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केजरीवाल के ‘शीशमहल’ के पत्थर ₹3 करोड़ और किचन ₹65 लाख के, रेनोवेशन में लगे ₹33 करोड़: BJP नेता प्रवेश वर्मा ने उसे जनता के लिए खोलने को CM आतिशी को लिखा पत्र

दिल्ली भाजपा के बड़े नेता और विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार प्रवेश सिंह वर्मा ने मुख्यमंत्री आतिशी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल में बनवाए गए ‘शीशमहल’ को जनता के लिए खोलने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा जनता जानना चाहती है कि आखिर यह शीशमहल कैसा दिखता है। उनके इस पत्र से पहले सामने आया है कि शीशमहल को बनाने में ₹33 करोड़ का खर्च किया गया। यह खर्च इसलिए बढ़ा क्योंकि इसमें स्पेशल मार्बल और परदे समेत तमाम सामान वह लगाया गया जो कई गुना महँगा था।

प्रवेश वर्मा ने यह पत्र 3 जनवरी, 2025 को लिखा था। इस पत्र में प्रवेश वर्मा ने कहा, “यह आपके संज्ञान में लाना चाहता हूँ कि पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक श्री अरविंद केजरीवाल के कार्यकाल में सरकारी आवास को विशेष रूप से सज्जित और भव्य रूप दिया गया था। इसे आम जनमानस में “शीशमहल” के नाम से जाना जा रहा है। नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की जनता, जिन्होंने लगातार तीन बार श्री केजरीवाल को अपना विधायक चुना और विधानसभा भेजा, इस भवन को देखने की प्रबल इच्छा रखती है।”

उन्होंने आगे लिखा, “यह भवन अब केवल एक निवास स्थान नहीं, बल्कि दिल्ली के शासन और प्रशासन के इतिहास का एक महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है। जनता इसे देखकर यह समझना चाहती है कि जिस स्थान पर उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि ने अपने कार्यकाल का समय बिताया, वह कैसा है। मेरा आपसे निवेदन है कि इस “शीशमहल” को प्रातः 10 बजे से सांय 4 बजे तक जनता दर्शन के लिए खोला जाए, ताकि दिल्ली की जनता इसे नजदीक से देख सके।”

प्रवेश वर्मा ने कहा कि इससे जनता की अपेक्षाएँ पूरी हो सकेंगी और साथ ही पारदर्शिता आएगी। गौरतलब है कि शीशमहल उस सरकारी बंगले को नाम दिया गया है, जिसमें अक्टूबर, 2024 तक मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल रहा करते थे। इस घर का रेनोवेशन केजरीवाल ने ही अपने कार्यकाल में करवाया था।

इस रेनोवेशन में सामान्य से कहीं अधिक धनराशि खर्च हुई थी। इस रेनोवेशन के दौरान हर चीज पर दोगुना तिगुना पैसा खर्च किया गया। इस पर बीते साल एक टीवी चैनल ने खुलासा किया था। अब इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि कैसे इसमें ₹33 करोड़ लगा दिए गए।

इंडियन एक्सप्रेस ने रविवार (5 जनवरी, 2025) को एक रिपोर्ट छापी है, इसमें CAG के हवाले से शीशमहल पर किए गए फालतू खर्च के बारे में बताया गया। CAG के मुखिया रहे गिरीश चन्द्र मुर्मू द्वारा तैयार की एक रिपोर्ट के आधार पर इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि फ्लैग स्टाफ रोड स्थित इस बंगले में रेनोवेशन के लिए 2020 में ₹7.9 करोड़ का काम होना था। लेकिन ठेका होते-होते यह ₹8.62 करोड़ पहुँच गया। लेकिन जब काम 2022 में खत्म हुआ, तब जनता के टैक्स के ₹33 करोड़ से अधिक इस शीशमहल में लग चुके थे।

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, CAG ने शीशमहल के ऑडिट में पाया है कि ₹33 करोड़ में से ₹18 करोड़ इसलिए खर्च हुए क्योंकि जो सामान असल में लगाया जाना था, उसकी जगह कहीं ज्यादा महँगा सामान लगाया गया। CAG की रिपोर्ट में ऐसे सामानों की लिस्ट दी गई है। इसमें निर्माण से जुड़े 198 सामान हैं जबकि 40 चीजें इलेक्ट्रिकल फिटिंग से जुड़ी हैं। यह भी बताया गया है कि 2 वर्षों में काम के दौरान PWD ने इसके लिए 5 अलग-अलग बार एस्टीमेट पेश किए।

CAG ने बताया है कि ₹1.87 करोड़ का खर्च तो केवल बाथरूम और जिम के सामान की फिटिंग पर कर दिया गया। CAG ने जहाँ उन सामानों की लिस्ट दी है जिन पर अधिक खर्च किया गया तो वहीं वह सामान भी बताए हैं जिनको जबरदस्ती लगाया गया। CAG के अनुसार, दीवाल पर लगने वाली टाइल पर ₹46 लाख, LED लाइट्स पर ₹45 लाख, LED पट्टियों पर ₹12 लाख, जमीन पर लगने वाली टाइल में ₹9 लाख खर्च किए गए। जबकि पंखे से लेकर लकड़ी और दरवाजे के हैंडल पर ₹2 लाख- ₹5 लाख तक अधिक खर्च हुए।

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, ₹3 करोड़ से अधिक इंटीरियर, ₹61 लाख लिफ्ट और स्लाइडिंग दरवाजों तथा ₹2 करोड़ ऊँचे ग्रेड के पत्थर पर खर्च किए गए। यहाँ तक कि मॉड्यूलर किचन पर तक ₹65 लाख खर्च हुए। CAG ने यह भी बताया कि रिपोर्ट के लिए असल बिल देने में AAP सरकार ने आनाकानी की थी। काम के लिए दिए गए ठेकों पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। यह रिपोर्ट अभी दिल्ली विधानसभा में पेश नहीं की गई है लेकिन इसके कुछ हिस्से बाहर आते ही बवाल मच गया है। इस रिपोर्ट का जिक्र पीएम मोदी ने अपनी रोहिणी की रैली में भी किया है।

मंदिर की जमीन पर बनवाई मज़ार, विरोध करने पर दलितों पर पत्थरबाजी: बजरंग दल का आरोप, पुलिस ने मजहबी एंगल नकारा

उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में एक जमीनी विवाद के चलते 2 पक्षों में जमकर पत्थरबाजी हुई। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आरोप है कि मंदिर की जमीन पर मजार बना देने के बाद तनाव फैला है। हालाँकि पुलिस ने मजाक वाले एंगल को नकारा है। वहीं पत्थरबाजी मामले में पुलिस ने शनिवार (4 जनवरी 2025) को कामिल, नूर हसन और इबले हसन के खिलाफ FIR दर्ज की है। तीनों पर दलित व्यक्ति को पीटने और धमकी देने का भी आरोप है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला कन्नौज के थाना क्षेत्र ठठिया का है। यहाँ के गाँव उमरन में बबूल के घने पेड़ों के बीच लगभग 70 बीघों का एक प्राचीन टीला है। बताया जा रहा है कि इसमें से 7 बीघा जमीन मंदिर के नाम पर है, जबकि बाकी बची 63 बीघा जमीन ग्राम समाज की है। बजरंग दल के सदस्यों का आरोप है कि इस पूरी जमीन पर गाँव में रहने वाले मुस्लिमों की लंबे समय से नजर है जो इस पर कब्जा करने की साजिश भी रच रहे हैं।

इस मामले में पहले मीडिया में बताा गया था कि एक सप्ताह पहले गाँव के रहने वाले दलित समुदाय के महिपाल कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ टीले पर गए थे। यहाँ उन्हें कथिततौर पर एक मजार दिखी। उनका कहना है कि ये मजार हाल ही में जमीन कब्ज़ाने की नीयत से बनाई गई है। यह मज़ार हिन्दुओं के पहले से बने एक धार्मिक चबूतरे पर बनी है।

हालाँकि कन्नौज पुलिस ने धार्मिक स्थल तोड़कर बनाई गई मजार के किसी प्रकरण को नकारा है। उन्होंने कहा कि ये जानकारी तथ्यात्मक आधार पर नहीं है और यह पूरी तरह भ्रामक एवं असत्य है । कन्नौज पुलिस इसका खण्डन करती है। थाना ठठिया क्षेत्रांतर्गत एक गांव में जमीन के स्वामित्व को लेकर दो पक्षों में विवाद है जो मा0 न्यायालय में वाद विचाराधीन है जिसको लेकर दोनो पक्षों में कहासुनी हुई थी । प्रकरण में प्राप्त प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना ठठिया पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया है। विधिक कार्यवाही की जा रही है।

मजार वाली बात के अलावा मीडिया में ये भी बताया गया था कि टीले का अवैध खनन भी किया जा रहा है। खनन की वजह से टीला कई जगहों पर समतल भी हो गया, जहाँ खेत बनाकर फसल भी बोई जा रही है। जब उन्होंने इस निर्माण का विरोध किया तो गाँव के मुस्लिम वर्ग के लोग वहाँ जमा हो गए। थोड़ी देर की बहस के बाद हिन्दू पक्ष पर पत्थरबाजी शुरू हो गई। इस पत्थरबाजी में टीले से गुजर रहीं महिलाओं को भी निशाना बनाया गया।

हमलावर भीड़ द्वारा दलित समुदाय के लोगों को पीटा गया और उन्हें जातिसूचक गालियाँ दी गईं। पीड़ित पक्ष ने भी अपनी आत्मरक्षा में पत्थरबाजी की। गाँव के कुछ लोगों ने जैसे-तैसे करके इस हमले से बचते हुए पत्थरबाजी की वीडियो बना ली। इस वीडियो को लेकर वे सभी पुलिस में शिकायत करने ठठिया थाना पहुँचे। हिंदू संगठनों को इसकी जानकारी मिली तो वे भी थाने के पास इकट्ठा हो गए।

बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता थाने पर पहुँचकर हंगामा किया। आखिरकार पुलिस ने शनिवार (4 जनवरी 2025) को नूर हसन, कामिल और इबले हसन पर मुकदमा दर्ज कर लिया। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 115 (2), 352 और 351 (2) के साथ SC/ST एक्ट में दर्ज हुआ है। पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों का जमीनी विवाद पहले से ही कोर्ट में चल रहा है। मौके पर पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दी गई है।

(नोट: इस खबर को पुलिस के बयान के अपडेट किया गया है)

‘AAP का शासन आप-दा काल, कोरोना में लोग ऑक्सीजन के लिए भटक रहे थे तो ये शीशमहल बनवा रहे थे’: PM मोदी ने बोला हमला, नमो भारत सहित दिल्ली को दी ₹12000 करोड़ की सौगात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राजधानी दिल्ली को नमो भारत ट्रेन के नए खंड की सौगात दी है। उन्होंने साहिबाबाद से अशोकनगर के बीच नमो भारत RRTS का उद्घाटन किया है। उन्होंने दिल्ली मेट्रो की मैजेंटा लाइन का नया हिस्सा भी चालू किया है। उन्होंने एक नए मेट्रो लाइन का शिलान्यास भी किया है। पीएम मोदी ने दिल्ली में ₹12000 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट का शिलान्यास और उद्घाटन किया है। पीएम मोदी ने इसके बाद दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर हमला भी बोला। पीएम मोदी ने AAP पर 10 वर्ष बर्बाद करने का भी आरोप लगाया।

पीएम मोदी ने सबसे पहले दिल्ली से मेरठ के बीच बन रही RRTS नमो भारत ट्रेन के साहिबाबाद से न्यू अशोक नगर के खंड का उद्घाटन किया। यह 13 किलोमीटर लंबा है। इसी के साथ कुल 82 किलोमीटर वाले इस रूट पर अब 55 किलोमीटर का रूट चालू हो चुका है। पीएम मोदी ने इस दौरान RRTS में यात्रा भी की। उन्होंने RRTS में स्कूली बच्चों से मुलाक़ात की और उनकी बनाई पेंटिंग्स भी देखी। पीएम मोदी ने दिल्ली में जनकपुरी और कृष्णा पार्क को जोड़ने वाले 2.8 किलोमीटर लम्बे मेट्रो रूट का भी उद्घाटन किया।

यह रूट मैजेंटा लाइन पर है। इसे ₹1200 करोड़ की लागत से बनाया गया है। इसके अलावा पीएम मोदी ने दिल्ली में मेट्रो निर्माण के फेज-IV के तहत बनाई जा रही रिठाला-कुंडली लाइन की आधारशिला भी रखी। इसे ₹6000 करोड़ से अधिक की लागत से बनाया जाएगा। पीएम मोदी ने सेन्ट्रल आयुर्वेद रिसर्च इंस्टिट्यूट की आधारशिला भी रखी है। इसे ₹185 करोड़ की लागत से बनाया जाएगा और इसमें OPD, IPD और ट्रीटमेंट ब्लॉक होंगे। पीएम मोदी ने इसके बाद दिल्ली के रोहिणी में एक रैली को भी संबोधित किया।

पीएम मोदी ने इस रैली में कहा कि आने वाले 25 साल दिल्ली और भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि इन 25 सालों में हम अपनी आँखों के सामने विकसित राष्ट्र की यात्रा देखेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली को विकसित भारत की राजधानी के रूप में बनाना है। उन्होंने कहा कि केवल भाजपा ही दिल्ली को विकसित कर सकती है। उन्होंने दिल्लीवासियों से आग्रह किया कि वह आगे विधानसभा चुनाव में भाजपा को अवसर दें। उन्होंने इसके बाद दिल्ली में सत्ताधारी AAP पर भी हमला बोला।

पीएम मोदी ने कहा कि बीते 10 साल दिल्ली में आपदा से कम नहीं रहे। उन्होंने कहा कि इसलिए अब दिल्ली में अब एक ही आवाज गूँज रही है कि आपदा नहीं सहेंगे, बदल के रहेंगे। पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली में भी लोग विकास की धारा चाहते हैं और उनका विश्वास भाजपा पर है। पीएम मोदी ने भाजपा को सुशासन लाने और सपनों को पूरा करने वाली पार्टी बताया। पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी कमल खिलने वाला है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वह इस चुनाव में पूरी ताकत झोंक दे।

रोहिणी की रैली में पीएम मोदी ने केजरीवाल के शीशमहल को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब दिल्ली के लोग कोरोना से जूझ रहे थे, जब दिल्ली के लोग ऑक्सीजन और दवाओं के लिए भटक रहे थे। तब इन लोगों का पूरा फोकस अपना शीश महल बनवाने पर था। इन्होंने शीश महल का भारी भरकम बजट बनाया। यही इनकी सच्चाई है… इन्हें दिल्ली के लोगों का कोई परवाह नहीं है।” पीएम मोदी ने कहा कि AAP सरकार के पास दिल्ली के लिए कोई विजन नहीं है। पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली में AAP के काम नहीं बल्कि कारनामों का हिसाब होना है।

पीएम मोदी ने कहा, “दिल्ली पर आप-दा लाने वाले ये झूठा आरोप लगाते हैं कि केंद्र सरकार उन्हें काम नहीं करने देती…केंद्र सरकार उन्हें पैसे नहीं देती… ये कितने बड़े झूठे हैं…इसका उदाहरण इनका शीशमहल है।” पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली के भीतर जितनी भी व्यवस्थाएँ बढ़िया चल रही हैं, वह केंद्र सरकार की हैं। उन्होंने कहा कि मेट्रो से जैसे ही गलियों में जाइए तो रोड में गड्ढे और सीवर बहता दिखता है। पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली में हर सीजन को AAP ने AAP-दा काल बनाया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को लोगों को मनाने के तरीके भी बताए।

‘बड़ी बहन को ज्यादा मानती हो तुम’: रेशमा ने अपनी अम्मी सबीरा बानो को चाकू घोंपकर मारा, मुंबई के थाने में जाकर किया सरेंडर

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में एक मुस्लिम महिला ने गुरुवार (2 जनवरी 2025) को अपनी अम्मी की हत्या कर दी। 41 वर्षीया आरोपित का नाम रेशमा मुजफ्फर क़ाज़ी है। उसने पुलिस के आगे आत्मसमर्पण कर दिया है। आरोपित ने अपनी 65 वर्षीया अम्मी सबीरा बानो को मार डालने के पीछे उनके द्वारा अपने अपने साथ किए जाने वाले पक्षपात को मुख्य वजह बताया है। पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला मुंबई के कुर्ला इलाके में पड़ने वाले कुरैशी नगर का है। 65 वर्षीया सबीरा बानो के परिवार में 1 बेटा अख्तर और 3 बेटियाँ हैं। सबीरा बानो की 42 वर्षीया बड़ी बेटी ज़ैनबी और छोटी पुत्री रेशमा में काफी पहले से झगड़ा होता आया है। साल 2021 में दोनों के बीच झगड़ा हुआ था, जिसके बाद रेशमा ने अपनी बहन के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाई थी।

सबीरा बानो अक्सर बीमार रहती थी। उसके इलाज का खर्च ज़ैनबी उठाती थी। इसी वजह से सबीरा ज्यादातर ज़ैनबी के साथ रहती थी। सबीरा बानो अक्सर ज़ैनबी की तारीफ भी करती थी। ये बातें रेशमा को काफी अखरती थी। रेशमा को लगता था कि उनकी अम्मी पक्षपात करती है और ज़ैनबी को ज्यादा पसंद करती है। इसकी वजह से कई बार रेशमा और उसकी अम्मी के बीच बहस भी हो चुकी थी।

गुरुवार को सबीर बानो रेशमा के घर गई। यहाँ एक बार फिर से माँ-बेटी में ज़ैनबी को लेकर बहस शुरू हो गई। कुछ देर तक जुबानी झगड़े के बाद रेशमा रसोई घर में गई और एक चाकू लेकर आई। इसी चाकू से रेशमा ने सबीरा पर कई वार कर दिए। घायल सबीरा की मौके पर ही मौत हो गई। हत्या के बाद रात लगभग 8 बजे रेशमा ने अपने भाई अख्तर को कॉल किया। अख्तर के जरिए यह बात ज़ैनबी तक पहुँची।

जब तक ज़ैनबी रेशमा के घर पहुँचती, तब तक सबीरा बानो ने दम तोड़ दिया था। उधर अपनी अम्मी को मार कर रेशमा खुद ही चूनाभट्टी थाने पहुँच गई। वहाँ उसने आत्मसमर्पण कर दिया। ज़ैनबी की तहरीर पर पुलिस ने रेशमा के खिलाफ केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। इसके साथ ही पुलिस ने सबीरा बानो के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

खालिस्तानी सांसद अमृतपाल बना रहा नया राजनीतिक दल, इंदिरा गाँधी के हत्यारे का MP बेटा भी साथ: शिरोमणि अकाली दल (आनंदपुर साहिब) होगा नाम, 14 जनवरी को ऐलान

खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह पंजाब के लिए नई राजनीतिक पार्टी बनाने जा रहा है। इंदिरा गाँधी के हत्यारे का सांसद बेटा सरबजीत सिंह खालसा भी इस काम में उसके साथ है। अमृतपाल सिंह अभी असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। वह जब बाहर आएगा तो वह इसका मुखिया बनेगा। इस पार्टी की अधिकारिक शुरुआत लोहड़ी के अगले दिन (14 जनवरी, 2025) को श्री मुक्तसर साहिब माघी मेला में होगी। पार्टी का नाम शिरोमणि अकाली दल (आनंदपुर साहिब) रखा जाएगा।

वारिस पंजाब दे मुखिया अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने बताया, “हमने माघी मेले पर श्री मुक्तसर साहिब में एक कॉन्फ्रेंस बुलाई है जिसमें एक समिति का गठन किया जाएगा। इस समिति को नई राजनीतिक पार्टी का संविधान तैयार करने, उसका नाम तय करने, सलाहकार समिति बनाने, हर जिले समितियाँ बनाने और पार्टी के गठन के लिए आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने का काम सौंपा जाएगा।” तरसेम सिंह ने बताया कि अमृतपाल सिंह के बाहर आने तक वह खुद ही इस पार्टी के मुखिया होंगे।

इंदिरा गांधी के हत्यारे बेअंत सिंह के बेटे और फरीदकोट के सांसद सरबजीत सिंह खालसा ने कहा कि शुरुआत में वे पंजाब के लोगों से जुड़ने के लिए 5 या 11 सदस्यों वाली समिति बनाएँगे। उन्होंने कहा कि पार्टी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के चुनाव भी लड़ेगी। खालसा ने कहा है कि अच्छे चरित्र वाले और पंजाब को बचाने की मंशा रखने वाले लोग उनकी पार्टी में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी पंजाब के लोगों को एक राजनीतिक विकल्प उपलब्ध करवाएगी।

अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने कहा कि पार्टी का मुख्य फोकस किसानों के मुद्दे, राज्य में बढ़ता धर्मांतरण और ड्रग्स की समस्या होगी। गौरलतब है कि अमृतपाल सिंह 2024 में खडूर साहिब जबकि सरबजीत सिंह खालसा ने फरीदकोट से निर्दलीय चुनाव जीता था। अमृतपाल सिंह ने यह चुनाव जेल से ही जीत लिया था। अमृतपाल सिंह का नया राजनीतिक दल राज्य में पंथिक राजनीति में असर डालेगा। अभी तक शिरोमणि अकाली दल ही मूल रूप से पंथिक मामलों की अगुवा पार्टी रही है।

बीते कुछ वर्षों में शिरोमणि अकाली दल की लोकप्रियता को गहरा झटका लगा है। उसकी पंजाब विधानसभा और लोकसभा, दोनों चुनावों में भी बुरी हालत हुई है। इसके अलावा SAD में नेतृत्व को भी लेकर संकट आया है। हाल ही में उसके मुखिया रहे सुखबीर सिंह बादल को पद छोड़ना पड़ा था। उन्हें अकाल तख़्त ने तनखैया घोषित कर दिया था। इसके बाद उन पर गुरूद्वारे में सेवा के दौरान जानलेवा हमला भी हुआ था। पंजाब में बीते कुछ सालों में कॉन्ग्रेस और SAD द्वारा खाली छोड़ी गई जगह को AAP ने भरा है। लेकिन लोग उससे भी परेशान हैं।

अमृतपाल सिंह की पार्टी का पहला टेस्ट पंजाब के 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव होंगे। हालाँकि, यह पहला मौक़ा नहीं है जब पंथिक राजनीति में SAD को चुनौती को मिली हो। इससे पहले पूर्व IPS और सांसद सिमरनजीत सिंह मान ने भी इसी नाम से पार्टी बनाई थी। हालाँकि, यह पार्टी कुछ ख़ास कमाल नहीं दिखा पाई।

फरियादी महिला को बाथरूम में ले गया DSP, स्तन दबाकर करवाया मुखमैथुन: वीडियो वायरल होने के बाद पहले सस्पेंड, फिर गिरफ्तार

कर्नाटक के तुमकुरु जिले में एक फरियादी महिला का डिप्टी एसपी द्वारा यौन शोषण किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपित DSP का नाम बी रामचंद्रप्पा है जिसे शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को सस्पेंड करने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। DSP ने यह हरकत अपने ऑफिस के बाथरूम में की। पुलिस अधिकारी की इस करतूत का वीडियो भी गुरुवार (2 जनवरी 2025) से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला तुमकुरु जिले के मधुगिरी सब डिवीजन का है। शुक्रवार को यहाँ 35 सेकेंड का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। इस वीडियो में एक पुलिस अधिकारी किसी लड़की को बाथरूम में ले गया। यहाँ उसने पीड़िता के स्तनों को दबाकर मुख मैथुन करवाया। बाहर से छिप कर इस वीडियो को बनाया गया। पुलिस अधिकारी को शक हुआ तो उसने मुड़ कर पीछे देखा। तब तक वीडियो बनाने वाला भाग चुका था। कुछ ही देर में यह वीडियो वायरल हो गई।

वायरल वीडियो की जाँच के दौरान पुलिसकर्मी की पहचान 58 वर्षीय डिप्टी एसपी बी रामचंद्रप्पा के तौर पर हुई। आरोपित DSP उस मधुगिरी क्षेत्र में तैनात हैं जो कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर की विधानसभा क्षेत्र है। आनन-फानन में मामले की जाँच करवाई गई और डिप्टी एसपी को सस्पेंड कर दिया गया। बी रामचन्द्रप्पा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 68, 75 और 79 के तहत FIR दर्ज कर ली गई और शनिवार (4 दिसंबर) को उन्हें जेल भेज दिया गया।

आरोपित DSP के खिलाफ विभागीय जाँच भी खोल दी गई है। तुमकुरु जिले के पुलिस अधीक्षक आशोक केवी के मुताबिक जाँच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मिली जानकारी के मुताबिक 30 वर्षीया पीड़िता घटना के दिन जमीनी विवाद की शिकायत करने DSP रामचन्द्रप्पा के पास गई थी। तब DSP ने मदद के बदले उस से आपत्तिजनक डिमांड की थी। फिलहाल मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

खोपड़ी की हड्डी तोड़ी, सिर से खून निकाला: बांग्लादेश में हिंदू पत्रकार के परिवार पर धारदार हथियार से हमला, माता-पिता-पत्नी किसी को नहीं छोड़ा

बांग्लादेश के फरीदपुर में अज्ञात हमलावर द्वारा एक हिन्दू परिवार को निशाना बनाया गया है। पीड़ितों परिवार पत्रकार का है। घायलों में महिलाएँ भी शामिल हैं। हमले में धारदार हथियारों का प्रयोग किया गया है। घटना शुक्रवार (3 जनवरी 2025) की है। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना फरीदपुर के मधुखली गाँव की है। यहाँ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्यामलेंदु बोस अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनका बेटा सौगात बोस दैनिक अजमेर पत्रिका में पत्रकार है। शुक्रवार की रात लगभग 8:30 पर श्यामलेंदु बोस का पूरा परिवार टीवी देख रहा था। तब उन्होंने अपने घर के अंदर किसी को देखा। खुद को देखे जाने पर घुसपैठी भाग कर मकान की दूसरी मंजिल पर चला गया।

जब बोस परिवार ने घुसपैठी का पीछा किया तो उसने धारदार हथियार निकाल लिया। हमलावर ने श्यामलेंदु सहित उनकी पत्नी पर भी हमला कर दिया। दोनों को मारकर घायल कर दिया गया। श्यामलेंदु और उनकी पत्नी की देखभाल करने वाली 15 वर्षीया प्रीति को भी हमलावर ने नहीं छोड़ा। श्यामलेंदु के घर से मची चीख-पुकार सुन कर पड़ोसी जमा हुए। मौक़ा पाकर हमलावर हथियार लहराते हुए भाग निकला।

सभी घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया है। पत्रकार सौगात बोस समय घर पर नहीं थे। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता के साथ प्रीति भी गंभीर रूप से घायल है जिसका इलाज चल रहा है। बकौल सौगात बोस उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है। सौगात को अभी तक यह भी नहीं पता कि हमलावर अकेले आया था या उसके साथ अन्य कुछ लोग भी थे। पीड़ित दम्पति के बेटे ने इस घटना को चोरी या डकैती के नहीं माना है। उनका कहना है कि हमले की वजह कुछ और ही है जिसकी जाँच पुलिस को करनी चाहिए।

डॉक्टरों के मुताबिक श्यामलेन्दु बोस के सिर में गंभीर चोटें आई हैं। उनका काफी खून बह गया है और खोपड़ी की हड्डी टूट चुकी है। बेहतर इलाज के लिए श्यामलेंदु को ढाका ले जाने की सलाह दी गई है। बाकी अन्य दोनों घायलों का स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। पुलिस ने शुरुआती तौर पर इस घटना को डकैती का प्रयास माना है। उनकी तरफ से हमलावर के नाबालिग किशोर होने की बात कही जा रही है। हालाँकि आगे की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई जारी है।

₹4 करोड़ की गाड़ी, ₹25 लाख का किराया, 5 स्टार होटल वाली सुख सुविधा: अनशन पर बैठे प्रशांत किशोर की वैनिटी वैन देखकर सबकी आँख फटी, सवाल उठने पर भड़के

जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर परीक्षा को मुद्दा बनकार पटना के गाँधी मैदान में आमरण अनशन पर बैठे हैं। उनके आमरण स्थल पर ही ही करोड़ों रुपए की लग्जरी वैनिटी वैन खड़ी है, जिसमें वे आराम करने और बाथरूम आदि के जाते हैं। बॉलीवुड स्टार्स के तर्ज वाली इस वैन को लेकर सियासी हलचल मच गई है। उन्होंने सुविधाभोगी और छात्रों को आंदोलन को दिग्भ्रमित करने वाला बताया जा रहा है।

बिहार की प्रमुख विपक्षी दल राजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि बीपीएससी परीक्षार्थियों के आंदोलन को प्रशांत किशोर दूसरी दिशा में भटका रहे हैं। अहमद ने आरोप लगाया कि वे लग्जरी सुविधाओं वाली वैनिटी वैन का उपयोग कर रहे हैं। इस वैनिटी वैन का रोजाना खर्च 25 लाख रुपए है। अहमद ने कहा कि प्रशांत किशोर के जनआंदोलन करने वाले नहीं, बल्कि सुविधाभोगी हैं।

सोशल मीडिया पर उनका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें प्रशांत किशोर वैनिटी वैन से बाहर निकल कर अनशन स्थल पर जा रहे हैं। वहीं, सैकड़ों लोग उनकी लग्जरी वैनिटी वैन को निहार रहे हैं। वैनिटी वैन के पास कोई जा ना सके, इसके लिए सुरक्षाकर्मी भी वीडियो में तैनात दिख रहे हैं। कई लोग वैन की तस्वीरें खींचते या वीडियो बनाते हुए नजर आए।

भाजपा और राजद का दावा है कि इस वैनिटी वैन की कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए है और प्रशांत किशोर इसका प्रतिदिन का किराया 25 लाख रुपए देते हैं। इसमें 5 स्टार होटल वाली सारी सुविधाएँ मौजूद हैं। शानदार बेड से लेकर टॉयलेट, वाई-फाई, टीवी आदि सब कुछ है। इसमें सारी सुख-सुविधाएँ हैं। प्रशांत किशोर जब से गाँधी मैदान में अनशन पर बैठे हैं, तब से यह वैनिटी वैन वहाँ खड़ी है।

वैनिटी वैन के सवाल पर प्रशांत किशोर भड़क गए। उन्होंने कहा कि गाँधी मैदान में वैनिटी वैन खड़ी जरूर है, लेकिन वे अपना अनशन खुले आसमान के नीचे ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “किस वैनिटी वैन की बात कर रहे हो? यहाँ एक बस खड़ी है, जिसका इस्तेमाल मैं शौच करने के लिए करता हूँ।” उन्होंने कहा, “जो लोग कह रहे हैं कि इस बस का किराया 25 लाख रुपए है, उन्हें मैं ये बस भेजवा दे रहा हूँ और वे रोज मुझे 25 लाख दे दें।”

राजद प्रवक्ता ने यह भी आऱोप लगाया कि प्रशांत किशोर की ऐसी सुख-सुविधा वाली राजनीति की पोल खुल गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के सत्याग्रह आंदोलन को प्रशांत किशोर ने गर्दनीबाग से गाँधी मैदान लाकर पहले छात्रों को पिटवाया और अब वे लग्जरी सुविधा में रहते हुए आंदोलन में छात्रों के साथ होने का दिखावा कर रहे हैं। उन्होंने इसे छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बताया।

बता दें कि बिहार में बीपीएससी सेवा की 70वीं पीटी परीक्षा को फिर से आयोजित कराने की माँग करते हुए छात्रों ने आंदोलन किया था। इसके बाद 29 दिसंबर 2024 को पुलिस ने बीपीएसपी अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज किया था। लाठी चार्ज से से पहले प्रशांत किशोर वहाँ से निकल गए थे। छात्रों के एक गुट ने प्रशांत किशोर पर आंदोलन को हाईजैक करने का आरोप लगाया था। हालाँकि प्रशांत ने सफाई दी थी।

अब उनकी जन सुराज पार्टी ने वैनिटी वैन के विवाद पर भी सफाई दी है। पार्टी के प्रवक्ता विवेक कुमार का कहना है कि अनशन करने वाले लोगों के वॉशरूम के उद्देश्य से वैनिटी वैन रखा गया है। विवेक कुमार ने कहा कि मुद्दा वैनिटी वैन का नहीं, पेपर लीक का है। छात्रों को सरकार लाठी से पिटवा रही और विपक्ष के राजकुमार घर पर आराम फरमा रहे हैं।

विवेक कुमार ने कहा, “हम विपक्षी नेताओं खासकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और भाजपा नेताओं को चुनौती देते हैं कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे इस कड़ाके की ठंड में एक रात गाँधी मैदान में महात्मा गाँधी की मूर्ति के नीचे बिताकर दिखाएँ। पीके आठों पहर मीडिया के कैमरे के सामने बैठे हैं। विपक्ष को छात्रों के मुद्दों से कोई मतलब नहीं है, इसलिए अनावश्यक बातें हो रही हैं।”

UPA सरकार में ‘भगवा आतंकी’ बता पकड़े गए 12 लोग निर्दोष साबित, नांदेड़ की अदालत ने दिया फैसला: 3 की हो चुकी मौत, 19 साल तक लड़ी न्याय की लड़ाई

कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान लाई गई हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी एक बार फिर झूठ सिद्ध हुई है। महाराष्ट्र के नांदेड़ में बम ब्लास्ट के आरोप में पकड़े गए 12 हिन्दुओं को कोर्ट ने निर्दोष करार दिया है। यह सभी बरी कर दिए गए हैं। इनमें से तीन की मौत हो चुकी है। इन सभी को 2006 में कॉन्ग्रेस सरकार ने कथित बम धमाके के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस धमाके में 2 लोगों की मौके पर मौत हुई थी। कोर्ट में यह साबित नहीं हो सका कि यह एक बम धमाका था या सिलेंडर अथवा पटाखों के फटने से हुआ हादसा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छत्रपति संभाजीनगर की एक कोर्ट ने शनिवार (4 जनवरी, 2025) को 2006 नांदेड़ ब्लास्ट मामले में 12 लोगों को बरी किया है। इस मामले में 12 हिन्दू आरोपित बनाए गए थे। इनमें से 2 की धमाके के दौरान ही मौत हो गई थी जबकि 1 की मौत इस मुकदमे के दौरान हो गई थी। बाकी 9 जीवित लोग 2006 के बाद से ही इस मामले में मुकदमा लड़ रहे थे। मामले में यह आरोप सिद्ध नहीं हो पाए कि धमाका एक बम में हुआ था और यह सिलेंडर या ऐसी ही किसी चीज का धमाका नहीं था।

कोर्ट ने इस मामले में राहुल पांडे (मृतक), हिमांशु पानसे (मृतक), नरेश राजकोंडवार (मृतक), लक्ष्मण राजकोंडवार, संजय चौधरी, रामदास मुलगे, डॉ. उमेश देशपांडे, मारुति वाघ, योगेश विडोलकर, गुरुराज टुपतेवार, मिलिंद एकताटे, मंगेश पांडे, राकेश धावड़े को बरी कर दिया है। यह कथित धमाका 4-5 अप्रैल, 2006 को नांदेड़ के पतबंधारे नगर में हुआ था। धमाका लक्ष्मण राजकोंडावार के घर पर हुआ था और इसमें हिमांशु पानसे और नरेश राजकोंडावार की मौत हो गई थी। बाद में मुकदमे के दौरान राहुल पांडे की मौत हो गई थी।

तब महाराष्ट्र और केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। इस मामले में पुलिस ने आरोप लगाया था कि यह धमाका बम बनाने के दौरान हुआ है। यह भी दावा हुआ था कि यहाँ से एक ज़िंदा बम भी बरामद हुआ था और कुछ गोलियाँ बरामद हुई थी। इस मामले में हिन्दुओं के पकड़े जाने के बाद ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी गढ़ने की कोशिश हुई थी। यह मामला पुलिस से ATS और फिर CBI को सौंप दिया गया था। तब कॉन्ग्रेस ने इन्हें हिन्दू आतंकी बता कर खूब शोर मचाया था।

इस मामले में 19 साल तक न्याय की लड़ाई लड़ने के बाद अब इन हिन्दुओं को न्याय मिल सका है। इससे पहले यह जेलों में जिन्दगी गुजार चुके थे। इनको अपने पर से आतंकी का ठप्पा हटाने के लिए लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी। कॉन्ग्रेस सरकार में इनके साथ जेलों में सही व्यवहार नहीं हुआ। इनके माध्यम से हिन्दुओं को हिंसक और आतंकी बताने की कोशिश हुई। अब यह सब दावे जमीन पर मुंह के बल गिरे हैं। इस मामले में फैसला आने के बाद भाजपा और VHP के लोगों ने प्रसन्नता जताई है।

VHP के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा है, “नांदेड़ मामले में कोर्ट का फैसला कॉन्ग्रेस के मुंह पर करारा तमाचा है। उन्होंने इस मामले में को मालेगाँव की तरह हिन्दू आंतकवाद साबित करने का प्रयास किया था। आज सम्पूर्ण कॉन्ग्रेसी कुनबा बेनकाब हुआ है… अब कॉन्ग्रेस को पूरे देश से माफ़ी माँगनी चाहिए। सबसे बड़ा सवाल है कि हिन्दुओं को फंसाने के चक्कर में असल अपराधी बच गए। यह न्यायिक तंत्र पर हमला है।” भाजपा नेता अतुल भट्खालकर ने कहा है कि UPA सरकार के दौरान साजिश के चलते निर्दोष हिन्दू फंसाए गए थे जो अब मुक्त हैं।

लोगों ने जेल के नाम पर डराया, लेकिन मोदी सरकार ने दिया सहारा: बिहार में पहली बार CAA के तहत सुमित्रा प्रसाद को मिली नागरिकता, 40 साल से वीजा पर रहने को थीं मजबूर

बिहार के भोजपुर जिले में बांग्लादेश की मूल निवासी एक हिन्दू महिला को भारत की नागरिकता प्रदान की गई है। महिला का नाम सुमित्रा प्रसाद है जो पिछले 40 वर्षों से भारतीय नागरिकता के लिए प्रयासरत थीं। अब तक वीजा पर रह रहीं सुमित्रा की राह नागरिकता संसोधन कानून (CAA) के जरिए आसान हुई। शुक्रवार (3 जनवरी 2025) से सुमित्रा भारत की नागरिक बन चुकी हैं। बिहार में CAA के तहत किसी विदेशी को भारत की नागरिकता देने का यह पहला मामला है। सुमित्रा ने स्वीकार किया कि बांग्लादेश में हिन्दुओं को इस्लामी चरमपंथी प्रताड़ित करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 वर्ष की उम्र में सुमित्रा प्रसाद उर्फ़ रानी शाहा बांग्लादेश में अपनी बुआ के घर गई थीं। यहाँ जाने की वजह सुमित्रा के पिता की खराब आर्थिक स्थिति थी। उनके पिता मदन गोपाल अपनी पत्नी के साथ 2 बेटियों और इतने ही बेटों का खर्च उठाने में सक्षम नहीं थे। सुमित्रा की बुआ बांग्लादेश के राजशाही जिले में रहती थीं। साल 1971 में पाकिस्तान का विभाजन हुआ। इस दौरान काफी उथल-पुथल रही और सुमित्रा वहीं रह गईं। अपनी बुआ के ही घर से सुमित्रा ने कक्षा 10 पास किया।

सुमित्रा बताती हैं कि बांग्लादेश में हिन्दुओं को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता है। चरमपंथियों की आए दिन की प्रताड़ना से सुमित्रा 1985 में वापस भारत आ गईं। इसके बाद सुमित्रा कभी लौट कर बांग्लादेश नहीं गईं। जब सुमित्रा भारत आईं तब उनकी उम्र 20 साल थी। भारत लौट कर वो अपने पिता के पास कटिहार चली गईं। 1985 में सुमित्रा का ब्याह आरा (भोजपुर) जिले के परमेश्वर से हुआ। सुमित्रा के पति होम एप्लायंस की दुकान चलाते हैं। शादी के बाद सुमित्रा 3 बेटियों की माँ बनीं।

साल 2010 में सुमित्रा के पति की बीमारी से मौत हो गई। बांग्लादेश से लौटने के बाद से ही सुमित्रा भारत की नागरिकता के लिए प्रयासरत थीं। वह हर साल वीजा के कार्यालयों के चक्कर लगाती थीं। सुमित्रा बताती हैं कि बिहार में उनके मोहल्ले के ही तमाम लोग अक्सर बांग्लादेश वापस चले जाने की नसीहत दिया करते थे। वीजा में देरी हो जाने की वजह से उनको साल 2023 में पुलिस ने भी यही सलाह दी थी। सुमित्रा को कुछ लोगों ने कोर्ट-कचेहरी के चक्कर में फँसने और जेल आदि जाने की बातों से डराया भी था।

आखिरकार उनकी बेटी ऐश्वर्या को CAA (नागरिकता संसोधन कानून) के बारे में पता चला। ऐश्वर्या ने इसी कानून के तहत अपनी माँ का आवेदन किया। आवेदन के महज 3 माह के अंदर सुमित्रा को भारत की नागरिकता मिल गई है। अब सुमित्रा का परिवार बेहद खुश है। ऐश्वर्या बताती हैं कि अब तक उनकी माँ के भारतीय पहचान पत्र नहीं बन पाए थे जिसकी वजह से उनका परिवार गैस कनेक्शन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित था।