हिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की दिन-दहाड़े हत्याकांड मामले में उनके नौकर सतेंद्र ने मीडिया को रो-रोकर पूरे हत्याकांड का हाल बताया। यह पूछे जाने पर कि जिस समय हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया उस वक़्त उनकी सुरक्षा में तैनात गार्ड कहाँ थे, तो उनके नौकर ने जवाब दिया कि वो तो रात से ही मौजूद नहीं थे और जो सिपाही (सिक्योरिटी गार्ड) था वो लेटा हुआ था।
सतेंद्र ने बताया कि उन लोगों (हमलावर) ने तिवारी जी से 10 मिनट पहले फोन पर बात की, उसके बाद वो लोग तिवारी जी से मिलने आए। उस समय सिपाही (सिक्योरिटी गार्ड) सोया हुआ था। वो लोग तिवारी जी से मिलने ऊपर उनके रूम में चले गए। उन्हें देखकर तिवारी जी बाहर आए और उनसे आधे घंटे तक बातचीत की। इस दौरान उन्होंने (हमलावर) दही-बड़ा खाया, और चाय भी पी।
इसके आगे सतेंद्र ने बताया कि आरोपितों और तिवारी के बीच किसी मुस्लिम लड़की की हिन्दू लड़के से शादी की कोई बात चल रही थी। इसके बाद उन गुंडों ने नौकर सतेंद्र को 100 रुपए का नोट दिया और गोल्ड फ्लैक्स पाँच सिगरेट लाने को कहा। वो पैसे लेकर बगल की दुकान से सिगरेट लेने चला गया, शायद वो लोग मौक़ा ढूँढ़ रहे थे, लेकिन सतेंद्र दो मिनट में सिगरेट लेकर पहुँच गया। इसके बाद तिवारी जी ने अपने नौकर को मसाला लाने के लिए बोला। सतेंद्र ने बताया कि जब वो मसाला लेने गया और वापस आने पर उसने देखा कि दोंनोंं आदमी वहाँ से ग़ायब थे।
सतेंद्र ने रोते हुए बताया कि उसने देखा कि गुरू जी (कमलेश तिवारी) टेबल के नीचे थे और उनसे मिलने वाले दोनों हमलावर वहाँ से फ़रार हो गए थे, जैसे ही उसने टेबल के नीचे ख़ून देखा तो उसके होश उड़ गए।
सतेंद्र ने बताया कि वो हत्या के बाद आधे घंटे से पुलिस को फोन करता रहा, लेकिन फोन लग ही नहीं रहा था… 100 नंबर भी नहीं मिल रहा था। इसके बाद इतनी देर में तो वो लोग (हमलावर) पता नहीं कहाँ चले गए। सतेंद्र ने बताया कि कार्यालय में जो सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ था वो भी काम नहीं करता। तिवारी जी ने कई बार कहा कि यहाँ पर फ़ोर्स बढ़ाओ, लेकिन तब भी यहाँ एक बुज़ुर्ग को रख दिया गया। वो जब भी यहाँ आते हैं, हमेशा सोए-लेटे हुए ही रहते हैं। हमलावरों के बारे में सतेंद्र ने बताया कि वो दोनों हमलावर यहाँ पहली बार आए थे। लेकिन, उसने दावा किया कि अगर वो लोग सामने आ जाएँगे तो वो उन्हें पहचान लेगा। उसने बताया कि एक हमलावर ने भगवा वस्त्र पहने हुआ था और दूसरा सादे वस्त्र में था। हमलावर बाइक से आए थे।
सीसीटीवी में क़ैद हुए संदिग्ध हमलावर
ख़बर के अनुसार, कमलेश तिवारी हत्याकांड में पुलिस को अहम सुराग मिला। वारदात को अंजाम देने वाले संदिग्ध हत्यारे सीसीटीवी फुटेज में क़ैद हो गए है। फुटेज में दिख रहे संदिग्धों के आधार पर पुलिस आरोपितों की तलाश में जुट गई है। एसपी कलानिधि नैथानी के निर्देश पर पुलिस की कई टीमें आरोपितों की तलाशी में जुट गई है। पुलिस दावा कर रही है कि जल्द ही हत्याकांड की गुत्थी को सुलाझा लिया जाएगा।
मुस्लिमों द्वारा किए गए अपराध को हिन्दू स्पिन देना कुछ मीडिया हाउस के लिए आम बात हो गई है। ऐसा ही एक मामला फिर सामने आया है। दरअसल बिहार के मुजफ्फरपुर में मोहम्मद शफीक नाम के शख्स ने अपनी दूसरी बीबी मीना खातून की जीभ काट दी। हिन्दी मीडिया ‘आज तक’ ने इसे सनसनीखेज बनाने के लिए हिन्दू त्योहार करवा चौथ को बदनाम करने की कोशिश करते हुए लिखा कि करवा चौथ वाले दिन पति ने हैवानियत दिखाई और ब्लेड से पत्नी की जीभ काट दी। बता दें कि करवाचौथ हिन्दू का वह पर्व है, जिस दिन पत्नियाँ अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
आज तक में प्रकाशित खबर की हेडलाइन
खबर के मुताबिक मुजफ्फरपुर के सकरा थाना के सरैया गाँव में दो सौतन के बीच झगड़े से गुस्साए पति शफीक ने दूसरी बीबी की जीभ ब्लेड से काट दी। घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने आरोपित पति मोहम्मद शफीक को पोल से बाँध दिया जिसे बाद में पुलिस गिरफ्तार कर ले गई। पीड़िता मीना खातून को गंभीर हालत में सकरा रेफरल अस्पताल लाया गया जहाँ प्रारंभिक उपचार कर उसे एसकेएमसीएच रेफर कर दिया गया। मीना खातून के परिवार वालों ने मोहम्मद शफीक और उसकी पहली बीबी अंगूरी खातून के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है।
उन्होंने बताया कि पहली बीबी को बच्चा नहीं होने पर शफीक ने झाँसा देकर मीना खातून के साथ निकाह किया था। इसके बाद वो पहली बीबी के साथ मिलकर उसे प्रताड़ित करने लगा। जब मीना इस प्रताड़ना के खिलाफ आवाज उठाने की बात कहती तो शफीक और अंगूरी मीना की जीभ काटकर आवाज बंद करने की धमकी देते थे।
हैरानी की बात ये है कि इस पूरी घटना में कहीं भी करवा चौथ का जिक्र नहीं है, लेकिन घटना का करवा चौथ की रस्म के साथ कोई संबंध न होने के बावजूद आज तक ने अपनी हेडलाइन में इसका उल्लेख किया और मीडिया हाउस ने बड़ी ही धूर्तता से इस भयावह कृत्य में शामिल मुस्लिम लोगों की पहचान को छुपाया। इस हेडलाइन में करवा चौथ लिखकर ये दिखाने का प्रयास किया गया कि जरूर किसी हिन्दू पति ने ही अपनी पत्नी के साथ ये घृणित अत्याचार किया होगा। जबकि सच्चाई ये है कि मोहम्मद शफीक की दो बीबियाँ थी, जिसके बीच लड़ाई हुई और इस बीच शफीक ने अपनी दूसरी बीबी मीना खातून की जीभ काट दी। धूर्तता से इस तथ्य को हेडलाइन में छुपाया गया।
हिंदू त्योहारों को गालियाँ देना, उसका तिरस्कार करना कोई नई घटना नहीं है। कई मीडिया हाउस हिंदू रीति-रिवाजों और त्योहारों की बदनामी करने के दोषी हैं। एक मीडिया आउटलेट द वायर ने एक वाहियात लेख प्रकाशित किया जिसमें कहा गया है कि हिन्दू का त्योहार होली बलात्कार की संस्कृति को बढ़ावा देता है। एक अन्य धर्मनिरपेक्ष मीडिया आउटलेट हफ़िंगटन पोस्ट ने अपनी वेबसाइट पर पितृसत्ता के खिलाफ करवाचौथ की स्मृतियों के बारे में एक अपमानजनक अंश अपलोड किया था। इस तरह के कई उदाहरण हैं, जहाँ मीडिया आउटलेट्स ने हिंदू त्योहारों को बेझिझक होकर बदनाम किया है।
उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ से हिन्दू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की निर्मम हत्या की खबर ने आज सबको झकझोर के रख दिया। दिन दहाड़े उनके कार्यालय में उनपर चाकू से हमला करके उनका गला रेतकर आरोपित फरार हो गए। जिसके बाद पुलिस ने हत्यारों की खोज करने के लिए सीसीटीवी खँगाले और हाथ लगा दोनों बदमाशों का हूलिया। अब पुलिस सामने आई इस फुटेज के आधार पर इनकी तलाश कर रही है।
सीसीटीवी फुटेज में कैद हुई तस्वीर में देखा जा सकता है कि दोनों आरोपित भगवा रंग का कुर्ता पहनकर कमलेश तिवारी के कार्यालय में गए। इसके बाद दोनों ने मौक़ा देखकर उनके सीने और ठोड़ी पर चाकू से 15 से ज्यादा वार किए। बाद में दोनों फरार हो गए।
यहाँ बता दें कि पहले खबर आ रही थी कमलेश तिवारी को गोली मारी गई, लेकिन डॉक्टरों ने साफ किया कि उनकी हत्या किसी धारधार हथियार से हुई। उधर पुलिस ने मौक़े से एक रिवॉल्वर भी बरामद की हैं। शुरुआती जाँच में कहा गया कि ये हत्या किसी परिचित द्वारा की गई है, लेकिन वास्तविकता हत्यारों के पकड़े जाने के बाद ही पता चलेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने बताया है कि हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमों का गठन किया गया है। मामले में सख्ती से जाँच जारी हैं।
लेकिन, फिलहाल कमलेश के समर्थकों ने बाग कालोनी में प्रदर्शन शुरू कर दिया है और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए भारी संख्या में पुलिस और पीएसी तैनात कर दी गई हैं।
बता दें कि इस हमले के बाद कमलेश को ट्रॉमा सेंटर ले जाकर बचाने की खूब कोशिश हुई लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
उल्लेखनीय है हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे कमलेश तिवारी को पैगंबर मोहम्मद साहब के ख़िलाफ़ टिप्पणी करने के मामले में रासुका के तहत गिरफ्तार किया गया था।
दिल्ली विधानसभा के स्पीकर और आम आदमी पार्टी के नेता राम निवास गोयल और उनके बेटे सुमित गोयल को एक भाजपा नेता के घर घुसना महंगा पड़ गया। दिल्ली की रॉउज एवन्यू कोर्ट ने रामनिवास गोयल और उनके बेटे सुमित गोयल समेत पाँच लोगों को 6-6 महीने जेल की सजा सुनाई है साथ ही प्रति व्यक्ति एक-एक हज़ार रूपए का जुर्माना भी लगाया है। बता दें कि हाल ही में कोर्ट ने इन सभी लोगों को पीड़ित भाजपा नेता के घर में घुसने, मारपीट करने का दोषी ठहराया था। इनमें सबसे प्रमुख नाम दिल्ली की विधानसभा के स्पीकर रामनिवास गोयल का है जोकि दिल्ली के शाहदरा इलाके से विधायक भी हैं।
मामला 2015 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव के समय का है जब 6 फरवरी को यह लोग भाजपा नेता मनीष घई के घर में घुस गए और उनके साथ मारपीट की थी जिसपर भाजपा नेता मनीष ने मामला दर्ज कराया था और उन्होंने इस मारपीट के खिलाफ न्याय पाने के लिए अदालत में लम्बी लड़ाई लड़ी जिसका फैसला अब आया है। अपने बचाव में रामनिवास गोयल ने यह दलील दी थी कि “चुनाव के दौरान भाजपा नेता मनीष के घर कम्बल और शराब छिपाकर रखी गई थी जो चुनाव से पहले गरीबों में बाँटी जानी थी।”
दिल्ली विधानसभा स्पीकर रामनिवास गोयल को 6 महीने की जेल
बता दें कि सभी दोषियों पर भारतीय दंड संहिता के तहत धारा 448 (मकान में जबरन घुसने) का आरोप था जबकि आम आदमी पार्टी के नेता रामनिवास गोयल के बेटे सुमित गोयल पर धारा 323 (चोट पहुँचाने) के तहत शिकायत दर्ज की गई थी।
अभियोग चलने के दौरान पूरी जाँच के दौरान अदालत की कार्यवाही इस नतीजे पर पहुँची कि मामले में संलिप्त सभी आरोपित दोषी पाए गए हैं जिसके बाद इस पूरे घटनाक्रम में दिल्ली विधानसभा के स्पीकर और आम आदमी पार्टी से ताल्लुक रखने वाले रामनिवास गोयल, उनके बेटे सुमित गोयल सहित अन्य पाँच लोग दोषी पाए गए हैं।
टेरर फंडिंग मामले में एटीएस और स्थानीय पुलिस ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से शुक्रवार (11 अक्टूबर) को चार लोगों को गिरफ़्तार किया था। गिरफ़्तार किए गए चारों आरोपितों से पूछताछ के बाद एटीएस ने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े दो और आरोपितों सिराजुद्दीन और फ़हीम को बरेली के इज्जतनगर से गुरुवार (17 अक्टूबर) को गिरफ़्तार कर लिया है। सिराजुद्दीन के पास से दो मोबाइल फोन और एक कार बरामद हुई है। वहीं, इस मामले का एक और आरोपित सदाकत नेपाल भाग चुका है।
ख़बरों के मुताबिक़, एटीएस अधिकारियों ने बताया कि सिराजुद्दीन और फ़हीम निर्दोष व्यक्तियों को लालच देकर अन्य देशों से अपने बैंक खातों में रुपए ट्रान्सफर करने के लिए कमीशन की पेशकश करते थे। एडीजी, एटीएस, डी के ठाकुर ने बताया कि आरोपितों (सिराजुद्दीन और फ़हीम) ने गिरफ़्तार किए गए उम्मेद अली, समीर सलमानी, संजय अग्रवाल, एजाज अली को कमीशन का लालच दिया था।
उन्होंने बताया,
“यह जोड़ी दूसरे देशों से अपने बैंक खातों में पैसा ट्रान्सफर करती थी और बाद में इसे वापस ले लेती थी। फ़हीम इस पैसे को आतंकी गतिविधियों के लिए दिल्ली ले गया था।”
जानकारी के अनुसार, गुरुवार को बरेली एटीएस टीम के प्रभारी मंजीत सिंह इज्जतनगर थाना पुलिस को लेकर परतारपुर पहुँचे। वहाँ पहुँचकर टीम ने सदाकत, फ़हीम और सिराजुद्दीन के घर का मुआयना किया। सदाकत के घर पर ताला लगा हुआ था। इसलिए सिराजुद्दीन और फ़हीम तो नहीं मिले लेकिन उनके घर के सदस्य वहाँ मौजूद थे। उन्होंने बताया कि दोनों कई दिनों से घर से लापता हैं।
ग़ौरतलब है कि टेरर फंडिंग मामले में लखीमपुर खीरी से जिन चार आरोपितों को गिरफ़्तार किया गया था, उनके बारे में पता चला था कि वो विदेस से नेपाल की बैंकों में आने वाले धन को भारतीय मुद्रा में तब्दील करके खीरी के रास्ते देश भर में भेजते थे। इस धन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था।
अभियुक्तों ने इस बात का भी ख़ुलासा किया था कि अवैध धन बरेली के रहने वाले फ़हीम और सदाकत को दिया जाता था और उनसे कमीशन ले लिया जाता था। फ़हीम और सदाकत रक़म को दिल्ली पहुँचाते थे। अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, गिरफ़्तार किए गए लोगों ने नेपाल के एक बैंक की वेबसाइट हैक करके 49 लाख रुपए निकाले थे। पुलिस ने इनके पास से 4.75 लाख भारतीय रुपए और 1.65 लाख नेपाली रुपए बरामद किए।
राजस्थान के बीकानेर में कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के लिए लैंड डील करने वाले प्रॉपर्टी डीलर के ठिकानों पर आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान बड़े पैमाने पर जमीनों के दस्तावेज बरामद हुए हैं। प्रॉपर्टी डीलर के बीकानेर स्थित ठिकानों से आयकर विभाग की टीम ने 11 लाख रुपए कैश और लगभग 6 बोरियों में भरे जमीनों की रजिस्ट्री के कागजात बरामद किए हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार (अक्टूबर 18, 2019) को इसकी जानकारी दी।
दस्तावेजों में कथित रूप से वाड्रा द्वारा राजस्थान और बीकानेर में खरीदी गई सैकड़ों एकड़ जमीन के पंजीकरण के कागजात शामिल हैं। इससे पहले प्रॉपर्टी डीलर ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की गई पूछताछ के दौरान स्वीकार किया था कि उसने राजस्थान में वाड्रा की कंपनियों के लिए जमीन के सौदे किए थे।
सीबीआई द्वारा दर्ज किए गए केस के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय की टीम मनी लॉन्ड्रिंग के उस मामले की जाँच कर रही है, जिसमें आरोप है कि वाड्रा की कंपनी ने राजस्थान में नियमों की अनदेखी कर लैंड डील की थी। प्रॉपर्टी द्वारा ईडी को दी गई जानकारी के आधार पर आयकर विभाग की टीम ने छापेमारी की थी, जो एक दिन से अधिक समय तक चली। जब्त की दस्तावेजों की जाँच के लिए पंजाब से आई टीम उसे अपने साथ ले गई है।
उल्लेखनीय है कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने मामले में गिरफ्तारी से वाड्रा को 24 नवंबर तक के लिए सुरक्षा दे दी है। इसकी अंतिम सुनवाई 26 सितंबर को हुई थी। इसके साथ ही वाड्रा को लंदन स्थित संपत्ति ब्रायनस्टन स्क्वायर में 1.9 मिलियन पाउंड की संपत्ति खरीदने के आरोपों का भी सामना करना पड़ रहा है।
केरल सरकार द्वारा जारी की गई एक राजपत्र अधिसूचना सोशल मीडिया पर उसकी छीछालेदर करा रही है। अगस्त 2019 में जारी इस राजपत्र में असिस्टेंट सर्जन और कैजुयलिटी मेडिकल अधिकारी के आवेदन माँगे गए हैं- केवल उन अनुसूचित जाति के लोगों के, जिन्होंने ईसाई धर्म अपनाया [Scheduled Caste Converts to Christianity (SCCC)]।
इस अधिसूचना का मतलब है कि केरल की सरकार अलग से उन लोगों को प्राथमिकता दे रही है जिन्होंने हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई पंथ अपनाया है।
केरल सरकार द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना
पद भरने की तीसरी कोशिश, मोटा वेतन- आखिर क्यों नहीं कम होंगे हिन्दू?
यह पहली बार हुआ हो, ऐसा भी नहीं है। इसी SCCC श्रेणी के लिए विशेष तौर पर जारी यह तीसरी अधिसूचना है- क्योंकि SCCC वर्ग के लोग, यानि आदिवासी और जनजातीय लोग, जो हिन्दू से ईसाई बने हों, उतने हैं ही नहीं, जितने सरकार चाहती है। इससे पहले भी, इन्हीं रिक्तियों को भरने के लिए सरकार दो बार अधिसूचना जारी कर चुकी है और तब भी उनमें इस विशेष बिंदु का उल्लेख था-कि आवेदक हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाई बना हो। इस पद को भरने के लिए पहली नोटिफिकेशन साल 2014 के दिसंबर में आई थी, दूसरी 2016 में और तीसरी अब फिर आई अगस्त 2019 में।
हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाई बनने वालों के लिए विशेष तौर पर सुरक्षित किए गए इन पदों का वेतन ₹45,800 से ₹89000 तक है।
विभाग है या कंपनी?
अब इस मामले के प्रकाश में आने के बाद लोगों ने आवाज उठानी शुरू की है कि आखिर कैसे केरल सरकार आस्था और उपासना-पद्धति के आधार पर भेदभाव कर रही है और कैसे नौकरी की भर्तियों में उन लोगों को प्राथमिकता दे रही है, जो हिन्दू से ईसाई बन गए। लेकिन और गहराई में झाँकने पर पता चलेगा कि इस मामले में चौंकने जैसा कुछ नहीं है- क्योंकि केरल सरकार में तो ऐसे लोगों के ‘कल्याण’ के लिए पूरा एक विभाग है जिन्होंने हिंदू धर्म त्यागकर ईसाई पंथ अपनाया। इस विभाग का नाम “केरल राज्य अनुसूचित जातियों और अनुशंसित समुदायों से ईसाई विकास निगम”। निगम– यानि कम्पनी, जैसे NTPC (राष्ट्रीय ताप-विद्युत ऊर्जा निगम) सरकारी कंपनी है, ONGC सरकारी तेल कंपनी है।
सही पढ़ा आपने- केरल सरकार ने हिन्दू से ईसाई बनने वाले लोगों की विशेष देखभाल करने के लिए एक पूरी कंपनी खोल रखी है।
सरकार द्वारा संचालित इस विभाग (या कंपनी?) ने अपने घोषित लक्ष्य में बताया है:
“केरल के कोटय्यम में साल 1980 में कंपनी एक्ट 1956 के अंतर्गत केरल राज्य अनुसूचित जातियों और अनुशंसित समुदायों से ईसाई विकास निगम की स्थापना की गई थी। इसका प्रमुख लक्ष्य अनुसूचित जातियों और अनुशंसित समुदायों से ईसाई पंथ में मतांतरित लोगों के व्यापक समाज, शैक्षिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उत्थान एवं अन्य जीवन स्थितियों को बढ़ावा देना है।“
हालाँकि, यह विभाग एक सरकारी उपक्रम है, लेकिन इसकी स्थापना कंपनी अधिनियम 1956 के तहत करना सवाल खड़े करता है। आमतौर पर ऐसे विभागों को ‘सोसाइटी एक्ट’ और ‘स्पेशल एक्ट’ के अंतर्गत स्थापित किया जाता है। करने को वैसे तो कंपनी एक्ट की धारा 8 के अंतर्गत सरकारी उपक्रम को स्थापित किया जा सकता है, लेकिन सोसाइटी की जगह कंपनी के तौर पर इसकी स्थापना की मंशा पर उठे सवाल केवल इतने से नहीं दबाए जा सकते कि यह किसी कानून के किसी पेंच से संभव है। आखिर इस विभाग को केरल सरकार ने सोसाएटी के अन्तर्गत न रखकर कंपनी एक्ट के तहत क्यों रखा है? ऐसा कौन सा व्यवसाय है, जिसे ये विभाग कंपनी एक्ट के तहत कंपनी बन कर कर रहा है?
इसके बारे में राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर भी जानकारी मौजूद है।
केरल सरकार की आधिकारिक वेबसाइट
केरल सरकार की वेबसाइट के मुताबिक इस विभाग/कंपनी में RTI कानून के तहत सूचना अधिकारियों (PIOs) की भी नियुक्ति की गई है। यानि यह तो पक्का है कि यह विभाग या कंपनी सरकारी ही है, निजी नहीं।
वेबसाइट के अनुसार इस विभाग योजनाएँ हैं:
मतलब कि चाहे ज़रूरत जमीन खरीददारी की हो या फिर विदेशी रोजगार की, शादी के लिए लोन चाहिए हो या निजी लोन- हिन्दू से ईसाई बनने को प्रोत्साहित करने के लिए केरल सरकार ढेरों योजनाएँ चला रही है। साल 2010 में SCCC श्रेणी के लोगों को ₹159 करोड़ की ऋण माफी भी दी गई थी। द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार केरल के SC/ST और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री एके बालन ने इसकी सार्वजनिक रूप से घोषणा की थी।
2010 की इस स्कीम में हिन्दू से ईसाई बनने वालों को 31 मार्च, 2006 की डेडलाइन के कर्ज़ों में ₹25,000 तक का तो कृषि कर्ज पूरी तरह माफ़ कर दिया गया, और जिनका कर्ज इससे अधिक का था, उन्हें जुर्माने के तौर पर वसूली जाने वाली सूद की राशि से मुक्त कर दिया गया। इस योजना की ‘पीठ’ एंग्लिकन चर्च ऑफ़ इंडिया के आर्चबिशप वटप्परा ने भी थपथपाई थी।
केरल में SCCC बाकायदा अलग वर्ग है
केरल में यह SCCC एक विशिष्ट वर्ग है, जिसे केरल सरकार अलग से आरक्षण देती है।
केरल के पिछड़ा वर्ग विकास आयोग की वेबसाइट के हिसाब से हिन्दू से ईसाई बनने वाले लोग पिछड़े वर्ग के भीतर ही एक अलग वर्ग हैं, जिन्हें राज्य सरकार की नौकरियों में विशेष आरक्षण प्राप्त होता है। यह एंग्लो-इंडियंस और लैटिन कैथोलिकों से अलग, और इनके अलावा एक विशेष आरक्षण है। “हिन्दू से ईसाई बने अनुसूचित जनजाति के लोग” वर्ग को राज्य की ओबीसी सूची में भी स्थान मिला हुआ है।
कई पद केवल हिन्दू धर्म छोड़ने को प्रोत्साहित करने के लिए
एक नहीं, कई-कई पद, कई-कई बार हिन्दू से ईसाई बनने वालों के लिए केरल सरकार ने विशेष तौर पर सुरक्षित रखे हैं। जून 2019 में सहायक जेल अधिकारी के पद के लिए भी हिन्दू से ईसाई बने अनुसूचित जनजाति के लोगों से ही आवेदन माँगे गए थे।
इसके अलावा लेक्चरर,जल प्राधिकरण के सर्वेयर, जैसे पदों के लिए भी केवल SCCC अभ्यर्थियों से ही आवेदन माँगे गए।
कहाँ गया सेक्युलरिज़्म?
ऐसे में यह सवाल उठता है कि एक ‘सेक्युलर’ संविधान, उससे चलने वाली सेक्युलर सरकार आखिर किसी एक मज़हब से दूसरे में मतांतरण के लिए प्रोत्साहित कैसे कर सकती है। कैसे आस्था के आधार पर भेदभाव किया जा सकता है कि इस नौकरी के लिए न केवल किसी एक मज़हब के ही लोग आवेदन करें, बल्कि उस मज़हब के अंदर भी नए-नए आए लोग ही आवेदन करें, पुराने ईसाई नहीं? केरल सरकार की यह नीति सेक्युलरिज़्म, अनुसूचित जनजातियों से साथ सामाजिक न्याय आदि कई सारे सिद्धांतों का उल्लंघन है।
(नूपुर शर्मा की मूलतः अंग्रेजी में प्रकाशित इस रिपोर्ट का हिंदी रूपांतरण मृणाल प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव ने किया है।)
ख़ुफ़िया एजेंसियों की तरफ से अलर्ट जारी होने के बाद से ही गोरखपुर व आसपास के जिलों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। बताया जा रहा है कि नेपाल के रास्ते कुछ आतंकियों के भारतीय सीमा को पार कर देश में घुसपैठ करने की सूचना मिली है। दरअसल इन आतंकियों को भारत में गोरखपुर के ज़रिए घुसवाने में नेपाल में ठिकाना बनाए बैठे आतंकी मोहम्मद उमर मदनी की अहम भूमिका है।
ख़ुफ़िया एजेंसियों की मानें तो मदनी मार्च और मई के महीने में एक नेपाली व्यक्ति के साथ गोरखपुर, वाराणसी और अयोध्या की यात्रा कर कई अहम जगहों की रेकी करने भारत आया था, उसने यहाँ रूककर कई स्थानीय जानकारियाँ भी इकठ्ठा की थीं। सूचना यह भी मिली थी कि वह यहाँ रुककर कुछ लोगों से मिलकर गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। अपनी जाँच के आधार पर सुरक्षा आयुक्त ने अपने पत्र में लिखा है कि 16 सितम्बर को कहा जंगल की रेलवे क्रासिंग के पास एक कार सर्विस सेंटर पर कुछ संदिग्ध लोगों को बात करते सुना गया था जो बोल रहे थे कि “इस दीवाली पर काफी धमाका होगा जिसे पूरा हिंदुस्तान याद रखेगा।”
बता दें की मोहम्मद मदनी आतंकी संगठन लश्कर का ही एक सक्रिय सदस्य है और 15 साल पहले उसे पाकिस्तान में छपे 5 लाख की रकम वाले जाली नोट के साथ गिरफ्तार किया गया था, टेरर फंडिंग के अपराध में मदन भारत की जेल में 10 साल सज़ा भी काट चुका है। जेल से छूटने के बाद उसने नेपाल के जनकपुर जिले के बलकटवा में अपना ठिकाना बना लिया, अब मदनी वहीं से भारत में आतंकवादी गतिविधियों की रूपरेखा तैयार करता है और भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए स्लीपिंग माड्यूल तैयार करने में जुटा है।
अयोध्या भूमि विवाद मामले में एक नया मोड़ आ गया है। मुस्लिम पक्षकारों के वकील एजाज मकबूल ने अयोध्या मामले में मध्यस्थता पैनल द्वारा की गई रिपोर्ट की सिफारिशों को अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की है। दरअसल, बुधवार (अक्टूबर 16, 2019) को मीडिया में एक रिपोर्ट सामने आई थी, जिसमें कहा गया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड तीन शर्तों के तहत राम जन्मभूमि भूमि पर अपना दावा छोड़ने को तैयार है। मगर अब मुस्लिम पक्षों ने मध्यस्थता रिपोर्ट में दिए गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मुस्लिम पक्ष उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते हैं जो मीडिया में जारी किया गया है और साथ ही उस तरीके को भी अस्वीकार करते हैं जिसमें दावे को वापस लेने का समझौता किया गया था।
Advocate on record for Sunni Waqf Board Ejaz Maqbool in Supreme Court has issued a press release and denied reports of settlement on Ayodhya issue before the mediation panel.
इसको लेकर मुस्लिम पक्ष ने याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड के प्रतिनिधियों के अयोध्या साइट पर से अपना दावा वापस लेने के बयान के बाद मुस्लिम पक्ष को आड़े हाथों लिया गया। उनका कहना है कि मीडिया में यह जानकारी मध्यस्थता समिति या फिर निर्वाणी अखाड़ा द्वारा लीक की गई।
याचिका में कहा गया है कि यह स्वीकार करना मुश्किल है कि ऐसी परिस्थिति में मध्यस्थता हो सकता है, खासकर जब मुख्य हिंदू दलों ने खुले तौर पर कहा कि वे किसी भी तरह के मध्यस्थता के पक्ष में नहीं है और अन्य सभी मुस्लिम अपीलकर्ताओं ने भी स्पष्ट किया था कि वे भी किसी भी तरह की मध्यस्थता के पक्ष में नहीं हैं, तो फिर आखिर मध्यस्थता कैसे हो सकती है। उनका कहना है कि मध्यस्थता कमिटी ने जो प्रयास किया था उसमें उनका कोई आदमी शामिल नही था।
याचिका के मुताबिक वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पंचू ने भारत के मुख्य न्यायाधीश से जफर फारुकी को संरक्षण देने की अपील की थी। उनका कहना है कि पंचू ने मुख्य न्यायाधीश से कहा था कि वो उत्तर प्रदेश सरकार को इसके लिए आदेश दें।
इसके अलावा, याचिका में कहा गया है कि मध्यस्थता समिति खुद प्रतिनिधि नहीं थी और मीडिया में लीक हुआ रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन था। याचिका में लीक होने के समय पर भी संदेह जताया गया है।
उल्लेखनीय है कि मीडिया के सामने आई रिपोर्ट में कहा गया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड ने माँग की है कि ‘THE PLACES OF WORSHIP (SPECIAL PROVISIONS) ACT, 1991 ACT NO. 42 OF 1991’ को पूर्णरूपेण लागू कर इसे अभेद्य बनाया जाए। साथ ही सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने यह भी कहा है कि अयोध्या में 22 मस्जिदों के रख-रखाव की जिम्मेदारी सरकार उठाए। इसके साथ ही सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अंतिम शर्त रखी है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियंत्रण में जितने भी धार्मिक स्थल हैं, उनकी स्थिति की जाँच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट एक समिति बनाए।
बता दें कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में देश की सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई पूरी कर ली है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट जल्द ही इस पर अपना फैसला सुनाएगी। बताया जा रहा है कि 14 से 16 नवंबर 2019 के बीच इस पर फैसला आ सकता है।
INX मीडिया मामले में सीबीआई ने आज चार्जशीट दाखिल कर दी। इस चार्जशीट में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम सहित 14 लोगों के नाम शामिल हैं। अब मामले में आगे की सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।
मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार सीबीआई की तरफ से दायर आरोप पत्र में कार्ति चिदंबरम, पीटर मुखर्जी और इंद्राणी मुखर्जी समेत 14 लोगों को आरोपित बनाया गया है।
INX media case: Central Bureau of Investigation(CBI) has filed chargesheet in a Delhi Court. Matter to be taken up by Court on Monday,October 21 pic.twitter.com/Yyf1QWOrE4
इसके अलावा भास्कर, सिंधुश्री खुल्लर, अनूप पुजारी, प्रबोध सक्सेना, आर प्रसाद जैसे लोगों के नाम भी चार्जशीट में हैं। इस चार्जशीट में वित्त मंत्रालय के 4 पूर्व अफसरों का नाम हैं। साथ ही आईएनएक्स मीडिया, एएचसीएल और शतरंज प्रबंधन पर भी इसमें आरोप हैं।
INX media case: Senior Congress leader P Chidambaram, his son Karti Chidambaram, former media baron Peter Mukerjea among those named in CBI chargesheet https://t.co/pd07MXK3zQ
उल्लेखनीय है कि काफी दिनों से तिहाड़ जेल में बंद कॉन्ग्रेस नेता को गुरुवार को यानी कल (17 अक्टूबर, 2019) राउज़ एवेन्यू कोर्ट में एक बार फिर झटका लगा था। दरअसल, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने चिदंबरम को 7 दिनों के लिए ईडी की कस्टडी में भेज दिया।
जिसके बाद आईएनएक्स मीडिया केस में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम अब आगामी 24 अक्टूबर तक ईडी की कस्टडी में रहेंगे। इस दौरान पी चिदंबरम को घर से खाना ले जाने की अनुमति मिलेगी, वेस्टर्न टॉयलेट और दवाइयाँ ले जाने की भी इजाजत दे दी गई है। वहीं सीबीआई ने भी चिदंबरम की न्यायिक हिरासत 14 दिन आगे बढ़ाने की माँग हैं और ईडी भी एक और मामले में चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है।