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कारगिल के 8 नेता BJP में शामिल, महबूबा की पार्टी से हैं अधिकतर मुस्लिम चेहरे

जम्मू-कश्मीर विधान परिषद् के सभापति हाजी अनायत अली सहित कारगिल के कई प्रमुख नेता सोमवार (अगस्त 26, 2019) को भाजपा में शामिल हो गए।

अनायत अली के अलावा, लद्दाख स्वायत्तशासी पर्वतीय विकास परिषद, कारगिल के कार्यकारी पार्षद मोहम्मद अली हसन और 6 अन्य नेताओं ने भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा से मुलाकात की और पार्टी में शामिल हो गए। अनायत अली सहित अधिकतर नेता महबूबा मुफ़्ती की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) से हैं।

उनका स्वागत करते हुए लद्दाख के सांसद जामयांग सेरिंग नामग्याल ने कहा कि केंद्र शासित क्षेत्र बनाए जाने के निर्णय से लेह और कारगिल जिलों सहित पूरा क्षेत्र खुश है।

अनायत अली ने संवाददाताओं से कहा कि मुस्लिम बहुल जिले कारगिल के लोगों ने भले ही लद्दाख के लिए केंद्र शासित क्षेत्र का दर्जा नहीं माँगा हो, लेकिन घोषणा के बाद वे खुश हैं क्योंकि इससे केंद्र मामलों को सीधे तौर पर देखेगा, जिसमें विकास परियोजनाएँ भी शामिल हैं।

भाजपा ने बताया कि पार्टी में शामिल अन्य नेताओं में मोहसीन अली, जहीर हुसैन बाबर, काचो गुलजार हुसैन, असदुल्ला मुंशी, मोहम्मद इब्राहिम और ताशी सेरिंग शामिल हैं।

RBI से सरकार को पैसा देने की सिफारिश करने वाले बिमल जालान इंदिरा गाँधी के ‘लाए हुए’ हैं, मोदी के नहीं

‘RBI की स्वायत्ता पर हमला’ का बोगस तर्क देकर मोदी सरकार के RBI से ₹1.76 लाख करोड़ लेने का विरोध कर रहे लोग वही हैं, जो चीखते हैं कि ‘मोदी सरकार संस्थानों की आज़ादी खत्म कर रही है’; “मोदी सरकार अपने लोगों को, संघियों को भरकर संस्थाओं की ‘क्वालिटी डाउन’ कर रही है।” लेकिन यह लोग इस मामले में या तो भूल गए हैं या लोगों से बात छिपा रहे हैं कि बिमल जालान को सरकार में लाने वाले मोदी नहीं, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी हैं।

1970 के दशक में इंदिरा गाँधी ने 4-5 उभरते हुए आर्थिक और सार्वजनिक नीति (पब्लिक पॉलिसी) के विद्वानों को सरकारी तंत्र का हिस्सा बनाया था। बिमल जालान को लाने में उनके साथ काम कर चुके आर वेंकटरमन का बड़ा हाथ था। इसके अलावा इंदिरा गाँधी के समय के ताकतवर नौकरशाह पीएन हक्सर और डीपी धर भी जालान और उसी योजना के अंतर्गत आने वाले विजय केलकर, नितिन देसाई, अरुण शौरी आदि को लाने वालों में प्रमुख थे। यानी जालान के ‘मोदी का आदमी’ होने का मिथक गलत है।

इसके बाद अगर स्वायत्ता की बात करें तो जालान खुद रिजर्व बैंक की स्वायत्ता में कटौती न करने और उसे अक्षुण्ण रखने के पक्षधर रहे हैं- मोदी सरकार के दौरान भी। तो ऐसे आदमी के नेतृत्व में बनी कमिटी क्या RBI की स्वायत्ता पर कोई खतरा बन सकती है, यह सवाल इस फैसले पर सवाल उठाने वालों से पूछा जाना चाहिए।

‘मोदी का सबसे बड़ा आलोचक रहा हूँ, अगर कॉन्ग्रेस सहमत न हो, तो भी मेरे विचारों का सम्मान करे’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के कारण कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर अपनी पार्टी के निशाने पर आ गए हैं। लेकिन लगता नहीं है कि शशि थरूर पीएम मोदी को लेकर अपने मत पर पीछे हटने वाले हैं।

केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी द्वारा इस मामले पर स्पष्टीकरण माँगने के बाद शशि थरूर ने अपनी ही पार्टी के नेताओं को राय दे डाली है। शशि थरूर ने स्पष्टीकरण माँगने वालों को कड़ा जवाब देते हुए कहा है कि यदि कॉन्ग्रेस नेता उनकी राय से सहमत नहीं भी हैं तब भी उन्हें उनके विचार की कद्र करनी चाहिए।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा- “मैं नरेंद्र मोदी सरकार का एक कठोर आलोचक रहा हूँ और मुझे उम्मीद है कि सकारात्मक आलोचक रहा हूँ। समावेशी मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के कारण ही मैंने लगातार 3 बार चुनाव जीता है। मैं अपने कॉन्ग्रेस के साथियों से निवेदन करता हूँ कि मेरे विचारों की कद्र करें, यदि वे उससे सहमत नहीं हैं, तब भी।”

समाचार पोर्टल ‘द प्रिंट’ पर एक लेख में शशि थरूर ने इस पूरे मामले पर अपनी बात कही है। थरूर ने लिखा है- “पहले मेरे साथी और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश, जिनकी विश्वसनीयता पर संदेह नहीं किया जा सकता, ने कहा कि पीएम मोदी को हर समय ‘खलनायक’ की तरह पेश करना गलत है। इसके बाद सीनियर वकील और कॉन्ग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी जयराम के बयान से सहमति जताते हुए यही बात कही थी। जब मुझसे इस संबंध में राय माँगी गई थी, तो मैंने ट्वीट कर कहा कि मैं पिछले 6 साल से यह बात कह रहा हूँ कि जब पीएम मोदी कोई अच्छी बात कहें या करें, तो उसकी तारीफ होनी चाहिए।”

केरल कॉन्ग्रेस पर तीखा कटाक्ष करते हुए शशि थरूर ने लिखा है- “मेरे इस बयान पर ही मेरे खिलाफ सार्वजनिक आलोचना की जा रही हैं, सोनिया गाँधी को पत्र लिखे गए, मुझे भाजपा ज्वाइन करने की राय दी जा रही है।”   

थरूर ने लिखा है कि इसी तरह से 2014 में मोदी की तारीफ कर देने की वजह से उन्हें पार्टी प्रवक्ता पद से हटा दिया गया और उन पर नरेंद्र मोदी से नजदीकियाँ बढ़ाने के आरोप लगाए गए। दरअसल, इस बारे में थरूर ने सफाई भी दी थी कि मोदी पर उनके बयानों को सही ढंग से नहीं समझा गया है। उन्होंने कहा था कि क्लीन इंडिया कैंपेन से जुड़ने का यह मतलब नहीं कि वह बीजेपी के हिंदुत्व के अजेंडे का समर्थन करते हैं। उन्होंने खुद को एक स्वाभिमानी कॉन्ग्रेसी करार दिया था। लेकिन, फिर भी आखिरकार पार्टी ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए प्रवक्ता के पद से हटा दिया था।

अपने लेख में थरूर ने यह भी लिखा है कि वो चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस और सेक्युलर दलों को जनता का विश्वास जीतना चाहिए।

बता दें कि केरल प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी ने पीएम मोदी की प्रशंसा करने पर शशि थरूर से स्‍पष्‍टीकरण माँगा है। यही नहीं, राज्‍य नेतृत्‍व ने कॉन्ग्रेस आलाकमान से भी थरूर की शिकायत करने का फैसला किया है। केपीसीसी के अध्‍यक्ष मुल्‍लाप्‍पल्‍ली रामचंद्रन और राज्‍य में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नितला ने थरूर के बयान का खुलकर विरोध किया। इसके बाद ही शशि थरूर की यह प्रतिक्रिया आई है।

पूर्व CM अजीत जोगी नहीं हैं आदिवासी, विधायकी खतरे में: जाति के पेंच पर कॉन्ग्रेस-BJP दोनों खफा!

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के आदिवासी के दर्जे के दावे को सरकार द्वारा नियुक्त समिति ने खारिज कर दिया है। जोगी की जाति के मामले की जाँच कर रही हाई-पावर कमिटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। कमिटी ने जोगी को आदिवासी नहीं माना है। कमिटी ने यह भी साफ किया है कि सरकारी जाँच में यह साबित होने के बाद उनका जाति प्रमाण पत्र और अनुसूचित जनजाति के तहत उन्हें मिल रहे सभी लाभों को निरस्त कर दिया गया है। 

फरवरी 2018 में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के आदेश पर डीडी सिंह की अध्यक्षता में बनी समिति ने 21 अगस्त को अपनी जाँच रिपोर्ट सरकार के समक्ष रखी। रिपोर्ट में कहा गया है कि अजीत जोगी कोई भी ऐसा प्रमाण नहीं दे सके जिससे वह यह साबित कर सकें कि वह आदिवासी जाति से ताल्लुक रखते हैं। लिहाजा बिलासपुर के कलेक्टर को छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी नियम 2013 के तहत उन पर एक्शन लेने के लिए कहा गया है। अजीत जोगी मारवाही से विधायक हैं और अगर इस रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होती है, तो मारवाही से अजीत जोगी की विधायकी को रद्द किया जा सकता है। क्योंकि ये विधानसभा सीट आदिवासी प्रत्याशी के लिए आरक्षित है।

रिपोर्ट के सामने आने पर अजीत जोगी ने कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया कि उन्हें जरूरी दस्तावेज और सबूत पेश करने का मौका नहीं दिया गया। समिति को ‘भूपेश अधिकार प्राप्त समिति’ करार देते हुए उन्होंने कहा कि वो 1986 में नागरिक सेवाओं में शामिल हुए और 43 वर्षों में, न्यायपालिका ने 6 बार पहले भी उन्हें जातिगत पंक्ति में शामिल किया है। साथ ही उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी की नजरों में वो एक आदिवासी हैं, लेकिन सीएम भूपेश बघेल उन्हें आदिवासी नहीं मानते। 

बता दें कि बीते दो दशक से जोगी की जाति को लेकर कई सवाल खड़े होते रहे हैं। इससे पहले भी 2018 में भी  रीना बाबा कंगाले की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी और इस समिति की रिपोर्ट में भी यही बात सामने आई थी। बाब कंगाले की समिति ने भी अजीत जोगी को आदिवासी नहीं माना था।

गौरतलब है कि यह मामला 2001 का है, जब भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता नंद कुमार साय ने अजीत जोगी की जाति को चुनौती दी थी। जोगी ने हमेशा दावा किया है कि वह और उनका परिवार, जो एसटी आरक्षित सीटों पर भी चुनाव लड़ते हैं, कंवर जनजाति से हैं। 2011 में यह मामला उच्चतम न्यायालय में चला गया जिसने जोगी की जनजातीय स्थिति का निर्धारण करने के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति को आदेश दिया था।

26 बांग्लादेशी नागरिक पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार, भारत-बांग्लादेश सीमा से देश में कर रहे थे घुसने की कोशिश

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने मंगलवार (अगस्त 27, 2019) को पश्चिम बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा के घौना मैदान क्षेत्र से 26 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये सभी बांग्लादेशी भारत में घुसने की कोशिश कर रहे थे।

बीएसएफ ने इससे पहले सोमवार (अगस्त 26, 2019) को भारत में घुसने की कोशिश कर रहे 5 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। बीएसएफ अधिकारियों ने सोमवार को इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि 5 बांग्लादेशी नागरिकों को भारत-बांग्लादेश सीमा पर उत्तरी 24 परगना जिले के स्वरूपनगर और गाईघाटा क्षेत्रों से गिरफ्तार किया गया। 

पुलिस द्वारा किए गए शुरुआती जाँच में पता चला है कि वो बिचौलिए की मदद से सीमापार करके भारत में आने की ताक में थे। बता दें कि बीएसएफ ने इस साल 15 भारतीय नागरिकों को और 731 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को उस समय गिरफ्तार किया, जब वे अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर रहे थे।

गौरतलब है कि शनिवार (अगस्त 24, 2019) को भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ और पशु तस्करों के बीच मुठभेड़ हो गई थी, जिसमें बीएसएफ ने एक बांग्लादेशी गौ तस्कर को मार गिराया था। एसपी मानवेन्द्र देब रे ने बताया कि 40 से भी अधिक बांग्लादेशी भारत की सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे थे, इसी दौरान मुठभेड़ हुई और एक पशु तस्कर की मौत हुई।

कोलकाता शहर अब किसी के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है- बांग्ला एक्ट्रेस जूही सेनगुप्ता

टीवी सीरियल ‘भजो गोबिंदो’ से चर्चित होने वाली बांग्ला टीवी एक्ट्रेस जूही सेनगुप्ता अपने माता-पिता के साथ रविवार (25 अगस्त) को सुबह पेट्रोल पंप पर पेट्रोल भरवाने के लिए रुकी थी। उन्होंने पेट्रोल पंप के कर्मचारी से अपनी गाड़ी में 1500 रुपए का पेट्रोल भरने को कहा, लेकिन उसने 3000 रुपए का पेट्रोल भर दिया। इस बारे में जब एक्ट्रेस के पिता ने कर्मचारी से जवाब माँगा तो आपसी बहस एक विवाद में तब्दील हो गई।

एक्ट्रेस के अनुसार,

“जब मेरे पिता ने उनसे इस बारे में पूछा, तो विवाद हो गया और उन्होंने मेरे पिता जो कि एक सीनियर सिटिजन हैं, उनको धक्का मारा, उन्होंने हमारी कार की चाबियाँ भी छिन लीं।”

इस मामले में कोलकाता पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने घटना-स्थल पर पहुँचकर मामले की जानकारी ली और फिर दोनों पक्षों को पुलिस स्टेशन ले आई जहाँ उन्हें समझाया गया। इसके बाद दोनों पक्षों में आपसी सहमति बन गई। इस मामले में किसी प्रकार की कोई शिक़ायत दर्ज नहीं हुई है। हालाँकि, टीवी एक्ट्रेस ने इस घटना से आहत होकर सोशल मीडिया पर कहा, “यह शहर अब किसी के लिए भी सुरक्षित नहीं रह गया है।”

हालाँकि जूही सेनगुप्ता और पेट्रोल पंप के कर्मचारियों के बीच हुआ आपसी विवाद सुलझ गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस के हस्तक्षेप से इस मामले को सुलझा लिया गया है। जूही सेनगुप्ता ने भारत पेट्रोलियम कम्युनिकेशन लिमिटेड (BPCL) द्वारा की गई त्वरित प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद दिया है।

फेसबुक पर उन्होंने लिखा, “मैंने अब्बास अख्तर (महाप्रबंधक ब्रांड और पीआर टीम बीपीसीएल) और राजीव दत्ता (महाप्रबंधक खुदरा, पश्चिम बंगाल बीपीसीएल) के साथ बातचीत की। उन्होंने पूरी घटना के लिए BPCL की ओर से माफ़ी माँगी है।” उन्होंने लिखा कि BPCL ने उन कर्मचारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है। मुझे BPCL के साथ कोई समस्या नहीं है। पूरे विवाद को सुलझा लिया गया है। इस घटना के बारे में ख़ुद जूही ने अपने फेसबुक पेज पर लाइव आकर सारी बातें बताई।

बांग्ला एक्ट्रेस ने फेसबुक पर जो वीडियो पोस्ट किया उसके कैप्शन में उन्होंने लिखा,

“Thanks for quick response from Bharat Petroleum Communication Limited.. I had a conversation with Mr. Abbas Akhtar (General Manager Brand and PR team BPCL) & Mr. Rajiv Dutta (General Manager Retail ,West Bengal BPCL).They apologised for the whole incident on behalf of Bharat Petroleum Corporation Limited .They have taken actions against those staff.I don’t have any issue with BPCL , had issue with their staff..So now everything has been sorted..”

12 देशों में है चिदंबरम का बैंक खाता: INX मनी लॉन्ड्रिंग केस में ED का दावा

INX मीडिया मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दावा किया है कि पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम की प्रॉपर्टी सिर्फ़ भारत में ही नहीं है बल्कि दुनिया के अन्य देशों में भी है। ED ने अपने दावे में यह बात भी स्पष्ट की कि वो विदेशों में सम्पत्ति को बेचने और विदेशी बैंक खातों को बंद करने के साक्ष्यों के साथ भी छेड़छाड़ कर रहे हैं। 

ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में दायर ऐफिडेविट में जाँच एजेंसी ने यह दावा किया कि चिदंबरम के कई देशों में बैंक खाते हैं। ED का कहना है कि चिदंबरम और इस मामले के सह-आरोपितों की 12 देशों में सम्पत्ति है। इन देशों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रिया, ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड, फ्रांस, ग्रीस, मलेशिया, मोनाको, फिलीपींस, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका, स्पेन और श्री लंका शामिल है।

ED ने चिदंबरम की ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए कहा, “आरोपित के ख़िलाफ़ हमारे पास मजबूत केस है और इस आधार पर बेल याचिका का विरोध कर रहे हैं। लेकिन, इसके साथ ही इनकी अग्रिम ज़मानत याचिका का विरोध करने का हमारे पास एक और मजबूत आधार है। हमें ऐसे संकेत मिले हैं कि आरोपी और सह-आरोपी न सिर्फ़ सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं बल्कि गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश भी कर रहे हैं।”

इसके अलावा ED ने कहा, “सबूतों की रक्षा के साथ गवाह की गरिमा और सुरक्षा की भी रक्षा होनी चाहिए। गवाह को प्रभावित किया जा रहा है और उनका अपमान हो रहा है। आरोपी बहुत ताकतवर और प्रभावशाली भी है।”

ग़ौरतलब है कि चिदंबरम की CBI की हिरासत को चार दिन बढ़ा दिया गया है, उन्हें अब 30 अगस्त को कोर्ट में पेश किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने INX मीडिया मामले में चिदंबरम की अग्रिम ज़मानत याचिका रद्द करने के हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।

कॉन्ग्रेस नेता ने 8 महीने में 3 बार कहा – ‘मैं नचनिया हूँ, नचनिया हूँ, नचनिया हूँ’

कॉन्ग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय झा ख़ुद को नचनिया मानते हैं। ऐसा उन्होंने एक बार नहीं बल्कि तीन बार कहा है। हाँ, नृत्य की विधा हर बार बदल जाती है। एक वित्त मंत्री के समय वे एक ही नृत्य विधा में पारंगत होते हैं और जैसे ही दूसरा वित्त मंत्री आता है, वह ख़ुद को किसी और नृत्य विधा में पारंगत बताते हैं। उदाहरण के लिए हम यहाँ तीन ट्वीट लेकर आए हैं। ये तीनों ट्वीट के समय देश के वित्त मंत्री अलग-अलग थे। लेकिन हाँ, सरकार राजग की ही थी।

सबसे पहले इस ट्वीट को देखिए। यह उनका ताज़ा ट्वीट है, जिसमें उन्होंने ख़ुद को नचनिया घोषित किया है। सोमवार (अगस्त 26, 2019) को उन्होंने लिखा कि अगर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अर्थशास्त्री हैं तो वो एक बेली डांसर हैं। बेली डांस को अरबी डांस भी कहा जाता है, जिसकी शुरुआत मिस्र से हुई थी। इस नृत्य विधा में सारा ज़ोर नृत्य करने वाले की धड़ पर होता है क्योंकि सारे मूवमेंट्स उसके प्रयोग से ही किए जाते हैं। ये रहा संजय झा का ट्वीट:

ऑल इंडिया प्रोफेशनल कॉन्ग्रेस, महाराष्ट्र के अध्यक्ष संजय झा के अब दूसरे ट्वीट पर गौर कीजिए। यह ट्वीट उन्होंने मार्च 26, 2019 को किया था। उस समय वित्तमंत्री अरुण जेटली थे, जिनका हाल ही में निधन हो गया। इस ट्वीट में झा ने लिखा कि अगर अरुण जेटली अर्थशास्त्री हैं तो वो एक बैलेट डांसर हैं। बैलेट डांस 15वीं सदी में इटली के उद्भव के साथ लोकप्रिय हुआ और फ्रांस एवं रूस में जाकर इसने कॉन्सर्ट डांस का रूप ले लिया। खैर, आप ट्वीट देखिए:

अब आते हैं फ़रवरी 3, 2019 को उनके द्वारा किए गए ट्वीट पर। उस दौरान पीयूष गोयल ने कार्यवाहक वित्त मंत्री के रूप में अंतरिम बजट पेश किया था। पूर्ण बजट चुनाव के बाद नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया। पूर्णकालिक बजट के दौरान संजय झा ने फिर ख़ुद को नचनिया घोषित किया। हाँ, उनकी डांस विधा बदल कर अबकी स्वदेशी हो गई। हो सकता है कि कई लोगों को इसमें अच्छे दिन भी नज़र आएँ क्योंकि अरब और फ्रांस से डांस विधा लाने वाले संजय झा ने अबकी स्वदेशी डांस का जिक्र किया।

संजय झा ने लिखा कि अगर पीयूष गोयल अर्थशास्त्री हैं तो वो कथक डांसर हैं। उत्तर भारत के कथाकारों और पौराणिक कहानीकारों ने इस नृत्य विधा को लोकप्रिय बनाया। वे इस नृत्य के माध्यम से पौराणिक कहानियों को पेश करते थे। यह भारतीय क्लासिक डांस के अंतर्गत आता है। ये रहा संजय झा का ट्वीट:

राजनीति और नृत्य में पारंगत होने के अलावा संजय झा क्रिकेट नेक्स्ट नामक वेबसाइट के संस्थापक भी हैं। हो सकता है कि कल को अगर देश को नया वित्त मंत्री मिल जाए तो वह ख़ुद को स्ट्रिपटीज डांस में ही पारंगत न घोषित कर दें! या फिर वह अबकी पोल डांस भी चुन सकते हैं। खैर, आपने टीवी पर अक्सर उन्हें न्यूज़ डिबेट्स में भाग लेते देखा होगा और वह पहले से ही सुर्ख़ियों में रहते आए हैं।

फिरोजशाह कोटला का नाम अब होगा अरुण जेटली स्टेडियम, लंबे समय तक रहे थे DDCA के अध्यक्ष

दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) ने मंगलवार (अगस्त 27, 2019) को फिरोजशाह कोटला स्टेडियम का नाम अपने पूर्व अध्यक्ष अरुण जेटली के नाम पर रखने का फैसला किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली का गत शनिवार (अगस्त 24, 2019) को निधन हो गया था। इस स्टेडियम को अब अरुण जेटली स्टेडियम के नाम से जाना जाएगा। इसका नया नामकरण 12 सितंबर को एक समारोह में किया जाएगा।

डीडीसीए ने ट्विटर पर स्टेडियम का नाम बदलने की जानकारी दी। डीडीसीए ने ट्वीट किया, “कोटला का नाम अब बदल कर अरुण जेटली स्टेडियम कर दिया जाएगा। दिल्ली के ऐतिहासिक क्रिकेट स्टेडियम के नाम बदलने का समारोह 12 सिंतबर को आयोजित किया जाएगा और इसी दिन स्टेडियम के एक स्टैंड का नाम विराट कोहली के नाम पर रखा जाएगा।”

डीडीसीए अध्यक्ष रजत शर्मा ने कहा, “वह अरुण जेटली का सहयोग और प्रोत्साहन था जिसने कि विराट कोहली, वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर, आशीष नेहरा, ऋषभ पंत और कई अन्य खिलाड़ियों ने भारत को गौरवान्वित किया।”

अरुण जेटली को इस स्टेडियम को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाने और दर्शक क्षमता बढ़ाने के साथ विश्वस्तरीय ड्रेसिंग रूम बनवाने का श्रेय जाता है। इसमें एक स्टैंड का नाम भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली के नाम पर भी रखा जाएगा, जिसकी पूर्व में घोषणा की गई थी। यह समारोह जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में होगा, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह और खेल मंत्री किरन रिजिजू भी हिस्सा लेंगे।

अम्बानी को UPA सरकार ने दी थी Z सिक्योरिटी, SC ने फटकारा था: यूथ कॉन्ग्रेस के झूठ की खुली पोल

यूथ कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से झूठ फैलाया है। कॉन्ग्रेस ने यह झूठ डॉक्टर मनमोहन सिंह की एसपीजी सुरक्षा कवर हटाए जाने को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए फैलाया। केंद्र सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह को मिली एसपीजी सुरक्षा कवर वापस लेने का निर्णय लिया है। हालाँकि, डॉक्टर सिंह को जेड प्लस सुरक्षा कवर मिलता रहेगा। लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि पूर्व पीएम का एसपीजी कवर हटाने का कारण यही है कि वह कॉन्ग्रेस पार्टी से सम्बन्ध रखते हैं।

कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने याद दिलाया कि आज तो प्रधानमंत्री और गृहमंत्री हैं, वह भी कभी ‘पूर्व’ (पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व गृहमंत्री) कहलाएँगे। उन्होंने लिखा कि ‘कर्मा (कर्म)’ सब देख रहा है। यहाँ यह जानने लायक बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा कॉन्ग्रेस के शीर्ष परिवार के तीनों सदस्यों सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी वाड्रा को एसपीजी कवर सिक्योरिटी मिली हुई है।

गृह मंत्रालय का कहना सिक्योरिटी कवर हटाए जाने का निर्णय सम्बंधित एजेंसियाँ वार्षिक समीक्षा के बाद लेती है, जो कि एक निश्चित प्रक्रिया है। यह इस आधार पर तय किया जाता है कि उक्त व्यक्ति को कितना ख़तरा है। यूथ कॉन्ग्रेस ने इस निर्णय का विरोध करते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अम्बानी का नाम भी इसमें घुसेड़ा। यूथ कॉंग्रेस ने लिखा कि मुकेश अम्बानी को जेड-कैटेगरी की सुरक्षा देने वाली मोदी सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी का एसपीजी सुरक्षा हटा दी। देखें ट्वीट:

यहाँ आपको बताना ज़रूरी है कि सच्चाई कुछ और ही है। मुकेश अम्बानी को जेड सिक्योरिटी कवर मोदी ने नहीं दी थी। उन्हें जेड सिक्योरिटी अप्रैल 2013 में डॉक्टर मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने दी थी। उस समय महाराष्ट्र में भी कॉन्ग्रेस के पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता सुशील कुमार शिंदे उस वक़्त केंद्र में गृहमंत्री थे। एक ख़बर के अनुसार, मुकेश अम्बानी को जेड सिक्योरिटी के लिए हर महीने 15 लाख रुपए का ख़र्च अनुमानित किया गया था। इसके अलावा कमांडोज के रहने की व्यवस्था भी उन्हें ही करनी थी।

तत्कालीन यूपीए सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने इस निर्णय के लिए डाँट भी पिलाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि जब देश में आम लोगों पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, तब हाई प्रोफाइल लोगों को जेड श्रेणी सुरक्षा कवर क्यों दिया गया? उस समय एक पाँच वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार की घटना हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकारते हुए कहा था कि अगर राजधानी में उचित सुरक्षा होती तो शायद इस दुःखद घटना को टाला जा सकता था।

अम्बानी का नाम लिए बिना जस्टिस जीएस सिंघवी की पीठ ने कहा था कि समाचार-पत्रों में गृह मंत्रालय द्वारा एक व्यक्ति को सीआईएसएफ की सुरक्षा देने वाली ख़बर पढ़ी है। सुप्रीम कोर्ट के जज ने पूछा था कि केंद्र ऐसे व्यक्ति को सुरक्षा क्यों दे रहा है? जज ने टिप्पणी करते हुए कहा था,

“जो बड़े उद्योगपति हैं, वह अपनी सुरक्षा के लिए प्राइवेट सुरक्षा बलों को हायर करने में सक्षम हैं। पहले पंजाब में उद्योगपतियों को सरकार द्वारा सुरक्षा दी जाती थी और अब मुंबई पहुँच गया है। वैसे हमलोग किसी भी एक्स, वाई, जेड व्यक्ति की सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं हैं लेकिन हमारी चिंता आम आदमी की सुरक्षा को लेकर है। ये क्या बकवास है? यह जनता का रुपया है। आम आदमी की सुरक्षा का क्या? “

एनडीटीवी के सूत्रों के अनुसार, 2013 में गृह मंत्रालय मुकेश अम्बानी को ‘राष्ट्रीय सम्पदा’ मानता था और इसीलिए उनकी उचित सुरक्षा की व्यवस्था करनी ज़रूरी थी। तब केंद्रीय मंत्री रहे मंत्री मनीष तिवारी ने कहा था कि अम्बानी को जेड श्रेणी सुरक्षा समीक्षा के बाद दी गई है।

यह भी जानने लायक बात है कि जिस यूथ कॉन्ग्रेस ने मुकेश अम्बानी को जेड श्रेणी सुरक्षा कवर दिए जाने को लेकर झूठ फैलाया है और इसका विरोध किया है, मनीष तिवारी कभी इसी यूथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हुआ करते थे।

उस समय गृह मंत्रालय का मानना था कि प्राइवेट सुरक्षा दस्ते के साथ मुकेश अम्बानी सेफ नहीं रहेंगे, क्योंकि प्राइवेट गार्ड्स को अधिकतम 12 बोर राइफल प्रयोग करने का अधिकार है। उनके पास आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल का अधिकार नहीं होता।