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घुसपैठ की फ़िराक में थे 40 बांग्लादेशी गौ तस्कर, BSF ने अब्दुल को मार गिराया

दक्षिणी असम के करीमगंज में शनिवार (अगस्त 24, 2019) को पशु तस्करों और सीमा सुरक्षा बल के बीच मुठभेड़ हुई। भारत-बांग्लादेश सीमा पर हुई इस मुठभेड़ में बीएसएफ ने एक बांग्लादेशी गौ तस्कर को मार गिराया। एसपी मानवेन्द्र देब रे ने बताया कि ये मुठभेड़ तब हुई जब 40 से भी अधिक बांग्लादेशी भारत की सीमा में घुसने की चेष्टा कर रहे थे। मुठभेड़ के दौरान बीएसएफ ने पंप-एक्शन बंदूकें और पैलेट के प्रयोग किया।

मृतक की पहचान सिलहट स्थित मौलवीबाजार निवासी अब्दुल रउफ के रूप में हुई है। हालाँकि, पुलिस ने कहा कि ये पहचान फ़िलहाल अनौपचारिक रूप से हुई है। पशु तस्कर अब्दुल की छाती पर गोली लगी। बांग्लादेशी सीमा गार्ड्स ने असम पुलिस को अनौपचारिक रूप से मृतक की पहचान बताई है। बीएसएफ को मुठभेड़ से पहले ही ख़ुफ़िया सूचना मिली थी कि कुछ बांग्लादेशी गौ तस्कर भारत में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं।

बॉर्डर फेन्स के दूसरी तरफ़ बीएसएफ की एक टीम को तैनात कर दिया गया था। यह जानने लायक बात है कि बॉर्डर फेन्स और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच 150 मीटर की दूरी है। जब 40 के क़रीब बांग्लादेशी पशु तस्करों ने घुसपैठ की कोशिश की, तो बीएसएफ ने उन्हें रोका। इसके बाद एक तस्कर ने बीएसएफ की तरफ धारदार हथियार फेंका।

मुठभेड़ के कुछ देर बाद जब बीएसएफ क्षेत्र में तलाशी के लिए पहुँची तो एक मृत तस्कर दिखा। उसकी लाश बॉर्डर फेन्स से 20 मीटर की दूरी पर पड़ी मिली। पंप-एक्शन बन्दूक से दागे गए पैलेट बहुत ज्यादा नुक़सान पहुँचा सकते हैं अगर उनका उपयोग क़रीबी रेंज से किया गया हो।

भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार ने कसी नकेल: 22 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन किया रिटायर

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में सरकारी विभागों से भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई करने का सिलसिला जारी है। इसकी कड़ी में आज केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 22 वरिष्ठ अधिकारियों को जबरन रिटायर कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इन अधिकारियों को भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों की वजह से फंडामेंटल रूल 56 (जे) के तहत अनिवार्य रूप से रिटायर किया गया है।

जानकारी के अनुसार, सेवानिवृत्त किए गए ये सभी अधिकारी दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, मेरठ और चेन्नई टैक्स यूनिट से जुड़े हुए हैं। इनमें कुछ पर हजार की लाइन में रिश्वत माँगने का आरोप है तो कुछ पर लाख की श्रेणी में रिश्वत माँगने का आरोप हैं। इसके अलावा बताया जा रहा है कि इनमें से एक पर कथित रूप से दुबई से 1224 ग्राम सोना लेकर आए एक युवक से दिल्ली हवाई अड्डे पर 58 ग्राम सोना लेने का भी आरोप है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक जबरन रिटायर किए गए अधिकारियों के नाम वीपी सिंह, आरएस गोगिया, केसी मंडल, एमएस डमोर, केके उकई, एसआर पराते, कैलाश वर्मा, किशोर पटेल, जेसी सोलंकी, एसके मंडल, गोविंद राम मालवीय, एयू छापरगारे, एस अशोकाराज, दीपक एम गनेयन, प्रमोद कुमार, मुकेश जैन, नवनीत गोयल, अचिंत्य कुमार प्रमाणिक, वीके सिंह, डीआर चतुर्वेदी, डी अशोक, और लीला मोहन सिंह हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले मोदी सरकार ने जून महीने में केंद्र प्रत्यक्ष बोर्ड के 12 अधिकारियों समेत 27 उच्च रैंकिंग आईआरएस अधिकारियों को भी मौलिक नियम 56 के तहत अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया था। इस हिसाब से अब तक मोदी सरकार भ्रष्टाचार में लिप्त 49 अफसरों को रिटायर कर चुकी है। जिनमें अधिकतर पर भ्रष्टाचार, घूसखोरी के आरोप हैं।

चिदंबरम को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, सिब्बल बोले- सीबीआई पूछ रही ‘आपके पास है ट्विटर अकाउंट’

सुप्रीम कोर्ट से सोमवार को भी पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को राहत नहीं मिली। शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि सीबीआई गिरफ्तारी के बाद इसका कोई मतलब नहीं रह जाता है। चिदंबरम फिलहाल INX मीडिया मामले में सीबीआई कस्टडी में हैं।

अब उनकी सारी उम्मीदें आज सीबीआई अदालत में होने वाली सुनवाई पर टिकी है। उनकी पॉंच दिन की रिमांड आज खत्म हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस भानुमति की पीठ ने कहा कि राहत पाने के लिए चिदंबरम को निचली अदालत में जाना होगा। दिल्ली हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद 21 अगस्त को सीबीआई ने चिदंबरम को गिरफ्तार कर लिया था। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ चिदंबरम ने शीर्ष अदालत से राहत माँगी थी।

इसके अलावा ईडी ने भी चिदंबरम के रिमांड की माँग की है। ईडी की तरफ से दायर हलफनामे पर भी सुनवाई होनी है।

इससे पहले, सीबीआई ने चिदंबरम की अग्रिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि गिरफ्तारी के बाद याचिका अर्थहीन है। जस्टिस भानुमति ने भी कहा, “सुप्रीम कोर्ट के संविधान पीठ के एक फैसले के मुताबिक गिरफ्तारी के बाद अग्रिम जमानत याचिका अर्थहीन हो जाती है।”

वहीं, चिदंबरम के वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मेंशन किया कि कोर्ट ऑर्डर के बावजूद, आईएनएक्स मीडिया केस में सीबीआई रिमांड के खिलाफ दायर याचिका को सुनवाई के लिए लिस्ट नहीं किया गया। सिब्बल ने जीवन के अधिकार की दलील देते हुए याचिका के लिस्टिंग न होने के बावजूद सुनवाई के लिए कहा। इस पर जस्टिस भानुमति ने कहा कि जिस पेटिशन को औपचारिक नंबर न मिला हो, उसकी लिस्टिंग के लिए CJI की अनुमति ज़रूरी है। रिमांंड के खिलाफ अर्जी लिस्ट नहीं है और वो लिस्टिंग के लिए नहीं कह सकती हैं। उन्होंने कहा कि वो अग्रिम जमानत को रेग्युलर बेल में कन्वर्ट नही कर सकती हैं।

सिब्बल ने पीठ को बताया कि सीबीआई चिदंबरम से उनके खिलाफ लगाए गए आरोप के बारे में पूछताछ नहीं कर रही। उनसे विदेशी बैंक खाते के बारे में पूछा गया था, जिससे उन्होंने इनकार कर दिया था। इसके अलावा उनके मुवक्किल से पूछा गया था कि क्या उनके पास ट्विटर अकाउंट है। उन्होंने कहा कि इससे जाहिर होता है कि सीबीआई जॉंच को लेकर गंभीर नहीं है।

सिब्बल ने मीडिया ट्रायल का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जॉंच एजेंसी बगैर सत्यापित जानकारी मीडिया को लीक कर रही है।

जन्माष्टमी में डीजे पर बवाल: घर में घुस कर युवक की हत्या, गर्भवती पत्नी की हालत नाजुक

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में जनमाष्टमी के मौके पर डीजे बजाने को लेकर एक युवक की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। हमले में युवक के पिता, भाई, बहन और पत्नी भी गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गए। गर्भवती पत्नी की हालत नाजुक बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक छह नामजद सहित 18 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। नामजदों में से तीन मुस्लिम हैं। पुलिस ने एहतियातन इलाके में धारा 144 लगा दी है। आरोपितों की तलाश की जा रही है। देवरिया के जिलाधिकारी अमित किशोर ने बताया कि 15 सितंबर तक धारा 144 लागू रहेगी।

घटना देवरिया ज़िले के बरहज नगर की है। शनिवार (24 अगस्त) की देर रात कुछ लोगों ने घर में घुस कर लाठी-डंडों से पीट-पीट कर 28 वर्षीय सुमित जायसवाल की हत्या कर दी। घटना के बाद से स्थानीय लोगों में काफ़ी गुस्सा है।

दैनिक जागरण के देवरिया संस्करण में छपी ख़बर

विरोध प्रकट करने के लिए लोगों ने दुकानें बंद रखीं। भारी तनाव को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस फ़ोर्स की तैनाती कर दी गई है। घटना की सूचना मिलते ही ज़िलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक घटना-स्थल पर पहुँचे। इसके अलावा, गोरखपुर के कमिश्‍नर व आइजी भी घटना-स्‍थल का मुआयना करने पहुँचे।

बताया जाता है कि बरहज के पटेल नगर वॉर्ड में जन्माष्टमी का डोल रखा हुआ था। मोहल्ले के ही रहने वाले मुन्नूलाल ने डीजे बंद करने को कहा। इसको लेकर कहा सुनी हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुँच कर मामला शांत कराया।

इसके बाद रात को करीब 12:30 बजे एक दर्जन से ज्यादा युवक मुन्नूलाल के घर पहुँचे। उनके बेटे सुमित ने जैसे ही दरवाजा खोला युवकों ने हमला बोल दिया। बचाव में आए मुन्नूलाल और उनके छोटे बेटे सचिन को भी युवकों ने पीटा और फरार हो गए। गम्भीर रूप से घायल सुनील ने अस्पताल लाते वक़्त रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

पुलिस अधीक्षक श्रीपति मिश्र ने बताया कि यह सांप्रदायिक घटना नहीं है। हमलावरों में से तीन की गिरफ़्तारी हो चुकी है।

राजस्थान: VHP की रैली पर जामा मस्जिद से पत्थरबाजी, धारा 144 लागू, इंटरनेट बंद

राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी कस्बे में रविवार (अगस्त 25, 2019) की दोपहर विश्व हिंदू परिषद की रैली पर दूसरे समुदाय के लोगों ने पत्थरबाजी की। रैली में करीब 500 लोग शमिल थे। फव्वारा चौक के पास जमा मस्जिद और आसपास के घरों से रैली पर पथराव किया गया। 5 लोग घायल हो गए।

घटना की सूचना मिलते ही मौक़े पर पहुँची पुलिस ने उपद्रवियों को बल का प्रयोग करके वहाँ से खदेड़ा। तनाव को देखते हुए 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी इलाके में तैनात किए गए हैं। इलाके में धारा 144 भी लागू कर इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सवाई माधोपुर के एसपी सुधीर चौधरी ने बताया कि विहिप के स्थापना दिवस पर निकाली गई रैली जब जामा मस्जिद के पास पहुँची तो दूसरे समुदाय के लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ लोगो ने पत्थर फेंके। इससे भगदड़ मच गई।

जानकारी के मुताबिक इस मामले में पुलिस ने 25 पत्थरबाजों को हिरासत में लिया है। फिलहाल, हालात नियंत्रण में हैं। बताया जाता है कि रविवार रात भी पुलिस को पथराव की घटनाओं की सूचना मिली। इसके बाद देर रात लोगों की धड़पकड़ की गई।

पाकिस्तान में फँसे गोधरा के 80 मुस्लिमों ने वतन वापसी के लिए मोदी से लगाई गुहार

भारत-पाकिस्तान के बीच ट्रेन सेवाओं के आवागमन पर लगी रोक से गुजरात के गोधरा इलाक़े के लोग काफ़ी परेशानियों का समाना कर रहे हैं। ट्रेनों सेवा पर रोक लगने से लगभर 80 लोग पाकिस्तान में फँसे हुए हैं। इनके परिजनों ने मोदी सरकार से उन्हें भारत वापस लाने के लिए मदद की गुहार लगाई है।

ग़ौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को निरस्त कर दिए जाने के बाद से ही पाकिस्तान काफ़ी बौखलाया हुआ है। इसी बौखलाहट में उसने भारत-पाकिस्तान के बीच सप्ताह में दो दिन चलने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन को बंद कर दिया है। यह ट्रेन दिल्ली से अटारी वाघा बॉर्डर होते हुए पाकिस्तान के लाहौर तक जाती थी। 1972 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए शिमला समझौते के बाद 1976 में दोनों देशों के बीच समझौता एक्सप्रेस चलाई गई थी।

ख़बर के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता हाजी फ़िरदौस का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लगभग 80 लोग अपने रिश्तेदारों से मिलने पाकिस्तान गए थे। दोनों देशों के बीच चल रही समझौता एक्सप्रेस ट्रेन पर प्रतिबंध लगने के बाद वहाँ वे लोग फँस गए हैं और भारत नहीं लौट पा रहे हैं। इसलिए केंद्र सरकार से निवेदन है कि वे इन लोगों की मदद करें।

वहीं, ज़मीयत उलेमा-ए-हिंद की गुजरात इकाई के उपाध्यक्ष मुहम्मद इदरीश के अनुसार, पाकिस्तान में फँसे लोग सभी प्रक्रियाओं को पूरा करके पाकिस्तान गए थे। भारत सरकार से अनुरोध है कि उन्हें जल्द से जल्द भारत वापस लाया जाए। गोधरा के तहसीलदार एचए पंजाबी ने कहा, “हम इस बात की जाँच कर रहे हैं कि कितने लोग पाकिस्तान गए हैं और कब वापस आना था। सारी जानकारी एकत्र करके ज़िलाधिकारी को दी जाएगी। इसके बाद इस संबंध में केंद्र सरकार को अनुरोध भेजा जाएगा।”

J&K: पत्थरबाजों ने ट्रक ड्राइवर नूर मोहम्मद को सेना का जवान समझकर की हत्या

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग के बिजबेहरा इलाके में रविवार को पत्थरबाजों ने सेना का जवान समझकर एक ट्रक ड्राइवर की बर्बरता से हत्या कर दी। घटना 25 अगस्त देर शाम 8 बजे घटी। मृतक की पहचान 42 वर्षीय नूर मोहम्मद डार के रूप में हुई।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो नूर मोहम्मद अनंतनाग के ही जरादीपोरा उरहानहॉल इलाके का रहने वाला था। वह रविवार देर शाम ट्रक लेकर वापस घर लौट रहा था कि तभी वहाँ मौजूद कुछ पत्थरबाजों की नजर उस पर पड़ी। पत्थरबाजों ने उसके ट्रक को सुरक्षाबल की गाड़ी और उसे जवान समझ लिया। इसके बाद उन्होंने नूर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी।

एक अधिकारी के मुताबिक पत्थरबाजी में एक पत्थर नूर के सिर पर लगाा, जिस कारण उसे गंभीर चोट आई। उसे जल्दबाजी में नजदीक के बिजबेहरा अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहाँ डॉक्टरों ने उसे स्किम्स सौरा रेफर कर दिया। किंतु अस्पताल पहुँचने से पहले नूर ने मौत के आगे अपने घुटने टेक दिए।

मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस जाँच में जुटी और जल्द ही उन्होंने उस पत्थरबाज को ढूँढ निकाला, जिसने नूर पर हमला किया था। आरोपित के खिलाफ़ बिजबेहरा थाने में हत्या के आरोप में केस दर्ज किया गया और अब आगे की कार्रवाई जारी है।

उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद पूरे देश भर में खुशी का माहौल है। जम्मू-कश्मीर के अधिकांश लोग इस फैसले को सराह रहे हैं और शांति से इसे स्वीकार रहे हैं। लेकिन फिर भी घाटी में कुछ अराजक तत्व ऐसे मौजूद हैं जो लगातार माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे हैं। इन पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा बल लगातार प्रयासरत है।

370 के पक्ष में नहीं थे अम्बेडकर, इस पर राजनीति बंद हो, सरकार को समय दो: मायावती ने विपक्षी नेताओं को लताड़ा

बसपा सुप्रीमो मायावती ने कश्मीर की यात्रा के लिए कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को फ़टकार लगाई है। मायावती ने इस दौरे के पीछे उनकी मंशा की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को इंतज़ार करना चाहिए था और जम्मू-कश्मीर के हालात को सामान्य करने के लिए सरकार को कुछ समय दिया जाना चाहिए।

ट्विटर पर मायावती ने अनुच्छेद-370 पर केंद्र सरकार के फ़ैसले का समर्थन किया और इस फ़ैसले का विरोध करने वाली कॉन्ग्रेस और अन्य दलों को कहा कि वो जम्मू-कश्मीर के हालात का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रहे हैं।

मायावती ने ट्वीट किया, “जैसा कि विदित है कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर हमेशा ही देश की समानता, एकता व अखण्डता के पक्षधर रहे हैं। इसलिए, वे जम्मू-कश्मीर राज्य में अलग से अनुच्छेद 370 का प्रावधान रखने के कतई भी पक्ष में नहीं थे। इसी खास वजह से बीएसपी ने संसद में इस अनुच्छेद को हटाए जाने का समर्थन किया।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत का संविधान लागू होने के 69 साल बाद सरकार द्वारा यह क़दम उठाया गया है और फ़िलहाल वहाँ स्थिति सामान्य होने में अभी कुछ समय लगेगा। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि सरकार को स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए कुछ समय और दिया जाना चाहिए।

मायावती ने आगे कहा कि इस स्थिति में, कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए कश्मीर जाना और स्थिति का राजनीतिकरण करने का प्रयास करना उचित नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि पार्टियों को कश्मीर जाने से पहले थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए।

यहाँ यह बात ग़ौर करने वाली है कि मायावती उन प्रमुख क्षेत्रीय नेताओं में से एक थीं जिन्होंने विपक्ष का हिस्सा होने के बावजूद अनुच्छेद-370 के बारे में सरकार के फ़ैसले का समर्थन किया था।

आंध्र के सीएम और वाईएसआरसीपी के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी, बीजेडी के नवीन पटनायक एनडीए के बाहर अन्य पार्टी के नेता थे, जिन्होंने संसद में इस फ़ैसले का काफी समर्थन किया था। इनके अलावा टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने भी सरकार का समर्थन किया था।

मध्य प्रदेश: मदरसों ने कमलनाथ से अलग से मॉंगा मिड डे मील, कहा- एक रसोई का बना नहीं खाएँगे

मध्य प्रदेश में जब से कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी है तुष्टिकरण की आवाज जोर पकड़ने लगी है। राज्य के उज्जैन शहर में मदरसों ने सरकार से मिड डे मील के लिए अलग से व्यवस्था करने की मॉंग की है। मदरसों ने केंद्रीयकृत किचन से भोजन लेने से मना कर दिया है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार सभी शासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में केंद्रीयकृत किचन से ही भोजन उलब्ध कराने का प्रावधान है। जिला पंचायत ने मदरसों की माँग पर प्रदेश शासन से राय माँगी है।

वैसे, ये पहली बार नहीं है, जब उज्जैन के मदरसों ने अपने लिए अलग से मिड डे मील की माँग की हो। यहाँ के मदरसों ने मिड डे मील को लेकर पहले भी विरोध किया है और अपने लिए अलग से भोजन की व्यवस्था की माँग करते रहे हैं। अगस्त 2015 में उज्जैन के मदरसों ने यह कहकर भोजन लेने से इनकार कर दिया था कि भोजन बनाने वाली संस्था इस्कॉन हिन्दुओं का धार्मिक संगठन है। उन्होंने इस संस्था पर आरोप लगाया था कि भोजन बनाने के बाद उसे भगवान को भोग लगाया जाता है और इसमें गंगाजल मिलाकर स्कूलों में भेजा जाता है।

दैनिक जागरण में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

इसके बाद 2016 में मध्यान्ह भोजन का ठेका इस्कॉन से लेकर माँ पृथ्वी साँवरी और बीआरके फूड को दे दिया गया, मगर फिर भी मदरसा समिति ने भोजन लेने से इनकार कर दिया। तभी से शहर के मदरसे मिड डे मील नहीं लेते हैं।

बता दें कि, उज्जैन शहर में 35 मदरसे हैं, जिनमें लगभग 2 हजार विद्यार्थी हैं। अभी चूँकि मदरसों में मिड डे मील नहीं पहुँच रहा है, इसलिए उनके विद्यार्थियों के लिए पैसा भी जारी नहीं हो रहा है। फिलहाल, पिछले आठ महीने से मिड डे मील की व्यवस्था उज्जैन शहर में शानू स्वसहायता समूह संभाल रहा है।

जिला पंचायत के मिड डे मील प्रभारी कीर्ति मिश्र ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मदरसों के लिए मदरसा समिति ने अलग भोजन व्यवस्था की माँग की है। चूँकि शासन की बनी व्यवस्था अनुसार सभी स्कूलों को एक ही किचन में बना भोजन मुहैया कराने का प्रावधान है, इसलिए मध्यान्ह भोजन प्रकोष्ठ से अभिमत माँगा है। वहीं, जिला मदरसा समिति के अध्यक्ष अशफाकउद्दीन ने कहा कि मदरसों में भी विद्यार्थियों को मध्यान्ह भोजन मिले, इसके लिए अलग भोजन निर्माण की माँग का पत्र जिला पंचायत को भेजा था। इस पर अब निर्णय नहीं हुआ है। 

इसके अलावा, उज्जैन जिला पंचायत के सीईओ ने इस बारे में बात करते हुए कहा कि मदरसों में मध्यान्ह भोजन की अलग व्यवस्था करने की माँग जिला मदरसा समिति ने की है। मौजूदा प्रावधान के अनुसार यह संभव नहीं है। उनकी माँग पर क्या निर्णय लिया जाए, इस संबंध में शासन से अभिमत माँगा गया है।

सोनिया गॉंधी के ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते ही मोदी की तारीफ करने के लिए शशि थरूर पर टूट पड़े कॉन्ग्रेसी

लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद ही यह जाहिर हो गया था कि कॉन्ग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है। आर्टिकल 370 और प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज को लेकर पार्टी का विभाजन साफ-साफ दिखने लगा है।

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी ने पिछले दिनों पार्टी सांसद शशि थरूर के उस बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की थी। इसके बाद से केरल कॉन्ग्रेस के नेता इस मुद्दे पर थरूर के पीछे पड़ गए हैं। थरूर केरल की ही तिरुवनंपुरम सीट से सांसद हैं।

प्रधानमंत्री की सही चीजों के लिए प्रशंसा करने के थरूर के बयान की रविवार (अगस्त 25, 2019) को केरल कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तीखी आलोचनी की। हालाँकि पार्टी नेताओं की आलोचनाओं से बेपरवाह थरूर ने कहा है कि उनके रुख में कुछ भी गलत नहीं है।

केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता रमेश चेन्नितला ने कहा कि मोदी सरकार की गलतियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वहीं प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने कहा कि थरूर का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है और कहा कि वो इस बारे में उनसे बात करेंगे।

थरूर ने कहा था कि सही चीज करने पर प्रधानमंत्री की सराहना करने से विपक्ष की आलोचना की साख बनेगी। उन्होंने और पार्टी के एक अन्य नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने पिछले हफ्ते पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश का समर्थन किया था। रमेश ने कहा था कि मोदी के काम को नहीं स्वीकारने और उन्हें हर समय उन्हें खलनायक की तरह पेश करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है।

चेन्नितला ने अलप्पुझा के हरिपद में थरूर के बयान पर मीडिया से बात करते हुए कहा कि केंद्र सरकार कई ऐसे निर्णय ले रही है, जो लोगों को अस्वीकार्य हैं और किसी एक अच्छे काम के लिए उनका महिमामंडन करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस मोदी सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी। मोदी सरकार के हजारों गलत काम के बाद एक अच्छे कार्य के लिए प्रधानमंत्री मोदी की गुणगान करने की जरूरत नहीं है।

रामचंद्रन ने तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से कहा कि थरूर ने 5 सालों तक भाजपा नीत एनडीए सरकार का खुलकर विरोध किया है। रामचंद्रन ने कहा कि वो नहीं जानते कि पिछले एक हफ्ते में क्या बदलाव आया है कि वो अचानक से मोदी सरकार का समर्थन कर रहे हैं।

थरूर ने रविवार को अपने, अभिषेक मुन सिंघवी और जयराम रमेश द्वारा की गई टिप्पणियों का बचाव करते हुए मलयालम टीवी पर कहा, “जयराम रमेश और सिंघवी ने जो कुछ कहा है, वह गलत नहीं है। अगर पीएम मोदी ने कुछ अच्छा किया है, तो हमें इसे स्वीकार करना चाहिए। अन्यथा हम लोगों के बीच अपना विश्वास खो बैठेंगे। यदि जरूरत हो, तो हमें उनकी कड़ी आलोचना भी करनी चाहिए।”

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने 22 अगस्त को थरूर के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था। उन्होंने कहा था कि थरूर को इस तरह के बयान सार्वजनिक तौर पर देने की बजाए कॉन्ग्रेस संसदीय दल के समक्ष रखना चाहिए था।

गौरतलब है कि, इससे पहले भी लोकसभा में कॉन्ग्रेस संसदीय दल के नेता अधीर रंजन चौधरी समेत अन्य नेताओं ने जयराम रमेश, अभिषेक मनु सिंघवी और शशि थरूर के बयान की आलोचना की थी।