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मन्दिर के पुजारियों से 6-6 पन्नों पर लिखवाया ‘राष्ट्रद्रोही’: क्या पागल हो गई है ‘गौभक्त कमलनाथ’ की पुलिस?

एक तरफ़ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद को भाजपा से बड़ा ‘गौभक्त’ साबित करने में लगे हैं, और दूसरी तरफ़ उनकी पुलिस के कर्मचारी गाँधी जी के कटआउट के साथ छेड़-छाड़ में किसी और को न पकड़ पाने पर अब मन्दिर के पुजारियों को मामले में फँसाने की कोशिश कर रहे हैं। गाँधीजी के कट-आउट पर लिखे ‘राष्ट्रद्रोही’ से लक्ष्मण बाग़ मन्दिर के पुजारियों की लिखावट मिलाने के लिए उनसे बार-बार ‘राष्ट्रद्रोही’ लिखने को कहा जा रहा है। मीडिया की खबरों के अनुसार अब तक 6 पन्ने भर कर उनसे यही शब्द लिखवाया जा चुका है, और इससे व्यथित पुजारियों के अन्न-जल त्यागने की भी खबर आ रही है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के रीवा जिले में स्थित मेमोरियल में से राष्ट्रपिता गाँधी जी की चिता की राख चोरी कर ली गई थी। इतना ही नहीं, चोरों ने उनके पोस्टर पर ‘राष्ट्रद्रोही’ भी लिख दिया। ‘बापू’ के उपनाम से प्रख्यात रहे गाँधी जी की चिता की राख को लक्ष्मण बाग स्थित बापू भवन में रखा गया था, जहाँ ये घटना हुई। बापू भवन का निर्माण 1948 में किया गया था और तब से ही लक्ष्मण बाग ट्रस्ट इसकी देखभाल करता रहा है।  

कलश था ही नहीं, तो चोरी कैसे हुआ?

एक तरफ़ स्थानीय कॉन्ग्रेस नेताओं ने अज्ञात लोगों के खिलाफ़ राष्ट्रद्रोह जैसी संगीन धारा में मामला दर्ज कराया हुआ है, और दूसरी ओर पुजारियों का कहना है कि जिस कथित अस्थि-कलश के पीछे यह सब कवायद हो रही है, पिछले कई वर्षों के अपने मन्दिर प्रवास के दौरान उन्होंने वह कलश कभी देखा ही नहीं। यह दावा करने वाले एक-दो नहीं, पाँच पंडित हैं।

और-तो-और, कॉन्ग्रेस नेताओं की मूल तहरीर में तो अस्थि कलश का ज़िक्र था भी नहीं। नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक बिछिया थाने में पहली शिकायत केवल गाँधी जी की तस्वीर पर ‘राष्ट्रद्रोही’ लिखने को लेकर हुई थी। उसके दो घंटे बाद जाकर शहर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष गुरमीत सिंह ने थाना प्रभारी को पत्र देकर अस्थि-कलश चोरी की बात कही।

मन्दिर में 40 साल से सेवाएँ दे रहे एक पुजारी और पूजा पाठ प्रभारी पंडित दीनानाथ शास्त्री के मुताबिक कलश यहाँ आया अवश्य था, लेकिन श्रद्धांजलि अर्पित होने के बाद कलश वापस इलाहाबाद (वर्तमान में प्रयागराज) चला गया था।

लिखावट का नमूना आखिर कितना चाहिए?  

मन्दिर के पुजारियों का आरोप है कि रोज़ाना उन्हें बुलाकर नए सिरे से कोरे कागज़ पर ‘राष्ट्रद्रोही’ लिखवाया जाता है। अब तक 6 पन्ने भरे जा चुके हैं। थाने के पुलिस वालों का कहना है कि यह लिखावट के नमूने के लिए किया जा रहा है।

खाना-पीना छोड़ा तो पहुँचे आईजी-एसपी  

यह विडम्बना की ही बात है कि जिन मोहनदास करमचन्द गाँधी की तस्वीर पर ‘राष्ट्रद्रोही’ लिखने का आरोप लगाकर पुजारियों का उत्पीड़न हो रहा है, उन्हीं की तरह पुजारियों को अनशन भी करना पड़ रहा है। जब आरोपित पुजारियों ने खाना-पीना छोड़ दिया तो आईजी चंचल शेखर, एसपी आबिद खान, डीआईजी अविनाश श्रीवास्तव उनसे मिलने पहुँचे। तब ही जाकर पुजारियों को प्रशासन की तरफ़ से निष्पक्षता का आश्वासन भी मिला।

नुसरत जहां को जल्द मारना होगा, पूरा मुस्लिम समुदाय खतरे में: कॉन्ग्रेस समर्थक की माँग

कॉन्ग्रेसी समर्थक एवं खुद को कॉन्ग्रेस के सोशल मीडिया का संयोजक बताने वाले हसन लसकर नाम के शख्स ने तृणमूल सांसद नुसरत जहाँ को जल्द मारने की बात कही है। लसकर का कहना है कि नुसरत जहां को जल्द मारना होगा, वरना पूरा मुस्लिम समुदाय खतरे में आ जाएगा।

नुसरत के लिए सरेआम ये जहर लसकर ने ट्वीट के जरिए उगला है। लसकर ने अपने ट्वीट में नुसरत को मारने की बात ऐसी तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए कही है, जिसमें एक ओर वे संसद में माँग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र पहनकर खड़ी हैं और दूसरी ओर बुर्के में एक औरत खड़ी है।

ट्वीट में बताया जा रहा है कि नुसरत ने दूसरी तस्वीर में होने की बजाय पहली तस्वीर में होना इसलिए चुना क्योंकि ऐसा होना उन्हें आजादी देता है। जिसे देखते हुए ही लसकर ने खुलेआम कहा कि नुसरत को मार दिया जाना चाहिए। वरना पूरा मुस्लिम समुदाय खतरे में आ जाएगा।

हैरानी की बात तब हुई जब लसकर के फेसबुक अकॉउंट को खँगाला गया, जिसका लिंक उसके ट्विटर अकॉउंट पर ही दिया गया है। इस अकॉउंट से मालूम हुआ (फेसबुक पर लिखे अनुसार) कि लसकर ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी के सोशल मीडिया का संयोजक है। और इसके पेज पर शेयर किए पोस्ट भी यही दिखाते हैं कि यह शख्स कॉन्ग्रेस समर्थक है। पेज पर अधिकतर कॉन्ग्रेस एवं राहुल गाँधी से संबंधित पोस्ट हैं और ऐसे मीम्स हैं जो भाजपा और नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ बनाए गए।

वहीं, लसकर का ट्विटर अकॉउंट देखने पर भी मालूम हुआ कि उसके अधिकतर ट्वीट नफरत से भरे हुए हैं। जिसमें कश्मीर संबधित पोस्ट हैं। जिनमें से एक में लिखा गया है कि कश्मीर कभी हिंदुओं का नहीं हो सकता, बल्कि कश्मीर में हिंदुओं का शमशान होगा।

वहीं, एक दूसरे पोस्ट में हसन लिखता है कि अगली पीढ़ी में वे बाबरी मस्जिद का बदला लेगा।

गौरतलब है कि लसकर जैसे नफरत फैलाने वाले लोग नुसरत को पहले भी ट्रोल कर चुके हैं। उन्हें निखिल जैन से शादी करने से लेकर हिंदू त्यौहारों में शिरकत करने तक में इस्लाम को शर्मसार करने वाला बताया जा चुका है।

इतना ही नहीं, दुर्गा पूजा में उन्हें पूजा करते देखकर मजहबी गुरू ये तक कह चुके हैं कि अगर उन्हें पूजा पाठ करना है तो वो इस्लाम को छोड़कर अपना धर्म परिवर्तन कर लें क्योंकि इस्लाम में ये सब हराम है।

अब फिलहाल इस मामले में ऑपइंडिया असम प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी और हसन लसकर से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है, ताकि ज्ञात हो सके कि क्या वाकई में नुसरत के लिए अपशब्द बोलने वाला शख्स एपीसीसी में आधिकारिक रूप से पद पर कार्यरत है या नहीं? अभी तक हमें इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है लेकिन जैसे ही इसके बारे में पता चलेगा हम अपनी रिपोर्ट को उसी अनुसार अपडेट करेंगे।

जब रावण ने पत्थर पर लिटा कर अपनी बहू का ही बलात्कार किया… वो श्राप जो हमेशा उसके साथ रहा

विजयादशमी के दौरान यह याद करना ज़रूरी है कि भगवान श्रीराम ने किसी ऐसे रावण का वध नहीं किया था जो विद्वान था, शास्त्रों का ज्ञाता था और अपने राज्य की भलाई के बारे में सोचता था। राम ने ऐसे रावण का वध किया था जो स्त्रियों का सम्मान नहीं करता था, उनके साथ दुर्व्यवहार करता था और बलपूर्वक अपनी बात मनवाता था। आजकल रावण को ‘अच्छा’ साबित करने के लिए उसके ग़लत पक्षों को सही बता कर पेश किया जा रहा है। हाँ, रावण रचित ‘शिव तांडव’ हम आज भी गाते हैं, जिसका अर्थ यह हुआ कि बुरे से बुरे व्यक्ति ने भी अगर कोई अच्छा काम कर दिया तो उस अच्छे को याद रखा जाता है लेकिन उसे अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है।

रावण के संगीत-ज्ञान की प्रशंसा चल सकती है लेकिन ‘उसने सीता को छुआ भी नहीं’ वाला नैरेटिव बहुत ग़लत है क्योंकि रावण का इतिहास उस प्रकार का नहीं रहा है। रावण की शिवभक्ति कई ऋषियों-मुनियों के भी तपस्या से परे थी लेकिन इसका अर्थ ये नहीं कि ‘रावण ने सीता के साथ बलपूर्वक व्यवहार नहीं किया’ वाला नैरेटिव सही है। रावण ने क्या अपहरण करते समय सीता पर अपने बल का प्रयोग नहीं किया था? लंकापति का इतिहास वाल्मीकि रामायण के ही एक अंश से पता चलता है, जो महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित है और जिसे रामकथा का मूल माना जाता है।

रम्भा का नाम आपने सुना होगा। वह स्वर्ग की अप्सरा थी जो तमाम नृत्यों और कई कलाओं में पारंगत थीं। आगे बढ़ने से पहले एक और बात बताना ज़रूरी है कि रावण और कुबेर भाई थे। कुबेर के पुत्र का नाम था नलकुबेर। रम्भा नलकुबेर की प्रेमिका थी और इस रिश्ते से वह रावण की बहू लगती थी। एक दिन जब वह अपने प्रेमी से मिलने जा रही थी, तभी रावण उसकी सुंदरता पर मोहित हो गया और उसने रम्भा से आपत्तिजनक बातें पूछी। रावण ने रम्भा से पूछा कि वह इतना सज-धज कर किसको तृप्त करने जा रही है? रावण ने इसके लिए संस्कृत में ‘भोक्ष्यते’ शब्द का प्रयोग किया, जो दिखाता है कि वह स्त्री को उपभोग की वस्तु समझता था।

रम्भा ने रावण को रिश्ते-नातों की याद दिलाई। रावण ने पहले तो मानने से इनकार कर दिया कि वह उसकी पुत्रवधू है लेकिन जब रम्भा ने नलकुबेर के बारे में बताया तो रावण ने फिर आनाकानी शुरू कर दी। उस समय रम्भा काफ़ी डरी हुई थी और देवताओं को भी जीत चुके रावण के बारे में उसे पता था कि वह कुछ भी कर सकता है। डर से काँप रही रम्भा को शायद यह नहीं पता था कि रावण अपनी दुष्टता के कारण रिश्तों-नातों की भी परवाह नहीं करेगा। क्या आपको पता है जब यह साबित हो गया कि रम्भा रावण की पुत्रवधू है तब रावण ने क्या जवाब दिया?

रावण ने कहा कि सारे रिश्ते-नाते सिर्फ़ उन्हीं स्त्रियों के लिए होते हैं जो किसी एक पुरुष की पत्नी हो। उसने रम्भा से कहा कि स्वर्गलोक में तो ऐसा कोई नियम-क़ानून या रिश्ते-नाते नहीं होते। उसके बाद रावण ने रम्भा के जाँघों और वक्षस्थल को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। साथ ही उसने घमंड से चूर होकर अपनी वीरता का बखान किया और यहाँ तक कहा कि अश्विनीकुमार सहित दुनिया का कोई भी पुरुष उससे बेहतर नहीं है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम जहाँ शबरी के झूठे फल खाते थे, रावण किसी भी स्त्री की तरफ़ सही नज़र से नहीं देखता था। ‘वाल्मीकि रामायण’ के अनुसार, रावण ने रम्भा का बलात्कार किया।

एवमुक्त्वा स तां रक्षो निवेश्य च शिलातले ।
कामभोगाभिसंसक्तो मैथुनायोपचक्रमे ।। ७.२६.४२ ।। (उत्तरकाण्ड)

इस श्लोक का अर्थ यह है कि राक्षसराज रावण ने रम्भा को बलपूर्वक शिला पर बिठाया और फिर कामभोग में लीन होकर बलपूवक उसके साथ समागम किया। रम्भा के पुष्पहार टूट गए, उसके द्वारा धारण किए गए आभूषण बिखर गए और व्याकुलता से वह पीड़ित हो उठी। रावण रम्भा का बलात्कार करने के बाद उसे वहीं छोड़ दिया और निकल गया। महर्षि वाल्मीकि लिखते हैं कि उसकी हालत ऐसी हो गई थी, जैसे किसी फूलों की लता को हवा द्वारा झकझोड़ दिया गया हो। उसका श्रृंगार अस्त-व्यस्त हो गया था और उसका शरीर काँप रहा था।

बिलखती हुई रम्भा अपने प्रेमी नलकुबेर के पैरों पर गिर पड़ी थी। रम्भा ने नलकुबेर को बताया कि रावण स्वर्ग जीतने के लिए भारी संख्या में सैन्यबल लेकर आया है और इसी दौरान उसने उसका बलात्कार किया। नलकुबेर महामना थे। उनमें ब्राह्मण सी धर्मशीलता और क्षेत्रीय सी वीरता थी। अपनी प्रेमिका के साथ हुए अत्याचार से क्रुद्ध होकर नलकुबेर ने उसी क्षण रावण को श्राप दिया कि आगे से उसने किसी भी स्त्री के साथ बलपूर्वक समागम करना चाहा तो उसके सिर के टुकड़े हो जाएँगे। अर्थात, रावण तब तक किसी स्त्री के साथ संभोग नहीं कर सकता था, जब तक वह ऐसा न चाहती हो।

अब आपको जवाब मिल गया होगा कि रावण ने सीता से इतनी मिन्नतें क्यों की? उसने क्यों सीता के साथ लंका में जबरन कुछ ग़लत करने की कोशिश नहीं की? इस श्लोक में नलकुबेर का श्राप देखें:

यदा ह्यकामां कामार्तो धर्षयिष्यति योषितम् ।
मूर्धा तु सप्तधा तस्य शकलीभविता तदा ।। ७.२६.५७ ।।
(उत्तरकाण्ड)

सीता-हरण के समय भी रावण ने अपने ही मुँह से कहा था कि किस तरह से उसने इधर-उधर से काफ़ी सारी स्त्रियों का अपहरण कर उन्हें लंका में लाकर रखा है। अगर किसी के भीतर रावण के अच्छे पक्षों की चर्चा करने की ही इच्छा है तो उसकी अच्छे की चर्चा करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन जिस क्षेत्र में वह बुरा था, बलात्कारी था- उस मामले में उसकी बुराई में अच्छा ढूँढने वालों को कम से कम बिना तथ्यों को जाने दुष्प्रचार तो नहीं फैलाना चाहिए।

इस लेख में वाल्मीकि रामायण के अलावा किसी अन्य सोर्स से कुछ भी नहीं लिया गया है। उपर्युक्त कहानी वाल्मीकि रामायण के उत्तरकाण्ड में वर्णित है और श्लोक संख्या देख कर आप उसे पढ़ सकते हैं। आप सीता-हरण वाला भाग भी पढ़ सकते हैं, जहाँ रावण ने जोर-जबरदस्ती करते हुए सीता को हाथ लगाया और फिर उन्हें उठा कर अपने रथ में लेकर गया। रावण अक्सर माँ सीता को अपनी वीरता और धन का लोभ भी देता रहता था। लेकिन, यही श्राप का डर था कि उसने सीता को हाथ नहीं लगाया।

अमृतसर हादसा: 59 मृतकों के परिवारों को 1 साल बाद भी नहीं मिला न्याय, कॉन्ग्रेस सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

जहाँ पूरे देश में दशहरा को लेकर हर्ष-उल्लास का मौसम है, पंजाब में एक शहर ऐसा भी है जहाँ दशहरा का नाम आते ही एक ऐसी भीषण दुर्घटना याद आ जाती है, जिसे भुलाए नहीं भुलाया जा सकता। सबसे बड़ी बात तो यह कि अब तक इस हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों के साथ न्याय नहीं हो सका है। इस हादसे को एक साल हो गए और लोग आज भी न्याय की उम्मीद में सड़कों पर हैं। अमृतसर में लोगों ने कैप्टेन अमरिंदर सिंह की सरकार के ख़िलाफ़ कैंडल मार्च निकाला है, पोस्टर लहराए हैं। साथ ही जनता ने मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी। शिरोमणि अकाली दल के विधायक विक्रम सिंह मजीठिया ने भी विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

कैंडल मार्च के दौरान पीड़ित परिवारों ने बताया कि उनके परिवारों के घर में खाने को रोटी तक नहीं है। पंजाब की कॉन्ग्रेस सरकार ने नौकरी का वादा भी अभी तक पूरा नहीं किया है। उन्होंने आरोपितों को सज़ा देने की भी माँग की। पूर्व मंत्री मजीठिया ने कहा कि पंजाब सरकार ने झूठे वादे किए और अब तक आरोपितों के खिलाफ कर्रवाई नहीं की। उन्होंने माँग करते हुए कहा कि अमरिंदर सरकार आरोपितों पर कार्रवाई करे और वादे के मुताबिक पीड़ित परिवारों को नौकरी दे। उन्होंने कहा:

“अमृत सर रेल हादसे को लेकर 3 जाँच कमिटियाँ बनीं लेकिन अब तक एक भी व्यक्ति के ऊपर FIR तक नहीं हुआ। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। जाँच कमिटी ने दोषी कॉन्ग्रेस नेताओं को बचाने की कोशिश की। मैंने विधानसभा में इस मामले को उठाया था और बताया था कि कई कॉन्ग्रेस नेता इस हादसे के लिए ज़िम्मेदार हैं लेकिन अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। कॉन्ग्रेस सरकार का पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने का कोई इरादा नहीं है।”

बता दें कि बीते वर्ष अमृतसर के जोड़ा फाटक पर दशहरा महोत्सव चल रहा था। वहाँ लोग रेलवे ट्रैक पर खड़े होकर रावण दहन देख रहे थे। तभी एक तेज रफ्तार ट्रेन वहाँ से गुजरी और कई लोग काल के गाल में समा गए। इस हादसे के बाद हर्षोल्लास में डूबे शहर में मातम पसर गया। इस हादसे ने 59 लोगों की ज़िंदगियाँ लील लीं। कई दर्जन लोग घायल हुए। मरने वालों में बच्चे, बूढ़े, जवान और महिलाएँ शामिल थीं।

उस दशहरा समारोह में कॉन्ग्रेस नेता नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी मुख्य अतिथि थीं। हादसे के तुरंत बाद वह वहाँ से निकल गई थीं। सिद्धू दम्पति ने भी कई बड़े-बड़े वादे करते हुए कहा था कि वे पीड़ित परिवारों को गोद लेंगे, घायलों का इलाज करवाएँगे और मृतकों के परिजनों के लिए नौकरी की व्यवस्था करेंगे। हालाँकि, तब सिद्धू के मंत्री रहते भी यह सब नहीं हो सका।

नवरात्रि के आखिरी दिन शिव मंदिर में तोड़फोड़: UP में आंदोलन की धमकी, इलाके में तनाव

उत्तर प्रदेश के बदायूं के उघैती में नवरात्रि के आखिरी दिन रविवार की देर रात कुछ अराजक तत्वों ने इलाके में स्थित शिव मंदिर में तोड़फोड़ करके माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में तनाव बढ़ गया। पुलिस को मामले की सूचना दी गई और अज्ञातों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार घटना की सूचना मिलते ही थाना पुलिस समेत सीओ बिल्सी संजय रेड्डी घटनास्थल पर पहुँचे और तोड़फोड़ करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश देकर लोगों का गुस्सा शांत करवाया। उघैत के रहने वाले पुरुषोत्तम की शिकायत पर इस मामले के संबंध में अज्ञातों के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज हुआ।

खबर के अनुसार ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि रविवार की रात में सभी लोग मंदिर में पूजा-अर्चना करके अपने-अपने घर चले गए थे। उस समय तक धार्मिक स्थल की सभी मूर्तियाँ सुरक्षित थीं। लेकिन जब सुबह अर्चना हेतु मंदिर में जाया गया तो मूर्तियाँ क्षतिग्रस्त थीं। जिसे देखने के बाद स्थानियों में गुस्सा फैल गया।

आनन-फानन में पुलिस को घटना के बारे में सूचित किया गया और ग्रामीणों द्वारा जल्द से जल्द गिरफ्तारी की माँग उठाई गई। लोगों ने पुलिस को अज्ञात आरोपितों को न पकड़ने पर आंदोलन करने की चेतावनी दी।

लेकिन, मौक़े पर पहुँची पुलिस ने सूझ-बूझ से घटनास्थल की वीडियोग्राफी करवाते हुए लोगों को शांत करवाया और उन्हें आश्वस्त किया कि मामले में उचित कार्रवाई होगी। इसके बाद पुलिस ने मंदिर का जायजा लिया और मीडिया को बताया, “उघैती में शिव मंदिर में मूर्ति क्षतिग्रस्त की गई हैं। अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। खुराफाती तत्वों को चिह्नित किया जा रहा है। जल्द ही उनको पकड़कर जेल भेजा जाएगा। “

गौरतलब है कि अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के देवरिया थाना क्षेत्र के मदिरा पाली भरत राय में काली मंदिर में देवी की प्रतिमा को अराजक तत्वों द्वारा खंडित करने का भी मामला सामने आया था। जब घटना की सूचना मिलते ही पुलिस द्वारा फौरन काली माता की प्रतिमा को ठीक करवाया गया था और तनावपूर्ण स्थिति से काबू पाने के लिए इलाके में पुलिस बल तैनात हुआ था। जाँच में पता चला था कि मंदिर मुस्लिम बहुल इलाके में स्थित है।

Pak ने किया था जिस Avenger को मार गिराने का दावा, IAF ने उड़ाया वही विमान

बालाकोट एयर स्ट्राइक के जवाब में हुई हवाई झड़प में पाकिस्तान विंग कमांडर अभिनंदन के अलावा जिस दूसरे लड़ाकू विमान को मार गिराने का दावा कर रहा था, हिंदुस्तान ने आज वायु सेना दिवस पर उसी को उड़ा कर पाकिस्तान को करारा तमाचा मारा है। यही नहीं, अभिनंदन वर्तमान समेत फरवरी की उस संक्षिप्त जंग में पाकिस्तानी एयर फ़ोर्स को धूल चटाने वाले विमान के चालक दल के सैनिक भी वायुसेना की परेड का हिस्सा बने। 87वें वायु सेना दिवस पर यह नज़ारा दिल्ली के पास स्थित हिंडन वायु सेना बेस, गाज़ियाबाद पर देखने को मिला।

पाकिस्तान को मुँह चिढ़ाता ‘Avenger-1’

परेड का एक हिस्सा था वायुसेना का Avenger नामक battle formation (हवा में युद्धक विमानों का व्यूह)। इसमें शामिल थे तीन मिराज-2000, और उन्हें अपने सुरक्षा घेरे में लिए हुए दो Sukhoi-30MKI। और इन्हीं Sukhoi-30MKI में से एक का नाम है Avenger-1, जिसके लिए पाकिस्तानी वायु सेना ने दावा किया था कि उसने इस विमान को 27 फरवरी की झड़प में मार गिराया था। हिंदुस्तान ने उस समय भी इस दावे को सिरे से नकार दिया था, और आज उस विमान का दुनिया के सामने प्रदर्शन कर पाकिस्तान के मुँह पर जवाब फेंक कर मारा है। Avenger-1 के चालक दल के सदस्य वही वायु सैनिक थे, जिन्होंने इस Sukhoi-30MKI को फरवरी में हुए ‘ऑपरेशन स्विफ्ट रिटॉर्ट’ में हिस्सा लिया था।

अभिनंदन और MiG- Bison भी शामिल  

इसके अलावा वीर चक्र से सम्मानित होने वाले विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान ने भी अपने MiG- Bison विमान के साथ परेड में हिंदुस्तानी वायु सेना की ताकत और घातकता का प्रदर्शन किया। MiG- Bison वही विमान है, जिसमें बैठकर उन्होंने फरवरी में पाकिस्तान के अत्याधुनिक F-16 विमान को हवा में दौड़ा कर मार गिराया था। उसके बाद उनका विमान भी पाकिस्तानी हमले की चपेट में आकर पाकिस्तानी सीमा में क्रैश हो गया, और उन्हें 60 घंटों तक पाकिस्तानी कैद में रहना पड़ा।

समारोह के पहले हिन्दुस्तान के तीनों सैन्य प्रमुखों- थलसेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत, वायु सेना के मुखिया एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया, और नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर एयर चीफ मार्शल भदौरिया ने कहा कि बालाकोट का असली रणनीतिक महत्व राजनीतिक नेतृत्व का जिहादियों को सज़ा देने की इच्छाशक्ति के प्रदर्शन का है। “सरकार के आतंकवादी हमलों ने निपटने के तरीके में भारी बदलाव है।”

हिन्दू महिला और मुस्लिम प्रोफेसर को OYO होटल ने नहीं दिया रूम, कहा – ‘अलग-अलग धर्म के हो’: मीडिया रिपोर्ट्स

जयपुर के एक होटल ने एक जोड़े को रूम देने से सिर्फ़ इसीलिए मना कर दिया क्योंकि वो दोनों अलग-अलग धर्म से ताल्लुक रखते हैं। उक्त पुरुष मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता है तो महिला हिन्दू है। जयपुर के होटल ने दोनों का धर्म अलग-अलग होने पर आपत्ति जताई। होटल के रिसेप्शन पर दोनों को कहा गया कि उन्हें चेक-इन नहीं करने दिया जाएगा लेकिन क्योंकि दोनों अलग-अलग धर्म से हैं।

शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को ये घटना हुई जब उदयपुर के एक असिस्टेंट प्रोफ़ेसर ‘ओयो’ के सिल्वरकी होटल में चेक-इन करने की कोशिश की। होटल ने कहा कि वो जयपुर पुलिस द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का अनुसरण करते हुए ऐसा कर रहे हैं। हालाँकि, होटल के अधिकारियों ने लिखित में ये सूचना देने से इनकार कर दिया।

होटल के मैनेजर गोवर्धन सिंह ने कहा कि अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखने वाले जोड़ों को होटल में चेक-इन न करने देना होटल की पॉलिसी है और साथ ही यह स्थानीय पुलिस की हिदायतों के अनुरूप है। असिस्टेंट प्रोफेसर ने कहा कि सरकार द्वारा ऐसा कोई भी नियम नहीं बनाया गया है और होटल या ओयो की वेबसाइट पर कहीं भी इसका जिक्र नहीं है। प्रोफेसर ने ओयो की वेबसाइट पर इस बात की शिकायत की।

इसके बाद ओयो ने उनका रुपया रिफंड किया और फिर उन्हें शहर के एक अन्य होटल में मुफ़्त कमरा उपलब्ध कराया। महिला ने कहा कि वह असिस्टेंट प्रोफेसर को एक दशक से जानती हैं और कभी भी उनके बीच धर्म आड़े नहीं आया। उन्होंने कहा कि जोड़े में अगर हिन्दू और सिख होते तो शायद होटल उन्हें अनुमति दे देता।

जयपुर के पुलिस कमिश्नर ने कहा कि पुलिस ने ऐसा कोई भी आदेश नहीं दिया है, जिसमें होटलों को हिन्दू-मुस्लिम कपल को न रखने को कहा गया हो। उन्होंने कहा कि होटल ने पुलिस का नाम लेकर झूठ बोला है। वहीं ओयो ने कहा कि यह उसके सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है और इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी।

सामान्यतः होटलों में अविवाहित जोड़ों को एक साथ कमरा नहीं दिया जाता है। और ग्राहकों को चिड़चिड़ा बना देने की हद तक उनसे आईडी और तमाम तरह की चीजें माँगी जाती हैं। यह कोई कानूनी व्यवस्था नहीं है लेकिन स्थानीय दादा/गुंडे/नेता इन मामलों के तिल का ताड़ बना देते हैं, इस कारण से होटल मैनेजमेंट अविवाहित जोड़ों को कमरा देने से इनकार करने का हर संभव प्रयास करते हैं। जैसा कि इस मामले में मीडिया रिपोर्ट बता रही है कि इस जोड़े को हिंदू-मुस्लिम के कारण कमरा नहीं दिया गया, यह बहुत तार्किक नहीं है।

अमेरिका ने चीन की 28 संस्थाओं को किया ब्लैकलिस्ट, उइगर मुस्लिमों के साथ अत्याचार करने पर लिया एक्शन

चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर मुस्लिमों और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ होते अत्याचार को देखते हुए अमेरिका के वाणिज्य मंत्रालय ने चीन की 28 संस्थाओं को सोमवार को ब्लैकलिस्ट कर दिया। खुद अमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने इस फैसले की घोषणा की। जिसके बाद अब चीन की ये 28 संस्थाएँ अमेरिकी सामान नहीं खरीद पाएँगी।

वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने उइगर मुस्लिमों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिकी सरकार और वाणिज्य विभाग चीन में अल्पसंख्यकों का निर्मम उत्पीड़न बर्दाशत नहीं कर सकते और न ही करेंगे। उन्होंने अपने इस कदम पर कहा कि इस फैसले से ये सुनिश्चित होगा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मुक्त उद्यम के माहौल में बनी उनकी तकनीक का उपयोग लाचार अल्पसंख्यकों की आबादी के दमन के लिए न हो।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो विभाग द्वारा जारी एक रिपोर्ट में ये स्पष्ट कहा गया है कि ये कार्रवाई चीन के शिनजियांग क्षेत्र में उइगर और अन्य अल्पसंख्यक मुस्लिमों के मानवाधिकारों का हनन करने में संलिप्तता के चलते लिया गया है।

जानकारी के अनुसार, अमेरिका द्वारा जिन कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया गया है, उनमें मुख्य रूप से सर्विलांस और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से संबंधित कंपनियाँ हैं। जिनमें दहुआ और हाईकेविजन जैसी कंपनियाँ हैं जो निगरानी रखने के लिए उपकरण बनाती हैं और आईफ्लाईटेक एवं मेग्वी जैसी संस्थाएँ हैं जो फेस और वॉयस रेकॉगनाइजेशन वाली तकनीक पर काम करती हैं।

इस प्रतिबंध के बाद हाईकेविजन के एक प्रवक्ता ने अमेरिका के इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। प्रवक्ता का कहना है कि अमेरिका के वाणिज्य विभाग द्वारा लिए गए इस फैसले से वैश्विक कंपनियों द्वारा पूरी दुनिया में मानवाधिकारों की बेहतरी के लिए किए जा रही कोशिशों पर प्रभाव पड़ेगा।

यहाँ बता दें कि चीन के ख़िलाफ अमेरिका ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है, जब चीन के साथ उसका ट्रेड वॉर चल रहा है और पूरे विश्व की नजर दोनों देशों पर है।

अधिकार समूहों (right groups) की मानें तो पश्चिमी शिनजियाँग क्षेत्र के शिक्षा शिविरों में 10 लाख उइगरों और अन्य मुस्लिमों को चीन ने अपनी हिरासत में लिया हुआ है। जो कि वाशिंगटन के अनुसार नाजी जर्मनी की याद दिलाता है।

हालाँकि, इस पर चीन शुरुआत में ऐसे शिविरों के अस्त्तिव के होने से इंकार करता रहा था, लेकिन अब उसने खुलकर दावा किया है कि ये शिविर व्यावसायिक प्रशिक्षण स्कूल हैं, जो आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए जरूरी हैं। विश्व भर में होती आलोचनाओं पर चीन ने इस पूरे मामले को आतंरिक करार दिया है और कहा है कि वे इस मामले में किसी प्रकार का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि 28 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाने से पहले भी अमेरिका इसी वर्ष चीन के टेलीकॉम उपकरण निर्माता कंपनी हुवावे के ख़िलाफ़ भी ऐसा ही मिलता-जुलता कदम उठा चुका है। जब हुवावे पर इरान के ख़िलाफ़ अमेरिका के प्रतिबंधों का उल्लंघन करने और अमेरिकी तकनीक को चुराने का आरोप लगा था।

119 जज और 1372 वकील… सब के सब हो गए फेल: जिला न्यायाधीश बनने के लिए दी थी परीक्षा

गुजरात में हाल ही में 40 जिला न्यायाधीश पदों के लिए परीक्षा हुई। जिसमें 119 जजों और 1,372 वकीलों ने हिस्सा लिया। लेकिन, हैरानी की बात ये है कि इनमें से कोई भी जिला न्यायाधीश की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सका। खुद गुजरात हाईकोर्ट ने सोमवार को लिखित परिणामों का ऐलान करते हुए इसकी पुष्टि की। कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर इस परीक्षा का परिणाम शून्य बताया।

गुजरात हाईकोर्ट के पोर्टल पर परीक्षा के परिणाम

गुजरात हाईकोर्ट के पोर्टल पर लगी लिस्ट के मुताबिक असफल अभ्यार्थियों में 119 जज हैं। इनमें से 51 जज गुजरात के किसी न किसी कोर्ट में न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं, जो जून तक वहाँ की अदालतों में प्रिंसिपल जज या फिर चीफ जुडिशल मैजिस्ट्रेट के पद पर तैनात थे।

जानकारी के मुताबिक ये परीक्षा 35 प्रतिशत सीटों के लिए हुई थी। क्योंकि हाईकोर्ट ने नियमानुसार जिला जजों की रिक्त पड़ी 65 प्रतिशत सीटों पर सीनियर सिविल न्यायाधीशों का प्रमोशन किया था। जबकि शेष 25 प्रतिशत पदों पर वकीलों का और 10 प्रतिशत पर अडिशनल डिस्ट्रिक्‍ट जजों का चयन होना था। इनमें 40 खाली पदों को 26 प्रैक्टिस कर रहे वकीलों द्वारा भरा जाना था और 14 पद के लिए 119 न्यायधिकारी प्रतिस्पर्धा की पंक्ति में थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार इस परीक्षा के लिए आवेदन मार्च माह में माँगे गए थे और जून में इसके मद्देनजर एक ऑनलाइन एलिमिनेशन एग्जाम हुआ था। इस परीक्षा में 1,372 वकीलों ने भाग लिया था। लेकिन हाईकोर्ट ने 50 प्रतिशत नंबर लाने वाले सिर्फ़ 494 अभ्यार्थियों को लिखित परीक्षा के लिए उत्तीर्ण किया था।

इसके बाद लिखित परीक्षा 4 अगस्त को हुई, लेकिन जब परिणाम आया तो कोई भी अभ्यार्थी लिखित परीक्षा को पास करके साक्षात्कार के चरण तक नहीं पहुँच पाया। उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एचडी सुथार ने खुद इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 494 वकील में से एक भी उम्मीदवार लिखित परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए न्यूनतम अंक नहीं ला सका। यहाँ तक जिन न्यायिक अधिकारियों ने वकीलों की ऑनलाइन परीक्षा ली थी, वे खुद भी लिखित परीक्षा में फेल हो गए।

लड़की की हत्या कर पुलिस के बगल में खड़ा हो गया दाढ़ी वाला हत्यारा: ब्रिटिश नेता ने ट्वीट किया Video

ब्रिटेन के नेता डेविड वांस ने लन्दन की सड़क पर खुलेआम हत्या का एक दिल दहला देने वाला वीडियो ट्वीट किया है। वीडियो में एक शख्स किसी महिला पर प्रत्यक्षदर्शियों से भरी सड़क पर चाकू या कार की चाभी जैसी नुकीली चीज से हमला करता है और 5 बार उस पर वार करता है। लेकिन वहाँ मौजूद एक भी शख्स उसे न ही रोकता है, न ही बाद में घायल होकर गिरी महिला की सहायता का प्रयास करता है।

पहले से गुत्थमगुत्था

जिस महिला पर हमला हुआ, वीडियो में वह पहले से किसी महिला से उलझी हुई दिख रही थी। यह दोनों महिलाएँ एक कार के बगल में लड़ रहीं थीं। दोनों की हाथापाई में यह हमलावर शख्स, जो दाढ़ी रखे हुए है, कूद पड़ता है। एक-एक कर वह उनमें से एक महिला पर ताबड़तोड़ पाँच वार करता है, जिसमें से तीन सीधे गले पर होते हैं। इसके बाद उसे एक दूसरी कार की तरफ़ भागता हुआ दिखाया जा रहा है।

मूक प्रत्यक्षदर्शी, पुलिस के बगल में टहल रहा हत्यारा

खुलेआम हत्या और हमलावर के दुस्साहस से भी ज़्यादा स्तब्ध कर देने वाली वहाँ मौजूद अन्य लोगों की उदासीनता है। पहले तो किसी ने भी हमला रोकने की कोई कोशिश नहीं की। उसके बाद जब वह शख्स भागा, तो न ही किसी ने उसे पकड़ने का कोई प्रयास किया, न ही उस महिला की मदद की कोशिश।

यही नहीं, हमलावर आगे वीडियो में दूसरी कार पर झपटता दिखने के बाद घटनास्थल पर लौटता है, और महिला की लाश का मुआयना कर रहे पुलिस वाले के बगल में खड़ा हो जाता है।

वीडियो शेयर करने वाले डेविड वांस के ट्विटर थ्रेड के जवाबों में लोग इन सभी पहलुओं पर हैरत जाता रहे हैं। खुद वांस ने कहा कि लंदन एक ऐसा वीभत्स और बर्बर शहर बनता जा रहा है, जहाँ इंसानी जान की कोई कीमत नहीं है।