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PM मोदी ने किया जम्मू रेलवे डिवीजन का शुभारंभ, तेलंगाना के नए रेलवे टर्मिनल का भी उद्घाटन: कहा- इससे जम्मू-कश्मीर के साथ हिमाचल और लद्दाख को फायदा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को कई नए रेलवे प्रोजेक्ट की सौगात दी है। उन्होंने जम्मू कश्मीर में नए रेलवे डिवीजन और तेलंगाना में नए रेलवे टर्मिनल का उद्घाटन किया है तथा ओडिशा में एक नए रेलवे टर्मिनल का शिलान्यास किया है। पीएम मोदी ने इस मौके पर रेलवे क्षेत्र में हुए विकास पर बात की है।

पीएम मोदी ने सोमवार (6 जनवरी, 2025) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सैकड़ों करोड़ के रेलवे प्रोजेक्ट का शिलान्यास और उद्घाटन किया। उन्होंने उत्तरी रेलवे के अंतर्गत बनाए गए नए जम्मू डिवीजन की शुरुआत की। यह उद्घाटन जम्मू से कश्मीर रेल पहुँचने से पहले हुआ है।

श्रीनगर रेल के माध्यम से जम्मू से जुड़ चुका है। कुछ ही दिनों में इस पर ट्रेनें चलने लगेंगी। जम्मू डिवीजन इसी क्षेत्र में रेलवे के सुगम संचालन के लिए बनाया गया है। इसके अंतर्गत कुल 742 किलोमीटर का रेल रूट होगा। जम्मू डिवीजन में पठानकोट-जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला, भोगपुर सिरवाल-पठानकोट, बटाला-पठानकोट तथा पठानकोट से जोगिंदर नगर वाले रूट होंगे।

इनमें से उधमपुर से बारामूला वाला रेल रूट सबसे अहम होगा क्योंकि यह घाटी को मैदानी इलाके से जोड़ेगा। इसे जोड़ने के लिए ही चेनाब नदी पर विश्व का सबसे ऊंचा रेल ब्रिज बनाया गया है। इस पर रेलवे वर्तमान में अलग-अलग ट्रेनें चला कर ट्रायल कर रहा है।

पीएम मोदी ने जम्मू डिवीजन के उद्घाटन पर कहा, ”आज जैसे-जैसे रेलवे नेटवर्क का विस्तार हो रहा है, उसी हिसाब से नए हेडक्वार्टर और डिवीजन भी बनाए जा रहे हैं। जम्मू डिवीज़न का लाभ जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश और पंजाब के कई शहरों को भी होगा। इससे लेह-लद्दाख के लोगों को भी सुविधा होगी।”

उन्होंने कहा, “हमारा जम्मू-कश्मीर आज रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में नए रिकॉर्ड बना रहा है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लाइन इसकी चर्चा आज पूरे देश में है। ये परियोजना जम्मू-कश्मीर को भारत के अन्य हिस्सों के साथ और बेहतरी से जोड़ देगी। इसी परियोजना के तहत दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्च ब्रिज, चिनाब ब्रिज का काम पूरा हुआ है।”

उन्होंने जम्मू रेलवे डिवीजन के अलावा तेलंगाना के चर्लपल्ली न्यू टर्मिनल स्टेशन का भी उद्घाटन किया। इसे ₹413 करोड़ की लागत से बनाया गया है। यह मेडचाल और मलकाजगिरी जिले में है। इससे हैदराबाद समेत बाकी जिलों के रेलवे टर्मिनल पर भीड़ कम होगी।

पीएम मोदी ने इस पर कहा, ” इस स्टेशन के आउटर रिंग रोड से जुड़ने से क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी। स्टेशन पर आधुनिक प्लेटफॉर्म, लिफ्ट, एस्केलेटर जैसी सुविधाएं हैं। एक और खास बात है कि ये स्टेशन सोलर ऊर्जा से संचालित हो रहा है। ये नया रेलवे टर्मिनल, शहर के मौजूदा टर्मिनल्स जैसे सिकंदराबाद, हैदराबाद और काचिगुड़ा पर प्रेशर को बहुत कम करेगा।”

ओडिशा में भी रायगड़ा रेल मंडल के मुख्यालय का शिलान्यास भी किया। उन्होंने ओडिशा में चल रहे रेलवे प्रोजेक्ट को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा, “आज ओडिशा में रेलवे के नए ट्रैक से जुड़े लगभग अनेकों प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। इन पर 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हो रहा है। राज्य में 7 गति शक्ति कार्गो टर्मिनल शुरू किए गए हैं, जो व्यापार और उद्योगों को बढ़ावा दे रहे हैं। आज भी ओडिशा में जिस रायगड़ा रेल मंडल का शिलान्यास किया गया है, इससे प्रदेश का रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत होगा।”

 

लिवर के 4 टुकड़े, इतना मारा कि 5 पसलियों के टूटने के बाद दिल भी फट गया… पोस्टमॉर्टम वाले डॉक्टर ने पूरे करियर में ऐसा नृशंस मामला कभी नहीं देखा: पढ़िए पत्रकार मुकेश चंद्राकर की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की लाश 3 जनवरी 2025 को एक सेप्टिक टैंक में मिली थी। इस हत्याकांड में मुख्य आरोपित कॉन्ग्रेस नेता एवं ठेकेदार सुरेश चंद्राकर, उसके भाई और 4 अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। सुरेश के ठिकानों पर बुलडोजर भी चली है। मुकेश चंद्राकर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई है। उनके तमाम अंगों में घाव मिले हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुकेश को कत्ल से पहले बुरी तरह से तड़पाया गया था। मुकेश को इतना मारा गया था कि उनका लिवर 4 टुकड़ों में बँट गया था। सीने की 5 पसलियाँ और कॉलर बोन भी टूटे पाए गए। कॉलर बोन पसलियों को हाथों की हड्डियों से जोड़ती है। हाथ की हड्डी दो टुकड़ों में बँट गई थी। पिटाई से पसलियों के टूटने के बाद दिल भी फट गया था। गर्दन की हट्टी टूट गई थी। मृतक के सिर पर भी 15 घाव पाए गए हैं।

सिर पर किए गए वार से मृतक की खोपड़ी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थी। उनके सीने और सिर को खासतौर पर निशाना बनाया गया था। मुकेश का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का कहना है कि 12 साल के मेडिकल करियर में उन्होंने ऐसा नृशंस मामला पहले कभी नहीं देखा। डॉक्टर का मानना है कि मौत से पहले किसी भारी चीज से मुकेश के शरीर के कई हिस्सों पर वार किए गए थे।

दरअसल, छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जब 31 मई 2019 को बीजापुर जिले के भोपालपटनम गए थे, तब पार्टी के SC मोर्चा के सचिव एवं आरोपित सुरेश ने उनका जोरदार स्वागत किया था। उसके द्वारा जारी किए गए पोस्टर में दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर राहुल गाँधी, प्रियंका गाँधी और सोनिया गाँधी तक दिखे थे। सुरेश ने अपनी फेसबुक प्रोफ़ाइल पर भी इसे शेयर किया था।

गौरतलब है कि 1 जनवरी 2015 को 33 वर्षीय पत्रकार मुकेश चंद्राकर लापता हो गए थे। परिजनों ने सुरेश चंद्राकर पर अगवा करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने उनका शव 3 जनवरी को सुरेश की एक बिल्डिंग के सेप्टिक टैंक से बरामद किया था। हत्या की वजह मुकेश द्वारा सुरेश चंद्राकर की बनवाई सड़क में कमियाँ उजागर करना बताया जा रहा है। पुलिस इस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।

HMPV भारत के लिए नया नहीं, खतरनाक भी कम: बेंगलुरु में 2 केस निकलने पर घबराएँ नहीं, बड़े सर्जन ने बताया- बच्चों में जल्दी होता है

चीन में चिंता का विषय बन चुके ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) वायरस के इन्फेक्शन का भारत में पहला मामला सोमवार (6 जनवरी, 2024) को सामने आया। इस वायरस से बेंगलुरु का एक 8 महीने का बच्चा ग्रसित हुआ है। वह भारत में इसका ‘जीरो पेशेंट’ है। जीरो पेशेंट किसी रोग के सबसे पहले पहचाने गए रोगी को कहते हैं।

बेंगलुरु में ही एक और बच्चे के इस वायरस से ग्रसित होने की बात सामने आई है। वह तीन महीने का है। लेकिन अभी इस वायरस से चिंतित होने की जरूरत नहीं है, ऐसा एक बड़े सर्जन ने बताया है। उन्होंने कहा है कि यह वायरस भारत के लिए नया नहीं है।

भारत में यह पहला मामला हाल ही में चीन में HMPV के मामलों में उछाल के बाद सामने आया है। चिंताएँ इस लिए भी बढ़ी हैं क्योंकि चीन से ही कोविड-19 की शुरुआत हुई थी। बेंगलुरु में पाए गए इस वायरस से ग्रसित पाए गए बच्चों में से 8 माह के बच्चे का इलाज चल रहा है।

वहीं जो 3 महीने का बच्चा इससे ग्रसित पाया गया था, वह ठीक हो चुका है और उसको अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इन मामलों की पुष्टि भारत में मेडिकल रिसर्च के लिए जिमेदार संस्था भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने की है।

इस वायरस से बढ़ती चिंताओं के बाद काफी जाने-माने सर्जन अमित ठधानी ने लोगों से ना घबराने की अपील की है। उन्होंने बताया है कि भारत में इस वायरस का पहले से क्या इतिहास रहा और पहले हुए शोधों में इस पर क्या जानकारियाँ हासिल हुई हैं।

उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “चीन से आया नया वायरस HMPV दशकों से भारत में मौजूद है और यह एक जाना-माना वायरस है जो खास तौर पर बच्चों में सांस से जुड़ी बीमारी का कारण बनता है। करीब दो दशक पहले AIIMS में किए गए इस शोध से पता चला कि बचपन में सांस कि बीमारियों में इसकी मौजूदगी करीब 3% से 33% है।”

सर्जन ठधानी से एक व्यक्ति ने पूछा कि भले ही यह वायरस पहले मिला चुका हो लेकिन इसका स्ट्रेन (प्रकृति) नई हो सकती है क्या। इस पर डॉ. अमित ठधानी ने साफ़ किया कि भले ही स्ट्रेन नया हो या पहले से अलग हो, यह क्रॉस-इम्युनिटी के चलते ज्यादा असर नहीं कर पाएगा।

सर्जन ठाधानी ने बताया कि सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) वायरस, जिससे कोविड चालू हुआ था, वह केवल जानवरों और पक्षियों में पाया जाता है। जबकि HMPV आम तौर पर इंसानों में पाया जाता है। चीन ने इन मामलों के चिंताजनक होने से इनकार किया है। चीन HMPV मामलों में बढ़त को हर साल मौसम बदलने पर होने वाली बीमारी के तौर पर आँका है।

1954 का कुंभ, 1000+ लोगों की मौत और PM नेहरू: किसे बचाने के लिए इसे कहा गया ‘कुछ भिखारियों की मौत’ – एकमात्र मौजूद पत्रकार ने जो-जो देखा-लिखा, जानिए सब

तीर्थराज प्रयागराज में हर 12 साल बाद कुँभ मेले का आयोजन होता है। प्रयागराज महाकुंभ 2025 को लेकर बहुत कुछ लिखा-पढ़ा जा रहा है, लेकिन हम बताने चल रहे हैं आजादी के बाद आयोजित पहले कुंभ मेले के बारे में, जहाँ प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और उस समय राष्ट्रपति रहे डॉ राजेंद्र प्रसाद भी पहुँचे थे। लेकिन उनका पहुँचना इतना दुर्भाग्यपूर्ण रहा कि 1000 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गँवानी पड़ी और 2000 से ज्यादा लोग घायल हो गए।

करीब 1000 लोगों के मारे जाने की वजह थी, भगदड़ का मचना.. जिसके बारे में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग दावे किए जाते हैं। हालाँकि हम प्रकाशित कर रहे हैं वो सबसे विश्वसनीय आँखों देखी, जिसके हमेशा से छिपाने की कोशिश की गई।

कुंभ 1954 में भगदड़ का नेहरू कनेक्शन

भारत को आजादी 1947 में मिली थी। सन 1954 में पहली बार आजाद भारत के प्रयाग (तत्कालीन इलाहाबाद) में कुंभ का आयोजन होने वाला था। हालाँकि 1948 में अर्धकुंभ का आयोजन हो चुका था। चूँकि कुंभ 1954 का आयोजन खुद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के शहर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हो रहा था, तो इसमें नेहरू की निजी रुचि भी थी। लेकिन दूसरे शाही स्नान (मौनी अमावस्या) में खुद नेहरू के शामिल होने के फैसले ने प्रयाग में लाशों के ढेर लगा दिए।

इन घटनाओं को कॉन्ग्रेस की सरकारों ने दबाने के भरसक प्रयास किए, यहाँ तक कि इस 1000 लोगों के मारे जाने की घटना को कुछ ‘भिखारियों’ की मौत कह कर भी सरकार ने प्रचारित किया और असलियत को दबाने की कोशिश की, लेकिन आनंद बिहार पत्रिका के एक पत्रकार की वजह से घटना खुल गई। सबूत के तौर पर तस्वीर भी छप गई। इसके बावजूद इस घटना को कॉन्ग्रेसियों ने पूरी ताकत से छिपाने की कोशिश की। हालाँकि इस घटना के खुल जाने और हादसे के चलते निराशा में घिर चुके उस समय के मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत बेहद नाराज हुए थे और पत्रकार के लिए ‘हरा#$%दा’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।

कैसे गई थी कुंभ 1954 में हजार से ज्यादा लोगों की जान?

ये दिन था 3 फरवरी 1954… मौका था कुंभ के दूसरे शाही स्नान यानी मौनी अमावस्या का। जवाहरलाल नेहरू खुद ही प्रयाग पहुँचे थे और उनके साथ थे राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद। समय था सुबह के करीब 10.20 बजे का, जब नेहरू जी और राजेंद्र बाबू की कार त्रिवेणी रोड से आई और बैरियर को पार करके किला घाट की ओर बढ़ी। इस दौरान नेहरू को देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ी, तो मेले में आ रहा हुजूम और मेले से निकल रहा हुजूम आमने-सामने आ गया। भगदड़ मच गई। लोग खाईं से नीचे गिरने लगे, तो पास का ही बड़ा कुआँ लाशों से भर गया।

आनंद बाजार पत्रिका के लिए मेला कवर कर रहे फोटो जर्नलिस्ट एनएन मुखर्जी ने साल 1989 में ‘छायाकृति’ नाम की पत्रिका में छपे अपने संस्मरण में इन बातों को विस्तार से बताया है। दरअसल, इस मेले में हुए हादसे की भयावहता की पोल उन्हीं की तस्वीर से खुली थी। वो हादसे के समय वो संगम चौकी के पास एक टॉवर पर खड़े थे।

उन्होंने अपने संस्मरण में बताया था कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को उसी दिन संगम स्नान के लिए आना था। इसलिए सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी उनके आगमन की तैयारियों में व्यस्त थे। लेकिन सुबह 10.20 बजे जब दोनों कार से किला घाट की तरफ बढ़े, तो भीड़ बेकाबू हो गई। हर तरफ लाशें थी। वो खुद कई लाशों के ऊपर से चढ़ कर आगे गए थे और तस्वीरें खींची थी।

उन्होंने हैरानी जताते हुए लिखा था कि इस बड़ी घटना के बावजूद हादसे वाली जगह से दूर रहे शीर्ष अधिकारी सरकारी आवास पर शाम 4 बजे तक चाय-नाश्ते में व्यस्त रहे, और उन्हें इस हादसे के बारे में जानकारी तक नहीं मिली। वहीं, जब एनएन मुखर्जी करीब 1 बजे अपने दफ्तर पहुँचे, जहाँ संपादक समेत तमाम पत्रकार साथी उनके जिंदा बचने पर हैरानी जताते हुए उनके आने पर खुशी जताई।

ये मामला अंतर्राष्ट्रीय सुर्खियों में न जाए, इसलिए उस समय की सरकार ने इसे ‘कुछ भिखारियों की मौत’ कहकर खारिज करने की कोशिश की। लेकिन एनएन मुखर्जी ने वो तस्वीरें अधिकारियों के सामने रख दी, जिसमें कई महिलाएँ महँगे कपड़े और गहने पहने हुई थी, जिससे साफ जाहिर होता था कि मृतक कोई भिखारी नहीं थे, बल्कि वो संपन्न परिवारों से थे और सरकारी अव्यवस्था के शिकार हुए थे।

इस घटना में मारे गए लोगों के शव किसी को दिए नहीं गए, बल्कि ढेर के ढेर लगाकर सामूहिक रूप से जला दिए गए। एनएन मुखर्जी ने बताया था कि वो किसी तरह से उन शवों के ढेर के पास पहुँचे थे। उन्होंने पुलिसकर्मी के पैर पकड़ते हुए उससे से कहा था कि वो अपनी “मृत दादी को आखिरी बार देखना चाहते हैं”, जिसके बाद उन्हें शवों के पास जाने दिया गया। इस बीच, एनएन मुखर्जी ने चुपके से छोटे कैमरे से सामूहिक रूप से जलाए जा रहे शवों की तस्वीर खींच ली थी।

आनंद बाजार पत्रिका ने हादसे की खबर तस्वीर के साथ छापी। चूँकि बाकी जगहों पर बहुत कम खबर छपी, ऐसे में कॉन्ग्रेसी सिस्टम हैरान था कि हादसे की तस्वीर छप कैसे गई। उन तस्वीरों को देखते ही मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत ने चिल्लाकर कहा था, ‘कहाँ है ये ह$%#@मजा%$ फोटोग्राफर।’ एनएन मुखर्जी ने कहा कि इस बड़े हादसे से सबक लेकर सरकार ने आगे के सभी कुंभ मेले के लिए महीनों-सालों पहले से व्यवस्था करनी शुरू की थी। हालाँकि इस घटना के दौरान जवाहरलाल नेहरू की मौजूदगी को छिपाने के प्रयास अब तक चले आ रहे हैं।

पीएम मोदी ने मंच से की सही बात, तो गलत ठहराने में जुटा मीडिया गैंग

इस पूरी घटना को हमेशा से छिपाने की कोशिश होती रही है। तथ्यों को भी तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कौशांबी की एक जनसभा में इस वाकये का जिक्र किया था। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि प्रयागराज कुंभ 1954 की लोहमर्षक घटना को छिपाने, दबाने के प्रयास किए गए। इसके बाद तो मानों पालतू मीडिया गैंग को कोई चारा मिल गया हो। तुरंत ही ऐसे गवाह पेश कर दिए गए, जिनका उस स्थान से कोई खास लेना-देना नहीं था और जवाहर लाल नेहरू के नारनामे को छिपाने के लिए ‘सुनी-सुनाई’ बातों को छापा गया। इस मामले को लेकर 12 साल पहले भास्कर ने भी एक रिपोर्ट छापी थी, लेकिन उसमें भी नेहरू की संलिप्तता को छिपा लिया गया था। बता दें कि हादसे के बाद इंडिया एक्सप्रेस ने इस घटना में सरकारी अधिकारियों के हवाले से सिर्फ 300 लोगों के मारे जाने की बात प्रकाशित की थी। हालाँकि टाइम पत्रिका ने हादसे में 500 लोगों के मारे जाने की बात कही थी, लेकिन नेहरू की मौजदूगी को हर तरफ से छिपाने की कोशिश ही की गई।

कुंभ 1954 के हादसे की तस्वीर, जो एनएन मुखर्जी ने खींची थी (फोटो साभार: TheStatesman)

ऐसा ही एक किस्सा बीबीसी हिंदी ने भी छापा, जिसमें उसने ये बताने की कोशिश की थी कि उस समय का मीडिया बहुत आजाद था। लेकिन एनएन मुखर्जी को वो भूल गया और ये साबित करने की कोशिश में पूरा जोर लगा दिया कि उस हादसे की वजह जवाहरलाल नेहरू नहीं थे। यही नहीं, बीबीसी ने तो ये भी झूठ स्थापित करने की कोशिश की, कि जवाहरलाल नेहरू घटना के समय प्रयागराज में थे ही नहीं। अलबत्ता उसने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को जरूर खींचने की कोशिश की, कि उनके सामने ही भगदड़ हुई।

(एनएन मुखर्जी के संस्मरण के बारे में 4 फरवरी 2019 को द-स्टेट्समैन ने अंग्रेजी में छापा था। वो मूल रिपोर्ट स्क्रॉल की हिंदी वेबसाइट सत्याग्रह पर छपी थी। चूँकि सत्याग्रह वेबसाइट बंद हो गई है, ऐसे में ये रिपोर्ट सिर्फ द स्टेट्समैन पर ही उपलब्ध है।)

60 वर्ष पुराना मंदिर 30 सालों से बंद, फिरोजाबाद में खंडित मिली प्रतिमाएँ: प्रशासन ने पट खुलवाया, हिन्दू संगठनों ने पढ़ी हनुमान चालीसा

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में रविवार (5 दिसंबर 2024) को 30 साल पुराना एक बंद पड़ा मंदिर मिला है। मंदिर की जानकारी होते ही जहाँ हिन्दू संगठनों ने इसकी सफाई शुरू की, तो वहीं प्रशासन ने महादेव के इस मंदिर में पहुँचकर ताला खुलवाया। यह मंदिर मुस्लिम बहुल इलाके में है। लोगों ने बताया कि इलाके में पहले एक हिन्दू परिवार रहता था मगर अब वो पलायन कर चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला फिरोजाबाद जिले के थानाक्षेत्र रसूलपुर का है। यहाँ के शहीद चौक के पास बेहद संकरी गली नंबर 8 मुस्लिम आबादी मुस्लिम बहुल क्षेत्र मानी जाती है। इसी गली के कोने में एक मंदिर पिछले 30 वर्षों से बंद पड़ा था। बताया जा रहा है कि 3 दशक पहले इस जगह एक हिन्दू परिवार रहा करता था। उसी परिवार द्वारा इस मंदिर को बनवाया गया था जहाँ काफी समय तक नियमित पूजापाठ हुआ।

कुछ समय पहले हिन्दू परिवार इलाके से पलायन कर गया। हिन्दू परिवार के जाते ही मंदिर पर ताला लग गया। धीरे-धीरे वह जगह खंडहर नुमा हो गई। रविवार को यहाँ हिन्दू संगठन से जुड़े लोग पहुँचे और साफ़-सफाई करने लगे। उन्होंने पाया कि मंदिर के अंदर मौजूद मूर्तियाँ भी खंडित हो गई हैं। मंदिर के गुंबद पर अभी तक जंजीर लटक रही थी। माना जा रहा है कि इसी जगह पर घंटा लटका रहा होगा। दीवालों पर धार्मिक लाइनें लिखी हुई हैं। यहाँ हनुमान चालीसा का पाठ भी हुआ।

मामले की जानकारी प्रशासन को मिली तो पुलिस फ़ौरन मौके पर पहुँची। पुलिस की मौजूदगी में मंदिर का ताला खोला गया। इस दौरान कोई विरोध नहीं हुआ। सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह के मुताबिक मंदिर लगभग 60 वर्ष पुराना है। इसका निर्माण 1963 में हुआ था। स्थानीय हिन्दुओं ने मंदिर खोले जाने को अपने धार्मिक अधिकार वापस मिलने जैसा बताया है। हिन्दू संगठन से जुड़े सदस्यों ने जल्द ही इस जगह विधि-विधान से प्रतिमा स्थापित करने का ऐलान किया है।

हिंदू महिला से परमिशन के बिना घुसा दिया कॉपर-टी… ताकि जनसंख्या न बढ़े: जिस नेता ने लगाया यह आरोप, तमिलनाडु पुलिस ने उन्हें कर लिया गिरफ्तार

तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले में पुलिस ने रविवार (5 जनवरी 2025) को हिन्दू मुन्नानी संगठन के प्रदेश सचिव के कुट्रालनाथन को गिरफ्तार कर लिया है। उन पर सोशल मीडिया पर भ्रामक खबर फैलाने का आरोप लगाया गया है। के कुट्रालनाथन ने तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने एक हिन्दू महिला की मर्जी के खिलाफ कॉपर टी लगा दी। कुट्रालनाथन ने इसे हिन्दुओं की आबादी कम करने की साजिश करार दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मूल रूप से मदुरै की रहने वाली 31 वर्षीया एक महिला नवंबर 2024 में तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज अस्पताल (टीवीएमसीएच) में भर्ती हुई थी। 25 नवंबर को उसने एक बच्चे को जन्म दिया। बाद में महिला के पिता एस मारुथुपंडियन ने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी की मर्जी के बिना कॉपर टी लगा दिया गया। महिला के पिता का यह भी दावा था कि कॉपर टी लगाने के दौरान उनकी बेटी को ब्लीडिंग हुई जिससे सेहत पर बुरा असर पड़ा।

महिला के पिता ने मेडिकल कॉलेज के स्टाफ पर हिन्दू महिलाओं से भेदभाव के आरोप लगाया था। उनका दावा था कि अस्पताल में किसी गैर हिन्दू महिला को कॉपर टी नहीं लगाई गई। इस बाबत उन्होंने एक शिकायती पत्र भी दिया। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी को इतना खून निकला कि उसी के साथ कॉपर टी भी बाहर निकल आई। महिला के पिता की इसी शिकायत को हिन्दू मुन्नानी के प्रदेश सचिव कुट्रालनाथन ने सोशल मीडिया पर शेयर किया था।

के कुट्रालनाथन ने तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज अस्पताल के डॉक्टरों की इस हरकत को हिन्दुओं की आबादी कम करने की साजिश करार दे डाला। उन्होंने अस्पताल के स्टाफ के खिलाफ जाँच और पीड़िता को मुआवजा देने की माँग उठाई। माँगों के पूरा न होने पर के कुट्रालनाथन ने TVMCH के आगे प्रदर्शन का भी ऐलान किया था। हिन्दू मुन्नानी के पदाधिकारी के इन आरोपों को अस्पताल प्रशासन ने बेबुनियाद बताया और पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी।

अस्पताल प्रशासन की इस शिकायत पर पुलिस ने के कुट्रालनाथन के खिलाफ FIR दर्ज कर ली। उन पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) में भ्रामक सूचना देने और अशाँति फैलाने की धाराओं 192, 196(1) और 352 के तहत कार्रवाई की गई है। रविवार को के कुट्रालनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी के बाद हिंदू मुन्नानी और भाजपा के सदस्यों ने टीवीएमसीएच पुलिस स्टेशन के सामने विरोध प्रदर्शन किया। बाद में के कुट्रालनाथन को जमानत मिल गई।

इस बीच पीड़िता महिला ने भी टीवीएमसीएच के डीन और डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। अपनी शिकायत में पीड़िता ने बताया कि उन्हें बिना उनकी मर्जी के कॉपर टी लगाई गई है। इसी दौरान अस्पताल के कुछ कर्मचारियों ने पीड़िता से एक खाली फॉर्म पर दस्तखत भी करवा लिए थे। पुलिस ने इस शिकायत का संज्ञान ले कर जाँच शुरू कर दी है।

मुँह में ठूंसी गेंद, Anal गैंगरेप के लिए 13 साल की बच्ची पर 5-6 मर्दों को छोड़ा: ब्रिटेन के ग्रूमिंग गैंग की हैवानियत खोल रहे एलन मस्क, चश्मदीदों को जिंदा जलाने की दी जाती थी धमकी

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग के खिलाफ इन दिनों मुखर होकर बोलने वाले एलन मस्क ने हाल में ग्रूमिंग गैंग की दरिंदगी को बताने के लिए कुछ घटनाओं की डिटेल को साझा किया है। इस क्रम में एक 13 साल की बच्ची के साथ हुई हैवानियत की डिटेल भी है।

एलन मस्क के ट्वीट में एक इस्लामी कट्टरपंथी मोहम्मद करार के कुकर्मों का जिक्र है जिसने एक 13 साल की बच्ची को एनल गैंग रेप के लिए तैयार किया था और बाद में 5 से 6 लोग उसपर टूट पड़े। इस दौरान बच्ची के गुदाद्वार को फैलाने के लिए पंप तक का इस्तेमाल किया और उसके बाद एक टाइम तो ऐसा भी आया कि चार-चार मर्दों ने उसके भीतर एक साथ लिंग डाला हुआ था।। वो दर्द से चिल्लाए न इसलिए उसके मुँह में लाल रंग की गेंद डाल दी गई थी।

इतना ही नहीं, मोहम्मद करार ने सिर्फ दूसरों से उसका गैंगरेप नहीं कराया बल्कि खुद भी उसका रेप किया। ये सब उसी समय हुआ जब वो 13 साल की पूरी भी नहीं हुई थी। उसके साथ न केवल ओरल सेक्स किया गया बल्कि वेजाइनल सेक्स भी किया गया।

एलन मस्क द्वारा साझा किया गया ये स्क्रीनशॉट www.judiciary.uk पर मौजूद लीगल दस्तावेज का है जिसमें ग्रूमिंग गैग के बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके अनुसार ग्रूमिंग गैंग से जुड़े इस्लामी कट्टरपंथी चश्मदीदों को पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की धमकी देते थे, उन्हें बंदूक दिखाकर डराया धमकाया जाता था। ग्रूमिंग गैंग चश्मदीदों को ये कहकर चुप कराते थे कि अगर उन्होंने किसी को कुछ भी कहा था उनके साथ भी वही होगा तो पीड़िताओं के साथ हो रहा है यानी कई मर्द मिलकर रेप करेंगे। बता दें कि साल 2019 में इसी मोहम्मद करार को इसके 2 भाइयों सहित कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

मौजूदा दस्तावेज ये भी बताते हैं कि कैसे ग्रूमिंग गैंग को पुलिस ने संरक्षण दिया हुआ था। दो ऐसे मामले थे जहाँ लड़कियों के पिता को उनकी बेटियों के बारे में पता भी चला और वो उन्हें बचाने भी गए, लेकिन हुआ क्या? जिस जगह पहुँचकर पुलिस को पिता की मदद करनी चाहिए थी, उन्हीं जगहों पर पहुँचकर पुलिस ने लाचार पिता को अरेस्ट कर लिया और आरोपितों के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई।

एलन मस्क ऐसे केसों को आधार बनाकर कहते हैं कि सोचकर देखिए कि आप पिता हैं और बेटी को गैंगरेप और हत्या से बचाने के लिए कहीं पहुँचे हैं, लेकिन पुलिस ने उलटा आपको ही गिरफ्तार कर लिया।

ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग

उल्लेखनीय है कि ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग की समस्या आज की नहीं है। सालों से इस गैंग का शिकार हुई पीड़िताओं की कहानी लोगों को चौंकाती रही है। इस गैंग का कनेक्शन सीधा पाकिस्तान के इस्लामी कट्टरपंथियों से था जो चुन-चुन कर छोटी उम्र की गोरी और गैर मुस्लिम लड़कियों को अपना शिकार बनाते, फिर उनका शोषण करते, उनसे अप्राकृतिक रूप से बलात्कार करते, उनकी तस्करी करते और उन्हें हिंसक धमकियाँ देते थे। 2013 के बाद इस गैंग के बारे में दुनिया को पता चला और फिर एक टास्कफोर्स बनी जिसने पिछले वर्ष तक 550 से अधिक संदिग्धों को गिरफ्तार किया था और 4000 से अधिक पीड़ितों की पहचान की थी।

AI रोबोट करेंगे नौकरी, OpenAI कंपनियों में करवाएगी भर्ती: CEO सैम ऑल्टमैन का ऐलान, कहा- अभी ये साइंस फिक्शन जैसा, लेकिन जल्द होगा सच्चाई

जल्द ही कई कंपनियों में इंसानों की जगह पर AI रोबोट (सॉफ्टवेयर) नौकरी करते नजर आएँगे। यह काम 2025 में चालू हो जाने की संभावना है। काम करने के लिए इंसान की जगह AI रोबोट देने की योजना इस तकनीक पर काम करने वाली विश्व की बहुचर्चित कंपनी OpenAI ने बनाई है। इसके CEO सैम ऑल्टमैन ने हाल ही में अपने ब्लॉग पर इस संबंध में जानकारी दी है।

उन्होंने कहा है कि अभी AI एजेंट की बात साइंस फिक्शन (वैज्ञानिक कल्पना) जैसा लगता है, लेकिन जल्द ही यह सच्चाई होगी। गौरतलब है कि बीते कुछ सालों से यह चर्चा चल रही है कि AI इंसानों को कई क्षेत्रों में रिप्लेस कर देगी और उनकी जगह काम करेगा।

कैसी रही OpenAI की यात्रा

सोमवार (6 जनवरी, 2025) को सैम ऑल्टमैन ने यह ब्लॉग साझा किया है। इसमें उन्होंने अपनी कंपनी की यात्रा और बातचीत करने वाले प्रोडक्ट ChatGPT के बारे में बात की। उन्होंने लिखा, “ChatGPT का दूसरा जन्मदिन महीने पहले ही मनाया गया था, और अब हम ऐसे मॉडल्स की दुनिया में घुस चुके हैं जो कहीं कठिन तर्क वाले काम कर सकते हैं। नए साल में लोग सोच विचार करते हैं। अब मैं इस बारे में कुछ निजी विचार साझा करना चाहता हूँ कि यह कैसे हो रहा है, और कुछ ऐसी चीज़ें जो मैंने इस दौरान सीखी हैं।”

उन्होंने आगे लिखा,”हमने OpenAI की शुरुआत लगभग 9 साल पहले की थी क्योंकि हमारा मानना ​​था कि AGI (आर्टिफिशियल जनरेटिव इंटेलिजेंस) पर काम हो सकता है और यह मानव सभ्यता के इतिहास में सबसे प्रभावशाली तकनीक हो सकती है। हम यह पता लगाना चाहते थे कि इसे बनाया कैसे जाए और इसका फायदा बड़े स्तर पर कैसे। हम इतिहास पर अपनी छाप छोड़ने की कोशिश करने के लिए काफी उत्साहित थे… यह काम समाज को फायदा पहुँचा सकता है।”

ChatGPT का लॉन्च और दुनिया में तहलका

सैम ऑल्टमैन ने इसके बाद बताया कि कैसे सालों तक काम करने के बाद उन्होंने ChatGPT AI को लॉन्च किया और इसने दुनिया भर में तहलका मचा दिया। उन्होंने लिखा, “हमने इसका नाम बदलकर ChatGPT रख दिया, और इसे 30 नवंबर, 2022 को लॉन्च कर दिया। हम हमेशा से ही जानते थे कि किसी समय हम एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचेंगे और AI क्रांति की शुरुआत होगी। लेकिन हमें नहीं पता था कि वह समय क्या होगा। हमें यह आश्चर्य हुआ कि यह वही समय निकला।”

उन्होंने कहा, “ChatGPT के लॉन्च ने हमारी कंपनी, हमारी इंडस्ट्री और पूरी दुनिया में एक ऐसी तरक्की की शुरुआत की है, जो हमने पहले कभी नहीं देखी। आखिरकार हम AI से वह बड़ी सफलता देख रहे हैं, जिसकी हमें हमेशा से उम्मीद थी, और हम देख सकते हैं कि जल्द ही और भी बहुत कुछ देखने को मिलेगा। यह आसान नहीं रहा है। इसका रास्ता आसान नहीं रहा है और ऐसा नहीं हुआ कि हमने हमेशा सही विकल्प ही चुने।” उन्होंने कहा कि हमने बीते 2 साल के भीतर ही पूरी कंपनी खड़ी करनी पड़ी।

AI एजेंट करेंगे नौकरी

सैम ऑल्टमैन ने इस ब्लॉग में लिखा, “हमारा विजन नहीं बदलेगा, हमारी रणनीति बदलती रहेगी। उदाहरण के लिए, जब हमने शुरुआत की थी तो हमें नहीं पता था कि हमें एक प्रोडक्ट कंपनी बनानी होगी, हमने सोचा था कि हम सिर्फ़ रिसर्च करेंगे। हमें यह भी नहीं पता था कि हमें इतनी बड़ी पूँजी की ज़रूरत होगी। हमें अभी कुछ नई चीज़ें बनानी हैं जिन्हें हम कुछ साल पहले समझ नहीं पाए थे, और भविष्य में कुछ ऐसी भी तकनीक होंगी जिनकी हम अभी कल्पना भी नहीं कर सकते।”

उन्होंने इसके बाद ऐलान किया कि 2025 में पहले AI एजेंट कम्पनियों को ज्वाइन करने लगेंगे और नौकरी में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, “हमारा मानना ​​है कि 2025 में हम पहले AI एजेंट को ‘वर्कफोर्स में शामिल होते’ हुए देख सकते हैं और वह कंपनियों के आउटपुट में काफी परिवर्तन ला सकते हैं। हमारा विश्वास है कि अगर हम लोगों को तकनीक देते हैं, तो इससे बड़े परिणाम आते हैं।”

अभी यह साइंस फिक्शन लगता है, लेकिन जल्द सच्चाई होगा

सैम ऑल्टमैन ने लिखा कि अभी यह भले ही कोई साइंस फिक्शन लगता हो लेकिन जल्द ही यह सच्चाई होगा। उन्होंने लिखा, “यह अभी साइंस फिक्शन जैसा लगता है, और इसके बारे में बात करना भी एकदम पागलपन जैसा है। यह भी ठीक ही है, हम पहले भी ये देख चुके हैं और फिर से उसी जगह पर खड़े होने में हमें कोई दिक्कत नहीं है। हमें पूरा विश्वास है कि अगले कुछ सालों में, हर कोई वही देखेगा जो हम देखते हैं.. हमारे काम में आगे की संभावनाओं को देखते हुए, OpenAI कोई ऐसी-वैसी सामान्य कंपनी नहीं हो सकती।”

लड़की का सिर्फ एक बार पीछा करना ‘स्टॉकिंग’ नहीं: नाबालिग के यौन उत्पीड़न मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी, दोनों आरोपित हुए बरी

बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने एक मामले की सुनवाई मे कहा कि केवल लड़की का पीछा करना भारतीय दंड संहिता (IPC) के 354-D और यौन अपराधों से बच्चों की सुरक्षा (POCSO) अधिनियम के तहत अपराध नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई किसी लड़की का बार-बार पीछा करता है तो वह उसके आचरण के आधार पर अपराध माना जा सकता है।

जस्टिस गोविंद सनप ने इस मामले में एक नाबालिग लड़की का पीछा करने वाले दो आरोपितों को ‘स्टॉकिंग’ के आरोप से बरी कर दिया। घटना के समय लड़की की उम्र 14 साल थी, जबकि दोनों लड़कों की उम्र 19 साल थी। दोनों पर लड़की का पीछा करने का आरोप लगाया हुए उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और POCSO के तहत मामला दर्ज किया गया था।

जज ने कहा, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि पीछा करने के अपराध को तय करने के लिए अभियोजन पक्ष को यह साबित करना होगा कि अभियुक्त ने बार-बार उसे घूरा, पीछा किया या उससे सीधे या इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल मीडिया के माध्यम से संपर्क किया। स्टॉकिंग के अपराध की इस अनिवार्य आवश्यकता के मद्देनजर पीड़िता का पीछा करना इस अपराध को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।”

दरअसल, यह मामला जनवरी 2020 का है। पीड़ित लड़की ने अपनी माँ को बताया कि जब वह पानी लाने के लिए नदी के किनारे गई थी तो दोनों आरोपित वहाँ आ गए। इसके बाद, एक दिन आरोपित नंबर 1 या मुख्य आरोपित ने उसे बताया कि वह उसे पसंद करता है और उसके साथ शादी करना चाहता है। हालाँकि, लड़की ने इसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया।

आरोप है कि लड़के ने 26 अगस्त 2020 को लड़की के घर में जबरन घुस गया और वहाँ उसने लड़की का मुँह बंद करके उसके स्तन को दबाया। इस दौरान दूसरा आरोप घर के बाहर खड़ा रहा। इसके बाद परिजनों ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया। इस मामले में निचली अदालत दोनों को लड़की का पीछा करने और यौन उत्पीड़न का दोषी ठहराया।

निचली अदालत के निर्णय का दोनों लड़कों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। हाई कोर्ट के न्यायाधीश गोविंद सनप ने कहा कि पीड़िता ने अपनी गवाही में दूसरे अभियुक्त की कोई विशिष्ट भूमिका नहीं बताई। जज ने कहा कि दूसरा आरोपि पीड़ित के घर के बाहर खड़ा था। इस प्रकार उसे यौन उत्पीड़न या पीछा करने के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता था। कोर्ट ने उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।

वहीं, मुख्य आरोपित को लेकर कोर्ट ने कहा कि उसने अदालत ने कहा कि उसने पीछा करने का अपराध नहीं किया है, क्योंकि वह केवल एक बार लड़की के पीछे गया। वहीं, यौन उत्पीड़न के अपराध को लेकर कोर्ट ने पीड़िता और उसकी बहन के सबूतों को भी नोट किया। दोनों ने गवाही दी कि मुख्य आरोपित ने उसके घर में घुसकर पीड़िता का मुँह बंद कर दिया और फिर उसके स्तन को दबाया।

न्यायाधीश ने यौन उत्पीड़न के आरोप को सही पाया। इस आधार पर न्यायाधीश ने पहले आरोपों को बरकरार रखा। निचली अदालत ने मुख्य आरोपित को पाँच साल की सश्रम कारावास एवं 5000 रुपए की जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालाँकि, हाईकोर्ट ने मुख्य आरोपित के युवा उम्र को देखते हुए उसकी सजा को संशोधित कर दिया। वह पहले से ही दो-ढाई साल हिरासत में बिता चुका था।

पूरी दुनिया में होगा इस्लाम का राज… अमेरिका-यूरोप-रूस-चीन सब देशों पर फतह: कनाडा में इसके लिए कॉन्फ्रेंस, आयोजक है आतंकी संगठन

इस्लामी आतंकी संगठन हिज्ब उत तहरीर खलीफा का राज (खिलाफत) कैसे आए, इस पर कनाडा में एक कॉन्फ्रेंस कर रहा है। यह खलीफा कॉन्फ्रेंस कनाडा के मिसीसॉगा में आयोजित की जानी थी। कनाडा के आतंक पर इस ढुलमुल रवैये को लेकर अब प्रश्न उठाए जा रहे हैं। मिसीसॉगा की मेयर ने इस आयोजन का विरोध किया है और कार्रवाई की बात कही है। इसके बाद यह कॉन्फ्रेंस दूसरे शहर में आयोजित की जाएगी। मिसीसॉगा की जगह अब इसे हैमिलटन में करवाया जाएगा।

हिज्ब उत तहरीर की यह कॉन्फ्रेंस 18 जनवरी, 2025 को मिसीसॉगा में होनी थी। मिसीसॉगा शहर में किस जगह पर यह होती, यह नहीं पता चला। लेकिन अब यह हैमिलटन में भी यह किस जगह होगी, यह नहीं बताया गया है।इस कॉन्फ्रेंस का विषय है – ‘खिलाफत की वापसी में देर लगा रहे रुकावटों को हटाना।’

कनाडा खिलाफत तहरीर

इसको लेकर एक फेसबुक पोस्ट भी वायरल है। इस पोस्ट में लिखा है, “हिज्ब उत तहरीर कनाडा आपको इस साल की कॉन्फ्रेंस में आमंत्रित करता है – खिलाफत: इसकी वापसी में देरी करने वाली बाधाओं को दूर करना… मुस्लिमों पर दुनिया में रही त्रासदियों पर पूरी दुनिया में आक्रोश और सदमा है, लेकिन अल्लाह और अल्लाह के रसूल ने जीत के लिए सही तरीका और रोडमैप पहले ही बता दिया है। इस्लाम को पूरी तरह से लागू करके और खिलाफत की स्थापना करके ही मुसलमान दुनिया में एक बार फिर से अपना सही जगह पा सकते हैं।”

इसमें आगे लिखा गया, “ऐ मुसलमानों, और हम कितने दिन तक खिलाफत के राज के बिना रह सकते हैं? क्या अब भी हम उस अंधेरे से तंग नहीं आए हैं जो हमें कुचल रहा है? क्या हम सही में बदलाव चाहते हैं? तो शनिवार, 18 जनवरी को हमारे स्पीकर्स से मिलें।” इस कॉन्फ्रेंस में खलीफा का राज फिलिस्तीन की आजादी के लिए कैसे जरूरी है इस पर बात होगी।

एक और पोस्ट हिज्ब उत तहरीर ने लिखा, “आज की औपनिवेशिक महाशक्तियों के खिलाफ़ फतह हासिल करने लिए हमें क्या कदम उठाने की ज़रूरत है? जानें कि आज हम जिस स्थिति में हैं, उससे आगे अमेरिका, यूरोप, रूस, चीन और अन्य देशों पर जीत हासिल करने के लिए हमारी उम्माह को क्या करना होगा।” हिज्ब उत तहरीर ने दावा किया कि क्या अमेरिका सही में इतना ताकतवर है जो वह उम्माह को हरा दे। इस कॉन्फ्रेंस में कई मुस्लिम कट्टरपंथी जुड़ रहे हैं, लेकिन इसके आयोजन से पहले विवाद हो गया है।

गौरलतब है कि हिज्ब उत तहरीर भारत समेत इजरायल, इंग्लैंड, जर्मनी, चीन, रूस, तुर्की और बांग्लादेश में प्रतिबंधित इस्लामी आतंकी संगठन है। भारत ने इसे अक्टूबर, 2024 में ही प्रतिबंधित किया था। हिज्ब उत तहरीर 1953 में बना था और यह पूरी दुनिया में इस्लाम के राज की वकालत करता है।

इसके लिए वह खिलाफत को रास्ता बताता है। इस पर कनाडा में प्रतिबन्ध नहीं लगाया गया है और यहाँ यह लगातार अपनी गतिविधियाँ चला रहा है। इससे पहले भी यह इस्लामी देशों में कॉन्फ्रेंस आयोजित करता रहा है। कनाडा में इस कॉन्फ्रेंस के आयोजन को लेकर ट्विटर के मालिक एलन मस्क ने भी प्रश्न उठाए हैं। कनाडा के सांसदों समेत बाकी लोगों ने कहा है कि जस्टिन ट्रूडो के राज में उनका देश आतंकियों के लिए पनाहगाह बन चुका है। उन्होंने इस आयोजन समेत हिज्ब उत तहरीर पर प्रतिबंध लगाने की माँग की है।

इस कॉन्फ्रेंस के आयोजन का संज्ञान मिसीसॉगा की मेयर ने भी लिया जिसके बाद इसका आयोजन यहाँ रद्द कर दिया गया। मिसीसॉगा की मेयर कैरोलिन पैरिश ने इस आयोजन की जगह ढूंढ कर पुलिस को सूचना देने की बात कही थी। इसके बाद इसे हैमिलटन शहर में आयोजित जा रहा है। हिज्ब उत तहरीर ने इस कॉन्फ्रेंस की जगह में अब बदलाव करने हिज्ब उत तहरीर ने खलीफा के राज पर 2024 में भी मिसीसॉगा में एक कॉन्फ्रेंस करने की कोशिश कई थी लेकिन बाद में इसे कैंसिल कर दिया गया था।

कनाडा की सरकार ने अभी इस पर कोई एक्शन नहीं लिया है। कनाडा के भीतर खुले तौर पर हिज्ब उत तहरीर के समर्थक और आतंकी घूम रहे हैं। कनाडा इन पर प्रतिबन्ध ना लगाने को बोलने की आजादी का नाम देता है। इसी तरह वह भारत तोड़ने की बात करने वाले खालिस्तानी आतंकियों को भी प्रश्रय देता है।