भालुओं का गुप्तांग खाता था सेक्स-पावर बढ़ाने के लिए: शिकारी जसरत को STF ने MP में किया गिरफ़्तार

वह भालुओं का शिकार इसलिए करता था ताकि उनके जननांग (पेनिस) को खा सके। उसके मुताबिक इससे उसकी खुद की यौन शक्ति में इजाफ़ा होता था। 30-वर्षीय जसरत की जोरों शोरों से तलाश लगभग 6 साल से जारी थी।

मध्य प्रदेश में वन अधिकारियों को बड़ी सफ़लता हाथ लगी है। मध्य प्रदेश की वन्य STF (स्पेशल टास्क फ़ोर्स- वाइल्डलाइफ) को सबसे कुख्यात बाघ शिकारियों में से एक यारलेन उर्फ़ लूज़लेन उर्फ़ जसरत को हिरासत में लेने में कामयाबी हाथ लगी है। जसरत को विलुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल बाघों का बड़ी संख्या में शिकार करने के अलावा एक और अजीब वजह से जाना जाता है- वह भालुओं का शिकार इसलिए करता था ताकि उनके जननांग (पेनिस) को खा सके। उसके मुताबिक इससे उसकी खुद की यौन शक्ति में इजाफ़ा होता था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 30-वर्षीय जसरत की जोरों शोरों से तलाश लगभग 6 साल से जारी थी।

2014 में जसरत जमानत पर निकल कर गायब हो गया। पुलिस ने उसे तलाश करने की कोशिश की लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद भी मध्य प्रदेश की SIT ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। अंत में पुलिस ने उसे गुजरात के वडोदरा में ढूँढ़ ही निकाला- हाइवे के पास ही बनी एक झोंपड़ी में, जहाँ वह हाल ही में आया था।

जसरत को गिरफ़्तार करने के बाद मध्य प्रदेश के वन अधिकारियों ने शिकारी के पास से तीन फ़र्ज़ी वोटर आईडी कार्ड और नकली आधार कार्ड बरामद किए। इसके अलावा पूछताछ में भी उसने कई सारे राज़ खोले- मसलन वह शिकारी महज़ 15 साल ही उम्र से बना। तब से अब तक उसके हाथों जान गँवाने वाले निरीह जानवरों में कई सारे बाघों, स्लॉथ भालुओं के अलावा सैकड़ों मोर और जंगली सूअर भी शामिल हैं। वह एक अजीब से ‘लेनदेन’/बार्टर सिस्टम से काम करता था- इसके तहत गाँवों के सरपंचों पर मुँह बंद रखने, उन्हें अपनी गतिविधियों के बारे में अधिकारियों को आगाह करने से रोकने के लिए अपने शिकार में से जंगली सूअर मुफ़्त में दे देता था।

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जसरत को गिरफ़्तार करने वाली एसटीएफ़ को वन विभाग ने स्लॉथ भालुओं की लाशें बिना जननांग के मिलने के बाद बनाया था। मीडिया सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि जसरत ने इसमें अपना हाथ होने की बात स्वीकार कर ली है। जसरत STF का पहला असाइनमेंट था।

एक एसटीएफ़ अधिकारी के अनुसार, “यारलेन अंतरराष्ट्रीय बाज़ार को सप्लाई करता था, लेकिन उसकी पहुँच दिल्ली तक ही थी और वह सीमापार की लिंक के बारे में अनभिज्ञ था।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिन बिजनेसमैनों के हुक्म पर यारलेन उर्फ़ जसरत यह करता था, उनमें से एक छत्तीसगढ़ का है। एसटीएफ़ का यह भी दावा है कि यारलेन की गिरफ़्तारी के साथ पेंच अभ्यारण्य से गुमशुदा मादा बाघ T13 की गुत्थी भी सुलझ गई है, जिसे मारने की बात उसने कबूल ली है।

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