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रात के 10 से सुबह के 6 बजे तक महिलाओं को FREE में ड्रॉप करेगी पुलिस: कर्नाटक में सराहनीय पहल

इन दिनों महिलाओं की सुरक्षा देश के लिए अहम सवाल बना हुआ है। आए दिन महिलाओं के साथ रेप की घटनाएँ सामने आ रही है। महिलाओं के खिलाफ लगातार बढ़ रही अपराध की घटनाओं को देखते हुए कर्नाटक की बीजेपी सरकार ने बड़ा फैसला लिया। 

कर्नाटक की गडग पुलिस ने रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच महिलाओं के लिए मुफ्त ड्रॉप सेवा शुरूआत की है। गडग के एसपी श्रीनाथ जोशी कहते हैं कि इस समय के बीच महिलाएँ किसी भी पुलिस स्टेशन या टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकती हैं। पुलिस उन्हें पिक कर लेगी और उन्हें उनके निर्धारित स्थानों तक सुरक्षित पहुँचाएगी। रात 10 से सुबह 6 बजे तक कोई भी महिला इस सुविधा का लाभ उठा सकती है।

कर्नाटक पुलिस का यह निर्णय ऐसे समय में आया है, जब देश में एक के बाद एक महिलाओं के साथ रेप और बर्बर तरीके से हत्या के मामले सामने आ रहे हैं। पूरे देश में इन घटनाओं के कारण रोष व्याप्त है। कर्नाटक पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए मुफ्त ड्रॉप सेवा शुरू करके ये दिखाया है कि वो महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कितने सतर्क एवं चिंतित हैं। पुलिस का यह कदम वाकई काफी सराहनीय है। वारदात को अंजाम देने के बाद अपराधियों को तो पुलिस सजा देती ही है, लेकिन अपराध होने की नौबत ही न आए, इसके लिए ये कदम उठाकर कर्नाटक पुलिस ने मिसाल पेश की है।

इससे पहले केंद्र की मोदी सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया था। इसमें कहा गया था कि महिला सुरक्षा को लेकर देशभर के सभी थानों में महिला डेस्क बनाए जाएँगे। इन थानों के लिए गृह मंत्रालय ने निर्भया फंड से 100 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। यह योजना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू की जाएगी। गृह मंत्रालय ने पुलिस स्टेशनों में महिला हेल्प डेस्क बनाने की योजना को मंजूरी देते हुए इसके लिए निर्भया फंड से 100 करोड़ रुपए की राशि मंजूर की है।

पुलिस स्टेशनों को महिलाओं के अनुकूल और पहुँच योग्य बनाने के लिए महिला सहायता डेस्क बनाने का फैसला लिया गया है। इससे कोई भी महिला पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायक महिला डेस्क पर कर सकेंगी। इस डेस्क पर अनिवार्य रूप से महिला पुलिस अधिकारियों को तैनात किया जाएगा।

महिला हेल्प डेस्क के अधिकारियों को महिलाओं के प्रति संवेदनशील होने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। ये हेल्प डेस्क कानूनी सहायता, परामर्श, आश्रय, पुनर्वास और प्रशिक्षण आदि की सुविधा देने के लिए वकीलों, मनोवैज्ञानिकों, गैर सरकारी संगठनों और विशेषज्ञों के पैनल को सूचीबद्ध करेगी. इन सभी का इस्तेमाल महिलाओं को मदद करने में किया जाएगा।

बाल ठाकरे मेमोरियल के लिए कटेंगे 1000 पेड़: मेट्रो प्रोजेक्ट रोकने वाली शिवसेना का दोहरा रवैया

देवेंद्र फडणवीस सरकार के रहते जब मेट्रो कार शेड प्रोजेक्ट के लिए आरे जंगल में पेड़ों को काटा जा रहा था, तब आदित्य ठाकरे ने उसका विरोध किया था। शिवसेना ने सत्ता संभालते ही मेट्रो प्रोजेक्ट को रोकने की घोषणा की और इसकी समीक्षा की बात कही। उद्धव ने मुख्यमंत्री बनते ही घोषणा करते हुए कहा कि मेट्रो नहीं रुकेगा लेकिन आरे में अब पेड़ तो क्या, एक पत्ता भी नहीं काटा जाएगा। पर्यावरण एक्टिविस्ट्स ने इसका स्वागत किया। अब ख़बर आई है कि मराठवाड़ा के औरंगाबाद में बाल ठाकरे मेमोरियल के लिए 1000 पेड़ों को काटा जाएगा।लोग इसे शिवसेना का दोहरा रवैया बता रहे हैं।

बाल ठाकरे शिवसेना का संस्थापक थे। औरंगाबाद के प्रियदर्शिनी पार्क में उनका मेमोरियल बनाया जा रहा है। औरंगाबाद म्युनिसिपल कॉपोरेशन (AMC) इसके लिए 1000 पेड़ों को काट कर वहाँ से हटाना चाहती है। औरंगाबाद नगरपालिका पर फ़िलहाल शिवसेना का ही कब्ज़ा है। 17 एकड़ में फैला प्रियदर्शिनी पार्क औरंगाबाद के बीचोंबीच स्थित है। यह एक घने जंगल की तरह है। लोग यहाँ टहलने, जॉगिंग करने या हरियाली के बीच अपना समय व्यतीत करने के लिए आते हैं। इस पार्क का इस शहर के लिए ख़ासा महत्व है। कई जीव-जंतुओं ने भी यहाँ अपना बसेरा बना रखा है।

प्रियदर्शिनी पार्क को पक्षियों की 70 प्रजातियों के अलावा तितलियों की 40 प्रजातियों ने अपना बसेरा बनाया हुआ है। इसके अतिरिक्त यहाँ कई रेप्टाइल्स और छोटे जानवर भी रहते हैं। जाहिर है, पेड़ों को काटना इन जानवरों के घरों को तोड़ने जैसा होगा। शिवसेना यहाँ बाल ठाकरे का एक विशाल मेमोरियल बनाने की योजना बना रही है। साथ ही एक बड़ा गैलरी और थिएटर भी बनाया जाएगा। शिवसेना के नियंत्रण वाली औरंगाबाद म्युनिसिपल कारपोरेशन ने एक फूड कोर्ट और एक म्यूजियम के निर्माण की भी योजना तैयार की है।

3 एकड़ में बनने वाले मेमोरियल के निर्माण में कुल 61 करोड़ रुपए ख़र्च आएँगे। पेड़ों को काटने के ख़िलाफ़ अदालत में पीआईएल दाखिल करने वाले सन्नी खिनवसरा ने कहा कि एएमसी ने कोर्ट में डाले गए एफिडेविट में स्पष्ट नहीं बताया है कि कितने पेड़ काटे जाएँगे और कहा है कि कम से कम पेड़ों को काटा जाएगा। एएमसी ने एक स्थानीय अख़बार में 330 पेड़ काटने के लिए टेंडर आमंत्रित किया है। उन्होंने बताया कि ये पार्क एएमसी ने सिटी एंड इंडसट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (CIDCO) से लिया और तब से इसकी हालत बदतर होती जा रही है।

अब तक एएमसी 1200 पेड़ों को काट चुकी है। पर्यावरणविदों ने माँग की है कि आरे की तरह औरंगाबाद में बाल ठाकरे मेमोरियल का काम भी रोका जाए। इससे पहले आरे में मेट्रो प्रोजेक्ट को लेकर पेड़ काटने पर शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में एक संपादकीय के माध्यम से कहा गया था कि पेड़ों के पास मताधिकार नहीं होते हैं, इसीलिए उन्हें काटा जाता है। शिवसेना ने पूछा था कि ‘पेड़ों की हत्या’ को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुप क्यों हैं? लेकिन अब शिवसेना खुद ही पेड़ कटवाने जा रही है।

17 साल की गोद ली गई बेटी, बाप पर यौन शोषण का आरोप और प्राइवेट पार्ट कटी हुई लाश: मुंबई केस सॉल्व

मुंबई पुलिस ने शनिवार (7 दिसंबर) को 59 साल के बुज़ुर्ग की हत्या और उनके शरीर के अंगों को काटने, बैग में भरने के बाद नदी में फेंकने के ज़ुर्म में एक नाबालिग समेत दो लोगों को गिरफ़्तार किया।

पुलिस के हाथों जिस वक़्त यह सूटकेस लगा, तो उन्हें उसमें आदमी के पैर, एक हाथ और प्राइवेट पार्ट मिला। खोजबीन के बाद पता चला कि आरोपित कुमारी आराध्या जितेंद्र पाटिल उर्फ़ ​​रिया (19) और उसके 16 वर्षीय प्रेमी ने मिलकर 27 नवंबर को मुंबई के वकोला में द्वारका कुंज में स्थित अपने घर पर चाकू और बाँस की छड़ी से बेनेट रेबेलो की हत्या कर दी थी।

लड़की और उसके प्रेमी ने बेनेट रेबेलो पर मच्छर मारने की दवा का छिड़काव भी किया था क्योंकि वह चाकू मारे जाने के बाद भी जीवित थे। लेकिन, इस पूरे प्रकरण में ट्विस्ट तब आया जब पुलिस को अपनी छानबीन में पता चला कि बेनेट रेबेलो ने रिया को गोद लिया था और उसका यौन शोषण भी किया था। इसके अलावा बेनेट रेबेलो अपनी गोद ली हुई बेटी के नाबालिग प्रेमी को लेकर भी काफ़ी नाराज़ थे।

रिया और उसके नाबालिग प्रेमी ने 27 नवंबर को बेनेट रेबेलो की हत्या कर दी। उन्होंने बेनेट रेबेलो को मारने के लिए एक चाकू और बाँस का इस्तेमाल किया था। लेकिन वह चाकू मारे जाने के बाद भी साँस ले रहे थे। इसके बाद दोनों ने मिलकर बेनेट पर मच्छर मारने वाले स्प्रे का छिड़काव किया।

एक बार जब दोनों को यह विश्वास हो गया कि बेनेट रेबेलो मर चुके हैं, तब उन्होंने उनके शरीर के अंगों को काटने के लिए गर्म चाकू का इस्तेमाल किया। उन्होंने ने बेनेट रेबेलो के शव को टुकड़ों-टुकड़ों में काटा और एक सूटकेस समेत 3 बैग में उसे रख दिया। इसके बाद सूटकेस को मुंबई के मीठी नदी में फेंक दिया।

आरोपितों ने शव को नदी में बहाने के लिए 3 दिन लगाए। सूटकेस में बेनेट रेबेलो का एक पैर, हाथ और प्राइवेट पार्ट मिला। मीठी नदी से सूटकेस बरामद होने के बाद इस मामले की जाँच के लिए मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 5 टीम का गठन किया और उसने पूरे मामले की गुत्थी को सुलझा लिया।

इस मामले को सुलझाने के लिए पहले सुराग के रूप में पुलिस के हाथों एक स्वेटर लगा। इसका इस्तेमाल शरीर के अंगों को ढकने के लिए किया गया था। इस स्वेटर पर जो स्टिकर लगा हुआ था, वो कुर्ला स्थित अल्मो मेन्स वियर दुकान का था। पुलिस जब इस दुकान पर पहुँची तो वहाँ से बेनेट के नाम पर एक रसीद मिली।

मुंबई पुलिस ने आगे की जाँच के लिए सोशल मीडिया पर इसकी तलाश की और बेनेट नामक शख्स को फेसबुक पर ढूँढ लिया। बेनेट की मैरून कलर की एक तस्वीर भी मिली, जो सूटकेस में मिले स्वेटर से मेल खाती थी। इन सबूतों के आधार पर पुलिस ने तय किया कि यह शख़्स बेनेट रेबेलो ही है। रेबेलो का विजिटिंग कार्ड उनके एक फेसबुक पोस्ट पर मिला, जिसके माध्यम से पुलिस उनके घर तक पहुंँच गई, लेकिन वो घर बंद था।

पुलिस ने आगे जाँच की तो पता चला कि वो पिछले 10 दिनों से ग़ायब थे। इसके अलावा, पुलिस को यह भी पता चला कि रेबेला एक गिटार वादक थे और स्थानीय क्लब में गिटार भी बजाते थे।

अपनी जाँच के दौरान मुंबई पुलिस को जल्द ही पता चल गया कि रेबेलो ने रिया नाम की एक लड़की को गोद लिया था, जिसका एक प्रेमी था। पुलिस ने रिया और उसके प्रेमी के साथ लगातार पूछताछ की। पूछताछ के दौरान लड़की ने आरोप लगाया कि रिबेलो ने उनका यौन शोषण किया और उनके प्रेम संबंधों का विरोध किया था।

ख़बर के अनुसार, डीसीपी डिटेक्शन, शाहजी उमाप ने कहा,

“हम अभी इस वीभत्स अपराध की जाँच कर रहे हैं कि यह एक सुनियोजित हत्या थी या नहीं! आरोपित (रिया) को दो साल पहले ही रेबेलो ने गोद लिया था। उसके माता-पिता घाटकोपर स्थित असल्फा में रहते हैं। नाबालिग आरोपित (प्रेमी) असल्फा में उसका पड़ोसी था।”

मुंबई पुलिस को एक सुटकेस तो मिल चुका था, लेकिन बाकी के बैग अभी तक नहीं मिले, जिसकी तलाश में पुलिस जुटी हुई है। फ़िलहाल, पुलिस हत्या के पीछे के कारणों का पता नहीं लगा सकी है। 

वहीं, पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि मृतक के प्राइवेट पार्ट को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त किया गया था। मृतक बेनेट के बारे में पता चला है कि वो वकोला में अकेला रहता था, उन्होंने दो बार शादी की थी लेकिन दोनों ही पत्नियों से उनका तलाक हो गया था।

छेड़छाड़ और गंदी वीडियो बना वायरल करने वाला जमानत पर बाहर आया, आते ही पीड़िता को हंसिये से काटा

17 साल की लड़की को किडनैप कर 2 महीने तक गैंगरेप… फिर जिंदा जला कर त्रिपुरा में मार डाला

आरिफ, शाहनवाज, शरीफ, आबिद ने एसिड से जलाया… क्योंकि पीड़िता ने रेप केस वापस लेने से किया इनकार

‘ऊपर’ से अनुमति के बिना कुछ नहीं, एनकाउंटर का क्रेडिट CM को: तेलंगाना के मंत्री का विवादित बयान

हैदराबाद में महिला वेटनरी डॉक्टर से गैंगरेप के बाद हत्या करने के सभी आरोपितों को तेलंगाना पुलिस ने शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को एनकाउंटर में मार गिराया था। इस एनकाउंटर को लेकर भले ही कई तरह के सवाल खड़े किए जा रहे हों, लेकिन तेलंगाना के मंत्री ने इसे जायज ठहराया है। उन्होंने कहा कि जो कोई भी इस तरह के क्रूर अपराध को अंजाम देता है, उसके दिमाग में अब इस तरह के एनकाउंटर का डर हो सकता है। मंत्री ने कहा कि यह एक तरह का संदेश है। उन्होंने कहा कि अगर आपका आचरण गलत है, तो आप किसी भी अदालती मुकदमे, जेल की सजा या बाद की जमानत का लाभ नहीं उठा सकेंगे, क्योंकि हम ऐसा होने ही नहीं देंगे। इस एनकाउंटर के माध्यम से हम संदेश देना चाहते हैं कि जो कोई भी क्रूर और गलत है, उसका एनकाउंटर होगा।

राज्य के पशुपालन मंत्री तलसानी श्रीनिवास यादव ने द संडे एक्सप्रेस से बात करते हुए पहली बार इस एनकाउंटर में सरकार की कथित भूमिका पर बोला। उन्होंने कहा कि यह एनकाउंटर पूरे देश के लिए संदेश है। आगे उन्होंने कहा कि सरकार पर तत्काल कार्रवाई के लिए दबाव था। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था पर संदेह जाहिर करते हुए कहा कि अगर अदालती प्रक्रिया से न्याय होता तो इसमें काफी लंबा समय लगता। उनका कहना है कि भारतीय न्यायिक प्रक्रिया लंंबे समय तक चलती है।

एनकाउंटर को लेकर उन्होंने कहा, “इसका क्रेडिट मुख्यमंत्री को जाता है।” उन्होंने संडे एक्सप्रेस को बताया कि क्राइम सीन को रिक्रिएट करना और फिर एनकाउंटर करना ‘ऊपर’ से अनुमति के बिना नहीं हुई होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या शीर्ष नेतृत्व की जानकारी के बिना एनकाउंटर हो सकता है, तो उन्होंने कहा कि 100% क्राइम सीन को रिक्रिएट करना ‘ऊपर’ के निर्देश से हुआ। उन्होंने कहा कि तेलंगाना राज्य तत्काल कार्रवाई करने में बहुत तेज है।

आगे यह पूछे जाने पर कि क्या यह कहा जा सकता है कि एनकाउंटर के लिए सीएम की अनुमति थी, उन्होंने कहा, “अनुमति नहीं, लेकिन जब पुलिस को कार्रवाई करनी है, तो हम क्या कर सकते हैं? अनुमति नहीं थी, लेकिन तत्काल कार्रवाई के लिए दबाव था।” बलात्कार के आरोपितों के एनकाउंटर हत्या के बारे में बात करते हुए वह कहते हैं, “मैं बहुत खुश हूँ। पूरे भारत में लोग खुश हैं। मैं इस मंत्रिमंडल का हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस कर रहा हूँ।” उन्होंने कहा कि यह पूरे भारत के लिए एक संदेश है। 

तलसानी श्रीनिवास यादव ने आगे कहा कि 16 दिसंबर को दिल्ली में हुए सामूहिक बलात्कार के सात साल हो चुके हैं। लेकिन आज तक इस मामले में कुछ नहीं हुआ है। यह केस भारत के साथ-साथ पूरे विश्व के लिए एक महत्वपूर्ण मामला था। इससे यह संदेश जाता है कि देश में कोई कानून-व्यवस्था नहीं है। लोग जेल जाते हैं, बाहर आते हैं और फिर से अपराध करने का मौका मिलता है। भारत में यही हालत है। इसलिए इस मामले में यह (एनकाउंटर) पूरे भारत में एक मजबूत संदेश है।

यह पूछे जाने पर कि क्या इस दबाव ने सरकार को मजबूर किया, उन्होंने कहा, “हाँ, हाँ, यह पूरे भारत से महसूस किया गया था। यह घटना सभी के लिए एक झटका थी। तेलंगाना पुलिस बहुत मजबूत है। पूरे भारत में हैदराबाद पुलिस बहुत मजबूत है।” तेलंगाना मंत्री ने बताया कि कैसे बसपा प्रमुख मायावती और दिल्ली सामूहिक बलात्कार पीड़िता निर्भया की माँ ने एनकाउंटर के बाद तेलंगाना सरकार की प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा, “कल, पूरे भारत में यह एकमात्र राष्ट्रीय समाचार था।”

वहीं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित मानवाधिकार समूहों द्वारा उठाई गई चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “ऐसे लोग (कुछ भी) कह सकते हैं। (पीड़ित के) परिवार के बारे में क्या? वे उन्हें क्या बोलेंगे?” यादव ने इस बात पर भी संदेह व्यक्त किया कि अगर न्यायिक प्रक्रिया से चारों आरोपित गुजरे होते तो क्या न्याय मिलता? उन्होंने कहा, “इसका कोई अंत नहीं होगा। भारतीय कानून, भारतीय न्यायिक प्रक्रिया… हमेशा के लिए चलेगी। पूरे भारत के लोग जानते हैं कि भारतीय न्यायपालिका में बहुत देरी होती है, जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहाँ तक कि निर्भया की माँ ने भी इस पर नाराजगी जताई। यही है भारतीय कानून है। अभी इसमें काफी बदलाव की आवश्यकता है। लोगों को इसके बारे में सोचना होगा।”

मारे गए सभी आरोपित: पुलिस ने वहीं किया एनकाउंटर, जहाँ ‘प्रीति रेड्डी’ के साथ किया था जघन्य अपराध

वे सब उसी तरह से जलें, जैसे उन सबने मेरी बेटी को जलाया: डॉ. ‘प्रीति’ रेड्डी की माँ

‘मेरी बेटी की आत्मा को अब शांति मिलेगी’ – ‘प्रीति रेड्डी’ के पिताजी ने कही ‘दिल की बात’

हैदराबाद एनकाउंटर: आरिफ ने पुलिस से छीने थे हथियार, कर्नाटक में भी अपराधों को अंजाम दे चुके थे प्रीति रेड्डी के गुनहगार

‘पुलिस पर हमला’ का मामला दर्ज: ‘प्रीति रेड्डी’ मामले के चारों आरोपित एनकाउंटर के बाद भी कानून के शिकंजे में

CM कमलनाथ के साथ व्यापम घोटाले का मास्टरमाइंड, दिग्विजय सिंह भी कार्यक्रम में मौजूद

मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापम घोटाले का मुख्य आरोपित जगदीश सागर शनिवार (7 दिसंबर) को एक स्कूली कार्यक्रम में मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ बैठा दिखा। इस कार्यक्रम में, कमलनाथ के अलावा उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी और वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भाग लिया था। इस घोटाले के सामने आने के बाद जगदीश सागर को 2013 में मुंबई की एक होटल से इंदौर क्राइम ब्रांच ने गिरफ़्तार किया था।

ख़बर के अनुसार, सूट पहने और काले रंग का सनग्लास पहने हुए जगदीश सागर ने शुरुआत में मीडियाकर्मियों के कैमरों को हटाने की कोशिश की और बाद में कार्यक्रम स्थल से चले गए। उल्लेखनीय रूप से, कॉन्ग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनावों के दौरान व्यापम में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को लेकर पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार पर निशाना साधा था। इसके बाद, सागर को बहुजन समाज पार्टी ने भिंड ज़िले में गोहद विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा था। सागर को व्यापम घोटाले के मास्टरमाइंड के रूप में जाना जाता है और इस मामले में उनकी गिरफ़्तारी भी हुई थी

व्यापम घोटाला मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं में अनियमितता के लिए जाना जाता है। यह घोटाला 2013 में सामने आया था और इस घोटाले ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था के मूल को हिला कर रख दिया था। इसमें राजनेताओं, वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों सहित कई घोटालेबाज़ शामिल थे। इंदौर की क्राइम ब्रांच ने 20 ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ मामला दायर किया था। इन मामलों में परीक्षा देने वाले छात्र की जगह किसी और ने परीक्षा दी थी। इसके अलावा, परीक्षा हॉल में बैठने की व्यवस्था में हेरफेर करना और अधिकारियों को रिश्वत देकर जाली उत्तर पुस्तिकाओं की आपूर्ति करने की व्यवस्था भी इस घोटाले में शामिल था।

जगदीश सागर जो कि एक चिकित्सक भी हैं, उनके ऊपर प्री-मेडिकल टेस्ट में धाँधली करने और सैकड़ों छात्रों को अनुचित साधनों के माध्यम से परीक्षा देने में मदद करने का आरोप लगा हुआ है। अपने चुनावी हलफ़नामे में, उनके ख़िलाफ़ दर्ज आपराधिक मामलों में, सागर ने कई मामलों का उल्लेख किया है, इनमें मध्य प्रदेश प्री मेडिकल टेस्ट (MPMT) घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत प्रवर्तन निदेशालय द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग के दर्ज मामले शामिल हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने पिछले साल जगदीश सागर के ख़िलाफ़ आरोपों की जाँच के बाद खुलासा किया था कि जगदीश सागर ने अवैध रूप से PMT-2012, पूर्व-पीजी परीक्षा-2012, PMT-2013 में गड़बड़ी का सहारा लेकर धन अर्जित किया था। उन्होंने अपनी अवैध कमाई को नियमित रूप से बैंक में जमा किया था और विभिन्न सम्पत्तियों का अधिग्रहण किया था।

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‘अंतिम संस्कार से पहले CM योगी आएँ, तत्काल सख्त कार्रवाई करें, हमें नौकरी दें’ – उन्नाव मामले में परिवार की माँग

उन्नाव में दरिंदगी का शिकार हुई पीड़िता का शव उनके गाँव पहुँच चुका है। कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार की तैयारी की जा रही है। लेकिन अभी पीड़िता का परिवार शव के अंतिम संस्कार को राजी नहीं है। यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मामले की फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई का फैसला किया है लेकिन परिजन अभी संतुष्ट नहीं हैं। पीड़िता के परिजनों ने सीएम योगी को बुलाने की माँग की है।

एसपी और डीएम सहित कई अधिकारी गाँव में मौजूद हैं। अधिकारी शव के अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं मृतका के परिजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आने के बाद शव की अंत्योष्ठी करने पर अड़े हुए हैं। इस बीच पीड़िता की बहन ने बयान देते हुए माँग की है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसके घर आएँ और तत्काल सख्त कार्रवाई करें। साथ ही बहन ने सरकारी नौकरी देने की भी माँग की है। उन्होंने कहा, “मैं माँग करती हूँ कि मुझे सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए।”

किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए गाँव में भारी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात कर दिया गया है। दमकल की गाड़ियाँ भी मौके पर मौजूद हैं। वहीं, गाँव में पुलिस-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सुबह से ही डेरा डाले हुए हैं। उल्लेखनीय है कि उन्नाव में पीड़िता को गुरुवार (दिसंबर 5, 2019) की सुबह केरोसिन तेल डालकर आग लगा दी गई थी। बता दें कि पीड़िता को जलाने वाले आरोपित वही लोग हैं, जिन्होंने उनका बलात्कार किया था। आरोपितों से बचने के लिए पीड़िता 1 किलोमीटर तक जलते हुए भी बदहवास अवस्था में भागती रहीं। यहाँ तक कि उसने 112 नंबर पर पुलिस को भी कॉल किया था। जब पुलिस मौके पर पहुँची, तब तक वह 90 प्रतिशत जल चुकी थीं।

पीड़िता के परिवार का कहना है कि वो अब पीड़िता के पार्थिव शरीर को जलाएँगे नहीं बल्कि दफनाएँगे। उनका कहना है कि पहले से ही दरिंदों द्वारा आग लगा कर जला दी जा चुकी पीड़िता के शरीर में जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है, इसीलिए उनके शव को दफनाया जाएगा। बलात्कार पीड़िता के भाई ने बताया कि उनकी बहन 90% जल चुकी है, ऐसे में अंतिम क्रियाकर्म हेतु जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है।

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, बालिका की मौत अत्यंत दुखद है। उन्होंने पीड़िता के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सभी अपराधी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उन्हें फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाकर कड़ी सजा दिलाई जाएगी।

उन्नाव रेप पीड़िता के ऊपर केरोसिन तेल डालकर जिंदा जलाकर मारने वाले हैवानों के चेहरे आए सामने

मैं अपनी बहन को दफनाऊँगा क्योंकि जलाने के लिए कुछ बचा ही नहीं है: उन्नाव पीड़िता का भाई

‘हैदराबाद के जैसा दौड़ा-दौड़ाकर गोली मारी जाए…’ – उन्नाव में जला कर मार दी गई बेटी के पिता का छलका दर्द

समाज एनकाउंटर पर जश्न मनाता है, तो उसका कारण है: उन्नाव की बेटी भी कल मर गई

आरिफ, शाहनवाज, शरीफ, आबिद ने एसिड से जलाया… क्योंकि पीड़िता ने रेप केस वापस लेने से किया इनकार

देश में महिलाओं के खिलाफ बर्बरता कम होने का नाम नहीं ले रही है। पहले हैदराबाद में महिला के साथ गैंगरेप के बाद उसे जिंदा जला दिया गया, उसके बाद उन्नाव रेप पीड़िता को कोर्ट जाते समय जिंदा जला दिया गया, जिसके कुछ समय बाद महिला ने अस्पताल में दम तोड़ दिया। इन दोनों घटनाओं के बाद देश भर में लोगों का गुस्सा अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब मेरठ में भी रेप पीड़िता पर तेजाब फेंकने का मामला सामने आया है।

पुलिस के अनुसार 30 वर्षीय महिला ने रेप का मामला कोर्ट से वापस लेने से इनकार कर दिया तो चारों आरोपितों ने बुुधवार (दिसंबर 4, 2019) को महिला पर तेजाब फेंक दिया। जानकारी के अनुसार महिला 30 फीसदी जल गई है और उसका मेरठ के अस्पताल में इलाज चल रहा है। शाहपुर स्टेशन के सर्किल ऑफिसर गिरिजा शंकर त्रिपाठी ने बताया कि बुधवार रात को चारों आरोपित महिला के घर में जबरन घुस गए और उस पर तेजाब फेंक दिया, क्योंकि महिला ने आरोपितों के खिलाफ रेप का मामला वापस लेने से इनकार कर दिया।

गिरजा शंकर त्रिपाठी ने बताया कि जिन चार लोगों ने महिला पर तेजाब फेंका है, उनकी पहचान कर ली गई है। इन आरोपितों के नाम आरिफ, शाहनवाज, शरीफ और आबिद है। चारों कसेरवा गाँव के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि चारों आरोपित फिलहाल फरार हैं, मगर जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। 

वहीं जब पुलिस से पूछा गया कि आखिर क्यों महिला ने पुलिस से शिकायत की बजाए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो विभाग के सूत्र ने बताया कि महिला ने पहले पुलिस से इस मामले की शिकायत की थी। लेकिन जाँच के दौरान किसी भी तरह का सबूत नहीं मिलने की वजह से पुलिस ने केस बंद कर दिया था।

सर्किल ऑफिसर गिरिजा शंकर त्रिपाठी का कहना है कि एसिड अटैक मामले में आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 326ए के तहत मामला दर्ज कर लिया है। बता दें कि आईपीसी की धारा 326ए के तहत दोषी को 10 साल की सजा का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा आरोपितों के खिलाफ जिन अलग-अलग धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है, उसमें धारा 452, धारा 504 और धारा 506 शामिल हैं।

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Breaking: दिल्ली में आग से 43 की मौत, 50+ गंभीर रूप से घायल – अनाज मंडी में हुआ यह हादसा

राजधानी दिल्ली के रानी झाँसी रोड पर रविवार (दिसंबर 8, 2019) सुबह अनाज मंडी में भीषण आग लग गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। आग इतनी भयानक थी कि आग पर काबू पाने के लिए दमकल की 27 गाड़ियाँ पहुँची। हालाँकि देखते ही देखते आग बढ़ती ही चली गई और ताजा जानकारी मिलने तक आग में झुलसने से 43 लोगों की मौत की खबर है। दिल्ली पुलिस ने इसकी जानकारी दी है।

दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर अतुल गर्ग ने कहा कि अब तक 50 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है, जिनमें से अधिकतर धुएँ के कारण प्रभावित हुए हैं।

दरअसल घटना सुबह 5 बजे की है। मंडी में एक तीन मंजिला बेकरी है। बेकरी की ऊपरी मंजिल पर आग लगी थी। जिसके बाद आग ने पूरी इमारत को ही अपनी चपेट में ले लिया। आग के चलते इलाके में चारों तरफ धुआँ ही धुआँ हो गया। वहीं इलाके के काफी कन्जेस्टेड होने के चलते भी आग ज्यादा फैली। 43 की मौत के पहले जो सूचना आई थी, उसमें 35 लोगों की मौत के साथ ही कई अन्य गंभीर रूप से घायल की खबर थी।

डेप्युटी चीफ फायर ऑफिसर सुनील चौधरी ने मीडियाकर्मियों को बताया कि आग बुझा दी गई है। राहतकार्य जारी है। ऑपरेशन में दमकल के 27 वाहन लगे हुए हैं। घटनास्थल पर बड़ी संख्या में दमकलकर्मी मौजूद हैं और फँसे हुए लोगों को निकालने में लगे हुए हैं। मकान की खिड़कियों से काला धुआँ निकल रहा है जिससे जाहिर हो रहा है कि अंदर भीषण आग लगी थी। फिलहाल आग लगने की वजह का पता नहीं चल पाया है।

Note: यह डेवलपिंग स्टोरी है। जैसे-जैसे सूचना आती जाएगी, हम इस खबर को अपडेट करते रहेंगे।

17 साल की लड़की को किडनैप कर 2 महीने तक गैंगरेप… फिर जिंदा जला कर त्रिपुरा में मार डाला

उत्तर प्रदेश के उन्नाव में रेप पीड़िता को जलाकर मार डालने की घटना के बाद त्रिपुरा में भी 17 साल की लड़की के साथ रेप के बाद जला देने की खबर सामने आई है। आरोपित के पड़ोसियों ने पीड़िता को अस्पताल पहुँचाया। जहाँ पीड़िता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। जानकारी के मुताबिक शुक्रवार (दिसंबर 6, 2019) को पीड़िता को दक्षिण त्रिपुरा के शांतिर बाजार में उसके ब्वॉयफ्रेंड और और उसकी माँ ने आग के हवाले कर दिया। इस कारण से पीड़िता 90% जल गई थी।

पीड़िता की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल में भीड़ जमा हो गई और आरोपित युवक और उसकी माँ पर हमला कर दिया। त्रिपुरा पुलिस ने शनिवार (दिसंबर 7, 2019) को नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार करने और परिजनों के साथ मिलकर जलाकर उसकी हत्या करने के आरोप में पीड़िता के ब्वॉयफ्रेंड अजय रूद्रपॉल को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने कहा कि मुख्य आरोपित अजय रुद्रपॉल ने दो महीने पहले लड़की से शादी करने का वादा किया और उसे दक्षिण त्रिपुरा के शांतिर बाजार इलाके में अपने घर ले गया। पुलिस ने बताया कि अजय ने यहाँ पीड़िता को फिरौती के लिए बंदी बनाकर रखा था और पिछले दो महीने से उसके साथ रेप कर रहा था। पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि अजय और उसके परिवार के सदस्यों ने पिछले दो महीनों में लड़की को प्रताड़ित किया और उन्होंने उसे शुक्रवार शाम को आग लगा दी।

पीड़ित लड़की के परिवार ने आरोप लगाया कि अजय रुद्रपॉल ने पीड़िता की रिहाई के लिए 50,000 रुपए की माँग की थी, लेकिन वे शुक्रवार को केवल 17,000 रुपए ही दे पाए। पुलिस ने दावा किया कि इससे अजय गुस्से में आ गया और नाबालिग लड़की को जला दिया। दक्षिण त्रिपुरा की एसपी जल सिंह मीणा ने कहा कि मामले के मुख्य आरोपित अजय को अस्पताल में गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे शांति बाजार पुलिस स्टेशन लाया गया। आगे की जाँच की जा रही है।

पुलिस ने कहा कि पीड़ित लड़की आरोपित के साथ सोशल मीडिया के जरिए संपर्क में आई थी। इसके बाद आरोपित ने लड़की के घर जाकर शादी के लिए प्रपोज किया। उन्होंने बताया कि दिवाली के ठीक बाद लड़की आरोपित के साथ रहने लगी थी। पुलिस ने दावा किया कि उसके बाद आरोपितों ने उसे फिरौती के लिए किडनैप कर कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद आरोपित और उसके दोस्तों द्वारा पीड़ित नाबालिग के साथ गैंगरेप किया गया।

पीड़ित की माँ का कहना है कि उन्होंने लड़की के लापता होने के तुरंत बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। जब आरोपितों ने दूसरी बार पैसे माँगे, तो उन्होंने फिर से पुलिस से मदद माँगी, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। पीड़िता की माँ ने आरोप लगाया, “शुक्रवार की रात हमने चंद्रपुर आईएसबीटी में अजय की माँ को 17,000 रुपए दिए, लेकिन वह खुश नहीं थी। उन्होंने हमें चेतावनी दी कि अगर हम लड़की को वापस लेना चाहते हैं तो हमें पूरी रकम का भुगतान करना होगा। इस बीच, हमने उनके घर का पता जाना और आज उन तक पहुँचने की योजना बनाई थी, लेकिन आज सुबह हमें सूचित किया गया कि उसे आग लगा दी गई और फिर अस्पताल भेज दिया गया।”

लड़की की माँ ने आगे कहा, “हमने तुरंत पुलिस को मामले की सूचना दी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। जब हम उससे अस्पताल में मिले, तो मेरी बेटी की हालत बेहद गंभीर थी। उसने हमें बताया कि पिछले दो महीनों से उसके साथ बार-बार सामूहिक बलात्कार किया गया था और फिरौती के पैसे न देने के कारण उसे लगातार प्रताड़ित किया गया। और जब अजय को पता चला कि केवल 17,000 ही दिए गए, तो वह उग्र हो गया और रात में उसने उसे आग लगा दी।”

पीड़िता का हवाला देते हुए उसकी माँ ने मीडिया को बताया कि अजय बेंगलुरु में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता है और उनकी बेटी से मिलने के लिए हमारे घर आया था। लड़की की माँ ने मीडिया को बताया, “जब तक मेरी बेटी लापता नहीं हुई, तब तक सब कुछ ठीक था। पहले दो दिनों के बाद अजय और उसकी माँ ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। कुछ दिनों के बाद अजय और उसके दोस्तों ने उसका बलात्कार करना शुरू कर दिया। उसे ठीक से खाना भी नहीं दिया गया और उससे लगातार कहा जाता था कि अगर फिरौती की पूरी रकम नहीं दी गई तो उसे मार दिया जाएगा।”

हैदराबाद एनकाउंटर: आरोपित की पत्‍नी ने पति का शव दफनाने से किया इनकार, रख दी ये बड़ी माँग

छेड़छाड़ और गंदी वीडियो बना वायरल करने वाला जमानत पर बाहर आया, आते ही पीड़िता को हंसिये से काटा

‘पुलिस पर हमला’ का मामला दर्ज: ‘प्रीति रेड्डी’ मामले के चारों आरोपित एनकाउंटर के बाद भी कानून के शिकंजे में

समाज एनकाउंटर पर जश्न मनाता है, तो उसका कारण है: उन्नाव की बेटी भी कल मर गई

हैदराबाद एनकाउंटर की जाँच शुरू: NHRC की टीम पहुँची शादनगर, केंद्र ने KCR सरकार से माँगी है विस्तृत रिपोर्ट

हैदराबाद में पशु चिकित्सक डॉ. ‘प्रीति’ (बदला हुआ नाम) रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के आरोपितों के कथित एनकाउंटर की जाँच करने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की टीम शादनगर पहुँच गई है। हैदराबाद के पास स्थित शादनगर डॉ. प्रीति की गैंगरेप के बाद हत्या, और उनके हत्यारोपितों चेन्नाकेशवुलु, जोल्लू नवीन, जोल्लू शिवा, और मो. आरिफ़ के कथित एनकाउंटर, दोनों ही वारदातों का घटनास्थल है।

शादनगर पुलिस थाने में इस घटना की तहरीर स्थानीय एसीपी ने दर्ज की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और हत्या के चारों आरोपित शुक्रवार को पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। इस मामले में तहरीर दर्ज की गई है। शादनगर के सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) ने शिकायत दर्ज की है। शादनगर पुलिस स्टेशन में भी कंप्लेन दर्ज की गई है। हैदराबाद एनकाउंटर मामले की जाँच शुरू हो गई है। बताया जा रहा है कि एनएचआरसी की टीम ने महबूबनगर के उस सरकारी अस्पताल का भी दौरा किया, जहाँ चारों आरोपितों के शव पोस्टमॉर्टम के बाद रखे गए हैं। इसके अलावा केंद्र सरकार ने राज्य शासन से भी हिरासत में मुठभेड़ का मामला देखते हुए विस्तृत रिपोर्ट की माँग की है।

गौरतलब है कि कल (6 दिसंबर, 2019 को) सुबह-सुबह साइबराबाद पुलिस ने दावा किया था कि डॉ. ‘रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के चारों आरोपित पुलिस के साथ एनकाउंटर में मारे गए। अपनी ही हिरासत में पहले से मौजूद अभियुक्तों के एनकाउंटर के बारे में साइबराबाद के पुलिस कमिश्नर वीसी सज्जनर ने कहा कि मूल वारदात के घटनाक्रम को सूक्ष्मता से समझने के लिए पुलिस चारों आरोपितों को तड़के सुबह घटनास्थल पर लेकर गई थी। वहॉं उन्होंने पहले पुलिस पर लाठियों से हमला कर दिया और इसके बाद पुलिस के हथियार छीन उन पर फायरिंग की। पुलिस को आत्मरक्षा के लिए जवाबी कार्रवाई में उनको गोली मारनी पड़ी।

जहाँ देश की अधिकांश जनता ने इस घटना पर खुशी जाहिर की है, वहीं कॉन्ग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर समेत कुछ लोगों ने इस मुठभेड़ के तरीके पर सवाल खड़े किए थे। इसके बीच एनएचआरसी ने इस घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए एनकाउंटर की जाँच की घोषणा की थी।

इसके पहले इन चारों के ख़िलाफ़ त्वरित और सख्त कार्रवाई करने के लिए जनाक्रोश उबल पड़ा था। न केवल कई स्थानीय अदालतों की बार काउंसिलों और एसोसिएशनों ने इनकी पैरवी न करने की हिदायत और अपील अपने सदस्यों से की थी, बल्कि इस भयावह हत्याकाण्ड से बिफ़री जनता इन्हें खुद मौत के घाट उतारने के लिए पुलिस थाने के बाहर इकठ्ठा हो गई थी, जिसके बाद पुलिस ने आक्रोशित भीड़ को भगाने के लिए लाठीचार्ज भी किया था।

आज चेन्नाकेशवुलु की विधवा ने अपने पति के अंतिम संस्कार से इंकार कर दिया है। कथित तौर पर पुलिस पर हमला करने और हिरासत से फ़रार होने की कोशिश में मारे गए अपने पति को दफ़नाने से मना करते हुए पत्नी ने माँग की है कि जैसे पहले उनके पति और अन्य आरोपितों को पुलिस ने गोली मारी, वैसे ही जेलों में बंद सभी आरोपितों को गोली मारी जाए। “जेलों में ऐसे कितने ही बंद हैं जिन्होंने गलतियाँ की हैं। उन्हें भी उसी तरह गोली मारी जानी चाहिए जैसे इन्हें (डॉ. ‘प्रीति’ रेड्डी के गैंगरेप और हत्या के आरोपितों) को मारी गई। हम तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। हम वह तभी करेंगे जब पहले ऐसा कर दिया जाए।” गर्भवती पत्नी कुछ अन्य के साथ नारायणपेट जिले स्थित अपने गाँव में इस माँग को लेकर धरने पर बैठी हुईं हैं। उनका आरोप है कि उनके पति के साथ अन्याय हुआ है।