति कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को जगह नहीं दी गई है। बीजेपी नेता ने आगे कहा, ” इस फंड में बीजेपी से भी कोई नहीं है- ट्रस्ट में जो भी लोग हैं वो सरकार में अपनी पोजीशन की वजह से हैं।”

तबलीगी जमात के मौलाना साद समेत 7 को क्राइम ब्रांच का नोटिस, 26 सवालों के माँगे जवाब

तबलीगी जमात के नेता मौलाना साद कांधलवी पर शिकंजा कसता जा रहा। दिल्ली पुलिस ने मौलाना समेत 7 लोगों को नोटिस जारी किया है। इसमें इनसे 26 सवालों के जवाब मॉंगे गए हैं। मुक़दमा दर्ज के बाद से ही दिल्ली पुलिस इनकी तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है।

दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने नोटिस जारी कर मौलाना साद से 26 सवालों को जवाब माँगे हैं। दिल्ली पुलिस ने जमात से जुड़े पदाधिकारी, कमेटी में शामिल लोग, तीन साल में भरे गए आयकर, संस्था का पैन नंबर सहित बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट, 1 जनवरी से अब तक आयोजित मजहबी सभाओं की संख्या, परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की संख्या, मरकज में शामिल होने वाले लोगों का ऑडियो या वीडियो का ब्यौरा, 12 मार्च के बाद विदेशियों सहित आने वाले श्रद्धालुओं की लिस्ट को लेकर जानकारी माँगी है।

12 से मार्च के बाद समारोह में शामिल होने वाले लोगों के रिकॉर्ड का रजिस्टर, इस बीच क्या कोई जमाती बीमार पड़ा, साथ ही इमारत खाली कराने के लिए मरकज की ओर से उठाए गए कदम, लॉकडाउन लगने के बाद प्रबंधन की ओर से उठाए गए कदम, जिन लोगों को अस्पताल ले जाया गया उनकी तारीखवार सूची, 12 मार्च के बाद मस्जिदों या अन्य स्थानों पर ले जाने वालों की तारीखवार सूची, मरकज में शामिल होने और उसके बाद मरने वाले लोगों का ब्यौरा भी माँगा गया है।

इसके साथ ही पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान किसी को भी जारी किए गए कर्फ्यू पास का ब्यौरा, 12 मार्च के बाद मरकज में आने वाले किसी भी सरकारी एजेंसी के लोगों का ब्यौरा और ऐसे कोई भी कागजात भी पुलिस ने अपने नोटिस के माध्म से जमात से माँगे हैं।

गौरतलब है कि निजामुद्दीन स्थित मरकज को बुधवार को खाली कराकर यहाँ से कुल 2361 लोगों को निकाला गया था। इसके बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया था कि मरकज में 36 घंटे का सघन अभियान चलाकर कुल 2361 लोग बाहर निकाले गए। इनमें से 617 को अस्पतालों में और बाकी को अलग-अलग जगहों पर क्वारंटाइन किया गया है।

मौलाना साद फरार है। उसके भी कोरोना संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। असल में मौलाना ने एक ऑडियो जारी कर कहा था कि वह डॉक्टर के कहने पर घर पर ही क्वारंटाइन हैं। साथ ही उसने जमात के लोगों से भी सरकारी गाइडलाइन पालन करने को कहा। इसके बाद से यह सवाल उठ रहा है कि मौलाना खुद भी तो संक्रमित नहीं हो गया है। या फिर गिरफ्तारी से बचने के लिए वह क्वारंटाइन की बात कह रहा है। उल्लेखनीय है कि इस ऑडियो से पहले उसने कोरोना संक्रमण को लेकर जमात के लोगों को गुमराह करने का काम किया था।

भूल-सुधार: त्रुटिवश इस रिपोर्ट में कुछ समय के लिए मौलाना साद की जगह, मीडिया में चलती भ्रमित करने वाले तस्वीरों के कारण, किसी और व्यक्ति की तस्वीर लगा दी गयी थी। उसे अब सुधार लिया गया है। हमें इसका खेद है और इसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति की छवि को क्षति पहुँचाना नहीं था।

निजामुद्दीन में कोरोना से दुकानदार की मौत: यहीं से सामान खरीदते थे मरकज के जमाती, अब हजारों संकट में, इलाके में दहशत का माहौल

कोरोना वायरस का असर तेजी से देश भर में बढ़ता जा रहा है। अब तक कोरोना वायरस के चलते 2000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं 56 लोग इस वायरस के चलते अपनी जान गँवा चुके हैं। राजधानी दिल्ली में भी निजामुद्दीन स्थित मरकज की वजह से लगातार कोरोना के पॉजिटिव केस बढ़ते जा रहे हैं।

इस बीच निजामुद्दीन इलाके से 74 साल के एक दुकानदार की मौत की खबर आई। दरअसल, बुजुर्ग की मौत सोमवार को ही मरकज के पास वाली गली में हो गई थी। अब उसकी जाँच रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें मृतक के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई और साथ ही कहा गया कि उसकी मौत इसी जानलेवा वायरस की वजह से हुई। इस दुकानदार की मौत इसलिए ज्यादा अहम है क्योंकि इसी दुकान से जमात के कई लोग सामान खरीदते थे।

इस खुलासे ने खतरे की एक और घंटी बजा दी है। इस खबर के बाद अब पूरी निजामुद्दीन बस्ती में कोरोना का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि इस बुजुर्ग की मरकज के पास दुकान थी और दुकान पर जमात के लोगों के साथ ही बस्ती के लोग भी काफी संख्या में सामान लेने के लिए आते थे। अब पूरी बस्ती में लोगों की संक्रमण की जाँच की जाएगी। बुजुर्ग की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बस्ती में हड़कंप मच गया। इसे दिल्ली में दुकानदार की पहली मौत बताया जा रहा है। 

बुजुर्ग मरकज से करीब 50 मीटर दूर स्थित घर में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनकी यहीं पर दुकान थी जिसमें वह खुद बैठते थे। मृतक की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद से अब पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। दरअसल, दुकान चलाने के कारण बुजुर्ग के संपर्क में रोजाना सैकड़ों लोग आते रहे होंगे। सामान लेते होंगे, नोट व सिक्कों का आदान-प्रदान होता होगा। बुजुर्ग के पास मरकज के जमाती भी सामान लेने आते थे। बुजुर्ग खुद भी मरकज के अंदर सामान देने जाते थे। 

अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन सभी लोगों को ट्रेस करने की है जो यहाँ आते-जाते थे। अब इस कॉलोनी के आसपास हजारों लोगों में कोरोना संक्रमण फैल जाने का खतरा पैदा हो गया है। पुलिस के मुताबिक अब दुकानदार के पूरे परिवार के सदस्यों की जाँच कराई जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को निर्देश दिए गए हैं।

बता दें कि निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात में शामिल हुए कोरोना संदिग्ध राजधानी समेत पूरे देश के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। गाजियाबाद में जमातियों के दुर्व्यवहार के बाद अब दिल्ली के कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने शिकायत की है कि जमात के लोग जाँच और इलाज कराने को तैयार नहीं हैं। यहाँ तक कि ये लोग डॉक्टरों को धमकियाँ तक दे रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि वे बिल्कुल स्वस्थ हैं और इनको इलाज या भर्ती करने की जरूरत नहीं है।

दिल्ली के कई अस्पतालों ने दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग को तबलीगी जमातियों द्वारा किए जा रहे व्यवहार के विषय में जानकारी दी। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने पत्र लिखकर अस्पतालों और क्वारंटाइन केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाने का दिल्ली पुलिस से आग्रह किया। सरकार के आग्रह के बाद अस्पतलाओं और क्वारंटाइन केंद्रों में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने स्पष्ट रूप से दिल्ली पुलिस को लिखा था कि तबलीगी जमात के लोग डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं और साथ ही उन पर थूक भी रहे हैं।

रामायण धारावाहिक की सफलता से बौखलाए वामपंथी व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन ने किया खबर देने वाले मेम्बर को ग्रुप से बाहर

कोरोना वायरस की महामारी के दौरान देशभर में कुछ ऐसी घटनाएँ भी जारी हैं, जिनसे देश का वामपंथी समाज घर पर बैठे-बैठे आहत हो रहा है। वामपंथियों को सबसे ताजा दर्द दूरदर्शन पर फिरसे प्रसारित हो रहे रामायण धारावाहिक से हो रहा है। इस धारावाहिक ने एक बार फिरसे लोकप्रियता के नए मुकाम हासिल कर लिए हैं और इसी कारण सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप्स तक में कुछ लोग इसकी चर्चा से भी घबरा कर लोगों से ‘डिस्टेंस’ बना रहे हैं।

ऐसे ही एक घटना के शिकार अनिल बिस्वाल ने ट्विटर पर अपनी आपबीती बताते हुए लिखा है कि किस तरह से उन्हें व्हाट्सएप समूह से एक वामपंथी ने सिर्फ इसलिए बाहर कर दिया क्योंकि उन्होंने वहाँ रामायण धारावाहिक की सफलता की चर्चा की।

अनिल बिस्वाल ने लिखा है – “अगर आप यह कहते हैं कि रामायण सबसे ज्यादा देखा जाने वाला धारावाहिक बन गया है तो वामपंथी आपको साम्प्रदायिक कहकर आपको व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल देते हैं।”

अपने ट्वीट में व्हाट्सएप समूह के एडमिन की जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा है- “ओडिसा के भालाचंद्रन सारंगी जो कि एक कट्टर CPIM लीडर हैं, ने यह काम किया है। स्क्रीनशॉट संलग्न है।”

उल्लेखनीय है कि रामायण सीरियल पिछले पाँच सालों में यानी 2015 से लेकर अब तक जनरल एंटरटेनमेंट केटेगरी (जीईसी) में बेस्ट सीरियल बन गया है। इस बात की जानकारी प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्‍यूरो ने ट्वीट कर दी है। BARC रेटिंग में रामायण के रिपीट शो ने बाजी मारी है। इसे 4 शोज में ही 170 मिलियन व्यूज यानी 17 करोड़ दर्शक मिले।

सोशल मीडिया पर भी एक वर्ग-विशेष द्वारा निरंतर रामायण धारावाहिक के प्रसारण पर आपत्ति जताते हुए देखा जा सकता है।

महाराष्ट्र में 50,000 लोगों का जुटान करने वाला था तबलीगी जमात, कोरोना संक्रमण से मंसूबों पर फिरा पानी

दिल्ली में नियम-कायदों को ताक पर रखकर कार्यक्रम आयोजित करने और निजामुद्दीन स्थित अपने मरकज में सैकड़ों लोगों को रखने वाले तबलीगी जमात के इरादे महाराष्ट्र में भी बड़ा जुटान करने के थे। उसने 12-13 मार्च को वसई सनसिटी में 50,000 लोगों को इकट्ठा करने की योजना बनाई थी। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के दो मामले सामने आने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने इस आयोजन की अनुमति से इनकार कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने प्रारंभ में 6 फरवरी को इस जलसे के लिए अपनी अनुमति दे दी थी। बाद में इस निर्णय को बदल दिया गया, क्योंकि संक्रमण के मामले सामने आने के बाद सतर्कता बरतने की जरूरत समझी गई। राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि जब तबलीगी जमात ने अपने जलसे को लेकर अड़ने की कोशिश की तो उन्होंने सख्त लहजे में क़ानूनी एक्शन लेने की चेतावनी दी।

कोंकण रेंज के इंस्पेक्टर जनरल निकट कौशिक ने कहा, “हमने 6 मार्च को अपनी अनुमति वापस ले ली और उन्हें इसके बाबत सूचना दे दी।” तबलीगी जमात के एक सदस्य ने बताया कि उनकी योजना महाराष्ट्र के पुणे, रत्नागिरी और रायगढ़ में ऐसे ही जलसों को आयोजित करने की थी।

रिपोर्ट्स के अनुसार ठाणे के राबोडी पुलिस स्टेशन में लॉकडाउन का उलंघन करने पर एक समूह के 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है जो नमाज अदा करने के लिए इकट्ठे हुए थे। 15 बांग्लादेशी और 12 मलेशियाई नागरिकों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज की गई है। ये निजामुद्दीन के मरकज में गए थे। राज्य के मंत्री जितेंद्र अहृवाड ने बताया कि फिलहाल इन सभी को अभी होम क्वारन्टाइन में रखा गया है।

287 में से उन 211 विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट जब्त किए जा चुके हैं जो मार्च 13-15 के बीच तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। ये सारे विदेशी उत्तर प्रदेश की अलग-अलग मस्जिदों में छिपे हुए थे। इनके खिलाफ कुल 34 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन 960 विदेशी नागरिकों के वीजा को भी निरस्त कर दिया जिन्होंने नियमों की अवहेलना करते हुए तबलीगी की गतिविधियों में हिस्सा लिया था। यह भी रिपोर्ट्स में आ रहा है कि कल बृहस्पतिवार को एक दिन में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण के जो मामले सामने आए हैं, उनमें 60% मामले उनसे संबंधित हैं जो मरकज में शामिल हुए थे।

बकैत कुमार का प्राइम टाइम लीक: समुदाय विशेष से जबरन दीपावली मनवाने की साजिश की जा रही है

नमस्कार, मैं बकैत कुमार

नौ बजे, एक आदमी आता है, कहता है फलाने दिन नौ बजे बत्ती जलाओ, टॉर्च जलाओ, फ्लैश लाइट जलाओ, प्रकाश करो… ठीक है, जिसने चुना है वो जलाएँ, उससे दिक्कत नहीं है। जिसने वोट दिया अपना टॉर्च जलाए, माँग कर जलाए लेकिन हमारे लिबरल और सेकुलर लोगों का क्या? हमारी तो अभी से ही सुलगने लगी है, और पाँच तारीख तक तो हवा का बहाव सही रहा तो आग भी जल जाएगी।

क्या ये हमारे जैसे लोगों पर हमला नहीं है? हमारा जब मन नहीं है तो भी हमें दूसरे तरीके से मजबूर क्यों किया जा रहा है? दूसरी बात, हम तो टॉर्च नहीं जलाएँगे, हमारा तो शरीर का स्थान विशेष जल जाएगा, उसके लिए बरनॉल कहाँ से लाएँगे? ये सही है कि दो दिन पहले ही बता दिया ताकि हम लिबरलों और कामपंथियों, सॉरी वामपंथियों की सुलगनी शुरु हो जाए और नियत समय पर भक्क से आग लग जाए!

बाकी समय ये प्रधानमंत्री विज्ञान का प्रयोग नहीं करेगा, लेकिन विरोधियों की सुलगाने की पूरी प्लानिंग की जा रही है। यहाँ पूरा अग्निविज्ञान की सहायता ली गई है और लॉकडाउन में बरनॉल तो छोड़िए कच्चे आलू पीस कर लगाने के लिए भी घर में बीवी कूच देगी, ये आखिर हो क्या रहा है? क्या विरोधियों को ऐसे घाव देना चाहती है मोदी सरकार? आम आदमी को चुनना पड़ रहा है कि आलू को सब्जी में डाले या जली हुई जगह पर लगा कर राहत पाए।

दूसरी बात यह भी है कि क्या यह अल्पसंख्यकों का उपहास नहीं है? पिछली बार गरीब की थाली बजवा कर पिचका दी थी और कलावती अब टेढ़ी थाली में खाना खाती है, ग्लास फूट गया है, सेलो टेप मार कर पानी पीती है… इस बार कलावती से मन नहीं भरा तो नाजरा बानो पर निशाना साधा गया है कि बेचारी अनभिज्ञता में दिया जला लेगी और शौहर पूछेगा कि जबरन दीवाली क्यों मनाई जा रही है!

हमने ज़ोया से इस संदर्भ में बात की तो उन्होंने कहा, “कितना तेल बर्बाद होगा ये भी तो सोचिए। इतने तेल में तो बकरीद पर लाखों बकरे पक जाते। यही है मोदी जी का सबका साथ सबका विकास? मनमोहन सिंह जी आज होते तो कहते तेल पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है। सऊदी वाला क्रूड ऑयल नहीं, उस पर तो है ही पहला हक काफिरों।”

ताकि कोई ये न कहे कि हमने फर्जी बयान छापा है!

क्या जवाब देगी ज़ोया बेगम? सलमा क्या कहेगी पति से? क्या अब इस निजाम में समुदाय विशेष जबरन हिन्दुओं के पर्व मनाएगा? और अगर नहीं मनाएगा तो बगल का हिन्दू उसे देशद्रोही घोषित कर देगा! आप सोचिए कि समाज को कहाँ ले जाया जा रहा है! एकजुट होनी की यह मुहिम भले ही मोदी और उनके आईटी सेल वाले, अजीत भारती टाइप के भक्त जीत लें, लेकिन एक समाज के तौर पर हम हार रहे हैं।

हमने बेजान मुस्तफा से इस बारे में बात की तो उन्होंने कहा कि उनकी समस्या ये है कि रात में गलती से भी टॉर्च का फोकस पड़ोसन पर गया तो घर में तीसरी बार महाभारत चालू हो जानी है। आप चाहें तो हँस सकते हैं इस बात पर, लेकिन दिल में पूछिए कि पत्नी बगल में हो, और हड़बड़ी में टॉर्च की रोशनी पड़ोसन पर पड़े और उसी वक्त वो मुस्कुरा दे…

चिंटुआ के पापा की ऐसी धुलाई होगी कि मोदी जी के अगले सामूहिक कार्यक्रम के लिए वो खड़े नहीं हो पाएँगे। खैर, मैं तो लदीदा और लंकेश जैसे बच्चों के बारे में सोच रहा हूँ कि इसी कार्यक्रम के दौरान वो अपनी प्रेमिकाओं और इश्कबाज लौंडों पर बार-बार लाइट मार कर मात-पिता को एक इशारा तो कर ही दें कि देखो पापा, मेला बाबू थोली देल में उधल वाले मतान में थाना थाएगा… अरे हम भी प्रेम किए थे भाई… हें हें हें…

साथ ही, संभव हो तो लड़की से ‘कौन जात हो’ पूछ कर टॉर्च जलाएँ, एक विजातीय प्रेम क्रांति है। ऐसे समय में अगर जलानी ही है तो क्रांति की लौ जलाएँ। घर में क्रांति कर दीजिए। घरवालों का भी टाइम पास हो जाएगा। पिटाई भी हो सकती है, लेकिन क्रांतिकारी तो गोली भी खाते हैं। चलिए इसी बहाने दो-चार प्रेम की बातें भी निकल आएँगी, वरना आपातकाल में क्या प्रेम कर पाएँगे हम!

दिया जला लीजिए, उसी से सब सुधर जाएगा। भक्त और आईटी सेल वाले फैलाएँगे कि दिया जलाने से हवा में वायरस मर जाते हैं। वो व्हाट्सएप्प पर फैला रहे हैं कि चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में जा रहा है, और उस दिन अंधेरा कर देने से शरीर पर और घरों में चाँद की रोशनी जाएगी जिससे शरीर में कोरोना के लिए एंटीबॉडी बनने लगेंगे। जबकि किसी को ये पता नहीं है कि ये मैसेज मैंने साढ़े नौ बजे लिखा और रजदिप्पा को फॉरवर्ड कर दिया।

रजदिप्पा भेजलस सगरिकिया के, सगरिकिया क फोन से ई चलल आ घुस गइल कौनो भक्तन के फोन में, ओकर बाद से जे होइल, से त सबके पता होइए गईल बा… आईटी सेल वालों को उल्लू बनाना इतना आसान है। ऐसा मैंने कई बार किया है, और जब वो वायरल हो जाता है तो शाम में प्राइम टाइम में बताता हूँ कि ये आईटी सेल वालों की करतूत है।

तीसरी बात, जिस पर सघन चर्चा आवश्यक है वो यह है कि नौ बजे, नौ मिनट ही क्यों? इस पर शशि थरूर ने भी लिखा है कि सब कुछ नौ-नौ हो रहा है। क्या हमने वाकई सब-कुछ राम भरोसे छोड़ दिया है? नहीं, आप सोचिए कि शशि थरूर पढ़े-लिखे आदमी हैं, पुलिस आज तक पकड़ नहीं पाई है उन्हें। काफी किताबें उन्होंने पढ़ी हैं। उन्होंने लिखा है कि नौ की संख्या पर सब छोड़ दिया गया है। लेकिन एक चीज जो मोदी जी नौ पर नहीं ला पा रहे वो है भारत का ग्रोथ रेट। जीडीपी का पता कर लीजिए।

शशि थरूर के वैज्ञानिक अभिकलन का एक नमूना

क्या मोदी जी अल्पसंख्यकों को विश्वास में लेने के लिए नौ मिनट तक नौ आयतें पढ़ने नहीं बोल सकते थे? इससे अच्छी बात क्या होती कि हिन्दू लोग कुछ जान जाते शांतिप्रिय मजहब इस्लाम के बारे में। क्यों नहीं बोला उन्होंने कि देश के हर मस्जिद से एक साथ अजान दी जाए? ठीक है कि देश के सारे मस्जिद वैसे भी दिन में पाँच बार एक साथ ही अजान देते हैं, लेकिन तबलीगी जमात के कारण अल्पसंख्यकों को जिस तरह से निशाना बनाया जा रहा है, उस समय उनका ये कह देना काफी असर कर सकता था।

लेकिन हिन्दी, हिन्दू, हिन्दुस्तान का नायक भला अल्पसंख्यकों का क्यों सोचेगा। वो तो सुप्रीम कोर्ट पर ही हमला कर देगा। आपको क्या लगता है कि थाली बजवाना और अब प्रकाश की बात करना, दिया-मोमबत्ती जलाना, ऐसे ही है? जी नहीं, ये बदला है सुप्रीम कोर्ट द्वारा दीवाली पर रोक लगवाने के कारण। दीवाली में रोशनी होती है, और आवाज होती है पटाखों से। यही दो काम मोदी दीवाली के दिन नहीं, किसी और दिन करवा रहे हैं।

आपको ये सब नहीं दिखेगा लेकिन एक सूअर को टट्टी खोजने में मशक्कत नहीं करनी होती। मुझे आसानी से दिख जाती है। हें हें हें…

आप कहेंगे देश को एकता के सूत्र में पिरोने का काम है, वो मैं जानता हूँ लेकिन मैं एक पत्रकार हूँ। मेरे लिए पत्रकार की परिभाषा है कि हमेशा सत्ता के विरोध में रहना। खास कर तब जब सत्ता मेरे वोट वाले की नहीं है तो उसकी हर अच्छाई को शब्दों के प्रयोग से राष्ट्र के लिए विनाशकारी बता देना।

सिलिंडर दे, तो बोलो कि उससे विस्फोट हो सकता है और तीन-चार खबरें ले आओ… बिजली दे तो बोलो कि करंट लग सकता है, हर साल बिजली के झटके से इतने लोग मरते हैं… सड़क बनवाए तो बोलो कि आदमी जल्दी पहुँच कर बचे समय में शैतानी योजनाएँ बनाएगा दिमाग में… पुल बनवाए तो बोलो कि नाव चलाने वालों का रोजगार चला गया… स्कूल खोले तो बोलो कि सबको संघ की बातें सिखाने की योजना है…

असली पत्रकार का कार्य यही है। हम क्यों सरकार की बड़ाई करें? वो तो सरकार कर ही रही है। हमें तो समाज में नकारात्मकता भरनी है कि पाँच साल में लोग उब जाएँ। लेकिन उसमें बात यह आड़े आ रही है कि मेरा चैनल कुछ लोग बंद करवाते हैं, लोगों के घर तक पहुँच नहीं रहा और मोदी दोबारा जीत गया। लेकिन मैंने क्या बकैती करनी छोड़ी? जी नहीं, अब तो भोजपुरी में भी कर रहा हूँ।

नोट: न्यूजलौंडी के अभिनंदन को यह बताया जाता है कि ऑपइंडिया ने इस स्क्रिप्ट को ले कर किसी भी बकैत कुमार से बातचीत नहीं की है।

लॉकडाउन के बीच कन्नौज में छत पर नमाज पढ़ रहे लोगों को पुलिस ने रोका तो कुल्हाड़ी से हमला, दो पुलिसकर्मियों की हालत नाजुक

लॉकडाउन का उल्लंघन कर सामूहिक रूप से एक मकान की छत नमाज पढ़ने की कोशिश करने और रोके जाने पर पुलिस को निशाना बनाने की एक और घटना सामने आई है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के कन्नौज का है। यहॉं की एक मकान की छत पर जुमे की नमाज अदा करने के लिए जुटान हो रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुॅंची और उन्हें सोशल डिस्टैन्सिंग के लिए समझाने की कोशिश की। लेकिन वहाँ जुटे लोग पुलिस की एक नहीं सुनी और उल्टा पुलिस पर ही हमला कर दिया। जमकर पत्थरबाजी हुई। हमले में कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। दो पुलिसकर्मियों की हालत नाजुक बताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, पुलिसकर्मी किसी तरह जान बचाकर निकले। बाद में जब भारी फोर्स के साथ आला अधिकारी मौके पर पहुॅंचे तब तक हमलावर फरार हो चुके थे।

पुलिस के आला अधिकारियों ने कहा है कि लॉकडाउन तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त से कार्रवाई की जाएगी। हमलावरों की पहचान की जा रही है। उन्हें जल्द गिरफ्तार करने का दावा किया गया है। ड्रोन की मदद से छतों की निगरानी की जा रही है। घायल पुलिसकर्मियों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण पर काबू पाने के लिए पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। किसी तरह के आयोजनों पर पाबंदी है। धार्मिक स्थल भी बंद हैं। असल में सोशल डिस्टेंसिंग इस संक्रमण से निपटने का सबसे कारगर उपाय है। बावजूद कई शहरों से सामूहिक नमाज अदा करने की घटनाएँ सामने आ चुकी है।

यूपी के ही अलीगढ़ की एक मस्जिद में भी गुरुवार की रात मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोग जुटे थे। सूचना मिलने पर पुलिस पहुॅंची तो उनलोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस मामले में अलीगढ़ पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। उससे पहले बुधवार शाम को मुजफ्फरनगर में लॉकडाउन का पालन कराने पहुँची पुलिस की टीम पर भी हमला हुआ था। सहारनपुर के गाँव जमालपुर में भी नमाज पढ़ने को लेकर मस्जिद के बाहर इकट्ठा भीड़ को हटाने और छह लोगों को हिरासत में लेने पर लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया था। लाठी-डंडों का प्रयोग कर पकड़े गए लोगों को छुड़वा लिया था।

बिहार के मधुबनी की एक मस्जिद में सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस को समुदाय विशेष की भीड़ ने एक किमी तक खदेड़ दिया था। जमकर पत्थरबाजी की थी। फायरिंग की और पुलिस की जीप को तलाब में पलट दिया था। गुजरात के अहमदाबाद स्थित गोमतीपुर में भी भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की थी। गोमतीपुर में पुलिस उन लोगों की तलाश में गई थी, जिन्होंने तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

यूपी में चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन खोलने की बनाएँ योजना, असहयोग करने वालों के खिलाफ लें सख्त एक्शन: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गरीबों के लिए खजाना खोला है। सीएम योगी ने शुक्रवार को 87 लाख वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांगजनों के बैंक खातों में 871 करोड़ रुपए पेंशन ट्रांसफर किए। सीएम योगी ने लखनऊ स्थित अपने सरकारी आवास से लोगों के बैंक खातों में पैसे भेजे। इस दौरान सीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लाभर्थियों से संवाद किया। सीएम ने कहा कि किसी को कोई परेशानी हो तो अधिकारियों को बताएँ।

इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कोरोना वायरस से निपटने की तैयारियों पर चर्चा करने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के डीएम-एसपी संग सरकारी आवास पर बैठक की। इस दौरान सीएम ने लॉकडाउन खुलने के बाद की तैयारियों पर मंथन की। सीएम ने अधिकारियों से कहा कि 15 अप्रैल को लॉकडाउन खोलने की कार्ययोजना बनाई जा रही है। इसे प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी कर लें।

सीएम ने कहा कि राज्य की तर्ज पर जिलों में भी टीम-11 गठित करें। सरकार कोरोना केयर कोष बनाने जा रही है। इसका उपयोग इलाज से जुड़ी जरूरतों में होगा। सीएम ने प्रदेश के हर चिन्हित अस्पताल में कोरोना संक्रमित मरीजों की निगरानी और इसकी जाँच की व्यवस्था को फुलप्रूफ रखने के निर्देश भी दिए हैं।

सीएम योगी ने कहा कि लॉकडाउन खुलने के साथ ही जो जहाँ फँसा होगा, वहाँ से आने की कोशिश करेगा और ऐसे में उनसे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। इसलिए इसके लिए अभी से प्लानिंग करनी शुरू करें कि स्कूल, कॉलेज, अलग-अलग तरह के बाजार और मॉल कब और कैसे खुलेंगे। इस समय के हालातों से कैसे निपटा जाएगा, इस पर विचार करें।

योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से चर्चा के दौरान यह कहा है कि बाहरी राज्यों के जो भी लोग यूपी में रह रहे हैं उनका पूरा ध्यान रखा जाए। इसके अलावा सभी नागरिकों को उनकी दैनिक जरूरतों का हर सामान मुहैया कराया जाए। हर जरूरतमंद तक समय से भोजन पहुँचाना सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए स्वयंसेवी संस्थाओं की भी मदद लें। संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों से समन्वय कर आँगनबाड़ी का पौष्टिक आहार भी घर-घर तक पहुँचाएँ। हर जिले में कम्युनिटी किचन चलाएँ। इसमें स्वयंसेवी संस्थाओं सहित अन्य जो लोग भी मदद देना चाहें उनकी मदद लें। हर कोई भोजन बाँटने न निकले इसके लिए कुछ कलेक्शन सेंटर बनाएँ। वहाँ भोजन इकट्ठा किया जाए और फिर बाँटने के लिए ले जाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें दो स्तर पर तैयारी करनी होगी। मौजूदा हालात और भविष्य के मद्देनजर रणनीति तैयार करें। भविष्य की तैयारियों के मद्देनजर एनएसएस, एनसीसी, स्काउट्स और युवक मंगल दल में से वालंटियर तैयार करें। इनको कोराना के संक्रमण को रोकने और संक्रमण के दौरान क्या करना है, इस बाबत प्रशिक्षण दें। भोजन और जरूरी सामानों की आपूर्ति के अलावा ये संक्रमण बढ़ने पर भी हमारे लिए उपयोगी होंगे।

इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कई आदेश दिए। जिसमें इलाज के लिए डॉक्टरों की सूची बनाने से लेकर कोरोना फंड तैयार करने, खादी के मास्क बनाने समेत असहयोग करने वालों के खिलाफ सख्ती से पेश आने का आदेश शामिल है।

निजी क्षेत्र के डॉक्टरों की लिस्ट करें तैयार

सीएम ने सभी अधिकारियों से संबंधित क्षेत्रों में एनेस्थेसिया, फीजिशियन, बच्चों और महिलाओं के डॉक्टर्स की लिस्ट बनाने के लिए और उन्हें ट्रेनिंग देने के लिए कहा है। सीएम ने ऐसा करने के लिए इसलिए कहा है ताकि आगे जरूरत पड़ने पर इनकी मदद ली जा सके। इसी तरह के प्रशिक्षण की जरूरत इनके पैरामेडिकल स्टाफ और आयुष विभाग के चिकित्सकों और उनके स्टॉफ को भी ट्रेनिंग देने की बात कही गई है। 

1000 करोड़ का तैयार करेंगे कोरोना केयर फंड

सीएम ने कहा कि सरकार 1000 करोड़ रुपए का कोरोना केयर फंड तैयार करेगी। इस फंड से टेस्टिंग लैब की सुविधाएँ बढ़ाने के साथ इलाज में जरूरी और उपकरणों मसलन वेंटीलेटर, मास्क, सेनिटाइजर, पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट) आदि की व्यवस्था की जाएगी। 

तैयार कराएँ खादी के मास्क

सीएम ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग विभाग यह सुनिश्चित कराए कि जरूरी सामानों का उत्पादन प्रदेश में ही हो। इससे वे सस्ते तो होंगे ही उनकी उपलब्धता भी बढ़ेगी। खादी के कपड़े से ऐसा मास्क तैयार कराएँ, जिसका दोबारा उपयोग किया जा सके। इसके लिए महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप की मदद लें। ऐसा करने से खादी का प्रचार भी होगा, स्थानीय स्तर पर महिलाओं को रोजगार मिलेगा और मास्क सस्ता होने पर लोग इसे अपनी आदत का हिस्सा बना सकेंगे।

असहयोग करने वालों से सख्ती के आदेश

सीएम ने कहा कि लॉकडाउन में सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करने वालों को सख्त संदेश दें। इंदौर जैसी घटना यूपी में कहीं भी कतई नहीं होनी चाहिए। ऐसे लोगों पर डिजास्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करें। जो भी लोग सरकार से असहयोग करें उनको थोड़ी-थोड़ी संख्या में अलग-अलग कड़ी निगरानी में रखें।

वहीं सीएम ने ये भी कहा कि लॉकडाउन में जो लोग बेहतर काम कर रहे हैं उनकी सूची भी बनाएँ। हालात सामान्य होने पर सरकार ऐसे लोगों को सम्मानित करेगी। कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्ती से अंकुश लगाएँ। अगर जरूरी सामान थोक बाजार से ही ऊँचे दाम पर मिल रहे हों तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई करें।