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जिस ट्रेन से महाकुंभ जा रहे थे 36 श्रद्धालु, उस पर जलगाँव में बरसाए गए पत्थर: खिड़की चकनाचूर, ताप्ती गंगा एक्सप्रेस में बैठे यात्री दहशत में आए

सूरत से बलिया जा रही ताप्ती गंगा एक्सप्रेस ट्रेन पर महाराष्ट्र के जलगाँव के पास पथराव की खबर है। इस ट्रेन में महाकुंभ मेले के लिए प्रयागराज जा रहे यात्री सवार थे। यह घटना रविवार (12 जनवरी 2024) को 15.17 बजे हुई, जब ट्रेन जलगाँव स्टेशन से आगे बढ़ी ही थी। अज्ञात लोगों द्वारा किए गए इस पथराव से बी-6 कोच की खिड़की का शीशा टूट गया। इस घटना से यात्रियों में डर का माहौल बन गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ताप्ती-गंगा एक्सप्रेस ट्रेन के बी-6 कोच में सूरत के उधना से 36 श्रद्धालु सवार हुए थे, जिनमें 5 बच्चे, 6 बुजुर्ग, 13 महिलाएँ और 12 पुरुष शामिल थे। सभी श्रद्धालु महाकुंभ मेले के पहले शाही स्नान में हिस्सा लेने जा रहे थे। पथराव की सूचना तुरंत रेलवे पुलिस को दी गई, जिसके बाद मामले की जाँच शुरू कर दी गई है।

घटना के बाद बी-6 कोच के यात्रियों ने बताया कि अचानक तेज आवाज आई और खिड़की का काँच टूट गया। कुछ यात्रियों ने बताया कि पथराव के दौरान कई पत्थरों की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरे कोच में दहशत फैल गई। इस बीच, यात्रियों की तरफ से वीडियो रिलीज किया गया है, जिसमें कम से कम 2 खिड़कियों के सीसों को नुकसान पहुँचा है।

आरपीएफ इंस्पेक्टर ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि दोपहर बाद 15.17 मिनट पर ट्रेन प्लेटफॉर्म से बामुश्किल 16-17 कोच की दूरी तक ही आगे बढ़ी थी कि बाईं तरफ से पत्थर ट्रेन पर आया। भुसावल में ट्रेन की जाँच की गई, इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। हालाँकि पत्थरबाज का अब तक पता नहीं चल पाया है।

मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल नीला ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की चार सदस्यीय टीम ट्रेन में तैनात कर दी गई। रेलवे पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि यह हमला संभवतः असामाजिक तत्वों द्वारा किया गया हो सकता है। घटना के बाद से यात्रियों को अतिरिक्त सुरक्षा का भरोसा दिया गया है।

‘युवाओं के पास हर समस्या का समाधान, मैं उनका परम मित्र’ : प्रधानमंत्री मोदी ने दिखाई विकसित भारत की राह, आने वाले 25 सालों को बताया ‘अमृतकाल’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती पर ‘विकसित भारत युवा नेता संवाद 2025’ कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए देश के भविष्य को लेकर अपनी सोच साझा की। दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में 15 से 29 वर्ष के करीब 3,000 युवा शामिल हुए। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के युवाओं की ऊर्जा, आत्मविश्वास और सामर्थ्य देश को जल्द से जल्द एक विकसित राष्ट्र बना सकता है।

उन्होंने कहा, “स्वामी विवेकानंद जी को देश के नौजवानों पर बहुत भरोसा था। वे कहते थे कि मेरा विश्वास युवा पीढ़ी में है। जैसे स्वामी जी को युवाओं पर विश्वास था, वैसे ही मुझे भी है। भारत के युवा हर समस्या का समाधान निकाल सकते हैं।”

युवाओं के साथ ‘परम मित्र’ वाला रिश्ता

पीएम मोदी ने युवाओं के साथ अपने रिश्ते को ‘परम मित्र’ वाला बताया। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, “कुछ महीने पहले, जब मैं युवा एथलीटों से मिला था, तो एक खिलाड़ी ने कहा, ‘मोदी जी, आप दुनिया के लिए प्रधानमंत्री हो सकते हैं, लेकिन हमारे लिए पीएम का मतलब है परम मित्र।'”

उन्होंने कहा, “दोस्ती की सबसे मजबूत कड़ी होती है विश्वास। मुझे आप पर विश्वास है, और यही विश्वास मुझे प्रेरित करता है। ‘माई भारत’ डॉट कॉम और ‘विकसित भारत युवा नेता संवाद’ की शुरुआत इसी विश्वास का परिणाम है।”

इकोनॉमी और इकोलॉजी दोनों मजबूत

प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं के सामने विकसित भारत की परिकल्पना को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा, “विकसित भारत वह होगा जो आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और सामरिक रूप से मजबूत होगा। जहाँ इकोनॉमी और इकोलॉजी दोनों समृद्ध होंगी। जहाँ अच्छी शिक्षा और रोजगार के ज्यादा अवसर होंगे।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत के सामने आने वाले 25 साल ‘अमृतकाल’ के हैं। “यह समय हमारे सपनों को साकार करने का है। जब हर नीति और हर कदम का लक्ष्य विकसित भारत होगा, तो दुनिया की कोई ताकत हमें रोक नहीं सकती।”

पीएम मोदी ने स्वामी विवेकानंद के जीवन का किया उल्लेख

स्वामी विवेकानंद के जीवन और उनकी शिक्षाओं का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि विवेकानंद ने युवाओं में जो विश्वास जताया था, वही विश्वास आज भी भारत के युवाओं में है। “वे कहते थे कि युवा हर समस्या का समाधान निकाल सकते हैं। आज का भारत इसे सच कर दिखा रहा है।”

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने अमेरिका और सिंगापुर जैसे देशों के उदाहरण दिए। उन्होंने बताया कि कैसे 1930 के दशक में अमेरिका ने आर्थिक संकट से उबरकर तेज विकास किया और सिंगापुर ने अपने मजबूत नेतृत्व और जनता के प्रयासों से खुद को वैश्विक व्यापारिक हब बनाया।

पीएम मोदी ने कोरोना महामारी के दौरान भारत की सफलता का जिक्र करते हुए कहा, “जब दुनिया वैक्सीन के लिए परेशान थी, तब भारत के वैज्ञानिकों ने रिकॉर्ड समय में वैक्सीन बनाकर दिखा दिया। यह भारत की क्षमता का सबूत है।”

प्रधानमंत्री ने युवाओं को सुझाव देने और राजनीति में भाग लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मैंने लाल किले से 1 लाख नए युवाओं को राजनीति में लाने की बात कही थी। राजनीति एक ऐसा माध्यम हो सकता है, जहाँ आप अपने सुझावों को लागू कर सकते हैं।”

भारत मंडपम से ‘विश्व मंच’ तक

प्रधानमंत्री ने सितंबर 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन की चर्चा करते हुए कहा, “जिस जगह पर वैश्विक नेता दुनिया के भविष्य पर चर्चा करते थे, वहाँ आज भारत के युवा अगले 25 वर्षों का रोडमैप तैयार कर रहे हैं। यह अपने आप में एक प्रेरणादायक पल है।”

प्रधानमंत्री ने युवाशक्ति पर भरोसा जताते हुए कहा, “भारत के युवा आज उल्लेखनीय परिवर्तन ला रहे हैं। यह संवाद एक ऐसा मंच है, जहां उनकी ऊर्जा और नए विचारों को विकसित भारत के लिए एकजुट किया जा रहा है। मेरा विश्वास है कि भारत की युवाशक्ति जल्द ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाएगी।”

प्रधानमंत्री का यह भाषण न केवल युवाओं को प्रेरित करने वाला था, बल्कि यह भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक नई ऊर्जा देने वाला भी साबित हुआ। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए युवाओं को भविष्य का निर्माण करने की दिशा में कदम बढ़ाने का आह्वान किया। “युवाओं की ताकत से कोई भी सपना असंभव नहीं है। विकसित भारत का सपना हमारे सामूहिक प्रयासों से जरूर पूरा होगा।”

मकर संक्रांति से पहले 3 गायों पर धारदार हथियार से हमला, थन काटकर तड़पने को छोड़ा: बेंगलुरु में हिंदू संगठन भड़के, BJP नेता बोले – ये जिहादी मानसिकता का काम

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में गायों पर हमला किया गया और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया गया। उनके थन काट दिए गए और उन्हें रक्तरंजित छोड़ दिया गया। गायें स्थानीय लोगों को कराहती हुई मिलीं। इन पर हमला करने वालों की पहचान नहीं हो पाई है। इस घटना के बाद बेंगलुरु में तनाव है। भाजपा ने इस घटना को जघन्य करार दिया है और कहा है कि यदि राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार इस पर एक्शन नहीं लेती तो संक्रांति पर प्रदर्शन होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना बेंगलुरु के चामराजपेट में हुई। यहाँ कर्ण नाम के एक व्यक्ति की तीन गायें स्थानीय लोगों को चिल्लाती हुई मिलीं। जब वह बाहर आए तो उन्होंने गायों को घायल अवस्था में देखा। यह खून से लथपथ थीं और इनके थन भी काट दिए गए थे। इन पर हमला करने वालों की पहचान नहीं हो पाई है। इसके बाद इलाके में रोष फ़ैल गया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने इस मामले में कॉटनपेट थाने में शिकायत दर्ज कर ली है।

गोपालक ने बताया कि यह घटना रविवार सुबह हुई है। इस घटना की सूचना मिलने के बाद यहाँ बड़ी संख्या में हिन्दू संगठन के लोग पहुँचे और प्रदर्शन किया। उन्होंने कार्रवाई की माँग की है। कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष BY विजयेन्द्र ने राज्य सरकार पर गायों के प्रति लापरवाह रुख अपनाने का आरोप लगाया है। BY विजयेन्द्र ने कहा है कि राज्य लगातार हिन्दू विश्वासों पर हमला हो रहा है। BY विजयेन्द्र ने कहा है कि अगर इस मामले में जल्द कार्रवाई नहीं होती तो सरकार के ऊपर भी सवाल उठेंगे।

भाजपा नेता और कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष R अशोक ने घटनास्थल का दौरा किया है। R अशोक ने कहा, “बेंगलुरु के चामराजपेट के विनायक नगर में गाय के थन काटने की घटना अत्यंत निंदनीय है, तथा सरकार को गाय के थन काटने वाले अपराधियों को तत्काल गिरफ्तार करना चाहिए। गाय भारतीयों के लिए माता के समान है। संक्रांति पर्व पर गाय की विशेष पूजा की जाती है। संक्रांति पर्व पर गाय के थन काटकर कट्टरपंथी ताकतों ने हिंदुओं को चुनौती दी है। हमारे राज्य में ऐसी जिहादी मानसिकता कभी नहीं देखी गई।”

R अशोक ने कहा, “अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के दौरान कारसेवकों के खिलाफ 30 साल पुराने मामले फिर से खोले जाते हैं। गणेश उत्सव के दौरान सांप्रदायिक हिंसा होती है। दशहरा उत्सव के दौरान दुर्गा माता के जुलूस के दौरान हँगामा होता है। कॉन्ग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद से बार-बार सांप्रदायिक दंगे क्यों हो रहे हैं? कॉन्ग्रेस पार्टी की वोट बैंक की राजनीति ने कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ावा दिया है। कट्टरपंथियों को कानून का कोई डर नहीं है।”

भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं होती तो वह मकर संक्रांति पर प्रदर्शन करेंगे। भाजपा ने कहा कि वह ‘काली संक्रांति’ मनाएगी। राज्य के गृह मंत्री जी परमेश्वरा ने कहा है कि पुलिस इस मामले में कार्रवाई कर रही है।

UAE ने 8 ब्रिटिश संस्थाओं को किया ब्लैकलिस्ट, इस्लामी आतंकी संगठन ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से कनेक्शन पर हुई कार्रवाई: इनसे जुड़े लोग नहीं आ पाएँगे दुबई, खाते होंगे सीज

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने यूनाइटेड किंगडम के 8 संगठनों को पर बैन लगा दिया है। यह बैन इनके इस्लामी आतंकी संगठन ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से संबंध रखने के चलते लगाया गया है। अब इन्हें ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया है। इनसे जुड़े लोग अब UAE नहीं आ पाएँगे और इनके खातों पर भी UAE में कार्रवाई होगी।

UAE ने जिन संगठनों पर बैन लगाया है, उनकी पहचान कैम्ब्रिज एजुकेशन एंड ट्रेनिंग सेंटर लिमिटेड, IMA6INE लिमिटेड, वेम्बली ट्री लिमिटेड, वासलाफोरॉल, फ्यूचर ग्रेजुएट्स लिमिटेड, यास फॉर इन्वेस्टमेंट एंड रियल एस्टेट, होल्डको यूके प्रॉपर्टीज लिमिटेड और नेफेल कैपिटल के रूप में हुई है।

यूनाइटेड किंगडम के इन 8 संगठनों के अलावा 11 और लोगों को भी इस बैन में शामिल किया गया है। यह लोग UAE के ही नागरिक हैं। इन 11 लोगों पर भी आतंक को समर्थन करने का आरोप है। यह लोग इन कम्पनियों में डायरेक्टर या बाकी पदों पर काम कर रहे हैं। UAE ने यह कदम अपने यहाँ इस्लामी कट्टरपंथ और आतंक से लड़ने को उठाए हैं।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि, यूनाइटेड किंगडम के इन आठ संगठनों से मिलकर काम करने वाले किसी भी व्यक्ति की UAE यात्रा पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। UAE ने इन पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने की भी तैयारी कर ली है। UAE ने ऐसे लोगों की संपत्ति जब्त करने का फैसला लिया है।

UAE का कोई नागरिक और दूसरी संस्थाएँ इन संस्थाओं के साथ मिलकर काम नहीं कर सकेगीं। UAE द्वारा लगाए गए प्रतिबंध तुरंत ही लागू हो जाएँगे। UAE में आतंक फ़ैलाने के लिए यह यूनाइटेड किंगडम में अपनी आजादी का सहारा ले रहे थे। अभी भी इन पर यूनाइटेड किंगडम में अपनी इस्लामी आतंक की विचारधारा फ़ैलाने पर कोई रोक नहीं है।

मुस्लिम ब्रदरहुड एक इस्लामी आतंकी संगठन है, इसकी स्थापना 1928 में हसन अल-बन्ना ने मिस्र में की थी। यह संगठन राजनीतिक इस्लाम, शरिया कानून, हिंसा और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए जाना जाता है।

इस संगठन को मिस्र, सऊदी अरब और UAE जैसे मुस्लिम बहुल अरब देशों में भी प्रतिबंधित किया गया है। हालाँकि, इस संगठन पर यूनाइटेड किंगडम में बैन नहीं है।

हिंदू लड़की को बार-बार गर्भवती कर कराता था गर्भपात, धर्मांतरण का डालता था दबाब: मुरादाबाद में पुलिस ने आसिफ को दबोचा, परिवार के खिलाफ मुकदमा दर्ज

मुरादाबाद पुलिस ने शनिवार (11 जनवरी 2024) को आसिफ नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया, जिसके खिलाफ हिंदू युवती ने रेप करने, कई बार अबॉर्शन कराने और उसके धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने का केस दर्ज कराया था। युवती ने आसिफ और उसके परिवार के 8 लोगों के खिलाफ उत्तर प्रदेश की धर्मांतरण रोधी धाराओं समेत कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कराया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला कटघर इलाके का है, जहाँ की रहने वाली हिंदू लड़की की इमलाख गाँव के रहने वाले आसिफ से 4 साल पहले मुलाकात हुई थी। कुछ समय बाद आसिफ ने उससे शादी की इच्छा जताई, जिसे युवती ने ठुकरा दिया। युवती ने साफ कहा कि दोनों अलग-अलग धर्म के हैं। इसके बावजूद आसिफ लगातार उसे शादी के लिए मनाता रहा और आखिर में उसे अपने झाँसे में लेने में सफल रहा।

युवती का भरोसा जीतने के लिए आसिफ उसे लेकर हरिद्वार गया और हिंदू बनने का नाटक किया। इसके बाद शादी का झाँसा देकर उसने युवती का रेप किया और लगातार उसके साथ संबंध बनाता रहा। युवती उससे जब भी शादी के लिए कहती, वो बहाने बनाकर टाल जाता।

आसिफ ने युवती के साथ संबंध बनाकर उसे कई बार गर्भवती किया और बार-बार गर्भपात कराया। वो युवती को मानसिक रूप से परेशान करता था, ताकि वो उसकी बातों को मान जाए। बीते 20 दिसंबर को युवती को पता चला कि वो एक बार फिर से गर्भवती है, जिसके बाद फिर से आसिफ ने गर्भपात का दबाव डाला। युवती ने मना किया, तो आसिफ ने उसकी पिटाई भी की और बताया कि उसने उसे फंसाने के लिए झूठ बोले थे।

आसिफ का परिवार डाल रहा इस्लाम कबूलने का दबाव

पीड़ित हिंदू युवती ने आसिफ के परिजनों पर भी उसके साथ मिलीभगत के आरोप लगाए। युवती ने अपनी शिकायत में आसिफ की माँ रुखसाना, चाचा कासिम, भाई इमरान, चाची सन्नो, जीजा मोहम्मद उमर और एक अन्य रिश्तेदार नासिर का भी नाम लिखा है। जो इस पूरे प्लान में शामिल थे। युवती ने आरोप लगाया कि आसिफ के साथ परिवार के लोग भी उसे परेशान कर रहे हैं और वो लोग उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव डाल रहे हैं। साथ ही इस्लाम न कबूल करने की सूरत में उसकी हत्या की धमकी दे रहे हैं।

इस मामले में कटघर पुलिस ने आसिफ और उसके परिवार के 8 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। पुलिस ने रेप, मारपीट, आपराधिक साजिश रचने और धर्मांतरण की धाराओं में मामला दर्ज किया है। सीओ कटघर ने एफआईआर की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि मामला काफी गंभीर है। पुलिस आरोपों की गंभीरता से जाँच कर रही है। उन्होंने बताया कि एसएसआई सतेंद्र सिंह उज्जवाल की अगुवाई में पुलिस टीम ने आसिफ को गिरफ्तार लिया है और कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

चैंपियंस ट्रॉफी तक रोहित शर्मा ही होंगे कप्तान, बुमराह की फिटनेस को लेकर फंसा पेंच: बीसीसीआई की बैठक में इन अहम मुद्दों पर चर्चा, कोहली से भी होगी बात

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने शनिवार (11 जनवरी 2024) को अहम बैठक की। मुंबई के एक होटल में हुई इस बैठक में बीसीसीआई के पदाधिकारियों के साथ ही टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर, कप्तान रोहित शर्मा और मुख्य चयनकर्ता अजित अगरकर भी शामिल हुए। इस बैठक में टीम इंडिया के भविष्य को लेकर चर्चा हुई, खासकर कप्तानी के विकल्प को लेकर।

दैनिक जागरण की मानें, तो बीसीसीआई की बैठक में रोहित शर्मा से कप्तानी को लेकर खास चर्चा की गई, जिसमें रोहित शर्मा ने कहा है कि वो कम से कम चैंपियंस ट्रॉफी तक कप्तानी संभालेंगे, तब तक बीसीसीआई उनके विकल्प की खोज जारी रखे। खास बात ये है कि ऑस्ट्रेलिया में खेली गई बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भारतीय टीम की करारी हार हुई थी। इस सीरीज में रोहित शर्मा बतौर कप्तान और बतौर बल्लेबाज बुरी तरह से फेल हुए थे। यही नहीं, उन्हें सिडनी में खेले गए सीरीज के आखिरी टेस्ट मैच से भी बाहर कर दिया गया था। हालाँकि कुछ रिपोर्ट्स में बता रहे हैं कि रोहित शर्मा सिडनी टेस्ट से पहले ही संन्यास लेना चाहते थे और वो इसके लिए तैयार भी थे, लेकिन आखिरी समय में उन्होंने अपना फैसला बदल लिया। इसके बाद उन्होंने मैच के दौरान इरफान पठान से बात करते हुए कहा था कि वो अभी संन्यास नहीं ले रहे हैं, बल्कि खराब फॉर्म की वजह से खुद को टीम से ड्रॉप किया था।

शनिवार को बीसीसीआई की बैठक में उनकी कप्तानी और भविष्य को लेकर फिर से गहरी चर्चा हुई, जिसमें रोहित शर्मा ने कम से कम चैंपियंस ट्रॉफी तक पीछे नहीं हटने के संकेत दिए। उन्होंने साफ कहा कि बीसीसीआई उनके विकल्प की खोज जारी रखे। वैसे, रोहित शर्मा टी-20I से पहले ही संन्यास ले चुके हैं और उनका टेस्ट करियर भी लगभग खत्म हो चुका है। ऐसे में माना जा सकता है कि वो चैंपियंस ट्रॉफी के आखिरी मैच के साथ ही कोई बड़ी घोषणा कर दें।

वैसे, बीसीसीआई की बैठक में जसप्रीत बुमराह को अगले कप्तान के तौर पर जिम्मेदारी देने की भी बात की गई, लेकिन बुमराह की पाँच टेस्ट मैच जैसी सीरीज में पूरी तरह से फिट रहकर टीम की कमान संभालने के मुद्दे पर मतभेद सामने आ गए। बता दें कि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के आखिरी मैच में बुमराह ने कप्तानी तो संभाली थी, लेकिन आखिरी पारी में वो गेंदबाजी नहीं कर सके थे, और अभी इंग्लैंड के खिलाफ घोषित टी-20 सीरीज में भी फिटनेस की वजह से उन्हें शामिल नहीं किया गया है।

विराट कोहली से भी बात करेगा बीसीसीआई

वहीं, सूत्रों के हवाले से ये भी कहा गया है कि बीसीसीआई जल्द ही विराट कोहली से भी उनकी भविष्य की योजनाओं को लेकर बातचीत करने वाला है। चूँकि विराट भी ऑस्ट्रेलिया में पूरी तरह से फ्लॉप रहे थे और पर्थ टेस्ट की दूसरी पारी में नाबाद शतक के अलावा वो किसी भी पारी में ढंग से खेल नहीं सके थे और वो लगातार एक ही तरह की गेंदों पर आउट हो रहे थे। ऐसे में चैंपियंस ट्रॉफी के बार विराट को लेकर भी कोई बड़ी खबर सामने आ सकती है।

घरेलू क्रिकेट में उतरेंगे वरिष्ठ खिलाड़ी

बता दें कि बीसीसीआई पहले ही साफ कर चुकी है कि भारतीय टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों को घरेलू क्रिकेट में भी हिस्सा लेना होगा। बीसीसीआई ने साफ कहा है कि अगर कोई खिलाड़ी किसी सीरीज या घरेलू क्रिकेट से छुट्टी लेना चाहता है, तो उसे फिजियो और कोच की सहमति वाला पत्र जमा करना पड़ेगा। यही वजह है कि सूर्यकुमार यादव से लेकर वो सभी इंटरनेशनल क्रिकेटर घरेलू क्रिकेट में हिस्सा ले रहे हैं, जो मौजूदा समय में भारतीय टीम से बाहर हैं।

‘पूजा करो तो मातृभूमि की, सेवा करो तो देशवासियों की’: शिकागो से 4 साल बाद लौट स्वामी विवेकानंद ने भावुक होकर माँगी थी ‘धरती माँ’ से माफी, भारत को बताया था- तीर्थस्थान

इंग्लैंड से विदा लेने से पूर्व एक अंग्रेज मित्र ने उनसे पूछा, “स्वामी जी, चार वर्षों तक विलासिता, चकाचौंध तथा शक्ति से परिपूर्ण इस पश्चिमी जगत का अनुभव लेने के बाद अब आपको अपनी मातृभूमि कैसी लगेगी?” स्वामी जी ने उत्तर दिया, “यहाँ आने से पूर्व मैं भारत से प्रेम करता था परंतु अब तो भारत की धूलिकण तक मेरे लिए पवित्र हो गई है। अब मेरे लिए वह एक पुण्यभूमि है- एक तीर्थस्थान है!”

ऐसी थी हमारे परमपूज्य स्वामी विवेकानंद की भारत भक्ति। 12 जनवरी 1863 को कलकत्ता में जन्में, ठाकुर श्रीरामकृष्ण परमहंस देव के परमप्रिय शिष्य, गुरुदेव के आशीर्वाद से साधारण नरेन्द्र से असाधारण स्वामी विवेकानंद बन गए। परिव्राजक सन्यासी के रूप में स्वामी जी भारत भ्रमण करते हुए अंत में भारतवर्ष के अंतिम छोर, ध्येय भूमि कन्याकुमारी पहुँचते हैं। 1892, दिसंबर माह की 25, 26 और 27 तारीख को महासागर के मध्य स्थित शिला पर भारत के भूत, भविष्य, वर्तमान का ध्यान करते हुए उन्हें साक्षात जगतजननी भारत माता के दिव्य स्वरूप के दर्शन होते हैं और साथ ही अपना जीवनोद्देश्य भी प्राप्त होता है।

शिकागो (अमेरिका) में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में पहुँचने से पूर्व स्वामी जी को अनगिनत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। तत्पश्चात 11 सितंबर 1893 के पावन दिवस पर उनके मुख से गुरु रामकृष्ण प्रेरित ऐसी ओजस्वी वाणी गूँजी कि आज भी दुनिया याद करती है। यह केवल स्वामी जी की दिग्विजय ही नहीं अपितु भारतवर्ष के पुनरुत्थान का शंखनाद भी था। सम्पूर्ण विश्व भारत के प्रति, यहाँ की सभ्यता-संस्कृति के प्रति नतमस्तक हो गया।

स्वामी जी रातों – रात लोकप्रिय और प्रसिद्ध हो गए। उनके सम्मान में राजोचित सत्कार का आयोजन किया गया। स्वामीजी का कक्ष भौतिक सुख सुविधाओं से परिपूर्ण था, किन्तु उस विलासितापूर्ण बिछौने पर एक सन्यासी को नींद कहां आने वाली थी! उनका हृदय तो भारत के लिए क्रंदन करता रहा और वे फर्श पर लेट गए। द्रवित होकर सारी रात एक शिशु के समान फूट-फूट कर रोते रहे और ईश्वर के सम्मुख भारत के पुनरुत्थान की प्रार्थना करते रहे। भारत के प्रति उनका ऐसा ही ज्वलंत प्रेम था।

चार वर्षों के विदेश प्रवास के उपरान्त भारत लौटने के लिए अधीर होते स्वामी जी भारत की मिट्टी पर 15 जनवरी 1897 को अपना पहला कदम रखते हैं। अपने मन के आवेग को वे रोक नहीं पाते और स्वदेश की मिट्टी में लोट-पोट होने लगते हैं तथा भाव-विभोर होकर रोते हुए कहने लगते हैं कि, “विदेशों में प्रवास के कारण मुझमें यदि कोई दोष आ गए हों तो हे धरती माता! मुझे क्षमा कर देना।”

एक बार किसी ने स्वामी जी से कहा की सन्यासी को अपने देश के प्रति विशेष लगाव नहीं रखना चाहिए, बल्कि उसे तो प्रत्येक राष्ट्र को अपना ही मानना चाहिए। इस पर स्वामी जी ने उत्तर दिया – “जो व्यक्ति अपनी ही माँ को प्रेम तथा सेवा नहीं दे सकता, वह भला दूसरे की माँ को सहानुभूति कैसे दे सकेगा ?” अर्थात पहले देशभक्ति और उसके बाद विश्वप्रेम!

स्वामी जी की महान प्रशंसिका तथा उन्हें अपना मित्र माननेवाली अमेरिकी महिला जोसेफिन मैक्लाउड ने एक बार उनसे पूछा था, “मैं आपकी सर्वाधिक सहायता कैसे कर सकती हूँ?” तब स्वामी जी ने उत्तर दिया था, “भारत से प्रेम करो।” स्वयं के विषय में बोलते हुए उन्होंने एकबार कहा था कि वे ‘घनीभूत भारत’ हैं। वस्तुतः उनका भारत-प्रेम इतना गहन था कि आखिरकार वे भारत की साकार प्रतिमूर्ति ही बन गए थे। कविश्रेष्ठ रवीन्द्रनाथ टैगोर ने उनके विषय में कहा था कि, “यदि आप भारत को समझना चाहते हैं, तो विवेकानंद का अध्ययन कीजिये।”

स्वामी जी और भारत एकाकार हो गए थे। भगिनी निवेदिता के शब्दों में यही विश्वास प्रतिध्वनित होता है – “भारत ही स्वामी जी का महानतम भाव था। भारत ही उनके हृदय में धड़कता था, भारत ही उनकी धमनियों में प्रवाहित होता था, भारत ही उनका दिवा-स्वप्न था और भारत ही उनकी सनक थी। इतना ही नहीं वे स्वयं ही भारत बन गए थे। वे भारत की सजीव प्रतिमूर्ति थे। वे स्वयं ही – साक्षात भारत, उसकी आध्यात्मिकता, उसकी पवित्रता, उसकी मेधा, उसकी शक्ति, उसकी अन्तर्दृष्टि तथा उसकी नियति के प्रतीक बन गए थे।”

स्वामी जी सभी दृष्टियों से अतुल्य थे। ऐसा कोई भी न था, जो भारत के प्रति उनसे अधिक लगाव रखता हो, जो भारत के प्रति उनसे अधिक गर्व करता रहा हो और जिसने उनसे अधिक उत्साहपूर्वक इस राष्ट्र के हित के लिए कार्य किया हो। उन्होंने कहा था, “अगले 50 वर्षों तक के लिए सभी देवी-देवताओं को ताक पर रख दो, पूजा करो तो केवल अपनी मातृभूमि की, सेवा करो अपने देशवासियों की, वही तुम्हारा जाग्रत देवता है।” उन्होंने देशभक्ति का ऐसा राग छेड़ा, कि वह आज भी गुंजायमान है।

युवाओं के प्रति आशा भरी दृष्टि

युवावस्था जीवन की वह अवधि है, जो शक्ति और क्षमता के साथ आगे बढ़ती है। किसी भी समस्या का समाधान युवा सकारात्मकता से हल करना जानता है। अतः किसी भी देश के युवा उस देश का भविष्य होते हैं और उस देश की प्रगति और विकास में उनकी प्रमुख भूमिका होती है। स्वामी विवेकानंद का भारत की युवा पीढ़ी पर अटल विश्वास रहा है। वे बड़ी आशा भरी दृष्टि से कहा करते थे कि, “मेरा विश्वास युवा पीढ़ी में, नई पीढ़ी में है; मेरे कार्यकर्ता उनमें से आयेंगे। सिंहों की भांति वे समस्त समस्या का हल निकालेंगे।”

वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। जनसंख्या के आँकड़ों के मुताबिक भारत में पच्चीस वर्ष तक की आयु वाले लोग कुल जनसंख्या के पचास फीसद हैं, वहीं पैंतीस वर्ष तक वाले कुल जनसंख्या के पैंसठ फीसद हैं। यानी भारत अपने भविष्य के उस सुनहरे दौर के निकट है, जहाँ उसकी अर्थव्यवस्था नई ऊँचाईयों को छू सकती है। यही कारण है कि भारत को दुनिया भर में उम्मीद से देखा जा रहा है और इक्कीसवीं सदी की महाशक्ति होने की भविष्यवाणी की जा रही है। ये युवा न केवल कुल आबादी का एक बड़ा हिस्सा हैं, बल्कि आने वाले समय में सामाजिक-राजनीतिक, आर्थिक और जनसंख्या के विकास का संकेत भी देते हैं। चूँकि ये किसी भी देश के सबसे अधिक उत्पादक कामकाजी वर्ग होते हैं, तो यह उम्मीद की जा रही है कि युवाओं की बड़ी आबादी की मदद से भारत वर्ष 2025 तक दुनिया की चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। तब विश्व की कुल जीडीपी में भारत का योगदान लगभग छः फीसद होगा।

राष्ट्र निर्माण कैसे होगा ?

अब प्रश्न यह उठता है कि कौन सा युवा राष्ट्र निर्माण करेगा? कौन है वह जो देश बदलेगा? वह जिसकी प्रतिभा भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गई? अपितु वह जो रोजगार हेतु दर-दर की ठोकरें खा रहा है? या वह जो साक्षर तो है परन्तु शिक्षित नहीं… हाथों में डिग्रियाँ तो हैं परन्तु विषय संबंधित व्यावहारिक ज्ञान का अभाव है। या वह जो सोशल मीडिया की दुनिया में डूब गया है, जिसे सही गलत का भान न रह गया है.. आखिर कौन?

आज बहुत से ऐसे विकसित और विकासशील राष्ट्र हैं, जहाँ नौजवान ऊर्जा व्यर्थ हो रही है। कई देशों में शिक्षा के लिए आवश्यक आधारभूत संरचना की कमी है तो कहीं प्रच्छन्न बेरोजगारी जैसे हालात हैं। ऐसी परिस्थिति में भी युवाओं को एक उन्नत और आदर्श जीवन की ओर अग्रसर करना नितांत आवश्यक है।

यह सच है कि जितना योगदान देश की प्रगति में कल-कारखानों, कृषि, विज्ञान और तकनीक का है, उससे बड़ा और महत्त्वपूर्ण योगदान स्वस्थ और शक्तिशाली युवाओं का होता है। इतिहास साक्षी है कि आज तक दुनिया में जितने भी क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं, चाहे वे सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक अथवा वैज्ञानिक रहे हों, उनके मुख्य आधार युवा ही रहे हैं। शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ युवा वर्ग ही राष्ट्र निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

स्वामी विवेकानंद के विचारों ने भारतवर्ष ही नहीं अपितु सम्पूर्ण विश्व के युवाओं को प्रभावित व प्रेरित किया है। समय की माँग है कि भारत की युवा शक्ति स्वामी जी के “उत्तिष्ठत! जाग्रत! प्राप्य वरान्निबोधत!!” (उठो, जागो और अपने लक्ष्य तक पहुँचने तक मत रुको) रूपी आह्वान से जाग उठे। अपने कंफर्ट जोन से बाहर निकले, यात्राएँ करे, दुनिया की समझ विकसित करे, ज्ञान की खोज में निकले, लक्ष्य प्राप्ति हेतु सदैव तत्पर और संघर्षरत रहे, चरित्रवान, आस्थावान और ऊर्जावान रहे। यदि सत्य में स्वामी विवेकानंद के विचार हमें प्रेरणा देते हैं तो हमारा प्रत्येक दिन ही ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ होना चाहिए। 19वीं शताब्दी में ही उस राष्ट्रसंत ने भारत माता के पुनः जगद्गुरु बनने का मार्ग प्रशस्त कर दिया था। आज 21वीं शताब्दी में, स्वामी जी 162वीं जयंती पर आवश्यकता है तो केवल उनके बताए मार्ग पर संकल्पबद्ध होकर चलने की।

(लेखिका कलकत्ता विश्वविद्यालय में शोधार्थी हैं।)

ग्रीनलैंड पर होगा अमेरिका का कब्जा? : प्रधानमंत्री हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बात करने को तैयार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था- हमें स्वतंत्रता चाहिए

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए डोनाल्ड ट्रम्प के साथ बातचीत को लेकर हामी भरी है। उनका यह बयान राष्ट्रपति चुने गए डोनाल्ड ट्रम्प के ग्रीनलैंड को नियंत्रण में लेने की बात के बाद आया है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री म्यूट एगेदे ने कहा है कि उनके देश के लोग अमेरिकी नहीं बनना चाहते लेकिन वह बातचीत को तैयार हैं।

एगेदे ने कहा, ”हमें स्वतंत्र होने की इच्छा है, हम अपने घर का मालिक बनना चाहते हैं, यह ऐसी बात है जिसका सबको सम्मान करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि अभी उनका ट्रम्प से कोई सम्पर्क नहीं हुआ है लेकिन वह बातचीत के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के साथ अपने सहयोग को बढ़ाने को राजी है।

उन्होंने इसी के साथ यह स्पष्ट कर दिया कि उनके देश के लोग ना ही अमेरिकी और ना ही डेनिश बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “हम डेनिश नहीं बनना चाहते। हम अमेरिकी नहीं बनना चाहते। हम ग्रीनलैंडिक बनना चाहते हैं… बेशक, यह ग्रीनलैंड के लोग ही हैं जो अपना भविष्य तय कर सकते हैं।”

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने यह सारी बातें कोपनहेगन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में तब कहीं जब डेनमार्क के प्रधानमंत्री भी उनके साथ बैठे थे। डेनमार्क का ग्रीनलैंड पर वर्तमान में नियंत्रण है। ग्रीनलैंड को 2009 में कई मामलों में स्वायत्ता दे दी गई थी लेकिन उसकी विदेश नीति और रक्षा नीति डेनमार्क ही तय करता है।

ग्रीनलैंड 57,000 की आबादी वाला एक द्वीप है जो कि डेनमार्क के साम्राज्य का हिस्सा है। ग्रीनलैंड में लगातार पूर्ण स्वतंत्रता की आवाजें उठती रही हैं। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका से बातचीत और स्वतंत्रता की माँग के बीच डेनमार्क से संबंध नहीं खत्म करेंगे।

उन्होंने कहा, “हम स्वतंत्रता चाहते हैं… लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम डेनमार्क के साथ सभी संबंध, सहयोग और सभी रिश्ते खत्म कर रहे हैं।”

ट्रम्प के बयान के बाद चालू हुआ बवाल

अमेरिका के ग्रीनलैंड का नियंत्रण लेने की बात का यह मामला ट्रम्प के हालिया बयानों के बाद चालू हुआ है। उन्होंने हाल ही में कहा था कि अमेरिका की आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड का नियंत्रण लेना जरूरी है। उन्होंने पनामा की नहर कब्जाने की बात भी कही थी। इसके अलावा वह कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य भी बनाना चाहते हैं।

ट्रम्प ने इस संबंध में सैन्य कार्रवाई तक से इनकार नहीं किया था। उन्होंने कहा था कि डेनमार्क का ग्रीनलैंड पर कानूनी अधिकार स्पष्ट नहीं है। ट्रम्प के इस बयान को लेकर अब डेनमार्क, ग्रीनलैंड और अमेरिका में बहस छिड़ी हुई है।

जहाँ डेनमार्क का कहना है कि ग्रीनलैंड के लोग अपनी इच्छा के अनुसार निर्णय करेंगे तो वहीं ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने साफ़ किया है कि वह अमेरिकी नहीं बनना चाहते। अमेरिका इससे पहले द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश कर चुका है। वह वहाँ एक मिलिट्री बेस भी चलाता है।

सपने में आते थे बजरंगबली, इसलिए फिरोज बना राहुल: शुद्धिकरण के बाद सनातन में प्रवेश, MP के खंडवा से घर वापसी का 22वाँ मामला

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में मुस्लिम युवक फिरोज ने सनातन धर्म अपनाकर अपना नाम राहुल सनातनी रख लिया है। महादेवगढ़ मंदिर में बुधवार (8 जनवरी 2025) को पंडित अश्विन खेड़े की उपस्थिति में मंत्रोच्चार, शुद्धिकरण और हवन के साथ यह प्रक्रिया पूरी की गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, खंडवा के दुबे कॉलोने के रहने वाले फिरोज S/o अकरम ने बताया कि वह 14 साल से हिंदू धर्म के प्रति गहरी आस्था रखते थे। बजरंगबली और खाटू श्याम जी उनके सपने में आते थे और यही उनकी घर वापसी का मुख्य कारण बना। उन्होंने इसे धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि अपनी जड़ों की ओर लौटना बताया।

शुद्धिकरण की प्रक्रिया में मंदिर में गाय के गोबर, गोमूत्र और दस प्रकार के पवित्र द्रव्यों से स्नान कराया गया। मुंडन के बाद भगवा वस्त्र पहनाकर प्रायश्चित हवन करवाया गया। इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक भी किया गया।

मंदिर संरक्षक अशोक पालीवाल ने बताया कि फिरोज काफी समय से हिंदू धर्म अपनाने की इच्छा जता रहे थे। उन्होंने बताया कि इस निर्णय के चलते फिरोज को अपने परिवार और समाज के विरोध का भी सामना करना पड़ा। विरोध के कारण उन्हें कुछ समय के लिए इंदौर जाना पड़ा था। लेकिन आठ दिन पहले वे महादेवगढ़ मंदिर के संपर्क में आए और अपनी इच्छा पूरी करने का निर्णय लिया।

यह पहली घटना नहीं है। खंडवा जिले में पिछले दो वर्षों में 22 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब मुस्लिमों ने सनातन धर्म परंपरा को अपनाया हो। इस घटना ने फिर से सनातन धर्म की उदारता और उसकी ओर लोगों के आकर्षण को उजागर किया है।

राहुल ने कहा कि सनातन धर्म में सभी के कल्याण की भावना है और यही वजह है कि उन्होंने इसे अपनाया। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म में आने के बाद उन्हें आत्मिक शांति और संतोष का अनुभव हो रहा है।

महादेवगढ़ मंदिर के पुजारी पंडित अश्विन खेड़े ने कहा कि धर्म परिवर्तन के दौरान विधि-विधान से सभी प्रक्रियाएँ पूरी की गईं। मंदिर में शिव भक्तों ने स्वस्तिवाचन का पाठ किया और पुष्प-अक्षत के माध्यम से राहुल का स्वागत किया।

‘हमारी सरकार आने दो, तुम्हारा गला काट मस्जिद में रखेंगे’ : सुल्तानपुर में माजिद, अनस, कैफ ने 40-50 की भीड़ संग किया हिंदू युवकों पर हमला, दावा- हाथ में थी तलवार

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में मुस्लिम भीड़ पर हिन्दुओं पर हमला करने का आरोप लगा है। हिन्दुओं ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम भीड़ उन पर तलवार और बाँका लेकर हमला करने आई थी। इस हमले में दो हिन्दू युवक गंभीर रूप से घायल हुए हैं। विवाद एक युवक के पैर पर बाइक चढ़ने से चालू हुआ था। ममाले में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना सुल्तानपुर के कोइरीपुर नगर पंचायत में हुई। यह विवाद शुक्रवार (10 जनवरी, 2024) को चालू हुआ। यहाँ एक मुस्लिम लड़के पर गलती से हिन्दू युवक की बाइक टकरा गई थी। इसके बाद दोनों पक्ष में गालीगलौज हुई लेकिन मामला तुरंत शांत हो गया।

हिन्दू पक्ष का आरोप है कि मामला सुलझने के बावजूद शाम को मुस्लिम पक्ष के लोग बड़ी संख्या में उनके इलाके में आए और हमला किया। काफी देर तक यह लड़ाई झगड़ा चलता रहा और इस दौरान ईंट पत्थर भी चले। हिन्दुओं ने आरोप लगाया है कि हमलावरों ने औरतों और बच्चों को भी नहीं छोड़ा। बीचबचाव करने आए लोगों पर भी हमले की बात सामने आई है।

हिन्दुओं ने आरोप लगाया है कि इस हमले में जैद राईन, हामिद राईन सुफियान अंसारी, इसरार, माजिद, सद्दाब, मोहम्मद कैफ, साहिल, मोहम्मद अनस, मोहम्मद आकिब, समेत 40-50 लोग शामिल थे। इस हमले में जतिन और मोहित नाम के युवक घायल हो गए। उनके सर में चोट आई है। जतिन का आरोप है कि यह सभी लोग बाँका, लाठी और तलवार लेकर आए थे।

यह भी आरोप है कि इन लोगों ने गला काटने की धमकी भी दी। मामले में दर्ज FIR के मुताबिक, “हमलावरों ने धमकी दी कि एक बार उनकी सरकार (समाजवादी पार्टी/ INDI गठबंधन) सत्ता में आ गई, तो वे दूसरे पक्ष को मारेंगे, उनका गला काट देंगे और उनके बाल भी काट देंगे, जिन्हें मस्जिद में रखा जाएगा।”

उन्होंने आरोप लगाया कि यह सभी पहले भी हमला कर चुके हैं। पुलिस ने इस मामले में शिकायत दर्ज कर ली है। शांति व्यवस्था बनाने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया है। पुलिस ने हमले में घायल हुए लोगों को मेडिकल के लिए भेज दिया है और आगे की कार्रवाई कर रही है।