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‘उन्हें पढ़कर मेरा देश के प्रति प्रेम हजार गुना बढ़ गया’ : जानें कैसे स्वामी विवेकानंद के कार्यों से गाँधी हुए प्रभावित, मिलने की लालसा में निकले थे पैदल

स्वामी विवेकानंद और महात्मा गाँधी दो महान व्यक्तित्व हैं जिन्होंने अपने जीवनकाल और उसके बाद की पीढ़ियों पर गहरा प्रभाव डाला और प्रेरित किया। स्वामी विवेकानंद का जन्म 1863 में हुआ और महात्मा गाँधी का जन्म 1869 में हुआ, दोनों को समकालीन कहा जा सकता है। हालाँकि, स्वामी विवेकानंद की महा समाधि केवल 39 वर्ष और 5 महीने की आयु में 1902 में हुई, जबकि गाँधी जी का निधन 1948 में हुआ।

स्वामी विवेकानंद ने जहाँ इतने कम समय में ही भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा दी और वेदांत तथा भारतीय ज्ञान का संदेश वैश्विक स्तर पर प्रचारित किया, वहीं इसी अवधि में महात्मा गाँधी दक्षिण अफ्रीका में थे, जहाँ उन्होंने अपना करियर बनाने और अफ्रीका में भारतीय समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष करने पर ध्यान केंद्रित किया। हालाँकि, वह बीच-बीच में भारत आते रहे।

स्वामी विवेकानंद और महात्मा गाँधी के बीच संबंध लेखन या चर्चा का विषय उस स्तर तक नहीं बन पाया, जितना वह बन सकता था। उनके बीच जो संबंध था, स्वामी विवेकानंद का महात्मा गाँधी पर जो प्रभाव पड़ा, और गाँधी जी ने स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं और उनके कार्यों को किस दृष्टिकोण से देखा, यह अधिकांशतः अनछुआ और अनविख्यात है। कुछ शोधकर्ताओं ने महात्मा गाँधी के जीवन पर स्वामी विवेकानंद के प्रभाव पर छोटे स्तर पर कार्य किया है, लेकिन इस संबंध को समग्र रूप से परखा नहीं गया है।

1893 में, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गाँधी का अलग-अलग उद्देश्यों के लिए विदेश यात्रा जाना हुआ था। स्वामी विवेकानंद शिकागो, अमेरिका गए थे ताकि वे विश्व धर्म महासभा में भाग ले सकें, जबकि महात्मा गाँधी दक्षिण अफ्रीका गए थे ताकि वह एक वकील के रूप में कार्य कर सकें। यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि स्वामी विवेकानंद को गाँधी जी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, क्योंकि गाँधी जी उस समय विदेश में थे और उन्होंने अभी तक व्यापक पहचान नहीं प्राप्त की थी।

वहीं दूसरी ओर, स्वामी विवेकानंद अपने 11 सितम्बर 1893 के ऐतिहासिक भाषण के बाद विश्व प्रसिद्ध हो गए थे और उनके पहले पश्चिमी प्रवास (1893-96) के दौरान ही वे किसी परिचय के मोहताज नहीं रहे थे। उनके अनुयायी और प्रशंसक प्रत्येक महाद्वीप में फैल चुके थे। इस दौरान, गाँधी जी, जो दक्षिण अफ्रीका में थे, स्वामी विवेकानंद और उनकी शिक्षाओं से अच्छी तरह परिचित थे। गाँधी जी ने स्वामी विवेकानंद के विचारों और उनके दृष्टिकोण को न केवल आध्यात्मिक बल्कि सामाजिक सुधारों के संदर्भ में भी बहुत महत्वपूर्ण माना था।

महात्मा गाँधी के संकलित कार्य, जो 98 खंडों में हैं और ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं, कई ऐसे तथ्य और जानकारी प्रस्तुत करते हैं जो गाँधी जी और स्वामी विवेकानंद के बीच करीबी संबंध को दर्शाते हैं। हालाँकि, उनका व्यक्तिगत कभी मिलन नहीं हुआ, गाँधी जी का स्वामी विवेकानंद से मिलने की गहरी इच्छा थी। वह नियमित रूप से स्वामी विवेकानंद के साहित्यिक कार्यों को पढ़ते थे, उनकी शिक्षाओं का अध्ययन करते थे, और स्वामी जी द्वारा स्थापित रामकृष्ण मिशन संस्थान में जाते थे। गाँधी जी ने स्वामी विवेकानंद पर भाषण भी दिए, और उन्होंने उनके विचारों को अपने व्याख्यानों और पत्रों में शामिल किया, जो विभिन्न विषयों पर आधारित थे। महात्मा गाँधी के इन प्रमुख दस्तावेजों के माध्यम से हमें इन दो महान व्यक्तित्वों की अनकही धरोहर का गहरा परिचय मिलता है।

दो घटनाक्रम जब स्वामी विवेकानंद और महात्मा गाँधी मिल सकते थे

स्वामी विवेकानंद और महात्मा गाँधी की मुलाकात के दो प्रमुख अवसर थे। पहला 1898 में हुआ, जब गाँधी जी ने स्वामी विवेकानंद से यह अनुरोध किया था कि वे दक्षिण अफ्रीका आएँ और वहाँ अपने आध्यात्मिक संदेश का प्रचार करें। यह बात गाँधी जी ने अपने मित्र श्री बी. एन. भजेकर को फरवरी 1898 में लिखे गए एक पत्र में व्यक्त की थी, जिसमें उन्होंने लिखा: “यहाँ एक धार्मिक उपदेशक की बहुत आवश्यकता है, लेकिन उसे यहाँ के सभी पुजारियों से ऊँचा होना चाहिए। वह पूरी तरह से निष्कलंक और निःस्वार्थ होना चाहिए और उसे अपना भरण-पोषण करने के लिए पैसे की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए………… क्या स्वामी को यात्रा के लिए प्रेरित किया जा सकता है? मैं उनके मिशन को सफल बनाने के लिए जो कुछ भी कर सकता हूँ, करूँगा। वह भारतीयों और यूरोपियों दोनों के बीच काम कर सकते हैं। ………………..आप यदि चाहें तो इस पत्र को स्वामी के सामने रख सकते हैं।”

हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि महात्मा गाँधी का पत्र स्वामी विवेकानंद तक पहुँचा था या नहीं, लेकिन यह निश्चित है कि स्वामी ने कभी दक्षिण अफ्रीका का दौरा नहीं किया। दूसरा वाकया कुछ साल बाद हुआ, जब गाँधीजी कुछ महीनों के लिए भारत में थे और 1901 में कलकत्ता गए। गाँधीजी स्वामी से मिलने के लिए उत्सुक थे, और इसके लिए वे बेलूर मठ गए। हालाँकि, स्वामी जी अस्वस्थ थे, इसलिए उनकी मुलाकात नहीं हो सकी।

The Story of My Experiments with Truth में गाँधी जी लिखते हैं: “ब्रह्मो समाज को पर्याप्त देख लेने के बाद, स्वामी विवेकानंद को देखे बिना संतुष्ट होना असंभव था। इसलिए मैंने बहुत उत्साह के साथ बेलूर मठ जाने का निर्णय लिया, अधिकांशतः, या शायद पूरी तरह से, पैदल ही। मुझे मठ की एकांत स्थिति बहुत पसंद आई। मुझे यह सुनकर निराशा और खेद हुआ कि स्वामी जी कलकत्ता स्थित अपने घर पर बीमार थे और उनसे मिलना संभव नहीं था।”

इन दोनों घटनाओं में, गाँधीजी की स्वामी विवेकानंद से मिलने की प्रबल इच्छा के बावजूद, वह ऐसा नहीं कर पाए। दूसरी घटना विशेष रूप से करीब थी, क्योंकि गाँधी जी कलकत्ता में थे और बेलूर मठ गए थे, लेकिन स्वामी जी की अस्वस्थता और उस समय उनकी वहां अनुपस्थिति ने उनकी मुलाकात को रोका।

स्वामी विवेकानंद के साहित्य का महात्मा गाँधी पर प्रभाव

किसी व्यक्तित्व को समझने के लिए उनका साहित्य एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। महात्मा गाँधी भी स्वामी विवेकानंद के करीब उनके साहित्य के माध्यम से ही आए। स्वामी के साहित्य के माध्यम से गाँधी जी भारत की सांस्कृतिक परंपराओं और ज्ञान के और निकट पहुँचे। राजयोग पुस्तक, जो स्वामी विवेकानंद ने अपनी पश्चिमी यात्रा के दौरान लिखी थी, वह एक ऐसा ग्रंथ था जिसे गाँधीजी ने अपने जीवनभर अपने पास रखा।

22 जुलाई 1941 को तिरुप्पुर सुब्रह्मण्य अविनाशीलिंगम चेट्टियार (1903-1991) को लिखे एक पत्र में गाँधीजी ने स्वामी के लेखन पर अपने विचार व्यक्त किए, जिसमें उन्होंने लिखा: “निःसंदेह स्वामी विवेकानंद के लेखन को किसी भी परिचय की आवश्यकता नहीं है। वे अपनी अपूर्व अपील स्वयं प्रस्तुत करते हैं।”

गाँधी जी जब दक्षिण अफ्रीका में थे, उसी समय उन्होंने राजयोग पुस्तक पढ़ना शुरू किया था। 1923 में, 28 सितंबर (शुक्रवार) को, उन्होंने अपनी जेल डायरी में लिखा कि उन्होंने स्वामी विवेकानंद का राजयोग पूरा पढ़ लिया था। बाद में, 1932 में, गाँधी जी ने स्वामी विवेकानंद की जीवनी ‘द लाइफ ऑफ विवेकानंद’ और उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस की जीवनी “द लाइफ ऑफ रामकृष्ण “ पढ़ी, जो नोबेल पुरस्कार विजेता रोमां रोलां द्वारा लिखित थीं।

स्वामी विवेकानंद के कार्यों का महात्मा गाँधी पर प्रभाव और महत्व 1921 में बेलूर मठ, जो रामकृष्ण मिशन का मुख्यालय है, पर गाँधी जी द्वारा दिए गए एक भाषण में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। गाँधी जी ने कहा: “मैंने उनके कार्यों को बड़े गहरे से अध्ययन किया है, और उन्हें पढ़ने के बाद, जो प्रेम मुझे अपने देश के लिए था, वह हजार गुना बढ़ गया।”

महात्मा गाँधी का रामकृष्ण मिशन से संबंध

स्वामी विवेकानंद और उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करने के लिए महात्मा गाँधी ने कई बार रामकृष्ण मिशन (जो स्वामी विवेकानंद द्वारा 1 मई 1897 को स्थापित एक आध्यात्मिक संगठन है) का दौरा किया। बेलूर मठ (कोलकाता) के अलावा, गाँधीजी ने मिशन के कई अन्य केंद्रों का भी दौरा किया, जिनमें वृंदावन और रंगून सहित अन्य स्थान शामिल थे।

रंगून में रामकृष्ण मिशन में 1929 में श्री रामकृष्ण परमहंस की जयंती के विशेष अवसर पर भाषण देते हुए, गाँधीजी ने कहा: “मैं आपको रामकृष्ण परमहंस और उनके मिशन के बारे में कुछ बताना चाहता हूँ। …… मुझे उनके मिशन पर पूरा विश्वास है और मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि आप भी उनका अनुसरण करें। जहाँ-जहाँ मैं जाता हूँ, वहाँ रामकृष्ण के अनुयायी मुझे आमंत्रित करते हैं और मुझे यह पता है कि उनका आशीर्वाद मेरे कार्य पर है। रामकृष्ण सेवा आश्रम (लोगों की सेवा केंद्र) और अस्पताल पूरे भारत में फैले हुए हैं। ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ उनका कार्य छोटे या बड़े स्तर पर नहीं हो रहा हो। अस्पताल खोले गए हैं और गरीबों को दवाइयाँ और उपचार प्रदान किया जा रहा है। …… जब मैं रामकृष्ण का नाम याद करता हूँ, तो मैं विवेकानंद को भूल नहीं सकता। सेवा आश्रमों का प्रसार मुख्य रूप से विवेकानंद की गतिविधियों के कारण हुआ और उन्हीं ने अपने गुरु को दुनिया भर में प्रसिद्ध किया।”

गाँधी जी के शब्द स्वामी विवेकानंद, उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस और रामकृष्ण मिशन के प्रति उनकी गहरी श्रद्धा और सम्मान को व्यक्त करते हैं। महात्मा गाँधी के 98 संकलित कार्यों में और भी नई जानकारियाँ प्राप्त हुई हैं, जैसे गाँधी जी का स्वामी विवेकानंद से संबंधित साहित्य को अपने विदेशी मित्रों को सुझाना, स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं का सार्वजनिक व्याख्यानों में प्रचार करना। इस सबका संकलन मेरी पुस्तक “रामकृष्ण-विवेकानंद आंदोलन का गांधी पर प्रभाव” में विस्तृत रूप से किया गया है।

नोट: यह लेख डॉ. निखिल यादव का है। वह विवेकानन्द केंद्र के उपप्रमुख हैं। उन्होंने जेएनयू से पीएचडी की है और ‘Influence of the Ramakrishna-Vivekananda Movement on Gandhi’ पुस्तक के लेखक हैं।

बांग्लादेश में मुस्लिम भीड़ की हिंसा को पुलिस ने दी क्लीन चिट, हिंदुओं पर हमलों को बताया ‘राजनीतिक हिंसा’ : रिपोर्ट में कहा- सिर्फ 1.59% घटनाएँ थी सांप्रदायिक

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों को लेकर बांग्लादेश की पुलिस ने रिपोर्ट जारी की है, जिसमें अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा को राजनीतिक हिंसा कहा गया है। खास बात ये है कि ये आँकड़े सिर्फ उन 16 दिनों के हैं, जब शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था।

दरअसल, इस रिपोर्ट में बताया गया कि 4 अगस्त 2024 से 20 अगस्त 2024 के बीच अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई 1,415 घटनाओं में से 98.4% मामले राजनीतिक प्रेरित थे और सिर्फ 1.59% घटनाएं सांप्रदायिक कारणों से हुईं। ऐसे में कट्टरपंथियों के दम पर सत्ता में बनी मोहम्मद यूनुस की कार्यवाहक सरकार हिंदुओं पर हमलों को राजनीतिक हिंसा का नाम देकर असली सांप्रदायिक मुद्दे को छिपाने की कोशिश कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 से 20 अगस्त 2024 के दौरान हिंदुओं, बौद्धों, ईसाइयों (अल्पसंख्यक समुदायों) पर 2,010 हमलों की रिपोर्ट बांग्लादेश हिंदू बुद्ध ईसाई एकता परिषद ने दर्ज की थी। इनमें उनकी संपत्तियों, पूजा स्थलों और जीवन पर हमले शामिल थे। हालाँकि, पुलिस के आँकड़ों के मुताबिक 1769 घटनाएँ दर्ज हुईं, जिनमें से 1415 मामलों की जाँच पूरी हो चुकी है। बाकी 354 मामलों की जाँच अभी चल रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस की इस जाँच में 1,254 मामलों को सही पाया गया, जबकि 161 मामलों में सबूत नहीं मिले। सत्यापित मामलों में 1,234 घटनाओं को राजनीतिक हिंसा बताया गया और सिर्फ 20 मामलों को सांप्रदायिक।

पुलिस ने कहा कि उन्होंने प्रभावित इलाकों का दौरा किया, पीड़ितों और गवाहों से बात की और औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के लिए पीड़ितों को प्रोत्साहित किया। इसके अलावा, सुरक्षा के लिए कदम उठाए गए। इस पूरी प्रक्रिया के बाद 62 मामले दर्ज हुए और 951 सामान्य डायरियाँ (जीडी) बनाई गईं। अब तक 63 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के मामलों को देखें, तो अकेले 5 अगस्त 2024 को ही 1452 घटनाएँ हुई थी, जो कुल मामलों का 82.8% है। ये वही दिन था, जब शेख हसीना को ढाका छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। इसके बाद से पूरे देश की व्यवस्था बदल गई, फिर कितने मामले किस तरह दर्ज हुए होंगे, इसका महज अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

सांप्रदायिक हिंसा के नए मामलों पर भी नजर डालें तो अगस्त 5, 2024 से जनवरी 8, 2025 के बीच 134 ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं, जिनमें से 53 मामलों में एफआईआर दर्ज हुई और 53 सामान्य डायरियाँ बनाई गईं। अब तक 65 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच, बांग्लादेश की सरकार ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की शिकायत दर्ज कराने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है, जिसमें अल्पसंख्यक समुदाय के प्रतिनिधि शामिल हैं। साथ ही राष्ट्रीय हेल्पलाइन 999 पर आने वाली शिकायतों का तुरंत निपटारा किया जा रहा है।

बांग्लादेश हिंदू बुद्ध ईसाई एकता परिषद का कहना है कि सरकार इन हमलों को राजनीतिक रंग देकर असली समस्या को छिपा रही है। परिषद ने बताया कि अल्पसंख्यकों पर हुए हमले उनके जीवन और धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला हैं। अल्पसंख्यक समुदायों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि राजनीतिक हिंसा का बहाना बनाकर कट्टरपंथी सरकार असली सांप्रदायिक हिंसा को नजरअंदाज कर रही है।

बांग्लादेश में हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया गया है। ऐसे कई मामलों को ऑपइंडिया ने रिपोर्ट किया है। इन रिपोर्ट्स को आप यहाँ पढ़ सकते हैं- बांग्लादेश में हिंदू घृणा

गुजरात के बेट द्वारका में फिर गरजा बुलडोजर, सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का समतलीकरण शुरू: सैकड़ों एकड़ से हटेगा कब्जा, हजार पुलिसकर्मी तैनात

गुजरात के देवभूमि द्वारका और बेट द्वारका में राज्य सरकार ने एक बार फिर से बुलडोजर की कार्रवाई की है। तटीय इलाकों में सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके एक छोर से दूसरे छोर तक मकान और अन्य मजहबी एवं व्यावसायिक ढाँचे बना दिए गए हैं। अब इन ढाँचों को हटाया गया है। यह कार्रवाई कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच की जा रही है।

राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक जानकारी का इंतजार है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चला है कि ध्वस्तीकरण अभियान में करीब 40 से 50 अवैध आवासीय एवं व्यावसायिक संरचनाओं को ध्वस्त किया गया है। गुजरात के गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने इसको लेकर सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर अभियान की जानकारी दी है।

हर्ष संघवी ने अपने पोस्ट में लिखा, “बेट द्वारिका देश भर के करोड़ों लोगों की आस्था की भूमि है। कृष्ण भूमि में किसी भी अवैध अतिक्रमण को नहीं होने देंगे। हमारी आस्था और संस्कृति की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। गुजरात में भूपेन्द्र भाई पटेल सरकार ने अवैध अतिक्रमण के प्रति जीरो टॉलरेंस दिखाया है।”

इस कार्रवाई के बाद बेट द्वारका में श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं और कड़ी सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस बल को भी तैनात कर दिया गया है। हालाँकि, इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि मंदिर में किसी तरह की अव्यवस्था न हो। वही, भगवान की पूजा-अर्चना नियमित रूप से जारी रहेगी।

ऑपरेशन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों समेत कुल एक हजार जवान शामिल हैं। प्रशासन और पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने इसकी सभी तैयारियाँ पहले ही कर ली थीं। ऑपरेशन के दौरान ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा रही है। अभी यह ज्ञात नहीं है कि इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, लेकिन निर्माण कार्यों की संख्या को देखते हुए इसमें कुछ समय लग सकता है।

उल्लेखनीय है कि बेट द्वारका भारत के सबसे पश्चिमी छोर है। देवभूमि द्वारका से 2 किलोमीटर दूर इस छोटे से द्वीप पर भगवान कृष्ण का मंदिर है, जो हिंदुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। हर साल यहाँ लाखों लोग भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए आते हैं। पहले यहाँ समुद्र के रास्ते ही जाया जा सकता था, लेकिन अब यहाँ पुल बन गया है।

द्वारका से ही शुरू हुआ था ध्वस्तीकरण का काम

गुजरात का समुद्र तट लगभग 1600 किलोमीटर लंबा है। इसके कई फायदे हैं, लेकिन साथ ही सुरक्षा के लिहाज से यह एक संवेदनशील इलाका भी है। गुजरात में भूपेंद्र पटेल की सरकार आने के बाद तटीय इलाकों में सुरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया और इसके साथ ही इन इलाकों में सालों से सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण को भी चिन्हित किया जाने लगा।

साल 2022 में इन अतिक्रमण को हटाने की शुरुआत द्वारका से ही हुई और सैकड़ों एकड़ सरकारी जमीन पर बुलडोजर चलाया गया और ढाँचों को ध्वस्त किया गया था। यह कार्रवाई संभवतः गुजरात के इतिहास की सबसे बड़ी विध्वंस कार्रवाई थी। उसके बाद भी सरकार ने सोमनाथ, पोरबंदर आदि तटीय क्षेत्रों में यह कार्रवाई जारी रखी। हाल ही में सोमनाथ में भी बड़े पैमाने पर ऐसी कार्रवाई की गई।

अब बुलडोजर फिर से द्वारका पहुँच गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2022 के ध्वस्तीकरण के बाद प्रशासन को बेट द्वारका इलाके में और अतिक्रमण की जानकारी मिली। उसके बाद अतिक्रमण करने वालों की पहचान की गई। सरकारी सूत्र कह रहे हैं कि जहाँ भी अतिक्रमण होगा, वहाँ इस तरह की बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी।

‘तुम छोटी जाति वालों को इस्लाम में देंगे ऊँचा मुकाम’: हमीरपुर में दलित परिवार पर मौलाना खालिक और उसके साथी डाल रहे थे धर्मांतरण का दबाव, शिकायत के बाद 5 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में एक दलित परिवार को जबरन इस्लाम मजहब अपनाने के लिए धमकाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस साजिश में शामिल पाँच लोगों-नूरुद्दीन, मेराजू हसन, खालिक, इरफ़ान और मोहम्मद हनीफ को गिरफ्तार किया है। पीड़ित परिवार को उनकी जाति का हवाला देकर इस्लाम अपनाने का लालच दिया गया। आरोप है कि उनके घर में मजार बनवाई गई और हर साल उर्स मनाने की बात कही गई।

ये मामला हमीरपुर के मौदहा थाना इलाके का है, जहाँ उर्मिला नाम की एक दलित महिला ने शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को धर्म-परिवर्तन कराने जानी की कोशिश के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उर्मिला ने बताया कि वह अक्सर बीमार रहती थीं। लगभग दो साल पहले उनकी मुलाकात नूरुद्दीन नाम के एक व्यक्ति से हुई। नूरुद्दीन ने उनकी बीमारी ठीक करने के नाम पर उन्हें मजार पर जाने के लिए उकसाया।

कुछ समय बाद नूरुद्दीन अपने भतीजे मेराजू हसन और खालिक के साथ उर्मिला के घर पहुँचा। इन सभी ने मिलकर उनके घर में एक मजार बनवाई और उर्मिला को मजार की पूजा करने और उर्स मनाने की सलाह दी। उर्मिला के पति अजीत और उनके रिश्तेदारों को भी इस्लाम कबूल करने पर उनकी सारी परेशानियों के खत्म हो जाने और आर्थिक मदद का झाँसा दिया गया।

इस साजिश को पूरा करने 10 जनवरी 2025 को नूरुद्दीन, खालिक, मेराजू हसन, इरफ़ान और मोहम्मद हनीफ फिर से उर्मिला के घर पहुँचे। इस बार उर्स का आयोजन किया गया, जिसमें उर्मिला ने अपने कुछ रिश्तेदारों को भी बुलाया। आरोप है कि वहाँ खालिक और उसके साथ आए लोगों ने उर्मिला और उनके परिवार पर इस्लाम मजहब अपनाने का दबाव बनाया। परिवार को मुस्लिम बन जाने पर बीमारियों से छुटकारा और ऊँची जाति का दर्जा मिलने का लालच दिया गया।

शुरुआत में परिवार ने उनकी बातों पर सहमति जताई, लेकिन बाद में आरोपितों के व्यवहार से असहज हो गए। जब परिवार ने इस्लाम कबूल करने से मना किया, तो आरोपितों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। डर के बावजूद, उर्मिला और उनके परिजनों ने हिंदू धर्म में बने रहने का फैसला किया और तुरंत पुलिस को मामले की जानकारी दी।

पुलिस ने उर्मिला की शिकायत पर नूरुद्दीन, मेराजू हसन, खालिक, इरफ़ान और मोहम्मद हनीफ के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 351 (2) और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। ऑपइंडिया के पास एफआईआर की कॉपी उपलब्ध है। फिलहाल पुलिस ने शनिवार (11 जनवरी 2025) को पुलिस ने पाँचों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। मामले की जाँच जारी है और अन्य कानूनी प्रक्रियाएँ पूरी की जा रही हैं।

दारू घोटाले से दिल्ली को हुआ ₹2026 करोड़ का नुकसान: CAG रिपोर्ट में खुलासा, AAP नेताओं की भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का सच भी सामने आया

दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, अरविंद केजरीवाल सरकार की इस शराब नीति के कारण दिल्ली सरकार को 2026 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ। यह नीति नवंबर 2021 में लागू की गई थी और इसका उद्देश्य शराब की बिक्री के माध्यम से राजस्व बढ़ाना और व्यवस्था में सुधार लाना था। हालाँकि, रिपोर्ट में इसे भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और कमीशनखोरी से भरा बताया गया है। इस चक्कर में मनीष सिसोदिया, अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नेताओं को जेल की हवा भी खानी पड़ी थी, क्योंकि शराब घोटाले से जमा किए पैसों की मनी लॉन्ड्रिंग का भी मामला सामने आ गया था।

कथित तौर पर लीक हुई CAG की रिपोर्ट में कहा गया है कि शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी करने में नियमों का उल्लंघन किया गया। कई ऐसी कंपनियों को लाइसेंस दिए गए, जो घाटे में थीं या जिनके खिलाफ शिकायतें थीं। नियम तोड़ने वालों को सज़ा देने की बजाय उन्हें छूट दी गई। रिपोर्ट में कहा गया कि शराब नीति के कई अहम फैसले बिना कैबिनेट और उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए गए।

यही नहीं, दिल्ली शराब नीति घोटाले के दौरान एक्सपर्ट पैनल की सिफारिशों को नजरअंदाज कर मनमाने तरीके से फैसले लिए गए। लाइसेंसधारकों और थोक विक्रेताओं के बीच अनुचित समझौते हुए। सरकार ने कोविड-19 के नाम पर 144 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं थी।

CAG ने अपने विश्लेषण में बताया कि शराब नीति के तहत कई मोर्चों पर नुकसान हुआ। इसमें-

  • लाइसेंस वापस लिए गए, लेकिन उन्हें दोबारा टेंडर नहीं किया गया, जिससे ₹890 करोड़ का नुकसान हुआ।
  • ज़ोनल लाइसेंसधारकों को दी गई छूट से ₹941 करोड़ का घाटा हुआ।
  • कोविड-19 के नाम पर ₹144 करोड़ की माफी ने राजस्व को और कमजोर किया।
  • सुरक्षा जमा राशि सही से वसूलने में ₹27 करोड़ का नुकसान हुआ।

शराब की गुणवत्ता और जाँच पर ध्यान नहीं: नीति के तहत शराब की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टेस्टिंग लैब और अन्य बुनियादी ढाँचे की योजना बनाई गई थी, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शराब की दुकानों का वितरण समान रूप से नहीं किया गया, जिससे जनता को परेशानी हुई।

रिपोर्ट में कहा गया कि इस नीति से आप नेताओं को सीधा फायदा हुआ। उस समय आबकारी विभाग के प्रमुख मनीष सिसोदिया और उनके साथी मंत्रियों ने जानबूझकर नियमों का उल्लंघन किया। लाइसेंस जारी करने और शुल्क माफी जैसे फैसलों में पारदर्शिता की कमी रही।

CAG की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब दिल्ली चुनाव नजदीक हैं। भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया है और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जवाब माँगा है। हालाँकि आम आदमी पार्टी ने इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज किया है। पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा, “यह रिपोर्ट अभी दिल्ली विधानसभा में पेश नहीं हुई है। भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाने के लिए गलत दावे कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस रिपोर्ट का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी की छवि खराब करने के लिए कर रही है।

बता दें कि दिल्ली शराब नीति घोटाले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार के शीर्ष लोगों को जेल जाना पड़ा था। इस मामले में जाँच अभी जारी है। मनीष सिसोदिया को काफी समय बाद जेल से बेल मिली थी, तो अरविंद केजरीवाल को भी महीनों जेल में बिताना पड़ा, इसके बाद उन्हें मुख्यमंत्री पद से भी हटना पड़ा। हालाँकि जेल से बाहर आने के बाद अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दिया था।

बहरहाल, दिल्ली सरकार की शराब नीति को लेकर यह विवाद राजनीति के नए मोड़ ले सकता है। जनता यह जानना चाहती है कि 2026 करोड़ का नुकसान क्यों हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रिपोर्ट के बाद आम आदमी पार्टी पर जनता और विपक्ष का दबाव बढ़ गया है।

ऑपइंडिया ने दिल्ली शराब घोटाले पर लगातार खबरें प्रकाशित की थी। इस घोटाले की वजह से जेल और बेल समेत तमाम जरूरी खबरों को आप यहाँ पढ़ सकते हैं- (दिल्ली शराब नीति घोटाला)

‘झाड़-फूँक करके जेल से छुड़ा दूँगा तेरा शौहर’ : बागपत में नसीम मौलवी ने महिला को झाँसा देकर किया दुष्कर्म; महताब, गफ्फार सहित हुआ गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक शादीशुदा महिला से गैंगरेप का मामला सामने आया है। सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में पुलिस ने बुधवार (8 जनवरी 2025) को नसीम, महताब और गफ्फार को गिरफ्तार किया गया है। इसमें से नसीम मौलवी है। नसीम ने झाड़-फूँक के जरिए पीड़िता के जेल में बंद शौहर को छुड़ाने का झाँसा दिया था। रेप के दौरान विरोध करने पर पीड़िता की पिटाई भी की गई थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना बागपत के सिंघावली की है। यहाँ के एक गाँव में रहने वाली महिला का शौहर किसी मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। इसी जेल में महिला के शौहर का मुँहबोला फूफा गफ्फार भी बंद था। थोड़े समय पहले गफ्फार जेल से छूट कर आया था। गफ्फार मूलतः मुज़फ्फरनगर का रहने वाला था। महिला ने उससे जेल से छूटने का तरीका पूछा। जवाब में गफ्फार ने मौलवी नसीम द्वारा की गई झाड़-फूँक से खुद के छूटने की बात कही।

गफ्फार की बातों में महिला आ गई। उसने मौलवी नसीम का पता लिया और अपने शौहर को छुड़वाने के लिए झाड़-फूँक की मिन्नत की। नसीम ने महिला को अपने पास बुलाया और झाड़-फूँक के बहाने पीड़िता से गैंगरेप किया। इस रेप में नसीम का सहयोगी महताब भी शामिल था। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो महताब और नसीम ने मिल कर उसकी पिटाई की। रेप के बाद पीड़िता ने मौलवी की करतूत अपने शौहर के फूफा गफ्फार को बताई। गफ्फार ने पीड़िता के बजाय मौलवी का साथ दिया।

पीड़िता की तहरीर में आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। पुलिस ने इस तहरीर पर नसीम, महताब और गफ्फार के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 123, 70 (1), 61 (2) और 351 (2) के तहत दर्ज हुई है। बुधवार को पुलिस ने नसीम, महताब और गफ्फार को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

50 क्विंटल फूलों से सजा राम मंदिर, 56 प्रकार के भोग लगे: अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के 1 साल पूरे, हुई 3 दिवसीय उत्सव की शुरुआत

अयोध्या में भगवान रामलला की स्थापना 22 जनवरी 2024 को हुई थी। हालाँकि, हिंदी पंचांग के आधार पर देखें तो आज शुक्रवार (11 जनवरी 2025) को प्राण प्रतिष्ठा के एक साल पूरे हो गए हैं। आज इसे प्रतिष्ठा द्वादशी उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। यह उत्सव तीन दिनों तक चलेगा। पिछले साल 22 जनवरी को जो मुहूर्त था, वही मुहूर्त 11 जनवरी को है।

प्राण प्रतिष्ठा द्वादशी उत्सव आज 11 जनवरी से शुरू होकर 13 जनवरी तक चलेगा। कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे और भगवान राम का पूजन किया। इसके अलावा, उत्सव में कई साधु संन्यासी भी शामिल हुए हैं। सीएम योगी ने राम मंदिर में रामलला की विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती की।

इस उत्सव में कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें रामलीला और भजन-कीर्तन शामिल है। इन आयोजनों में भारत की प्राचीन संस्कृति के दर्शन के साथ-साथ भारतीय लोक गीतों और लोक नृत्यों को भी शामिल किया गया है। इन सबके लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से अयोध्या में बड़े स्तर पर तैयारियाँ की गई हैं।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से बताया गया है, “प्रतिष्ठा द्वादशी के पावन पर्व पर आयोजित श्री राम राग सेवा के अंतर्गत आज लब्धप्रतिष्ठित श्रीमती ऊषा मंगेशकर, श्रीमती गौरी यादवाडकर तथा गायक श्री मयूरेश पई द्वारा प्रभु के समक्ष श्री राम भजन प्रस्तुत किए जाएँगे।”

राम मंदिर में आयोजित उत्सव को लेकर मंदिर परिसर को 50 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। भगवान राम को 56 प्रकार के भोग लगाए गए और इस भोग को श्रद्धालुओं में वितरित किए जाने की बात कही जा रही है। इस दिन भगवान श्रीराम को सलोने रंग के वस्त्र पहनाए गए हैं, जिसमें सोने की आभा वाले हैं। मंदिर में दीपोत्सव को लेकर भी तैयारी की गई है।

फ्रिज में 6 महीने सड़ी पिंकी की लाश, बाल-बच्चेदार प्रेमी हत्या करके हुआ था फरार: गिरफ्तारी के बाद गुनाह कबूला, MP की घटना

मध्य प्रदेश के देवास में लिव इन रिलेशनशिप में रह रही एक लड़की की हत्या का मामला सामने आया है। मृतका का नाम पिंकी/प्रतिभा है। पुलिस ने इस मामले में पिंकी के शादीशुदा प्रेमी संजय पाटीदार को गिरफ्तार कर लिया है। संजय ने 6 माह पहले ही पिंकी को मारकर लाश फ्रिज में रख दी थी। हत्याकांड का खुलासा शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को हुआ। हत्या की वजह मृतका द्वारा अपने शादीशुदा व 2 बच्चों के पिता प्रेमी पर शादी का दबाव बनाना बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना देवास के वृन्दावन धाम इलाके की है। यहाँ दुबई में रहने वाले धीरेन्द्र नाम के एक व्यापारी का 2 मंजिला मकान है। जुलाई 2024 में इस मकान के ग्राउंड फ्लोर को बलवीर नाम के व्यक्ति ने किराए पर लिया था। इस फ्लोर के 2 कमरों को बलवीर प्रयोग इसलिए नहीं कर पा रहे थे क्योंकि उसमें पुराने किराएदार ने अपना सामान रख रखा था। काफी दिन तक किरायेदार के न आने पर मकान मालिक की सहमति से गुरुवार (9 जनवरी) को ताले को तोड़ा गया।

बलवीर ने पाया कि लम्बे समय से पुराने किराएदार ने अपने फ्रिज को ऑन ही रखा था। उन्होंने फ्रिज को बंद कर दिया। अगले दिन शुक्रवार को फ्रिज के अंदर से तेज बदबू उठने लगी। किसी अनहोनी की आशंका में पुलिस को फोन किया गया। पुलिस की मौजूदगी में फ्रिज को खोला गया तो अंदर चादर से लिपटी एक महिला की लाश निकली। लाश काफी हद तक सड़ चुकी थी। मृतका की पहचान पिंकी उर्फ़ प्रतिभा प्रजापति के तौर पर हुई। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी।

जाँच में पता चला कि बलवीर से पहले धीरेन्द्र के मकान में संजय पाटीदार अपनी प्रेमिका प्रतिभा के साथ लिव इन रिलेशनशिप में पिछले 5 वर्षों से रह रहा था। इस से पहले दोनों 3 साल तक उज्जैन में एक साथ रहे थे। संजय पहले से ही शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप था। प्रतिभा उस पर लगातार शादी का दबाव बना रही थी जिसके लिए संजय तैयार नहीं था। जून 2024 में संजय और प्रतिभा में एक बार फिर से इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ।

आखिरकार संजय ने प्रतिभा को रास्ते से हटाने की ठान ली। उसने इस साजिश में अपने एक साथी विनोद दवे को भी शामिल कर लिया। जून में ही दोनों ने प्रतिभा की गला दबा कर हत्या कर दी। लाश को फ्रिज के डीप कूल मोड में डाल कर संजय ने एक कमरे में छोड़ दिया। कमरे में ताला लगा कर उसने इसी माह घर खाली करते हुए बचे सामान को जल्द ले जाने का भरोसा दिया। बीच-बीच में मकान मालिक द्वारा याद दिलाए जाने के बावजूद संजय आज-कल कह कर टालता रहा।

फ़िलहाल पुलिस ने पिंकी उर्फ़ प्रतिभा हत्याकांड में मुख्य आरोपित संजय पाटीदार को गिरफ्तार कर लिया है। संजय का साथी विनोद दवे एक अन्य आपराधिक मामले में राजस्थान की जेल में बंद है। पुलिस उस से भी पूछताछ की तैयारी में जुट गई है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई जारी है।

‘विधायकी का चुनाव लड़ना है, जमानत दे दो’ : दिल्ली दंगों का आरोपित ताहिर हुसैन AIMIM से टिकट पाकर पहुँचा हाईकोर्ट, IB अधिकारी की हत्या का लगा था आरोप

दिल्ली में फरवरी 2020 के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने अंतरिम जमानत माँगी है। ताहिर हुसैन अब एआईएमआईएम में शामिल हो चुका है, उसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्तफाबाद सीट से AIMIM ने टिकट दिया है। इसके बाद उसने चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका दायर की है। ताहिर हुसैन ने याचिका में 14 जनवरी से 9 फरवरी 2024 तक का समय माँगा है, ताकि वो चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले सके।

याचिका पर सुनवाई पहले जस्टिस अमित शर्मा के सामने होनी थी, लेकिन उन्होंने खुद को मामले से अलग कर लिया। इसके बाद इसे जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की अदालत में भेजा गया, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। अब यह मामला 13 जनवरी को सुना जाएगा।

अरविंद केजरीवाल के मामले का दिया हवाला

ताहिर हुसैन की दलील है कि वह चार साल नौ महीने से जेल में हैं और अब तक मुकदमे में अभियोजन पक्ष के केवल 20 गवाहों की गवाही हुई है, जबकि कुल गवाहों की संख्या 114 है। उनका तर्क है कि मुकदमे के लंबा खिंचने के कारण उन्हें अंतरिम जमानत दी जाए ताकि वह चुनाव प्रचार कर सकें। हुसैन ने याचिका में यह भी कहा कि चुनाव प्रचार प्रक्रिया का हिस्सा बनना उनके लिए जरूरी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया, जिसमें AAP नेता अरविंद केजरीवाल को 2024 के लोकसभा चुनाव में हिस्सा लेने के लिए जमानत दी गई थी।

हुसैन पर दिल्ली दंगों के समय खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है। 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान शर्मा का शव खजूरी खास नाले से बरामद हुआ था, जिनके शरीर पर 51 चोटों के निशान पाए गए थे। उनके पिता रविंदर कुमार ने पुलिस को बताया था कि उनका बेटा 25 फरवरी 2020 से लापता था। अगली सुबह उनका शव खजूरी खास नाले से बरामद हुआ। शर्मा के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले, जो उनके साथ हुई क्रूरता को दर्शाते हैं। इस मामले के साथ ही हुसैन पर कई अन्य आरोप भी हैं।

जानकारि के मुताबिक, हुसैन ने अब तक अपने खिलाफ दर्ज 12 मामलों में से 8 में जमानत हासिल की है। हालाँकि, वह अभी भी 3 मामलों में हिरासत में हैं, जिनमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) का एक मनी लॉन्ड्रिंग मामला और दिल्ली दंगों से संबंधित बड़ी साजिश का मामला शामिल है।

मंदिर के अतिरिक्त धन का इस्तेमाल नहीं हो सकता शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनवाने में: मद्रास HC ने तमिलनाडु सरकार के निर्णय पर लगाई रोक, कहा- धार्मिक स्थलों को रखो मुकदमे से दूर

मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में तमिलनाडु हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग को मंदिर के अधिशेष कोष (Surplus Fund) से शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने से रोक दिया है। यह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अरुलमिघु नंदीश्वरम थिरुकोइल की भूमि पर बनाया जा रहा था। कोर्ट ने यह भी कहा कि जहाँ तक हो सके मंदिरों को मुकदमेबाजी से दूर रखा जाना चाहिए।

मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केआर श्रीराम और न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ ने संभावित मुदकमेबाजी के कारण शॉपिंग कॉमप्लेक्स बनाने पर रोक लगाई। बेंच ने कहा कि यदि वाणिज्यिक परिसरों को अनुमति दी जाती है तो इससे निवेश पर लाभ, लाइसेंसधारियों/किराएदारों की बेदखली, बकाया किराए की वसूली और अतिक्रमण को रोकने जैसी जटिलताएँ पैदा हो सकती हैं।

कोर्ट ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने कहा कि एचआर एंड सीई अधिनियम के अनुसार, मंदिर के अधिशेष धन का उपयोग केवल धारा 66(1) या अधिनियम की धारा 36ए या धारा 36बी के तहत निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है और किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किसी भी श्रेणी में नहीं आता है। इसलिए निर्णय को रद्द कर दिया जाना चाहिए।

दरअसल, पी. भास्कर नाम के एक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी और कहा था कि वे मंदिर के अनुयायी हैं। उन्होंने दावा किया कि वे अधिनियम की धारा 6(15)(बी) के तहत परिभाषित हितधारक व्यक्ति हैं। याचिकाकर्ता ने बंदोबस्ती विभाग के निर्णय को चुनौती दी थी। भास्कर ने दावा किया था कि बंदोबस्ती को केवल अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ही विनियोजित किया जा सकता है।

इस पर बंदोबस्ती विभाग ने दलील दी कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए मंदिर से संबंधित अधिशेष निधि का उपयोग किया जा रहा है। हालाँकि, विशेष सरकारी वकील ने दलील दी कि अधिनियम की धारा 36 के पहले प्रावधान के अनुसार, ट्रस्टी निर्दिष्ट उद्देश्य को प्राथमिकता देंगे, लेकिन अधिशेष निधि का उपयोग किसी भी उद्देश्य के लिए कर सकते हैं, जिसे वे उचित समझते हैं, जिसमें शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी शामिल है।

हालाँकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मंदिर के फंड का उपयोग करके शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण संस्था के धार्मिक सिद्धांतों के प्रचार को इंगित नहीं करता है। इन कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य धार्मिक सिद्धांतों का प्रचार है। अतिरिक्त भूमि कि इस्तेमाल को लेकर कोर्ट ने सुझाव दिया कि पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए विभाग इस पर देशी पेड़ लगाने पर विचार कर सकता है।

चूँकि उसे बताया गया कि संपत्ति में निर्माण का एक हिस्सा पहले ही बनाया जा चुका है और वह बर्बाद हो सकता है, इसलिए न्यायालय ने फैसला सुनाया कि शेष निर्माण इस तरह से किया जा सकता है कि इसका उपयोग गरीबों को भोजन देने में किया जा सके।

न्यायालय ने यह भी कहा कि भवन का उपयोग गरीब और जरूरतमंद हिंदुओं के बीच विवाह आयोजित करने के लिए किया जा सकता है। हालाँकि, न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि हर मामले में अधिशेष धन का उपयोग विवाह हॉल के निर्माण के लिए नहीं किया जा सकता है।