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न जाएँगे जेल, न देंगे जुर्माना: पोर्न स्टार केस में दोषी करार होने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप को मिली राहत, फैसला सुन बोले- ये डेमोक्रेट्स की हार

अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हश मनी केस में राहत मिली है। न्यूयॉर्क की अदालत ने उन्हें किसी भी सजा से बरी कर दिया। 78 वर्षीय ट्रंप को जुर्माना नहीं देना होगा और न ही उन्हें जेल जाना पड़ेगा। इस फैसले के बाद ट्रंप ने इसे ‘डेमोक्रेट्स की चाल’ बताया और कहा कि यह मामला कभी था ही नहीं। उन्होंने फैसले को अपने खिलाफ चलाए गए ‘शिकार अभियान – Witch Hunt’ का अंत करार दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस जुआन मर्चन ने शुक्रवार (10 जनवरी 2024) को ट्रंप को ‘अनकंडीशनल डिस्चार्ज’ दिया, जिसका मतलब है कि उनके खिलाफ दोषसिद्धि तो रहेगी, लेकिन कोई कानूनी सजा नहीं दी जाएगी। अदालत ने कहा कि इस फैसले के बाद ट्रंप के खिलाफ यह मामला बंद हो गया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए ट्रंप ने खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने इस फैसले को ‘डेमोक्रेट्स की एक और हार’ करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने लिखा, “यह एक निराधार मामला था। यह साबित हो गया कि कोई केस था ही नहीं। आज का दिन अमेरिकी न्याय प्रणाली के लिए अहम है।” ट्रंप के वकीलों ने कहा है कि वे इस दोषसिद्धि के खिलाफ अपील करेंगे।

बता दें कि मई 2024 में ट्रंप को व्यवसायिक रिकॉर्ड के 34 मामलों में दोषी ठहराया गया था। आरोप था कि उन्होंने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए 1.30 लाख डॉलर की रकम दी थी। इस भुगतान को छुपाने के लिए व्यावसायिक दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई। अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह सब ट्रंप की चुनावी संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए किया गया। हालाँकि, ट्रंप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और डेनियल्स के आरोपों को झूठा बताया। ट्रंप के वकीलों ने भी अदालत में दलील दी कि इस तरह के आरोप लगाने का मकसद ट्रंप को राजनीतिक नुकसान पहुँचाना था।

क्या है हश मनी केस?

हश मनी केस में ट्रंप पर आरोप था कि उन्होंने स्टॉर्मी डेनियल्स को 2016 के चुनाव से पहले एक कथित निजी मामले को सार्वजनिक न करने के लिए पैसे दिए। अभियोजकों का दावा था कि यह भुगतान चुनावी नियमों का उल्लंघन करता है।

इस मामले में अधिकतम चार साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन ट्रंप को दोषसिद्धि के बावजूद किसी भी सजा से राहत दी गई। अदालत का यह फैसला अमेरिका के इतिहास में पहला मौका है जब किसी पूर्व राष्ट्रपति को आपराधिक मामले में दोषी साबित होने के बावजूद राष्ट्रपति पद पर बने रहने की अनुमति मिली है। वो पहले राष्ट्रपति या पूर्व राष्ट्रपति भी हैं, जिन्हें किसी मामले में दोषी पाया गया है।

‘असम में लड़कियाँ तंत्र से लड़कों को बना देती हैं बकरी… रात में संभोग करती हैं’: यूट्यूबर अभिषेक के भ्रामक दावे पर भड़के CM हिमंता, कार्रवाई का दिया आदेश

असम सरकार ने शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को राज्य पुलिस को फाइनांशियल इनफ्लुएंसर अभिषेक कर के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। कर के खिलाफ यूट्यूब पर पॉडकास्ट में गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया है। असम के DGP जीपी सिंह ने साफ किया है कि राज्य के अपराध जाँच विभाग (CID) को इस शख्स के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।

हाल ही में YouTube पॉडकास्ट की एक क्लिप वायरल हुई है। इसमें अभिषेक कर अतिथि थे। इसमें वे असम की महिला को अपमानित एवं बदनाम करने के उद्देश्य से प्रोपगेंडा फैलाते नजर आए। कर ने कहा कि किसी गाँव की महिलाएँ पुरुषों को दूसरे जीवों में तब्दील कर देती हैं और फिर रात में उसे पुरुष बनाकर संभोग करती हैं। ये सब तांत्रिक गतिविधियाँ की जाती हैं।

यह वीडियो वायरल हुआ तो शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को CMO ने इसका संज्ञान लिया। CMO ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “रिया उप्रेती नामक यूट्यूब चैनल का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें अभिषेक कर नामक व्यक्ति असम के इतिहास और परंपराओं पर अस्वीकार्य टिप्पणी करता हुआ दिखाई दे रहा है। गलत सूचना फैलाने के लिए उक्त व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।”

वायरल वीडियो में अभिषेक को असम के मोरीगाँव जिले के मायोंग गाँव के बारे में बात करते हुए सुना जा सकता है। अभिषेक कहता है, “असम में एक गाँव है। वहाँ की लड़कियों को इतनी ज्यादा सिद्धियाँ हासिल हैं कि they have the power कि आप इंसान बनकर जाते हो And they convert you into बकरी और Any other animal और रात को वापस आपको इंसान बनाकर संभोग करती हैं आपके साथ। Why? Because lots of Tantrik practices, जिसका रूट यहाँ से चलता है।”

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मध्य असम का मायोंग क्षेत्र लंबे समय से रहस्यवाद और ‘तांत्रिक’ प्रथाओं से जुड़ा हुआ है। हालाँकि, ये मुख्य रूप से लोक चिकित्सा पर केंद्रित हैं। अभिषेक सुनी-सुनाई बातों को स्टेबलिश करने की कोशिश कर रहा था। उसका अपना YouTube चैनल है, जिसके 18.6 लाख सब्सक्राइबर हैं। वह शेयर बाजार, ट्रेडिंग, वित्त और व्यापार से संबंधित वीडियो अपलोड करता है। इंस्टाग्राम पर उसके 2.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

असम के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा कार्रवाई का निर्देश देने के बाद अभिषक कर ने ऑनलाइन आकर माफी माँगी है। अभिषेक ने अपने वीडियो में कहा, “मैं जनता, असम के मुख्यमंत्री कार्यालय और डीजीपी जीपी सिंह से सहित हर संबंधित पक्ष से माफ़ी चाहता हूँ जो आहत हुए हैं। मेरा इरादा किसी को चोट पहुँचाने का नहीं था और आगे भी इस बात का ध्यान रखूँगा कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।”

अभिषेक कर का कहना है कि उन्होंने ये सब कुछ जानबूझकर नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सब कुछ रिसर्च के बाद दावा किया था। इसको लेकर अपने ट्विटर थ्रेड में एक लिंक भी शेयर किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरह का दावा करने से पहले वह हर पहलू की गंभीरता से जाँच करेंगे।

4 साल में 64 लोगों ने किया नाबालिग का यौन शोषण, सहपाठी से लेकर टीचर और रिश्तेदार भी शामिल: केरल में 2 FIR दर्ज, 6 पकड़े गए

केरल के पथानामथिट्टा जिले में एक 18 वर्षीया लड़की ने दावा किया है कि पिछले 4 वर्षों में उसके साथ 64 लोगों ने यौन शोषण किया। इन आरोपितों में लड़की के सहपाठी, रिश्तेदार, पड़ोसी और कोच भी शामिल हैं। इस खुलासे के बाद पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। अब तक कुल 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वारदात का खुलासा शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को पुलिस की एक प्रेस कॉन्फ्रेस में हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्तमान समय में पीड़िता की उम्र 18 साल 2 महीने है। छात्रा की काउंसिलिंग कर रहे पथानामथिट्टा बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजीव एन ने बताया कि साल 2019 में पीड़िता पहली बार यौन शोषण का शिकार बनी थी। तब यह हरकत पीड़िता के ही स्कूल में पढ़ने वाले एक सहपाठी छात्र ने की थी। बाद में आरोपित छात्र ने यही करतूत अपने कुछ अन्य साथियों को बुला कर दोहराई थी। पीड़िता चुप रही और यह बात किसी के सामने नहीं आ पाई।

खेलों में रूचि रखने वाली पीड़िता का एडमिशन कुछ दिनों बाद स्पोर्ट्स स्कूल में हुआ। यहाँ पीड़िता के साथ खेल की प्रैक्टिस कर रहे कुछ छात्रों ने उसके साथ यौन शोषण किया। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि पीड़िता के कोच और ट्रेनर भी इस अपराध में शामिल हो गए। दर्ज करवाए गए बयान में पीड़िता ने अपने कुछ रिश्तेदारों के नाम भी बताए हैं जो उसके यौन शोषण में शामिल रहे। कुल मिला कर पिछले 4 वर्षों में लगभग 64 आरोपितों ने तब नाबालिग रही पीड़िता को अपनी हवस का शिकार बनाया।

इस मामले के सामने आते ही पुलिस ने 2 अलग-अलग थानों में 2 FIR दर्ज की है। यह केस पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में दर्ज हुआ है। जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि पीड़िता अपना खुद का कोई मोबाइल फोन प्रयोग नहीं करती। वह अपने पापा के फोन से बात करती थी। इसी फोन में पीड़िता ने अपना यौन शोषण करने वाले 40 आरोपितों के नंबर सेव कर रखे हैं। पुलिस ने अब तक कुल 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

शुक्रवार (10 जनवरी) को गिरफ्तार आरोपितों में 24-24 वर्षीय सुबिन और सुधी श्रीनी, 30-30 वर्षीय संदीप और वी के विनीत और 21 वर्षीय के आनंदु के नाम सामने आए हैं। ये सभी चेन्नीरकारा के रहने वाले हैं। एक अन्य आरोपित को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें से सुधी श्रीनी पर पहले से ही एक अन्य नाबालिग लड़की के यौन शोषण का केस चल रहा है। पुलिस सभी आरोपितों को चिन्हित करके उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई जारी है।

छत्तीसगढ़ में अब ‘आज तक’ के पत्रकार के माता-पिता और भाई को कुल्हाड़ी से काटा: पुश्तैनी जमीन बना विवाद की वजह, दूसरे भाई ने भाग कर बचाई जान

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में संपत्ति विवाद के चलते एक पत्रकार के परिवार के तीन सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मृतकों में पत्रकार संतोष कुमार टोपो के माता-पिता और भाई शामिल हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये वारदात शुक्रवार (10 जनवरी 2024) को दोपहर करीब 1 बजे खड़गवाँ थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर गाँव में हुई। आज तक न्यूज चैनल के पत्रकार संतोष कुमार टोपो के माता-पिता माघे टोपो (57) और बसंती टोपो (55), तथा भाई नरेश टोपो (30) खेत में काम करने पहुँचे थे। तभी संपत्ति विवाद को लेकर परिवार के दूसरे पक्ष के छह से सात लोग वहाँ पहुँचे।

दोनों पक्षों में बहस होने लगी, तभी दूसरे पक्ष के लोगों ने माघे टोपो और उनके परिवार पर कुल्हाड़ी और लाठियों से हमला कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से बसंती और नरेश की मौके पर ही मौत हो गई। माघे टोपो को गंभीर हालत में अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। इस दौरान संतोष के दूसरे भाई उमेश टोपो ने भागकर अपनी जान बचाई और ग्रामीणों को घटना की सूचना दी।

पुलिस की शुरुआती जाँच में पता चला है कि विवादित पुश्तैनी जमीन पत्रकार के परिवार और उनके रिश्तेदारों के बीच लंबे समय से तनाव का कारण बनी हुई थी। जिस खेत पर पीड़ित परिवार काम कर रहा था, उस पर पहले हमलावर परिवार का कब्जा था, लेकिन कोर्ट केस में मिली जीत के बाद माघे टोपे और उनके परिवार को कब्जा मिला था और वो खेती करने पहुँचे थे। ऐसे में जब शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को पत्रकार संतोष के परिवार ने खेत पर खेती शुरू की, तो यह विवाद हिंसक झगड़े में बदल गया।

घटना के बाद जगन्नाथपुर गाँव में डर और गम का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों पक्षों में पहले भी संपत्ति विवाद के चलते झगड़े हुए थे, लेकिन इसका अंजाम इतना भयावह होगा, किसी ने सोचा नहीं था।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारी मौके पर पहुँचे। तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और आरोपितों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वारदात के बाद से आरोपित लोग फरार हैं। पुलिस ने उनकी तलाश में कई जगह दबिश दी है और जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई थी। उस हत्याकांड में कॉन्ग्रेस नेता और ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया था। मुकेश चंद्राकर को मार कर सेप्टिंक टैंक में चुनवा दिया गया था।

खत्म हो जाएगी जापान की पूरी आबादी, इस साल तक नहीं बचेगा एक भी जापानी: समस्या के लिए 2012 से ही चल रही एक घड़ी

जापान तकनीकी और विज्ञान के क्षेत्र में बहुत आगे है, लेकिन उसके सामने अपनी आबादी को बचाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। दरअसन, जापान में जन्मदर (बच्चों का जन्म) की गिरावट से उनके ऊपर विलुप्ति का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में जापान की आबादी खत्म हो सकती है। तोहोकू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हिरोशी योशिदा ने चेतावनी दी है कि अगर यही हाल रहा तो 5 जनवरी 2720 तक जापान में 14 साल से कम उम्र का सिर्फ एक बच्चा बचेगा।

प्रोफेसर योशिदा ने इसकी मॉनिटरिंग के लिए एक खास ‘टिकिंग क्लॉक’ बनाई है, जो हर साल के आँकड़ों के आधार पर दिखाती है कि जापान में बच्चों की संख्या कितनी तेजी से घट रही है। आँकड़ों के अनुसार, हर साल बच्चों की आबादी में 2.3% की कमी हो रही है। अगर यही दर जारी रही तो 695 साल बाद जापान में एक भी व्यक्ति जीवित नहीं बचेगा। यह घड़ी 2012 से अपडेट हो रही है और इसका मकसद इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचना है।

जापान की जन्मदर 2023 में 1.20 तक गिर गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। 2024 की पहली छमाही में केवल 3,50,074 बच्चों का जन्म हुआ, जो 2023 की तुलना में 5.7% कम है। यह आँकड़ा साल 1969 के बाद का सबसे कम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अब शादी और बच्चों में कम रुचि ले रहे हैं। आर्थिक असुरक्षा, बच्चों की परवरिश की बढ़ती लागत और सिंगल लाइफ का बढ़ता चलन इसके प्रमुख कारण हैं। कई युवा करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे शादी और बच्चे पैदा करने का फैसला टलता जा रहा है।

जापान सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे माता-पिता को आर्थिक मदद और बच्चों की देखभाल के लिए सब्सिडी। लेकिन इन नीतियों का प्रभाव अभी तक दिखाई नहीं दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जापान का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

जिस चर्च में हर महीने 3000 हिंदुओं का धर्मांतरण, उस पर चलेगा बुलडोजर: एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार का फैसला

आंध्र प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने गुंटूर जिले में स्थित कैल्वरी टेम्पल चर्च को गिराने के आदेश जारी किया है। यह चर्च पेडकाकनी मंडल के नम्बुरु गाँव में स्थित है। इस चर्च को अवैध रूप से संचालन किया जा रहा था। एक जाँच के बाद इसका खुलासा हुआ था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, केवल उन संरचनाओं को ध्वस्त किया जाएगा जो बिना कानूनी अनुमति के चल रही हैं।

दरअसल, नवंबर 2024 में इस चर्च के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय को एक शिकायत दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इसका संचालन पंचायती राज, राजस्व, पुलिस और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे सरकारी विभागों से कानूनी अनुमति के बिना किया जा रहा है। इसमें ये भी कहा गया था कि पादरी डॉक्टर सतीश कुमार ने टैक्स का भुगतान किए बिना दान के जरिए लोगों को लूटा।

शिकायत के बाद जाँच में पाया गया कि यह चर्च अवैध रूप से संचालित हो रहा था और गरीबों को किराने का सामान देकर तथा फर्जी दावे करके हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित कर रहा था। अक्टूबर में बताया गया था कि हैदराबाद के पादरी डॉक्टर सतीश कुमार के नेतृत्व में कैल्वरी चर्च ने हर महीने लगभग 3,000 हिंदुओं को ईसाई धर्म में धर्मांतरित किया है।

पादरी सतीश कुमार ने विशेष रूप से दावा किया कि उन्होंने अब तक 3.5 लाख से अधिक हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया है। सतीश कुमार ने अगले 10 वर्षों में पूरे भारत में 40 ऐसे चर्च स्थापित करने की योजना बताई थी। CBN न्यूज़ (द क्रिश्चियन ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क इंक) का एक वीडियो 26 अक्टूबर 2024 को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर वायरल हुआ।

इस वीडियो में कैल्वरी टेम्पल चर्च की धर्मांतरण गतिविधियों के बारे में बात की गई थी। बाद में 28 अक्टूबर 2024 को लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फ़ोरम (LRPF) ने X पर साझा किया कि काकीनाडा के जिला कलेक्टर के आदेश के बाद राजस्व अधिकारियों ने कैल्वरी टेम्पल चर्च को ज़ब्त कर लिया है। चर्च पर भूमि कब्जाने, संदिग्ध समझौतों के ज़रिए नए चर्च बनाने, कानून का उल्लंघन सहित कई आरोप हैं।

कैल्वरी टेंपल चर्च एशिया के सबसे बड़े चर्चों में से एक है, जिसके सदस्यों की संख्या 4 लाख से अधिक है। वहीं, साप्ताहिक उपस्थिति 20,000 से अधिक होती है। चर्च के अलावा, सतीश कुमार का संगठन कैल्वरी बाइबल कॉलेज, कैल्वरी अस्पताल और कैल्वरी स्कूल चलाता है। पादरी सतीश कुमार का आंध्र प्रदेश और उसके बाहर राजनीति से लेकर हर क्षेत्र में काफी प्रभाव माना जाता है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ईसाई समुदायों में भी सतीश कुमार की तगड़ी पहुँच है। वह मिशनरी गतिविधियों के लिए अक्सर अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, कोरिया सहित विभिन्न देशों में आते-जाते रहते हैं। अमेरिका के तत्कालीन उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने साल 2018 में सतीश कुमार से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया साइट X पर शेयर की थी और मुलाकात को प्रेरणादायक बताया था।

चर्च की स्थापना

कैल्वरी टेम्पल इंडिया की स्थापना 2005 में सतीश कुमार ने की थी। उन्हें अक्सर एक सम्मानित पादरी, लेखक और अंतरराष्ट्रीय वक्ता बताया जाता है। उन्हें दूरदर्शी नेतृत्व और ईमानदार बताया जाता है। हालाँकि, जाँच में उनके मिशनरी कामों का पता चला। पादरी सतीश ‘बाइबिल के मानकों’ पर जोर देते हैं, जो रणनीतिक रूप से उनके अनुयायियों को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया लगता है।

यह भारत में आक्रामक तरीके से धर्मांतरण को बढ़ावा देने के उनके लक्ष्य को दिखाता है। चर्च की वेबसाइट पर कैल्वरी के बारे में खूब प्रशंसा की गई है। इसमें चर्च के 400,000 सदस्य होने का दावा किया गया है। ये सब कुछ हिंदुओं को लक्षित करने के लिए धन जुटाने की रणनीति के तहत किया गया लगता है। कैल्वरी चर्च का यह भी दावा है कि चर्च का निर्माण केवल 52 दिनों में किया गया था।

जब कैल्वरी बाइबिल कॉलेज और कैल्वरी अस्पताल जैसी पहलों के साथ-साथ प्रदान किए जाने वाले मुफ़्त भोजन पर विचार किया जाता है, तो यह परोपकार के बारे में कम और धार्मिक साम्राज्य के निर्माण के बारे में अधिक प्रतीत होता है। पादरी सतीश कुमार अपनी कई गतिविधियों के कारण कुख्यात हो चुके हैं। हालाँकि, ईसाई उनकी गतिविधियों को समुदाय के लिए एक बड़ी सेवा मानते हैं।

‘चीफ जस्टिस के बंगले में हनुमान मंदिर था ही नहीं’: वकीलों ने मंदिर तुड़वाने का लगाया था आरोप, MP हाई कोर्ट ने नकारा, कहा – हो सकती है अवमानना की कार्रवाई

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने चीफ जस्टिस के बंगले में बने हनुमान मंदिर को तोड़े जाने के आरोप नकारे हैं। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने कहा है कि मीडिया में चलाई जा रही खबरें मनगढ़ंत हैं और इन पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है। MP हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने कहा है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के अनुसार इस बंगले में कोई मंदिर था ही नहीं। हाई कोर्ट ने कहा है कि यह खबरें न्यायपालिका की विश्वसनीयता कम करने के उद्देश्य से चलाई गई हैं। बार काउंसिल का आरोप था कि जस्टिस सुरेश कुमार कैत के आने के बाद यह मंदिर तोड़ा गया।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह ने हनुमान मंदिर तोड़े जाने के आरोपों को लेकर कहा, ” हाई कोर्ट के संज्ञान में यह बात आई है कि माननीय चीफ जस्टिस के बंगले से भगवान हनुमान के मंदिर को हटाने का आरोप लगाते हुए कुछ रिपोर्ट चलाई की जा रही हैं। ये रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी, भ्रामक और निराधार हैं। मैं इन दावों को स्पष्ट तौर पर नकारता हूँ और और उनका खंडन करता हूँ। PWD ने भी मामले में स्पष्टीकरण दिया है कि इस बंगले में कभी कोई मंदिर मौजूद ही नहीं था।”

रजिस्ट्रार जनरल ने आगे अपने बयान में कहा, “मीडिया में प्रसारित किए जा रहे आरोप पूरी तौर पर मनगढ़ंत हैं और ऐसा लगता है कि यह जनता को गुमराह करने और न्यायपालिका की विश्वसनीयता को बदनाम करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास है।” रजिस्ट्रार जनरल ने कहा कि ऐसी खबरों पर अवमानना की कार्रवाई हो रही है।

उन्होंने आगे कहा, “रजिस्ट्रार जनरल का कार्यालय इन निराधार आरोपों की निंदा करता है और मजबूती से कहता है कि मंदिर तोड़े जाने की यह रिपोर्ट पूरी तरह से झूठी हैं और हमारी न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को बदनाम करने के अलावा कोई और उद्देश्य पूरा नहीं करतीं। न्यायपालिका निष्पक्षता के साथ न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है।”

बार काउंसिल ने क्या आरोप लगाए थे?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिख कर शिकायत की थी और जाँच तथा कार्रवाई की माँग भी की थी। बार एसोसिएशन के पत्र के अनुसार, जबलपुर के पचपेड़ी में बने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के बंगले में एक पुराना हनुमान मंदिर था। एसोसिएशन ने कहा था कि इस मंदिर में जस्टिस बोबडे,जस्टिस खानविलकर समेत बाकी पूर्व चीफ जस्टिस पूजा किया करते थे। एसोसिएशन ने बताया था कि इस मंदिर में उनके स्टाफ भी पूजा करते थे जिससे किसी को कोई परेशानी नहीं थी।

पत्र में कहा गया था कि यहाँ जस्टिस रफत आलम और जस्टिस रफीक अहमद भी अपने कार्यकाल के दौरान रहे, उन्होंने भी कभी इस मंदिर पर कोई आपत्ति नहीं जताई। एसोसिएशन की शिकायत में कहा गया था कि यह मंदिर सरकारी था और इसकी समय-समय पर मरम्मत भी सरकारी पैसे से करवाई जाती रही थी। शिकायत के अनुसार, जस्टिस सुरेश कुमार कैत के यहाँ आने के बाद इस मंदिर को तोड़ दिया गया और मूर्तियाँ हटा दी गईं। यह कार्रवाई बिना किसी सरकारी या न्यायिक आदेश के की गई।

पत्र में कहा गया था कि इस कृत्य से हिन्दू धर्म में आस्था रखने वालों की भावनाओं का अपमान हुआ है तथा सरकारी सम्पत्ति का भी नुकसान हुआ है। एसोसिएशन ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना से माँग की है कि वह जाँच करवाएँ और दोषियों पर कार्रवाई करें। अभी जस्टिस कैत का पक्ष सामने नहीं आया है।

बार काउंसिल के अध्यक्ष ने भी की जाँच की माँग

इस मामले में ऑपइंडिया ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट धन्य कुमार जैन से बात की थी। धन्य कुमार जैन ने बताया था,”यह मंदिर यहाँ चीफ जस्टिस का बँगला बनने से पहले से था। यह एक नीम के पेड़ के पास बना था। बाद में यह बंगले में शामिल हो गया। इसमें समय के साथ छोटा-मोटा निर्माण भी करवाया गया। मंदिर लगभग 5×6 फीट के साइज का था, इसमें हनुमान जी और शिवलिंग स्थापित थे। यहाँ पूर्व में रहे चीफ जस्टिस पूजा करते थे, उनके स्टाफ भी यहाँ पूजा करते थे।”

सीनियर एडवोकेट जैन ने बताया था, “यहाँ तक कि जस्टिस पटनायक यहाँ रोज सुबह धोती पहन कर पूजा करने आते थे चीफ जस्टिस रहे रफत आलम साहब ने इसका जीर्णोद्धार तक करवाया था। वह इसके सामने चप्पल उतार देते थे। किसी को इससे आपत्ति नहीं थी। लेकिन तीन महीने पहले यहाँ जस्टिस कैत आए और इसके बाद इस मंदिर को तोड़ दिया गया। अब कहा जा रहा है कि यहाँ कुछ था ही नहीं। संविधान में सभी धर्मों को आजादी दी गई है, लेकिन जब न्यायपालिका से जुड़े लोग मंदिर हटवा देंगे तो संवैधानिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा।”

उन्होंने इस मामले में जाँच करवाने की माँग की थी और कहा था कि यदि संभव हो तो सुप्रीम कोर्ट जस्टिस कैत का ट्रांसफर किसी दूसरे हाई कोर्ट में करे। उन्होंने मंदिर का निर्माण दोबारा करवाए जाने की माँग की थी। गौरतलब है कि इस मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के बार एसोसिएशन को एक वकील रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी की तरफ से शिकायत मिली थी। जिसके बाद यह यह पत्र लिखा गया था। वकील त्रिपाठी ने माँग की थी कि जस्टिस कैत के खिलाफ आरोप सिद्ध होने पर आपराधिक कार्रवाई भी चालू की जाए।

मस्जिद नहीं ‘विवादित ढाँचा’ कहो, सनातन प्रतीकों की होने दो वापसी: संभल मामले पर CM योगी की टो टूक, बोले- हिंदुओं की मानी जाएँ माँगें

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि सनातन धर्म से जुड़े प्रतीकों को शांतिपूर्वक वापस दिया जाना चाहिए और इसमें कोई विवाद नहीं होना चाहिए। सीएम योगी ने यह भी कहा कि जहाँ भी ऐसे दावे हैं, उन्हें मस्जिद ना कह कर ‘विवादित ढाँचा’ कहा जाए। उन्होंने संभल की मस्जिद के विषय में आइन-ए-अकबरी का हवाला दिया है। उन्होंने चेताया है कि यह देश मुस्लिम लीग की विचारधारा से नहीं चलेगा।

सीएम योगी ने यह सारी बातें टीवी चैनल आजतक द्वारा प्रयागराज में आयोजित धर्मसंसद में कही हैं। सीएम योगी ने संभल के प्रश्न पर कहा, “संभल में श्रीहरि विष्णु का 10वाँ अवतार जन्म लेने वाला है। यह हमारे पुराणों में उल्लेख है, कब विष्णु का कौन सा अवतार आएगा, इसको लेकर लिखा हुआ है और संभल भी उसी में है। संभल में आजकल जो कुछ देखने को मिल रहा है। वह सब सनातन धर्म से जुड़ा है और इसके प्रमाण प्राप्त हो रहे हैं… भारत में जितने पुराण बने हैं, इन सबकी रचना 3500 वर्ष से 5000 वर्ष में हुआ था।”

उन्होंने आगे कहा, “जिस कालखंड में यह रचे गए तब इस धरती पर इस्लाम नहीं था और तब केवल सनातन था। उसमें भी इसका उल्लेख है। जब इस्लाम ही नहीं था तब जामा मस्जिद कहाँ से आ गई। आइन-ए -अकबरी में इस बात का उल्लेख है कि यहाँ श्रीहरि विष्णु के मंदिर को तोड़ कर मस्जिद का ढाँचा खड़ा किया गया है। यह उनका ग्रन्थ कह रहा है तो उन्हें अपनी गलती माननी चाहिए। ऐसे में सनातन के जो प्रतीक उन्हें शांतिपूर्वक वापस दिया जाना चाहिए।”

सीएम योगी ने कहा कि ऐसे प्रतीक वापस दिए जाने पर विवाद नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लीग की मानसिकता से नहीं बल्कि भारतीय विचारधारा से यह देश चलेगा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि भारत ने हमेशा ही दुनिया से आए बाकी पीड़ित लोगों को शरण दी है। सीएम योगी ने कहा,” आइन-ए-अकबरी यह बताता है कि 1526 में संभल और 1528 में अयोध्या में मंदिर तोड़कर ढाँचे खड़े किए गए, तो अगर हिन्दू इन्हें माँगते हैं तो उसे मान लिया जाना चाहिए, आप प्रमाण देखिए।”

सीएम योगी ने काशी, मथुरा और संभल समेत बाकी जिन जगह पर विवाद है, उन्हें मस्जिद कहे जाने पर आपति जताई। उन्होंने कहा, “विवादित ढांचों को मस्जिद नहीं कहा जाना चाहिए, जिस दिन हमने यह बोलना बंद कर दिया, उस दिन लोग जाना बंद कर देंगे। इस्लाम में भी यह है कि किसी धर्म को ठेस पहुँचा कर जो मस्जिदनुमा खड़े किए गए ढाँचे में की गई इबादत खुदा को मंजूर नहीं होती… इस्लाम में उपासना के लिए कोई ढाँचा जरूरी नहीं है। सनातन में है। इस बात पर जिद नहीं की जा सकती। समय है कि नए भारत पर सोचा जाए।”

3 बेटी, अब्बा की तीसरी शादी, अम्मी की दूसरी… सबको पत्थर काटने वाली मशीन से काट डाला: 1 देवरानी और 2 भाई पर FIR, एक्शन में UP पुलिस

मेरठ के लिसाड़ी गेट इलाके के सुहेल गार्डन में एक ही परिवार के 5 लोगों की हत्या ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया। घटना में मोइनुद्दीन उर्फ मोइन, उनकी बीवी आसमा और तीन बेटियाँ – अफ्सा (8), अजीजा (4), और अदीबा (1) शामिल हैं। सभी के गले कटे हुए थे। पास में ही पत्थर काटने वाली मशीन मिली, जो खून से सनी थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार (9 जनवरी 2025) सुबह से मोइन और उनके परिवार से संपर्क न होने पर उनके भाई तसलीम और मोमिन चिंतित हो गए। तसलीम ने घर के रोशनदान से झाँककर देखा तो अंदर खून बिखरा था। सूचना पर पुलिस पहुँची और गेट का ताला तोड़कर अंदर दाखिल हुई।

अंदर का नजारा दिल दहला देने वाला था। कपड़े, बर्तन और अन्य सामान बिखरा था। मोइन का शव बेड के पास गठरी में बंधा मिला, जबकि उसकी बीवी और तीनों बेटियों के शव बेडबॉक्स में बंद थे। दोनों छोटी बेटियों को चादरों में लपेटकर और एक बोरी में बंद करके रखा गया था। पुलिस ने घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम को बुलाया। टीम को वहाँ पत्थर काटने की मशीन और खून के धब्बे मिले। पुलिस को इलाके में सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर भी कुछ सुराग मिले हैं।

बताया जा रहा है कि ये मोइन ने 3 निकाह किए थे, जिसमें पहली बीवी की बेटी के जन्म के समय मौत हो गई थी, तो दूसरी बीवी से तलाक हो गया था। आसमा के साथ उसका तीसरा निकाह था। वहीं, आसमा का भी ये दूसरा निकाह था, पहले शौहर से उसकी कोई औलाद नहीं थी।

मृतका आसमा के भाई शमीम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आसमा की देवरानी नजराना, एक भाई तख़लीम और एक अन्य भाई को नामजद किया गया। इनके अलावा तीन अज्ञात पर भी शक जताया गया है। मोईन सात भाइयों में तीसरे नंबर का था। मोईन के अन्य भाइयों के नाम सलीम, अनीस, कलीम, तसलीम, मोमिन, अमजद हैं। वहीं, पुलिस ने नजराना समेत दो अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया है। घटना की जानकारी मिलने के बाद एडीजी जोन, कमिश्नर, डीआईजी, डीएम और एसएसपी भी मौके पर पहुँचे और हत्या की वजह जानने के लिए क्राइम सीन भी रीक्रिएट कराया।

एसएसपी विपिन टाडा ने बताया कि पुलिस हर पहलू से जाँच कर रही है। सभी संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि हत्याकांड में कई लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस और प्रशासन ने जनता को भरोसा दिलाया है कि दोषियों को जल्द ही कानून के कठघरे में लाया जाएगा।

अरविंद केजरीवाल के लिए यूपी-बिहार के वोटर फर्जी: BJP बोली- बांग्लादेशी-रोहिंग्या को बसाने वाली AAP को दूसरे लोग पसंद नहीं

आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में जारी विधानसभा चुनावों के नाम पर स्कैम का आरोप लगाया है। यूपी-बिहार के लोगों को फर्जी वोटर बताते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा वोटर लिस्ट में बड़े पैमाने पर हेराफेरी कर रही है और स्थानीय चुनाव अधिकारी बीजेपी के सामने घुटने टेक दिए हैं। वहीं, भाजपा ने केजरीवाल पर जमकर निशाना साधा है।

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर करते हुए अपने पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में चुनाव के नाम पर स्कैम हो रहा है। बीजेपी बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में हेराफेरी कर रही है। स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने बीजेपी के सामने घुटने टेक दिए हैं। आज चुनाव आयोग से मिलकर शिकायत की है। अगर चुनाव आयोग ने तुरंत कार्रवाई नहीं की तो दिल्ली में लोकतंत्र की हत्या हो जाएगी।”

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वे दिल्ली के मुख्यमंत्री आतिशी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और सांसद संजय सिंह के साथ चुनाव आयुक्त से मिलने के लिए गए। वहाँ उन्होंने भाजपा को लेकर कई शिकायतें कीं। केजरीवाल ने कहा, “हमारे कुछ मुद्दे थे। इनमें से एक था दिल्ली विधानसभा के अंदर 15 दिसंबर से 7 जनवरी के बीच यानी 22 दिन में 5500 वोट कटने के लिए आ गए हैं।”

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ एक लाख मतदाता हैं और इसमें से साढ़े पाँच लाख वोट काट रहे हैं। उन्होंने कहा कि चुनावी अधिकारियों ने जब इन मामलों में सुनवाई की तो पता चला इन लोगों में से किसी ने वोटर लिस्ट में से अपना नाम हटाने का आवेदन नहीं दिया था। केजरीवाल का कहना है कि इन लोगों के नाम से फर्जी आवेदन दिया गया था।

केजरीवाल ने घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा, “इसका मतलब ये हुआ कि बहुत बड़े स्केल पर स्कैम चल रहा है। बहुत बड़ा फ्रॉड चल रहा है। पिछले 15 दिनों में 13000 नए वोटरों का नाम जोड़ने के लिए आवेदन आए हैं। ये लोग अचानक कहाँ से आ गए? जाहिर है ये यूपी-बिहार से ला-ला कर… यूपी और आसपास के स्टेट से ला-ला कर फर्जी वोट बनवा रहे हैं ये लोग (भाजपा)।”

उन्होंने कहा कि किसी विधानसभा में 18.5 प्रतिशत वोट इधर-उधर कर दिए जाएँ तो ये चुनाव थोड़े है, ये तो तमाशा है… नाटक है। इसके अलावा, केजरीवाल ने नई दिल्ली से भाजपा के प्रत्याशी प्रवेश वर्मा पर नोट बाँटने और जॉब लगाने जैसे वोटरों को लुभाने का आरोप लगाया और इसकी शिकायत भी चुनाव आयोग से की।

अरविंद केजरीवाल ने कहा, “प्रवेश वर्मा खुलेआम नई दिल्ली क्षेत्र में जॉब कैंप लगा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन कर रहे हैं। खुलेआम पैसे बाँटे जा रहे हैं। हेल्थ कैंप में खुलेआम चश्मे बाँटे जा रहे हैं। उन्होंने ऐलान किया है कि 15 जनवरी को जॉब फेयर लगाए जाएँगे। ये सब कुछ चुनाव आयोग के विभिन्न नियम-कानूनों के तहत भ्रष्ट कृत्य के तहत आता है।”

उन्होंने कहा कि प्रवेश वर्मा के घर पर रेड मारकर पता लगाने और चुनाव लड़ने से रोकने का आग्रह किया। उन्होंने चुनाव अधिकारियों पर भी आरोप लगाए और भाजपा के कथित गलत कामों को उनके द्वारा आसान बनाने का आरोप लगाया गया। उन्होंने लोकल DO और ERO को हटाने की माँग की। उन्होंने कहा कि इन अधिकारियों को भाजपा को रोकने की हिम्मत नहीं है।

अरविंद केजरीवाल द्वारा यूपी-बिहार के लोगों को ‘फर्जी’ वोटर कहने पर भाजपा ने जबरदस्त पलटवार किया है। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने अपने पोस्ट में लिखा, “दिल्ली में रह रहे यूपी-बिहार के लोग अरविंद केजरीवाल के लिए फर्जी! लेकिन रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिये इनके रिश्तेदार? अब नहीं चाहिए आप-दा…।”

बता दें कि अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान बड़े पैमाने पर बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिम आकर दिल्ली में बसे। उन्हें दिल्ली सरकार बिजली-पानी जैसी मुफ्त सुविधाएँ लगातार उपलब्ध करा रही हैं, जिसको लेकर AAP सरकार की बड़े पैमाने पर आलोचना होती है। इन बांग्लादेशी-रोहिंग्याओं के पहचान का काम बड़े पैमाने पर शुरू किया गया है।