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मैं मुजाहिद्दीन का काम करता हूँ, लश्कर के साथ हूॅं: आतंकियों के कबूलनामे का वीडियो सेना ने जारी किया

भारतीय सेना के हाथों एक बड़ी क़ामयाबी लगी है। बुधवार (4 सितंबर) को सेना ने बताया कि पाकिस्तान के दो आतंकियों को जिंदा पकड़ने में कामयाबी मिली है। आतंकियों का संबंध लश्कर-ए-तैयबा से है। इनके कबूलनामे का वीडियो भी सेना ने जारी किया है।

सेना के कमांडर लेफ़्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन और जम्मू-कश्मीर के पुलिस एडीजी मुनीर ख़ान ने बताया कि दोनों घाटी में अशांति फैलाने की फ़िराक में थे। दोनों को 21 अगस्त को गिरफ़्तार किया गया था।

सेना द्वारा जारी वीडियो में आप देख सकते हैं कि खलील स्वीकार करता है, “मैं मुजाहिद्दीन का काम करता हूँ, लश्कर-ए-तैयबा के साथ हूँ।” खलील ने बताया कि उसने काचरबेन में एक हफ़्ते की ट्रेनिंग ली थी। वीडियो में उसने अपने कई अन्य साथियों का भी नाम लिया जो लश्कर से जुड़े हैं।  

वहीं, दूसरे आतंकी ने अपना नाम नज़ीम बताया जो पाकिस्तान के रावलपिंडी का निवासी है। उसने भी क़बूला कि वो लश्कर से जुड़ा हुआ है। उसने बताया कि उसे और खलील को मिलकर पाकिस्तानी फ़ौज की मदद से भारत में घुसपैठ करनी थी। 

मीडिया को संबोधित करते हुए लेफ़्टिनेंट जनरल ने बताया,

“घाटी में शांति को बाधित करने के लिएपाकिस्तान आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा है। 21 अगस्त को हमने दो पाकिस्तानी नागरिकों को गिरफ़्तार किया जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हैं।”

उन्होंने इस बात की भी जानकारी दी कि दोनों आतंकी लश्कर के एक बड़े ग्रुप की मदद के लिए घाटी में घुसे थे।

अपने आतंकी मंसूबों को पूरा करने के लिए पाकिस्तान नई साज़िश रच रहा है। घाटी और उसके बाहर भारत के अलग-अलग हिस्सों में रक्तपात की इस साजिश को अंजाम देने की फिराक में बदनाम खुफिया एजेंसी आईएसआई जुटा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जैश और लश्कर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोल खुलने के कारण आईएसआई ने एक नए नाम से आतंकी संगठन तैयार किया है। इसका नाम अल-उमर-मुजाहिद्दीन (AUM) है। इसका अगुआ मुश्ताक अहमद जरगर उर्फ मुश्ताक लातराम है।

सूत्र के हवाले से बताया गया है कि आईएसआई चाहता है कि भारतीय सेना मजबूर होकर निहत्थे लोगों पर गोली चलाए ताकि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के प्रोपगेंडा को मजबूती मिल सके। सूत्रों के मुताबिक इसी कड़ी में फेक तस्वीरें और न्यूजों को भी योजनाबद्ध तरीके से फैलाया जा रहा है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रोपगेंडा को अभी तक दुनिया में किसी ने समर्थन नहीं दिया है। सभी मुल्कों ने कश्मीर को भारत का आंतरिक मसला बताया है। इससे पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। इस बौखलाहट में उसके प्रधानमंत्री इमरान खान परमाणु जंग की धमकी भी दे चुके हैं।

अगर आपने तबरेज का नाम सुना है और रंजीत का नहीं तो जान लीजिए ‘उनका’ एजेंडा कामयाब रहा

मॉब लिंचिंग भी आजकल 2 तरह की हो गई है- ‘अच्छी’ लिंचिंग और ‘बुरी’ लिंचिंग। ‘अच्छी’ लिंचिंग वह है, जिसमें आरोपित हिन्दू हों और मृत व्यक्ति मुस्लिम। ‘बुरी’ लिंचिंग वह है, जिसमें इसका उल्टा हो। ‘अच्छी’ मॉब लिंचिंग पर हंगामा खड़ा किया जाता है, सरकार पर सवाल उठाए जाते हैं और ‘डर का माहौल’ साबित करने की कोशिश की जाती है। वहीं ‘बुरी’ मॉब लिंचिंग की ख़बर किसी कोने में पड़ी होती है, जिसे लेकर कोई आउटरेज नहीं होता।

मुंबई में एक ड्राइवर को सिर्फ़ इसीलिए मार डाला गया, क्योंकि साज़िश के तहत अफवाह फैलाया गया कि वह चोर है। यह साज़िश एक दूसरे बस के ड्राइवर ने की। इस मामले में अनवर, उसका भाई मिंटू सहित 4 लोग गिरफ़्तार किए गए हैं। यह घटना महाराष्ट्र के पालघर स्थित बोइसर की है। वहाँ एक बस ड्राइवर ने दूसरे ड्राइवर को लेकर हंगामा किया कि वह चोर है और उसके बस की बैटरी चुरा रहा था। इसके बाद कुछ लोगों ने उसे मार डाला।

मृतक का नाम रंजीत पांडेय है। रंजीत को जब मारा-पीटा जा रहा था तब वह काफ़ी मिन्नतें करता रहा, लेकिन किसी ने उसकी एक न सुनी। उसे 20 मिनट तक मारा-पीटा जाता रहा। उसके पेट और छाती पर लात-घूसों की बरसात कर दी गई। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, लेकिन मरने से पहले उसने घटना को लेकर अपने परिवार वालों को सब कुछ बताया। आपने किसी मानवाधिकार संगठन, विपक्षी नेता, कथित एक्टिविस्ट या फिर मीडिया के लोगों से कहीं भी रंजीत का नाम सुना क्या? आपने नहीं सुना।

आपने इसीलिए रंजीत का नाम नहीं सुना, क्योंकि उसकी मॉब लिंचिंग को लेकर किसी ने आवाज़ ही नहीं उठाई। क्यों नहीं उठाई? क्योंकि आरोपितों में मुस्लिम शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपितों में से 2 के नाम अनवर और मिंटू है, जो भाई हैं। अगर इस पर आउटरेज किया जाएगा तो लोगों को यह भी बताना पड़ेगा कि आरोपितों में अनवर और उसका भाई है। अब यही मामला बिगड़ जाएगा। फिर ‘डर का माहौल’ वाला वातावरण कैसे साबित किया जाएगा?

‘डर का माहौल’ तो हिन्दुओं द्वारा किसी मुस्लिम की ‘मॉब लिंचिंग’ के बाद बनता है न? यही कारण है कि आपने रंजीत का नाम नहीं सुना है, लेकिब तबरेज का नाम सुना है। चोरी करने के आरोप में झारखण्ड में भीड़ ने
तबरेज को मारा था जिसके कारण कथित तौर पर उसकी मौत हो गई। तबरेज का बदला लेने के लिए कई शहरों में हंगामे हुए। झारखण्ड के सरायकेला में ओवैसी की पार्टी के कुछ नेता पहुँचे और उन्होंने खुलेआम गुंडागर्दी की। महिलाओं के साथ बलात्कार करने की धमकियाँ दी गईं। गाँव में दहशत का माहौल बनाया गया और पुरुष घर छोड़ कर पलायन करने को मजबूर हुए।

इसी तरह दंगा भड़काने की साज़िश के तहत कुछ लोगों ने टिक-टॉक वीडियो बना कर कहा कि तबरेज को मारे जाने के बाद अगर उसका बेटा आतंकवादी बन जाता है तो फिर किसी को ये पूछने का हक़ नहीं होगा कि मुस्लिम आतंकवादी क्यों बनते? अभिनेता एजाज़ ख़ान ने भी आरोपितों का साथ दिया। लेकिन, कहीं भी सोशल मीडिया पर आपने रंजीत पांडेय को लेकर कोई वीडियो देखा क्या, जिसमें उनकी हत्या को लेकर सवाल पूछे गए हों? नहीं। तबरेज के नाम में ऐसा क्या था जो रंजीत के नाम में नहीं है?

इसी तरह राँची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र के हरमू फल मंडी के पीछे शेखर राम और बसंत राम को चार स्थानीय लोगों ने पकड़ा और उन्हें मज़हबी नारे लगाने को मजबूर किया। धार्मिक नारे न लगाने पर उन दोनों को चाकू मार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। एक की गर्दन पर चाकू मारा तो दूसरे के हाथ को लहुलूहान कर दिया। ये घटना भी तबरेज की मॉब लिंचिंग का बदला लेने के लिए हुई। जब तबरेज की मॉब लिंचिंग बड़ी ख़बर बनी तो उसका बदला लेने के लिए जो वारदातें हुईं, वो ख़बर क्यों नहीं बनीं?

झारखण्ड में भीड़ द्वारा तबरेज अंसारी की हत्या के विरोध में मालेगाँव में 1 लाख मुस्लिम सड़कों पर उतरे। ये सभी मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ कड़े क़ानून बनाने की माँग लेकर सड़कों पर उतरे थे। रैली के आयोजकों ने कहा था कि तबरेज का मारा जाना ‘फाइनल ट्रिगर’ है और अब विरोध का समय आ गया है। जहाँ तबरेज की हत्या के बाद सिर्फ़ एक क्षेत्र में 1 लाख लोग सड़कों पर उतरे, रंजीत पांडेय की लिंचिंग के ख़िलाफ़ कितनों ने धरना दिया? क्या सिर्फ़ उसी मॉब लिंचिंग के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा, जिसमें आरोपित हिन्दू हों?

तबरेज को शहीद का दर्जा तक देने की भी माँग की गई। मेरठ में भीड़ द्वारा मज़हबी टिप्पणियाँ की गईं और उन्मादी नारे लगाए गए। बदमाशों ने इंस्पेक्टर तक को नहीं छोड़ा। इंस्पेक्टर को सरेआम गिरेबान पकड़ कर धमकाया गया। इंस्पेक्टर का गला पकड़े जाने के बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

लेकिन, रंजीत पांडेय की मॉब लिंचिंग को लेकर सवाल नहीं पूछे जाएँगे, क्योंकि आरोपितों में अनवर शामिल है। गिरोह विशेष का नैरेटिव यह कहता है कि अनवर नाम सिर्फ़ और सिर्फ़ पीड़ित हो सकता है, आरोपित नहीं। आरोपित तो वो होता है जिसके नाना के फूफा के नाती के साढ़ू का पोता बजरंग दल के किसी कार्यकर्ता के मौसेरा भाई के साले का भांजा हो। उनका नैरेटिव यह भी कहता है कि अनवर सिर्फ़ और सिर्फ़ ‘बेचारा’ हो सकता है। अगर वह आरोपित है तो उस ख़बर को किसी कोने में पटक दो।

JNU की रोमिला थापर से CV माँग कर गुनाह किया है इस क्रूर, घमंडी, तानाशाही सरकार ने

युद्धों के साथ जुड़ी कहानियाँ हमेशा से सभ्यता में सुनी-सुनाई जाती रही हैं। युद्ध का मतलब ही संघर्ष होता है, शायद मनुष्य की संघर्ष करने की प्रवृति, मनुष्यों के लिए संघर्ष की कथाओं को रोचक बना देती है। यहाँ यह भी याद रखना जरूरी है कि युद्ध से जुड़ी हर कहानी सच्ची नहीं होती। अक्सर एक पक्ष दूसरे पक्ष को अमानवीय और क्रूर दिखाने के लिए कहानियाँ गढ़ता भी है। अगर आपके पास अच्छा प्रचार तंत्र हो, कुछ अच्छे लेखक हों तो कोई मुश्किल नहीं कि आप विपक्षी को बिलकुल ही राक्षस बना दें।

ऐसी कहानियों का एक अच्छा नमूना वो कहानी है जिसमें एक परिवार को चिट्ठी मिलती है। चिट्ठी उनके बेटे की थी जो कि जर्मनी के किसी युद्ध बंदी कैंप में था। लड़ाई के समय शायद पकड़ लिया गया होगा। चिट्ठी में बेटा लिखता है कि वो जर्मन युद्ध बंदी कैंप में है, ठीक ठाक है। उसे खाना बढ़िया मिलता है, उसके साथ कोई मार-पीट नहीं होती। परिवार को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। बेटे की चिट्ठी आने से परिवार थोड़ा निश्चिन्त होता है।

लेकिन चिट्ठी में एक अनोखी बात थी। ख़त के आखिर में जिक्र था कि सबसे छोटे बेटे “अल्फि” को स्टांप जमा करने का शौक है तो उसे शायद चिट्ठी पर लगा स्टांप पसंद आए। अनोखी बात इसमें ये थी कि अल्फि नाम का कोई छोटा बेटा तो घर में था ही नहीं! सबसे छोटा वाला ही तो जेल में था! हैरान परिवार के लोग थोड़ा दिमाग लगाते हैं कि शायद कोई गुप्त बात स्टांप के साथ जुड़ी है। वो स्टांप उखाड़ कर देखते हैं। वहाँ एक छोटा सा सन्देश था। बेटे ने लिखा था कि उसकी जबान काट ली गई है!

ये प्रोपगेंडा की कहानी क्यों है ? इसलिए क्योंकि युद्ध बंदियों के कैंप से ही नहीं, किसी भी जेल से भेजी गई चिट्ठी पर स्टांप नहीं चिपकाना पड़ता। जेल से आप मुफ्त में चिट्ठियाँ भेज सकते हैं। आम आदमी कभी जेल गया नहीं होता, उसे जेल से चिट्ठी नहीं आई होती, इसलिए उसे पता ही नहीं होता कि जेल की चिट्ठी पर डाक टिकट नहीं लगता। डाक टिकट के नीचे छुपे कूट सन्देश के नाम पर ज्यादातर लोगों को बरगलाना बहुत आसान है।

ऐसा नहीं है कि मिथ्या प्रचार किसी एक दौर में चला है। जब भी आम लोगों की सहानुभूति जुटा कर किसी विरोधी के खिलाफ उन्हें एकजुट किया जाता है, तो ऐसे प्रचार किए जाते हैं। ईसाइयों और समुदाय विशेष के क्रूसेड के समय से ही ये तरीका प्रचलन में है। अर्बन द्वित्तीय ने क्रूसेड के लिए लोगों को उकसाते हुए ऐसे प्रचार किए थे और हाल के दौर तक इसका इस्तेमाल होता दिखेगा।

कुछ दो दशक पहले यानी दस अक्टूबर, 1990 को एक कुवैती लड़की नायिराह अमेरिकी कॉन्ग्रेस समिति के सामने गवाही देने खड़ी हुई थी। उसने कई नरसंहारों का प्रत्यक्षदर्शी गवाह होने का दावा किया था। उसने बताया था कि उसने इराकी सैनिकों को, कुवैती बच्चों को अस्पताल के इनक्यूबेटर से खींच कर जमीन पर पटकते और मारते देखा है। ये ऐसा सनसनीखेज खुलासा था कि उस समय के लगभग हर समाचार-पत्र, हर रेडियो-टीवी कार्यक्रम में ये गवाही पूरे अमेरिका में दिखाई गई। तत्कालीन राष्ट्रपति बुश ने कई भाषणों में नायिराह की गवाही का जिक्र किया। बाद के, इराक पर, अमेरिकी हमले की कहानी सब जानते हैं।

थोड़े समय बाद जब CBC-TV ने अपने प्रोग्राम To Sell a War में इस गवाही की जाँच की तो अनोखी बातें पता चली। नायिराह की गवाही झूठी थी। वो युद्ध के समय कुवैत में नहीं थी। उसने इराकी सैनिकों को कोई नरसंहार करते नहीं देखा था। नायिराह दरअसल यूनाइटेड स्टेट्स में कुवैत के राजदूत की बेटी थी। कुवैती सरकार ने Hill & Knowlton नाम के पब्लिक रिलेशन संस्थान को युद्ध में अमेरिकी हस्तक्षेप के पक्ष में जनमत बनाने का ठेका दिया था। उसी के तहत ये झूठी गवाही दिलवाई गई थी।

मशहूर संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी इस गवाही को जम कर बेचा था। बाद में एमनेस्टी इंटरनेशनल के तत्कालीन प्रमुख जॉन हेअले ने, पोल खुलने पर पलटते हुए कहा कि ये अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकारों की मुहिम को कमजोर करने की साजिश है। ये बयान आने तक इराकी मानवाधिकारों को अमेरिकी पेट्रियट मिसाइलों ने चपटा कर दिया था।

प्रोपगेंडा के हथियारों को इसी रूप में इस्तेमाल होते देखना है तो आप आज के भारत में जरूर देखिए। जब भी किसी को नरभक्षी भेड़िया बताया जाता है तो यही किया जा रहा होता है। जब बार-बार किसी तथाकथित जुल्मों की दास्तान की पोल खुलने लगे तो यही इस्तेमाल हो रहा होता है। जब घटना के सत्य होने या ना होने पर सवाल उठाते ही आपको जालिमों-आततायियों का समर्थक घोषित किया जाए तो मान लीजिए कि असली पिशाचों का हमला हुआ है आप पर।

गौर कीजिए आसपास। किसी पर तेज़ाब से, किसी पर सरकारी तंत्र से हमले हो रहे हैं? क्या लोगों को आत्महत्या के लिए मजबूर किया जा रहा है? कहीं कोई तथाकथित इतिहासकार “शिक्षा के भगवाकरण” का शिकार होता तो नहीं सुनाई दे रहा? ऐसा होता दिखे तो सोचिएगा कि जहाँ कुछ ही दिन पहले प्रधानमंत्री से डिग्री दिखाओ जी कहा जा रहा था, वहाँ एक रिटायर हो चुके प्रोफेसर से, सीवी माँगना गलत क्यों है? अगर वो कहें कि ये ऐसी जगह है जहाँ डिग्री की जरूरत ही नहीं होती, तो ये भी पूछिएगा कि प्रधानमंत्री होने के लिए कौन सी शैक्षणिक योग्यताएँ जरूरी हैं?

बाकी इस बार जो शिक्षा के नाम पर किन्हीं कपोल-कल्पित जुल्मों की दास्तान सुनाई जा रही है, उस विधा को भी एट्रोसिटी प्रोपगेंडा (Atrocity Propaganda) कहते हैं। ऐसी चीज़ों को ध्यान से सीखिए, हम फोर्थ जेनेरशन (चौथी पीढ़ी) के युद्धों के दौर में हैं, यहाँ सूचना भी हथियार होती है।

मोदी के नाम से करंट खाने वाले इमरान के मंत्री का पाक मीडिया ने किया बॉयकॉट

पाकिस्तान की मीडिया ने देश के रेल मंत्री शेख रशीद अहमद का बहिष्कार करने का फैसला किया है। लंदन में अंडे खाने वाले शेख अहमद शेखी बखारने के चक्कर अपनी बेइज्जती करवाने के लिए मशहूर हैं। पाकिस्तान के पास पाव, आधा पाव का एटम बम होने का दावा करने वाले अहमद को एक बार मोदी का नाम लेते ही करंट लग गया था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान के नेशनल प्रेस क्लब (एनपीसी) ने उनके कवरेज पर अस्थायी तौर पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसा एक कैंसर पीड़ित पत्रकार के लिए शेख अहमद द्वारा ‘अपमानजनक’ भाषा का इस्तेमाल करने को लेकर किया गया है।

मंगलवार को कैंसर पीड़ित पत्रकार के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करने पर एनपीसी ने सात दिनों के लिए शेख रशीद पर प्रतिबंध लगाया है। क्लब की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि जियो टीवी के वीडियो पत्रकार नासिर से एनपीसी अध्यक्ष शकील करार के मिलने के बाद यह फैसला लिया गया। पत्रकार नासिर का रावलपिंडी के बेनजीर भुट्टो अस्पताल में कैंसर का इलाज चल रहा है।

नासिर ने करार को बताया कि रशीद ने हाल ही में जब अस्पताल का दौरा किया तो एक पत्रकार ने उनकी बीमारी के बारे में उन्हें बताया। इस पर रेल मंत्री ने नासिर के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जिससे उसकी भावनाएँ आहत हुईं।

शेख रशीद की गिनती इमरान खान के कैबिनेट के बड़बोले मंत्रियों में होती है। इसके कारण अक्सर वे खुद का मजाक भी बना लेते हैं। वे भारत पाकिस्तान के बीच एक-दो महीने में परमाणु युद्ध होने की भविष्यवाणी भी कर चुके हैं।

घाटी में पत्थरबाजों का शिकार बने असरार अहमद ने तोड़ा दम: 30 दिन में 5 नागरिक मारे गए

कश्मीर में पिछले महीने पत्थरबाजों का शिकार हुए कश्मीरी युवक असरार अहमद की बुधवार (सितंबर 4, 2019) तड़के श्रीनगर के अस्पताल में मौत हो गई। लेफ्टिनेंट जेनरल केजेएस ढिल्लन ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि 6 अगस्त को पत्थरबाजों ने असरार अहमद खान को निशाना बनाया था।

शौरा अस्पताल में उसका इलाज चल रहा था। उन्होंने बताया कि बीते 30 दिनों में घाटी में किसी नागरिक की मौत की यह पाँचवीं घटना है। सभी जानें आतंकियों, पत्थरबाजों और पाकिस्तान परस्तों ने ली है।

असरार अहमद की मौत के बाद श्रीनगर के कुछ इलाके में माहौल तनावपूर्ण है। एहतियात के तौर पर सुरक्षाबलों ने इलाके में फिर से प्रतिबंध लगा दिया गया है। डाउन टाउन और सिविल लाइंस इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

गौरतलब है कि, इससे पहले दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के बिजबेहरा इलाके में 25 अगस्त को पत्थरबाजों ने सेना का जवान समझकर एक ट्रक ड्राइवर की बर्बरता से हत्या कर दी थी। मृतक की पहचान 42 वर्षीय नूर मोहम्मद डार के रूप में हुई थी। नूर देर शाम ट्रक लेकर वापस घर लौट रहा था कि तभी वहाँ मौजूद कुछ पत्थरबाजों की नजर उस पर पड़ी। पत्थरबाजों ने उसके ट्रक को सुरक्षाबल की गाड़ी और उसे जवान समझ लिया। इसके बाद उन्होंने नूर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।

दो लोगों की लड़ाई में मृतक साहिल को मुस्लिम समझकर वामपंथी कविता कृष्णन ने फैलाया प्रोपेगेंडा

सेकुलर और लिबरलों का गिरोह समुदाय विशेष के किसी व्यक्ति की मौत पर किस तरह से राजनीति करने और प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए उतारू रहते हैं, इसका ताजा नमूना वामपंथी कविता कृष्णन के ट्वीट से मिला है। बता दें कि, कविता कृष्णन वही शख्सियत है, जिनकी हाल ही में ईमेल लीक हुई थी। लीक हुए इस ईमेल में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के विरोध में रणनीति तैयार की गई थी।

कृष्णन ने साहिल नाम के एक 23 वर्षीय लड़के की मौत पर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने साहिल को मुस्लिम बताते हुए इसे मॉब लिंचिंग, हेट क्राइम और मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा करार दिया। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि बड़े ही अफसोस की बात है कि मुस्लिमों के खिलाफ सांप्रदियक हिंसा कोई नैरेटिव नहीं, बल्कि सच्चाई है। उन्होंने इस ट्वीट में मोहम्मद आसिफ खान के द्वारा मुस्लिमों के खिलाफ हेट क्राइम और मॉब लिंचिग पर तैयार की गई रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा है कि उसने बिल्कुल सही रिपोर्ट पेश की है। वह कभी गलत खबरें नहीं फैलाता है।

क्विंट ने भी साहिल की मौत वाली खबर को खूब तोड़-मरोड़ कर पेश किया है। इसमें उसने साहिल के माता-पिता केे हवाले से लिखा है कि मुस्लिम होने की वजह से उसकी हत्या की गई। जबकि, सच्चाई कुछ और है और वो इसके बिल्कुल विपरीत है। 

सबसे पहली बात तो ये है कि जिस साहिल को मॉब लिंचिग का शिकार बताया जा रहा है। उसकी मॉब लिंचिंग में नहीं, बल्कि उसकी दो लोगों के साथ मोटरसाइकिल को रास्ता न देने की वजह से हाथापाई हुई थी। इस दौरान वो जख्मी हो गया था और फिर घर जाने के बाद उसकी हालत गंभीर हो गई। जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई। पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकरे ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ये शुक्रवार (अगस्त 30, 2019) की घटना है। इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिसमें से एक नाबालिग है। साथ ही पुलिस ने इस मामले में किसी भी तरह की सांप्रदायिक एंगल न होने की बात कही।

मगर, लिबरलों को तो बस प्रोपेगेंडा और झूठी खबर फैलाने का मौका चाहिए होता है। उसने साहिल का नाम देखा और उसे मुस्लिम समझकर प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू कर दिया। इसके बाद कई लोगों ने कविता कृष्णन की खिंचाई करते हुए खबरों की पुष्टि कर लेने की नसीहत दी। जर्नलिस्ट रौशनी सिंह ने कृष्णन को लिखा कि उन्हें बिना खबरों की पुष्टि किए हुए इस तरह से झूठी खबर नहीं फैलानी चाहिए। हालाँकि, उन्होंने ये भी लिखा कि कविता ने ऐसा पहली बार नहीं किया है। रौशनी ने कृष्णन को बताया कि साहिल के माता-पिता यकीनी तौर पर नहीं कह सकते कि साहिल की हत्या मुस्लिम होने की वजह से की गई। उन्हें शक है कि ऐसा हुआ होगा। इसके साथ ही रौशनी ने कहा कि उसके और आसिफ जैसे लोग ही बिना सच को जाने ही प्रोपेगेंडा फैलाने का काम करते हैं।

कविता कृष्णन जिस आसिफ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहती हैं कि उसकी रिपोर्ट हमेशा सही होती है, एक यूजर ने उसका भी पर्दाफाश कर दिया। ललिया नाम के एक यूजर ने लिखा कि आसिफ एक बार नहीं, बल्कि सौ बार ऐसी हरकतें कर चुका है। उन्होंने आसिफ के एक हालिया ट्वीट का स्क्रीनशॉट शेयर किया। जिसमें वो एक वीडियो को शेयर करते हुए मुस्लिमों के खिलाफ हो रही हिंसा के लिए पुलिस को संज्ञान लेने के लिए कहते हैं। मगर, पुलिस उन्हें फटकार लगाते हुए बताती है कि उन्होंने 2 साल पुराना वीडियो शेयर किया है। इस मामले में पहले ही कार्रवाई हो चुकी है। साथ ही पुलिस ने आसिफ को चेतावनी देते हुए कहा कि बिना तस्दीक के पुराने वीडियो को बार-बार शेयर कर साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने का प्रयास न करें, वरना उनके खिलाफ भी कार्यवाही की जा सकती है।

वहीं, नेशन फर्स्ट के सीनियर एडिटर प्रमोद कुमार सिंह ने भी कविता कृष्णन को फर्जी खबर फैलाने के लिए लताड़ लगाई है। उन्होंने लिखा कि ये कोई मॉब लिंचिग या हेट क्राइम की घटना नहीं थी। दो लोग मिलकर अगर किसी के साथ मारपीट करते है, तो उसे मॉब लिंचिग नहीं कहा जाता है। उन्होंने पुलिस के द्वारा किसी भी साम्प्रदायिक एंगल न होने की बात भी कही और साथ ही बताया कि साहिल एक सामान्य नाम है। उन्होंने बताया कि उनके भतीजे का नाम भी साहिल है और उनसे कभी किसी ने नहीं कहा कि ये एक मुस्लिम नाम है। प्रमोद सिंह ने कहा कि उनके रिपोर्टर भी वहाँ गए थे। वहाँ पर ऐसी कोई बात नहीं थी, जैसा कि वो दिखाने की कोशिश कर रही हैं। जर्निलस्ट स्वाति चतुर्वेदी ने भी प्रमोद कुमार सिंह के बात का समर्थन किया है।

मुद्रा योजना: 33 महीने में 1.12 करोड़ को रोजगार, शिशु लोन से 66% नौकरी पैदा

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मुद्रा योजना से 33 महीने में 1.12 करोड़ अतिरिक्त रोजगार पैदा हुए हैं। इनमें से 66 फीसदी नौकरी अकेले शिशु लोन से पैदा हुई है। इस योजना के तहत 50 हजार रुपए तक का कर्ज शिशु लोन के दायरे में आता है।

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से कराए गए सर्वे से यह बात सामने आई है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से संबंधित यह सर्वे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। इंडियन एक्सप्रेस ने मसौदा रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया है कि अप्रैल 2015 से दिसंबर 2017 यानी शुरुआती 33 महीनों में ही इस योजना से 1.12 करोड़ अतिरिक्त नौकरी पैदा हुई।

इसके मुताबिक इस योजना से 51.06 लाख लोग स्वरोजगार कर रहे हैं, जबकि 60.94 लाख लोग वेतन पर काम कर रहे हैं। योजना का लाभ उठाने वाले हरेक पाँच (20.6 प्रतिशत) में से एक ने लोन के पैसे से नया बिज़नेस शुरू किया। वहीं, अन्य कारोबारियों ने लोन के पैसों से पहले से चल रहे अपने बिज़नेस का विस्तार किया। मसौदा रिपोर्ट 27 मार्च, 2019 को तैयार की गई।

सर्वे की मुख्य बातें

  • मुद्रा योजना के तहत कुल 5.71 लाख करोड़ का लोन मुद्रा योजना की शिशु, किशोर और तरुण योजना के तहत बाँटा गया है। इसमें से 12.27 करोड़ के लोन पहले तीन सालों में बाँटे गए। बाँटे गए लोन की औसत रकम 46,536 रुपए रही।
  • योजना के तहत बाँटे गए लोन में से शिशु लोन (50,000 तक का लोन) का हिस्सा 42 प्रतिशत है। किशोर लोन (50,000 से 5 लाख रुपए तक) का हिस्सा 34 प्रतिशत है, जबकि तरुण लोन (पाँच लाख से लेकर 10 लाख तक का लोन) की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत है।
  • अतिरिक्त रोजगार का 66 प्रतिशत हिस्सा शिशु लोन से पैदा हुआ। किशोर लोन से 18.85% और तरुण लोन से 15.51% लोगों को रोज़गार मिला।

यह सर्वे, विनिर्माण, सेवाओं, संबद्ध कृषि, व्यापार और अन्य क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों में रोज़गार सृजन की जानकारी एकत्र करने के लिए किया गया था। सर्वे शुरू होने से पहले लगभग 5 करोड़ व्यक्ति (3.1 करोड़ स्व-नियोजित, 1.95 करोड़ काम पर रखे गए कर्मचारी) ऐसे प्रतिष्ठानों में कार्यरत थे, जिन्हें मुद्रा लोन का लाभ मिला था।

ग़ौरतलब है कि मुद्रा योजना (PMMY) के तहत बिना गारंटी के लोन मिलता है। इसके अलावा लोन के लिए कोई प्रोसेसिंग चार्ज भी नहीं लिया जाता है। मुद्रा योजना (PMMY) में लोन चुकाने की अवधि को 5 साल तक बढ़ाया जा सकता है। लोन लेने वाले को एक मुद्रा कार्ड मिलता है, जिसकी मदद से कारोबारी ज़रूरत पर आने वाला खर्च कर सकता है। कोई भी व्यक्ति जो अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है, वह PMMY के तहत लोन ले सकता है।

विधायकों की खरीद-फरोख्त: उत्तराखंड के पूर्व CM हरीश रावत पर कसा शिकंजा, FIR दर्ज करने की तैयारी में CBI

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम, कर्नाटक के कद्दावर कॉन्गेसी नेता डीके शिवकुमार के बाद अब उत्तराखंड के पूर्व सीएम हरीश रावत पर कानूनी शिकंजा कसता दिख रहा है। उनके खिलाफ 2016 में सामने आए स्टिंग वीडियो मामले में सीबीआई एफआईआर दर्ज करने की तैयारी में है। वीडियो में रावत सत्ता बचाए रखने के लिए कथित तौर पर विधायकों की खरीद-फरोख्त करते नजर आ रहे हैं।

जाँच एजेंसी की तरफ से इस संबंध में मंगलवार को हाई कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिसमें कहा गया कि इस मामले में प्रारंभिक जाँच पूरी हो चुकी है और अब वो हरीश रावत के खिलाफ मामला दर्ज करना चाहती है। कोर्ट की अगली सुनवाई 20 सितंबर को होने वाली है।

दरअसल, मार्च 2016 में विधानसभा में वित्त विधेयक पर वोटिंग के बाद 9 कॉन्ग्रेस विधायकों ने बगावत कर दी थी। जिसके बाद एक निजी चैनल ने हरीश रावत का एक स्टिंग जारी किया था। जिसमें रावत सरकार बचाने के लिए कथित तौर पर विधायकों से सौदेबाजी करते दिखे थे। इसके बाद तत्कालीन राज्यपाल कृष्णकांत पॉल द्वारा केंद्र सरकार को स्टिंग मामले की सीबीआई जाँच की संस्तुति भेजी गई। इसी बीच केंद्र ने संविधान के अनुच्छेद-356 का उपयोग करते हुए रावत सरकार को बर्खास्त कर दिया था।

हालाँकि, मामला हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में पहुँचने के बाद कोर्ट के आदेश पर कॉन्ग्रेस सरकार फिर से बहाल हो गई। कॉन्ग्रेस की सरकार वापस आने पर कैबिनेट बैठक में स्टिंग प्रकरण की जाँच सीबीआई से हटाकर एसआईटी से कराने का निर्णय किया गया। लेकिन केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया और हरीश रावत के खिलाफ सीबीआई की प्रारंभिक जाँच जारी रही। तत्कालीन बागी विधायक व वर्तमान में वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ हरक सिंह रावत ने भी कैबिनेट के इस निर्णय को हाई कोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी। इसमें कहा गया था कि जब एक बार राज्यपाल मामले की सीबीआई जाँच की संस्तुति केंद्र को भेज चुके हैं, तो आदेश वापस नहीं लिया जा सकता।

अलादीन ने शादी का झॉंसा दे हिंदू लड़की से बनाए संबंध, मलेशिया ले जाकर बेचने की फिराक में था

हरियाणा में पानीपत के यमुनानगर में लव जिहाद का एक मामला सामने आया है। अलादीन नाम के शख़्स ने पहले तो एक हिंदू लड़की को अपने प्रेम-जाल में फँसाया और फिर शादी का झाँसा दे उससे संबंध बनाए। इसके बाद वो लड़की को मलेशिया ले जाकर उसका सौदा करने की तैयारी में था। अलादीन अपनी इस चाल में क़ामयाब हो पाता, उससे पहले ही उसे पुलिस ने धर-दबोचा।

दैनिक जागरण के राष्ट्रीय संस्करण में छपी ख़बर

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर के अनुसार, 25 वर्षीय अलादीन और 21 वर्षीय लड़की साथ पढ़ते थे। अलादीन और लड़की के बीच दोस्ती हुई जो धीरे-धीरे प्रेम में तब्दील हो गई। अलादीन ने शादी कर मलेशिया ले जाने का झाँसा दे लड़की से संबंध बनाए। बाद में उसने शादी से इनकार कर लड़की से बात करना बंद कर दिया।

पूरे प्रकरण की जानकारी लड़की ने जब अपने परिजनों को दी, तो उन्होंने थाने में जाकर अलादीन के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया। अलादीन के पास से लड़की का पासपोर्ट और वीज़ा बरामद हुआ है, जिसमे आरोपित ने अपना 15 दिन का वीज़ा लगवाया था, जबकि लड़की का वीज़ा 6 महीने का था। शक़ जताया जा रहा कि आरोपित लड़की को मलेशिया ले जाकर बेचने की फ़िराक में था। परिजनों की शिक़ायत पर पुलिस ने अलादीन को धर-दबोचा।

महिला थाने के डीएसपी प्रदीप राणा ने बताया कि पीड़िता की शिक़ायत पर आरोपित के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया है।

विश्व हिंदू परिषद के संयोजक गगन प्रकाश का कहना है कि ये मामला बेहद गंभीर है, आरोपित अलादीन के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो घटना के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किए जाएँगे। उनका कहना है कि इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं।

लंदन में फिर पाकिस्तानियों की गुंडई, भारतीय उच्चायोग पर फेंके पत्थर और स्मोक बम

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में फिर से पाकिस्तानियों ने उत्पात मचाया है। यहॉं स्थित भारतीय उच्चायोग के सामने
मंगलवार (सितंबर 3, 2019) को पाकिस्तानी कश्मीर के नाम पर इकट्ठा हुए और फिर सैकड़ों की भीड़ ने दफ्तर पर हमला किया। बिल्डिंग पर अंडे, टमाटर, जूते, पत्थर, स्मोक बम और बोतलों से हमला किया गया।

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद पाकिस्तानियों ने लंदन में दूसरी बार ऐसी हिमाकत की है। इससे पहले 15 अगस्त को उच्चायोग के सामने देश की स्वतंत्रता का जश्न मना रहे भारतीयों पर पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों ने हमला किया था।

कश्मीर पर अपने प्रोपगेंडा को ​समर्थन नहीं मिलने से निराश पाकिस्तान के हुक्मरान दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारतीय प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की साजिश रच रहे हैं। बीते दिनों दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता तेजिंदर बग्गा ने एक ऑडियो जारी कर इस साजिश का खुलासा किया था। ऑडियो में पेरिस में भारत विरोधी प्रदर्शन की आयोजक एक पाकिस्तानी महिला इसमें शामिल होने के लिए पैसे का लालच देती सुनाई पड़ रही है।

भारतीय उच्चायोग ने ट्वीट कर मंगलवार को हुए हमले की जानकारी दी। भारतीय उच्चायोग ने प्रदर्शन का फोटो ट्वीट करते हुए कहा, “लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने दूसरी बार हिंसक प्रदर्शन किया गया।” तस्वीर में उच्चायोग की खिड़कियों के शीशे टूटे हुए दिखाई दे रहे हैं।

पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों ने अपने इस विरोध-प्रदर्शन को ‘कश्मीर फ्रीडम मार्च’ का नाम दिया था। मार्च पार्लियामेंट स्क्वेयर से शुरू होकर भारतीय उच्चायोग की बिल्डिंग तक पहुँचा। मार्च का नेतृत्व यूके की लेबर पार्टी के कुछ सांसदों ने किया। प्रदर्शनकारियों के हाथ में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) का झंडा और प्लेकार्ड था, जिस पर लिखा था- कश्मीर में गोलाबारी बंद करो और चिल्लाते हुए कह रहे थे- ‘हम आजादी चाहते हैं।’ प्रदर्शनकारियों में मुख्य रूप से ब्रिटिश पाकिस्तानी और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) मूल के ब्रिटिश नागरिक शामिल थे।

लंदन के पाकिस्तानी मूल के मेयर सादिक खान ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि इस बारे में लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस से बात की है। जल्द से जल्द दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि, 15 अगस्त को हुए हमले में पाकिस्तानी मूल के हमलावरों ने बच्चों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा था। उन्होंने जश्न मना रहे भारतीयों पर पानी, जूस, आलू, टमाटर, अंडे और भी कई अन्य चीजें फेंक कर कर उन्हें नुकसान पहुँचाने की कोशिश की।