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370 का ‘पावर’ खत्म होने के बाद घाटी और आसपास के महत्वपूर्ण स्थानों पर 8000 अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की सिफ़ारिश की। अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प राज्यसभा में पेश किया। शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 का सिर्फ़ एक खंड लागू होगा और राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी है। जिसके बाद से ही संसद से लेकर देश के कई जगहों पर हंगामा जारी है। हालाँकि, स्थिति सामान्य है फिर भी सावधानी बरतते हुए श्रीनगर में घाटी और आसपास के महत्वपूर्ण स्थानों जैसे, नागरिक सचिवालय, पुलिस मुख्यालय, हवाई अड्डे और विभिन्न केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों में 8000 अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

पुलिस और अर्धसैनिक बलों को घाटी में पहले से ही हाई अलर्ट पर रखा गया है। रविवार को ही, पुलिस स्टेशन में पारंपरिक टेलीकॉम नेटवर्क को बायपास करने के लिए सैटेलाइट फोन उपलब्ध कराए गए थे।

जानकारी के अनुसार, आज होने वाले वाले बड़े फैसले के मद्देनज़र केंद्र ने विभिन्न एयरलाइन्स के टिकट बढ़ते दाम पर रोक लगाते हुए उसकी क़ीमत 7,000 रुपए कर दी थी जिससे अमरनाथ यात्री और पर्यटक घाटी से निकलने में काफ़ी मदद मिली। क्रिकेट टीमों के मेंटर पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान अपने घर सुरक्षित लौट गए थे। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा के मद्देनज़र श्रीनगर में चल रहे अंडर-16 और अंडर-19 ट्रायल्स स्थगित कर दिए गए थे। ग़ौरतलब है कि इरफान पठान अंडर-16 (विजय मर्चेंट ट्रॉफी) और अंडर-19 (कूच बेहार ट्रॉफी) के ट्रायल्स को देखने और संभावित खिलाड़ियों की सूची तैयार करने के लिए श्रीनगर में थे।

इरफान पठान ने रविवार को पीटीआई से कहा, ”हमने फ़िलहाल जूनियर टीम ट्रायल्स का दूसरा चरण स्थगित कर दिया है। हमारा पहला चरण जून और जुलाई में चला था। यह दूसरा चरण था। सरकार की तरफ से परामर्श जारी हुआ है और इसलिए जम्मू कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) सीईओ बुखारी और प्रशासक न्यायमूर्ति प्रसाद से मैंने मुलाकात की। इसके बाद लड़कों को वापस घर भेजने का फैसला किया गया।”

370 का ‘पावर’ खत्म होने के बाद कश्मीर दौरे पर अजित डोभाल, स्थितियाँ सामान्य होने तक नजर रखेंगे

जम्मू कश्मीर पर सरकार के ऐतिहासिक फैसले के बाद देश भर में जश्न का माहौल है। इसी बीच खबर आ रही है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल आज (5 अगस्त, 2019) जम्मू-कश्मीर के दौरे पर जाएँगे और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेंगे। साथ ही वे अन्य वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के साथ मिलकर जमीनी हालात की समीक्षा करेंगे। इधर, केंद्र ने जम्मू-कश्मीर से संबंधित फैसलों के बाद राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में सुरक्षाबलों को अधिकतम सतर्कता बरतने के लिए कहा है।

केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया है कि किसी भी अप्रिय घटना को रोकने या शांति भंग की आशंका के मद्देनजर जम्मू कश्मीर के निवासियों और वहाँ के छात्रों का विशेष ध्यान रखा जाए। किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए सेना को तैयार कर रखा गया है। बताया जा रहा है कि अजित डोभाल जम्मू कश्मीर की स्थितियों को देखते हुए वहाँ रुक भी सकते हैं और स्थितियाँ सामान्य होने तक सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखेंगे।

गौरतलब है कि अजीत डोभाल जुलाई के अंतिम सप्ताह में भी कश्मीर पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के आला अफसरों के साथ अलग-अलग बैठकें की थीं। इनमें राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार, मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यन, डीजीपी दिलबाग सिंह, आईजी एसपी पाणि जैसे लोग शामिल थे। कश्मीर दौरे पर दिल्ली से आईबी के आला अधिकारियों की टीम भी एनएसए के साथ थी।

अजित डोभाल के कश्मीर दौरे से लौटते ही वहाँ 10,000 अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजने का फैसला हुआ था। तब केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया था कि अतिरिक्त केंद्रीय बलों की तैनाती से कश्मीर में आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने का अभियान मजबूत होगा। साथ ही, राज्य में कानून-व्यवस्था को चाक-चौबंद बनाए रखने में मदद मिलेगी।

कोई अलग देश बना रहा था, कोई पाकिस्तान से घड़ी मिला रहा था: 370 पर मोदी को ऐसे दिया था चैलेंज

जम्मू-कश्मीर के राज्य से केंद्र-शासित प्रदेश बनने और लद्दाख के घाटी से ‘आज़ाद’ होने के साथ एक ‘Recap’ भी लाज़मी है उन बयानवीरों के वीरता भरे बयान का, जो कश्मीर से 370 जाने पर कभी “मार दूँगा-चीर दूँगा”, तो कभी “ऐ जानेवफ़ा, ये ज़ुल्म न कर” का ऑड-ईवेन खेलते थे। इनमें पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला से लेकर पार्ट-टाइम क्रांतिकारी शेहला रशीद और ‘कश्मीर के केजरीवाल’ शाह फ़ैसल शामिल हैं।

‘पापा’ पापा होते हैं

प्रधानमंत्री मोदी को मोदी-समर्थकों के ‘पापा’ बताने वालीं शेहला रशीद शायद भूल गई थीं कि पापा होते क्या हैं, और देश के प्रधानमंत्री हर इंसान के बराबर ‘माई-बाप’ होते हैं। आज ‘पापा की मार’ खाकर शेहला रशीद अपने इस ट्वीट को याद कर रही होंगी।

370 भी खत्म, कश्मीर हिंदुस्तान में भी… लेकिन अब्दुल्ला घर में ‘कैद’

‘छोटू अब्दुल्ला’ ने दावा किया था, मोदी सरकार 1.0 के शपथ-ग्रहण के बमुश्किल 24 घंटे के भीतर, कि या तो कश्मीर हिंदुस्तान का हिस्सा नहीं बचेगा, या अनुच्छेद 370 बदस्तूर जारी रहेगा। उनका व्यंग्य उन उम्मीदों पर था, जो भाजपा के समर्थकों में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आ गई थी कि अब 370 के दिन गिनती के बचे हैं। गिनती शायद कुछ लम्बी हो गई (5 साल+), लेकिन आशा गलत नहीं निकली। गलत साबित ‘छोटू’ हुए, जो आज अपने घर में नज़रबंद हैं।

घड़ी किसी से भी मिलाइए, शाह फ़ैसल, हाज़िरी IST से ही होगी

इसी साल जब देश में लोक सभा चुनाव चल रहे थे, और लिबरलों के मुताबिक देश ‘साम्प्रदायिक तनाव और ध्रुवीकरण’ से गुज़र रहा था, तो कश्मीर के केजरीवाल माने जाने वाले शाह फ़ैसल ने आग में घी डालते हुए भाजपा को चुनौती दी कि 370/35A हटा कर दिखाए। साथ ही धमकी भी दी कि अगर ऐसा किया तो वे अपनी घड़ी भारतीय समय (IST) से 15 मिनट पीछे कर लेंगे। बहुत लोग शायद समझ न पाएँ, इसलिए यह जानना जरूरी है कि पाकिस्तान और भारत (कश्मीर) के स्थानीय समय में 15 मिनट का फ़र्क है। यानी 15 मिनट कम का अर्थ हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच कश्मीर का अलग देश बनाने की धमकी।

आज शाह फ़ैसल के पास आराम से समय होगा कि वे बैठें और तय करें कि वे अपनी कलाई पर बँधी घड़ी किस देश के समय से चलाना चाहते हैं। लेकिन खुदा-न-खास्ता अगर कश्मीर में किसी कचहरी या सरकारी दफ़्तर के चक्कर काटने पड़ ही गए, तो IST से ही करना पड़ेगा।

‘जंगली मोदी’ से घबरा गए?

वही शाह फ़ैसल, जो अप्रैल में भाजपा को 370/35A हटाने की चुनौती दे रहे थे, तीन महीने के भीतर अमित शाह-डोवाल के कश्मीर दौरे और उसके बाद सुरक्षा बलों की आवक से इतना बैकफ़ुट पर आ गए कि मोदी को ‘डील’ देने लगे। मोदी के ‘Man Vs Wild’ एपिसोड के प्रचार की पेशकश की, अगर मोदी सरकार 370/35A को बख्श दे तो।

तेल किसका निकला?

महबूबा मुफ़्ती ने कहा था लोकसभा चुनावों के अंतिम दौर में कि न नौ मन तेल होगा, न राधा नाचेगी; न भाजपा आएगी पलट कर, न अनुच्छेद 370 हटेगा। शायद इसीलिए जब जनता ने 90 मन तेल (भाजपा को भारी बहुमत) के साथ इन्हें लोकसभा भेज दिया तो महबूबा, जो खुद अंनतनाग में चुनाव हार गईं, की ज़बान फ़िसलने लगी। कभी 370/35A हटाने को बारूद से खेलना बतातीं, तो कभी हाथ जोड़ कर चिरौरी करतीं कि इस्लाम में हाथ जोड़ना मना है, फिर भी कर रही हूँ; मेरे 370/35A को बख़्श दो। राधा का ‘राग कश्मीर’ पर नृत्य तो अभी शुरू हुआ है!

चलती बस के फ्यूल टैंक में आग लगने से हुआ बड़ा हादसा: 20 की मौत, दर्जनों घायल

बिहार के पूर्णिया में मुजफ्फरपुर से सिलीगुड़ी जाती यात्रियों से भरी बस सोमवार ( अगस्त 5, 2019) की सुबह एक हादसे का शिकार हो गई। बताया जा रहा है कि रास्ते में डिवाईडर से टकराने के बाद बस के फ्यूल टैंक में आग लग गई, जिसने देखते ही देखते अपनी लपटो में पूरी बस को घेर लिया। इस आग में 20 लोगों की झुलसकर मौत हो गई, जबकि बाकी लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसा खंजासी थाना स्थित बस स्टैंड के पास हुआ।

जानकारी के मुताबिक डिवाईडर से टकराने के कारण दुर्घटनाग्रस्त होने वाली ये बस ‘न्याय ट्रैवल्स’ की थी। जिसमें हादसे के समय 50 लोग सवार थे। इनमें दो दर्जन से ज्यादा झुलसने के कारण घायल हैं जबकि 20 की मौत हो गई।

खबरों की मानें तो स्लीपर बस होने के कारण घटना के समय कई यात्री ऊपर के बर्थ पर सो रहे थे। जिस कारण वे आग लगी बस से नहीं निकल पाए और उनकी मौत हो गई। कई यात्री किसी तरह शीशा तोड़कर बस से निकल पाने में कामयाब रहे।

बस में आग लगने की सूचना पाकर कई लोग घटनास्थल पर पहुँचे और बस में लगी आग को बुझाने की कोशिश भी की, लेकिन 20 लोगों को आग की चपेट से नहीं बचाया जा सका।

घटनास्थल पर पहुँचे बचावकर्मियों ने घायलों को सदर अस्पताल पहुँचाया। सूचना मिलते ही एसपी भी मौक़े पर पहुँच गए और डीएम के साथ मिलकर उन्होंने घटना स्थल का मुआएना किया। हादसे के कारणों की जाँच फिलहाल जारी है। अधिकारी घटना के विस्तृत ब्यौरे की प्रतीक्षा में हैं।

370 हटाने के संकल्प की PM मोदी की पुरानी तस्वीर वायरल, परेश रावल ने लिखा- ‘सौ सौ सलाम आपको’

सोमवार (अगस्त 5, 2019) को जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 के खत्म होने के साथ ही राज्य को मिला विशेष राज्‍य का दर्जा भी खत्‍म हो गया है। यानी कि अब एक देश एक कानून होगा। पूरा भारत इस समय अनुच्छेद 370 खत्म होने की घोषणा पर जश्न मना रहा है। इस फैसले के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक पुरानी तस्‍वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। जिसमें वो अनुच्छेद 370 का विरोध करते नज़र आ रहे हैं।

हालाँकि, यह तस्‍वीर कब की है, इस बात का पता नहीं चल सका है। लेकिन पीएम मोदी जिस स्‍टेज पर मौजूद हैं, वहाँ पर पीछे एक बैनर लगा है जिस पर लिखा है, ‘370 हटाओ, आतंकवाद मिटाओ, देश बचाओ।’ ट्विटर पर यूजर इस फोटो को तेजी से शेयर कर रहे हैं और कमेंट कर रहे हैं कि पीएम मोदी ने जो वर्षों पहले एक वादा किया था आज वह अपना वादा पूरा करने में सफल रहे हैं।

एक्टर और अहमदाबाद ईस्ट से पूर्व बीजेपी सांसद परेश रावल ने भी प्रधानमंत्री की इस पुरानी फोटो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखते हैं- ‘सौ सौ सलाम आपको।’ इसके साथ ही उन्होंने इस बदलाव पर प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा कि कश्मीर की घटनाओं को सबका साथ सबका विकास के साथ ना जोड़ें। ये सबका इलाज योजना भी हो सकती है।

बता दें कि, जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद अब जम्मू-कश्मीर में अलग संविधान नहीं होगा। उसका अलग झंडा नहीं होगा। अब जम्मू-कश्मीर में देश के अन्य राज्यों के लोग भी जमीन खरीद सकेंगे। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का न हो कर 5 साल का होगा।

पार्टी के सभी सांसद अगले 3 दिन सदन में रहें मौजूद: कश्मीर पर हंगामे के बीच BJP ने जारी किया व्हिप

जम्मू-कश्मीर में बढ़ रही हलचल के बीच भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी किया है। इसमें 5 से 7 अगस्त तक सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए कहा गया है। भाजपा का कहना है कि 5 से 7 तारीख के बीच कई महत्त्वपूर्ण विधायी कार्यों पर चर्चा की जा सकती है। इसलिए उनका सदन में मौजूद रहना अनिवार्य है। पार्टी ने सांसदों से 5, 6 और 7 तारीख को सदन में उपस्थित रहकर सरकार के कार्य में मदद करने का अनुरोध किया है।

सदन में सांसदों की उपस्थिति में अनुच्छेद 370 ख़त्म किया जा चुका है। विपक्ष लगातार हंगामा कर रहा है। वहीं गृहमंत्री अमित शाह ने सभी प्रश्नों पर चर्चा और जवाब का आश्वासन दिया है।

इसके साथ ही राज्यसभा सचिवालय ने स्पष्ट कर दिया है कि विधायी कार्य पूरे होने के बाद आज शून्यकाल (Zero Hour) होगा। आज (अगस्त 5, 2019) विधायी कार्यो को निपटाने के बाद ही शून्यकाल हो पाएगा। राज्यसभा के सभापति ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि कुछ आवश्यक विधायी कार्यों के कारण शून्यकाल बाद में होगा।

एक तरफ भाजपा ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने को कहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी पूरी तरह से मुस्तैद है। आज विपक्ष संसद में कश्मीर के मसले पर बहुत ज़्यादा हंगामा कर सकता है।

आज के सदन में कश्मीर में जारी हलचल को लेकर बहस और सवाल-जवाब किए जा सकते हैं। इस बीच, कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर के ट्वीट के बाद आज सुबह कॉन्ग्रेस के नेताओं ने लोकसभा और राज्यसभा में कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद कार्य स्थगन प्रस्ताव का नोटिस दे चुके हैं, वहीं लोकसभा में अधीर रंजन चौधरी ने नोटिस दिया है।

दरअसल, अब्दुल्ला को घर में नजरबंद किए जाने के बाद शशि थरूर ने ट्वीट किया, “आप अकेले नहीं हैं उमर अब्दुल्ला। लोकतंत्र को मानने वाला हर भारतीय कश्मीर की मुख्यधारा से जुड़े नेताओं के साथ खड़ा होगा। संसद का सत्र अभी भी चल रहा है और हमारी आवाज खामोश नहीं रहेगी।”

‘या तो Article 370 रहेगा या फिर जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं होगा… मेरे शब्दों को याद रखना’

बीते कुछ दिनों से जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 को हटाने को लेकर जारी अटकलें आज प्रधानमंत्री मोदी के ऐतिहासिक फैसले के साथ खत्म हो गई। इस पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। इस सिलसिले में गृह मंत्री अमित शाह ने राज्‍यसभा में बड़ा ऐलान करते हुए जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का संकल्प पेश किया और राष्ट्रपति ने इसकी मंजूरी दे दी। इसी के साथ आर्टिकल 35A का भी अब कोई औचित्य नहीं रह गया।

इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया गया है- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख। गृहमंत्री अमित शाह के नाम से जो पत्र जारी किया गया है, उसके अनुसार जम्मू कश्मीर में विधायिका होगी, जबकि लद्दाख में विधायिका नहीं होगी।

आर्टिकल 370 के हटाने का विपक्ष ने आज जमकर विरोध किया। इनका यह विरोध आज कोई नया नहीं है। बता दें कि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 2014 में आर्टिकल 370 को लेकर 3 ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने ना सिर्फ इसे हटाने की बात कही था, बल्कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को चैलेंज भी किया था कि वो इसे हटा ही नहीं सकते।

उमर अब्दुल्ला ने अपने पहले ट्वीट में कहा था कि प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से कहा गया है कि आर्टिकल 370 को खत्म करने पर चर्चा की जा रही है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। उन्होंने इस तंज कसते हुए कहा था कि इसकी शुरुआत बहुत जल्द हो गई। उमर अब्दुल्ला ने तो इसे तंज में कहा था मगर मोदी सरकार ने आज इसे करके दिखा दिया।

अपने दूसरे ट्वीट में उमर अब्दुल्ला ने चेतावनी भरे लहजे में लिखा था, “मेरे शब्दों को याद रखना। या तो आर्टिकल 370 रहेगा या फिर जम्मू कश्मीर भारत का हिस्सा नहीं रहेगा।”

उन्होंने अपने तीसरे ट्वीट में आर्टिकल 370 को जम्मू कश्मीर और भारत के बीच का एकमात्र संवैधानिक कड़ी बताया था।

आर्टिकल 370 हटने के साथ ही 2014 में उमर अब्दुल्ला द्वारा पीएम मोदी को किया गया बचकानी चैलेंज मात्र एक मजाक बनकर रह गया है, क्योंकि आर्टिकल 370 तो हट गया है, और जम्मू कश्मीर अभी भी भारत का हिस्सा है। ये हमेशा ही भारत का हिस्सा रहेगा। 370 हटने के बाद अब जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है जो अलगाववादियों की सहायता करने वालों को सबक सिखाने के लिए काफी है।

370 का ‘पावर’ खत्म होने पर लिबरलों और मीडिया गिरोह की आँखों में आए आँसू, ट्विटर पर छलका दर्द

राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कश्मीर में लागू अनुच्छेद-370 और 35-A को खत्म करने के प्रस्ताव को पेश करते ही विपक्षी पार्टियों और लिबरल गैंग को झटके लगने शुरू हो गए हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने राज्‍यसभा में कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्‍छेद-370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे। इसके साथ ही आर्टिकल 35-A को भी हटा दिया गया है।

इस फ़ैसले से नाराज़ समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सेठ ने पार्टी के साथ-साथ संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बता दें कि संजय सेठ, मुलायम सिंह के बेहद क़रीबी रहे हैं। कॉग्रेस के सांसद भुवनेश्वर कालिता ने भी राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। ऐसी संभावना है कि वो जल्द ही बीजेपी में शामिल होंगे।

दूसरी तरफ, लिबरल गैंंग भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहा है। बरखा दत्त ने ट्वीट किया, “एक डेस्क में दो विधानसभा, दो प्रधान, दो निशान नहीं हो सकते।” जैसे ही जम्मू-कश्मीर में सरकार आएगी तब क्या?

सोशल मीडिया पर सागरिका घोष का भी दर्द छलका जम्मू-कश्मीर राज्य के एक केंद्र शासित प्रदेश बनने की स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए लिखा कि बिना किसी परामर्श और चर्चा के कैसे यह बिल आगे बढ़ गया।

स्वाति चतुर्वेदी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि इन फ़ैसलों पर दोनों सदनों में बहस होनी चाहिए। लोकतंत्र को रबर स्टैंप मत बनाइए।

जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा बाधित होने के बावजूद पीडीपी नेता महबूबा मुफ़्ती का ग़ुस्सा सोशल सोशल मीडिया पर फूटा। उन्होंने ट्वीट किया हमारे जैसे लोग जिन्होंने संसद पर भरोसा रखा, उन्हें लोकतंत्र के मंदिर में धोखा दिया गया है।

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने पीडीपी के मीर फ़ैयाज़ और नज़ीर अहमद लावे को संविधान को फाड़ने के बाद सदन से बाहर जाने के लिए कहा, इस पर प्रतिक्रिया स्वरूप आदित्य मेनन ने ट्वीट किया कि ये बीजेपी सरकार है जिसने आज संविधान की हत्या की है।

संसद में MP अहमद और फ़ैयाज़ ने फाड़ डाला संविधान, कॉन्ग्रेस के गुलाम नबी बैठे धरने पर

जम्मू-कश्मीर में लागू अनुच्छेद-370 में बदलाव और राज्य पुनर्गठन के निर्णय का कॉन्ग्रेस, पीडीपी समेत कई पार्टियों ने कड़ा विरोध किया। महबूबा मुफ्ती की पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के दो सांसदोंं ने नज़ीर अहमद लवे और एमएम फ़ैयाज़ ने अपना विरोध जताते हुए संसद परिसर में संविधान फाड़ दिया। उनकी इस हरक़त से नाराज़ सभापति एम वेंकैया नायडू ने दोनों को संसद से बाहर जाने को कहा। इसके बाद भी दोनों सांसदो ने अपना हंगामा जारी रखा और अपने कपड़े फाड़ दिए।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में मोदी सरकार ने बड़ा फ़ैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A हटा दिया, जिसपर राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल गई है। इसके अलावा लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया गया है। साथ ही जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित राज्य घोषित कर दिया गया। अब जम्मू-कश्मीर अलग राज्य नहीं रहा।

इस परिवर्तन से विपक्ष ने काफ़ी हंगामा मचाया। जहाँ एक तरफ़ पीडीपी नेताओं ने अपने कपड़े तक फाड़ दिए वहीं दूसरी तरफ क़ॉन्ग्रेस के गुलाम नबी अज़ाद विरोध प्रकट करने के लिए धरने पर बैठ गए।

370 का ‘पावर’ खत्म और 35-A के हटने के बाद… सपा और कॉन्ग्रेस के 1-1 सांसदों ने दिया इस्तीफ़ा, BJP में होंगे शामिल!

राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कश्मीर में लागू अनुच्छेद 370 और 35-A खत्म करने के प्रस्ताव को पेश करने के बाद ही विपक्ष में हलचल तेज हो गई। एक ओर जहाँ गुलाम नबी आजाद सरकार के इस फैसले को संविधान की हत्या बता रहे हैं तो वहीं कुछ विपक्षी नेता ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी-अपनी पार्टी से ही इस्तीफ़ा दे दिया है।

खबरों के मुताबिक मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले सपा नेता संजय सेठ ने पार्टी की सदस्यता के साथ-साथ संसद की सदस्यता से भी इस्तीफ़ा दे दिया है। कयास लगाए जा रहे हैं कि वह अब जल्द भाजपा का दामन थाम सकते हैं। गौरतलब है कि इससे पहले समाजवादी पार्टी के नीरज शेखर और सुरेंद्र नागर भी पार्टी से इस्तीफ़ा दे चुके हैं। इससे सपा की परेशानियाँ बढ़ती नजर आ रही है।

संजय सेठ के अलावा राज्यसभा में कश्मीर पर फैसला आने के बाद कॉन्ग्रेस के सांसद भुवनेश्वर कालिता ने भी पार्टी के साथ-साथ अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। संजय सेठ की तरह इनके लिए भी कहा जा रहा है कि ये जल्द ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं।