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इराकी बच्ची को ईद का तोहफा: दिल्ली के डॉक्टरों ने दिल के पंप को लंग्स से जोड़ा

इराक के युद्ध प्रभावित क्षेत्र एरबिल से आने वाली दो मासूमों को दिल्ली के डॉक्टरों ने ईद के मौक़े पर रविवार को नई जिंदगी का तोहफा दिया है। जानकारी के मुताबिक दिल की बीमारी से जूझ रही इन दोनों बच्चियों में एक को सर्जरी के जरिए ठीक किया गया जबकि दूसरी को सिर्फ़ दवाई के माध्यम से नया जीवन प्रदान किया गया।

स्टैश आजाद खलील (2) और नवीन यासीन (7) नाम की इन दोनों बच्चियों को अगर यहाँ इलाज नहीं मिलता तो उनकी जान भी जा सकती थी, क्योंकि इराक के जिस इलाके से ये आतीं है, वहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी होने के कारण इनका उपचार नहीं हो पा रहा था। जिसके बाद नई दिल्ली स्थित इंडिया फाउंडेशन और इराक स्थित ब्रिंग होप ह्यूमैनिटेरियन के साझा प्रयासों से उन्हें दिल्ली लाया गया।

यहाँ गंगाराम अस्पताल के पेडिएट्रिक्ट कार्डिएक सर्जरी के चेयरमैन डॉ. राजा जोशी की अगुवाई में इलाज शुरू हुआ। जब जाँच हुई तो पता चला 2 साल की स्टैश का तो दिल का आधा हिस्सा ही जन्म से गायब है। जिस कारण वह बार-बार नीली पड़ती थी और उसको पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन न मिलने पर उसकी साँस भी फूलने लगती थी।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो बच्ची की हालत देखने के बाद इकोकार्डियोग्राफी और कार्डिएक कैथीटेराइजेशन स्टडी के बाद सुनिश्चित किया गया कि स्टैश के लिए एक सर्जिकल विकल्प से सब ठीक हो सकता है।

इस जाँच के बाद ही डॉक्टर जोशी की अगुआई में सर्जरी को पूरा किया गया। बताया जा रहा है इस सर्जरी में स्टैश के दिल के पंप को लंग्स से जोड़ा गया है। जिसके बाद उसके शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य है। साथ ही वह अब ठीक से साँस लेने में भी सक्षम है। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह सर्जरी का पहला स्टेज था। अभी बच्ची की चार साल बाद एक और सर्जरी होगी।

लेकिन, फिलहाल उन्हें अपने घर जाकर ईद मनाने के लिए अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब बच्ची को 4 साल बाद सर्जरी के लिहाज से भारत बुलाया जाएगा। स्टैश की माँ की मानें तो उन्हें बिलकुल उम्मीद नहीं थी कि यहाँ आकर इतने अच्छे इलाज के साथ उन्हें प्यार भी मिलेगा। वे यहाँ से बेहद संतुष्ट होकर घर लौट रही हैं। वहीं दूसरी बच्ची नवीन यासीन को अपनी दिल की बीमारी के लिए सर्जरी की आवश्कता नहीं पड़ी। उसे यहाँ के डॉक्टरों ने दवाई से ही ठीक कर दिया।

PAK के इशारे पर कश्मीर को लेकर प्रोपगेंडा रचती हैं शोभा डे: अब्दुल बासित का कबूलनामा

सेलिब्रिटी स्तंभकार शोभा डे पाकिस्तान के इशारों पर कश्मीर को लेकर प्रोपगेंडा रचती हैं। यह खुलासा नई दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायुक्त रहे अब्दुल बासित ने किया है। बासित का एक वीडियो सामने आया है जिसमें वे बता रहे हैं कि कैसे बुरहानी वानी के मारे जाने के बाद उन्होंने शोभा डे को लिखने के लिए राजी किया था।

आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहानी वानी को सुरक्षा बलों ने जुलाई 2016 में मार गिराया था। बासित वीडियो में कह रहे हैं कि बुरहान वानी की ‘शहादत’ के बाद यह देखा गया कि किस तरह से पैलेट गन्स का इस्तेमाल हुआ, इकॉनोमिक ब्लॉकेड हुआ, कश्मीर की इकॉनोमी बर्बाद हो गई थी। लेकिन भारत में ऐसा कोई शख़्स नहीं था जो कश्मीर की हालत का सही मायने में ज़िक्र कर सके। मेरे लिए यह चैलेंज था कि भारत के किसी जर्नलिस्ट को कश्मीर के हालात पर किसी अख़बार में कोई ‘अच्छा’ आर्टिकल लिखने के लिए राजी कर सकूँ। इसी वीडियो में बासित कहते हैं कि उन्होंने शोभा डे से इस मसले पर बात की और उन्होंने एक आर्टिकल लिखा था।

https://youtu.be/T53IGElN0rE

बासित ने शोभा डे के लेख की अंतिम लाइनों को ज़िक्र भी किया है, जिसमें उन्होंने लिखा था कि चलिए अब इस क्षेत्र में दर्द ख़त्म करें और कश्मीरियों को शांति से जीने दें, जिस सम्मान और सद्भाव के वो हक़दार हैं।

दरअसल, शोभा डे का यह लेख टाइम्स आफ़ इंडिया में 17 जुलाई 2016 को ‘Burhan Wani is dead but he’ll live on till we find out what Kashmir really wants’ शीर्षक से छपा था। इस लेख में उन्होंने कश्मीर के हालात पर विस्तृत रूप से लिखा था। मोटे तौर पर उनका कहना था कि बुरहान वानी को भले ही ‘अल्ट्रा-पेट्रियट’ आतंकी कहें या गद्दार, कश्मीर के लोगों का वो हीरो था, उसमें ‘करिज़्मा’ था। हिंदुस्तान के नेताओं को घेरते हुए उन्होंने लिखा था कि वे अपने घरों में आराम से बैठकर ‘शांतिप्रिय’ कश्मीरियों के बारे में खोखले भाषण देते हैं।

उन्होंने पूरे लेख में पाकिस्तान की ही लाइन पकड़े रखी- यहाँ तक कि हिंदुस्तान की सेना के जवानों को भी कश्मीरी पत्थरबाजों और जिहादियों के बराबर में खड़ा कर दिया।

अपने लेख के अंत में उन्होंने देश के नेताओं पर अपनी ‘अग्ली पॉलिटिक्स’ (गंदी राजनीति) के लिए कश्मीर की खूबसूरती को बर्बाद करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कश्मीर में जनमत संग्रह की भी वकालत की थी, जो हिंदुस्तान की कश्मीर को अपना हिस्सा मानने की नीति और इसी आशय से संसद से पारित प्रस्ताव के ठीक उल्टा था। और इसी की तारीफ़ अब्दुल बासित कर रहे थे।

Article 370: चिदंबरम की शह पर आईएएस से नेता बने शाह फैसल ने दी ‘बदला’ लेने की धमकी

कॉन्ग्रेस नेताओं के बाद अब आईएएस की नौकरी छोड़ राजनीति में आए शाह फैसल ने आर्टिकल 370 को लेकर विवादित बयान दिया है। फैसल ने जम्मू-कश्मीर के लोगों को भड़काने का प्रयास करते हुए कहा है कि वे तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक बेइज्जती का बदला नहीं ले लेते।

बौखलाए फैसल ने भारतीयों को चेताते हुए कहा है कि वे तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्रशासित प्रदेशों में बॉंटने के फैसले से हुई ‘पीड़ा’ का बदला नहीं ले लेते।

उन्होंने ट्ववीट कर कहा है, “कैसी ईद। दुनिया भर के कश्मीरी अपनी जमीन पर अवैध कब्जे का शोक मना रहे हैं। तब तक कोई ईद नहीं मनेगी जब तक 1947 से हमसे छीनी गई हर चीज वापस नहीं ले ली जाती। जब तक हर अपमान का बदला पूरा नहीं होता ईद नहीं मनेगी।”

फैसल का यह ट्वीट कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की सराहना मिलने के बाद सामने आया है। चिदंबरम ने अनुच्छेद 370 पर सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए फैसल के उस बयान का हवाला दिया था जिसमें उन्होंने इसे भारत सरकार द्वारा कश्मीरियों के साथ किया गया “सबसे बड़ा विश्वासघात” बताया था।

गौरतलब है सिर्फ़ शाह फैसल या घाटी में मौजूद अलगाववादी नेता ही नहीं, बल्कि आर्टिकल 370 का पॉवर खत्म होने पर देश की सबसे पुरानी राजनैतिक पार्टी कॉन्ग्रेस के चिदंबरम जैसे दिग्गज नेता भी लगातार भारत सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। जिस कारण शाह फैसल जैसे लोगों नफरत, डर और नकारात्मकता फैलाने के लिए एक नया अवसर मिल गया है।

इसरो के जनक विक्रम साराभाई की जन्मशती पर भी नेहरू की चाटुकारिता से बाज नहीं आए कॉन्ग्रेसी

मौका कोई भी कॉन्ग्रेस नेता नेहरू-गॉंधी परिवार के प्रति अपनी वफादारी दिखाने का अवसर तलाश ही लेते हैं। भारत के स्पेस प्रोग्राम के जनक और अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के संंस्थापक विक्रम साराभाई की जन्मशती पर ऐसी ही चाटुकारिता पूर्व केन्द्रीय मंत्री जयराम रमेश ने दिखाई है।

12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में जन्मे साराभाई की उपलब्धियों को इस मौके पर हर कोई याद कर रहा है। इंटरनेट सर्च ईंजन गूगल ने डूडल के जरिए उन्हें याद किया है। लेकिन जयराम रमेश को इस मौके पर भी नेहरू ही याद आए। उन्होंने ट्वीट किया है, “आज विक्रम साराभाई की जन्मशती है जिन्हें नेहरू ने 1962 में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को शुरू करने के लिए चुना। सात साल बाद इसरो अस्तित्व में आया। दु:ख की बात है कि साराभाई का दिसंबर 1971 में निधन हो गया।”

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “फिर 1972 की शुरुआत में सतीश धवन को इसरो की कमान संभालने के लिए इंदिरा गाँधी ने राजी किया और उन्होंने भारत का गौरव बढ़ाने वाला संगठन बनाया।”


दंगल फैमिली: बबीता फोगाट BJP में होंगी शामिल, Article 370 पर कहा था-लठ गाड़ दिया, धुम्मा ठा दिया

कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट रेसलर बबीता फोगाट आज बीजेपी में शामिल होंगी। उनके पिता महावीर फोगाट भी पार्टी की सदस्यता लेंगे। कुश्ती को लेकर फोगाट फैमिली काफी चर्चित है।

द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित महावीर फोगाट ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए कहा कि उन्होंने काफी सोच-समझकर भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। उनका कहना है कि भाजपा सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म कर और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करके एक महान कार्य किया। साथ ही मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली हरियाणा सरकार ने पारदर्शी सरकार दी है और युवाओं की नियुक्ति निष्पक्ष तरीके से की है। अनुच्छेद 370 खत्म पर बबीता ने भी ट्वीट कर सरकार के फैसले का समर्थन किया था।

फोगाट परिवार के मुताबिक, बबीता ने हरियाणा पुलिस के इंस्पेक्टर के पद से इस्तीफा दे दिया है। ऐसी अटकलें हैं कि बबीता को दादरी जिले के बड़हरा या दादरी विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। इससे पहले महावीर दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) में स्पोर्ट्स विंग के प्रभारी थे।

बता दें कि, बबीता फोगाट देश के लिए बहुतेरे पदक अपने नाम कर चुकी हैं। उनका परिवार दादरी के बलाली गाँव में रहता है। बबीता ने बीते दिनों मनोहर लाल खट्टर का समर्थन करते हुए कहा था, “हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर जी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है, जिससे हमारी बहन बेटियों के बारे में गलत बोला गया हो मेरी मीडिया से प्रार्थना है कि उनके बयान को गलत तरीके से जनता के सामने पेश ना करें।”

दिग्विजय के विवादित बोल: ‘मोदी सरकार ने आग में हाथ डाला है, कश्मीर हमारे हाथ से निकल जाएगा’

विवादास्‍पद बयानों के लिए विख्‍यात कॉन्ग्रेसी नेता दिग्‍विजय सिंह ने अब कश्मीर पर अनर्गल प्रलाप किया है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाए जाने के फैसले को गलत बताते हुए कहा है कि इस फैसले की वजह से कश्मीर भारत के हाथ से निकल जाएगा।

दिग्विजय सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया का हवाला देते हुए कहा कि सरकार देखे कि कश्मीर में क्या हो रहा है। उन्होंने कहा, “मोदी सरकार ने आग में हाथ डाला है। कश्मीर को बचाना हमारी पहली प्राथमिकता है। मैं मोदी जी, अमित शाह जी और अजीत डोभाल जी से अपील करता हूँ कि वो संभल कर कदम उठाएँ, वरना हम कश्मीर को खो देंगे, कश्मीर हमारे हाथ से निकल जाएगा।”

मध्यप्रदेश के सीहोर के दौरे पर आए दिग्विजय ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि अगर धारा 370 हटी तो इसके गंभीर परिणाम होंगे और देखिए आज कश्मीर जल रहा है। इन्होंने (प्रधानमंत्री) अपने हाथ आग में झुलसा लिए हैं।

बता दें कि, जम्मू-कश्मीर में हालात पूरी तरह सामान्य है। आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने का राज्य के आम जनजीवन पर कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है। राज्य में विरोध-प्रदर्शन और फायरिंग से जुड़ी खबरों को प्रशासन खारिज कर चुका है।

बकरीद के दौरान लोगों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो इसकी प्रशासन ने पुख्ता व्यवस्था की है। प्रशासन के मुताबिक आवश्यक वस्तुओं का राज्य में पर्याप्त स्टॉक है। 65 दिनों का गेहूॅं, 55 दिनों का चावल, 17 दिनों का मटन, एक महीने का चिकन, 35 दिनों का मिट्टी का तेल, एक महीने का गैस सिलेंडर और 28 दिनों के पेट्रोल का राज्य में स्टॉक है।

हिस्ट्रीशीटर घोषित होंगे भू-माफिया आजम खान, चोरी सहित 72 मामले दर्ज

सपा के भू-माफिया नेता आजम खान हिस्ट्रीशीटर घोषित हो सकते हैं। यूपी पुलिस उनकी हिस्ट्रीशीट खोलने वाली है। जानकारी के मुताबिक आजम खान पर अप्रैल से अब तक 72 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें अधिकतर मामले आपराधिक हैं। जमीन कब्जाने से लेकर चोरी तक के आरोप उन पर हैं। रामपुर के जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने उनकी हिस्ट्रीशीट खोलने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा, “चूंकि आजम खान के खिलाफ दर्ज अधिकतर मुकदमे आपराधिक हैं जैसे- जमीन कब्‍जाने और चोरी, हमने उनकी हिस्‍ट्रीशीट खोलने का फैसला किया है। जो 72 मामले दर्ज हुए हैं, पुलिस ने उनमें से 15 में चार्जशीट दाखिल कर दी है और बाकी में जाँच जारी है।”

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार हिस्ट्रीशीटर घोषित हो जाने के बाद उनकी हरेक गतिविधि पुलिस नजर रखेगी।

खबरों की मानें तो हालिया मामला उनपर गुरुवार को दर्ज हुआ है। जिसमें आजम खान सहित जिला नगरपालिका के एक पूर्व अधिकारी को नामजद किया गया है। दोनों पर शत्रु जमीन कब्जा कर जौहर यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनाने का आरोप है।

बता दें कि रामपुर से सपा सासंद आजम खान हाल ही में भू-माफिया घोषित किए गए थे। वह जौहर विश्वविद्यालय के चांसलर हैं और कई लोगों की जमीन हड़पने के आरोपी भी हैं। उनके ऊपर ‘आलिया मदरसा’ से किताबें चुरानें और रामपुर में क्लब से शेर की मूर्तियाँ चुराने का भी आरोप है।

UP: सिपाहियों की हत्या कर हिरासत से भागने वाला शकील ढेर

उत्तर प्रदेश के संभल में दो पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार होने वाले 3 बदमाशों में से पुलिस ने रविवार (अगस्त 12, 2019) को दूसरे बदमाश शकील को भी ढेर कर दिया। जानकारी के मुताबिक पुलिस ने शकील को पकड़ने के लिए उसपर ढाई लाख रुपए का इनाम रखा हुआ था। इससे पहले पुलिस ने इन तीन बदमाशों में से एक कमल को एनकाउंटर में मार गिराया था। जबकि शकील और धर्मपाल फरार चल रहे थे।

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ बदमाश रजपुरा के गाँव मौलनपुर में छिपकर कुछ बड़ी वारदात को अंजाम देने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस को पता चला कि इन बदमाशों में इनामी बदमाश शकील भी है, जिसके बाद पुलिस पूरी तैयारी करके उन्हें पकड़ने वहाँ पहुँच गई। सम्भल पुलिस ने बदमाशों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया और पूरा जंगल घेर लिया।

17 जलुाई को सिपाहियों को मारने वाले तीनों बदमाश।

पुलिस की आहट सुनते ही बदमाश सतर्क हो गए। उन्होंने पुलिस पर ताबड़तोड़ फायरिंग की और फरार होने की कोशिश की। लेकिन एसपी यमुना प्रसाद की टीम ने लगातार फायरिंग के बावजूद शकील को ढेर कर दिया। इस दौरान एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ।

गौरतलब है पिछले महीने 17 जुलाई को संभल में जब पुलिस की गाड़ी कुछ बदमाशों को ले जा रही थी तब वैन पर हमला किया गया था। इस दौरान बदमाशों ने पुलिसकर्मियों की हत्या कर अपने सभी साथियों को छुड़ा लिया था। इसके बाद से ही पुलिस इन तीनों की तलाश में जुटी हुई थी। पुलिस ने कमल को 20 जुलाई को मार गिराया था।

J&K: बाप-दादा की करनी पर लड़े उमर अब्दुल्ला-महबूबा मुफ्ती, अब अलग रखे गए

जम्मू-कश्मीर के हरि निवास गेस्ट हाउस में राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती झगड़ पड़े। हालात इतने बिगड़ गए कि उमर को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ा। दरअसल, दोनों एक-दूसरे पर राज्य में भारतीय जनता पार्टी को लाने का आरोप लगा रहे थे। बता दें कि, अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी किए जाने के बाद से दोनों हरि निवास गेस्ट हाउस में हिरासत में रखे गए थे।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

खबर के मुताबिक, महबूबा के साथ विवाद के दौरान उमर उन पर चिल्ला पड़े। उन्होंने महबूबा के पिता मुफ्ती मोहम्मद सईद पर भाजपा के साथ 2015 में गठबंधन करने का आरोप मढ़ा। जिसके बाद दोनों ही नेताओं के बीच जमकर कहा-सुनी हुई। महबूबा ने भी उमर को याद दिलाया कि किस तरह से उनके पिता फारूक अब्दुल्ला ने अटल बिहारी वाजपेयी के ज़माने में भाजपा का साथ दिया था।

एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि महबूबा ने उमर पर चिल्लाते हुए कहा कि वो तो वाजपेयी सरकार में विदेश मामलों में जूनियर मिनिस्टर थे। यही नहीं, उन्होंने उमर के दादा शेख अब्दुल्ला को 1947 में जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय करने का आरोप लगाया। एक अधिकारी ने बताया कि जब दोनों ही नेताओं के बीच विवाद काफी बढ़ गया तो दोनों को अलग-अलग शिफ्ट करने का फैसला लिया गया। उमर अब्दुल्ला को महादेव पहाड़ी के पास चेश्माशाही में वन विभाग के भवन में रखा गया है तो महबूबा हरि निवास में ही रखी गईं हैं।

एक अधिकारी का कहना है कि दोनों नेताओं को जेल के नियमों और उनके ओहदों के हिसाब से खाना दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि महबूबा ने ब्राउन बेड खाने की इच्छा जाहिर की थी, लेकिन उन्हें वह दी नहीं जा सकी क्योंकि जेल के मेन्यू में हिरासत में लिए गए वीवीआईपी लोगों के लिए ऐसा कुछ नहीं है।

कॉन्ग्रेस राज में पुलिस धुत: MP में 5 लोगों को पीटा, पेशाब पीने को किया मजबूर

मध्यप्रदेश के अलीराजपुर में 5 लोगों की बेहरमी से पिटाई करने के आरोप में 4 पुलिसवालों को निलंबित कर दिया गया है। इन पुलिसवालों पर नशे की हालत में कुछ लोगों को पीटने और फिर अपना पेशाब पिलाने का आरोप है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार घटना अलीराजपुर जिले के नानपुर पुलिस स्टेशन सीमा की है। जहाँ चारों पुलिसकर्मी नानपुर फाट बाँध के पास पिकनिक के लिए गए थे। इस दौरान इन पुलिसवालों का कुछ लोगों से झगड़ा हो गया।

पीड़ितों के घरवालों ने आरोप लगाया है कि जिस समय ये घटना हुई उस दौरान सभी आरोपित नशे में धुत थे। उन्होंने पहले पीड़ितों को पीटा और फिर उन्हें अपना पेशाब पीने पर मजबूर किया।

कुछ मीडिया खबरों की मानें तो पुलिसकर्मियों ने युवकों की सरिया, बेल्ट, लाठी से भी पिटाई की। घायल युवकों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पीड़ितों में एक नाबालिग भी शामिल है।

पुलिस की अमानवीय हरकत प्रकाश में आने के बाद राज्य के गृहमंत्री बाला बच्चन और जिला प्रभारी मंत्री सुरेन्द्र सिंह बघेल को इसकी जानकारी दी गई। गृहमंत्री ने एसपी से बात करके उन्हें मामले में संलिप्त पुलिसवालों पर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। जिसके बाद चारों पुलिस वालों को निलंबित कर दिया गया।

एएनआई ने अलीराजपुर के पुलिस सुपरिटेंडेंट विपुल श्रीवास्तव के हवाले से बताया है कि नानपुर पुलिस स्टेशन प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही, विभागीय जाँच के आदेश भी दे दिए गए हैं।