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विधानसभा से चोरी हुए क़ीमती फर्नीचर, मिले कहाँ? पूर्व स्पीकर के घर और उनके बेटे के शोरूम में

आंध्र प्रदेश विधानसभा से कुछ क़ीमती फर्नीचर गायब हो गए थे। इस सम्बन्ध में पुलिस ने केस भी दर्ज किया था। अब यही फर्नीचर विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष कोडेला शिवा प्रसाद राव के गुंटूर स्थित निजी दफ़्तर से मिले हैं। ऐसा करने के लिए वह अनधिकृत हैं क्योंकि विधानसभा की संपत्ति को कोई भी नेता अपने व्यक्तिगत प्रयोग के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकता।

राजस्व विभाग और विधानसभा के अधिकारियों ने गुंटूर स्थित गौतम हीरो शोरूम से भी कुछ फर्नीचर बरामद किए। ये शोरूम पूर्व विधानसभाध्यक्ष के बेटे शिवराम कृष्णा का है। दोनों पिता-पुत्र के ख़िलाफ़ विधानसभा की संपत्ति को व्यक्तिगत प्रयोग के लिए कहीं और लेकर जाने के सम्बन्ध में मामला दर्ज किया गया। विधानसभा के अधिकारियों ने पहले ही फर्नीचर की पहचान कर ली थी और उसके बाद मामला दर्ज किया गया।

शोरूम में कम से कम 70 ऐसी चीजें थीं, जिन्हें विधानसभा से चुरा कर लाया गया था। हालाँकि, विधानसभा अधिकारियों ने जिन चीजों की सूची दी थी, उनकी संख्या इससे कम ही थी। पूर्व विधानसभाध्यक्ष के ख़िलाफ़ धारा 409 (लोक सेवक या बैंक कर्मचारी, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन) और धारा 411 (चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

विधानसभा के अधिकारी एम ईश्वर राव की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। ईश्वर राव ने हाईकोर्ट से अनुमति माँगी थी कि पूर्व विधानसभा स्पीकर के दफ्तर और उनके बेटे के शोरूम से विधानसभा की सम्पत्तियाँ वापस ली जाएँ। उन्होंने उच्चाधिकारियों को इस सम्बन्ध में जून में ही पत्र लिखा था लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राव ने स्वीकार किया था कि विधानसभा के फर्नीचर को हैदराबाद से अमरावती ट्रांसफर करते समय उनमें से कुछ फर्नीचर उनके आवास पर भेजे गए थे। पूर्व स्पीकर का कहना था कि फर्नीचर अस्थायी विधानसभा में ख़राब हो सकते थे, इसीलिए उनकी सुरक्षा और मेंटेनन्स के लिए ऐसा किया गया। टीडीपी नेता राव ने हालिया चुनाव में हार का सामना किया है। विवाद होने के बाद यह फर्नीचर के रुपए देने के लिए भी तैयार हैं।

आतंकियों से भी ज्यादा लोगों की जान लेते हैं नक्सली, इसलिए अमित शाह ने लाल आतंक के खिलाफ खोला मोर्चा

छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा। अप्रैल 2010 में यहॉं नक्सली हमले में 76 सीआरपीएफ जवानों की मौत हो गई थी। जून 2019 झारखंड के सरायकेला खरसांवा जिले में नक्सली हमले में पांच पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। 9 साल के इस अंतराल में भले ही नक्सलवाद की जड़ें सिकुड़ी हो और उनके हमलों में कमी आई है, फिर भी लाल आतंकवाद आज भी देश के लिए आतंकवाद से ज्यादा बड़ी चुनौती बना हुआ है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आँकड़ों पर ही गौर करे तो पता चलता है कि 2014 से 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में 1,315 लोग आतंकवाद की भेंट चढ़े। इसी दौरान देश के नक्सल प्रभावित इलाक़ों में लाल हिंसा के शिकार लोगों की संख्या 2056 है।

यही कारण है कि नक्सल समस्या को खत्म करना अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्राथमिकता है। नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सोमवार (अगस्त 26, 2019) की बैठक में उन्होंने इस लड़ाई को जीतने के लिए नक्सलियों के अर्थ तंत्र को चोट पहुॅंचाना जरूरी बताया। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों पर नकेल कसने में यह फॉर्मूला कारगर भी साबित हुआ है।

आम लोगों से लेकर सुरक्षा बलों के जवानों की जान लेने वाला नक्सलवाद 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी नामक गॉंव से शुरू हुआ था। धीरे-धीरे बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा जैसे कई राज्यों में यह फैल गया।

आईआईएससी बेंगलुरु में असिस्टेंट प्रोफेसर अभिषेक बनर्जी ने ऑपइंडिया को बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बता चुके हैं। मनमोहन सिंह की सरकार ने करीब 30 हजार जवानों के साथ इनसे निपटने के लिए ऑपरेशन ग्रीन हंट शुरू भी किया था। उस समय पी चिदंबरम देश के गृह मंत्री हुआ करते थे। इस वामपंथी हिंसा के कारण झारखंड ने कितनी पीड़ा झेली है इस पर बनर्जी एक किताब ‘ऑपरेशन जोहार’ भी लिख चुके हैं।

यह दूसरी बात है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट को लेकर कॉन्ग्रेस नीत यूपीए सरकार ने शुरू में जो प्रतिबद्धता दिखाई थी वह धीरे-धीरे अपने ही नेताओं के विरोध के कारण ढीली पड़ गई। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद इस दिशा में फिर से ठोस प्रयास शुरू हुए हैं। इसका नतीजा भी दिख रहा है।

इसी साल 25 जून को केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया था कि 2009-13 के मुकाबले 2014-18 के बीच नक्सली घटनाओं में 43 फीसदी से ज्यादा और इसके कारण जान गॅंवाने वालों की संख्या में 60 फीसदी से अधिक की कमी आई है। आँकड़े बताते हैं कि 2009-13 के बीच 8,782 नक्सली घटनाएँ हुईं जिनमें 3,336 आम नागिरकों और सुरक्षा बलों के जवानों की मौत हुई थी। 2014-2019 के बीच 4,969 नक्सली हमलों में 1,321 मौतें हुईं। इसी समय अंतराल के बीच नक्सलियों के मारे जाने में करीब 11 फीसदी का इजाफा हुआ। 2009-2013 के बीच 665 नक्सली मारे गए थे जो 2014-2018 के बीच 735 हो गया। 2008 में 223 जिले नक्सल प्रभावित थे जो आज घटकर 90 हो गई है। ये सभी जिले देश के 11 राज्यों में फैले हैं। इनमें छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित माने जाते हैं।

आँकड़ों से साफ है कि बीते पॉंच साल में नक्सली हिंसा में कमी आई है और कई ज़िलों को नक्सलियों से मुक्त कराने में सुरक्षा बल कामयाब रहें हैं। लेकिन, एक चिंताजनक पहलू यह है कि इस दौरान कई नए जिलों में नक्सली गतिविधियॉं शुरू हुई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक देश के 8 जिलों में पहली बार नक्सल गतिविधियाँ देखी गई हैं। इनमें से 3 जिले केरल, 2 ओडिशा के और छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा आंध्र प्रदेश के एक-एक जिले हैं। इसका एक बड़ा कारण वामपंथियों और उनके शुभचिंतकों का वो गिरोह है जो शहरों में बैठकर अपनी हिंसा को अंजाम देने के नए-नए इलाकों की तलाश में लगे रहते हैं।

यही कारण है कि प्रभावित इलाकों में सख्ती और विकास कार्यों को तेजी देने के साथ-साथ केंद्र सरकार ने अर्बन नक्सलियों पर शिकंजा कसना शुरू किया है। बीते साल ऐसे लोगों पर शिकंजा कसने के लिए कई शहरों में एक साथ छापेमारी भी की गई थी।

दूसरी ओर, इन इलाकों में विकास के कार्यों पर भी केंद्र सरकार विशेष ध्यान दे रही है। उल्लेखनीय है कि नक्सली अपने इलाकों में विकास की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं कर पाते। वे स्कूलों, अस्पतालों, मोबाइल टॉवरों को निशाना बनाते रहते हैं।

पिछले पॉंच सालों में इन इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, सेलफोन कनेक्टिविटी, पुल, स्कूल जैसे विकास कार्यों पर तेजी से काम हो रहा है। सर्वाधिक नक्सल प्रभावित 30 जिलों में नवोदय विद्यालय और केंद्रीय स्कूल चलाए जा रहे हैं। इन इलाकों में युवाओं की आजीविका के लिए ‘रोशनी’ नामक विशेष पहल की गई है। बीते साल केंद्र सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए ‘समाधान’ नामक 8 सूत्री पहल की घोषणा की थी। इसके तहत नक्सलियों से लड़ने के लिए रणनीतियों और कार्ययोजनाओं पर जोर दिया गया है। स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस स्कीम के तहत तीन सालों (2017-2020) के लिए तकरीबन 3,000 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। इससे लाभान्वित होने वाले राज्यों में बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और केरल शमिल हैं।

बीते साल पुणे पुलिस ने कुछ अर्बन नक्सलियों के पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन और कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से संपर्क का खुलासा भी किया था। ऐसे में देश को भीतर से खा रही इस समस्या को पूरी तरह खत्म करना बेहद जरूरी है। जैसा कि बनर्जी कहते हैं, “लोग लंबे अरसे से वाम हिंसा के शिकार हैं। बहुत हुआ। अब वक्त है आर-पार की लड़ाई का।” उम्मीद की जानी चाहिए नक्सली जल्द ही बीते दिनों की बात होंगे।


‘हम कश्मीर लेने की बात करते थे, अब ये हाल है कि POK बचाना भी मुश्किल हो गया है’ – Pak सांसद

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की हर जगह खिंचाई हो रही है। पाकिस्तान की संसद में इमरान खान को कोसने के बाद इस बार मीडिया में कुछ इसी तरह का बयान दिया है पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने।

बिलावल ने पाकिस्तान में मीडिया से कहा कि पहले हम भारत को धमकी देते थे कि हम उससे कश्मीर छीन लेंगे, लेकिन इस नाकाम सरकार के चलते अब हालात ये हो गए हैं कि हमें मुजफ्फराबाद बचाने के लाले पड़ गए हैं।
कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पूरी दुनिया में समर्थन के लिए घुमते रहे लेकिन एक भी देश पाकिस्तान के पक्ष में खड़ा नजर नहीं आया। वहीं इमरान खान की आलोचना पाकिस्तान में मीडिया से लेकर आम जनता तक कर रही है।

बिलावल ने एक बार फिर प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तान की सेना पर तंज कसते हुए कहा कि इमरान खान इलेक्टेड (जनता द्वारा चुना हुआ) नहीं, सिलेक्टेड (फौज द्वारा चुना हुआ) पीएम है। मुल्क की जनता अब सिलेक्टेड और सिलेक्टर्स से जवाब माँग रही है।

दरअसल, मुजफ्फराबाद पाक-अधिकृत कश्मीर (POK) के आज़ाद कश्मीर क्षेत्र की राजधानी और मुख्यालय है। यह शहर मुजफ्फराबाद ज़िले का भाग है और झेलम व किशनगंगा (जिसे पाकिस्तान में नाम बदलकर अब ‘नीलम नदी’ कहते हैं) नदियों के किनारे बसा है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और रावलपिंडी से इस की दूरी 138 किलोमीटर है, जबकि एबटाबाद से इसका फासला मात्र 76 किलोमीटर है।

मीडिया को सम्बोधित करते हुए बिलावल भुट्टो की नाराजगी साफ़ देखी जा सकती है। इस्लामाबाद में उनकी पार्टी पीपीपी की एक अहम बैठक के बाद मीडिया के साथ बातचीत करते हुए बिलावल भुट्टो ने कहा कि अब ये बात बिल्कुल साफ हो गई है कि वर्तमान सरकार जितनी नाकाम साबित हुई है, पहली की कोई भी सरकार इस कदर नाकाम नहीं हुई। इमरान खान पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा- “आपने लोकतंत्र के साथ जो खिलवाड़ किया है, उसे हमने बर्दाश्त कर लिया।”

अपनी बातचीत में भुट्टो ने कहा- “आपने देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद कर दी, हमने उसे भी बर्दाश्त कर लिया। आप केवल सोते रहे और जब जागे तो विरोधियों को दबाने के लिए। आप आराम से सोते रहे और मोदी ने कश्मीर छीन लिया। पहले हमारी कश्मीर नीति क्या होती थी? हम प्लान बनाते थे कि कैसे श्रीनगर को लिया जाए? लेकिन अब सिलेक्टेड पीएम इमरान खान के चलते यह हालात बन गए हैं कि हमें सोचना पड़ रहा है कि हम भारत से मुजफ्फराबाद कैसे बचाएँगे?”

इमरान खान सरकार से अपनी नाराजगी प्रकट करते हुए बिलावल भुट्टो ने आगे कहा- “हमारी विदेश नीति क्या है? हमारी आर्थिक नीति क्या है? ये उस सब का नतीजा होता है जब एक सिलेक्टेड (फौज द्वारा चुना गया) एक आदमी को सिलेक्ट (इमरान खान) को प्रधानमंत्री के पद पर बैठाती है। यह सिलेक्टेड व्यक्ति केवल अपने सिलेक्टर्स को खुश करने के लिए देश को तबाह कर देता है। देश की जनता महँगाई की सुनामी में डूब रही है। कश्मीर भी हमारे हाथों से निकल गया। अब यहाँ सवाल यह उठता है कि हम किसे दोषी ठहराएँ? सिलेक्टेड व्यक्ति को या सिलेक्टर्स को? देश में कोई भी क्षेत्र देख लीजिए। हर जगह कठपुतली (इमरान खान) नाकाम हुई है। अब हम दोनों से हिसाब लेंगे।”

PM मोदी की तारीफ कर बुरे फँसे शशि थरूर, कॉन्ग्रेस ने माँगा स्पष्टीकरण

पीएम नरेंद्र मोदी की तारीफ करना कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के लिए मुसीबत बन गया है। पहले पार्टी के सांसदों ने इस बयान को लेकर थरूर की आलोचना की और अब केरल कॉन्ग्रेस ने उनसे स्पष्टीकरण माँगा है। राज्य की केरल ईकाई के अध्यक्ष मुलापल्ली रामचंद्र ने उनसे जवाब माँगा है। कन्नूर में रामचंद्र ने कहा कि उन्होंने थरूर से प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करने को लेकर स्पष्टीकरण चाहते हैं। उनके स्पष्टीकरण के आधार पर ही भविष्य की कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। 

इससे पहले पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने शशि थरूर के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा था कि उन्हें इस तरह का बयान सार्वजनिक तौर पर न देकर पार्टी के समक्ष रखना चाहिए था। सोनिया गाँधी के बयान के बाद से कई कॉन्ग्रेसी नेताओं ने थरूर की जमकर आलोचना की। केरल में विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नितला ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा था कि मोदी सरकार की गलतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि मोदी सरकार के हजारों गलत काम के बाद एक अच्छे कार्य के लिए प्रधानमंत्री मोदी की महिमामंडन करने की जरूरत नहीं है।

राज्यसभा में कॉन्ग्रेस उप नेता आनंद शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री और सरकार के कामों की आलोचना करना विपक्ष का कर्तव्य है। इसे खलनायक की तरह पेश करना नहीं कहा जा सकता है। विपक्ष से यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए की वह सरकार जो भी करेगी, उसकी तारीफ करेगा। इसके साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने भी थरूर के बयान की तीखी आलोचना की थी।

बता दें कि थरूर ने कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश और अभिषेक मनु सिंघवी के बयान का समर्थन करते हुए कहा था कि हर समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खलनायक की तरह पेश करना सही नहीं है। उनके अच्छे काम के लिए उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए। इससे उनकी (कॉन्ग्रेस) आलोचना को विश्वसनीयता मिलेगी। पार्टी के नेताओं की आलोचनाओं से बेपरवाह थरूर ने कहा कि उनके रुख में कुछ भी गलत नहीं है।

अब कार्ति चिदंबरम पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, गिरफ्तारी से रोक हटाने की माँग पर ED जा रहा कोर्ट

INX मीडिया मामले में CBI की कस्टडी में भेजे गए पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम के बाद अब उनके बेटे कार्ति चिदंबरम पर भी गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सूत्रों का कहना है कि वह इस मामले में चिदंबरम के बेटे कार्ति को मिली जमानत का विरोध करते हुए मामला कोर्ट में लेकर जाएगा। उनकी जमानत खारिज किए जाने के बाद उन्हें भी हिरासत में लेकर इस मामले में पूछताछ किए जाने की रणनीति ED बना रही है।

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्ति की गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इतना ही नहीं, ED सुप्रीम कोर्ट से पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर लगी रोक (यह रोक सिर्फ ED संबंधित मामलों के लिए है, CBI के मामले में सीनियर चिदंबरम हिरासत में हैं) हटाने की भी माँग कर रहा है। जाँच एजेंसी सुप्रीम कोर्ट में एक और अर्जी दाखिल करने जा रहा है। उधर, पी. चिदंबरम ने ईडी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि ईडी द्वारा उनकी जब्त सारी संपत्ति वैध हैं।

दरअसल, INX मीडिया घोटाले में कार्ति पर आरोप लगे हैं कि उन्होंने अपने पिता के पद का दुरुपयोग करते हुए इस घोटाले को अंजाम दिया। आईएनएक्स मामले में पी चिदंबरम इन दिनों सीबीआई की कस्टडी में हैं। ऐसे में अब खबर है कि ईडी द्वारा इस मामले में कार्ति पर शिकंजा कसने के लिए उनकी जमानत खारिज किए जाने की याचिका कोर्ट में लगाई जाएगी। ईडी उनकी गिरफ्तारी पर से रोक हटाने की माँग करेगा।

हालाँकि, इससे पहले जब भी ईडी और सीबीआई ने इस मामले में पूछताछ के लिए पिता-पुत्र को बुलाया है, दोनों ही जाँच एजेंसियों के सामने पेश हुए हैं। ऐसे में ईडी का कहना है कि इस मामले की आगे की जाँच जारी रखने के लिए कार्ति चिदंबरम की जमानत रद्द किए जाने की जरूरत है।

मनी लॉन्ड्रिंग केस की जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) का दावा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने विदेशों में संपत्तियाँ बनाई हैं। ED का कहना है कि केस के सह-आरोपितों के साथ कॉन्ग्रेस नेता विदेशों में संपत्ति को बेचने और विदेशी बैंक खातों को बंद करने के सबूत से भी छेड़छाड़ कर रहे रहे हैं। सोमवार (अगस्त 26, 2019) को जाँच के लिए कस्टडी बढ़ाने की माँग करते हुए जाँच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट को यह दलील दी।

पाक सरकार के मजे ले रहा ट्विटर यूज़र, 3 हीरो को बताया RAW operative, आलिया से पहले…

टिमाटर-नान के भाव तय करने से लेकर हिंदुस्तान पर न्यूक्लियर हमला करने तक हर चीज़ में नाकाम साबित हो रहे पाकिस्तान के मंत्री कितने खलिहर हैं, इसका नज़ारा एक ट्विटर यूज़र ने पेश किया है। उसने पाकिस्तान के संघीय साइंस एन्ड टेक्नोलॉजी मंत्री चौधरी फ़वाद हुसैन के ब्लू-टिक वाले, ‘वेरिफाइड’ ट्विटर अकाउंट पर संदेश भेज कर पाकिस्तान में रह रहे R&AW ऑपरेटिव की पहचान बताने का लालच दिया। न केवल पहली बार गच्चा खा कर मंत्री जी उससे चैट करते रहे, बल्कि बार-बार यह जान कर भी कि वह बेवकूफ बना रहा है, समय बर्बाद कर रहा है, उससे बतियाने और जानकारी लेने के लोभ का संवरण नहीं कर पाए।

‘हेलो, मैं मुखबिर बोल रहा हूँ’

शश नामक ट्विटर यूज़र ने मंत्री साहब को ट्विटर पर संदेश भेजकर कहा कि वह अभी-अभी अपने हिंदुस्तानी दोस्त के साथ शराब पीकर आ रहा है, और उस दोस्त ने बताया कि उसका (दोस्त का) भाई पाकिस्तान में तैनात R&AW एजेंट है। यही नहीं, वह किसी मंत्रालय में है। शश ने उसकी तस्वीर और अन्य गुप्त जानकारियाँ होने का भी दावा किया।

मंत्री जी की जीभ ‘कैसी जीभ लपलपाई’ वाले टीवी एड की तरह लपलपाने लगी, और उन्होंने डिटेल्स भेजने के लिए कहा। शश ने सैफ़ अली खान अभिनीत फिल्म ‘एजेंट विनोद’ से सैफ की तस्वीर भेज दी। न केवल तस्वीर भेजी, बल्कि साथ में लिख भी दिया कि उसका नाम “विनोद राठौर” है, और सब उसे ‘एजेंट विनोद’ कहते हैं।

किसी भी ऐसे आदमी को, जिसे ढंग के काम हैं, समझ में आ जाएगा कि उसके साथ मजाक चल रहा है, प्रैंक हो रहा है। लेकिन पाकिस्तान जैसे तकनीक चुरा के परमाणु बम बनाने वाले देश के साइंस एंड टेक्नोलॉजी मंत्री को ‘समय बिताने के लिए करना है कुछ काम’ तो चाहिए ही! इसीलिए वे ‘एजेंट विनोद’ को पहचान कर भी डटे रहे मैदान में।

फिर शश ने भेजी जॉन अब्राहम की तस्वीर। फिल्म मद्रास कैफे और ‘रोमियो अकबर वॉल्टर (RAW)’ में वह भी रॉ एजेंट बन चुके हैं। इस बार मंत्री जी की समझ में तो आ गया कि उनका ‘कीमती’ समय बर्बाद किया जा रहा है, लेकिन उनके पास चूँकि इससे बेहतर कोई काम था नहीं, इसलिए उन्हें किसी जुआरी की तरह ‘एक बार और’ किस्मत आज़माने में कोई बुराई नहीं दिखी।

इसके बाद शश ने दो फिल्मों में रॉ एजेंट बन चुके सलमान खान की ‘एक था टाइगर’ की तस्वीर भेजी। 2012 की ₹199 करोड़ कमाने वाली फिल्म हालाँकि आधिकारिक रूप से पाकिस्तान में प्रतिबंधित थी, लेकिन हुसैन साहब ने टॉरेंट से पायरेटेड कॉपी ज़रूर देखी होगी, क्योंकि वे न केवल सलमान को पहचान गए बल्कि यह भी समझ गए कि यहाँ केवल उनके मज़े लिए जा रहे हैं। फिर उन्होंने शश को ब्लॉक कर दिया।

उसके बाद शश ने ‘दुःखी’ होकर ट्वीट किया कि आलिया की तस्वीर भेजना बाकी था। आलिया भट्ट ने 2018 की ‘राज़ी’ में पाकिस्तान में तैनात रॉ एजेंट का किरदार अदा किया था।

FACT CHECK: सऊदी के व्यक्ति ने बेटे को गिफ्ट देने के लिए ₹2600 करोड़ में ख़रीदे 2 एयरक्राफ्ट्स?

सटायर वेबसाइट ‘द थीन एयर’ ने एक आर्टिकल प्रकाशित किया, जिसे कई लोगों ने असली समझ कर जम कर शेयर किया। न सिर्फ़ सोशल मीडिया के लोग बल्कि टाइम्स नाउ जैसे बड़े मीडिया संस्थानों ने भी इस लेख को सच्ची घटना समझ कर प्रकाशित किया। मज़ाकिया ख़बरें प्रकाशित करने वाली वेबसाइट ने अपने लेख में लिखा कि सऊदी के एक व्यक्ति ने ग़लती से अपने बेटे को गिफ्ट देने के लिए 2 एयरबस ख़रीद लिया। व्हाट्सप्प पर भी ये स्टोरी खूब सर्कुलेट हुई।

इस लेख के अनुसार, सऊदी का उक्त व्यक्ति 2 एयरक्राफ्ट्स के सिर्फ़ मॉडल खरीदना चाहता था लेकिन ग़लती से उसने असली एयरक्राफ्ट्स ख़रीद ली। 329 मिलियन यूरो ख़र्च कर उसने ऐसा किया और बाद में कहा कि इतना मूल्य उचित है। अर्थात, उसने 2600 करोड़ से भी अधिक रुपए ख़र्च कर दिए।

उसने अपने अमेरिकन एक्सप्रेस कार्ड से पे कर दिया और बाद में कम्पनी ने कॉल किया कि दोनों असली एयरक्राफ्ट्स रेडी हैं। सऊदी के उस व्यक्ति ने फिर एक एयरक्राफ्ट अपने कजन को गिफ्ट में दे दिया। यह थी उस लेख की बात, जो सटायर वाली वेबसाइट में छपी थी।

टाइम्स नाउ ने तो ‘तुम फेंको’ नमक वेबसाइट से उठा कर इस लेख को प्रकाशित कर दिया। टाइम्स नाउ ने ‘तुम फेंको’ नामक वेबसाइट के हवाले से इस ख़बर को छाप दिया। देखिए कैसे टाइम्स नाउ ने इस ख़बर को ओरिजिनल समझा:

टाइम्स नाउ भी फँसा फेक न्यूज़ की जाल में

इसके अलावा ट्विटर पर भी कुछ लोगों ने ट्वीट करते हुए इस ख़बर को सच्ची समझ कर इस पर प्रतिक्रिया दी:

इस खबर की सच्चाई यह है कि इसे मज़ाकिया ख़बरें प्रकाशित करने वाले वेबसाइट ने प्रकाशित की है और यह पूरी तरह सटायरिकल स्टोरी है और इसे हँसी-मज़ाक के लिए बनाया गया है। इस वेबसाइट पर और भी ऐसी कई सटायर वाली खबरें हैं, जैसे- “हॉन्गकॉन्ग एयरपोर्ट को मेनलैंड चीन में भेज दिया जाएगा” और “लंदन में दुनिया का पहला भूमिगत एयरपोर्ट का निर्माण हुआ है।”

हिंदुओं से पिट गए? उसे गोली क्यों नहीं मारी? आप समुदाय पर एक धब्बा हैं – हरियाणा के जज फ़ख़रुद्दीन

ज़िला बार एसोसिएशन, चरखी दादरी, हरियाणा के वकीलों के एक समूह द्वारा लिखा गया एक पत्र सामने आया है, जिसमें उन्होंने पीठासीन अधिकारी फखरुद्दीन पर आरोप लगाया है कि उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान दूसरे मजहब के याचिकाकर्ताओं को हिन्दुओं के ख़िलाफ़ उकसाने वाली बातें कही।

वकीलों का आरोप है कि 20 अगस्त को राज्य बनाम परविंदर मामले की सुनवाई चल रही थी, जिसमें शिक़ायतकर्ता और गवाह दोनों उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के रहने वाले दूसरे समुदाय से थे। भारतीय दंड संहिता की धारा-365 (अपहरण और ग़लत कारावास), धारा-379 बी (चोरी) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

गवाहों से दुश्मनी निभाने के एवज़ में न्यायाधीश ने वकीलों से इस मामले के प्रत्येक गवाह को 1,000 रुपए देने के लिए कहा।

सुनवाई के दौरान, पीठासीन अधिकारी ने यह कहकर गवाहों को डाँटा कि दूसरे (हिंदू) समुदाय के सदस्यों द्वारा पीटे जाने पर वो समुदाय पर एक धब्बा हैं। जज साहब ने ग़ुस्से में सवाल किया कि उन्होंने अपने विरोधी (जो इस मामले में हिंदू थे) को गोली क्यों नहीं मार दी?

पीठासीन न्यायाधीश फ़ख़रुद्दीन ने हिंदुओं पर तीखा हमला करते हुए गवाहों से कहा कि वे अगली बार पिस्तौल के साथ अदालत में आएँ।

पत्र के अनुसार, न्यायाधीश ने हिंदुओं के बारे में कहा कि उनके पास ऐसी कोई ताक़त नहीं है जिससे वो दूसरे मजहब के सामने टिक सकें। उन्होंने कहा,

“आप एक पिस्तौल के साथ आएँ। मैं यहीं हूँ। हर बात की ज़िम्मेदारी मैं लूँगा।”

पत्र लिखने वाले वकीलों ने इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने लंबित मामलों के ट्रांसफर भी की माँग की क्योंकि उन्हें विशेष अदालत में न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। इस शिक़ायती पत्र की कॉपी CJI रंजन गोगोई, कानून और न्याय मंत्री- रवि शंकर प्रसाद, बार काउंसिल ऑफ पंजाब एंड हरियाणा और बार काउंसिल इंडिया के अध्यक्ष को भेजी गई है।

वाजपेयी, सुषमा, जेटली… अगला नंबर मोदी का: POK में जन्मा ब्रिटिश मुस्लिम सांसद

ब्रिटिश संसद के उच्च सदन हाउस ऑफ़ लॉर्ड के सदस्य नज़ीर अहमद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर विवादित ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है, “विपक्ष के बीजेपी पर जादू-टोना, तंत्र-मंत्र के दावे के बीच पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व वित्‍तमंत्री अरुण जेटली, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज, मध्‍य प्रदेश के पूर्व सीएम बाबू लाल गौर, गोवा के पूर्व सीएम मनोहर पर्रिकर का पिछले एक साल के भीतर निधन हो गया। अगला नंबर नरेंद्र मोदी का है।”

POK में पैदा हुए लॉर्ड नज़ीर अहमद को इस अभद्र ट्वीट के लिए यूज़र्स ने सोशल मीडिया में जमकर लताड़ लगाई। इसके बाद उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया।

केंद्रीय मंत्री किरण किरण रिजिजू ने ट्वीट कर कहा, “इस तरह के ब्रिटिश प्रबुद्ध वर्ग के बीच मैं नहीं समझ पा रहा हूँ कि इस धरती पर कैसे-कैसे लोग आ गए हैं। क्‍या आप लोगों को मैनेज करके हाउस ऑफ़ लॉर्ड के सदस्‍य बने हैं।”

किरण रिजूजू के अलावा कुमार विश्वास ने भी नज़ीर अहमद के इस ट्वीट पर तीखी प्रतिक्रिया दी।

बता दें कि नज़ीर अहमद पर 1970 के दशक में एक बच्‍ची और बच्‍चे के साथ रेप करने की कोशिशों से जुड़ा केस चला रहा है। इस मामले की जाँच साल 2016 में शुरू हुई थी।

24 अप्रैल 1957 को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जन्मे नज़ीर अहमद जब 11 साल के थे तभी उनके पिता ब्रिटेन चले गए थे। 18 साल की उम्र में नज़ीर ने ब्रिटेन की लेबर पार्टी ज्वॉइन कर ली। ब्रिटेन के पूर्व पीएम टोनी ब्लेयर ने 1988 में उसे हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स का सदस्य नियुक्त किया था। 2013 में नज़ीर अहमद को मोटर क्रैश मामले में सज़ा सुनाई गई थी, इसे नज़ीर ने एक यहूदी साज़िश करार दिया था। इसके बाद तुरंत ही उसे पार्टी से निकाल दिया गया और फिर नज़ीर ने लेबर पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया।

हाउस ऑफ़ लार्ड के बारे में आपको बता दें कि इसमें उच्च शिक्षित और प्रबुद्ध वर्ग के लोगों को सदस्य बनाया जाता है। यह सदन हाउस ऑफ़ कॉमन्स के कामों की निगरानी रखता है और पूरी तरह से स्वतंत्र होता है। इसके साथ ही सरकार द्वारा किए गए कामों का आंकलन करना भी इस सदन की ज़िम्मेदारी होती है।

₹150 करोड़ का बेनामी होटल सीज, हरियाणा कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व CM के बेटों के नाम है संपत्ति

आयकर विभाग (Income Tax) ने गुरुगाम में 150 करोड़ रुपए का एक होटल बेनामी संपत्ति के तौर पर जब्त किया है। सम्पत्ति की जाँच में पता चला है कि बेनामी संपत्ति हरियाणा कॉन्ग्रेस नेता कुलदीप बिश्नोई और उनके भाई की है। कुलदीप बिश्नोई हरियाणा के पूर्व सीएम भजन लाल के बेटे हैं। जाँच अधिकारियों ने बताया कि विभाग की दिल्ली बेनामी निषेध इकाई ने होटल सम्पत्ति को जब्त करने के आदेश जारी किए थे।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आयकर विभाग ने यह कार्रवाई बेनामी संपत्ति लेनदेन अधिनियम, 1988 की धारा 24 (3) के तहत की है। आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई (BPU) ने यह कार्रवाई की है।

आयकर विभाग द्वारा जब्त की गई संपत्ति का स्वामित्व ब्राइट स्टार होटल प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर है, जिसमें 34% शेयर अन्य कंपनी के नाम हैं, जो ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड (BVI) में रजिस्टर्ड है। यह कंपनी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से संचालित होती है।

आयकर विभाग ने यह कार्रवाई जुलाई 2019 में कंपनी से जुड़ी जाँच में सबूत के आधार पर की है। इस जाँच में आयकर विभाग को कई ऐसे सबूत हाथ लगे थे जिससे कंपनी के स्वामित्व पर शक हुआ था। ब्रिस्टल होटल के स्वामित्व को लेकर आयकर विभाग ने अनियमितता पाई थी। इसके बाद कार्रवाई करते हुए बेनामी संपत्ति को जब्त कर लिया गया।

यहाँ से आयकर विभाग को 200 करोड़ रुपए की अघोषित विदेशी संपत्ति और कर चोरी के सबूत मिले थे। इनकम टैक्स अधिकारियों की छापेमारी कुल 77 घंटे 45 मिनट तक चली थी और इसके बाद यह टीम उनके बेटे भव्य बिश्नोई को अपने साथ दिल्ली ले गई थी।