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लोगों ने जेल के नाम पर डराया, लेकिन मोदी सरकार ने दिया सहारा: बिहार में पहली बार CAA के तहत सुमित्रा प्रसाद को मिली नागरिकता, 40 साल से वीजा पर रहने को थीं मजबूर

बिहार के भोजपुर जिले में बांग्लादेश की मूल निवासी एक हिन्दू महिला को भारत की नागरिकता प्रदान की गई है। महिला का नाम सुमित्रा प्रसाद है जो पिछले 40 वर्षों से भारतीय नागरिकता के लिए प्रयासरत थीं। अब तक वीजा पर रह रहीं सुमित्रा की राह नागरिकता संसोधन कानून (CAA) के जरिए आसान हुई। शुक्रवार (3 जनवरी 2025) से सुमित्रा भारत की नागरिक बन चुकी हैं। बिहार में CAA के तहत किसी विदेशी को भारत की नागरिकता देने का यह पहला मामला है। सुमित्रा ने स्वीकार किया कि बांग्लादेश में हिन्दुओं को इस्लामी चरमपंथी प्रताड़ित करते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 5 वर्ष की उम्र में सुमित्रा प्रसाद उर्फ़ रानी शाहा बांग्लादेश में अपनी बुआ के घर गई थीं। यहाँ जाने की वजह सुमित्रा के पिता की खराब आर्थिक स्थिति थी। उनके पिता मदन गोपाल अपनी पत्नी के साथ 2 बेटियों और इतने ही बेटों का खर्च उठाने में सक्षम नहीं थे। सुमित्रा की बुआ बांग्लादेश के राजशाही जिले में रहती थीं। साल 1971 में पाकिस्तान का विभाजन हुआ। इस दौरान काफी उथल-पुथल रही और सुमित्रा वहीं रह गईं। अपनी बुआ के ही घर से सुमित्रा ने कक्षा 10 पास किया।

सुमित्रा बताती हैं कि बांग्लादेश में हिन्दुओं को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता है। चरमपंथियों की आए दिन की प्रताड़ना से सुमित्रा 1985 में वापस भारत आ गईं। इसके बाद सुमित्रा कभी लौट कर बांग्लादेश नहीं गईं। जब सुमित्रा भारत आईं तब उनकी उम्र 20 साल थी। भारत लौट कर वो अपने पिता के पास कटिहार चली गईं। 1985 में सुमित्रा का ब्याह आरा (भोजपुर) जिले के परमेश्वर से हुआ। सुमित्रा के पति होम एप्लायंस की दुकान चलाते हैं। शादी के बाद सुमित्रा 3 बेटियों की माँ बनीं।

साल 2010 में सुमित्रा के पति की बीमारी से मौत हो गई। बांग्लादेश से लौटने के बाद से ही सुमित्रा भारत की नागरिकता के लिए प्रयासरत थीं। वह हर साल वीजा के कार्यालयों के चक्कर लगाती थीं। सुमित्रा बताती हैं कि बिहार में उनके मोहल्ले के ही तमाम लोग अक्सर बांग्लादेश वापस चले जाने की नसीहत दिया करते थे। वीजा में देरी हो जाने की वजह से उनको साल 2023 में पुलिस ने भी यही सलाह दी थी। सुमित्रा को कुछ लोगों ने कोर्ट-कचेहरी के चक्कर में फँसने और जेल आदि जाने की बातों से डराया भी था।

आखिरकार उनकी बेटी ऐश्वर्या को CAA (नागरिकता संसोधन कानून) के बारे में पता चला। ऐश्वर्या ने इसी कानून के तहत अपनी माँ का आवेदन किया। आवेदन के महज 3 माह के अंदर सुमित्रा को भारत की नागरिकता मिल गई है। अब सुमित्रा का परिवार बेहद खुश है। ऐश्वर्या बताती हैं कि अब तक उनकी माँ के भारतीय पहचान पत्र नहीं बन पाए थे जिसकी वजह से उनका परिवार गैस कनेक्शन जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित था।

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी फौजियों से भरी बस में ब्लास्ट, 6 की मौत, SSP सहित 32 घायल: BLA ने ली अटैक की जिम्मेदारी, 2024 में Pak के 685 सुरक्षाकर्मी मारे गए

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर एक बस को निशाना बनाते हुए हमला किया गया है। इस हमले में कम-से-कम 6 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 32 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर है। कराची से तुर्बत जा रही इस बस को न्यू बहमन में निशाना बनाया गया। इस हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान में प्रतिबंधित संगठन ‘बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी’ (BLA) समूह ने ली है।

ज़्यादातर पीड़ित फ्रंटियर कॉर्प्स (FC) अर्धसैनिक बल के सदस्य थे। FC पाकिस्तान की सीमाओं की रक्षा करता है और आतंकवाद विरोधी अभियानों को सँभालता है। क्षेत्र के पुलिस अधिकारी रोशन बलूच ने बताया कि सड़क किनारे खड़ी एक कार में विस्फोटक छिपाकर रखा गया था और उसे दूर से ही उसे ब्लास्ट कर दिया गया। वहीं, BLA ने कहा कि उसके सुसाइड बॉम्बर ने यह अटैक किया था।

घायलों में गंभीर अपराध शाखा के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) जोहैब मोहसिन और उनका परिवार भी शामिल हैं। उनके परिवार के छह सदस्य घायल हो गए हैं। जिस समय विस्फोट हुआ था, उस समय SSP अपने परिवार के सदस्यों के साथ उस रोड से गुजर रहे थे। सामने आए वीडियो एवं तस्वीरों के अनुसार, विस्फोट होने के बाद आग की चपेट में आसपास के कई वाहन आ गए थे।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस हमले की निंदा की है और मृतकों एवं घायलों के लिए प्रार्थना की। शनिवार (4 जनवरी 2025) हुए हमले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “आतंकवादी अपने नापाक इरादों में सफल नहीं होंगे। सरकार और सुरक्षा बल आतंकवादियों के खिलाफ कड़ी मेहनत कर रहे हैं। पाकिस्तान से आतंकवाद को खत्म करने का दृढ़ संकल्प है।”

इससे पहले बुधवार (1 जनवरी 2025) को किला सैफुल्लाह जिले में एक गैस कंपनी के वाहन पर हुए बम फेंका गया था। इस हमले में एक व्यक्ति घायल हो गया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों ने किला सैफुल्लाह के बाहरी इलाके में स्थित तेल एवं गैस विकास निगम लिमिटेड के शिविर पर हमला करने की योजना बनाई थी।

ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से सटा बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और यह प्राकृतिक संपदा से भरपूर है। यहाँ पर बलूचिस्तान लिबरेशन ग्रुप पाकिस्तान सरकार पर बलूचों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हैं और वहाँ की संपदा को चीन को सौंपने पर ऐतराज जताते हैं। इसके साथ ही वे अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ रहे हैं।

पिछले साल नवंबर में अलगाववादियों ने क्वेटा के रेलवे स्टेशन पर बम विस्फोट की थी। इस हमले में 14 सैनिकों सहित कम से कम 26 लोग मारे गए थे। उससे पहले अगस्त में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने दर्जनों हमलावरों के साथ समन्वित हमले किए थे, जिसमें कम से कम 39 लोग मारे गए थे। BLA आमतौर पर सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर हमले करता है।

अगर आँकड़ों को देखें तो हाल के महीनों में पाकिस्तान में इस तरह के हमलों में बढोतरी देखी गई है। ये हमले खास तौर पर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में अधिक हो हुए हैं। पाकिस्तानी सेना के अनुसार, सिर्फ 2024 में 444 हमलों में 685 सुरक्षाबलों की जान गई है। वहीं, 1612 नागरिकों की मौत हुई है और 934 अपराधी मारे गए हैं।

हमास की कैद में इजरायल की महिला सैनिक क्या हुआ हाल, पहली बार वीडियो सामने आई: देखकर परिवार का बेहाल, PM नेतन्याहू बोले- जल्द छुड़वाएँगे

इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने एक 19 वर्षीय इजरायली महिला सैनिक का वीडियो जारी किया है। यह महिला सैनिक बीते लगभग 14 महीने से हमास की बंधक है। उसे 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमले में इस्लामी आतंकी उठा ले गए थे। महिला सैनिक को 6 और साथियों के साथ बंधक बनाया गया था। उसके एक साथी की हत्या हो चुकी है जबकि एक को इजरायल ने मुक्त करवा लिया था। महिला सैनिक ने वीडियो में अपनी पीड़ा बताई है और जल्दी अपने को मुक्त करवाने की बात कही है।

इजरायली मीडिया के अनुसार, 14 महीने से हमास की कैद में रहने वाली इस सैनिक का नाम लिरी अलबाग है। वह 19 साल की हैं। वह 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के समय इजरायल-गाजा सीमा पर तैनात थीं। वह एक टोही दस्ते में तैनात थीं। उनकी पोस्ट पर हुए हमले में 15 सैनिक मारे गए थे जबकि लिरी अलबाग को 6 और सैनिकों के साथ इस्लामी आतंकी उठा ले गए थे। लिरी अलबाग का यह वीडियो हमास ने हाल ही में जारी किया है ताकि इजरायली सरकार पर जनता का दबाव बन सके और वह अपनी आतंक रोधी कार्यवाही को रोक दे।

इस वीडियो में लिरी अलबाग कहती हैं, “मैं सिर्फ़ 19 साल की हूँ। अभी मेरे सामने पूरी ज़िंदगी है, लेकिन अब मेरी जिंदगी रुक सी गई है…हम यहाँ एक बहुत ही खराब साल की शुरुआत कर रहे हैं, दुनिया हमें भूलने लगी है। कोई भी हमारी परवाह नहीं करता। हम एक दुखी सपने में जी रहे हैं।” लिरी के वीडियो के बाद उनके माता-पिता ने इसकी पुष्टि की है। उहोने कहा है कि इस वीडियो के कहते उनका दिल टूट गया और उन्होंने अपनी बेटी को इस हालत में कभी नहीं देखा।

उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री से बातचीत की है। उन्होंने लिरी को संदेश दिया है कि वह उसको मुक्त करवाने के लिए हर प्रयत्न कर रहे हैं। उन्होंने हमास इस वीडियो को प्रकाशित ना करने का अनुरोध किया है। नेतन्याहू ने उन्हें विश्वास दिलाया है कि जल्द ही उनकी बेटी को छुड़वा लिया जाएगा। उन्होंने कहा है कि इसके लिए सारे प्रयास किए जा रहे हैं और बातचीत चल रही है।

लिरी अलबाग के साथ 4 और साथी भी अभी हमास की कैद में हैं। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर, 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला बोल दिया था। इस हमले में उन्होंने 1200 से अधिक लोगों को मार दिया था जबकि 3000 से अधिक लोगों को घायल कर दिया था। उन्होंने इस हमले में बड़ी संख्या में सैनिकों समेत 251 लोगों को बंधक बना लिया था। इनमें से अब भी 96 हमास की कैद में हैं। इनमें से 34 की मौत भी हो चुकी है, उनके शव भी वापस नहीं किए गए हैं।

दुर्गा मंदिर में भजन बंद कराने पहुँचा कॉन्ग्रेस नेता नासिर अली, पुजारी के साथ की गाली-गलौच: पूजा में बाधा डालने पर छत्तीसगढ़ पुलिस ने किया गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के जसपुर जिले में हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं के अपमान में पुलिस ने कॉन्ग्रेस पार्टी के एक नेता को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपित का नाम नासिर अली खान है, जो जसपुर कॉन्ग्रेस का जिला उपाध्यक्ष है। नासिर अली के खिलाफ 3 जनवरी 2025 (शुक्रवार) को एक मंदिर के पुजारी ने शिकायत दर्ज करवाई थी। उसने मंदिर में हो रही पूजा को रुकवाने की कोशिश की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना जसपुर के थाना क्षेत्र बगीचा की है। यहाँ माँ दुर्गा का एक मंदिर है। हर दिन की भाँति इस मंदिर में 3 जनवरी की सुबह 6 से 7 बजे के बीच पूजा हो रही थी। उसी दौरान वहाँ कॉन्ग्रेस का जिला उपाध्यक्ष नासिर अली पहुँचा और पूजा रोकने के लिए कहने लगा। जब पुजारी भूपेंद्र पाठक ने उसे रोकने की कोशिश की तो वह मारपीट पर उतारू हो गया।

नासिर ने पुजारी को गंदी-गंदी गालियों के साथ धमकी भी दी। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भी नासिर को समझाना चाहा, लेकिन वह नहीं माना और उलटे श्रद्धालुओं को ही भला-बुरा कहने लगा। वह भजन-कीर्तन एवं आरती के दौरान बज रहे लाउडस्पीकर को बंद करने के लिए भी कहा। कुछ देर की तनातनी के बाद नासिर पुजारी और श्रद्धालुओं को धमकी देते हुए चला गया।

कॉन्ग्रेस नेता की इस हरकत को को लेकर पुजारी ने बगीचा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाई है। उन्होंने इस हरकत को अपनी भावनाओं का अपमान बताया है। पुजारी ने अपनी शिकायत में नासिर पर कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। पुलिस ने मामले को गंभीरता को देखते हुए नासिर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 (2) और 299 के तहत केस दर्ज कर लिया है।

केस दर्ज होने के बाद से नासिर फरार हो गया था। पुलिस ने नासिर अली की पड़ताल में अपने मुखबिरों को लगा दिया था। शनिवार (4 जनवरी 2025) को पुलिस ने नासिर अली को गिरफ्तार कर लिया। जसपुर के पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने मीडिया से बातचीत में नासिर की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगे की जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

‘₹1000 का किया था वादा, अब तक कुछ नहीं मिला’ : अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर जुटीं पंजाब की महिलाएँ, बोलीं- हमारे बाद दिल्ली को भी ठगने की हो रही कोशिश

पंजाब की महिलाओं के एक समूह ने शनिवार (4 दिसंबर 2024) को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के घर के बाहर जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। इन महिलाओं का आरोप था कि पंजाब में AAP सरकार ने हर महिला को ₹1000 प्रति माह देने का जो चुनावी वादा किया था, वह अब तक पूरा नहीं हुआ। प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने कहा कि अब दिल्ली में ₹2100 प्रति माह का नया वादा करके केजरीवाल फिर से जनता को गुमराह कर रहे हैं।

महिलाओं ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे पंजाब के अमृतसर और गुरदासपुर से आई हैं। एक प्रदर्शनकारी महिला ने कहा, “लोग वहाँ बहुत गरीब हैं। केजरीवाल और भगवंत मान ने ₹1000 प्रति महिला देने का वादा करके वोट लिए और सरकार बनाई। लेकिन अब तक कुछ भी नहीं मिला।” उन्होंने कहा कि दिल्ली की महिलाओं को भी इसी तरह झूठे वादों के जाल में फंसाया जा रहा है।

दिल्ली पुलिस ने इन महिलाओं को प्रदर्शन स्थल से हिरासत में ले लिया। हिरासत में ली गई महिलाओं ने कहा कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने केजरीवाल से सवाल किया कि अगर पंजाब में ₹1000 का वादा पूरा नहीं हुआ, तो दिल्ली में ₹2100 देने का वादा क्यों किया जा रहा है।

प्रदर्शन के बाद केजरीवाल ने अपने विरोधियों पर पलटवार करते हुए कहा कि प्रदर्शन कर रही महिलाएँ कॉन्ग्रेस और बीजेपी की कार्यकर्ता हैं। उन्होंने दावा किया, “ये महिलाएँ पंजाब से नहीं आईं। पंजाब की महिलाएँ आम आदमी पार्टी के साथ हैं और उन पर विश्वास करती हैं। बीजेपी और कॉन्ग्रेस को साफ-साफ कहना चाहिए कि वे दिल्ली में मिलकर AAP के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं।”

बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने दिसंबर में ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ का ऐलान किया था। इस योजना के तहत दिल्ली की महिलाओं को ₹2100 प्रति माह देने की बात कही गई। हालाँकि, दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास (WCD) विभाग ने बाद में स्पष्ट किया कि इस योजना को अब तक औपचारिक रूप से अधिसूचित नहीं किया गया है। ऐसी कोई योजना वजूद में ही नहीं है।

इस बीच, दिल्ली के लेफ्टिनेंट गवर्नर विनय कुमार सक्सेना ने मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत दिल्ली निवासियों से व्यक्तिगत जानकारी एकत्र करने के आरोपों की जाँच शुरू कर दी है। इस मामले में अधिकारियों पर यह आरोप है कि वे गैर-सरकारी लोगों को पंजीकरण के नाम पर डेटा इकट्ठा करने दे रहे हैं।

पानी के बिल को लेकर भी केजरीवाल ने दिया बयान

पानी के बिल को लेकर भी केजरीवाल ने एक बयान दिया है। केजरीवाल ने कहा, “अगर किसी का पानी का बिल बढ़ा हुआ आता है, तो उसे भरने की जरूरत नहीं है। हमारी सरकार जब सत्ता में लौटेगी, तो इन बिलों को माफ कर दिया जाएगा या सही किया जाएगा।”

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने केजरीवाल के इस बयान पर भी सवाल उठाए और इसे जनता को गुमराह करने की नई कोशिश बताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केजरीवाल झूठे वादे करके वोट लेने की राजनीति कर रहे हैं।

गौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में होने वाले हैं। इससे पहले केजरीवाल सरकार पर चुनावी वादों को लेकर दबाव बढ़ता जा रहा है। 2020 के चुनाव में AAP ने 70 में से 62 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को केवल 8 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, कॉन्ग्रेस जो कभी दिल्ली की सत्ता पर 15 साल तक काबिज थी, पिछले दो चुनावों में शून्य पर सिमट चुकी है।

NRI आकिब ने ब्रिटेन से वीडियो कॉल करके बीवी को दिया तीन तलाक, प्रताड़ित करके माँग रहा था दहेज: मुंबई पुलिस की FIR में अम्मी-अब्बा भी नामजद

महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में तीन तलाक का मामला सामने आया है। यहाँ इंग्लैंड में रहने वाले एक युवक व उसके अम्मी अब्बा पर दहेज़ उत्पीड़न सहित तीन तलाक कानून के तहत केस दर्ज हुआ है। आरोपित शौहर का नाम आकिब है। उस पर वीडियो कॉल करके अपनी बीवी को तीन तलाक देने का आरोप है। आकिब के अन्य परिजनों द्वारा भी पीड़िता को प्रताड़ित किया गया। मुंबई पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला मुंबई के सागर पुलिस स्टेशन क्षेत्र का है। यहाँ के सीवुड्स में रहने वाली पीड़िता एक मुस्लिम महिला ने अपने NRI शौहर व अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है। पीड़िता ने बताया कि साल 2022 में उसका निकाह इस्लामी तौर-तरीकों से आकिब भाटीवाल से हुआ था। उनका शौहर इंग्लैंड में रह कर जॉब करता है। शुरुआत में सब कुछ सही रहा लेकिन थोड़ा समय बीतते ही पीड़िता को उसकी ससुराल में प्रताड़ित किया जाने लगा।

थोड़े समय बाद पीड़िता अपने शौहर के पास इंग्लैंड चली गई। यहाँ भी उसकी प्रताड़ना जारी रही। इस प्रताड़ना में आकिब का साथ उसके अन्य परिजन भी देते थे। पीड़िता से दहेज़ की माँग की जाती थी। इंकार करने पर उसकी पिटाई होती थी। एक दिन आकिब और उसके घर वालों ने पीड़िता के तमाम गहने हड़प लिए। जब पीड़िता ने इसे वापस माँगा तो उसे वापस भारत लौटा दिया गया। भारत पहुँच कर पीड़िता लगातार अपनी ससुराल वालों को सम्पर्क का प्रयास करती रही। हालाँकि उधर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।

इस बीच एक बार आकिब ने पीड़िता को ब्रिटेन से वीडियो कॉल किया। कॉल पर ही उसने पीड़िता को तीन तलाक दे दिया। पीड़िता ने बहुत मिन्नत की पर आरोपित पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उल्टे पीड़िता की उसकी भारत स्थित ससुराल में एंट्री बंद कर दी गई। आखिरकार परेशान होकर पीड़िता ने पुलिस में आकिब और उसके अम्मी-अब्बा के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में आरोपितों को दहेज़ लोभी बता कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है।

पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान लेकर आकिब भाटीवाला और उसके अम्मी-अब्बा के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ तीन तलाक क़ानून के तहत कार्रवाई की गई है। आरोपितों के खिलाफ मुंबई पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है।

मोदी घृणा फैलाने में फिर बौराए रवीश कुमार, प्रोपगेंडा फैलाने में की ‘बड़ी मिस्टेक’: ₹17 लाख के हीरे को ₹68 लाख का बताया, नेटीजन्स उड़ा रहे मजाक

पूर्व पत्रकार और अब यूट्यूबर बने रवीश कुमार लगातार मोदी सरकार के खिलाफ लोगों को भड़काने की कोशिश में पकड़े जाते रहे हैं। वो फेक न्यूज फैलाते हैं और एक्सपोज होते हैं, लेकिन सुधरने की जगह एक बार फिर से वो फेक न्यूज फैला कर आम जनता को भ्रमित करने के काम में लग जाते हैं। इसी क्रम में एक बार फिर से उन्होंने प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश करते हुए फेक न्यूज फैलाया। इस बार रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अमेरिकी राष्ट्रपति की पत्नी जिल बायडेन को 7.5 कैरेट का हीरा गिफ्ट करने को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश की, लेकिन गलत आँकड़ों की वजह से खुद सवालों के घेरे में आ गए।

अमेरिका की नेशनल आर्काइव्स एंड रिकॉर्ड्स एडमिनिस्ट्रेशन ने 1 जनवरी 2025 को एक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के पेज 12 पर बताया गया कि 22 जून 2023 को अमेरिकी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन की पत्नी जिल बायडेन को 7.5 कैरेट का हीरा उपहार में दिया। इसकी कीमत $20000 (करीब 17.15 लाख रुपये) बताई गई थी।

रवीश कुमार ने 3 जनवरी 2024 को इसे लेकर सोशल मीडिया पर मोदी सरकार को निशाना बनाते हुए कहा कि यह हीरा 68 लाख रुपये का है। उन्होंने भारतीय रुपये और अमेरिकी डॉलर के एक्सचेंज रेट को सही से समझे बिना यह दावा कर दिया।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह हीरा लैब में तैयार किया गया था और ये इको-फ्रेंडली है। रवीश ने इसे जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए सरकार पर कटाक्ष किया। लेकिन असलियत यह है कि $20000 का मतलब भारतीय करेंसी में सिर्फ 17.15 लाख रुपये है।

इसके अलावा, टाइम्स ऑफ इंडिया के सूत्रों का कहना है कि यह हीरा मात्र ₹2 लाख (लगभग $2331) का था। इस खुलासे के बाद रवीश कुमार के दावे और उनकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

बहुत बार फेक न्यूज फैलाते पकड़े जा चुके हैं रवीश कुमार

बता दें कि रवीश कुमार कई बार फेक न्यूज फैलाते पकड़े जा चुके हैं। यूट्यूबर बनने से पहले जब वो एनडीटीवी में थे, तब भी उन्होंने जान-बूझकर लोगों को भ्रमित करने के लिए फेक न्यूज फैलाने के काम किए थे। ऐसा ही काम उन्होंने जनवरी 2021 में किया था, जब किसान आंदोलन के बहाने आम जनता और किसानों को उन्होंने भ्रमित करने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें लताड़ भी लगी थी।

साल 2020 में वो लगातार फेक न्यूज फैलाते पकड़े गए थे। उन्होंने एक के बाद एक लगातार तीन फेक न्यूज फैलाए थे, जिसमें रेलवे को लेकर भी फर्जी खबरें शामिल थी। किसी फेक न्यूज में वो ट्रेनों के 90 घंटे से लेट चलने का दावा करते दिख रहे थे, तो किसी में वो टाइम मैगजीन के बहाने फर्जी न्यूज फैलाने की कोशिश करते दिखे थे।

यही नहीं, रवीश कुमार लव जिहाद जैसी जघन्य घटनाओं को भी कम करके बता रहे थे और लव जिहाद को मनगढंत बात बता रहे थे। जिसके बाद पीड़ित नेशनल शूटर ने सार्वजनिक तौर पर उनकी बघिया उघेड़ी थी।

‘जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा…’ : प्रधानमंत्री ने ‘ग्रामीण भारत महोत्सव’ का किया उद्घाटन, कहा- 2012 में 26% थी गाँव की गरीबी, अब 5% रह गई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (4 जनवरी 2025) को दिल्ली के भारत मंडपम में ‘ग्रामीण भारत महोत्सव 2025’ का उद्घाटन किया, जो 9 जनवरी तक चलेगा। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि साल 2014 में सरकार बनते ही ग्रामीण भारत को समृद्ध बनाने के लिए कई कदम उठाए गए। इसके नतीजे भी आने शुरू हो गए। पीएम मोदी ने कहा कि जब इरादे नेक होते हैं तो नतीजे भी संतोष देने वाले होते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार ने गाँव के हर वर्ग के लिए विशेष नीतियाँ बनाई हैं। उन्होंने कहा, “2014 से ही मैं लगातार, हर पल ग्रामीण भारत की सेवा में लगा हूँ। गाँव के लोगों को गरिमापूर्ण जीवन देना मेरी सरकार की प्राथमिकता है। हमारा विजन है, भारत के गाँव के लोग सशक्त बनें, उन्हें गाँव में ही आगे बढ़ने के ज्यादा से ज्यादा अवसर मिले, उन्हें पलायन न करना पड़े।”

उन्होंने कहा, “गाँव के लोगों का जीवन आसान हो, इसलिए हमने गाँव-गाँव में मूलभूत सुविधाओं की गारंटी का अभियान चलाया। अभी दो-तीन दिन पहले ही कैबिनेट ने ‘पीएम फसल बीमा योजना’ को एक वर्ष अधिक तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। दुनिया में DAP का दाम बढ़ रहा है, लेकिन हमने निर्णय किया कि हम किसान के सिर पर बोझ नहीं आने देंगे और सब्सिडी बढ़ाकर DAP का दाम स्थिर रखा है।”

उन्होंने कहा, “कृषि के अलावा भी हमारे गाँव में अलग-अलग तरह के पारंपरिक कला और कौशल से जुड़े हुए कितने ही लोग काम करते हैं। रूरल इकोनॉमी और लोकल इकोनॉमी में इनका बड़ा योगदान रहा है, लेकिन पहले इनकी भी उपेक्षा हुई। अब हम उनके लिए पीएम विश्वकर्मा योजना चला रहा हैं। ये योजना देश के लाखों विश्वकर्मा साथियों को आगे बढ़ने का मौका दे रही है।”

पिछड़े और दलित समाज की समस्याओं को लेकर पीएम मोदी ने कहा, “पहले की सरकारों ने SC-ST-OBC की आवश्यकताओं की ओर ध्यान नहीं दिया। गाँव से पलायन होता रहा, गरीबी बढ़ती रही, गाँव और शहर के बीच की खाई बढ़ती रही। जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, उन्हें मोदी ने पूजा है। जो इलाके दशकों से विकास से वंचित थे, अब उन्हें बराबरी का हक मिल रहा है।”

SBI की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “अभी कल ही स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आई है, जिसके अनुसार 2012 में भारत में ग्रामीण गरीबी करीब 26 प्रतिशत थी। जबकि 2024 में भारत में ग्रामीण गरीबी घटकर 5 प्रतिशत से भी कम हो गई है।” उन्होंने कहा, “हमारी सरकार की नीयत, नीति और निर्णय ग्रामीण भारत को नई ऊर्जा से भर रहे हैं।”

छत्तीसगढ़ के जिस ठेकेदार ने की पत्रकार मुकेश की हत्या, वह कॉन्ग्रेस का पदाधिकारी निकला: देखते ही देखते बन गया बड़ा नाम, हेलीकॉप्टर से ले गया था बारात

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में मुकेश चंद्राकर नाम के एक पत्रकार की हत्या कर दी गई है। शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को मुकेश का शव सेप्टिक टैंक से बरामद हुआ है। वह 1 जनवरी से लापता थे। आरोप है कि सड़क निर्माण में कमियाँ उजागर करने की वजह से ठेकेदार सुरेश चंद्राकर द्वारा मुकेश की हत्या की गई। मुख्य आरोपित सुरेश चंद्राकर और उसके भाई सहित 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

ठेकेदार का कॉन्ग्रेस कनेक्शन सामने आया है। ठेकेदार सुरेश चंद्राकर छत्तीसगढ़ प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश सचिव हैं। सुरेश चंद्राकर को कॉन्ग्रेस के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष दीपक बैज का बेहद करीबी बताया जाता है। भाजपा का कहना है कि दीपक बैज के कहने पर ही सुरेश चंद्राकर को पार्टी में यह पद मिला है।

इस घटना को लेकर छत्तीसगढ़ भाजपा ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा है, “कॉन्ट्रैक्टर है या कॉन्ग्रेसी कॉन्टैक्ट किलर!!” घृणित येन-केन-प्रकारेण की राजनीति के परिचायक कॉन्ग्रेसियों… ज़रा अपने गिरेबाँ पर झाँककर देखो, क्या जल्दबाज़ी में तुमने अपना ही कच्चा चिट्ठा खोल दिया है!!” भाजपा ने इस मामले में राहुल गाँधी से जवाब माँगा है।

भाजपा ने आगे लिखा, “बीजापुर के युवा पत्रकार स्व. मुकेश चंद्राकर जी की हत्या का मुख्य आरोपित कॉन्ट्रैक्टर सुरेश चंद्राकर की कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज से घनिष्ठता जगज़ाहिर है। दीपक बैज ने ही सुरेश को कॉन्ग्रेस के SC मोर्चा के प्रदेश सचिव के पद से नवाजा है। मोहब्बत की तथाकथित कॉन्ग्रेसी दुकान से तरह-तरह के अपराध के सामान बिक रहे हैं।”

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने X पर अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “ठेकेदार, जिस पर पत्रकार की हत्या का इल्जाम है, उसका नाम सुरेश चंद्राकर है। सुरेश चंद्राकर कॉन्ग्रेस का बड़ा नेता है, जिसे हर चुनाव में कॉन्ग्रेस की तरफ से बड़ी ज़िम्मेदारियाँ सौंपी जाती हैं। कॉन्ग्रेस के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज के साथ आरोपित।”

कॉन्ग्रेस नेता सुरेश चंद्राकर मूलरूप से बासागुड़ा का रहने वाला है। राज्य में सलवा जुड़ूम आंदोलन के बाद से वह और उसका परिवार बीजापुर में रहने लगा था। बीजापुर में आकर सुरेश ने ठेकेदारी शुरू कर दी। देखते ही देखते वह बड़ा ठेकेदार बन गया। साल 2021 में हेलीकॉप्टर से बरात लेकर जाने पर वह चर्चा में आया था। यह बात भी सामने आ रही है कि मुकेश और सुरेश आपस में रिश्तेदार थे।

मृतक मुकेश ने बस्तर में 120 करोड़ रुपए की लागत वाली सड़क निर्माण परियोजना में धाँधली के खिलाफ एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग की थी। गंगालूर में इस सड़क को सुरेश चंद्राकर ने बनवाया था। इसके बाद से सुरेश की तरफ से पत्रकार को चेतावनी मिल रही थी। इस रिपोर्ट के बाद कॉन्ग्रेस नेता सुरेश के भाई रितेश ने 1 जनवरी को मुकेश को मिलने के लिए बुलाया था। इसके बाद मुकेश घर नहीं लौटे थे।

मुकेश चंद्राकर के लापता होने पर उनके पत्रकार भाई युकेश चंद्राकर ने इसका आरोप सुरेश चंद्राकर पर लगाया था। उन्होंने कहा था कि सुरेश चंद्राकर ने उनके भाई को लापता किया है। इसके बाद पुलिस ने मुकेश की खोजबीन शुरू कर दी। एएसपी चंद्रकांत गोवर्ना के मुताबिक, मुकेश के मोबाइल की आखिरी लोकेशन कॉन्ग्रेस नेता सुरेश चंद्राकर की कंस्ट्रक्शन कंपनी में मिली थी।

ASP के अनुसार, इसके बाद फोन बंद हो गया था। सुरेश चंद्राकर की यह कंपनी चट्टानपारा में स्थित है। इसके बाद खोज में मुकेश की लाश मिली। मुकेश चंद्राकर बस्तर इलाके से एनडीटीवी के लिए रिपोर्टिंग करते थे और ‘बस्तर जंक्शन’ नाम से अपना यूट्यूब चैनल चलाते थे। साल 2021 में नक्सलियों द्वारा CRPF के एक जवान को अपहरण करने के बाद उसे रिहा कराने में मुकेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

टूरिस्ट बनकर भारत में घुसे बांग्लादेशी, फिर यहीं बस गए: दिल्ली पुलिस ने 5 को दबोचकर वापस भेजा, जिस गेस्ट हाउस में मिले उसके मालिक पर भी केस

दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी में अवैध तौर पर रह रहे बांग्लादेश के 5 नागरिकों को हिरासत में लिया है। ये सभी वीजा की अवधि खत्म होने के बावजूद भारत में ही रह रहे थे। इसमें महिलाएँ भी शामिल हैं। इन सभी को जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद उनके मुल्क वापस भेज दिया गया है। शुक्रवार (3 जनवरी 2025) को पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी दी है। घुसपैठियों को चिन्हित करके उनकी धरपकड़ का अभियान अभी भी जारी है।

शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए दक्षिण पूर्व दिल्ली पुलिस के DCP रवि कुमार ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेशी व अन्य घुसपैठियों को चिन्हित करने के लिए पुलिस ने एक अलग से टीम बना रखी है। इसी टीम की निगरानी के दौरान पुलिस को सरिता विहार इलाके में आने वाले मदनपुर खादर क्षेत्र के मवासी गेस्ट हाउस के अंदर रह रहे कुछ संदिग्धों का पता चला। इस सूचना पर पुलिस ने दबिश दी तो गेस्ट हाउस में 5 लोग मिले। इनकी जाँच में ये सभी बांग्लादेश के नागरिक निकले।

जाँच में यह पता चला कि पाँचों बांग्लादेशियों की टूरिस्ट वीजा अवधि अगस्त 2024 में खत्म हो चुकी है। इसके बावजूद ये सभी अपने देश वापस नहीं लौटे। इन पाँचों को कस्टडी में लेकर जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद वापस बांग्लादेश भेज दिया गया है। पुलिस ने गेस्ट हाउस के मालिक के खिलाफ भी FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि गेस्ट हाउस के मालिक ने पाँचों बांग्लादेशियों को अपने यहाँ किराये पर रखने से पहले उनके कागजातों की सही से जाँच नहीं की थी।

गौरतलब है कि गुरुवार को दक्षिण पश्चिम जिले में भी पुलिस ने एक तलाशी अभियान चलाया था। तब पुलिस ने साल 2012 से अवैध तौर पर भारत में रह रहे 2 बांग्लादेशियों को पकड़ा था। इनकी पहचान 54 वर्षीय लियाकत और 39 वर्षीया नसरीन के तौर पर हुई थी। लियाकत और नसरीन रिश्ते में मियाँ-बीवी हैं। इन दोनों को भी विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) के माध्यम से बांग्लादेश वापस लौटा दिया गया है।

इसी के साथ साथ दिल्ली पुलिस ने कई अन्य स्थानों पर अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इन्हीं में से एक घुसपैठी को लवली खतूम इस्लाम के तौर पर चिन्हित हुई थी। लवली खातून पिछले 4 वर्षों से दिल्ली में रह रही थी। घुसपैठियों के खिलाफ एक अन्य कार्रवाई में वसंत कुञ्ज इलाके से भी एक बंगलदेश पकड़ कर वापस अपने मुल्क भेजा गया था। उसकी पहचान ढाका के डेमरा गाँव निवासी मोहम्मद बबलू के तौर पर हुई थी।