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दुकानों में मुर्गा-बकरा काटते दिखे तो खैर नहीं: अवैध बूचड़खानों पर योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला

योगी सरकार ने प्रदेश में बीमारी और संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रयास करते हुए बूचड़खानों पर कड़ा रुख अपनाया है। यूपी में योगी अदित्यनाथ की सरकार ने बूचड़खाने को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। प्रदेश सरकार ने दिवाली के दौरान इस सम्बन्ध में कठोर नीति अपनाते हुए यह फैसला किया है कि यदि इस नियम के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने में गाज सीधे पुलिस और प्रशासन पर गिरेगी।

बता दें कि इस नीति के लिए सभी अधिकारियों को आदेश दे दिए गए हैं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, डीएम, आईजी और डीआईजी अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के ज़रिए इस सम्बन्ध में बात की। बैठक पर ज्यादा जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने बताया कि अवैध बूचड़खानों को लेकर योगी बेहद सख्त हैं और कोताही बरतने वाले डीएम और एसपी दोनों के खिलाफ सीधे कार्रवाई की जाएगी।

सीएम के मुताबिक प्रदेश में अवैध बूचड़खाने पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं बावजूद इसके कई जिलों में बूचड़खानों की शिकायत मिल रही है। योगी ने कहा कि बूचड़खाने का मतलब सिर्फ स्लॉटर-हॉउस न समझा जाए बल्कि बाज़ारों में सड़क किनारे खुले-आम कट रहे जानवर वाली दुकानें भी इसमें शामिल हैं। योगी का कहना है कि इनपर भी प्रतिबन्ध लगाया जाए क्योंकि इनसे संक्रमण फैलता है, जिससे लोग बीमारियों के शिकार होते हैं।

बता दें की यह कोई पहला मौका नहीं है जब प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने बूचड़खानों को लेकर ऐसा कोई आदेश दिया हो। 2017 में प्रचंड बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में आने के बाद ही योगी सरकार ने बूचड़खानों को लेकर सख्ती दिखाई थी। उस वक़्त दावा किया गया था कि अवैध स्लॉटर-हॉउस किसी मानदंड को नहीं मानते हैं जिसके कारण उनके यहाँ काटे जाने वाले जानवर और उनका मीट बीमारी के मुख्य कारणों में से एक है।

बता दें कि उस वक़्त रिटेल में मीट बेचने वाले दुकानदारों को भी इस बात के निर्देश दिए गए थे कि वह लाइसेंसी बूचड़खाने से ही मीट खरीदकर बेचें। साथ ही दुकान पर पशु को न काटें। ऐसे दुकानों को या तो पर्दे या फिर चटाई से ढक कर मीट बेचने का आदेश दिया गया था। इस नीति का पालन उस वक़्त पूरी सख्ती के साथ कराया गया था, मगर एक बार फिर से इस तरह की दुकानें नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर खुलना शुरू हो गई हैं यही वजह है कि योगी सरकार ने इस पर सख्ती दिखाई है।

रामलीला ‘बच्चों की ब्लू फिल्म’, खतरनाक और मुस्लिमों को डराने वाली: प्रकाश राज, Video वायरल

अभिनेता से नेता बने प्रकाश राज का 2018 का एक वीडियो सोशल मीडिया में घूम रहा है, जिसमें उन्होंने हिन्दुओं में काफ़ी लोकप्रिय रामलीला की तुलना ‘चाइल्ड पोर्न’ से की है।

फरवरी 2018 में न्यूज़ 18 के एक इवेंट में बोलते हुए अल्ट्रा-लेफ़्ट विंग की विचारधारा वाले प्रकाश राज ने उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर रामलीला के प्रचार-प्रसार के लिए हमला बोला था। प्रकाश राज ने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश के सीएम का धार्मिक उत्सवों में शामिल होना महज़ दिखावा है और इससे अल्पसंख्यकों में डर का माहौल पैदा होता है। उन्होंने कहा था कि क्या यूपी के मुख्यमंत्री ‘विकास’ की उम्मीद दीवार पर रंग बदल देने से कर रहे हैं।

प्रकाश राज ने आगे यह भी कहा कि उन्हें यह काफी मज़ाकिया लगता है जब यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ‘रथोत्सव’ में भागीदारी करते हैं। उन्होंने आगे बढ़कर यह भी कह दिया कि योगी आदित्यनाथ का राज्य का मुख्यमंत्री होने के नाते ऐसी चीज़ें करना सही नहीं है।

इसके बाद उन्होंने रामलीला इवेंट पर हैरत में डाल देने वाला कमेंट किया जहाँ प्रकाश राज ने दावा किया कि वे रामलीला जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस देश में नहीं होने देना चाहते। इन कार्यक्रमों को तुष्टिकरण कहते हुए प्रकाश राज ने वह निंदनीय कमेंट किया जिसमें उन्होंने इसकी तुलना ‘child porn’ से की।

एंकर ने पूछा कि क्यों उत्तर प्रदेश सरकार को ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं कराने चाहिए क्योंकि ये तो लोगों की इच्छा का प्रतिबिम्ब है और सवाल किया कि क्यों प्रकाश राज को इस इवेंट से दिक्कत है। झुँझलाए हुए प्रकाश राज ने कहा, “आप तब नहीं पूछेंगे जब बच्चे ‘child porn’ देखते हैं? आप उसे छोड़ देंगे? यह समाज के लिए हानिकारक है। रामलीला जैसे इवेंट्स समाज के लिए हानिकारक हैं। यह तुष्टिकरण है। यह अल्पसंख्यकों में डर फैला रहा है। उन्होंने (यूपी सरकार ने) जो किया उससे हम में डर बैठ गया। मैं इससे सहज नहीं हूँ।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरी समझ के अनुसार क्या उनका मंदिर जाना हमारी संस्कृति है। पूरी जनता के सामने आप नाटक क्यों कर रहे हैं?”

जब उनसे पूछा गया कि वे कैसे क्या भारतीय संस्कृति है और क्या नहीं इसका सर्टिफिकेट बाँट रहे हैं, प्रकाश राज ने कहा कि उन्हें यह बात स्पष्ट है कि क्या संस्कृति है और क्या नहीं। “राम, लक्ष्मण और सीता को हेलीकॉप्टर से लाना और नीचे उतारना मेरी संस्कृति नहीं है।”

अल्ट्रा-लेफ़्ट विंग की विचारधारा वाले प्रकाश राज, जिन्हें अक्सर हिन्दुओं की आस्था के प्रति ज़हर उगलते और अपने वाममपंथी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए झूठ फैलाते देखा जाता है, को 2019 के आम चुनावों में अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा था। उन्होंने उस हार को अपने “मुँह पर करारा थप्पड़” कहा था।

बीते समय में प्रकाश राज ने एक और विवाद को हवा दी थी जब उन्होंने हिन्दू धर्म के ख़िलाफ़ बदज़बानी करते हुए और सबरीमाला की प्राचीन मान्यता को घसीटते हुए कहा था कि उनके पास “कोई इज्जत नहीं है” उस धर्म के लिए जो “औरतों को प्रार्थना करने से रोकता है”। तथ्यों के लिए प्रकाश राज के पास कोई सम्मान नहीं है और उन्होंने जानबूझकर हिन्दू धर्म का अपमान किया था हिन्दुओं से अपनी नफरत को आगे बढ़ाने के लिए।

पश्चिम बंगाल के बीरभूम में TMC गुंडों ने महिला BJP कार्यकर्ता की गोली मारकर की हत्या, 6 घायल

पश्चिम बंगाल में खूनी राजनीतिक हिंसा का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। टीएमसी के गुंडों ने एक और भाजपा कार्यकर्ता की हत्या कर दी है। रिपोर्ट के अनुसार बंगाल के बीरभूम के नानूर इलाके में 47 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता शंकरी बागड़ी की सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) दोपहर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने गोली मारकर हत्या कर दी। जानकारी के मुताबिक शंकरी बागड़ी बीरभूम जिले के नानूर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हाटसालंडी गाँव की एक भाजपा कार्यकर्ता थीं। दो समूहों के बीच झड़प में टीएमसी के गुंडों द्वारा उसे गोली मार दी गई थी।

कथित तौर पर बागड़ी के बेटे उदय की पड़ोसी आदित्य बागड़ी के साथ लड़ाई हुई थी। आदित्य उस इलाके में टीएमसी समर्थक है। बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन दर्जनों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बंदूकें और हथियार के साथ शंकरी बागड़ी के घर को घेर लिया था। वहाँ के बीजेपी के समर्थकों का कहना है कि गाँव में भाजपा की बढ़ती लोकप्रियता से टीएमसी गुंडे काफी चिढ़े हुए हैं। इलाके में टीएमसी कार्यकर्ताओं और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई, तो टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर गोलीबारी शुरू कर दी। इस दौरान शंकरी बागड़ी को गोली जा लगी। झड़प में 6 अन्य भाजपा समर्थक भी घायल हो गए हैं।

मीडिया रिपोर्टों का कहना है कि टीएमसी के गुंडे उदय बागड़ी को मारना चाहते थे, मगर गोली शंकरी बागड़ी को लग गई। बता दें कि उदय भी बीजेपी कार्यकर्ता हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक उदय ने कहा कि इलाके के टीएमसी गुंडे उससे काफी गुस्सा हैं, क्योंकि वो टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गया। उदय का कहना है कि टीएमसी के गुंडे ने उस पर एक शादीशुदा महिला के साथ अवैध संबंध की झूठी कहानी बनाकर निशाना बनाया।

झड़प के दौरान जैसे ही टीएमसी कार्यकर्ताओं ने उदय को मारने के लिए गोली चलाई कि बीच में शंकरी बागड़ी आ गई। गोली लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। हालाँकि पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। 

टीएमसी ने कथित तौर पर कहा है कि बागड़ी भाजपा से जुड़ी हुई नहीं थीं। लेकिन बीरभूम जिला भाजपा अध्यक्ष श्यामपद मंडल ने कहा है कि बागड़ी स्थानीय भाजपा कार्यालय से जुड़ी थीं। टीएमसी जिला इकाई के उपाध्यक्ष अभिजीत सिंघा ने दावा किया है कि उदय के अवैध संबंधों को लेकर ग्रामीणों के दो समूहों के बीच झड़पें हुईं। इसमें कोई राजनीतिक एंगल नहीं है।

उल्लेखनीय है कि टीएमसी शासित राज्य पश्चिम बंगाल में भाजपा धीरे-धीरे पैर जमाने में सफल रही है। इसको लेकर टीएमसी में काफी आक्रोश है। इसी का नतीजा है कि पश्चिम बंगाल में लगातार बड़े पैमाने पर राजनीतिक हिंसा हो रही है। बता दें कि टीएमसी के गुंडों द्वारा अब तक दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है।

दुकानदार ने पॉलीथिन में नहीं दिया सामान तो फैजान ने मुँह पर ईंट मारकर किया लहूलुहान, मौत

उत्तर पूर्वी दिल्ली के दयालपुर में प्रतिबंधित पॉलीथिन की थैली नहीं देने पर ग्राहक फैजान ने दुकान के कर्मचारी खलील अहमद पर ईंट से हमला कर दिया। जख्मी हालत में कर्मचारी खलील अहमद को जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया। पुलिस आरोपित फैजान के खिलाफ केस दर्ज कर मामले की जाँच कर रही है।

डीसीपी वेद प्रकाश सूर्य ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि फैजान फरार है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 304 के तहत एफआईआर दर्ज कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि मृतक खलील अहमद परिवार के साथ दयालपुर के नेहरू विहार गली नंबर-5 में रहते थे। परिवार में पत्नी, बेटा कासिम समेत अन्य सदस्य हैं। उसी गली में खलील के एक रिश्तेदार की बेकरी की दुकान है। खलील अहमद अपने बेटे कासिम के साथ उस बेकरी की दुकान पर काम करते थे।

जिस समय ये घटना घटी, खलील का बेटा कासिम अपने पिता के साथ दुकान पर ही मौजूद था। कासिम ने बताया, “15 अक्टूबर की सुबह लगभग 10 बजे फैजान दुकान पर क्रिस्पी रस्क लेने के लिए आया। उसने उसे पॉॉलीथिन में पैक करने के लिए कहा, मगर पॉलीथिन बैन होने की वजह से हमारे बेकरी में पॉलीथिन नहीं था।”

खलील के परिवार के एक अन्य सदस्य ने बताया कि खलील और कासिम ने पॉलीथिन बैग की जगह कागज के बैग में रस्क को पैक करके दिया। उन्होंने कहा कि जब खलील ने बेकरी में पॉलीथिन न होने की बात कही तो इस पर फैजान गाली गलौच करने लगा। कासिम ने कहा कि जब उन्होंने फैजान को पैसे वापस करते हुए जाने को कहा तो उसने गाली-गलौज शुरू कर दी।

कासिम का कहना है कि फैजान ने दुकान की काउंटर पर रखे सारे रस्क फेंक दिए। वह गाली गलौच करते हुए दुकान के नीचे आया। इस दौरान कासिम और उसके पिता भी दुकान के बाहर आ गए। तभी फैजान ने उनका रास्ता रोका और वहाँ नीचे पड़ी ईंट उठाकर जोर से खलील के मुँह पर दे मारी। खलील लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गए। पुलिस ने कहा कि एक राहगीर ने पीसीआर कॉल की और खलील को अस्पताल पहुँचाया। जहाँ रविवार को पीड़ित की मौत हो गई।

कमलेश तिवारी हत्याकांड: फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस, हत्यारों के लिए माँगेंगे मृत्युदंड – मंत्री, योगी सरकार

योगी सरकार ने कमलेश तिवारी की हत्या का मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने का फैसला किया है। परिजनों से मिलने सीतापुर पहुँचे उत्तर प्रदेश के कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के लिए कार्यवाही करेगी। ब्रजेश पाठक ने कहा है कि सरकार कमलेश तिवारी के परिवार के साथ खड़ी है। वो उनकी सभी माँगों को पूरा करेगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही हत्यारों को पकड़ लिया जाएगा और साथ ही फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए सरकार हत्यारों के लिए मृत्युदंड की भी माँग करेगी।

बता दें कि इससे पहले रविवार (अक्टूबर 20, 2019) को लखनऊ में कमलेश तिवारी के परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके आवास पर मुलाकात की थी। सीएम ने भी पीड़ित परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया था। सीएम के साथ मुलाकात के दौरान कमलेश तिवारी की पत्नी किरण तिवारी ने भी अपने पति के हत्यारों के लिए मौत की सजा की माँग की थी। उन्होंने कहा था, “हमने हत्यारों के लिए फाँसी की सजा की माँग की है, उन्होंने भरोसा दिया कि उन्हें सजा दी जाएगी।”

यूपी पुलिस ने सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) को हत्या में शामिल दो संदिग्ध हत्यारों अशफाक और मोइनुद्दीन की गिरफ्तारी के लिए 2.5 लाख रुपए का इनाम रखा है। दोनों संदिग्धों, अशफाक और मोइनुद्दीन, की तस्वीरें और उनके स्केच भी जारी किए हैं। बता दें कि कि हिंदू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की दिन दहाड़े 18 अक्टूबर को लखनऊ में नृशंस हत्या की गई थी। हिरासत में लिए गए आरोपितों से पूछताछ की जा रही है।

उन्होंने कहा कि कमलेश की हत्या मामले में सरकार काफी गंभीर है। सरकार हत्यारों को ऐसी सजा दिलाएगी जो मिसाल बन जाएगी। सरकार कमलेश तिवारी के परिवार को अपना परिवार मानकर उन्हें हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने के लिए संकल्पबद्ध है। कमलेश तिवारी के परिवार से कानून मंत्री के मुलाकात के दौरान सेवता विधायक ज्ञान तिवारी, जिलाध्यक्ष अजय गुप्त, आशा मौर्य, अम्बरीश गुप्त, मोहन प्रसाद, चंद्रभूषण शुक्ल व राम प्रवेश प्रजापति आदि भी मौजूद थे।

J&K और लद्दाख के सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा सातवें वेतन आयोग का लाभ

केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार मिलने वाले सभी भत्ते भुगतान के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। जिसका लाभ कर्मचारियों को 31 अक्टूबर से मिलेगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा इस संबंध में मंगलवार (अक्टूबर 22, 2019) को निर्देश जारी हुआ है। गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में संबधित सिफारिश को मंजूरी दी। जिसके बाद कर्मचारियों को यह भुगतान 31 अक्टूबर 2019 से मिलेगा। इस फैसले से 4 लाख 50 हजार कर्मचारियों को फायदा होगा और सरकार पर इसका 4800 करोड़ रुपए का खर्च आएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस फैसले के साथ ही महंगाई भत्ते में 5 फीसद की बढ़ौतरी के बाद कर्मचारियों को मिलने वाला ट्रांसपोर्ट एलॉउंस बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा इस फैसले से सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 810 रुपए से लेकर 4,320 रुपए तक की बढ़ौतरी होगी।

गौरतलब है केंद्र सरकार द्वारा 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 निष्प्रभावी किए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर दिया गया था और जम्मू-कश्मीर को राज्य की जगह केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। हालाँकि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद विपक्षों ने उच्च सदन में बड़े पैमाने पर हंगामा किया गया था। लेकिन मोदी सरकार ने जनता को आश्वासन दिया था कि ये फैसला उनके हित में है। इसके कारण अब जो सुविधाएँ देश के अन्य राज्यों के नागरिकों को मिलेंगी वो जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को भी मिलेंगी।

नरसिंहानंद सरस्वती के ख़िलाफ़ ‘हेट स्पीच’ का मामला दर्ज, कमेलश तिवारी की हत्या के बाद दिया था भाषण

डासना मंदिर के महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश के सीतापुर में ‘घृणा फैलाने वाला भड़काऊ बयान देने’ का मामला दर्ज किया गया है। कमलेश तिवारी की हत्या के बाद महंत सरस्वती ने उनके परिजनों से मुलाक़ात की थी। मुलाक़ात के दौरान उन्होंने सार्वजनिक रूप से भाषण दिया था, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो में वह कमलेश तिवारी की माँ के कंधे पर हाथ रख कर भाषण देते दिख रहे हैं। उनके ख़िलाफ़ दर्ज मामले में उनके बयान को ‘मुस्लिम समाज के ख़िलाफ़ घृणा फैलाने वाला’ बताया गया है। बता दें कि कमेलश तिवारी को 18 अक्टूबर को इस्लामी कट्टरपंथियों ने नृशंस हत्या कर दी थी।

सीतापुर स्थित मोहम्मदाबाद पुलिस स्टेशन के एसएचओ अरुण कुमार ने बताया कि सरस्वती और उनके अनुयायियों ने दोपहर के समय कमलेश तिवारी के परिजनों से मुलाक़ात की थी। उनका कहना है कि महंत यति सरस्वती ने इसके बाद जो भाषण दिया, वो काफ़ी भड़काऊ था और सोशल मीडिया पर वायरल भी हो गया। डासना देवी मंदिर के महंत के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 295 ए (किसी धर्म की भावनाओं का अपमान करना), धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के सविचार आशय से शब्द उच्चारित करना) और धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती को डासना मंदिर में आस्था रखने वाले व अन्य लोग काफ़ी श्रद्धा की दृष्टि से देखते हैं। ये मंदिर गाजियाबाद में स्थित है। सितम्बर 2019 में जब यादव और गुज्जर समुदायों के बाच तनाव बढ़ गया था, तब महंत सरस्वती ने आगे आकर दोनों पक्षों को समझाया था। उस संघर्ष को ख़त्म करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इस कारण क्षेत्र के लोग उन्हें आदरभाव से देखते हैं। महंत ख़िलाफ़ एफआईआर होने के बाद उनके कई अनुयायियों ने आक्रोश जताया।

दरअसल, यादवों और गुज्जरों के बीच संघर्ष एक रोड रेज की घटना के बाद चालू हुआ था। उस तनाव के कारण जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही थी, तब महंत सरस्वती ने आगे आकर शांति स्थापित करने के लिए पहल किया। उन्होंने दोनों समुदायों को समझाया था कि वे एक ही माँ के दो हाथ हैं, इसीलिए लड़ना बंद करें। उन्होंने दोनों समुदायों के लोगों को बताया कि कैसे हिन्दुओं की आपसी लड़ाई का फायदा हिंदुत्व-विरोधी ताक़तों को मिलता रहा है।

हिन्दू हितों के लिए संघर्ष करने के लिए महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती को 2015 में सऊदी अरब से धमकी भी मिल चुकी है। एक व्यक्ति ने महंत को जान से मारने की धमकी दी थी। हालाँकि, उन्होंने कहा था कि वे हिन्दुओं के हितों के लिए लड़ाई लड़ते रहेंगे और किसी से डरेंगे नहीं।

कमलेश के साथ UP अध्यक्ष को भी मारने का था प्लान, अशफ़ाक़ ने दिया था राम मंदिर के लिए भीड़ का लालच

जैसा कि हमने पहले भी आपको बताया था, कमलेश तिवारी हत्याकांड में आरोपित अशफ़ाक़ ने रोहित सोलंकी के नाम से फेसबुक आईडी बना कर धोखाधड़ी की थी। उसने रोहित सोलंकी के नाम से कमलेश तिवारी से जान-पहचान बढ़ाई और फिर उन्हें विश्वास में लिया। उसने ‘हिन्दू समाज पार्टी’ के नाम से फेसबुक आईडी बना कर उससे 4000 लोगों को भी जोड़ा। वह हिंदूवादी लोगों को अपने साथ जोड़ता गया और सोशल मीडिया पर ‘जय श्री राम’ के नारे भी लगाता था। ‘हिन्दू समाज पार्टी’ के गुजरात प्रकोष्ठ के अध्यक्ष जैमिन बापू ने एटीएस के समक्ष ये खुलासे किए हैं। अशफ़ाक़ अभी मोईनुद्दीन के साथ फरार है और एसटीएफ लगातार उसका पीछा कर रही है।

अशफ़ाक़ और उसके साथी सिर्फ़ ‘हिन्दू समाज पार्टी’ के संस्थापक कमलेश तिवारी ही नहीं बल्कि संगठन के उत्तर प्रदेश प्रकोष्ठ के अध्यक्ष गौरव गोस्वामी को भी मारने की योजना बना रहे थे। सूरत से लखनऊ जाते समय उन्होंने गोस्वामी को कॉल कर के दफ्तर आने की काफ़ी जिद की थी लेकिन उन्होंने मना कर दिया। गौरव गोस्वामी ने काम ज्यादा होने के कारण इनकार कर दिया था, जिससे उनकी जान बच गई। ख़ुद गोस्वामी ने भी इस बात की पुष्टि की है। उधर जैमिन बापू की पत्नी चाँदनी ने भी बताया है कि अशफ़ाक़ ने लखनऊ जाते समय फोन कर के बताया था कि वो कमलेश तिवारी से मिलने जा रहा है।

अशफ़ाक़ ने जैमिन बापू को बताया था कि वह 20 अक्टूबर को प्रस्तावित अधिवेशन में शामिल होने के बाद ही वहाँ से लौटेगा। अशफ़ाक़ हिन्दू समाज पार्टी के पदाधिकारियों को विश्वास में लेने के लिए कई तरह की बातें किया करता था। वह राम मंदिर निर्माण के लिए भारी भीड़ जुटाने की बात करता था। कमलेश तिवारी अशफ़ाक़ (नकली रोहित सोलंकी) की बातों से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने उसे संगठन के सूरत आईटी सेल से जोड़ दिया था।

उधर अशफ़ाक़ द्वारा की गई धोखाधड़ी की बात सामने आते ही असली रोहित सोलंकी सामने आए, जो वारछा के रहने वाले हैं। उन्होंने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए उनकी आईडी का ग़लत इस्तेमाल किए जाने और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया। रोहित सोलंकी को काफ़ी बाद में पता चला कि उनका मार्केटिंग मैनेजर (एमआर) अशफ़ाक़ ही कमलेश तिवारी का हत्यारा है और उसने उन्हीं की आईडी का इस्तेमाल कर के यह सब किया है। उसने न सिर्फ़ उनके नाम से नकली फेसबुक अकाउंट बनाया बल्कि फ़र्ज़ी आधार कार्ड भी बना लिया था। रोहित की शिकायत के बाद पुलिस इस सम्बन्ध में आगे की कार्रवाई कर रही है।

अशफ़ाक़ ने हिन्दू समाज पार्टी के पदाधिकारियों को रुपए का लालच भी दिया था। उसने कमलेश तिवारी और जैमिन बापू को 50 हज़ार रुपए पार्टी फंड में देने का लालच दिया था। आईटी सेल का लेटर मिलने पर उसने जैमिन बापू को 2 हज़ार रुपए पार्टी फंड में दिए थे लेकिन उन्होंने 50 हज़ार रुपए लेने से इनकार कर दिया था। इससे इस आशंका को बल मिलता है कि हत्यारे रुपए का लालच देकर कमलेश तिवारी को रुपए पहुँचाने के बहाने मारना चाहते थे। लेकिन, जब उसने देखा कि तिवारी और उनके साथी रुपए के लालच में नहीं आ रहे हैं, तब मिठाई देने के बहाने मारने की योजना बनाई गई।

अगर ताज़ा अपडेट्स की बात करें तो कमलेश तिवारी के हत्यारों की लोकेशन बरेली, लखीमपुर, पीलीभीत और फिर शाहजहाँपुर में मिली है। एसटीएफ लगातार उनका पीछा कर रही है। उन्होंने बरेली में एक इनोवा गाड़ी इस्तेमाल की और एक वकील से आत्मसमर्पण को लेकर बात की। उधर नागपुर से भी असीम अली नामक एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है, जो नितिन गडकरी के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव लड़ चुका है। बिजनौर के दो मौलानाओं से पूछताछ की गई है। पुलिस कई लाक़ों के मस्जिदों और मदरसों पर नज़र रख रही है।

2020 के बाद 2 से अधिक बच्चे वालों को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी: असम सरकार ने लिया फैसला

असम सरकार ने बढ़ती जनसंख्या पर लगाम लगाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में अब एक जनवरी 2021 के बाद से दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। सोमवार (अक्टूबर 21, 2019) देर शाम कैबिनेट की हुई बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद असम जनसंपर्क विभाग की ओर से इस फैसले के संबंध में एक बयान भी जारी किया गया है।

मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के जनसंपर्क प्रकोष्ठ के कार्यालय से जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि छोटे परिवार के मानक के अनुसार 1 जनवरी 2021 से दो से अधिक बच्चे वालों को सरकारी नौकरी के लिए योग्य नहीं माना जाएगा। सरकार ने छोटे परिवार को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया है, ताकि माता-पिता अपने बच्चों को सही पोषण युक्त भोजन मुहैया करा सकें और उनके गुणवत्ता युक्त जीवन की व्यवस्था कर सकें।

इस नई नीति के तहत यह शर्त सिर्फ किसी को सरकारी नौकरी देते वक्त ही ध्यान में नहीं रखी जाएगी, बल्कि नौकरी के अंत तक सभी को इस नीति के हिसाब से यह ध्यान रखना होगा कि उनके बच्चों की संख्या दो से अधिक ना हो। बच्चों की संख्या दो से अधिक होने पर सरकारी नौकरी से उस व्यक्ति को निकाला भी जा सकता है।

इसके साथ ही बैठक में भूमिहीन लोगों के लिए भी फैसले लेते हुए नई जमीन नीति घोषित की गई। सरकार ने फैसला किया है कि भूमिहीन किसानों को तीन बीघा कृषि भूमि और एक मकान बनाने के लिए आधा बीघा जमीन मुहैया कराई जाएगी। इस तरह से मिलने वाली जमीन को 15 साल तक नहीं बेचा जा सकता है। इसके अलावा मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य में बस किराए में 25 प्रतिशत की वृद्धि करने का निर्णय लिया गया।

उल्लेखनीय है कि सितंबर 2017 में असम विधानसभा ने ‘असम की जनसंख्या और महिला सशक्तीकरण नीति’ पारित की थी, जिसमें कहा गया था कि दो बच्चों वाले नौकरी के उम्मीदवार ही केवल सरकारी नौकरी के लिए पात्र होंगे और मौजूदा सरकारी कर्मचारी दो बच्चों के परिवार के मानदंडों का सख्ती से पालन करेंगे। 

पटाखे फोड़ना है गैर-इस्लामिक, पटाखों का व्यवसाय करना है हराम: देवबंद से फतवा जारी

उत्तर प्रदेश के देवबंद में दिवाली से कुछ दिन पहले अब्दुल वकील कासमी नामक एक मौलाना ने फतवा जारी कर पटाखे फोड़ना गैर इस्लामिक बताया है और साथ ही पटाखों का व्यवसाय करके मिलने वाले लाभ को हराम करार दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ये मौलाना अब्दुल वकील कासमी इत्तेहाद उलेमा-उल-हिंद के राज्य सचिव हैं। इनका कहना है, “दूसरे क्या कर रहे हैं, ये हमारी चिंता नहीं हैं, लेकिन मुस्लिमों के लिए ये हराम हैं। पटाखे फोड़ने का उल्लेख किसी भी धार्मिक किताब में नहीं हैं। इनमें आग लगाना ऐसा है जैसे अपने पैसों में आग लगाई जा रही हो। ये पैसा शिक्षा जैसी बेहतर चीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।”

खास बात ये है कि ये फतवा दिवाली से कुछ दिन पहले ही आया है। ताकि मुस्लिम हिन्दू त्यौहारों में शिरकत करने से दूर रहें। लेकिन ये जानने वाली बात है कि पटाखे शब-ए-बारात में भी बहुत स्तर पर इस्तेमाल होते हैं।

शब-ए-बारात वो दिन होता है, जब मुस्लिम साल में एक बार अपने खुदा से गुनाहों के लिए माफी माँगते हैं और पूरी रात मिठाई बाँटी जाती है और पटाखे जलाए जाते हैं।

गौरतलब है कि इत्तहाद-अल-हिंद का फतवा जारी करने का अलग ही इतिहास रहा है। अभी हाल ही में इसी संस्थान के उपाध्यक्ष ने नुसरत जहां पर निशाना साधा था, जब उन्होंने हिंदू परिवार में शादी की थी और हिंदू त्यौहारों को भी मनाया था।

नुसरत पर मौलाना का कहना था कि दुर्गा पूजा आदि करना गैर-इस्लामिक है। अगर नुसरत को ये सब करना है तो उन्हें अपना नाम और धर्म बदल लेना चाहिए क्योंकि बतौर मुसलमान वो दुर्गा पूजा आदि में शामिल नहीं हो सकतीं।